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हैदराबाद की सड़क पर कुत्ते से कुकर्म करता CCTV में कैद हुआ युवक, 3 दिन में कई बार किया यौन शोषण

तेलंगाना के हैदराबाद में कुत्ते के यौन शोषण की घटना सामने आई है। CCTV में एक युवक सड़क पर घूम रहे कुत्ते के साथ रेप करता दिख रहा है। वीडियो 5 फ़रवरी (शनिवार) का बताया जा रहा है। मामले की पुलिस से शिकायत दी गई है। पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपित की तलाश शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना नरसिम्हा बस्ती की है। इस मामले के शिकायतकर्ता का नाम पृथ्वी है। पृथ्वी पशु अधिकार कार्यकर्ता हैं। पृथ्वी के मुताबिक, “हमें जानकारी मिली कि आरोपित ये घिनौना काम पिछले 3 दिनों से कर रहा है। उसने ऐसा कई बार किया है। पशुओं के साथ ऐसा काम करने वाले लोगों से महिलाएँ, बच्चे और वरिष्ठ नागरिक भी सुरक्षित नहीं होते।” पृथ्वी की शिकायत पर हैदराबाद की नालाकुंता पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। केस पशु क्रूरता की धारा सेक्शन 11 (A) के तहत दर्ज हुआ है। पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर आरोपित की तलाश शुरू कर दी है।

गौरतलब है कि कुत्ते के साथ क्रूरता की घटनाएँ पहले भी सामने आ चुकी हैं। फरवरी की पहली तारीख को राजस्थान के जोधपुर में एक कुतिया को 2 लोगों ने बेरहमी से मारा था। इस घटना का वीडियो काफी वायरल हुआ था। उससे पहले मार्च 2021 में गुजरात के मच्छीपीठ निवासी एजाज ने एक कुत्ते के सिर पर बुरी तरह से वार किया था। बुरी तरह से घायल कुत्ते को एजाज ने बाइक में बाँध कर काफी दूर घसीटा भी था। मार्च 2021 में ही मुंबई के सांताक्रुज कलीना में लगभग 25 वर्षीय तौफीक अहमद एक कुतिया का रेप करते सीसीटीवी में पकड़ा गया था।

इसी के साथ मार्च 2021 में मुंबई पुलिस ने जूहू में कई कुतियों के साथ दुष्कर्म कर चुके सब्ज़ी विक्रेता अहमद शाह को गिरफ्तार किया था। अप्रैल 2021 में केरल के मल्ल्पुरम में 53 साल के जेवियर ने अपने पालतू कुत्ते को स्कूटर में बाँध कर 200 मीटर तक घसीटा था। इस घटना की भी शिकायत पुलिस में की गई थी। अक्टूबर 2020 में मुंबई के पोवई स्थित गैलेरिया शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में 8 साल की ‘नूरी’ नाम की कुतिया के साथ दरिंदगी की गई थी।

‘गलती की तो कश्मीर, केरल, बंगाल बन जाएगा यूपी’: योगी का Video संदेश, पहले चरण की 58 सीटों पर जारी है वोटिंग

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Election 2022) के लिए मतदान आज (10 फरवरी 2022) से शुरू हो गया है। पहले चरण में 58 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक वीडियो आया है। इसमें उन्होंने कहा है, “अब बड़े निर्णय का समय आ गया है। पिछले 5 सालों में भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन की सरकार ने जो कुछ भी किया, वह बहुत प्रतिबद्धता के साथ किया है और जो कुछ भी कहा आपके भरोसे को ध्यान में रखते हुए उसे निभाया।”

करीब 6 मिनट के वीडियो में उन्होंने कहा है, “केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार के पास सब कुछ समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ है। मैंने आपको वह सब कह दिया है, जो मेरे दिल में है। इन पाँच सालों में कई चमत्कारिक चीजें हुई हैं। सावधान, यदि आप चूके तो पाँच साल की मेहनत बेकार हो जाएगी। उत्तर प्रदेश को कश्मीर, केरल और बंगाल बनने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। आपका वोट मेरे पाँच सालों के प्रयासों पर आशीर्वाद होगा। आपका वोट भयमुक्त जीवन की गारंटी भी होगा।”

सीएम ने कहा, “मैं यहाँ वोट माँगने के लिए नहीं आया, बल्कि मैं तो पिछली सरकारों की तरफ से माफी माँगता हूँ कि इस काम को वह 70 सालों में नहीं कर पाए। हमने घर-घर करोड़ों घरों में शौचालय बनवाए, मेरे लिए यह भी आपके वोट पाने का जुगाड़ नहीं था। स्वच्छता से भी अधिक मेरे लिए माताओं और बहनों के सम्मान और गरिमा का प्रश्न था। लाखों घर और परिवार खपरैल से निकलकर पहली बार अब पक्के मकान में आ गए हैं। उनकी आँखों में ऐसी चमक है, जो सैकड़ों चुनाव में जीत की चमक को भी फीका कर दे।”

CM योगी ने कहा, “चुनाव आएँगे, चुनाव जाएँगे लेकिन अब तक धुएँ वाले चूल्हे पर काम करती हमारी माताएँ और बहनें, अब बार बीमार पड़ने से बचेंगी, स्वस्थ रहेगी। आयुष्मान योजना आज उत्तर प्रदेश के करोड़ों परिवार के लिए रोगों के निपटने का सहारा बनी। आपने देखा कि हम हर घर नल योजना से घरों में पानी पहुँचा रहे हैं, एक कोने से दूसरे कोने तक एक्सप्रेसवे बिछा रहे हैं, प्रदेश भर में औद्योगिक कॉरिडोर लगाने की ओर बढ़ रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “मैं योगी हूँ। मेरे भगवे पर कोई दो पैसे का भ्रष्टाचार नहीं लगा सकता। लेकिन इस बात के लिए भी मैं आपसे वोट नहीं माँगूँगा। यह शोभा नहीं देता।” इसके अलावा उन्होंने यूपी के गुंडों, दंगाइयों और बदमाशों से मुक्त होने और पलायन कर गए हिंदुओं के वापस घर लौटने की बात कही। उन्होंने कहा कि उनको धमकाने वाले या तो जेलों में बंद हैं या फिर सहम कर दुबक गए हैं। वीडियो के अंत में उन्होंने वोटरों को आगाह करते हुए कहा कि वे यूपी को बंगाल, केरल या कश्मीर न बनने दें।

यूपी चुनाव 2022 के पहले चरण में 10 फरवरी को शामली, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा और आगरा जिलों की सीटों पर मतदान जारी है। 403 सदस्यीय यूपी विधानसभा के लिए सात चरणों में 10 फरवरी से लेकर 14, 20, 23 और 27 फरवरी को और 3 व 7 मार्च को मतदान होना है। मतगणना पाँचों चुनावी राज्यों में एक साथ 10 मार्च को होगी।

बुर्के पर HC की बड़ी बेंच में होगी सुनवाई: बोलीं अब्दुल गफ्फार खान की पोती- यूनिफॉर्म कोड का हो पालन, नकवी ने विवाद को बताया साजिश

कर्नाटक में शैक्षणिक संस्थानों में बुर्का पहनने को लेकर चल रहे विवाद पर आज (10 फरवरी 2022) को हाई कोर्ट की बड़ी बेंच सुनवाई करेगी। बुधवार को अदालत की एकल पीठ ने मामले को बड़ी बेंच को हस्तांतरित कर दिया था। इस बीच अब्दुल गफ्फार खान की पोती यास्मीन निगार ने कहा है कि स्कूलों में यूनिफॉर्म कोड का पालन होना चाहिए। वे ऑल इंडिया पख्तून जिरगा-ए-हिंद की अध्यक्ष भी हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने बुर्के पर चल रहे हालिया विवाद को आपराधिक साजिश करार दिया है।

नकवी ने इस मामले में राजनीति करने वालों को पाकिस्तान से जुगलबंदी करने वाला बताया है। साथ ही उन्होंने इस मामले को तूल देने वालों को भारत को बदनाम करने की मंशा रखने वाली सोच करार दिया है। नकवी ने कहा, “हिजाब पर चल रहा हंगामा एक आपराधिक षड्यंत्र हैं। यह ड्रेसकोड पर एक भ्रामक प्रचार है। हर संस्थान को अपना ड्रेसकोड लागू करने का अधिकार है। यह अनुशासन और शिष्टाचार का प्रतीक है। भारत को कोसने वाले ऐसे समूहों के साथ पाकिस्तान जुगलबंदी करने को हमेशा तैयार रहता है।”

वहीं यास्मीन खान ने यूनिफॉर्म कोड का समर्थन करते हुए कहा है कि यदि आप स्कूल में खुद को बुर्का या हिजाब के कवर करते हैं तो यह पहचान का मुद्दा होगा। मुझे लगता है कि पूरे चेहरे को ढकने के बजाय एक स्कार्फ पहना जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब लोग हज के लिए मक्का जाते हैं तो कुछ लोग बुर्का पहनते हैं, कुछ नहीं पहनते। इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। स्कूलों में सभी को बराबर होना चाहिए और धर्म का पालन सिर्फ एक हद तक ही करना चाहिए।

गौरतलब है कि कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर शिक्षण संस्थानों में हिजाब/बुर्के में एंट्री की अनुमति माँगी गई है। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने कहा कि इस मामले में केवल ‘पर्सनल लॉ’ ही नहीं, बल्कि संवैधानिक पहलुओं पर भी विचार करना ज़रूरी है। लिहाजा मामले को बड़ी बेंच के पास भेजा गया है। इस मामले में कई वकील अपना पक्ष रखना चाह रहे थे, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि ये PIL नहीं है।

मीडिया भले ही इसे हिजाब का मामला बता रहा हो, लेकिन विरोध-प्रदर्शनों और पहनावे को देख कर स्पष्ट है कि मामला बुर्के को लेकर है। इस बीच बेंगलुरु प्रशासन ने स्कूल-कॉलेजों के 200 मीटर के घेरे में विरोध-प्रदर्शनों पर रोक लगा दी है। अगले दो सप्ताह तक ये रोक जारी रहेगी। इस घेरे में धारा-144 लगी रहेगी। सभी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए ये निर्णय जारी रहेगा।

‘हिजाब पहनने से रोकना छात्राओं का अपमान’: AMU में लगे अल्लाह-हू-अकबर के नारे, कोलकाता में 500 छात्र-छात्राओं का समर्थन में प्रदर्शन

कर्नाटक से शुरू हुआ हिजाब विवाद (Hijab Controversy) देश भर में फैलता जा रहा है और मुस्लिम कट्टरपंथी इसे सुनहरे मौके के रूप में ले रहे हैं। मुस्लिम छात्राओं के समर्थन में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) और पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की आलिया यूनिवर्सिटी द्वारा रैली निकाली जा रही। माहौल बिगाड़ने के लिए अल्लाह-हू-अकबर जैसे नारे लगाकर बहुसंख्यकों को उकसाने की भी कोशिश की जा रही है।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं ने हिजाब के समर्थन में पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया और अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाए। बुधवार (9 फरवरी) को प्रदर्शनकारी विश्वविद्यालय के डक प्वॉइंट से बाबा सैयद गेट तक जा रहे थे, लेकिन यूनिवर्सिटी के सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया। यूनिवर्सिटी के छात्र नेता आरिफ त्यागी ने कहा कि हिजाब के समर्थन में 12 फरवरी को बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।

आरिफ धमकी वाले अंदाज में कहा कि इस प्रोटेस्ट की आवाज पूरे भारत और देश के बाहर भी आवाज जाएगी। आरिफ ने कहा, “अगर हमारे इस्लाम पर बात आएगी तो यकीनन हम जवाब देंगे चाहे ईट की जगह हमें पत्थर से जवाब देना पड़े। जरूरी हुआ तो हम ऐसा भी करेंगे।” इन लोगों का कहना है कि छात्राओं को क्लासरूम में हिजाब पहनने से रोक कर उनका अपमान किया गया और इससे उनका खून खौल रहा है।

वहीं, कोलकाता के आलिया यूनिवर्सिटी के लगभग 500 छात्र-छात्राओं ने हिजाब के समर्थन में पार्क सर्कस एरिया में प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनकारियों में शामिल अधिकतर छात्राओं ने हिजाब पहन रखा था। इन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हिजाब इनके मजहब का हिस्सा है और भारत का संविधान धार्मिक स्वतंत्रता की अनुमति देता है। इनका आरोप है कि दक्षिणपंथी ताकतें चाहती हैं कि बिना हिजाब के वे मध्ययुग में वापस चली जाएँ।

बता दें कि कर्नाटक के उडुपी में जनवरी में शुरू हुआ यह विवाद राज्य के कई हिस्सों में फैलते हुए दूसरे राज्यों में भी फैल गया है। कर्नाटक के शिमोगा में हिजाब के समर्थन में और हिजाब के विरोध में दो गुट आमने-सामने आ गए। बताया जा रहा है कि विरोध पर कुछ लोगों ने भगवा स्कार्फ पहने लोगों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। इस पत्थरबाजी में दो लोगों के घायल होने की भी खबर है।

इस घटना के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा। इसके बाद स्कूल-कॉलेजों के इलाके में धारा 144 लगाते हुए शिक्षण संस्थानों को तीन दिनों के लिए बंद कर दिया है। वहीं, हिजाब के समर्थन में देश के विपक्षी दल और मुस्लिम नेता के अलावा तमाम विदेशी ताकतें भी समर्थन देकर भारत में माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रही हैं।

झारखंड में माँ सरस्वती के विसर्जन में जा रहे नाबालिग की पीट-पीट कर हत्या, मुस्लिम युवकों की करतूत: 37 घंटे बाद इंटरनेट बहाल

झारखंड (Jharkhand) के हजारीबाग जिले में 37 घंटों के बाद इंटरनेट सेवा एक बार फिर से बहाल कर दी गई है। हजारीबाग जिले के बरही थाना क्षेत्र के दुलमाहा गाँव की घटना के अफवाह पर रोक को लेकर इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थी, जिससे वहाँ के स्थानीय लोगों का जनजीवन काफी प्रभावित हुआ है। बताया जा रहा है कि इंटरनेट बंद रहने से जिले में शांति तो बनी रही, लेकिन इससे काफी नुकसान उठाना पड़ा।

नेट बंद होने से कोरोना काल में बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई नहीं हो पाई। कई कॉलेज, विश्वविद्यालय और शैक्षणिक संस्थान बंद रहे। इसके अलावा नेट बैंकिंग बंद होने से करोड़ों का कारोबार प्रभावित हुआ। घर से काम करने वाले लोग भी काफी प्रभावित हुए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 6 फरवरी को दुलमाहा में टांड निवासी युवक की पीट पीटकर हत्या कर दी गई थी। युवक की हत्या के बाद प्रदेश भर में लोगों का आक्रोश देखने को मिला था। आक्रोश के बीच अफवाह न फैले इसलिए इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया गया था।

ई पेपर प्रभात खबर

ट्विटर पर मिस्टर सिन्हा नाम के यूजर ने इस घटना के संबंध में लिखा, “एक खबर जो एमएसएम/एसएम के जरिए ट्रेंड में नहीं आ सकी, वह है झारखंड में माँ सरस्वती की मूर्ति विसर्जन के लिए जा रहे एक 17 साल के हिंदू बच्चे की पीट-पीटकर हत्या कर देना। जाहिर है कि वह एक हिंदू था और घटना गैर भाजपा शासित राज्य में हुई थी, इसलिए यह किसी के लिए मायने नहीं रखती।”

मालूम हो कि 17 वर्षीय रूपेश कुमार पांडेय (Rupesh Kumar Pandey) 6 फ़रवरी को सरस्वती मूर्ति विसर्जन करने जा रहे थे। हजारीबाग के बरही थाना में नईटांड गाँव में लखना दूलमाहा इमामबाड़ा के पास मुस्लिम युवकों की विसर्जन करने जा रहे लोगों से कहासुनी की। देखते ही देखते कहासुनी मारपीट में बदल गई। मुस्लिम युवक रूपेश कुमार को तब तक पीटते रहे, जब तक वह बेहोश नहीं हो गया। बेहोशी की हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि असामाजिक तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। उन्होंने कुछ दुकानों में आग भी लगा दी थी, जिसके बाद पुलिस को उपद्रवियों पर काबू पाने के लिए हवाई फायरिंग करनी पड़ी थी। इस मामले में 7 नामजद सहित 100 अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया है। अब तक 3 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

‘गर्मी में बुर्का भट्ठी बन जाता है’: अब मलाला युसुफजई छात्राओं के लिए हिजाब पहनने की कर रही वकालत, सोशल मीडिया पर हुईं ट्रोल

ब्रिटेन में आराम की जिंदगी मिलने के बाद अपना असली कट्टरपंथी रंग दिखाने वाली शांति नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला युसुफजई (Malal Yousafzai) द्वारा कर्नाटक में जारी हिजाब विवाद (Hijab Controversy) पर बयान देकर फँस गई हैं। सोशल मीडिया पर हिजाब और शिक्षा को लेकर उनके दिए गए पुराने बयान को लेकर लोग ट्रोल करने लगे हैं।

अफगानिस्तान में इस्लामिक कट्टरपंथियों की गोली शिकार बनने के बाद ब्रिटेन में शरण पाने वाली मलाला ने कभी हिजाब को लेकर सवाल उठाया था। अपनी पुस्तक ‘आई एम मलाला’ में उन्होंने हिजाब को गलत और घुटन वाला बताया था। लेखक आनंद रंगनाथन ने मलाला के इस कथन का संदर्भ देते हुए एक ट्वीट किया है।

रंगनाथन ने ट्वीट में लिखा है कि कभी मलाला ने कहा था, “वे (इस्लामिक कट्टरपंथी) महिलाओं को बुर्का पहनने के लिए मजबूर कर रहे थे। बुर्का पहनना एक बड़े कपड़े के शटलकॉक के अंदर चले जाने जैसा है, जिसमें केवल एक ग्रिल है और गर्म दिनों में यह ओवन की तरह हो जाता है। मुझे यह पहनना नहीं था।”

मलाला इस बयान की सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है। कर्नाटक में जारी हिजाब विवाद के संदर्भ में सोशल मीडिया यूजर्स उनके हालिया बयान को लेकर उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। उनसे इस विषय में लगातार सवाल किए जा रहे हैं।

हिजाब विवाद पर मंगलवार (8 फरवरी) को मलाला ने हिजाब को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने एक खबर को शेयर करते हुए लड़कियों को स्कूल और कॉलेजों में हिजाब पहनने की अनुमति देने की बात कही थी। अपने ट्वीट में उन्होंने था, “कॉलेज हमें पढ़ाई और हिजाब के बीच चयन करने के लिए मजबूर कर रहा है। लड़कियों को उनके हिजाब के साथ स्कूल आने से मना करना भयावह है। महिलाओं पर कम या ज्यादा कपड़े पहनने को लेकर दबाव डाला जा रहा है। भारतीय नेताओं को मुस्लिम महिलाओं को किनारे लगाने की कोशिश पर रोक लगानी चाहिए।”

भारत के मामले बयानबाजी करने वाली मलाला से सोशल मीडिया यूजर पूछ रहे हैं कि जिस नॉर्वे की ओर से उन्हें नोबेल सम्मान दिया गया है, उसने साल 2017 में स्कूल और यूनिवर्सिटी में हिजाब पर प्रतिबंध लगाते हुए कानून बनाया था। लोग पूछ रहे हैं कि मलाला नॉर्वे को लेकर कोई बात क्यों नहीं कही। 

द स्किन डॉक्टर नाम के एक ट्विटर हैंडल पर मलाला को जवाब देते हुए लिखा गया, ‘जहां तक कॉलेज के फैसले की बात है तो वह सिर्फ महिलाओं के लिए नहीं है। यदि पुरुष भी हिजाब पहनकर आएंगे तो उन्हें भी परमिशन नहीं मिलेगी। महिलाओं को ऑब्जेक्ट समझने की बात तो आपके मजहब में कही गई है, जहां सिर्फ महिलाओं के हिजाब पहनने की बात है। कॉलेजों की ओर से लड़कों को भी भगवा शॉल ओ

अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा किए जा रहे नरसंहार और कब्जे के बावजूद एकदम चुप्पी साधे हुए हैं। तालिबान के अमानवीय हमलों का विरोध करना और उस पर रोना तो छोड़िए एक फुसफुसाहट तक नहीं नजर आ रही है। ये वही मलाला हैं, जिन्हें अक्टूबर 2012 में पाकिस्तान की स्वात घाटी में महिलाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर तालिबान ने गोली मारी थी। गंभीर रूप से घायल हालत में उन्हें पहले पाकिस्तान के आर्मी अस्पताल में ले जाया गया और फिर वहाँ से यूके रेफर किया। वहाँ इलाज के बाद वह चमत्कारिक रूप से ठीक हो गई थीं।

भारत के विरुद्ध मलाला के स्टैड का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन्होंने भारत के किसान आंदोलन में खुलकर किसानों के पक्ष में अपना समर्थन दिया था। इतना ही नहीं, अपनी वेबसाइट पर जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को विवादित क्षेत्र बताया था। मलाला की वेबसाइट पर लद्दाख को छोड़ कर लगभग पूरे जम्मू कश्मीर को ही बाकी भारत से अलग रंग में दिखाया गया है और उसे विवादित माना गया है। अरुणाचल प्रदेश को भी इन्होंने विवादित दिखाया है।

‘मैं UN में तमिल बोलता हूँ, सपा परिवार के 45 लोग कई पदों पर थे’: ANI से बोले PM मोदी – योगी जी की योजनाएँ अद्भुत हैं, असंभव को संभव किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (9 फरवरी, 2022) को ANI की संपादक स्मिता प्रकाश को दिए गए इंटरव्यू में कई सवालों के जवाब दिए और पाँच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव पर भी अपनी बात रखी। पीएम मोदी ने बताया कि वो चीन के राष्ट्रपति को तमिलनाडु ले गए, फ्रांस के राष्ट्रपति को उत्तर प्रदेश ले गया और जर्मन चांसलर को कर्नाटक ले गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की शक्ति को उभारना, हर राज्य को प्रोत्साहन देना हमारा काम है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वो UN में तमिल में बोलते हैं और दुनिया को गर्व होता है कि भारत के पास दुनिया की सबसे पुरानी भाषा है। लखीमपुर-खीरी घटना पर उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जो कमेटी बनाना चाहती थी, राज्य सरकार ने सहमति दी। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि जिस जज के नेतृत्व में जाँच चाहती थी, सरकार ने सहमति दी। योगी सरकार को लेकर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शिता के साथ काम कर रही है तभी सुप्रीम कोर्ट की इच्छा के अनुसार सारे निर्णय करती है।

प्रधानमंत्री ने याद किया कि भारतीय जनता पार्टी हार-हार कर ही जीतने लगी है। उन्होंने कहा कि हमने बहुत पराजय देखे हैं, ज़मानत ज़ब्त होती देखी हैं। उन्होंने बताया कि एक बार जनसंघ के समय चुनाव हारने पर भी मिठाई बाँटी जा रही थी, तो हमने पूछा की हारने पर मिठाई क्यों बाँट रहे हैं? उनके अनुसार, तब जवाब दिया गया कि हमारे तीन लोगों की ज़मानत बच गई। आगामी चुनावों पर उन्होंने कहा कि वो इस चुनाव में सभी राज्यों में देख रहे हैं कि भाजपा के प्रति लहर है, भारी बहुमत से भाजपा जीतेगी।

उन्होंने उम्मीद जताई कि हमें सेवा का मौका इन सभी 5 राज्यों की जनता देगी। साथ ही कहा कि जिन राज्यों ने हमें सेवा का मौका मिला है उन्होंने हमें परखा है, हमारे काम को देखा है। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के बयान “उत्तर प्रदेश में योजनाएँ भाजपा की नहीं हैं, भाजपा अमलीजामा पहनाती है” पर उन्होंने कहा कि देश में एक कल्चर चला है, राजनेता बोलते रहते हैं कि हम ये करेंगे, वो करेंगे। उन्होंने कहा कि 50 साल बाद भी कोई अगर वो काम कर देगा तो कहेंगे कि हमने ये उस समय कहा था, ऐसे लोग बहुत मिल जाएँगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “कोविड महामारी में सब कहते थे कि जो जहाँ है वो वहीं रहे। कॉन्ग्रेस ने फ्री टिकट देकर लोगों को प्रोत्साहित किया कि जाइए। दिल्ली में भी ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ के नेताओं ने जीपों में जाकर झोंपड़ियों में लोगों को कहा है कि आप जल्दी जाइए, यहाँ लॉकडाउन हो रहा है। आज भाजपा पंजाब में सबसे विश्वसनीय पार्टी बनकर उभरी है। समाज जीवन के बहुत से वरिष्ठ लोग, राजनीति के बहुत बड़े महारथी भी अपने पुराने दल छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं। हमने छोटे किसानों के लिए जो काम किया है, उसकी पंजाब में ज़बरदस्त पहुँच है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस की कार्यशैली और विचारधारा के आधार सम्प्रदायवाद, जातिवाद, भाषावाद, प्रांतवाद, भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार हैं। उन्होंने पूछा कि अगर यही इस देश की मुख्य धारा में रहेगा तो देश का कितना बड़ा नुकसान होगा। पीएम मोदी ने कहा कि देश की आज जो हालत है उसमें सबसे ज़िम्मेदार कोई मुख्य धारा है तो वे कॉन्ग्रेस है। साथ ही याद दिलाया कि इस देश को जितने प्रधानमंत्री मिले उसमें अटल बिहारी वाजपेयी और उन्हें छोड़कर सारे प्रधानमंत्री कॉन्ग्रेस स्कूल के ही थे।

जवाहरलाल नेहरू को लेकर संसद में दिए गए बयान पर पीएम ने कहा कि उन्होंने किसी के पिता, माता, नाना, दादा के लिए कुछ नहीं कहा। बकौल पीएम मोदी, उन्होंने देश के प्रधानमंत्री ने क्या कहा, वो कहा है। उन्होंने बताया कि एक प्रधानमंत्री के ये विचार थे तब क्या स्थिति थी और आज प्रधानमंत्री के ये विचार हैं तब क्या स्थिति है। पीएम मोदी ने बताया कि वो समाज के लिए हैं परन्तु मैं जो नकली समाजवाद की चर्चा करते हैं ये पूरी तरह परिवारवाद है। उन्होंने पूछा कि लोहिया जी का परिवार कहीं नजर आता है क्या? जॉर्ज फर्नांडिस का परिवार कहीं नजर आता है क्या? नीतीश कुमार का परिवार कहीं नजर आता है क्या?

पीएम मोदी ने कहा, “एक बार किसी ने मुझे चिट्ठी भेजी थी कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के परिवार से 45 लोग ऐसे थे जो किसी न किसी पद पर थे। किसी ने मुझे कहा कि उनके पूरे परिवार में 25 साल से अधिक आयु के हर व्यक्ति को चुनाव लड़ने का मौका दिया गया है। कुछ नेता निजी स्वार्थ के लिए विविधता को एक दूसरे से साथ विरोध के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। पिछले 50 साल उन्होंने यही किया है, हर बात पर देश को ‘बाँटो और राज करो’। परिवारवादी पार्टियाँ लोकतंत्र का सबसे बड़ा दुश्मन है। जब परिवार ही सर्वोपरि होता है, परिवार को बचाओ पार्टी बचे न बचे, देश बचे न बचे। ये जब होता है तो सबसे बड़ा नुकसान प्रतिभा को होता है। सार्वजनिक जीवन में जितनी अधिक प्रतिभा आए वो जरूरी है।”

पीएम मोदी ने कहा कि चुनाव का समय हो या ना हो, भाजपा संगठन में हो या सरकार में हो, हम हमेशा जनता-जर्नादन की सेवा में लगे रहते हैं और जब सरकार में होते हैं तो बहुत अधिक तीव्रता से अधिक विस्तार से सबका साथ, सबका विकास इस मूल मंत्र को लेकर जी जान से जुटे रहते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सामूहिकता में विश्वास करती है और हम स्तर पर सामूहिक रूप से काम करने के आदी हैं। बकौल नरेंद्र मोदी, वो तस्वीर प्रधानमंत्री की नहीं है, वो भाजपा की कार्यकर्ता की तस्वीर है जिसको नरेन्द्र मोदी कहते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि हम जब चुनाव जीतते हैं तो हम लोगों के दिल जीतने के काम में कोई कमी नहीं आने देते हैं और हमारे लिए हर पल, हर दिन, हर योजना, हर काम जनता-जर्नादन के लिए समर्पित होती है। उत्तर प्रदेश को लेकर उन्होंने कहा कि योगी जी की योजनाएँ अद्भुत हैं, असंभव को संभव किया है और विरोधी भी उन योजनाओं को कैश करने के लिए मैदान में उतरे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के लोगों ने मुसीबतें झेली हैं, जिस प्रकार का वहाँ गुंडाराज और दबंगराज चलता था, वहाँ की सरकार में दबंग लोगों को आश्रय प्राप्त था।

प्रधानमंत्री ने यूपी का वो दौर याद दिलाया, जब बहन बेटी घर से बाहर नहीं निकल पाती थी। उन्होंने कहा, “आज उत्तर प्रदेश की बेटी कह रही है कि मैं शाम को अंधेरा होने के बाद भी अगर कहीं काम है तो जा सकती हूँ। ये जो विश्वास पैदा हुआ है, वो सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा का मंत्र है ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास।’ उन्होंने कहा कि हमने अपने सिद्धांतों को कभी बदला नहीं है।

‘नोबेल प्राइज वालों को हिजाब से दिक्कत नहीं, कुरान में लिखा है कि…’: बुर्के पर बोले ओवैसी – ‘मैं 24 घंटे मास्क में रह सकता हूँ’

कर्नाटक के बुर्का विवाद से राजनीति गरमा गई है। हिजाब विवाद पर बुधवार (9 फरवरी, 2022) को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने कहा, “हिजाब पहनकर फुटबॉल वर्ल्ड कप खेल सकते हैं, इंटरनेशनल बास्केटबॉल टूर्नामेंट में हिस्सा ले सकते हैं। आप क्या कर रहे हैं। आप बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ ने नारे के बीच देश को कहाँ लेकर जा रहे हो।”

हिजाब मुद्दे पर किसी भी राजनीतिक पार्टियों द्वारा बयान न दिए जाने पर ओवैसी ने आजतक से कहा कि इसको लेकर पार्टियों को बोलना चाहिए, किससे डर रहे हैं, अगर नहीं बोले तो 10 मार्च को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बीजेपी की रैलियों में मुस्लिम महिलाएँ नकाब और हिजाब पहनकर जाती हैं। नड्डा जी की आरती उतारती हैं, तब सब अच्छा है। फिर नकाब और हिजाब पहनकर स्कूल-कॉलेज जाने पर पाबंदी क्यों? क्यों डबल डबल चेहरे बनाते हैं? जब उनसे कहा गया कि शैक्षणिक संस्थानों में ऐसा करने पर एक खाई बनती है, तो औवेसी ने कहा, “यमन की एक लड़की को नोबेल प्राइज मिला, वो भी हिजाब में हैं। यानी नोबेल प्राइज देने वालों को भी हिजाब से कोई ऐतराज नहीं है।”

उन्होंने कहा कि मैं 24 घंटे मास्क पहनकर रह सकता हूँ। जिस तरह मास्क पहनने का मकसद है कि कोविड से बचाव हो सके। उसी प्रकार नकाब पहनने का मकसद ये है, “कुरान में कहा गया है कि औरत ये करे और मर्द किसी गैर औरत को देखे तो अपनी नजरे झुका ले। अगर मैं एक महिला को घूर-घूर कर लगातार देखे जा रहा हूँ तो वो गुनाह है।”

उनसे पूछा गया कि तीन तलाक पर आप कुछ भी बोलना नहीं चाहते थे और हिजाब मुद्दे पर बढ़ चढ़कर बोल रहे हैं। इस पर औवेसी ने कहा कि तीन बार संसद में तीन तलाक का कानून लाया गया, तब हम ही बोल रहे थे और कोई दूसरा नहीं बोला। उन्होंने कहा, “एक बच्ची की बहादुरी की तारीफ करना कोई बुरी बात नहीं है। हम कह रहे हैं कि अगर वो बच्ची मुस्कान नहीं होती, लक्ष्मी होती तो भी मैं उसकी तारीफ करता। किसी भी लड़के को अधिकार नहीं है कि वो किसी लड़की को जाकर इस तरह से घेरे। ये तो आप गुंडागर्दी कर रहे हैं। आप कैसे किसी महिला के खिलाफ ऐसे कर सकते हैं। वो किसी की बेटी किसी की औलाद है, उसे घेर के ऐसे नारे नारे नहीं लगा सकते है।”

इसके अलावा उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, “उन्होंने पाँच साल में मदरसों को एक पैसा भी नहीं दिया है। देवबंद एक स्कूल ऑफ थॉट हैं। यहाँ के जितने भी स्कॉलर हैं, वे भारत की जमीन से मोहब्बत करते हैं। इनका तालिबान और अफगानिस्तान से रिश्ता बताना गलत है।”

आँख में 5 इंच की कील ठोकी, गुदाद्वार में डंडा डाला, चेहरे को सिगरेट से दागा, पूरे शरीर पर जख्म: 10 साल के बच्चे की हत्या

उत्तर प्रदेश के कानपुर से दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ मंगलवार (8 फरवरी, 2022) को 10 वर्षीय दलित बच्चे का अपहरण कर उसके साथ हैवानियत की सभी हदें पार कर दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मासूम नर्वल इलाके के सकट बेहटा गाँव के एक राजमिस्त्री परिवार का बेटा था, जो 5वीं कक्षा में पढ़ता था। वह सोमवार दोपहर को घर से बाहर टायर लेकर खेलने निकला था। उसके बाद अचानक लापता हो गया।

पुलिस ने मंगलवार को लापता बच्चे की लाश 400 मीटर दूर गाँव के ही रामेंद्र मिश्रा के सरसों के खेत से बरामद की। बच्चे के साथ हुई हैवानियत को देख सुनकर पुलिस सहित इलाके के लोग भी हैरान हैं। बताया जा रहा है कि दरिंदों ने मासूम की गला घोंटकर हत्या करने से पहले उसकी आँख में 5 इंच की कील ठोंक दी, उसके पूरे चेहरे को सिगरेट से दाग दिया था।

इतना ही नहीं, उसके गुदाद्वार में डंडा भी डाला गया है। शव के पास मिले डंडे में मल और खून लगा हुआ मिला है। इसके अलावा पूरे शरीर पर चोट और खरोंच के निशान भी मिले हैं। घटना के बाद से गाँव में जातीय तनाव का माहौल बन गया है।

वहीं, पुलिस की अब तक की जाँच में सामने आया है कि बच्चे की हत्या तंत्र मंत्र या फिर कुकर्म करने के बाद हत्या की गई है। उसके शरीर पर मिले जख्म हैवानियत और टोना-टोटका की ओर इशारा कर रहे हैं। परिजनों ने गाँव में किसी से भी रंजिश होने की बात से इनकार किया है। इसके अलावा पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में 6 संदिग्धों को हिरासत में लेकर जाँच-पड़ताल की जा रही है। एसपी आउटर अजीत कुमार सिन्हा का कहना है कि जल्द ही हत्याकांड का खुलासा करेंगे।

राजमिस्त्री शमशुद्दीन ने अपहरण के बाद 3 महीने तक किया नाबालिग का रेप, अलग-अलग जगह ले गया: पुलिस ने दबोचा

उत्तराखंड के देहरादून में पुलिस ने एक युवक को नाबालिग के अपहरण एवं दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपित को पॉक्सो एक्ट के तहत लुधियाना से गिरफ्तार किया। साथ ही पीड़िता को भी सकुशल छुड़ा लिया है। पुलिस ने आरोपित और पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराकर आरोपित को जेल भेज दिया है।

बता दें कि देहरादून के बसंत विहार क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने 28 अक्टूबर, 2021 को पुलिस में शिकायत की थी कि हरिद्वार के पिरान कलियर निवासी शमशुद्दीन उर्फ छोटू क्षेत्र में राजमिस्त्री का कार्य करता था। वह उनकी 16 वर्षीय बेटी को अगवा कर कहीं ले गया है। शिकायत मिलने पर पुलिस ने लापता किशोरी की तलाश शुरू कर दी। इस दौरान आरोपित शमशुद्दीन ने अपना मोबाइल भी बंद कर दिया था।

लगातार कई महीनों की जाँच पड़ताल के बाद पुलिस को आरोपित के लुधियाना में होने की सूचना मिली। पुलिस द्वारा अलग-अलग टीमों का गठन कर तलाश शुरू की गई। पुलिस टीम ने सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल सर्विलांस की सहायता सहित मुखबिर की सूचना के आधार पर रविवार (6 फरवरी 2022) को लुधियाना से आरोपित को गिरफ्तार किया है। साथ ही नाबालिग को बरामद कर लिया। पुलिस से पूछताछ में आरोपित ने बताया कि वह क्षेत्र में राजमिस्त्री का कार्य करता था। नाबालिग को अगवा कर उसने 3 महीने अलग-अलग जगहों पर रखकर दुष्कर्म किया। थानाध्यक्ष ने बताया कि आरोपित के खिलाफ दुष्कर्म व पॉक्सो की धारा भी लगा दी गई है। 

गौरतलब है कि पिछले दिनों उत्तराखंड के देहरादून से तीन तलाक का मामला सामने आया था। रिपोर्ट के अनुसार देहरादून के विकास नगर थाना क्षेत्र की एक महिला का निकाह पटेल नगर निवासी कुर्बान अली से हुआ था। पत्नी का आरोप था कि शौहर दहेज के लिए उसे आए दिन ताने मारता था। उसकी शक्ल सूरत पर नकारात्मक कमेंट करता था। विरोध करने पर दूसरी निकाह की धमकी देता था। पीड़िता ने आरोप लगाया कि शौहर ने उसके साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाए। फिर तीन तलाक दे घर से निकाल दिया।

वहीं इससे पहले एक अन्य घटना में हरिद्वार के सिडकुल इलाके में किराए पर रह रही एक युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने अहबाब अली, उसके भाई परवेज, दोस्त हनीस, हुसैन और वसी के खिलाफ शादी का झाँसा देकर शारीरिक शोषण, जान से मारने की धमकी देने सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।