Home Blog Page 2989

उधर नेहरू की ‘आँखों में आँसू’, इधर ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गाने के बाद लता मंगेशकर के पीछे पड़ा था IT विभाग: 50 साल किया गया परेशान

भारत रत्न से सम्मानित बॉलीवुड की मशहूर दिवंगत गायिका लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) ने 26 जनवरी, 1963 को ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गाना गाया तो पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू (Jwaharlal Nehru) भी अपने आँसू नहीं रोक पाए थे। यह गीत 1962 के भारत-चीन के युद्ध के अगले साल गाया गया था। यह गीत उन सैनिकों को समर्पित था, जो युद्ध में बलिदान हो गए थे, लेकिन उसी वक्त आयकर विभाग दिग्गज गायिका पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा था।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बॉम्बे हाई कोर्ट के पास मौजूद रिकॉर्ड से पता चलता है कि आईटी विभाग लता जी के खिलाफ यह मामला अदालत लेकर पहुँचा था, जो 1947 में देश को स्वतंत्रता मिलने के ठीक बाद शुरू हुआ था। लेकिन इसे लता जी का सौभाग्य ही कहेंगे कि उस दौरान उन्हें नानी पालकीवाला जैसे मशहूर वकील का साथ मिला, जिन्हें भारत का संविधान और इसके नागरिकों का अधिकार बचाने के लिए जाना जाता है। इसके बाद आयकर विभाग को पीछे हटना पड़ा था।

हाई कोर्ट के रिकॉर्ड इसकी पुष्टि करते हैं कि उनके (लता जी) बढ़ते कद को ध्यान में रखते हुए अदालत में कैसे उनका सम्मान बढ़ा। अदालत के फैसलों में 1958 में उन्हें पहली बार एक गायिका, फिर एक प्रसिद्ध पार्श्व गायिका और 1970 के दशक में एक acknowledged playback singer कहकर सम्मान दिया गया था।

बताया जाता है कि नई दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में गणतंत्र दिवस समारोह के कुछ ही दिनों बाद आईटी विभाग ने मूल्यांकन वर्ष 1962-63, 1963-64 और 1964-65 के लिए लता के रिटर्न पर सवाल उठाया था, जो क्रमश: 143650 रुपए, 138251 रुपए 119850 थे। मुख्य रूप से आयकर विभाग की यह कर्रवाई पार्श्व गायिका के रूप में कार्य करने के बाद प्राप्त रसीद के संबंध में उनके द्वारा डायरी में नोट की गई एंट्री पर आधारित थी।

मद्रास (अब चेन्नई) में वासु फिल्म्स द्वारा की गई कुछ एंट्री एक आईटी अधिकारी को मिली थी, जिसके आधार पर उन्होंने अनुमान लगाया कि लता जी ने अपनी वास्तविक आय को छुपाया था। 20 जून, 1973 को IT विभाग और लता जी की ओर से दलीलों को पढ़ने के बाद हाई कोर्ट ने कहा था, “चूंकि हम ट्रिब्यूनल के विचार को बरकरार रखते हैं, इसलिए जुर्माना लगाने का कोई सवाल ही नहीं उठता।”

एक अन्य सुनवाई में, आईटी विभाग ने सवाल किया था कि लता ने 23 अगस्त, 1960 को पेडर रोड पर ‘प्रभु कुंज’ में 45,000 रुपए में एक फ्लैट खरीदने के लिए कैसे पैसे जुटाए? लता ने वालकेश्वर में एक और फ्लैट था, जिसे 12 अक्टूबर, 1960 को बेच दिया गया था।

बता दें कि बॉम्बे हाई कोर्ट के 30 दिसंबर, 1991 के फैसले से स्पष्ट है कि आईटी विभाग के साथ दिवंगत गायिका का यह मामला 1990 के दशक की शुरुआत तक जारी रहा। आईटी विभाग ने आयकर आयुक्त द्वारा लता को राहत देने के फैसले के खिलाफ अपील की थी, क्योंकि विदेशों से भी उन्हें संगीत कार्यक्रमों के लिए 391570 रुपए मिले थे, लेकिन हाई कोर्ट ने आईटी विभाग की अपील को खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा था, “हम CIT (A) से सहमत हैं कि भारत में होने वाले खर्च के किसी भी हिस्से को विदेशों में प्राप्त पैसों से जोड़ कर देखने का कोई औचित्य नहीं है।”

70 मिनट, 21 सीरियल ब्लास्ट, 56 मौतें: 14 वर्षों बाद अहमदाबाद ब्लास्ट में आया फैसला – 49 दोषी, 28 बरी

अहमदाबाद में 2008 में हुए सिलसिलेवार बम ब्लास्ट केस में सेशंस कोर्ट जज ए आर पटेल ने फैसला सुना दिया है। 77 में से 49 आरोपितों को दोषी ठहराया और 28 को बरी कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने 1 फरवरी को फैसले की तारीख के रूप में निर्धारित किया था, लेकिन जज के कोरोना पॉजिटिव होने और होम आइसोलेशन में जाने के बाद मामले को 8 फरवरी तक के लिए टाल दिया गया था।

बता दें कि 2009 में कानूनी कार्यवाही शुरू हुई थी और 1163 विटनेस की गवाही ली गई। 6000 दस्तावेजी सबूत पेश किए गए । 3,47,800 पेज की कुल 547 चार्जशीट की गई। 77 आरोपितों के सामने 13 साल बाद दलीलें पूरी हुई। 7 जज बदले गए, कोरोना काल में भी डे-टू-डे सुनवाई चली 3 आरोपत पाकिस्तान और 1 आरोपित सीरिया भाग गया था। 

यह मामला 26 जुलाई 2008 का है जब अहमदाबाद नगर पालिका क्षेत्र में 70 मिनट के भीतर 21 सीरियल ब्लास्ट हुए थे। इस धमाके ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इस विस्फोट में 56 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। देश में इतने कम समय में इतने धमाके पहले कभी नहीं हुए थे। इस हमले के बाद गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी आतंकियों की गिरफ्तारी के आदेश दिए थे।

अहमदाबाद में सिलसिलेवार धमाकों के कुछ दिन बाद पुलिस ने सूरत के विभिन्न इलाकों से कई बम बरामद किए थे। इसके बाद अहमदाबाद में 20 और सूरत में 15 FIR दर्ज की गई थीं। अदालत की ओर से सभी 35 FIR को एक साथ जोड़ देने के बाद दिसंबर 2009 में 77 आरोपितों के खिलाफ मुकदमे की शुरुआत हुई थी। पुलिस जाँच में दावा किया गया था कि वे एक ही साजिश का हिस्सा थे।

पुलिस ने दावा किया था कि आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े लोगों ने साल 2002 में गुजरात दंगों का बदला लेने के लिए इन हमलों को अंजाम दिया था। बता दें कि जब यह मुकदमा चल रहा था, तब कुछ कैदियों ने साल 2013 में जेल में 213 फीट लंबी सुरंग खोदकर कथित तौर पर भागने की कोशिश की थी। इस जेल तोड़ने के प्रयास के लिए मुकदमा अभी भी लंबित है।

अहमदाबाद के इन इलाकों में हुए थे ब्लास्ट

• हाटकेश्वर 

• नरोडा 

• सिविल अस्पताल 

• एलजी अस्पताल 

• नारोल सर्कल 

• जवाहर चौक 

• गोविन्द वाडी 

• इसनपुर 

• खाडिया 

• रायपुर चकला 

• सरखेज 

• सारंगपुर 

• ठक्करबापा नगर 

• बापूनगर

80 करोड़ जनता को फ्री राशन, 5 करोड़ वाटर कनेक्शन, 27 लाख नौकरी: PM मोदी ने गिनाई भारत की उपलब्धि, राज्यसभा में ‘कॉन्ग्रेस’ को बताया सबसे बड़ा खतरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राज्यसभा में कई विषयों पर अपनी बात रखी। उन्होंने देश के विकास में चलाई जा रही योजनाओं का उल्लेख किया और कहा कि आजादी के सौ साल पूरे होने तक देश को कहाँ पहुँचाना है, इसके लिए ये सबसे महत्वपूर्ण समय है। उन्होंने कोविड से उपजे हालातों पर बात की और बताया कि कैसे भारत ने इससे निपटने के पूरे प्रयास किए। इसके बाद पीएम मोदी ने विपक्षी पार्टियों पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा वंशवादी पार्टियाँ हैं।

उन्होंने कोविड महामारी को लेकर कहा कि इंसानियत ने कभी भी पिछले 100 सालों में ऐसी चुनौती का सामना नहीं किया था। इसके बाद उन्होंने इन हालातों से जूझ रहे भारतीयों को सराहते हुए कहा कि भारतीय जनता ने वैक्सीन ली इससे उन्होंने सिर्फ खुद ही सुरक्षित नहीं किया बल्कि दूसरों भी सुरक्षित किया है। वैश्विक स्तर पर चलाए गए वैक्सीन विरोधी अभियान के बाद ये होना काफी सराहनीय है।

कोरोना काल में भारत की उपलब्धि गिनाई

आगे पीएम मोदी ने देश के विकास पर चर्चा की और बताया कि कोविड महामारी के समय भी भारत ने अपनी 80 करोड़ जनता के घर फ्री राशन पहुँचाया। ये सुनिश्चित किया गया कि गरीबों के घर बनें, उन्हें वाटर कनेक्शन दिए जाएँ। पीएम ने जानकारी दी कि कोविड के बीच 5 करोड़ घरों में साफ पानी के लिए वाटर कनेक्श दिए गए। इसके अलावा देश के युवाओं ने स्टार्टअप शुरू करने के मामले में देश को वैश्विक स्तर पर तीसरे नंबर पर पहुँचाया। पीएलआई योजना की मदद से भारत ने मोबाइल मैनुफैक्चर करने के मामले में एक नई उपलब्धि हासिल की। इसके साथ आईटी सेक्टर में करीब 27 लाख लोगों को नौकरी मिलना भी एक नया रिकॉर्ड है।

पीएम मोदी ने सभा में अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लिखित उन पंक्तियों को पढ़ा जिसके शब्द इस तरह हैं:

व्याप्त हुआ बर्बर अंधियारा
किंतु चीर कर तम की छाती
चमका हिंदुस्थान हमारा।
शत-शत आघातों को सहकर
जीवित हिंदुस्थान हमारा।
जग के मस्तक पर रोली सा
शोभित हिंदुस्थान हमारा।

इन पंक्तियों के साथ पीएम मोदी ने कहा कि ये अटल बिहारी जी के ये शब्द इस कालखंड में भारत के सामर्थ्य का परिचय कराते हैं।

आगे प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि उनकी सरकार ने तय किया है कि 200 करोड़ रुपए तक के टेंडर ग्लोबल नहीं होंगे। उनके अनुसार इससे देश के एमएसएमई क्षेत्र मजबूत होगा और रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। वे राज्यसभा में बताते हैं कि यूपी और तमिलनाडु में डिफेंस कॉरिडरो बनाए जा रहे हैं। ऐसे में MSME का आगे आकर डिफेंस सेक्टर को ज्वाइन करना बेहद प्रेरणादायक है। 

महंगाई पर बोले पीएम मोदी

अन्य देशों से तुलना किए जाने पर पीएम मोदी ने जवाब दिया कि इस समय महंगाई की मार हर देश को लगी है। यूएसए में पिछले 40 सालों में सबसे अधिक महंगाई सामना करना पड़ा। वहीं ब्रिटेन में 30 सालों में ये दन देखने पड़ रहे हैं। इनके अलावा जिन देशों की करंसी यूरो है वो भी महंगाई की मार झेल रहे हैं। पीएम ने बताया कि भारत में महंगाई थामने के लिए प्रयास किए गए हैं। 2015 से 2020 के बीच जो दर 4-5% था वो यूपीए काल में डबल डिजिट में हुआ करता था। पीएम ने कहा कि भारत ही ऐसी बड़ी अर्थव्यवस्था है जो अधिक विकास के साथ औसत महंगाई झेल रही है।

विपक्ष पर बोला हमला

पीएम मोदी ने राज्यसभा में विपक्षी पार्टियों को भी जमकर घेरा। कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इस देश के लोकतंत्र के लिए सबे बड़ा खतरा वंशवादी पार्टियाँ है। कॉन्ग्रेस की समस्या है कि वो अपने वंश से आगे कुछ देखते ही नहीं। पीएम ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि अगर कॉन्ग्रेस नहीं होती तो क्या होता। मैं कहता हूँ,कॉन्ग्रेस नहीं होती तो आपातकाल नहीं लगता, जाति की राजनीति नहीं होती, सिखों का नरसंहार नहीं होती, कश्मीरी पंडितों को कभी समस्या नहीं होती।

पीएम ने जानकारी दी कि आयुष्मान भारत के तहत देश में 80 हजार से ज्यादा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर हैं। यहाँ गाँव और घर में फ्री टेस्ट होते हैं। उन्होंने इस बात पर निराशा जताई कि कैसे कोविड-19 के समय पार्टी बुलाई जाती थी और कई पार्टियाँ उसका बहिष्कार करती थीं। कुछ लोगों ने तो वैक्सीन अभियान को कोई बड़ी बात मानने से इनकार किया था।

उडुपी के कॉलेज में छात्राओं का हिजाब में प्रदर्शन, जवाब में भगवा गमछे में हुई नारेबाजी: हाई कोर्ट पर नजरें

कर्नाटक के कई स्कूल-कॉलेजों में में उपजे हिजाब विवाद पर मंगलवार (8 फरवरी 2022) को हाई कोर्ट में सुनवाई होनी है। उससे पहले उडुपी के महात्मा गाँधी मेमोरियल कालेज में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया है। हिजाब पहनकर प्रदर्शन कर रही छात्राओं के जवाब में भगवा गमछा में छात्रों ने प्रदर्शन किया। 

बता दें कि कुछ छात्राएँ महात्मा गाँधी मेमोरियल कॉलेज परिसर में हिजाब विवाद को लेकर प्रदर्शन कर रही थीं। तभी वहाँ छात्रों का एक समूह पहुँच गया। इस दौरान भगवा गमछा पहने छात्रों ने छात्राओं के सामने ही नारेबाजी शुरु कर दी। पुलिस-प्रशासन ने छात्रों को समझाने की कोशिश करते हुए उनसे क्लास में वापस जाने को कहा।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई ने जूनियर कॉलेज के छात्रों से मामला खत्म होने तक यूनिफार्म को लेकर सरकार की तरफ से जारी नियमों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित लोगों को शांति बनाए रखनी चाहिए और बच्चों को पढ़ने देना चाहिए। मामला आज हाई कोर्ट में पेश किया जाएगा, इसका इंतजार करें।

गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार के नए आदेश के मुताबिक, सभी शिक्षण संस्थानों में ड्रेस कोड अनिवार्य है। अभी सरकारी शिक्षण संस्थानों पर ये फैसला लागू है। कर्नाटक शिक्षा कानून-1983 के तहत ये फैसला लिया गया है। सभी स्टूडेंट्स को समान पोशाक पहननी होगी।

‘हिजाब विवाद’ की शुरुआत कैसे हुई?

बता दें कि हिजाब को लेकर विवाद की शुरुआत उडुपी के एक कॉलेज से हुई थी। जहाँ पिछले दिनों हिजाब पर बैन लगा दिया गया था। हिजाब पहने हुई छात्राओं को गेट पर रोक दिया गया था। इसके बाद एक छात्रा ने कर्नाटक हाईकोर्ट में ये कहते हुए याचिका दायर की कि हिजाब पहनने की अनुमति न देना असंवैधानिक है। जिसके बाद ये विवाद बढ़ गया।

वर्षा को कहते थे- काफिर की औलाद, देवी-देवताओं को भी गाली: अरमान से निकाह के बाद फंदे से लटकी मिली थी, नईम और कुरैशी को बेल नहीं

उत्तर प्रदेश के आगरा में हिंदू लड़की वर्षा रघुवंशी की संदिग्ध हालात में हुई मौत के मामले में कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। दरअसल, गिरफ्तारी के बाद से रिहा होने के लिए परेशान फईम उर्फ अरमान कुरैशी के घरवालों ने कोर्ट में बेल याचिका दी थी। लेकिन कोर्ट ने वर्षा के भाई की शिकायत का हवाला देते हुए इस बेल याचिका को खारिज कर दिया।

अब कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश के कुछ अंश स्वराज्य पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने अपने ट्वीट में साझा किए हैं। जिसमें साफ लिखा है कि वर्षा के भाई ने शिकायत दी थी कि उसकी बहन वर्षा को फईम कुरैशी (अरमान) डेढ़ साल पहले बहला-फुसलाकर ले गया था और उससे शादी कर ली थी। इसके बाद फईम के घरवालों ने वर्षा को तंग करना शुरू कर दिया। उसके हिंदू होने के कारण उससे मारपीट होने लगी।

शिकायत में बताया गया है कि फईम और उसके परिजन वर्षा से माँस कटवाकर उससे बनवाते और उसे जबरन खाने को मजबूर करते थे। उससे कार और 5 लाख रुपए माँगे जाते थे। वर्षा को ससुराल में ‘काफिर की औलाद’ जैसे शब्द सुनने को मिलते थे और हिंदू देवी-देवताओं को गाली देकर उसे अपमानित किया जाता था। शिकायत में वर्षा के भाई ने बताया कि उसे 12 नवंबर 2021 को सूचना दी गई थी कि उसकी बहन की हत्या कर दी गई है। जब उसके परिजन वहाँ पहुँचे तो वर्षा का शव फर्श पर पड़ा था।

कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए इस तथ्य पर गौर किया कि वर्षा की मृत्यु संदिग्ध परिस्थितियों में शादी के लगभग डेढ़ वर्ष के अंदर ही हुई है और उसके साथ हुई घटनाएँ गंभीर व घृणित प्रकृति की हैं। अदालत ने सारे तथ्यों की जाँच परख करते हुए और अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए आरोपितों की जमानत को खारिज किया। दस्तावेजों के मुताबिक, अदालत ने कय्यूम कुरैशी और नईम कुरैशी की बेल याचिका को खारिज किया।

वर्षा रघुवंशी का पूरा मामला

उल्लेखनीय है कि पिछले साल नवंबर में जब वर्षा रघुवंशी की हत्या का मामला पहली बार प्रकाश में आया था उस समय फईम अपने घर से फरार हो गया था। पुलिस ने उसके परिजनों को पकड़कर उससे पूछताछ करनी शुरू की थी। वहीं लड़की के परिजनों में और अन्य स्थानीय हिंदुओं में इतना रोष था कि सबने मिलकर काफी हंगामा किया था। मृतिका के भाई के पास शाम 6 बजे फोन करके बताया गया था कि उसकी बहन ने आत्म हत्या कर ली है। मगर, मौके पर पहुँचने के बाद और पहले की घटनाओं को देखते हुए उन्हें शक हुआ कि वर्षा को पहले मारा गया फिर उसके शव को फंदे पर लटकाया गया। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले पर अपनी तहरीर दी थी और आगे की कार्रवाई फईम के रिश्तेदारों को पकड़कर शुरू की गई।

40 मंजिला दो टावर-950+ फ्लैट, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- 2 हफ्ते में गिराना शुरू करो, 28 फरवरी तक पैसा वापस करो

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने रियल एस्‍टेट कंपनी सुपरटेक के नोएडा स्थित ट्विन टावर को 2 सप्ताह के अंदर गिराने का आदेश दिया है। ये इमारतें सुपरटेक कंपनी के एमेराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट में बनी हैं। अदालत ने नोएडा अथॉरिटी (Noida Authority) के सीईओ को आदेश दिया है कि वह 72 घंटे यानी 3 दिनों के भीतर सभी संबंधित पक्षों की एक मीटिंग बुलाए। इस बैठक में इमारतों को गिराने का शेड्यूल तय करें। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक लिमिटेड को आदेश दिया था कि वह इन इमारतों में फ्लैट खरीदने वाले लोगों को रकम वापस करें।

टावर को गिराने के लिए सीबीआरआई के संपर्क में नोएडा प्राधिकरण

17 जनवरी को इस मामले में हुई सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने सुपरटेक को नोएडा में एमराल्ड कोर्ट परियोजना के दो 40 मंजिला टावर को ध्वस्त करने के लिए एक कंपनी के साथ एक सप्ताह के भीतर अनुबंध करने का निर्देश दिया था। नोएडा प्राधिकरण ने पीठ को सूचित किया था कि उसने केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई), रुड़की के साथ परामर्श कर दोनों टावर को ध्वस्त करने के लिए एडिफिस इंजीनियरिंग का चयन किया है। शीर्ष अदालत ने सुपरटेक लिमिटेड को घर खरीदारों को उनके अधिकारों और विवादों के पूर्वाग्रह के बिना पैसे लौटाने का भी निर्देश दिया था।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी को भी नोएडा के सेक्टर-93 स्थित सुपरटेक एमराल्ड के दोनों 40 मंजिला टावरों को ध्वस्त करने के आदेशों का पालन नहीं करने के लिए बिल्डरों को फटकार लगाई थी। साथ ही कोर्ट ने निदेशकों को न्यायालय में अनुपस्थित रहने पर जेल भेजने की चेतावनी दी थी।

28 फरवरी तक घर खरीदारों को तय राशि लौटाने का निर्देश

न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने 4 फरवरी को एक सुनवाई में सुपरटेक को निर्देश दिया कि वह इस परियोजना के दोनों टावर के घर खरीदारों को तय राशि 28 फरवरी तक लौटा दे। न्यायालय की तरफ से इस मामले में नियुक्त ‘न्याय-मित्र’ गौरव अग्रवाल ने घर खरीदारों को लौटाई जाने वाली राशि निर्धारित की है। न्यायालय ने कहा कि बकाया आवासीय ऋण वाले मामलों में कंपनी को 31 मार्च तक कर्ज निपटाना होगा और संबंधित वित्तीय संस्थान से अनापत्ति प्रमाण-पत्र लेकर 10 अप्रैल 2022 तक जमा करना होगा।

अगस्त 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने दिया था दोनों टावरों को गिराने का आदेश

उच्चतम न्यायालय ने 31 अगस्त 2021 को सुपरटेक के निर्माणाधीन 40 मंजिला दोनों टावरों को ध्वस्त करने का आदेश देते हुए कहा था कि इस काम को तीन महीने के भीतर पूरा किया जाए। इसके साथ ही उसने इस परियोजना में घर खरीदने वाले सभी खरीदारों को बुकिंग के समय से 12 प्रतिशत ब्याज के साथ रकम लौटाने का निर्देश सुपरटेक को दिया था।

क्यों होगी ध्वस्त 

सुपरटेक की दोनों बिल्डिंग्स नोएडा सेक्टर 93 यानी एक्सप्रेस-वे की तरफ स्थित हैं। इनका नाम है- एमरल्ड कोर्ट ट्विन टावर्स। जानकारी के मुताबिक इन टावर्स में 950 से ज्यादा फ्लैट हैं और एक टॉवर 40 मंजिल का है। इनमें सैकड़ों फ्लैट बुक हो चुके थे। बता दें कि ये एक अवैध कंस्ट्रक्शन था, इसलिए टावर्स को तोड़ने के आदेश  दिए गए। ये कंस्ट्रक्शन सुपरटेक बिल्डर और नोएडा अथॉरिटी की मिलीभगत से किया गया था। दरअसल, जिस जमीन पर दोनों टावर बने हैं, वो जगह एक पार्क बनाने के लिए थी। हालाँकि, जमीन सुपरटेक की ही थी लेकिन उसने पार्क वाली जगह पर अवैध तरीके से दोनों टावर बनवाए।

महाभारत में ‘भीम’ का किरदार निभाने वाले प्रवीण कुमार का लंबी बीमारी के बाद निधन: देश के लिए जीते थे कई गोल्ड-सिल्वर मेडल

बीआर चोपड़ा के मशहूर पौराणिक टीवी सीरियल ‘महाभारत’ में भीम का किरदार निभाने वाले प्रवीण कुमार सोबती का निधन हो गया। वह 74 साल के थे। बताया जा रहा है कि निधन से पहले प्रवीण कुमार सोबती आर्थिक तंगी का सामना कर रहे थे और लंबे समय से वह बीमार भी चल रहे थे। अपनी कद काठी की वजह से प्रवीण कुमार सोबती लोगों के बीच मशहूर थे और महाभारत के लिए भीम के रोल में उन्होंने इस कदर जान फूँकी थी कि लोगों ने उन्हें खूब पसंद किया था। 

महाभारत में युधिष्ठिर का किरदार निभाने वाले अभिनेता गजेंद्र चौहान ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, “आज सुबह ही एक और दुःखद समाचार मिला। मेरा महाभारत का भाई प्रवीण कुमार जी हम सबको छोड़कर अनंत यात्रा पे चला गया। विश्वास नही हो रहा। पा जी, आप हमेशा हमारी यादों में रहेंगे। ओम शांति ओम शांति ओम शांति।”

छोटे और बड़े पर्दे के दर्शकों के बीच प्रवीण कुमार सोबती ने कम समय में ही लोकप्रियता हासिल कर ली थी। पंजाब से ताल्लुक रखने वाले प्रवीण कुमार ने बॉलीवुड की कई फिल्मों में अहम रोल अदा किए थे। फिल्मों में अक्सर वह विलेन के रोल में ही दिखते थे।

लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे प्रवीण कुमार ने अपने करियर में एक्टिंग के अलावा खेल में भी हिस्सा लिया था। वह एक एथलीट भी थे। प्रवीण कुमार सोबती ने दो बार ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने देश के लिए कई गोल्ड और सिल्वर मेडल हासिल किए। खेल के प्रति उनके योगदान के लिए साल 1967 में उन्हें अर्जुन अवार्ड से नवाजा गया था।

उन्होंने एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल हासिल करके देश का नाम रोशन किया था। खेल की दुनिया में नाम कमाने के बाद उन्हें सीमा सुरक्षा बल (BSF) की नौकरी भी मिली थी। बताया जाता है कि प्रवीण कुमार सोबती ने पीठ दर्द की शिकायत होने की वजह से ही खेल की दुनिया को अलविदा कहा था। इसके कुछ साल बाद ही प्रवीण कुमार सोबती ने एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा था और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा। 

पंजाब में कॉन्ग्रेस और लोक इंसाफ पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच हुई भिड़ंत, चली गोली: 3 घायल, गाड़ी भी तोड़ी

पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लुधियाना में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं और लोक इंसाफ पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच जमकर भिड़ंत हुईं। सामने आई जानकारी के अनुसार, इनमें एक पक्ष कॉन्ग्रेस नेता कमलजीत सिंह करवाल के समर्थन में था और दूसरा लोक इंसाफ पार्टी के विधायक सिमरजीत बैंस के समर्थन में। ये दोनों ही नेता अपनी-अपनी पार्टी से आत्मनगर विधानसभा में प्रत्याशी है।

करवाल ने आरोप लगाया कि विधायक बैंस और उनके बेटे अजयप्रीत व उनके 25-30 समर्थकों ने उनके ऊपर उस समय हमला किया जब वो दाबा रोड पर पोल मीटिंग के लिए जा रहे थे। करवाल ने कहा कि बैंस और उनसे साथियों ने उन पर ओपन फायरिंग की और गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ की। कॉन्ग्रेस नेता का दावा है कि घटना के समय विधायक व उनके साथ आए सभी लोगों पर तलवार, लोहे की रॉड जैसे हथियार थे। पूरी घटना में कम से कम तीन लोग घायल हुए।

लुधियाना के ज्वाइंट कमिशनर पुलिस ने बताया कि कॉन्ग्रेस नेता करवाल ने आरोप लगाया है कि सिमरजीत बैंस की ओर से हमला करके गोलीबारी की गई। अब मामले में आगे कार्रवाई होगी। वहीं इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, इलाके में तनाव देखते हुए भारी पुलिस की तैनाती कर दी गई है।

करवाल ने जानकारी दी है कि वे अपने साथियों के साथ दाबा रोड पर मीटिंग करने आए थे जब बैंस समर्थकों ने हथियार लेकर उन पर हमला किया और उनकी गाड़ियाँ तोड़ी। करवाल का कहना है कि बैंस की ओर से ओपन फायरिंग भी की हई। कॉन्ग्रेस नेता ने बताया, “घटना की वीडियो में विधायक बैंस और उसका बेटा अजयप्रीत दिखाई दे रहे हैं। बैंस पूरा पागल हो गया है क्योंकि वो जानता है कि वो इस बार चुनाव हारेगा। गुस्से में उसने कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमला किया। ऐसे लोगों को खुलेआम घूमने की इजाजत कैसे मिल सकती हैं जो सरेआम गुंडागर्दी और हिंसा में शामिल हैं।”

इस मामले में बैंस का कहना है कि न तो वह और न ही उनके समर्थकों ने ये हमला किया है। कॉन्ग्रेस प्रत्याशी सिर्फ अपनी मनगढ़ंत कहानियाँ बना रहे हैं। बैंस ने अपने बयान में ये भी दावा किया कि उन लोगों ने नहीं बल्कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके समर्थकों को प्रताड़ित किया। अब अतिरिक्त डीसीपी बलविंदर सिंह रंधावा ने अपने बयान में कहा कि दोनों पक्षों की ओर से बयान रिकॉर्ड कर लिए गए हैं और शिमलापुरी थाने में एफआईआर दर्ज हो गई है। जाँच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि लोक इंसाफ पार्टी की शुरुआत 2016 में सिमरजीत बैंस द्वारा की गई थी। साल 2017 में इन्होंने आम आदमी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़े थे। हालाँकि, इस बार ये पार्टी अकेले चुनावी मैदान में उतरी है। आत्म नगर में जहाँ सबसे ज्यादा संवेदनशील पोलिंग स्टेशन हैं। वहीं ये पंजाब चुनाव से पहले दोनों पार्टियों के बीच दूसरी भिड़ंत हैं। इससे पहले होर्डिंग लगाने के चक्कर में दोनों पक्षों में झगड़ा हुआ था।

‘हमारा नसीब तो देखो, अपने बालक भी खोए और अखिलेश सरकार में जेल भी गए’: फूट-फूटकर रोई माँ, कहा- जबसे बाबा, तब से सुरक्षा

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) जिले की छह विधानसभा सीटों में से एक है, मीरापुर (Meerapur)। जिले की सभी छह सीटों पर पहले चरण में 10 फरवरी 2022 को वोट डाले जाएँगे। 2012 में अस्तित्व में आए मीरापुर विधानसभा क्षेत्र का ही हिस्सा है, मलिकपुरा। यहीं मुनीश देवी रहती हैं। रविवार (6 फरवरी 2022) की दोपहर जब हम उनके दरवाजे पर पहुँचे तो उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया। हमारे काफी आग्रह के बाद जब वह बात करने को तैयार हुईं तो अगस्त 2013 की 27 तारीख के बारे में बात करते-करते फूट-फूटकर रोने लगीं। उनके पति बिशन सिंह सवाल करने पर डबडबाई आँखों से अपने बड़े भाइयों की ओर इशारा करते हैं कि जो पूछना है इनसे पूछिए। मुनीश और बिशन उस सचिन के पिता हैं जिनकी निर्मम तरीके से कवाल गाँव (Kawal Case) में हत्या कर दी गई थी। एक बच्चे के पिता रहे सचिन के साथ उनके 17 वर्षीय फूफेरे भाई गौरव की भी उस दिन निर्मम हत्या की गई थी।

मलिकपुरा जाने के लिए आपको कवाल की उन तंग गलियों से गुजरना पड़ता है, जिसमें दोनों भाई मार डाले गए थे। वो भी गोली या धारदार हथियारों से नहीं। डॉक्टरों के पैनल को सचिन के शरीर पर 17 और गौरव के शरीर पर 15 निर्मम घाव मिले थे। उन्हें लाठी-डंडों और सरिये से मार-मारकर मौत के घाट उतार दिया गया था। सिर और मुँह को पत्थरों से कुचल दिया गया था।

सचिन के चाचा तेजिंदर सिंह ने ऑपइंडिया को ब​ताया, “भाई गोली लग जाए तो भी समझा जाए। वह हत्या ऐसी थी कि शरीर में कोई ऐसी जगह नहीं थी जहाँ उनके चोट न लगी हो। उनका हाथ-पैर बाँध के पूरा जुलूस निकाला। गाँव में कोई भी ऐसा नहीं था जो छुड़ाने या बचाने वाला हो। जब हमें पता चला तो हम गए। तब उनकी लाश पड़ी हुई थी। लाश में कोई ऐसी जगह नहीं थी, जहाँ आप कह दो कि यहाँ डंडा या हाथ-पैर नहीं लगा।” मुनीश बताती हैं, “हमारे 2-2 बच्चे कत्ल किए गए थे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था। दिमाग बिलकुल आउट हो गया था।” आगे वे कहती हैं, “मैं किसी की कही नहीं बल्कि अपने दिमाग से कहती हूँ कि जबसे बाबा (योगी आदित्यनाथ) की सरकार आई तब से सुरक्षा तो है। अब लोग छेड़खानी करने से डरते हैं। अब विवाद करने वालों को पता चल गया है कि बिना जेल जाए छूटने का नहीं है।”

‘योगी से बढ़िया सरकार न आई…अब किसी में दम हो तो देख ले’

जब कवाल गाँव में सचिन और गौरव की हत्या हुई थी, तब अखिलेश यादव के नेतृत्व में राज्य में सपा की सरकार थी। उस सरकार और बीजेपी की सरकार के बारे में पूछे जाने पर मुनीश कहती हैं, “पहले से घना बेहतर है इस सरकार में। गुंडागर्दी, अपहरण, चोरी डकैती सब खत्म है। बहू-बेटियों का भी आना-जाना है।” सचिन के पिता तीन भाई हैं। सबसे बड़े प्रह्लाद सिंह ने ऑपइंडिया को बताया, “भाजपा ने बहुत कुछ कर दिया। हमारे लिए सबसे बड़ा मुद्दा सुख-शांति है। पहले हर जगह कहीं भी चलते हुए राहजनी का डर लगता था। अब कही भी घूमते फिरो। किसी भी बहन-बेटी को कोई दिक्कत नहीं। पिछले 5 साल में बहुत सुधार हुआ। योगी ने बढ़िया विकास कर रखा है। योगी सरकार से बढ़िया सरकार न आई। इस बार भी यही आएगी। पहले अपहरण और सारे कर्म होते थे। राहजनी होती थी और बहू-बेटी की कदर भी नहीं थी। अब किसी में दम हो तो देख ले। और क्या चाहते हो?”

‘योगी जी का जो कानून है, वो सबको पता है’

जब हम मुनीश के दरवाजे पर थे, उसी वक्त मीरापुर के बीजेपी प्रत्याशी प्रशांत गुर्जर भी वहाँ पहुँचे। उन्होंने ऑपइंडिया से कहा, “योगी जी का जो कानून है, वो सबको पता है। पूरा जाट समाज लॉ एन्ड आर्डर के साथ है।” वे कहते हैं, “यहाँ तो जयंत का प्रत्याशी भी नहीं है। जयंत का केवल सिंबल भर है, प्रत्याशी समाजवादी का है। लड़ाई प्रशांत और चंदन (रालोद के कैंडिडेट चंदन चौहान) की नहीं है। लड़ाई अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ की है। लोग जानते हैं कि फिर अखिलेश की सरकार बनी तो आजम खान की चलेगी और फिर वही दिन आएँगे।”

सचिन के पिता के साथ मीरापुर से बीजेपी उम्मीदवार प्रशांत गुर्जर (सबसे बाएँ)

क्या है कवाल कांड

27 अगस्त 2013 को कहासुनी में सचिन और गौरव की हत्या कर दी गई थी, जबकि शाहनवाज की अस्पताल में मौत हो गई थी। दोनों भाइयों की हत्या के मामले में एडीजे कोर्ट ने 2019 में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इनके नाम हैं: मुजस्सिम, मुजम्मिल, फुरकान, जहाँगीर, नदीम, अफजाल और इकबाल।

शाहनवाज के पिता सलीम ने एक एफआईआर दर्ज कराते हुए गौरव और सचिन के परिवार पर अपने बेटे की हत्या का आरोप लगाया था। इसको लेकर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद महापंचायत बुलाई गई थी। 07 सितंबर को महापंचायत से लौट रहे लोगों पर जौली नहर के पास हमला किया गया। इसके बाद पूरे मुजफ्फरनगर में भीषण दंगे हुए थे।

‘मोहम्डनों ने घेर-घेर कर वहाँ मार काट कर दी’

मुनीश ने ऑपइंडिया को बताया, “हमारे ऊपर अभी भी केस चल रहा है। घर से पैसा लगा कर मुकदमा लड़ रहे हैं। जब हमारे बच्चे बिगड़े (मारे गए) तब तो भाजपा सरकार आई भी नहीं थी। हमें तो भाजपा सरकार की बहुत मदद मिली। हम जेल में गए। भाजपा ने हमारी मदद भी की। सचिन के पिता जी, बड़े ताऊ, छोटे ताऊ, 2 भाई और गौरव का पिता ऐसे 6-7 लोग थे। ये सब अखिलेश सरकार में जेल काट कर आए।” वे कहती हैं, “पुलिस और सारी दुनिया को ये पता था कि हम निर्दोष थे। पुलिस पर हमारे घर जाने और हमें पकड़ कर लाने का दबाव डाला जाता था। सरकार अखिलेश की थी, यह दबाव वही डाल रहे थे। ये न होता तो पंचायत ही न होती। यह पंचायत इसीलिए तो हुई थी कि इन्हीं के बच्चे भी मार दिए गए बीच-बाजार में और इन्हीं के परिवार के नाम रिपोर्ट भी हो गई। इसलिए तो पंचायत हुई थी। जाते समय शांति का माहौल था। सब अपने-अपने गाँव को लौट रहे थे। मोहम्डनों ने घेर-घेर कर वहाँ मार काट कर दी और गोली चला दी।”

जख्म आठ साल बाद भी हरे

इस बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा और रालोद गठबंधन जाट-मुस्लिम समीकरण के आसरे हैं। इस चुनावी फॉर्मूले को राकेश टिकैत का समर्थन भी हासिल है। लेकिन, सचिन और गौरव की निर्मम हत्या और उस पर तत्कालीन सपा सरकार की एकतरफा कार्रवाई ने जो हालात पैदा किए उसके जख्म आठ साल बाद भी हरे ही हैं। मुनीश कहती हैं, “हम अब उनसे (मुस्लिम) कोई मतलब नहीं रखते। पहले हमारा भाईचारा था। पहले शादी-ब्याह में आना-जाना खूब था। लेकिन अब पहले वाली बात नहीं रही। अब मन नहीं मानता।” वे कहती हैं, “हमारा नसीब तो देखो, अपने बालक भी खोए, जेल भी गए और मुकदमा भी लड़ रहे हैं। हमे पता होता कि हमारे बालकों के साथ ऐसा हो रहा है तो क्या हम उन्हें मरने देते?”

‘सरकार तो योगी की ही आएगी, आप भी देख लेना’

शायद यही कारण है कि तेजिंदर सिंह पूरे यकीन के साथ कहते हैं, “हमारे लिए सबसे बड़ी बात है कानून-व्यवस्था में सुधार। थोड़ा बहुत जातिगत समीकरण जरूर होता है। पर जाटों में कोई बिखराव नहीं है। जाटों का कोई भी ठेकेदार नहीं है। सरकार तो योगी की ही आएगी। आप भी देख लेना।”

-साथ में राहुल पांडेय

दाऊद इब्राहिम पर जल्द ही कसेगा शिकंजा, NIA को सौंपी गई जिम्मेदारी: अभी तक ED के पास था मामला

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार (7 फरवरी 2022) को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) पर शिकंजा कसने की जिम्मेदारी दी। एनआईए ने दाऊद इब्राहिम, डी कंपनी और उससे जुड़े गुर्गों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पहली बार है, जब आतंक पर जाँच करने वाली देश की सबसे बड़ी एजेंसी नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को दाऊद इब्राहिम पर शिकंजा कसने के लिए बड़े स्तर पर लगाया गया है, क्योंकि अभी तक प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दाऊद से जुड़े मामलों की जाँच कर रही थी।

केंद्र सरकार द्वारा लिए गए फैसले के तहत अब NIA विदेश में जाकर उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, D कंपनी और दाऊद इब्राहिम भारत में टेरर फंडिंग, नार्को टेरर, ड्रग्स स्मगलिंग और फेक करेंसी (FICN) का बिजनेस कर आतंक फैलाने का काम कर रहा है।

इसके अलावा दाऊद लश्कर ए तैयबा (LeT), जैश ए मोहम्मद (JeM) और अल कायदा के जरिए भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रही है। वहीं, एनआईए के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि एफआईआर में दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों के नामों का उल्लेख किया गया है।