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‘हमें धोखा दिया गया’: उत्तर-पूर्व में कॉन्ग्रेस को बड़ा झटका, मेघालय के सभी कॉन्ग्रेस विधायक BJP गठबंधन में हुए शामिल

मेघालय में मंगलवार (8 फरवरी 2022) को कॉन्ग्रेस के पाँच विधायक BJP के समर्थन वाले गठबंधन मेघालय जनतांत्रिक गठबंधन (MDA) में शामिल हो गए। पाँचों विधायकों ने मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा (Conrad Sangma) को एक सिग्नेचर किया हुआ पत्र सौंपा है। मेघालय डेमोक्रेटिक एलायंस (MDA) राजनीतिक दलों का एक गठबंधन है, जिसने 2003 के विधानसभा चुनाव के बाद मेघालय में सरकार बनाई थी। उस वक्त इसकी अध्यक्षता भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस ने की थी।

फोटो साभार: ट्विटर

कॉन्ग्रेस छोड़कर MDA में आए पाँच विधायकों में सीएलपी नेता अंपारीन लिंगदोह, मायरलबोर्न सिएम, मोहेंड्रो रापसांग, किम्फा मारबानियांग और पीटी सॉकमी शामिल हैं। कॉन्ग्रेस छोड़ने वाले अंपारीन लिंगदोह ने कहा, “हमें धोखा दिया गया, जिसकी वजह से हमने ये कदम उठाया है। हम इन विधायक को बचा रहे हैं, क्योंकि हम ऐसा नहीं करेंगे तो मुसीबत में पड़ेंगे। जनता ने हमें जीत दिलाई है।”

बता दें कि मेघालय में कॉन्ग्रेस के पास 17 विधायक थे। पिछले साल नवंबर में पूर्व सीएम मुकुल संगमा समेत कॉन्ग्रेस के 12 विधायक तृणमूल कॉन्ग्रेस TMC में शामिल हो गए थे। अब शेष पाँच कॉन्ग्रेस विधायकों के एमडीए सरकार में शामिल होने के बाद टीएमसी राज्य में प्रमुख विपक्षी दल बन गई है।

अफगानिस्तानी क्रिकेट टीम के खिलाड़ी नहीं लौटना चाहते हैं अपने मुल्क, अंडर-19 वर्ल्ड कप के बाद यूके से माँगी पनाह

हाल ही में वेस्टइंडीज़ में खेले गए अंडर-19 वर्ल्ड कप को भारत ने जीता है। टीम इंडिया की युवा ब्रिगेड ने पाँचवीं बार इस खिताब को अपने नाम किया और इतिहास रच दिया। वर्ल्ड कप खत्म हुआ तो टीमें अब अपने-अपने घरों को लौट रही हैं, लेकिन अफगानिस्तान की अंडर-19 टीम ऐसा नहीं कर रही।

अफगानिस्तान की अंडर-19 टीम के खिलाड़ी वेस्टइंडीज़ से लौटते वक्त इंग्लैंड में रुक गए हैं। कुछ खिलाड़ियों ने अब अफगानिस्तान वापस लौटने से इनकार कर दिया है। ऐसे में कुछ खिलाड़ियों, स्टाफ ने माँग की है कि उन्हें यूके में ही शरण दे दी जाए। अफगान मीडिया पश्तोवोआ के मुताबिक, टीम के कुछ खिलाड़ी, बोर्ड के कुछ अन्य सदस्य तब वेस्टइंडीज़ से रवानगी के बाद यूके में लैंड किए तब उन्होंने काबुल की फ्लाइट पकड़ने से इनकार कर दिया। 

पश्तोवोआ वेबसाइट के एडिटर जफर हांद ने ट्वीट कर कहा, “अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के दो सूत्रों ने मुझे बताया कि अफगानिस्तान अंडर 19 टीम के एक खिलाड़ी और तीन अधिकारियों ने घर आने से मना कर दिया।” हालाँकि जिन प्लेयर्स या स्टाफ ने यूके में शरण के लिए अप्लाई किया है, उनके नाम उजागर नहीं किए गए हैं और इस बारे में भी कोई जानकारी नहीं है कि वे अफगानिस्तान लौटने से इनकार क्यों कर रहे हैं।

अफगानिस्तान के लिए बेहतर गया ये वर्ल्ड कप

अफगानिस्तान की टीम के लिए अंडर-19 वर्ल्ड कप 2022 काफी शानदार रहा और टीम चौथे पायदान पर रही। ये अभी तक का टीम का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है, लेकिन इस खुशी के अवसर पर भी खिलाड़ी घर पर जाने से खौफ खा रहे हैं।

पहले भी शरण माँग चुके हैं अफगान प्लेयर्स

यह पहली बार नहीं है जब अफगानिस्तान के अंडर 19 खिलाड़ियों से विदेश में शरण माँगी है। कुछ साल पहले भी पाँच-छह खिलाड़ियों ने कनाडा में शरण चाही थी। हालाँकि तालिबान के सत्ता में आने के बाद यह पहली घटना है जब खिलाड़ियों ने विदेश में शरण माँगी है। अभी तक इस मामले में ब्रिटेन और तालिबान की तरफ से कोई बयान नहीं आया है।

अफगानिस्तान टीम के अंडर 19 वर्ल्ड कप में जाने में भी काफी दिक्कतें आई थीं। टीम को वीजा मिलने में परेशानी हुई थी। इस वजह से अफगान टीम टूर्नामेंट में अपने वॉर्म अप मुकाबले भी नहीं खेल पाई थी। वह ऐन मौके पर ही वर्ल्ड कप के लिए पहुँच सकी थी।

बुर्के के लिए हिंसा: कर्नाटक में 3 दिन के लिए बंद किए गए सभी हाई स्कूल और कॉलेज, CM बोम्मई ने कहा – शांति बनाए रखें

कर्नाटक के शैक्षणिक संस्थानों में बुर्के में एंट्री दिए जाने के समर्थन में चल रहे विरोध प्रदर्शन के कारण मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने सभी कॉलेजों और हाई स्कूलों को बंद करने का ऐलान किया है। सीएम बोम्मई ने कहा, “मैं सभी स्कूल-कॉलेजों के छात्रों, शिक्षकों और प्रबंधन के साथ-साथ कर्नाटक की जनता से आग्रह करता हूँ कि राज्य में शांति और सामंजस्य बनाए रखें। मैंने अगले 3 दिनों के लिए सभी कॉलेजों और हाई स्कूलों को बंद करने का आदेश जारी किया है।”

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि इस मामले के सभी हितधारकों से उम्मीद की जाती है कि वो सहयोग करेंगे। बता दें कि कर्नाटक के शैक्षणिक संस्थानों में बुर्के में एंट्री लेने के लिए मुस्लिम छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जो अब हिंसा में बदल गया है। अब मुस्लिम छात्र भी सड़क पर उतर आए हैं। हिंसा हो रही है। इसके विरोध में जो हिन्दू छात्र-छात्राएँ भगवा शॉल या स्कार्फ़ में आ रहे हैं तो उनका विरोध किया जा रहा है। विपक्षी दल और मीडिया का गिरोह विशेष भी प्रोपगैंडा फैलाने में लगा है।

शिमोगा में कॉलेज पर पत्थरबाजी

शिमोगा में हिजाब के समर्थन में मुस्लिम छात्रों ने कॉलेज पर पत्थरबाजी की। इसके बाद वहाँ धारा-144 लगा दी गई है। पत्थरबाजी के वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने कहा कि संविधान की बात करने वालों ने एक बार फिर से पत्थर उठा लिए। बता दें कि वहाँ मुस्लिम और हिन्दू छात्रों के बीच झड़प के वीडियोज भी सामने आए हैं। कर्नाटक के कई इलाकों में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहन कर आने के विरोध में भगवा शॉल के साथ प्रदर्शन करने के लिए निकले हिन्दू छात्रों के साथ बदतमीजी भी की गई और उन्हें धमकाया गया।

पुलिस के बीच-बचाव से मामला शांत हुआ। साथ ही शिवमोगा में भगवा ध्वज फहराने के वीडियोज भी सामने आए हैं। स्कूल में बड़ी संख्या में दोनों समुदायों के छात्र-छात्राएँ मौजूद हैं। उच्च-न्यायालय में भी इस मामले की सुनवाई चल रही है। सभी की नजरें वहाँ टिकी हुई हैं। उधर उडुपी के महात्मा गाँधी मेमोरियल कालेज में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया है। हिजाब पहनकर प्रदर्शन कर रही छात्राओं के जवाब में भगवा गमछा में छात्रों ने प्रदर्शन किया। कुछ छात्राएँ महात्मा गाँधी मेमोरियल कॉलेज परिसर में हिजाब विवाद को लेकर प्रदर्शन कर रही थीं। तभी वहाँ छात्रों का एक समूह पहुँच गया।

भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, ये बुर्का के लिए हो रहा है।

‘क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं’: ‘Hyundai’ विवाद पर भारत ने दक्षिण कोरियाई राजदूत को तलब किया, अलापा था पाकिस्तानी राग

कोरिया की दिग्गज कंपनी ‘हुंडई मोटर्स’ की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। भारत सरकार ने मंगलवार (8 फरवरी, 2022) को हुंडई विवाद (Hyundai) पर दक्षिण कोरिया के राजदूत को तलब किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची (Arindam Bagchi) ने तथाकथित कश्मीर एकजुटता दिवस पर हुंडई पाकिस्तान के सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर मीडिया के सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने कहा, “हमने तथाकथित कश्मीर एकजुटता दिवस पर हुंडई पाकिस्तान द्वारा सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट देखी। रविवार (6 फरवरी 2022) को इस पोस्ट को सोशल मीडिया पोस्ट करने के तुरंत बाद सियोल में हमारे राजदूत ने हुंडई मुख्यालय से संपर्क किया और उनसे स्पष्टीकरण माँगा, जिसके बाद इस आपत्तिजनक पोस्ट को तुरंत ​हटा दिया गया था।”

अरिंदम बागची ने कहा, “कोरिया के राजदूत को विदेश मंत्रालय ने सोमवार (7 फरवरी 2022) को तलब किया था। हुंडई पाकिस्तान द्वारा किए गए पोस्ट को लेकर हमने उन्हें अवगत कराया कि यह बिल्कुल भी सही नहीं है। साथ ही बताया कि यह मामला भारत की क्षेत्रीय अखंडता से संबंधित है, जिससे कोई समझौता नहीं किया सकता है। हमें उम्मीद थी कि कंपनी इन मुद्दों को ठीक से हल करने के लिए उचित कार्रवाई करेगी।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत विभिन्न क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों के निवेश का स्वागत करता है। लेकिन, उनसे यह भी उम्मीद की जाती है कि ऐसी कंपनियाँ और उनके सहयोगी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के मामलों पर झूठी और भ्रामक टिप्पणियों से परहेज करेंगे।”

बागची ने कहा कि कोरिया के विदेश मंत्री चुंग यूई-योंग ने आज सुबह विदेश मंत्री को फोन किया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट के कारण भारत के लोगों और सरकार को नकारात्मक प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा, इसका हमें खेद है।

इससे पहले हुंडई मोटर्स इंडिया ने अपने आधिकारिक बयान में कहा था, “कश्मीर के बारे में पोस्ट साझा करने वाला एक इंडिपेंडेट डिस्ट्रीब्यूटर था और इसका हुंडई इंडिया से इससे कोई लेना देना नहीं था। उन्होंने कहा कि हम राष्ट्रवाद का सम्मान करने की अपनी प्रकृति के पीछे मजबूती से खड़े हैं।” कंपनी ने कहा, “हुंडई मोटरइंडिया 25 से अधिक सालों से भारतीय बाजार में प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है और वह राष्ट्रवाद का सम्मान करने के लिए मजबूती से खड़े हैं।”

हुंडई से जुड़ा पूरा विवाद

गौरतलब है कि हुंडई पाकिस्तान (Hyundai Pakistan) ने बीते दिनों एक ट्वीट किया था। ट्वीट कश्मीर को लेकर था। इस ट्वीट को लेकर भारत की ऑटोमोबाइल कंपनी हुंडई इंडिया (Hyundai Motor India) सवालों के घेरे में आ गई थी और सोशल मीडिया पर देखते ही देखते #BoycottHyundai ट्रेंड होने लगा। कई यूजर्स ने कंपनी की इस हरकत पर अपनी नाराजगी जाहिर की और कई यूजर्स ने शिकायत की कि भारत की हुंडई इस मामले में ट्वीट करने पर सवाल करने पर उन्हें ब्लॉक कर रही है।

काफी लताड़ लगने के बाद शाम के समय कंपनी का यह बयान आया। लेकिन यूजर्स इससे भी संतुष्ट नहीं हैं। लोगों का कहना है कि कंपनी अपने सबसे बड़े बाजार की आँख में धूल झोंकने की कोशिश कर रही है।

‘संविधान की बात करने वालों के हाथ में फिर पत्थर’: शिमोगा में बुर्का के समर्थन में कॉलेज पर पत्थरबाजी, लगाई गई धारा-144

कर्नाटक में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब (बुर्का) पहन कर जाने की मुस्लिम छात्र-छात्राओं की माँग अब हिंसक प्रदर्शनों में बदल गई है। शिमोगा में हिजाब के समर्थन में मुस्लिम छात्रों ने कॉलेज पर पत्थरबाजी की। इसके बाद वहाँ धारा-144 लगा दी गई है। पत्थरबाजी के वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने कहा कि संविधान की बात करने वालों ने एक बार फिर से पत्थर उठा लिए। बता दें कि वहाँ मुस्लिम और हिन्दू छात्रों के बीच झड़प के वीडियोज भी सामने आए हैं।

कर्नाटक के कई इलाकों में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहन कर आने के विरोध में भगवा शॉल के साथ प्रदर्शन करने के लिए निकले हिन्दू छात्रों के साथ बदतमीजी भी की गई और उन्हें धमकाया गया। पुलिस के बीच-बचाव से मामला शांत हुआ। साथ ही शिवमोगा मर भगवा ध्वज फहराने के वीडियोज भी सामने आए हैं। स्कूल में बड़ी संख्या में दोनों समुदायों के छात्र-छात्राएँ मौजूद हैं। उच्च-न्यायालय में भी इस मामले की सुनवाई चल रही है। सभी की नजरें वहाँ टिकी हुई हैं।

उधर उडुपी के महात्मा गाँधी मेमोरियल कालेज में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया है। हिजाब पहनकर प्रदर्शन कर रही छात्राओं के जवाब में भगवा गमछा में छात्रों ने प्रदर्शन किया। कुछ छात्राएँ महात्मा गाँधी मेमोरियल कॉलेज परिसर में हिजाब विवाद को लेकर प्रदर्शन कर रही थीं। तभी वहाँ छात्रों का एक समूह पहुँच गया। इस दौरान भगवा गमछा पहने छात्रों ने छात्राओं के सामने ही नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस-प्रशासन ने छात्रों को समझाने की कोशिश करते हुए उनसे क्लास में वापस जाने को कहा।

भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, ये बुर्का के लिए हो रहा है।

‘CM के लिए मेरे पति सही विकल्प, राहुल गाँधी को गुमराह किया गया’: छलका सिद्धू की पत्नी का दर्द, कॉन्ग्रेस ने पंजाब में चन्नी को बनाया है चेहरा

पंजाब विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कॉन्ग्रेस की ओर से चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाए जाने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर बेहद नाराज हैं। नवजोत कौर ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि किसी को सीएम फेस बनाए जाने से पहले उसकी शिक्षा देखी जानी चाहिए। वह बोलीं कि उनके पति पंजाब सीएम पद के लिए सबसे सही ऑप्शन थे।

जानकारी के मुताबिक कॉन्ग्रेस नेता की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू से जब पूछा गया कि क्या राहुल गाँधी को सीएम के लिए निर्णय लेने में गुमराह किया गया था। इस पर सिद्धू की पत्नी ने ‘हाँ’ में जवाब दिया। उन्होंने कहा, “किसी को इतने उच्च पद पर चुनने के लिए मेरिट, शिक्षा, ईमानदारी, काम को गिना जाना चाहिए। सिद्धू भले ही मेरे पति है लेकिन मुझे यह कहने में बिलकुल संकोच नहीं है कि सीएम के लिए सही विकल्प मेरे पति हैं।”

बता दें कि एक तरफ जहाँ नवजोत कौर सिद्धू ने अपने पति को सीएम का चेहरा न बनाने पर नाराजगी जाहिर की। वहीं सिद्धू ने चन्नी को सीएम फेस बनाए जाने पर कहा था कि ये सब हाईकमान को तय करना था, अब उनका जो भी फैसला है, वह उससे सहमत हैं।सिद्धू ने अपने बयान में कहा था, “मैं कॉन्ग्रेस हाईकमान के साथ था, हूँ और रहूँगा।”

जब पत्रकारों ने उनसे थोड़ा और गहराई में पूछा कि वो चन्नी के साथ हैं या हाईकमान के साथ? इस पर भी सिद्धू ने जवाब दिया- “मैं पहले दिन से ही हाईकमान के साथ हूँ। उनके हर फैसले को मानता हूँ। मैं जितना हाईकमान के साथ हूँ, उससे दोगुना पंजाब के लोगों के साथ हूँ।”

मालूम हो कि इससे पहले सीएम के तौर पर चन्नी के नाम का ऐलान होने पर सिद्धू ने इशारों में ही कॉन्ग्रेस को चेतावनी दे डाली थी। उन्होंने खुद को अरबी घोड़ा करार देते हुए कहा था, “मुझे पद की कोई लालसा नहीं है, लेकिन मुझे दर्शनी घोड़ा न बनने देना। फैसला लेने की ताकत देना।” इससे पूर्व चन्नी को ही सीएम पद दिए जाने की खबरों के बीच सिद्धू ने बागी तेवर अपनाते हुए कहा था कि ऊपर वाले तो चाहते हैं कि कोई कमजोर मुख्यमंत्री हो, जिसे वो ता थैया, ता थैया नचा सकें और कहें कि नाच मेरी बुलबुल तुझे पैसा मिलेगा।

‘राजनीति में अदालत को न लाएँ’: सुप्रीम कोर्ट ने आज़म खान को जमानत देने से किया इनकार, सपा के लिए चुनाव प्रचार करना चाहते थे

समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान (Azam Khan) को सुप्रीम कोर्ट से मंगलवार (8 फरवरी 2022) को बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने आजम खान की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए उन्हें हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने हाई कोर्ट को आजम खान मामले की जल्‍द सुनवाई करने का निर्देश भी दिया है। जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “आखिर संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत दायर इस तरह की याचिका पर सुनवाई कैसे की जा सकती है।”

पीठ ने आजम खान की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल को फटकार लगाते हुए कहा, “हम याचिका की सुनवाई के इच्छुक नहीं हैं। आपको हाई कोर्ट जाना चाहिए। आजम खान हाई कोर्ट जाकर जल्द सुनवाई की माँग कर सकते हैं।”

जवाब में सिब्बल ने कहा, “हम हाई कोर्ट भी गए थे। किसी न किसी वजह से सुनवाई टल गई। तीन बार जल्द सुनवाई की माँग भी की। महीनों से सुनवाई नहीं हुई है। आखिर हम कहाँ जाएँ।” सिब्बल ने जेल में सपा सांसद आजम खान की ओर से कहा कि उनके मुवक्किल पर 87 केस दर्ज हैं। उन्हें 83 मामलों में जमानत मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि मेरे मुवक्किल को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में हिस्‍सा लेना है, लिहाजा उनकी अंतरिम जमानत की याचिका को स्‍वीकार किया जाए। आजम खान ने कुछ नहीं किया है, फिर भी वह जेल में हैं।

इस पर जस्टिस राव ने सिब्बल से कहा, “कृपया राजनीति को अदालत में न लाएँ।” जवाब में सिब्बल ने कहा, “राजनीति आपके सामने हैं।” पीठ ने आगे कहा कि हम इस पर सुनवाई नहीं कर सकते।

बता दें कि सीतापुर जेल में बंद सपा सांसद ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाग लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अंतरिम जमानत माँगी थी। हालाँकि, अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आजम खान ने अपनी याचिका वापस ले ली है। फर्जीवाड़े और भूमि पर अवैध कब्जे के आरोप में आजम खान दो साल से यूपी की सीतापुर जेल में बंद हैं। वो यूपी विधानसभा चुनाव में रामपुर सीट से लड़ रहे हैं।

‘यहाँ 900 घर बने, इनमें 650 मुसलमानों के’: फतवे और गोकशी के लिए कुख्यात देवबंद में इस बार भी खिलेगा कमल?

सहारनपुर की मुस्लिम बहुल देवबंद (Deoband) सीट। यहाँ दारूल उलूम है, जो अपने फतवों को लेकर कुख्यात है। माँ बालासुंदरी का मंदिर है। कहा जाता है कि यहाँ अर्जुन ने अज्ञातवास में साधना की थी। यहीं श्री कृष्ण गोशाला है, जिसके मुख्य द्वार पर देववृन्द (Devvrind) अंकित है। देवबंद का नाम बदलकर देववृन्द करने की माँग पुरानी है। 1990 से इस गोशाला का काम देखने वाले विजयपाल बताते हैं कि इस समय यहाँ 324 गोवंश हैं। उनके अनुसार 2017 से पहले यहाँ बड़ी संख्या में ऐसे गोवंश लेकर पुलिस आती थी, जिन्हें गो तस्करों से बचाया जाता था। योगी सरकार में गोकशी पर सख्ती के बाद से यह सिलसिला थमा है।

यह इलाका गोकशी के लिए भी कुख्यात था। मौजूदा सरकार में सख्ती के बावजूद यह पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। सहारनपुर के एसएसपी आकाश तोमर ने ऑपइंडिया को बताया, “मुझे इस जिले में 3 माह से अधिक समय हुआ है। तब से लगभग 57 गोकशी करने वालों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। एक गोकश की 1 करोड़ से ज्यादा की सम्पत्ति को कुर्क किया गया है। इन लोगों के खिलाफ काफी केस दर्ज किए गए हैं। गोकशी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। यह भी दिलचस्प है कि श्री कृष्ण गोशाला की गाड़ी हर रोज रोटी इकट्ठा करने के लिए देवबंद के मोहल्लों में घूमती है, लेकिन गोशाला के दानदाताओं में एक भी मुस्लिम नाम हमें देखने को नहीं मिला।

देववृंद की श्री कृष्ण गोशाला में गोवंश

राम मंदिर पर मुस्लिमों की चुप्पी

केवल बात गोवंश की सुरक्षा का ही नहीं है। वह अहसान राव भी दारूल उलूम से ही पढ़े हैं और देवबंद की ही एक गली में रहते हैं, जिन्हें उनकी बिरादरी के लोग केवल इसलिए गालियाँ और धमकी दे रहे क्योंकि उन्होंने जय श्रीराम और भारत माता की जय के नारे लगाए। चुनावी मौसम में भी देवबंद के मुस्लिम इन मुद्दों पर अपनी राय रखने से बचते हैं। ऑपइंडिया से बातचीत में बीजेपी की शान में कसीदे पढ़ने वाले सूफियान कुरैशी से जब राम मंदिर को लेकर हमने सवाल किया तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया। इन्हीं सूफियान ने हमसे कहा, “यहाँ पर 73 प्रतिशत वोटर मुस्लिम हैं। मैं बहुत सारे मुसलमान घरानों को जानता हूँ, जिनके भाजपा ने घर बनवाए। मैंने सुना है कि यहाँ 900 घर लोगों के बने हैं। इसमें 650 मुसलमानों के हैं। अब जिन लोगों के घर भाजपा ने या मोदी जी ने बनवाए वो तो सीधा बोलते हैं कि हम उसी को वोट देंगे जिसने मेरा घर बनाया।”

वो सीट जहाँ बीजेपी का मुकाबला बसपा से

बीजेपी ने फिर से इस सीट पर बृजेश रावत को उम्मीदवार बनाया है। चुनावों के ऐलान से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जिन सीटों से चुनाव लड़ने को लेकर मीडिया में अटकलें लगती थी, उनमें से एक देवबंद भी था। लेकिन आखिर में पार्टी ने 2017 में इस सीट पर कमल खिलाने पर रावत पर ही भरोसा जताया। सपा ने यहाँ से पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह राणा के बेटे कार्तिकेय राणा को इस उम्मीद में प्रत्याशी बनाया है कि उसे मुस्लिमों के एकमुश्त वोट मिलेंगे और हिंदुओं के वोट बँटेंगे। लेकिन, यह वह सीट है जिस पर बीजेपी का मुकाबला बसपा से बताया जा रहा है। गौर करने की बात यह है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जिन सीटों से अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान हम गुजरे उसमें देवबंद इकलौती सीट है जहाँ बसपा का उम्मीदवार मुख्य मुकाबले में बताया जा रहा है। ओवैसी की पार्टी AIMIM ने उमर मदनी को मैदान में उतार रखा है। वे इस इलाके में दबदबा रखने वाले मदनी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। फिर भी वोटकटुवा से ज्यादा उनकी भूमिका नहीं दिखती। जैसा कि इंजीनियर मोहम्मद अनवर ने ऑपइंडिया को बताया, “मदनी जी का परिवार मजहबी वजह से सम्मानित है। पॉलिटकली उनका कोई प्रभाव नहीं है। मौलाना मदनी का बयान आया है कि आप ऐसी पार्टी को सपोर्ट करें जो मुल्क में अमन और भाईचारा कायम रखे। जिसने अभी तक ऐसा काम किया है, सबका साथ सबका विकास का नारा दिया है, वह भारतीय जनता पार्टी है। यहाँ के लोगों को इससे फायदा मिल रहा है।”

‘अखिलेश लौटे तो फिर वही हुल्लड़बाजी हो’

हालाँकि ऐसा नहीं है कि देवबंद में बीजेपी के लिए लड़ाई बिल्कुल एकतरफा है। अहसान राव को 10 मार्च के बाद देख लेने की धमकी देने वालों में से बहुतेरे भी देवबंद की ही गलियों में रहते हैं। जैसा कि अहसान ने ऑपइंडिया को बताया, “जहाँ भी मैं जाता हूँ, वे गाली धमकी देते हैं। सब लोग इस इंतजार में हैं कि भैया (अखिलेश यादव) आएँगे, सरकार बदलेगी तो बदला लेंगे। मेरे पिता को, घरवालों को, रिश्तेदारों को, सबको बरगलाने का काम कर रहे।” एक तरफ बीजेपी सरकार की सरहाना करते देवबंद के मुस्लिम, दूसरी ओर सत्ता परिवर्तन का इंतजार कर रहे मुस्लिम! इसे समझना है ​तो यहाँ तैनात रहे एक पुलिस अधिकारी, जिन्होंने अपनी पहचान उजागर नहीं करने का आग्रह किया के शब्दों में समझे, “वे चाहते हैं कि टोपी बहनकर बाइक पर हुल्लड़बाजी करते हुए सड़कों पर निकले और पुलिस उन्हें नहीं रोके। अखिलेश यादव के समय ऐसा ही चलता था। अब यह सब बंद है। वे चाहते हैं कि अखिलेश फिर से लौटे और वे उसी तरह सड़क पर हुल्लड़बाजी करें।”

‘कोई डर नहीं है अब’

ऐसा भी नहीं है कि इन हुल्लड़बाजों से केवल हिंदू ही प्रताड़ित थे। खुद को समाजसेवी बताने वाली रोशन आरा ने ऑपइंडिया को बताया, “पिछली सरकार में क्राइम बहुत था इसलिए महिलाएँ उनसे नाराज हैं। इस सरकार में महिलाओं को बहुत ज्यादा सुरक्षा है। महिला किसी भी समय कही भी निकल जाए उसको कोई डर नहीं है अब। पहले महिलाएँ निकलती थीं तो उनके पीछे बाइकों पर हुल्लड़ करने वाले लग जाते थे। लड़कियों को छेड़ते थे। इस सरकार में ऐसा नहीं है। पुलिस-प्रशासन सही है अब। किसी तरह का कोई खतरा नहीं है। थानों में दलाली बंद हो गई। जो दलाल लोग थानों में बैठे रहते थे, अब उनकी नो इंट्री कर दी गई है।” सुफियान कुरैशी भी बताते हैं, “पहले सड़क पर चलते-फिरते गुंडे लड़कियों को परेशान करते थे। लड़कियाँ स्कूल नहीं जाया करती थीं। अब खुले में लोग चले जाया करते हैं। पहले यहाँ लोगों से लूट हो जाया करती थी। अब नहीं होती।” मोहम्मद हारून अंसारी के अनुसार, “लॉ एन्ड आर्डर सबसे बड़ा फैक्टर है।”

‘भूल गए दंगा क्या चीज होता है’

मोहम्मद अनवर कहते हैं, “अब अपराध है ही कहाँ? अपराध पर तो जीरो टॉलरेंस है। 2017 से पहले तो ये अपराध का गढ़ था। मुज़फ्फरनगर, देवबंद और सहरानपुर गढ़ था। कैराना, शामली और गंगोह गढ़ थे। लेकिन जब से उत्तर प्रदेश में योगी जी की सरकार आई है, शांति है।” वे आगे बताते हैं, “यहाँ एक इंग्लिश स्पीकिंग स्कूल चलता है। 2017 तक वहाँ 5 बजे शाम को लास्ट क्लास चलती थी। उसके बाद छुट्टी हो जाती थी। वहाँ से निकलने वाली लड़कियों को मनचले इतना छेड़ते थे कि घर वालों ने उनकी पढ़ाई छुड़वा दी और बहुत से इंस्टीट्यूट ने अपना टाइम घटा दिया। लेकिन आज वही इंस्टीट्यूट रात 10 बजे तक चल रहे हैं।” मुर्तजा कुरैशी के लिए भी सबसे बड़ा मुद्दा कानून-व्यवस्था में सुधार है। वे कहते हैं, “ये बीजेपी की सबसे अच्छी बात है। पहले हम देखते थे कि कोई लड़का बेवजह लड़ रहा, कोई बाइक उलटी-सीधी चला रहा, कोई दंगा-फसाद कर रहा। लेकिन अब ऐसा कुछ भी नहीं है। दंगा-फसाद का तो नाम ही मिट गया। लोग भूल ही गए कि दंगा क्या चीज होता है। मैं इस चीज का सपोर्ट करता हूँ।”

‘भाजपा को मुसलमानों ने सपोर्ट दिया है, आगे भी करेंगे’

तो देवबंद के अंतिम नतीजे क्या होंगे? जैसा कि सुफियान कुरैशी ऑपइंडिया से बातचीत में कहते हैं, “कौन सी पार्टी जीत रही ये तो आने वाली तारीख़ बताएगी। लेकिन यहाँ तो काम बोल रहा है। जो लोग भाजपा को मुस्लिम विरोधी पार्टी बोलते हैं वो बताएँ कि भाजपा ने फिर मुसलमानों के घर क्यों बनवाए? भाजपा ने फिर मुसलमानों को आयुष्मान कार्ड क्यों दिया? फिर मुसलमानों के घर पर जा कर वोट क्यों माँग रही है भाजपा?” मोहम्मद अनवर बताते हैं, “सरकार ने यहाँ योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के दिया है। इससे लोगों में भाजपा के लिए कोई हीन भावना नहीं है। यहाँ मुस्लिम बहुल एरिया होने के बाद भी भाजपा का विधायक जीत कर गया है। इसका मतलब यह है कि भाजपा को मुसलमानों ने सपोर्ट दिया है। आगे भी सपोर्ट करेंगे और कर रहे हैं।” मुर्तजा कुरैशी बताते हैं, “हमारे साथ इस सरकार में कोई भेदभाव नहीं हुआ है। सभी योजनाओं का लाभ दिया है। हमने जब भी विधायक जी से कुछ कहा तो उन्होंने उसको किया। सबका साथ, सबका विकास। हम बृजेश जी को वोट दे रहे हैं।”

-साथ में राहुल पांडेय

नेपाल सरकार ने माना सीमा पर जमीन कब्ज़ा रहा है चीन: जाँच समिति की रिपोर्ट से खुलासा, UN में दिया गया ज्ञापन

नेपाल ने अपनी सीमा में चीनी अतिक्रमण को लेकर भले ही चुप्पी साध रखी हो, लेकिन कई मीडिया रिपोर्ट इस तरफ इशारा करती रही है। अब नेपाल सरकार की एक रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में ने नेपाल ने चीन पर पश्चिमी नेपाल में अपनी साझा सीमा पर अतिक्रमण करने का आरोप लगाया गया है।

यह पहली बार है जब नेपाल ने अपने क्षेत्र में चीनी प्रभाव का आधिकारिक आरोप लगाया है। बता दें कि रिपोर्ट पिछले सितंबर में उन आरोपों के जवाब में पेश की गई थी जब खबर आई थी कि चीन नेपाल के सुदूर पश्चिम में हुमला जिले में घुसपैठ कर रहा है। नेपाल सरकार ने उस समय हुमला के उत्तरी हिस्से में स्थित नेपाल-चीन सीमा के संबंध में अध्ययन के लिए गृह सचिव के नेतृत्व में सात सदस्यीय समिति बनाई थी। नेपाल-चीन सीमा पर विवाद का अध्ययन करने के लिए गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में इस समिति का गठन किया गया था।

नेपाल की हिंदू सिविक सोसाइटी, राष्ट्रीय एकता अभियान ने सोमवार (7 फरवरी, 2022) को संयुक्त राष्ट्र को एक ज्ञापन सौंपा। एकता अभियान के चेयरपर्सन बिनय यादव ने काठमांडू में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर रिचर्ड हॉवर्ड को ज्ञापन सौंपा। जिसमें कहा गया है कि चीन ने हुमला जिले में उनकी भूमि पर कब्जा कर लिया है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से चीनी भूमि हथियाने पर ध्यान देने का आग्रह किया है। इसके साथ ही नागरिक समाज संगठन ने नेपाली कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार से समिति के सुझाव के अनुसार कार्रवाई करने का भी आग्रह किया है।

गौरतलब है कि चीन के नेपाल के अंदरूनी मामलों में लगातार हस्तक्षेप को लेकर पिछले दिनों नेपाल के सियासी तबकों से लेकर आम लोगों तक ने आवाज उठाई। इसको लेकर नेपाल के राष्ट्रीय एकता अभियान ने बिराटनगर, मोरंग और खाबरहुब में चीन के खिलाफ प्रदर्शन भी किया। देश के नागरिक समाज ने नेपाल के आंतरिक मामलों में चीन के हस्तक्षेप और उत्तरी सीमा के इलाके में अतिक्रमण का विरोध किया था।

विरोध प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय एकता अभियान के सदस्यों ने महेंद्र चौक से बिराटनगर के भट्टा चौक तक मार्च निकाला। साथ ही चीन की विस्तारवादी नीति और नेपाल के शीर्ष राजनीतिक क्षेत्र में इसके अनुचित हस्तक्षेप के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का पुतला भी फूँका।

नेहरू की आलोचना पर जेल और इंदिरा के आगे न झुकने पर बैन: पढ़ें राज्यसभा में PM मोदी ने कॉन्ग्रेस को कैसे-कैसे धोया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राज्यसभा में कॉन्ग्रेस के ऊपर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कॉन्ग्रेस जैसी वंशवादी पार्टियों को देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि अगर कॉन्ग्रेस नहीं होती तो देश को आपातकाल नहीं देखना पड़ता, जाति की राजनीति नहीं सहनी पड़ी, सिखों का नरसंहार नहीं देखना पड़ता और कश्मीर पंडित प्रताड़ित नहीं होते।

कॉन्ग्रेस शासन काल पर बात करते हुए पीएम ने कहा नेहरू की आलोचना करने के लिए मजरूह सुल्तानपुरी और प्रोफेसर धर्मपाल को जेल नहीं होती। किशोर कुमार को इंदिरा गाँधी के आगे न झुकने पर आपातकाल के दौरान रेडियो पर बैन नहीं किया जाता। उन्होंने कहा, “हम जानते हैं कि कैसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचला गया जब एक परिवार से लोग सहमत नहीं हुए।”

पीएम ने नेहरू काल को लेकर कहा, “उस समय के समाचार पत्रों ने कहा था पंडित नेहरू को केवल अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि की चिंता होती थी। अपने निहित स्वार्थों के लिए उन्होंने गोवा के लोगों को नजरअंदाज किया और वहाँ के लोगों को जब गोली लगी तो उनके लिए कोई कदम नहीं उठाया। तत्कालीन पीएम ने सत्याग्रहियों की मदद करने से मना कर दिया था। राज्य को 15 साल से ज्यादा समय तक विदेशी शासन में रहना पड़ा।”

कॉन्ग्रेस को घेरने के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि पार्टी की हालत देख ऐसा लगता है जैसे पार्टी को अर्बन नक्सलियों ने हाईजैक कर लिया है। ये चिंता करने वाली बात है। लेकिन ये लोग कहते हैं कि इतिहास बदला जा रहा है। पीएम ने कहा, “हम बस यादश्त को सुधार रहे हैं। अगर कुछ लोगों के लिए इतिहास केवल एक परिवार है, तो हम कुछ नहीं कर सकते।”

पीएम ने कॉन्ग्रेस के हाई कमान पर तंज कसते हुए कहा कि उनके काम करने के बस तीन ढंग हैं- डिस्क्रेडिट , डिस्टेबलाइज, डिसमिस। वे इन्हीं सिद्धांतों पर काम करते हैं। पीएम ने पूछा कि आखिर फारूख अब्दुल्ला सरकार, चौधरी देवी लाल सरकार, चौधरी चरण सिंह सरकार, सरदार बादल सिंह सरकार और तमाम आखिर क्यों पिछले 6-7 दशकों में अस्थिर हुईं। पीएम ने कहा कि उन हरकतों से वाकिफ है जो कॉन्ग्रेस ने भारत के इतिहास में सरकारों को गिराने के लिए क्या चाल चलीं। अटल जी ने तीन राज्यों में सरकार बनाई लेकिन वहाँ कभी ऐसी दिक्कत नहीं आई।

पीएम मोदी ने राज्यसभा में आज वंशवादी पार्टियों को देश के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। पीएम ने कहा कि भारत को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है। इस पर बहस लंबे अरसे से चलती आई है। कॉन्ग्रेस की दिक्कत ये है कि उन्होंने वंश से हटके कुछ किया नहीं। सभा में पीएम मोदी ने लता मंगेशकर के भाई द्वारा वीर सावरकर पर कविता पढ़े जाने पर उन्हें जॉब से हटाने वाली घटना का भी जिक्र किया।