Home Blog Page 2990

‘कोरिया में लड़ाई से भारत में बढ़ जाती है महँगाई’: PM मोदी ने याद दिलाया नेहरू का बयान तो लोगों ने लिए मजे, कहा – धो दिया

सोशल मीडिया पर देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को लेकर कई ट्वीट्स किए जा रहे हैं। दरअसल, यूजर्स उनके (नेहरू) महँगाई को लेकर दिए गए एक पुराने बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कोई कह रहा है, मोदी जी ने आज संसद में नेहरू से लेकर राहुल गाँधी को चमचों समेत धोया है। बस एक कसक रह गई कि मोदी जी काश एक बार ‘एडविना चाची’ का भी जिक्र कर देते। वहीं एक अन्य ने कहा कि जब आज़ादी के लिए देश लड़ रहा था लड़ाई, तब नेहरू कुछ और में लगे थे।

शिवेंद्र पांडेनाम के यूजर ने लिखा, “आज तो नेहरू ही नेहरू, मजा लीजिये आप। धो दिया।”

वहीं राहुल पराशर ने लिखा, “देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने लालकिले से कहा था, ‘कभी-कभी कोरिया में लड़ाई हमें प्रभावित करती है। इसके कारण वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती है। यह हमारे नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं।’ देश के सामने प्रधानमंत्री हाथ खड़ा कर देते हैं। लोकसभा में पीएम मोदी।”

ओपी शेखावत नाम के यूजर ने लिखा, “आज नेहरू का नाम ले ले कर मोदी जी ने कॉन्ग्रेसियों की जो धुलाई की वे समझ ही नहीं पाए कि मोदी जी के नाम से नेहरू जी का नाम सुनकर खुश हों कि मातम मनाएँ।”

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने सोमवार (7 फरवरी 2022) को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण को लेकर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए अपने भाषण में महँगाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की नीतियाँ ऐसी थीं कि सरकार खुद मानने लगी थी कि महँगाई उसके नियंत्रण के बाहर है, जबकि मौजूदा कोरोना महामारी के बावजूद अब महँगाई 5.2 फीसदी रही है, उसमें भी खाद्य मुद्रास्फीति 3 फीसदी से कम है।

उन्होंने इस दौरान पीएम ने कहा, “वैसे महँगाई पर कॉन्ग्रेस के राज में पंडित नेहरू ने लाल किले से क्या कहा, वो जरा आपको मैं बताना चाहता हूँ। आपकी शिकायत रहती है कि मैं नेहरू जी पर नहीं बोलता हूँ, लेकिन आज आपकी इच्छा के अनुसार नेहरू जी पर ही बोलूँगा..मजा लीजिए आज। आपके नेता कहेंगे कि मजा आ गया।”

पीएम के मुताबिक, नेहरू जी ने कहा था, “कभी-कभी कोरिया में लड़ाई भी हमें प्रभावित करती है। इसके चलते वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं और यह हमारे नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं। अगर अमेरिका में भी कुछ हो जाता है तो इसका असर भी वस्तुओं की कीमत पर पड़ता है।  मतलब देश के सामने पहले प्रधानमंत्री महँगाई को लेकर अपने हाथ ऊपर कर देते हैं।”

जालसाज सुकेश चंद्रशेखर तिहाड़ में भी रिश्वत देने से नहीं आ रहा बाज, भेजा गया दूसरी जगह: जेल के 3 अधिकारियों के खिलाफ जाँच के आदेश

दिल्ली के तिहाड़ जेल के तीन अधिकारियों के खिलाफ महाठग सुकेश चंद्रशेखर (Sukesh Chandrashekhar) से रिश्वत लेने के आरोपों की जाँच के आदेश दिए गए हैं। तिहाड़ में सुख-सुविधा पाने के लिए जालसाज ने जेल के अधिकारियों और कर्मियों को रिश्वत देने का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, सुकेश चंद्रशेखर ने एक कैदी के भाई के बैंक खाते में 1.25 लाख रुपए डलवाए, जहाँ से जेल के अधिकारियों को पैसे पहुँचाए गए। हालाँकि, मामले का खुलासा होते ही सुकेश चंद्रशेखर की जेल को बदल दिया और दो जेल अधीक्षक और एक वार्डर को पुलिस लाइन में भेज दिया गया है।

बता दें कि सुकेश चंद्रशेखर 200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग केस सहित कई मामलों का सामना कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पूरा मामला तिहाड़ में रिश्वतखोरी से जुड़ा है। सुकेश चंद्रशेखर ने तमाम सतर्कता के बाद भी जेल संख्या 4 में तैनात कर्मियों को विशेष सुविधाओं के लिए करीब सवा लाख रुपए की रिश्वत दी। जिस जेल अधिकारी को रिश्वत दिया जाना था, उसके पास रिश्वत पहुँचाने के लिए उसने जेल के एक कैदी की मदद ली। इस कैदी के भाई के खाते में सुकेश ने करीब सवा लाख रुपए जमा करवा दिए। इस शख्स ने बाद में यह रकम जेल अधिकारी तक पहुँचा भी दिया।

लेकिन, जब यह मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया, जब जेल अधिकारी सहित तीन जेलकर्मियों को लाइन में भेज दिया गया। फिलहाल सभी मुख्यालय से संबद्ध रहेंगे। जेल महानिदेशक संदीप गोयल ने कहा, “हमें सूचना मिली थी कि कैदी सुकेश चंद्रशेखर ने जेल नंबर 4 के एक कर्मचारी को रिश्वत देने की कोशिश की थी, जहाँ वह बंद था. उसने कथित तौर पर एक अधिकारी को 1.25 लाख रुपए भिजवाए।”

उन्होंने कहा, “हम जाँच करवा रहे हैं और वहीं तीनों आरोपित अधिकारियों का तबादला कर दिया है। सुकेश को भी दूसरी जेल में स्थानांतरित कर दिया गया है।” उन्होंने आगे बताया, “इनके खिलाफ विभागीय जाँच के नतीजों में यदि दोष सिद्ध होता है तो सभी को बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।”

गौरतलब है कि इससे पहले जनवरी में, दिल्ली पुलिस ने फोर्टिस हेल्थकेयर कार्यकर्ता से लगभग 200 करोड़ रुपए की जबरन वसूली में कैदी और कॉनमैन सुकेश चंद्रशेखर की मदद करने के आरोप में जेल स्टाफ के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया था। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने जेल प्रशासन से इसे अनुमति देने के लिए कहा था। भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत रोहिणी जेल के 82 अधिकारियों व कर्मचारियों की जाँच के लिए दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने तिहाड़ जेल से अनुमति माँगी थी।

बता दें कि जालसाज सुकेश द्वारा जेलकर्मियों को रिश्वत देने के मामले पहले भी आते रहे हैं। बार-बार इस तरह के मामले सामने आने के बाद ही करीब डेढ़ साल से उसे एक जेल में अधिक दिनों तक नहीं रखा जाता है। उसका जेल समय समय पर बदला जाता है। लेकिन अब जेल बदले जाने की प्रशासन की नीति भी कारगर साबित नहीं हो रही है।

CM चन्नी के भतीजे को बालू खनन और तबादलों के लिए मिले ₹10 करोड़: ED का खुलासा, जालंधर से दबोचा गया था

पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) के गिरफ्तार भतीजे भूपिंदर सिंह उर्फ हनी (Bhupinder Singh Honey) ने सोमवार (7 फरवरी 2022) को अपने सभी अपराध कबूल कर लिए। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आज एक बयान जारी कर बताया कि सीमावर्ती राज्य में बालू खनन से जुड़ी गतिविधियों, अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले में मदद करने के बदले 10 करोड़ रुपए नकद प्राप्त होने की बात भूपिंदर सिंह ने कबूल कर ली है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी ने कहा कि हनी को कुछ दस्तावेजों के साथ तीन फरवरी को एजेंसी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी किया गया था। हनी उपस्थित हुआ और अपना बयान दिया, जिसमें उसने स्वीकार किया कि वह खनन संबंधी गतिविधियों में शामिल है, लेकिन दोष साबित करने वाला डाटा सामने रखे जाने पर वह टालमटोल करने लगा। ईडी ने आगे कहा कि पंजाब में मलिकपुर के अलावा, बुर्जहल दास, बरसल, लालेवाल, मंडला और खोसा में भी खनन किया गया है।

केंद्रीय जाँच एजेंसी ने पंजाब में अवैध बालू खनन में मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में भूपिन्दर सिंह हनी को 3 फरवरी को जालंधर में गिरफ्तार किया था। वह मंगलवार यानी 8 फरवरी तक ईडी की हिरासत में रहेगा।

बता दें कि जाँच एजेंसी ने 18 जनवरी को हनी और अन्य के खिलाफ छापेमारी की कार्रवाई की थी। इस दौरान हनी के ठिकाने से लगभग 10 करोड़ रुपए नगद बरामद किए थे। तलाशी के दौरान कुदरतदीप सिंह, भूपिंदर सिंह (हनी) के पिता संतोख सिंह और संदीप कुमार के बयान दर्ज किए हैं और यह सिद्ध हुआ कि जब्त 10 करोड़ रुपए भूपिंदर सिंह हनी के हैं।

‘जब भैया (अखिलेश यादव) आएँगे तो तेरा क्या होगा’: एक डरे हुए मुस्लिम से मिलिए, जय श्रीराम पर कट्टरपंथी कह रहे- सु@र, ह#म का बच्चा…

‘डरा हुआ मुस्लिम’ नैरेटिव वाली कई खबरें आपने पढ़ी होंगी। लेकिन डरा हुआ मुस्लिम असल में कैसा होता है? वह किससे डरा होता है? यह जानना है तो अहसान राव (Ahsan Rao) से मिलिए। देवबंद (Deoband) में रहने वाले इस युवा के अनुसार उसे सु@र, कुत्ता, ह#म का बच्चा… जैसी गालियाँ दी जा रही है। पूछा जा रहा- 10 मार्च के बाद तेरा क्या होगा? 10 मार्च को जब योगी मठ में जाएँगे और भैया (अखिलेश यादव) आएँगे तो तेरा क्या होगा?

उल्लेखनीय है कि 10 मार्च 2022 को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आने हैं। उत्तर प्रदेश (UP Election 2022) में 11 जिलों की 58 सीटों पर पहले चरण में 10 फरवरी को वोट डाले जाएँगे। इन सीटों में सहारनपुर जिले की देवबंद सीट भी शामिल है। करीब साढ़े तीन लाख मतदाताओं वाले इस सीट पर सवा लाख तक मुस्लिम वोटर बताए जाते हैं।

अहसान राव को धमकी देने वाले कौन

अहसान राव के अनुसार उन्हें अपनी गली-गाँव से लेकर विदेश तक से धमकी मिल रही है। घर से निकलना हो या सोशल मीडिया पर पोस्ट करना, अहसान को गाली ही मिल रही। वजह, उन्होंने दिसंबर 2021 में सहारनपुर की एक रैली में ‘जय श्रीराम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए थे। इस रैली को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबोधित किया था।

अहसान ने ऑपइंडिया को बताया, “नारे लगाने का वीडियो वायरल होने के बाद मेरे पास फोन आने शुरू हो गए। पाकिस्तान से कॉल आए। दुबई से कॉल आए। कतर से कॉल आए। कहने लगे आप वसीम रिजवी बन जाइए या माफी माँग लीजिए। किस बात की माफी माँग लूँ।” वे आगे बताते हैं, “मेरे गाँव में भी कुछ लोगों ने विरोध करना शुरू किया। अब मुझे सुरक्षा मिल गई है। फिर भी घर से निकलते ही लोग कहने लगते हैं- ये वही है सु@र, कुत्ता, ह#म का बच्चा… जिसने जय श्रीराम के नारे लगाए।” यह पूछे जाने पर कि गाली देने वाले लोग कौन हैं, “अहसान कहते हैं, हमारे समाज के ही लोग हैं। जहाँ भी मैं जाता हूँ, वे गाली धमकी देते हैं। सब लोग इस इंतजार में हैं कि भैया (अखिलेश यादव) आएँगे, सरकार बदलेगी तो बदला लेंगे। मेरे पिता को, घरवालों को, रिश्तेदारों को, सबको बरगलाने का काम कर रहे। जिस मुल्क में रहता हूँ, उसका जय जयकार करना कौन सा गुनाह है?”

दो तरह के मुस्लिम: एक कलाम को मानने वाले, दूसरे कसाब को

उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “मैंने भी दारूल उलूम से इस्लाम और कुरान शरीफ की पढ़ाई की है। इन लोगों ने पता नहीं कौन सा इस्लाम पढ़ा है। इस्लाम कहता है कि आप जिस मुल्क में रहते हैं, उससे मुहब्बत करें। उसके लिए जान कुर्बान होने पर जन्नत मिलती है। आज दो तरह के मुस्लिम हैं। एक कलाम को फॉलो करने वाले मेरे जैसे लोग। दूसरे कसाब को मानने वाले लोग। कलाम साहब ने देश को बुलंदियों पर पहुँचाया। उन पर सभी हिन्दुस्तानी गर्व करते हैं। लेकिन कुछ लोग कसाब पर भी खुश होते हैं। यही लोग हमारे सीडीएस की मौत पर मजाक उड़ा रहे थे। यही लोग अहसान का विरोध करते हैं। मैं कहता हूँ हम जिस देश में रहते हैं, हमें उस देश की वफादारी करनी चाहिए। यही इस्लाम कहता है। मैं अपने देश के लिए जान कुर्बान करने को तैयार हूँ।”

देवबंद के ही उलेमा मुफ़्ती असद कासमी ने अहसान को इस्लाम से खारिज करने की धमकी दी थी। इसके बारे में पूछे जाने पर वे कहते हैं, “क्या मुुफ्ती साहब ने उन पर भी कभी कोई फतवा लगाया जो ‘जय भीम’ बोलते हैं। केवल अहसान पर ही सारा इस्लाम जाग रहा।” अहसान ने बताया कि धमकी मिलने के बाद से स्थानीय प्रशासन और भाजपा नेताओं का उन्हें सहयोग मिल रहा है। देवबंद से बीजेपी उम्मीदवार और निवर्तमान विधायक बृजेश सिंह ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से धमकी देने वाले लोगों को चेताया था। इसी तरह का आश्वासन अन्य दलों, दारूल उलूम अथवा यहॉं मुस्लिमों के बीच खासा प्रभाव रखने वाले मदनी परिवार से मिलने से अहसान इनकार करते हैं। उनका दावा है, “मदनी साहब कभी किसी मैटर में खुद सामने नहीं आते। उनके जैसे और भी बहुत सारे लोग हैं जो खुलकर सामने नहीं आ रहे। लेकिन अपने लोगों को बरगलाकर, भड़काकर काम करवाते हैं। ओवैसी को दारूल उलूम आने की इजाजत नहीं दी गई। लेकिन मदनी साहब के भतीजे ओवैसी की पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं। उस पार्टी से एहसान या कोई और मुसलमान लड़ता को उसका विरोध होता। जब उनके परिवार का लड़का लड़ रहा है तो सही है, जायज है। इस्लाम में कहाँ लिखा है कि दूसरे पर फतवा जारी हो सकता है, आप पर नहीं हो सकता है।”

जब तक हूँ जय श्रीराम कहता रहूँगा

अहसान का कहना है कि उनका विरोध कर रहे लोग वे हैं जो अफ्रीका होते हुए पाकिस्तान जाते हैं। जिन्हें विदेशों से पैसा मिलता है। जो 70 साल से कॉन्ग्रेस के तलवे चाट रहे हैं। उसके इशारे पर काम करते हैं। वे कहते हैं, “यदि ऐसा नहीं होता तो बसपा में रहने वाले मुस्लिम का जय भीम कहना ठीक, आएलडी के मुस्लिम नेता का चौधरी चरण सिंह की जयंती और पुण्यतिथि मनाना ठीक और बीजेपी-संघ से जुड़े मुस्लिमों का जय श्रीराम कहने पर विरोध क्यों होता?” वे बताते हैं, “जो मुस्लिम पढ़ा-लिखा है, युवा है, अपने राष्ट्र के प्रति जागरूक है, आज भाजपा के साथ है।” यह पूछे जाने पर कि जिस तरह से धमकी दी जा रही है, नाते-रिश्तेदारों ने जैसे उनसे दूरी बना ली है, क्या उन्हें ये नारे लगाने पर अफसोस है, अहसान जवाब देते हैं, “मुझे ऐसा कोई भी अफसोस नहीं है। मैं जब तक रहूँगा जय श्रीराम और भारत माता की जय-जयकार करता रहूँगा।”

साथ में राहुल पांडेय

‘यह भारत है, लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि देते शाहरुख और उनकी बीवी गौरी खान’: सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर की सच्चाई

बॉलीवुड की दिग्गज गायिका लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar Funeral) के अंतिम संस्कार की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं। इनमें से एक फोटो शाहरुख खान (Shahrukh Khan) की भी है, जिसमें उनके साथ सफेद सूट पहने एक महिला खड़ी हुई नजर आ रही है। इस फोटो में जहाँ अभिनेता लता जी के लिए दुआ माँग रहे हैं, वहीं वह महिला उनके लिए प्रार्थना करती हुई नजर आ रही है। फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर लोग इस फोटो को ज्यादा से ज्यादा शेयर कर रहे हैं और फोटो में दिखाई दे रही महिला को शाहरुख की बीवी गौरी खान (Gauri Khan) कह रहे हैं।

ट्विटर पर एक यूजर ने लिखा, “यह भारत है, जहाँ लता मंगेशकर के अंतिम संस्कार में SRK और उनकी पत्नी गौरी खान उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।”

एक और यूजर ने लिखा, “दुआ और प्रार्थना एक साथ। सोशल मीडिया पर आज की सबसे खूबसूरत तस्वीर।”

एक अन्य यूजर ने शाहरुख खान और गौरी खान को टैग करते हुए लिखा, “यह मेरा भारत है।”

कौन है लता मंगेशकर के अंतिम संस्कार में शाहरुख़ खान के साथ दिख रही महिला

आपको बता दें कि लता मंगेशकर के अंतिम संस्कार में रविवार को अभिनेता शाहरुख खान अपनी मैनेजर पूजा ददलानी (Pooja Dadlani) के साथ मुंबई के शिवाजी पार्क पहुँचे थे। इस दौरान जहाँ पूजा ने हाथ जोड़कर लता जी के लिए प्रार्थना की, वहीं शाहरुख ने हाथ उठा कर दुआ करते हुए लता जी को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। दरअसल, पूजा कई सालों से शाहरुख के साथ काम कर रही हैं। हाल ही में उन्हें गौरी खान, फराह खान, सीमा खान, नीलम कोठारी, महीप कपूर के साथ लंच करते हुए देखा गया था। इसके अलावा वह आर्यन खान ड्रग्स मामले के दौरान भी चर्चा में रही थीं।

बता दें कि इससे पहले बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख़ खान पर आरोप लगा है कि उन्होंने लता मंगेशकर की अंत्येष्टि के दौरान थूक कर ‘सुर सम्राज्ञी’ को श्रद्धांजलि दी। इस घटना का वीडियो तेज़ी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके आधार पर लोग ये आरोप लगा रहे हैं। वे दावा कर रहे हैं कि वीडियो में शाहरुख खान अपना मास्क उठाकर लता जी पर थूक रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या ये इस्लाम के हिसाब से अंतिम दर्शन की प्रक्रिया है या फिर उन्होंने जानबूझ कर ऐसा किया?

‘कश्मीर की स्वतंत्रता के लिए खड़ा है Pizza-Hut’: मुर्गी बेचने वाले KFC के बाद पिज्जा हट का बहिष्कार शुरू, Hyundai, Kia भी झेल रहे बायकॉट

पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय ऑउटलेट राजनीतिक प्रोपेगेंडा के टूल बने हुए हैं। इसी कड़ी में अब एक और नाम आया है पिज्जा हट का, जिसने ‘Hyundai’, ‘Kia’, KFC के बाद भारत विरोधी पाकिस्तानी नैरेटिव को आगे बढ़ाया है। अभी हुंडई, ‘Kia’, KFC मामला शांत भी नहीं हुआ था कि पिज्जा हट के ‘कश्मीर की आजादी के समर्थन’ का पोस्ट सामने आने बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। लोग सोशल मीडिया पर इस अंतरराष्ट्रीय ऑउटलेट पर भड़के हुए हैं जो पाकिस्तान में भारत विरोधी एजेंडा चला रहा है।

पिज्जा हट पाकिस्तान ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किया, “कश्मीर सॉलिडेरिटी डे पर हम सभी कश्मीरी भाई-बहनों की स्वतंत्रता के लिए साथ खड़े हैं।”

ऐसे में लोग भी इन कंपनियों के मुखर विरोध में उतर आए हैं। एक ट्वीटर यूजर गुज्जु गिरी ने ट्वीट कर कहा, “कंपनियों से व्यापार करने की अपेक्षा की जाती है, राजनीति में नहीं उलझने की। लेकिन अगर वे ऐसा करते हैं, तो अब समय आ गया है कि नागरिक भी उन्हें उनका स्थान दिखाएँ।”

वहीं आज KFC का भी भारत विरोधी पोस्ट सामने आया। अपने पाकिस्तानी फेसबुक पेज से 5 फरवरी कश्मीर डे पर एक तस्वीर शेयर किया जिसपर लिखा था, “कश्मीर कश्मीरियों का है!”

साथ ही पाकिस्तान से KFC ने कश्मीरियों को सम्बोधित करते हुए लिखा, “आपने हमारे इस विचार को कभी नहीं छोड़ा और हम आशा करते हैं कि आने वाले वर्ष आपके लिए शांति लाए!”

हालाँकि यह पहली बार नहीं पिछले साल भी KFC ने ऐसे ही भारत विरोधी एजेंडा चलाया था। तब रिलीज पोस्टर पर लिखा है, “कश्मीर सॉलिडेरिटी डे पर हम आपके साथ खड़े हैं, आपको यह एहसास दिलाने के लिए स्वतंत्रता आपका अधिकार है।”

KFC पाकिस्तान की इन हरकतों पर उसे ट्विटर सही सोशल मीडिया पर लताड़ा जा रहा है। लोग भारत विरोधी एजेंडा चलाने वाले इन कंपनियों का भारत में बहिष्कार की अपील कर रहे हैं।

बता दें कि इससे पहले ‘Kia’ के पाकिस्तानी ट्विटर हैंडल ने लिखा, “हम सब कश्मीर की आज़ादी के लिए एक होकर खड़े हैं।” कंपनी ने इसके साथ ही ‘5 फरवरी’ और ‘कश्मीर दिवस’ का हैशटैग भी लगाया। पाकिस्तान भारत विरोधी प्रोपेगंडा के लिए 5 फरवरी को ‘कश्मीर डे’ मनाता है।

इन कंपनियों का भारत विरोधी एजेंडा देखकर लोग भड़के हुए हैं। लोगों ने कहा कि पाकिस्तान से कई गुना अधिक कारें भारत में बिकती हैं, लेकिन इसके बावजूद ‘Kia’ कश्मीर पर पाकिस्तानी झूठ फैलाने में लगा हुआ है। ‘Kia’ से लोगों ने सवाल किया कि क्या उसने अब आतंकवादियों को फंडिंग करनी भी शुरू कर दी है? उस ट्वीट के साथ तस्वीर में पाकिस्तान का झंडा भी लगाया गया था। हालाँकि, विवाद होने के बाद ‘Kia’ के उस पाकिस्तानी हैंडल ने अपने ट्वीट को डिलीट कर दिया है। लेकिन, इसके लिए लोग माफ़ी की माँग कर रहे हैं।

वहीं हुंडई पाकिस्तान (Hyundai Pakistan) ने भी एक ट्वीट किया था जहाँ से इस विवाद की शुरुआत हुई। इस ट्वीट को लेकर भारत की ऑटोमोबाइल कंपनी हुंडई इंडिया (Hyundai Motor India) अब सवालों के घेरे में है। रविवार (6 फरवरी 2022) दोपहर से ही ट्विटर पर हैशटैग #BoycottHyundai के साथ ट्रेंड कर रही है। बता दें कि हुंडई पाकिस्तान ने शनिवार (5 फरवरी 2022) को ट्वीट किया था, “आइए हम अपने कश्मीरी भाइयों के बलिदान को याद करें और उनके समर्थन में खड़े हों, क्योंकि वे आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।”

हालाँकि, अब सोशल मीडिया के विस्तार के साथ ऐसे प्रोपेगेंडा आसानी से लोगों की पकड़ में आ रहा है और लोग मुखर होकर इन कंपनियों के विरोध के साथ ही भारत में इनके सामानों का विरोध के साथ ही, बहिष्कार की अपील भी कर रहे हैं।

निहंगों ने टोलकर्मियों पर तलवार से बोला हमला, 2 कर्मचारी घायल: टोल माँगने पर भड़क गए थे, कहा था – हम धार्मिक यात्रा पर जा रहे

उत्तराखंड में निहंगों ने टोल कर्मियों पर तलवार से हमला बोल दिया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। दो टोलकर्मी घायल हुए हैं। ये घटना उधम सिंह नगर की है। 4 निहंग युवक कार में सवार होकर किच्छा से तरफ से जा रहे थे।जब टोलकर्मियों ने उनसे टोल माँगा तो वो भड़क गए। आरोप है कि उन्हें थाने को हवाले किए जाने के बावजूद पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया है। ये पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हो गई है। ये घटना सोमवार (7 फरवरी, 2022) की है।

सुबह के समय ये युवक किच्छा से रुद्रपुर की तरफ जा रहे थे। सुबह के पौने 8 बजे वो चुटकी देवरिया स्थित ‘राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)’ के टोल प्लाजा पर पहुँचे, जहाँ टोलकर्मी ने उनसे टोल माँगा। इतनी सी बात पर वो भड़क गए। उन्होंने कहा कि वो एक धार्मिक यात्रा पर जा रहे हैं और इसीलिए टोल नहीं दे सकते। उन्होंने ये भी दावा किया कि पूरे भारत में कहीं भी उन्हें टोल नहीं देना होता है। कर्मचारी ने बताया कि वो उनलोगों में शामिल नहीं हैं, जिन्हें टोल में छूट होती है।

उनसे टोल के रूप में तय धनराशि ही माँगी गई थी। इसके बाद निहंगों ने टोलकर्मियों के साथ बदतमीजी शुरू कर दी और गाली-गलौज भी किया। टोलकर्मियों ने जब उनसे कहा कि वो मैनेजर के कक्ष में जाकर अपनी बात रखें, तो इससे भी निहंगों ने इनकार कर दिया। इसके बाद 11 नंबर लेन के टोलकर्मी के ऊपर उन्होंने तलवार से हमला बोल दिया। कर्मचारी का कहना है कि वो छूट की श्रेणी में नहीं आते थे और यदि ऐसा है सीनियर से बात करें, बस इतनी सी बात पर वो भड़क गए।

निहंगों ने जबरदस्ती टोल के गेट खोलने के प्रयास किए। मना करने पर तलवार भाँजते हुए हमला कर दिया। जब अरुण कुमार नाम के कर्मचारी अपने सहकर्मी को बचाने आए तो उन पर भी हमला कर दिया गया। सीधा उनके गले को निशाना लगा कर वार किया गया, लेकिन उन्होंने बचाने के लिए हाथ बीच में किया और जख्मी हो गए। किच्छा के कोतवाल अजय कुमार सिंह ने जानकारी दी है कि ये निहंग अमृतसर से नानकमत्ता जा रहे थे। घायलों का मेडिकल करने के बाद आगे की कार्रवाई की जा रही है।

कश्मीर की तुलना फिलिस्तीन से करने पर रूस ने अपनी ही मीडिया को किया खारिज, कहा- ये भारत-पाकिस्तान का आपसी मामला

कश्मीर मामले पर ‘रूसी मीडिया’ के प्रोपगेंडे को रूस की पुतिन सरकार ने लताड़ लगाई है। कश्मीर के हालातों को फिलिस्तीन से जोड़ने वाली डॉक्यूमेंट्री की झलक दिखाते हुए रेडफिश डिजिटल मीडिया ने कुछ समय पहले एक ट्वीट किया था। इसी ट्वीट पर पुतिन सरकार की प्रतिक्रिया आई और उन्होंने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि कश्मीर पर होने वाली कोई भी बात भारत-पाकिस्तान का आपसी मसला है।

उल्लेखनीय है कि ट्विटर पर रेडफिश डिजिटल मीडिया को रूस का सरकारी मीडिया बताया गया है। रेडफिश ने खुद को तमाम अवार्ड जीतने वाले मीडिया के तौर पर ट्विटर पर पेश किया है। जानकारी के मुताबिक, इसी मीडिया ने पिछले दिनों एक डॉक्यूमेंट्री शेयर की थी जिसमें कश्मीर के हालातों की तुलना फिलिस्तीन से हो रखी थी। जब डॉक्यूमेंट्री देख लोगों ने इस पर आवाज उठाई और इसका विरोध हुआ तो रूसी दूतावास को इस मामले पर अपना बयान जारी करना पड़ा।

रूसी दूतावास ने एक बयान में साफ कहा, ”कश्मीर के मुद्दे और द्विपक्षीय विवादों में रूस के हस्तक्षेप नहीं करने के सिद्धांत को लेकर उसके आधिकारिक रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। कश्मीर मसले का समाधान सिर्फ भारत और पाकिस्तान के बीच ही हो सकता है और यह केवल 1972 के शिमला समझौते (Simla Agreement of 1972) और 1999 के लाहौर डिक्लेरेशन (Lahore Declaration of 1999) के तहत ही पूरा होगा।”

एबेंसी ने आगे अपने बयान में ये जानकारी भी दी कि रेडफिश का रूसी सरकारी मीडिया से लेना-देना नहीं है। चैनल ने भ्रामक लेबल अपने ट्विटर पर लगाया हुआ है। इस मीडिया को सरकार का समर्थन नहीं है। चैनल पूर्णत: स्वतंत्र है और ये अपनी संपादकीय नीतियों से चलता है। दूतावास के बयान में मामले की जटिलता व ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को देखते हुए मीडिया चैनल को संतुलित रहने की सलाह दी गई।

‘कोरोना काल में आपने यूपी-बिहार के श्रमिकों को मुंबई से वापस भेजा’: PM मोदी ने गिनाया इन राज्यों में दशकों से कॉन्ग्रेस सत्ता से दूर

संसद के बजट सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (7 फरवरी, 2022) को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान लोकसभा में सम्बोधन दिया। ‘सुर सम्राज्ञी’ लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि देने के साथ उन्होंने इस सम्बोधन की शुरुआत की और कहा कि देश ने आदरणीय लता दीदी को खो दिया है, इतने लंबे काल तक जिनकी आवाज ने देश को मोहित किया, देश को प्रेरित भी किया, देश को भावनाओं से भर दिया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के बाद विश्व एक नए वर्ल्ड आर्डर की तरफ नई व्यवस्थाओं की तरफ बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये एक ऐसा टर्निंग पॉइंट है कि हम लोगों को एक भारत के रूप में इस अवसर को गँवाना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि इस परिप्रेक्ष्य में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ अपने आप में एक प्रेरक अवसर है और उस प्रेरक अवसर और नए संकल्पों को लेकर देश जब आजादी के 100 साल मनाएगा, तब तक हम पूरे सामर्थ्य से, पूरी शक्ति से, पूरे संकल्प से देश को उच्चतम स्तर पर लेकर पहुँचेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि पहले गैस कनेक्शन स्टेटस सिंबल हुआ करता था, लेकिन अब गरीब से गरीब व्यक्ति तक इसकी पहुँच है और यह बहुत खुशी की बात है।

पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के इतने सालों के बाद गरीब के घर में रोशनी होती है, तो उसकी खुशियाँ देश की खुशियों को ताकत देती हैं। उन्होंने आगे कहा कि गरीब के घर में गैस का कनेक्शन हो, धुएँ वाले चूल्हे से मुक्ति हो तो उसका आनंद कुछ और ही होता है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य ये है कि आपमें से बहुत से लोग ऐसे हैं जिनका काँटा 2014 में अटका हुआ है और उससे वो बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। बकौल पीएम मोदी, उसका नतीजा भी आपको भुगतना पड़ा है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “देश की जनता आपको पहचान गई है, कुछ लोग पहले पहचान गए, कुछ लोग अब पहचान रहे हैं और कुछ लोग आने वाले समय में पहचानने वाले हैं। हम सब संस्कार से, व्यवहार से लोकतंत्र के लिए प्रतिबद्ध लोग हैं और आज से नहीं, सदियों से हैं। ये भी सही है कि आलोचना जीवंत लोकतंत्र का आभूषण है, लेकिन अंधविरोध लोकतंत्र का अनादर है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने कोरोना काल में सारी हदें पार दी। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे लॉकडाउन के दौरान जब लोगों को जो जहाँ हैं वहीं रहने के लिए कहा जा रहा है, मुंबई स्टेशन पर कॉन्ग्रेस पार्टी लोगों को डरा रही थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये भी याद दिलाया कि जो आज भी दिल्ली सरकार में हैं, उन्होंने आवासीय इलाके में माइक्रोफोन ले जाकर लोगों को घर छोड़ने के लिए कहा। उन्होंने पूछा कि कब तक ये राजनीति चलेगी? उन्होंने याद दिलाया कि नागालैंड के लोगों ने आखिरी बार 1998 में कॉन्ग्रेस के लिए वोट किया था, करीब 24 साल हो गए। ओडिशा ने 1995 में इस पार्टी के लिए लिए वोट किया था, सिर्फ 27 साल हुए उसे वहाँ एंट्री नहीं मिली। इसी तरह गोवा में 1994 में पूर्ण बहुमत के साथ कॉन्ग्रेस जीती थी, 28 साल से गोवा ने इस पार्टी को स्वीकार नहीं किया।

इसी तरह उन्होंने उदाहरण गिनाए कि पिछली बार 1988 में त्रिपुरा में वहाँ की जनता ने कॉन्ग्रेस को वोट दिया था, करीब 34 साल पहले। यूपी, गुजरात, बिहार ने आखिरी बार 1985 में कॉन्ग्रेस के लिए वोट किया था, करीब 37 साल पहले। पिछली बार पश्चिम बंगाल के लोगों ने करीब 50 साल पहले 1972 में आपको पसंद किया था। उन्होंने पूछा कि क्या ‘वोकल फॉर लोकल’ के जरिए महात्मा गाँधी के सपने को नहीं पूरा किया जा रहा है? प्रधानमंत्री ने इन पंक्तियों के सहारे अपनी बात रखी:

वो जब दिन को रात कहें, तो तुरंत मान जाओ।
नहीं मानोगे तो वो दिन में नकाब ओढ़ लेंगे।
जरूरत हुई तो हकीकत को थोड़ा बहुत मरोड़ लेंगे,
वो मगरूर हैं खुद की समझ पर बेइंतहा,
इन्हें आईना मत दिखाओ,
वो आईने को भी तोड़ देंगे।”

उन्होंने पूछा कि विपक्षी दल ‘वोकल फॉर लोकल’ का विरोध क्यों कर रहे हैं? उन्होंने याद दिलाया कि कैसे योग और ‘फिट इंडिया’ का भी विपक्ष ने मजाक बनाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि जहाँ समझ से अधिक समर्पण होता है, वहाँ अर्पण करने की ताकत होती है। पीएम मोदी ने कहा कि बीते 2 सालों में 100 साल का सबसे बड़ा वैश्विक महामारी का संकट पूरी दुनिया की मानव जाति झेल रही है और जिन्होंने भारत के अतीत के आधार पर ही भारत को समझने का प्रयास किया, उनको तो आशंका थी कि शायद भारत इतनी बड़ी लड़ाई नहीं लड़ पाएगा, खुद को बचा नहीं पाएगा।

उन्होंने कहा, “आज ‘मेड इन इंडिया’ कोविड वैक्सीन दुनिया में सबसे प्रभावी है। आज भारत शत-प्रतिशत पहली डोज के लक्ष्य के निकट पहुँच रहा है और लगभग 80% सेकंड डोज का पड़ाव भी पूरा कर लिया है। भारत सरकार ने ये सुनिश्चित किया कि 80 करोड़ नागरिकों को महामारी के दौरान मुफ्त में राशन उपलब्ध कराया गया और अब भी कराया जा रहा है। हमारी प्रतिबद्धता है कि कोई भारतीय भूखा न रहे। क्या आप नहीं चाहते कि देश आत्मनिर्भर बनें, जिस महात्मा गांधी के आदर्शों की बात करते हैं, तो इस अभियान (Vocal For Local) को ताकत देने में आपका क्या जाता था। गाँधी जी के स्वदेशी के निर्णय को आगे बढ़ाइए।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने याद दिलाया कि कैसे कॉन्ग्रेस पार्टी ने मुंबई में रह रहे श्रमिकों को डरा कर यूपी-बिहार भेजा। इसके लिए फ्री में टिकट तक दिया गया। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे इन मजदूरों को ‘महाराष्ट्र का बोझ’ बता कर वापस भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि सदन बात का साक्षी है कि कोरोना से जो स्थितियाँ उत्पन्न हुई, उससे निपटने के लिए भारत ने जो भी रणनीति बनाई उसको लेकर पहले दिन से क्या-क्या नहीं कहा गया है। उन्होंने ये भी याद किया कि दुनिया के और लोगों से बड़ी-बड़ी कॉन्फ्रेंस करके ऐसी बातें बुलवाई गई ताकि पूरे विश्व में भारत बदनाम हो।

उन्होंने कहा, “जिस रास्ते पर हम चले, आज विश्व के अर्थजगत के सभी ज्ञाता इस बात को मानते हैं कि भारत ने जिस आर्थिक नीतियों को लेकर इस कोरोना काल में अपने आप को आगे बढ़ाया है, वो अपने आप में दुनिया के लिए एक उदाहरण है। इतने वर्षों तक देश पर राज करने वाले और महल जैसे घरों में रहने के आदी लोग, छोटे किसान के कल्याण की बात करना भूल गए हैं। भारत की प्रगति के लिए छोटे किसान को सशक्त बनाना जरूरी है। छोटा किसान ही भारत की तरक्की को मजबूत करेगा।”

‘HC के आदेश तक हिजाब नहीं हटाएँगे’: मुस्लिम छात्राओं की हठ पर कर्नाटक के शिक्षा मंत्री की दो टूक- छात्राएँ कोई और विकल्प तलाशने के लिए आजाद

कर्नाटक के उडुपी जिले में कुंडापुरा के सरकारी पीयू कॉलेज में हिजाब पहनकर क्लास में बैठने का मामला तूल पकड़ने के बाद कॉलेज प्रशासन ने मुस्लिम लड़कियों को एक अलग कमरे में बैठने की अनुमति दी है। लेकिन उन्हें क्लास में एंट्री तभी मिलेगी, जब वह हिजाब उतारकर कॉलेज के नियम के अनुसार यूनिफॉर्म में क्लास अटेंड करेंगी। समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) के मुताबिक, लंच के लिए हिजाब पहनकर कॉलेज परिसर से बाहर आते हुए एक छात्रा ने कहा, “हाईकोर्ट के आदेश तक हम अपना हिजाब नहीं हटाएँगे। वे (प्रशासन) हमें हिजाब पहनकर क्लास में नहीं बैठने देंगे, इसलिए हम बाहर हॉल में बैठेंगे। हमारी क्लास नहीं चल रही हैं, इसलिए हम यहाँ सिर्फ बैठे हुए हैं।”

वहीं, कॉलेज की एक अन्य छात्रा का कहना है, “कॉलेज के प्रिंसिपल और फैकल्टी हमसे मिले और पूछा कि क्या हम हिजाब हटाकर क्लास में जाना चाहते हैं। उन्होंने हमारी अटेंडेंस भी ली।”

इस बीच कर्नाटक के शिक्षा मंत्री बीसी नागेश (BC Nagesh) ने हिजाब विवाद (Karnataka Hijab Row) पर कहा, “जो भी छात्रा यूनिफॉर्म ड्रेस कोड (Uniform Dress Code) का पालन करने की इच्छुक नहीं हैं, वो कोई और विकल्प तलाशने के लिए आजाद हैं।” राज्य के शिक्षा मंत्री ने मीडियाकर्मियों से आगे कहा कि जैसे सेना में नियमों का अनुपालन किया जाता है, उसी प्रकार शैक्षणिक संस्थानों में भी किया जाना चाहिए। छात्राओं को क्लास में बैठने के लिए ड्रेस कोड का पालन करना होगा। हमारी छात्राओं से अपील की है कि वो सियासी दलों के लिए ‘टूल’ न बनें।

दरअसल, कर्नाटक सरकार ने 5 फरवरी को प्रदेश भर के शैक्षणिक संस्थानों में शांति, सद्भाव और कानून व्यवस्था को बिगाड़ने वाले कपड़ों पर प्रतिबंध लगाने को लेकर एक सर्कुलर जारी किया था। राज्य के शिक्षा मंत्री बीसी नागेश (BC Nagesh) ने इसको लेकर कहा था कि सरकार ने इस मामले पर स्पष्टीकरण की जरूरत महसूस की और एक सर्कुलर जारी किया। उन्होंने साथ ही यह भी साफ किया कि छात्राएँ हिजाब पहनकर स्कूल आ सकती हैं, लेकिन स्कूल या कॉलेज कैंपस के अंदर उन्हें इसे अपने बैग में रखना होगा।

वहीं, कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र (Karnataka Home Minister Araga Gyanendra) ने एएनआई से कहा, “कॉलेज परिसर में हिजाब और भगवा स्कार्फ पहनकर आने की अनुमति नहीं है। राज्य सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि सभी छात्रों को कॉलेज प्रशासन द्वारा निर्धारित की गई ड्रेस कोड का पालन करना होगा। हमारे लिए सभी समान और भारत माता की संतान हैं।”

गौरतलब है कि कर्नाटक के उडुपी में हिजाब विवाद के बाद से पीयू कॉलेज लगातार चर्चा में बना हुआ है। रविवार को यहाँ से पुलिस ने दो संदिग्धों को भी गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान रज्जाब और हाजी अब्दुल मजीद के रूप में हुई थी। पुलिस ने इन दोनों के पास के हथियार भी बरामद किए थे। वहीं तीन अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।

बता दें कि कर्नाटक के उडुपी के स्कूल से शुरू हुआ हिजाब विवाद पूरे कर्नाटक में फैल गया है। 3 फरवरी की सुबह कर्नाटक के उडुपी जिले के कुंडापुर के भंडारकर कॉलेज में हिजाब पहनी 20 से अधिक छात्राओं को कॉलेज में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। पीयू कॉलेज का यह मामला सबसे पहले 2 जनवरी 2022 को सामने आया था, जब 6 मुस्लिम छात्राएँ क्लासरूम के भीतर हिजाब पहनने पर अड़ गई थीं।

भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, ये बुर्का के लिए हो रहा है।