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सऊदी और UAE में बैन होगी राना अयूब की एंट्री? 2022 में हज का था देख रही थीं सपना, अब अरब वाले कह रहे – ‘काबा तुम्हारा नहीं है’

भारतीय कट्टरपंथी इस्लामी पत्रकार राना अयूब अब सऊदी अरब का भी कोपभाजन बन रही हैं। उन्होंने यमन के हूती विद्रोहियों का समर्थन करते हुए सऊदी अरब और UAE को खून बहाने वाला कह दिया, जिसके बाद वहाँ के लोग उन्हें आतंकियों का हितैषी और उनसे भी ज्यादा खतरनाक बता रहे हैं। अब कुछ मीडिया संस्थान सूत्रों के हवाले से दावा कर रहे हैं कि राना अयूब की एंट्री पर सऊदी अरब और UAE प्रतिबंध लगा सकता है, जिससे उनके हज करने का सपना अधूरा ही रह जाएगा।

‘OSINT Updates’ नाम के ट्विटर हैंडल ने लिखा, “बड़ी खबर! UAE अपने मुल्क में राना अयूब की एंट्री को प्रतिबंधित करने पर विचार कर रहा है।” इसके अलावा ‘Megh Updates’ नाम के ट्विटर हैंडल ने भी सूत्रों के हवाले से ये खबर चलाई। लोगों ने पूछा कि क्या अब राना अयूब ‘किसी के बाप का सऊदी थोड़ी है?’ वाले पोस्टर्स लेकर निकलेंगी? कइयों ने उन्हें समझाया कि भारत के लोग रोज उनका प्रोपेगंडा बर्दाश्त करते हैं, लेकिन एक ट्वीट पर सऊदी अरब वालों ने उन्हें दिखा दिया।

राना अयूब ने 10 दिसंबर, 2021 को इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर कर के लिखा था कि उनके दिमाग में यही चल रहा है कि 2022 में उन्हें हज करना है। उन्होंने ‘इंशाअल्लाह’ लिखते हुए दिल वाली दो इमोजी भी लगाई थी। उन्होंने लिखा था, “साल 2021 अब लगभग ख़त्म हो गया है। मेरे पास कृतज्ञ होने के लिए काफी कुछ है। अब मेरा नए साल का रिजोल्यूशन यही है। अल्लाह मुझे और दूसरों को भी इस सपने को पूरा करने में मदद करे।” साथ ही उन्होंने कृतज्ञता, स्वप्न और शुक्र का हैशटैग भी लगाया था।

बता दें कि अब सऊदी अरब और भारत के लोग मिल कर उन पर निशाना साध रहे हैं। मेजर (रिटायर्ड) माणिक एम जॉली ने लिखा, “राणा अयूब ने एक कूटनीतिक मुद्दे में टाँग अड़ाया, जिस समस्या की उन्हें समझ नहीं थी। ISI ने उनका इस्तेमाल ईरान-पाकिस्तान-तुर्की के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया, ताकि वो सऊदी अरब-अमेरिका और आंशिक रूप से इजरायल पर भी निशाना साध सकें। ये रोजमर्रा के घृणा फैलाने से कहीं अधिक बढ़ कर है। ये एक बड़ा लीग हैं।” सऊदी वाले कह रहे कि मुस्लिम होने की वजह से काबा राना अयूब का नहीं हो जाता।

‘जूही चावला पर लगे जुर्माने को ₹20 लाख से ₹2 लाख कर देंगे’: दिल्ली हाईकोर्ट का प्रस्ताव, 5G के खिलाफ चला रही हैं मुहिम

5जी नेटवर्किंग के खिलाफ अभिनेत्री जूही चावला समेत अन्य याचिका पर एकल पीठ द्वारा लगाए गए 20 लाख रुपए के जुर्माना का भुगतान नहीं करने पर आज सुनवाई हो रही है। हाल ही में इसकी वसूली के लिए दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएसएलएसए) ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। वहीं अभिनेत्री जूही चावला ने भी सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। जिसमें जुर्माने की रकम को चुनौती दी गई थी।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने जूही चावला की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद से कहा, “हम ऐसा करने का प्रस्ताव कर रहे हैं, हम जुर्माना कम कर देंगे। लेकिन हम इसे पूरी तरह से माफ नहीं करेंगे। हम इसे 2 लाख रुपए कर देंगे। लेकिन उसके साथ कुछ शर्तें भी होंगी।”

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चूँकि आपके मुवक्किल एक सेलिब्रिटी हैं और सार्वजनिक रूप से उनकी उपस्थिति है, ऐसे में उन्हें सार्वजनिक कार्य भी करना चाहिए। ऐसे में उनके पद का उपयोग समाज में किसी सार्वजनिक कार्य के लिए भी किया जा सकता है।

कोर्ट का कहना है कि एक कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है जिसमें डीएसएलएसए जूही चावला से संपर्क कर उनकी उपस्थिति का प्रमोशन के तौर पर जनहित में उपयोग कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि उक्त कार्यक्रम में उनको अपनी उपस्थिति या प्रमोशन में सहयोग करना होगा।

वहीं जूही चावला के वकील सलमान खुर्शीद ने इस मामले में निर्देश लेने के लिए समय माँगा, उनका कहना है, “मैं निर्देश माँगूगा और उनसे कहूँगा कि यह उनके लिए जीवन भर का एक अवसर होगा।” वहीं कोर्ट को सलमान खुर्शीद ने बताया कि जूही चावला को इस तरह से हिस्सा होकर ख़ुशी होगी। इस मामले में अब अगली सुनवाई गुरुवार को होगी।

बता दें कि शुक्रवार (21 जनवरी, 2022) को 5 जी मामले पर न्यायमूर्ति अमित बंसल की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान जूही चावला की तरफ से पेश अधिवक्ता ने मामले की सुनवाई टालने का अनुरोध किया। उन्होंने दलील दिया था कि एकल पीठ के आदेश की अपील याचिका अन्य पीठ के समक्ष लंबित है, जिस पर 25 जनवरी को विचार किया जाएगा। आज उसी पर सुनवाई हो रही थी।

गौरतलब है कि जूही चावला ने 5जी तकनीक को लेकर यह कहते हुए कोर्ट में याचिका दायर की थी, कि 5 जी तकनीक आने से इंसान से लेकर पशु-पक्षियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इस मामले में सिंगल बेंच ने अभिनेत्री की याचिका को खारिज करते हुए उन पर जून
2021 में 20 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। वहीं दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने इस फैसले को अमलीजामा पहनाए जाने या उचित कार्यवाई करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछली सुनवाई में डीएसएलएसए की ओर से पेश हुए वकील सौरभ कंसल ने कहा था कि जुर्माना लगाने का आदेश जून में पारित किया गया था और इस फैसले के मुताबिक जूही चावला और अन्य प्रतिवादियों के लिए डीएसएलएसए को सात दिनों के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया गया था लेकिन इसका अभी भी पालन किया जाना बाकी है। उन्होंने दावा किया था कि डीएसएलएसए द्वारा वसूली के लिए नोटिस भेजे जाने के बाद ही आदेश के खिलाफ अपील दायर की गई थी और खंडपीठ द्वारा कोई रोक नहीं लगाई गई थी।

अदालत ने फिलहाल इस निष्पादन याचिका (Execution Petition) पर सुनवाई टालते हुए कहा था कि आइए देखते हैं कि खंडपीठ के समक्ष क्या होता है। वहीं, जूही चावला और अन्य प्रतिवादियों की ओर से पेश वकील दीपक खोसला ने कहा था कि एकल न्यायाधीश (सिंगल बेंच) को जुर्माना लगाने का अधिकार नहीं है।

वहीं वकील सौरभ कंसल और पल्लवी एस कंसल के माध्यम से दायर निष्पादन याचिका में डीएसएलएसए ने जुर्माना रकम की वसूली के लिए चल और अचल संपत्तियों की कुर्की और बिक्री के वारंट जारी करने या जूही चावला और अन्य को दीवानी कारावास के निर्देश देने के लिए अदालत से सहायता माँगी थी।

बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट में बॉलीवुड अभिनेत्री जूही चावला की 5जी टेक्नोलॉजी को चुनौती देने वाली याचिका पर 2 जून 2021 को वर्चुअल सुनवाई की थी। इस दौरान एक व्यक्ति अभिनेत्री की फिल्म का गाना गुनगुनाने लगा। इससे डिस्टर्बेंस की वजह से जज को सुनवाई बीच में ही रोकनी पड़ी थी।

हिन्दू लड़कियों की साड़ी उठा कर…, मुस्लिम मर्दों के साथ… – Reddit ग्रुप में सैकड़ों फोटो और गंदी बातें, क्यों शांत है मीडिया-प्रशासन?

सोशल मीडिया पर तस्वीरों को फोटोशॉप करके दुरुपयोग करने की खबरें लगातार आती रहती हैं। हालिया मामले में अंकिता नाम की एक महिला ने उनकी तस्वीरों को एडिट करके पोस्ट करने का आरोप लगाया है। अंकिता भाजपा कार्यकर्ता हैं। उन्होंने रेडिट ग्रुप ‘I_AM_Bengaalan’ के एक पोस्ट के स्क्रीनशॉट के साथ एक ट्वीट किया। जिसमें उनकी तस्वीर का दुरुपयोग किया गया है। 

उन्होंने रविवार (24 जनवरी 2022) को ट्वीट करते हुए लिखा, “सोशल मीडिया पर मेरी तस्वीर का दुरुपयोग किया जा रहा है। मुझे डर लग रहा है। जिसका पोस्टिंग प्रूफ रेडिट पर मिला। राधा शेख नाम के एक शख्स ने मेरी तस्वीर को एडिट किया और फिर घटिया कमेंट्स के साथ पोस्ट किया। मैं इस मामले को देखने के लिए एनसीडब्ल्यू, रेखा शर्मा, कोलकाता पुलिस से अनुरोध करती हूँ।”

अंकिता की पोस्ट का स्क्रीनशॉट (साभार: Twitter)

तस्वीर पोस्ट करने वाले यूजर ने ट्विटर पर स्क्रीनशॉट वायरल होने के बाद पोस्ट और उसकी प्रोफाइल को डिलीट कर दिया।

ऑपइंडिया ने फिर उस समूह की तहकीकात की, जिसमें अपमानजनक तस्वीर पोस्ट की गई थी। इसमें ग्रुप के बारे में लिखा गया है, “मैं बंगाली हिंदू लड़की हूँ जो मुस्लिम बीबीसी पर आकर्षित हुई है।” समूह अत्यधिक आपत्तिजनक पोस्ट और हिंदू महिलाओं की बेतरतीब ढंग से चुनी गई तस्वीरों से भरा पड़ा है।

रेडिट पर समूह का स्क्रीनशॉट (साभार: Reddit)

एक पोस्ट में, सोशल मीडिया अकाउंट से ली गई एक तस्वीर को इस कैप्शन के साथ पोस्ट किया गया था, “तुम्हारी माँ के इस तरह से भीख माँगने के बाद सलीम काफी सही था…सिर्फ साड़ी ऊपर करके ही चो****उसने ब्लाउज और ब्रा फाड़ दिया बीच में से ताकि शर्मा जी के रिकॉर्डिंग में तेरी माँ टॉपलेस और 18 साल के मुस्लिम लड़के साथ fuc*** वायरल बनी।” 

साभार: Reddit (प्राइवेसी बनाए रखने के लिए ऑपइंडिया द्वारा एडिट की गई तस्वीर)

एक अन्य पोस्ट भी एक हिंदू लड़की की तस्वीर की तरह लग रही थी जिसे शायद किसी सोशल मीडिया अकाउंट से लिया गया था। कैप्शन में लिखा है, “कमेंट में बताओ सोनिया की माँ को अब्दुल कहाँ ले गया है और अभी तक वो वापस क्यों नहीं आई?”

साभार: Reddit (प्राइवेसी बनाए रखने के लिए ऑपइंडिया द्वारा एडिट की गई तस्वीर)

समूह के यूजर्स ने मॉडल और अभिनेत्रियों की तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया। एक अन्य पोस्ट के कैप्शन में लिखा था, “आपकी बहन को लगा कि वह धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया से गुजर रही है, लेकिन वह वसीम से बहुत प्यार करती थी और कुछ भी करने के लिए तैयार थी… वह उस लड़के को नहीं जानती, जिसके बारे में वह सोचती है कि मौलाना है, वह सिर्फ एक दलाल है और वह उसके वेश्यालय की हरंदी (Hrandi) की माँग में सबसे नई है। वसीम पहले ही दूसरी लड़कियों के पास जा चुका है।”

साभार: Reddit

सबसे चौंकाने वाली पोस्ट में, एक महिला की नग्न तस्वीर को कैप्शन के साथ पोस्ट किया गया था, “बहन ने आखिरकार अपना असली रंग दिखाया।” तस्वीर पर लिखा है, “मुझे आतिफ बताओ, आप किसके कमरे में रात बिताना चाहेंगे।”

साभार: Reddit

एक अन्य पोस्ट में कैप्शन में लिखा है, “मेरी माँ ‘मुस्लिम स्टड्स’ को दिखाना चाहती हैं कि वह कितनी मजहबी हैं। कभी-कभी जब वह उस मंदिर में जाती है तो घर बहुत देर से आती है। शायद, मुझे लगता है कि ‘मुस्लिम स्टड्स’ को प्रज्वलित करने के लिए कुछ अतिरिक्त पूजा कर रही हैं।”

साभार: Reddit

ग्रुप में #hslut4mstud या “Hindu sl*t for Muslim stud” हैशटेग का इस्तेमाल किया गया है।

समूह में एक चैट का एक सेक्शन (साभार: Reddit)

ऑपइंडिया ने पहले बताया था कि रेडिट एक मंच के रूप में नीच और कट्टर प्रचार के साथ-साथ जिहाद को आगे बढ़ाने के लिए भी काम कर रहा है। रेडिट पर सांप्रदायिक तनाव और कलह पैदा करने के इरादे से अश्लील सामग्री नियमित रूप से साझा की जाती है। अश्लील तस्वीरें अक्सर ‘हिंदू महिलाओं को मुस्लिम पुरुषों की लालसा’ दिखाती हैं।

कई, ऐसे कई पोस्ट ट्विटर पर भी एक ही हैशटैग के साथ पोस्ट किए गए हैं, जिसमें मुस्लिम पुरुषों द्वारा हिंदू महिलाओं का यौन शोषण किया जाता है।

पीड़ित द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से मदद के लिए पहुँचने के बावजूद अब तक अधिकारियों ने उपरोक्त उत्पीड़न में हस्तक्षेप नहीं किया है। हालाँकि, इस सम्बन्ध में पुलिस-प्रशासन वैसी सक्रियता नहीं दिखा रहा है, जैसी उसने ‘बुल्ली बाई’ या ‘सुल्ली डील्स’ जैसे मामलों में दिखाया था। इससे पहले भी हिन्दू महिलाओं के अश्लील चित्रण की बातें सामने आई थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। न तो मीडिया इसे उठाता है और न ही तथाकथित एक्टिविस्ट्स इस पर आवाज़ उठाते हैं।

‘मुफ्त का लालच देने वाले दलों का रजिस्ट्रेशन रद्द हो, चुनाव चिह्न वापस लिए जाएँ’: केंद्र और चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (25 जनवरी, 2022) को राजनीतिक दलों द्वारा मतदाताओं को रिझाने के लिए सरकारी कोष का दुरुपयोग करने पर केंद्र और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। दरअसल, शीर्ष न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर उन राजनीतिक दलों का पंजीकरण रद्द करने और उनके चुनाव चिन्ह जब्त करने की माँग की गई है, जो मतदाताओं को मुफ्त में सुविधाएँ देने के वादे कर रहे हैं।

अगले महीने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा और पंजाब में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा। ऐसे में कई राजनीतिक दल सरकारी कोष से अतार्किक मुफ्त ‘उपहारों’ का मतदाताओं को लालच दे रहे हैं। इस दलों में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) और समाजवादी (SP) पार्टी शीर्ष पर हैं। आम आदमी पार्टी ने गोवा और पंजाब के आम वोटरों को बिजली व अन्य सुविधाएँ मुफ्त में देने का वादा किया है। वहीं, किसानों की कर्जमाफी को वे चुनावों में बड़ा मुद्दा बना रहा हैं।

गोवा में दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने कई चुनावी घोषणाएं की थीं। अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि अगर गोवा में हमारी सरकार बनती है तो यहाँ की सभी महिलाओं के लिए गृह आधार योजना के तहत 1500 रुपए से बढ़ाकर 2500 रुपए प्रति माह किया जाएगा। 18 वर्ष से अधिक उम्र की प्रत्येक महिला को 1000 रुपए प्रति माह दिए जाएँगे। इसके अलावा केजरीवाल ने कहा था कि गोवा में हमारी सरकार बनी तो दिल्ली की तरह यहाँके लोगों को भी बिजली मुफ्त में देंगे। युवाओं को रोजगार देंगे और जब तक उन्हें रोजगार नहीं मिलता, तब तक बेरोजगारी भत्ता देंगे।

इसी तरह अरविंद केजरीवाल के पद चिन्हों पर चलते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूपी चुनाव ((UP Assembly Election 2022) से पहले बड़ा ऐलान करते हुए घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने का वादा किया था। इसके अलावा कहा था कि किसानों को सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त मिलेगी।

‘सेक्स सीन के समय ऑन कैमरा हुआ मेरा रेप’ : अमेरिकी अभिनेत्री ने 15 साल बाद फेमस सिंगर मर्लिन मैनसन पर लगाया आरोप

अमेरिकी अभिनेत्री इवान रशेल वुड (Evan Rachel Wood) ने संगीतकार मर्लिन मैनसन (Marilyn Manson) पर एक म्यूजिक वीडियो के दौरान रेप करने का आरोप लगाया है। फॉक्स न्यूज के अनुसार, अभिनेत्री ने ‘फोनिक्स राइजिंग’ नाम की डॉक्यूमेंट्री में कहा कि साल 2007 में रिलीज हुआ मर्लिन मैनसन ने अपने म्यूजिक वीडियो ‘हार्ट शेप्ड ग्लासेज’ में सेक्स सीन के दौरान सच में रेप किया था।

34 साल की वुड ने जानकारी दी कि कैमरा रोल हो रहे थे और सेक्स सीन के दौरान उन्होंने अभिनेत्री को वाकई पेनेट्रेट करना शुरू कर दिया था। वुड के मुताबिक उन्होंने इसके लिए कभी हामी नहीं भरी थी। अभिनेत्री के अनुसार उन्हें सेट पर नशीले पदार्थ का सेवन कराया गया जहाँ वह लोलिता आधारित किरदार में थीं। वह बताती हैं कि जब मर्लिन उन पर हावी हुए तब वो मुश्किल से इस स्थिति में थीं कि उन्हें रोक पाएँ।

उनके मुताबिक, वह कभी इतनी अनप्रोफेशन पहले नहीं हुई थीं। उस दिन पहली बार वो असुरक्षित महसूस कर रही थीं। कोई उनका ख्याल रखने वाला नहीं था। वुड ने बताया कि वो नहीं जानती थीं कि खुद को कैसे बचाएँ और मना करें। वह कहती हैं कि उन्हें हमेशा से यही सिखाया था कि वो कभी पलट कर जवाब न दें। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस घटना के समय क्रू बेहद असहज हो गया था और किसी को समझ नहीं आ रहा था क्या करें।

वुड कहती हैं कि इस घटना ने उन्हें बहुत घृणित महसूस कराया और उन्हें ऐसा लगा जैसे उन्होंने कुछ गलत किया है। वह बोलती हैं, “झूठ के बहाने मुझे एक कमर्शियल सेक्स कराया गया। ये पहला अपराध है जो मेरे साथ हुआ जब मेरा ऑन कैमरा रेप हुआ।”

बता दें कि वुड और मैनसन का रिश्ता 2007 में खुला था। उस समय मैनसन की उम्र 38 थी और अभिनेत्री सिर्फ 19 की थी। साल 2010 में इनका ब्रेकअप हुआ और 2021 में वुड ने इस बात को पब्लिकली बताया कि कैसे उसे रिश्ते में भ्रमित किया जाता था। इससे पहले उन्होंने अपने इंस्टा पर जानकारी साझा की थी मगर तब मैनसन का नाम नहीं लिया था। 

हालाँकि अब मर्लिन मैनसन उर्फ ब्रियान वॉर्नर का नाम उन्होंने खुलकर लिया है जबकि आरोपित मैनसन ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि उनके हर रिश्ते में संबंध मर्जी से बने। मालूम हो कि मर्लिन पर गेम्स ऑफ थ्रोन की एक्टर एस्मे बियानको ने भी यौन शोषण और शारीरिक हिंसा का आरोप मढ़ा था।

‘खून के बदले 1 किलो चिकन’: बाल ठाकरे की जयंती पर शिवसेना का ऑफर, CM उद्धव ने कहा – BJP के साथ बर्बाद कर दिए 25 साल

महाराष्ट्र में शिवसेना के संस्थापक रहे दिवंगत बाल ठाकरे की जयंती पर पार्टी की उल्हासनगर इकाई की ओर से एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में पार्टी की ओर से लोगों को रक्तदान के लिए आगे आने की प्रेरणा देने के लिए अजीब ऑफर भी दिया गया। यह ऑफर था– ‘खून दो और बदले में एक किलो चिकन ले जाओ।’

दरअसल, रविवार (23 जनवरी, 2022) को बाल ठाकरे की 96वीं जयंती थी। इस मौके पर उल्हासनगर इकाई ने यह शिविर आयोजित किया था। स्थानीय नगर निकाय में पार्टी के नेता धनंजय बोडारे ने बताया कि शिविर के दौरान 65 बोतल खून एकत्र किया गया। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने ब्लड बैंक के सहयोग से आयोजित शिविर में भाग लेने वाले प्रत्येक रक्तदाता को इस दौरान ऑफर के अनुरूप एक किलो चिकन भी दिया।

बाल ठाकरे की 96वीं जयंती पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनका अब भी मानना है कि शिवसेना ने भाजपा के साथ गठबंधन में 25 साल बर्बाद किए। उन्होंने शिवसैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा का हिंदुत्व सत्ता के लिए है। उन्होंने कहा कि शिवसेना ने भाजपा को छोड़ा है, हिंदुत्व को नहीं। उनका मानना है कि भाजपा का अवसरवादी हिंदुत्व सत्ता के लिए है। 

इसके बाद बीजेपी नेता राम कदम ने उद्धव ठाकरे को जवाब देते हुए कहा था, “हिंदुत्व पर लेक्चर देने से पहले ठाकरे को ये सोचना चाहिए कि क्या शिवसेना बाल ठाकरे की विचारधारा पर चल रही है? जिन्होंने कहा था कि वो निजी और राजनीतिक तौर पर कॉन्ग्रेस में शामिल नहीं हो सकते हैं, अगर ऐसी स्थिति बनती है तो वो अपने पार्टी दफ्तर पर ताला लगाना पसंद करेंगे।”

पिछले साल नासिक में भी आयोजित हुआ था रक्तदान शिविर

उल्लेखनीय है कि ऐसा ही ऑफर वाला एक रक्तदान शिविर बीते वर्ष 19 जून को शिवसेना के स्थापना दिवस के मौके पर नासिक में आयोजित किया गया था। यहाँ भी पार्टी की ओर से एक यूनिट ब्लड देने पर एक किलो चिकन या फिर पनीर मुफ्त ले जाने का ऑफर दिया गया था।

इस शिविर के आयोजन से पहले पार्टी की ओर से नासिक शहर में बाकायदा जगह-जगह पोस्टर तक लगाए गए थे। ये रक्तदान शिविर नासिक के सिरको औद्योगिक क्षेत्र में शिवसेना की स्थानीय पार्षद किरणताई के पति योगेश दराडे की ओर से आयोजित किया गया था। इसमें 75 यूनिट रक्त एकत्र हुआ था।

शादी के कारण बर्बाद हुआ विराट कोहली, वर्ल्ड कप में भारत को फिर हराएगा पाकिस्तान: शोएब अख्तर

पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने विराट कोहली के परफॉर्मेंस और उनकी शादी पर बयान दिया। अख्तर ने कहा कि कोहली ने जल्दी शादी कर ली है। शादी का दबाव ही है, जिसका असर उनके परफॉर्मेंस पर पड़ा है। अख्तर ने कहा कि कोहली को 120 शतक लगाने के बाद ही शादी करने का फैसला करना चाहिए था।

अख्तर ने कहा कि अब विराट कोहली के हाथ में बल्ला है। उनके पास मौके हैं। अब यहाँ से उसे तीनों में से किसी भी फॉर्मेट में ड्रॉप तो नहीं होना है। यह ना हो कि किसी शॉर्ट फॉर्मेट या लॉन्ग फॉर्मेट में ड्रॉप हो जाए। अब यह दबाव तो उन पर रहेगा। अब उन पर परफॉर्मेंस का प्रेशर रहेगा। उन्होंने कहा कि वह तो चाहते थे कि विराट कोहली 120 सेंचुरी लगाए।

उन्होंने कहा, “यदि आप हिंदुस्तान में स्टार हो तो… यदि मैं हिंदुस्तान में स्टार होता तो, मैं यहाँ फास्ट बॉलर होता तो मैं तो कभी भी शादी नहीं करता। मैं क्रिकेट पर फोकस करता और 400 विकेट लेता। मैं अपने जिम्मेदारियों को कभी भी नहीं बढ़ाता। यह मेरा निजी फैसला होता। हालाँकि, यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है।”

वहीं अख्तर ने आगामी टी20 विश्व कप 2022 में भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर दावा किया है कि एक बार फिर पाकिस्तान की टीम भारत को हरा देगी। शोएब अख्तर ने ANI से बात करते हुए कहा, “हम फिर से टीम इंडिया को मेलबर्न में हराएँगे। टी20 क्रिकेट में पाकिस्तान की टीम भारत की टीम से कहीं ज्यादा बेहतर है। भारतीय मीडिया ही है जो अपनी टीम पर बेवजह दबाव बनाती है। जब भी क्रिकेट में दोनों देशों की भिड़ंत होती है तो भारत का हारना स्वाभाविक है।” गौरतलब है कि भारतीय टीम विश्व कप (वनडे और टी20 को मिलाकर) के इतिहास में सिर्फ एक बार पाकिस्तान से हारा है और वो साल 2021 ही था। 

25 मस्जिदें, जहाँ था CAA विरोधी प्रदर्शन स्थल: उमर खालिद लेने गया था बेल, खुल गई उसके सेकुलर होने की पोल

सीएए-एनआरसी का विरोध दिल्ली में कुछ जगहों पर किया गया था? नहीं। कुछ मस्जिदों के पास किया गया था। मस्जिद ही क्यों? ताकि मुस्लिम समुदाय को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाया जा सके। PFI, जमात-ए-हिंद और स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया जैसे तत्वों को शामिल किया जा सके। यह सारी बात उमर खालिद की जमानत याचिका के दौरान अदालत में खुल कर सामने आई।

विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने अदालत को बताया कि सीएए-एनआरसी के नाम पर 25 विरोध स्थल स्थानीय मस्जिदों के करीब बनाए गए थे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि श्रीराम कॉलोनी में नूरानी मस्जिद को विरोध स्थल बनाया गया था। इसी तरह सदर बाजार का विरोध स्थल मूल रूप से शाही ईदगाह है। शास्त्री पार्क में विरोध स्थल वाहिद जामा मस्जिद था और गाँधी पार्क का विरोध स्थल वाकई में जमीला मस्जिद थी। अमित प्रसाद ने बताया कि उन लोगों ने गलत जानकारी साझा की और मुस्लिम समुदाय को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसाया। इसमें महिलाएँ और बच्चे भी थे। 

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि विरोध स्थलों के आयोजक 24X7 धरना-प्रदर्शन के लिए जमीनी तौर पर भीड़ बढ़ाने के लिए काम करना चाहते थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि विरोध के दौरान PFI, जमात-ए-हिंद और स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया सहित कई छिपे हुए तत्व शामिल थे। 

दिल्ली दंगों के मामले में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर खालिद की जमानत याचिका का अभियोजन पक्ष ने सोमवार (24 जनवरी 2022) को विरोध किया। साथ ही, नास्तिक और सेकुलर के रूप में उसकी जनता के बीच धारणा पर सवाल उठाया और जानना चाहा कि अगर ऐसा है तो फिर वह जेएनयू में एक विशेष समुदाय के समूह में क्यों शामिल हुए। 

विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने पूछा कि वह जेएनयू में मुस्लिम समूह में क्यों शामिल हुए? जबकि आप सार्वजनिक तौर पर खुद को कुछ और दिखाते हैं। कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत खालिद की जमानत अर्जी पर अभियोजन पक्ष की दलीलें सुन रहे थे। 

अमित प्रसाद ने तर्क दिया कि एक सार्वजनिक धारणा थी कि उमर खालिद एक नास्तिक है और जेएनयू में पढ़ रहा है। यह उसके सेक्युलर होने की पुष्टि करता है। प्रसाद ने कहा, “फिर आप एक मुस्लिम समूह (JNU के मुस्लिम छात्र) में क्यों शामिल हुए? आप सार्वजनिक तौर पर खुद को कुछ और बताते हैं।”

विशेष लोक अभियोजक ने दिल्ली दंगों के साथ सीएए-एनआरसी के विरोध की पृष्ठभूमि में हुई दंगों की कई घटनाओं के बीच समानताएँ भी बताईं। इसमें कहा गया, “दिसंबर 2019 के दंगों में शामिल लगभग हर व्यक्ति 2020 में सामने आया… 2019 और 2020 के बीच का अंतर सिर्फ जामिया और शाहीन बाग का है, जिसे जानबूझकर टाला गया और 2020 में इसी सही ठहराने के लिए महिलाओं को आगे कर इस्तेमाल किया गया।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों दिल्ली की एक अदालत ने माना था कि जेनएयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद और आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन ने पिछले साल की शुरुआत में राजधानी दिल्ली में हुई हिंसा की साजिश रची थी। कोर्ट ने एक बयान में कहा था कि शुरुआती सबूतों से ऐसा ही मालूम होता है। आरोप पत्र का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया जाँच निष्कर्षों के अनुसार, JNU के छात्र नेता रहे उमर खालिद और AAP के पार्षद रहे ताहिर हुसैन ने मिल कर नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों की साजिश रची थी – ये मानने के वाजिब आधार हैं। चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दिनेश कुमार ने ये बातें कही थीं।

अनुसूचित वर्ग के लिए रिजर्व सीट पर ओवैसी ने हिजाब वाली ‘ललिता कुमारी’ को बनाया प्रत्याशी, बोलीं- अल्लाह के करम से जीतेंगे

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर असदुनद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहालदुल (AIMIM) ने जब से अपने प्रत्याशियों की सूची जारी की है उसके बाद से ललिता कुमारी एक ऐसा नाम हैं जो हर जगह चर्चा का विषय बनी हुई हैं। पार्टी ने ललिता को नगीना सीट से टिकट दिया है। सब हैरान हैं कि नगीना सीट जहाँ पर दलितों के बराबर मुस्लिम हैं वहाँ ललिता कुमारी को क्यों उतारा गया। आइए आज इन्हीं ललिता के बारे में आपको जानकारी दें और बताएँ कि इन्हें टिकट दिए जाने के पीछे क्या राज है।

दरअसल, ललिता कुमारी के शौहर इफ्तिखार चौधरी AIMIM के समर्थक हैं और प्रदेश में ओवैसी के आने के बाद से उनके प्रचार प्रसार में जुटे हैं। ऐसे में सोचना जाहिर है कि चुनावी टिकट तो ओवैसी को इफ्तिकार को देनी चाहिए। लेकिन नहीं! ओवैसी ऐसा नहीं कर सके, इसके पीछे की वजह है चुनाव आयोग के नियम। चुनाव आयोग ने बिजनौर की सीट नगीना को अनुसूचित जाति वालों के लिए रिजर्व किया हुआ है। यही वजह है कि ओवैसी ने अपने पार्टी कार्यकर्ता को टिकट नहीं दिया बल्कि उनकी हिंदू नाम वाली पत्नी को टिकट दे दिया। ऐसा सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि ललिता शादी से पहले अनुसूचित जाति की थीं और अब वर्तमान में हिजाब पहनती हैं इस्लाम को फॉलो करती हैं।

यानी देखा जाए तो ओवैसी ने सीट पर ललिता को टिकट देकर एक तीर से दो निशाना साधने की कोशिश की है। उन्होंने एक मुस्लिम की बीवी को वोट देकर मुस्लिमों को तो अपने पक्ष में रखा है। साथ ही साथ चुनाव आयोग को भी ये दिखा दिया कि उन्होंने अनुसूचित जाति वाली महिला को टिकट दिया है।

बता दें कि AIMIM से टिकट मिलने से पहले ललिता कुमारी और उनके पति इफ्तिखार चौधरी ने एक वेब चैनल को दिए इंटरव्यू दिया था। इस साक्षात्कार में ललिता को कहते सुना गया था, “इंशाअल्लाह टिकट मिला तो मैं सभी वर्गों के विकास के लिए हमेशा आगे खड़ी रहूँगी।” जब उनसे पूछा गया कि जब कॉन्ग्रेस की प्रियंका गाँधी भी लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ के नारे के साथ मैदान में है फिर वो ओवैसी के साथ क्यों है। इस पर ललिता ने जवाब दिया- “ओवैसी काफी पढ़ी लिखे हैं, उनकी पार्टी पढ़े लिखे वालों की है, इसलिए साथ आई हूँ… यही पार्टी है जो सबको साथ लेकर चल सकती है। इंशाल्लाह ताला के करम से हमें हिंदू-मुस्लिम सबका साथ मिल रहा है।” 

गौरतलब है कि नगीना में मुसलमानों और दलितों की संख्या बराबर है। यहाँ मुस्लिम आबादी 65 हजार है। ऐसे में ओवैसी का यहाँ आना-जाना प्रत्याशी घोषित किए जाने से पहले से रहा है। कुछ दिन पहले ओवैसी ने इसी इलाके में राहुल गाँधी पर सवाल खड़ा कर कहा था- अच्छा हिंदू कौन है? तुम्हारे पिता जी जिनके रहते बाबरी मस्जिद का ताला तुड़वाया गया था। वहीं अब उनके पार्टी समर्थक और ललिता के शौहर जो कि पहले कॉन्ग्रेस में थे उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस छोड़ने का कारण है कि जनता उनसे सवाल करती थी कि जितने दंगे हुए हैं, जितने ताले खुलवाए गए हैं वो कन्ग्रेस ने ही तो किए हैं, उस समय उन पर जवाब नहीं होता था, इसलिए उन्होंने कॉन्ग्रेस को छोड़ aimim में जाने का फैसला किया।

‘कु!#या का बच्चा’ – अमेरिकी राष्ट्रपति से पत्रकार ने किया महंगाई पर सवाल, भड़क गए बायडेन, माइक पर दी गाली

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन की सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद से जगह-जगह आलोचना हो रही है। 24 जनवरी 2022 को एक प्रेस वार्ता में एक पत्रकार ने उनसे महंगाई पर क्या सवाल किया, बायडेन इतना भड़क गए कि उन्होंने उस पत्रकार को सबके सामने गाली दे डाली। अब बायडेन की यह वीडियो जगह-जगह वायरल है। लोगों का सवाल है कि क्या उनको मालूम नहीं था कि माइक चालू है या फिर उन्होंने जानबूझकर पत्रकार को सबके सामने गाली दी।

सामने आई जानकारी के मुताबिक, प्रेस कॉन्फ्रेंस में फॉक्स न्यूज के रिपोर्टर पीटर डूसी ने बायडेन से पूछा था कि देश में लगातार बढ़ रही महंगाई से मिड टर्म इलेक्शन में उनकी पार्टी को कितना नुकसान होगा। इस पर बायडेन ने कहा कि इससे नुकसान नहीं फायदा होगा और इसके बाद उन्होंने पत्रकार को धीरे से ‘Stupid son of bi%$’ यानी ‘कु!#या का बच्चा’ कहा। मगर, माइक ऑन होने के कारण ये चीज वहाँ बैठे सभी लोगों को सुनाई दी, जिसके कारण कमरे से निकलते हुए वहाँ मौजूद पत्रकार चिल्लाने लगे।

राष्ट्रपति की वीडियो वायरल होने के बाद पत्रकार डूसी फॉक्स न्यूज पर ही अपने अन्य साथी पत्रकारों से बात करते दिखे। उन्होंने बताया कि उन्होंने तो सवाल किया था लेकिन बाद शोर के कारण जो भी राष्ट्रपति ने कहा वो उन्हें सुनाई नहीं दिया। जब वह बाहर आए तब जाकर उन्हें किसी अन्य पत्रकार ने बताया, “तुमने सुना क्या उन्होंने तुम्हें सन ऑफ ^%% कहा।”

उल्लेखनीय है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकार के साथ हुई इस अभद्रता पर अभी व्हाइट हाउस से कुछ नहीं कहा गया है। बस अंदाजे लग रहे हैं कि शायद राष्ट्रपति बायडेन को मालूम नहीं था कि माइक ऑन है इसलिए उन्होंने धीमी आवाज में इसे कहा था। बता दें कि पत्रकारों से नाराज होना बायडेन के लिए कोई नई बात नहीं है। पिछले हफ्ते की ही बात है जब फॉक्स न्यूज की एक महिला पत्रकार ने यूक्रेन मामले पर उनसे सवाल किया था। पत्रकार ने पूछा था कि वह रूस के राष्ट्रपति के पहले कदम उठाने का इंतजार क्यों कर रहे हैं। इस पर बायडेन ने गुस्सा निकालते हुए कहा था कि ये बेहद बेवकूफों वाला सवाल है।