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मोहम्मद नाजिल ने नाबालिग हिंदू लड़की से किया रेप, फिर ब्लैकमेलिंग से धर्मांतरित कर किया निकाह: अब भाई से कराना चाहता है हलाला, लखनऊ में दर्ज हुई FIR

लखनऊ में एक महिला ने हसनगंज थाने में तहरीर देकर मोहम्मद नाजिल पर कई आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि नाजिल ने उसे हलाला के लिए मजबूर किया और उसकी तीन साल की बच्ची पर नशे की आदत डालने की कोशिश की।

पीड़िता के अनुसार, उसकी मुलाकात नाजिल से साल 2016 में हुई थी, जो धीरे-धीरे दोस्ती में बदल गई। एक दिन नाजिल ने उसे नशीला पदार्थ पिला कर फिर उसका रेप किया, उस वक्त वो नाबालिग थी।

इस दौरान आरोपित नाजिल ने पीड़िता का अश्लील वीडियो भी बना लिया और उसको ब्लैकमेल कर बार-बार उसका रेप करता और अलग से कमरा ले कर उसके साथ रहने लगा। इस दौरान जब पीड़िता ने उससे शादी के बारे में पूछा तो उसने इस्लाम कबूल करने को कहा।

ब्लैकमेलिंग से तंग आकर पीड़िता ने वर्ष 2020 में नाजिल से निकाह कर लिया और धर्म परिवर्तन कर अपना नाम बदल लिया। पीड़िता का आरोप है कि शादी के बाद उसकी जिंदगी नर्क बन गई। नाजिल उसे जबरन काम पर भेजता, नशे के लिए पैसे माँगता और इनकार करने पर बुरी तरह मारता-पीटता था।

आरोपित अपनी तीन साल की बच्ची को शराब और कोरेक्स पिला कर उसे नशे के सामान की आदत डाल रहा था। पीड़िता ने बताया कि उसने इस हरकत की वीडियो भी उसके पास मौजूद है। साथ ही बच्ची के साथ भी अश्लील हरकतें करता था।

महिला ने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में नाजिल ने उसके चरित्र पर सवाल उठाए और कहा कि अगर वह फिर से उसके साथ रहना चाहती है, तो पहले उसके भाई से हलाला करना होगा। यह माँग पीड़िता के लिए पूरी तरह असहनीय थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हसनगंज थाने की पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। ACP महानगर नेहा ने बताया कि महिला की तहरीर के आधार पर FIR दर्ज की जा रही है।

‘हिंदू लड़की के साथ क्यों बैठे हो’- सवाल पर फैजान को आया गुस्सा, 3 हिंदू युवकों को मार दिया चाकू: श्याम मोरे की हुई मौत, भोपाल की घटना

मध्य प्रदेश के भोपाल में 3 हिंदू लड़कों को फैजान बेग से सवाल पूछना इतना भारी पड़ कि एक की जान चली गई और 2 की जान पर बन आई है। पार्क में फैजान अपनी हिंदू प्रेमिका के साथ गले में हाथ डालकर बैठा था। इस दौरान श्याम मोरे समेत 3 हिंदू लड़कों ने उन्हें देखा तो पूछा कि वह हिंदू लड़की के साथ क्यों है।

इस पर फौजान ने तीनों पर चाकू से हमला कर दिया। हमले में श्याम की मौत हो गई। अन्य 2 लड़कों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, भोपाल के बरखेड़ा पठानी इलाके के अंबेडकर पार्क में 10 जुलाई 2025 को श्याम अपने दो दोस्तों के साथ गया था। यहाँ पर फैजान पहले से ही लड़की के साथ बैठा था। तीनों लड़के भी पास ही की बेंच पर बैठकर हँसी-ठिठोली कर रहे थे। इस बीच उनकी एक-दो बार फैजान और उसकी प्रेमिका पर भी नजर पड़ गई।

फैजान को लगा कि तीनों उसके बारे में ही बात कर रहे हैं। इसके बाद उसने श्याम को अपने पास बुलाया और सवाल जवाब करने लगा। इस बीच बहस बढ़ गई। श्याम ने फैजान से पूछा कि वह हिंदू लड़की के साथ क्यों है। उसने फैजान पर हिंदू लड़कियों को फँसाने और लव जिहाद का आरोप भी लगाया।

आरोपों को सुनने के बाद फैजान की प्रेमिका ने पहले श्याम को थप्पड़ मारा। उसी के तुरंत बाद फैजान ने चाकू निकाल कर श्याम पर हमला कर दिया। बीच-बचाव करने आए अन्य दोनों दोस्तों को भी घायल कर दिया। तीनों को अस्पताल लेकर जाया गया। गुरुवार (10 जुलाई 2025) की रात श्याम की मौत हो गई। अन्य दो गंभीर हालत में हैं।

एक घायल लड़के ने बताया कि वे तीनों जब पार्क में टहल रहे थे तो उन्होंने फैजान को लड़की के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। फैजान को लगा कि तीनों उसकी प्रेमिका पर हँस रहे हैं। इसके बाद वह बहस करने लगा। श्याम ने उस पर लव जिहाद ला आरोप लगाया तो वह भड़क गया। लड़की ने भी श्याम को मारा।

पूरे मामला पर फैजान ने अलग कहानी बताई है। उसका दावा है कि श्याम चाकू लेकर आया था और उस पर हमला किया। इसके बाद फैजान ने उससे चाकू छीनकर अपने बचाव में उस पर हमला कर दिया।

पुलिस ने फैजान को गिरफ्तार कर लिया है और इस पूरे मामले की जाँच कर रही है। जाँच में लड़की की भूमिका को भी शामिल किया गया है कियोंकि उसी ने पहले श्याम को थप्पड़ मारा था। हालाँकि पूरे मामले पर पुलिस लव जिहाद से मना कर रही है क्योंकि फैजान और हिंदू लड़की दोनों बालिग हैं।

कॉन्ग्रेसी नेता जलालुद्दीन ने दिव्यांग हिंदू की पत्नी को पार्टी ऑफिस में ले जाकर किया रेप, धर्मांतरण का डाला दबाव – घर भी कब्जाया: पहले से दर्ज हैं 1 दर्जन मामले, FIR के बाद गिरफ्तार

आगरा में कॉन्ग्रेस पार्टी के महानगर उपाध्यक्ष जलालुद्दीन को पुलिस ने गुरुवार (10 जुलाई 2025) को गिरफ्तार किया है। उस पर एक हिंदू महिला के साथ 3 साल तक रेप करने और जबरन धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगा है।

पीड़ित महिला ने जलालुद्दीन के खिलाफ रेप, धर्मांतरण और जानलेवा हमला करना के लिए शिकायत दर्ज करवाई है। आरोपित सगीर फातिमा गर्ल्स इंटर कॉलेज परिसर का रहने वाला है। इस समय वह ताजगंज के बगीची बिंदा भगत में रहता है।

पीड़िता ने 4 जुलाई 2025 को आगरा के शाहगंज थाने में शिकायत दर्ज करवाई। उसने अपने ऊपर हुए चाकू के हमले का वीडियो फुटेज भी दिखलाया है। शिकायत में महिला ने बताया कि पेशे से वकील जलालुद्दीन से उसकी मुलाकात 2019 में दीवानी कोर्ट में हुई थी। जान-पहचान बढ़ाकर मदद के बहाने वह महिला के घर आने लगा। महिला का पति दिव्यांग है।

2019 में ही सितंबर में जलालुद्दीन महिला को दवा दिलाने के लिए लेकर गया। इस दौरान वह उसे एमजी रोड स्थित कॉन्ग्रेस कार्यालय लेकर गया। वहाँ उसने महिला के साथ रेप किया। इसके बाद शिकायत करने पर बदनाम करने की धमकी दी और बार-बार उत्पीड़न किया।

यही नहीं, जलालुद्दीन ने महिला पर धर्म बदलने और निकाह करने का दबाव बनाने लगा। पीड़िता ने बताया कि उसकी माँ की मौत के बाद जलालुद्दीन ने उस घर पर कब्जा कर लिया। घर में रखे पूजा के सामान और देवी-देवताओं के सामान फेंक दिए। उसे नमाज अदा करने और रोजे रखने का दबाव बनाया।

नेता के डर से महिला मार्च में पति के साथ गुजरात के राजकोट चली गई। कॉन्ग्रेस नेता ने इसके बाद उस पर ताजगंज थाने में चोरी का मुकदमा लिखवा दिया। मुकदमे की जानकारी मिलने पर महिला वापस आगरा आई।

इसके बाद महिला ने पुलिस आयुक्त दीपक कुमार से अपनी कहानी बताई और शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने जलालुद्दीन के खिलाप जाँच शुरू की। उसे पुलिस ने गुरुवार को जीआईसी ग्राउंड के पास से गिरफ्तार किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने बताया कि जलालुद्दीन पर 1 दर्जन से भी अधिक मुकदमे पहले से ही दर्ज हैं। इनमें 2016 में बंधक बनाकर रेप करने के साथ 1989 में भी चोरी, बलवा, जानलेवा हमला, छेड़छाड़ और डकैती तक के मामले शामिल हैं।

जलालुद्दीन ने पीड़ित महिला के साथ का अपने निकाहनामा से जुड़े कागज भी वायरल किए हैं। पीड़िता ने इसे फर्जी बताया है। इस मामले में पुलिस ने अपनी जाँच तेज कर दी है। पीड़िता और उसके पति के का बयान कोर्ट में दर्ज करवाया जाएगा।

‘छांगुर’ रहे ना रहे चलना चाहिए धर्मांतरण का काम…क्या ‘शिजर-ए-तैयबा’ छपवाने का ये था मकसद: ATS रिपोर्ट में खुलासा- जलालुद्दीन कव्वाली सुनाकर करता था ब्रेनवॉश, खतने के लिए डॉक्टर भी तैयार थे

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में धर्मांतरण की बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ, जिसमें जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर मुख्य आरोपित है। जाँच एजेंसियों का मानना है कि यह एक बड़ा धर्मांतरण गैंग है। इसका मकसद हिंदुओं का ब्रेनवॉश करके उनका धर्म परिवर्तन करना और उनके नाम पर अवैध जमीन करना था।

ATS और ED छांगुर पीर के बताए ठिकानों पर लगातार छानबीन कर रही है। इसी कड़ी में ATS को ‘शिजर-ए-तैयबा’ नाम की किताब मिली है, जिसमें छांगुर पीर के सभी काले-चिट्ठे शामिल है। इस किताब में धर्मांतरण की पूरी थ्योरी बयान कर रही है।

‘शिजर-ए-तैयबा’ किताब मिली

न्यूज़18 की रिपोर्ट के अनुसार, यूपी ATS को छांगुर पीर के ठिकाने से एक अहम किताब मिली है। इस किताब का नाम ‘शिजर-ए-तैयबा’ है। ATS का मानना है कि यह किताब लव जिहाद और अवैध धर्मांतरण को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल की जा रही थी।

यह किताब खुद छांगुर पीर ने छपवाई थी। इस किताब का मकसद लोगों का ब्रेनवॉश करना था। किताब में ऐसे लोगों का जिक्र किया गया है, जो इस्लाम के लिए अपनी जान दे सकते हैं। किताब में यह भी बताया गया है कि कैसे युवाओं को इस्लाम की तरफ आकर्षित किया जाए। यह किताब विदेशी पैसों से छपी थी।

रिपोर्ट बताती है कि किताब सोशल नेटवर्किंग और धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए युवाओं तक पहुँचाई जाती थी, जिससे वे धीरे-धीरे कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित होते जाए। इस किताब को छपवाने का मकसद ये भी था, कि छांगुर पीर ने ना होने पर उसका गैंग इसके माध्यम से धर्मांतरण का काम जारी रखें।

‘किताब’ नहीं ‘हथियार’ है

पुलिस और ATS ‘शिजर-ए-तैयबा‘ नाम की किताब की गहराई से जाँच कर रही है। उनका मानना है कि यह कोई सामान्य धार्मिक किताब नहीं है। बल्कि, यह एक खतरनाक हथियार है।

इस किताब का इस्तेमाल लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण के लिए किया गया। ATS अब यह पता लगा रही है कि इस किताब की कितनी कॉपियाँ बनाई गईं। यह किताबें किन-किन लोगों तक पहुँचीं और कहाँ-कहाँ भेजी गईं।

जाँच एजेंसियों का मानना है कि यह एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। इसका मकसद सुनियोजित तरीके से लोगों का धर्मांतरण कराना और कट्टरपंथी सोच फैलाना था।

त्रिशुल और कव्वाली से किया जाता था धर्मांतरण

आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस और ED छांगुर पीर के साथियों के बैंक खातों की जाँच कर रही हैं। छांगुर पीर के 4 करीबी दोस्त पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) के जिलों में अवैध तरीके से लोगों का धर्म बदलवाते थे।

यह लोग मजार (दरगाह) जैसी जगहों पर त्रिशूल लगाते थे और कव्वाली गाते थे। ऐसा करने से ये लोगों को इस्लाम की तरफ आकर्षित करते थे और हिंदू धर्म की मान्यताओं को गलत बताते थे। उनका मकसद लोगों को लालच देकर धर्म बदलवाना था।

लड़कियों को ‘प्रोजेक्ट’ कहने का कोडवर्ड

जानकारी के अनुसार, जाँच में खुलासा हुआ कि जमालुद्दीन उर्फ छांगुर अपने साथियों से बात करने के लिए कोडवर्ड का इस्तेमाल करता था। वह गरीब, विधवा और प्रेमजाल में फँसी हिंदू लड़कियों को बहला-फुसलाकर निशाना बनाता था। इन लड़कियों को कोडवर्ड में ‘प्रोजेक्ट‘ कहा जाता था।

धर्मांतरण को ‘मिट्टी पलटना‘ और मानसिक रूप से प्रभावित करने या ब्रेनवॉश करने को ‘काजल करना‘ कहा जाता था। छांगुर पीर से मिलवाने के लिए ‘दर्शन‘ शब्द का इस्तेमाल होता था।

डॉक्टर्स करते खतना

आजतक की रिपोर्ट में एक पीड़िता ने खुलासा किया है कि छांगुर पीर के गैंग के 30-40 लोग अभी भी बाहर हैं। वे बरेली और आजमगढ़ में धर्मांतरण का नेटवर्क चला रहे हैं।

इस गैंग में कई प्रभावशाली लोग और डॉक्टर भी शामिल हैं। कुछ डॉक्टर हिंदुओं का धर्म बदलकर उनका खतना भी करते थे। पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस उनकी मदद नहीं कर रही है।

पीड़िता का खुलासा

बलरामपुर में छांगुर पीर नाम का एक व्यक्ति था। वह एक बड़ी दरगाह चलाता था। छांगुर पीर ने दावा किया था, “मैं इतना ताकतवर हूँ कि मुझे कोई छू नहीं सकता।”

जनजातीय महिला ने बयान दिया कि वह एक दिन महबूब की दुकान से कपड़े लेकर आई थी। कपड़े फटे थे और वह उन्हें बदलवाने के लिए दुकान गई। महिला को वहाँ से महबूब के घर जाने के लिए कहा गया।

महिला जब घर पहुँची तो उसे वहाँ छांगुर पीर, नीतू और महबूब था। महिला ने कपड़े वापस करवाने के लिए महबूब को बुलाने को कहा। नीतू उर्फ नसरीन ने महबूब को बुलाया और खुद छांगुर पीर के साथ नीचे चली गई।

महिला ने बताया कि महबूब और नदीम मुझे पकड़कर कमरे में ले गए और मेरे साथ रेप किया। इसकी शिकायत जब मैंने छांगुर पीर से कही तो उसने कहा ‘इसमें गलत क्या है?’

फिर छांगुर पीर ने कहा कि इस्लाम कबूल कर लो, यहाँ तुम्हें पैसा, आराम शोहरत सब कुछ मिलेगा। महिला ने छांगुर पीर की बात नहीं मानी। फिर छांगुर पीर ने कहा कि जाओ, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, ‘मैं इतना ताकतवर हूँ कि मुझे कोई छू नहीं सकता।’

पीड़ित महिला की पुकार जब स्थानीय पुलिस ने नहीं सुनी तो वे कुछ समय बाद लखनऊ गई, जिसके बाद मामला दर्ज किया गया। पीड़िता का कहना है कि इन्हें फाँसी हो जाए।

मामले में, यूपी ATS का कहना है कि छांगुर पीर धर्मांतरण का एक बड़ा रैकेट चला रहा था। यह रैकेट ₹100 करोड़ से ज़्यादा का है। इसे खाड़ी देशों से पैसा मिलता था।

यह रैकेट गरीब, दलित और विधवा हिंदू महिलाओं को निशाना बनाता था। वह लालच और धमकी देकर उनका धर्म बदलवाता था।

छांगुर पीर का धर्मांतरण मामला

बलरामपुर में एक बड़े अवैध धर्मांतरण नेटवर्क को चलाने वाला जमालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर (जिसे हाजी पीर जलालुद्दीन, पीर बाबा या हजरत बाबा भी कहा जाता है) पुलिस की गिरफ्त में हैं। छांगुर पीर पर हिंदू लड़कियों, गरीब और असहाय लोगों को बहला-फुसलाकर जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप है।

छांगुर पीर का नेटवर्क खाड़ी देशों से ₹100 करोड़ से अधिक की विदेशी फंडिंग प्राप्त करता था। इस फंडिंग से धर्मांतरण की गतिविधियों को अंजमा देता था। गैंग के पास 40 से अधिक बैंक खाते थे, जिनमें बड़े पैमाने पर लेनदेन होता था।

छांगुर पीर इन पैसों से लग्जरी गाड़ियाँ, बंगले और अन्य संपत्तियाँ खरीदता था। गैंग जाति के आधार पर धर्मांतरण के लिए पैसा देता था। गैंग में शामिल मुस्लिम युवक हिंदू पहचान बताकर युवतियों को प्रेमजाल में फँसाते और उनका ब्रेनवॉश कर धर्मांतरण करवाते।

छांगुर पीर के साथ नीतू रोहरा उर्फ नसरीन भी पुलिस की गिरफ्त में है। ATS ने बताया कि पूरा नेटवर्क भारत में फैला है। इस गैंग के 14 अन्य सदस्य फरार हैं, जिनकी तलाश में टीमें जुटी हुई हैं।

फिलहाल छांगुर पीर की अवैध ठिकानों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है और उसके खिलाफ ATS, पुलिस और ED समेत कई एजेंसियाँ जाँच कर रही हैं।

छांगुर पीर का मामला केवल धर्मांतरण का नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित आपराधिक गैंग का है। विदेशी फंडिंग और ‘शिजर-ए-तैयबा’ जैसी सामग्री का उपयोग करते हुए, यह रैकेट ‘लव जिहाद’ और लालच के माध्यम से कमजोर वर्गों (खासकर हिंदुओं) को निशाना बना रहा था। एटीएस और ईडी की लगातार कार्रवाई इस गहरी साजिश की परतों को खोल रही है।

नेपाल के रास्ते भारत में आतंकी भेजने में जुटा पाकिस्तान, हाफिज सईद और मसूद अजहर कर रहे तैयारी: नेपाली राष्ट्रपति के सलाहकार ने बताया-7 मुस्लिम बहुल इलाकों को बना सकते हैं लॉन्चिंग पैड

पाकिस्तान में मौजूद हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे आतंकी अब नेपाल के रास्ते भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं। हाफिज सईद का संगठन लश्कर ए तैयबा और मसूद अजहर का जैश के मोहम्मद पाकिस्तान-भारत की सीमा को पार करने के बजाए अब नेपाल के रास्ते भारत में आने की कोशिश कर सकता है। इस खतरे की जानकारी खुद नेपाल के राष्ट्रपति के सलाहकार ने दी है।

नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल के सलाहकार सुनील बहादुर थापा ने आतंकवाद को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। उन्होंने 9 जुलाई को काठमांडू में नेपाल इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल को ऑपरेशन एंड एंगेजमेंट की ओर से आयोजित सेमिनार में कही। सेमिनार ‘दक्षिण में आतंकवाद: क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए चुनौतियाँ’ विषय पर आयोजित की गई थी।

नेपाल से खुली सीमा का उठा सकता है फायदा

भारत और नेपाल के बीच 1751 किलोमीटर लंबी खुली सीमा रेखा है। यहाँ चौकसी काफी कम होती है। आतंकवादियों के लिए अपनी पहचान छिपा कर इससे आना दूसरी जगहों की तुलना में आसान है। जम्मू कश्मीर में आतंकियों की एंट्री पर कड़ा पहरा होने के बाद आतंकी दूसरे दरवाजे की तलाश कर रहे हैं इसलिए हाल के वर्षों में नेपाल में आतंकी गतिविधियाँ बढ़ गई हैं। नेपाल से भारत के बीच आने-जाने के लिए सड़क मार्ग आसान है। यहाँ वीजा नहीं लगता और हर दिन हजारों लोग सीमा पार करते हैं। नेपाली दस्तावेज बनाना यहाँ आसान है।

नेपाल में हिन्दू बहुसंख्यक हैं। इसके बाद बौद्ध का नंबर आता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यहाँ मुस्लिमों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है खास कर भारत-नेपाल से सटे तराई क्षेत्रों में। साल 2021 की जनगणना के मुताबिक मुस्लिम की जनसंख्या 4.27 फीसदी है। ये लोग सबसे ज्यादा 7 जिले में रहते हैं जो यूपी-बिहार से सटे हैं। इन जगहों में आईएसआई के स्लीपर सेल की मौजूदगी भी बताई जाती है। इनसे भारत-नेपाल सीमा की जानकारी लेने और आतंकियों के घुसपैठ के लिए किया जा सकता है।

आतंकवाद को खत्म करने के लिए सहयोग जरूरी

सुनील कुमार थापा ने भारत-नेपाल के मजबूत सहयोग की चर्चा की और खुफिया जानकारी शेयर करने, मनी लॉन्ड्रिंग पर एक्शन और सीमा की चौकसी बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खात्मे के लिए भारत के साथ सहयोग बढ़ाना होगा। सेमिनार में पाकिस्तान में आतंक को मिल रही पनाह को क्षेत्रीय देशों और सार्क के लिए बड़ी चुनौती बताया है।

ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ की नेपाल ने

उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ आतंकवाद पर एक मजबूत चोट था। इस ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तान स्थित 9 आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया। थापा ने याद दिलाया कि पहलगाम हमले में एक नेपाली भी आतंकवाद की भेंट चढ़ गया था। इससे पता चलता है कि आतंकवाद की जद में सिर्फ एक देश नहीं बल्कि कई देश हैं।

पहले भी नेपाल की जमीन का इस्तेमाल किया था आतंकियों ने

1999 में इंडियन एयरलाइंस का विमान आईसी-814 का अगवा किया गया था। ये विमान काठमांडू से दिल्ली आ रहा था। आतंकवादी काठमांडू एयरपोर्ट की सुरक्षा चूक का फायदा उठाते हुए फ्लाइट में चढ़ गए। आतंकियों के पास आधुनिक हथियार थे। इनलोगों ने विमान का अपहरण कर लिया था।

एअर इंडिया प्लेन क्रैश पर आई रिपोर्ट के साथ विदेशी मीडिया ने की छेड़छाड़, BBC-Reuters-डेली मेल सबने भ्रम फैलाया: हेडलाइन में डाला सब दोष पायलटों पर, बोइंग को दी क्लीन चिट

अहमदाबाद प्लेन क्रैश को लेकर एअर इंडिया की फ्लाइट-AI171 के प्लेन की AAIB (एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो) की रिपोर्ट सामने आ चुकी है। इसके बाद भी शनिवार (12 जुलाई 2025) को विदेशी मीडिया संस्थानों जैसे रॉयटर्स, बीबीसी, डेली मेल आदि ने इस रिपोर्ट को जानबूझकर गलत तरीके पेश किया।

इस रिपोर्ट में पायलटों की गलती को लेकर कोई बात नहीं कही गई है। फिर भी इन मीडिया संस्थानों ने पायलटों को ही को दोषी ठहराने की कोशिश की। इसके जरिए ये मीडिया संस्थान साफ तौर पर बोइंग कंपनी को बचाने की जुगत में लगे हैं। ये तब है जब बोइंग पर जेटलाइनर्स के खराब इंजन और मैनुफैक्चरिंग डिफेक्ट के लिए जाँच चल रही है।

भारत की विमान दुर्घटना जाँच एजेंसी (AAIB) ने अहमदाबाद में 12 जून 2025 को हुए एअर इंडिया फ्लाइट AI171 के हादसे पर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की है। इस दुर्घटना में प्लेन में सवार 241 लोगों समेत 260 लोगों की मौत हुई थी।

इनमें 19 लोग वे थे जो प्लेन में सवार भी नहीं थे बल्कि प्लेन जिस बिल्डिंग के ऊपर गिरा वहाँ पर थे। अहमदाबाद से लंदन जा रहा यह विमान बोइंग का 787-8 ड्रीमलाइनर था। उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद दोनों इंजन बंद हो गए और विमान एयरपोर्ट के पास घनी आबादी वाले इलाके में क्रैश हो गया।

AAIB की 15 पन्नों की रिपोर्ट में कई अहम तकनीकी जानकारियाँ शामिल की गई हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, उड़ान भरते समय विमान की गति 180 नॉट्स पर थी। उसी समय दोनों इंजन बंद हो गए। इंजन-1 और इंजन-2 के फ्यूल कटऑफ स्विच ‘RUN’ से ‘CUTOFF’ की स्थिति में एक सेकंड के अंदर पहुँच गए। इसके कारण फ्यूल की आपूर्ति बंद हो गई और दोनों इंजन फेल हो गए।

इसके बाद कुछ सेकेंड के लिए इंजन फिर से चालू हुए, लेकिन वे स्टेब्लाइज (स्थिर) नहीं रह सके। इसी के काण विमान ने उड़ान भरते ही ऊपर जाने के बजाय एयरपोर्ट की दीवार तक भी नहीं पहुँच पाया।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि प्लेन का Ram Air Turbine (RAT) पूरी बिजली बंद होने पर अपने आप सक्रिय हो जाता है, वह भी उड़ान भरते ही चालू हो गया था। इससे यह बात स्पष्ट है कि प्लेन ने पूरी तरह से बिजली और इंजन पावर खो दिया था।

AAIB ने मौके पर जाकर भी निरीक्षण, ड्रोन फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की प्रक्रिया पूरी की है। दोनों इंजनों को सुरक्षित जगह पर रखा गया है और जरूरी हिस्सों की जाँच की जा रही है। इस रिपोर्ट में किसी पक्षी के टकराने की आशंका को भी खारिज कर दिया गया है क्योंकि उस समय किसी भी पक्षी के आसपास उड़ने की एक्टिविटी नहीं पाई गई थी।

पश्चिमी मीडिया ने क्रैश के लिए पायलट को माना जिम्मेदार

रिपोर्ट में शामिल तथ्यों के बावजूद, कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान इस हादसे को पायलटों की गलती दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। पूरी जाँच के निष्कर्ष सामने आने से पहले ही इन संस्थानों ने रिपोर्ट के कुछ चुनिंदा हिस्सों को ही उठाया और कहा कि ये हादसा मानव त्रुटि के कारण हुआ।

इससे इस बात को लेकर चिंता सामने आई है कि पश्चिमी मीडिया बोइंग जैसी विमान बनाने वाली कंपनियों को बचाने की हरसंभव कोशिश कर रही है और इसके लिए हादसे में जान गँवाने वाले पायलटों को ही जिम्मेदार ठहरा रही है।

द गार्जियन ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया कि उड़ान भरते ही फ्यूल स्विच ‘CUTOFF’ स्थिति में चले गए, लेकिन ये नहीं बताया कि ऐसा किसने किया या क्यों हुआ।

बीबीसी ने बताया कि उड़ान भरते समय ही कॉकपिट के फ्यूल स्विच बंद कर दिए गए, जो केवल आपात स्थिति या लैंडिंग के बाद ही किए जाते हैं। इसके बाद कॉकपिट में असमंजस की स्थिति को लेकर आवाजें सुनाई पड़ी। इसमें एक पायलट दूसरे से पूछता है कि उसने फ्यूल क्यों बंद किया। यह विमान कैप्टन सुमित सभरवाल और को-पायलट क्लाइव कुंदर उड़ा रहे थे। रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि आवाज किस पायलट की थी।

डेली मेल ने भी अपनी रिपोर्ट में ये बताया कि वॉयस रिकॉर्डर में कैसे कॉकपिट में असमंजस की स्थिति को सुना गया, जिसमें पायलट एक दूसरे से फ्यूल बंद करने के लेकर सवाल कर रहे थे।

AAIB की रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया है कि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग से हादसे से ठीक पहले के पलों की महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से पूछता है, “तुमने कट ऑफ क्यों किया?” इस पर दूसरा पायलट जवाब देता है कि उसने ऐसा नहीं किया।

इसके बाद पायलट ने इंजन को फिर से चालू करने की कोशिश की और स्विच को वापस ‘RUN’ की स्थिति में ले गया। इंजन 1 दोबारा चालू होने की स्थिति में आया, लेकिन इंजन 2 में समस्या जस की तस रही।

इस बातचीत के बाद इस बात के लेकर चिंता जाहिर की गई कि हादसे से पहले के कुछ ही अहम सेकंड्स में या तो पायलटों के बीच गलतफहमी हुई या फिर कोई तकनीकी खराबी सामने आई, जिसके बाद दोनों इंजन बंद हो गए।

बोइंग के फ्यूल लॉक को लेकर FAA की एडवाइजरी

AAIB की रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू भी है जिसे कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने नजरअंदाज कर दिया है। वह है- FAA (फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन) की बोइंग विमानों में फ्यूल लॉक समस्या से संबंधित एडवाइजरी।

यह तकनीकी खामी बोइंग विमानों में पहले भी देखी गई है और इसे लेकर FAA ने चेतावनी जारी की थी। AAIB की रिपोर्ट में इस पहलू को शामिल किया गया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स ने इसे जानबूझकर नजरअंदाज कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स में यह दिखाया जा रहा है कि कॉकपिट में असमंजस की स्थिति बनी और प्लेन क्रैश पायलटों की गलती से हुआ, जबकि असल में दोनों पायलटों ने फ्यूल स्विच बंद करने से इनकार किया। रिपोर्ट में भी तकनीकी खराबी की आशंका जलाई गई है।

पायलटों पर दोषारोपण करके लोगों को बरगलाने और यहाँ तक कि जाँच में भी पक्षपात किए जाने की आशंका बढ़ जाती है। सच ये है कि AAIB ने अभी तक जाँच का कोई निष्कर्ष नहीं निकाला है। रिपोर्ट में न तो पायलटों को दोषी ठहराया है और न ही बोइंग या इंजन निर्माता को पूरी तरह निर्दोष बताया गया है।

रिपोर्ट में केवल अब तक सिर्फ पहले से ही मिले तथ्यों का उल्लेख किया गया है। साथ ही ये स्पष्ट किया गया है कि जाँच अभी भी जारी है। बिना किसी निष्कर्ष के मृत पायलटों पर दोषारोपण करना न केवल उनके लिए अन्याय है बल्कि सच्चाई के प्रति भी अनादर है।

गाजा की पैरवी, हरकतें US-इजरायल विरोधी… जानें कौन हैं फ्रांसेस्का अल्बानीज? जिस पर अमेरिका ने लगाया बैन: एक्शन के बाद कहा- ताकतवर लोग कमजोर को दबा रहे

संयुक्त राज्य अमेरिका ने 9 जुलाई को स्वतंत्र विशेषज्ञ फ्रांसेस्का अल्बानीज पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। अल्बनीज को यूएन ने फिलिस्तीनी क्षेत्रों में मानवाधिकारों के उल्लंघन की जाँच के लिए विशेष दूत नियुक्त किया था। वह इजरायल की मुखर विरोधी रही हैं।

गाजा में इजरायल की कार्रवाई का उन्होंने हमेशा विरोध किया और इसे ‘नरसंहार’ और ‘इंटरनेशनल कानून’ का उल्लंघन करार दिया। यहाँ तक कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने जब गिरफ्तारी वारंट जारी किया तो उन्होंने उसका भी समर्थन किया।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने फ्रांसेस्का अल्बानीज पर लगे प्रतिबंध पर कहा है कि उन्होंने आईसीसी को मजबूर करने की कोशिश की कि वह अमेरिका और इजरायल के अधिकारियों पर कार्रवाई करे। अमेरिकी विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है, ” अमेरिका और इजरायल के खिलाफ उनके अभियान को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम अपने सहयोगियों की रक्षा के लिए हमेशा खड़े रहेंगे।”

अल्बनीज ने अमेरिकी एक्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “ताकतवर लोग कमजोर की पैरवी करने वालों को सजा दे रहे हैं।” उन्होंने कहा कि ” ये ताकत की नहीं, बल्कि कमजोरी की निशानी है।”

मिडिल ईस्ट आई से बात करते हुए अल्बनीज ने कहा, ” ऐसा लगता है कि मैंने दुखती रग पर पैर रख दिया है। जब मैं और आप बात कर रहे हैं तब भी गाजा में लोग मर रहे हैं और यूएन कुछ नहीं कर पा रहा।”

उन्होंने अपने पिछले पोस्ट में लिखा था कि सबको गाजा की स्थिति के बारे में सोचना चाहिए। हर हाल में वहाँ नरसंहार रुकना चाहिए।

अल्बनीज के मुताबिक अमेरिकी प्रतिबंध उनके मिशन को कमजोर करने के लिए लगाया गया है। उन्होंने कहा, “मुझे जो करना है वो मैं करती रहूँगी।”

इस बीच संयुक्त राज्य मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने अमेरिका से इन प्रतिबंधों को तुरंत हटाने की माँग की हैं। उन्होंने कहा, “तमाम असहमति के बावजूद यूएन के सदस्य देशों को इस मुद्दे पर बातचीत कर हल निकालना चाहिए। “

गौरतलब है कि व्हाइट हाउस ने पिछले महीने 4 आईसीसी जस्टिस पर प्रतिबंध लगा दिया था। इन पर अमेरिका के खिलाफ काम करने का लगाया आरोप

क्या थी अल्बनीज की रिपोर्ट?

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की सदस्य अल्बनीज एक ऐसे पैनल की सदस्य हैं जो विश्वस्तर पर मानवाधिकार हनन की रिपोर्ट तैयार करता है और उसकी निगरानी करता है। ये संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक प्रवक्ता नहीं होते लेकिन उनके निष्कर्षों पर ध्यान दिया जाता है। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय को इससे मदद मिलती है।

परिषद ने खास राष्ट्रों और क्षेत्रों के लिए 13 विशेषज्ञ नियुक्त किए हैं। अफगानिस्तान, बेलारूस, बुरुंडी, कंबोडिया, उत्तर कोरिया, इरिट्रिया, ईरान, म्यांमार और रूस के अलावा सीरिया, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, माली और सोमालिया में इनकी नियुक्ति हुई है।

फिलिस्तीनी क्षेत्र में हाल ही में हुई इजरायली हमले को देखते हुए एक निष्पक्ष विशेषज्ञ को नियुक्त किया है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के अनुसार अल्बानीज अंतर्राष्ट्रीय कानून में विशेषज्ञ हैं और उन्होंने शरणार्थी एवं विस्थापितों के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी के साथ साथ दूसरे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ काम किया है।

फ्रांसेस्का अल्बनीज कौन है?

इटली की मानवाधिकार आयोग की वकील फ्रांसेस्का अल्बनीज गाजा और वेस्ट बैंक क्षेत्र में विशेष दूत हैं। 2022 में उनकी नियुक्ति हुई थी। वह इंटरनेशनल वकील होने के साथ साथ जॉजटाउन विश्वविद्यालय के इंटरनेशनल प्रवासी स्टडी सेंटर से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने मध्यपूर्व के कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाया है। ‘ अंतर्राष्ट्रीय कानून में फिलिस्तीनी शरणार्थी’ किताब की सह लेखिका हैं।

उन्होंने 2003-13 के बीच यूएन के साथ काम किया। 2013-15 के बीच इबोला बीमारी से पश्चिम अफ्रीका को बचाने के मुहिम का हिस्सा रहीं इस दौरान गैर सरकारी संगठन प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल की सुरक्षा सलाहकार थी

उन्होंने कानून में इटली के पीसा विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज से मानवाधिकार में एलएलएम किया है। 2015 तक उनका संबंध अमेरिकन यूनिवर्सिटी ऑफ बेरूत के इस्साम फारेस इंस्टीट्यूट और आईएसआईएम से था।

इजरायल की मुखर विरोधी रही हैं अल्बनीज

गाजा पर इजरायल के हमले के बाद अल्बनीज लगातार इजरायल की कार्रवाइयों का विरोध करती रही हैं। उन्होंने यूएनएचआरसी में दिए अपने भाषण में इजरायल को ‘आधुनिक इतिहास का क्रूरतम नरसंहारक’ कहा था।

2024 में अल्बनीज ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में अपनी रिपोर्ट पेश की जिसमें इजरायल पर सामूहिक हत्या, फिलिस्तीन का विनाश की चर्चा की। जून 2025 में उन्होंने अपनी रिपोर्ट में उन बैंकों और हथियार निर्माता बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नाम बताए थे जो इजरायल के अभियान का समर्थन कर रहे थे।

अल्बनीज अपनी विवादित टिप्पणियों के लिए भी सुर्खियों में रही हैं। उन्होंने 2014 में इजराइल -फिलिस्तीन के जंग में यहूदी लॉबी की बात की थी। उन्होंने कहा था कि अमेरिकी सरकार के फैसलों को “यहूदी लॉबी” प्रभावित कर रही थी। बाद में उन्होंने माफी माँगी थी। इससे उनके ‘यहूदी विरोधी’ रुझान का पता चलता है।

(मूल रूप से इस खबर को अंग्रेजी में रुकमा राठौड़ ने लिखी है। इसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)

विकसित भारत के निर्माण में बढ़ रही युवाओं की भागीदारी, पीएम मोदी ने 51 हजार बाँटे नियुक्ति पत्र: बोले- नई ‘इम्प्लॉयमेंट लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम बिना पर्ची, बिना खर्ची वाला’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार (12 जुलाई 2025) को 16वें रोजगार मेले में भाग लिया। मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 51 हजार से ज्यादा युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए।

ये युवा अब विभिन्न सरकारी विभागों और संगठनों में काम करेंगे। देश भर में आयोजित रोजगार मेलों के जरिए अब तक 10 लाख से अधिक नियुक्ति पत्र जारी किए जा चुके हैं।

सरकारी नौकरियों पर जोर और पारदर्शिता

प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार युवाओं को पक्की नौकरी देने के लिए लगातार काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह ‘बिना पर्ची, बिना खर्ची’ वाली प्रक्रिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये नए युवा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।

प्रधानमंत्री ने रोजगार मेले के बारे में एक्स (पहले ट्विटर) पर भी जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि सरकार विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में युवाओं की भागीदारी बढ़ाना चाहती है।

‘इम्प्लॉयमेंट लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम’ और निजी क्षेत्र

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार निजी क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर बढ़ा रही है। इसके लिए एक नई योजना शुरू की गई है। इसका नाम ‘इम्प्लॉयमेंट लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम’ है।

इस योजना के तहत, सरकार निजी क्षेत्र में पहली बार नौकरी पाने वाले युवाओं को ₹15,000 देगी। यह राशि उनकी पहली नौकरी की पहली सैलरी में सरकार का योगदान होगी।

इस योजना के लिए सरकार ने करीब ₹1 लाख करोड़ का बजट बनाया है। इस स्कीम से लगभग 3.5 करोड़ नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।

साल्हेर, शिवनेरी, सिंधुदुर्ग समेत शिवाजी महाराज के 12 किले UNESCO की लिस्ट में शामिल: मराठाओं की मजबूत रणनीति का रही हैं गवाह, पीएम मोदी बोले- ये देश के लिए ‘गर्व की बात’

महाराष्ट्र के लिए यह एक बड़ा गौरवशाली क्षण है। UNESCO ने ‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स’ के तहत छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े 12 ऐतिहासिक किलों को अपनी विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया है।

यह निर्णय पेरिस में आयोजित विश्व धरोहर समिति (WHC) के 47वें सत्र के दौरान लिया गया। भारत के लिए यह 44वीं संपत्ति है जिसे यह वैश्विक मान्यता मिली है।

यह उपलब्धि मराठा शासकों की मजबूत किलेबंदी प्रणाली और सैन्य रणनीति का प्रतीक है। ये किले महाराष्ट्र और तमिलनाडु में फैले हुए हैं।

विश्व धरोहर लिस्ट में शामिल किले

‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स’ में कुल 12 किले चुने गए हैं। इनमें से 11 किले महाराष्ट्र में हैं। इनके नाम- साल्हेर, शिवनेरी, लोहगढ़, खंडेरी, रायगढ़, राजगढ़, प्रतापगढ़, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला, विजय दुर्ग और सिंधुदुर्ग हैं।

तमिलनाडु का जिंजी किला (Gingee Fort) भी इसमें शामिल है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने इन्हें ‘स्वराज्य’ के लिए बनवाया था। ये किले मराठा साम्राज्य की वास्तुकला (बनावट) और उनकी युद्ध कला को दिखाते हैं।

किले और उनकी रणनीतिक स्थिति

ये किले अलग-अलग जगहों पर बने हैं। ये दिखाते हैं कि मराठा सैनिक कितने समझदार थे और रणनीतिक रक्षा योजना को दर्शाते हैं। कुछ किले पहाड़ों पर हैं। इन्हें ‘पहाड़ी किले’ कहते हैं। जैसे- साल्हेर, शिवनेरी, लोहागढ़, रायगढ़, राजगढ़ और जिंजी।

प्रतापगढ़ जंगल के बीच एक पहाड़ पर बना है। पन्हाला एक पहाड़ी पठार पर स्थित किला है। विजयदुर्ग समुद्र किनारे बना है। खंडेरी, सुवर्णदुर्ग और सिंधुदुर्ग पानी के बीच बने हैं। इन्हें ‘द्वीप किले’ कहते हैं। ये सभी किले मिलकर एक मजबूत सैनिक व्यवस्था बनाते हैं।

12 किलों की खासियत

सालहेर किला- यह महाराष्ट्र का सबसे ऊँचा किला है। यह नासिक जिले में है और यहाँ से बहुत सुंदर नज़ारा दिखता है।

शिवनेरी किला- यह पुणे जिले में है। छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म इसी किले में हुआ था।

लोहगढ़ किला- यह पुणे जिले में है। इसका मतलब है ‘लोहे जैसा मजबूत किला’। यह मराठा साम्राज्य की रक्षा में बहुत महत्वपूर्ण था।

खंडेरी किला- यह रायगढ़ जिले में समुद्र के बीच एक द्वीप पर है। शिवाजी महाराज ने इसे समुद्री रास्तों पर नियंत्रण के लिए बनवाया था।

रायगढ़ किला- यह शिवाजी महाराज की राजधानी था। उन्हें यहीं पर 1674 में छत्रपति बनाया गया था।

राजगढ़ किला- यह पुणे जिले में है। यह छत्रपति शिवाजी महाराज की पहली राजधानी था।

प्रतापगढ़ किला- यह सतारा जिले में है। यह किला 1659 में अफजल खान के साथ हुए युद्ध के लिए मशहूर है।

सुवर्णदुर्ग- यह रत्नागिरी जिले में समुद्र के बीच एक द्वीप पर है। यह मराठा नौसेना की ताकत का प्रतीक है।

पन्हाला किला- यह कोल्हापुर जिले में है। शिवाजी महाराज ने इसे 1659 में जीता था।

विजय दुर्ग- यह सिंधुदुर्ग जिले में समुद्र किनारे है। यह भारत के सबसे मजबूत समुद्री किलों में से एक है। शिवाजी महाराज ने इसे नौसेना का केंद्र बनाया।

सिंधुदुर्ग- यह सिंधुदुर्ग जिले में समुद्र के बीच एक द्वीप पर है। शिवाजी महाराज ने इसे समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए बनवाया था। यहाँ शिवाजी महाराज के हाथों के निशान भी हैं।

जिंजी किला- यह तमिलनाडु में है। इसे ‘दक्षिण भारत का सबसे मजबूत किला’ माना जाता है। यह किला तीन पहाड़ियों पर फैला हुआ है।

देश भर से बधाई संदेश

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर देश के नेताओं ने खुशी जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह सम्मान हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। उन्होंने लोगों से इन किलों को देखने की अपील की।

वहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे राज्य के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज को नमन किया और नागरिकों को बधाई दी।

इसके अलावा, गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह सभी देशवासियों के लिए गर्व का पल है। उन्होंने बताया कि ये किले ‘हिंदवी स्वराज‘ के मुख्य आधार रहे हैं।

उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने कहा कि ये किले छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता को दिखाते हैं।

एक के बाद एक दोनों इंजन हुए बंद, पायलटों ने एक दूसरे से पूछा- तुमने ऑफ किया क्या, और फिर…: अहमदाबाद प्लेन क्रैश केस की प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट आई, जानें और क्या-क्या हुआ खुलासा

विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि 12 जून को अहमदाबाद में हुई एयर इंडिया दुर्घटना की कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग में इंजन फेल होने के दौरान दोनों पायलटों के बीच छोटी लेकिन अहम बातचीत रिकॉर्ड हुई है।

कॉकपिट की बातचीत में अहम खुलासा

15 पन्नों की रिपोर्ट में बताया गया है कि कॉकपिट में एक पायलट ने दूसरे से कहा, “आपने ईंधन क्यों बंद कर दिया?” जिस पर दूसरे ने जवाब दिया, “मैंने ऐसा नहीं किया।” यह बातचीत उस समय हुई जब दोनों इंजन ईंधन कटऑफ स्विच 13:38:42 IST (08:08:42 UTC) पर ‘रन’ से ‘कटऑफ’ में बदल गए। इस वक्त बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर 180 नॉट्स की तेज रफ्तार में पहुँच चुका था।

दोनों इंजन का फ्यूल एक साथ बंद

रिपोर्ट में कहा गया है कि इंजन 1 का स्विच 13:38:52 IST (08:08:52 UTC) पर वापस ‘रन’ पर चला गया। उसके बाद इंजन 2 का स्विच 13:38:56 IST (08:08:56 UTC) पर चला। इंजन और एयरक्राफ्ट फ़्लाइट रिकॉर्डर (EAFR) ने दोनों इंजनों के एग्जॉस्ट गैस तापमान (EGT) में वृद्धि के के संकेत दिए।

इंजन 1 का कोर रुक गया और फिर उसमें गति आने लगी। हालाँकि बार-बार ईंधन1 बंद और चल रहा था। वहीं इंजन 2 बंद होने के बाद चल नहीं पाया। दोनों इंजनों के काम नहीं करने पर विमान नीचे गिर गया।

MAY DAY का कॉल पायलट की तरफ से 08:09:05 UTC पर आया यानी दुर्घटना के चंद सैकेंड पहले। हालाँकि विमान नॉर्मल टेकऑफ की तरह की उड़ान भरा था लेकिन चंद सेकेंड के बाद ही उसमें गड़बड़ी आ गयी।

बोइंग के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी अभी

प्रारंभिक रिपोर्ट में फिलहाल बोइंग कंपनी और इंजन बनाने वाली इलेक्ट्रिक जनरल यानी जेई के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश नहीं की गई है । सुरक्षा जाँच में अभी गड़बड़ी के संकेत नहीं मिले हैं। हालाँकि रिपोर्ट में आगे कहा गया है, ” सबूत माँगे जा रहे हैं और उनकी जाँच की जाएगी।”

एएआईबी ने कहा, “दोनों इंजनों को मलबे वाली जगह से बरामद कर लिया गया था जिसे अलग से जाँच के लिए रखा गया है। इसके अलावा विमान के अहम कलपुर्जे की पहचान करके आगे की जाँच के लिए अलग रखा गया है।”

एएआईबी ने आगे बताया कि ड्रोन फोटोग्राफ़ी और वीडियोग्राफ़ी सहित मलबे वाली जगह पर जाँच का काम पूरा हो गया है और मलबे को एक सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है।

तकनीकी पहलू की जाँच की गई

रिपोर्ट में उन तकनीकी चीजों का सिलसिलेवार तरीके से ज़िक्र किया गया है जो विमान के उड़ान के बाद कुछ सेकेंड में घटित हुईं। ये विमान अहमदाबाद से लंदन गैटविक के लिए अहमदाबाद हवाई अड्डे से उड़ान भरा था लेकिन कुछ सेकेंड बाद ही बी जे मेडिकल कॉलेज के होस्टल पर गिर गया। इस दुर्घटना में 260 लोग मारे गए।

इनमें 241 यात्री और चालक दल के सदस्य शामिल हैं जबकि हॉस्टल में मेडिकल कॉलेज के कई छात्रों समेत 19 अन्य लोग भी अपनी जान गँवा बैठे। इस हादसे में एक यात्री की जान बच गई। ये विमान हादसा भारत की सबसे भयानक विमान दुर्घटनाओं में एक माना जाता है।

इस फ्लाइट के दो पायलट कैप्टन सुमीत सभरवाल और क्लाइव कुंदर थे। 56 वर्षीय कैप्टन सभरवाल एक बेहद अनुभवी पायलट थे, जिनके पास 15,600 घंटों से ज़्यादा उड़ान भरने का अनुभव था।

वहीं 32 वर्षीय कुंदर के पास 3,400 से ज़्यादा घंटों तक उड़ान भरने का अनुभव था । दोनों के पास बोइंग 787 उड़ाने का लाइसेंस और योग्यता दोनों था।