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मणिपुर में सेना के काफिले पर आतंकी हमला: कर्नल और सेना के कई जवान हुए बलिदान, CO के परिवार के सदस्यों की भी मौत

मणिपुर में शनिवार (13 नवंबर 2021) को सेना के काफिले पर उग्रवादियों ने बड़ा हमला कर दिया है। यह हमला चुराचांदपुर जिले के सिनघाट सब-डिवीजन में हुआ है। इस हमले में कर्नल और उनके परिवार के सदस्य भी शहीद हो गए हैं। बताया जा रहा है कि सेना की टुकड़ी पर घात लगाकर बैठे आतंकियों ने हमला किया है।

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस घटना पर शोक व्यक्ति किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर कहा, “मणिपुर के चुराचांदपुर में असम राइफल्स के काफिले पर कायराना हमला बेहद दर्दनाक और निंदनीय है। देश ने 46 असम राइफल्स के सीओ और उनके परिवार के दो सदस्यों सहित 5 बहादुर सैनिकों को खो दिया है। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएँ। जल्द ही दोषियों को न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाएगा।”

असम राइफल्स यूनिट के काफिले में क्विक रिएक्शन टीम के साथ ही कमांडिंग ऑफिसर और उनका परिवार भी शामिल था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आतंकी हमले में सीओ और उनके परिवार के दो सदस्यों तथा क्विक एक्शन टीम के तीन जवानों की मौत हो गई। हमले के पीछे मणिपुर की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है।

मणिपुर के सीएम बिरेन सिंह ने ट्वीट कर घटना पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा, ”46 असम राइफल्स के काफिले पर कायरतापूर्ण हमले की मैं कड़ी निंदा करता हूँ। इसमें सीओ और उनके परिवार समेत कुछ कर्मियों की मौत हो गई। राज्य सुरक्षाबल और अर्धसैनिक बल पहले से ही आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चला रहे हैं। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।”

बता दें कि मणिपुर की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का गठन 1978 में किया गया था। स्वतंत्र मणिपुर की माँग करने वाले इस संगठन को भारत सरकार ने आतंकी संगठन घोषित कर रखा है। इससे पहले भी मणिपुर में यह संगठन धोखे से भारतीय सुरक्षाबलों पर हमले करता रहा है।

‘भाषा का गोमुख है काशी’: राजभाषा सम्मेलन में बोले गृहमंत्री अमित शाह, CM योगी ने हिंदी को बताया- राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने वाली भाषा

गृह मंत्री अमित शाह वाराणसी के दो दिनों के दौरे पर हैं। आज गृह मंत्री वाराणसी में ‘अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन’ में शामिल हुए। इस दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “मुझे गुजराती से ज्यादा हिंदी भाषा पसंद है। हमें अपनी राजभाषा को मजबूत करने की जरूरत है।” अमित शाह ने बाबा विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन भी किया।

अमित शाह ने आज दिनाँक 13 नवम्बर 2021 (शनिवार) को वाराणसी के हस्तकला संकुल में अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को सम्बोधित किया। पहले यह सम्मेलन दिल्ली में ही आयोजित होता था। इस सम्मेलन को काशी में आयोजित करके एक नई शुरुआत की गई है। इस मुद्दे पर अमित शाह ने कहा कि अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को राजधानी दिल्ली से बाहर करने का निर्णय 2019 में ही हो गया था। उस समय कोरोना के चलते इसका आयोजन नहीं हो पाया था। अमित शाह ने ख़ुशी जताते हुए कहा कि ये नई शुभ शुरुआत आजादी के अमृत महोत्सव में हो रही है।

इसी सम्मेलन में आगे बोलते हुए अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र किया। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्वभर में राजभाषा हिंदी के बढ़ते गौरव की हम सभी ने अनुभूति की है। अब हमें सभी द्वेष मिटाकर एक साथ हमारी राजभाषा और स्थानीय भाषाओं की गौरवशाली विरासत को और समृद्ध करना है।

अमित शाह ने हिंदी भाषियों से संकल्प लेने की भी बात कही। उन्होंने कहा, “हम सब हिन्दी प्रेमियों के लिए ये संकल्प का वर्ष रहना चाहिए कि जब आज़ादी के 100 वर्ष हों तब देश में राजभाषा और सभी स्थानीय भाषाओं का दबदबा इतना बुलंद हो कि हमें किसी भी विदेशी भाषा का सहयोग लेने की जरूरत न पड़े। मैं मानता हूँ कि ये काम आज़ादी के तुरंत बाद होना चाहिए था।”

अमित शाह ने देशवासियों से अपने परम्परागत मूल्यों की रक्षा करने की भी अपील की। अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा कि जो देश अपनी भाषा खो देता है वो कालक्रम में अपनी सभ्यता, संस्कृति और अपने मौलिक चिंतन को भी खो देता है। जो देश अपने मौलिक चिंतन को खो देते हैं वो दुनिया को आगे बढ़ाने में योगदान नहीं कर सकते।

हिंदी के और अधिक प्रसार – प्रचार की जरूरत पर भी अमित शाह ने जोर दिया। उन्होंने इसका मंत्र भी दिया। उनके अनुसार हिन्दी की स्वीकृति लानी है तो हिन्दी को लचीला बनाना पड़ेगा। हिन्दी के शब्दकोष को भी समृद्ध करने की जरूरत है। उनके अनुसार हिंदी भाषा बोलने में किसी भी प्रकार की शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए। हिंदी हमारी राजभाषा और हमारा गौरव है। हमें अपने बच्चों से भी अपनी मातृभाषा हिंदी में बात करनी चाहिए। अमित शाह ने खुद को गुजराती से अधिक हिंदी भाषा पसंद करने वाला बताया।

इस मौके पर अमित शाह ने देश को आज़ादी दिलाने वालों को भी याद किया। उनके अनुसार स्वतंत्रता दिलाने के लिए जो हमारे पुरखों ने यातानाएं सही, सर्वोच्च बलिदान दिए उसको स्मृति में जीवंत करके युवा पीढ़ी को प्रेरणा देने का मौका है।

अमित शाह ने काशी के इतिहास पर भी प्रकाश डाला। उनके अनुसार काशी को देश के इतिहास से अलग करके नहीं देखा जा सकता है। उन्होंने काशी को भाषा का गौमुख बताया।

इस आयोजन को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सम्बोधित किया। योगी आदित्यनाथ ने कहा, “ईश्वर ने हमें अभिव्यक्ति का माध्यम दिया है और अभिव्यक्ति का माध्यम है हमारी भाषा। देश और दुनिया में सबसे ज़्यादा बोलने वाली भाषा है हिंदी लेकिन हिंदी की उपेक्षा इससे समझ सकते हैं कि इस सम्मेलन को आयोजित करने में आज़ादी के बाद भी 75 वर्ष लग गए।”

योगी आदित्यनाथ ने हिंदी को पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने वाली भाषा बताया। उन्होंने भक्तिकाल से वर्तमान तक हिंदी का कालखंड काशी से जुड़ा बताया। श्रीरामचरित मानस को उन्होंने भगवान शिव की प्रेरणा से अवधी में रचित बताया। इसी के साथ उन्होंने नरेंद्र मोदी के के नेतृत्व में भारत पिछले 7 वर्षों में भारत में अभूतपूर्व बदलाव होने की बात कही। इस अवसर पर आज़मगढ़ में 108 करोड़ रूपए की लागत से राज्य विश्वविद्यालय की भी घोषणा की गई।

दिल्ली दंगों में कर दी गई थी दीपक की हत्या, हथियारों से लैस थी भीड़: अब अनवर, कासिम, शाहरुख और खालिद के खिलाफ आरोप तय

देश की राजधानी दिल्ली में पिछले साल हुए दंगों में दीपक नाम के हिंदू व्यक्ति की हत्या के मामले में दिल्ली की एक अदालत ने चार लोगों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। कड़कड़डूमा कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने चारों आरोपित अनवर हुसैन, कासिम, शाहरुख और खालिद के खिलाफ हत्या, दंगा फैलाने और आपराधिक साजिश रचने के आरोप तय करते हुए इसे एक सुनियोजित हमला बताया है। इन लोगों ने दिल्ली दंगों के दौरान 25 फरवरी 2020 को अंबेडकर कॉलेज के पास दीपक नाम के शख्स की हत्या की थी। हालाँकि, आरोपियों ने खुद को निर्दोष साबित करने की भरपूर कोशिश की।

दीपक पर 25 फरवरी 2020 को दोपहर में गोकुल रोड फ्लाईओवर के सर्विस रोड पर भीड़ द्वारा हमला किया गया था। वह घायल अवस्था में अचेत मिला था। बाद में उसे जीटीबी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण सिर और पेट में खून की नली में एंटीमॉर्टम चोट के कारण रक्तस्राव को बताया गया था।

अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह साबित हो चुका है कि दीपक की हत्या 25 फरवरी 2020 को दोपहर करीब 1.30 बजे हथियारों से लैस भीड़ द्वारा की गई थी। जज ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा, “उनके भीड़ की शक्ल लेने और इरादे से उनके आचरण को समझा जा सकता है। इस तरह की गैर-कानूनी सभा दंगों और मृतक दीपक की हत्या जैसे अन्य अपराधों को अंजाम देने के लिए आयोजित किया गया। अवैध तरीके से भीड़ द्वारा साजिश के तहत पीड़ित पर बड़ा सुनियोजित हमला किया गया।”

जज ने कहा कि गवाहों ने दीपक की हत्या के मामले में आरोपितों के खिलाफ बयान दिए हैं। इस घटना के चश्मदीद रहे कीर्ति राज तिवारी ने बताया कि उस दिन वो अंबेडकर कॉलेज के पीछे ईडीएमसी पार्किंग में काम कर रहे थे तो उन्होंने देखा कि डिस्पेंसरी के सामने कर्दमपुरी नाले के पास 100-200 लोगों की भीड़ दंगे कर रही थी। उस दौरान वह मुस्लिमों की उन्मादी भीड़ ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाते हुए एक लड़के को पकड़कर बेरहमी से डंडे और पत्थर से मार रही थी। इस बीच जैसे ही दूसरे समुदाय के लोग वहाँ पहुँचे तो इन लोगों ने लड़के को छोड़कर सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाना शुरू कर दिया। कट्टरता से भरी उन्मादी भीड़ में कुछ ऐसे लोग भी थे, जिन्हें तिवारी जानते थे और उन्होंने उनके नाम भी बताए।

सुनील ने आरोपितों को हत्या करते देखा

जज के मुताबिक, इस घटना का सबसे अहम गवाह सुनील कुमार हैं, जिन्होंने इस वारदात को करीब से देखा था। उन्होंने पूरा वाकया बताया कि कैसे मुस्लिमों की उन्मादी हथियारबंद भीड़ ने दीपक की हत्या कर दी। सुनील के मुताबिक, 25 फरवरी को कर्दमपुरी पुलिया से कट्टरपंथी इस्लामियों की भीड़ ‘अल्लाह हू अकबर’ का नारा लगाते हुए गोकुलपुर पार करने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान दीपक उनके हाथ लग गया। उन्होंने उसे पकड़कर बेरहमी से पीटा।

सुनील का कहना है कि जिस वक्त ये घटना हुई उस दौरान वह नाले के पास स्थित एक दीवार के पीछे छिपे थे और दीवार के सुराख से उसने इस घटना को देख रहे थे। इतना ही नहीं सुनील ने चारों आरोपितों के नाम के साथ पहचान की। उन्होंने बताया कि भीड़ की संख्या के कारण वह डर गए थे और दीपक को बचा नहीं पाए।

कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा, “आरोप तय करने के मामले में अभियोजन पक्ष अदालत को संतुष्ट करने में में सफल रहा है कि अभियुक्तों समेत गैर-कानूनी रूप से इकट्ठा हुई भीड़ ने दंगा फैलाने के साथ ही दीपक की हत्या भी की। गैर-कानूनी सभा पूरी तरह से हथियारों से लैस थी। उसने दीपक का पीछा किया और पकड़कर उसकी हत्या कर दी। उनके आचरण से यह कहा जा सकता है कि यह आपराधिक साजिश का मामला है।”

अदालत ने आगे कहा है कि चारों आरोपित अनवर हुसैन, कासिम, शाहरुख उर्फ ​​रिंकू और खालिद अंसारी इसी इस्लामी भीड़ में शामिल थे। इसलिए इन सभी के खिलाफ इंडियन पिनल कोड की धारा 147, 148, 302, 149, 120 बी के तहत आरोप लगाए हैं।

‘भगवान शिव ने पूरे संसार को निगल लिया था’: सारे उपनिषदों को पढ़ने का दावा करने वाले राहुल गाँधी ने दिया ज्ञान, लोगों ने पढ़ाया सही इतिहास

कॉन्ग्रेस पार्टी के डिजिटल अभियान ‘जन जागरण अभियान’ के शुभारंभ के अवसर पर राहुल गाँधी ने शनिवार (13 नवंबर, 2021) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को भाजपा पर हमला करने की सलाह देते हुए कहा कि पार्टी हिंदुत्व की विचारधारा का पालन करती है, जो हिंदू धर्म से अलग है। हमेशा की तरह इस बार भी केरल के सांसद ने अपने संबोधन में अजीबोगरीब बातें कर दी। उन्होंने भगवान शिव के बारे में पुराणों की एक प्रसिद्ध कहानी को तोड़-मरोड़ कर पेश किया।

राहुल गाँधी ने हिंदू पौराणिक कथाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भगवान शिव ने पूरे संसार को निगल लिया था। राहुल गाँधी ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा, ”जैसे शिव जी ने पूरे संसार को निगल लिया था, वैसे ही कॉन्ग्रेस की विचारधारा भाजपा की विचारधारा को निगल जाएगी। तुम्हें पता भी नहीं चलेगा, तुम नहीं जानोगे और यह (भाजपा की विचारधारा) मिट जाएगा। आज जो नफरत फैलाई जा रही है, वह भी मिट जाएगी और जो भविष्य आज नहीं देखा जा सकता वह भी देखा जा सकेगा।”

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने उनका वीडियो भी ट्विटर पर साझा किया है, जिसमें वह यह कह रहे हैं कि शिव जी पूरे संसार को निगल जाते थे। जबकि सच तो यह है कि शिव जी ने संसार को बचाने के लिए जहर पीया था। हिंदू ग्रंथों में इसका उल्लेख भी किया गया है। खैर, इन सबके बावजूद विडंबना यह है कि जनेऊ-धारी राहुल गाँधी ने हिंदू धर्म ग्रंथों को पढ़ने के बजाए इसे गलत तरीके से पेश किया।

मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकला विष भगवान शिव ने पीया था। विष पीने के बाद उनका गला नीला पड़ गया था, इसलिए उन्हें नीलकंठ भी कहा गया। भागवत पुराण और विष्णु पुराण में भी इसका उल्लेख किया गया है। राहुल द्वारा समुद्र मंथन की कहानी को गलत तरीके से पेश करना इसलिए और भी विडंबनापूर्ण है, क्योंकि कुछ मिनट पहले ही उन्होंने दावा किया था कि वह हिंदू ग्रंथों को अच्छे पढ़ चुके हैं और इसकी जानकारी रखते हैं।

कॉन्ग्रेस नेता ने कहा, ”हिंदुस्तान में दो विचाधाराएँ हैं। एक कॉन्ग्रेस पार्टी की विचारधारा और एक आरएसएस की विचारधारा और हमें यह बात माननी पड़ेगी कि आज के हिंदुस्तान में बीजेपी, आरएसएस नफरत फैला रहे हैं। वहीं कॉन्ग्रेस की विचारधारा जोड़ने की, भाईचारे और प्यार की विचारधारा है, उसको बीजेपी की नफरत भरी विचारधारा ने ओवर शेड्डो कर दिया है। मिटाया नहीं है, हराया नहीं है, लेकिन उनका प्रोपेगेशन हमारे प्रोपेगेशन से ज्यादा है। मतलब उनके हाथ में लाउडस्पीकर है। उनके हाथ में मशीनशरी है।”

कॉन्ग्रेस नेता ने आगे कहा, ”आज के हिंदुस्तान में विचारधारा की लड़ाई सबसे जरूरी हो गई है, जो हमारी विचारधारा है, इसको हम कॉन्ग्रेस की विचारधारा कहते हैं। मगर ये हमसे बहुत पुरानी है। हम कहते हैं कि हिंदू धर्म और हिंदुत्व में फ​र्क है। क्योंकि अगर फर्क नहीं होता तो नाम एक ही होता। हिंदुत्व को हिन्दू या फिर हिंदू को हिंदुत्व की जरूरत नहीं होती। ये नए नाम की क्या जरूरत है, जिस शक्ति को ​हम शिव कहते हैं, शिवा कहते हैं। उसका ये प्रतीक थे। कबीर, गुरुनानक, महात्मा गाँधी उनके भी आइकॉन है और हमारे भी आइकॉन हैं। हमारे महात्मा गाँधी हैं और उनके वीर सावरकर हैं।

‘राइट विंग लड़ कर लेने को तैयार था, फिर कॉन्ग्रेस के भीख के कटोरे में क्यों मिली आज़ादी?’ कंगना ने कहा – जवाब दे दो, लौटा दूँगी पद्मश्री

कंगना रनौत ने हाल ही में कहा था कि 1947 में भारत को भीख में आज़ादी मिली और असली आज़ादी 2014 में मिली। तमाम विपक्षी दलों के नेता उनके इस बयान का विरोध करते हुए उनका पद्मश्री सम्मान वापस लेने की बातें कर रहे हैं। कंगना रनौत ने कहा कहा कि उन्होंने उसी इंटरव्यू में स्पष्ट कर दिया था कि 1857 में भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम हुआ था और उन्होंने महारानी लक्ष्मीबाई, सुभाष चंद्र बोस और वीर सावरकर के बलिदानों को भी याद किया।

कंगना रनौत ने कहा कि 1857 का तो उन्हें पता है, लेकिन अगर कोई उनके सामने ये सिद्ध कर देगा कि 1947 में कौन सा युद्ध हुआ था, तो वो अपना पद्मश्री वापस करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उस स्थिति में वो माफ़ी भी माँग लेंगी। कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा कि उन्होंने बलिदानी लक्ष्मीबाई की फिल्म में काम किया है, ऐसे में उन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को लेकर काफी रिसर्च किया है। उनका मानना है कि उस दौरान राष्ट्रीयता और दक्षिणपंथ, दोनों ऊँचा उठ रहा था।

कंगना रनौत का पूछना है कि लेकिन ये सब अचानक से ख़त्म कैसे हो गया? उन्होंने पूछा कि महात्मा गाँधी ने भगत सिंह को क्यों मरने दिया? साथ ही सवाल दागा कि क्यों नेताजी सुभाष चंद्र बोस को मार डाला गया और उन्हें कभी महात्मा गाँधी का समर्थन नहीं मिला? उन्होंने ये भी सवाल पूछा कि विभाजन की रेखा आखिर एक गोरे व्यक्ति ने क्यों खींची? कंगना रनौत का ये प्रश्न भी है कि आज़ादी का युद्ध लड़ने की बजाए भारतीय क्यों एक-दूसरे को मारने लगे? उन्होंने कहा कि इन सवालों के जवाब वो खोज रही हैं, इसमें उनकी कोई सहायता करे।

कंगना रनौत ने माँगे सवालों के जवाब

कंगना रनौत ने लिखा, “इतिहास वही है जो आज स्पष्ट दिख रहा है। अंग्रेजों ने भारत को तब तक लूटा, जब तक उन्हें संतुष्टि नहीं हुई। चरम गरीबी, सूखा और शत्रुता के बाद भी वो भारत में रह रहे थे, वो भी तब जब उन पर दूसरे विश्व युद्ध का दबाव था। उन्हें पता था कि वो वो सदियों के अत्याचार की कीमत चुकाए बिना यहाँ से नहीं जा सकते। इसीलिए, उन्हें भारतीयों के मदद की ज़रूरत थी। INA (आज़ाद हिन्द फ़ौज) का एक छोटा युद्ध भी हमें आज़ादी दिला देता। तब सुभाष चंद्र बोस भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बनते।”

कंगना रनौत ने पूछा कि जब दक्षिणपंथ इसे लड़ तक लेने के लिए तैयार था, तब आज़ादी कॉन्ग्रेस के भीख के कटोरे में क्यों डाली गई? उन्होंने कहा कि कोई उन्हें ये बात समझा दे। उन्होंने कहा कि कोई उन्हें इन सवालों के जवाब खोज कर दे देता है तो वो ख़ुशी से अपना पद्मश्री वापस कर देंगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई साबित कर देता है कि ‘टाइम्स नाउ’ के इंटरव्यू में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान किया है, तब भी वो अपना पद्मश्री सम्मान वापस कर देंगी।

‘आज़ादी’ वाले बयान के स्टैंड पर कायम हैं कंगना रनौत

उन्होंने कहा कि सीधे गाली बकने या बड़ी चालाकी से एडिट किए गए इंटरव्यू के किसी क्लिप को शेयर करने से कुछ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि उनका कहा पूरा वाक्य सुना जाए और तथ्यों पर बात की जाए, तब वो कोई भी परिणाम भुगतने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पास ज़रूर भौतिक आज़ादी थी, लेकिन 2014 में हमारी चेतना को आज़ादी मिली। उन्होंने कहा कि तब एक मृत सभ्यता उठ खड़ी हुई और उसने अपने पंख लहराए। उन्होंने कहा कि आज के सभ्यता दहाड़ मार रही है और ऊँचाई को प्राप्त कर रही है।

कंगना रनौत ने लिखा, “आज शायद पहली बार है जब अंग्रेजी न बोलने, छोटे शहरो से आने या स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग करने के लिए कोई हमें शर्मिंदगी महसूस नहीं करा सकता। उस इंटरव्यू में मैंने सब स्पष्टता से रखा है। लेकिन जो चोर हैं, उनकी तो जलेगी। कोई बुझा नहीं सकता है।” कंगना रनौत ने ‘ट्रांसफर ऑफ पॉवर’ का एक पुराना पत्र शेयर करते हुए लिखा कि ये वो ‘फ्रीडम फाइट’ है, जिसका उन्होंने अपमा किया था, जो ‘डोमिनियन ऑफ इंडिया’ को पॉवर का ट्रांसफर था।

ममता सरकार बंगाल में BSF का अधिकार क्षेत्र बढ़ाए जाने के खिलाफ लाएगी प्रस्ताव, बीजेपी ने TMC को घेरा, बताया- ‘आतंकियों का समर्थक’

केंद्र सरकार द्वारा बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाए जाने के खिलाफ पंजाब के बाद अब पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार भी प्रस्ताव लाने जा रही है। पश्चिम बंगाल सरकार 17 नवंबर को राज्य विधानसभा में सीमा सुरक्षा बल के अधिकार क्षेत्र को 15 किमी से बढ़ाकर 50 किमी करने के खिलाफ एक प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। बता दें कि गृह मंत्रालय ने 11 अक्टूबर को एक अधिसूचना जारी कर बीएसएफ को पंजाब में अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर के भीतर तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी की अनुमति दी थी। पश्चिम बंगाल सरकार ने यह फैसला केंद्रीय गृह सचिव के कोलकाता के दौरे के एक दिन बाद लिया गया है।

ममता सरकार के संसदीय कार्यमंत्री पार्थ चटर्जी का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा लाया जाने वाला प्रस्ताव यह बताएगा कि किस तरह से केंद्र सरकार देश के संघीय व्यवस्था को नष्ट करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “यह कदम संघीय ढाँचे के खिलाफ है। केंद्र ने राज्य सरकार से परामर्श किए बिना मनमाना निर्णय लिया।”

मंत्री के मुताबिक, “अगर बीएसएफ को अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से 50 किमी के भीतर काम करने दिया जाएगा, तो यह राज्य की भूमि के 37 प्रतिशत क्षेत्र को सीमा बल के नियंत्रण में कर देगा और ‘राज्य पुलिस के अधिकार को काट देगा।” उन्होंने कहा कि मामले के संबंध में निर्णय कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में लिया गया। इससे पहले भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर इस फैसले के खिलाफ अपनी आपत्ति जता चुकी हैं।

इधर, ममता बनर्जी पर हमला बोलते हुए भाजपा विधायक अग्निमित्र पॉल ने इसका विरोध किया है। बीएसएफ ने 12 नवंबर की सुबह सीताई में दो कथित बांग्लादेशी पशु तस्करों को गोली मारी थी, जिसमें दोनों तस्करों की मौत हो गई है। भाजपा विधायक अग्निमित्र पॉल ने कहा, “संकल्प लाने का क्या मतलब है? पश्चिम बंगाल अब एक आतंकवादी केंद्र है। उन्होंने बाड़ लगाने के लिए 631 किमी जमीन क्यों नहीं दी है? सभी भाजपा विधायक प्रस्ताव का विरोध करेंगे।”

गौरतलब है कि पिछले महीने ही देश की सीमाओं की सुरक्षा और सीमा पार से होने वाले आतंकवाद पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) का अधिकार क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर तक कर दिया था।

पंजाब सरकार ने भी किया था प्रस्ताव पारित

पश्चिम बंगाल सरकार से पहले इसी महीने 11 नवंबर 2021 को पंजाब की चरणजीत सिंह चन्नी की अगुवाई वाली सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र बढ़ाए जाने के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया है। चन्नी ने कहा था कि उनकी सरकार पंजाब की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन जरूरत पड़ी तो केंद्र के इस फैसले के खिलाफ वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएँगे।

जबकि पंजाब के ही पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गृह मंत्रालय के बीएसएफ का दायरा बढ़ाने के फैसले का स्वागत किया था और केंद्र के इस फैसले का सम्मान करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पंजाब में ड्रग्स की तस्करी और आतंकी खतरा बढ़ा है, अब केंद्र के फैसले से पंजाब सुरक्षित होगा।

‘किसानों की आलोचना का फैशन बन गया है’: प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट नाराज़, कहा – 2 दिन का लॉकडाउन या गाड़ियों को रोक दो

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने शनिवार (13 नवंबर, 2021) को दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के मामले में सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश नूतलपाटि वेंकटरमण रमना ने केंद्र सरकार से कहा कि वायु प्रदूषण एक गंभीर परिस्थिति है। उन्होंने कहा कि हमलोगों को घर में भी मास्क पहन कर रहना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से ये भी पूछा कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उसने क्या कदम उठाए हैं। सुनवाई के दौरान किसनों द्वारा पराली जलाने का मुद्दा भी उठा।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि पराली को ख़त्म करने के लिए आपके पास 2 लाख मशीनें मौजूद हैं और बाजार में भी ऐसी दो-तीन किस्म की मशीनें मिल रही हैं, लेकिन किसान उन्हें खरीदने की आर्थिक ताकत नहीं रखते हैं। उन्होंने पूछा कि केंद्र और राज्य की सरकारें क्यों नहीं किसानों को ये मशीनें मुफ्त में देती हैं या फिर उनसे पराली लेती हैं? जस्टिस सूर्यकान्त ने कहा कि ठण्ड के मौसम में राजस्थान में बकरियों को खिलाने के लिए पराली का इस्तेमाल किया जा सकता है।

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वो भी एक किसान हैं और CJI भी एक किसान परिवार से हैं, ऐसे में हम जानना चाहते हैं कि इन मशीनों को कितने दाम में किसानों को उपलब्ध कराया जाता है। केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सहकारिता संगठनों के जरिए किसानों को मुफ्त में ये मशीनें उपलब्ध कराई जाती हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि ऐसी कितनी संस्थाएँ हैं? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को सलाह दी कि वो पराली किसानों से लेकर इंडस्ट्री को सप्लाई करे।

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि चाहे दिल्ली सरकार हो या कोई और, किसानों की आलोचना करने का एक फैशन बन बन गया है। उन्होंने कहा कि पटाखों पर भी प्रतिबंध था, लेकिन दिल्ली में क्या हुआ? सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या 2 दिन लॉकडाउन लगाने से प्रदूषण 200 AQI कम हो जाएगा? सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि स्कूल खुल गए हैं और बच्चे सड़क पर प्रदूषण का सामना कर रहे हैं। उसने डॉक्टर गुलेरिया के बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि हम बच्चों को प्रदूषण, महामारी और डेंगू के बीच छोड़ रहे हैं।

CJI रमना ने कहा कि कुछ ऐसा किया जाना चाहिए, जिससे 2-3 दिन में हमलोग राहत महसूस कर सकें। उन्होंने इसे सरकार और राजनीति से अलग हट कर देखने की सलाह देते हुए पूछा कि केंद्र सरकार हरियाणा और पंजाब से क्यों नहीं कहती कि पराली जलाने को कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों को ‘इमरजेंसी प्लान्स’ पर सोचने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि क्यों न गाड़ियों को कुछ दिनों के लिए रोक दिया जाए। साथ ही दिल्ली सरकार को भी फटकार लगाई कि उनके स्मॉग टॉवर्स का क्या हुआ।

हिंदू युवती को बहलाकर ले भागा तौसीफ खान, लव जिहाद बता VHP ने पुलिस को दिया 3 दिन का अल्टीमेटम, कहा- गिरफ्तारी नहीं होने पर होगा आंदोलन

मध्यप्रदेश के गुना जिले में एक युवती के गायब होने की घटना को हिन्दू संगठनों ने लव जिहाद बताया है। युवती को गायब करने का जिस पर आरोप है, उसका नाम तौसीफ खान है। पीड़ित परिवार का कहना है कि तौसीफ ही पीड़िता को बहला-फुसला कर अपने साथ ले गया है। जिले के आरोन क्षेत्र की रहने वाली युवती 3 नवम्बर 2021 (बुधवार) से गायब है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आरोन नगर के मठ मोहल्ले में रहने वाली युवती 3 नवम्बर से अचानक गायब हो गई। परिजनों ने काफी तलाश किया, लेकिन वो नहीं मिली। बाद में परिजनों ने तौसीफ खान को अपनी बेटी को बहला-फुसला कर ले जाने का आरोपित किया। इस मामले में पुलिस ने FIR भी दर्ज कर ली है। हालाँकि, हिन्दू संगठनों ने पुलिस पर कार्रवाई में देरी करने का आरोप लगाया है।

घटना के विरोध में विश्व हिन्दू परिषद ने गुना के पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ज्ञापन दिया है। विहिप कार्यकर्ताओं ने पुलिस को लड़की की एक मार्कशीट भी सौंपी है। यह मार्कशीट लड़की के LKG क्लास की है। इस मार्कशीट के अनुसार, लड़की नाबालिग है। दूसरी तरफ, यह भी बताया जा रहा है कि FIR के दौरान परिजनों द्वारा पुलिस को सौंपे गए दस्तावेजों में लड़की बालिग है।

बजरंग दल द्वारा प्रेषित ज्ञापन

VHP ने घटना के विरोध में बाइक रैली भी निकाली। यह रैली जयस्तम्भ चौराहा, सदर बाजार, हाट रोड से होकर गुजरी और पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर जाकर खत्म हुई। VHP ने पुलिस की सुस्त कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किये और लड़की बरामद करने के लिए 3 दिन की समय सीमा दी। विहिप का कहना है कि अगर लड़की वापस नहीं आई तो सभी तहसीलों में आंदोलन किया जाएगा।

लाल किला हिंसा में गिरफ्तार ‘किसानों’ को 2-2 लाख का मुआवजा देगी पंजाब की चन्नी सरकार, भाजपा ने कहा- कॉन्ग्रेस का ‘हाथ’ उग्रवादियों के साथ

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार ने किसान आंदोलन पर बड़ा दांव खेला है। पंजाब की चरणजीत सिंह चन्नी सरकार ने दिल्ली हिंसा में गिरफ्तार सभी 83 किसानों को 2-2 लाख रुपए का मुआवजा देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री चन्नी ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है।

चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा, ”काले कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन को मेरी सरकार का पूरा समर्थन है। हमने 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली की वजह से दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए सभी 83 लोगों को दो लाख रुपए का मुआवजा देने का फैसला किया है।” इसके अलावा पंजाब सरकार ने किसान आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए का मुआवजा और घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है।

इसको लेकर भाजपा किसान मोर्चा ने पंजाब सरकार पर हमला बोला है। मोर्चा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से कहा गया, ”कॉन्ग्रेस का ‘हाथ’ उग्रवादियों के साथ! पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार ने राहुल गाँधी के निर्देश पर लाल किले पर हमला करने वालों को 2 लाख रुपए देने का ऐलान किया।” कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और चरणजीत सिंह चन्नी को टैग करते हुए ट्वीट में आगे लिखा गया है, “राहुल गाँधी और चरणजीत सिंह चन्नी की ओर से उग्रवादियों के लिए खास पेशकश। अगर आप लाल किले पर हमला करते हैं तो कॉन्ग्रेस आपको 2 लाख रुपए देगी।”

बता दें​ कि किसान संगठनों ने केंद्र के तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की माँग को लेकर 26 जनवरी को लाल किले तक ट्रैक्टर मार्च का किया था। हजारों किसान अपने ट्रैक्टर लेकर लाल किले तक पहुँच गए थे। इस दौरान कुछ उपद्रवियों ने राष्ट्रीय ध्वज का अपमान कर धार्मिक ध्वज फहरा दिया था। इस सिलसिले में दिल्ली पुलिस ने हिंसा करने वाले 12 उपद्रवियों की तस्वीरें जारी की थी। चिन्हित किए गए इन उपद्रवियों को हिंसा के दौरान हाथ में लाठी-डंडे लिए, पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और लाल किला समेत कई जगहों पर जमकर उत्पात और पुलिस वालों पर हमला करते हुए देखा गया था।

जिस लड़की को बहन बोलता था, उसे ही लेकर फरार हुआ आमिर हुसैन: घर में था आना-जाना, अब पिता ने दर्ज कराई FIR

राजस्थान के जिला नागौर में एक युवती को बहला फुसला कर भगा ले जाने की खबर है। यह नागौर के मकराना क्षेत्र के दातार कालोनी की। है युवती के पिता ने इस मामले की शिकायत स्थानीय पुलिस स्टेशन में की है। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। आरोपित का नाम आमिर हुसैन है। यह घटना 8 नवम्बर, 2021 (सोमवार) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आरोपित आमिर 8 नवम्बर की सुबह लगभग 10 बजे युवती को ले कर फरार हो गया। इस काम को अंजाम देने के लिए उसने बाइक का प्रयोग किया है। बताया जा रहा है कि आमिर पहले युवती को बहन बोलता था। वह परबतसर से मकराना मजदूरी करने आया था। मकराना में वो दातार कालोनी में किराए पर कमरा ले कर रहता था।

भाई बहन की बातों से उसने पीड़ित परिवार को पहले विश्वास में लिया। इसी रिश्ते से उसने अपनी जान पहचान बढ़ाई थी। धीरे – धीरे उसका पीड़ित परिवार में आना जाना हो गया। अब आमिर द्वारा मुँहबोली बहन के साथ किए गए इस कृत्य से लड़की के परिजन हैरान और परेशान हैं। पुलिस को दी गई शिकायत में लड़की के परिजनों ने आमिर हुसैन द्वारा लड़की के साथ कुछ गलत करने की भी संभावना जताई है।

सभार – दैनिक भास्कर