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PLA और MNPF ने ली असम राइफल्स के CO सहित 7 के मौत की जिम्मेदारी, जानिए कौन है ‘पंगल’ मुस्लिम जो हैं इस आतंकी संगठन की रीढ़

पूर्वोत्त्तर भारत के मणिपुर राज्य में शनिवार (13 नवंबर 2021) को भारतीय सेना के काफिले पर घात लगा कर हमला किया गया। इस आतंकी हमले में कमांडिंग ऑफिसर और उनके परिवार के सदस्यों को मिला कर कुल 7 लोग बलिदान हो गए। इस हमले के पीछे प्रतिबंधित समूह पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और MNPF (मणिपुर नागा पीपल फ्रंट) का हाथ बताया जा रहा है। वहीं अब इन दोनों संगठनों द्वारा जिम्मेदारी लेने की खबरें भी आ रही है। हमला चुराचाँदपुर जिले के सिनघाट सब-डिवीजन में हुआ। ऐसे में इस हमले की जिम्मेदारी लेने वाला एक नाम पंगल विशेष चर्चा में है जिसे मणिपुरी मुस्लिम भी कहा जाता है।

सैनिक और उनके परिवार पर इस हमले के बाद देश भर में गुस्से की लहर है। हमले की जिम्मेदार पीपल्स लिबरेशन आर्मी का गठन 25 सितंबर 1978 को हुआ था। यह आतंकी समूह मणिपुर को अलग देश बनाने की माँग करता आया है। इस आतंकी समूह के मुख्य हमलावर पंगल समूह के लोग हैं। समूह में थोड़े बहुत लड़ाके मेइतेई (Meitei) समुदाय के भी हैं। इसके साथ मणिपुर के ही नागा, कुकिस और अन्य जनजातियाँ इस देशविरोधी समूह के साथ नहीं हैं।

मेइतेइ का अर्थ मणिपुर के मूल निवासी से है। मणिपुर की राजधानी इम्फाल के आस-पास इनकी अधिकांश संख्या बसी हुई है। ये पूरे पूर्वोत्तर में फैले हुए हैं। असम, त्रिपुरा, नागालैंड, मेघालय और मिजोरम में भी ये अलग अलग हिस्सों में रहते हैं। इनकी थोड़ी बहुत आबादी पड़ोसी देश बंगलादेश और म्यांमार में भी है। मणिपुर की कुल आबादी का आधे से अधिक हिस्सा 53 फीसदी लोग मेइतेई ही हैं।

पीपल्स लिबरेशन आर्मी के आतंकियों में दूसरी बहुतायत संख्या पंगल समूह की है। पंगल मणिपुर के मुस्लिमों को कहा जाता है। इनके बारे में बताया जा रहा है कि ये कई सदियों से यहाँ रह रहे हैं। कुछ इन्हे मंगोल वंश का मानते हैं। बताया जाता है कि जाते-जाते मंगोल अपने कुछ लोगों को छोड़ कर गए थे। वही आज पंगल नाम से जाने जाते हैं। पंगल चीनी और तिब्बती भाषा के भी जानकार होते हैं। कुछ का कहना है कि पहले पंगल मेइतेई ही थे जिन्होंने बाद में मुस्लिम धर्म स्वीकार कर लिया।

पंगल अर्थात मणिपुरी मुस्लिमों की वर्तमान में कुल आबादी लगभग 239886 है। ये मणिपुर की कुल आबादी का लगभग 8.4 प्रतिशत हैं। राजनैतिक परिदृश्य में लगभग 4 सीटों पर पंगल मुस्लिम वोट बैंक निर्णायक भूमिका में रहता है। इसके साथ लगभग 8 सीटों पर पंगल यानी मणिपुरी मुस्लिम हार जीत में अहम रोल अदा करते हैं। 1970 के दशक में इस समुदाय एक एक सदस्य मणिपुर के मुख्यमंत्री भी बने थे।

वर्ष 2017 में पंगल समुदाय के कट्टरपंथियों ने वहाँ की सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला की पार्टी से चुनाव लड़ने वाली उम्मीदवार को धमकाया था। उनकी पार्टी पीपल्स रिसर्जेंस एंड जस्टिस एलायंस (प्रजा) ने वाबगाई विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने वाली 44 वर्षीया नाजीमा बीबी को मैतेई पंगल (मणिपुरी मुस्लिम) समुदाय के कुछ मौलवियों ने कब्र की जमीन तक न देने की धमकी दी थी।

तब मणिपुर के सबसे पुराने मदरसे आलिया के प्रमुख और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मोहम्मद नूरूद्दीन कासमी ने बयान जारी किया था। उन्होंने बताया था कि राजनीति और शरीयत में अंतर होता है। मुस्लिम औरतों को पर्दे में रहने का हुक्म है। अगर चुनाव लड़ रही नजीमा पर्दे में नहीं हैं तो वो मुस्लिम नहीं हैं। इसी के साथ उन्होंने कहा था कि अगर किसी ने नजीमा को खलीफा बना दिया है तो वो कौम की बर्बादी के फरमान जैसा है।

इस पंगल समूह का एक छात्र JNU से गिरफ्तार भी हो चुका है। इसका नाम चिंगीज खान था जो PHD कर रहा था। इस गिरफ्तारी की जानकारी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने 10 अप्रैल 2020 को अपने ट्विटर हैंडल से दी थी। उस समय इसे रिहा करवाने के लिए अभियान छेड़ने की भी अपील की गई थी। उस ट्वीट में बरखा दत्त और राजदीप सरदेसाई को भी टैग किया गया था। इस आरोपित पर भड़काऊ लेख लिखने की धाराएं मणिपुर पुलिस ने लगाई थीं।

PLA के आतंकी भारतीय सुरक्षा बलों से लगातार गुरिल्ला युद्ध लड़ते रहे हैं। 90 के दशक में इस समूह ने स्थानीय लोगों की सहानभूति पाने मणिपुर पुलिस के जवानों पर हमला न करने का ऐलान किया था। जुलाई 2020 में भी पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने असम रायफल्स के जवानों पर घात लगा कर हमला किया था। इस हमले में 3 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे।

साल 2012 में एनआईए ने बड़ा खुलासा करते हुए इस समूह की नक्सलियों से मिलीभगत की पोल खोल दी थी। उसी समय इन आतंकी दल के चीन से संबंधो और समर्थन का भी खुलासा हुआ था। तब NIA के खुलासे में सामने आया था कि माओवादियों ने 2006 से 2011 के बीच चीनी शस्त्रों और हथियारों को म्यामांर से कोलकाता होते हुए गुवाहाटी पहुँचाया था। इस संगठन के सिद्धांत और विचारधारा चीन की सेना पीएलए से काफी मिलती-जुलती है।

साल 2018 में भारत सरकार ने मणिपुर के 8 उग्रवादी गुटों पर बैन बढ़ाया था। गृह मंत्रालय ने PLA के साथ इसकी राजनैतिक शाखा RPF, UNLF को भी प्रतिबंधित किया था। इस समूह का सैनिक विभाग भी है। गृह मंत्रालय ने इसके सैन्य विंग MPA, PREPAK और इसके सैन्य विंग रेड आर्मी, KCP और इसके सैन्य विंग, KYKL, द कॉर्डिनेशन कमिटी और ASUK पर 5 साल का प्रतिबंध बढ़ा दिया था।

वर्ष 2009 में इस आतंकी समूह के एक सदस्य सार्जेट रॉनी को गिरफ्तार किया गया था। लम्बी पूछताछ में उसने इस समूह का रिश्ता चीन से होना स्वीकार किया था। उसने यह भी कबूल किया था कि 16 आतंकी चीन से ट्रेनिंग ले कर भारत आतंक फैलाने आए थे। गिरफ्तार आतंकी रॉनी ने उत्‍तर प्रदेश से शिक्षा पूरी कर के उत्‍तराखंड के पंतनगर के कृषि महाविद्यालय से कृषि विज्ञान की डिग्री हासिल किया था।

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में C-60 कमांडो के साथ मुठभेड़ में शीर्ष कमांडर सहित 26 नक्सली ढेर, 4 पुलिसकर्मी भी जख्मी

देश की सुरक्षा और शांति में बाधा बने नक्सलियों के सफाये का काम प्राथमिकता के आधार पर जारी है। महाराष्ट्र पुलिस ने शनिवार (13 नवंबर) को गढ़चिरौली के जंगलों में 26 नक्सलियों को मार गिराया है। इस ऑपरेशन में पुलिस के 4 जवान भी घायल हो गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए नागपुर भेजा गया है। कहा जा रहा है कि मारे गए नक्सलियों में एक शीर्ष कमांडर भी शामिल है। महाराष्ट्र पुलिस के नक्सल रोधी स्पेशल स्क्वॉयड C-60 कमांडो दस्ते ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया।

गढ़चिरौली के एसपी अंकित गोयल ने इस ऑपरेशन के बारे में जानकारी दी। गोयल ने बताया कि मुठभेड़ सुबह 7 बजे मर्दिनटोला वन क्षेत्र के कोरची में हुई। ऑपरेशन को अंजाम देने वाली C-60 पुलिस कमांडो का नेतृत्व एएसपी सौम्या मुंडे कर रही थी। मुंडे के नेतृत्व में तलाशी अभियान चला रही थी। मारे गए नक्सलियों की पहचान को अभी उजागर नहीं किया गया है। कहा जा रहा है कि मारे गए नक्सलियों में एक शीर्ष कमांडर भी शामिल है।

दरअसल, पुलिस को सूचना मिली थी कि जिले के कोरची तालुके के ग्यारहबत्ती कोटगुल इलाके के जंगलों में नक्सलियों ने शिविर लगाए हैं। सूचना मिलते ही पुलिस की C-60 टीम को तलाशी अभियान के लिए भेज दिया गया। इसके बाद पुलिस की कमांडो टीम एएसपी सौम्या मुंडे के नेतृत्व में घने जंगलों में नक्सलियों की टोह के लिए निकल पड़ी।

पुलिस टीम जैसे ही उनके ठिकाने के पास पहुँची, नक्सलियों को इसकी जानकारी मिल गई और उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस टीम ने भी जवाबी कार्रवाई की। दोनों तरफ से कई घंटे तक चली इस मुठभेड़ में पुलिस ने 26 नक्सलियों को मार गिराया। इसके साथ ही पुलिस ने उनके शिविरों को भी ध्वस्त कर दिया।

महाराष्ट्र के गृहमंत्री दिलीप वलसे पाटिल ने 26 नक्सलियों को मार गिराने पर गढ़चिरौली पुलिस के साथ-साथ C-60 कमांडो को बधाई दी। उन्होंने जिले के पुलिस अधीक्षक अंकित गोयल के नेतृत्व की भी जमकर तारीफ की है। मुंबई से 920 दूर गढ़चिरौली जिला नक्सली गतिविधियों के लिए कुख्यात है। यहाँ के घने जंगल नक्सलियों के लिए पनाहगाह बने हैं।

बीते गुरुवार को महाराष्ट्र पुलिस ने एक नक्सली को गिरफ्तार कर बड़ी कामयाबी हासिल की थी। पुलिस ने इसी इलाके से कुख्यात नक्सली मंगारु मांडवी को गिरफ्तार किया था। मंगारु पर सरकार ने 2 लाख रुपये का सरकार इनाम रखा था। पुलिस के मुताबिक, मंगारु के खिलाफ हत्या और पुलिस पर हमला करने जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं।

नक्सलियों को उत्पात को देखते हुए कई राज्यों ने स्पेशल टीम बना रखी है। नक्सल प्रभावित आंध्र प्रदेश पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन के लिए ग्रेहाउंड यूनिट बना रखी है। इस यूनिट के जवान नक्सलियों की ड्रेस में जंगलों में रहते हैं और उनके बारे में सूचनाएँ जुटाकर उनका सफाया करते हैं। इसी तरह महाराष्ट्र में नक्सल रोधी स्पेशल स्क्वॉयड C-60 यूनिट तैयार की गई है। इस यूनिट में राज्य पुलिस के 60 सबसे तेज-तर्रार जवानों को शामिल किया गया है। ये जवान आधुनिक हथियारों से लैस होते हैं और नक्सलियों की तरह जंगलों में रहकर ही उनके बारे में सूचनाएँ जुटाते हैं।

मुश्किल में दिल्ली, प्रदूषण ने बिगाड़े हालात तो लगा पॉल्यूशन वाला लॉकडाउन! SC की फटकार के बाद एक्शन में केजरीवाल सरकार

देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। दिल्ली में आसमान में स्मॉग की जमती परत के बीच सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को दिल्ली में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए आपातकालीन उपाय करने को कहा था। शीर्ष अदालत के आदेश के बाद अब दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में अगले एक सप्ताह तक के लिए स्कूलों को बंद कर दिया है और सभी सरकारी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम दे दिया गया है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज शाम घोषणा की कि राष्ट्रीय राजधानी में स्कूल सोमवार से एक सप्ताह के लिए बंद रहेंगे। उन्होंने कहा कि स्कूल बंद रहेंगे लेकिन ऑनलाइन क्लासेस चलेंगी ताकि बच्चों को प्रदूषित हवा में साँस न लेनी पड़े।

केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के सरकारी कार्यालयों के लिए भी इसी तरह का आदेश जारी किया है। इसके तहत शत-प्रतिशत सरकारी कर्मचारी अपने घरों से काम करेंगे। इसके अलावा केजरीवाल सरकार निजी कार्यालयों को भी यथासंभव वर्क फ्रॉम होम (डब्ल्यूएफएच) करने के लिए एक एडवाइजरी जारी करने की तैयारी कर रही है। गौरतलब है कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान ज्यादातर निजी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम का ऑप्शन दिया था और अब उसी मॉडल को प्रदूषण के लिए अपनाना पड़ेगा।

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि निर्माण कार्यों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए 14 से 17 तक निर्माण गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2-3 दिनों के लिए पूर्ण लॉकडाउन लागू करने के सुझाव के बारे में बात करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वे शीर्ष अदालत के सामने प्रस्तुत करने के लिए एक प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हालाँकि इस कदम को फिलहाल लागू नहीं किया जा रहा है, लेकिन यह बहुत बड़ा कदम होगा। अगर प्रदूषण के हालात बदतर होते हैं तो सरकार वही कदम उठाएगी।

हालाँकि, उससे पहले दिल्ली सरकार केंद्र सरकार, CPCB, SAFAR को विश्वास में लेकर सभी एजेंसियों से चर्चा कर प्रस्ताव तैयार करेगी। केजरीवाल ने कहा कि हालात बिगड़ने पर सभी निजी वाहन, परिवहन, निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों को रोका जा सकता है।

गौरतलब है कि दिल्ली की खराब होती हवा को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से स्थिति में सुधार के लिए तत्काल कदम उठाने को कहा था। कोर्ट ने कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी में हवा की गुणवत्ता इस हद तक खराब हो गई है कि लोग अब घर पर मास्क पहन रहे हैं। इन हालातों में अदालत ने सरकार से जरूरत पड़ने पर 2-3 दिनों के लिए कंप्लीट लॉकडाउन करने को कहा था।

इसके साथ ही पंजाब के किसानों द्वारा पराली जलाने को जिम्मेदार ठहराने से इनकार करते हुए कहा कि आजकल किसानों को दोष देने का फैशन बन गया है। भले ही दिल्ली की हवा कुछ दिन पहले ही बिगड़ी हो, लेकिन अदालत ने दीवाली के पटाखों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है।

‘अब आजमगढ़ को ‘आर्यमगढ़’ बनने से कोई नहीं रोक सकता’: क्या एक और जिले का नाम बदलने जा रहे हैं CM योगी?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार (13 नवंबर 2021) को आजमगढ़ में स्टेट यूनिवर्सिटी के शिलान्यास के मौके पर ऐसा बयान दिया है, जिसके बाद अब प्रदेश में एक और जिले का नाम बदलने के कयास लगाए जाने लगे हैं। सीएम योगी ने कहा कि इस विश्वविद्यालय के बनने के बाद आजमगढ़ को ‘आर्यमगढ़’ बनने से कोई नहीं रोक पाएगा और इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए।

रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि एक वक्त ऐसा भी था, जब आजमगढ़ में वंदेमातरम गाने पर हत्या कर दी जाती थी, लेकिन अब यहाँ कोई ऐसा करने का साहस नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि 2017 और 2014 से पहले आजमगढ़ का रहने वाला व्यक्ति कहीं जाता था तो लोग उसे किराए पर कमरा तक नहीं देते थे। उनके सामने पहचान का संकट खड़ा हो गया था। सीएम योगी ने आगे कहा, “यह विश्वविद्यालय, जिसकी आज आधारशिला रखी जा रही है, आजमगढ़ को सचमुच आर्यमगढ़ बना ही देगा। इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए।”

उन्होंने साल 2007 का जिक्र करते हुए कहा कि इसी आजमगढ़ में अजीत राय की हत्या केवल इसलिए कर दी गई थी, क्योंकि वे एबीवीपी के कार्यकर्ता थे। इसी आजमगढ़ में उन पर (सीएम योगी पर) हमला हुआ था। उन्होंने कहा, “आपको ये समझना होगा कि आपके सामने पहचान का संकट खड़े करने वाले ये वही लोग थे, जो जाति के नाम पर लोगों को बाँटते थे और अपने परिवार के लिए (धन) बटोरते थे।”

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को पूर्वांचल की रीढ़ करार देते हुए सीएम योगी ने कहा, “मुझे याद है जब इस सरकार का गठन हो रहा था तो माननीय अमित शाह ने कहा था कि पूर्वांचल एक्सप्रेस वे को ऐसे बनाएँ कि ये आजमगढ़ और पूर्वी उत्तर प्रदेश के विकास की रीढ़ बन जाए। आज यह एक्सप्रेस वे आपके विकास की धुरी बना हुआ है। आजमगढ़ में एयरपोर्ट बन रहा है, जिसका लगभग 95 फीसदी पूरा हो चुका है।”

नौकरियों का किया जिक्र

सीएम योगी आदित्यनाथ ने भाषण के दौरान बताया कि आज प्रदेश के अंदर 4.5 लाख लोगों को सरकारी नौकरी और लगभग 3 लाख नौजवानों को संविदा के आधार पर नौकरी दी गई है। इस तरह साढ़े सात लाख लोगों को सरकारी नौकरी दी गई है।

CM योगी के राज में पूर्वांचल ‘मच्छर और माफिया’ दोनों से मुक्त : आजमगढ़ में अमित शाह ने साधा सपा के ‘JAM’ पर निशाना

उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे प्रदेश की सियासी सरगर्मियाँ तेज हो रही हैं। इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दो दिवसीय यूपी के दौरे पर हैं। यहाँ उन्होंने आजमगढ़ में स्टेट यूनिवर्सिटी का शिलान्यास करने के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पहले आजमगढ़ आतंकवाद और कट्टरता के लिए कुख्यात था, लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ ने यहाँ के माहौल को बदल दिया है। उन्होंने आजमगढ़ को गुंडाराज और माफियाराज से मुक्ति दिलाया है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने सपा और बसपा पर निशाना साधा। उन्होंने आजम खान, मुख्तार अंसारी और मोहम्मद अली जिन्ना का जिक्र करते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश पर कटाक्ष किया और JAM का अर्थ बताया। उन्होंने कहा कि सपा के लिए JAM का अर्थ J से जिन्ना, A से आजम खान, और M से मुख्तार अंसारी है, जबिक हमारी सरकार ने भी JAM का आविश्कार किया है, जिसका अर्थ J से जनधन बैंक खाते, A से आधार कार्ड और हर M से आदमी को मोबाइल है। उन्होंने ये भी कहा, “जैसे ही चुनाव नजदीक आया तो अब अखिलेश यादव को जिन्ना महान लगने लगा है। क्योंकि चुनावी मौसम आया है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं योगी सरकार को एक सर्टिफिकेट देकर जाना चाहता हूँ कि उन्होंने पूर्वांचल को ‘मच्छर और माफिया’ दोनों से मुक्त कर दिया है।”

पश्चिमी यूपी के कैराना में हुए पलायन का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि पहले कैराना से लोग पलायन करने के लिए मजबूर थे, लेकिन अब यहाँ कानून का राज है। हालात ये थे कि बेटियाँ घर से बाहर निकल नहीं पाती थीं, लेकिन अब गहने पहनकर स्कूटी पर सवार होकर 16 साल की लड़की भी रात के 12 बजे यूपी की सड़कों पर निकल सकती है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ

केंद्रीय गृह मंत्री ने सीएम योगी आदित्यनाथ के कामकाज की तारीफ करते हुए कहा कि 2017 में हमने राज्य में 10 नए विश्वविद्यालय की स्थापना करने का वादा किया था और ये 10वाँ विश्वविद्यालय है।

सीएम ने ये भी कहा कि पहले राज्य में तुष्टिकरण, जातिवाद और परिवारवाद का बोलबाला था, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। सीएम योगी ने इन सब को खत्म किया है। गृह मंत्री ने बताया कि आजमगढ़ में बनने वाला विश्वविद्यालय राजा सुहेलदेव के नाम से जाना जाएगा।

कॉलेज में नमाज पढ़ने से रोकने पर शिक्षक-गार्ड से भिड़े मुस्लिम छात्र: NSUI समर्थन में उतरी तो ABVP ने कहा- सांप्रदायिकता नहीं फैलाने देंगे

राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित राजस्थान कॉलेज नमाज को लेकर सुर्ख़ियों में है। कॉलेज के कैम्पस के अंदर शुक्रवार (12 नवम्बर 2021) को नमाज़ पढ़ने वाले कुछ छात्रों को टोकने के बाद विवाद उठ खड़ा हुआ है। यह रोक-टोक कॉलेज के सुरक्षा गार्डों और शिक्षक ने की थी। नमाज़ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

राजस्थान भाजपा नेता लक्ष्मीकांत भरद्वाज का आरोप है कि नमाज़ पढ़ने के लिए मौलवी भी बुलाया गया था। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर घटना का वीडियो शेयर किया है। इसी के साथ उन्होंने लिखा, “जयपुर के सरकारी कॉलेज (राजस्थान कॉलेज) परिसर में ही इब्राहिम नमाज़ पढ़ रहा है, एक मौलवी भी दिख रहा है। धमकी और साथ में, फ़ीस देते हैं पढ़ेंगे नमाज़।”

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब कॉलेज में छात्रों के 2 समूह आमने-सामने आ गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने किसी भी हाल में कैम्पस के अंदर नई परम्परा शुरू नहीं होने देने का ऐलान किया है। दूसरी तरफ NSUI नमाज़ पढ़ने वालों के साथ खुलकर खड़ी हो गई है। NSUI ने कैम्पस में नमाज़ को सही ठहराया है। इसी के साथ इस संगठन ने नमाज़ से रोकने वाले सुरक्षा गार्डों और शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

शुक्रवार को इस घटना के बाद उपजे आक्रोश को कॉलेज प्रशासन ने जैसे-तैसे शांत कराया। NSUI के प्रदेश प्रवक्ता रमेश भाटी के अनुसार, नमाज़ पढ़ रहे लोगों को जबरदस्ती उठाया गया। नमाज़ से रोकने वालों को NSUI ने संकीर्ण सोच वाला बताया। इसके साथ ही शिक्षक और गार्ड को नहीं हटाने पर NSUI ने आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

इस घटना का एक और वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में नमाज़ पढ़ने वाले छात्र खुद को रोकने आये लोगों से बहस कर रहे हैं। वीडियो में वो बोलते दिखाई दे रहे हैं कि क्या आपका धर्म भ्रष्ट हो रहा है? इस वीडियो को शेयर करते हुए ABVP पदाधिकारी हुशियार मीणा ने लिखा, “राजस्थान की राजधानी जयपुर के राजस्थान कॉलेज में सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश करते हुए शांतिदूत। शिक्षा के मंदिर को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने देंगे। अशोक गहलोत जी अगर इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो हम चुप नहीं बैठेंगे। इसका विरोध करते हैं। ईंट जवाब पत्थर से देना जानते है!”

वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने नमाज़ रोकने वाले गार्ड और शिक्षक के समर्थन का ऐलान किया है। ABVP के प्रदेश मंत्री हुशियार मीणा ने आरोप लगाया है कि शिक्षा के केंद्र को धार्मिक अखाड़ा बनाने की साजिश चल रही है। जहाँ एक तरफ राजस्थान की गहलोत सरकार मंदिर निर्माण पर रोक लगा रही है तो दूसरी तरफ वही सरकार स्कूलों में नमाज़ अदा करा रही है। ABVP ऐसी कोई परम्परा किसी भी हाल में नहीं शुरू होने देगी।

‘त्रिपुरा में जो घटा ही नहीं, उस पर महाराष्ट्र में दंगे, मुस्लिम भीड़ ने मचाया उत्पात’: ठाकरे सरकार के गृहमंत्री ने की शांति की अपील

पिछले महीने त्रिपुरा में हुई घटना के नाम पर महाराष्ट्र सुलगने लगा है। राज्य के तीन शहरों अमरावती, नांदेड़ और मालेगाँव में शुक्रवार को कट्टरपंथी मुस्लिमों की उन्मादी भीड़ ने जमकर उत्पात मचाया और हिंदुओं को टारगेट कर हमले किए। यह सिलसिला आज (शनिवार, 13 नवंबर 2021) को भी जारी रहा। इसी कड़ी में आज हिंदू संगठनों ने भी बंद का आह्वान किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी दंगाइयों की भीड़ द्वारा मचाए गए उत्पात के बाद महाराष्ट्र के गृह मंत्री दिलीप वालसे पाटिल ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए इस घटना की निंदा की। पाटिल के मुताबिक, उन्होंने इस मामले में अमरावती की सांसद नवनीत राणा और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस से भी शांति बहाली को लेकर मदद माँगी है।

इस बीच एक वीडियो जारी कर सांसद नवनीत राणा ने भी घटना की निंदा करते हुए नेताओं और नागिरकों से शांति बनाए रखने की अपील की है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य के मंत्रियों से इस मामले पर सियासी रोटी नहीं सेंकने की अपील भी की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमरावती के हालात नाजुक बने हुए हैं। हिंसक विरोध के चलते पुलिस ने लाठीचार्ज के साथ ही जिले में कर्फ्यू लगा दिया है। इस मामले में 20 एफआईआर और 20 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, शुक्रवार को करीब 8,000 मुस्लिमों की भीड़ त्रिपुरा के मामले में अमरावती के जिलाधिकारी कार्यालय को ज्ञापन सौंपने के लिए निकली थी।

फडणवीस ने की शांति बनाए रखने की अपील

बीजेपी नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र में उन्मादी मुस्लिमों की भीड़ द्वारा मचाए गए उत्पात की निंदा करते हुए कहा, “त्रिपुरा में जो घटना ही नहीं घटी, उसको लेकर जिस तरह से महाराष्ट्र में दंगे हो रहे हैं। ये बिल्कुल गलत है। त्रिपुरा में जिस मस्जिद को जलाए जाने की अफवाह उड़ाई गई, वहाँ की पुलिस ने उस मस्जिद की फोटो जारी की है। इसके इलावा सोशल मीडिया पर सर्कुलेट की जा रही फेक फोटो का भी पर्दाफाश किया है।”

बीजेपी नेता ने आगे कहा, “महाराष्ट्र में जिस प्रकार से मोर्चे निकाले गए और उनमें जिस तरह की हिंसा हुई और उसमें हिंदुओं की दुकानों को जलाने की कोशिश की गई। हम इस घटना की निंदा करते हैं।”

इसके साथ ही फडणवीस ने अमरावती में कल मुस्लिमों द्वारा किए दंगे के बाद आज मोर्चे निकाले गए उसकी भी निंदा करते हुए इसे सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने वाली घटना करार दिया। उन्होंने लोगों से हिंसा नहीं करने की अपील की। बीजेपी नेता ने राज्य की सत्ताधारी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार के जो नेता स्टेज पर जाकर भड़काऊ भाषण देते हैं और उसके बाद मोर्चे निकालते हैं तो इसकी भी जाँच होनी चाहिए और इन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

गौरतलब है कि त्रिपुरा की घटना के विरोध के नाम पर नांदेड़, अमरावती और मालेगाँव में मुस्लिमों की भीड़ ने जमकर दंगा किया। हिंदुओं की दुकानों में तोड़फोड़ की।

उदयपुर में आदिवासी युवक को बेल्ट से पीटा, झालावाड़ में लाठी-डंडों से युवक की पिटाई: राजस्थान के 2 वीडियो, खुलेआम हो रही वारदातें

राजस्थान के दो अलग-अलग जिलों से दो ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसके आधार पर विपक्षी भाजपा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार पर हमलावर है। एक वीडियो उदयपुर का है, तो दूसरा झालावाड़ का। दोनों जगह हिंसक भीड़ को दो अलग-अलग युवकों की पिटाई करते हुए देखा जा सकता है। जहाँ एक जगह बेल्ट से आदिवासी युवक की पिटाई हो रही है, एक जगह लाठी-डंडे से युवक को पीटा जा रहा है। बढ़ते अपराध और बलात्कार के मामलों के कारण राजस्थान सरकार पहले से ही निशाने पर है।

झालावाड़: जमीन के विवाद में युवक को स्त्री-पुरुषों ने पीटा

झालावाड़ में जमीन के मामूली विवाद में एक युवक के ऊपर कुछ स्त्री-पुरुष लाठी-डंडे लेकर चढ़ गए और बीच सड़क पर उसकी पिटाई की। ये घटना मनोहर थाने के तोड़नी जगन्नाथ गाँव में हुई है। घायल विजय सिंह ने बताया कि वो इलाके में एक चाय की दुकान पर बैठा हुआ था, तभी गढ़बोलिया गाँव के दो लोग अपनी पत्नियों के साथ वहाँ आ धमके। इसके बाद उन्होंने लाठी-डंडों से मारपीट शुरू कर दी। काफी देर तक उन्होंने युवक की पिटाई जारी रखी।

बाजार में मौजूद अन्य लोगों ने सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो बना कर वायरल कर दिया। पीड़ित विजय सिंह ने बताया कि आरोपितों के साथ उसका लंबे समय से जमीनी विवाद चल रहा है, जिस कारण उन्होंने सरेराम आकर हमला बोल दिया। राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने इस पर टिप्पणी करते हुए तंज कसा, “इसे लिंचिंग नहीं माना जाए, क्योंकि ये कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान के झालावाड़ में हो रही है।” कई अन्य लोगों ने भी इस घटना की आलोचना की।

उदयपुर: आदिवासी युवक की पिटाई

वहीं दूसरा वीडियो उदयपुर से सामने आया है, जहाँ एक आदिवासी युवक की बेल्ट और लकड़ियों से पिटाई की जा रही है। आरोप लगाया गया कि मानसिक रूप से बीमार युवक एक व्यक्ति की बाइक लेकर गलती से चला गया था। इस पर उसे चोर बताते हुए उसकी पिटाई शुरू कर दी गई। मावली थाना क्षेत्र के विशनपुरा गाँव के नजदीक हुई इस घटना के मामले में पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार भी किया है। सूरज सुथार और सुरेंद्र वैष्णव के विरुद्ध SC/ST एक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है।

मावली के पुलिस अधिकारी हनुमंत सिंह भाटी ने जानकारी दी कि बाइक में चाभी लगी हुई थी, ऐसे में मानसिक रूप से बीमार पीड़ित उसे लेकर चला गया। इसके बाद दो युवक चोर समझ कर उसे पीटने लगे। काफी देर तक उसकी पिटाई की गई और पुरानी वारदातों के बारे में उससे पूछा गया। उसे जमीन पर जबरन बिठाया और दोनों युवकों ने उसकी पिटाई की।

‘… तो हम लोग अंग्रेजों के जूते-चप्पल साफ कर रहे होते’: अब कंगना को घेरने उतरे तेज प्रताप, सफाई वाली तस्वीर शेयर कर मारा ताना

फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के “भीख में मिली आज़ादी” वाले बयान पर घमासान जारी है। इस मुद्दे पर ताजा बयान लालू प्रसाद यादव के बेटे तेज प्रताप का आया है। तेज प्रताप ने कू प्रोफ़ाइल से बयान जारी कर कंगना के बहाने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा। तेज प्रताप ने कहा कि वीर बलिदान नहीं होते तो भारतीय अँग्रेजों के घर जूते-चप्पल साफ कर रहे होते।

तेज प्रताप ने लिखा है, “वीर अगर देश की खातिर बलिदान ना देते तो आज भी हम किसी अँग्रेज के घर जूते-चप्पल साफ कर रहे होते।” वे आगे लिखते हैं कि जब कुछ लोग अँग्रेजों से माफी माँग रहे थे, तब देश के वीर फाँसी का फंदा चूम रहे थे। तो यह कहना कि देश को आजादी 2014 के बाद मिली है, शहीदों का अपमान है। उन्हें अपमानित ना किया जाए। 

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जब कुछ लोग अंग्रेजों से माफी मांग रहे थे तब देश के वीर फांसी का फंदा चूम रहेथे तोयह कह कर की देश को आजादी 2014के बाद मिली है देश के खातिर शहीद हुए सवतंत्रता सेनानियों को तो अपमानित ना करें अगर वह देश के खातिर बलिदान ना देते तो आज भी किसी अंग्रेज के घरमें जूते चप्पल साफ कर रहे होते TEJ PRATAP YADAV (@tejpratapyadavofficial) 13 Nov 2021

तेज प्रताप से पहले शुक्रवार को लालू की बेटी डॉ. रोहिणी आचार्य ने भी कंगना पर हमला बोला था। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से कहा गया, “2014 में कथित आज़ादी दिलाने वाले से, उसी आज़ादी की बदौलत Barter System योजना अंतर्गत पद्मश्री प्राप्त करने वाली “थेलनी” की शादी करा देनी चाहिए ताकि उसे 1947 में हमारे क्रांतिकारियों व महापुरुषों के सदियों लंबे संघर्षों, त्यागों, बलिदानों और वीरता से प्राप्त स्वतंत्रता ‘भीख’ ना लगे।”

तेज प्रताप यादव ने अपने कू एकाउंट से कंगना रनौत के जिस फोटो को शेयर किया है, उसे कंगना ने 31 दिसंबर 2020 को अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया था। उस समय कंगना रनौत नए साल की तैयारी कर रही थीं। उन्होंने ये फोटो शेयर करते हुए लिखा था, “जब से मैं घर आई हूँ, सिर्फ सफाई और सफाई ही कर रही हूँ। लगातार सफाई के चलते मैं खुद को अपनी ही चीजों की गुलाम जैसी महसूस कर रही हूँ। आशा है कि यह काम आज पूरा हो जाएगा और मैं एक रानी की तरह 2021 में प्रवेश करूँगी।”

गौरतलब है कि एक TV कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना ने कहा था कि देश को असली आज़ादी साल 2014 में मिली। उन्होंने 1947 वाली आज़ादी को ‘भीख’ बताया था। उनके बयान की काफी आलोचना हो रही है।

’70 वर्षों से रो रही थीं भारत माता, 2014 से शुरू किया मुस्कुराना’: गोविंद देवगिरि ने पूछा – राम को काल्पनिक बताने का पाप किसने किया?

अयोध्या राम मंदिर के कोषाध्यक्ष और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य गोविंद देवगिरी महाराज का बयान इन दिनों सुर्खियों में है। उन्होंने पुणे में शुक्रवार (12 नवंबर 2021) को कहा, “भारत माता 70 साल से खुश नहीं थी, लेकिन 2014 के बाद उसने थोड़ा-थोड़ा मुस्कुराना शुरू किया है।” 

गोविंद देवगिरी महाराज ने समग्र वंदे मातरम ग्रंथ प्रकाशन समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस इतिहास में मुगल को महान बताया जाए, छत्रपति शिवाजी महाराज के लिए महज 5 पंक्तियां लिखी जाएँ और महाराणा प्रताप को दूर फेंक दिया जाए, तो क्या वो इतिहास हमारा इतिहास है? गोविंद देवगिरी ने साम्यवाद पर निशाना साधते हुए कहा कि यही इतिहास हमको आज तक पढ़ाया गया, क्योंकि दिल्ली के तख्त के नीचे जो सारे साम्यवादी बैठे थे। उन्होंने शिक्षा का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में लेकर रखा था।

इसके अलावा उन्होंने परंपराओं और इतिहास झुठलाने वालों को भी करारा जवाब देते हुए कहा, ”हमारी परंपराओं को झुठलाकर, हमारे इतिहास-भूगोल को झुठलाकर, हमारे तीर्थों को झुठलाकर, भगवान राम को काल्पनिक कहकर, राम सेतु किसी के द्वारा बनाया ही नहीं गया ये कहकर और इसका एफिडेविट देकर हमारी सरकारों ने जो पाप किया वो पाप आपके माथे पर भी लगा हुआ है।”  

बता दें कि हाल ही में पद्मश्री से सम्मानित की गई कंगना रनौत पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा था कि 1947 में जो आज़ादी मिली वो भीख थी, देश को असली स्वतंत्रता तो 2014 में मिली। इसको लेकर वामपंथी-कॉन्ग्रेसी गिरोह एक साथ कंगना पर टूट पड़ा और उनसे पद्मश्री छीन कर उन्हें गिरफ्तार करने की माँगे।