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शादीशुदा बाइक मैकेनिक साजिद ने समीर बन कर हिन्दू लड़की को फँसाया, धर्मांतरण करा बना दिया मुस्लिम: 14 महीने बंधक बना कर रखा

उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला बिजनौर जिले का है। यहाँ साजिद नाम के एक युवक ने समीर बनकर पहले जम्मू की युवती से दोस्ती की, उसके बाद उसे बिजनौर ले आया। इसके बाद आरोपित ने उसे अलग-अलग जगह 14 म​हीनों तक बंधक बनाकर रखा और बाद में उसका धर्मांतरण कराकर उसका नाम रीना से मुस्कान रख दिया। इस घटना की जानकारी जब हिंदू संगठनों को लगी तो वे पुलिस के साथ शहबाजपुर पहुँचे।

सोमवार (8 नवंबर, 2021) को उन्होंने पुलिस की मदद से बिजनौर जनपद के थाना कोतवाली क्षेत्र के गाँव शहबाजपुर से जम्मू जिला रियासी और तहसील माहौर के गाँव परापर निवासी रीना को बरामद किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, साजिद वहाँ पर आठ साल से बाइक मैकेनिक का काम करता था और लोगों को उसने अपना नाम समीर बता रखा था। दो साल पहले उसने उसी गाँव में रहने वाली रीना को अपनी दोस्ती के जाल में फँसा लिया और 2 सितंबर 2020 को वह उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले आया। यहाँ उसने युवती के साथ निकाह (कोर्ट मैरिज) किया और उसका धर्मांतरण कर दिया। धर्मांतरण के बाद उसने उसका नाम बदलकर रीना से मुस्कान रख दिया। पिछले साल से पीड़िता पिता जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ उसकी तलाश में लगे रहे, लेकिन पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली थी। 

निकाह के बाद साजिद युवती को किराए के मकान में लेकर रहता था। जब किसी को रीना के मुस्कान होने की बात पता चलती तो वह कमरा बदल देता था। पिछले कुछ दिनों से रीना काफी बीमार चल रही थी, जिसके चलते साजिद उसे अपने गाँव शहबाजपुर ले गया। उसने यहाँ एक बच्चे को भी जन्म दिया। इसकी सूचना मिलने के बाद हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पीड़िता को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया।

युवती की हालत खराब बताई जा रही है। पुलिस का कहना है कि एक दिन पहले ही पीड़िता ने एक बच्चे को जन्म दिया, जिसके चलते उसकी हालत काफी नाजुक है। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है। बता दें कि साजिद शादीशुदा था उसके चार बच्चे भी हैं। पुलिस ने पीड़िता के घरवालों को उसके बारे में सूचित कर दिया है।

‘लखनऊ में महापंचायत, 29 नवंबर से ट्रैक्टर लेकर संसद घेरेंगे 500 किसान’: आंदोलन के 1 साल पूरा होने पर राकेश टिकैत का ऐलान

‘किसान नेता’ राकेश टिकैत ने 29 नवंबर, 2021 (सोमवार) को ‘किसान आंदोलन’ के एक वर्ष पूरा होने के मौके पर संसद भवन के घेराव का ऐलान किया है। ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ की मंगलवार (9 नवंबर, 2021) को हुई बैठक में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान से दिल्ली के सभी मोर्चों पर भारी भीड़ जुटाने और बड़ी सभाएँ करने का प्रस्ताव पारित किया गया। बता दें कि संसद का शीतकालीन सत्र भी 29 नवंबर से ही शुरू हो रहा है।

बैठक में ‘किसान नेताओं’ ने निर्णय लिया कि 500 ऐसे किसानों को चुना जाएगा, जो संसद सत्र के अंत तक हर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से दिन संसद भवन जाएँगे। 28 नवंबर को मुंबई के आजाद मैदान में एक विशाल किसान-मजदूर महापंचायत का आयोजन करने का भी फैसला लिया गया। इसका आयोजन संयुक्त शेतकारी कामगार मोर्चा (SSKM) के बैनर तले महाराष्ट्र के 100 से अधिक संगठनों की तरफ से संयुक्त रूप से किया जाएगा। बता दें कि 26 नवंबर को तीनों कृषि कानूनों के विरुद्ध शुरू हुए ‘किसान आंदोलन’ का एक वर्ष पूरा हो रहा है।

2020 में 26 नवंबर के दिन ही किसान प्रदर्शनकारियों की भीड़ हरियाणा में घुसी थी और फिर अगले दिन कुंडली बॉर्डर पर बैठ कर जीटी रोड को जाम कर दिया गया था। गाजीपुर बॉर्डर पर किसान अब भी राकेश टिकैत की अगुआई में धरने पर बैठे हैं। केंद्र सरकार ने अपनी तरफ से पूरे प्रयास किए और केंद्रीय मंत्रियों ने किसान नेताओं के साथ कई दौर की बैठकें की, लेकिन सहमति नहीं बनी। केंद्र सरकार कहती रही है कि बातचीत के रास्ते अब भी खुले हुए हैं।

राकेश टिकैत ने उत्तर प्रदेश की राजधानी में भी रैली करने की घोषणा करते हुए कहा, “लखनऊ में 22 नवंबर, 2021 (सोमवार) को आयोजित किसान महापंचायत ऐतिहासिक होगी। SKM की यह महापंचायत किसान विरोधी सरकार और तीनों काले कानूनों के विरोध में ताबूत में आखिरी कील साबित होगी। अब पूर्वांचल में भी अन्नदाता का आंदोलन और तेज होगा।” इसके जरिए पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ बिहार के कई हिस्सों में भी ‘किसान आंदोलन’ का प्रभाव जमाने की कोशिश की जा रही है

वहीं राकेश टिकैत ने प्रदर्शन में शामिल नौजवानों से कहा कि हम ट्रैक्टर चला लेते हैं, लेकिन हमें ट्विटर चलाना नहीं आता। उन्होंने कहा कि इसमें हम कमजोर हैं, इसीलिए नौजवानों को ट्विटर चलाने के लिए आगे आना चाहिए। राकेश टिकैत ने कहा कि ट्रैक्टर हम चला लेंगे। वहीं उन्होंने भाजपा के आईटी सेल और ‘गोदी मीडिया’ की बात करते हुए दावा किया कि न्यूज़ चैनलों की रिपोर्ट भाजपा तैयार कर रही है। चैनलों के बहिष्कार का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि एक आईटी सेल के कर्मचारी पर भाजपा 20,000 से लेकर 2 लालः रुपए तक खर्च करती है।

राकेश टिकैत ने कहा, “किसी की साजिश से हताश न हों, बहकावे में न आएँ। हमारे नौजवानों को भी अब आगे आना चाहिए। वह ट्विटर संभालें, हम ट्रैक्टर संभाल लेंगे। आंदोलन तोड़ने के प्रयास में लगे मीडिया से हमें बचना है। वह हवा में बातें करते हैं। किसान विरोधी चैनलों की लिस्ट तैयार कर रहे हैं, जरूरत पड़ने पर उनका बहिष्कार कर देंगे।” बैठक में पूछा गया कि किसी ‘किसान नेता’ की सरकार से अनौपचारिक बातचीत भी हुई है तो बताएँ। साथ ही लखीमपुर-खीरी हिंसा और उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन व रैलियों के जगहों पर चर्चाएँ हुईं।

छठ पर्व पर 10 नवंबर को यूपी में रहेगा अवकाश: योगी सरकार ने जारी किया आदेश

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने छठ पर्व पर अवकाश घोषित किया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने आदेश जारी किया है कि जिन जिलों में छठ का पर्व बड़े स्तर पर मनाया जाता है, वहाँ के जिलाधिकारी 10 नवंबर को स्थानीय स्तर पर अवकाश घोषित कर सकते हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार (8 नवंबर) को अपने सरकारी आवास पर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए छठ पूजा व कार्तिक मास में होने वाले त्योहारों के प्रबंधन के बारे में जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक की।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी किया गया आदेश

उन्होंने कहा कि 10 नवंबर को छठ का पर्व है। छठ के अवसर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, लखनऊ आदि महानगरों में नदियों, सरोवरों आदि पर भीड़भाड़ की संभावना रहती है। ऐसे में नदियों, तालाबों आदि के तटों पर साफ-सफाई तथा सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की जाए।

बता दें कि राज्य के डीजीपी मुकुल गोयल ने छठ पर्व से संबंधित आयोजन स्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आयोजन स्थलों पर सादे कपड़ों में महिला पुलिस कर्मियों की भी ड्यूटी लगाई जाए और कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया जाए।

अगली T20 सीरीज में रोहित शर्मा को टीम इंडिया की कमान: विराट कोहली और मोहम्मद शमी को आराम, ये बने उप-कप्तान

न्यूजीलैंड के विरुद्ध होने वाली T20 सीरीज के लिए सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा को भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान नियुक्त किया गया है। वहीं मौजूदा कप्तान विराट कोहली को आराम दिया गया है। मंगलवार (9 नवंबर, 2021) को ‘भारतीय क्रिकेट कन्ट्रोल बोर्ड (BCCI)’ ने ये घोषणा की। साथ ही हार्दिक पंड्या को भी इस टीम में जगह नहीं मिली है। सीनियर लेग स्पिनर यजुवेंद्र चहल और तेज़ गेंदबाज मोहम्मद सिराज को टीम में वापस बुलाया गया है।

साथ ही IPL में शानदार प्रदर्शन करने वाले हर्षल पटेल और ऑलराउंडर वेंकटेश अय्यर को भी इस टीम में शामिल किया गया है। 17 नवंबर, 2021 से न्यूजीलैंड के विरुद्ध तीन T20 मैचों की श्रृंखला शुरू होगी। विराट कोहली ने पहले ही कह दिया था कि T20 टीम के कप्तान के रूप में मौजूदा विश्व कप उनका आखिरी होगा। भारत का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा और उसे पाकिस्तान और न्यूजीलैंड से हार का सामना करना पड़ा। अफगानिस्तान, स्कॉटलैंड और नामीबिया जैसी छोटी टीमों से जीत भले ही मिली, लेकिन टीम इंडिया सेमीफाइनल में जगह नहीं बना पाई।

BCCI ने जिस 16 सदस्यीय टीम का ऐलान किया है, वो इस प्रकार है – रोहित शर्मा (कप्तान), केेएल राहुल (उप-कप्तान), ऋतुराज गायकवाड़, श्रेयस अय्यर, सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), वेंकटेश अय्यर, यजुवेंद्र चहल, रविचंद्रन आश्विन, अक्षर पटेल, आवेश खान, भुवनेश्वर कुमार, दीपक चाहर, हर्षल पटेल और मोहम्मद सिराज। हर्षल पटेल और वेंकटेश अय्यर ने अभी तक एक भी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है।

न्यूजीलैंड के साथ 3 मैचों की श्रृंखला 17 नवंबर (बुधवार) को जयपुर में, 19 नवंबर (शुक्रवार) को राँची में और 21 नवंबर (रविवार) को कोलकाता में खेली जाएगी। टीम इंडिया में अब बहुत कुछ बदल जाएगा क्योंकि पिछले साढ़े 4 वर्षों से मुख्य कोच रहे रवि शास्त्री की जगह अब राहुल द्रविड़ ने ली है। इस सीरीज में मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह जैसे तेज़ गेंदबाजों को भी आराम दिया गया है। फ़िलहाल भारतीय टीम अपने प्रदर्शन को लेकर खासी आलोचना का शिकार हो रही है।

‘फौजी का बेटा हूँ, फौजियों के परिवारों का भाजपा से खास कनेक्शन’: CM धामी ने कहा – बदलेगा इतिहास, सत्ता में लौटेगी BJP

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पूरा विश्वास है कि भाजपा 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में दोबारा सत्ता में लौटेगी। अब जब उत्तराखंड ने अपने गठन के 21 वर्ष पूरे कर लिए हैं, यहाँ अब तक कोई भी दल लगातार दूसरी बार सत्ता में नहीं लौटा है। पिछले कुछ महीने में यहाँ जनता ने 3 मुख्यमंत्रियों का चेहरा देख लिया है, जबकि भाजपा के पास पूर्ण बहुमत है। 4 वर्षों के कार्यकाल में त्रिवेंद्र सिंह रावत से संतों व जनता की नाराजगी के कारण तीर्थ सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया गया था।

लेकिन, तीरथ सिंह रावत ये नाराजगी दूर नहीं कर पाए और उनके बयान विवादों का विषय बने सो अलग। उनसे 4 महीने में ही इस्तीफा ले लिया गया और युवा पुष्कर सिंह धामी को पहाड़ी प्रदेश की कमान मुश्किल समय में सौंपी गई। उत्तर प्रदेश से काट कर उत्तराखंड के गठन के 21 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘न्यूज़ 18’ को दिए गए इंटरव्यू में कहा है कि पिछले दो दशकों में राज्य में काफी विकास हुआ है और केंद्र में अटल बिहार वाजपेयी की सरकार के दौरान ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ से गाँवों तक सड़कें पहुँचीं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे केदारनाथ के हालिया दौरे में पीएम मोदी ने कहा कि ये दौर उत्तराखंड का है। उन्होंने पहाड़ों तक रेल कनेक्टिविटी का जिक्र करते हुए कहा कि सीमावर्ती इलाकों पर खास ध्यान दिया जा रहा है उन्हें पूरा विश्वास है कि 25 वर्ष पूरा करने तक उत्तराखंड कई बड़े पड़ावों को पार करेगा। 21 वर्षों में 11 मुख्यमंत्री देखने और भाजपा द्वारा 3 मुख्यमंत्री बदलने पर सीएम धामी ने कहा कि इससे विकास कार्यों की प्रगति या निरंतरता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।

उन्होंने कहा कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है और वो विकास कार्यों को तेज़ करने की अपनी तरफ से सर्वश्रेष्ठ कोशिश कर रहे हैं। उनके लिए कम समय बचने पर सीएम धामी ने कहा कि चुनौती भी एक तरह का मौका ही होता है। उन्होंने कहा कि वो भले ही वनडे मैच के बचे हुए 10 ओवर ही खेल रहे हों, लेकिन वो लक्ष्य को प्राप्त करेंगे और चुनाव बाद सत्ता में वापसी करेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के मतदाता अंपायर की भाँति सब देख रहे हैं और वो उनके काम का विश्लेषण कर के नतीजा तय करेंगे।

उन्होंने विश्वास जताया कि न सिर्फ उत्तराखंड आगे बढ़ेगा, 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा जीतेगी और सत्ता में लौटेगी। किसी भी सरकार के लगातार सत्ता में दोबारा न लौटने के उत्तराखंड के इतिहास को लेकर उन्होंने कहा कि हमलोग इस क्रम को तोड़ने में कामयाब होंगे और उत्तराखंड भाजपा को एक और मौका देकर एक नया इतिहास बनाएगा। हालिया उपचुनाव में पड़ोसी हिमाचल प्रदेश की चारों विधानसभा सीटें व एक लोकसभा सीट कॉन्ग्रेस के खाते में जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा भी तो हमारे पड़ोसी हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “किसान आंदोलन के बावजूद यूपी-हरियाणा में भाजपा ने अच्छा किया। मुझे विश्वास है कि हिमाचल प्रदेश की हार पर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ज़रूर मंथन कर रहा होगा। उत्तराखंड में कॉन्ग्रेस को हम एक राजनीतिक ताकत के रूप में नहीं देखते। वो द्वेषपूर्ण आंतरिक कलह से जूझ रहे हैं, जो आने वाले दिनों में और स्पष्ट दिखेगा। भाजपा में हम राज्य को आगे ले जाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। मुझे हर तरफ से समर्थन मिल रहा हूँ। मुझे वरिष्ठ नेताओं का मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है।”

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने कहा कि वो वरिष्ठों और मार्गदर्शकों को पूरा सम्मान देते हैं। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेता पार्टी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एवं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित शीर्ष आलाकमान का आशीर्वाद प्राप्त है। उन्होंने कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसकी उन्हें समझ है। पिछले विधानसभा चुनाव में 57 सीटें जीतने वाली भाजपा के ‘अबकी बार, 60 पार’ के नारे पर उन्होंने कहा कि वो जहाँ भी जा रहे हैं, लोग उनका स्वागत आशा और ऊर्जा के साथ करते हैं।

उन्होंने कहा, “इस राज्य में फौजियों के परिवारों की संख्या ज्यादा है, वो सेवा में हों या सेवानिवृत्त हों। मैं भी एक फौजी का बेटा हूँ। फौजियों के परिवारों का भाजपा से एक अलग जुड़ाव है। फौजियों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई योजनाएँ लॉन्च की हैं। केंद्र सरकार का समर्थन पूरा रहा है। लोग इसे जाते हैं, इसीलिए हम बड़े बहुमत के प्रति आशावान हैं। पार्टी टिकट को लेकर फ़िलहाल कोई सवाल नहीं है। ऐसे मामलों पर राष्ट्रीय नेतृत्व निर्णय लेता है। मैं फ़िलहाल राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर रहा हूँ।”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘देवस्थानम एक्ट’ को लेकर कहा कि वरिष्ठ नेता मनोहर कांत ध्यानी के नेतृत्व में एक समिति बनाई गई है, जिसने अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंप दी है और अब अंतिम रिपोर्ट की प्रतीक्षा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी हितधारकों से विचार-विमर्श कर के ही अंतिम फैसला होगा। भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बतौर सीएम पहली बार शामिल होने के अनुभव पर उन्होंने बताया कि उन्होंने यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के प्रस्ताव का समर्थन किया और उत्तराखंड में केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की प्रगति के विषय में बात की।

‘एक और फ्री सुविधा के लिए बधाई लघुकाय-लंपट जी’: कुमार विश्वास ने छठ व्रतियों की तस्वीर शेयर कर केजरीवाल पर कसा तंज

दिल्ली में छठ पर्व की शुरुआत पर श्रद्धालुओं ने यमुना नदी के जहरीले झाग के बीच खड़े होकर पूजा अर्चना की। इसको लेकर मशहूर कवि कुमार विश्वास ने श्रद्धालुओं की तस्वीर को ट्वीट करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तंज कसा है। उन्होंने ट्वीट किया, ”भगीरथ जी स्वर्ग से गंगा, बादलों के जिस मार्ग से उतार कर लाए थे ‘लघुकाय-लंपट’ जी, यमुना जी को उसी रास्ते दिल्ली ले आएँ हैं और वो भी मुफ्त (और हाँ, इस बार वायु-प्रदूषण की जिम्मेदारी हरियाणा के किसानों पर रहेगी, पंजाब वालों पर नहीं, क्योंकि वहाँ कुछ महीनों में चुनाव हैं)।”

दरअसल, बीते कुछ दिनों से यमुना में सफेद-सफेद झाग बड़े पैमाने पर तैरते हुए देखे जा सकते हैं। आम आदमी पार्टी के पूर्व सदस्य रहे कुमार विश्वास ने दो दिन पहले यानी 7 नवंबर को समाचार एजेंसी एएनआई के एक ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा था, ”दिल्ली को एक और ‘फ्री’ सुविधा के लिए बधाई। अब तो यमुना में बादल भी उतार दिए, गली-गली मुफ्त का नरक कोविड के दौरान दिखा ही दिया था। टैक्सपेयर्स के पैसे पर TV में कालनेमि-लाइव देखा ही होगा। अब पंजाब में यही कौशल दिखाने का अवसर दें, स्वराज-शिरोमणि लघुकाय आत्ममुग्ध धूर्तेश्वर’ को।”

कुमार विश्वास का यह तंज केजरीवाल के उन कथित वादों को लेकर है, जो उन्होंने सरकार बनने पर यमुना की सफाई के लिए किए थे। केजरीवाल सरकार के इतने सालों से सत्ता में रहने के बाद भी यमुना नदी की हालत जस की तस है। हर साल छठ पर्व पर श्रद्धालुओं को झाग के बीच खड़े होकर पूजा करनी पड़ती है।

वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष राघव चड्ढा ने एक बयान जारी कर बीते दिनों कहा था कि हरियाणा से काफी मात्रा में सीवेज और औद्योगिक कचरा छोड़े जाने के चलते दिल्ली के जल शोधन संयत्रों में उत्पादन प्रभावित हुआ है।

कंगना-रंगोली के खिलाफ कासिफ खान की याचिका मुंबई कोर्ट ने खारिज की, तबलीगी जमात पर ट्वीट से था नाराज

तबलीगी जमात मामले पर किए गए एक ट्वीट और उसका समर्थन करने के कारण कंगना रनौत और रंगोली चंदेल के ख़िलाफ़ मुंबई के कासिफ अली खान देशमुख नामक वकील ने एक केस किया हुआ था, अब इसी केस पर मुंबई की अंधेरी कोर्ट ने दोनों बहनों को राहत देते हुए कासिफ की याचिका को खारिज कर दिया है।

याचिकाकर्ता ने अपनी शिकायत में कहा था कि पिछले साल 15 अप्रैल को रंगोली ने अपने ट्विटर अकाउंट पर तबलीगी जमात के खिलाफ एक आपत्तिजनक बयान पोस्ट किया था। इसके तुरंत बाद, ट्विटर ने उनका सोशल मीडिया अकाउंट सस्पेंड कर दिया। कासिफ के मुताबिक चूँकि कंगना ने भी रंगोली के बयान का समर्थन दिया था तो इसलिए वह कहते हैं कि इन दोनों ने विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा दिया और असामंजस्य को पैदा किया। उनके अनुसार, दोनों आरोपितों ने मुस्लिम समुदाय की भावनाओं का अपमान किया था और उन्हें उकसाया था।

इस शिकायत के मिलने के बाद कोर्ट ने अंबोली थाने से आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 202 के तहत जाँच रिपोर्ट माँगी थी। रिपोर्ट मिलने के बाद मजिस्ट्रेट भागवत टी जीरापे (Bhagawat T Zirape) ने कहा कि आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 153-ए, 153-बी, 295-ए और धारा 505 के तहत कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट की मंजूरी मिलना जरूरी है। इसलिए वह बिन मंजूरी के केस को आगे नहीं बढ़ा सकते।

मजिस्ट्रेट ने सीपीसी की धारा 196 का हवाला देते हुए कहा कि वो बिन केंद्रीय सरकार, राज्य सरकार या डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की मंजूरी के मामले पर संज्ञान नहीं ले सकते और शिकायत में ऐसी किसी अनुमति को जोड़ा नहीं गया है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की शिकायत में कानूनी तौर पर दोष है। मंजूरी लिए बिना जारी किया गया आदेश टिकाऊ नहीं है। इसलिए उन्हें (कोर्ट को) इस केस को आगे बढ़ाने के पर्याप्त आधार नहीं मिले। वहीं कासिफ ने इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा कि वो कलेक्टर से मंजूरी के लिए एप्लीकेशन दे रहे हैं। केस सिर्फ मंजूरी आदेश न होने के कारण डायरेक्ट नहीं खारिज हो सकता। 

क्या था रंगोली का ट्वीट:

बता दें कि पिछले साल मुरादाबाद में डॉक्टरों पर हुए हमले को लेकर रोष जताने के बाद ट्विटर ने रंगोली का अकॉउंट सस्पेंड किया था। जिस ट्वीट पर यह कार्रवाई हुई थी। वह था:-

“एक जमाती की कोरोना से मौत हो गई, जब पुलिस और डॉक्टर उसके परिवार को चेक करने गए तो उन्होंने उनपर (पुलिस और डॉक्टर) हमला किया और उन्हें मारा। धर्मनिरपेक्ष मीडिया और इन मुल्लाओं को एक पंक्ति में खड़ा कर गोली मार देनी चाहिए। इतिहास में वे हमें नाजी कह सकते हैं, किसे चिंता है, जिदंगी फेक इमेज से ज्यादा जरूरी है।“

जिस कर्नल काजी को 50 साल से तलाश रहा पाकिस्तान उन्हें पद्मश्री: जला दिया था घर, माँ-बहन को भी फौज ने किया था टारगेट

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जिन शख्सियतों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया है, उनमें एक नाम कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर का भी है। बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के इस नायक को पाकिस्तान 50 साल से तलाश रहा है। 1971 की लड़ाई में वे जान बचाकर पाकिस्तान से भारत आने में कामयाब रहे थे। बताया जाता है कि उन्होंने पाकिस्तानी फौज के कई गोपनीय दस्तावेज भारत को सौंपे थे। पाकिस्तानी फौज ने उस समय उनके घर को जला दिया था। उनकी माँ-बहन तक को टारगेट किया गया था, लेकिन वे भी जान बचाने में सफल रहीं थीं।

कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। उनके अलावा दो और बांग्लादेशी नागरिक संजीदा खातून और मुअज्जम अली को भी इस बार पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। कर्नल जहीर ने बांग्लादेश मुक्ति वाहिनी को प्रशिक्षण भी दिया था। पाकिस्तान ने उनकी मौत का वारंट जारी किया था।

कर्नल जहीर 1969 के आखिर में पाकिस्तानी फौज में शामिल हुए थे। तब बांग्लादेश भी पाकिस्तान का ही हिस्सा हुआ करता था। लेकिन तब के पूर्वी पाकिस्तान और आज के बांग्लादेश में पाकिस्तानी फौजियों ने जो अत्याचार किए, उसने उनको हिलाकर रख दिया और उन्होंने अपनी ही फौज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने पाकिस्तान से भागकर भारत में प्रवेश किया। कर्नल जहीर के भारत आने के बाद बांग्लादेश में उनके घर को पाकिस्तानी फौज ने आग लगा दी। उनकी माँ और बहन को भी फौज ने टारगेट किया, लेकिन वो दोनों भागकर सुरक्षित ठिकाने पर पहुँच गईं।

बांग्लादेश की आजादी के बाद उन्होंने शुद्धोई मुक्तिजोद्धो नाम से एक संगठन की स्थापना की। इस संगठन ने मुक्ति संग्राम का हिस्सा रहे बांग्लादेशी और भारतीय लोगों की पहचान की। ऐसे लोगों के योगदान को दस्तावेज तैयार कर समेटा। वे आज भी बांग्लादेश में कट्टरपंथ के खिलाफ मुहिम चला रहे है। उनका मानना है कि जब तक बांग्लादेशी कट्टरपंथ और देश विरोधी ताकतों से दूर हैं तभी तक उनका मुल्क सुरक्षित है। वे जोर देकर कहते हैं बांग्लादेश को सुरक्षित रखने के लिए पाकिस्तान मॉडल के पैरोकारों को दूर रखना ही होगा।

जब एक ट्रांसवुमन ने उतारी राष्ट्रपति की नजर: कभी भीख माँगने को थीं मजबूर, कई बार रेप हुआ… संघर्षों भरा रहा है सफर

इस बार पद्म पुरस्कार पाने वालों में एक नाम कर्नाटक की ट्रांसवुमन (Transwoman) कलाकार मजम्मा जोगाठी का भी है, जिन्होंने पद्मश्री प्राप्त करते समय राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को अपने अंदाज़ में नजर उतारी। उन्होंने पुरस्कार लेने से पहले अपनी साड़ी की आँचल को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के सिर पर रखा और फिर दोनों हाथों से भूमि को छुआ। वहाँ उपस्थित लोगों ने मुस्करा कर और तालियाँ बजा कर उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी उन्हें हाथ जोड़ कर नमस्कार किया।

ट्रांसवुमन मजम्मा जोगाठी (Matha B Manjamma Jogati) के बारे में बता दें कि वो जोगम्मा विरासत की देशी नृत्यांगना हैं। ‘कर्नाटक जनपद अकादमी’ के अध्यक्ष के पद पर पहुँचने वाली वो पहली ट्रांसवुमन हैं। अपने जावें में उन्होंने लोगों के घृणा का सामना करने से लेकर और फिर इस ऊँचाई तक का सफर काफी संघर्षों के बाद पूरा किया है। उनका मानना है कि मानव तो मानव होता है, कोई कम या अधिक मानव नहीं होता। कला के बारे में भी उनकी यही सोच है।

वो कहती हैं कि कई लोगों के लिए तो कला ही ज़िंदगी है। उन्होंने जाति, वंश, समुदाय और लिंग के बंधनों को तोड़ कर ये ऊँचाई हासिल की है। इसके साथ ही वो धर्म की मशाल को भी हमेशा जलाए रखती हैं। उनका जन्म ‘मंजुनाथ शेट्टी’ के रूप में हुआ था, लेकिन ‘महिला’ बनने के कारण उनके माता-पिता ने भी उन्हें घर से निकाल दिया था। वो गलियों पर कई वर्षों तक भटकती रहीं। कइयों ने उनका बलात्कार किया। भीख माँग कर गुजारा करना पड़ा और आत्महत्या तक के प्रयास किए।

अब वो एक सफल नृत्यांगना हैं। वो ‘येलम्मा’ की भक्ति हैं। उनकी प्रतिमा को सिर पर रख कर नृत्य करती हैं। ‘कर्नाटक जनपद अकादमी’ की स्थापना 1979 में हुई थी। 64 वर्षीय मजम्मा जोगाठी पहले इसकी सदस्य हुआ करती थीं। उन्होंने बताया कि जब वो पहली बार अकादमी की कुर्सी पर 2019 में बैठी थीं, तब उनके हाथ काँप रहे थे। उन्होंने सपने में भी इसके बारे में नहीं सोचा था। वो बचपन से ही महिला बनना चाहती थी और तौलिए को स्कर्ट जैसे पहन लेती थीं।

स्कूल में भी वो लड़कियों के साथ ही घूमने-फिरना और नृत्य करना पसंद करती थीं। उनके भाई ने समझा कि उनके अंदर कोई ‘देवी’ घुस गई है और उन्हें एक खंभे से बाँध कर पीटा गया। एक पुजारी ने बाद में कहा था कि उन पर ‘देवी शक्ति’ का आशीर्वाद है। उनके पिता ने कह दिया कि वो उनके लिए मर चुकी हैं। 1975 में उन्हें होस्पेट के नजदीक हुलीगेयममा मंदिर ले जाया गया, जहाँ उनका नया नामकरण हुआ। उनकी माँ उन्हें महिला के कपड़ों में देख कर रोते हुए कह रही थीं कि उन्होंने अपना बेटा खो दिया।

उनके माता-पिता उन्हें घर नहीं ले गए। वो भीख माँगने लगीं। कई दिन बीमारी के कारण अस्पताल में रहीं। एक बार 6 लोगों ने मिल कर उनके रुपए लूट लिए और उनका बलात्कार किया। आत्महत्या का विचार आया, लेकिन तभी उन्होंने एक पिता-पुत्र को सिर पर बर्तन रख कर नृत्य करते देखा। ये ‘जोगती नृत्य’ था। इसके बाद वो इसे सीखने लगीं और पारंगत हो गईं। थिएटरों में उन्हें प्रदर्शन के मौके मिले। 2010 में उन्हें ‘कर्नाटक राज्योत्सव अवॉर्ड’ मिला और हावेरी के ‘कर्नाटक फोक यूनिवर्सिटी’ के BA में उनकी जीवनी पढ़ाई जाती है।

BHU के उर्दू विभाग के पोस्टर पर महामना मालवीय की जगह अल्लामा इकबाल की तस्वीर, भड़के छात्र: डीन ने दिए जाँच के आदेश

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के उर्दू विभाग में उर्दू दिवस के अवसर पर 9 नवंबर, 2021 को आयोजित एकदिवसीय बेबिनार के लिए बनाए गए पोस्टर ने बखेड़ा खड़ा कर दिया है। परंपरा के अनुसार, बीएचयू के सभी कार्यक्रमों में संस्थापक भारत रत्न महामना मदन मोहन मालवीय की तस्वीर होती है और कोई भी समारोह उनके माल्यार्पण और कुलगीत के गायन से ही शुरू होता है। लेकिन कला संकाय के उर्दू विभाग के सेमिनार के पोस्टर पर महामना की तस्वीर के जगह पर पाकिस्तान के निर्माण में योगदान देने और कसीदे पढ़ने वाले अल्लामा इकबाल की तस्वीर लगा दी गई।

BHU के उर्दू विभाग द्वारा जारी पोस्टर

ऑपइंडिया से बात करते हुए कला संकाय के छात्रों ने बताया, “जैसे ही हमें जानकारी मिली हमने कला संकाय प्रमुख डीन प्रो. विजय बहादुर सिंह से मिलकर विरोध दर्ज कराया। उर्दू विभाग में उर्दू दिवस के आयोजन के आरंभ में बीएचयू का कुलगीत भी नहीं गाया गया। जबकि नियमानुसार हर कार्यक्रम के शुरुआत में विश्वविद्यालय के कुल गीत का गायन अनिवार्य है।”

महामना की तस्वीर हटाकर उर्दू विभाग के प्रोफेसरों द्वारा भारत-पाकिस्तान द्वि-राष्ट्र के समर्थक अल्लामा इकबाल की तस्वीर लगाने के रवैए को छात्रों ने बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। साथ ही छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से दोषी लोगों पर तुरंत कार्रवाई की माँग की है, नहीं तो आंदोलन का रास्ता अपनाने की बात कही है।

बता दें कि इस मामले पर नजर पड़ते ही सामाजिक विज्ञान संकाय के शोध छात्र पतंजलि पांडेय और गुंजेश गौतम झा, आशीर्वाद दुबे और शुभम मिश्रा समेत बड़ी संख्या में छात्रों ने कला संकाय में जुटकर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने डीन प्रो. विजय बहादुर सिंह को शिकायत पत्र देते हुए तत्काल कार्रवाई की माँग की।

छात्रों द्वारा कला संकाय के डीन को दिया गया शिकायती पत्र

वहीं छात्रों के विरोध और आंदोलन पर जाने को मद्देनजर रखते हुए उर्दू विभाग के पोस्टर पर मालवीय जी की तस्वीर हटाकर अल्लामा इकबाल की तस्वीर लगाए जाने पर डीन प्रोफेसर विजय बहादुर ने माफी माँगी है। इसके साथ ही उन्होंने छात्रों से कहा है कि मामले की जाँच कराने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

डीन ने कला संकाय के हैंडल से ट्वीट भी किया, “BHU कला संकाय का उर्दू विभाग पोस्टर में दिए गए विवरण के अनुसार एक वेबिनार का आयोजन कर रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए पहले के पोस्टर में अनजाने में हुई गलती के लिए ईमानदारी से माफी।”

गौरतलब है कि मामले में छात्रों का विरोध प्रदर्शन देखते हुए बाद में पोस्टर की गलती को दुरुस्त कर लिया गया है। ऑपइंडिया ने उर्दू विभाग के HOD आफताब अहमद से भी उनका पक्ष जानना चाहा लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया है।