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‘सपा-कॉन्ग्रेस पर लोगों को विश्वास नहीं’: BSP अकेले लड़ेगी UP विधानसभा चुनाव, मायावती ने कहा- इस बार समझौता नहीं

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने ऐलान कर दिया है कि वो साल 2022 में किसी भी दल के साथ समझौता नहीं करेंगी और अकेले चुनाव लड़ेंगी। उनका कहना है कि इस बार बसपा का गठबंधन जनता से होगा और प्रदेश में उनकी ही सरकार बनेगी।

मायावती ने कहा, “बीएसपी, किसी भी पार्टी के साथ कोई चुनावी समझौता नहीं करेगी। हम अपने दम पर लड़ेंगे। हमारा समझौता समाज के हर वर्ग की जनता से होगा ताकि उन्हें एकजुट लाएँ- यही गठबंधन पर्मानेंट है। हमारी इच्छा नहीं है कि हम किसी पार्टी के साथ गठबंधन करें।”

यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वह ताबड़तोड़ सरकारी योजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण कर रही है। लेकिन ये योजनाएँ अभी आधी-अधूरी ही हैं और जनता इनके झांसे में नहीं आएगी। इसी तरह कॉन्ग्रेस व समाजवादी पार्टी को आड़े हाथों लेते हुए बसपा सुप्रीमो ने कहा, “कॉन्ग्रेस भी भाजपा की राह पर है इसलिए लगातार लोकलुभावन घोषणाएँ कर रही है। अगर उन्होंने सत्ता में रहते हुए 50 फीसदी भी अपने वादे पूरे किए होते तो आज केंद्र की सत्ता से बाहर न होते।” मायावती ने कहा कि जनता सपा के चुनावी वादों पर यकीन नहीं करेगी और उन्हें वोट नहीं देगी।

बता दें कि 2022 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मायावती ने भले ही अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है लेकिन अभी पिछले लोकसभा चुनावों में उन्होंने अखिलेश की सपा से समझौता कर पार्टी की किस्मत को आजमाया था। दोनों पार्टियों ने साल 2019 में 12 जनवरी को साथ आने का ऐलान किया था और भाजपा की प्रचंड जीत व अन्य पार्टियों की हार के बाद 23 जून को ये गठबंधन टूट गया था। मायावती ने तब कहा था कि लोकसभा चुनावों में सपा का व्यवहार ठीक नहीं था। अतः पार्टी के हित में बसपा आगे सभी चुनाव अकेले लड़ेगी।

मायावती ने ट्वीट कर कहा था, “बसपा ने प्रदेश में सपा सरकार के दौरान हुए दलित विरोधी फ़ैसलों को दरकिनार कर देशहित में पूरी तरह गठबंधन धर्म निभाया। चुनावों के बाद सपा का व्यवहार सोचने के लिए मजबूर करता है कि क्या ऐसा करके बीजेपी को आगे हरा पाना संभव होगा? जो संभव नहीं है। अतः पार्टी के हित में बसपा आगे होने वाले सभी छोड़े-बड़े चुनाव अकेले अपने बूते पर ही लड़ेगी।”

साल 2017 के विधानसभा चुनावों की बात करें उस दौरान सपा-कॉन्ग्रेस ने एक दूसरे के साथ गठबंधन किया था लेकिन उसके बाद भी 403 सीटों में से 324 पर बीजेपी गठबंधन, 54 पर एसपी-कॉन्ग्रेस गठबंधन, 19 पर बीएसपी और 6 सीटें अन्य के खाते में गई थीं।

जिस कंगना रनौत को मिले हैं 4 राष्ट्रीय पुरस्कार, उसे ‘पद्मश्री’ मिलता देख लिबरलों का जायका बिगड़ा: ट्विटर पर निकाली भड़ास

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 8 नवंबर 2021 को विभिन्न क्षेत्रों के पद्म पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया। इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली और सुषमा स्वराज को मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। खेल जगत से बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू को पद्म भूषण और फिल्म जगत से एक्ट्रेस कंगना रनौत, गायक अदनान सामी को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस समारोह में कुल 119 लोगों को पुरस्कार प्रदान किए। 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण यह समारोह आयोजित नहीं किया जा सका था। ‘मणिकर्णिका’ फिल्म की अभिनेत्री कंगना रनौत को पद्मश्री पुरस्कार देना वामपंथी झुकाव वाले तथाकथित बुद्धिजीवियों को रास नहीं आया है। यही कारण है कि लिबरल अजीबोगरीब तर्क ​देकर एक्ट्रेस को ट्विटर पर घेर रहे हैं।

अजीबोगरीब तर्क से ट्विटर पर विरोध

स्वीडन में उप्साला विश्वविद्यालय (Uppsala University) के प्रोफेसर अशोक स्वैन अक्सर ट्विटर पर फर्जी खबरें फैलाते हुए पाए जाते हैं। उन्होंने कंगना को पद्मश्री अवॉर्ड मिलने के बाद अपनी पीड़ा व्यक्त की। एएनआई के एक ट्वीट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “भारत का सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार किसी ऐसे व्यक्ति को दिया जा रहा है, जिसके ट्विटर अकाउंट को मुसलमानों के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने पर प्रतिबंधित कर दिया गया था।”

साभार: ट्विटर

इसी तरह, कॉन्ग्रेस के मुखपत्र नेशनल हेराल्ड की स्तंभकार मृणाल पांडे भी कंगना को पद्मश्री से सम्मानित करना नहीं पचा पाईं। उन्होंने राष्ट्रीय सम्मान के लिए कंगना की प्रतिक्रिया को कोट करते हुए आश्चर्य जताया कि क्या पद्म जोक्स सबसे अच्छे हैं।

साभार: ट्विटर

वामपंथी प्रचार वेबसाइट द वायर से जुड़ी पत्रकार आरफ़ा खानम शेरवानी जिन्हें कट्टरपंथी इस्लामवादियों का बचाव करने के लिए जाता है, उन्होंने कहा कि नफरत फैलाने वाले स्पीच देने के लिए प्रतिबंधित लोगों का सम्मान करना नफरत का सम्मान करने के समान है।

साभार: ट्विटर

ट्विटर बॉयो में खुद को पत्रकार बताने वाले अमन सिंह ने ट्वीट किया, “नफरत फैलाने वालों को राष्ट्रीय सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि उसने ट्विटर पर क्या लिखा था।”

साभार: ट्विटर

चार राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी हैं कंगना

कंगना के विरोधियों ने ट्विटर द्वारा उनके अकाउंट को ब्लॉक करने का हवाल देकर आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि एक्ट्रेस को देश का प्रतिष्ठित सम्मान नहीं देना चाहिए था। ध्यान दें कि पद्म पुरस्कार सरकार द्वारा उन लोगों दिया जाता है, जो अपने कार्य क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं, ना कि ये देखकर कि ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनका अकाउंट है या नहीं। आतंकी संगठन तालिबान के भी ट्विटर पर कई अकाउंट हैं, जिसके जरिए वह दुनिया भर में आतंक फैलाता है। इसलिए, एक ट्विटर अकाउंट होना यह तय नहीं करता कि कौन पद्म पुरस्कार का हकदार है और कौन नहीं।

आपको बता दें कि कंगना को अब तक चार राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। उन्हें हाल ही में ‘मणिकर्णिका: क्वीन ऑफ झाँसी’ और ‘पंगा’ में दमदार अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने 2008 में ‘फैशन’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार, 2014 में ‘क्वीन’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार और 2015 में ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ के लिए भी राष्ट्रीय पुरस्कार जीता था।

पुरस्कार प्राप्त करने के बाद कंगना ने अपने फैंस से इस खुशी को इंस्टाग्राम पर बाँटा। उन्होंने कहा कि एक अभिने​त्री के तौर पर उनके काम के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले थे, लेकिन पद्मश्री मिलने के बाद उन्हें अहसास हुआ कि देश उन्हें एक ‘आदर्श नागरिक’ के रूप में भी महत्व देता है।

लाखों पेड़ लगाने वाली तुलसी गौड़ा से लेकर वैदिक मंत्रों के साथ पेड़ लगाने वाले कल्याण रावत तक: आम लोगों के लिए अब दूर नहीं राष्ट्रपति भवन

जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है, तब से आम लोगों के लिए पद्म पुरस्कार के लिए राष्ट्रपति भवन के दरवाजे भी खुल गए हैं। ऐसा ही एक नाम तुलसी गौड़ा का भी है। उन्होंने पर्यावरण को बचाने की दिशा में अभूतपूर्व कार्य किया है। कर्नाटक की 72 वर्षीय पर्यावरणविद तुलसी गौड़ा हलक्की नामक वनवासी समुदाय से आती हैं। औपचारिक शिक्षा न मिलने के बावजूद पेड़-पौधों को लेकर उनकी जानकारी विशिष्ट है। उन्हें ‘जंगलों का इनसाइक्लोपीडिया’ कहा जाता है।

जब वो किशोराववस्था में थीं, तभी से उन्होंने पर्यावरण को बचाने की दिशा में कार्य आरंभ कर दिया था और अब तक वो हजारों पेड़-पौधे लगा चुकी हैं। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के साथ वो अस्थायी स्वयंसेवक के रूप में जुड़ी रही हैं। उनकी मेहनत व कार्य को देखते हुए उन्हें स्थायी रूप से जोड़ा गया। उन्होंने अब तक लाखों पौधे लगाए हैं और 10 वर्ष की उम्र से ही इस दिशा में कई और कार्य किए हैं। उनकी माँ एक नर्सरी में काम करती थीं और उनके साथ कार्य करते हुए ही उन्हें इसकी प्रेरणा मिली।

तुलसी गौड़ा इसके अलावा लाखों पेड़-पौधों की देखभाल भी करती हैं। वो खुद भूल चुकी हैं कि उन्हें कितने पौधे लगाए हैं। वो अघासुर नर्सरी में पिछले 50 वर्षों से काम कर रही हैं। वो कई पौधों के बीज जमा करती थीं और उन्हें रोपने के बाद नन्हे पौधों की देखभाल करती थीं। फिर उन्हें जंगलों में रूप देती थीं। ऐसे कर के कई किस्म के पेड़ों के जंगल बने। इलाके के अधिकारी उन्हें ‘बेयरफुट इकोलॉजिस्ट’ कहते हैं। इस उम्र में भी वो नर्सरी जाती हैं और पर्यावरण का काम करती हैं। महज 3 साल की उम्र में ही उनके पिता का निधन हो गया था।

गुजरात की बात करें तो इनमें अपनी रचनाओं के जरिए लोगों को हँसाने वाले शाहबुद्दीन राठौड़ को शिक्षा एवं साहित्य के क्षेत्र में पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया। वापी के उद्यमी एवं गाँधीवादी गफूरभाई बिलखिया को व्यापार एवं उद्यम के क्षेत्र में अपूर्व योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार दिया गया। आईआईटी गाँधीगर के निदेशक प्रोफेसर सुधीर जैन को साइंस एंड इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री अवार्ड से नवाजा गया। अयोध्या के मोहम्मद शरीफ को पद्म पुरस्कार मिला, जो सभी धर्मों के लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करते हैं।

एक राजस्थान के अनिल प्रकाश जोशी भी हैं, जिन्हें पर्यावरण व गाँवों के विकास के लिए ये पद्म भूषण पुरस्कार मिला। कल्याण सिंह रावत ने लड़की की शादी में फलदार पौधे दूल्हा-दुल्हन को दिए जाने का अभियान चलाया। वैदिक मंत्रों के साथ उन्हें रोपा जाता है। इसी तरह ‘सीड मदर’ के नाम से पहचानी जाने वाली राहीबाई सोमा पोपेरे को सम्मान मिला। 57 साल की पोपेरे स्वयं सहायता समूहों के जरिए 50 एकड़ जमीन पर 17 से ज्यादा देशी फसलों की वैज्ञानिक तकनीक से जैविक खेती करती हैं। 

इसी तरह एक साधारण से शर्ट और धोती में कर्नाटक के नारंगी विक्रेता हरेकला हजब्बा जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से पद्मश्री का सम्मान लेने पहुँचे, तो सभी की नजरें उनकी तरफ अनायास ही मुड़ गईं। प्रति दिन मात्र 150 रुपए कमाने वाले 68 वर्ष के फल विक्रेता ने अपने खर्चे से गाँव में एक प्राइमरी स्कूल का निर्माण करवाया है। कई वर्षों पहले एक विदेशी पर्यटक ने उनसे अंग्रेजी में नारंगी का दाम पूछा था। हरेकला हजब्बा को अंग्रेजी नहीं आती थी और इसीलिए उन्हें कुछ समझ में नहीं आया। इस बात ने उन्हें परेशान कर दिया और स्कूल बनाने की ठान ली। उन्हें गरीबी के कारण शिक्षा पाने का अवसर नहीं मिल सका था।

दिव्यांग एस रामकृष्णन व्हीलचेयर से पद्मश्री सम्मान को लेने पहुँचे। उनके योगदान को देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें हाथ जोड़कर प्रणाम किया। तमिलनाडु के तिरुनेलवेली के रहने वाले रामकृष्णन स्वयं लकवाग्रस्त हैं और चलने में असमर्थ हैं, इसके बावजूद वह दिव्यांग लोगों के पुनर्वास में मदद करने का सराहनीय काम पिछले 40 वर्षों से करते आ रहे हैं। लकवाग्रस्त होने के बाद उन्होंने दिव्यांग लोगों के दर्द को महसूस किया और जाना कि ऐसे लोगों को समाज के मुख्यधारा में बनाए रखने के लिए उनके पुनर्वास की सख्त आवश्यकता है। इसके लिए उन्होंने दिव्यांग लोगों की मदद करने का बीड़ा उठाया

कुल मिला कर देखें तो 2014 से पहले तक ऐसा ऐसा लगता है, जैसे पद्म पुरस्कार अमीरों के लिए बने हैं और राष्ट्रपति भवन में केवल प्रभावशाली लोग ही जा सकते हैं। मोदी सरकार ने इस क्रम को तोड़ दिया है। अब सुदूर गाँवों में काम करने वाले आम लोगों के सामाजिक योगदान को भी पहचान दी जा रही है। समाज के कार्य के लिए जीवन खपाने वालों को राष्ट्रपति पुरस्कार देते हैं और प्रधानमंत्री प्रणाम करते हैं। इससे आम लोगों को भी समाजसेवा की प्रेरणा मिलेगी।

UP की चुनावी हवा में अब परफ्यूम: कौन है खजांचीनाथ, जिसके जन्मदिन पर सपा ने लॉन्च किया ‘समाजवादी’ इत्र

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी अपने दल की छवि बनाने के लिए लगातार प्रयासों में जुटी है। इसी क्रम में उन्होंने आज पार्टी कार्यालय में पार्टी के नाम का परफ्यूम लॉन्च किया है। ये परफ्यूम खजांचीनाथ नाम के बच्चे के जन्मदिन पर लॉन्च हुआ, जिसका जन्म नोटबंदी के दौरान बैंक में हुआ था। वह कानपुर देहात का रहने वाला है।

खजांचीनाथ-नोटबंदी के समय बैंक में हुआ था जन्म।

इस परफ्यूम को लॉन्च बाकायदा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके किया गया। हरे और लाल रंग के कॉम्बिनेशन से बनी परफ्यूम की डिब्बी में अखिलेश यादव का चेहरा और पार्टी चिह्न साइकिल छपा है। इसके पीछे कन्नौज एमएलसी पम्मी जैन का नंबर भी दिया गया है।

पार्टी का तर्क है कि जब वह समाजवादी पार्टी के इस परफ्यूम का इस्तेमाल करेंगे तो उन्हें इसमें समाजवाद की महक आएगी। इस परफ्यूम से 2022 में हर नफरत का खात्मा होगा। इस परफ्यूम को लॉन्च करने के बाद अखिलेश ने दावा किया कि नोटबंदी के कारण सैंकड़ों लोगों की जान गई। ऐसे में खजांची ही था जो बैंक में पैदा हुआ।

अपनी बात करते करते अखिलेश ने भारतीय जनता पार्टी को नोटबंदी के लिए खूब कोसा। उन्होंने कहा कि नोटबंदी को मास्टरस्ट्रोक बताया गया लेकिन असल में वो ब्रेनस्ट्रोक बन गया। अपनी बात रखते हुए अखिलेश ने भाजपा को भ्रष्टाचार समेत कई मुद्दों पर घेरा और दावा किया कि भाजपा ने जानबूझकर लोगों को परेशान करने के लिए नोटबंदी की थी।

पत्रकारों से बात करते हुए अखिलेश यादव ने अलग से उन्हें रोकते हुए कहा कि मतदाता सूची में 21, 56, 262 नाम जोड़े गए हैं और 16, 42, 756 नाम काटे गए हैं। जो नाम काटे गए और जोड़े गए उन नामों की सूची जारी की जाती है, लेकिन इस बार चुनाव आयोग ना जाने किसके दबाव में ये सूची जारी नहीं कर रहा है। अगर चुनाव आयोग ने ये सूची नहीं जारी की तो हम चुनाव आयोग के खिलाफ धरना भी देंगे।

बता दें कि साल 2016 में भी समाजवादी पार्टी ने  4 परफ्यूम लॉन्च किए थे जो प्रतीकात्मक तौर पर बनारस घाट, कन्नौज, ताजमहल, रूमी दरवाजा को दिखा रहे थे। हालाँकि वो परफ्यूम सीमित थे और उनका वितरण तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा किया गया था। उस दौरान समाजवादी सुगंध की शुरुआत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा था, “संगीत हमेशा से समाजवाद का हिस्सा रहा है। इसमें सुगंध है। मैंने हमेशा कहा है कि हमारी नदियाँ भी समाजवादी प्रकृति की हैं क्योंकि वे सभी की समान रूप से सेवा करती हैं। समाजवादी सुगंध एक समान पहल है और पार्टी और बाहर सभी को एकजुट करेगी और समाजवाद के संदेश को दूर-दूर तक फैलाएगी।”

बंगाल के बच्चे अब देखेंगे समलैंगिक संबंधों पर बनी 8 शॉर्ट फ़िल्में, स्कूलों में किया जाएगा प्रसारण: ‘समावेशी’ माहौल बनाने का दावा

पश्चिम बंगाल के विद्यालयों में बच्चों को अब ‘समावेश (Inclusiveness)’ को लेकर जागरूक करने के लिए समलैंगिक संबंधों पर 8 शॉर्ट फ़िल्में दिखाई जाएँगी। ये ऐसी फ़िल्में हैं, जिन्हें ‘Prayasam’s Bad’ और ‘ब्यूटीफुल वर्ल्ड फिल्म फेस्टिवल’ द्वारा चुना गया है। कोरोना आपदा के बाद अब जब राज्य के शैक्षिक संस्थान धीरे-धीरे खुल रहे हैं, छात्र-छात्राओं को ‘युवा फिल्म निर्देशकों’ द्वारा बनाई गई ये शॉर्ट फ़िल्में दिखाई जाएँगी। Prayasam के बारे में बता दें कि ये ‘संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF)’ से जुड़ी संस्था है।

ये संगठन एक ऐसा माहौल बनाने का दावा करता है, जिसमें युवाओं को खुद को सशक्त महसूस करने को मिले। इन फिल्मों को इन लोगों ने बनाया है, वो हैं – सलीम शेख, मनीष चौधरी, सप्तर्षि रॉय, और अविजित मार्जित। ये सभी नज़रुल पल्ली के महिषबाथान स्थित दाखिंडारी में रहते हैं। ये इलाका राजधानी कोलकाता में ही स्थित है। ये सभी ‘Prasyam विज़ुअल बेसिक्स एशिया’ की आधारभूत फिल्म स्टूडियो के छात्र हैं, जिसे एडोबी (Adobe) नामक कंपनी का समर्थन प्राप्त है।

इनका कहना है कि इन शॉर्ट फिल्मों को बच्चों को दिखा कर ‘समावेशी शिक्षा’ को बढ़ावा दिए जाने का उद्देश्य है। इन लोगों का कहना है कि LGBTQ युवा खुद को समाज से अलग या अवांछित महसूस न करें, इसके लिए ऐसा करना आवश्यक है। ‘Prayasam’s’ के निदेशक प्रशांत रॉय ने कहा कि स्कूलों के खुलते ही उनमें ये शॉर्ट फ़िल्में बच्चों को दिखाई जाएँगी। इन फिल्मों का टाइटल RESH (जिसकी ऊँची और गहरी आवाज़ की प्रकृति हो) रखा गया है।

इसमें समलैंगिक संबंधों से जुड़ी काल्पनिक कहानियाँ दिखाई जाएँगी। साथ ही उसमें भाईचारा, बच्चों के यौन शोषण के प्रति जागरूकता, स्वीकार्यता, पहचान का संकट, और आया मानवीय सवेदनाओं के पहलुओं को दिखाने का भी दावा किया गया है। इनका कहना है कि ये रोचक आइडियाज हैं, लेकिन इनमें सुधार की भी ज़रूरत है। सलीम शेख की ‘देखा’ नामक शॉर्ट फिल्म में एक पिता और उसके गे बेटे की कहानी है। ‘दक्खिना’ में एक ‘मेल एस्कॉर्ट’ की कहानी है, जिसे एक बुजुर्ग शहर में घुमा रहा होता है।

23 वर्षीय सलीम शेख ने कहा कि उनके कुछ दोस्त ‘मेल एस्कॉर्ट्स’ हैं, जिनका कहना है कि उनके लिए आत्मसम्मान काफी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन फिल्म के जरिए वो उनकी बातें व उनके चॉइसेज को समाज के सामने रखना चाहते हैं। ‘दूरबीन’ नामक शॉर्ट फिल्म में दिखाया गया है कि एक पत्रकार होने लिव-इन पार्टनर को बताता है कि कैसे उसके पिता के निधन के बाद उसे उनके समलैंगिक होने का पता चला। 24 वर्षीय निर्देशक सप्तर्षि रॉय ने कहा कि फिल्म की कहानी सुनते एक्टर्स भाग गए थे, इसीलिए इन्हें समाज को दिखाना बेहद आवश्यक है।

इसी तरह 24 वर्षीय डायरेक्टर मनीष चौधरी ने एक फ़ूड डिलीवरी बॉय और एक व्यक्ति के बीच में विकसित होते समलैंगिक संबंधों पर कहानी बनी है। उन्होंने कहा कि 15 मिनट के भीतर ही उन्होंने ऐसे रिश्तों के समक्ष खड़े होने वाले समाजिक-आर्थिक समस्याओं को एक्सप्लोर किया है। ‘कलान्जलि आर्ट स्पेस’ में होने वाले आठवें ‘बबैड एंड ब्यूटीफुल वर्ल्ड फिल्म फेस्टिवल’ में 3 दिसंबर, 2021 को इस फिल्मों को प्रीमियर किया जाएगा। हालाँकि, इन्हें बच्चों को दिखाए जाने को लेकर विरोध भी हो रहा है।

‘पिछली सरकारें आतंकियों के मुकदमे लेती थीं वापस, हम उन्हें उनके लोक पहुँचाते हैं’: CM योगी की सपा के गढ़ में ललकार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार (9 नवंबर 2021) को बदायूँ जिले में 1328 करोड़ की 359 परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। यहाँ उन्होंने समाजवादी पार्टी का गढ़ रही बदायूँ की सहसवान सीट के क्षेत्र में रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने आयुष्मान कार्ड, PM आवास योजना में चाबी एवं विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को चेक/स्वीकृति-पत्र वितरित किए। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछली सरकारों को आड़े हाथों लेते हुए उन पर जमकर हमले किए।

गौरतलब है कि CM योगी उत्‍तर प्रदेश की उन सभी सीटों पर जनसभा कर रहे हैं, जहाँ बीजेपी थोड़ी कमजोर है। बदायूँ की 6 विधान सभा सीटों में से 5 इस समय बीजेपी के खाते में है, लेकिन सहसवान पर सपा का कब्‍जा रहा। यही वजह है कि सीएम योगी उन सभी जगह अपनी रैलियाँ अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले करके उनके लिए अलग से विकास योजनाओं की घोषणा कर रहे हैं।

सीएम योगी ने कहा, ”पिछली सरकारें आतंकवादियों का मुकदमा वापस लेती थीं, दंगाइयों को मुख्यमंत्री आवास पर बुलाकर सम्मानित किया जाता था, लेकिन हमारी सरकार में आतंकवादियों को उनके लोक में पहुँचाने का कार्य होता है।”

बता दें कि विधानसभा चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री इन दिनों पश्चिम उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में दौरा कर रहे हैं। उसी कड़ी में आज उन्होंने बदायूं का दौरा किया। उन्होंने आगे कहा, “पहले नौकरी निकलती थी, तभी एक परिवार वसूली के लिए निकल जाता था। नियुक्ति के नाम पर पैसा वसूला जाता था, लेकिन नियुक्ति नहीं होती थी क्योंकि धाँधली के बाद कोर्ट स्टे लगा देता था। साढ़े चार साल में 4.5 लाख लोगों को नौकरी मिली है जिन पर कोई प्रश्न नहीं उठा सकता है।”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मुफ़्त राशन योजना को लेकर भी बोला। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने कोरोना के समय मुफ़्त राशन दिया था। राज्य सरकार ने तय किया है कि इसे होली तक दिया जाए। इसके तहत अंत्योदय परिवार कार्ड धारकों को 35 किलो गेहूँ या चावल दिया जाएगा साथ ही 1-1 किलो दाल, खाद्य तेल, चीनी और नमक हर परिवार को उपलब्ध कराया जाएगा।”

बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार (8 नवंबर 2021) को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कैराना पहुँचे थे। इस दौरान उन्होंने ‘गुंडों’ को चेताया और कहा, ”जो हमारी बहन-बेटियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ करेगा, उसकी पीढ़ियाँ भूल जाएँगी कैसे दंगा होता है।” उन्होंने बिना नाम लिए अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर हमले किए और मुजफ्फरनगर दंगे की याद दिलाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री आवास में दंगाइयों को सम्मानित किया जाता था।

‘UPA काल में दलाल को दिए गए थे ₹65 करोड़’: फ्रेंच मीडिया के खुलासे से बुरी फँसी कॉन्ग्रेस, BJP ने कहा – INC मतलब आई नीड कमीशन

राफेल सौदा को लेकर मोदी सरकार पर घोटाले का आरोप लगाती रही कॉन्ग्रेस पार्टी अब इसमें खुद फँसती दिख रही है। फ्रांस के एक पोर्टल ‘मीडियापार्ट’ ने खुलासा किया है कि राफेल बनाने वाली कंपनी ‘दसौ एविएशन’ इस मामले में ‘मध्यस्थ’ रहे सुषेण गुप्ता की कंपनी ‘इंटरस्टेलर टेकनोलॉजीज़’ को 2007-2012 के बीच 7.5 मिलियन यूरो (अब 64.36 करोड़ रुपए) दिए थे। उस समय केंद्र में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए की सरकार चल रही थी और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी उस सरकार की सर्वेसर्वा थीं।

फ्रांस के पोर्टल ने खुलासा किया है कि सुषेण गुप्ता से जुड़ी कंपनियों ने कई बोगस रसीदें प्रिंट की और मॉरीशस के अटॉर्नी जनरल ने उन्हें 11 अक्टूबर, 2018 को CBI को भी भेजा था। साथ ही उसने मॉरीशस के AG द्वारा भेजे गए पत्र की प्रति भी प्रकाशित की है। हालाँकि, इस पर भारतीय मंत्रालय, CBI या ‘दसौं एविएशन’ की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं आई है। ‘मीडियापार्ट’ ने बताया कि इसी तरह भारतीय जाँच एजेंसियों को पता चला कि सुषेण गुप्ता ने इसमें दलाल की भूमिका निभाई थी।

उसने लिखा है, “सुषेण गुप्ता की कंपनी को जो रुपए मिले, उसके लिए आईटी कॉन्ट्रैक्ट्स के बिल को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया। इसके लिए गलत रसीदों के जरिए इन रुपयों को मॉरीशस भेजा गया। इनमें से कई में तो राफेल बनाने वाली फ्रेंच कंपनी के नाम तक गलत लिखे हुए थे।” सुषेण गुप्ता के खिलाफ अगस्ता-वेस्टलैंड हैलीकॉप्टर घोटाले में भी ED ने चार्जशीट दायर की थी। ‘मीडियापार्ट’ का कहना है कि गुप्ता ने फ्रेंच कंपनी को भारतीय नेगोशिएशन टीम की गतिविधियों की डिटेल्स सौंपी थी।

इस तरह राफेल सौदे में जिस घोटाले की बात कॉन्ग्रेस करती आई है और घूस की जो बात कही जा रही है, वो यूपीए काल में ली गई थी, 2007-12 के दौरान। भाजपा भी इसे लेकर हमलावर है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, “इटली से राहुल गाँधी जी जवाब दें – राफेल को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश आपने और आपकी पार्टी ने इतने वर्षों तक क्यों किया? आज ये खुलासा हुआ है कि उन्हीं की सरकार में पार्टी ने 2007 से 2012 के बीच में राफेल में ये कमीशनखोरी हुई है, जिसमें बिचौलिए का नाम भी सामने आया है।”

उन्होंने कहा, “राफेल का विषय कमीशन की कहानी थी, बहुत बड़े घोटाले की साजिश थी। ये पूरा मामला 2007 से 2012 के बीच हुआ। 2019 के चुनावों से पहले विपक्षी दलों ने, खासकर कॉन्ग्रेस पार्टी ने जिस प्रकार से एक झूठा माहौल बनाने की चेष्टा राफेल को लेकर किया था वो हम सभी ने देखा था। उनको लगता था कि इससे उनको कोई राजनीतिक फायदा होगा। INC का मतलब है – ‘आई नीड कमीशन।’ यूपीए काल में हर डील के भीतर एक डील हुई और फिर भी एक भी डील सफल नहीं हुई।”

उधर कॉन्ग्रेस अब भी राफेल घोटाले को देश का सबसे बड़ा रक्षा घोटाला बता कर इस पर हंगामा मचा रही है। पार्टी ने राफेल में रिश्वतखोरी को दफनाने की कोशिश का आरोप मोदी सरकार पर लगाते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन कवर अप’ चलाया जा रहा है और पिछले 5 वर्षों में सारे आरोप सत्ता में शीर्ष पर बैठे लोगों पर लगा है। मजे की बात तो ये है कि यूपीए पर लगे आरोपों वाली मीडिया रिपोर्ट की खबर ही कॉन्ग्रेस वाला शेयर कर रहे हैं और भाजपा पर निशाना साध रहे हैं।

‘तेलंगाना कॉन्ग्रेस सेवादल’ ने उस रिपोर्ट को शेयर कर के उलटा मोदी सरकार को ही घेरा। पार्टी के सोशल मीडिया के हेड रोहन गुप्ता ने पूछा कि कब तक छिपेगा? ‘ओडिशा कॉन्ग्रेस सेवादल’ की पदाधिकारी सुरभि ने इसे ‘बिग ब्रेकिंग’ बता कर पेश किया। कॉन्ग्रेस नेता विजय थोट्टाथिल ने पीएम मोदी के ‘चौकीदार’ वाले बयान पर तंज कसा। मीडिया ने भी इसे ऐसे चलाया, जैसे आरोप भाजपा पर हों। सच्चाई ये है कि 2007-12 के दौरान घूस का खुलासा हुआ है और उस समय कॉन्ग्रेस की सरकार थी।

लाल सलाम वाले केरल में आदिवासी बच्चे 10वीं के बाद शिक्षा को तरसे, राहुल गाँधी के वायनाड का सबसे बुरा हाल

केरल में आदिवासी छात्र अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए संघर्षरत हैं। वह चाहते हैं कि दसवीं के बाद वह आगे पढ़ें, लेकिन राज्य की वामपंथी सरकार ने बड़ी कक्षाओं में पढ़ने के उनके रास्ते सीमित किए कर दिए हैं। राज्य में उच्च माध्यमिक शिक्षा में आदिवासी बच्चों के लिए सिर्फ 8% सीट आरक्षित है। इन 8% के हिसाब से केवल 2000 आदिवादी छात्र हर साल आगे शिक्षा जारी रख पाते हैं जबकि 10वीं पास करने वाले हर साल 6000-7000 होते हैं और इन भी में एक तिहाई राहुल गाँधी के वायनाड से आते हैं।

द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के अनुसार, 2000 आदिवासी बच्चों ने पिछले साल वायनाड में 10वीं की परीक्षा पास की। लेकिन सरकार ने सिर्फ 529 बच्चों को 2020-21 सत्र में एडमिशन दिया। जिसका साफ मतलब है कि वायनाड से ही सिर्फ कई सौ बच्चे हर साल अपनी पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर होते हैं और एक्टिविस्टों की मानें तो पढ़ाई छूटने के बाद इन्हें जीवनयापन के लिए दिहाड़ी मजदूरी का काम करना पड़ता है।

इस रिपोर्ट में वायनाड के पिछले कुछ सालों के आँकड़े दिए गए हैं। इनके मुताबिक आगे शिक्षा जारी रखने के लिए 2019-2020 में कुल 2321 बच्चों ने आवेदन दिया था लेकिन केवल 1659 छात्रों को एडमिशन मिला। इस कारण 662 छात्र आगे की शिक्षा से अछूते रहे। 2020-2021 वाले सत्र में 2431 बच्चों ने एप्लाई किया और 1659 छात्र दाखिला पाए।

तस्वीर साभार: द न्यूज मिनट

डेटा दिखाता है कि वायनाड में हर साल 500 के करीब छात्र कम सीट के कारण एडमिशन नहीं ले पाते। 11वीं में एडमिशन की प्रक्रिया अभी जारी है। लेकिन इस बार कितनी सीटें बच्चों को मिली और कितने नाउम्मीद हुए ये डेटा प्रक्रिया खत्म होने के बाद ही सामने आएगा

बता दें कि राज्य में सीटों का बँटवारा सिर्फ वर्ग के आधार पर नहीं है बल्कि स्ट्रीम के आधार पर ही है। यहाँ मुश्किल से आदिवासी बच्चे साइंस स्ट्रीम में एडमिशन ले पाते हैं क्योंकि इसके लिए भी सीटें डिवाइड की गई हैं। इसके अलावा जो ओपन से दसवीं करते हैं उन्हें भी एडमिशन देने से मना कर दिया जाता है। ऐसे में लड़कियाँ घरों में रहने को मजबूर होती है और लड़के मजदूरी करने बाहर निकल जाते हैं।

उल्लेखनीय है कि राज्य में छात्रों के लिए सीटों में कमी के कारण विपक्ष सत्ताधारी वामपंथी पार्टी का लगातार विरोध कर रही है। आँकड़े कहते हैं कि आदिवासी छात्रों के साथ ये परेशानी दशकों से बनी हुई है। इस संबंध में आदिवासी गोथरा महासभा (AGMS) के तहत आदिवासी और दलित युवाओं के एक समूह आदि शक्ति समर स्कूल ने सुल्तान बथेरी की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था। इसके अलावा अक्टूबर में राज्य मंत्री के राधाकृष्णन को एक ज्ञापन दिया गया था।

शिवसेना की महिला नेता चलाती थी सेक्स रैकेट, MP पुलिस ने अनुपमा तिवारी समेत 10 को किया गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से सेक्स रैकेट का खुलासा हुआ है। रैकेट की सरगना शिवसेना नेता अनुपमा तिवारी है। वह खुद को शिवसेना नेता के अलावा समाजसेवी, पत्रकार, आईटीआई कार्यकर्ता और योगाचार्य भी बताती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने सीहोर बस स्टैंड के पास स्थित अनुपमा तिवारी के घर पर छापा मारकर रविवार (7 नवंबर 2021) देर रात 4 लड़कियाँ, 3 ग्राहक, ड्राइवर, महिला मैनेजर और संचालिका को गिरफ्तार किया था। इसके साथ ही मौके से नशे का सामान, कार और नकदी भी जब्त की गई है।

बताया जा रहा है कि अनुपमा भोपाल की महिलाओं के घर जाकर उनसे समाजिक कार्यों में जुड़ने की बात कहती थी। इस तरह से वह काम पाने के लालच में उसके जाल में फँस जाती थीं। इसके बाद वह किसी न किसी बहाने से उन्हें सीहोर बुलाती और उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उनको देह व्यापार के लिए मजबूर करती थी। अनुपमा ने पुलिस को खुद बताया कि महिलाओं के तैयार होते ही वह उन्हें सेक्स रैकेट के वॉट्सऐप ग्रुप में जोड़ लेती थी। ये सभी महिलाएँ बैरागढ़ की रहने वाली हैं।

जाँच में पता चला है कि अनुपमा सिर्फ शादीशुदा महिलाओं को ही अपने जाल में फँसाती थी। एएसपी सीहोर समीर यादव ने बताया कि अनुपमा का मानना था कि मजबूरी और बदनामी के डर से ऐसी महिलाएँ जल्दी राज नहीं खोलती हैं। इसी वजह से वह लंबे समय से देह व्यापार में लगी हुई थीं।

बता दें कि मूलरूप से होशंगाबाद की रहने वाली अनुपमा तिवारी ने साल 2015 में शिवसेना की टिकट पर नगर पालिकाध्यक्ष का चुनाव लड़ा था, जिसमें वह हार गई थी। सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिसमें सीहोर के तत्कालीन अपर कलेक्टर द्वारा नेहरू युवा केंद्र के कार्यक्रम में योगाचार्य के रूप में उसे सम्मानित भी किया जा चुका है।

‘नवाब मलिक की 4 संपत्तियों का दाऊद से लिंक, ₹20 लाख में 3 एकड़ जमीन, पैसे मुंबई बम धमाके के आतंकियों को भी मिले’: फडणवीस ने दिखाए सबूत

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के उद्धव ठाकरे सरकार के मंत्री नवाब मलिक के आतंकी दाऊद इब्राहिम से सम्बन्ध होने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने सॉलिडस नाम की एक कंपनी का जिक्र करते हुए कहा कि नवाब मलिक पहले इसके सदस्य थे और अब उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने दावा किया कि NCP नेता नवाब मलिक का परिवार अब भी इस कंपनी से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि वो दिवाली के बाद ही कुछ खुलासे करने वाले थे, लेकिन दस्तावेज जमा करने में देर हो गई थी।

उन्होंने कहा कि उनके जो आरोप हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। उन्होंने 1993 के मुंबई बम धमाकों का जिक्र करते हुए कहा कि उस घटना में सरदार शाह वली खान दोषी था और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। फ़िलहाल वो जेल में है। फड़नवीस ने बताया कि ये व्यक्ति आतंकी टाइगर मेनन को हथियारों का प्रशिक्षण देने में शामिल था। उसने स्टॉक एक्सचेंज और बीएमसी में बम कहाँ रखना है, इसकी रेकी की थी। सुप्रीम कोर्ट ने उसकी उम्रकैद की सज़ा बरक़रार रखी थी।

इसके बाद उन्होंने एक सलीम पटेल का नाम लिया, जो दाऊद की बहन हसीना पारकर का बॉडीगार्ड और ड्राइवर है। उसे 2007 में हसीना पारकर के साथ गिरफ्तार किया गया था। देवेंद्र फड़नवीस की में तो मुंबई पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक, दाऊद के फरार होने के बाद संपत्ति हसीना के नाम जमा कराई जा रही थी और ये काम सलीम पटेल ने किया था। उसके नाम पर पावर ऑफ अटॉर्नी चलती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सलीम पटेल जमीन पर कब्जे का काम करता था।

देवेंद्र फड़नवीस ने खुलासा किया, “सॉलिडस कंपनी ने 2007 में 2053 रुपए प्रति वर्ग फुट में जमीन खरीदी थी। तीन एकड़ जमीन अंडरवर्ल्ड के लोगों से महज 30 लाख रुपए में खरीदी गई थी, जिसमें से 20 लाख रुपए दिए गए। सलीम पटेल के खाते में 15 लाख रुपए गए तो 5 लाख शाह वली खान को मिला। जमीन की कम कीमत दिखाने के लिए किए बहुत सारे घोटाले हुए। लेन-देन 2003 में शुरू हुआ और 2005 में समाप्त हुआ। तब नवाब मलिक मंत्री थे।”

देवेंद्र फड़नवीस ने सवाल दागा कि नवाब मलिक ने मुंबई के हमलावरों से जमीन क्यों खरीदी? इन अपराधियों ने तीन एकड़ जमीन नवाब मलिक को सिर्फ 30 लाख रुपये में क्यों दी? फड़नवीस ने कहा कि राज्य सरकार टाडा के आरोपितों की जमीन नियमानुसार जब्त करती है, क्या आपको यह जमीन इसलिए दी गई कि इसे जब्त न किया जाए? भाजपा नेता की मानें तो यह अकेला उदाहरण नहीं है और ऐसी 5 संपत्तियाँ हैं। उन्होंने बड़ा आरोप लगाया कि अंडरवर्ल्ड इनमें से 4 संपत्तियों के लेनदेन में सीधे तौर पर शामिल है।

देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि वो इन सभी करतूतों के सबूत न सिर्फ जाँच एजेंसियों को सौंपेंगे, बल्कि NCP के अध्यक्ष शरद पवार को भी देंगे। उन्होंने आगे बताया कि गोवा का कुर्ला में एलबीएस रूट पर एक कंपाउंड है। जमीन सॉलिडस नाम की कंपनी में रजिस्टर्ड है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन सलीम पटेल और शाह वली खान द्वारा बेची गई थी और जिस सॉलिडस कंपनी को जमीन आवंटित की गई थी, वह नवाब मलिक के परिवार की कंपनी है। खरीद और बिक्री दस्तावेज पर एक फ़राज़ मलिक के नाम हैं।