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‘स्टाफ को सैलरी देनी है बैंक खातों से रोक हटाएँ’: रिया चकवर्ती का अकाउंट डीफ्रीज, फोन-लैपटॉप भी मिले

मुंबई की एक अदालत ने बॉलीवुड अभिनेत्री रिया चकवर्ती के बैंक अकाउंट को डीफ्रीज करने का आदेश दिया है। उसने स्टाफ की सैलरी सहित अन्य देनदारियों को पूरा करने के लिए बैंक खातों से रोक हटाने की गु​हार लगाई थी। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में ड्रग्स एंगल की जाँच कर रही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने रिया के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया था।

नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत स्पेशल कोर्ट के जज डीबी माने में अकाउंट डीफ्रीज करने की रिया की याचिका स्वीकार की है। उन्होंने एक अन्य याचिका पर ₹1 लाख के बॉन्ड के साथ रिया के फोन, लैपटॉप और अन्य जब्त गैजेट्स भी लौटाने के निर्देश दिए।

रिपोर्ट के अनुसार रिया चकवर्ती ने अपनी याचिका में कहा था कि उनके बैंक अकाउंट और एफडी एनसीबी ने 16 सितंबर 2020 को फ्रीज कर दिए थे। स्टाफ की सैलरी, जीएसटी व अन्य टैक्स भुगतान और अन्य देनदारियों को पूरा करने के लिए बैंक खातों को डीफ्रीज करने की आवश्यकता है। साथ ही बताया था कि उनका भाई भी उन पर ही निर्भर है। एनसीबी की ओर से जाँच जारी होने का हवाला देते हुए याचिका का विरोध किया गया था। लेकिन स्पेशल जज ने इसे दरकिनार करते हुए अकाउंट्स डीफ्रीज करने के निर्देश दिए। साथ ही रिया को निर्देश दिए कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें खातों के विवरण एजेंसी के साथ साझा करनी होगी।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत 14 जून 2020 को ब्रांदा के अपने फ्लैट में फंदे से लटके मिले थे। सीबीआई इस मामले की जाँच कर रही है। मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के ऐंगल की जाँच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बॉलीवुड सेलिब्रिटीज और ड्रग पैडलर्स के बीच कनेक्शन मिले थे। इसके बाद एनसीबी ने कार्रवाई करते हुए कई जगहों पर छापेमारी और गिरफ्तारियाँ की थी।

रिया चकवर्ती और उनके भाई शौविक की इस मामले में गिरफ्तारी भी हुई थी। उन पर ड्रग्स का ‘इस्तेमाल और डीलिंग’ का आरोप है। इस मामले में विशेष विशेष एनडीपीएस कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने रिया को बेल दी थी। ​इसे NCB ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है। इसी साल मार्च में एजेंसी ने इस मामले में चार्जशीट भी दायर की थी। इसमें रिया सहित 33 लोग आरोपित बनाए गए हैं।

भगवद् गीता पर IIM अहमदाबाद में पाठ्यक्रम, कॉरपोरेट्स को सिखाएगा प्रबंधन और कुशल नेतृत्व से जुड़े स्किल

भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) अहमदाबाद कॉर्पोरेट पेशेवरों के लिए प्रबंधन पाठ (management lessons) पढ़ाने के लिए भगवद् गीता पर एक पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। 13 दिसंबर से शुरू होने वाले प्रोग्राम में गीता से ‘समकालीन प्रबंधन अवधारणाओं, संघर्षों, संकट की स्थिति और व्यापार में ट्रेड ऑफ का पता लगाने’ के पाठ और अध्याय शामिल किए जाएँगे।

महाभारत और भगवद् गीता जैसे भारतीय महाकाव्यों ने लोगों के जीवन को काफी प्रभावित किया है। महाकाव्यों में बताई गई बातें एक बेहतर जीवन के लिए बेहद जरूरी हैं। इसने कई संस्थानों और कॉरपोरेट्स को भी प्रेरित किया है। आईआईएम-ए वेबसाइट के अनुसार, ”भगवद् गीता के पाठ प्रबंधन की बारीकियों को समझने और इसमें बेहतर करने के लिए आवश्यक तरीके सुझाते हैं, जो बिजनेस मॉडल के अनुरूप हैं और नैतिक भी हैं।”

अहमदाबाद मिरर के साथ बात करते हुए एक आईआईएम अधिकारी ने कहा, “भगवद् गीता के पाठ Management Practices को बढ़ावा देने के सटिक तरीकों का सुझाव देते हैं, जो बिजनेस मॉडल के अनुरूप हैं और नैतिक भी हैं।”

पाठ्यक्रम के बारे में

पाठ्यक्रम को हर 3 घंटे के 6 सेशन में बाँटा गया है। पाठ्यक्रम का उद्देश्य अंतर्दृष्टि विकसित करना, समकालीन प्रबंधन और मूल्य-आधारित नेतृत्व की अवधारणाओं को मजबूत करना, नेतृत्व कुशलता और समझ को विकसित करना है। भगवद् गीता पढ़ने वाला हर शख्स कृष्ण-अर्जुन संवाद से महान शिक्षाओं, युद्ध में कदम रखने से पहले अर्जुन की दुविधा और एक मार्गदर्शक के रूप में कृष्ण की भूमिका से अच्छी तरह वाकिफ होगा।

अधिकारी ने आगे कहा, “भगवद् गीता पाठ्यक्रम प्रतिभागियों को आत्मविश्वास के साथ अपने करियर में चुनौतीपूर्ण समय का सामना करने की क्षमता विकसित करने में मदद करेगा। कार्यक्रम का उद्देश्य उन्हें कॉरपोरेट जगत में खुद को प्रभावी लीडर के रूप में विकसित करने के तरीकों के बारे में जागरूक करना है। केस डिस्कशन और वीडियो फिल्मों का उपयोग करके जो कंटेंट दिखाया जाएगा, उसमें कृष्ण ने गीता का जो उपदेश दिया जो आज भी व्यवहारिक जीवन की समस्याओं के लिए समाधानकारक है। वह सब भी​ सिखाया जाएगा।”

यह प्रोग्राम 5 साल के कार्य अनुभव वाले पेशेवरों के लिए है। निर्णय लेना, नेतृत्व क्षमता, प्रेरणा, रणनीति योजना, बातचीत, टीम के निर्माण में कुशल प्रबंधन तकनीकों को सीखने का इच्छुक कोई भी व्यक्ति पाठ्यक्रम के लिए नामांकन कर सकता है। प्रोग्राम की फीस 64,000 रुपए है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराने की अंतिम तिथि 29 नवंबर है।

मीडिया से बात करते हुए पाठ्यक्रम बनाने वाले प्रोफेसर सुनील माहेश्वरी ने कहा, “हम केस स्टडी पद्धति के माध्यम से पढ़ाते हैं और अगर हमें प्रबंधकों को ये कौशल सिखाना है, तो कुशल नेतृत्व सिखाने के लिए भगवान कृष्ण के जीवन से बेहतर तरीका और क्या हो सकता है।”

‘सूअर से कुश्ती नहीं लड़ना चाहिए, आप गंदे होंगे और उसे मजा आएगा’: नवाब मलिक के ‘हाइड्रोजन बम’ के बाद फडणवीस का पोस्ट

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नवाब मलिक के अंडरवर्ल्ड से संबंधों को उजागर करने के एक दिन बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाला है। बुधवार (10 नवंबर, 2021) को शेयर किए गए पोस्ट में उन्होंने आयरलैंड के दिवंगत लेखक जॉर्ज बर्नार्ड शॉ की एक उक्ति शेयर की, “मैं काफी समय पहले ही सीख गया था कि हमें किसी सूअर से कुश्ती नहीं लड़नी चाहिए। इससे आप तो गंदे हो ही जाओगे, ऊपर से सूअर को भी काफी मजा आता है।”

नवाब मलिक ने देवेंद्र फडणवीस के खुलासे के बाद ‘हाड्रोजन बम’ फोड़ने की बात कही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री के रियाज भाटी से रिश्ते हैं, जो अंडरवर्ल्ड के सरगना दाऊद इब्राहिम का करीबी है। इसके कुछ ही देर बाद महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने ‘आज के विचार (Thought Of The Day)’ के नाम से ये उक्ति शेयर की। माना जा रहा है कि नवाब मलिक के आरोपों की प्रतिक्रिया स्वरूप उन्होंने ये शेयर किया है।

इससे पहले नवाब मलिक ने आरोप लगाया कि देवेंद्र फडणवीस ने राजनीति का अपराधीकरण किया। उन्होंने कहा कि रियाज भाटी को फर्जी पासपोर्ट के साथ गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उसे दो दिन में ही छोड़ दिया गया। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि रियाज भाटी को कई कार्यक्रमों में देवेंद्र फडणवीस के साथ देखा गया है और भाजपा के कई कार्यक्रमों में भी वो दिखता है। महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के भाजपा नेता पर ये आरोप लगाए।

उन्होंने कहा, “मैं इस मामले में प्रधानमंत्री को नहीं लाना चाहता। लेकिन, रियाज भाटी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में भी गया था और उनके साथ तस्वीरें क्लिक कराई थीं। दुनिया भर के कई अंडरवर्ल्ड डॉन ने देवेंद्र फडणवीस द्वारा नियुक्त किए गए ठाणे के पुलिस अधिकारियों को कॉल किया और मुद्दे को दबा दिया गया। 2016 में नोटबंदी के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री फडणवीस ने राज्य में फर्जी नोट गिरोह को बचाया। इसके लिए तब DRI रहे समीर वानखेड़े की मदद ली गई।”

नवाब मलिक ने आरोप लगाया कि जब 2016 में नोटबंदी के बाद जब देश के कई हिस्सों में जाली नोटों की खेप पकड़ी जा रही थी, तब 8 अक्टूबर, 2017 तक महाराष्ट्र में जाली नोट पकड़े जाने का कोई भी मामला सामने नहीं आया, क्योंकि यहाँ देवेंद्र फडणवीस की देखरेख में जाली नोटों के खेल चल रहा था। बता दें कि शाहरुख़ खान के बेटे आर्यन के ड्रग्स मामले में पकड़े जाने के बाद से ही नवाब मलिक समीर वानखेड़े पर हमलावर हैं और व्यक्तिगत आक्षेप भी लगाते रहे हैं।

बता दें कि फडणवीस ने सॉलिडस नाम की एक कंपनी का जिक्र करते हुए कहा था कि नवाब मलिक पहले इसके सदस्य थे और अब उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने दावा किया था कि NCP नेता नवाब मलिक का परिवार अब भी इस कंपनी से जुड़ा हुआ है। उनका आरोप है कि सॉलिडस कंपनी ने 2007 में 2053 रुपए प्रति वर्ग फुट में जमीन खरीदी थी। तीन एकड़ जमीन अंडरवर्ल्ड के लोगों से महज 30 लाख रुपए में खरीदी गई थी, जिसमें से 20 लाख रुपए दिए गए। उन्होंने दाऊद से जुड़े रहे सलीम पटेल और 1993 मुंबई धमाकों के आरोपित सरदार शाह वली खान से नवाब मलिक के रिश्तों को उजागर किया।

जल छिड़क कर टॉक्सिक फोम से छुटकारा, केजरीवाल सरकार ने यमुना सफाई के 2000 करोड़ पर फेरा पानी: छठ पर लोगों ने घेरा

देश की राजधानी दिल्ली में यमुना नदी का पानी गंदे नालों और फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल के कारण पूरी तरह से जहरीला हो गया है। छठ के मौके पर श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए अब दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारी जहरीले झाग से छुटकारा पाने के लिए यमुना नदी पर पानी छिड़क रहे हैं। इसको लेकर सोशल मीडिया पर लोग केजरीवाल सरकार के मजे ले रहे हैं।

इस मामले में दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारी अशोक कुमार ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि वे शाम तक झाग से छुटकारा पाने के लिए नदी के किनारे यमुना के जल में पानी छिड़केंगे। यह छठ पूजा के लिए जहरीले झाग को खत्म करने तैयारी का हिस्सा है जहाँ भक्त सूर्य से प्रार्थना करते हुए पानी में डुबकी लगाते हैं।

हालाँकि, यह समझ नहीं आ रहा है कि पानी छिड़कने के बाद नदी कैसे साफ की जा सकेगी। लेकिन, अब नेटिजन्स को ये बात परेशान कर रही है कि जब इतने सरल तरीके से जहरीले झाग से निपटा जा सकता था तो अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने नदी की सफाई के लिए 2000 करोड़ रुपए क्यों आवंटित किए थे।

सोशल मीडिया पर तार्किक लोग यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि जहरीले झाग को छितरा देने भर से कैसे यमुना के पानी का जहरीलापन कम होगा। लेकिन, इसमें किसी प्रकार का आतिशयोक्ति नहीं होना चाहिए, क्योंकि जब आम आदमी पार्टी की बात आती है, तो ज्यादातर समय तर्क और बेसिक सामान्य ज्ञान को झुठला दिया जाता है।

गजेंद्र नाम के यूजर ने लिखा कि गैर-मानसून महीनों में अगर इस तरह से यमुना में पानी का छिड़काव करने से नदी का जल स्तर बढ़ सकता है और शायद राष्ट्रीय राजधानी में भी जल संकट का समाधान हो सकता है। इतने अच्छे आइडिया का मजाक उड़ाने वाले लोगों को शर्म आनी चाहिए।

दरअसल, यमुना के पानी के जहरीलेपन को खत्म करने के केजरीवाल सरकार के इस आइडिया से हर कोई आश्चर्यचकित है। किसी ने भी नहीं सोचा था कि AAP सरकार यमुना के जहरीले झाग को साफ करने के लिए आगे आएगी।

वैसे भी प्राकृतिक नियमों के विपरीत यमुना नदी को पानी उपलब्ध कराने के दिल्ली के सीएम की महानता की सराहना नेटिजन्स ने की। दिल्ली सरकार के इस आश्चर्यचकित कर देने वाले कारनामे पर आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और कवि कुमार विश्वास ने भी दिल्ली के हालात का वर्णन करते हुए एक कविता लिख दी।

हालाँकि, अगर आप दिल्ली सरकार के इस साइंटफिक सॉल्यूशन से अचंभित हो रहे हैं तो इसकी कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि दिल्ली सरकार का विज्ञान से बहुत गहरा रिश्ता है। आखिरकार, वे अपनी सरकार में बहुत पढ़े-लिखे लोगों के होने का दावा जो करते हैं। इसी तरह जनवरी 2021 में दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने एक वैज्ञानिकता भरा तर्क देते हुए कहा था कि दिल्ली में पानी की आपूर्ति करने वाले पाइपों को साफ करना असंभव था।

उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें एक पत्रकार सिसोदिया से खराब गुणवत्ता वाले पानी के बारे में पूछता है। इस पर सिसोदिया ने समझाया कि जब पानी की आपूर्ति की जा रही है और मोटर चालू रहेगा तो पानी साफ हो जाएगा। उन्होंने कहा, “भौतिकी बताती है कि जब आप पानी की आपूर्ति बंद होने पर मोटर चालू करते हैं तो वो पाइप के अंदर की मिट्टी और अन्य गंदगी को अपने साथ ले जाएगा।” उन्होंने दिल्लीवासियों को सलाह दी कि पानी की सप्लाई के लिए जो समय निर्धारित किया गया है अगर वो उसमें मोटर को चालू करेंगे तो उन्हें साफ पानी मिलेगा।

उस दौरान भी किसी ने ये तनिक भी नहीं सोचा था कि #ScientistSisodia इतना अच्छा आइडिया भी सुझा सकते हैं।

सिंघु बॉर्डर पर अब पेड़ से लटका मिला 45 साल का गुरप्रीत, ‘किसान आंदोलन’ से लंबे समय से जुड़ा था: प्रदर्शन स्थल पर ट्रॉली में ठहरा था

दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के बीच वहाँ एक किसान का शव पेड़ से लटका हुआ मिला है। मृतक की पहचान 45 वर्षीय गुरप्रीत सिंह के रूप में हुई है। दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर नीम के पेड़ से गुरप्रीत सिंह का शव लटका हुआ मिला। वो पंजाब के फतेहगढ़ साहिब के रहने वाले थे। कुंडली थाने की पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर आगे की जाँच शुरू कर दी है। गुरप्रीत सिंह काफी लंबे समय से ‘किसान आंदोलन’ से जुड़े हुए थे।

मृतक किसान ‘भारतीय किसान यूनियन (BKU सिद्धपुर)’ का सदस्य था। तहसील अमलोह के रुड़की गाँव निवासी गुरप्रीत सिंह अपने कई साथियों के साथ लंबे समय से प्रदर्शन स्थल पर ही ट्रॉली में ठहरे हुए थे। दिवाली से पहले उनके बाकी के साथी अपने घर लौट गए थे, जिसके बाद ट्रॉली में गुरप्रीत सिंह को अकेला ही रहना पड़ रहा था। बुधवार (10 नवंबर, 2021) की सुबह अन्य किसानों ने देखा कि नांगल रोड पर पार्कर मॉल के पास एक नीम के पेड़ पर रस्सी से एक व्यक्ति का शव लटका हुआ है।

इसके बाद कुंडली थाने की पुलिस को इस सम्बन्ध में सूचित किया गया। पुलिस ने शव को अपनी निगरानी में पेड़ से उतरवाया और पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेजा। आसपास अन्य ट्रॉलियों में रहने वाले किसानों से जानकारियाँ जुटाई जा रही है। मृतक के परिजनों को घटना की जानकारी दे दी गई है। पुलिस अब तक पता नहीं कर पाई है कि ये हत्या है या फिर आत्महत्या। उक्त किसान BKU के जिस गुट से जुड़ा हुआ था, उसका नेतृत्व जगजीत सिंह डल्लेवाल नाम के किसा नेता करते हैं।

याद दिला दें कि पिछले सप्ताह लखबीर सिंह की जघन्य हत्या कर शव को सिंघु बॉर्डर के पास लगे बैरिकेड से टाँग दिया गया था। निहंगों ने गुरु ग्रन्थ साहिब की बेअदबी के आरोप में लखबीर सिंह की बेरहमी से हत्या कर दी थी। उनके हाथ-पाँव काट डाले गए थे। हत्या के बाद उलटा मृतक के विरुद्ध ही FIR दर्ज करवा दी गई थी। इस मामले में 4 निहंग सिख गिरफ्तार किए गए हैं। उन्होंने अपना गुनाह कबूल करते हुए कहा था कि लखबीर सिंह को ‘सज़ा’ दी गई है।

‘दलित हो औकात में रह, मोदी-शाह नहीं बचाएगा’: राजस्थान में BJP की महिला सांसद को धमकी, फोटो पर क्रॉस निशान लगा चिपका दिया जिंदा कारतूस

राजस्थान में भरतपुर की भाजपा सांसद रंजीता कोली के आवास पर देर रात बदमाशों ने गोलीबारी की। हमलावरों ने सांसद के पोस्टर पर क्रॉस का निशान लगाकर उसपर जिंदा कारतूस चिपकाए। साथ ही साथ एक धमकी भरा लेटर छोड़ा।

इस लेटर में लिखा है, “दलित है, दलित बनकर रह। सारी सांसद गिरी निकाल देंगे। पहले तो एक बार छोड़ दिया तो नहीं मानी। औकात में रह, तेरे को न तो अंबेडकर बाबा साहब बचाएगा और न मोदी और शाह। हवा में उड़ रही है न तू। यह तो सिर्फ एक ट्रेलर है। अगली बार तेरे अंदर गोलियाँ भर देंगे।”

सांसद रंजीता कोली

गोलीबारी की इस घटना के बाद से सांसद और उनके परिजन दहशत में हैं। रंजीता कोली की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। बताया जा रहा है कि हमले के वक्त सांसद के घर पर उनके दोनों गनमैन मौजूद नहीं थे।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, सांसद रंजीता ने हमले को लेकर कहा कि वह कल साढ़े 9 बजे के करीब भरतपुर से आई थीं। इसके बाद खाना खाकर 11:30 बजे या 12 बजे के करीब सब सोने की तैयारी में लग गए। तभी नीचे से आवाज आई। आवाज बहुत तेज थी। ऐसा लगा किसी ने फायर किया हो। नीचे के हिस्से में उनकी जेठानी रहती हैं, वह घर पर नहीं थीं, इसलिए सांसद खुद ही नीचे देखने के लिए गईं। जैसे उन्होंने घर का गेट खोला तो सामने ही उनका पोस्टर लगा हुआ था, जिस पर गोलियाँ चिपकी हुई थीं। उसे देख सांसद की तबीयत बिगड़ गई।

वहीं इस घटना पर सीओ अजय कुमार ने बताया कि रात को सांसद रंजीता कोली के घर बाहर एक धमकी भरा लेटर और उनके पोस्टर पर कारतूस चिपका कर जाने की जानकारी उनको मिली थी। इसके बाद मौके पर पुलिस अधिकारी वहाँ गए लेकिन गोलीबारी के उन्हें कोई सबूत नहीं मिले। वहीं रंजीता के भाई दीपक कुमार का कहना है कि बतौर सांसद रंजीता कुछ जनहित के मुद्दे उठा रही है जिसके कारण कई लोगों के अवैध कारोबार बंद हो जाएँगें। संभव है कि ये काम उन्हीं लोगों में से किसी ने किया हो। मामला दर्ज हो गया है। पुलिस आरोपितों का पता लगा रही है।

इस घटना की बाबत राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “राजस्थान की बिगड़ती कानून व्यवस्था के प्रतिदिन अनेक उदाहरण देखने को मिल रहे हैं; सांसद जैसे जनप्रतिनिधियों पर बार बार जानलेवा हमला हो रहा है; भरतपुर सांसद श्रीमती रंजीता कोली के घर पर हमला; आखिर राज्य के गृहमंत्री कब तक सोते रहेंगे; कानून व्यवस्था न सम्भले तो इस्तीफा दें।”

वहीं प्रदेश मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, “भरतपुर सांसद श्रीमती रंजीता कोली से फोन पर बात कर कुशलक्षेम जानी। साथ ही, डीजीपी, प्रमुख सचिव, गृह विभाग को निर्देशित किया है कि घटना की पूरी जाँच कर सख्त कार्रवाई की जाए। घटना की जाँच के लिए जयपुर से SOG की टीम भरतपुर जाकर घटना की जाँच करेगी।”

बता दें कि भाजपा सांसद रंजीता कोली पर 27 मई 2021 को भी एक हमला किया गया था। उस समय वह धरसोनी गाँव में कम्युनिटी हेल्थ सेंटर का दौरा करने पहुँची थी। हमले के बाद की तस्वीरों में देखा गया था कि उनकी गाड़ी के शीशे टूट गए थे और सीट पर ईंट-पत्थर भी थे।

जून में कहा- निकाह क्यों करनी, नवंबर में तस्वीरें दिखा दुनिया को दी निकाह की खबर: जानिए कौन हैं मलाला के शौहर असर

शांति का नोबल पुरस्कार पाने वाली मलाला युसुफजई (24) ने निकाह कर लिया है। उन्होंने मंगलवार 9 नवंबर को ट्वीट कर इसके बारे में जानकारी दी। मलाला ने लिखा, “आज का दिन मेरे जीवन का एक अनमोल दिन है। जीवन भर का साथ निभाने के लिए असर और मैंने निकाह कर लिया है। अब हम एक साथ जीवन बिताने के लिए उत्साहित हैं।”

उन्होंने बताया कि निकाह ब्रिटेन के बर्मिंघम स्थित उनके घर पर एक छोटे से कार्यक्रम हुआ। इसकी कुछ तस्वीरें भी शेयर की। उनके शौहर का नाम असर मलिक है। रिपोर्ट के अनुसार असर क्रिकेट की दुनिया से जुड़े हैं। वे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के हाई परफॉर्मेंस जनरल मैनेजर हैं। वे 2020 में पीसीबी से जुड़े थे। उन्होंने लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज से 2012 में अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन किया था।

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड से जुड़ने से पहले असर मलिक प्लेयर मैनेजमेंट एजेंसी में प्रबंध निदेशक थे। पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) फ्रेंचाइजी मुल्तान सुल्तान से भी उनका जुड़ाव रहा है। उन्हें वहाँ ऑपरेशनल मैनेजर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। गौरतलब है कि मलाला को 2012 में वैश्विक पहचान तब मिली जब पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा की पैरोकारी पर तालिबान ने उनके सिर में गोली मार दी थी। उस वक्त वह 15 साल की थीं।

जब मलाला ने कहा- निकाह क्यों करनी

ट्विटर के जरिए निकाह की खबर देने वाली मलाला इसी साल जून में अपने एक बयान को लेकर पाकिस्तान में विवादों में आ गईं थी। दरअसल ब्रिटिश पत्रिका वोग को दिए साक्षात्कार में उन्होंने निकाह पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था, “मुझे समझ नहीं आता कि क्यों लोगों का निकाह करना जरूरी है। यदि आप अपने जीवन में कोई व्यक्ति चाहते हैं, तो आपको निकाह के कागजात पर दस्तखत करने की क्या जरूरत है। यह केवल साझेदारी क्यों नहीं हो सकती?”

‘बकवास मत करो मूर्ख आदमी’: जब मिया खलीफा का नाम सुनते ही भड़क गए उदित राज, कहा- वो दिल से कलाकार

हाल में कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने पत्रकार अभय प्रताप सिंह को दिए एक इंटरव्यू में ‘आईटी सेल’ की शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि ये सब लोग ट्विटर पर उन्हें ‘काला तीतर’ और ‘कऊआ’ कहते हैं। लेकिन उन्हें सब पता चलता है कि इसके पीछे कौन है। अब इसी इंटरव्यू के कुछ दिसचस्प अंश और सामने आए हैं।

अभय प्रताप सिंह को दिए इंटरव्यू में उदित राज ने मिया खलीफा पर बात की हुई है। कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि वो हॉलीवुड को बहुत अंदर से जानते हैं और बॉलीवुड में तो सितारे सिर्फ अपने बच्चों के लिए कमाई करते हैं। पत्रकार ने जब उनसे पूछा कि आखिर ये जो किसान आंदोलन में रिहाना और मिया खलीफा के ट्वीट आए थे…तो ये लोग कौन से किसान नेता हैं और क्या जैसे बीजेपी कंगना को समर्थन दे रही है। वैसे ही कॉन्ग्रेस इन्हें टिकट देगी।

इस सवाल पर उदित राज ने उन्हें कहा कि उन्हें ये सब क्या मालूम। इस पर जिसने पहले रिएक्शन दिया था उससे सवाल होना चाहिए। कॉन्ग्रेस नेता ऐसा बयान देकर कोशिश कर रहे थे कि वो अपने वाले ट्वीट से पत्रकार का ध्यान भटका दें, लेकिन पत्रकार इस सवाल पर अड़ा रहा और उदित राज की हालत बीच इंटरव्यू में ऐसी हो गई कि उन्होंने कैमरे के सामने झुंझुलाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि रिहाना ग्रेटा और मिया खलीफा के ट्वीट पर सबसे पहले गोदी मीडिया और आईटी सेल ने प्रतिक्रिया दी तो उनसे सवाल होना चाहिए।

उदित राज ने दावा किया कि हॉलीवुड को लोगों ने आज जाकर जाना है लेकिन वो इसे भीतर से जानते हैं। वहाँ शत-प्रतिशत लोग दिल से कलाकार हैं। जब अभय प्रताप सिंह ने जोर देकर मिया खलीफा के ट्वीट पर पूछा तो उदित राज कहने लगे कि उनसे कुतर्क न किया जाए और न मिया खलीफा को बीच में लाया जाए।

उदित राज से अभय प्रताप ने कहा कि आपके हिसाब से ग्रेटा और रिहाना जैसों के ट्वीट पर रिएक्ट मूर्खों ने किया तो क्या वो (उदित राज) भी इस पर प्रतिक्रिया देकर मूर्ख बने। इस पर कॉन्ग्रेस नेता ने कहा- “बकवास मत करो तुम। तुम बेवकूफ आदमी हो। तुम मूर्ख आदमी हो। भागो, ले जाओ अपना टाट-टप्पर व दोबारा दिखाई न पड़ना यहाँ पर।”

बता दें कि इसी इंटरव्यू में कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने अपना दर्द बयां किया था। उन्होंने कहा था, ”ये लोग जो ट्रेंड करवाते हैं कि उदित राज कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष होंगे, उसके नीचे जब आप देखें तो वहाँ मुझे ढेरों गाली दी हुई होंगी। मुझे काला तीतर, कऊआ बुलाते हैं, तो ये गोरे हैं और हम काले हैं। ये सब हम देखते रहते हैं। आप समझ सकते हैं कि ये सब करने के पीछे इनका क्या मकसद है।”

पहले यौन शोषण की शिकायत करने वाली कॉलेज छात्राओं पर बनाया दबाव , फिर उनका साथ देने वाले शिक्षकों पर एक्शन

केरल में उन कॉलेज प्रोफेसरों पर कार्रवाई की गई है, जिन्होंने यौन शोषण की शिकायत करने वाली छात्राओं का समर्थन किया था। मामला तिरुवनंतपुरम के चेम्पाझांथी (Chempazhanthy) स्थित एसएन कॉलेज का है। रिपोर्टों के अनुसार 6 छात्राओं ने इसी साल जुलाई में असिस्टेंट प्रोफेसर टी अभिलाष पर यौन शोषण और आपत्तिजनक मैसेज भेजने का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। कोई कार्रवाई नहीं होने उन्होंने अगस्त में राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान से भी इसकी शिकायत की थी।

द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के अनुसार अब उन 5 प्रोफेसरों पर कार्रवाई की गई जिन्होंने इस मामले में छात्राओं का समर्थन किया था। इनमें से तीन का ट्रांसफर कर दिया गया है जबकि दो को सस्पेंड किया गया है। कार्रवाई कॉलेज का संचालन करने वाली श्री नारायण ट्रस्ट कोल्लम की ओर से की गई है। जिन शिक्षकों पर कार्रवाई की गई है उनके नाम हैं, मनु रेमाकांत, लक्ष्मी एजे, रेम्या सीआर, लेखा एनबी और संगीता हरिहरन। आरोपित टी अभिलाष राजनीति विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर है।

रिपोर्ट के अनुसार पीड़ितों का साथ देना कॉलेज मैनेजमेंट को नागवार गुजरा। कॉलेज प्रबंधन ने कार्रवाई करते हुए मनु रेमाकांत को एसएन कॉलेज चेरथला, रेम्या को नाग्यारकुलंगारा और संगीता का तबादला कोल्लम में कर दिया। कार्रवाई से पहले इन शिक्षकों को एक मेमो जारी किया गया था, लेकिन इसकी जानकारी उन्हें 8 नवंबर को मिली। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि जानबूझकर शिक्षकों को मेमो का जवाब देने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया।

खास बात यह है कि आरोपित शिक्षक अभिलाष के खिलाफ कॉलेज प्रशासन ने अब तक कार्रवाई नहीं की है। छात्राओं का साथ देने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई का विरोध भी हो रहा है। कॉलेज छात्रों ने 9 नवंबर को इस पर आपत्ति जताते हुए प्रबंधन से इसका कारण पूछा। इस मामले में प्रिंसिपल ने कहा कि शिक्षकों के तबादले में उनकी कोई भूमिका नहीं है।

​इससे पहले यह बात सामने आई थी कि ​छात्राओं पर शिकायत वापस लेने का दबाव डाला जा रहा है। साथ ही रिपोर्ट में बताया गया था कि शिकायतकर्ता छात्राओं की पहचान तक उजागर कर दी गई। इतना ही नहीं मामले की जाँच के लिए इंटरनल कंप्लेन कमिटी के गठन में भी यूजीसी गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया।

बच्चियाँ हिंदू और ट्रेनिंग ईसाइयत की: क्रिश्चियन मिशनरी गर्ल्स हॉस्टल में चल रहा था ‘धर्मांतरण का धंधा’, NCPCR ने खोली पोल

मध्यप्रदेश के रायसेन में क्रिश्चियन मिशनरी गर्ल्स हॉस्टल में चल रहे धर्मांतरण के धंधे का राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने पर्दाफाश किया है। आयोग के अध्यक्ष ने हॉस्टल का औचक निरीक्षण करते हुए पता लगाया कि वहाँ आदिवासी हिंदू लड़कियाँ लाकर रखी गई थीं जिन्हें धार्मिक पुस्तकें देकर ईसाई धर्म की ओर आकर्षित करने की कोशिश हो रही थी।

आयोग अध्यक्ष ने अपनी छानबीन के दौरान हॉस्टल में रखे गए रजिस्टर चेक किए और बताया कि हॉस्टल के परिसर में 15-20 बच्चियों को रखा गया है, जो हिंदू आदिवासी हैं और इनमें कुछ नॉर्थ-ईस्ट की भी लड़कियाँ हैं। इन्हें ईसाई धर्म से संबंधित किताब पढ़ाई जा रही थीं। उन्हें बाइबल मिली थी, जो कि  निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी को सौंप दी गई।

अपने ट्वीट में उन्होंने एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “ईसाई मिशनरियों के छात्रावास का औचक निरिक्षण, चला रहे थे धर्मांतरण का धंधा।” इस वीडियो में आयोग अध्यक्ष ने अपना बयान भी दिया है।

प्रियंक कानूनगो कहते हैं, “इन्हें किसी प्रकार की खास ट्रेनिंग के लिए तैयार किया जा रहा था। ये बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ रहे थे क्योंकि परिसर में कोई स्कूल नहीं था। ये अपने आप में जाँच का विषय है कि बच्चे वहाँ आए कैसे और कैसे वो वहाँ रह रहे थे।” वह कहते हैं, “इस तरह इनका धर्मांतरण कराना न केवल कानूनी तौर पर बल्कि नैतिक तौर पर भी गलत है। हमने आदेश दिया है कि इस तरह धर्मांतरण की गतिविधि चलाने वालों पर कार्रवाई की जाए।”

तिलक लगाने पर छात्र की पिटाई, NCPCR ने दिए कार्रवाई के निर्देश

यहाँ बता दें कि मध्यप्रदेश के रायसेन में दौरे के समय एनसीपीसीआर अध्यक्ष ने एक अन्य मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। ये मामला एक नाबालिग लड़के से जुड़ा है जिसे कुछ दिन पहले तिलक लगाने के कारण उसकी टीचर निशाद बेगम ने बाहरी लड़कों से पिटवाया था। आयोग ने उस मामले में पुलिस से कहा है कि वो पीड़ित के ताजा बयान पर संज्ञान लें और 2 दिन के अंदर रिपोर्ट दें।

अपने पत्र में आयोग ने कहा कि मामले में हुई पड़ताल से अभी पीड़ित के परिजन संतुष्ट नहीं हैं और आरोप लगाया है कि जाँच अधिकारी ने उनसे या पीड़ित से संपर्क नहीं किया। पत्र में लिखा है कि पीड़ित का बयान आयोग के अध्यक्ष के निर्देश पर एसडीएम, तहसीलदार, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष की मौजूदगी में दर्ज किया गया है। उन्होंने पुलिस को कहा है कि वह इस बयान पर संज्ञान लें और उचित कार्रवाई करें।

NCPCR writes to Raisen police after family of victim claim dissatisfaction with police action
NCPCR का पत्र