Home Blog Page 3244

18 साल पहले डर से कबूला था इस्लाम, मुजफ्फरनगर के आश्रम में हवन-पूजा कर पूरे परिवार ने हिंदू धर्म में की वापसी

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के बघरा स्थित योग साधना यशवीर आश्रम में एक मुस्लिम परिवार के 15 लोगों ने धर्म बदलकर हिंदू धर्म में एंट्री ली। परिवार का कहना है कि उन्होंने 18 साल पहले डरकर इस्लाम कबूला था, मगर अब वह दोबारा धर्म में लौटना चाहते हैं।

जानकारी के मुताबिक, ये परिवार बिनौली क्षेत्र का है और इन्होंने सोमवार (नवंबर 8, 2021) को आश्रम पहुँचकर हिंदू धर्म अपनाने की इच्छा जाहिर की। इसके बाद आश्रम के संचालक यशवीर महाराज ने उनसे आश्रम में हवन-पूजा करवाई और इनकी हिंदू धर्म में आस्था देखते हुए इन्हें दोबारा हिंदू धर्म में स्वीकार कराया।

इस दौरान इन्हें जेनऊ पहनाई गई और विधि-विधान से शुद्धिकरण के बाद रहीसू का नाम यशपाल किया गया, दानिश का नाम दिनेश किया गया, जरीना को मिथलेश बनाया गया। इसी तरह शमी को बादल, सनी को दीपक, गुलबहार को संगीता, आसमां को कविता, आशिया को वंदना, आनिया को प्रतिमा, नीशा को नीशा देवी, सुलेखा का सरोज, असगर का बिल्लू कुमार, शकील का अमित, अशरफ का विनोद नाम रखा गया।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, परिवार के कुल 15 लोगों ने हिंदू धर्म में वापसी की। इनमें 7 महिलाएँ, 5 पुरूष और 3 बच्चियाँ हैं। परिवार मजदूरी करके पेट पालता है। इस धर्म परिवर्तन की पूरी प्रक्रिया में मोहनलाल, सागर शर्मा, सुमित चौधरी, परमजीत, अमरपाल, मुकेश कुमार और रविंद्र मौजूद थे। वहीं परिवार के सदस्यों ने कहा कि 18 साल बाद उन्होंने हिंदू धर्म में वापसी कर ली है। उनके मुताबिक, उन्होंने इस्लाम डर से अपनाया था लेकिन अब हिंदू धर्म वह अपनी मर्जी से स्वीकार रहे हैं। उनके ऊपर किसी ने दबाव नहीं बनाया।

बता दें कि इससे पहले इस्लाम छोड़कर परिवार सहित हिंदू धर्म अपनाने का एक मामला यूपी के शामली से आया था। वहाँ 9 अगस्त को तीन मुस्लिम परिवारों ने हिंदू धर्म में वापसी की थी। कांधला कस्बे के सूरज कुंड मंदिर में पहले इन परिवारों का पूजा-पाठ के साथ शुद्धिकरण किया गया, इसके बाद 18 मुस्लिमों का धर्म परिवर्तन कर उनकी घर वापसी कराई गई। घर वापसी करने वालों में 7 महिलाएँ, 4 पुरुष और 4 बच्चे शामिल थे।

लालू राज से भागते बिहारी, दिल्ली में 90 के दशक में कैसे मनाते थे छठ: लोकपर्व के ब्रांड बनने की कहानी

बिहार का लोकपर्व छठ अब सिर्फ एक त्योहार नहीं होकर ब्रांड बन गया है। 1992 में जब मैं पिताजी के साथ दिल्ली आया था तो माँ ने पहला छठ इंडिया गेट के बोट क्लब के कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देकर मनाया था। हम तब वसंत कुंज में रहते थे। वहाँ से बस रूट नंबर 604 लेकर कृषि भवन पहुँचे थे। तब गिनती के 10-15 व्रती छठ कर रही थीं। पुरुष व्रती एक भी नहीं थे उस वर्ष। उस समय यहाँ के लोगों के लिए यह पर्व कौतूहल का विषय था। लोग रुक के देखते थे।

उस समय दिल्ली के अन्य बसते हुए मोहल्लों में छिटपुट बिहारी छठ मनाना शुरू कर चुके थे। एक अनुमान के अनुसार उस समय दिल्ली में छठ मनाने वालों की कुल संख्या 1000 भी नहीं थी। इससे पहले तक ज्यादातर बिहारी कलकत्ता (कोलकाता), बॉम्बे (मुंबई), सूरत को अपना कार्य क्षेत्र बनाते थे। लेकिन 1991-92 के बाद से दिल्ली बिहारियों का नया कार्य क्षेत्र बनना शुरू हुआ। तब दिल्ली की राजनीति पर पंजाबियों का वर्चस्व हुआ करता था। लेकिन जैसे ही डेमोग्राफी बदली 1998 के विधानसभा चुनाव में शीला दीक्षित की चुनावी जीत में बिहारियों ने मुख्य किरदार अदा किया। फिर 2003, 08, 13 के चुनाव में बिहारियों ने बताया कि दिल्ली की चुनावी राजनीति के वे किंग मेकर बन चुके हैं।

यहाँ ये गौर करने वाली बात है कि जो बिहार छोड़ कर आ रहे थे, लगभग सभी लालू राज से त्रस्त थे या लालू/कॉन्ग्रेस के अलावा उस वक़्त बिहार में कोई प्रभावी विकल्प नहीं होने से निराश थे। हालाँकि रथ यात्राओं के बाद बिहार की चुनावी राजनीति में बीजेपी की हवा बननी शुरू हो गयी थी। बावजूद इसके जो बिहारी उस समय दिल्ली आए उन्होंने कॉन्ग्रेस को ही जाना था। राजीव गाँधी और गाँधी परिवार के प्रति उनकी सहानुभूति भी थी। एक वजह यह भी थी कि अरविंद केजरीवाल और आप (AAP) के उदय से पहले तक दिल्ली में बिहारी कॉन्ग्रेस को लगातार चुनते रहे। वहीं बिहार इसी दौरान धीरे-धीरे भाजपामय होते गया।

फिर बिहारियों के छठ पर लौटते हैं। बिहारी जहाँ गए, अपने साथ अपनी संस्कृति और परंपरा लेकर गए। यथासंभव उसका पालन भी करते रहे हैं। आज भी गिरमिटिया में इसकी छाप दिख जाती है। सामूहिक रूप से मनाया जाने वाला आस्था का महापर्व छठ अब बिहार का ब्रांड बन गया है। भले बिहारी की राजनीति जातिवादी हो, लेकिन छठ एक ऐसा त्योहार है जहाँ जाति का बँधन नहीं रहता। एक घाट पर सभी जाति के व्रती और परिवार वाले अर्घ्य देते हैं। बिहारी जहाँ गए छठ फैलता गया। अब भारत और विश्व के लगभग सभी प्रमुख शहरों में छठ का अर्घ्य देते हुए व्रती आपको दिखेंगे। बिहार में मुस्लिम भी यह व्रत रखते हैं। वह समय दूर नहीं जब भारत और विश्व के सभी समुदाय छठ को आत्मसात कर लें। इसे ग्लैमराइज्ड करने में मीडिया और सोशल मीडिया ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

चढ़ते सूर्य को को तो दुनिया प्रणाम करते आई है। लेकिन सबसे कठिन व्रत में से एक छठ दुनिया का इकलौता पर्व है, जिसमें डूबते सूर्य को भी प्रणाम किया जाता है। छठ की सबसे बड़ी विशेषता है इस त्योहार में शुद्धता, स्वच्छता और पवित्रता का सबसे मुख्य स्थान होना। छठ व्यापार का भी मौका देता है। टूरिज्म सेक्टर से जुड़े बिहारी, छठ टूरिज्म का एक पैकेज बना उन लोगों को बिहार लाकर छठ की छठा दिखा सकते हैं, जिनको इस पर्व को जानने की उत्सुकता हो। वैसे भी बिहार में होने वाले छठ की बराबरी बिहार से बाहर होने वाले छठ में कहाँ!

(लेखक मनीष आनंद 90 के दशक की शुरुआत में दिल्ली में आए थे और यहीं के होकर रह गए। ​फिलहाल बिहार में ‘मिथिला नेचुरल्स’ नाम से एक स्टार्टअप शुरू कर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने में लगे हैं। यह लेख उनके फेसबुक पोस्ट पर आधारित है।)

पूनम पांडे को शौहर सैम अहमद ने इतना पीटा कि अस्पताल में एडमिट होना पड़ा, पिछले साल गोवा में भी मारा था

अपने बोल्ड फोटोशूट के लिए सोशल मीडिया पर चर्चा में बनी रहने वाली अभिनेत्री पूनम पांडे के पति सैम अहमद बॉम्बे को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया है। अभिनेत्री ने अपने शौहर के ऊपर मारपीट करने का आरोप लगाया था। वह अस्पताल में भी भर्ती हुई थीं।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, मुंबई पुलिस ने बताया कि पूनम पांडे के पति सैम अहमद को उन्होंने रविवार (नवंबर 7, 2021) को गिरफ्तार किया। अभिनेत्री ने शिकायत की थी कि सैम ने उनसे मारपीट की। पूनम को अस्पताल में भी भर्ती किया गया था।

बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब सैम अहमद के खिलाफ़ पूनम पांडे ने मारपीट का मामला दर्ज कराया हो। उन्होंने पिछले साल सितंबर में अपनी शादी के दो हफ्ते बाद ही अहमद के ख़िलाफ़ उत्पीड़न, मारपीट और धमकी देने का आरोप लगाया था।

इस शिकायत के बाद बॉम्बे पुलिस ने सैम अहमद को गोवा में 22 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया था। पुलिस में दर्ज श‍िकायत के मुताबिक, दक्ष‍िण गोवा के कानाकोना गाँव में पूनम पांडे किसी फिल्‍म की शूटिंग कर रही थीं। यह घटना तभी हुई थी। 

कानाकोना पुलिस थाने के इंस्‍पेक्‍टर तुकाराम चव्‍हाण के अनुसार, पूनम ने अपनी श‍िकायत में कहा था कि सितंबर 21, 2020 की रात सैम अहमद ने उन्‍हें मोलेस्‍ट किया और मारपीट की। इतना ही नहीं, पूनम ने यह भी कहा था कि सैम अहमद बॉम्‍बे ने उन्‍हें अंजाम भुगतने की भी धमकी दी थी।

बता दें कि अभिनेत्री के 37 वर्षीय शौहर सैम अहमद पेशे से एक फिल्म डायरेक्टर हैं, जिनका घर दुबई में है। उनके एक प्रोडक्शन हाउस का नाम बॉम्बे मैटिनी फिल्म्स भी है। वहीं, पूनम पांडे कानपुर से हैं। उन्होंने साल 2013 में फिल्म नशा से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद से वह अपने बोल्ड फोटोशूट के कारण अक्सर चर्चा में रहीं। उन्होंने कई तेलुगु और कन्नड़ फिल्मों में भी काम किया। सैम अहमद बॉम्बे के साथ उनका रिलेशन करीब 4 साल पुराना है। पिछले साल 27 जुलाई 2020 को दोनों ने सगाई की थी और 10 सितंबर 2020 को सोशल मीडिया पर खबर दी थी कि उन्होंने शादी कर ली है।

खुद 44 साल से व्हीलचेयर पर हैं रामकृष्णन, दिव्यांगों की मदद के लिए पद्मश्री से हुए सम्मानित: PM मोदी ने किया प्रणाम

विकट परिस्थितियों में भी स्वयं को पहचानकर मानवता के लिए कार्य करने वाले प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता एस. रामकृष्णन को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति भवन में सोमवार (8 अक्टूबर) को आयोजित एक समारोह में रामकृष्णन को यह सम्मान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रदान किया। दिव्यांग रामकृष्णन व्हीलचेयर से इस सम्मान को लेने पहुँचे। उनके योगदान को देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें हाथ जोड़कर प्रणाम किया।

तमिलनाडु के तिरुनेलवेली के रहने वाले रामकृष्णन का समाज में किया गया कुछ ऐसा योगदान है, जिसके कारण सरकार ने इस सम्मान के लिए उन्हें चुना। रामकृष्णन स्वयं लकवाग्रस्त हैं और चलने में असमर्थ हैं, इसके बावजूद वह दिव्यांग लोगों के पुनर्वास में मदद करने का सराहनीय काम पिछले 40 वर्षों से करते आ रहे हैं।

रामकृष्णन जब 20 साल के थे, तब वह एक हादसे का शिकार हो गए थे। इस हादसे के बाद वह लकवाग्रस्त हो गए। लकवाग्रस्त होने के बाद उन्होंने दिव्यांग लोगों के दर्द को महसूस किया और जाना कि ऐसे लोगों को समाज के मुख्यधारा में बनाए रखने के लिए उनके पुनर्वास की सख्त आवश्यकता है। इसके लिए उन्होंने दिव्यांग लोगों की मदद करने का बीड़ा उठाया। उन्होंने एक संस्था भी बनाया और इसे लोगों की मदद का माध्यम बनाया। इसके बाद वे पीछे मुड़कर नहीं देखे।

रामकृष्णन पिछले 44 साल से व्हीलचेयर पर हैं, लेकिन जरूरतमंदों के सेवा में वे हमेशा आगे रहते हैं। रामकृष्णन ने 1981 में अमर सेवा संगम नाम की संस्था की शुरुआत की थी। इस संस्था के माध्यम से वे आसपास के इलाके लोगों की मदद करते हैं। आज यह संगठन अपने सेवा कार्यों के लिए लोगों के बीच बेहद सम्मानित नाम बन चुका है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र के दिव्यांगों पर विशेष ध्यान दिया। ग्रामीण क्षेत्र के दिव्यांगों के पुनर्वास के लिए अभी भी बड़े पैमाने पर काम किए जाने की जरूरत है।

रामकृष्णन का संगठन अमर सेवा संगम गाँवों में पोलियो शिविर का समय-समय पर आयोजन के साथ-साथ एकीकृत स्कूल भी संचालित करता है। इस स्कूल में सामान्य बच्चों के साथ-साथ दिव्यांग बच्चे भी पढ़ाई करते हैं। उनके किये कार्यों को देखते हुए रामकृष्णन को दिव्यांगों का मसीहा कहा जाने लगा।

साल 1975 में इंजीनियरिंग के छात्र रामकृष्णन 20 साल थे, तब उन्होंने नौसेना में भर्ती होने की सोची। वह तमाम परीक्षा को उत्तीर्ण करने के बाद शारीरिक टेस्ट के लिए गए। ऐसे ही एक टेस्ट के दौरान उन्हें 15 फीट ऊँचे पेड़ से छलाँग लगाने को कहा गया। छलाँग के दौरान उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई और गर्दन से नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया। इसके बाद उन्होंने अपने माता-पिता के जमीन पर एक स्कूल खोला। पाँच बच्चों के साथ शुरू हुए इस स्कूल में आज तकरीबन 300 बच्चे पढ़ते हैं।

गौरतलब है कि पद्मश्री भारत का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। इस श्रेणी में भारत रत्न सर्वोच्च स्थान पर आता है। ये पुरस्कार उन लोगों को दिए जाते हैं, जो अपने क्षेत्र में विशिष्ट सेवा और समाज में अतुलनीय योगदान देते हैं। उनके सेवा और योगदान को देखते हुए सरकार उन लोगों को सम्मानित करती है। हर वर्ष गणतंत्र दिवस के मौके पर घोषित होने वाले इन पुरस्कारों का वितरण साल 2020 में कोरोना संक्रमण के चलते नहीं हो सका था।

जम्मू कश्मीर में अब सेल्समैन को मारी गोली, 24 घंटे में दूसरा आतंकी हमला: पुलिस कॉन्स्टेबल के बाद अब आम नागरिक को बनाया निशाना

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर के बोहरी कदल इलाके में आतंकियों ने सोमवार (8 नवंबर 2021) को एक सेल्समैन पर फायरिंग की। जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक, वह अस्पताल में भर्ती है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में फायरिंग अभी भी जारी है। पिछले 24 घंटों में शहर में यह दूसरा हमला है।

वहीं, एक दिन पहले यानी रविवार (7 नवंबर, 2021) को आतंकियों ने श्रीनगर में तौसीफ अहमद नाम के एक पुलिस कॉन्स्टेबल की गोली मार कर हत्या कर दी थी। ये घटना बेमिना इलाके के एसडी कॉलोनी में हुई थी। गोली लगने के बाद घायल पुलिस कॉन्स्टेबल को महाराजा हरि सिंह अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। कॉन्स्टेबल तौसीफ अहमद के सिर में गोली के जख्म थे।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में बीते कुछ दिनों से आम नागरिकों को निशाना बनाने के कई मामले सामने आए हैं। कश्मीर में आतंकवादियों ने फेरीवाली, एक स्कूल के दो शिक्षकों सहित कई आम लोगों की हत्या कर दी थी। बात करें अक्टूबर की, तो यह महीना जम्मू-कश्मीर के लिए काफी हिंसक रहा है। इस एक महीने में आतंकी मुठभेड़ों में कुल 44 मौतें हुई हैं। एक तरफ सुरक्षा बलों ने 19 आतंकियों को एकाउंटर में ढेर किया है, तो वहीं दूसरी तरफ 12 सुरक्षाकर्मी भी बलिदान हुए हैं। आतंकी हमले में अन्य राज्यों से यहाँ काम करने आए 5 बाहरी मजदूरों सहित कुल 13 आम नागरिकों को अपनी जा गँवानी पड़ी। इसके बाद घाटी से नए सिरे से पलायन शुरू हो गया था। आतंकियों की कोशिश है कि आम लोगों में डर बिठाया जाए।

‘वो तो फातिहा जला रहा था, अल्लाह देते हैं बरकत’: AltNews के जुबैर ने खाने में थूक वाले वीडियो को दी क्लीन चिट, कहा – हवा फूँक रहे

ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने फैक्ट-चेकिंग के बहाने भोजन पर थूकने वाले एक मुस्लिम व्यक्ति की हरकत को सही ठहराने की कोशिश की। ट्विटर पर एक यूजर ने वीडियो साझा किया है। इसमें एक मुस्लिम व्यक्ति सफेद टोपी पहने हुए भोजन पर थूकता हुआ दिखाई दे रहा है। मोहम्मद जुबैर से यह वीडियो कब का है, यह पता लगाने के लिए कहते हुए ट्विटर यूजर ने लिखा, “Wtf। कृपया इसका फैक्ट चेक करें जुबैर कि क्या यह मौलाना थूक रहा है या फिर कुछ और कर रहा है।”

इसके तुरंत बाद ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक ने एक लेख के माध्यम से इसका जवाब दिया, जिसका शीर्षक था, “पुराने वीडियो को गलत तरीके से दिखाकर वायरल किया जा रहा है, यह भोजन लॉकडाउन के दौरान गरीबों को बाँटने के लिए था और इसे थूकने से जोड़कर दिखाया जा रहा है।” ऑल्ट न्यूज के लेख में दावा किया गया है कि यह 15 दिसंबर, 2018 का एक पुराना वीडियो है।

मोहम्मद जुबैर के ट्वीट का स्क्रीनग्रैब

ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक ‘थूकने’ को हवा फूँकना बताते नजर आए

जुबैर द्वारा साझा किए गए लेख में ऑल्ट न्यूज की टीम ने भोजन पर थूकने को हवा फूँकना बताते हुए इस घिनौने कृत्य को सही ठहराने की कोशिश की। उन्होंने लिखा, “वीडियो में वास्तव में क्या हो रहा है, यह जानने के लिए हमने एक इस्लामिक विद्वान से संपर्क किया।” विद्वान ने कहा, “इसे ‘फातिहा जलाना’ कहा जाता है। यह खाना पकाने के बाद किया जाता है। भोजन के ऊपर कुरान की कुछ आयतें पढ़ी जाती हैं, ताकि अल्लाह हर प्रकार की बीमारियों से दूर रखे या उसकी इच्छापूर्ति की लिए होता है। इसलिए कुछ हवा फूँकते हैं और कुछ नहीं।” लेख में यह भी लिखा गया है, “यह फातिहा है, जहाँ आप कुछ खाना निकालते हैं और अल्लाह से बरकत माँगते हैं।”

उन्होंने आगे कहा’ “हम देखते हैं कि नमाज के बाद बहुत से लोग बीमार बच्चों के साथ मस्जिदों के बाहर इकट्ठा होते हैं। नमाज पढ़ने के बाद मस्जिद से बाहर निकलने वालों को इन बच्चों पर हवा उड़ाने के लिए कहा जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इसमें अल्लाह ने बरकत दी है। यह एक पुरानी प्रथा है, जिसका पालन बहुत कम लोग करते हैं।” एक इस्लामी विद्वान का हवाला देते हुए, ‘फैक्ट चेक वेबसाइट’ ने भोजन में लार डालने को तुच्छ और घिनौना कार्य बताया है।

ऑल्ट न्यूज़ के लेख का स्क्रीनग्रैब

जुबैर ने यह लेख इसलिए साझा किया था कि ताकि वह बता सके कि यह वीडियो हाल का नहीं है, जबकि कोरोना के समय में शूट किया गया था। इस तरह उन्होंने लोगों को यह समझाने का प्रयास किया कि मुस्लिम व्यक्ति द्वारा ऐसा कार्य ‘पुरानी प्रथा’ के कारण किया था, ना कि किसी को नुकसान पहुँचाने के मकसद से किया गया था। ऑपइंडिया ने पहले बताया था कि इस्लाम में ‘बुरी आत्मा’ या ‘शैतान’ को भगाने करने के लिए थूका जाता है। सहीह अल-बुखारी, खंड 4, पुस्तक 54, संख्या 513 के अनुसार, अपनी बाईं ओर थूकना बुरे सपनों से सुरक्षित रहने का एक तरीका है। सहीह मुस्लिम, बुक 026, नंबर 5463 में भी इसे श्रेय दिया जाता है, जो कहता है कि अपनी बाईं ओर तीन बार थूकने से शैतान भाग जाता है।

नेटिज़ेंस ने ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक से सवाल किया

वास्तविक वीडियो साझा करने वाले ट्विटर यूजर (@erbmjha) ने मोहम्मद जुबैर से ‘भोजन पर थूकने’ के कृत्य के बारे में पूछताछ की। उसने पूछा, “उसने थूका या नहीं? यही सवाल था। यह घटना प्री-कोविड है, कोविड के दौरान या उसके बाद यहाँ ज्यादा मायने नहीं रखता।”

जैसा कि पहले कहा गया है, मोहम्मद जुबैर ने ट्विटर यूजर (@erbmjha) द्वारा साझा किए गए वीडियो को पुराना बताने की कोशिश की, जो 2018 का है। इस दावे में एक कमी की ओर इशारा करते हुए ट्विटर यूजर वरदा मराठा ने पूछा, “फिर इस आदमी ने 2018 में मास्क पहन रखा है क्या?”

एक अन्य ट्विटर यूजर (@datslit) ने बताया कि जुबैर द्वारा साझा किया गया वीडियो और ट्विटर यूजर (@erbmjha) द्वारा शेयर किया गया वीडियो एक नहीं था। यूजर ने लिखा, “क्या आप अंधे हैं, क्योंकि दोनों वीडियो अलग हैं? आप किस तरह से फैक्ट चेक करते हैं? साथ ही, देखिए एक व्यक्ति ने मास्क पहना हुआ है। यह साबित करता है कि वीडियो वास्तव में कोविड काल का है।”

ऑल्ट न्यूज ने अपने लेख में दावा किया था कि वह इस वीडियो क्लिप के बारे में पता नहीं लगा पाया है। लेख में कहा गया है, “हालाँकि, ऑल्ट न्यूज इस वीडियो की जगह और संदर्भ की पुष्टि नहीं कर सका, लेकिन यह कहना पर्याप्त है कि वीडियो का हालिया राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन से कोई संबंध नहीं है।”

एक ट्विटर यूजर ने धोती और शर्ट पहने एक शख्स की तरफ इशारा करते हुए लिखा कि यह वीडियो केरल में शूट किया गया है। इसके बावजूद जुबैर कहता है कि स्थान की पहचान नहीं की जा सकती, जबकि इसे देखने के बाद कोई भी क​ह सकता है कि यह वीडियो केरल का है।

‘जय भीम’ से लेकर ‘चंद्रकांता’ तक: हिन्दुओं को बदनाम करने और मुस्लिमों को अच्छा दिखाने के लिए असली कहानी से यूँ की जाती है छेड़छाड़

हाल ही में तमिल अभिनेता सूर्या की फिल्म ‘जय भीम’ को ‘अमेज़न प्राइम’ पर रिलीज किया गया। इंटरनेट पर इसका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें हिंदीभाषियों के विरुद्ध हिंसा और घृणा को बढ़ावा दिया गया है। अब इस फिल्म पर आरोप लग रहे हैं कि वास्तविक घटनाओं की आड़ में चीजों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। जहाँ फिल्म के निर्माता-निर्देशकों ने इसे असली घटनाओं पर आधारित कहानी बताया है, लोगों का कहना है कि इसमें कई चीजें वास्तविकता से परे हैं।

इसमें 1990 की कहानी दिखाई गई है, जब एक वकील एक महिला का केस मद्रास हाईकोर्ट में लड़ता है। उस महिला के पति को पुलिस ने लॉकअप में मार दिया होता है। वनवासी समुदाय पर पुलिस क्रूरता इसमें दिखाई गई है। लेकिन, लोगों का कहना है कि कुछ किरदारों की जाति जानबूझ कर बदल दी गई है। गुंडों को ‘वन्नियार’ समुदाय से दिखाया गया है। इसमें दिखाया गया है कि ‘वन्नियार’ समुदाय का सब-इंस्पेक्टर मुख्य विलेन है और वो इरुलर समुदाय का दुश्मन है।

जबकि सच्चाई ये है कि वास्तविकता में उस सब-इंस्पेक्टर का नाम ‘एंथोनी सामी’ था और वो ‘वन्नियार’ समुदाय से नहीं था। ‘वन्नियार’ समुदाय ने इसके बाद अभिनेता सूर्या पर उन्हें बदनाम करने का आरोप लगाया है। इसमें सूर्या को ब्राह्मण समुदाय के प्रति घृणा फैलाने के आरोप भी लगे हैं। हमेशा ‘शिवाय नमः’ कहने वाले एक ब्राह्मण वकील से बात करते हुए ऐसा दिखाया गया है कि ब्राह्मणों पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए। वैसे भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के लिए ये कोई नई बात नहीं है।

अपना नैरेटिव बनाने के लिए ये लोग अक्सर झूठ का सहारा लेते हैं और वास्तविक घटनाओं के नाम पर बेची जाने वाली फिल्मों में नैरेटिव के हिसाब से छेड़छाड़ का तड़का लगाया जाता है। ‘क्रिएटिव लिबर्टी’ के नाम पर अपनी विचारधारा फैलाई जाती है। वास्तविकता को बदल कर दिखाने वाली ‘जय भीम’ न तो पहली फिल्म है और न ही ये आखिरी होगी। तथ्यों को ट्विस्ट कर के इसे प्रोपेगंडा का रूप देना कोई भारतीय मनोरंजन इंडस्ट्री से सीखे। इनका लक्ष्य कभी वास्तविकता दिखाना होता ही नहीं। उदाहरण हम बताते हैं

चक दे इंडिया: मीर रंजन नेगी को बना दिया कबीर खान

शाहरुख़ खान की फिल्म ‘चक दे इंडिया’ भी इसी श्रेणी में आती है, जहाँ तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। शाहरुख़ खान ने इसमें एक मुस्लिम हॉकी खिलाड़ी का किरदार अदा किया है, जिसकी देशभक्ति पर सवाल खड़े किए जाते हैं। मुस्लिम बहुल पाकिस्तान के विरुद्ध अच्छा प्रदर्शन न करने पर उस पर ये आरोप लगते हैं। इस फिल्म में भारत में ‘मुस्लिमों के साथ मजहब के आधार पर भेदभाव’ वाला नैरेटिव आगे बढ़ाया गया था। ‘कबीर खान’ बाद में कोच बन कर लौटता है और भारत को जितवा देता है।

उससे पहले उसे उसके पड़ोसी ‘देशद्रोही’ कह कर बुला रहे होते हैं। ये पूर्व भारतीय गोलकीपर मीर रंजन नेगी से प्रेरित फिल्म है। 1982 के एशियन गेम्स में पाकिस्तान के खिलाफ 1-7 से हार के बाद उनका करियर ख़त्म हो गया था। पाकिस्तानी खिलाड़ियों का गोल न रोकने के कारण उन्हें लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा था। कई वर्षों बाद वो लौटे और भारतीय पुरुष व महिला टीम के कोच के रूप में शानदार प्रदर्शन किया। 2002 कॉमनवेल्थ में स्वर्ण पदक विजेता टीम के वो गोलकीपर कोच थे। 2004 एशिया कप विजेता टीम के वो अस्सिस्टेंट कोच थे।

शेरनी: असगर अली खान को बना दिया ‘पिंटू भैया’

विद्या बालन की फिल्म ‘शेरनी’ में भी ऐसा ही ‘खेला’ किया गया है। इसमें अवनि नाम के एक बाघिन की कहानी दिखाई गई है। ये बाघिन आदमखोर बन गई थी और उसने 14 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। इसे असगर अली खान नाम के एक शिकारी ने मार गिराया था। लेकिन, फिल्म में बाघिन को मार गिराने वाला शिकारी कलावा पहनता है और उसे हिन्दू दिखाया गया है। इसमें उसका नाम ‘रंजन राजहंस’ उर्फ़ ‘पिंटू भैया’ होता है। इसी तरह IFS केएम अभरणा ने उस शिकारी को सज़ा दिलाई थी।

लेकिन, फिल्म में इसी किरदार को अदा कर रहीं विद्या बालन को ईसाई नाम दिया गया है। अधिकतर वरिष्ठ फॉरेस्ट अधिकारी जो हिन्दू हैं, उन्हें भ्रष्ट और अनैतिक दिखाया गया है। जबकि हसन नूरानी नाम का अधिकारी ईमानदारी की प्रतिमूर्ति होता है। हिन्दू अधिकारियों को जानबूझ कर बुरा दिखाया गया है। एक गुंडे को तो सरकारी दफ्तर में पूजा और भजन करते हुए दिखाया गया है। हिन्दू प्रथाओं और परंपराओं का मजाक बनाने में बॉलीवुड तो आगे है ही।

आर्टिकल 15: बदायूँ रेप काण्ड के दोषियों को बना दिया ब्राह्मण

इसी तरह की एक फिल्म आई थी ‘आर्टिकल 15’, जिसमें आयुष्मान खुराना ने पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई थी। अनुभव सिन्हा की इस फिल्म को सच्ची घटनाओं के आधार पर तैयार बताया गया था। उत्तर प्रदेश के बदायूँ में दो लड़कियों के बलात्कार एवं हत्या पर ये आधारित था। इसे तब ‘दलितों पर उच्च-जाति का अत्याचार’ बता कर प्रचारित किया गया था। यूपी में तब अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा की सरकार थी। आरोपितों के नाम थे – पप्पू यादव, उर्वेश यादव, छत्रपाल यादव, सर्वेश यादव।

छत्रपाल और सर्वेश पुलिस अधिकारी थे। पुलिस की जाँच पर सवाल उठे थे। सपा सरकार पर यादव होने के कारण आरोपितों को बचाने के आरोप लगे थे। CBI ने अपनी जाँच में 14-15 वर्ष की दोनों लड़कियों की हत्या व बलात्कार की बात नकारते हुए आरोपितों को क्लीन चिट दे दी। अनुभव सिन्हा मनी लॉन्ड्रिंग केस में फँसे रहे हैं और उन्होंने पाकिस्तानियों को अवैध रूप से ‘मुल्क’ फिल्म देखने की सलाह दी थी। फिल्म में सभी बुराइयों की जड़ को एक ‘महंत जी’ को बताया गया है, जो योगी आदित्यनाथ को बदनाम करने की कोशिश थी। दोषी पुलिस अधिकारी को ब्राह्मण बना दिया गया है।

चंद्रकांता: मुस्लिमों को अच्छा दिखाने के लिए जोड़ दिया एक किरदार

1990 के दशक की शुरुआत में ‘चंद्रकांता’ नाम के एक सीरियल का खूब क्रेज था। इसे देवकी नंदन खत्री के इसी नाम के एक उपन्यास के आधार पर बनाया गया था। दर्शकों के बीच ये काफी लोकप्रिय हुआ था। लेकिन, ये सीरियल उस उपन्यास का ठीक से प्रतिनिधित्व नहीं करता था। उपन्यास में कोई ऐसा अच्छा किरदार है ही नहीं, जो कि मुस्लिम हो। उसमें विलेन या कॉमेडी के किरदारों में कुछ मुस्लिम किरदार हैं। दूरदर्शन पर ये सीरियल उस समय आता था।

इसीलिए, दूरदर्शन वालों को इससे बड़ी चिंता हुई कि भला इस सीरियल में कोई ‘अच्छा मुस्लिम’ क्यों नहीं है। इसीलिए, उन्होंने उपन्यास की कहानी से छेड़छाड़ कर के एक ‘अच्छा मुस्लिम’ का किरदार इसमें जोड़ दिया। ‘जांबाज’ नाम के उस मुस्लिम किरदार को मुकेश खन्ना ने अदा किया था। इसमें वो हिन्दू हीरो को उसके प्यार को पाने में सहायता करता है। जब वो किरदार स्क्रीन पर आता था, जो पीछे से अजान की आवाज़ आती थी। यानी, मुस्लिमों को अच्छा दिखाने के लिए कला के नाम पर ये किसी भी हद तक जा सकते हैं।

‘काबुली वाला’: रवीन्द्रनाथ टैगोर की कहानी से भी छेड़छाड़

इसी तरह रवींद्रनाथ टैगोर की कहानी ‘काबुलीवाला’ के साथ भी छेड़छाड़ की गई। ये सीरीज इससे पहले ‘एपिक’ नाम के चैनल पर आई थी। इसे अनुराग बासु ने बनाया था। इसमें दिखाया गया है कि लड़की ‘मिनी’ नमाज पढ़ रही होती है, क्योंकि उसका दोस्त ‘काबुलीवाला’ उस दिन नहीं आया होता है। असली कहानी में ऐसा कुछ भी नहीं है। इसमें उसे ‘काबुलीवाला के गॉड’ से प्रार्थना करते हुए दिखाया गया है, ताकि वो आ जाए। ओरिजिनल कहानी में कहीं भी हिन्दू लड़की के नमाज पढ़ने का जिक्र नहीं है।

लामडिंग जंगल को हिमंता सरकार ने कराया अतिक्रमण मुक्त: तैनात किए 1000 जवान, गोरुखुटी में अभियान के दौरान हुई थी हिंसा

असम के होजई जिले के लामडिंग रिजर्व फॉरेस्ट में अवैध रूप से रहने वाले लोगों को हटाने का काम शांतिपूर्ण समाप्त हो गया है। इस संबंध में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व शर्मा ने बताया कि यहाँ रहने वाले सभी लोगों को घर वापस भेज दिया गया है और अब यह जंगल अतिक्रमण से पूरी तरह मुक्त हो गया है। अतिक्रमण हटाने के अभियान में राज्य सरकार ने 1,000 पुलिस औ केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों को तैनात किया था।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अतिक्रमण हटाने के दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई और यह अभियान शांत से निपट गया। वहीं, होजई के उपायुक्त अनुपम चौधरी ने कहा कि बेदखली अभियान सोमवार को शांति से संपन्न हो गया, क्योंकि वहाँ के लोगों को गुवाहाटी हाईकोर्ट के आदेश के बारे में बताया गया था। जिला प्रशासन द्वारा की गई काउंसलिंग के बाद अधिकांश लोग पिछले कुछ दिनों में वहाँ से चले गए थे।

गौरतलब है कि लामडिंग वन क्षेत्र के 22,403 हेक्टेयर क्षेत्र में से 1,410 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जा था। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इस अतिक्रमण को हटाने के लिए कहा था। होजई के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर गौनादीप दास के अनुसार, 1,410 हेक्टेयर भूमि पर 670 परिवार के 3,000 लोग रह रहे थे। वे लोग यहाँ खेती व व्यवसाय कर रहे थे।

बता दें कि करीब डेढ़ महीने पहले यानी 23 सितंबर को दारांग जिले के गोरुखुटी इलाके में भी अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया गया था। इस अभियान के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। जगह खाली कराने गई पुलिस पर गाँव वालों ने हमला कर दिया था। इस हमले में दो लोग मारे गए थे और 20 से अधिक घायल हो गए थे। मारे गए लोगों में 12 साल का एक किशोर भी शामिल था।

रोज रात 9 बजे TV चैनलों पर दिखेगा पाकिस्तान का ‘गलत’ नक्शा: इमरान खान ने किया भारत को उकसाने का काम

पाकिस्तान सरकार ने सभी न्यूज चैनलों को रात 9 बजे बुलेटिन प्रसारित करने से पहले देश का ‘नया नक्शा’ दिखाने का आदेश दिया है। आपको जानकार हैरानी होगी, लेकिन यह सच है कि यह नक्शा पूरी तरह से गलत है, जिसे लोगों को दिखाकर उन्हें गुमराह करने की तैयारी की जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान इलेक्ट्रानिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (PEMRA) ने अधिसूचना जारी की है कि सभी चैनल (सरकारी व निजी) पिछले साल अगस्त में प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा जारी नया नक्शा दिखाएँ। ‘नया राजनीतिक नक्शा’ रोजाना न्यूज बुलेटिन से पहले दो सेकेंड के लिए दिखाना होगा। अधिसूचना में इसको लेकर सूचना और प्रसारण मंत्रालय के संदर्भ का हवाला दिया गया है।

इमरान खान ने अगस्त 2020 में इस ‘नए राजनीतिक मानचित्र’ जारी किया था। इसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख ही नहीं, बल्कि गुजरात के जूनागढ़ पर भी उसमें दावा ठोका गया था। विवादित नक्शा ऐसे समय पर जारी किया था, जब भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद चल रहा था। मालूम हो कि पेमरा पाकिस्तान की मीडिया अथॉरिटी है। इससे पहले भी पेमरा पर न्यूज चैनलों के खिलाफ कई आदेशों के जरिए कठोर नीति अपनाने का आरोप लगता रहा है।

पाकिस्तान का तथाकथित नक्शा

PEMRA द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है, “सभी समाचार चैनलों (सार्वजनिक और निजी दोनों) को रोजाना रात 9 बजे समाचार बुलेटिन प्रसारित करने से पहले दो सेकंड के लिए पाकिस्तान के राजनीतिक नक्शे को फ्लैश करना होगा। PEMRA का आदेश रविवार (3 नवंबर) से सार्वजनिक हो गया।”

PEMRA के मुताबिक, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के 16 सितंबर के एक पत्र के जवाब में टीवी स्टेशनों को निर्देश जारी किए गए थे। सूचना और प्रसारण मंत्री फवाद चौधरी ने पीईएमआरए को निर्देश भेजने के अपने मंत्रालय के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि सरकार को पीईएमआरए अध्यादेश 2002 की धारा 5 के तहत ऐसा करने का अधिकार है।

बता दें कि भारत को उकसाने और दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए पाकिस्तान ने भारत की सीमा को अपने नक़्शे में दिखाया है। अगस्त में यह नक्शा लॉन्च करने के बाद इमरान खान ने कहा था, “आज एक ऐतिहासिक दिन है, हमने पाकिस्तान का एक नया राजनीतिक मानचित्र लॉन्च किया है, जो पूरे देश के साथ-साथ कश्मीर के लोगों की उम्मीदों के अनुसार है। यह नक्शा पिछले साल 5 अगस्त को भारत सरकार के अवैध कृत्य का भी विरोध करता है।”

‘घर जा रहा हूँ, कुछ अच्छा नहीं लग रहा है’: विराट कोहली के गले की फाँस बना उनका ट्वीट, पाकिस्तानियों ने किया ट्रोल

T20 विश्व कप 2021 से भारत बाहर क्या हुआ, अब पाकिस्तानी भी भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली को ट्रोल कर रहे हैं। वजह है उनकी एक पुरानी ट्वीट। न्यूजीलैंड की टीम ने जैसे ही रविवार (7 नवंबर, 2021) को अफगानिस्तान को हराया, भारत इस टूर्नामेंट से बाहर हो गया। सेमीफाइनल में पहुँचने का सपना भी टूट गया। इसके बाद 20 मार्च, 2012 को किया गया विराट कोहली का एक ट्वीट वायरल हो गया। पाकिस्तानियों ने भी उसे लपक लिया।

इस ट्वीट में उन्होंने लिखा था, “कल घर जा रहा हूँ। कुछ अच्छा नहीं लग रहा।” इसके बाद पाकिस्तानियों ने न सिर्फ इस ट्वीट को लाइक और रीट्वीट करना शुरू कर दिया, बल्कि वो इस पर टिप्पणियाँ भी करने लगे। उस समय एशिया कप में टीम इंडिया का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था, जिसके बाद ये ट्वीट विराट कोहली ने किया था। इसे मौजूदा टी20 विश्व कप से जोड़ कर देखा जा रहा है। 2012 में तब पाकिस्तान ने बांग्लादेश को हरा कर एशिया कप का ख़िताब जीता था। नीचे देखें पाकिस्तानियों के ट्वीट्स:

किसी ने लिखा कि भारतीय क्रिकेट टीम मुंबई एयरपोर्ट के लिए क्वालीफाई कर की गई है, तो किसी ने भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों की स्थिति का मजाक बनाने के लिए वीडियोज शेयर किए। एक यूजर ने ‘बाय-बाय इंडिया’ का पोस्टर लिए लोगों की तस्वीर शेयर की। एक अन्य पाकिस्तानी यूजर ने ऑटो से जाते हुए लोगों की तस्वीर शेयर की, जिनकी टीशर्ट पर पीछे से कोहली, रोहित और धोनी लिखा था। एक ने नाचते हुए तालिबानियों का वीडियो शेयर कर लिखा कि भारतीय क्रिकेट टीम मुंबई एयरपोर्ट के लिए क्वालीफाई कर गई है।

हाल ही में अपने बयानों की वजह से भी विराट कोहली जम कर ट्रोल हुए हैं। हाल ही में विराट कोहली का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वो अपना जन्मदिन मनाते हुए दिख रहे हैं। लोगों का कहना था कि वो केक बर्बाद कर रहे हैं। लोगों ने कहा कि दुनिया में कई बच्चे भूखे सोते हैं और भूख के कारण मौत तक हो जाती है, लेकिन दूसरों को ‘ज्ञान’ देने वाला खिलाड़ी खुद इस तरह केक बर्बाद कर रहा है। एक यूजर ने विराट कोहली की पत्नी अभिनेत्री अनुष्का शर्मा को टैग करते हुए लिखा, “दुनिया को पाठ पढ़ाने से अच्छा खुद सुधर जाओ। ऐसा ‘उपदेश’ मत दो, जिसका अनुसरण तुम खुद नहीं कर सकते।”