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इजरायली हमले के बाद ट्रंप ने दी ईरान को चेतावनी, कहा- सब कुछ हो जाए बर्बाद, इससे पहले कर लो समझौता: और बड़े हमले की भी दी धमकी, तेहरान ने बात करने से किया मना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान को चेतावनी दी है कि वह परमाणु समझौते को स्वीकार करे, वरना परिणाम भुगते। उन्होंने कहा कि इजरायल के पास दुनिया में सबसे बेहतरीन अमेरिकी हथियार हैं और दावा किया कि इजरायल का अगला हमला और भी घातक होगा।

ट्रंप ने कहा कि ईरान को इससे पहले समझौता कर लेना चाहिए, जब तक कि कुछ भी न बचे। उन्होंने कहा- “बस करो, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए”

60 दिन का ईरान को ट्रंप ने दिया था वक्त

सोशल मीडिया पोस्ट पर डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा है कि उन्होंने ईरान को समझौता करने के कई मौके दिए, लेकिन वे इसे पूरा नहीं कर पाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने चेतावनी दी थी कि हमला उनकी अपेक्षा से कहीं अधिक भयानक होगा, लेकिन कुछ ईरानी कट्टरपंथियों ने समझौते को अस्वीकार कर दिया। ट्रंप ने कहा कि ऐसे कट्टरपंथी अब मर चुके हैं। ट्रंप के मुताबिक उन्होंने ईरान को 60 दिन का वक्त दिया था लेकिन ईरान ने गँवा दिया और समझौता नहीं किया।

ट्रंप ने कहा, “मैंने ईरान को समझौता करने के लिए कई मौके दिए। मैंने उन्हें सख्त शब्दों में कहा, “बस करो”, लेकिन चाहे उन्होंने कितनी भी कोशिश की हो, चाहे वे कितने भी करीब क्यों न पहुँचे हों, वे इसे पूरा नहीं कर पाए। संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया में अब तक का सबसे बेहतरीन और सबसे घातक सैन्य उपकरण बनाता है। इजरायल के पास इसका भंडार है। वे जानते हैं कि इसका इस्तेमाल कैसे करना है? कुछ ईरानी कट्टरपंथी बहादुरी से बोलते थे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि क्या होने वाला है। वे सभी अब मर चुके हैं, और स्थिति और भी बदतर होगी!”

नरसंहार को रोकने का अभी भी है वक्त-ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इजरायली हमले को रोकने के लिए समय है। इसके लिए ईरान को एक समझौता करना होगा। उन्होंने कहा, “पहले से ही बहुत अधिक मौतें और विनाश हो चुके हैं, लेकिन इस नरसंहार को समाप्त करने के लिए अभी भी समय है। ईरान को परमाणु समझौता करना चाहिए, इससे पहले कि कुछ भी न बचे, और जिसे कभी ईरानी साम्राज्य के रूप में जाना जाता था उसे बचाओ।”

डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्रुथ पोस्ट में कहा, “अब और मौत नहीं, अब और विनाश नहीं, बस करो, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए। भगवान आप सभी का भला करे!”

ईरान नहीं करेगा अब अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता

ईरान ने आधिकारिक तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता से हटने की घोषणा की है। यह निर्णय इजरायल द्वारा ईरानी परमाणु और सैन्य स्थलों पर हमला और तेहरान द्वारा जवाबी ड्रोन हमले के बाद लिया गया है।

इस वार्ता का उद्देश्य 2015 के परमाणु समझौते को फिर से लागू करना था। उस वक्त प्रतिबंधों में राहत के बदले ईरान की परमाणु गतिविधि को सीमित कर दिया गया था।

इस बीच ईरान ने अपने परमाणु स्थलों पर हमले और तेहरान में अपने वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व की हत्या का बदला लेने की कसम खाई है और कहा कि वह जोरदार तरीके से जवाब देगा और “इस कहानी का अंत ईरान के हाथों से लिखा जाएगा”।

भोपाल के ‘मुस्लिम गैंग’ पर पुलिस ने लगाई 250 पन्नों की चार्जशीट, बताया- कॉलेज की लड़की के साथ उसकी बहन का भी किया था रेप: हामिद, फरहान, साहिल समेत बाकी हो चुके गिरफ्तार

भोपाल ‘लव जिहाद’ केस में पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत भोपाल की विशेष अदालत में 250 पन्नों का चालान (चार्जशीट) दाखिल कर दिया है। यह चालान गुरुवार (12 जून 2025) को जिला न्यायालय में जज नीलम मिश्रा की कोर्ट में पेश किया गया। इस केस में मुख्य आरोपित फरहान खान और उसका साथी साहिल खान हैं। पुलिस ने 57 गवाहों की सूची के साथ यह चालान तैयार किया है।

कोर्ट को दिए गए चालान के साथ पीड़िताओं की मेडिकल रिपोर्ट और महत्वपूर्ण दस्तावेज भी पेश किए गए हैं।

क्या है मामला?

यह घटनाक्रम भोपाल के पिपलानी थाना क्षेत्र के कोकता इलाके में हुई। यहाँ एक निजी कॉलेज की छात्राओं को दोस्ती का झाँसा देकर फँसाया गया। आरोपितों ने पहले लड़कियों को अपने प्रेम जाल में उलझाया, फिर उनके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। इतना ही नहीं, उन्होंने पीड़िताओं पर धर्म बदलने का दबाव डाला और हिंदू धर्म के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं।

पुलिस की जाँच के अनुसार, फरहान खान ने पहले एक कॉलेज छात्रा (बड़ी बहन) को अपने दोस्त हामिद के घर ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया। इसके बाद साहिल खान ने इस घटना का वीडियो बनाकर लड़की को ब्लैकमेल करना शुरू किया। वह उससे बार-बार मिलने के लिए दबाव डालता था। चूँकि लड़की किराए के मकान में रहती थी, इसलिए उसे डर था कि यह बात मकान मालिक या परिवार तक पहुँच जाएगी। इस डर का फायदा उठाकर आरोपित लगातार उसका शोषण करते रहे।

छोटी बहन भी नहीं बची

एक दिन जब बड़ी बहन अपने कमरे पर नहीं थी, तब उसकी छोटी बहन, जो स्कूल में पढ़ती है, वहाँ अकेली थी। आरोपितों ने मौके का फायदा उठाया और नाबालिग लड़की के साथ भी बलात्कार किया।

धर्मपरिवर्तन का डाला दबाव

साहिल ने बड़ी बहन को शादी का लालच देकर उस पर धर्म बदलने का दबाव बनाया। उससे जबरदस्ती मांस खिलाया गया और बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया गया। इसके अलावा, पीड़िता के साथ मारपीट भी की गई। उसे लगातार धमकियाँ दी जाती थीं ताकि वह इस बारे में किसी से बात न करे।

और लड़कियाँ भी थीं निशाने पर

पुलिस ने फरहान के फोन की जाँच की तो उसमें आठ अन्य लड़कियों के वीडियो मिले। जब पुलिस ने इन लड़कियों से संपर्क किया, तो पता चला कि ज्यादातर पीड़िताएँ उसी टीआईटी कॉलेज की छात्राएँ थीं। जाँच में खुलासा हुआ कि फरहान और साहिल एक बड़े ‘लव जिहाद’ गिरोह का हिस्सा थे, जिसमें नबील, अली, साद और अबरार जैसे अन्य लोग भी शामिल थे।

पुलिस की चार्जशीट में यह भी खुलासा हुआ है कि फरहान और साहिल दोनों बारी-बारी से आए दिन कॉलेज छात्राओँ से दुष्कर्म करते थे। इस गिरोह के लोग कॉलेज की छात्राओं को निशाना बनाते और उनका शोषण करते थे।

पुलिस ने फरहान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया। चालान के साथ पीड़िताओं की मेडिकल रिपोर्ट और अन्य जरूरी दस्तावेज भी कोर्ट में जमा किए गए। पुलिस ने मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत भी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की, क्योंकि इस मामले में धर्मांतरण का दबाव डालने का आरोप भी है।

इस मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत भी केस चल रहा है। बता दें कि पॉक्सो एक्ट (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंसेज एक्ट) बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया कानून है। इस मामले में एक नाबालिग लड़की भी पीड़िता है, इसलिए इस कानून के तहत कार्रवाई हो रही है।

अहमदाबाद क्रैश में भी इस्लामी कट्टरपंथी ढूंढ लाए गाजा का विक्टिम कार्ड, पीड़ितों के प्रति संवेदना जताने के बजाय चलाया एजेंडा: जिन स्वयंसेवकों को गाली देते हैं लिबरल, उन्होंने जमीन पर उतर कर किया काम

गुरुवार (12 जून 2025) को अहमदाबाद में हुए भीषण प्लेन क्रैश में 265 लोगों ने अपनी जान गँवा दी। कई अन्य लोग घायल भी हैं जिनका अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस दुर्घटना के बाद देश ही नहीं दुनिया भर के लोग शोक व्यक्त कर रहे हैं, पर इसी बीच देश के ‘लिबरल समुदाय’ के कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इस आपदा को अपने लिए ‘अवसर’ में तब्दील करने की कोशिश कर रहे हैं। यह कोशिश भी देश के अंदर के लोगों के लिए नहीं बल्कि गाजा के लोगों के लिए ‘विक्टिम कार्ड’ खेलने की है।

इस लिबरल समुदाय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अहमदाबाद प्लेन क्रैश को भी गाजा के लोगों से तुलना करनी शुरू कर दी। मुस्लिम समुदाय के कई लोग लिख रहे हैं कि अगर अहमदाबाद के विमान दुर्घटना पर लोग इतनी संवेदना जाताई रही है तो गाजा के लिए यह संवेदना क्यों नहीं है।

इस ‘विक्टिम कार्ड’ के पैंतरे को खेलने के चक्कर में लोगों ने बॉलीवुड के अभिनेताओं को भी नहीं बख्शा। बॉलीवुड के कई सितारों ने प्लेन क्रैश दुर्घटना पर शोक व्यक्त किया और पीड़ित परिवारों को साहस रखने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट साझा की। बॉलीवुड के अभिनेता शाहरुख खान ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपनी संवेदना प्रकट की तो इस पर कुछ यूजर्स गाजा के लिए विक्टिम कार्ड खेलने से नहीं चूके।

यूजर्स ने शाहरुख को इस बात का ताना दिया कि उन्होंने अहमदाबाद प्लेन क्रैश की संवेदना की तरह गाजा के लोगों के लिए कुछ क्यों नहीं लिखा।

इस प्लेन क्रैश में अभिनेता विक्रांत मेसी के चचेरे भाई की भी मौत हुई है। इस घटना पर शाहरुख खान के साथ-साथ सलमान खान, अनुपम खेर, सुनील शेट्टी, आमिर खान के प्रोडक्शन हाउस, अक्षय कुमार, अजय देवगन, अनुष्का शर्मा, रितेश देशमुख, सोनू सूद, परिणीति चोपड़ा, सारा अली खान, अल्लू अर्जुन, सोनाक्षी सिन्हा, करिश्मा कपूर, अभिषेक बच्चन, जूनियर NTR, आलिया भट्ट, करण जौहर समेत कई सितारों ने संवेदना प्रकट की है।

एक पाकिस्तानी नागरिक ने लिखा कि अहमदाबाद की दुर्घटना पर पाकिस्तानियों को दुख है, लेकिन इससे पहले गाजा के विषय पर भारतीयों ने जश्न मनाया था।

असल में तो इस ‘उदारवादी समुदाय’ को अपना प्रोपेगेंडा चलाने के लिए सिर्फ एक सहारे की आवश्यकता होती है। प्लेन क्रैश में मरे किसी भी व्यक्ति की जात-पात धर्म से किसी को कोई मतलब नहीं रहा।

अन्य लोगों ने सिर्फ पीड़ितों की मदद और मृतकों के परिवार के लिए दुख जताया, लेकिन मुस्लिम समुदाय के लोगों ने यहाँ पर भी गाजा के लिए विक्टिम कार्ड का पैंतरा खोज ही लिया। एक दुर्घटना को दो देशों के बीच की अनबन से कैसे जोड़ा जा सकता है, यह भला कोई इन जैसे यूजर्स से सीखे।

लोगों की मौत पर हँसने की प्रतिक्रिया

बात यहीं पर खत्म भी नहीं होती, दुर्घटना के बाद जब कई मीडिया हाउसेज ने इस बात की जानकारी अपने सोशल मीडिया पेज पर दी तो वहाँ पर भी सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ही जश्न मनाने और हँसने वाली प्रतिक्रियाएँ दीं। इन प्रतिक्रियाओं पर भी लोगों का आक्रोश सामने आया है।

मदद के लिए गायब, बस जवाब माँगना आता है

आतंकी हमला हो, प्राकृतिक आपदा हो या अब विमान दुर्घटना, एक परेशान करने वाला पैटर्न ये है कि जब असल में आम जनता की मदद करने या एकजुटता दिखाने की बात आती है तो इन ‘लिबरल’ वामपंथियों और उनके इस्लामी कट्टरपंथी साथी गायब हो जाते हैं। ये तब अपना फन उठाते हैं जब घटना को अवसर के रूप में इस्तेमाल करना हो- वो भी एकता या सहानुभूति के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ के लिए।

इस प्लेन क्रैश के बाद भी इन लिबरल्स ने लोगों की मदद करने नाम पर चुप्पी साध ली। न तो कोई रक्तदान करने के लिए सामने आया, न ही किसी ने पीड़ितों या मृतकों की सुध लेने की कोशिश की, रेस्क्यू के लिए भी इनमें से कोई सामने नहीं दिखा, न ही अस्पताल में परेशान भटक रहे परिजनों को ढाँढस बंधाने के लिए कोई दिखा। लेकिन सरकार से दुर्घटना पर जवाब माँगना ये लिबरल कतई नहीं भूले।

सैकड़ों लोग अपनी जान बचाने की जिद्दोजहद कर रहे थे तब मदद के लिए वे लोग सामने आए जिन्हें ये ‘उदारवादी’ समुदाय गालियाँ देता है। ये है- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जिन्हें ये लिबरल्स राजनीतिक लाभ के भूखे लगते हैं, वे कार्यकर्ता बिना किसी लाग लपेट के घटना के आधे घंटे के भीतर पीड़ितों की मदद के लिए पहुँच गए।

इस मदद के एवज में RSS कार्यकर्ताओं ने किसी तरह की नुमाइश या स्वयं को महान बताने की चेष्ठा नहीं की, बस चुपचाप लोगों का सहारा बने रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस/RSS) ने अहमदाबाद में ही नहीं बल्कि अपनी स्थापना से बाद से आज तक कई आपदाओं और संकटों के दौरान पीड़ितों की मदद की है।

कई सामाजिक सेवा कार्य भी किए हैं, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास शामिल हैं। आरएसएस ने विभिन्न आपदाओं और आपात स्थितियों के दौरान पीड़ितों को आश्रय, भोजन, कपड़े और चिकित्सा सहायता प्रदान की है।

संकटकाल में ढाल बन कर खड़े रहे RSS कार्यकर्ता

देश में आई आपदाओं और संकटकाल के समय RSS कार्यकर्ता जी जान से सेवा में जुटते हैं और लोगों के लिए संकट के सामने ढाल बनकर कड़े रहते हैं। इनमें 1971 का ओडिशा चक्रवात, 1977 का आंध्र प्रदेश चक्रवात, 2004 का हिंद महासागर भूकंप और 2004 का सुमात्रा-अंडमान भूकंप समेत कई अन्य विपदाएँ शामिल हैं।

युद्ध और संघर्षों की बात करें तो आरएसएस ने 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध, 1999 के कारगिल युद्ध के साथ कश्मीर में आतंकवाद के कारण प्रभावित लोगों की कई बार मदद की है। इसके अलावा आरएसएस ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान सिख समुदाय के लोगों की मदद की। 1971 में आए ओडिशा चक्रवात को याद करें तो उस समय आरएसएस कार्यकर्ताओं ने चक्रवात पीड़ितों को भोजन, पानी, कपड़े और चिकित्सा सहायता प्रदान की थी।

इसके बाद 1984 में हुई भोपाल गैस त्रासदी में भी कार्यकर्ताओं ने पीड़ितों को चिकित्सा सहायता दिलाई। साथ ही त्रासदी के पीड़ितों के पुनर्वास में भी मदद की। इसके बाद 1999 में कारगिल युद्ध के समय भी आरएसएस ने युद्ध से प्रभावित परिवारों की मदद करने के साथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक जरूरतों को पूरा किया।

गुजरात में 2001 में आए विनाशकारी भूकंप में सैकड़ों लोगों की जान गई। इस दौरान भी आरएसएस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और भूकंप पीड़ितों को आश्रय, भोजन, कपड़े और चिकित्सा सहायता समेत अन्य जरूरतों का प्रबंधन किया। यही नहीं, 2004 में अंडमान के सुमात्रा में आए भूकंप और सुनामी में भी कार्यकर्ताओं ने पीड़ितों के लिए राहत कार्यों में जी जान से जुटे और उनके भी पुनर्वास में मदद की।

इसके अलावा 2020 में कोरोना महामारी, 2023 में दिल्ली में आई बाढ़ या फिर कोई अन्य परेशानी हो, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी लाठी और मजबूत कंधों के साथ हर पल लोगों की हरसंभव मदद के लिए खड़ा रहा है।

असल में इन लिबरल्स और उदारवादी लोगों को हर मुद्दे पर सिर्फ अपना हित साधना आता है। लोगों की परेशानी से इन्हें कभी कोई मतलब नहीं होता। राजनीतिक लाभ के लिए ये किसी भी हद तक जा सकते हैं। फिर अगर कोई इस समुदाय को बेपर्दा करने की कोशिश करे तो पूरी जमात ‘देशभक्ति’ का दावा ठोकने लगती है। इससे परे किसी विपदा के समय खुद तो कभी मदद के लिए हाथ नहीं बढ़ाते लेकिन दूसरे लोगों की मदद को प्रोपेगेंडा बताने से भी नहीं चूकते।

डियर अमाना बेगम, हिंदू ‘भाई-बहनों’ की आपस में नहीं कराते शादी… ‘जाति पर जहर’ कम फैलाओ: सोनम-राज कुशवाह मामले में ‘द प्रिंट’ की लेखिका ने घुसाया ‘अंतरजातीय’ एंगल, ठूंसी अपनी कुंठा

मेघालय हनीमून मर्डर केस ने देश भर में सनसनी मचा दी है। इंदौर की नवविवाहित सोनम रघुवंशी पर अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या का आरोप है। हत्या में शामिल सोनम का प्रेमी राज कुशवाहा भी है। इस जघन्य अपराध को लेकर विभिन्न मंचों पर बहस छिड़ी हुई है।

द प्रिंट की लेखिका अमाना बेगम ने इस हत्या और धोखे मामले को जातिगत भेदभाव और महिलाओं की स्वतंत्रता के अभाव पर एक लेख लिख दिया है।

द प्रिंट की लेखिका अमाना बेगम के अनुसार, भारत में आज भी अलग जाति में प्यार करना एक विद्रोह है, और महिलाओं को अपनी पसंद के साथी से शादी करने से रोका जाता है, जिससे वे ऐसे कदम उठाने पर मजबूर होती हैं।

‘द प्रिंट’ की लेखिका यह भी कहती है, कि अगर महिला नौकरी नहीं करती, तो उसके पास बिना मर्जी के शादी करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। अमाना बेगम यह मानती हैं कि परिवार बच्चों को ब्लैकमेल करके ज़बरदस्ती शादी करवाते हैं, जहाँ समाज में दिखावा भावनाओं से ज़्यादा ज़रूरी होता है।

लेकिन यह सोच इस पेचीदा मामले को सिर्फ़ एक छोटे दायरे में बाँध देती है। सोनम-राजा हत्याकांड को जातिवाद या फेमिनिज्म के नज़रिए से देखना सच से भटकना है। यह एक गंभीर अपराध को किसी सामाजिक मुद्दे की चादर ओढ़ाने जैसा है। इस केस में न कोई जातिवाद है और न ही यह फेमिनिज्म का मामला है। यह तो व्यक्तिगत धोखे, लालच और अपराधी सोच का नतीजा है।

सबसे पहले, द प्रिंट का यह दावा कि यह ‘नीची जाति’ के आधार पर देखा गया मामला है, पूरी तरह से गलत है। रघुवंशी और कुशवाहा दोनों ही समाज में स्थापित समुदाय हैं। सोनम के पिता ने अपनी बेटी के भविष्य को देखकर ही उसकी शादी एक अच्छे परिवार में करवाई होगी। यह किसी भी माता-पिता का फर्ज है कि वे अपनी संतान के लिए सबसे अच्छा जीवनसाथी चुनें, ख़ासकर जब उनकी बेटी पढ़ी-लिखी और अच्छे परिवार से हो।

सवाल यह भी उठता है कि क्या कोई पिता अपनी बेटी को उस व्यक्ति के हवाले करेगा, जो उसकी ही फैक्ट्री में एक कर्मचारी के तौर पर काम करता हो? सामाजिक और आर्थिक स्तर में यह अंतर अक्सर परिवारों को ऐसे रिश्तों को स्वीकार करने से रोकता है।

यह कोई ‘जातिगत भेदभाव’ नहीं, बल्कि भविष्य में स्थिरता और बराबरी लाने की एक प्रेक्टिकल सोच है। एक पिता हमेशा अपनी बेटी के लिए सुरक्षित, खुशहाल और सामाजिक रूप से स्वीकार्य परिवार चाहता है। यह कोई पुरानी सोच नहीं, बल्कि हर इंसान की स्वाभाविक इच्छा है।

दूसरा अहम मुद्दा राज कुशवाहा और सोनम के रिश्ते का दिखावा है। जानकारी के अनुसार, राज कुशवाहा लोगों के सामने सोनम को ‘दीदी’ बुलाता था और अपनी कलाई पर ‘राखी भी बँधवाता’ था। यह भाई-बहन के रिश्ते का संकेत है, जिसे समाज में सम्मान मिलता है।

लेकिन पर्दे के पीछे, वे प्रेमी-प्रेमिका की भूमिका निभा रहे थे और राज कुशवाहा सोनम को ‘पत्नी’ की तरह ट्रीट करता था। यह दोहरा व्यवहार न केवल धोखे का प्रतीक है, बल्कि समाज के बनाए गए नियमों और मर्यादाओं को भी तोड़ता है।

इससे साफ पता चलता है कि उनके रिश्ते में पारदर्शिता नहीं थी और वे जानते थे कि उनका रिश्ता समाज में स्वीकार नहीं होगा। ऐसे में, इस आपराधिक घटना का इल्जाम ‘समाज’ पर डालना या इसे ‘जातिवाद’ का नतीजा बताना पूरी तरह से गलत है।

द प्रिंट का यह तर्क कि ‘अगर महिला नौकरी नहीं करती तो उसके पास शादी के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता’ और उसे ज़बरदस्ती शादी करनी पड़ती है, यह भी हर स्थिति पर लागू नहीं होता। सोनम का परिवार आर्थिक रूप से मज़बूत था। उसके पिता और भाई बड़े ट्राँसपोर्ट कारोबारी हैं। वह खुद भी अपने भाई के काम में शामिल थी और हवाला कारोबार से जुड़ी थी, जहाँ उसने राज के खातों में बड़ी रकम भी भेजी थी।

यह बताता है कि वह किसी भी तरह से ‘कमज़ोर’ या ‘लाचार’ नहीं थी। अगर वह अपनी शादी से नाखुश थी या राज से शादी करना चाहती थी, तो उसके पास और भी कई रास्ते थे। लेकिन उसने हत्या का रास्ता चुना, जिसे किसी भी तर्क से सही नहीं ठहराया जा सकता।

समाज में दिखावे को महत्व देने की बात द प्रिंट ने कही है। हाँ, समाज में दिखावा होता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि परिवार के हर फ़ैसले सिर्फ दिखावे के लिए होते हैं। ज़्यादातर माता-पिता अपनी संतानों की खुशी और भविष्य की परवाह करते हैं।

अगर सोनम और राज कुशवाहा का रिश्ता इतना गहरा और सच्चा था, तो उन्हें खुलकर इसका सामना करना चाहिए था, न कि धोखाधड़ी और हत्या की योजना बनानी चाहिए थी। यह ‘समाज के दिखावे’ का नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वार्थ और आपराधिक सोच का परिणाम है।

आखिर में यही कहेंगे कि सोनम-राजा रघुवंशी मामला जाति या फेमिनिज्म का मुद्दा नहीं है। यह एक पहले से सोची-समझी हत्या का मामला है, जहाँ प्यार के नाम पर एक बेकसूर की जान ले ली गई।

ऐसे अपराधों को सामाजिक मुद्दों का रंग देकर अपराधियों के कामों को हल्का करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। सोनम और राज, अगर दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें कानून के हिसाब से सज़ा मिलनी चाहिए, और किसी भी सामाजिक या वैचारिक आधार पर उनके अपराध को सही ठहराने की कोशिश निंदनीय है।

एअर इंडिया प्लेन क्रैश के बाद रक्तदान के लिए उमड़े लोग, जरूरत से ज्यादा इकट्ठा हुआ ब्लड: RSS के स्वयंसेवकों ने रेस्क्यू में लिया हिस्सा, अम्बानी ने भी भेजी डॉक्टरों की एक टीम

अहमदाबाद एयर इंडिया प्लेन क्रैश जैसी दुखद आपदा ने सभी को झकझोर दिया। चारों तरफ अफरा-तफरी थी और लोगों के दिलों में दुख की आग जल रही थी। हवाई अड्डे से लेकर देश के कोने-कोने तक मरने वालों के परिवारों के लिए हमदर्दी थी। इस दुखद खबर के बीच कुछ अच्छी खबरें भी थीं, जो लोगों के दिलों को थोड़ा सुकून दे रही थीं। हजारों की चीख-पुकार के बीच लोगों की सेवा भावना भी दिखी।

अहमदाबाद में प्लेन क्रैश की न्यूज बाहर आते ही सरकारी मशीनरी काम में जुट गई और लोगों को बचाने का ऑपरेशन शुरू हो गया। स्थानीय लोग भी बचाव कार्य में मदद के लिए आगे आए। तभी खबर आई कि घायलों के लिए खून की जरूरत है। कई एनजीओ ने लोगों से रक्तदान करने की अपील की। इसके बाद जो नजारा दिखा, वो गुजरातियों की हिम्मत और जज्बे को साबित करने के लिए काफी था। रक्तदान का एक आवाज उठा और अहमदाबादी सारे काम छोड़कर कैंप में पहुँच गए। सोशल मीडिया पर इसके कई फोटो और वीडियो भी सामने आए।

रक्तदान के लिए लंबी कतारें, NGO बोले- दिखा अहमदाबादियों का सेवा भाव

अहमदाबाद में रक्तदान की घोषणा के बाद लोग ब्लड डोनेशन कैंप में पहुँच गए और खून देने के लिए आगे आए। कैंप के बाहर लंबी-लंबी कतारें दिखीं। लोग अपने आप घायलों की जान बचाने के लिए मैदान में उतर आए। सारे काम छोड़कर रक्तदान करने पहुँच गए। सोशल मीडिया पर खबरें आईं कि कुछ ही घंटों में अहमदाबादियों ने इतना खून दान किया कि सिविल ब्लड बैंक की डॉ. संगीता को कहना पड़ा कि जरूरत से ज्यादा रक्तदाता तैयार खड़े हैं।

सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें भी सामने आईं, जिनमें लोग घंटों तक रक्तदान के लिए इंतजार करते दिखे। ‘सहाय फाउंडेशन’ के संस्थापक जील शाह ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा, “हमारे शहर में जो हुआ, वो बहुत दुखद था। जैसे-जैसे इस घटना की खबरें बाहर आईं, वैसे-वैसे अहमदाबादियों का सेवा भाव सामने आने लगा। हमारे सहाय फाउंडेशन और कई अन्य एनजीओ ने सोशल मीडिया पर रक्तदान की पोस्ट डालीं, और अहमदाबादियों ने तुरंत इसे हाथों-हाथ लिया।”

जील शाह ने आगे कहा, “हमारे एनजीओ के कार्यकर्ता रेड क्रॉस पहुँचे और वहाँ सेवा भाव से भरे अहमदाबादी जमा होने लगे। पहले दो घंटे में ही करीब 300 लोगों ने हमसे संपर्क किया और वहाँ पहुँच गए। रेड क्रॉस में स्टाफ कम पड़ रहा था, तो हमारे कार्यकर्ता सागर और पार्थिल ने उनकी मदद की। देखते-देखते शाम तक हमने 900 से ज्यादा यूनिट खून जमा कर लिया। यही हाल हर लैब और ब्लड बैंक का था।”

जील शाह ने यह भी कहा, “लोग हमेशा ‘मुंबई स्पिरिट’ की बात करते हैं, लेकिन हम कई सालों से इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं, इसलिए जानते हैं कि ‘अहमदाबाद स्पिरिट’ भी उतनी ही मजबूत है।” जानकारी के मुताबिक, सिविल हॉस्पिटल में 600 यूनिट खून था। फिर रेड क्रॉस से 500 यूनिट भेजे गए। इसके अलावा, सिर्फ 2 घंटे में 350 लोग सिविल हॉस्पिटल में रक्तदान के लिए पहुँच गए। घंटों इंतजार के बाद उन्होंने रक्तदान किया।

24 घंटे डटे रहे संघ के स्वयंसेवक

इस दुखद घटना में एक और अच्छी खबर यह थी कि RSS के स्वयंसेवक 24 घंटे सेवा में डटे रहे। अहमदाबाद के एक RSS अधिकारी ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि प्लेन क्रैश की खबर आते ही संघ के स्वयंसेवक सेवा के लिए पहुँच गए। उनके मुताबिक, दो चरणों में RSS के स्वयंसेवकों ने सेवा कार्य किया। उन्होंने यह भी कहा कि 176 स्वयंसेवकों ने सीधे तौर पर सेवा की, जबकि 250 से ज्यादा स्वयंसेवक हर समय तैयार रहे।

RSS के स्वयंसेवकों ने क्रैश साइट पर लोगों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। इसके अलावा ट्रैफिक मैनेजमेंट की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली। पोस्टमॉर्टम रूम में डॉक्टरों और पीड़ित परिवारों की सेवा की। DNA सैंपल इकट्ठा करने में भी मदद की।

इसके अलावा ब्लड डोनेशन कैंप भी लगाए गए। सबसे खास बात यह थी कि संघ के स्वयंसेवकों ने पीड़ित परिवारों के लिए चाय-पानी और 2000 से ज्यादा लोगों के लिए खाने का इंतजाम भी किया। RSS पदाधिकारी ने बताया कि कालूपुर स्वामीनारायण मंदिर के सहयोग से लोगों के लिए खाने की व्यवस्था की गई। इसके अलावा स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर भी सेवा की गई।

RSS के अलावा अनंत अंबानी के वनतारा की ओर से भी तुरंत मदद शुरू की गई। वनतारा ने खबर मिलते ही सहायता भेज दी और डॉक्टरों की एक टीम को अहमदाबाद के लिए रवाना कर दिया। वनतारा की एम्बुलेंस सेवा भी अहमदाबाद के लिए खोल दी गई। घटनास्थल पर घायल हुए पशु-पक्षियों को बचाने का काम भी किया गया।

केरल में पादरी ने किया 16 साल के लड़के का रेप, अब हुआ फरार: चर्च ने बचाने के लिए चलाया अभियान, लोगों से कहा- अच्छे चरित्र वाला मैसेज पुलिस को भेजो

केरल में एक पादरी ने एक 16 वर्षीय लड़के का रेप किया। पादरी अब फरार है। पादरी को बचाने के लिए चर्च आगे आ गया है। उसको बचाने के लिए एक मुहिम चलाई गई है। मामले में FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस मामले की जाँच में जुटी है।

यह मामला केरल के कासगरगोड का है। यहाँ अथिरुम्मावु स्थित सेंट पॉल चर्च के पादरी फादर पॉल थाट्टुपरम्बिल के खिलाफ एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़के की शिकायत पर FIR दर्ज हुई है। चित्तरिक्कल पुलिस ने इस मामले में POCSO एक्ट के तहत FIR दर्ज कर ली है।

शिकायत के अनुसार, पादरी ने 15 मई, 2024 से 13 अगस्त, 2024 के बीच पर 11वीं कक्षा के नाबालिग छात्र को अपने घर और अन्य जगहों पर ले जाकर उसका यौन उत्पीड़न किया। यह पूरा मामला एक काउंसिलिंग सेशन के बाद खुला और चाइल्डलाइन पर इसकी सूचना आई। मामला दर्ज होने के बाद से पादरी गायब है।

पादरी के खिलाफ आरोप सामने आने के बाद चर्च उसे बचाने में जुट गया है। चर्च से जुड़े लोगों ने पॉल के खिलाफ लगाए गए आरोपों को गलत बताया है। चर्च ने पादरी को बचाने के एक अभियान भी चालू कर दिया है। इस चर्च के लोग एक मुहिम चला रहे हैं।

चर्च से जुड़े लोगों द्वारा व्हाट्सएप ग्रुप्स में एक वॉयस मैसेज भेजा जा रहा है और निवेदन किया जा रहा है कि वे चित्तरिक्कल पुलिस को पादरी को अच्छा चरित्र का बताने वाला एक पत्र भेजें। वहीं पादरी की इस बीच तलाश तेज हो गई है। यह भी दावा किया गया है कि पादरी एक अस्पताल में भर्ती हो गया है।

जिस पादरी थट्टुपरम्बिल पर यह आरोप लगा है वह पिछले डेढ़ साल से अथिरुम्मावु पैरिश का पादरी हैं। मूलतः वह एर्नाकुलम का हैं। अब पुलिस इस मामले में आगे कार्रवाई के लिए सबूत जुटा रही है और जाँच कर रही है।

80 दिन पहले गायब हुईं थी हिन्दू बहनें, अब ‘इस्लामी धर्मांतरण’ को बना चुकी हैं धंधा: परिवार बोला- दोस्त बनकर ‘सायमा’ ने किया ब्रेनवॉश, बंगाल से लेकर J&K तक कनेक्शन का संदेह

आगरा में एक हिन्दू परिवार की 2 बेटियों को धर्मांतरण गैंग ने फँसा लिया है। उन्होंने पहले बड़ी बहन को अपना निशाना बनाया और फिर वह छोटी को भी अपने साथ ले गई। हिन्दू लड़कियों का ब्रेनवॉश करने वाली महिला जम्मू कश्मीर की रहने वाली है। दोनों लड़कियाँ बीते लगभग 3 माह से गायब हैं। अब इस मामले में आगरा पुलिस जाँच कर रही है।

मामले की जाँच में आगरा की सायबर पुलिस भी शामिल है। सायबर पुलिस को इस मामले में एक धर्मांतरण गैंग के सुराग मिले हैं, जो भारत के अलग-अलग हिस्सों में फैला हुआ है। अब इस मामले में जाँच चल रही है।

पहले एक को फँसाया, फिर दूसरी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आगरा के एक हिन्दू परिवार की बड़ी बेटी 2021 में गायब हो गई थी। पीड़ित परिवार ने बताया है कि यह बेटी आगरा के दयालबाग एजुकेशनल इंस्टिट्यूट से पढ़ी हुई है। इस लड़की की दोस्ती एक मुस्लिम लड़की से थी।

पीड़ित परिवार ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी की दोस्ती सायमा नाम की एक लड़की से थी जो कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर के उधमपुर की रहने वाली थी। इस सायमा उर्फ़ खुशबू ने हिन्दू लड़की का ‘ब्रेनवॉश’ किया था। गायब हो चुकी बड़ी लड़की के पिता ने बताया कि इसी के चलते वह 2021 में गायब हुई थी।

गायब हुई लड़की के पिता के ने बताया कि उनकी बड़ी बेटी सायमा के चलते दूसरे मजहब के प्रभाव में थी।

दूसरी का भी किया ब्रेनवॉश

पीड़ित परिवार ने बताया कि उनकी बड़ी बेटी इस कदर प्रभाव में आ गई कि उसने घर आने के बाद अपनी छोटी बहन का ही ब्रेनवॉश करना चालू कर दिया और इसमें सफल भी रही। इसके बाद 25 मार्च, 2025 को दोनों लडकियाँ आगरा स्थित घर से गायब हो गईं।

उनका कोई भी पता नहीं लगा। वह किसके साथ गईं और कहाँ गईं, इस संबंध में एक भी जानकारी परिवार के पास नहीं है। थक हार कर यह परिवार पुलिस के पास पहुँचा। पुलिस ने दोनों लड़कियों के बालिग़ होने को लेकर कार्रवाई करने में शुरुआत में ढिलाई बरती। हालाँकि, इस मामले में 4 मई, 2025 को FIR दर्ज हो गई।

ऑपइंडिया के पास इस मामले में दर्ज FIR कॉपी मौजूद है। FIR में पीड़ित पिता ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि सायमा ही उनकी दोनों बेटियों को ले गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सायमा उनकी लड़कियों की शादी करवाने के लिए ले गई है।

पुलिस जाँच में धर्मांतरण गैंग का खुलासा

मामले में FIR दर्ज होने के बाद जाँच चालू की गई। पुलिस की शुरूआती जाँच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस को पता चला है कि यह मामला फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ जैसा है। पुलिस ने बताया है कि यह दोनों बहने अब इस्लामी धर्मांतरण गिरोह का हिस्सा बन गईं हैं।

पुलिस ने इस मामले में यह भी पता किया है कि इस केस के तार जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और दिल्ली-NCR से भी जुड़े हैं। पुलिस आगे और भी जानकारियाँ निकाल रही हैं। इसके अलावा मामले को आगरा की सायबर पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया है।

पुलिस के सायबर एक्सपर्ट्स सोशल मीडिया अकाउंट्स और उनके मूवमेंट की जानकारी खँगाल रही हैं। पुलिस को कुछ सोशल मीडिया आईडी मिली हैं, जिनकी गतिविधि धर्मांतरण जैसे मामलों से जुड़ी हुई और संदिग्ध लग रही है। पुलिस पूरे नेटवर्क का खुलासा करने का प्रयास कर रही है।

हिंदू दारोगा की ID बना महिलाओं को ठगता था मुनफेद, किसी से ₹16 लाख तो किसी ₹27 लाख ठगे: 14 को बनाया नौकरी के नाम पर शिकार, UP पुलिस ने वाराणसी से किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में पुलिस ने मुनफेद नाम के आरोपित को गिरफ्तार किया है। आरोपित ने नकली दारोगा बनकर हिंदू नाम रखा और प्रेम-संबंधों में फँसाते हुए 14 हिंदू महिलाओं से ठगी कर डाली। उसने कई पहचान रखी थी और फेसबुक के माध्यम से शिकार को फाँस कर ठगी करता था। वो प्रेम-संबंधों की भी आड़ लेता था। इस तरह से उसने महिलाओं से ₹50 हजार से लेकर ₹27 लाख तक ठगे। ठगी की रकम करोड़ों तक पहुँच सकती है।

आरोपित मुनफेद मथुरा जिले के गोवर्धन थाने के अंतर्गत आने वाले देवसेरस गाँव का निवासी है। उसने सोशल मीडिया से वाराणसी के पुलिस कमिश्नर के पीआरओ रहे सब इंस्पेक्टर दीपक रानावत और महाराजगंज जिले के परासामालिक थाने के उपनिरीक्षक अभिजीत सिंह के नाम की फेक आईडी का भी इस्तेमाल किया था।

उनकी वर्दी वाली फोटोज की सहायता से फर्जी आईडी बनाकर उसने यूपी, कश्मीर, हरियाणा और दिल्ली की 14 महिलाओं को फँसाया है। डीसीपी क्राइम सरवणन टी. के अनुसार दीपक रानावत ने केस दर्ज कराते हुए बताया था कि कोई उनके नाम और फोटो का गलत इस्तेमाल कर रहा है।

दीपक रानावत ने कहा था कि आरोपित सोशल मीडिया पर लोक सेवा आयोग तथा अन्य सरकारी विभाग में महिलाओं को नौकरी का लालच देकर उनसे मोटी रकम ऐंठ रहा है। जिसके बाद पुलिस ने मुनफेद को कैंट रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर लिया।

मैनपुरी की एक महिला ने 27 मई 2025 को पुलिस में शिकायत की थी और बताया था कि दारोगा दीपक राणावत ने उनके बच्चे की नौकरी संघलोकसेवा आयोग में काम करने वाले दोस्त संदीप के जरिए दिल्ली हाईकोर्ट में स्टेनो के पद पर नौकरी लगवाने के लिए कहा था। और संदीप को 16 लाख रुपये देने की बात की थी।

दरअसल, मुनफेद खुद को ही संदीप बनाकर महिलाओं से मिलता और पैसे लेता था। महिला की शिकायत के बाद दीपक रानावत को पीआरओ पद से भी हटा दिया गया था। मुनफेद ठगी के पैसों से गाँव में नया मकान भी बनवा रहा था। हालाँकि अब उसे भी तोड़ा जाएगा।

मुनफेद ने किसी से 16 लाख तो किसी से 27 लाख की ठगी की। यही नहीं, वो महिलाओं से उनके जेवर भी ले लेता था। उसके पास से झारखंड के डीएसपी की भी जानकारी मिली है, जिसे वो अब ठगी के काम को आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करने वाला था।

अहमदाबाद विमान हादसे में जिंदा बचा जो आदमी, उससे PM मोदी ने की मुलाकात… घायल मेडिकल छात्रों से भी मिले: क्रैश पर DGCA ने एअर इंडिया CEO को किया समन, मिल गया है ड्रीमलाइनर का ब्लैक बॉक्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (13 जून 2025) को उस दुर्घटनास्थल का दौरा किया, जहाँ गुरुवार (12 जून 2025) को एअर इंडिया का लंदन जाने वाला विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। घटनास्थल पर स्थिति के बारे में जानकारी लेने के बाद वे अहमदाबाद के सिविल अस्पताल पहुँचे। यहाँ घायलों का इलाज चल रहा है।

घायलों में वो एकमात्र व्यक्ति विश्वास कुमार रमेश भी शामिल हैं जो हादसे के वक्त प्लेन में मौजूद थे और बचकर निकले। पीएम ने उनसे हादसे के बारे में जानकारी ली। विश्वास कुमार रमेश ने बताया कि प्लेन में धमाका हो गया। पीएम ने पूछा कि क्या आप यात्री थे? तो उसने कहा कि वो प्लेन में सवार थे और धमाका हो गया।

डीडी न्यूज़ ने इस दुर्घटना में बचे इकलौते यात्री विश्वास कुमार से बातचीत की। इस दौरान विश्वास ने बताया कि 5 से 10 सेकंड के लिए लगा कि सब थम सा गया। बाद में विमान में बत्तियां जलने लगीं। हादसे के समय मैं सीट समेत बाहर आ गया। मैं कूदा नहीं था। सब कुछ इतनी जल्दी-जल्दी हुआ कि कुछ समझ नहीं आया.

पीएम मोदी ने हादसे में घायल मेडिकल कॉलेज के छात्रों और दूसरे लोगों से भी मुलाकात की और हालचाल जाना। पीएम मोदी प्लेन क्रैश में मारे गए गुजरात के पूर्व सीएम विजय रूपाणी की पत्नी अंजलि रूपाणी से मुलाकात करेंगे.

प्रधानमंत्री ने घायलों से मिलने के लिए अस्पताल जाने से पहले स्थिति का जायजा लेने के लिए लगभग 20 मिनट तक घटनास्थल पर रुके। प्रधानमंत्री के साथ केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू भी थे। इससे पहले प्रधानमंत्री ने एयरपोर्ट पर समीक्षा बैठक भी की. इस बैठक में कई मंत्री और अफसर मौजूद रहे।

विमान हादसे की जाँच के लिए डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी डीजीसीए ने एअर इंडिया के सीईओ को जाँच के लिए समन भेजा है। इस बीच दुर्घटनाग्रस्त बोइंग विमान का ब्लैक बॉक्स मिल गया है। इस बॉक्स की मदद से हादसे की असली वजह का पता लगाया जाएगा। क्रैश में मारे गए लोगों की शिनाख्त की चुनौती अभी भी बनी हुई है और इसके लिए डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं।

ब्रिटिश उच्चायोग के अधिकारी अहमदाबाद के एयरपोर्ट पहुँचे हैं। एअर इंडिया के विमान हादसे में ब्रिटेन के 53 नागरिक सवार थे। घटना को लेकर ब्रिटिश सरकार ने चिंता व्यक्त की है।

गुरुवार (12 जून 2025) को एअर इंडिया की बोइंग 787 विमान फ्लाइट नंबर एआई-171 अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ मिनट बाद ही मेघानीनगर में हादसे का शिकार हो गया। इसमें करीब 265 लोगों की मौत हो गयी है। विमान में 241 लोग सवार थे। इसे हाल के इतिहास में सबसे घातक विमानन दुर्घटनाओं में से एक कहा जा रहा है। बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान सीधे एक मेडिकल कॉलेज के छात्रावास में जा घुसा, जिससे भीषण आग लग गई और विमान में सवार 242 लोगों में से केवल एक ही बच पाया।

हादसे के सीसीटीवी फुटेज और दर्शकों द्वारा कैद किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि विमान ने ऊपर की ओर उड़ान नहीं भर पा रहा था, क्योंकि वह टकराने से पहले उड़ान भरने के लिए संघर्ष कर रहा था और आग के गोले में तब्दील हो गया।

इजरायल ने ईरान में की एयर स्ट्राइक, न्यूक्लियर संयंत्रों को बनाया निशाना… सेना प्रमुख-परमाणु वैज्ञानिकों की मौत: ऑपरेशन ‘राइजिंग लॉयन’ लॉन्च करके बोले PM नेतन्याहू- ये हमारी अगली पीढ़ी के लिए जरूरी

इजरायल ने शुक्रवार (13 जून 2025) सुबह ईरान पर एक बड़ा हमला किया है। इजरायली सेना ने ईरान की राजधानी तेहरान पर बमबारी की है। इजरायल ने ईरानी सेना के ठिकानों के साथ-साथ उनके परमाणु ठिकानों को भी निशाना बनाया है। इजरायली मीडिया के अनुसार, तेहरान में बड़े धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं।

इजरायल ने जानकारी दी है कि 200 से ज़्यादा फाइटर जेट से ईरान में किए गए हमलों में ईरानी सेना के तीन बड़े कमांडर मारे गए हैं। इनमें ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर और ईरान के इमरजेंसी कमांड के कमांडर शामिल हैं।

इजरायल का कहना है कि ये तीनों बहुत ही क्रूर हत्यारे थे, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खून बहाया है। इजरायल के अनुसार, इनके बिना दुनिया अब ज़्यादा सुरक्षित है।

इजरायल हमले का दावा

इजरायल ने घोषणा की है कि उसने ईरान के दर्जनों परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। इस हमले में ईरान का नतांज स्थित मुख्य परमाणु संयंत्र, परमाणु बम बनाने वाले वैज्ञानिक और ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के केंद्र शामिल हैं।

इस ऑपरेशन को ‘राइजिंग लॉयन’ (Rising Lion) नाम दिया गया है और यह कई दिनों तक जारी रह सकता है।

परमाणु बम वाले वैज्ञानिकों पर हमला- बेंजामिन नेतन्याहू

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमले की पुष्टि की है। बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल ने ईरान के परमाणु बम बनाने वाले वैज्ञानिकों पर भी हमला किया है। बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप को उनके नेतृत्व और ईरान के परमाणु कार्यक्रम का सामना करने के लिए धन्यवाद दिया।

नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि अगर इजरायल अभी कार्रवाई नहीं करेगा, तो अगली पीढ़ी का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। बेंजामिन नेतन्याहू ने यह भी कहा कि ईरान के पास अब 9 परमाणु बम बनाने लायक यूरेनियम जमा हो गया है और इजरायल उसे ऐसा करने से रोकेगा।

इजरायल में आपातकाल और सुरक्षा

इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल कैट्ज ने ईरान पर हमले के बाद पूरे देश में आपातकाल की घोषणा की है। इजरायल कैट्ज ने चेतावनी दी है कि ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले होने की आशंका है। पूरे इजरायल में सायरन बज रहे हैं और प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने सुरक्षा मंत्रिमंडल की आपात बैठक बुलाई है।

इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने बयान जारी कर कहा है कि उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी आक्रामकता के जवाब में यह हमला किया है।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और प्रभाव

हमले में अमेरिका का रुख सामने आया है। दो अमेरिकी अधिकारियों ने रॉयटर्स से पुष्टि की है कि इजरायल ने ईरान में हमला किया है। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कहा कि इसमें अमेरिका की कोई भागीदारी या सहायता नहीं थी।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा कि इजरायल ने ईरान के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की है और अमेरिका की सर्वोच्च प्राथमिकता क्षेत्र में अमेरिकी सेना की सुरक्षा है।

इस हमले के बाद इराक ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है, जिससे विमानों की आवाजाही रुक गई है।

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब ईरान के पास परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त यूरेनियम जमा होने की खबरें आ रही थीं, जिसे इजरायल अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता है।