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इस साल दलितों पर अत्याचार के 6000 मामले, महिलाओं के खिलाफ अपराधों में शीर्ष पर: राजस्थान के पीड़ितों को गले क्यों नहीं लगाते राहुल-प्रियंका?

पूरी की पूरी कॉन्ग्रेस पार्टी अभी सिर्फ और सिर्फ ‘लखीमपुर खीरी’ की माला जप रही है। मारे गए भाजपा कार्यकर्ताओं के परिजनों को कोई पूछने वाला नहीं है। लेकिन, अब ‘किसान आंदोलन’ के सहारे पार्टी न सिर्फ उत्तर प्रदेश, बल्कि पंजाब की चुनावी वैतरणी पार करने का ख्वाब भी देख रही है। छत्तीसगढ़ के कवर्धा में हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहा है। पंजाब में ईसाई धर्मांतरण बढ़ रहा है। लेकिन, कॉन्ग्रेस को चिंता सिर्फ यूपी की है।

इसका कारण ये है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा का शासन है। भगवा पहनने वाले एक महंत वहाँ के मुख्यमंत्री हैं, जो खुद के हिन्दू होने पर गर्व महसूस करते हैं। कारण ये है कि योगी आदित्यनाथ को ज्यादा से ज्यादा बदनाम कर के वोट बटोरे जाएँ। अब तो प्रियंका गाँधी ‘हिन्दू’ भी बन चुकी हैं। चंदन लगा रही हैं और मंदिर-मंदिर घूम रही हैं। अंबानी-अडानी के बाद अब टाटा को पीएम मोदी का दोस्त बताया जा रहा है।

लखीमपुर खीरी हिंसा: राजस्थान के नेताओं की ‘अति-सक्रियता’

जैसा कि हमें पता है, जहाँ-जहाँ कॉन्ग्रेस की सत्ता है, वहाँ-वहाँ वो आंतरिक कलह से जूझ रही है। राजस्थान के हालात तो सभी को पता हैं, जहाँ पिछले साल सचिन पायलट ने ‘लगभग’ पार्टी छोड़ दी थी। उनके बगावत के बाद कॉन्ग्रेस के होश उड़ गए थे। किसी तरह मामला सलटाया गया। लेकिन, नेताओं में अब भी होड़ मची है कि कौन राहुल-प्रियंका द्वारा उठाए गए मुद्दों को सबसे ज्यादा तूल देता है।

फिर क्या था, अशोक गहलोत भी सक्रिय हो गए। ‘जादूगर’ कहे जाने वाले गहलोत यूँ तो कई दिनों से बीमार थे और भगवान भरोसे चल रही राज्य सरकार में REET की प्ररीक्षा भी हो गई और प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप भी लग गए, लेकिन वो कहीं नहीं दिखे। जैसे ही लखीमपुर खीरी का मामला सामने आया, वो जिन्न की तरह प्रकट हो गए। उन्होंने कह दिया कि इस घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है।

अशोक गहलोत ने इस घटना पर कहा, “केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ को सबने सुना। जब वो कह रहे हैं कि आप सबको मालूम नहीं है कि सांसद बनने से पहले मैं क्या था? उन्होंने धमकाया कि मैं जिस दिन चाहूँगा, ऐसी स्थिति पैदा कर दूँगा कि आप लोग यहाँ से भाग जाओगे। जो अगर इस प्रकार की धमकी दे रहा है अपनी पब्लिक को, अपने मतदाताओं को, उसके बाद में जो कुछ भी हुआ वो देश के सामने है। यूपी में विपक्षी नेताओं को रोकने की परंपरा बन गई है।

सचिन पायलट की तो पूछिए ही मत। वो तो अपने पूरे लाव-लशकर, यानी बड़ी-बड़ी कई गाड़ियों के काफिलों के साथ लखीमपुर खीरी के लिए निकल पड़े। साथ में उन्होंने आचार्य प्रमोद कृष्णन को लिया हुआ था। हालाँकि, मुरादाबाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। तब उन्होंने ‘लोकतंत्र व संवैधानिक मूल्यों को कुचलने’ और ‘देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को आहत करने’ का रोना रोया था। उनके काफिले में आधा दर्जन गाड़ियाँ थीं।

सवाल ये है कि जिस पार्टी के किसी राज्य के शीर्ष दो नेता दूसरे राज्य के एक मुद्दे को हवा देने में लगे हैं, उनके खुद के राज्य में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है और रेप के मामले में वो अव्वल है। आखिर क्या कारण है कि इन्हें अपने राज्य के लोगों की चीखें नहीं सुनाई देती। क्षेत्रफल के हिसाब से राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है, ऐसे में यहाँ के नेताओं को तो गृह राज्य के मुद्दों से फुरसत ही नहीं होनी चाहिए।

लखीमपुर खीरी हिंसा के बाद राजस्थान में हुई 5 घटनाएँ

राजस्थान में आपराधिक घटनाएँ आम बात हैं और NCRB की सूची में भी ये शीर्ष पर रहता है, खासकर महिलाओं के साथ अपराध के मामले में। राज्य में आए दिन बलात्कार की घटनाएँ सामने आते रहती हैं। अपराधियों की तो छोड़िए, यहाँ के पुलिसकर्मियों पर बलात्कार के आरोप आम बात हो गए हैं। ऐसे तो वहाँ अपराध की हाल में कई घटनाएँ हुई हैं, लेकिन हम यहाँ मुख्य रूप से 5 घटनाओं के बारे में बता रहे।

पहला मामला: राजस्थान के हनुमानगढ़ में दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। भाजपा और बसपा सुप्रीमो मायावती तक ने पूछा कि क्या भूपेश बघेल और चरणजीत सिंह चन्नी वहाँ जाकर पीड़ित परिवार को मुआवजा देंगे? इसका वीडियो भी वायरल हुआ। सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हुआ। 11 लोगों पर FIR हुई। राजस्थान सरकार का कोई व्यक्ति वहाँ नहीं गया। पीलीबंगा थाने के बाहर लोगों ने न्याय के लिए धरना दिया।

दूसरा मामला: बुधवार (6 अक्टूबर, 2021) को डूंगरपुर और बाँसवाड़ा, एक ही दिन में दो जिलों में लूट की घटनाएँ हुईं। तीन बाइक सवार बदमाशों ने दोनों जिले के दो ज्वेलरी शॉप में बंदूक की नोक पर लूट की वारदात को अंजाम दिया । लाखों रुपए की चाँदी लूट कर ले गए। पिस्तौल की नोंक पर इन घटनाओं को अंजाम दिया गया। दुकानदार से मारपीट हुई। व्यवसायी डर के साए में जी रहे हैं, कॉन्ग्रेस सरकार सोइ हुई है।

तीसरा मामला: कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान के भरतपुर जिले में दो अलग-अलग घटनाओं में गौ तस्करों ने गुरुवार और शुक्रवार को पुलिस टीमों पर गोलियाँ चलाईं और पथराव किया। इन घटनाओं में दो पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। मवेशियों के अवैध परिवहन के साथ-साथ सीकरी से नगर क्षेत्र में अंतर-राज्यीय अपराधियों की आवाजाही की सूचना मिली थी। दूसरी घटना में गौ तस्करों ने 25 राउंड फायरिंग की

चौथा मामला: झालावाड़ जिले में आदिवासी समुदाय की एक किशोरी से उसके पड़ोसी ने एक साल तक कथित तौर पर बार-बार दुष्कर्म किया और बाद में उसे गर्भपात के लिए गोलियाँ दीं। इससे भ्रूण की भी मौत हो गई। लड़की ने पेट में दर्द की शिकायत की और उसे एक स्थानीय अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने पाया कि वह 6 महीने की गर्भवती है। आरोपित का नाम दाऊद है। राहुल गाँधी तो क्या, कॉन्ग्रेस का एक कार्यकर्ता तक नहीं जाएगा पीड़िता के यहाँ।

पाँचवाँ मामला: गाँव या शहर तो छोड़िए, राजस्थान की राजधानी तक सुरक्षित नहीं है। जयपुर के सांगानेर सदर इलाके में रविवार रात को एक युवक की सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। मीणा समुदाय से आने वाले उस युवक का नाम रिंकू था। गुर्जर-मीणा एकता की वकालत करने वाले पायलट वहाँ नहीं जाएँगे, स्पष्ट है। रिंकू टैक्सी चलाया करता था। गोली सिर में मारी गई थी। लेकिन, मामला भाजपा शासित राज्य का नहीं है, इसीलिए मुख्यधारा की मीडिया में तूल नहीं पकड़ पाया।

इस तरह की कई घटनाएँ सामने आई हैं, लेकिन हमने इनमें से 5 आपको बताया है ताकि आप एक अंदाज़ा लगा सकें। लखीमपुर खीरी हिंसा के बाद बलात्कार, हत्या, लूटपाट। गौ-तस्करी और पुलिस पर गोलीबारी जैसे मामले सामने आए लेकिन पीड़ितों से मिलने कॉन्ग्रेस का कोई नेता नहीं गया। मुआवजे का ऐलान नहीं हुआ। दलित की हत्या हुई। मीणा समुदाय के युवक की हत्या हुई। लेकिन, कॉन्ग्रेस शासन होने के कारण देश को कुछ पता नहीं चला।

अब बात कुछ आँकड़ों की

दलितों से अत्याचार के मामले में राजस्थान पूरे देश में दूसरे नंबर पर आता है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आँकड़ों की मानें तो केवल इसी साल अब तक दलितों के साथ अपराध के वहाँ 6000 से अधिक मामले आ चुके हैं। अभी तो ढाई महीने से भी अधिक हैं इस वर्ष को जाने को। इतना ही नहीं, इनमें से मात्र आधे में ही आरोपितों को सज़ा मिल सकी है। साल 2019 में 6,794 मामले दलितों पर अत्याचार के दर्ज हुए थे।

साल 2020 में ये आँकड़ा बढ़ कर 7017 हो गया। वहीं इस साल मात्र 24 दिनों के भीतर 3 दलितों की पीट-पीट कर हत्या का मामला सामने आ गया। भाजपा का तो कहना है कि अशोक गहलोत की सरकार ने अपराध के मामले में पिछले समस्त रिकार्ड्स तोड़ डाले हैं। 26 सितंबर को अलवर में एक दलित युवक की खेत में ले जाकर हत्या कर दी गई थी। मुस्लिम भीड़ ने 15 सितंबर को अलवर में ही योदेश की हत्या कर दी थी।

दलित ही नहीं, बेटियाँ भी राजस्थान में सुरक्षित नहीं हैं। 2020 में देश में सबसे ज्यादा रेप केस राजस्थान में दर्ज किए गए हैं। दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश जरूर है, लेकिन यहाँ रेप के मामले राजस्थान के आँकड़ों से आधे से भी कम हैं। जबकि यूपी जनसंख्या के मामले में देश का सबसे बड़ा राज्य है। राजस्थान ने तीन गुना अधिक लोग यहाँ रहते हैं। राजस्थान में एक साल में 5,310 रेप केस दर्ज किए गए

आँकड़ों को देख कर ये सवाल तो उठता है कि अपने शासन वाले राज्य में दलितों और महिलाओं को सुरक्षित न रख सकने वाली कॉन्ग्रेस दूसरे राज्यों में दो गुटों के बीच हुए संघर्ष को भी मुद्दा बना कर राजनीति करने पहुँच जाती है, जबकि मरने वालों में भाजपा कार्यकर्ता भी शामिल हैं। मृतकों तक के साथ भेदभाव किया जा रहा है। अशोक गहलोत और सचिन पायलट से राहुल-प्रियंका सवाल क्यों नहीं पूछते?

संगठन के कलह में डूबी है कॉन्ग्रेस, ख़ाक चलाएगी सरकार

पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बना कर भेजा गया। कैप्टेन अमरिंदर सिंह से उनके विवाद हुए। सीएम अमरिंदर से इस्तीफा लेकर चरणीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया और दलित राजनीति की गई। एकाध दिन सब ठीक रहा, फिर सिद्धू ने इस्तीफा सौंप दिया। लेकिन, सिद्धू लखीमपुर खीरी में धरना देने ज़रूर गए। उनका इस्तीफा मंजूर हुआ या नहीं, कुछ साफ़ नहीं है। बस वो घूम रहे हैं इस्तीफा देकर।

सीएम चन्नी के बेटे की शादी हुई, लेकिन सिद्धू वहाँ से नदारद रहे और वैष्णो देवी घूमने चले गए। पंजाब का कलह शांत नहीं हुआ है। तल्खी अभी भी चरम पर है। उधर छत्तीसगढ़ को ही ले लीजिए, जो अपेक्षाकृत छोटा राज्य है। कवर्धा में मुस्लिम भीड़ ने भगवा ध्वज उखाड़ के फेंक दिया, इसे अपमानित किया, लेकिन पुलिस ने हिन्दुओं को पीटा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मजे में यूपी में रैली कर रहे।

यहाँ भी आंतरिक कलह है। ज्यादा से ज्यादा चुनाव प्रचार कर रहे और राहुल-प्रियंका के साथ दिख रहे भूपेश बघेल को भी कुर्सी जाने का डर है, तभी उन्होंने अपने समर्थक विधायकों से दिल्ली में कई दिनों तक कैंप करवाया। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव, जो सुरगुजा के ‘महाराजा’ भी हैं, सीएम पद की रेस में है। ढाई साल वाले फॉर्मूले को लेकर भाजपा हमलावर है। यहाँ भी कॉन्ग्रेस में कई फाड़ हो चुके हैं।

राजस्थान की तो पूछिए ही मत। कई महीने से ‘कैबिनेट विस्तार’ का रट्टा मारा जा रहा है, लेकिन ये होगा कब, किसी को नहीं पता। सचिन पायलट के गुट ने एक बार फिर दिल्ली में डेरा डाला था, लेकिन गहलोत की कुर्सी बच गई। बस बच गई, हिल अब भी रही है। उनके करीबी मंत्री रघु शर्मा को गुजरात की जिम्मेदारी दी गई है। राजस्थान में संगठन में कई पद खली पड़े हैं। अंतर्विरोध के कारण उन्हें भरा नहीं जा रहा।

ऐसे में सोचने वाली बात ये है कि भाजपा शासित राज्यों के सेलेक्टिव मुद्दों उठा कर राजनीति करने वाली कॉन्ग्रेस, जो हर राज्य में आंतरिक कलह से जूझ रही है, जिसके खुद के शासन में अपराध चरम पर है – वो इस देश का भला कर सकती है? अब तो TMC भी राहुल गाँधी की जगह ममता बनर्जी को विपक्ष का चेहरा बताने लगी है। शिवसेना शरद पवार के गुण जाती है। कॉन्ग्रेस ये सब कर के अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मार रही है। अगर उसे मोदी-शाह का मुकाबला करना है, तो अपने शासन वाले राज्यों में अपराध को काबू में करे।

ईरान, पाक और अफगान से आने वाले कार्गो से अडानी ग्रुप के बंदरगाहों ने बनाई दूरी, 3000Kg हेरोइन बरामद होने के बाद समूह का बड़ा फैसला

अडानी ग्रुप ने सोमवार (11 अक्टूबर 2021) को बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की है कि अब से वह अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) पोर्ट पर पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान से आने वाले कार्गो को नहीं सँभालेगा। अडानी ग्रुप ने मुंद्रा पोर्ट पर दो कंटेनरों से लगभग 3,000 किलोग्राम हेरोइन जब्त किए जाने के लगभग एक महीने बाद यह फैसला लिया है। यह फैसला 15 नवंबर से प्रभावी हो जाएगा।

APSEZ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुब्रत त्रिपाठी द्वारा हस्ताक्षरित एडवाइजरी में कहा गया है, ”आपको सूचित किया जाता है कि 15 नवंबर, 2021 से APSEZ ईरान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आने वाले EXIM कंटेनर कार्गो को नहीं सँभालेगा। ये सलाह अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) की तरफ से ऑपरेट किए जा रहे सभी टर्मिनल्स और थर्ड पार्टी पर लागू होगी।”

दरअसल, APSEZ 16 सितंबर 2021 को ड्रग्स जब्त किए जाने के बाद से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार आलोचनाओं का सामना कर रहा है। इसके बाद कंपनी को 21 सितंबर 2021 को एक बयान जारी करना पड़ा था, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि APSEZ एक पोर्ट ऑपरेटर है, जो शिपिंग लाइंस को सेवाएँ प्रदान करता है। कंपनी ने आगे कहा कि मुंद्रा पर कंटेनरों या अडानी पोर्ट्स द्वारा प्रबंधित किसी भी पोर्ट पर पुलिसिंग अधिकार उसके पास नहीं है।

उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान पर तालिबान के शासन के बाद से इस बात को लेकर अधिक चिंता व्यक्त की जा रही है कि इस्लामिक कट्टरपंथी भारतीय और अन्य बाजारों में ड्रग्स की आपूर्ति बढ़ाएँगे। यह सर्वविदित है कि तालिबान की कमाई का प्रमुख स्रोत अफीम है।

राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने 16 सितंबर को मुंद्रा बंदरगाह पर करीब 3,000 किलोग्राम मूल्य की हेरोइन जब्त की थी। तभी से अडानी ग्रुप सोशल मीडिया यूजर के निशाने पर आ गया था। जाँच के दौरान पता चला कि ईरान के अब्बास बंदरगाह के रास्ते अफगानिस्तान से आया माल आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा स्थित आशी ट्रेडिंग फर्म के नाम से था।

बता दें कि डीआरआई को इस खेप के बारे में एक गुप्त सूचना मिली थी। जाँच एजेंसियों ने पाया कि विजयवाड़ा स्थित फर्म द्वारा इस खेप को ‘टैल्कम पाउडर’ बताया गया था। मीडिया के सूत्रों के अनुसार, इसे निर्यात करने वाली फर्म की पहचान अफगानिस्तान के कंधार में स्थित हसन हुसैन लिमिटेड के रूप में की गई है।

इस्लाम में परिवर्तित न होने पर सिरताज अली के नेतृत्व में दरगाह से जुड़े कई लोगों ने भूपेंद्र शुक्ला पर किया हमला: पंजाब की घटना

पंजाब में धर्म परिवर्तन से इनकार करने पर हमला करने का मामला सामने आया है। यहाँ के भूपेंद्र शुक्ला नाम के एक शख्स ने आरोप लगाया कि दरगाह से जुड़े लोगों के एक समूह ने इस्लाम में परिवर्तित होने से इनकार करने पर उन पर हमला किया।

स्वराज्य की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक रविवार (3 अक्टूबर) को भूपेंद्र शुक्ला ने धर्म परिवर्तन के प्रयास और उसके बाद उनकी दुकान पर हुए हमले के बारे में अपना वीडियो बयान दर्ज किया। उन्होंने इसे अपने जानने वाले लोगों के बीच इस उम्मीद के साथ भेजा कि यह ‘हिंदू समूहों’ तक पहुँच जाए और उनकी उम्मीद के मुताबिक यह वीडियो वाकई में सोशल मीडिया के जरिए उन तक पहुँचा। शुक्ला ने कहा कि उसी सप्ताह कई कार्यकर्ता उनसे मिलने के लिए आए।

वीडियो में शुक्ला कहते हैं कि मुस्लिम पुरुषों का एक समूह उनके घर आया और परिवार से पैसे के बदले इस्लाम स्वीकार करने के लिए कहा। बदले में पाँच लाख रुपए देने की पेशकश की। शुक्ला ने उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया और गुस्से में उन्हें जाने के लिए कहा। उस समय तो वो वहाँ से चले घए लेकिन वो अगले दिन वापस आए और उनकी दुकान में तोड़फोड़ की और उनका कीमती सामान लूट लिया।

शुक्ला आगे कहते हैं कि उन्होंने संबंधित थाने में शिकायत की, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उनका कहना है कि उन्होंने मुख्य व्यक्ति की पहचान कर ली है और पुलिस के साथ उसका नाम और अन्य जानकारी साझा की है।

शुक्ला उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के रहने वाले हैं। पिछले 6 साल से वह पंजाब के लुधियाना जिले में रह रहे हैं। वह नीची मंगली इलाके में अपनी विधवा माँ, पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते हैं। उनके साथ उनके एक छोटे भाई और बहन भी रहते हैं, दोनों अविवाहित हैं।

शुक्ला सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम करते हैं और ‘चाय-बीड़ी’ की दुकान चलाते हैं, दरअसल जिसे उनकी बहन और माँ चलाती हैं। उनका कहना है कि उन्होंने पहले कभी लुधियाना में सांप्रदायिक समस्या का सामना नहीं किया। हालाँकि, शेरपुर कॉलोनी में रहने वाले मुस्लिम पुरुषों का एक समूह नीची मंगली में प्रवासी हिंदू परिवार के पास आता है और उन्हें इस्लाम स्वीकार करने के लिए कहता है।

उन्होंने कहा कि वे बदले में पैसे की पेशकश करते हैं। उनका कहना है कि हर कोई इस्लाम स्वीकार कर रहा है और हमें भी ऐसा ही करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समूह हिंदू परिवारों को बताता है कि उनके पास कोई सपोर्ट सिस्टम नहीं है। जब वो इस्लाम अपनाएँगे और दूसरों को भी अपनाने के लिए कहेंगे तो वे और मजबूत होंगे।

शुक्ला ने कहा, “लेकिन हम अपना धर्म नहीं छोड़ना चाहते हैं। आप ही बताइए मैडम जी, हम जिस धर्म में पैदा हुए हैं, उसे कैसे बदला जा सकता है।” उनका कहना है कि वह अपने अब तक के वायरल वीडियो में कहे गए ‘हर शब्द’ पर कायम हैं। समूह द्वारा उनकी दुकान पर हमला करने के एक दिन बाद उन्होंने इसे रिकॉर्ड किया।

समूह सबसे पहले गुरुवार (30 सितंबर) को उनके घर आए थे। शुक्ला ने कहा, “उन्होंने हमारा सामान जमीन पर फेंक दिया। दुकान से कम से कम दस हजार रुपए की बीड़ी और माचिस भी ले गए। साथ में रखे पाँच हजार रुपए नकद भी ले गए। जब मैंने उनका वीडियो रिकॉर्ड करने की कोशिश की, तो उन्होंने मेरा फोन छीन लिया और वह भी ले गए।”

उन्होंने कहा कि वो एक ही शख्स को पहचान पाए। उसका नाम सिरताज अली है। शुक्ला ने कहा कि वह अली मिट्टी वाले बाबा के नाम से मशहूर दरगाह के मौलवी का भतीजा है। शुक्ला ने कहा कि अली ही उस समूह का नेतृत्व कर रहा था जो उसे इस्लाम स्वीकार करने के लिए मनाने आया था। हमला के समय भी अली ही समूह का नेतृत्व कर रहा था। उन्होंने कहा, “मैं दूसरों को नहीं पहचानता क्योंकि वे सभी स्कल कैप (जालीदार टोपी) पहने हुए थे और लंबी दाढ़ी रखा था।” 

शुक्ला इस बात से चिंतित हैं कि पुलिस का इरादा पहचाने गए आरोपित को पकड़ने का नहीं है, उसने उसी शाम अपना वीडियो बयान दर्ज किया और उसे वायरल कर दिया। रविवार (10 अक्टूबर) को जब स्वाति गोयल ने ट्विटर पर शुक्ला का वीडियो अपलोड किया, तो लुधियाना के पुलिस आयुक्त के आधिकारिक हैंडल (@Ludhiana_Police) ने जवाब दिया कि संबंधित पुलिस स्टेशन ने वीडियो में व्यक्ति से संपर्क किया है और “इस मामले को जल्द से जल्द सुलझा लिया जाएगा।”

आज (11 अक्टूबर) शुक्ला ने स्वाति को बताया कि उनके पास थाने से फोन आया था। शुक्ला ने कहा, “एक महिला अधिकारी ने फोन किया। उन्होंने पूछा कि मैं इस मामले को सोशल मीडिया पर क्यों ले गया। मैंने जवाब दिया कि मैं मामले को उच्चाधिकारियों के पास ले जाऊँगा। उन्होंने मुझे शांत होने के लिए कहा और कहा कि पुलिस उसका सहयोग करेगी।” उन्होंने कहा कि महिला अधिकारी ने उन्हें बताया कि जिस व्यक्ति के खिलाफ उन्होंने शिकायत की है। उसे जल्द ही पकड़ लिया जाएगा और जैसे ही उसे थाने लाया जाएगा, शुक्ला को भी पूछताछ में शामिल होने के लिए कहा जाएगा।

घाटी में वापसी के लिए तैयार कश्मीरी पंडितों को पुराने जख्म याद दिला रहे हैं आतंकी, कई बार कर चुके हैं हिंदुओं का सामूहिक नरसंहार

एक बार फिर से कश्मीर मैं हिंदुओं की हत्याओं का सिलसिला शुरू हो चुका है। पिछले सप्ताह श्रीनगर में रेहड़ी लगाने वाले बिहार के भागलपुर निवासी वीरेंद्र पासवान के साथ दवा व्यापारी माखनलाल बिन्दरू की हत्या कर दी थी। उसके बाद आतंकियों ने श्रीनगर के ईदगाह क्षेत्र के एक स्कूल में घुसकर शिक्षक दीपक चंद और प्रिंसिपल सुपिन्दर कौर की गोली मारकर हत्या कर दी। खास बात ये है कि शिक्षकों की हत्या करने से पहले उनका धर्म पूछा गया और परिचय पत्र में देखा गया।

केंद्रशासित राज्य जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यक हिंदू और सिख व्यक्तियों की ताबड़तोड़ हत्याओं के बाद कश्मीरी हिंदुओं में दहशत फैल गई है। यहाँ ये जानना बहुत जरूरी है कि कश्मीर में क्या ऐसा पहली बार हो रहा है या इससे पहले भी ये सब हो चुका है?

वर्तमान घटनाक्रम पर दुख प्रकट करते हुए पनुन कश्मीर के अध्यक्ष डॉ अजय चुरुंगु ने इसे घाटी में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास की कोशिशों को नाकाम करने की साजिश बताया। उन्होंने बताया कि बीते सप्ताह हिंदू धर्मस्थलों में तोड़फोड़ की गई है और फिर समाज के एक सम्मानित सदस्य को RSS का एजेंट बताकर दुकान में उनकी हत्या कर दी गई।

डॉ. अजय चुरुंगु के अनुसार, दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में लगभग एक हजार कश्मीरी हिंदुओं ने अपने खेत-खलिहान व मकानों को अवैध कब्जे से मुक्त करवाने का निवेदन किया है। नब्बे के दशक में आतंकियों के डर से घाटी छोड़ने के बाद उनकी संपत्तियों पर अवैध कब्जा कर लिया गया है।

इन हत्याओं पर वरिष्ठ कश्मीरी पत्रकार बिलाल बशीर ने कहा कि सिर्फ हिन्दू ही नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र और राष्ट्रवाद में आस्था रखने वाले मुसलमानों की भी हत्याएँ की जा रही हैं। बिलाल बशीर के अनुसार, वर्ष 2021 में ही अब तक 18 मुसलमानों को भारत समर्थक बताकर आतंकियों द्वारा मार डाला गया है।

पलायन कर रहे हिंदुओं की जमीनों को सुरक्षित रखने के लिए वर्ष 1997 में राज्य सरकार ने क़ानून बनाकर विस्थापितों की अचल संपत्ति को बेचने और ख़रीदने के ख़िलाफ़ क़ानून बनाया था। विस्थापित कश्मीरी पंडितों के अनुसार, इसका कोई विशेष लाभ नहीं हुआ और क़ानून के बावजूद औने-पौने दाम में संपत्तियाँ बिकती रहीं।

वर्तमान सरकार कश्मीरी हिंदुओं की उन जमीनों को मुक्त कराने का प्रयास कर रही है, जिन पर अवैध कब्जा है। कुछ समय पहले केंद्र सरकार ने वेबपोर्टल के माध्यम से कश्मीरी विस्थापितों की जमीन संबंधी विवाद का विवरण माँगा गया था। इन प्रयासों से पलायन कर चुके कश्मीरी हिन्दू एक बार फिर से अपने पैतृक आवासों में जाने के सपने को सच होता देख रहे।

कब्जा मुक्त कश्मीर बनाने के सरकार के प्रयासों को विफल करने व कश्मीरी हिंदुओं की पुनर्वापसी के सपने को तोड़ने के लिए आतंकियों द्वारा हिंसा का खेल शुरू किया गया है। पिछले साल 8 जून 2020 में अनंतनाग में कांग्रेस पार्टी से जुड़े सरपंच अजय पण्डिता की हत्या और 2 जून 2021 में त्राल में म्युनिसिपल कमेटी के प्रधान राकेश पण्डिता की हत्या इसी मकसद से की गई थी।

5 अगस्त 2019 को कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद सुरक्षा बलों ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए कई बड़े आतंकियों को मार गिराया था। इसके बाद आतंकियों ने पस्त मंसूबों के साथ सुरक्षाबलों के बदले निहत्थे आम नागरिकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। साल 2021 में अब तक कुल 25 आम नागरिक आतंकियों की गोली का शिकार हो चुके हैं।

एक आंकड़े के अनुसार, वर्तमान समय मे कश्मीर में लगभग 10 हजार हिन्दू बचे हैं। बचे हुए हिन्दू परिवारों की कुल संख्या 800 के आसपास है। बाहर से काम आदि करने आए अस्थाई हिंदुओं की संख्या 3,565 है। यदि पलायन किए कुल कश्मीरी हिंदुओं की संख्या जोड़ी जाए तो ये लगभग 3 लाख है, जो करीब 77 हजार परिवारों में बँटी हुई है।

कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, 15 मार्च 1989 से अब तक लगभग 730 कश्मीरी पंडितों की हत्या आतंकियों द्वारा की जा चुकी है। अपने लिए किए जा रहे प्रयासों को नाकाफी बताते हुए कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति का कहना है कि साल 1990 में 60 से 70 प्रतिशत कश्मीरी पंडित सरकारी नौकरी में थे, पर लंबे समय से लंबित कश्मीरी पंडितों के 500 बच्चों को अभी तक नौकरी नहीं मिल पाई है।

यदि आतंकियों द्वारा किए गए बड़े नरसंहारों को याद किया जाए तो वर्ष 2003 में पुलवामा क्षेत्र में आने वाले नंदीमार्ग गांव में 20 से अधिक कश्मीरी पंडितों की हत्या कर दी गई थी। इसी तरह 2001 में मार्च के महीने में चित्तीसिंहपुरा में 35 सिखों को लाइन में खड़ा कर के मार डाला गया था। डोडा में भी 14 अगस्त 1993 में बस रोक कर 15 हिंदुओं की हत्या कर दी गई थी।

इसी के साथ संग्रामपुर में वर्ष 1997 में घर में घुसकर अपहरण करने के बाद 7 कश्मीरी पंडित, 25 जनवरी 1998 को वंधामा में 4 परिवार के 23 सदस्य, 17 अप्रैल 1998 में ऊधमपुर के प्रानकोट में 11 बच्चों सहित 22 हिंदुओं का नरसंहार हुआ। प्रानकोट हत्याकांड के बाद ही रियासी क्षेत्र से एक हजार हिन्दू पलायन कर गए थे।

सिर्फ स्थानीय हिन्दू ही नहीं, बल्कि आतंकियों के निशाने पर बाहर से आने वाले गैर-मुस्लिम भी रहे। सन 2000 में अनंतनाग के पहलगाम में 30 अमरनाथ यात्रियों की आतंकियों ने हत्या कर दी थी और सन 2001 में जम्मू कश्मीर रेलवे स्टेशन पर सेना की वर्दी पहने आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर के 11 लोगों की जान ले ली थी।

हिंदुओं के धर्मस्थल भी आतंकियों के निशाने पर हमेशा रहे। जम्मू के रघुनाथ मन्दिर पर वर्ष 2002 में ही 2 बार हमला करके आतंकियों ने 15 से अधिक श्रद्धालुओं की जान ले ली थी। साल 2002 में क्वासिम नगर में आतंकियों के हाथों 29 मजदूर मार डाले गए थे, जिनमें 13 महिलाएँ और 1 बच्चा शामिल था।

कश्मीरी मूल के प्रसिद्ध फिल्मकार अशोक पण्डित ने कश्मीरी हिंदुओं के 1990 दशक के नरसंहार पर एक डाक्यूमेंट्री बनाई है, जिसमें क्रमवार तरीके से चश्मदीदों के बयानों के माध्यम से बताया गया है कि आतंकियों ने जीवित रहने का मात्र 1 विकल्प दिया था और वो था धर्म बदल लेना। जो इसे नहीं माना, उसे पलायन करना पड़ा अन्यथा उसे मार दिया गया।

बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता अनुपम खेर ने भी कश्मीरी पंडितों को ले कर एक वीडियो बनाया था, जिसे सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियाँ मिली थीं।

केजरीवाल सरकार का ‘पावर क्राइसिस’ और ‘कोयला संकट’ पर घड़ियाली आँसू, जबकि दो साल पहले खुद ही बंद करवाए ऐसे पावर स्टेशन

दिल्ली में कोयला ‘संकट’ आया तो केजरीवाल सरकार एक बार फिर केंद्र सरकार पर सारा ठीकरा फोड़ने को बैठी है। एक तरफ अरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री से पूरे मसले पर हस्तक्षेप को बोल रहे हैं, दूसरी ओर उन्हीं के पार्टी के नेता व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया आरोप लगा रहे हैं कि केंद्र सरकार इस संकट को नजरअंदाज करने की कोशिश कर रही है। उनके मुताबिक, ये हालत बिलकुल कोविड के कारण अप्रैल और मई में उपजी परिस्थिति जैसे हैं

हालाँकि, मेडिकल ऑक्सीजन की तुलना इस मुद्दे से करना थोड़ा हैरान करने वाला जरूर है क्योंकि वो केजरीवाल सरकार ही थी जिसने जरूरत से ज्यादा की डिमांड करके राजधानी में पैनिक बढ़ाया था।

सिसोदिया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर कहा, “पिछले 3-4 दिनों से, देश भर के मुख्यमंत्री इस मुद्दे को केंद्र सरकार के पास भेज रहे हैं। इन सबके बीच केंद्रीय ऊर्जा मंत्री कह रहे हैं कि कोई संकट नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री को पत्र नहीं लिखना चाहिए था। केंद्र का ऐसा गैर- जिम्मेदाराना रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सरकार ‘आँखें मूंदे रखने वाली’ नीति का पालन कर रही है, और इसने अतीत में परेशानी पैदा की है। उन्होंने कहा, “अगर सभी मुख्यमंत्री कोयले की कमी का मुद्दा उठा रहे हैं तो इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इस बार भी नाकामी के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है। जिस तरह से उन्होंने ऑक्सीजन का गलत प्रबंधन किया, उसी तरह वे कोयले का गलत प्रबंधन कर रहे हैं।”

हालाँकि सिसोदिया ये कहते हुए भूल गए कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त ऑडिट पैनल ने किस तरह ये बात पाई थी कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने 25 अप्रैल से 10 मई के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में ऑक्सीजन की आवश्यकता को चार गुना से अधिक बढ़ाकर माँगा। ये काम वो तब कर रहे थे जब कोरोना की दूसरी लहर अपने चरम पर थी और हर राज्य को ऑकसीजन पहुँचाई जानी थी।

इससे पहले दिल्ली के विद्युत मंत्री सत्येंद्र जैन ने चेतावनी दी थी कि अगर राष्ट्रीय राजधानी को जल्द से जल्द कोयले की सप्लाई नहीं पहुँचती है तो पूरा ‘ब्लैकाउट’ हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि दिल्ली सरकार महंगी बिजली खरीदने को भी तैयार है। दिल्ली मुख्यमंत्री ने भी कहा था कि वो हालातों पर नजर बनाए हुए हैं और पूरी कोशिश कर रहे हैं कि दिल्ली को बिजली की समस्या से बचाया जा सके।

AAP सरकार ने दिल्ली में किए थर्मल पावर प्लॉन्ट बैन

ये ज्ञात रहे कि दिल्ली सरकार जहाँ कह रही है कि वो अपने स्तर पर हर संभव कोशिश कर रही हैं कि थर्मल पावर प्लांट्स के लिए वो कोयला हासिल कर सकें। वहीं उनकी पुरानी रणनीति उनके दोहरे चरित्र को दिखाती है।

थर्मल प्लांट्स पर कंप्लीट बैन

2019 में, दिल्ली सरकार ने दिल्ली में कोयला आधारित बिजली संयंत्रों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। इसके बाद एक कदम आगे बढ़ते हुए, इन्होंने उन उद्योगों पर भी प्रतिबंध लगा दिया जो बिजली के स्रोत के रूप में कोयले का उपयोग कर रहे थे।

साल 2020 में, दिल्ली के बिजली मंत्री सत्येंद्र जैन ने केंद्रीय बिजली मंत्री आरके सिंह को पत्र लिखा था और उनसे राष्ट्रीय राजधानी के 300 किलोमीटर के दायरे में 11 थर्मल प्लांट बंद करने का आग्रह किया। फिर, तीन महीने पहले जून 2021 में, दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कोयले से चलने वाले दस बिजली संयंत्रों को बंद करने के निर्देश माँगे थे।

क्या सच में हो गई है भारत में कोयला कमी?

कुछ हफ्तों से विद्युत उद्योग में हल्ला है कि देश में कोयला की कमी है। इस बीच कई राज्यों समेत केजरीवाल सरकार ने हड़बड़ी मचानी शुरू कर दी है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स और राज्य सरकारों के दावों के उलट केंद्र सरकार कह रही है कि देश में कोयला की कोई कमी नहीं है। 

एक प्रेस विज्ञप्ति में, कोयला मंत्रालय ने आश्वस्त किया कि देश में कोयले का पर्याप्त भंडार है। विशेष रूप से, भारत में जहाँ कोयला खदानें स्थित हैं, उस क्षेत्र में मानसून और भारी वर्षा के बावजूद, कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) देश भर में थर्मल प्लांटों को लगातार कोयले की आपूर्ति कर रहा है।

ये बात जानने वाली है कि इस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोयले की कीमत बहुत बढ़ी हुई है, जिससे कोयला आयात में कठिनाई हो रही है और इसी को सबने ‘संकट’ से जोड़ दिया गया है।

CIL ने पॉवर कंपनियों से कोयला स्टॉक करने को कहा था

दिलचस्प बात यह है कि सितंबर 2021 में, यह बताया गया था कि सीआईएल बिजली कंपनियों को लिख रहा है कि वे कोयले के सेवन को विनियमित न करें और खुद से कोयला स्टॉक का निर्माण करें। सीआईएल ने कहा था कि इससे बिजली कंपनियों को लगातार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

इसके बाद उसी माह में, सीआईएल ने बिजली संयंत्रों को आपूर्ति 20% तक बढ़ा दी थी। राज्य के स्वामित्व वाली कंपनी ने कहा था कि उन्होंने प्राथमिकता पर 0 से छह दिनों के स्टॉक के साथ बिजली संयंत्रों को आपूर्ति आवंटित की थी और लिंक की गई खदानों के साथ किसी भी समस्या के मामले में वैकल्पिक स्रोतों की व्यवस्था की थी।

कोयले में कमी आना कोई नई बात नहीं है

नेताओं के दावों से उलट ये बात मालूम हो कि इस प्रकार कोयला की कमी आना कोई नई बात नहीं है। हर साल मॉनसून सत्र में ये कमी कुछ निश्चित समय के लिए होती है जिसे जल्द ही सही भी कर लिया जाता है। अप्रैल 2018 में भी ऐसी रिपोर्ट आई थी लेकिन तब सरकार ने सभी दावों को खारिज कर दिया था। 

2019 में कहा गया कि हेवी मॉनसून के कारण प्रोडक्शन में 24 फीसद कमी आई है। लेकिन, नवंबर 2020 में पता चला कोयला उत्पादन में 19 फीसद उछाल आई है। कोयले की कमी भारत में केवल एक दौर की तरह है जो हर साल आता है। इस साल कम आयात के कारण हो सकता है सप्लाई में कमी है। लेकिन केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि चिंता की कोई बात नहीं है।

‘बिग बॉस’ के ‘मास्टरमाइंड’ ने नवरात्रि को रेप से जोड़ा, खुद एक महिला को धक्का देने पर हुए थे शो के बाहर: लोगों ने कहा – ‘चरसी बॉलीवुड’

बॉलीवुड अक्सर हिन्दू पर्व-त्योहारों पर ज्ञान देता रहता है। होली पर पानी बचाने का ज्ञान हो, दीवाली पर पटाखे न उड़ाने का या फिर गणेश चतुर्थी पर शोर न मचाने का, मुंबई के फिल्म सेलेब्स ज्ञान देने में अव्वल हैं। वहीं ईद और क्रिसमस पर उनकी घिग्घी बँध जाती है। अभी पूरे देश में दुर्गा पूजा के कारण भक्तिमय माहौल है। इसी बीच टेलीविजन प्रोड्यूसर विकास गुप्ता ने नवरात्रि को रेप से जोड़ने वाला प्रयास किया है।

विकास गुप्ता ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की, जिसमें एक घायल महिला को प्रतीकात्मक रूप से दिखाया गया है। महिला एक शरीर पर जगह-जगह खून के धब्बे और जख्म हैं। इस तस्वीर पर लिखा हुआ है, “अगर आप साल के बाकी 365 दिन महिलाओं का सम्मान नहीं करते, मैं निश्चित हूँ कि 9 दिन नवरात्रि की पूजा करने से दुर्गा माँ आप पर खुश नहीं होंगी।” ट्वीट के कैप्शन में विकास गुप्ता ने लिखा – ‘जय माता दी।’

आश्चर्य की बात तो ये है कि जिस विकास गुप्ता ने ये पोस्ट किया, उन पर खुद महिला के अपमान का आरोप है। उन्होंने 2020 में ‘बग बॉस 14’ में आर्शी खान के साथ न सिर्फ लड़ाई की थी, बल्कि उन्हें स्विमिंग पूल में धक्का भी दे दिया था। इसके बाद उन्हें शो से निकाल बाहर किया गया था। तब उन्होंने कहा था कि उन्हें खुद को देखते हुए रोना आ रहा था। उन्होंने इसके बाद सफाई देते हुए वीडियो बयान जारी किया था।

इसी तरह 2019 में उन्हें ‘खतरों के खिलाड़ी 9’ से निकलने को कहा गया था, क्योंकि शो के होस्ट रोहित शेट्टी ने पाया था कि वो चुपके स्टंट्स से पहले पेन किलर्स ले रहे थे। तब उन्होंने बताया था कि वो 2 वर्षों से कंधे की चोट से जूझ रहे हैं और हैलीकॉप्टर से कूदने वाले स्टंट के दौरान नर्व पेन के कारण उन्हें दवाएँ लेनी पड़ी थी। एक प्रैंक वीडियो बनाने को लेकर भी रोहित शेट्टी ने उन्हें जम कर झाड़ लगाई थी।

नवरात्रि पर विकास गुप्ता की ट्वीट के बाद लोगों ने उन्हें सलाह दी कि वो खुद के बारे में जो सोचते हैं, उसे सार्वजनिक न करें। लोगों ने कहा कि बॉलीवुड के लोगों को तो कम से कम नैतिकता पर ज्ञान नहीं ही देना चाहिए। कइयों ने उन्हें ‘फ्लॉप प्रोड्यूसर’ बताते हुए उन्हें बताया कि साल में नवरात्रि 4 बार आती है। लोगों ने बॉलीवुड को ‘चरसी’ बताते हुए ज्ञान न देने को कहा। साथ ही याद दिलाया कि जो तस्वीर उन्होंने शेयर की है, वो इस्लामी मुल्कों में महिलाओं की दुर्दशा पर बनाया गया था।

अंत में आपको बता दें कि विकास गुप्ता कौन हैं। 17 की उम्र से ही एकता कपूर की ‘बालाजी टेलीफिल्म्स’ में इंटर्न करने वाले विकास गुप्ता वहाँ क्रिएटिव हेड के पद तक पहुँचे। इसके बाद उन्होंने ‘Lost Boy Production‘ नामक अपना प्रोडक्शन हाउस खोला और कई सीरियल बनाए। 2011 में उन्होंने ‘बिग बॉस 11’ में हिस्सा लिया, जिसमें वो दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें ‘मास्टरमाइंड’ का ख़िताब दिया गया। उनके भाई सिद्धार्थ गुप्ता भी अभिनेता और मॉडल हैं।

वहीं विरोध होने के बाद अब विकास गुप्ता ने इस ट्वीट पर सफाई देते हुए कहा है, “हमारे धर्म के विरुद्ध कोई प्रोपेगंडा नहीं होना चाहिए। मैं एक हिन्दू हूँ और मुझे इस पर गर्व है। मैंने इसे पोस्ट किया, क्योंकि पिछले साल पूजा से लौट रही एक लड़की के साथ गलत घटना हुई थी। जब कोई हमारे धर्म पर हमला करेगा तो मैं आपके साथ खड़ा रहूँगा।” वहीं ‘हिन्दू आईटी सेल’ ने भी उन्हें ट्वीट डिलीट कर के माफ़ी माँगने को कहा है।

स्विटजरलैंड ने भारत को दी बैंक अकाउंट्स की तीसरी लिस्ट, कालेधन के खिलाफ लड़ाई में मोदी सरकार का एक और कदम

भारत को स्विट्जरलैंड से अपने नागरिकों और संस्थाओं के स्विस बैंक खाते के विवरण का तीसरा सेट प्राप्त हुआ है। स्विस बैंक से भारत को यह जानकारी ऑटोमैटिक एक्सचेंज ऑफ इन्फॉर्मेशन पैक्ट (automatic exchange of information pact) के तहत मिली है। इसमें उन लोगों के अकाउंट के बारे में एक डिटेल रिपोर्ट है, जिन्होंने स्विटजरलैंड में पैसे जमा कर रखे हैं। यह जानकारी स्विस बैंक की तरफ से शेयर की गई है। इस तरह की दो अन्य रिपोर्ट इससे पहले शेयर की जा चुकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच हुए करार के तहत स्विस बैंक की तरफ से सालाना आधार पर इस तरह की रिपोर्ट शेयर की जाती है। इस साल स्विस बैंक ने 96 देशों के 33 लाख बैंक अकाउंट की जानकारी शेयर की है। वहाँ के फेडरल टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन (FTA) की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि इस साल स्विस बैंक ने 10 नए देशों के नागरिकों की जानकारी भी शेयर की है। इन 10 देशों में एंटीगुआ, बरबूडा, अजरबैजान, डोमिनिका, घाना, लेबनन, मकाउ, पाकिस्तान, कतर, सामाओ और Vanuatu शामिल हैं। इसके अलावा 96 में 70 देश ऐसे हैं, जिनके साथ परस्पर जानकारी शेयर की गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 26 देशों ने स्विटजरलैंड के साथ ये जानकारी शेयर की, लेकिन बदले में स्विटजरलैंड ने अपनी तरफ से उन्हें कोई जानकारी नहीं शेयर की। बताया जा रहा है कि डेटा सिक्यॉरिटी के कारण 14 देशों को स्विटजरलैंड ने जानकारी शेयर करने से मना कर दिया है।

मालूम हो कि फेडरल टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन (FTA) किसी भी अकाउंट होल्डर का नाम या अन्य जानकारी शेयर नहीं करता है। कहा जा रहा है कि सितंबर 2022 में स्विस एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से इसी तरह का चौथा विवरण शेयर किया जाएगा। FTA ने पहली बार सितंबर 2019 में स्विस बैंक से इस तरह की जानकारी हासिल की थी। उस साल स्विस बैंक ने 75 देशों के ऐसी जानकारी शेयर की थी।

गौरतलब है कि 9 अक्टूबर 2020 को भारत को स्विट्जरलैंड से अपने नागरिकों और संस्थाओं के स्विस बैंक खाते के विवरण का दूसरा सेट प्राप्त हुआ था। कालेधन के ख़िलाफ लड़ाई में मोदी सरकार को साल 2019 में सबसे पहली बड़ी सफलता मिली थी। स्विस बैंक में भारतीय खातों का विवरण प्राप्त करने के लिए भारत काफी समय से प्रयास कर रहा था। इसके बाद सितंबर 2019 में पहले दौर का विवरण स्विट्जरलैंड ने भारत को सौंपा था।

जिस टीचर को जयपुर के सेंट जेवियर्स ने किया था सस्पेंड, उनके खिलाफ कोर्ट से पीड़ित और गवाह नदारद: नकारात्मक प्रतिवेदन हुआ स्वीकार

अपडेट: जयपुर जिला एवं सेशन न्यायालय में सेंट जेवियर्स स्कूल के टीचर निखिल जोस का केस चला। छात्राओं को अश्लील मैसेज भेजने का जो आरोप इस शिक्षक पर लगाया गया था, वो पुलिस अनुसंधान में सही नहीं पाया गया। आरोप लगाने वाले परिवादी ने भी कोर्ट के समक्ष माना कि इस मामले में अब वो कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं। कोर्ट ने इस मामले में नकारात्मक प्रतिवेदन स्वीकार कर लिया।

जयपुर के सेंट जेवियर्स स्कूल की पूर्व छात्राओं को अश्लील मैसेज भेजने के मामले में आरोपित शिक्षक निखिल जोस को स्कूल प्रबंधन ने सस्पेंड कर दिया है। वहीं राज्य बाल अधिकार आयोग ने 7 दिन के भीतर पूरे मामले की जाँच कर प्रोग्रेस रिपोर्ट देने का नोटिस जारी किया है। मामले में स्कूल प्रबंधन की तरफ से एक तीन सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया गया है। इसमें दो महिला सदस्य हैं।

समिति अपनी रिपोर्ट जल्दी ही देगी जिससे आरोपित शिक्षक निखिल जोस के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके। स्कूल प्रबंधन ने जाँच रिपोर्ट आने तक आरोपित शिक्षक को निलंबित कर दिया है। प्रबंधन ने यह भी कहा है कि सोशल मीडिया में प्रसारित इस तरह की किसी भी घटना में स्कूल प्रबंधन की कोई भूमिका नहीं है। मामले में यह भी सामने आया है कि आरोपित 6 महीने से छात्राओं को अश्लील मैसेज भेज रहा था।

मुख्यमंत्री ने किया था सम्मानित।
निखिल जोस को CM द्वारा सम्मानित करने वाला पत्र वायरल (साभार: दैनिक भास्कर)

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक निखिल जोस को राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी सम्मानित कर चुके हैं। इस संबंध में एक पत्र वायरल हुआ है। इसमें मुख्यमंत्री गहलोत ने उसके कामों की प्रशंसा करते नजर आ रहे हैं। आरोपित शिक्षक की सीएम के साथ फोटो भी सामने आई है।

उल्लेखनीय है कि आरोपित शिक्षक छात्राओं को अश्लील मैसेज भेजता था और उन्हें होटल में शराब पार्टी के लिए बुलाता था। शुरुआत में लड़कियों ने इग्नोर किया, लेकिन आरोपित की अश्लीलता बढ़ी तो छात्राओं ने एकजुट होकर सोशल मीडिया पर कैम्पेन चला दिया। फिलहाल, पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। उसके मोबाइल में कई अश्लील मैसेज भेजने के सबूत मिले हैं। 

निखिल ने कहा था कि उसकी इंस्टाग्राम आईडी किसी ने हैक कर ली थी और उसी ने यह मैसेज किए थे। साथ ही निखिल ने कहा कि उसे एक दिन ही पहले पता लगा था कि उसकी इंस्टाग्राम आईडी से अश्लील मैसेज भेजे गए हैं। हालाँकि पुलिस का कहना है कि अब तक की जाँच में आईडी हैक होने की बात सामने नहीं आई है। आरोपित ही मैसेज करता था। उसके मोबाइल को फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा जाएगा। शुरुआती जाँच में पता चला था कि स्कूल में ऑनलाइन क्लास के लिए वॉट्सऐप ग्रुप बनाए गए थे। वहीं से स्टूडेंट के नंबर लेकर निखिल जोस प्राइवेट चैटिंग करने लगा था।

कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल को जूतों से सजाने पर BJP-VHP ने जताई आपत्ति, आयोजकों ने कहा- किसान आंदोलन के थीम पर बना है पंडाल

कोलकाता के दमदम इलाके के एक दुर्गा पूजा पंडाल की सजावट जूतों-चप्पलों से की गई है। पंडाल की इस सजावट को लेकर बीजेपी और विश्व हिंदू परिषद ने कड़ा ऐतराज जताया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के मुख्य सचिव से मामले में दखल देने व इसे हटवाने का आग्रह किया है।

शुभेंदु अधिकारी ने आपत्ति जताते हुए इसे हिंदू आस्था का अपमान कहा और राज्य के मुख्य और गृह सचिव से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर षष्ठी से पहले जूता-चप्पल को हटाने की माँग की। उन्होंने पंडाल में सजाई गई जूता और चप्पल की तस्वीर शनिवार (अक्टूबर 9, 2021) को ट्विटर पर डाली थी। 

ट्वीट में लिखा है, “दमदम पार्क में पूजा पंडाल को जूतों से सजाया गया है। ‘कलात्मक स्वतंत्रता’ के नाम पर माँ दुर्गा का अपमान करने का यह जघन्य कृत्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मैं मुख्य और गृह सचिव से आग्रह करता हूँ कि वे हस्तक्षेप करें और आयोजकों को षष्ठी से पहले जूते हटाने के लिए विवश करें।”

शुभेंदु अधिकारी की तरह ही मेघालय के पूर्व राज्यपाल व वरिष्ठ भाजपा नेता तथागत रॉय ने पत्रकारों से कहा है कि कला की आजादी के नाम पर सब कुछ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यह देवी दुर्गा का अपमान और हमारी धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है।

वहीं, विश्व हिंदू परिषद ने भी बंगाल के गृह सचिव को पत्र लिख पंडाल से जूते हटवाने की माँग की है। वीएचपी ने लिखा, “हम आपसे आग्रह करते हैं कि तुरंत पंडाल से जूते हटवाने के लिए उचित कदम उठाएँ। जब तक पूजा स्थल से इन आपत्तिजनक जूतों को नहीं हटाया जाता, तब तक बंगाली हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ शांत नहीं होंगी। मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि सांप्रदायिक सद्भाव खत्म करने और बंगाली हिंदुओं का अपमान करने वाले इन उपद्रवियों के खिलाफ मजबूती से कदम उठाएँ।”

इधर दमदम पार्क भारत चक्र समिति के एक पदाधिकारी ने अपनी ओर से स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि जूते पंडाल से दूर लगाए गए हैं। उन्होंने कहा, “इस साल हमारी थीम किसान आंदोलन है। इसके अनुसार, पंडाल जाने के रास्ते पर जूते लगाए गए हैं जो आंदोलनरत किसानों पर पुलिस के लाठीचार्ज के एक दृश्य का प्रतीक हैं।”

इसके अलावा दमदम पार्क भारत चक्र क्लब पूजा के आयोजकों ने पंडाल के रास्ते में ट्रैक्टर की प्रतिकृति रखकर ‘किसानों के आंदोलन’ को दर्शाया है। ट्रैक्टर के दो हिस्से हैं, जिन पर आंदोलन में मारे गए किसानों के नाम लिखे हैं। इसके साथ ही एक पोस्टर में अंग्रेजी में लिखा है, “हम किसान हैं। आतंकवादी नहीं। किसान अन्न सैनिक हैं।” क्लब के सचिव प्रतीक चौधरी ने कहा कि उनकी थीम किसानों की दुर्दशा और उन संघर्षों के इर्द-गिर्द है, जिनका सामना उन्होंने 1946 में अविभाजित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा आयोजित ऐतिहासिक आंदोलन तेभागा के बाद से किया है। उउनका कहना है कि इस पंडाल में उन्होंने लखीमपुर खीरी हिंसा की कहानी भी दिखाने की कोशिश की है।

कश्मीर के आतंकी, कॉन्ग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज के लिए ‘बच्चे’: कहा- बंदूक थामे बच्चों से पूछिए वे क्या सोचते हैं

कॉन्ग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज ने जम्मू कश्मीर के आतंकियों की पैरवी की है। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जिसके हाथ में बंदूक है, उनसे हमें पूछना चाहिए कि आप क्या सोचते हैं? उन्होंने कहा कि घाटी में कुछ इसी तरह का माहौल बनना चाहिए। अब जब जम्मू कश्मीर में गैर-मुस्लिमों की हत्याओं का सिलसिला फिर से शुरू हो गया है और सख्त केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कड़ी कार्रवाई की है, कॉन्ग्रेस नेता ने इस तरह का बयान दिया है।

उन्होंने कहा कि उन ‘बच्चों’ (बंदूक थामने वाले आतंकियों) का भी कुछ कहना है। उन्होंने ये भी कहा कि वो हिंसा का समर्थन नहीं करते हैं, लेकिन समस्या के समाधान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बारे में जम्मू कश्मीर की जनता और यहाँ के राजनीतिक दलों से बात करनी होगी। उन्होंने बातचीत को हर चीज का समाधान बताते हुए कहा कि कश्मीर का मुस्लिम समुदाय हिल गया है, क्योंकि उसे पता चला है कि ये हत्याएँ उनमें से किसी के द्वारा ही की गई थी।

उन्होंने दावा किया कि जम्मू कश्मीर का बहुसंख्यक समुदाय अंदर तक हिला हुआ है क्योंकि उनमें से ही कुछ ने हथियार उठा कर लोगों को मार डाला, लेकिन उन्हें भी सुना जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि केंद्र शासित प्रदेश की जनता में से कोई भी हिंसा का समर्थन नहीं करता। सैफुद्दीन सोज ने कश्मीर में सेना और अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी की बात करते हुए कहा कि समाधान बातचीत से ही निकलेगा।

कॉन्ग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज का आतंकियों के समर्थन में बयान (वीडियो साभार: India Today)

84 वर्षीय सैफुद्दीन सोज जम्मू कश्मीर में कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं में से एक हैं। पेशे से प्रोफेसर रहे सैफुद्दीन सोज 7 बार सांसद रहे हैं। 4 बार उन्होंने बारामुला से लोकसभा में जीत दर्ज की और 3 बार राज्यसभा के लिए उन्हें चुना गया। पहले JKNC में रहे सोज 2003 में कॉन्ग्रेस में आ गए थे। यूपीए-1 के दौरान उन्हें जल संसाधन मंत्री बनाया गया था। वो जम्मू कश्मीर में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। वो 90 के दशक में इंद्र कुमार गुजराल और एचडी देवगौड़ा के प्रधानमंत्रित्व काल में भी केंद्रीय मंत्री रहे।

ताज़ा घटनाओं की बात करें तो 2 अक्टूबर को राजधाइ श्रीनगर के चट्टाबल के रहने वाले माजिद अहमद गोजरी की आतंकियों ने हत्या कर दी। इसी दिन एसडी कॉलोनी बटमालू में मोहम्मद शफी डार को गोलियों से भून डाला गया। 5 अक्टूबर को लोकप्रिय दवा कारोबारी माखन लाल बिंदरू की हत्या हुई। इसके कुछ ही देर बाद बिहार के महादलित चाट विक्रेता वीरंजन पासवान की हत्या हुई। उसी दिन बांदीपोरा में मोहम्मद शफी लोन को मार डाला गया। फिर दो शिक्षकों को मौत के घाट उतार दिया गया, क्योंकि वो हिन्दू और सिख थे।