Homeदेश-समाजपंजाब के 'शिक्षा सुधारों' का श्रेय लेने पर कॉन्ग्रेस और AAP में जंग, पढ़े-...

पंजाब के ‘शिक्षा सुधारों’ का श्रेय लेने पर कॉन्ग्रेस और AAP में जंग, पढ़े- जब दिल्ली में केजरीवाल पर शीला दीक्षित के काम को अपना बताने के लगे थे आरोप

टाइमलाइन यह संकेत देती है कि पंजाब में शिक्षा सुधार की शुरुआत 2022 में AAP सरकार आने के तुरंत बाद नहीं हुई थी। सरकार बदलने से पहले हुए सर्वे और मूल्यांकन के आँकड़े बताते हैं कि राज्य में सुधार के संकेत पहले ही दिखाई देने लगे थे।

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर पंजाब के ‘शिक्षा क्षेत्र में नंबर-1’ बनने की काफी चर्चा हो रही है। स्कूल शिक्षा में शीर्ष स्थान मिलने के बाद इस बात पर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है कि इसका श्रेय किसे मिलना चाहिए।

आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार इसे अपनी शिक्षा सुधार नीतियों का नतीजा बता रही है। पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने कहा कि भगवंत मान सरकार के दौरान पंजाब 27वें स्थान से पहले नंबर पर पहुँचा है।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस विधायक और पंजाब के पूर्व शिक्षा मंत्री परगट सिंह ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पंजाब में शिक्षा सुधार की शुरुआत पिछली कॉन्ग्रेस सरकार के समय ही हो गई थी और 2022 में AAP के सत्ता में आने से पहले हुए बड़े शिक्षा सर्वे में इसके संकेत दिखने लगे थे।

यह विवाद दिल्ली की उस पुरानी बहस की याद दिलाता है, जब कॉन्ग्रेस नेताओं ने AAP पर आरोप लगाया था कि उसने शिक्षा क्षेत्र में उन सुधारों का श्रेय लिया, जिसकी नींव शीला दीक्षित सरकार के दौरान रखी गई थी। अब पंजाब में भी यही सवाल उठ रहा है कि शिक्षा जैसे लंबे समय के सुधार का असली श्रेय किसे मिलना चाहिए।

क्या है AAP का दावा?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब पंजाब सरकार ने हालिया रैंकिंग में अपने प्रदर्शन को लेकर हुए दावा किया कि राज्य स्कूल शिक्षा में देश में नंबर-1 बना है। अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री भगवंत मान और अन्य AAP नेताओं ने इस उपलब्धि का श्रेय 2022 में पार्टी के सत्ता में आने के बाद किए गए शिक्षा सुधारों को दिया।

सरकार का कहना है कि स्कूल्स ऑफ एमिनेंस, फिनलैंड और सिंगापुर जैसे देशों में शिक्षकों की ट्रेनिंग, शिक्षकों और स्टाफ की भर्ती, स्मार्ट क्लासरूम का विस्तार और स्कूलों के बुनियादी ढाँचे में सुधार जैसे कदमों से सरकारी स्कूलों में बड़ा बदलाव आया है।

AAP का दावा है कि इन पहलों की वजह से पंजाब की शिक्षा व्यवस्था मजबूत हुई और राज्य शिक्षा रैंकिंग में शीर्ष स्थान तक पहुँचा है। केजरीवाल ने यह भी कहा कि पहले पंजाब शिक्षा रैंकिंग में निचले पायदान पर था लेकिन अब नंबर-1 बन गया है जिसे AAP सरकार के शिक्षा मॉडल की सफलता के तौर पर पेश किया जा रहा है।

रियलिटी चेक: क्या पंजाब की शिक्षा में सुधार AAP के आने से पहले शुरू हो गया था?

AAP पंजाब के शिक्षा क्षेत्र में सुधार का श्रेय अपनी सरकार को दे रही है लेकिन घटनाक्रम की टाइमलाइन बताती है कि राज्य में सुधार की शुरुआत पार्टी के सत्ता में आने से पहले ही हो चुकी थी। AAP सरकार ने मार्च 2022 में पंजाब में सत्ता संभाली थी लेकिन जिन अहम सर्वे और रिपोर्टों का हवाला दिया जा रहा है, उनमें से कुछ का डेटा 2022 से पहले का है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस उपलब्धि का पूरा श्रेय AAP सरकार को मिलना चाहिए या फिर वह पहले से किए गए काम का फायदा उठा रही है?

उदाहरण के तौर पर, नेशनल अचीवमेंट सर्वे (NAS) 2021 जो देशभर में छात्रों की पढ़ाई और सीखने के स्तर को मापता है, AAP सरकार बनने से कई महीने पहले किया गया था। इस सर्वे में पंजाब का प्रदर्शन अच्छा रहा था और राज्य बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल था। इसी तरह कॉन्ग्रेस नेताओं ने पहले की परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया है कि पंजाब में शिक्षा क्षेत्र में सुधार के संकेत सरकार बदलने से पहले ही दिखने लगे थे।

हालाँकि इसका यह मतलब नहीं है कि मौजूदा सरकार की कोई भूमिका नहीं रही। सत्ता में आने के बाद AAP सरकार ने स्कूल्स ऑफ एमिनेंस शुरू किए, शिक्षकों के लिए ट्रेनिंग कार्यक्रम चलाए, भर्ती अभियान शुरू किए और स्कूलों के बुनियादी ढाँचे को बेहतर बनाने पर काम किया। लेकिन शिक्षा क्षेत्र में सुधार आमतौर पर लंबे समय में असर दिखाते हैं और इनके नतीजे सामने आने में कई साल लग सकते हैं। ऐसे में किसी एक सरकार को पूरे सुधार का श्रेय देना आसान नहीं होता।

इसलिए टाइमलाइन से यह संकेत जरूर मिलता है कि पंजाब की शिक्षा में सुधार की प्रक्रिया AAP के सत्ता में आने से पहले ही शुरू हो चुकी थी। हालाँकि, मौजूदा सरकार ने अपने स्तर पर कई नई पहलें जारी रखीं और सुधारों को आगे बढ़ाने की कोशिश की।

एक और महत्वपूर्ण बात जो अक्सर राजनीतिक बहस में छूट जाती है, वह यह है कि पंजाब को भारत का कुल मिलाकर शिक्षा में नंबर-1 राज्य घोषित नहीं किया गया है। AAP सरकार जिस रैंकिंग का हवाला दे रही है, वह केवल स्कूल शिक्षा के संकेतकों और छात्रों के सीखने के परिणामों (learning outcomes) से जुड़ी है। इसमें पूरे शिक्षा क्षेत्र को नहीं मापा गया है, जिसमें उच्च शिक्षा, विश्वविद्यालय, रिसर्च आउटपुट, शिक्षकों की गुणवत्ता, रोजगार क्षमता और अन्य कई मानक शामिल होते हैं। इसलिए यह कहना कि पंजाब पूरे शिक्षा क्षेत्र में भारत का नंबर-1 राज्य बन गया है, पूरी तरह गलत है। ऐसे दावों का प्रचार लोगों के बीच भ्रम फैला सकता है लेकिन सच को लंबे समय तक छिपाए नहीं रहा जा सकता है।

दिल्ली जैसा विवाद: बेहतर शिक्षा का श्रेय किसे?

पंजाब में शिक्षा को लेकर छिड़ी बहस नई नहीं है। इससे पहले दिल्ली में भी ऐसा ही विवाद हुआ था। AAP सरकार ने शिक्षा मॉडल को अपनी बड़ी उपलब्धि बताया लेकिन कॉन्ग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी उन सुधारों का श्रेय ले रही है जिसकी नींव पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सरकार के दौरान रखी गई थी।

शीला दीक्षित के 15 साल के कार्यकाल में स्कूलों के बुनियादी ढाँचे, नई कक्षाओं, सुविधाओं और शिक्षा बजट पर काफी काम हुआ था। वहीं सत्ता में आने के बाद AAP ने शिक्षक प्रशिक्षण, पाठ्यक्रम सुधार और स्कूलों के आधुनिकीकरण जैसे कई नए कदम उठाए।

कॉन्ग्रेस का कहना था कि AAP जिन सुधारों का प्रचार कर रही है, वे पहले से किए गए निवेश का नतीजा थे। हालाँकि AAP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसने अपनी नीतियों और सुधारों से शिक्षा व्यवस्था को बदला है। इसके बाद यह बहस शुरू हो गई कि शिक्षा में सफलता का असली श्रेय उस सरकार को मिलना चाहिए जिसने सुधार शुरू किए या उस सरकार को जिसने उन्हें आगे बढ़ाया और बड़े स्तर पर लागू किया।

अब पंजाब में भी कॉन्ग्रेस इसी तरह के आरोप लगा रही है तो इससे यह बहस फिर से तेज हो गई है कि शिक्षा जैसे लंबे समय में दिखने वाले सुधारों का असली श्रेय किसे मिलना चाहिए।

निष्कर्ष

पंजाब की हालिया शिक्षा रैंकिंग ने निश्चित तौर पर AAP सरकार के इस दावे को मजबूत किया है कि उसके शिक्षा सुधारों का असर दिख रहा है। लेकिन इस उपलब्धि को लेकर पैदा हुआ राजनीतिक विवाद एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि ऐसे सुधारों का श्रेय किसे मिलना चाहिए, जिनका असर दिखने में कई साल लगते हैं?

टाइमलाइन यह संकेत देती है कि पंजाब में शिक्षा सुधार की शुरुआत 2022 में AAP सरकार आने के तुरंत बाद नहीं हुई थी। सरकार बदलने से पहले हुए सर्वे और मूल्यांकन के आँकड़े बताते हैं कि राज्य में सुधार के संकेत पहले ही दिखाई देने लगे थे। हालाँकि, मौजूदा सरकार ने भी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अपनी तरफ से कई नई पहलें शुरू की हैं।

यह विवाद दिल्ली की उस पुरानी बहस जैसा भी नजर आता है जब कॉन्ग्रेस नेताओं ने AAP पर आरोप लगाया था कि वह उन सुधारों का श्रेय ले रही है जिसकी नींव शीला दीक्षित सरकार के दौरान रखी गई थी। चाहे कोई इस तुलना से सहमत हो या नहीं लेकिन दोनों मामले यह दिखाते हैं कि शिक्षा सुधार आमतौर पर कई सरकारों के प्रयासों का नतीजा होते हैं।

यह भी समझना जरूरी है कि पंजाब का हालिया प्रदर्शन मुख्य रूप से स्कूल शिक्षा और छात्रों के सीखने के परिणामों से जुड़ा है। इसलिए यह दावा करना गलत होगा कि पंजाब पूरे शिक्षा क्षेत्र में भारत का नंबर-1 राज्य बन गया है। ऐसा दावा करने के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों, विश्वविद्यालयों, रिसर्च, रोजगार क्षमता और शिक्षा से जुड़े अन्य मानकों की भी तुलना जरूरी होती है।

(यह खबर मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है जिसे इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं)

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Dhruv Mishra
Dhruv Mishra
Dhruv Mishra is a researcher and writer specializing in Indian politics and policy analysis. With a background in data-driven storytelling, he explores elections, governance, and India’s role in global affairs.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘BJP सहयोगियों को खा जाती है’: अन्नामलाई के जाने के बाद फिर उठा पुराना आरोप, लेकिन बिहार से महाराष्ट्र तक क्या कहते हैं तथ्य?

अन्नामलाई के जाने के बाद BJP पर सहयोगियों को कमजोर करने का आरोप फिर चर्चा में है। बिहार, महाराष्ट्र, पंजाब और UP के उदाहरणों से जानिए सच्चाई।

भारत-म्यांमार-थाईलैंड हाईवे चीन-पाकिस्तान के CPEC को देगा मात, लुक-ईस्ट नीति को मिलेगी मजबूती: जानिए क्यों 24 साल में भी पूरा नहीं हो पाया ये...

इंडिया-म्यांमार-थाईलैंड (आईएमटी) प्रोजेक्ट सामरिक मोर्चे पर चीन के बहुप्रचारित सीपीईसी को सीधी और करारी टक्कर देने का दम रखता है।
- विज्ञापन -