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आर्यन खान को पकड़ने वाले NCB अफसर समीर वानखेड़े का कब्रिस्तान तक पीछा: किसके इशारे पर जासूसी, फुटेज से उठे सवाल

ड्रग्स केस में बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन की गिरफ्तारी के बाद से ही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े चर्चा में हैं। उनकी गिनती ऐसे कड़क अफसरों में होती है जिनसे ड्रग्स माफिया खौफ खाते हैं। दूसरी ओर महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक उन पर आर्यन खान मामले में बीजेपी के इशारे पर काम करने का आरोप लगा चुके हैं। इस बीच, वानखेड़े की जासूसी कराए जाने का मामला सामने आया है।

इस संबंध में महाराष्ट्र पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। इसमें कहा गया है कि पिछले कुछ दिनों से वानखेड़े का पीछा किया जा रहा है। उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। शिकायत के साथ सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस को सौंपी गई है। इसमें कथित तौर पर सादे कपड़ों में संदिग्ध वानखेड़े का पीछा करते नजर आ रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार वानखेड़े ने आरोप लगाया है कि कब्रिस्तान तक उनका पीछा किया गया। उल्लेखनीय है कि वानखेड़े की माँ की मृत्यु 2015 में हो गई थी और उसके बाद से वह प्रार्थना करने अमूमन वहां जाते रहते हैं। कथित तौर पर उनका पीछा करने वाले मुंबई पुलिस से ही हैं। यह भी गौर करने वाली बात है कि सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद जब बिहार पुलिस मुंबई पहुँची थी तो उसके साथ असहयोग करने और जाँच में बाधा डालने का आरोप भी स्थानीय पुलिस पर लगा था।

गौरतलब है कि एनसीबी की टीम ने वानखेड़े के नेतृत्व में 2 अक्टूबर को मुंबई के समंदर में ‘कॉर्डेलिया क्रूज़’ पर छापा मारा था। यह क्रूज गोवा जा रही थी। एनसीबी के पास क्रूज पर ड्रग्स पार्टी को लेकर पुख्ता सूचना थी। उसने अपने कुछ कर्मी पहले से ही यात्री बनाकर क्रूज पर भेज रखे थे। क्रूज पर छापेमारी में कई तरह के नशीले पदार्थ मिले थे।

आर्यन खान सहित 11 लोगों को क्रूज से पकड़ा गया था। इस मामले में एनसीबी अब तक 20 गिरफ्तारी कर चुकी है। शाहरुख खान के ड्राइवर को भी पूछताछ के लिए बुला चुकी है। साथ ही शाहरुख के करीबी बताए जा रहे फिल्म प्रोड्यूसर इम्तियाज खत्री के घर पर भी दबिश दे चुकी है।

बता दें कि समीर वानखेड़े 2008 बैच के IRS-C&CE अधिकारी हैं। एनसीबी से पहले वह मुंबई में ही रेवेन्यू इंटेलीजेंस के जॉइंट डायरेक्टर पद पर तैनात थे। वह पहले भी कई ड्रग्स रैकेट का भंडाफोड़ कर चुके हैं। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद सामने आए ड्रग्स एंगल की जाँच से भी जुड़े हैं। उनकी पत्नी क्रांति रेडकर भी अभिनेत्री हैं। वह कई हिंदी, मराठी और अंग्रेजी फिल्मों में काम कर चुकी हैं।

वानखेड़े के लिए सेलेब्रिटीज के विरुद्ध कार्रवाई, कोई नई बात नहीं है। आपको जानकर हैरानी होगी कि वानखेड़े ने बतौर कस्टम ऑफिसर मुंबई अतंराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर शाहरुख खान के विरुद्ध एक्शन ले लिया था, जिसके कारण एक्टर को 1.5 लाख रुपए फाइन देने पड़े थे। 

उस समय शाहरुख खान हॉलैंड और लंदन गए हुए थे और घर वापसी में ज्यादा सामान करीब 20 बैग के साथ पकड़े गए थे, तब कस्टम अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की थी और उनके परिजनों को जाने दिया गया था। पूछताछ करने वाली टीम कस्टम अधिकारी समीर वानखेड़े की थी।

प्रक्रिया पूरी होने के बाद शाहरुख को 1.5 लाख रुपए का जुर्माना देना पड़ा था। इस पूछताछ पर उस समय के कस्टम कमिश्नर ने भी बयान दिया था कि ये केवल रूटीन प्रक्रिया थी। कोई भी ज्यादा सामान लाता है तो उसे उस पर कर देना होता है। शाहरुख पर 1.5 लाख लगा क्योंकि उन्होंने बहुत सामान लिया हुआ था। कस्टम अधिकारी की सर्विस के बाद वह सर्विस टैक्स डिपार्टमेंट में गए और उन्होंने अनुराग कश्यप, विवेक ऑबरॉय, मिका सिंह, राम गोपाल वर्मा से भी आमना-सामना किया।

जिस आतंकी ने बिहार के गोल-गप्पे वाले वीरेंद्र पासवान को मारी थी गोली, आज वो मारा गया: शोपियाँ मुठभेड़ में 3 ढेर

जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ जिले में मंगलवार (अक्टूबर 12, 2021) को एक मुठभेड़ के दौरान लश्कर-ए-तैयबा (LeT) – द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) के कम से कम तीन आतंकवादी मारे गए हैं। पुलिस ने बताया कि उनके पास से हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया गया है।

पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) कश्मीर विजय कुमार ने बताया कि एक आतंकवादी की पहचान गांदरबल के मुख्तार शाह के रूप में हुई है। वह बिहार के एक रेहड़ी वाले वीरेंद्र पासवान की हत्या करने के बाद शोपियाँ चला गया था। 24 घंटों के भीतर यह तीसरी मुठभेड़ है। केंद्रशासित प्रदेश में हो रही आतंकी घटनाओं के बाद सुरक्षाबलों ने कार्रवाई तेज कर दी है।

बता दें कि सुरक्षाबलों को शोपियाँ के तुलरान इमाम साहिब गाँव में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद सेना के संयुक्त ऑपरेशन में सोमवार (अक्टूबर 12, 2021) शाम को यह मुठभेड़ शुरू हुई थी। इलाके में तलाशी के दौरान उग्रवादियों ने सुरक्षाबलों पर गोलियाँ चलाईं, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। पुलिस ने फँसे हुए आतंकियों से सरेंडर करने की भी अपील की थी।

लाउडस्पीकर के जरिए आतंकियों को समझाने की कोशिश करते जवानों का वीडियो भी सामने आया था। ऑपरेशन के दौरान तीन आतंकियों के मारे जाने के साथ ही यह एनकाउंटर आज सुबह समाप्त हो गया। सुरक्षा बलों ने दावा किया कि यह एक बड़ी उपलब्धि थी क्योंकि तीनों आतंकवादी विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले सुरक्षाबलों ने सोमवार (11 अक्टूबर, 2021) सुबह अनंतनाग और बांदीपोरा में हुए मुठभेड़ में दो आतंकियों को मार गिराया था। वहीं दूसरा एनकाउंटर बांदीपोरा के हाजिन इलाके के गुंड जहाँगीर में हुआ था।

गौरतलब है कि बिहार के भागलपुर के रहने वाले स्ट्रीट वेंडर वीरेंद्र पासवान की मंगलवार (अक्टूबर 5, 2021) को श्रीनगर के लाल बाजार में इस्लामी आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। उनका अंतिम संस्कार बुधवार (अक्टूबर 6, 2021) को श्रीनगर में किया गया।

₹5 हजार देकर बंगाल से भारत में एंट्री, कबाड़ी वाला बन घर की रेकी… फिर डकैती: ये बांग्लादेशी लूटते ही नहीं, रेप और मर्डर भी करते हैं

लखनऊ के चिनहट में रविवार (10 अक्टूबर 2021) देर रात मुठभेड़ हुई। पुलिस ने तीन बदमाशों को पकड़ा। इनकी पहचान 26 साल के शेख रुबेल, 27 साल के आलम और 23 साल के रबीउल के तौर पर हुई। ये बांग्लादेशी नागरिक हैं। मुठभेड़ के दौरान इनके कुछ साथी भाग निकलने में भी कामयाब रहे। उनकी तलाश की जा रही है।

लखनऊ के पुलिस आयुक्त ध्रुव कांत ठाकुर ने बताया कि यह गिरोह डकैती को अंजाम देने निकला था, इसी दौरान मल्हौर रेलवे स्टेशन के करीब पुलिस पेट्रोल पार्टी से मुठभेड़ हो गई। ईस्ट जोन के डीसीपी संजीव सुमन ने बताया कि रविवार रात के करीब 1.45 बजे पुलिस ने कुछ संदिग्धों को देखा। रुकने के लिए कहे जाने पर वे भागने लगे और फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दो बदमाश गोली लगने से जख्मी हो गए। एक को भागते वक्त पुलिस ने दबोच लिया, जबकि अन्य फरार हो गए।

इनसे पूछताछ में बांग्लादेशी युवाओं के ऐसे गिरोह का खुलासा हुआ है जो देश के अलग-अलग हिस्सों में डकैती की घटनाओं का अंजाम देते हैं। रिपोर्ट के अनुसार ये नदी पार कर बांग्लादेश से आते हैं। 5-10 हजार रुपए देकर पश्चिम बंंगाल के 24 परगना के रास्ते भारत में घुसते हैं। इसके बाद ट्रेन के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों में पहुँचते हैं।

भारत में घुसने के बाद ये रेलवे पटरी के आसपास के इलाकों में कबाड़ी, चाय वाला या फेरी वाला बनकर घरों की रेकी करते हैं। अमूमन ऐसे घरों को टारगेट करते हैं जो रेलवे लाइन के किनारे या खाली प्लॉट में बने हों। डकैती को अंजाम देने के बाद पैसे और जेवरात अपने किसी साथी के साथ बांग्लादेश भेज देते हैं ताकि पकड़े जाने पर माल की बरामदगी न हो।

गिरोह के सदस्य अपराध के दौरान आपस में बंगाली में ही बातचीत करते हैं। मोबाइल की जगह वाकीटॉकी का इस्तेमाल करते हैं। 15 फीट की दीवार ये आराम से फाँद लेते हैं। अधिकारियों के अनुसार ग्रिल काटने के ब्लेड, स्कू ड्राइवर के अलावा ये अपने साथ देशी पिस्टल भी रखते हैं। इस 11 सदस्यीय गिरोह के सरगना की पहचान हमजा के तौर पर हुई है।

यह भी पता चला है कि डकैती के दौरान ये घर में मौजूद लोगों को बंधक बना लेते हैं। विरोध करने पर डंडों और लोहे की रॉड से उनकी बुरी तरह पिटाई करते हैं। कभी-कभी घर की महिलाओं के साथ रेप भी करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के आनंद विहार के एक घर में इस गिरोह ने डकैती के दौरान विरोध किए जाने पर एक बुजुर्ग महिला की सिर पर लोहे के रोड से हमला कर हत्या कर दी थी। इनसे पूछताछ में यूपी, दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में हुई डकैती की घटनाओं का पता चला है।

माता चिंतपूर्णी को पंजाबी अखबार में लिखा ‘बेगानी माँ’, हिंदू संगठनों का विरोध-प्रदर्शन, पुलिस ने नहीं किया अभी तक सिख संपादक को गिरफ्तार

लुधियाना से छपने वाली पंजाबी अखबार ‘रोजाना पहरेदार’ के संपादक जसपाल सिंह हेरां पर हिंदू संगठनों की शिकायत पर मामला तो दर्ज कर लिया गया, लेकिन उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है। इस बात से खफा हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया और जगराओं को बंद रखा।

बता दें कि पुलिस प्रशासन ने 295/A व अन्य धाराओं के तहत FIR दर्ज की है, लेकिन अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। अखबार के संपादक पर हिंदू संगठनों ने शनिवार (अक्टूबर 9, 2021) को FIR दर्ज करवाई थी और सोमवार (अक्टूबर 11, 2021) तक गिरफ्तार करने का अल्टीमेटम दिया था। सोमवार को जब जसपाल सिंह की गिरफ्तारी नहीं हुई तो हिंदू संगठनों ने शहर में रोष मार्च निकाला और रेलवे पुल पर धरना दिया।

दूसरी ओर संपादक के समर्थन में करीब 20 की संख्या में सिख संगठनों के लोग उतर आए। आक्रोशित भीड़ ने एसएसपी कार्यालय का भी घेराव भी किया। उन्होंने संपादक के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करवाने की माँग की। सिख संगठनों ने एसएसपी गुरदयाल सिंह से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपा और मुकदमा रद्द करने की माँग की। माहौल तनावपूर्ण होता देख पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर मामले को नियंत्रित किया।

क्या है मामला? 

कुछ दिन पहले अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने माँ चिंतपूर्णी के दरबार में माथा टेका था। इसे लेकर ‘रोजाना पहरेदार’ के संपादक ने लेख में विवादित टिप्पणी की थी। इस खबर का शीर्षक था, “अपने पेओ नूं छड सुखबीर पहुँचेआ बेगानी माँ के दरबार।” माता चिंतपूर्णी के लिए ‘बेगानी माँ’ शब्द का इस्तेमाल करने पर हिंदू संगठनों ने रोष जताया। 

पंजाबी अखबार पहरेदार में प्रकिशित खबर (साभार: thestellarnews.com)

मामले को लेकर शनिवार को हिंदू संगठनों समेत लोगों ने अखबार के एडिटर के खिलाफ मोर्चा खोलकर रानी झाँसी चौक में धरना दिया आरोपित के खिलाफ नारेबाजी की। इतना ही नहीं, लोगों ने धरना कर हनुमान चालीसा और माता का पाठ करना शुरू कर दिया। इसके चलते शहर में जाम लग गया। धरने की सूचना मिलते ही मौके पर पहुँची पुलिस ने जैसे-तैसे कर ट्रैफिक को दूसरे रास्तों से निकालना शुरू कर दिया।

इस मौके पर पुलिस के आला अफसरों ने धरना खत्म करवाने की कोशिश की, लेकिन गुस्से से भरे लोगों ने स्पष्ट जवाब दिया कि जब तक आरोपित पर कार्रवाई नहीं होती, वह धरने से नहीं उठेंगे। पुलिस ने माहौल गर्माता देख और लोगों की भीड़ को बढ़ता देख आनन-फानन में आरोपित पर केस दर्ज किया। हालाँकि अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है।

‘लॉकडाउन में ईद पर छूट, अब शराब के ठेके खुल गए फिर भी छठ पर प्रतिबंध: पूर्वांचल के लोगों को भगाना चाहते हैं केजरीवाल’

सांसद मनोज तिवारी ने ऐलान किया है कि छठ पूजा प्रतिबंधित करने के केजरीवाल सरकार के ‘तुगलकी फरमान’ के खिलाफ भाजपा मंगलवार (12 अक्टूबर, 2021) को एक प्रचंड प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा “इस साल जब सब कुछ सामान्य गति से चल रहा है, यहाँ तक कि दिल्ली में शराब के ठेके तक खोल दिए गए हैं वो भी बिना किसी परहेज़ के, लेकिन छठ माँ की पूजा जो नवंबर में है उसको रोकने का निर्णय 1.5 महीना पहले ही ले लिया गया, ये बेहद शर्मनाक है।”

वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में लाखों की संख्या में पूर्वांचल के लोग रहते हैं और छठ महापर्व मनाते हैं, ऐसे में केजरीवाल सरकार छठ मनाने की अनुमति दे। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पूर्वांचल के लोगों की आस्था को ठेस पहुँचाने का काम किया है। उन्होंने याद दिलाया कि सीएम केजरीवाल ने कहा था कि यूपी-बिहार के लोग 500 रुपए का टिकट लेकर आते हैं और यहाँ 5 लाख रुपए का इलाज मुफ्त में करा के चले जाते हैं।

आदेश गुप्ता ने इसे पूर्वांचल के लोगों का बहुत बड़ा अपमान करार दिया। उन्होंने कहा, “भाजपा एलान करती है कि हम छठ पूजा मनाएँगे और छठ पूजा के लिए जो भी निगम की ओर से व्यवस्थाएँ होंगी, वो भी हम पूर्ण करेंगे। भाजपा के कार्यकर्ता ये सुनिश्चित करेंगे कि छठ महापर्व कोरोना के नियमों का पालन करते हुए बड़ी धूमधाम से मनाया जाए। केजरीवाल सरकार छठ पूजा के महापर्व पर प्रतिबंध लगाकर दिल्ली में रहने वाले सभी पूर्वांचल वासियों की आस्था व विश्वास के साथ खिलवाड़ कर रही है।”

आदेश गुप्ता ने कहा कि बकौल असलियत यह है कि दिल्ली सरकार छठ की व्यवस्था नहीं कर सकती इसलिए उसपर प्रतिबंध लगा कर अपना निकम्मापन दिखा रही है। वहीं सांसद परवेश साहिब सिंह वर्मा ने कहा, “केजरीवाल ने पूरी दिल्ली खोल रखी है लेकिन छठ पूजा आ रही है तो अचानक से तालिबानी फरमान सुना दिया कि छठ पूजा पर पाबंदी रहेगी। यह केजरीवाल बकरीद, ईद पर लॉकडाउन में खुली छूट देता था। आखिर केजरीवाल जी इतनी नफरत क्यों?”

‘CRPF की गोली से कोई मरे तो ठीक, आतंकी की गोली से मरे तो गलत कैसे?’: महबूबा मुफ्ती, सेना ने आतंकियों को घेरा, देखें वीडियो

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का विवादित बयान सामने आया है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में महबूबा कह रही हैं, ”ये कैसा सिस्टम है इनका। कोई हमारे मुल्क की गोली से मरे तो ठीक, लेकिन आतंकी की गोली से मरे तो गलत कैसे?”

एक सभा को संबोधित करते हुए महबूबा मुफ्ती कहती हैं, ”हम आतंकवादियों की गोलियों से मरने वालों के परिजनों से मिलते हैं। हाल ही में सीआरपीएफ ने एसटी समुदाय के एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी थी। हम उनके परिवार से मिलने गए, लेकिन उसके घर पर ताला लगा हुआ था।”

मालूम हो कि जम्मू-कश्मीर के पुंछ में सोमवार (11 अक्टूबर 2021) को आतंकियों ने सेना पर घात लगाकर हमला कर दिया, जिसमें 5 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए। बताया जा रहा है कि ये सैनिक उस समय बलिदान हुए, जब एक टुकड़ी आतंकवादियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन कर रही थी।

जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने बताया, ”विश्वसनीय इनपुट के बाद शोपियां में दो ऑपरेशन लॉन्च किए गए। एनकाउंटर तुलरान में चल रहा है। इसमें तीन-चार आतंकी छिपे हुए हैं, जिन्हें सेना के जवानों ने घेर लिया है। यह पिछले 24 घंटों में तीसरा एनकाउंटर है।

भारतीय सेना के व्हाइट नाइट कोर ने बताया कि सराज सिंह, वैसाख एच, नायब सूबेदार जसविंदर सिंह, नायक मनदीप सिंह बहादुर, गज्जन सिंह शाहदरा थानामंडी, राजौरी (जम्मू-कश्मीर) में चल रहे ऑपरेशन के दौरान बलिदान हो गए। उनकी शहादत देश कभी नहीं भूलेगा। सेना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, एनकाउंटर से पहले आतंकी एलओसी पार कर चमरेर के जंगल तक पहुँच गए थे। इसके बाद पूरे इलाके को चारों ओर से घेर लिया गया।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में पिछले हफ्ते आतंकियों ने कई आम नागरिकों को निशाना बनाया था। यहाँ कुछ ही घंटों में कुल सात नागरिकों को आतंकियों ने करीब से गोली मारकर हत्या कर दी थी।

‘तुम सांघी लोग अब कैब भी चलाने लगा, तुम IT सेल का है न?’ – लिबरल अर्थशास्त्री, ड्राइवर और मोदी बुराई की कहानी

कैब के चलने के बाद अर्थशास्त्री ने करीब ढाई मिनट इंतज़ार किया। उसका मन कह रहा था कि ड्राइवर अब बस बोल ही देगा। बोलेगा तो बात निकलेगी। बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी। दूर तलक जाती हुई नहीं दिखी तो मैं बात को पकड़ कर दूर तलक ले जाऊँगा। इतनी दूर तलक कि पंद्रह ट्वीट वाला एक ट्विटर थ्रेड ठेल सकूँ, यह साबित करने की कोशिश में कि कैसे मोदी ने भारत को बर्बाद कर दिया है, वह एक कैब ड्राइवर भी समझता है। पर यह क्या? ड्राइवर ने तीन मिनट तक कुछ नहीं कहा तो अर्थशास्त्री ये सोचते हुए अधीर हो गया कि; कम्बख्त बोल क्यों नहीं रहा? ऐसा सोचते हुए उसका मन धक से रह गया; कहीं ये गूँगा तो नहीं है? यह सोचते हुए उसने ऐप खोलकर ड्राइवर की प्रोफाइल चेक की और राहत की साँस लेते हुए मन ही मन बोला; थैंक मार्क्स, ये गूँगा नहीं है।

जब राइड का कन्फर्मेशन आया था तो सरनेम पढ़कर अर्थशास्त्री खुश हो गया था। खुश होते हुए मन ही मन खुद से बोला; पचास मिनट का रास्ता है। मोदी की बुराई के चक्कर में ये लंबे रास्ते से गया तो बुराई सत्रह मिनट और लंबी हो जाएगी।

अचानक मन ही मन अपने इष्टदेव का स्मरण करते हुए उसने कहा; हे मार्क्स, इसे लंबे रास्ते से जाने की सद्बुद्धि दें। फिर खुद को एश्योर करते हुए मन ही मन बोला; माने आज ड्राइवर से बात करने… सॉरी बात सुनने का मज़ा ही आ जाएगा। कि; कैसे डिमॉनेटाइजेशन से मोदी ने भारत को बर्बाद कर दिया, कि कैसे 2024 में मोदी की हार पक्की है, कि कैसे मोदी ने लाखों किसान मार दिए। कि कैसे राहुल गाँधी ही किसानों का भला कर सकते हैं। कि कैसे प्रियंका के झाड़ू लगाने की वजह से कॉन्ग्रेस यूपी में सरकार बनाने जा रही है।

इधर ड्राइवर जब पाँच मिनट तक कुछ नहीं बोला तो अर्थशास्त्री को चिंता सताने लगी; कहीं ये भक्त तो नहीं? फिर मन ही मन समझाते हुए खुद से बोला; ऐसा नहीं हो सकता। ड्राइवर भक्त नहीं हो सकता है। मैं अभागा हूँ लेकिन इतना बड़ा अभागा भी नहीं हूँ कि कैब ड्राइवर भक्त निकल जाए। भक्त केवल ट्विटर पर पाए जाते हैं। वे केवल ट्वीट करना जानते हैं। ट्वीट जिनके लिए उन्हें आई टी सेल से फी के रूप में हर ट्वीट के दो रूपए मिलते हैं। संघी हैं।

अंत में अपनी सोच पर बहुत जोर से ठप्पा लगाते हुए उसने मन ही मन खुद को ढाढ़स बँधाया और बोला; असंभव! इस सरनेम का ड्राइवर भक्त हो नहीं सकता।

जब ड्राइवर ने पाँच मिनट तक बात नहीं की तो अर्थशास्त्री को चिंता सताने लगी। उसने खुद से कहा; पचास मिनट का रास्ता था और इस बेवकूफ ने पाँच मिनट वैसे ही गँवा दिए। जब दो मिनट और बीत गए तो अर्थशास्त्री बोला; कुछ बोलो।

रास्ते पर नजर रखे कैब चलाते हुए ड्राइवर बोला; जी, आप मेरे बोलने का इंतज़ार कर रहे थे? वैसे आपको देखते हुए मैं यही सोच रहा था कि कुछ बोलूँ।

यह सुनकर अर्थशास्त्री की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने जल्दी-जल्दी कहा; बोलो बोलो, मैं सुनने के लिए बेताब हूँ।

कैब ड्राइवर ने कहा; सर, आप तो वही हैं न जो कभी सरकार के सलाहकार थे?

यह सुनकर अर्थशास्त्री की बाँछे खिल गई। यह सोचते हुए उसकी ख़ुशी दोगुनी हो गई कि आजकल कैब ड्राइवर भी अर्थशास्त्रियों को पहचानते हैं। उसने ड्राइवर से पूछा; तुम मुझे पहचानते हो! यह सुनकर मैं सरप्राइज्ड हूँ कि एक कैब ड्राइवर भी मुझे पहचानता है। हाँ, मैं ही हूँ जो सरकार का सलाहकार था।

उनकी बात सुनकर ड्राइवर बोला; और आप वही हैं न जो कोलकाता की लगभग गिर चुकी बिल्डिंग और गन्दी गलियों की फोटो में रोमांस और नास्टैल्जिया का खज़ाना खोजते हैं?

यह सुनकर तो अर्थशास्त्री अपनी सीट पर उछल पड़ा। उरी बाबा, तुमी तो आमार संपर्के ओनेक किछु जानो !

ड्राइवर बोला; आपने बांग्ला में मुझे गाली दी क्या?

अर्थशास्त्री बोला; आरे नेही, मैं कह रहा था कि तुम तो मेरा बारे में बहुत कुछ जानते हो। इये केतना आशचोरजो का बात है। लगता है तुम मेरे कॉलम पढ़े हो कभी। और क्या जानते हो मेरे बारे में?

ड्राइवर बोला; यही कि आप जब सरकार के सलाहकार थे तब देश में इन्फ्लेशन बहुत बढ़ गया था। पॉलिसी पैरालिसिस था। देश में एफ डी आई आना कम हो गया था। …….. अच्छा सर, वो फाइनेंस मिनिस्टर को रेट्रोस्पेक्टिव टैक्सेशन की सलाह आपने ही दी थी?

अर्थशास्त्री को काटो तो खून नहीं। अचानक चिल्लाया; तुम सांघी लोग अब कैब भी चलाने लगा? तुम आई टी सेल का है न? दिन में कैब चलाता है और रात में ट्वीट करता है। समझ गया मैं। तुम हमको ट्विटर पर भी ट्रोल करता होगा। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से बाहर निकल कर देखो। असली ज्ञान बाहर है। तुम पहला कैब ड्राइवर है जो मोदी का आदमी निकला। तुमको कुछ पता नहीं है।

अचानक ड्राइवर ने गाड़ी रोक दी। अर्थशास्त्री और जोर से चिल्लाया; कैब क्यों रोका?

ड्राइवर शांत होकर बोला; सर आपका डेस्टिनेशन आ गया है।

कैब ड्राइवर द्वारा मोदी की बुराई की कहानी ट्वीट करने का अर्थशास्त्री का प्लान चौपट हो चुका था। वो कैब से उतर कर अपने अपार्टमेंट की ओर चला जा रहा था।

पंद्रह दिन बाद कैब एग्रीगेटर कंपनी को एक मेल मिला। मेल एक भारतीय अर्थशास्त्री की ओर से लिखा गया था। कंपनी को सुझाव देते हुए उसने लिखा था; कंपनी से रिक्वेस्ट है कि ड्राइवर रखने से पहले उसकी प्रॉपर स्क्रीनिंग करके देख ले कि ड्राइवर कहीं संघी तो नहीं। ऐसे ड्राइवर मोदी की बुराई करने की जगह सवाल पूछने लगते हैं।

राजस्थान: दाऊद ने आदिवासी लड़की से कई बार किया रेप, अजन्मे बच्चे (भ्रूण) को भी मार डाला, अब फरार

राजस्थान के झालावाड़ से एक आदिवासी लड़की के साथ कई बार रेप की घटना सामने आई है। आरोपित दाऊद ने अजन्मे बच्चे (भ्रूण) को भी मार डाला। पड़ोसी दाऊद ने पहले तो आदिवासी किशोरी के साथ कई बार रेप किया, फिर उसे जबरन गर्भनिरोधक गोलियाँ खिलाई। पीड़िता के परिवार का कहना है कि लड़की की उम्र 18 से अधिक है। हालाँकि, पुलिस मेडिकल जाँच के बाद देखेगी कि लड़की नाबालिग है या नहीं।

इसके बाद पुलिस निर्णय लेगी कि इस मामले में ‘यौन उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम (POCSO)’ के तहत धाराएँ लगाई है या नहीं। मंडावर पुलिस थाने में इस बाबत FIR दर्ज कराई गई है। ये मामला शनिवार (10 अक्टूबर, 2021) को सामने आया। दरअसल, लड़की ने जब पेट दर्द की शिकायत की तो परिजन उसे डॉक्टर के पास ले गए। वहाँ पता चला कि वो 6 महीने की गर्भवती है।

पुलिस उपाधीक्षक और सर्किल अधिकारी राजीव परिहार ने बताया कि अपराध को छिपाने के लिए आरोपित ने उसे गर्भ निरोधक गोलियाँ खिलाई थीं, जिससे भ्रूण (अजन्मे बच्चे) की मौत हो चुकी थी। पीड़ित परिजनों ने SC/ST एक्ट के तहत भी मामला दर्ज कराया है। हालाँकि, आरोपित दाऊद फरार है और उसे अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है। पीड़िता भील समुदाय से आती है। फ़िलहाल अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।

जानकारी मिली है कि फ़िलहाल पीड़िता की स्थिति खतरे से बाहर है। आरोपित युवक के खिलाफ पुलिस ने IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-376 (बलात्कार), 313 (महिला की सहमति के बिना गर्भपात) और 315 (जीवित बच्चे को पैदा से रोकने इरादतन हत्या) के तहत मामला दर्ज किया है। फ़िलहाल वो स्वस्थ है। लड़की की सही उम्र का पता चलते ही इस मामले में और धाराएँ जोड़ी जाएँगी।

बता दें कि  2020 में देश में सबसे ज्यादा रेप केस राजस्थान में दर्ज किए गए हैं। दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश जरूर है, लेकिन यहाँ रेप के मामले राजस्थान के आँकड़ों से आधे से भी कम हैं। जबकि यूपी जनसंख्या के मामले में देश का सबसे बड़ा राज्य है। राजस्थान ने तीन गुना अधिक लोग यहाँ रहते हैं। राजस्थान में एक साल में 5,310 रेप केस दर्ज किए गए। साल 2020 में दलितों से अपराध का आँकड़ा बढ़ भी कर 7017 हो गया। 

कर्नाटक में MLA की माँ सहित चार परिवारों ने ईसाई धर्म छोड़ की हिन्दू धर्म में घरवापसी, मंदिर में पूजा-अर्चना कर सुधारी गलती

कर्नाटक विधानसभा में हिंदुओं के ईसाई में धर्मांतरण का मुद्दा उठाने वाले चित्रदुर्ग जिले से भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री गुलीहट्टी शेखर की मेहनत आखिरकार रंग लाई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार (11 अक्टूबर 2021) को भाजपा विधायक की माँ सहित चार परिवारों ने ईसाई धर्म से हिंदू धर्म में वापसी की है।

शेखर ने मीडिया से बातचीत में बताया, ”मेरी माँ सहित चार परिवार के सदस्यों ने ईसाई धर्म का पालन करने के बाद घर वापसी की है। इन्होंने आखिरकार अपनी गलती सुधार ली है।” उन्होंने बताया हिंदू धर्म में वापसी करने वालों ने आज मंदिर में पहले पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने अपने फैसले पर खुशी व्यक्त की। पूर्व मंत्री का कहना है कि इन लोगों को बहला-फुसलाकर इनकी आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया, लेकिन अब इन्होंने फिर से हिंदू धर्म अपना लिया है।

राज्य विधानसभा के मानसून सत्र में यह मुद्दा उठाते हुए शेखर ने दावा किया था कि उनकी माँ सहित 20,000 से अधिक लोगों का ईसाई धर्म में धर्मांतरण कराया गया था। उन्होंने ईसाई मिशनरियों पर कार्रवाई की माँग की थी। साथ ही कहा था कि जो लोग इनका विरोध करते हैं उन्हें मिशनरी दुष्कर्म और प्रताड़ना के झूठे मामलों में फँसा देती है। राज्य के गृह मंत्री ए ज्ञानेंद्र ने उन्हें इस दिशा में कार्रवाई का भरोसा दिलाते हुए कहा कि प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन अपराध है।

गौरतलब है कि गुलीहट्टी शेखर ने बताया था कि उनकी माँ का धर्मांतरण करा उन्हें माथे पर कुमकुम का तिलक नहीं लगाने को कहा गया था। हालात ये हो गए थे उनकी माँ घर के पूजा स्थल में स्थापित देवी-देवताओं की प्रतिमा तक को नहीं देखना चाहती थी। यहाँ तक कि उनकी फोन की रिंगटोन भी ईसाई प्रार्थनाओं में बदल गई थी।

लखीमपुर खीरी हिंसा को लेकर कॉन्ग्रेस की ‘मौन व्रत’ सभा में खूब हुई गुफ्तगू, नहीं पहुँचे सीएम गहलोत व पायलट

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में हुई हिंसा के विरोध में अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी द्वारा राजस्थान की राजधानी जयपुर में मौन व्रत कार्यक्रम रखा गया था। इसका आयोजन सिविल लाइंस फाटक के पास किया था, जो राजभवन से महज कुछ ही दूरी पर स्थित है। हालाँकि, इस सभा में प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ही शामिल नहीं हुए।

मंच पर सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक कॉन्ग्रेस के मंत्रियों, विधायकों, नेताओं और कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा रहा, लेकिन मौन व्रत के नाम पर आयोजित इस सभा में मंच पर बैठे तमाम कॉन्ग्रेसी आपस में गुफ्तगू करते नजर आए।

लगभग 3 घंटे तक चले इस मौन व्रत में कॉन्ग्रेस से राज्यसभा सांसद नीरज डांगी, राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा, कृषि मंत्री लालचंद कटारिया, परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, चिकित्सा राज्यमंत्री सुभाष गर्ग, गृह रक्षा एवं नागरिक सुरक्षा राज्यमंत्री मंत्री भजनलाल जाटव शामिल हुए। शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा राजस्थान कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 3 घंटे बाद मंच से बयानबाजी शुरू हो गई और मौके पर मौन व्रत जैसा कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। वहाँ पर जमा कई नेता बार-बार मीडियाकर्मियों के पास आ रहे थे और बाकी आपसी बातचीत में व्यस्त थे।

इसी के साथ आदर्श नगर विधानसभा जयपुर से विधायक रफीक खान, किशनपोल विधानसभा से विधायक अमीन कागजी, बानसूर विधानसभा अलवर से विधायक शकुंतला रावत, बागरू विधानसभा जयपुर से विधायक गंगा देवी, तारानगर चूरू विधानसभा से विधायक नरेंद्र बुडानिया, सादुलपुर विधानसभा चूरू से विधायक कृष्णा पूनिया और हवा महल विधानसभा जयपुर से विधायक महेश जोशी सहित कई अन्य पदाधिकारी इस मौन व्रत में शामिल हुए।

इस मौन व्रत के निष्कर्ष में सभी ने एकजुट हो कर लखीमपुर प्रकरण में बेटे के आरोपित होने के चलते केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र से इस्तीफा देने को कहा और इस्तीफा न देने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अजय मिश्र को बर्खास्त करने की मांग की।

यह आयोजन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आवास से मात्र 100 मीटर की दूरी पर आयोजित था फिर भी इसमें मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए। उनके शामिल होने और थोड़ी देर में धरना स्थल पर पहुँचने का संदेश वहाँ मौजूद पदाधिकारी बार-बार मीडिया को देते रहे, पर मुख्यमंत्री अपने आवास से बाहर ही नहीं निकले। इसके अलावा, पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट टोंक के दौरे पर होने के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए।