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₹15 लाख करोड़ के संदिग्ध रेवेन्यू से SEBI की कार्रवाई तक: जानिए कौन हैं राजेश मेहता और क्यों घिरी उनकी कंपनी Rajesh Exports

SEBI का आरोप है कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच राजेश मेहता और राजेश एक्सपोर्ट्स ने करीब 15.15 लाख करोड़ रुपए की रेवेन्यू को गलत तरीके से दिखाया।

सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने 3 जून 2026 को बेंगलुरु स्थित जेम्स एंड ज्वेलरी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (REL), उसके प्रमोटर, चेयरमैन और प्रबंध निदेशक राजेश मेहता के खिलाफ एकपक्षीय अंतरिम आदेश जारी किया।

इसके तहत कंपनी और मेहता को प्रतिभूति बाजार (Securities market) तक पहुँच से प्रतिबंधित कर दिया गया। इसका सीधा मतलब है कि अगले आदेश तक राजेश मेहता REL के शेयरों की खरीद-बिक्री या किसी भी प्रकार का लेनदेन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नहीं कर सकेंगे।

राजेश एक्सपोर्ट्स की 99% आय फर्जी: राजेश मेहता की गोल्ड एक्सपोर्ट कंपनी के खिलाफ SEBI ने क्यों शुरू की कार्रवाई?

SEBI ने राजेश मेहता और राजेश एक्सपोर्ट्स पर वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपए के राजस्व को गलत तरीके से दिखाने या बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाया है। सरल शब्दों में कहें तो कंपनी और उसकी सहयोगी इकाइयों द्वारा इस अवधि में दिखाई गई आय का लगभग 99.8 प्रतिशत हिस्सा वास्तविक नहीं था।

SEBI के 109 पन्नों के आदेश में कहा गया है कि कंपनी का समेकित वित्तीय प्रदर्शन लगभग पूरी तरह उसकी विदेशी सहायक कंपनियों, विशेष रूप से वैलकैम्बी एसए (Valcambi SA), पर निर्भर बताया गया है। इसके बावजूद कंपनी ने लगातार इन कंपनियों के वित्तीय विवरण सार्वजनिक नहीं किए।

इतना ही नहीं बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद कंपनी ने जाँच अधिकारियों को विक्रेताओं, ग्राहकों और अन्य आवश्यक वित्तीय जानकारियों का विवरण भी उपलब्ध नहीं कराया। SEBI के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड ने अपनी सहायक (Subsidiaries) और स्टेप-डाउन सहायक कंपनियों के वित्तीय विवरण जाँच एजेंसी को उपलब्ध नहीं कराए।

इनमें वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के लिए REL Singapore, वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक के लिए Bab Al Rayan Jewellery LLC, वर्ष 2024 के लिए GGR तथा उसके 2020 से 2024 तक के स्टैंडअलोन वित्तीय विवरण, वर्ष 2020 से 2024 तक के लिए Valcambi USA Inc और वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक के लिए ACC Energy के स्टैंडअलोन वित्तीय विवरण शामिल हैं। SEBI का कहना है कि इन दस्तावेजों के अभाव में कंपनी के वित्तीय दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना मुश्किल हो गया।

SEBI के आदेश में कहा गया कि जाँच के दौरान राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड अपनी सहायक कंपनियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में विफल रही। इनमें बिक्री रजिस्टर, खरीद रजिस्टर, ग्राहकों के अनुसार बकाया रकम (डेब्टर्स) का विवरण, विक्रेताओं के अनुसार देनदारियों (क्रेडिटर्स) का ब्योरा, तथा संबंधित पक्षों (Related Parties) और उनसे हुए लेनदेन की सूची शामिल थी। SEBI का कहना है कि इन दस्तावेजों के अभाव में कंपनी की सहायक कंपनियों के वित्तीय लेनदेन और दावों की जाँच करना मुश्किल हो गया।

SEBI ने कहा कि कई बार ईमेल और समन भेजने के बावजूद राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (REL) ने माँगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। इससे जाँच प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हुई और SEBI के लिए कंपनी के समेकित वित्तीय विवरणों (Consolidated Financial Statements) की सत्यता की जाँच करना मुश्किल हो गया।

SEBI के अनुसार, यह SEBI अधिनियम, 1992 की धारा 11(2)(ia) और 11C(3) का उल्लंघन है। इसके अलावा कंपनी ने अपनी सहायक और स्टेप-डाउन सहायक कंपनियों के ऑडिट किए गए वित्तीय विवरण अपनी वेबसाइट पर अपलोड नहीं किए।

SEBI का कहना है कि इससे सूचीबद्ध कंपनियों से जुड़े LODR नियमों के रेगुलेशन 46(2)(s) और कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 136(1) का भी उल्लंघन हुआ।

राजेश एक्सपोर्ट्स की जाँच में SEBI को क्या निष्कर्ष मिले?

SEBI द्वारा राजेश एक्सपोर्ट्स, वैलकैम्बी और उसकी अन्य सहायक कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड की जाँच में पाया गया कि कंपनी ने समेकित स्तर (Consolidated Level) पर लाखों करोड़ रुपए का राजस्व दिखाया था, लेकिन स्टैंडअलोन स्तर पर उसकी आय इसका केवल एक छोटा हिस्सा थी।

वित्त वर्ष 2020-21 में राजेश एक्सपोर्ट्स का समेकित राजस्व 2,58,306 करोड़ रुपए बताया गया था, जबकि उसका स्टैंडअलोन रेवेन्यु सिर्फ 2,060 करोड़ रुपए था। 2020-21 से 2025-26 के बीच समेकित और स्टैंडअलोन दोनों तरह की आय बढ़ी, लेकिन दोनों के बीच का बड़ा अंतर लगातार बना रहा।

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का समेकित राजस्व 7,78,716 करोड़ रुपए तक पहुँच गया, जबकि उसका स्टैंडअलोन राजस्व केवल 9,189 करोड़ रुपए था।

राजेश एक्सपोर्ट्स (REL) का कहना था कि उसके समेकित और स्टैंडअलोन रेवेन्यु के बीच इतना बड़ा अंतर इसलिए है क्योंकि उसकी अधिकांश आय उसकी विदेशी सहायक कंपनियों से आती है। इनमें वैलकैम्बी एसए (Valcambi SA) प्रमुख है, जिसे कंपनी अपनी मुख्य परिचालन इकाई बताती है।

हालाँकि उपलब्ध आँकड़ों से पता चलता है कि GGR समेत REL से जुड़ी कई अन्य कंपनियाँ या तो केवल होल्डिंग कंपनियाँ हैं, जिनका कोई वास्तविक कारोबार नहीं है, या फिर उन्होंने अभी तक अपना संचालन शुरू ही नहीं किया है।

REL और उसकी सहायक कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड की जाँच के आधार पर SEBI के प्रारंभिक निष्कर्ष बताते हैं कि कंपनी के समेकित राजस्व का लगभग 97 से 99 प्रतिशत हिस्सा विदेशी सहायक और स्टेप-डाउन सहायक कंपनियों से जुड़ा हुआ बताया गया।

हालाँकि बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद कंपनी इन राजस्व दावों के समर्थन में सत्यापित किए जा सकने वाले दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सकी। SEBI ने यह भी कहा कि REL Singapore और कंपनी की अन्य कई सहायक इकाइयों की वास्तविक कारोबारी गतिविधियाँ बहुत कम थीं या लगभग नहीं थीं।

SEBI के अनुसार, कंपनी की मुख्य परिचालन इकाई के रूप में पेश की गई Valcambi SA ने अपने ऑडिट किए गए वित्तीय विवरणों में केवल बहुत मामूली स्टैंडअलोन आय दिखाई थी, जो मुख्य रूप से प्रोसेसिंग शुल्क और वैल्यू एडिशन से जुड़ी थी।

नियामक ने यह भी कहा कि GGR द्वारा समेकित स्तर पर दिखाई गई भारी-भरकम लेकिन अनऑडिटेड आय का समर्थन न तो उसके ऑडिट किए गए स्टैंडअलोन वित्तीय विवरणों से होता है और न ही उपलब्ध लेनदेन रिकॉर्ड या सामान्य अकाउंटिंग सिद्धांतों से। SEBI ने जोर देकर कहा कि समस्या केवल कुछ जानकारी उपलब्ध न होने की नहीं है।

असली मुद्दा यह है कि कंपनी द्वारा समेकित स्तर पर दिखाई गई आय को लंबे समय तक बार-बार माँगे जाने और पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद सत्यापित नहीं किया जा सका। SEBI के आदेश में कहा गया है कि कंपनी ने लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड, ग्राहकों का विवरण, विक्रेताओं की पुष्टि, चालान, स्टॉक संबंधी रिकॉर्ड और अन्य मूल साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए।

वहीं जिस विदेशी इकाई को मुख्य कारोबारी इकाई बताया गया, उसने भी बहुत कम स्टैंडअलोन आय दिखाई। इसके अलावा अन्य सहायक कंपनियों की ओर से भी कोई ठोस कारोबारी गतिविधि साबित नहीं की जा सकी। ऐसे में कंपनी द्वारा घोषित समेकित राजस्व के आँकड़े व्यावसायिक रूप से अविश्वसनीय प्रतीत होते हैं।

SEBI की जाँच में यह भी सामने आया कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच कंपनी ने अपनी सहायक कंपनियों से जुड़ी लगभग 15,15,385 करोड़ रुपए की आय को कथित तौर पर गलत तरीके से प्रस्तुत किया। यह राशि कंपनी द्वारा दिखाई गई कुल आय का करीब 99.80 प्रतिशत हिस्सा है।

SEBI का कहना है कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि कंपनी की इन गतिविधियों ने निवेशकों और शेयर बाजार के सामने राजेश एक्सपोर्ट्स के कारोबार के आकार, उसकी वित्तीय स्थिति और आर्थिक मजबूती की एक बढ़ी-चढ़ी और भ्रामक तस्वीर पेश करने में मदद की।

राजस्व को बढ़ाकर दिखाने के आरोपों के अलावा SEBI ने कंपनी से जुड़े कुछ संदिग्ध लेनदेन की भी जाँच की। जाँच के दौरान पाया गया कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने Affluence Shares and Stocks Pvt Ltd के साथ 11,487 करोड़ रुपए की बिक्री और 11,488 करोड़ रुपए की खरीद दिखाई थी।

हालाँकि इस कंपनी ने राजेश एक्सपोर्ट्स के साथ किसी भी प्रकार के कारोबारी संबंध होने से इनकार किया और कहा कि उसका लेनदेन सीधे कंपनी के बजाय व्यक्तिगत रूप से राजेश मेहता के साथ था। SEBI की जाँच में यह भी सामने आया कि कंपनी का पैसा पहले राजेश मेहता से जुड़ी संस्थाओं तक पहुँचाया गया और फिर वहां से उनके निजी खातों में भेजा गया।

हालाँकि इन लेनदेन को कंपनी के खातों में दर्ज किया गया था, लेकिन कुछ धनराशि का इस्तेमाल बोर्ड की मंजूरी और संबंधित पक्षों (Related Party Transactions) से जुड़े आवश्यक खुलासों के बिना व्यक्तिगत डेरिवेटिव ट्रेडिंग में किया गया। बाद में इस धन का कुछ हिस्सा वापस भी लौटा दिया गया।

SEBI के आदेश में कई अन्य संदिग्ध पहलुओं का भी उल्लेख किया गया है। इनमें अफ्रीका में सोने की खदान से जुड़े एक निवेश का मामला भी शामिल है, जिसमें लगभग 10.35 करोड़ रुपए लगाए गए थे। जाँच के दौरान इस निवेश से जुड़े पर्याप्त दस्तावेज, मूल्यांकन रिपोर्ट और ग्राहकों, विक्रेताओं तथा सहायक कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिले।

गौरतलब है कि राजेश एक्सपोर्ट्स के खिलाफ जाँच मार्च 2024 में शुरू हुई थी। यह जाँच एक शेयरधारक की शिकायत के बाद शुरू की गई, जिसमें दो साल से अधिक समय से बकाया पड़े असामान्य रूप से बड़े व्यापारिक देयों (Trade Receivables) पर सवाल उठाए गए थे।

अब SEBI ने राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रबंध निदेशक राजेश मेहता को प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने से रोक दिया है। हालाँकि राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज किया है, लेकिन SEBI की कार्रवाई का असर कंपनी और उसके निवेशकों पर साफ दिखाई दिया।

4 जून को कंपनी का शेयर 5 प्रतिशत के लोअर सर्किट पर पहुंच गया और करीब 104 रुपए पर कारोबार करता दिखा। पिछले तीन वर्षों में कंपनी के शेयर की कीमत 80 प्रतिशत से अधिक गिर चुकी है। इसका असर भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) पर भी पड़ा है, जिसके पास राजेश एक्सपोर्ट्स में 10.8 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

इस हिस्सेदारी का मूल्य करीब 334 करोड़ रुपए बताया जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, 2023 से अब तक निवेशकों को कुल मिलाकर लगभग 12,700 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है, जिससे करीब 1.94 लाख शेयरधारक प्रभावित हुए हैं।

सफलता की मिसाल से लेकर SEBI की जाँच तक: कौन हैं राजेश मेहता?

20 जून 1964 को बेंगलुरु में जन्मे राजेश जसवंत राय मेहता खुद के दम पर सफल हुए कारोबारी माने जाते हैं। उनका परिवार मूल रूप से गुजरात के मोरबी का रहने वाला जैन परिवार है। राजेश मेहता का सपना डॉक्टर बनने का था और उन्होंने नेशनल कॉलेज में पढ़ाई भी की लेकिन वे अपनी उच्च शिक्षा पूरी नहीं कर सके।

इसके बाद उन्होंने पारिवारिक कारोबार में हाथ बँटाना शुरू किया। वर्ष 1985 में उन्होंने अपने भाई प्रशांत मेहता के साथ मिलकर चाँदी के व्यापार की एक कंपनी शुरू की। इसके लिए शुरुआती पूँजी उनके दूसरे भाई बिपिन मेहता से उधार ली गई थी। मेहता बंधु चेन्नई से आभूषण खरीदते थे और उन्हें गुजरात व दक्षिण भारत के विभिन्न बाजारों में मुनाफे के साथ बेचते थे।

धीरे-धीरे राजेश मेहता ने आभूषणों का एक बड़ा थोक कारोबार खड़ा कर लिया। उन्होंने भारतीय पारंपरिक डिजाइनों को अलग-अलग बाजारों तक पहुँचाने में भी भूमिका निभाई और ‘राजेश आर्ट ज्वेलर्स’ के नाम से कारोबार संचालित किया। वर्ष 1989 में राजेश मेहता ने बेंगलुरु के एक गैरेज में केवल 10 कर्मचारियों के साथ राजेश एक्सपोर्ट्स की स्थापना की।

रिपोर्टों के अनुसार, यह भारत की शुरुआती संगठित स्वर्ण आभूषण निर्माण इकाइयों में से एक थी। कंपनी का मुख्य कारोबार संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ब्रिटेन, ओमान, कुवैत, अमेरिका और यूरोप को सोने के आभूषणों का निर्यात करना था। 1992 तक कंपनी का कारोबार लगभग 2 करोड़ रुपए तक पहुँच गया था।

इसके बाद इसमें तेजी से वृद्धि हुई और 1998 तक इसका टर्नओवर करीब 120 करोड़ रुपए हो गया। 1994 तक राजेश एक्सपोर्ट्स भारत की सबसे बड़ी स्वर्ण आभूषण निर्यातक और थोक विक्रेता कंपनियों में शामिल हो चुकी थी। वर्ष 1995 में कंपनी ने अपना IPO लाया, जिससे लगभग 10 करोड़ रुपए जुटाए गए।

इसके बाद कंपनी ने सोने के पूरे कारोबार में विस्तार किया, जिसमें रिफाइनिंग, निर्माण और खुदरा बिक्री शामिल थी। राजेश एक्सपोर्ट्स ‘शुभ ज्वेलर्स’ नाम से रिटेल ज्वेलरी चेन भी संचालित करती है। कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स दुनिया में उत्पादित होने वाले लगभग 35 प्रतिशत सोने को प्रोसेस करने का दावा करती है।

वर्ष 2015 में राजेश एक्सपोर्ट्स ने स्विट्जरलैंड की कंपनी वैलकैम्बी एसए (Valcambi SA) का लगभग 40 करोड़ डॉलर (400 मिलियन डॉलर) के नकद सौदे में अधिग्रहण करके बाजार विशेषज्ञों को चौंका दिया था। उस समय वैलकैम्बी दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग कंपनी मानी जाती थी।

हालाँकि अधिग्रहण के बाद वैलकैम्बी भी विवादों में घिर गई। कंपनी पर दुबई से आने वाले कथित ‘डर्टी गोल्ड’ (संदिग्ध स्रोतों से प्राप्त सोना) को प्रोसेस करने के आरोप लगे थे। इन विवादों के बीच ऐसी खबरें भी सामने आईं कि वैलकैम्बी ने स्विस गोल्ड एसोसिएशन की सदस्यता छोड़ दी थी।

एक समय राजेश एक्सपोर्ट्स का नाम फॉर्च्यून 500 कंपनियों की सूची में शामिल था। राजस्व के आधार पर इसे भारत की सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों में गिना जाता था। हालाँकि अब SEBI की जाँच में आरोप लगाया गया है कि हाल के वर्षों में कंपनी द्वारा दिखाए गए राजस्व का बड़ा हिस्सा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था और वास्तविक नहीं था।

राजेश मेहता को अपने कारोबारी जीवन में कई पुरस्कार और सम्मान मिले। उन्हें ‘उद्योग श्री’, कर्नाटक सरकार का ‘ज्वेलर ऑफ द ईयर’ पुरस्कार, चीन में ‘आउटस्टैंडिंग बिजनेसमैन’ सम्मान और फोर्ब्स की 2017 की भारत के सबसे अमीर लोगों की सूची में भी जगह मिली थी। राजेश एक्सपोर्ट्स को कई सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिला।

वर्ष 2022 में कंपनी एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज के लिए घोषित 18,100 करोड़ रुपए की PLI योजना के लाभार्थियों में शामिल थी। हालाँकि राजेश एक्सपोर्ट्स 2024 में SEBI की जाँच के दायरे में आई, लेकिन उससे पहले भी कई विश्लेषक और निवेशक कंपनी की असाधारण रूप से ऊँची आय, बड़े नकद भंडार और उसकी सहायक कंपनियों से जुड़ी सीमित पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाते रहे थे।

कुछ लोगों ने तो राजेश एक्सपोर्ट्स की स्थिति की तुलना गीतांजलि जेम्स के पतन से भी की, जिसे भारत के सबसे चर्चित ज्वेलरी निर्यात घोटालों में से एक माना जाता है।

(मूल रुप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

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Shraddha Pandey
Shraddha Pandey
Senior Sub-Editor at OpIndia. Email: [email protected]

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