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‘खान सरनेम के कारण शाहरुख के बेटे को कर रहे टारगेट’: आर्यन के बचाव में महबूबा मुफ्ती ने उगला जहर

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान ड्रग्स केस में इस समय मुबंई की आर्थर रोड जेल में बंद हैं। वहीं, इस मामले पर राजनीति जारी है। इसी बीच जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट कर आरोप लगाया है कि आर्यन को इसलिए निशाना बनाया गया, क्योंकि उनका सरनेम खान है।

महबूबा मुफ्ती लिखती हैं, ”चार किसानों की हत्या के आरोपित केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के बेटे की जगह केंद्रीय एजेंसियाँ 23 साल के लड़के के पीछे हैं, बस इसलिए क्योंकि उसका सरनेम खान है। बीजेपी के कोर वोट बैंक को खुश रखने के लिए मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसा करके न्याय का मजाक उड़ाया जा रहा है।”

महबूबा पर पलटवार करते हुए जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के नेता रवींद्र रैना ने कहा, ”महबूबा मुफ्ती सिर्फ राष्ट्र विरोधी राजनीति करती हैं। उनका सिर्फ अलगाववादियों से, देश को तोड़ने वालों से और लश्कर से लेना-देना है। उनके हर बयान में अलगाववाद दिखता है।” रवींद्र रैना (Ravinder Raina ) ने आरोप लगाया कि महबूबा अपने बयानों से हमेशा समाज में जहर घोलने का काम करती हैं।

गौरतलब है कि पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती इससे पहले भी केंद्र सरकार पर आरोप लगा चुकी हैं। उन्होंने केंद्र पर राजनीतिक लाभ के लिए ‘बाहुबल’ के इस्तेमाल का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा था, “मेरा डर इस तथ्य से और भी बढ़ गया है कि सुधार की बजाए भारत सरकार चुनावों में राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए बाहुबल के इस्तेमाल की नीति जारी रखेगी। इसका कारण उत्तर प्रदेश में होने वाला अगला चुनाव है।”

बता दें कि मुफ्ती ने यह भी कहा था कि कॉन्ग्रेस का 70 साल का शासन बीजेपी से कहीं अधिक बेहतर था। उन्होंने बीजेपी पर तालिबान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के मुद्दों पर वोट हासिल करने के लिए राजनीति करने का आरोप भी लगाया था।

केरल की 12.8% आबादी का मेंटल हेल्थ गड़बड़, इनमें से केवल 15% को मिलता है इलाज: स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज

पूरी दुनिया में रविवार (अक्टूबर 10, 2021) को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया गया। इस मौके पर केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने माना कि राज्य की कुल आबादी का लगभग 12.8 फीसदी लोगों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ हैं, जिन्हें उपचार की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि इनमें से सिर्फ 15 प्रतिशत लोगों को ही वैज्ञानिक उपचार मिल रहा है। उन्होंने केरल शास्त्र साहित्य परिषद, इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी और तिरुवनंतपुरम के सरकारी मेडिकल कॉलेज में मनोचिकित्सा विभाग द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन संगोष्ठी के दौरान यह टिप्पणी की।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आँकड़े देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि लोग उपचार केंद्रों और चिकित्सा सुविधाओं तक नहीं पहुँच रहे हैं, क्योंकि वे ऐसी सुविधाओं से अनजान हैं। वीना जॉर्ज ने कहा कि राज्य में ज्यादातर लोगों को मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की सही समझ नहीं है और इसलिए वे इसका इलाज नहीं करा पा रहे हैं।

उन्होंने ANI से कहा, “इस संदर्भ में यह आवश्यक है कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य साक्षरता से संबंधित गतिविधियों को तेज किया जाए। स्वास्थ्य विभाग सभी के सहयोग से इस मिशन को सक्रियता से चला रहा है। शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य भी बहुत जरूरी है। सभी को बीमारियों की पहचान करने और समय पर इलाज कराने पर ध्यान देने की जरूरत है।”

कोविड के बाद मानसिक स्वास्थ्य के बारे में अधिक जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “विशेष रूप से कोविड के बाद लोग विभिन्न कारणों से तनाव में हैं, चाहे वह वित्तीय हो या अन्य। साथ ही पढ़ाई समेत सब कुछ ऑनलाइन माध्यमों मे बदल रहा है। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।” यहाँ उल्लेखनीय है कि केरल कोरोना वायरस से सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्यों में से एक रहा है। भारत में कुल सक्रिय मामलों में लगभग 50% केरल से ही रहा है।

देश में महाराष्ट्र के बाद केरल में सबसे अधिक कुल कोविड मामले हैं। केरल में 47,94,800 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 1,11,147 वर्तमान में सक्रिय मामले हैं। केरल में 26,000 से अधिक लोग कोरोना वायरस से अपनी जान गँवा चुके हैं। केरल एकमात्र ऐसा राज्य है, जहाँ अधिकांश राज्यों द्वारा महामारी पर नियंत्रण पाने के बाद भी लगातार 10,000 से अधिक नए मामले सामने आ रहे हैं।

‘घर-घर अंदर धर्मसाल’: पंजाब में ईसाई धर्मांतरण से SGPC की उड़ी नींद, 150 टीमों के जरिए गाँव-गाँव में चलाएगा अभियान

पंजाब में सिखों के ईसाई धर्मांतरण को लेकर अब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (SGPC) की भी नींद उड़ गई है। संस्था ने इसके खिलाफ अभियान की शुरुआत कर दी है। सोशल मीडिया पर हाल के दिनों में ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें सिखों को ईसाई मिशनरियों द्वारा बरगलाने और उन्हें अपनी सभाओं में शामिल करने की बात पता चली है। कई सिख राजनेता भी ईसाई कार्यक्रमों का हिस्सा बने हैं।

हाल ही में सिखों की धार्मिक संस्था SGPC की इसे लेकर आलोचना भी हुई थी। लोगों का कहना है कि SGPC ने पंजाब में ईसाई धर्मांतरण के खतरों को देखते हुए कुछ नहीं किया और वो निष्क्रिय बनी रही। सिख धर्म को बचाने के लिए लगातार गुहार भी लगाई जा रही थी। अब SGPC ने ‘घर-घर अंदर धर्मसाल’ अभियान आरंभ किया है। ईसाई प्रचारक जिस प्रक्रिया द्वारा सिखों को बरगला रहे हैं, अब उसी का इस्तेमाल सिख धर्म को बचाने के लिए किया जाएगा।

साथ ही इसके लिए पारंपरिक माध्यमों का भी प्रयोग किया जा रहा है। राज्य के ग्रामीण इलाकों में विशेष जोर दिया जा रहा है। SGPC की मुखिया बीबी जागीर कौर ने कहा कि इस अभियान से न सिर्फ अपने धर्म को लेकर सिखों की आस्था अडिग होगी, होगी सिख युवा भी अपने इतिहास और संस्कृति पर गर्व करेंगे। ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की खबर के अनुसार, इस अभियान के तहत SGPC की 150 टीमों को विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में भेजा गया है।

ये टीम हर गाँव में एक सप्ताह के लिए रुकेगी और प्रत्येक परिवार के दरवाजे पर जाकर सिख साहित्य का वितरण करेगी। शाम के समय गाँव के बच्चों को स्थानीय गुरुद्वारा में एकत्रित किया जाएगा और उन्हें गुरुबाणी का सही उच्चारण सिखाया जाएगा। उनमें सिखों के इतिहास, संस्कृति और दर्शन को लेकर ज्ञान भरा जाएगा। इसके बाद उपदेशकों द्वारा दीवान (धार्मिक समारोह) का आयोजन किया जाएगा।

फिर धडी (सिखों का इतिहास बताता हुआ गायन, स्थानीय भाषा में) का आयोजन होगा। इस दौरान कविषर (स्थानीय गायकों द्वारा सिख धर्म का गुणगान) का आयोजन भी किया जाएगा। अंतिम दिन ‘अमृत संचार’ कार्यक्रम होगा। गाँव के लोगों को बुला कर बातचीत की जाएगी। सिख मिशनरी कॉलेजों के माध्यम से टीमों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य है। सिख संगठनों के अलावा RSS ने भी पंजाब में ईसाई धर्मांतरण पर चिंता जाहिर की थी।

इसमें विदेशी फंडिंग की बात भी सामने आई थी। खास कर के दलितों और आदिवासियों को निशाना बनाया जा रहा है। 26 जुलाई, 2021 को ‘अकाल तख़्त’ के पंथी कार्यक्रम में ये मुद्दा उठा था। जत्थेदार गियानी हरजीत सिंह ने कहा था कि हम किसी को अपने धर्म में आने का लालच नहीं देते, ऐसे में किसी को दबाव बना कर सिखों को धर्मांतरित करने का अधिकार नहीं है। वहीं पंजाब के क्षेत्रीय बिशप ने संविधान में धर्म के प्रचार-प्रसार के अधिकार का जिक्र करते हुए कहा कि ‘मास कन्वर्जन’ के आरोप गलत हैं।

‘तालिबान आतंकवादी नहीं’: फेसबुक पर ‘आपत्तिजनक’ पोस्ट करने वाले मकबूल आलम को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने दी जमानत

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले शख्स मकबूल आलम को जमानत दे दी। आलम को कथित तौर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर ‘अफगानिस्तान में तालिबानी आतंकवादी नहीं हैं’ पोस्ट करने के बाद गिरफ्तार किया गया था।

आरोपित पर धारा 120-बी (आपराधिक साजिश की सजा), धारा 153-ए (1)/153-बी (1), धारा 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से बोलना और आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग आदि), धारा 505 (1) (सार्वजनिक रूप से शरारती बयान देना) और 505 (2) (वर्गों के बीच शत्रुता, घृणा या दुर्भावना पैदा करने वाले बयान) भारतीय दंड संहिता, 1860 के साथ गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 39 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

जस्टिस सुमन शिवम की एकल पीठ ने कहा कि आरोपित के पर्सनल फेसबुक अकाउंट से किए गए पोस्ट में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। कोर्ट ने आरोपित की जमानत अर्जी को मंजूर करते हुए यह टिप्पणी की थी।

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Bar and Bench की रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने कहा, “आवेदक के खिलाफ कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है, सिवाय इसके कि उसने अपने पर्सनल फेसबुक अकाउंट से एक पोस्ट किया है। हम केवल इस आधार पर उसे अपराधी नहीं मान सकते हैं। इस मामले में आवेदक को और अधिक हिरासत में रखना सही नहीं होगा।” आवेदक की ओर से वकील के. मोहम्मद ने वरिष्ठ अधिवक्ता डी दास को पेश किया। वहीं, राज्य की ओर से एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर आरआर कौशिक पेश हुए।

गौरतलब है कि गुवाहाटी हाई कोर्ट ने हाल ही में मकबूल आलम नाम के व्यक्ति की जमानत अर्जी को मंजूर कर लिया था, जिसे फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। आरोपित ने अपने पोस्ट में तहरीक-ए-तालिबान जैसे आतंकवादी संगठन की तारीफ करते हुए उसका महिमामंडन किया था। जबकि यह पूरी दुनिया जानती है कि तालिबान ही वह आतंकी संगठन है, जिसने अफगानिस्तान की मासूम जनता पर ​कहर बरपाया है। उसी ने हथियारों के बल पर लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को बाहर कर देश पर अपनी सत्ता काबिज की है। यही नहीं उन्होंने भारतीय नागरिकों को भी अफगानिस्तान में निशाना बनाने से कोई गुरेज नहीं किया। लेकिन अदालत ने आवेदक को यह देखते हुए जमानत दे दी थी कि उस फेसबुक पोस्ट में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसके आधार पर उसे आगे हिरासत में रखने की आवश्यकता है।

‘आर्यन का बच्चा, रोमानिया में कार ड्राइविंग के दौरान सेक्स’: जानिए शाहरुख खान ने बेटे को लेकर चल रही अफवाहों पर क्या कहा था

मुंबई के क्रूज ड्रग केस में सोमवार (अक्टूबर 11, 2021) को भी आर्यन खान की जमानत टाल दी गई। अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी, तब तक आर्यन को आर्थर जेल में रहना होगा। अभी वह 14 दिन की न्यायिक हिरासत में हैं। इस बीच उन्हें लेकर मीडिया में तरह-तरह की बातें चल रही हैं। कुछ पुरानी अफवाहों को भी कुरेदा जा रहा है। आइए जानें कि आर्यन से जुड़ी एक ऐसी ही अफवाह पर शाहरुख ने क्या रिएक्शन दिया था। 

साल 2013 में शाहरुख खान के छोटे बेटे अबराम का सरोगेसी के माध्यम से जन्म हुआ था। इसके बाद मीडिया में बात फैली कि ये बच्चा शाहरुख खान का नहीं उनके बेटे आर्यन खान का है। शाहरुख के फैन्स इस बात को मानने को ही तैयार नहीं थे कि आर्यन और सुहाना के बाद अब शाहरुख तीसरे बच्चे की सोच सकते हैं। नतीजन अफवाहों ने जोर पकड़ लिया और बातें चलती रहीं।

वीडियो में 7 मिनट 9 सेकेंड के स्लॉट पर शाहरुख ने अबराम और आर्यन पर बात की है।

मगर, साल 2017 में शाहरुख खान ने इस विषय पर जमकर बोला। उन्होंने टेड टॉक में कहा, “चार साल पहले, मैंने और मेरी पत्नी गौरी ने तीसरा बच्चा करने का फैसला किया। उस समय कुछ जगह यह कहा गया कि अबराम मेरा नहीं बल्कि आर्यन का बेटा है जो उस समय सिर्फ 15 साल का था। जिस किसी ने भी यह अफवाह फैलाई उसने एक फेक वीड‍ियो दी जिसमें दावा किया गया कि आर्यन ने रोमानिया में कार ड्राइविंग के दौरान लड़की के साथ ये सब किया था।”

शाहरुख खान ने आगे बताया कि आर्यन को लेकर इस अफवाह से उनके घरवाले बहुत परेशान हो गए थे। आर्यन भी उस वक्त इन खबरों से हिल गया था। शाहरुख कहते हैं- “अब मेरा बेटा आर्यन 19 साल का है और आज भी अगर कोई उसे हेलो बोलता है, तो वह तुरंत पलटकर कहता ह- भाई मेरे पास तो यूरोप का ड्राइव‍िंग लाइसेंस भी नहीं है।”

बता दें कि अब आर्यन खान 23 वर्ष के हैं जबकि अबराम 8 साल के हैं। समय के साथ दोनों से जुड़ी अफवाहों पर विराम लग गया था। लेकिन आर्यन की गिरफ्तारी ने शाहरुख खान के जीवन से जुड़ी हर अफवाह और हर कॉन्ट्रोवर्सी को फिर प्रासंगिक कर दिया है। बताया जा रहा है कि कैसे आर्यन को लेकर पहले भी शाहरुख खान की इमेज धूमिर करने की कोशिश हुई थी।

इंदौर में गरबा कार्यक्रम संचालक पर लव जिहाद को बढ़ावा देने का आरोप, VHP ने कार्यक्रम रुकवाया, पुलिस ने 5 को हिरासत में लिया

मध्य प्रदेश के इंदौर में गरबा कार्यक्रम में गैर-हिंदू युवकों को प्रवेश देने पर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने आपत्ति जताते हुए हंगामा किया और कार्यक्रम को रुकवा दिया। हिंदूवादी संगठनों ने कार्यक्रम संचालक अक्षांशु तिवारी पर लव जिहाद का बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की माँग की। हंगामे की सूचना की बाद मौके पर पहुँचे एएसपी, सीएसपी और कई थानों की पुलिस ने पाँच युवकों को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ धारा 188 के तहत कार्रवाई की।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, शहर के गाँधी नगर इलाके के ऑक्सफोर्ड कॉलेज के संचालक अक्षांशु तिवारी ने गरबे का आयोजन कराया था। इस कार्यक्रम के लिए प्रशासन ने 800 लोगों की अनुमति दी थी, लेकिन हजारों की भीड़ जुटा ली गई। इस दौरान दूसरे समुदाय के युवकों को भी प्रवेश दे दिया गया। आरोप है कि 150 रुपए की टिकट को 600 रुपए तक में ब्लैक किया गया।

हिंदूवादी संगठनों की आपत्ति पर पुलिस ने संचालक अक्षांशु तिवारी सहित पाँच युवकों पर धारा 188 के तहत कार्रवाई की है। भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के अनुसार, किसी भी पब्लिक सर्वेंट की ओर से जारी किए गए ऑर्डर को न मानने वालों के खिलाफ सजा का प्रावधान दिया गया है। इसके मुताबिक, जो कोई भी जानबूझकर पब्लिक सर्वेंट के आदेश की अवमानना करता है, उसको जेल की सजा या जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं।

गौरतलब है कि पिछले दिनों मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के दुर्गा पांडालों में विश्व हिंदू परिषद ने ‘गैर-हिंदू का प्रवेश वर्जित’ वाले पोस्टर चिपका रखे हैं। इसको लेकर विहिप के धर्म प्रसार आयाम के कार्यकर्ताओं का स्पष्ट कहना है कि गैर-हिंदू लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं में हिंदू रिवाजों को शामिल नहीं करते हैं, इसलिए उन्हें गरबा पांडालों में आने का हक नहीं है।

विहिप धर्म प्रसार के जिलामंत्री चंदन शर्मा ने कहा, “जैसा कि आप सभी को पता है कि धर्म विशेष में बुतपरस्ती गुनाह है। अगर बुतपरस्ती उनके धर्म में गुनाह है तो वे गरबा में वो क्यों आते हैं? इतिहास में झाँक कर देखें तो हिंदू मंदिरों को तोड़ा गया है। इसलिए अगर उन्हें सच में गरबा और मूर्ति पूजा से प्रेम है तो अपने घर की बहन-बेटियों को इन कार्यक्रमों में क्यों नहीं भेजते?”

सितंबर महीने में बजरंग दल ने गरबा और डांडिया के आयोजकों से गैर-हिंदुओं का प्रवेश रोकने के लिए पहल करने को कहा था। इसके लिए आयोजकों से प्रवेश के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य करने की अपील की था। बजरंग दल ने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार रोकने के लिए इसे जरूरी बताया था।

बजरंग दल के मीडिया कन्वेनर एस कैलाश ने कहा था कि कार्यक्रम स्थल पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश रोकने और गैर-हिंदू बाउंसरों की तैनाती से बचने के लिए आयोजकों से यह अपील की गई है। उन्होंने कहा कि ऐसा देखा गया है कि दूसरे समुदाय के लोग भी डांडिया और गरबा में आते हैं। लेकिन, इसका कारण दूसरे के धार्मिक कार्यक्रमों के प्रति सद्भावना नहीं होती। असल में, समारोहों में प्रवेश करके वे महिला प्रतिभागियों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं।

J&K के सुरनकोट मुठभेड़: सेना के जेसीओ समेत 5 जवान बलिदान, एक आतंकी ढेर, मुठभेड़ जारी

जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर के नियंत्रण रेखा से सटे सुरनकोट में सुरक्षा बलों की आतंकियों के साथ मुठभेड़ जारी है। इस मुठभेड़ के दौरान सेना के जेसीओ समेत 5 जवानों के बलिदान होने की खबर है। इससे पहले सुरक्षाबलों ने सोमवार (11 अक्टूबर, 2021) सुबह अनंतनाग और बांदीपोरा में हुए मुठभेड़ में दो आतंकियों को मार गिराया था। फ़िलहाल, अभी बलिदानी जेसीओ व अन्य चार जवानों की अभी पहचान जाहिर नहीं की गई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस घेराबंदी में तीन से चार आतंकियों के घिरे होने की सूचना है। साथियों की शहादत के बाद सुरक्षाबलों ने भी अपना अभियान तेज कर दिया है। एक भी आतंकी इस मुठभेड़ से बचकर न निकल भागें इसकेे लिए घेराबंदी को और मजबूत बनाया जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस के एक अधिकारी के हवाले से बताया जा रहा है कि स्थानीय लोगों द्वारा सुरनकोट नियंत्रण रेखा से सटे जंगलों में संदिग्ध देखे जाने की सूचना के आधार पर एसओजी, सेना ने सुबह से तलाशी अभियान चलाया हुआ था। तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षाबलों को जंगल में आतंकियों के मौजूद होने के सबूत मिले। सुरक्षाबलों ने आतंकियों का पीछा करना शुरू कर दिया। लेकिन जैसे सुरक्षाकर्मी आतंकियों के नजदीक पहुँचे तो पहले से घाट लगाकर पेड़ों की होड़ में छिपे आतंकियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी।

जानकारी के अनुसार रविवार (10 अक्टूबर, 2021) को जम्मू कश्मीर पुलिस ने बांदीपोरा में आतंकियों के चार मददगारों को गिरफ्तार किया था। जब उनकी कड़े तरीके से पूछताछ हुई तो पता चला कि उनका एक साथी इसी इलाके में छिपा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, इन आतंकियों ने ही कुछ दिन पहले इलाके में एक सूमो चालक की हत्या कर दी थी। इसके बाद पुलिस ने मददगारों से पूछताछ के बाद आतंकी के ठिकाने को घेर लिया गया।

वहीं दूसरा एनकाउंटर बांदीपोरा के हाजिन इलाके के गुंड जहाँगीर में हुआ है। सुरक्षा बलों ने आतंकी को सरेंडर करने के लिए कहा लेकिन उसने फायरिंग कर दी। इसके बाद दोनों तरफ से मुठभेड़ हुई और आतंकी को मार दिया गया। मारे गए आतंकी की पहचान इम्तियाज अहमद डार के रूप में हुई है। वह टीआरएफ (द रेजिस्टेंस फ्रंट) का आतंकी था। शाहगुंड में उसने चालक की हत्या कर दी थी। उसके पास से भी पिस्टल को बरामद किया गया। माना जा रहा है कि वह भी इसी ग्रुप की तरह काम करता था। क्योंकि कश्मीर में पिछले दिनों जो हत्याएँ हुई है। उनमें पिस्टलों का ही इस्तेमाल किया गया है।

अब पान मसाला नहीं बेचेंगे अमिताभ बच्चन, विज्ञापन का करार खत्म कर फीस लौटाई: 80वें जन्मदिन पर दी जानकारी

बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन सोमवार (11 अक्टूबर, 2021) को अपना 80वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। इसी बीच जानकारी आई है कि उन्होंने विरोध के बाद पान मसाला का विज्ञापन बंद कर दिया है। कुछ ही दिनों पहले उनका एक विज्ञापन सामने आया था, जिसमें उनके साथ अभिनेता रणवीर सिंह भी दिखे थे। टीवी पर इसके जारी होने के कुछ ही दिनों बाद अब बॉलीवुड मेगास्टार ने इससे अपना करार ख़त्म कर दिया है।

अमिताभ बच्चन के कई प्रशंसकों और कई तम्बाकू व धूम्रपान विरोधी NGO ने भी राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता से आग्रह किया था कि वो पान मसाला का विज्ञापन न करें। सोशल मीडिया पर इसके लिए उनका कड़ा विरोध भी हुआ था। अमिताभ बच्चन के टीम के बयान के अनुसार, कुछ दिनों पहले एक विज्ञापन प्रसारित हुआ था। टीम ने आगे कहा कि अमिताभ बच्चन ने अब उस ब्रांड से संपर्क कर के करार ख़त्म करने का आग्रह किया।

पिछले सप्ताह ही उन्होंने ऐसा कर दिया था। टीम ने बताया है कि जब अमिताभ बच्चन इस पान मसाला एड से जुड़े थे, तब उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि ये सरोगेट विज्ञापन के अंतर्गत आता है। अमिताभ बच्चन न सिर्फ पान मसाला ब्रांड से अपने करार को ख़त्म कर के विज्ञापन से पीछे हट गए, बल्कि उन्होंने अपनी फीस भी वापस कर दी है। आधिकारिक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी गई है।

बता दें कि सरोगेट विज्ञापन उसे कहते हैं, जिसमें सिगरेट या अल्कोहल जैसे प्रोडक्ट्स का विज्ञापन किसी अन्य वस्तु की आड़ में किया जाता है। कुछ दिनों पहले एक फैन को जवाब देते हुए अमिताभ बच्चन ने कहा था कि इस विज्ञापन के लिए वो क्षमाप्रार्थी हैं। उन्होंने ये भी कहा था कि इसी भी व्यवसाय से कई लोगों का भला हो रहा हो, तो हमें उसके बारे में गलत नहीं सोचना चाहिए और हमें अपने व्यवसाय के बारे में भी सोचना पड़ता है।

तम्बाकू के खिलाफ अभियान चलाने वाले एक राष्ट्रीय NGO ने अमिताभ बच्चन से अपील की थी कि वो पान मसाला का विज्ञापन छोड़ें। NGO ने कहा था कि इससे युवाओं में गलत सन्देश जा रहा है। ‘National Organisation for Eradication of Tobacco’ के अध्यक्ष शेखर सलकर ने पत्र लिख कर कहा था कि चूँकि बच्चन सरकार के प्लस पोलियो अभियान के ब्रांड एम्बेसडर हैं, उन्हें जल्द से जल्द पान मसाला का विज्ञापन छोड़ना चाहिए।

नुसरत जहाँ ने यश दासगुप्ता से कर ली गुपचुप शादी? ‘हसबैंड’ वाली तस्वीरों से कयास

बांग्ला फिल्मों की एक्ट्रेस और टीएमसी सांसद नुसरत जहाँ एक बार फिर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में हैं। इंस्टाग्राम पर खासा एक्टिव रहने वाली नुसरत ने एक्टर और बीजेपी नेता यश दासगुप्ता को बेहद खास अंदाज में बर्थडे विश किया है।

टीएमसी सांसद ने यश के बर्थडे पर केक के साथ एक तस्वीर शेयर की है, जिस पर उन्होंने ‘हसबैंड’ और ‘डैड’ लिखा है। साथ ही उन्होंने यश के साथ इंस्टाग्राम स्टोरी में एक और तस्वीर शेयर की है। इसमें उन्होंने लव इमोजी के साथ ‘हैप्पी बर्थडे माय लव’ लिखा हुआ है।

ये तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कयास लगाए जा रहे हैं कि नुसरत ने यश दासगुप्ता के साथ गुपचुप तरीके से शादी कर ली है।

साभार: नुसरत जहाँ का इंस्टाग्राम

उल्लेखनीय है कि नुसरत जहाँ ने कोलकाता के भागीरथी नियोतिया अस्पताल में 26 अगस्त 2021 को बच्चे को जन्म दिया था। इसके बाद जब वह छुट्टी मिलने के बाद बाहर निकली थीं तो उस दौरान यश नवजात को गोद में लिए हुए दिखे थे। जब उनसे बच्चे के पिता को लेकर सवाल किया गया तो सांसद ने कहा था, “मुझे लगता है कि किसी महिला से यह पूछना कि उसके बच्चे का पिता कौन, यह बहुत ही ओछा है। इससे एक महिला के चरित्र पर काला धब्बा लगता है। पिता को पता है कि बच्चे का पिता कौन है और हम इस समय पितृत्व कर रहे हैं। मैं और यश एक साथ अच्छा समय बिता रहे हैं।”

बाद में मीडिया रिपोर्टों से यह बात सामने आई थी कि बर्थ सर्टिफिकेट में बच्चे के पिता का नाम देबाशीष दासगुप्ता बताया गया है। इसमें बच्चे का पूरा नाम ‘यिशान जे दासगुप्ता’ दर्ज है। अभिनेता यश दासगुप्ता को देबाशीष नाम से भी जाना जाता है।

टीएमसी सांसद नुसरत जहाँ ने निखिल जैन से 19 जून 2019 को तुर्की में एक निजी शादी समारोह में शादी की थी। लेकिन जून 2021 में इस शादी को अमान्य बताते हुए नुसरत ने कहा था कि शादी तुर्की में हुई थी और यह भारतीय कानूनों के मुताबिक अमान्य है। उस समय निखिल ने कहा था कि वे और नुसरत छह महीने से अलग रह रहे हैं और उनके पेट में पल रहा बच्चा उनका नहीं है। इसके बाद से यश के साथ उनके रिश्तों को लेकर लगातार कयास लगते रहे हैं।

फिरोजाबाद: पंडाल में आरती के दौरान गाली-गलौच करने पर दो समुदायों में तनाव, पथराव में कई घायल, पुलिस ने सांप्रदायिक घटना से किया इनकार

फिरोजाबाद के दिखतौली में देवी पंडाल में माता की आरती के दौरान समुुदाय विशेष के लोगों द्वारा हंगामा करने पर दो पक्षों में विवाद हो गया है। गाली-गलौच के बाद दोनों पक्षों में जमकर पथराव हुआ, जिसमें कई लोगों को हल्की चोटें भी आई हैं। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर दोनों पक्षों को बल प्रयोग करके खदेड़ दिया। इस दौरान पुलिस ने मौके से 9 लोगों को हिरासत में भी लिया है। घटना के बाद गाँव में तनाव है। बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात किया गया है।

जानकारी के मुताबिक, दिखतौली गाँव में जाटव समाज के लोगों ने सड़क किनारे एक प्लॉट में देवी की मूर्ति की स्थापना की है। यहाँ प्रतिदिन आरती का आयोजन किया जाता है। आरोप है कि जब से देवी पंडाल सजाया गया है, तभी से आरती के दौरान समुदाय विशेष के लोग आकर पास की खाली पड़ी जमीन पर बैठकर शराब पीते हैं और आरती में व्यवधान उत्पन्न करते हैं। इसको लेकर पिछले दो दिनों से तनाव की स्थिति थी।

बताया जा रहा है कि रविवार (अक्टूबर 10, 2021) देर रात जावेद अली अपना ई-रिक्शा खड़ा कर रहा था। तभी उसने नाली में ईंट रख दी। आरोप है कि जब दारा सिंह ने नाली बंद करने का विरोध किया तो दोनों पक्षों में विवाद हो गया। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और दोनों तरफ से जमकर पथराव होने लगा, जिसमें कई लोगों के हल्की चोटें भी आई हैं। पथराव और मारपीट होते ही गाँव में सनसनी फैल गई। दो समुदायों के बीच झगड़े की सूचना मिलते ही थाना पुलिस मौके पर पहुँची और झगड़ा कर रहे लोगों पर बल प्रयोग कर उन्हें खदेड़ दिया। इस दौरान पुलिस ने मौके से 9 लोगों को हिरासत में लेकर थाने भेज दिया।

पुलिस क्षेत्राधिकारी शिकोहाबाद राजवीर सिंह ने कहा कि दिखतौली गाँव में नाली में ईंट लगाने और ई-रिक्शा खड़ा करने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया है। इस दौरान दोनों पक्ष में पथराव हुआ है। नौ लोगों को हिरासत में लिया गया है। सांप्रदायिक मामले जैसी कोई बात नहीं है। मामले की जाँच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

गाँव के अजय का आरोप है कि समुदाय विशेष के लोगों ने नाली का पानी यह कहते हुए रोक दिया था कि जाटव समाज के लोगों के घरों की नाली का पानी उस तरफ नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने जब इसका विरोध किया तो समुदाय विशेष के लोगों ने उनके और अन्य जाटव समुदाय के घरों को निशाना बनाया। उन पर पथराव किया गया और लाठी-डंडों से मारपीट भी की गई। इसमें कई लोग घायल हो गए। यह हमला उस समय हुआ, जब अजय अपने एक साल से बेटे का जन्मदिन मना रहे थे।

पुुलिस ने गली में खड़ी तीन ई-रिक्शा को भी अपने कब्जे में ले लिया है। प्रभारी निरीक्षक उदयवीर सिंह मलिक का कहना है कि पूरे मामले की जाँच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। क्षेत्र में शांति-व्यवस्था को बिगाड़ने का प्रयास सफल नहीं होने दिया जाएगा।