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‘इस्लाम कबूलो तो जमीन मिलेगी’: IAS इफ्तिखारुद्दीन ने बनाया था धर्म परिवर्तन का दबाव, मुस्लिम बनाने के लिए ‘शुद्ध भक्ति’ भी लिखी

धर्म परिवर्तन को बढ़ावा देने वाले वीडियो वायरल होने के बाद IAS इफ्तिखारुद्दीन चर्चा में हैं। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मामले की SIT जाँच के आदेश देते हुए 7 दिन में रिपोर्ट तलब की है। इसके बाद कई ऐसे लोग सामने आए हैं जिनका दावा है कि आईएएस मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उन पर इस्लाम कबूलने का दबाव डाला था।

ये मामले तब के हैं जब इफ्तिखारुद्दीन कानपुर मंडल के आयुक्त हुआ करते थे। फिलहाल वे उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के चेयरमैन हैं। जो वीडियो वायरल हुए हैं वे भी उसी वक्त के बताए जा रहे जब इफ्तिखारुद्दीन कानपुर में तैनात थे। रिपोर्ट के अनुसार कानपुर के कल्याणपुर में रहने वाले निर्मल कुमार ने दावा किया है कि तत्कालीन कमिश्नर इफ्तिखारुद्दीन और उनके आदमियों ने उनकी बस्ती के लोगों पर धर्म परिवर्तन का दबाव डाला था।

भ्रष्ट तंत्र विनाशक शनि मंदिर चलाने वाले रॉबी शर्मा और राजकीय उन्नयन बस्ती की रहने वाली सविता देवी ने भी इसी तरह के आरोप लगाए हैं। निर्मल कुमार के अनुसार पहले मेट्रो की डीपीआर में गलत तरीके से लोगों की जमीन शामिल की गई। इसके बाद जब पीड़ित इफ्तिखारुद्दीन के पास फरियाद लेकर पहुँचे तो उन्हें कथित तौर पर इस्लाम कबूलने पर जमीन वापस मिलने की बात कही।

सविता देवी ने आज तक को बताया, “हम लोग अपनी फरियाद लेकर कमिश्नर इफ्तखारुद्दीन के पास गए थे। हमारी फरियाद नहीं सुनी गई। हमसे धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बनने को कहा गया। मना करने पर हमें बाहर निकाल दिया गया।” इन मामलों के सामने आने के बाद बिठूर से बीजेपी विधायक अभिजीत सिंह सांगा ने कानपुर के उस दफ्तर को गंगाजल से पवित्र कराने और हवन करने की बात कही है, जहाँ अपनी तैनाती के दौरान इफ्तखारुद्दीन बैठते थे।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार उस समय इस बात को लेकर मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन का विरोध भी हुआ था, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उल्लेखनीय है कि उस वक्त राज्य में सपा की सरकार थी। कथित तौर पर आईएएस इफ्तिखारुद्दीन ने ‘शुद्ध भक्ति’ के नाम से एक किताब भी लिख रखी है। कुरान की आयत वाली यह किताब इस्लाम का महिमामंडन करती है और लोगों को मुस्लिम बनने के लिए प्रेरित करने के मकसद से लिखी गई है। पीड़ितों के अनुसार उनकी बस्ती में भी यह किताब बाँटी गई थी।

गौरतलब है कि वायरल वीडियो IAS इफ्तिखारुद्दीन के आवास के बताए जा रहे हैं। इसमें एक व्यक्ति कुर्सी पर बैठ जमीन पर बैठे कुछ मुस्लिमों को सम्बोधित कर रहा है, जिसे IAS इफ्तिखारुद्दीन बताया गया है। वीडियो में एक मौलाना कहता है, “पूरे दुनिया के इंसानों को बताओ इस्लाम को आगे बढ़ाओ। अभी पिछले दिनों पंजाब के एक भाई ने इस्लाम कबूल किया तो मैंने उन्हें दावत नहीं दी थी। मैंने कहा कि इस्लाम कबूल करने की वजह क्या थी, तो उन्होंने कहा कि मेरी बहन की मौत। जब उसे जलाया तो वो कपड़े जल गए और वो निर्वस्त्र हो गई। फिर मुझे लगा मेरी बेटी भी है। कल को उसे भी लोग ऐसे ही देखेंगे। इसीलिए, मुझे इस्लाम से अच्छा कोई मजहब नहीं लगा और मैंने कबूल कर लिया।”

वह पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी की पुस्तक का भी जिक्र करता है। वो कहता है, “अल्लाह ने हमें उत्तर प्रदेश के रूप में एक ऐसा सेंटर दिया है, जहाँ से हम पूरे देश-दुनिया में काम कर सकते हैं। ऐलान करो दुनिया के इंसानों से कि अल्लाह की बादशाहत और निजामियत पूरी दुनिया में कायम करनी है। हर घर में अल्लाह का दीन दाखिल होना है, करना चाहिए।” एबीपी न्यूज का दावा है कि वायरल वीडियो का पूरा हिस्सा उसके पास है। इसमें IAS इफ्तिखारुद्दीन इस्लाम का महिमामंडन करते हुए धर्मपरिवर्तन के लिए उकसाते दिख रहे हैं।

‘उमर खालिद को मिली मुस्लिम होने की सजा’: कन्हैया के कॉन्ग्रेस ज्वाइन करने पर छलका जेल में बंद ‘दंगाई’ के लिए कट्टरपंथियों का दर्द

कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवानी द्वारा कॉन्ग्रेस का हाथ थामे जाने के चर्चाओं के बीच सोशल मीडिया पर एक नई बहस शुरू हो गई है। इस्लामी कट्टरपंथी इस चर्चा में उमर खालिद के लिए अपना रोना रो रहे हैं।

कोई कह रहा है कि जैसे इन दो युवा नेताओं को कॉन्ग्रेस से जुड़ने का मौका मिला वैसे उमर खालिद को नहीं मिला, तो कोई पूछ रहा है कि क्या अब जब ये लोग कॉन्ग्रेस में घुस गए हैं तो उमर खालिद को जेल से बाहर निकालने का काम करेंगे। हालाँकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तकनिकी कारणों से जिग्नेश मेवानी कॉन्ग्रेस में नहीं शामिल हो पाए हैं क्यों वो MLA हैं।

इस क्रम में आरफा खानुम शेरवानी कन्हैया कुमार को प्रतिभाशाली नेता तो कहती हैं और साथ ही इस बात पर भी खेद जताती है कि इससे उमर खालिद की मदद नहीं होगी जो कि उनके चमकते सितारे हैं और जेल में हैं। वह पूछती हैं कि क्या उन्हें मुस्लिम होने की सजा दी जा रही है।

सैफ नाम का यूजर लिखता है, “उमर खालिद और कन्हैया कुमार ने एक ही बिंदु पर शुरुआत की। कन्हैया को टीवी डिबेट, कॉन्क्लेव में आमंत्रित किया गया, भाकपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा, अब कॉन्ग्रेस में घुस गए; वह एक पूर्णकालिक राजनीतिज्ञ हैं। दूसरी ओर, उमर खालिद को बहिष्कृत कर दिया गया और अब वह एक साल से अधिक समय से जेल में सड़ रहा है।”

अफजल लिखता है, “मुस्लिम होने की सजा भुगत रहे उमर खालिद, क्या कन्हैया कुमार कॉन्ग्रेस में आएँगे और उन्हें जेल से बाहर निकालेंगे?”

पत्रकार जेबा वारसी लिखती हैं, “ये देखना बेहद दिलचस्प है कि कन्हैया और मेवानी जैसे युवा कार्यकर्ता मुख्यधारा राजनीति में आ रहे हैं। कॉन्ग्रेस ज्वाइन कर रहे हैं। लेकिन उमर खालिद का क्या जिन्हें जेल में रखा गया है। मेवानी गुजरात के निर्दलीय विधायक हैं। कॉन्ग्रेस से जुड़ रहे हैं। लेकिन कन्हैया कुमार, जिग्नेश मेवानी और उमर खालिद सब एक ही नस्ल के युवा कार्यकर्ता हैं और अब खालिद की वर्तमान हालत अलग है।”

मोहम्मद रिजवान कहते हैं, “सीपीआईएम अपना अस्तित्व खो रही है। अल्पसंख्यकों से तथाकथित उदारवादी जो कम्युनिस्ट पार्टी का काम करते हैं और उसका बचाव करते हैं, उन्हें उमर खालिद को याद रखना चाहिए। कन्हैया, जिग्नेश और उमर सभी एक ही पंक्ति में थे। लेकिन उमर जेल में सड़ रहा है। ये सीखने के लिए सबक है।”

यहाँ बता दें कि जिस उमर खालिद के रिहाई और उसके राजनैतिक जीवन पर इस्लामी कट्टरपंथी चर्चा कर रहे हैं उसे पिछले साल 14 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था, वो भी उत्तर पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा के मामले में। खालिद पर ट्रंप के भारत दौरे के दौरान हिंसा की साजिश रचने का आरोप है। इसके बावजूद कई इस्लामी और उनके हमदर्द ये दिखा रहे हैं कि कन्हैया कुमार, जिग्नेश मेवानी सब एक ही जैसे थे लेकिन उमर खालिद को प्रताड़ित किया जा रहा है क्योंकि वो मुसलमान है।

नेहरू पर ट्वीट करने पर रणवीर शौरी को मिली अंजाम भुगतने की धमकी, शेयर किया ‘कॉन्ग्रेस MLC भाई जगताप’ के गुर्गे का ट्वीट

बॉलीवड अभिनेता रणवीर शौरी को जवाहरलाल नेहरू पर ट्वीट करने पर धमकी दी जा रही है। उन्होंने मंगलवार (28 सितंबर 2021) को सूरज ठाकुर नाम के एक शख्स से मिले धमकी भरे मैसेज का स्क्रीनशॉट ट्विटर पर साझा किया। अभिनेता का कहना है कि सूरज ठाकुर कॉन्ग्रेस एमएलसी भाई जगताप के इशारे पर काम करता है। उसने ही मुझे धमकी भरे मैसेज भेजे हैं।

रणवीर शौरी ने बताया, “सूरज ठाकुर ने कहा था कि उसे भाई जगताप ने ऑर्डर दिया था कि वह अभिनेता से उनके द्वारा पोस्ट किए गए ट्वीट पर चर्चा करे, जिसमें उन्होंने गाँधी/नेहरू परिवार के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी।” उन्होंने आगे बताया कि ठाकुर ने मैसेज में कहा था कि आपके ट्वीट ने करोड़ों लोगों और कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की भावनाओं को आहत किया है। उसने पूर्व पीएम के लिए अभद्र टिप्पणी करने के लिए मुझे परिणाम भुगतने की धमकी भी दी थी।

भाई जगताप के कथित गुर्गे ने रणवीर शौरी को तुरंत माफी माँगने और सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से उस पोस्ट को हटाने की धमकी दी थी। उसने अभिनेता से कहा कि अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें।

शौरी को जिस तस्वीर के लिए धमकी दी जा रही है, उसे उन्होंने मोदी मीम पर सोशल मीडिया ट्रोल्स के ट्वीट के जवाब में पोस्ट किया था। इसमें कहा गया था कि भाजपा एक फटे कंडोम से पैदा हुई राजनीतिक पार्टी थी। तब शौरी ने पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू की एक तस्वीर साझा करते हुए कहा था कि उन्हें कंडोम का इस्तेमाल करना चाहिए था।

शौरी ने आगे कहा कि वह अपने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को बरकरार रखेंगे और धमकियों से नहीं डरेंगे। शौरी ने कहा था, “कृपया आपको बता दूँ कि मैं कॉन्ग्रेस पार्टी का समर्थक नहीं हूँ। मैं भारतीय संविधान के तहत मुझे दिए गए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अपने अधिकार को बरकरार रखूँगा और किसी से नहीं डरूँगा।”

रणवीर शौरी ने शेयर किया मजेदार मीम

अभिनेता रणवीर शौरी ने उन ट्रोल्स को ‘करारा जवाब’ दिया है, जो पीएम मोदी पर एक मीम को लेकर उन्हें गालियाँ दे रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार रात को सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत बन रही नई संसद की कंस्ट्रक्शन साइट पर अचानक पहुँचकर वहाँ चल रहे कामकाज का जायजा लिया था।

पीएम ने साइट पर तकरीबन एक घंटे का समय बिताया और निर्माण की स्थिति का निरीक्षण किया। यह बात उनके विरोधियों को रास नहीं आई थी। रणवीर शौरी ने नई संसद के निर्माण स्थल पर पीएम मोदी के कामकाज का जायजा लेते हुए एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी, जिसमें उनके पैरों के नीचे विपक्षी नेताओं के झुंड को दिखाया था।

कॉन्ग्रेस आलाकमान ने नहीं स्वीकारा सिद्धू का इस्तीफा- सुल्ताना, परगट और ढींगरा के मंत्री पदों से दिए इस्तीफे से बैकफुट पर पार्टी: रिपोर्ट्स

पंजाब कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू का इस्तीफा पार्टी की टॉप लीडरशिप ने स्वीकार नहीं किया है। मीडिया रिपोर्ट में कॉन्ग्रेस के सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि आलाकमान ने राज्य लीडरशिप को आदेश दिए हैं कि पहले वो विवादों को अपने स्तर पर ही सुलझाएँ। दरअसल आज ही सिद्धू के बाद पंजाब कॉन्ग्रेस में कई इस्तीफे हो चुके हैं।

खबर है कि मंगलवार (28 सितंबर, 2021) को नवजोत सिंह सिद्धू के साथ एकजुटता दिखाते हुए पंजाब कैबिनेट में दो दिन पहले शामिल हुईं रजिया सुल्ताना, परगट सिंह और योगिंदर ढींगरा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इसको लेकर बीजेपी ने कॉन्ग्रेस पर तंज कसा है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने पंजाब में चल रहे सियासी घमासान को लेकर सिलसिलेवार कई ट्वीट किए हैं। उन्होंने लिखा, ”वो दो आए नहीं.. एक चला गया..छा गए गुरु।” इसके बाद पात्रा ने ‘पंजाब कॉन्ग्रेस का मसला सुलझने के बाद ही गाँधी परिवार शिमला में छुट्टी मनाने गया था’ इस खबर को ट्वीट करते हुए लिखा, ”सुलझाने के बाद? छुट्टी मनाने, कमाल है!”

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, रजिया सुल्ताना ने दो दिन पहले पंजाब के कैबिनेट मंत्री के रूप में पदभार संभाला था। लेकिन उन्होंने सिद्धू के इस्तीफा देने के कुछ घंटे बाद ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को भेजे इस्तीफे में कहा कि वह ‘नवजोत सिंह सिद्धू के साथ एकजुटता दिखाते हुए’ इस्तीफा दे रही हैं। सुल्ताना ने कहा, ”सिद्धू साहब सिद्धांतों के आदमी हैं। वह पंजाब और पंजाबियत के लिए लड़ रहे हैं।”

दरअसल, पंजाब कॉन्ग्रेस में चल रहे घमासान के बीच मंगलवार (28 सितम्बर, 2021) को प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष पद से नवजोत सिद्धू ने 72 दिन बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालाँकि, उन्होंने पार्टी में बने रहने की बात कही है। सिद्धू ने कॉन्ग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को चिट्ठी के मध्यम से इस्तीफे की जानकारी दी है। लेकिन अभी खबर आ रही है कि पार्टी उनका इस्तीफा फिलहाल स्वीकारने के मूड में नहीं है। इससे घमासान और भी बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं।

गौरतलब है कि सिद्धू ने सोनिया को लिखी चिट्ठी में कहा, ”किसी के चरित्र के पतन की शुरुआत समझौते से होती है। मैं पंजाब के भविष्य और पंजाब की जनता के कल्याण के एजेंडा से कभी समझौता नहीं कर सकता हूँ।” उन्होंने आगे लिखा, ”इसलिए मैं पंजाब प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देता हूँ। मैं कॉन्ग्रेस की सेवा करता रहूँगा।” बताया जा रहा है कि पंजाब में आज ही नए मंत्रियों के बीच विभागों का बँटवारा हुआ है और इसके चंद घंटे बाद ही सिद्धू ने सोनिया गाँधी को इस्तीफा भेज दिया।

बता दें कि सुल्ताना को सिद्धू की बेहद करीबी माना जाता है। उनके शौहर मोहम्मद मुस्तफा सिद्धू के प्रधान रणनीतिक सलाहकार हैं, जो भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी रह चुके हैं। सुल्ताना को आज नई कैबिनेट में जल आपूर्ति और स्वच्छता, सामाजिक सुरक्षा, महिला और बाल विकास तथा मुद्रण एवं स्टेशनरी विभागों का प्रभार सौंपा गया था। परगट सिंह शिक्षा और खेल मंत्री थे, जबकि योगिंदर ढींगरा पंजाब कॉन्ग्रेस के महासचिव पद पर थे।

खुद को ‘पैगंबर’ घोषित करने वाली महिला प्रिंसिपल को लाहौर कोर्ट ने दी सजा-ए-मौत: पाकिस्तान के फैसले पर लोगों में छिड़ी बहस

पाकिस्तान में कट्टरपंथी और पुरुषवादी सोच के कारण एक महिला को सजा-ए-मौत सुनाई गई है। महिला प्राइवेट स्कूल की प्रिंसिपल है जिसने साल 2013 में पैगंबर मोहम्मद को इस्लाम का अंतिम पैगंबर मानने से इनकार कर दिया था। साथ ही खुद को इस्लाम का पैगंबर बताया था।

पाकिस्तानी रिपोर्ट के अनुसार, लाहौर की डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन कोर्ट ने सोमवार (सितंबर 27, 2021) को निश्तर कॉलोनी के एक प्राइवेट स्कूल की हेडमास्टर सलमा तनवीर को मौत की सजा सुनाई। कोर्ट ने उस पर 50000 पाकिस्तानी रुपए का जुर्माना भी लगाया।

बता दें कि एक स्थानीय मस्जिद के नमाजी नेता कारी इफ्तिखार अहमद रजा की शिकायत पर निश्तर कॉलोनी पुलिस ने महिला के खिलाफ 2 सितंबर 2013 को प्राथमिकी दर्ज की थी।

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय के जज मंसूर अहमद ने सुनवाई के दौरान फैसला सुनाते हुए कहा कि तनवीर ने पैगंबर मोहम्मद को इस्लाम का अंतिम पैगंबर नहीं मान कर ईशनिंदा की। इस दौरान तनवीर के वकील मोहम्मद रमजान ने दलील दी कि उनके क्लाइंट की मानसिक हालात ठीक नहीं है और अदालत को इस तथ्य पर गौर देना चाहिए।

हालाँकि, कोर्ट में पेश हुई महिला की मेडिकल रिपोर्ट से यह साबित हुआ कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक है। दरअसल, शिकायतकर्ता मौलवी की ओर से पेश हुए वकील ने अदालत को पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के एक मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें कहा गया था कि आरोपित महिला संदिग्ध मुकदमा चलाने के लिए फिट है क्योंकि उसकी मानसिक स्थिति बिल्कुल ठीक है। इसके बाद अदालत ने उसे सजा-ए-मौत सुनाई और पीपीसी की 295 धारा के तहत 50000 रुपए का जुर्माना देने को कहा।

लाहौर कोर्ट में सुनाए गए इस फैसले की अब सोशल मीडिया पर चर्चा है। यूजर्स पाकिस्तान के कट्टरपंथ और पुरुषवादी सोच को इसका जिम्मेदार बता रहे हैं। वहीं कुछ मानवाधिकारों को लेकर सवाल कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून में बहुत सख्त सजा का प्रावधान है। कथिततौर पर, 1987 से लेकर अब तक 1472 लोगों पर ईशनिंदा का आरोप पाकिस्तान में लगाया गया है। इस आरोप में फँसे या फँसाए लोग अपनी पसंद का वकील तक नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें डर होता है कि संवेदनशील मुद्दों पर केस लड़ना उनके लिए खतरा बन सकता है। अक्सर इस्लाम के विरोध में बोलने वाले लोग या फिर अल्पसंख्यक इसका शिकार होते हैं।

तेलंगाना की ‘मेडिसिन फ्रॉम द स्काई’ परियोजना: चक्रवात गुलाब के कारण आई बाढ़ में 16 महीने के बच्चे को ऐसे मिली दवा

तेलंगाना सरकार ने हाल ही में ‘मेडिसिन फ्रॉम द स्काई’ परियोजना शुरू की थी, जिसमें टीकों और दवाओं को वितरित करने के लिए ड्रोन का उपयोग करती है। इस परियोजना ने अपना रिजल्ट दिखाना शुरू कर दिया है। इसके तहत हाल ही में ड्रोन के जरिए 16 महीने के बच्चे के लिए बहुत ही जरूरी दवाएँ पहुँचाई गई थीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, 27 सितंबर को स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने चक्रवात गुलाब के कारण हुई बारिश के कारण उग्र रूप धारण कर चुकी मंजीरा नदी के पार एक ड्रोन तैनात किया था।

कथित तौर पर बीमार बच्चे का परिवार कामारेड्डी जिले के पितलम मंडल के कुर्ठी गाँव का रहने वाला है। बच्चा पेट में दर्द और बुखार से पीड़ित था। सरकारी डॉक्टरों ने फोन पर सलाह दी। मामले की जानकारी मिलने के स्थानीय स्वास्थ्य कर्मचारियों ने कामारेड्डी कलेक्टर कार्यालय को मामले की जानकारी दी और पीड़ित तक दवा की आपूर्ति करने के लिए ड्रोन के इस्तेमाल की अनुमति माँगी।

जिला प्रशासन से इसकी अनुमति मिलने के बाद करीब 4 बजे तकनीकी टीम ने व्यवस्था की और यह सुनिश्चित करने के लिए कुछ परीक्षण किए कि ड्रोन दवाओं के साथ नदी पार कर सके। न्यू इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार डोनिता जोस ने नदी के किनारे से ड्रोन के उड़ान भरने के वीडियो साझा किए।

स्काई प्रोजेक्ट

यह परियोजना 11 सितंबर 2021 को तेलंगाना सरकार द्वारा विश्व आर्थिक मंच, नीति आयोग और हेल्थनेट ग्लोबल (अपोलो हॉस्पिटल्स) के साथ साझेदारी में शुरू की गई थी। यह परियोजना वर्तमान में राज्य के 16 क्षेत्रों में सक्रिय है। ट्रायल रन के दौरान ड्रोन ने लॉन्च साइट से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लगभग 5 किलोग्राम टीके वितरित किए।

दिलीप घोष पर हमले में 8 गिरफ्तार: ‘ममता का राजनीतिक दिखावा’ कह BJP ने की अधिकारियों पर एक्शन की माँग

ममता बनर्जी के पश्चिम बंगाल से लॉ एन्ड ऑर्डर पर आए दिन सवाल उठा करते हैं। अब फिर वहीं से खबर। कल सोमवार को (27 सितंबर 2021) पश्चिम बंगाल के भवानीपुर में चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा नेता दिलीप घोष पर उनके अंगरक्षकों की मौजूदगी में हमला किया गया था। इस हमले में भारी जनदबाव के चलते आखिरकार पश्चिम बंगाल पुलिस को एक्शन लेना पड़ा है। ताजा समाचार मिलने तक 8 गिरफ्तारियाँ की जा चुकी हैं।

BJP नेता दिलीप घोष के अंगरक्षकों की मौजूदगी में हुए इस हमले के बाद मीडिया, सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर ये सवाल उठने शुरू हो गए थे कि आखिरकार पश्चिम बंगाल में सुरक्षित कौन? शुरुआत में पश्चिम बंगाल पुलिस ने हीलाहवाली की पर जब इस मामले ने राष्ट्रव्यापी तूल पकड़ा तब से अब तक 8 गिरफ्तारियाँ की जा चुकी हैं।

इस मामले से संबंधित केस को भवानीपुर थाने में दर्ज किया गया है। दिलीप घोष पर हमले की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुरक्षा अधिकारियों के साथ भी उस भीड़ ने धक्कामुक्की की थी। भीड़ के हाथों में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस का झंडा था। मजबूरी में आत्मरक्षार्थ अंगरक्षकों को पिस्टल भी निकालनी पड़ी थी।

इस घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता व केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि ये गिरफ्तारियाँ महज ममता सरकार का सियासी दिखावा भर है, यह सिर्फ जनाक्रोश को दबाने के लिए की गई हैं।

हमले और गिरफ्तारी पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा कि भाजपा का प्रतिनिधि मंडल चुनाव आयोग से इस मसले पर मिला। उन्होंने बताया कि प्रतिनिधि मंडल ने न सिर्फ अभियुक्तों बल्कि उस स्थान पर नियुक्त प्रशासनिक अधिकारियों पर भी कार्रवाई की माँग की है, जो सुरक्षा व्यवस्था को सुचारू रखने में नाकाम रहे।

बतौर भूपेंद्र यादव पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने लोकतंत्र की परिभाषा ही बदल डाली है और उन्होंने हिंसा को ही लोकतंत्र बना डाला है। उनके अनुसार 8 गिरफ्तारियों के बहाने ममता बनर्जी इस हमले के पीछे के मुख्य उन सूत्रधारों को बचाना चाह रही हैं, जो उनकी पार्टी तृणमूल के पदाधिकारी व कार्यकर्ता हैं। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि साक्ष्य संकलन के तौर पर इस हमले की एक CD भी तैयार की गई है।

फिलहाल इस पूरे मामले में बंगाल में लंबे समय तक शासक रहे वामपन्थी तत्व भी खामोश हैं और समता, समानता, अहिंसा जैसे सिद्धांतो की दुहाई फिलहाल मूक स्वरूप में है। विपक्षी दलों में से भी किसी ने अभी तक सुरक्षाबलों की मौजूदगी में एक विशेष भीड़ के इस हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया नहीं दी है।

3 बहनें, तीनों का एक ही लड़के पर आया दिल, हुईं घर से फरार: रामपुर पुलिस ने शुरू की जाँच

अक्सर सुनने में आता है कि एक ही लड़के पर दो लड़कियों का क्रश था। लेकिन ऐसा बहुत ही कम ही देखने को मिलता है कि दो बहनें एक ही लड़के के साथ प्रेम करने लगी हों और दोनों में से किसी को भी इससे समस्या न हो। एक लड़के पर तीन सगी बहनों का दिल आ जाना तो बहुत ही दुर्लभ है। लेकिन उत्तर प्रदेश के रामपुर में ऐसा हुआ है। यहाँ एक ही लड़के के प्यार में पागल तीन बहनें उसके साथ घर से भाग गईं।

यह अजीब घटना रामपुर के अजीमनगर थाना क्षेत्र की है। करीब एक सप्ताह पहले उस वक्त सामने आया जब तीनों लड़कियाँ अपने माता-पिता या अन्य रिश्तेदारों को बताए बिना ही लड़के के साथ अपने घर से फरार हो गईं। एक ही समय में तीनों बहनों के अचानक गायब हो जाने से घबराए परिजन उन्हें ढूँढने के लिए लिए निकल पड़े।

करीब 8 दिन पहले अपने घर से लापता हुई तीनों बहनों को उनके परिजन आसपास के गाँवों में उनकी तलाश कर रहे हैं। परिवार के सदस्य अपने रिश्तेदारों और परिचितों से भी उनके बारे में पूछताछ कर रहे हैं, लेकिन अभी तक तीनों बहनों का कोई पता नहीं चला है।

जहाँ तीनों बहनों की तलाश की जा रही है, वहीं गाँव और आसपास के इलाके में तीन लड़कियों के लापता होने की खबर फैल गई है। उनके लापता होने के संभावित कारण को लेकर ग्रामीणों में तरह-तरह की अफवाहें और अटकलें लगाई जाने लगीं। कहानी ये भी है कि तीनों लड़कियों का एक आदमी के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था।

बताया जा रहा है कि तीनों बहनों का एक ही आदमी के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था और इसी कारण संभवत: वो उसके साथ भाग गईं। इनमें से दो बहनें बालिग थीं जबकि एक नाबालिग (14) थी। परिवार की बदनामी के डर से लड़कियों के परिजनों ने अब तक चुप्पी साध रखी है और उन्होंने पुलिस में शिकायत तक दर्ज नहीं कराई है। लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस थानाधिकारी रवींद्र कुमार ने पुष्टि की कि परिवार ने शिकायत दर्ज नहीं की है और मामले में शिकायत दर्ज होने पर पुलिस उचित कार्रवाई करेगी।

बहरहाल, रामपुर पुलिस ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए अजीमनगर थाना प्रभारी को मामले की जाँच शुरू करने का आदेश दिया है।

तीन बहनों में से एक तलाकशुदा और एक नाबालिग

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, तीन बहनों में सबसे बड़ी को सबसे पहले उस आदमी से प्यार हुआ। हालाँकि, दोनों का प्यार उस वक्त अधूरा रह गया जब लड़की की शादी हो गई और वह अपने ससुराल चली गई। कुछ महीने बाद, उसका उसके पति से तलाक हो गया और वह अपने मायके चली आई। मायके आने के बाद उसे पता चला कि जिस लड़के से वो प्यार करती थी उसे अब उसकी छोटी बहन डेट कर रही है। हालाँकि, इस बीच दोनों के बीच आपसी समझ स्थापित हुई और वो दोनों उसी लड़के को डेट करने लगीं। अब दोनों बहनों का एक ही आदमी से प्रेम प्रसंग चल रहा था।

इस बीच एक दिन जब दोनों बहने अपने इकलौते प्रेमी के साथ घर से भागने लगीं तो तीसरी बहन जो एक नाबालिग भी है, उसने भी उसी लड़के के साथ भागने का फैसला किया। इसके बाद, तीनों बहनें कथित तौर पर उक्त व्यक्ति के साथ भाग गईं।

बंगाल का मुख्य सचिव TMC (सत्ता वाली पार्टी) का नौकर: कलकत्ता HC ने लताड़ा, जानिए पूरा मामला

कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल सरकार के मुख्य सचिव को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि बंगाल सरकार के मुख्य सचिव ने एक लोक सेवक की तरह काम करने की बजाय तृणमूल कॉन्ग्रेस के ‘नौकर/गुलाम/सेवक’ की तरह खुद को दर्शाया। कोर्ट ने यह टिप्पणी मंगलवार (सितंबर 28, 2021) को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसे मुख्य सचिव एच के द्विवेदी के उस अनुरोध के ख़िलाफ़ दायर किया गया था जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग से कहा था कि भवानीपुर के उपचुनाव में तेजी लाई जाए वरना संवैधानिक संकट पैदा होगा।

जनहित याचिका को सयान बनर्जी द्वारा दायर किया गया था। इस पर मुख्य न्यायाधीश (कार्यवाहक) राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति राजर्षि भारद्वाज की खंडपीठ ने सुनवाई की। अदालत ने पाया कि द्विवेदी ने चुनाव आयोग (ईसी) को ‘संवैधानिक संकट’ की स्थिति का हवाला देते हुए कहा था कि ऐसी स्थिति हो सकती है अगर बंगाल के भवानीपुर में नहीं किए जाते। चुनाव आयोग को समझाने के लिए, मुख्य सचिव ने दावा किया कि कोलकाता में कोरोना वायरस महामारी और ‘बाढ़ की स्थिति’ दोनों नियंत्रण में हैं।

बता दें कि चुनाव आयोग ने 3 संसदीय क्षेत्रों और 31 राज्य विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव टाल दिया था, लेकिन बाद में उन्होंने 30 सितंबर को भवानीपुर में चुनाव कराने के द्विवेदी के विशेष अनुरोध को मान लिया। उसी आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई थी। जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया, लेकिन साथ ही उसने मुख्य सचिव एचके द्विवेदी के खिलाफ कुछ तीखी टिप्पणी की।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि अगर उपचुनाव नहीं होते तो कोई संवैधानिक संकट नहीं आता। राज्य विधानसभा में 293 सदस्य होते हैं। इनमें सत्तारूढ़ दल ने 213 में जीत हासिल की। ऐसे में एक सदस्य इतना  महत्वपूर्ण नहीं है।

याचिका में लिखा, “प्रतिवादी संख्या 5 नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार गई थी जिसके लिए उसने इस न्यायालय में चुनाव याचिका दायर की थी, जो लंबित है। इस तथ्य के बावजूद कि वह चुनाव में हार गईं, उन्हें पार्टी के नेता के रूप में चुना गया और उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। केवल इसलिए कि एक व्यक्ति अभी तक निर्वाचित नहीं हुआ है, कोई संवैधानिक संकट पैदा नहीं होगा क्योंकि विधानसभा के किसी अन्य निर्वाचित सदस्य को पार्टी के नेता के रूप में और मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ दिलाई जा सकती है।”

कोर्ट ने बंगाल के मुख्य सचिव को लेकर क्या कहा

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सुनवाई में कहा कि मुख्य सचिव ने चुनाव आयोग को राज्य में महामारी और बाढ़ की स्थिति के बारे में गुमराह किया ताकि चुनावी प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। कोर्ट ने जोर देकर कहा “राज्य के मुख्य सचिव द्वारा चुनाव आयोग को दी गई जानकारी तथ्यों के विपरीत थी क्योंकि COVID-19 महामारी के कारण राज्य प्रतिबंधों को 30 सितंबर, 2021 तक बढ़ा दिया गया था…।” न्यायाधीशों ने कहा कि कोरोना वायरस की स्थिति नियंत्रण में नहीं थी क्योंकि राज्य सरकार को लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

उन्होंने आगे कहा, “चुनाव आयोग को भी बाढ़ की स्थिति के बारे में गुमराह किया गया था। यह सभी को पता है कि राज्य में अत्यधिक बारिश हुई थी।” कोर्ट ने कहा कि द्विवेदी को चुनाव आयोग को लिखने का अधिकार नहीं है। फैसले में कहा गया, “… सबसे अपमानजनक बात मुख्य सचिव का आचरण है, जिन्होंने खुद को एक लोक सेवक की तुलना में सत्ता में राजनीतिक दल के नौकर के रूप में अधिक पेश किया, और कहा कि अगर भवानीपुर का चुनाव नहीं हुआ तो संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है जहाँ से प्रतिवादी संख्या 5 (ममता बनर्जी) चुनाव लड़ना चाहती हैं।” 

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने द्विवेदी को लताड़ते हुए कहा, “चुनाव हारने या जीतने वाले एक व्यक्ति के साथ सरकार को किस संवैधानिक संकट का सामना करना पड़ सकता है, यह नहीं बताया गया है। मुख्य सचिव को कैसे पता चला कि प्रतिवादी संख्या 5 को भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना है? वह पार्टी के प्रवक्ता या रिटर्निंग ऑफिसर नहीं थे।”

कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल मुख्य सचिव पर की टिप्पणी

कोर्ट ने मामले में निष्कर्ष निकालते हुए कहा, “हम चुनाव आयोग को एक पत्र लिखकर मुख्य सचिव के आचरण के बारे में अपना कड़ा विरोध दर्ज करते हैं, जिसमें कहा गया है कि भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र के लिए उपचुनाव नहीं होने की स्थिति में ‘संवैधानिक संकट’ होगा। वह एक लोक सेवक है, जिन्हें कानून के प्रावधानों के अनुसार अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना है, जो भी सत्ता में हो। उन्हें यह सुनिश्चित नहीं करना है कि कोई व्यक्ति विशेष सत्ता में आए और उसकी अनुपस्थिति में ‘संवैधानिक संकट’ उत्पन्न हो।”

भाई के स्टिंग से बौखलाए राकेश टिकैत, मीडिया को दी खुलेआम धमकी, कहा- ‘बचना है तो साथ दो नहीं तो आप भी गए’

छत्तीसगढ़ के राजिम में मंगलवार (27 सितंबर 2021) को किसान महापंचायत में शामिल होने पहुँचे राकेश टिकैत ने मीडिया को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मीडिया को धमकाते हुए कहा, “सरकार का अगला टारगेट मीडिया है, आपको बचना है तो साथ दे दो नहीं तो आप भी गए।”

मीडिया से बातचीत में टिकैत ने कहा कि बीजेपी को बेचने की बीमारी है। कानून बनाकर आधा देश बेच दिया। इस दौरान पत्रकारों ने जब उनसे छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने नजरअंदाज कर दिया।

राकेश टिकैत ने महापंचायत सहित अन्य सवालों पर आगे कहा, ”इस समय सबसे बड़ी समस्या एमएसपी (MSP) की है, जो पूरे देश की है। ये लड़ाई दिल्ली से। छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस की सरकार है तो क्या हुआ? कुछ न कुछ तो यहाँ भी निकलेगा।” उन्होंने भारत बंद के दौरान लगे जाम को लेकर कहा कि दिल्ली और गुरुग्राम पुलिस ने जाम किया और दिखाया कि हमने जाम लगाया है।

दरअसल, बीकेयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और तथाकथित किसान नेता राकेश टिकैत के भाई नरेश टिकैत, ज़ी न्यूज़ द्वारा किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन में अपनी दोहरी नीतियों के कारण पकड़े गए हैं। इसमें उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है कि विदेशी कंपनी को न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) से कम कीमत पर गन्ना और फ़ैक्ट्री के लिए सस्ती जमीन भी दिला सकते हैं यदि नकद में भुगतान किया जाए। यह स्टिंग ऑपरेशन सामने आने के बाद से राकेश टिकैत बौखला गए हैं।

यही कारण है कि टिकैत सार्वजनिक रूप से मीडिया को धमकाते हुए नजर आ रहे हैं। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इससे किसान नेता एक बार फिर सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गए हैं। एक यूजर ने लिखा, ”अब ये किसान से गुंडा बनने लग गया, खुले आम मीडिया को धमकी दे रहा है। साथ दे दो तो ठीक है नहीं तो गए। क्या मतलब है इस लाइन का।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “रहने दे तिहाड़ी। अक्खा पब्लिक जानती है तुम एक दलाल हो।”

गौरतलब है कि नरेश टिकैत को लगभग 7 मिनट 24 सेकंड के वीडियो में गुड़ फ़ैक्ट्री और उसी के लिए गन्ना खरीद के प्रस्ताव पर चर्चा करते देखा जा सकता है। एक रिपोर्टर, जो एक उद्योगपति व्यापारी के रूप में नरेश टिकैत के सामने एक व्यापारिक सौदे का प्रस्ताव रख रहा है, को नरेश टिकैत से गुड़ की फैक्ट्री खोलने के बारे में बात करते हुए देखा जा सकता है और जब बातचीत आगे बढ़ते हुए गन्ने की कीमतें बढ़ीं तो… यहाँ पहुँची तो नरेश टिकैत को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “बहुत अच्छा, हमारे यहाँ बड़ी मात्रा में गन्ना है, और ये गन्ने आपको सही दाम पर मिलेंगे, मिल भी इतना गन्ना नहीं ले सकती, बस भुगतान नकद में होना चाहिए, मिल में माँगे गए दर से भी कम कीमत पर आपको गन्ना मिलेगा, जैसा कि मिल की कीमत है, 325 रुपए प्रति क्विंटल है, जबकि क्रशर (कोल्हू) की कीमत 225 रुपए, 250 रुपए या 275 रुपए में मिल जाएगा आपको..”