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सोशल मीडिया पर फँसाया, गर्भवती होने पर कहने लगा ईसाई बनो: हिन्दू युवती को घर से निकाला, ‘संजय मसीह’ की तलाश में पुलिस

मध्य प्रदेश के भोपाल में जबरन धर्म परिवर्तन कराने का मामला सामने आया है। राज्य में एक युवती को ईसाई लड़के द्वारा अपने प्यार के जाल में फँसा कर शादी कर ली गई। जिसके बाद उसे ईसाई बनने के लिए मजबूर किया जाने लगा। वहीं जब युवती ने इनकार किया तो युवक ने उसे घर से निकाल दिया। जिसके बाद युवती ने पुलिस की शरण ली और युवक के खिलाफ पुलिस में शिकायत की। युवती की शिकायत पर पुलिस ने आरोपित के खिलाफ मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2020 के तहत मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

सोशल मीडिया पर हुई थी मुलाकात

जानकारी के अनुसार मामला राजधानी के कोहेफिजा इलाके का है। जहाँ 26 वर्षीय युवती ने पुलिस से की गई शिकायत में बताया कि करीब 1 साल पहले उसकी सोशल मीडिया पर संजय सिंह से मुलाकात हुई थी। जिसके बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और फिर प्रेम प्रसंग चालू हो गया। इसी बीच नजदीकियाँ बढ़ी और युवती प्रेगनेंट हो गई। पीड़िता ने यह भी बताया कि इस 1 साल के बीच दोनों लिव इन रिलेशनशिप में भी रहे।

शादी का दवाब बनाने पर संजय ने बताई हकीकत

वहीं जब युवती गर्भवती हुई तो उसने इसकी जानकारी संजय को दी और उससे शादी करने के लिए कहा। जिसके बाद संजय ने खुद के ईसाई होने का खुलासा किया और उसने अपना सही नाम संजय मसीह बताया। लेकिन बवाल के डर से संजय की सच्चाई जानने के बाद भी युवती शादी के लिए तैयार हो गई। जिसके बाद दोनों ने 14 जनवरी 2021 को आर्य समाज से शादी कर ली।

बच्चे के जन्म के बाद बनाया दबाव

युवती ने आगे बताया कि जब उसने 19 अप्रैल को बच्चे को जन्म दिया। उसके बाद संजय ने उस पर ईसाई होने का दबाव बनाया। संजय का कहना था कि बच्चा ईसाई धर्म में रहेगा और युवती को भी धर्म परिवर्तन करने के लिए कहने लगा। वह बच्चे को ईसा मसीह की सेवा के लिए सौंपने का दबाव बनाने लगा। जिसके बाद युवती हैरान रह गई और उसने खुद का और अपने बच्चे का धर्म परिवर्तन करने से साफ इनकार कर दिया।

आरोप है कि इसके बाद संजय ने उसे घर से निकाल दिया। उसकी नदद सोनल मसीह ने भी उनका ब्रेनवॉश करने की बहुत कोशिश की। उसने उसे शादी टूटने तक का डर दिखाया। पति और ननद द्वारा धर्म परिवर्तन के लिए दिए जा रहे दबाव से परेशान होकर युवती ने थाने में शिकायत दर्ज करा दी। पुलिस दोनों भाई-बहन की तलाश कर रही है।

‘भारत के ग्रैंड मुफ़्ती’ की संस्था को ₹146 करोड़ का विदेशी चंदा: अमित शाह के मंत्रालय ने रद्द किया केरल के NGO का लाइसेंस

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने विदेशी योगदान नियमन अधिनियम (FCRA), 2010 के प्रावधानों के उल्लंघन पर प्रमुख सुन्नी नेता शेख अबूबकर अहमद से जुड़े केरल के एक गैर सरकारी संगठन (NGO) के विदेशी फंडिंग लाइसेंस को निलंबित कर दिया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। मरकज़ुल इघासथिल कैरियाथिल हिंडिया (Markazul Ighasathil Kairiyathil Hindiyya) नामक NGO कोझीकोड के पास स्थित है। यह एक टॉप विदेशी वित्त पोषित संगठन है। इस संगठन को पिछले तीन वर्षों में विदेशों से 146 करोड़ रुपए से अधिक का डोनेशन मिला है। हालाँकि, गृह मंत्रालय ने NGO को FCRA मानदंडों का उल्लंघन करते हुए पाया। जिसके बाद इसे पूर्व अनुमति के बिना या निलंबन आदेश के निरस्त होने तक किसी भी अंतरराष्ट्रीय डोनर्स से धन प्राप्त करने से रोक दिया।

27 अगस्त, 2021 को जारी निलंबन आदेश में कहा गया कि गैर सरकारी संगठन FCRA मानदंडों का उल्लंघन करते हुए विदेशी योगदानों का अनुचित उपयोग किया और साथ ही वर्ष 2019-20 के लिए वार्षिक FCRA रिटर्न जमा करने में विफल रहा।

NGO के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने गृह मंत्रालय से मिले निलंबन आदेश को मामूली बताने की कोशिश की। अधिकारी ने कहा कि कुछ लिपिकीय त्रुटियों (clerical errors) के कारण निलंबन हुआ। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि ग्रुप आदेश को पढ़ने के बाद स्पष्टीकरण जारी करेगा।

हालाँकि, एक सरकारी अधिकारी, जिनसे टाइम्स ऑफ इंडिया ने बात की थी, ने कहा कि मरकज़ुल के एफसीआरए लाइसेंस को निलंबित करने का निर्णय एक उचित जाँच प्रक्रिया का पालन करने के बाद लिया गया था। 05.04.2018 को एनजीओ को सवालों की एक लिस्ट भेजी गई थी। अधिकारी ने कहा कि सवालों के जवाब ने पुष्टि की कि एसोसिएशन ने एफसीआरए की धारा 12(4)(ए)(vi), धारा 18 और धारा 19 का उल्लंघन किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, जमीन की खरीद के लिए एसोसिएशन को 50 लाख रुपए का विदेशी फंड मिला। हालाँकि, 13.01.2015 को, भूमि सौदे को रद्द करने पर गैर सरकारी संगठन को राशि वापस मिल गई। यह राशि विदेशी योगदानकर्ता के बैंक अकाउंट में जमा नहीं किया गया। मरकजुल ने कहा कि पैसे अनाथ देखभाल कार्यक्रम के लिए वितरित किया गया था। हालाँकि, जाँच और एनजीओ के रिकॉर्ड से पता चला कि राशि प्राप्त करने से छह महीने पहले जुलाई 2014 से दिसंबर 2014 के बीच ही यह नकद ट्रांसफर किया गया था।

गृह मंत्रालय के आदेश में कहा गया है, “रद्द किए गए लैंड डीड के कारण प्राप्त 50 लाख रुपए की राशि का हिसाब नहीं है और ऐसा मालूम होता है कि इसका दुरुपयोग किया गया है। यह एफसीआरए की धारा 12(4)(ए)(vi), धारा 18 और धारा 19 का उल्लंघन था।”

एसोसिएशन पर व्यक्तिगत जरूरतों के लिए समूह द्वारा प्राप्त धन का उपयोग करने का भी आरोप है। गृह मंत्रालय ने एफसीआरए की धारा 12(4)(ए)(vi) का एक और उल्लंघन बताते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि संगठन के पैसे से वाहन किसी व्यक्ति के नाम पर खरीदा गया था न कि एसोसिएशन के नाम पर। आदेश में यह भी कहा गया है कि एनजीओ ने वक्फ बोर्ड ऑफ इंडिया से इस्लामिक एजुकेशन बोर्ड ऑफ इंडिया द्वारा लीज पर ली गई जमीन पर इमारत के निर्माण के लिए विदेश से प्राप्त धन का उपयोग किया था।

इसके अलावा, मरकजुल ने वर्ष 2019-20 के लिए अपना वार्षिक रिटर्न दाखिल नहीं किया, जो एफसीआरए की धारा 18 का उल्लंघन है। शेख अबुबकर अहमद उर्फ ​​कंथापुरम ए पी अबूबकर मुसलियार केरल के राजनेताओं में एक प्रमुख व्यक्ति हैं और उनके अनुयायियों द्वारा उन्हें ‘भारत का ग्रैंड मुफ्ती’ कहा जाता है। उन्हें 2000 में मरकज़ुल की स्थापना का श्रेय दिया जाता है और वे शिक्षा, सांस्कृतिक बहाली, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य और स्वच्छता आदि जैसे क्षेत्रों से संबंधित कार्यों में शामिल हैं। वह जामिया मरकज़ के चांसलर, सिराज डेली के अध्यक्ष और अखिल भारतीय सुन्नी जमीयतुल उलमा के महासचिव भी हैं। 

हमने केरल के NGO के बारे में क्या पाया

हमने वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए FCRA ऑनलाइन वेबसाइट से मरकजुल इघासथिल कैरियाथिल हिंडिया द्वारा जमा किए गए एफसी-4 फॉर्म को एक्सेस किया। इससे हमें पता चला कि वित्तीय वर्ष के दौरान संगठन को एक विदेशी स्रोत से 70,15,29,185.06 रुपए प्राप्त हुए।

35 लिस्टेड विदेशी योगदानों में से 28 यूएई से थे। अन्य ओमान, तुर्की और यूनाइटेड किंगडम से थे। यूएई रेड क्रिसेंट सोसाइटी और दुबई चैरिटी एसोसिएशन ने समूह को बड़ी रकम दान की है।

Source: The NGO’s FC-4 form

पिछले वित्तीय वर्ष, 2017-18 में ग्रुप को 33,61,18,095.60 रुपए विदेशी योगदान के रूप में मिला। यूएई ने फिर से सबसे अधिक दान किया था। 

‘NCP नेता’ ने महिला सरपंच को पटका, घसीट-घसीट कर मारा: वीडियो वायरल, पीड़िता ने कहा – नहीं मिला न्याय

महाराष्ट्र के पुणे से राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के कार्यकर्ता की गुंडागर्दी सामने आई है। पुणे के एक वैक्सीनेशन सेंटर पर NCP कार्यकर्ता द्वारा एक महिला सरपंच की बेरहमी से पिटाई करने का मामला प्रकाश में आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम महाराष्ट्र के पुणे स्थित एक वैक्सीनेशन सेंटर पर एक महिला सरपंच गौरी गायकवाड़ को सुजीत कलभोर नाम के व्यक्ति द्वारा बेरहमी से पीटने वीडियो वायरल हुआ है। आरोपित ने खुद दावा किया है कि वह राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) का कार्यकर्ता है। टीकाकरण केंद्र पर हुए विवाद के बाद आरोपित ने कथित तौर पर गौरी को थप्पड़ भी मारा था।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि सुजीत कलभोर महिला सरपंच गौरी को जमीन पर पटककर उसे पीटता है औऱ उसे घसीटता भी। वीडियो में दो महिलाएँ भी वहाँ पर देखी जा सकती हैं, जो कि बाद में महिला सरपंच को आरोपित से बचाती हुई देखी जा सकती हैं।

इस मामले में पीड़िता सरपंच गौरी गायकवाड़ ने पुलिस में शिकायत कराई है। वहीं पुलिस ने महिला सरपंच और उनके 3 सहयोगियों और सुजीत कलभोर के खिलाफ 2 अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की है।

मुझे अभी तक न्याय नहीं मिला: पीड़िता

एएनआई की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, एनसीपी के कार्यकर्ता सुजीत कलभोर द्वारा बेरहमी से पीटी गई महिला सरपंच गौरी ने कहा, “मुझे अभी तक न्याय नहीं मिला है। सुजीत कालभोर ने मुझे पीटा। सरपंच जब अच्छा काम कर रही है तो उसके साथ मारपीट की जा रही है। राकांपा कार्यकर्ताओं ने एक महिला पर हाथ उठाया है।”

रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना को लेकर एनसीपी ने चुप्पी साध ली है। पार्टी की ओर से अभी तक किसी भी तरह का कोई भी बयान जारी नहीं किया गया है।

सरकार ने अंडे बेचने के लिए दी मुर्गियाँ, लोग खा गए: Pak की इकोनॉमी सुधारने का सपना टूटा, इमरान की योजना धड़ाम

पकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने साल 2018 में देश से गरीबी मिटाने के लिए ‘मुर्गी पालन’ योजना शुरू की थी। इसके तहत सरकार ने गरीब महिलाओं को अंडा और चिकन उपलब्ध कराने का वादा किया था, जिससे वह खुद का मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू कर सकें। हालाँकि, जिस योजना को इमरान खान मास्टर स्ट्रोक समझ रहे थे, वह धराशायी हो गई है।

पाकिस्तानी समाचार मीडिया सिटी 41 ने गुरुवार (2 सितंबर 2021) को बताया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा शुरू की गई ‘मुर्गी पालन’ योजना से देश के गरीबों को कोई भी लाभ नहीं पहुँचा।

रिपोर्ट के मुताबिक, मुर्गियों के अंडों को बाजार में बेचने की बजाए, मुर्गे लेने वाले नागरिकों ने उन्हें काटकर खा लिया। इनमें से कुछ मुर्गियाँ अंडे भी नहीं देती थीं। आंतरिक रिपोर्ट कहती है कि अब तक तीन प्रतिशत मुर्गियाँ मर चुकी हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, 90% लोगों ने बाजार में एक भी अंडा नहीं बेचा है और खुद ही इसका सेवन किया। इनमें 10% मुर्गियाँ अंडे भी नहीं देतीं। हालाँकि, 80% नागरिक चाहते हैं कि यह योजना जारी रहे।

‘मुर्गी पालन’ योजना इस साल पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में शुरू की गई थी। योजना के तहत यहाँ 2021 के अंत तक 5,00,000 मुर्गियों को वितरित किया जाएगा। यहाँ केवल 1,050 पाकिस्तानी रुपए की सब्सिडी दर पर लोगों को मुर्गियाँ दी जाएँगी, जबकि इसकी वास्तविक कीमत 1,500 रुपए है। पिछले वर्ष, 50,000 परिवारों के बीच 3,24,000 मुर्गियाँ वितरित की गई थी। इस साल इस योजना के अंतर्गत 72,000 परिवारों को लाभ पहुँचने की उम्मीद है।

सहायक निदेशक और परियोजना पर्यवेक्षक डॉ. अतहर महमूद ने कहा, “पंजाब में वितरित होने वाली सभी मुर्गियों को हमारे पोल्ट्री फार्म में पाला जाता है।” उन्होंने कहा कि पंजाब में रावलपिंडी, अटक, दीना, सरगोधा, मुल्तान, बहावलपुर, बहावलनगर, गुजरात, मियांवाली और डेरा गाजी खान समेत 10 बड़े सरकारी पोल्ट्री फार्म हैं। यहाँ मुर्गियाँ सालाना 240 मिलियन करीब 2 अरब 40 करोड़ ( 2,40,00,00,000) अंडे देती हैं।”

यह पाकिस्तान से गरीबी मिटाने के लिए एक योजना है। इसमें गरीब महिलाओं को अंडा और चिकन दिया जाता है, ताकि वह अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें। यह बात पाकिस्तान में विपक्षी दलों को रास नहीं आई, जिसको लेकर उन्होंने मुर्गी पालन योजना का मजाक उड़ाया था। हालाँकि, इमरान खान ने अपना बचाव करते हुए कहा था, “उपनिवेशक मानने वालों के लिए जब देसी मुर्गे गरीबी से लड़ने की बात करते हैं तो उनका मज़ाक उड़ाया जाता है, लेकिन अगर कोई “विलायती” देसी चिकन के बारे में बात करे तो उसे उसकी प्रतिभा समझा जाता है। उन्होंने दिसंबर 2018 में ट्विटर पर एक लेख साझा किया था जो बिल गेट्स के चिकन प्लान से संबंधित था।

हिजाब के बिना शिक्षा व नौकरी से महरूम रहेंगी अफगानिस्तान की महिलाएँ: तालिबान का फरमान, कहा – ‘यहाँ शरिया चलेगा’

अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के बाद अब सरकार बनाने के लिए तालिबान आखिरी चरणों में है। यह बात भी लगभग साफ हो चुकी है कि तालिबान शासन की कमान मुल्ला बरादर को सौंपी जाएगी। लेकिन तालिबान के अस्तित्व में आने के बाद से लगातार महिलाओं के शोषण के आरोप लगते जा रहे हैं। 

एक ओर जहाँ तालिबान के प्रवक्ता दुनिया के सामने ये बयान दे रहे हैं कि तालिबान की सरकार में महिलाओं को काम करने की आजादी दी जाएगी तो दूसरी ओर तालिबानी फरमान चौंकाने वाले रहे हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, तालिबान ने कहा है कि देश में केवल हिजाब पहनने वाली महिलाओं को ही शिक्षा और रोजगार का अधिकार मिलेगा।

तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने शुक्रवार (सितंबर 3, 2021) देर रात ‘फॉक्स न्यूज’ से कहा, “महिलाओं के अधिकारों के बारे में कोई समस्या नहीं होगी। उनकी शिक्षा और काम के बारे में भी कोई समस्या नहीं होगी। हमारी संस्कृति है कि वे हिजाब के साथ शिक्षा प्राप्त कर सकती हैं। वे हिजाब के साथ काम कर सकती हैं।” उन्होंने साफ कर दिया कि इसके बिना समाज में रहने का अधिकार इस्लाम और शरियत नहीं देता। उन्होंने कहा कि अमेरिका की संस्कृति और जीने का ढंग यहाँ चलने वाला नहीं है।

प्रवक्ता सुहैल ने कहा कि अमेरिका ने अफगानिस्तान से महिलाओं के बिना हिजाब के काम करने और शिक्षा प्राप्त करने के अधिकार को सुनिश्चित करने की सिफारिश की थी। जो अफगानी संस्कृति को बदलने का एक प्रयास था। संगठन के दृष्टिकोण से यह अस्वीकार्य है। 

बता दें कि तालिबान ने एक सप्ताह तक अफगानिस्तान के विभिन्न प्रांतों पर हमलों और कब्जे के बाद 15 अगस्त को काबुल में प्रवेश किया। इसके बाद राष्ट्रपति अशरफ गनी को पद से इस्तीफा देकर मुल्क छोड़ना पड़ा और अमेरिका समर्थित सरकार गिर गई।

गौरतलब है कि अफगानिस्तान में तालिबानी आतंकियों का खौफ दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। तालिबान के इस्लामी कट्टरपंथी क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए निर्दोष लोगों को भी मार रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तालिबान ने पिछले दिनों एक 21 वर्षीय लड़की की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी, क्योंकि उसने टाइट कपड़े पहने थे और उसके साथ कोई पुरुष रिश्तेदार नहीं था।

खबरें आ रही हैं कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद से तालिबानी आतंकी बेगुनाह लोगों को जबरन घरों से बाहर निकालकर मार रहे हैं। उन्होंने जिन इलाकों पर कब्जा कर लिया है, वहाँ शरियत कानून लागू करते हुए महिलाओं के अकेले घर से बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

इस्लामी धर्मांतरण गिरोह के 8 आरोपितों पर चलेगा ‘देश के विरुद्ध युद्ध छेड़ने का केस’, कोर्ट ने स्वीकार की ATS की याचिका

उत्तर प्रदेश एटीएस ने धर्मांतरण कराने के मामले में गिरफ्तार किए गए मुहम्मद उमर गौतम औऱ जहाँगीर काजी कासमी समेत 8 आरोपितों के खिलाफ ‘भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने’ का आरोप लगाया गया है। लखनऊ की अदालत ने इस मामले में एटीएस की याचिका को स्वीकार कर लिया है।

लखनऊ की एक अदालत ने आठ गिरफ्तार आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 121-ए (धारा 121 के तहत दंडनीय अपराध करने की साजिश) और 123 (युद्ध छेड़ने के इरादे से छिपाना) के तहत आरोप तय कर दिए हैं।

आईपीसी की धारा 121 भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने, या युद्ध छेड़ने का प्रयास करने, या युद्ध छेड़ने के लिए उकसाने से संबंधित है।

ज्ञात हो कि इसी साल 21 जून को एटीएस ने दो मौलवियों – मोहम्मद उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहाँगीर आलम कासमी को दिल्ली से गिरफ्तार किया था और एक ‘बड़े धर्मांतरण रैकेट’ का भंडाफोड़ किया था। इन आरोपितों में कथित तौर पर हजारों लोगों का धर्मांतरण कर इस्लाम कबूल करवाया था।

एजेंसी ने बाद में आठ और लोगों को गिरफ्तार किया और दावा किया कि आरोपितों ने इस्लामिक दावा सेंटर (आईडीसी) के बैनर तले बड़े पैमाने पर धर्मांतरण कराया है। इसमें बड़ी संख्या में विकलांग बच्चों, महिलाओं, बेरोजगारों और गरीबों को अच्छी शिक्षा, नौकरी, शादी और पैसे का वादा किया गया था।

गिरफ्तार किए गए 10 लोगों में से चार महाराष्ट्र, 2 दिल्ली और एक-एक हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश और झारखंड से हैं।

जिन आठ लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 121-ए और 123 लगाई गई है, उनमें मोहम्मद उमर गौतम, मुफ्ती काजी जहांगीर आलम कासमी, सलाहुद्दीन जैनुद्दीन शेख, इरफान शेख उर्फ ​​इरफान खान, डॉक्टर फराज, प्रसाद रामेश्वर कावारे उर्फ ​​आदम, भूप्रिया बंदो उर्फ ​​अरसलान और कौसर आलम शामिल हैं।

एटीएस ने अदालत में अपने आवेदन में कहा कि जाँच में पाया गया कि ये लोग न केवल धर्मांतरण कराते थे, बल्कि जनसंख्‍या संतुलन बिगाड़ कर विभिन्‍न धर्मों के बीच दरार भी पैदा करना चाहते थे।

जाँच एजेंसी ने अदालत के समक्ष एक केस डायरी भी रखी और दावा किया कि उसने जो सबूत इकट्ठे किए हैं वो इन आठ आरोपितों के खिलाफ धारा 121-ए और 123 लागू करने के लिए पर्याप्त हैं। एटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “सबूतों और केस डायरी की पुष्टि करने के बाद अदालत ने आठ आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की दो धाराएँ 121-ए और 123 लगाने की अनुमति दी है।” अब मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर 2021 को होगी।

Pak ने उठाया तालिबानी सेना के पुनर्गठन का बीड़ा, ISI प्रमुख को भेजेगा काबुल: TTP ने उड़ा रखी है इमरान सरकार की नींद

अफगानिस्तान पर नियंत्रण करने के बाद तालिबान ने वहाँ पर अपना शासन स्थापित कर लिया है। अमेरिकी सेना की अफगानिस्तान से वापसी के बाद अब वह जल्द से जल्द अपनी सरकार बनाना चाहता है। इस बीच पड़ोसी पाकिस्तान अफगानिस्तान में ताज़ा हालात के बीच चिंता में आ गया है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सुरक्षा प्रतिष्ठान पश्तून आदिवासियों से बने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान की करतूतों को लेकर काफी चिंतित है क्योंकि वह अफगान तालिबान की तरह सीमा के पार पाकिस्तान में आतंकी घटनाओं को अंजाम दे रहा है। पिछले कुछ सालों में टीटीपी ने आतंकवादी हमले कर कई पाकिस्तानी अधिकारियों और नागरिकों की हत्या की है।

इससे पहले पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख राशिद ने तालिबान को लेकर कहा था, “हम तालिबान नेताओं के संरक्षक हैं। हमने लंबे समय तक उनकी देखभाल की है। उन्हें पाकिस्तान में आश्रय, शिक्षा और एक घर मिला। हमने उनके लिए सब कुछ किया है।”

लेकिन अब पाकिस्तान को अफगान-पाकिस्तान सीमा पर आतंकी हमलों के बढ़ने का डर सताने लगा है। ऐसा इसलिए क्योंकि तालिबान अफगान बलों और अमेरिकी बलों की वापसी से खाली हुए स्थान को भरने की कोशिश कर रहा है। एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी के मुताबिक, “अगले दो से तीन महीने महत्वपूर्ण हैं।” अधिकारी ने कहा, “हमें (अंतरराष्ट्रीय समुदाय को) तालिबान की सेना को पुनर्गठित करने में मदद करनी होगी, ताकि वे अपने क्षेत्र को नियंत्रित कर सकें। क्योंकि उसे न केवल टीटीपी, बल्कि ISIS से भी खतरा है।”

आईएसआई प्रमुख को अफगानिस्तान भेजेगा पाक

सुरक्षा फैसलों तक पहुँच रखने वाले एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी के मुताबिक, पाकिस्तान ने इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) एजेंसी के प्रमुख सहित सुरक्षा और खुफिया अधिकारियों को अफगानिस्तान भेजने का फैसला किया है। ताकि वो तालिबान की सेना के पुनर्गठन में मदद कर सकें।

दरअसल, पाकिस्तान काबुल एयरपोर्ट पर हमले के बाद से काफी चिंतित है। इसके अलावा पिछले हफ्ते से पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर गोलीबारी हुई है, जिसमें कम से कम दो पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं।

इस बीच, अमेरिकी अधिकारियों ने पाकिस्तान पर अफगान तालिबान का समर्थन करने का आरोप लगाया है, जो कि पिछले दो दशकों से अधिक समय से विदेशी ताकतों के खिलाफ ‘जिहाद’ लड़ने का दावा करता रहा है।

तालिबान शासन को पाकिस्तान ने अभी तक मान्यता नहीं दी

खास बात यह है कि तालिबान के मुख्य समर्थक पाकिस्तान ने अभी तक तालिबान शासन को मान्यता नहीं दी है। एक अधिकारी ने कहा, “हम तालिबान सरकार को मान्यता देते हैं या नहीं, अफगानिस्तान में स्थिरता बहुत महत्वपूर्ण है।” तालिबान सरकार की मान्यता अभी प्राथमिकता नहीं है।

नंगा कर समलैंगिक सेक्स करवाया, पैगम्बर मुहम्मद का अपमान भी: औरंगजेब और आरजू का आरोप, झारखंड पुलिस ने नकारा

झारखंड के जमशेदपुर में रहने वाले दो युवकों मोहम्मद आरज़ू और मोहम्मद औरंगजेब ने 26 अगस्त को एक आपराधिक मामले में पूछताछ के दौरान पूर्वी सिंहभूम पुलिस पर उन्हें जबरन समलैंगिक यौन संबंध बनाने और इस्लाम मजहब का अपमान करने का आरोप लगाया। ‘मुस्लिम मिरर‘ वेबसाइट में यह खबर प्रकाशित हुई है।

मुस्लिम मिरर वेबसाइट का स्क्रीनशॉट

विभिन्न ट्विटर हैंडल से इस खबर को रीट्वीट किया जा रहा है, जिससे यह वायरल हो गई है।

खबर को ट्विटर पर शेयर किया जा रहा है

वहीं, कुछ यूजर्स ने दावा किया है कि भारत में मुसलमानों को कानून का सहारा नहीं है।

ट्विटर पर झारखंड के युवाओं की खबर शेयर की गई

जमशेदपुर का दूसरा नाम टाटानगर भी है। यह झारखंड के दक्षिणी हिस्से में स्थित पूर्वी सिंहभूम जिले का हिस्सा है। पूर्वी सिंहभूम पुलिस ने मुस्लिम युवकों द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार और गुमराह करने वाला बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है।

पुलिस सूत्रों ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि कदमा थाने में एक लड़के द्वारा लड़की के अपहरण के मामले में दो नहीं बल्कि तीन युवकों को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, जो उनका दोस्त बताया जा रहा है। लेकिन शुरुआती पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया और उनके माता-पिता को सौंप दिया गया था। हैरानी की बात यह है कि सिर्फ दो युवकों ने लिखित आरोप लगाकर सात पुलिसकर्मियों और कदमा थाने के प्रभारी मनोज कुमार ठाकुर के खिलाफ यौन उत्पीड़न और धार्मिक भेदभाव के आरोप में एफआईआर दर्ज कराने की माँग की है।

दोनों युवकों ने आरोप लगाया कि उन्हें पीटा गया और अफगानिस्तान भेजने की धमकी दी गई। उन्होंने बताया कि उन्हें समलैंगिक यौन संबंध बनाने के लिए न्यूड होने के लिए कहा गया और उनके इस्लाम मजहब का अपमान किया गया। उन्होंने दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी।

प्रभारी अधिकारी ने कोई भी स्पष्टीकरण देने से इनकार कर दिया। ठाकुर ने कहा, “उन्होंने मेरे खिलाफ आरोप लगाए हैं, मुझे टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। कदमा थाना जमशेदपुर के बीचों-बीच स्थित है और इस तरह की चीजों का पता नहीं चल पाता है। यह सांप्रदायिक उन्माद पैदा करने का एक प्रयास है।”

शिकायत पर पूर्वी सिंहभूम के एसएसपी डॉ. एम तमिल वनन ने जाँच के आदेश दिए हैं। संपर्क करने पर पूर्वी सिंहभूम के एसपी सुभाष चंद्र जाट ने आरोप को निराधार, भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण बताया। एसपी ने कहा, ”जाँच में कुछ भी सामने नहीं आया है। इसमें कोई सच्चाई नहीं है।”

वामपंथी मीडिया और झारखंड के कोल्हान संभाग

यह वही कोल्हान डिवीजन (Kolhan division) है, जिसे वामपंथी मीडिया ने जब राज्य में भाजपा का शासन था, तब ‘खतरे में अल्पसंख्यक’ की कहानी को आगे बढ़ाने के लिए एक प्रयोगशाला के रूप में इस्तेमाल किया था। दो साल पहले 2019 में सरायकेला-खरसावां जिले में बाइक चोरी के आरोप में तबरेज अंसारी की भीड़ ने पिटाई कर दी थी, जिसके बाद उसकी मौत हो गई थी। इस खबर को वामपंथी मीडिया ने तोड़मरोड़ कर पेश किया था।

उस दौरान NDTV तबरेज अंसारी की मौत पर चीख-चीखकर उसका मजहब बताते नहीं थक रहा था। एनडीटीवी समेत तमाम सेकुलर मीडिया ने इसे संप्रदाय विशेष की मॉब लिंचिंग के तौर पर पेश किया था। बाद में पुलिस ने डॉक्टरों की रिपोर्ट (पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट) का हवाला देते हुए कहा था कि तबरेज की मौत तनाव और कार्डियक अरेस्ट (हृदयाघात) की वजह से हुई थी। झारखंड पुलिस के इस फैसले के बाद सभी 11 आरोपितों के ऊपर से हत्या संबंधी IPC की धारा (धारा 302) हटा ली गई थी।

सेना के सिलेबस में कौटिल्य का अर्थशास्त्र और गीता की सिफारिश, कॉन्ग्रेस ने कहा- ‘मुस्लिम सैनिकों की मदद से जीते कारगिल’

कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट (CDM) द्वारा किए गए एक आंतरिक अध्ययन में कौटिल्य के अर्थशास्त्र और भगवत गीता जैसे प्राचीन भारतीय ग्रंथों को सैन्‍य प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल करने की सिफारिश की गई है। अध्‍ययन में इस बात पर भी जोर देते हुए कहा गया है कि इस क्षेत्र में शोध किया जा सकता है और इसके लिए ‘भारतीय संस्कृति अध्ययन मंच’ भी बनाया जा सकता है। न्यूज 18 ने अपनी रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी।

सिकंदराबाद में कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट का सैन्य प्रशिक्षण संस्थान है। यहाँ पर सेना, नौसेना और भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जाती है और उच्च रक्षा प्रबंधन के लिए तैयार किया जाता है। News18 को पता चला है कि इंटीग्रेटेड डिफेंस स्‍टाफ के मुख्‍यालय द्वारा एक प्रोजेक्‍ट तैयार किया गया है जिसका नाम है, ‘प्राचीन भारतीय संस्कृति और युद्ध तकनीकों के गुण और वर्तमान समय में सामरिक सोच और प्रशिक्षण में इसका समावेश।’

रक्षा सूत्रों ने News18 को बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य भारतीय सशस्त्र बलों में रणनीतिक सोच और नेतृत्व के संदर्भ में चुनिंदा प्राचीन भारतीय ग्रंथों की खोज करना है। इसके साथ ही इसका मकसद सर्वोत्तम प्रथाओं और विचारों को अपनाने के लिए एक रोडमैप स्थापित करना है, जो वर्तमान समय में प्रासंगिक है। एक शीर्ष रक्षा सूत्र ने कहा, “यह राज कौशल, सैन्य कूटनीति व अन्य क्षेत्रों में हो सकता है।”

उदाहरण के लिए, यह कौटिल्य के अर्थशास्त्र को सशस्त्र बलों के लिए एक ‘खजाना निधि’ (treasure trove) बताता है और कहता है कि यह वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिक है। इसमें सशस्त्र बलों के लायक एक सामान्य अधिकारी से लेकर एक पैदल सैनिक तक के लिए सबक शामिल है। इसमें कहा गया है कि तीन ग्रंथ, वर्तमान परिदृश्य में नेतृत्व, युद्ध और रणनीतिक सोच के संबंध में प्रासंगिक हैं।

सेना के पाठ्यक्रम में अर्थशास्त्र और गीता, कॉन्ग्रेस ने की निंदा

कॉन्ग्रेस पार्टी ने प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए कहा कि भारतीय सेना के प्रशिक्षण में भागवत गीता और कौटिल्य अर्थशास्त्र को शामिल करना देश के सशस्त्र बलों के राजनीतिकरण के बराबर है। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने केंद्र पर भारतीय सेना का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए कहा, “कम से कम सरकार को सैन्य मामलों में राजनीति नहीं करनी चाहिए, हमने मुस्लिम सैनिकों की मदद से कारगिल युद्ध जीता।”

तैरना आता था, फिर भी नदी में डूब कर मौत: कवि को मिली मोपला नरसंहार का खुलासा करने की सज़ा? – RSS विचारक ने उठाए सवाल

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विचारक जे नंदकुमार ने ने कहा है कि केरल के कवि कुमारन आशान की मौत को लेकर जाँच होनी चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि मोपला हिन्दू नरसंहार की सच्चाई को सामने लाने के लिए उनकी हत्या की गई हो सकती है। बता दें कि मालाबार में मोप्पिला मुस्लिमों द्वारा 1921 में किए गए हिन्दुओं के नरसंहार को अब तक ‘मालाबार कृषि विद्रोह’ कहा जाता रहा था।

‘प्रजा प्रवाह’ संस्था के राष्ट्रीय संयोजक जे नंदकुमार ने अब केरल के कवि कुमारन आशान की संदिग्ध मौत का मुद्दा उठाया है। बता दें कि 16 जनवरी, 1924 को कुमारन आशान की अल्लापुझा के पलानी नदी में डूबने से मौत हो गई थी। उनकी लाश 2 दिनों बाद मिली थी। वो जिस नाव में सवार थे, उसके डूब जाने की बात कही गई थी। तब ये इलाका त्रावणकोर में आता था। जहाँ उनका अंतिम संस्कार हुआ, उस जगह को कुमारकोडी कहते हैं।

अब जे नंदकुमार ने आशंका जताई है कि ये साजिश के तहत की गई एक हत्या थी, क्योंकि उन्होंने मालबार में हिन्दुओं के नरसंहार का खुलासा किया था। उन्होंने मलयालम में ‘दुरावस्था’ नामक एक कविता लिखी है। कहा जाता है कि मालबर में जिहादियों की करतूतों का खुलासा करने के लिए ही उन्होंने ये रचना की थी। नंदकुमार ने ‘जनम टीवी’ के कार्यक्रम ‘मालाबार इस्लामी स्टेट एवं हिन्दू नरसंहार’ कार्यक्रम में ये बातें कहीं।

श्री नारायण गुरु ने कुमारन अशान को मालाबार भेजा था, ताकि वो वहाँ की स्थिति को समझ सकें। श्री नारायण गुरु सामाजिक एकता और जातिवाद को ख़त्म करने की दिशा में एक बड़े समाज सुधारक हुए हैं। मालाबार में हिन्दुओं की दुर्दशा देख कर कुमार अशान ने एक कविता लिखी, जिसका इस्लामी कट्टरपंथियों ने खूब विरोध किया था। उन्होंने लेखक से कहा था कि वो अपनी रचना तुरंत वापस लें, लेकिन कुमारन आशान ने इससे इनकार करते हुए कहा था कि उन्होंने वही लिखा जो देखा।

जे नंदकुमार ने मालाबार में हिन्दुओं के नरसंहार की घटना को ‘ अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम’ बता कर इसका महिमामंडन करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि ये एक देशद्रोही कृत्य है। बताया जाता है कि कुमारन अशान एक अच्छे तैराक थे, लेकिन फिर भी वो नाव डूबने के बाद तैर कर निकल नहीं पाए। साथ ही इस कविता की रचना के बाद उन्हें कई बार जान से मार डालने की धमकियाँ मिली थीं।