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झारखंड विधानसभा में नमाज के लिए कमरा: BJP ने कहा तुष्टिकरण, ‘कब्रिस्तान भी बनाओ’ की माँग सोशल मीडिया पर

झारखंड सरकार का एक बार फिर से सांप्रदायिक चेहरा सामने आया है। अब राज्य के विधानसभा में भी ‘शांतिप्रिय’ समुदाय की सुविधा का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। अब उनके लिए नमाज अदा करने के लिए अलग से कमरा आवंटित किया गया है। इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष की ओर से आदेश भी जारी कर दिया गया है।

इस आदेश पर 2 सिंतबर की तारीख है और नमाज कक्ष के रूप में कमरा संख्या TW348 बताया गया है। विधानसभा के उप सचिव नवीन कुमार के हस्ताक्षर से जारी आदेश में कहा गया है, “नए विधानसभा भवन में नमाज अदा करने के लिए नमाज कक्ष के रूप में कमरा संख्या TW-348 आवंटित किया जाता है।”

आदेश की कॉपी (साभार: सोशल मीडिया)

आदेश की प्रति वायरल होते ही तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। झारखंड सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया जा रहा है। बीजेपी विधायक अनंत ओझा ने इस पर सवाल उठाते हुए ट्वीट किया, “ये क्या स्पीकर साहब ,अब राज्य की सबसे बड़ी पंचायत भी तुष्टिकरण को पोषित करने की राह पर? झारखंड विधानसभा में नमाज़ अदा करने के लिए कक्ष। झारखंड की जनता सब देख रही है। सर्वधर्म समभाव की मूल आत्मा को कलंकित करने वाला निर्णय।”

वहीं योगेंद्र प्रताप ने लिखा, “झारखंड विधानसभा में हेमंत सोरेन की जेएमएम सरकार द्वारा नमाज कक्ष आवंटित करने के बाद कॉन्ग्रेस के बयान बहादुर विधायक जनाब इरफान अंसारी साहब तालिबान के समर्थन में कसीदे पढ़ रहे हैं। काश रोजगार और जनहित के अन्य सवालों पर भी ये ऐसे ही संवेदनशील होते? आप खुद समझिए झारखंड सरकार तुष्टिकरण की कैसी राजनीति कर रही है?”

झारखंड बीजेपी प्रवक्ता प्रतुल शाह देव लिखते हैं, “जब चौतरफा असफलताओं से घिर जाओ तो ध्यान भटकाने की कोशिश करो। झारखंड के इतिहास में पहली बार विधानसभा भवन में नमाज अदा करने के लिए नमाज भवन बनाया गया। तुष्टीकरण की सारी सीमाएँ पार हो गईं। क्या विधानसभा में बहुसंख्यक समाज के लिए मंदिर या प्रार्थना कक्ष की व्यवस्था है?”

बीजेपी विधायक भानु प्रताप शाही ने लिखा, “बहुत चिंतित हूँ , झारखंड के भविष्य को ले कर एक तरफ कॉन्ग्रेस के विधायक खुलेआम तालिबान का समर्थन करते हैं! दूसरी तरफ विधानसभा में नमाज की कक्ष खोली जा रही और तीसरी हिंदी को हटा कर उर्दू को प्राथमिकता नियोजन नीति में दी जा रही? किस दिशा में जा रहा झारखंड आप भी सोचें…”

शशि शेखर सिंह लिखते हैं, “हेमंत सोरेन जी ने समाज को बाटने वाली अपनी गंदी राजनीति का फिर से उदाहरण पेश किया है। झारखंड विधानसभा भवन में नमाज कक्ष का आवंटन उनके तुष्टीकरण की राजनीति को उजागर करता है। ऐसी विभाजनकारी राजनीति से बचिए साहब, ये राज्य का भला नहीं करेंगी।”

राहुल दुबे ने लिखा, “कॉन्ग्रेस का बस चले तो वह भारत को ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ इंडिया’ बना दे, झारखंड विधानसभा में पहले नमाज होगी फिर कोई दूसरा काम।”

योगेंद्र प्रताप लिखते हैं, “जेएमएम और कॉन्ग्रेस को तो सिर्फ हिंदुओं से परेशानी है? जब झारखंड विधानसभा में नमाज कक्ष हो सकता है तो फिर हिंदुओं के लिए पूजा कक्ष क्यों नहीं? राज्य के मन्दिरों को लेकर भी सरकार का उदासीन रवैया किसी से छिपा नहीं है। यह तुष्टिकरण की पराकाष्ठा नहीं तो और क्या है मुख्यमंत्री साहब?”

आयुष झा नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “केवल नमाज कक्ष ही क्यूँ? मेरी तो झारखंड सरकार से आग्रह है कि विधानसभा परिसर में एक कब्रिस्तान का निर्माण भी किया जाए, ताकि एक दिन उसी कब्र में इस तुष्टीकरण राजनीति करने वाली सरकार को भी दफनाया जा सके।”

यूपी के 24 जिलों में कोरोना के 0 मरीज, पिछले 24 घंटे में 63 जिलों से कोई नया मामला नहीं: टीकाकरण में भी बनाया रिकॉर्ड

देश का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला राज्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश ने कोरोना प्रबंधन के मामले में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुरू से ही सारी तैयारियों पर खुद निगरानी बनाए हुए हैं। वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर को लगभग नियंत्रण में ला चुका उत्तर प्रदेश टीकाकरण के मामले में भी अव्वल चल रहा है। प्रदेश में अब तक 7.70 करोड़ लोगों का टीकाकरण हो चुका है।

इनमें से 6.46 करोड़ नागरिक ऐसे हैं, जिन्होंने कम से कम कोरोना वैक्सीन की एक डोज ले ली है। ये आँकड़ा देश के किसी भी अन्य राज्य से ज्यादा है। ‘हिंदुस्तान’ की खबर के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 24 जिलों में कोरोना के एक भी मामले नहीं हैं। इनमें अलीगढ़, अमेठी, अमरोहा, अयोध्या, बागपत, बलिया, बांदा, बस्ती, बिजनौर, चित्रकूट, देवरिया, फतेहपुर, गाजीपुर, गोंडा, हमीरपुर, हरदोई, हाथरस, ललितपुर, महोबा, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत, रामपुर, शामली और सीतापुर शामिल हैं।

इन जिलों में अब एक भी व्यक्ति कोरोना संक्रमित नहीं है। पिछले 24 घंटों के दौरान हुई कोरोना टेस्टिंग में भी सकारात्मक परिणाम आए हैं। जहाँ 63 जिलों में नए संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया, 12 जनपदों में नए कोरोना मरीजों की संख्या इकाई अंक में ही रही। पूरे उत्तर प्रदेश में अब कोरोना के 300 से भी कम मरीज बचे हैं। कोरोना की रिकवरी दर भी 98.7 प्रतिशत पहुँच गई है।

उत्तर प्रदेश में फ़िलहाल कोरोना के 250 के करीब मरीज हैं। शुक्रवार (3 सितंबर, 2021) को दैनिक पॉजिटिविटी दर 0.01 प्रतिशत रही। अब तक 7.32 करोड़ कोरोना सैम्पल्स की जाँच की जा चुकी है। पिछले 24 घंटों में भी 3.31 लाख सैम्पल्स की जाँच की गई। इनमें से 26 नए मरीजों की पुष्टि हुई। 15 मरीज स्वस्थ होकर हॉस्पिटल से डिस्चार्ज भी किए गए। अब तक 16.86 लाख लोग कोरोना संक्रमण सेस्वस्थ हो चुके हैं।

गोल्ड और सिल्वर पर एक साथ कब्जा, टोक्यो पैरालिंपिक में शूटर मनीष नरवाल और सिंहराज ने रचा इतिहास

टोक्यो पैरालिंपिक में भारतीय पैराशूटर्स ने कमाल का प्रदर्शन किया है। शनिवार (4 सिंतबर) को भारत के पैराशूटर मनीष नरवाल (19 साल) ने शूटिंग P4 मिक्स्ड 50 मीटर पिस्टल SH1 इवेंट में जहाँ गोल्ड मेडल पर कब्जा किया है, वहीं सिंहराज (39 साल) ने सिल्वर मेडल जीता है।

भारत के खाते में अब तक 3 स्वर्ण, 7 रजत और 5 कांस्य पदक आ चुके हैं। इसके साथ ही भारत की झोली में अब पदकों की संख्या 15 हो गई है। यह पैरालिंपिक के इतिहास में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। वहीं, रियो पैरालिंपिक (2016) में भारत ने 2 स्वर्ण सहित 4 पदक जीते थे।

दोनों भारतीय पैराशूटर्स फरीदाबाद के रहने वाले हैं। मनीष ने 218.2 के कुल स्कोर के साथ पहला स्थान, जबकि सिंहराज ने 216.7 के कुल स्कोर के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्वॉलिफिकेशन राउंड में 536 अंकों के साथ सिंहराज चौथे नंबर पर जबकि मनीष नरवाल 533 अंकों के साथ सातवें स्थान पर रहे थे। इस पैरालंपिक में सिंहराज ने दूसरा मेडल जीता है। इससे पहले उन्हें 10m Air Pistol SH1 में कांस्य पदक मिला था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टोक्यो पैरालिंपिक में शानदार जीत के लिए मनीष और सिंहराज को बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट किया, ”टोक्यो पैरालिंपिक से गौरवपूर्ण प्रदर्शन जारी है। युवा और शानदार प्रतिभावान मनीष नरवाल की शानदार उपलब्धि। उनका स्वर्ण पदक जीतना भारतीय खेलों के लिए एक विशेष क्षण है। उन्हें इसके लिए बधाई और भविष्य के लिए शुभकामनाएँ।”

पंजशीर पर तालिबान का कब्जा नहीं: पूर्व उप-राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने कहा – ‘पाकिस्तान समर्थित आतंक के आगे झुकना नहीं’

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्जे के बाद और सरकार के गठन से कुछ समय पहले तालिबान ने पंजशीर घाटी पर भी कब्जा करने का दावा किया है। हालाँकि, पूर्व उप-राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह और नॉर्दन एलायंस के नेता अहमद मसूद ने तालिबान के दावे को खारिज कर दिया है।

तालिबान के दावे को अहमद मसूद ने साफ नकार दिया है। अहमद मसूद के ट्विटर अकाउंट से ट्वीट किया गया, “पंजशीर पर जीत की खबरें पाकिस्तानी मीडिया में घूम रही हैं। यह एक झूठ है। पंजशीर पर उनकी जीत पंजशीर में मेरा आखिरी दिन होगा, इंशाअल्लाह।” 

वहीं अमरुल्लाह सालेह ने भी कहा है कि वे कहीं नहीं भागे हैं। लड़ाई अभी भी जारी है। पिछले कई दिनों से पंजशीर प्रांत में अहमद मसूद और अफगानिस्तान के पूर्व उप-राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह तालिबान के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। शुरुआती कुछ दिनों तक तालिबान और मसूद के बीच बातचीत का दौर चला, लेकिन कोई भी हल नहीं निकल सका। इसके बाद, तालिबान ने पंजशीर पर कब्जा करने के लिए अपने लड़ाकों को भेज दिया। 

काबुल में खुशी जता की फायरिंग

पंजशीर पर तालिबान के कब्जे का दावा न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने कट्टर संगठन के सूत्रों के हवाले से किया था। तीन तालिबानी सूत्रों ने बताया था कि अब तालिबानियों का पूरे अफगानिस्तान पर कंट्रोल हो गया है, जिसमें पंजशीर भी शामिल है। पंजशीर घाटी में तालिबान और विरोधी गुटों के बीच टकराव जारी था। पंजशीर पर कब्जे के बाद तालिबानी लड़ाकों ने राजधानी काबुल में खुशी जताते हुए आसमान में फायरिंग भी की। तालिबान की हवाई गोलाबारी में बच्चों सहित कई लोग घायल हो गए और कई मारे गए

तालिबान का दावा- ‘पंजशीर अब कब्जे में’

एक तालिबानी कमांडर ने कहा, ”अल्लाह की कृपा से, पूरा अफगानिस्तान हमारे कंट्रोल में हैं। बाधा पैदा करने वालों को हमने हरा दिया है और पंजशीर अब हमारे कब्जे में है।” हालाँकि, अभी पंजशीर पर तालिबान के कब्जे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन तालिबान ने पंजशीर पर कब्जा करने का दावा किया है। इससे पहले भी तालिबान के लड़ाके कुछ ऐसे दावे करते रहे हैं, जिन्हें अमरुल्ला सालेह ने खारिज किया है। इस बार भी सालेह ने तालिबान के कब्जे के दावे को सिरे से नकार दिया।

पंजशीर पर कब्जे को सालेह ने किया खारिज, बोले- ‘देश छोड़ कर नहीं भागा’

इस बीच, अमरुल्ला सालेह ने शुक्रवार (सितंबर 3, 2021) को दावा किया कि वह देश छोड़कर नहीं भागे हैं और इन रिपोर्ट्स को निराधार बताया। सालेह ने बताया कि वह पंजशीर घाटी में हैं और अपने कमांडरों और राजनीतिक नेताओं के साथ स्थिति का प्रबंधन कर रहे हैं। 

उन्होंने कहा, “कुछ मीडिया रिपोर्ट्स को चारों ओर फैलाया जा रहा है कि मैं देश छोड़कर भाग गया हूँ। यह बिल्कुल निराधार है। यह मेरी आवाज है, मैं पंजशीर घाटी से, अपने बेस से बात कर रहा हूँ। मैं अपने कमांडरों और हमारे राजनीतिक नेताओं के साथ हूँ। बेशक, यह एक कठिन स्थिति है। हम पर तालिबान, उनके अल कायदा सहयोगियों, इस क्षेत्र के और उसके बाहर के अन्य आतंकवादी समूहों द्वारा आक्रमण किया गया है, हमेशा की तरह यह पाकिस्तानियों द्वारा समर्थित है। हमने विरोध किया है। प्रतिरोध आत्मसमर्पण करने वाला नहीं है, आतंकवाद के आगे झुकने वाला नहीं है और यह जारी रहने वाला है। कठिनाइयाँ हैं लेकिन मैं भागा नहीं हूँ और न ही फरार हुआ हूँ।”

गौरतलब है कि अफगानिस्तान में तालिबान का शासन आने के बाद से ही पाकिस्तान के साथ उसके संबंधों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। पिछले दिनों तालिबान ने पाकिस्तान को अपना ‘दूसरा घर’ कहा। वहीं इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री शेख राशिद ने कबूला कि पाकिस्तान तालिबान का संरक्षक है।

हम न्यूज चैनल के कार्यक्रम ‘ब्रेकिंग प्वाइंट विद मलिक’ में राशिद ने कहा था, “हम तालिबान नेताओं के संरक्षक हैं। हमने लंबे समय तक उनकी देखभाल की है। उन्हें पाकिस्तान में पनाह दी, शिक्षा दी और आशियाना दिया। हमने उनके लिए सब कुछ किया है।” इससे पहले भी एक इंटरव्यू के दौरान अमेरिका की निंदा और तालिबान का स्वागत करते हुए मंत्री ने खुलासा किया था कि पाकिस्तान लंबे समय तक अमेरिकी सेना को अपने यहाँ रखने की इच्छुक नहीं है।

पंजशीर बना तालिबान के लिए बड़ा नासूर

जब से तालिबान ने अफगानिस्तान पर नियंत्रण किया है, तभी से पंजशीर घाटी में विद्रोही लड़ाके जुटना शुरू हो गए हैं। बताया जा रहा है कि इनमें सबसे ज्यादा संख्या अफगान नेशनल आर्मी के सैनिकों की है। इस गुट का नेतृत्व नॉर्दन एलायंस ने चीफ रहे पूर्व मुजाहिदीन कमांडर अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद कर रहे हैं। उनके साथ पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह और बल्ख प्रांत के पूर्व गवर्नर की सैन्य टुकड़ी भी है।

‘ट्रेनिंग, सेक्स और संतुलन’ – नीरज चोपड़ा से Indian Express के इंटरव्यू में सवाल, मिला जवाब – क्वेश्चन से मन भर गया

टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाले नीरज चोपड़ा इन दिनों बेहद शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं – अपनी खातिर नहीं, पत्रकारों और मीडिया गिरोह के लोगों से। दरअसल, देश के जाने माने पत्रकार, रेडियो जॉकी और अब प्रसिद्ध भारतीय डिजाइनर व आर्ट क्यूरेटर राजीव सेठी ने उनसे बेहुदा सवाल पूछकर उन्हें शर्मिंदा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें नीरज चोपड़ा इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप को ऑनलाइन इंटरव्यू देते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान पत्रकार नीरज चोपड़ा को कहते हैं कि हम अब आपका थोड़ा समय और लेंगे, जिसमें प्रसिद्ध भारतीय डिजाइनर, आर्ट क्यूरेटर राजीव सेठी आपसे एक से दो सवाल करेंगे। इस पर नीरज राजी हो जाते हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि इतनी बड़ी हस्ती उनसे इस तरह का सवाल करेगी, जिसके बाद रेडियो जॉकी मलिष्का और पत्रकार नविका कुमार भी उनसे पीछे रह जाएँगी।

गाड़ी में बैठे हुए राजीव सेठी से जैसे ही नीरज से कनेक्ट होते हैं उनसे पहला प्रश्न पूछते हैं- “कितने सुंदर नौजवान हैं आप, तो मैं आपसे एक प्रश्न पूछूँगा, जो मैं जानता हूँ कि करोड़ों लोग पूछना चाहते हैं।” इस बात पर स्वर्ण पदक विजेता जोरों से हँसते हैं और कहते हैं कि आप अपनी बात को जारी रखें। इसके बाद राजीव सेठी कहते हैं – “देश के करोड़ों लोग आपसे यह बात पूछना चाहते हैं, लेकिन हिचकिचाते हैं कि आप अपनी एथलेटिक ट्रेनिंग के साथ सेक्स लाइफ का संतुलन कैसे बनाकर रखते हैं। मैं जानता हूँ कि यह बेहुदा प्रश्न है।”

इसके बाद नीरज को इंटरव्यू के दौरान काफी शर्मिंदगी महसूस हुई। उन्होंने कहा, ”सॉरी सर। अब इसके बाद मैं कुछ नहीं कह सकता हूँ।” सॉरी शब्द को शायद राजीव सेठी समझ नहीं पाते हैं, स्कूल में पढ़ाई नहीं की होगी… बेहूदगी जारी रख फिर पूछते हैं कि जो जवान लोग स्पोर्ट्स करते हैं, वो अपनी एथलेटिक ट्रेनिंग के साथ अपनी सेक्स लाइफ को कैसे संतुलित करते हैं।

नीरज ने इस सवाल का जवाब बेहद शालीनता से दिया। उन्होंने कहा, “सर मेरा आपके क्वेश्चन से मन भर गया है। प्लीज सर।” इसके बाद उन्होंने पत्रकार से कहा कि आप ही इन्हें इस सवाल का जवाब दें। राजीव सेठी, जो दक्षिण एशिया के जाने माने आर्ट क्यूरेटर हैं, उन्होंने देश को स्वर्ण पदक दिलाने से ऐसा प्रश्न पूछकर अपनी ही फजीहत करा ली है।

इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप ने अपने यूट्यूब चैनल पर टोक्यो ओलंपिक विजेताओं नीरज चोपड़ा और बजरंग पुनिया के इंटरव्यू का वीडियो शेयर किया है। इसमें जैवलिन थ्रो में गोल्ड मेडल जीतने वाले नीरज चोपड़ा का 2 मिनट 7 सेकंड के इंटरव्यू का वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स को नीरज चोपड़ा से ऐसे सवाल करना पसंद नहीं आया है।

हालाँकि, यह कोई पहला मामला नहीं है जब नीरज चोपड़ा को ऐसे निम्नस्तरीय सवालों का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले रेडियो जॉकी मलिष्का मेंडोंसा मलिष्का ने 19 अगस्त को अपने एक इंटरव्यू में उनसे बेहुदा सवाल किए थे। मलिष्का ने अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर इसका वीडियो भी शेयर किया था।

वीडियो में मलिष्का और रेड एफएम की स्टाफ (लड़कियाँ) नीरज चोपड़ा को इंप्रेस करने के लिए उनके सामने ‘उड़े जब जब जुल्फें तेरी’ गाने पर डांस करती हुई नजर आ रही हैं। चोपड़ा के असहज दिखने के बावजूद उन्होंने डांस करना बंद नहीं किया। ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता से मलिष्का इंटरव्यू के आखिरी में जादू की झप्पी भी माँगती हैं, जिस पर वह कहते हैं कि ऐसे ही दूर से नमस्ते। नीरज चोपड़ा का इंटरव्यू लेते समय आरजे मलिष्का मेंडोंसा का अंदाज नेटिज़न्स को पसंद नहीं आया।

मलिष्का मेंडोंसा से पहले नीरज चोपड़ा से उनकी निजी जिंदगी से जुड़े सवाल पूछने पर टाइम्स नाउ की पत्रकार नविका कुमार की भी सोशल मीडिया पर काफी आलोचना की गई थी। नेटिज़न्स ने उन्हें ‘गॉसिप आंटी’ कहा था। क्योंकि नविका ने उनकी गर्लफ्रेंड और शादी के सवाल पर पूछकर नीरज चोपड़ा अपने इंटरव्यू में शर्मिंदा किया था।

‘जोर से लैटरीन लगा था… लगा कि हो जाएगा, गिर जाएगा….’ – ‘गंजी-जांघिया-लैटरीन’ पर JDU विधायक गोपाल मंडल

बिहार के जेडीयू विधायक गोपाल मंडल की तेजस राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन में अंडरवियर के साथ तस्वीर वायरल होने के बाद विवाद गहराता जा रहा है। आरोप है कि चलती ट्रेन में उनकी इस हरकत पर आपत्ति जताने वाले एक यात्री से उन्‍होंने गाली-गलौज तक कर डाली। हालात बिगड़ने पर RPF को हस्‍तक्षेप करना पड़ा था। जेडीयू विधायक ने मामले में सफाई दी है। उन्होंने मामले में एबीपी न्यूज से बात करते हुए सभी आरोपों को खारिज कर दिया और ऐसा करने के पीछे की वजह बताई।

आपत्तिजनक फोटो वायरल होने के आरोप पर उन्होंने कहा, “मेरी उम्र साठ वर्ष है। अपने डेरे में हम 2-4 बार लैटरीन गए, फिर स्टेशन पर वेटिंग रूम में लैटरीन गए। फिर लैटरीन लगा हुआ था, हम चढ़ गए। यहाँ चढ़ते ही लैटरीन लग गया। यहाँ आते ही हम कुर्ता-पायजामा खोले और गमछी कंधा पर रखे, लेकिन पहन नहीं पाए, लगा कि लैटरीन हो जाएगा, गिर जाएगा, फिर दिक्कत हो जाएगी।” 

वो आगे कहते हैं, “हम तेजी से निकल रहे थे। बगल वाले ने पूछा- कहाँ जा रहे हैं आप? मैंने कहा कि लैटरीन जा रहे हैं, तो उसने कहा कि इस वेश में नहीं जा सकते। मैंने पूछा क्यों, तो उसने बोला कि पहले आप कपड़ा पहनिए। हम अगर कपड़ा पहनते तो हमको लैटरीन हो जाता।”

इस दौरान विधायक ने महिला रिपोर्टर को अपने जंघिया की लंबाई भी दिखाई। जब रिपोर्ट ने उनसे अर्धनग्न अवस्था के बारे में सवाल किया तो उनका जवाब बेहद ही हास्यास्पद था। उन्होंने जंघिया की लंबाई दिखाते हुए कहा, “ये देखिए, हमारा जंघिया यहाँ तक है। हम फुल जंघिया पहनते हैं। उसको शॉर्ट पैंट माना जाता है। हम उसी जंघिया और बनियान में जा रहे थे। इधर कोई भी नहीं था। सिर्फ एक व्यक्ति ने हमें टोका।”

महिलाओं के असहज होने के बारे में सवाल करने पर उन्होंने कहा, “यहाँ कोई महिला नहीं थी और हमको इतना जोर से लैटरीन लगा था कि कुछ याद ही नहीं रहा, लगा कि हो जाएगा, हम दौड़ते हुए जा रहे थे। रोक कर उन्होंने डिस्टर्ब किया। लैटरीन से वापस लौट कर हमने पूछा कि बोलिए बाबू। उसी समय मेरा फोटो और वीडियो लिया गया। हमने पूछा कि बोलिए बाबू क्या दिक्कत है? आप कौन हैं तो उसने कहा- आम यात्री। मैंने कहा कि आम यात्री होकर ऐसे क्यों डिस्टर्ब करते हैं। हम एमएलए हैं। हम किसी कष्ट में हैं। हम लोगों को शिक्षा-दीक्षा देते हैं। हम ऐसी वेश-भूषा में जाते। यही हुआ मैडम कि हम गमछा पहन नहीं पाए, हम जल्दी से लैटरीन से आए, तब मिजाज फ्रेश हुआ।”

टोकने पर धमकाने और गाली-गलौज के आरोप पर विधायक ने कहा, “हम किसी को नहीं धमकाए, सिर्फ उससे ऐसा बोले कि आप ऐसा क्यों किए? उसी पर बकवास करने लगा। वहाँ पर कोई आम पब्लिक नहीं था। फिर उधर से पुलिस आई और उन्होंने बयान लिया। यह सब आरोप झूठा है। अगर हम उसे मारने की धमकी देते, गोली मारते तो एफआईआर करता मेरे ऊपर। बात को बतंगड़ बनाया गया है मैडम। हम सुलझे हुए हैं मैडम। हम चौथा बार एमएलए बने हैं। 60 साल हमारा उम्र है। हम गलत कर ही नहीं सकते हैं।”

वहीं ट्रेन में सफर कर रहे एक अन्य व्यक्ति से जब इस वाकया के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, “विधायक जी आए और उन्होंने जल्दी से कपड़ा उतारा और बाथरूम की तरफ भागे। मुझे लगता है कि उन्हें ख्याल भी नहीं रहा कि वह ट्रेन में सफर कर रहे हैं। इस दौरान एक यात्री बिना मतलब उलझ गया। वह बदतमीजी से बात करने लगा। विधायक ने बोला कि तुम्हें नहीं पता कि मैं कौन हूँ, मेरी उम्र तो देखो। तो उसने कहा कि उम्र क्या देखें, आप नंगा घूम रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं नंगा नहीं घूम रहा हूँ। मैंने इतनी बड़ी चड्डी पहनी है। बनियान पहना है। गमछा लेने जा रहा हूँ। वह उनसे बेवजह का उलझ रहा था।”

इससे पहले जेडीयू विधायक गोपाल मंडल ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा था, “वास्तव में मैं अंडरवियर और बनियान में था, क्योंकि जैसे ही मैं ट्रेन चढ़ा और कुछ दूर गया तो मेरा पेट खराब था। मैं जो बोलता हूँ सत्य बोलता हूँ। झूठ मैं बोलता नहीं हूँ।”

उल्लेखनीय है कि राजेंद्र नगर (पटना) से नई दिल्ली जा रही तेजस राजधानी एक्सप्रेस में जेडीयू के विधायक गोपाल मंडल की यह हरकत सामने आई। जब कपड़े उतारकर वो चलती ट्रेन में घूम रहे थे। गंजी और अंडरवियर पहनकर टहल रहे थे। गोपाल मंडल के गंजी-जांघिया में देखकर कोच में मौजूद दूसरे पैसेंजर ने कड़ी आपत्ति जताई। जिसके बाद चलती ट्रेन में कोच के अंदर जमकर हंगामा हुआ।

जलियाँवाला बाग स्मारक = व्हेल का लिंग: हिंदुस्तानी माँ-बाप… अब कैम्ब्रिज की प्रोफेसर, मिलिए हिंदूघृणा वाली महिला से

भारतीय मूल की प्रोफेसर प्रियंवदा गोपाल को उनके द्वारा सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों के लिए काफी आलोचना मिल रही है। वह एक अमेरिकी लिबरल हैं, जो हिंदुओं के लिए अपने दिल में घृणा पालती हैं। वह कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में उत्तर औपनिवेशिक स्टडीज की प्रोफेसर हैं।

31 अगस्त को प्रियंवदा गोपाल ने जलियांवाला बाग स्मारक की तुलना ‘व्हेल पेनिस’ (‘whale penis’) से की। दरअसल ट्विटर पर एक शख्स ने स्मारक के सौंदर्यशास्त्र को स्वीकार नहीं करने की बात कही। जिसके बाग प्रियंवदा ने यह तुलना किया। दोनों के बीच की बातचीत में यह स्पष्ट रूप से सुना जा सकता है कि उन्हें यह पता नहीं है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने स्मारक का निर्माण नहीं किया है। यह दशकों से अस्तित्व में है।

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वैसे यह पहली बार नहीं है कि प्रोफेसर प्रियंवदा गोपाल ने सोशल मीडिया पर इस तरह की विवादास्पद टिप्पणियाँ की हैं। 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम के पारित होने के दौरान प्रियंवदा गोपाल ने H-1B वीजा का जिक्र करते हुए माँग की थी कि संयुक्त राज्य अमेरिका हिंदुओं के नागरिक बनाने की प्रक्रिया को ब्लॉक करे और ‘उनके कीमती H-1Bs को छीन ले’।

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हाल ही में, प्रियंवदा गोपाल ने दावा किया कि प्रसिद्ध विद्वान कोएनराड एल्स्ट ‘हिंदू वर्चस्ववाद के अनुयायी’ थे, जिसकी तुलना उन्होंने ‘आर्यन वर्चस्ववाद’ से की, जिसमें नाजी का प्रतीक है।

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उनका दावा है कि हिंदूफोबिया को उजागर करने वाले हिंदू श्वेत वर्चस्ववादियों के समान हैं।

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प्रोफेसर स्पष्ट रूप से किसी तरह यह साबित करने के लिए अडिग हैं कि हिंदुओं और श्वेत वर्चस्ववादियों के बीच एक साँठगाँठ है, जो कि एक हास्यास्पद दावा के अलावा और कुछ नहीं है।

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उनके ट्वीट से साफ है कि प्रियंवदा गोपाल को पश्चिमी देशों में सफल होने वाले हर हिंदू से दिक्कत है। उन्होंने 2019 में इंग्लैंड की सरकार में गृह सचिव प्रीति पटेल के खिलाफ हिंदूफोबिक टिप्पणी की थी।

प्रियंवदा गोपाल ‘व्हाइट लाइव्स डॉन्ट मैटर, ऐज व्हाइट लाइव्स’ (White lives don’t matter. As White lives) कहने के बाद विवादों में आ गई थी। इसके लिए उन्हें काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने तुरंत एक ट्वीट करते हुए ‘ब्राह्मण-नस्ल को खत्म करने’ की माँग की थी।

22 अगस्त 2020 को किया गया ट्वीट, कमाला हैरिस वाले विवाद पर

हिंदुस्तानी माँ-बाप से पैदा हुई हैं प्रियंवदा गोपाल। ऊपर उन्हीं का ट्वीट है। कभी डिलीट करके भाग भी सकती हैं, इसलिए स्क्रीनशॉट भी साथ में।

25 दिन में हाजिर हो वरना संपत्ति जब्त: कॉन्ग्रेस महिला नेता से रेप मामला, कॉन्ग्रेसी MLA के फरार बेटे पर कोर्ट सख्त

मध्य प्रदेश के उज्जैन के बड़नगर कॉन्ग्रेस विधायक मुरली मोरवाल के बेटे करण मोरवाल की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। न्यायालय ने आरोपित करण को 28 सितंबर तक कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने ये भी कहा कि यदि आरोपित दी गई समय सीमा में कोर्ट में पेश नहीं होता है तो उसकी संपत्ति कुर्क की जाएगी।

बता दें कि संपत्ति की कुर्की का नोटिस पुलिस ने विधायक के आरोपित बेटे के घर चस्पा कर दिया है। पुलिस ने आरोपित पर 5 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया है। वहीं कोर्ट ने उसे फरार घोषित किया है। 5 महीने बाद तक पुलिस उसे पकड़ नहीं पाई तो अब इंदौर पुलिस ने बड़नगर में उसके घर और प्रमुख स्थानों पर उसके पोस्टर चिपका दिए और लोगों से अपील की है कि जहाँ भी दिखे पुलिस को सूचना दें। बता दें कि करण मोरवाल पर कॉन्ग्रेस की ही एक महिला पदाधिकारी ने रेप का आरोप लगाया है।

कोर्ट ने दिया 28 सितंबर तक का वक्त

पहले कोर्ट ने 24 अगस्त तक करण मोरवाल को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था लेकिन करण मोरवाल कोर्ट में पेश नहीं हुए, जिसके बाद अब कोर्ट ने कहा है कि अगर 28 सितंबर तक करण मोरवाल कोर्ट में पेश नहीं होते हैं तो उनकी संपत्ति कुर्क की जाएगी। इससे पहले 12 जुलाई को जिला कोर्ट ने करण मोरवाल की अग्रिम जमानत खारिज कर दी थी।

अग्रिम जमानत याचिका दायर करते हुए आरोपित के वकील ने जो साक्ष्य पेश किए थे, उनके मुताबिक घटना के वक्त वो किसी अस्पताल में भर्ती थे, लेकिन पीड़िता ने कॉल रिकॉर्डिंग्स, व्हाट्सएप चैटिंग जैसे साक्ष्य पेश किए थे, जिसके कारण कोर्ट ने आरोपित करण मोरवाल की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था।

साभार: सोशल मीडिया

युवा कॉन्ग्रेस की पदाधिकारी हैं पीड़िता

बता दें कि अप्रैल के महीने में युवा कॉन्ग्रेस की ही महिला पदाधिकारी ने इंदौर के महिला थाने में करण मोरवाल के खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराई थी। युवती ने बताया था कि दिसबंर 2020 में वो करण मोरवाल के संपर्क में आई थीं। आरोप है कि करण मोरवाल ने उन्हें नशीला पदार्थ खिलाकर उनके साथ दुष्कर्म किया और शादी का झाँसा देकर बार-बार दुष्कर्म करता रहा।

इस मामले में युवती की शिकायत पर विधायक के बेटे के खिलाफ धारा 376 के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामला दर्ज होने के बाद से ही आरोपित फरार है, वहीं दूसरी तरफ पीड़िता को तरह तरह से केस वापस लेने के लिए धमकाया भी जा रहा है। जिसकी शिकायत भी पीड़िता की ओर से पुलिस में की गई है।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों इस मामले में एक ऑडियो वायरल हुआ था। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार ऑडियो में पीड़िता से कोई शख्स मामले को सुलझाने की बात कर रहा था। रिपोर्ट के अनुसार कॉल करने वाला खुद को राहुल गाँधी के ऑफिस से जुड़ा बता रहा था। उसका दावा था कि वह इस मामले को सुलझाने के लिए दिल्ली से भेजा गया है। पीड़िता से यह भी कह रहा था कि कमलनाथ के हिसाब से दुनिया नहीं चलती। 

रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता ने पूछा कि क्या उसे कमलनाथ (पूर्व मुख्यमंत्री व कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता) ने भेजा है, जिस पर युवक कहता है कि कमलनाथ से ऊपर भी कई लोग हैं। उन्होंने ही उसको इंदौर में पूरा मामला सुलझाने को भेजा है, वरना उसका इंदौर में कोई काम नहीं था। युवक इस बातचीत में पीड़िता को राजनीति में आगे बढ़ाने का लालच देकर कहता है कि वह उसे आगे बढ़ा सकता है।

Vaariyamkunnan फिल्म: मोपला हिंदू नरसंहार के जिहादियों का हो रहा था महिमामंडन, विरोध के बाद स्थगित

मलयालम फिल्म ‘वरियमकुन्नन’ (‘Vaariyamkunnan’) के निर्माताओं ने इस प्रोजेक्ट को स्थगित करने का फैसला किया है। बता दें कि कई लोगों द्वारा फिल्म निर्माताओं पर स्वतंत्रता आंदोलन के नाम पर जिहादियों के अपराधों पर लीपापोती करने का आरोप लगाने के बाद यह फैसला लिया गया है।

फिल्म ‘वरियमकुन्नन’ 1920 के दशक की शुरुआत में केरल में हजारों हिंदुओं के खिलाफ नरसंहार करने के लिए जिम्मेदार जिहादी वरियमकुन्नथु कुंजाहम्मद हाजी (Variyam Kunnathu Kunjahammed Haji) और अली मुसलियार (Ali Musaliar) के जीवन पर आधारित है। बढ़ते आक्रोश के बीच, फिल्म निर्माताओं ने कथित तौर पर विवादास्पद परियोजना को स्थगित करने का फैसला किया है। निर्देशक आशिक अबू ने हालाँकि अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, फिल्म ‘वरियमकुन्नन’ को कंपास मूवीज लिमिटेड और अबू के ओपीएम सिनेमाज के संयुक्त वेंचर के रूप में अनाउंस किया गया था। मलयालम निर्देशक आशिक अबू ने विवादास्पद मलयालम अभिनेता पृथ्वीराज सुकुमारन को अपनी पीरियड फिल्म ‘वरियमकुन्नन’ में कास्ट किया था, जो 2021 में रिलीज होने वाली थी। विवादास्पद फिल्म मोपला समुदाय के जिहादी नेताओं की कहानी पर आधारित है, जिन्होंने 1921 में मालाबार या मोपला सांप्रदायिक दंगों के दौरान हजारों हिंदुओं का नरसंहार किया था। 

जून 2020 में, विवादास्पद मलयाली अभिनेता पृथ्वीराज सुकुमारन ने नई फिल्म की घोषणा करने के लिए फेसबुक का सहारा लिया था और अपने पोस्ट में जिहादियों की सराहना की थी। अभिनेता ने फिल्म के पोस्टर साझा करते हुए कहा था कि वरियमकुन्नथु एक ऐसे साम्राज्य के खिलाफ खड़े हुए, जिसने दुनिया के एक चौथाई हिस्से पर शासन किया।

केरल के मालाबार क्षेत्र में हिंदुओं पर बड़े पैमाने पर आतंक फैलाने वाले इस्लामिक आतंकवादी वरियमकुन्नथु के जीवन पर नई मलयालम फिल्म ने न केवल केरल में बल्कि पूरे देश में बड़े पैमाने पर हंगामा किया था।

फिल्म निर्माताओं पर आंदोलन की स्वतंत्रता की आड़ में मोपला हिंदू नरसंहार के जिहादियों के कुकर्मों को धोने का आरोप लगाया गया था। कई लोगों ने फिल्म के खिलाफ आपत्ति जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि फिल्म आतंकवादी को अंग्रेजों के खिलाफ ‘विद्रोह’ करने वाले के रूप में अपराध से मुक्त करने का एक और प्रयास था।

विरोध करने वालों ने आरोप लगाया था कि यह इतिहास को मिटाने का एक और प्रयास है और मालाबार या मोपला हिंदू नरसंहार के इतिहास को उनके हिंदू विरोधी कथा के अनुरूप लिखने का एक वीभत्स कार्य भी है। इससे पहले, अबू के ‘वरियमकुन्नन’ के पटकथा लेखकों में से एक ने भी फिल्म से इस्तीफा दे दिया था क्योंकि उसके पुराने विवादास्पद फेसबुक पोस्ट इंटरनेट पर फिर से शेयर होने लगे थे।

मोपला हिंदू नरसंहार और जिहादी वरियाम कुन्नथु हाजी कुंजाहमद हाजी

वरियमकुन्नथु या चक्कीपरांबन वरियमकुन्नथु कुंजाहम्मद हाजी (Variyam Kunnathu Kunjahammed Haji), वही शख्स है जो खुद को ‘अरनद का सुल्तान’ कहता था। उसी क्षेत्र का सुल्तान, जहाँ हजारों मोपला हिंदुओं का नरसंहार हुआ। जहाँ इस्लामिक ताकतों ने मिलकर लूटपाट की और अंग्रेजों के ख़िलाफ़ विद्रोह की आड़ में हिंदुओं का रक्तपात किया। मगर, फिर भी, उन आतताइयों के उस चेहरे को छिपाने के लिए इतिहास के पन्नों में उन्हें मोपला के विद्रोहियों का नाम दिया गया।

बता दें कि मोपला में हिंदुओं का नरसंहार वही घटना है, जब हिंदुओं पर मजहबी भीड़ ने न केवल हमला बोला बल्कि आगे चलकर पॉलिटिकल नैरेटिव गढ़ने के लिए उस बर्बरता को इतिहास के पन्नों से ही गुम कर दिया या फिर काट-छाँटकर इस पर जानकारी दी गई।

केरल के मालाबार में हिंदुओं पर अत्याचार के उन 4 महीनों ने हजारों हिंदुओं की जिंदगी तबाह की। बताया जाता है कि मालाबार में ये सब स्वतंत्रता संग्राम के तौर पर शुरू हुआ। लेकिन जब खत्म होने को आया तो उसका उद्देश्य साफ पता चला कि वरियमकुन्नथु जैसे लोग केवल उत्तरी केरल से हिंदुओं की जनसंख्या कम करना चाहते थे।

खिलाफत आंदोलन का सक्रिय समर्थक वरियमकुन्नथु ने अपने दोस्त अली मुसलीयर के साथ मिलकर मोपला दंगों का नेतृत्व किया। जिसमें 10,000 हिंदुओं का केरल से सफाया हुआ। जबकि माना जाता है कि इसके बाद करीब 1 लाख हिंदुओं को केरल छोड़ने पर मजबूर किया गया।

इस दौरान हिंदू मंदिरों को ध्वस्त किया गया। जबरन धर्मांतरण हुए और कई प्रकार के ऐसे अत्याचार हिंदुओं पर किए गए, जिन्हें शब्दों में बयान कर पाना लगभग नामुमकिन है। बाबा साहेब अंबेडकर अपनी किताब में इस नरसंहार का जिक्र करते हैं। वे पाकिस्तान ऑर पार्टिशन ऑफ इंडिया नाम की अपनी किताब में लिखते हैं कि हिन्दुओं के खिलाफ मालाबार में मोपलाओं द्वारा किए गए खून-खराबे के अत्याचार अवर्णनीय थे। दक्षिणी भारत में हर जगह हिंदुओं के ख़िलाफ़ लहर थी। जिसे खिलाफत नेताओं ने भड़काया था।

इसके अलावा एनी बेसेंट ने इस घटना का जिक्र अपनी किताब में करते हुए बताया था कि कैसे धर्म न त्यागने पर हिंदुओं पर अत्याचार हुए। उन्हें मारा-पीटा गया । उनके घरों में लूटपाट हुई। एनी बेंसेंट ने अपनी किताब में बताया कि करीब लाख से ज्यादा हिंदू लोगों को उस दौरान अपने घरों को तन पर पहने एक जोड़ी कपड़े के साथ छोड़ना पड़ा था। उन्होंने लिखा, “मालाबार ने हमें सिखाया है कि इस्लामिक शासन का क्या मतलब है, और हम भारत में खिलाफत राज का एक और नमूना नहीं देखना चाहते हैं।”

मलयालम फिल्म को प्रोड्यूस करने वाले अधिकतर लोग मालाबार के समुदाय विशेष के लोग हैं। जिन्हें लगता है शायद इस तरह के प्रयासों से वह हिंदुओं पर हुई बर्बरता को लोगों की नजरों में धुँधला कर देंगे और अपनी कोशिशों से एक नई इतिहास नई पीढ़ी के सामने पेश करेंगे।

लेकिन, आपको बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब हाजी के आतताई चेहरे को नायक में तब्दील करने की कोशिश हुई। इससे पहले भी जामिया प्रदर्शन के समय सुर्खियों में आई बरखा दत्त की शीरो लदीदा ने हाजी का महिमामंडन किया था।

लदीदा ने स्पष्ट तौर पर इस्लामिक कट्टरपंथी विचारधारा उजागर करते हुए लिखा था, “हम हर जगह, हर पल मालकम एक्स, अली मुस्लीयर और वरियंकुन्नथ के बेटे-बेटियों और पोते-पोतियों के रूप में उपस्थित रहेंगे। वो सभी नारे हमारी आत्मा हैं और हमने अपने पूर्वजों से ही सीखा है कि राजनीति कैसे की जाती है। तुम लोगों के लिए भले ही वो नारे बस नारे ही हो लेकिन हमारे लिए वो हमारी पहचान हैं, जो हमें औरों से अलग करती है। हम पर ऐसा कोई दबाव नहीं है कि हमें तुम्हारे सेक्युलर नारों का ही इस्तेमाल करना है। मैं स्पष्ट कर दूँ कि हम तुमसे बिलकुल अलग हैं, हमारे तौर-तरीके अलग हैं और हमारा आधार अलग है। इसीलिए, हमें सिखाने की कोशिश मत करो। हमारे बाप मत बनो।”

हाथ काट लिया जाएगा, इस्लामी शरिया कानून से होगा सब कुछ: चोरी की सजा के लिए तालिबान ने मस्जिद से की घोषणा

तालिबान ने वही किया, जिसके कयास लगाए जा रहे थे। वही किया, जिससे वो खुद भी इनकार नहीं कर रहे थे। काबुल की एक मस्जिद से घोषणा कर दी गई कि जो लोग चोरी करते हुए या चोरी में लिप्त पाए जाते हैं, उनके हाथ इस्लाम के शरिया कानून के अनुसार काट दिए जाएँगे।

पत्रकार आदित्य राज कौल ने काबुल मस्जिद के माध्यम से तालिबान द्वारा की गई घोषणा के बारे में जानकारी देने के लिए ट्विटर का सहारा लिया। इसमें कहा गया कि जो लोग चोरी या चोरी के मामले में रंगे हाथ पकड़े जाते हैं, उनके हाथ इस्लामी शरीयत कानून में परिभाषित कानून के अनुसार काट दिए जाएँगे।

इस्लामी शरिया कानून मुस्लिमों को उस अपराधी के ‘हाथ काटने’ का आदेश देता है, जिसने चोरी की है। कुरान 5:38 कहता है कि चोरी और डकैती के अपराधियों का हाथ काट कर दंडित किया जाना चाहिए।

अमेरिका के सैनिक अब अफगानिस्तान से लौट गए हैं। वहाँ अब तालिबान का शासन हो गया है। अपने शासन के दौरान, तालिबान द्वारा दी गई सजा में हत्यारों को सार्वजनिक रूप से फाँसी देना, लुटेरों और चोरों के हाथ-पैर काटना और मिलावट करने वालों को पत्थर मारना एवं कोड़े मारना शामिल रहा है। 

उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान में तालिबानी आतंकियों का आतंक दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। तालिबान के इस्लामी आतंकी क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए निर्दोष लोगों को भी मार रहे हैं। पिछले दिनों तालिबान ने एक 21 वर्षीय लड़की की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी, क्योंकि उसने टाइट कपड़े पहने थे और उसके साथ कोई पुरुष रिश्तेदार नहीं था।

यह भी रिपोर्ट है कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद से तालिबानी आतंकी बेगुनाह लोगों को जबरन घरों से बाहर निकालकर मार रहे हैं। उन्होंने जिन इलाकों पर कब्जा कर लिया है, वहाँ शरियत कानून लागू करते हुए महिलाओं के अकेले घर से बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

मालूम हो कि तालिबान ने अपने 1996-2001 के क्रूर शासन के दौरान लड़कियों को स्कूल जाने के अधिकार से वंचित रखा था। साथ ही महिलाओं को घर से बाहर काम करने की अनुमति भी नहीं थी। उस समय महिलाओं को बुर्का पहनना पड़ता था और बाहर जाते समय उनके साथ पुरुष परिजन या किसी पुरुष रिश्तेदार का साथ होना जरूरी होता था। वहीं, उस समय व्यभिचार (adultery) के आरोपितों को सार्वजनिक रूप से पत्थर मार-मार कर मार डाला जाता था।