Home Blog Page 3436

गिलानी की लाश पर पाकिस्तानी झंडा, वीडियो सामने आने के बाद FIR: पाकिस्तान में भी झंडा झुका मना मातम

जम्मू-कश्मीर के कट्टरपंथी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी को दफनाने से पहले उनके पार्थिव शरीर को पाकिस्तानी झंडे में लपेटा गया था। पाकिस्तानी मीडिया ने गुरुवार (2 सितंबर) को इसकी जानकारी दी।

अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिलानी के शव को पाकिस्तानी झंडे में लपेटने और राष्ट्र विरोधी नारे लगाने के आरोप में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बडगाम में शनिवार (4 सितंबर) को अज्ञात लोगों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। इस बीच बडगाम जिले के नरकारा में पथराव की छिटपुट घटना को छोड़कर पूरी घाटी में शांति रही। बताया जा रहा है कि दर्जन भर से अधिक अराजक तत्वों को गिरफ्तार किया गया है। 

गिलानी को दफनाने से पहले का एक वीडियो सामने आया है। इसमें उनके शव को पाकिस्तानी झंडे से लपेटा हुआ दिखाया गया है। शव के चारों तरफ कई अन्य लोग भी मौजूद हैं, जिनमें अधिकतर महिलाएँ हैं। बताया जा रहा है कि जैसे ही पुलिस शव को अपने कब्जे में लेने के लिए आगे बढ़ी, दिवंगत अलगाववादी नेता के सहयोगियों ने झंडा हटा दिया। इसके बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने UAPA के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।

ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी का लंबी बीमारी के बाद बुधवार (सितंबर 1, 2021) देर रात निधन हो गया था। उनके शव को हैदरपोरा के एक कब्रिस्तान में दफनाया गया है।

श्रीनगर के पुराने इलाके और हैदरपोरा में पाबंदियाँ अभी भी जारी हैं। हैदरपोरा में गिलानी के घर की ओर जाने वाले सभी रास्ते सील हैं। शनिवार सुबह से इंटरनेट सेवाएँ फिर से बंद कर दी गई हैं। प्रशासन ने यातायात बहाल करने के साथ ही तीन दिन से फँसे वाहनों को निकाला।

बता दें कि गिलानी ने कभी भी कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं माना। सन् 1990 में उन्होंने अलगाववाद की राजनीति करने वालों के लिए एक मंच तैयार किया था, जिसका नाम ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस रखा गया था। इसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के विरुद्ध तमाम गुट शामिल हो गए।

सैयद अली शाह गिलानी पर अक्सर पाकिस्तान को फंडिंग के जरिए कश्मीर में अलगाववाद भड़काने के आरोप लगे हैं। उसके विरुद्ध कई केस भी दर्ज हुए हैं। NIA और ED ने टेरर फंडिंग के मामले में जाँच की थी, जिसमें उनके दामाद समेत कई रिश्तेदारों से पूछताछ हुई थी।

गिलानी की मौत पर पाकिस्तानी झंडे वाले कनेक्शन को समझना है तो इमरान खान के दर्द को समझिए। भारत में एक आदमी मरता है और पाकिस्तान का प्रधानमंत्री ट्वीट करके अपने देश के झंडे को आधी ऊँचाई पर फहराने (राष्ट्रीय मातम) का संदेश देता है। मुसलमान-मुसलमान/आतंकी-आतंकी वाला यह कनेक्शन शायद ही कभी खत्म हो।

अफगान की महिला पुलिस इंस्पेक्टर, जिसके अब्बा ने तालिबानियों से मिल सिर में मारवाई गोली, आँखें भी निकाल लीं

अफगानिस्तान में शासन पर काबिज होने के बाद तालिबान दुनिया की नजर में खुद को अच्छा साबित करने के लिए खुद के बदलने का दावा कर रहा है। लेकिन हकीकत कुछ और है। तालिबान के शासन में महिलाओं का कोई सामाजिक अधिकार नहीं है, काम पर करने पर उनकी आँखे निकाल ली जाती हैं।

अफगान पुलिस फोर्स में इंस्पेक्टर के तौर पर काम कर चुकीं खातिरा हाशमी ने तालिबान के जुल्म की कहानी बयाँ की है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, खातिरा ने बताया कि वो तालिबान की बर्बरता की जीती जागती सबूत हैं। खातिरा हाशमी जब गर्भवती थीं, तभी तालिबान ने उनका अपहरण कर लिया था। उनके सिर में गोली मारी गई थी। इसके बावजूद जब उनका मन नहीं भरा तो उन्होंने खातिरा की आँखें निकाल लीं।

इंडिया टुडे के साथ इंटरव्यू में खातिरा ने अपना दर्द बयाँ किया। उन्होंने कहा, “तालिबान की नजर में जब एक महिला काम के लिए घर से बाहर अपने कदम रखती है तो वो सबसे बड़ा पाप है। मेरे साथ जो हुआ वह अभी कई अन्य महिलाओं के साथ भी हो रहा है। लेकिन, वे बाहर आकर यह नहीं कह सकती हैं क्योंकि वे डरती हैं। ”

खातिरा फिलहाल भारत में रह रही हैं। लेकिन अफगानिस्तान में उन्हें मिली प्रताड़ना को याद कर वो आज भी डर कर रोने लगती हैं। उन्होंने कहा कि इस्लाम के नाम पर तालिबान अफगानिस्तान के लोगों को आतंकित कर रहा है।

खातिरा के अब्बू ने उनके पुलिस फोर्स ज्वाइन करने के फैसले का विरोध किया था। उसके बाद उन्हें उनके ही अब्बू ने ही धोखा भी दिया था। खातिरा हाशमी ने कहा कि उन पर हमले के बाद उन्हें केवल इतना पता चला था कि उनका अब्बू भी तालिबान के साथ मिला हुआ था और उसे तालिबान द्वारा किए गए हमले के बारे में पहले से पता था, लेकिन उसने कुछ नहीं किया।

अपने साथ हुई घटना को लेकर हाशमी ने कहा कि एक दिन वो अपनी ड्यूटी करके लौट रही थीं तो उनके घर के पास ही तीन तालिबानी उनका इंतजार कर रहे थे। खातिरा ने कहा, “उन्होंने मुझ पर हमला किया, मुझे आठ से दस बार चाकुओं से गोद दिया। उन्होंने मुझ पर बंदूक तान दी, सिर में गोली लगने से मैं बेहोश हो गई थी। इस पर भी वो संतुष्ट नहीं हुए तो उन्होंने चाकू से मेरी आँखें निकाल लीं।”

इसके बाद तालिबानियों ने उन्हें मरा समझ कर बीच सड़क पर छोड़ दिया था। हालाँकि, घायल अवस्था में उन्हें काबुल के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहाँ उनकी जान तो बच गई, लेकिन आँखें नहीं रहीं। खातिरा का कहना है कि अब वो एक जिंदा लाश बन चुकी हैं। अब वो साँस तो ले रहीं हैं, लेकिन हर दिन उनके लिए एक नया संघर्ष है।

खातिरा ने बताया कि वो भारत इलाज कराने के लिए आई थीं, उसी दौरान अफगानिस्तान में हालात बिगड़े और एक सप्ताह के हमले के बाद तालिबान का वहाँ शासन हो गया।

UP में योगी का जलवा, कुल 4 राज्यों में फिर से बन रही BJP की सरकार: ABP-C वोटर का सर्वे, जानिए किसको कितनी सीटें

अगले साल 2022 में पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसको लेकर एबीपी-सीवोटर ने अपना ओपिनियन सर्वे जारी कर दिया है। सर्वे में जिन पाँच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं उनमें से उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर समेत चार राज्यों में भाजपा के जीतने की संभावना है। उत्तर प्रदेश में जनता ने एक बार फिर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भरोसा जताया है। हालाँकि, पंजाब में त्रिशंकु की स्थित बनने का अनुमान है।

उत्तर प्रदेश

2024 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर हो रहे पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव न केवल बीजेपी, बल्कि सभी पार्टियों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश में भाजपा की वापसी उसकी पकड़ को काफी मजबूत करती है।

सी वोटर के सर्वे के मुताबिक बीजेपी को 2022 के चुनाव में 259 और 267 के बीच सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं। यानी, लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार को पसंद किया है, जबकि बीजेपी के बाद सपा को लगभग 109-117 सीटें मिलने की उम्मीद जताई गई है। इसके अलावा बसपा को करीब 12 से 16 सीटें और कॉन्ग्रेस के 3-7 सीटों पर सिमटने का आकलन है। वोट शेयर के लिहाज से भी बीजेपी को 0.4 फीसदी की बढ़त मिल रही है। हालाँकि, सपा पिछले चुनाव के मुकाबले लगभग 6.6 प्रतिशत अंक हासिल कर रही है।

उत्तर प्रदेश में सर्वे में शामिल किए गए 44 फीसदी लोगों ने स्पष्ट कहा है कि वो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काम करने के तरीके से खुश हैं।

उत्तराखंड

इसके अलावा सर्वे के मुताबिक, उत्तराखंड में भी बीजेपी वापसी कर रही है। उत्तराखंड में भी भाजपा की वापसी की भविष्यवाणी तय मानी जा रही है। यहाँ बीजेपी अकेले ही 70 में से 44-48 सीटें जीत रही हैं। इसके बाद कॉन्ग्रेस 19-23 सीटों पर सिमटती दिख रही है। जबकि, AAP को भी लगभग 2 सीटें मिलने की उम्मीद है।

वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर भी सर्वे में उत्तराखंड 46.5 प्रतिशत लोगों ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी को ही वोट देंगे। वहीं केजरीवाल 14.6 फीसदी वोटों के साथ दूसरे स्थान पर हैं, उन्होंने राहुल गाँधी को 10.4 फीसदी से हराया है।

गोवा

सी वोटर के सर्वे के मुताबिक, दक्षिण भारतीय राज्य गोवा में बीजेपी फिर से वापसी करती दिखाई दे रही है। पार्टी यहाँ पर 40 विधानसभा सीटों में से 22-26 सीटों पर जीत हासिल करती दिखाई दे रही है। इसके बाद कॉन्ग्रेस को पछाड़ते हुए गोवा में आम आदमी पार्टी 4-8 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर दिख रही है। जबकि, कॉन्ग्रेस के 3-7 सीटों पर सिमटने की उम्मीद है।

मणिपुर

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में एबीपी-सीवोटर सर्वे के मुताबिक, 32-36 सीटों पर जीत हासिल करके बीजेपी के एक बार फिर सत्ता में बने रहने का अनुमान है। वहीं कॉन्ग्रेस यहाँ 18-22 सीटें जीतती दिख रही है। इसके अलावा नागा पीपुल्स फ्रंट केवल 2-6 सीटों पर सिमट रही है।

वोट शेयर के हिसाब से भी सबसे अधिक 40.5 फीसदी वोट बीजेपी को और 34.5 फीसदी वोट कॉन्ग्रेस को मिल रहे हैं। जबकि 7 फीसदी एनपीएफ को मिलेगा। शेष 18 फीसदी निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में जाने की उम्मीद है।

पंजाब

कॉन्ग्रेस शासित पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली सरकार यहाँ पिछड़ती दिख रही है। राज्य में आम आदमी पार्टी बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है। यहाँ 2017 में 38.5 प्रतिशत वोट पाने वाली कॉन्ग्रेस घटकर 28.8 फीसदी पर आ सकती है। यानी कि 10 प्रतिशत अंक की गिरावट देखी जा सकती है। वहीं आप का वोट शेयर 23.7 फीसदी से बढ़कर 35.1 फीसदी हो सकता है।

राज्य में आम आदमी पार्टी को 51 से 57 के बीच सीटें मिल सकती हैं, तो वहीं कॉन्ग्रेस 38-46 सीटों पर सिमट सकती है। इसके अलावा शिरोमणि अकाली दल जहाँ करीब 16-24 सीटों पर सिमट सकता है। यहाँ बीजेपी के लिए मुश्किल दिख रही है।

‘…तो बिना कपड़ों के जाती’: उर्फी जावेद ने ब्रा दिखाने का किया बचाव, कभी कहा था – ‘लोग समझते थे पोर्न स्टार’

बिग बॉस ओटीटी की एक्स कंटेस्टेंट उर्फी जावेद को हाल ही में मुंबई एयरपोर्ट पर ब्रा फ्लॉन्ट करने पर जमकर ट्रोल किया गया। नेटिजन्स ने उर्फी के फैशन सेंस और स्टाइल पर सवाल उठाते हुए इसे पब्लिसिटी स्टंट बताया था। इसको लेकर अब उर्फी ने अपनी सफाई दी है।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में उर्फी ने कहा, ”अगर मुझे पब्लिसिटी ही चाहिए होती तो मैं एयरपोर्ट पर बिना कपड़ों के जाती।” साथ ही उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि लोग उनके बारे में बात करने की बजाए उनके आउटफिट्स के बारे में ही बात करते हैं।

वे कहती हैं कि मेरे कपड़ों से ज्यादा मैं महत्व रखती हूँ, आखिर क्यों लोग मेरे बारे में बात नहीं करते। मैंने देखा है कि मैं कुछ भी पोस्ट करूँ लोग उस पर कुछ ना कुछ जरूर कहेंगे। चाहे मैं बिकिनी पहनूँ या सलवार सूट, लोग घटिया कमेंट्स करते ही हैं।

सोशल मीडिया पर खासा एक्टिव रहने वाली उर्फी ने इंस्टाग्राम पर अपनी एयरपोर्ट वाली फोटो शेयर की है। इसमें उर्फी की जैकेट फ्रंट से इतनी छोटी थी कि उनकी ब्रा फ्लॉन्ट हो रही थी। इसको लेकर ट्रोलर्स ने सोशल मीडिया पर उनका काफी मजाक भी उड़ाया था।

गौरतलब है कि अगस्त में ‘बिग बॉस’ के घर से बाहर आने के बाद टीवी एक्ट्रेस ने अपनी निजी जिंदगी से जुड़े कई राज खोले थे। उर्फी ने बताया कि अडल्ट साइट पर उनकी तस्वीरें अपलोड होने के बाद उन्हें परिवार का कोई सपोर्ट नहीं मिला था। इसकी वजह से रिश्तेदार उन्हें पोर्न स्टार समझने लगे थे।

एक्ट्रेस ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके अब्बू ने उन्हें ‘मानसिक और शारीरिक रूप से’ प्रताड़ित किया था। उनके रिश्तेदार उनका बैंक अकाउंट चे​क करना चाहते थे। हिंदुस्तान टाईम्स के मुताबिक, सिद्धार्थ कनन को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उस वक्त मैं 11वीं क्लास में पढ़ती थी। उस दौरान मैं बहुत ही मुश्किल दौर से गुजरी थी, क्योंकि मुझे मेरे परिवार का सपोर्ट नहीं मिला था। वे मुझे ही दोष दे रहे थे।

‘ओवैसी को अयोध्या में नहीं घुसने देंगे’: संतों का ऐलान, AIMIM के पोस्टर पर श्रीराम की नगरी को लिखा ‘फैजाबाद’

उत्तर प्रदेश​ विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है। इसी बीच खबर है कि असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM पार्टी के सम्मेलन को लेकर अयोध्या के संत विरोध में उतर आए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबि​क, 7 सितंबर को अयोध्या मुख्यालय से 40 किमी दूर रुदौली क्षेत्र में AIMIM की ‘शोषित वंचित समाज सम्मेलन’ नाम से सियासी सभा आयोजित की गई है।

इसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी पहुँच रहे हैं। ओवैसी के यूपी दौरे को लेकर उनकी पार्टी एआईएमआईएम ने एक पोस्‍टर जारी क‍िया है, जिसमें उन्होंने अयोध्या को फैजाबाद लिखा है। इसको लेकर संतों ने नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर पोस्टर में फैजाबाद की जगह अयोध्या नहीं लिखा गया तो ओवैसी की रैली अयोध्या में नहीं होने दी जाएगी।

हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास का ​कहना है, ”संसद देश का मंदिर है और उसके सदस्य ओवैसी की भाषा ऐसी है। अयोध्या से क्या चिढ़ है? क्यों अयोध्या को फैजाबाद कह रहे हैं? सरकारी अभिलेख में भी अयोध्या नाम दर्ज हो गया है तो पोस्टर पर फैजाबाद नाम दुर्भाग्यपूर्ण है। ओवैसी की विचारधारा की पुरजोर निंदा कर हम पोस्टर को हटाने की माँग करते हैं।”

वहीं, तपस्वी पीठ के महंत जगत गुरु परमहंस आचार्य ने कहा, ”यह मुख्यमंत्री और अयोध्यावासियों का अपमान है। यदि फैजाबाद नाम लिखे पोस्टर नहीं हटाए जाते हैं, तो अयोध्या में ओवैसी का प्रवेश वर्जित किया जाए। हम अयोध्या में एआईएमआईएम के सम्मेलन को किसी भी सूरत में नहीं होने देंगे।

बता दें कि पार्टी के जिला अध्यक्ष शाहनवाज सिद्दीकी ने सफाई देते हुए कहा है कि पहले अयोध्या का नाम फैजाबाद था और बदले हुए नाम को अमल में लाने में वक्त लगेगा। पोस्टर में कहीं अयोध्या भी लिखा है, कहीं फैजाबाद भी। वहीं, ओवैसी ने गुरुवार (2 सितंबर) को कहा था क‍ि वह 7 सितंबर को ‘फैजाबाद’, 8 सितंबर को सुल्तानपुर और 9 सितंबर को बाराबंकी का दौरा करेंगे। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा क‍ि यह सिर्फ शुरुआत है। हम यूपी में कई जगहों पर जाएँगे। 

1000 विद्रोहियों का सरेंडर, क्षेत्र के विकास में खर्च होंगे ₹1000 Cr: जानिए क्या है कार्बी समझौता, शाह-सरमा ने किए हस्ताक्षर

असम में शांति बहाली के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने शनिवार (4 अगस्त 2021) को दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कार्बी संगठनों के प्रतिनिधियों ने त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के बाद शाह ने असम में कार्बी आंगलॉन्ग समझौते को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि मोदी सरकार असम की क्षेत्रीय अखंडता को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

गृह मंत्री अमित शाह ने इस मौके पर कहा, “जब से नरेंद्र मोदी प्रधान मंत्री बने हैं तभी से पूर्वोत्तर भारत न केवल उनके फोकस का क्षेत्र रहा है, बल्कि नॉर्थ ईस्ट का किस तरह से सर्वांगीण विकास हो यह उनके लिए महत्वपूर्ण काम का अंग रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए बीते सात सालों में मोदी जी के नेतृत्व में काफी काम हुआ है। आज 1000 कार्बी कैडर ने हथियार डालकर विकास की मुख्यधारा में लौटने की शुरुआत की है। मोदी सरकार की यह नीति रही है कि अगर कोई हथियार डालकर मुख्यधारा में आता है तो उसे उसकी माँग के अनुसार सम्मान दिया जाता है।”

उन्होंने आगे कहा कि हथियार डालकर मुख्यधारा में आनेवालों के पुनर्वसन के लिए भारत सरकार औऱ असम सरकार कटिबद्ध है। गृह मंत्री ने कार्बी आंगलॉन्ग के विकास को लेकर कहा कि असम सरकार पाँच साल में 1000 करोड़ रुपए इस क्षेत्र के विकास के लिए खर्च करेगी। हर बजट में इसके लिए 200 करोड़ रुपए आवंटित होंगे। इसके अलावा ये जो समझौता हुआ है ये इस क्षेत्र के विकास के लिए मुख्य कारक बनने वाला है।

सरमा बोले-यह बड़ी उपलब्धि

इस समझौते को लेकर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि 1,000 आतंकवादी आत्मसमर्पण करेंगे और ढेर सारे हथियार जमा किए जाएँगे। इससे इस क्षेत्र में शांति बहाल होगी। यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। सीएम ने आगे कहा कि हम 300 से अधिक अत्याधुनिक हथियारों के साथ आत्मसमर्पण करने वाले 1000 आतंकवादियों के पुनर्वास के लिए काम करेंगे। उन्हें पहली बार कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद में आरक्षण दिया जाएगा।

इस बीच राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानन्द सोनोवाल ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी औऱ गृह मंत्री अमित शाह को राज्य के दशकों पुराने संकट को हल करने के लिए धन्यवाद दिया।

कौन हैं कार्बी समूह

रिपोर्ट के मुताबिक, कार्बी असम का एक जातीय समूह है, जो कि कई गुटों औऱ टुकड़ों में है। इनका इतिहास 1980 के दशक से हत्याओं, जातिगत हिंसा और अपहरण से जुड़ा हुआ है।

मुकेश अंबानी का ‘दामाद’ UP में, माँग रहा Z+ सिक्योरिटी, कहा – ‘मैंने बनवाया है ये DIG कार्यालय’

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के विंध्याचल परिक्षेत्र के डीआईजी कार्यालय पर शुक्रवार (सितंबर 3, 2021) को पहुँचे एक युवक ने ऐसा दावा किया जिसके बाद वहाँ मौजूद अधिकारी और कर्मी चौंक गए। उसने कहा, “मैं रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी का दामाद हूँ, मुझे जेड प्लस सुरक्षा चाहिए।” डीआईजी कार्यालय पर पहुँच कर सुरक्षा की माँग करने का वीडियो वायरल हो रहा है।

खुद को अंबानी परिवार का दामाद बताने वाले युवक डा. रविश्याम द्विवेदी ने बताया कि बताया कि मुकेश अंबानी की बेटियों से उसका विवाह तय हुआ है। वह मुकेश अंबानी के परिवार के सदस्यों का नाम लेते हुए अपना रिश्ता बताने लगा। बताया कि 2017 में उसके भाइयों ने उसके ऊपर हमला किया था। उनसे जान का खतरा है। इसलिए सुरक्षा की माँग कर रहा है।

रविश्याम द्विवेदी ने बताया कि पहले भी वह डीआईजी, कमिश्नर डीएम, एसपी आदि अधिकारियों से शिकायत कर चुका है। कई अधिकारी उससे मिलने मुंबई भी पहुँचे थे। डीआईजी कार्यालय पर जब लोगों ने उससे मुकेश अंबानी से मोबाइल पर बात करने की बात कही तो उसने कहा कि उसे खतरा है। इसलिए पीएम, सीएम ने उसे फोन सिर्फ इमरजेंसी सेवा में चालू करने के लिए कहा है।  

उसने यहाँ तक बोला कि जिस कार्यालय में पुलिस उपमहानिरीक्षक बैठे हुए हैं वो कार्यालय भी उसने ही बनवाया है। इस पर सभी भौंचक्के रह गए। उसके बाद व्यक्ति से पूछा गया कि उसकी शादी मुकेश अंबानी की बेटियों से कैसे और कहाँ लगी तो उसने बताया कि मुंबई के महालक्ष्मी मंदिर में उसकी शादी की बात हुई थी और कुछ ही समय बाद उसकी शादी उनकी बेटियों से हो जाएगी। बाद में पता चला कि व्यक्ति आंशिक तौर पर मानसिक रूप से विक्षिप्त है और जनपद के ही खैरा गाँव का रहने वाला है। आए दिन सोशल मीडिया पर इस तरह के अजीबोगरीब वीडियो वायरल होते रहते हैं।

‘कॉन्ग्रेस की तालिबानी सोच’ – तालिबान के समर्थन में कॉन्ग्रेसी MLA इरफान अंसारी पर BJP का पलटवार

अपने बयान को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले कॉन्ग्रेस विधायक और झारखंड के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष इरफान अंसारी ने अब तालिबान की तारीफ करके नए विवाद को जन्म दे दिया है। इरफान अंसारी ने कहा कि वहाँ के लोग अब खुश हैं।

इरफान अंसारी का कहना है, “अमेरिकी वहाँ जाकर अफगानिस्तान और तालिबान के साथ ज्यादती कर रहे थे। माँ-बहन, बच्चों तक को तंग कर रहे थे। इसी के खिलाफ यह लड़ाई है। जो कुछ फैलाया जा रहा है, वह गलत है। अगर किसी भी जनता पर जुल्म होगा तो वो उसका समर्थन करेंगे।”

तालीबान की तारीफ करते हुए इरफान अंसारी ने कहा कि उन्होंने अमेरिका को अफगानिस्तान से खदेड़ कर शानदार काम किया है। झारखंड में मानसून सत्र के पहले दिन विधानसभा पहुँचे इरफान ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि तालिबानियों की सराहना की जानी चाहिए क्योंकि उन्होंने अमेरिकियों को अफगानिस्तान से खदेड़ दिया है। जामताड़ा से दूसरी बार विधायक बने अंसारी ने कहा कि अमेरिकी सेना अफगानिस्तान में ज्यादती करती थी।

तालिबानियों का समर्थन करके वो ऐसे संगठन का सपोर्ट कर रहे, जिसे पूरी दुनिया में आंतकवादी माना जाता है – इस सवाल पर इरफान अंसारी ने कहा कि वो आतंकवादी संगठन हैं लेकिन अमेरिकियों को अपने देश से खदेड़कर उन्होंने क्रांतिकारी काम किया है। विधायक के अनुसार ब्रिटिश और अमेरिकी सेना जहाँ भी जाती है, लोगों पर अत्याचार करती है।

हालाँकि बाद में अपने शब्दों को संभालते हुए उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में शांति होनी चाहिए क्योंकि अमेरिकी सैनिक चले गए हैं और ब्रिटिश सेना को खदेड़ दिया गया है। यह भी कहा कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान में जो हो रहा है, उससे उन्हें कुछ लेना-देना नहीं है।

इरफान अंसारी के बयान पर पलटवार करते हुए बीजेपी ने कहा कि यह कॉन्ग्रेस की तालिबानी सोच को दर्शाता है। विधानसभा में बीजेपी के मुख्य सचेतक बिरंची नारायण ने कहा कि वह इस तरह की बातें इसलिए कर रहे हैं क्योंकि कॉन्ग्रेस पार्टी तालीबानी मानसिकता से ओतप्रोत है।

बिरंची नारायण के अनुसार इरफान अंसारी ऐसे आतंकवादी संगठन का समर्थन कर रहे हैं, जो औरतों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ क्रूरता के लिए जाना जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कई माँ और बहनें और अन्य लोग डर के कारण अफगानिस्तान से भाग रहे हैं… तो क्या अंसारी यहाँ भी ऐसी ही स्थिति देखना चाहते हैं?

’56 साल में 12 मेडल, इस साल अकेले 17 मेडल’: लोगों ने पूर्व PM नेहरू को याद किया: चेतन भगत को भी हल्का-फुल्का क्रेडिट

ओलंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों द्वारा देश के लिए मेडल लाने के बाद अब टोक्यो पैरालंपिक गेम्स 2020 में भारतीय पैरालंपिक खिलाड़ियों ने कई मेडल्स जीते हैं। पैरालंपियन खिलाड़ियों ने अब तक 16 मेडल्स हासिल किए हैं, जो कि 1960- से वर्ष 2016 तक जीते गए 12 मेडल्स की तुलना में कहीं अधिक हैं। इसी को लेकर सोशल मीडिया पर लोग तंज कसते हुए पूर्व प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू को धन्यवाद दे रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल पैरालंपिक्स खेल 2020 में भाविना पटेल ने टेबल टेनिस में सिल्वर मेडल, हाई जम्प में निषाद कुमार ने सिल्वर मेडल, अवनी लेखारा ने 10 मीटर राइफल शूटिंग में गोल्ड, जैवेलिन थ्रो में देवेंद्र झाझरिया ने सिल्वर, सुंदर सिंह गुर्जर ने जैवेलिन थ्रो में कांस्य, योगेश कथुनिया ने डिस्कस थ्रो में सिल्वर, सुमित अंतिल ने जैवेलिन थ्रो में गोल्ड मेडल, सिंहराज अधाना ने शूटिंग कांस्य, मरियप्पन थंगावेलू ने मेन्स हाई जम्प में सिल्वर, शरद कुमार ने भी पुरुषों के हाई जम्प में कांस्य, प्रवीन कुमार ने पुरुषों के हाई जम्प में सिल्वर, अवनी लेखारा ने महिलाओं के 50 मीटर राइफल शूटिंग में कांस्य पदक, हरविंदर सिंह ने आर्चरी में कांस्य पदक जीता है। इसके अलावा प्रमोद भगत ने पहली बार बैडमिंटन में गोल्ड मेडल हासिल किया है। इसी के साथ भारत ने टोक्यो पैरालंपिक-2020 खेलों में अब तक कुल 17 मेडल हासिल कर लिए हैं।

भारतीय पैरालंपियन खिलाड़ियों द्वारा टोक्यो पैरालंपिक में शानदार प्रदर्शन को लेकर फर्रागो अब्दुल्ला नाम के यूजर ने आँकड़े शेयर किए और पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू को इसके लिए धन्यवाद दिया।

इस पर ट्रैवेलिंग नाम के यूजर में भारतीय खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन के लिए मोदी सरकार को श्रेय दिया और कहा कि मोदी सरकार ने खेल पर ध्यान दिया है जिस कारण से भारत ने इतना अच्छा प्रदर्शन किया है। अन्यथा दूसरे तो भारतीय खिलाड़ियों को केवल भोजन-पानी और आवास में उलझाकर रखते थे। क्योंकि इससे सत्ता के लिए खतरा कम रहता।

अरुन सिंह इंडियन नाम के यूजर ने पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गाँधी पर निशाना साधते हुए कहा, “80 के दशक में दिल्ली में हुए एशियन गेम्स में एक भारतीय एथलीट ने गोल्ड जीता और राजीव गाँधी अखाड़े में उतरे। उनके एक चमचे ने एथलीट को उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेने के लिए मजबूर किया। वह कॉन्ग्रेसी तरीके से एथलीट को दिया गया प्रोत्साहन था।”

इस बीच एक अन्य यूजर ने चेतन भगत के हालिया बयान को लेकर उनके मजे लेते हुए कहा कि इसके लिए उन्हें धन्यवाद दिया जाना चाहिए कि उन्होंने पीएम मोदी को खेलों के बारे में सोचने के लिए प्रोत्साहित किया।

राहुल देव नाम के यूजर ने खेल रत्न अवार्ड से राजीव गाँधी के नाम हटाने को भारत के मेडल जीतने से जोड़ा।

दिल्ली के 365 गाँवों के नाम आक्रांताओं पर, पहले हिन्दू देवी-देवताओं पर थे: ऐतिहासिक साक्ष्य पर नाम वापसी प्रक्रिया शुरू

इतिहास गवाह है कि आक्रमणकारियों ने दिल्ली को कई बार तोड़ा, देशवासियों की भावनाओं और मान-सम्मान को अपने अभिमान और क्रूरता तले रौंदा। इन्हीं घटनाओं, क्रूरताओं और बर्बरताओं की निशानी आज भी नामों के रूप में हमें पल-पल डसती रहती हैं। मुगल शासकों ने भारत पर आक्रमण करने के बाद कई बार दिल्ली का नाम बदला। वहीं दिल्ली में बने छोटे बड़े गाँवों के नाम आज भी आक्रांताओं के नामों पर हैं।

दिल्ली को पहले ढिल्ली के नाम से बुलाया जाता था। फिर इसका नाम शाहजहाँनाबाद पड़ा। इसके बाद इसे इंद्रप्रस्थ के नाम से लोग जानने लगे। यहाँ के गाँव के नाम, हुमायूँ, तैमूर, औरंगजेब या फिर मोहम्मदपुर के नाम से होते थे। लेकिन सच तो यह है इनका नाम कुछ और था। कई अभिलेख, साक्ष्य मिले हैं, जिनसे यह पता चलता है कि इनके नाम पहले हिन्दूओं के भगवान के नाम पर थे। इस दिशा में काम कर रहे हैं लोगों का कहना है कि यह बदलाव हमारी संस्कृति और सभ्यता की वास्तविक पहचान का प्रतीक बनेंगे। उन नामों को तलाशना होगा जो इन आक्रमणकारियों से पहले थे, क्योंकि इतिहास के पन्नों में जिन नामों को पढ़ते हुए लोगों को घृणा होती है उन्हीं के नाम के गाँवों में रहने और सड़कों पर चलने को वे मजबूर होते हैं।

दैनिक जागरण की ए​क रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में करीब 365 गाँव ऐसे हैं, जिनमें अधिकतर के नामों में विदेशी आक्रमणकारियों की छाप मिलती है। पुरातत्व विभाग, दिल्ली के पूर्व निदेशक और यहाँ के 365 गाँवों पर अध्ययन करने वाले डॉ. धरमवीर शर्मा का कहना, ”बात सिर्फ दो गाँवों की नहीं है। दिल्ली में करीब 365 गाँव हैं, जिनमें से अधिकतर के नाम आक्रांताओं के नाम पर हैं।”

पुरातत्व विभाग को इससे जुड़े साक्ष्य भी मिले हैं। तेरहवीं शताब्दी में मिला सरवन अभिलेख इसकी पुष्टि करता है, जिसमें ‘इंद्रप्रस्थ मौजा हरियाणा लिखा’ हुआ है। दिल्ली ढिल्ली, ढिल्लू और ढिल्लिका होने से पहले पहले एक गाँव से विकसित हुई थी। इस गाँव का नाम किलोकड़ी था, जब यहाँ पर राजा ढिल्लू ने कील लगाई तो इसका नाम किलोकड़ी पड़ गया। इसी तरह से महरौली का नाम मिहिरावाली था जो आचार्य मिहिर के नाम पर रखा गया था। डॉ. धरमवीर का कहना है कि जो इतिहास पाँच सौ सालों में पढ़ाया गया है वह गाइड की कहानियों के अलावा कुछ नहीं है।

वहीं, पौराणिक इतिहासकार नीरा मिश्र का कहना है कि दिल्ली में गाँवों के नामों के साथ मुगलों के समय में बहुत खिलवाड़ हुआ है। पहले हौज खास और सिरी फोर्ट के इलाके का नाम शाहपुर जट था। इसी तरह मनीष कुमार गुप्ता बताते हैं कि पटपड़गंज का नाम मुगल शासन काल में साहिबगंज हुआ करता था, जो कि किसी मुगल बादशाह की प्रेमिका के नाम पर था।

आजकल मोहम्मदपुर गाँव का नाम बदलने की चर्चा जोरों पर है, जिसका प्राचीन नाम माधवपुर था। इतिहासकार मनीष कुमार गुप्ता बताते हैं कि पृथ्वीराज चौहान को हराकर जब मोहम्मद गौरी ने उत्तर क्षेत्र पर अपना कब्जा जमा ​लिया था, तब अपने गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक को उसने गवर्नर बना दिया था और खुद वापस गजनी लौट गया था। मोहम्मद गौरी की इच्छानुसार कुतुबुद्दीन ऐबक ने भारतवर्ष में इस्लाम को फैलाने की कोशिशें शुरू कर दीं। इसके लिए उसने सबसे पहले स्थानों के नाम बदलने प्रारंभ किए। उसने माधवपुर गाँव का नाम बदलकर अपने मालिक यानी मोहम्मद गौरी के नाम पर मोहम्मदपुर कर दिया था, जिसे अभी तक इसी नाम से बुलाया जाता रहा है।

दक्षिणी दिल्ली के हुमायूँपुर गाँव को पहले हनुमानपुर के नाम से जाना जाता था। यह गाँव तकरीबन 350 साल पहले बसाया गया था। गाँव के बुजुर्गों का कहना है कि उस वक्त यहाँ फोगाट, महले, टोकस, गहलोत और गरसे गोत्र के लोग आए थे और गाँव की नींव रखी थी। यह असल में एक शिव और हनुमान का मंदिर था, जिसको तुगलक के समय में एक गुंबद का रूप देकर कोई गुमनाम सी कब्र बनाकर इसका इस्लामीकरण कर दिया गया।

आपको बता दें कि आक्रांताओं ने आखिरकार नाम क्यों बदले। दरअसल, विदेशी आक्रमणकारियों को अपनी जीत की निशानी के तौर पर गाँव, कस्बों और शहरों के नामों को बदलना शौक था। सेवानिवृत प्रोफेसर डीपी भारद्वाज कहते हैं कि लंबे समय त​क उन्होंने यहाँ शासन किया और लोगों की मानसिकता बदली। हमें अपने देश के गौरव और स्वाभिमान के लिए कदम उठाने होंगे। ऐतिहासिक भूलों को सुधारना होगा। अगर डॉ. अब्दुल कलाम आजाद के नाम पर दिल्ली में सड़क बनती है तो किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। वे हमारे प्रेरणास्नोत थे, लेकिन औरंगजेब के नाम सड़क होगी तो हमें ऐतराज होगा।