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पोर्न फ़िल्में, बॉलीवुड का सपना लिए मुंबई आने वाली युवतियाँ निशाना: राज कुंद्रा सहित 11 गिरफ्तार, पूनम पांडे ने भी किया था केस

पोर्न फ़िल्में बनाने और फिर उन्हें कुछ एप्स के जरिए बेचने के आरोप में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कारोबारी राज कुंद्रा को गिरफ्तार किया है। वो बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति हैं। उनके खिलाफ केस भी दर्ज किया गया है। राज कुंद्रा के खिलाफ IPC और IT एक्ट के अलावा ‘स्त्री अशिष्ट रूपण प्रतिषेध अधिनियम (Indecent Representation of Women (Prohibition) Act)’ के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

मुंबई पुलिस ने कहा है कि राज कुंद्रा इस मामले के मुख्य साजिशकर्ता हैं, इसीलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया है। जाँच अभी जारी है, लेकिन पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उसके पास राज कुंद्रा के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। क्राइम ब्रांच ने पोर्न फ़िल्में बनाने वाले एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो लड़कियों को फिल्मों में लॉन्च करने का लालच देकर उनसे अश्लील कंटेंट्स बनवाता है। इसके बाद इन वीडियोज को पोर्न साइट्स और कुछ मोबाइल एप्स पर रिलीज किया जाता है।

इस मामले में राज कुंद्रा सहित 11 आरोपितों की गिरफ़्तारी हुई है। इनमें अभिनेता-अभिनेत्री से लेकर लाइटमैन, वीडियोग्राफर और ग्राफिक्स एडिटर के रूप में कार्य करने वाले लोग तक शामिल हैं। क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल ने कार्रवाई की है। इसके पीछे कुछ ऐसी प्रोडक्शन कंपनियाँ हैं, जो टीवी या फिल्मों में बड़ा नाम कमाने के लिए आने वाली युवतियों पर डोरे डालती हैं। फिर उन्हें बड़े बजट की फिल्मों का लालच देकर अपनी शर्तों पर अश्लील वीडियोज शूट कराए जाते थे।

इसके लिए कुछ बड़े लोगों के बंगलों का इस्तेमाल किया जाता है। इन बंगलों को किराए पर लेकर उनमें पोर्न फ़िल्में शूट की जाती हैं। इससे इन कंपनियों को लाखों का फायदा होता है। साथ ही कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इनकी रिलीज से पहले ट्रेलर भी जारी किए जाते थे। मलाड वेस्ट के मढ़ द्वीप पर के एक बंगले से कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। मुंबई के शोरगुल से दूर महानगर के ही मढ़ में कई सेलेब्रिटीज ने अपना ठिकाना बनाया हुआ है।

शुरुआती जाँच में पता चला है कि राज कुंद्रा ‘Hothit Movies’ नामक एक एप के मालिक हैं, जिस पर पोर्न कंटेंट्स ही अपलोड होते रहे हैं। यूजर्स को इस एप को डाउनलोड करने के लिए रुपए देकर इन्हें सब्स्क्राइब करना होता है, फिर वो वीडियोज देख पाते हैं। कुछ प्रोडक्शन कंपनियाँ ऐसे कई एप्स चलाती हैं। राज कुंद्रा के खिलाफ फरवरी 2021 में ही FIR हो गई थी। उमेश कामत नामक एक आरोपित ने पुलिस से कहा था कि वो राज कुंद्रा की कंपनी के लिए काम करता है।

वहीं मॉडल और अभिनेत्री गहना वशिष्ठ से पूछताछ में कामत का नाम सामने आया था। कामत को फरवरी में ही गिरफ्तार किया गया था। उमेश सबसे पहले गहना वशिष्ठ से वीडियोज लेता था, फिर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम करते हुए उन्हें इंग्लैंड भेजता था। फिर इन वीडियोज को ‘हॉटशॉट्स’ नामक एप पर रिलीज किया जाता था। मुंबई में हर साल अभिनेता-अभिनेत्री बनने के लिए हजारों युवक-युवतियाँ पहुँचते हैं। इनका निशाना यही लोग थे।

‘गंदी बात’ फेम अभिनेत्री गहना वशिष्ठ उर्फ वंदना तिवारी पर सामूहिक दुष्कर्म और गलत तरीके से कैद करने के आरोप भी लगाए गए थे। एक 24 वर्षीय मॉडल ने बताया था कि उसे एक वीडियो शूट के दौरान 3 पुरुषों के साथ अश्लील काम करने के लिए मजबूर किया गया था। इससे पहले 21 वर्षीय अभिनेत्री ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उसे एक नशीली ‘एनर्जी ड्रिंक’ दी गई थी और नग्न अवस्था में उसके साथ अश्लील दृश्य फ़िल्माए गए थे। 

अभिनेत्री पूनम पांडेय ने भी राज कुंद्रा के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में केस फ़ाइल किया था। उनका आरोप था कि राज कुंद्रा की कंपनी के साथ उनका करार ख़त्म होने के बावजूद राज कुंद्रा और उनके सहयोगी उनके कंटेंट्स का बिना अनुमति इस्तेमाल कर रहे थे। राज कुंद्रा और उनके सहयोगियों की कंपनी ‘Armsprime Media’ ने पूनम पांडे के एप के कंटेंट्स का प्रबंधन का जिम्मा लिया था। आरोप था कि कर ख़त्म होने के 8 महीने बाद भी इन कंटेंट्स का इस्तेमाल रुपए कमाने के लिए किया जाता रहा।

पूनम पांडे ने कहा था, “राज कुंद्रा ऐसी कौन सी मुसीबत में हैं कि वो मेरी वीडियोज चुरा रहे हैं? अगर वो वित्तीय समस्या से जूझ रहे हैं तो मैं उन्हें कुछ रुपए दे सकती हूँ, लेकिन अपने कंटेंट्स नहीं।” हालाँकि, राज कुंद्रा इन आरोपों से ये कह कर किनारा करते रहे हैं कि उनका इन सब से कोई लेनादेना नहीं है। उन्होंने कहा था कि जिस कंपनी पर ये सब आरोप हैं, उसे वो कब का छोड़ चुके हैं।

पेगासस विवाद पर NDTV ने अश्विनी वैष्णव को बताया गलत, आईटी मंत्री ने वामपंथी वेबसाइट को जमकर लताड़ा

वामपंथी वेबसाइट ‘द वायर’ ने रविवार (18 जुलाई) को भ्रामक दावा किया कि भारत सरकार पत्रकारों, केंद्रीय मंत्रियों, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों, विपक्षी नेताओं और अन्य हस्तियों की जासूसी करने के लिए इजरायली कंपनी एनएसओ के पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रही है। इससे बाद विपक्षी दलों और उनके मित्र मीडिया घरानों ने केंद्र सरकार पर आरोपों की झड़ी लगा दी है। वे मोदी सरकार के खिलाफ अपने भ्रामक प्रचार अभियान में जुट गए हैं। खासतौर, पर एनडीटीवी इस मामले को भुनाने में सबसे आगे रहा है।

मीडिया हाउस ने इस मामले पर तुरंत एक ट्वीट किया, जिसमें आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के हवाले से आज से शुरू हुए संसद के मॉनसून सत्र के दौरान कहा गया था, “पेगासस के इस्तेमाल का सुझाव देने के लिए कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।”

एनडीटीवी का ट्वीट

एनडीटीवी ने आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव को गलत बताया

हालाँकि, मोदी सरकार को बदनाम करने के उतावलेपन में NDTV ने आईटी मंत्री को गलत बता दिया। दरअसल, एनडीटीवी ने आईटी मंत्री को लेकर जो टिप्पणी ​की थी, वह वास्तव में इजरायली कंपनी एनएसओ (NSO) ग्रुप की थी, जिसने अपने बयान में पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके किसी भी तरह की जासूसी से इनकार किया है और फॉरबिडन स्टोरीज की रिपोर्ट को गलत धारणाओं और अपुष्ट सिद्धांतों से परिपूर्ण बताया है।

एनएसओ का बयान, एनडीटीवी ने आईटी मंत्री को ठहराया जिम्मेदार

लोकसभा में सोमवार (19 जुलाई) को आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा दिए गए भाषण में स्पष्ट रूप से सुना जा सकता है, जो उन्होंने वामपंथी वेबसाइट ‘द वायर’ की रिपोर्ट के कुछ घंटों बाद दिया था। उन्होंने इस रिपोर्ट की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा है कि ये तथ्यों से परे है और इसमें सच्चाई नहीं है।

उन्होंने कहा कि 18 जुलाई को एक रिपोर्ट सामने आई, जिसमें सरकार पर पत्रकारों, भारतीय मंत्रियों, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों, विपक्षी नेताओं और अन्य हस्तियों पर जासूसी करने के लिए स्पाइवेयर पेगासस का उपयोग करने का आरोप लगाया गया है। ये रिपोर्ट देश के लोकतंत्र और हमारी सुस्थापित संस्थाओं को बदनाम करने का प्रयास लगती है।

वैष्णव ने कहा कि डेटा का जासूसी से कोई संबंध नहीं है। केवल देशहित व सुरक्षा के मामलों में ही टैपिंग होती है, जो रिपोर्ट मीडिया में आई है, वो तथ्यों से परे और गुमराह करने वाली हैं। फोन टैपिंग को लेकर सरकार के नियम बेहद सख्त हैं। जो आरोप लगाए गए हैं, उनमें सच्चाई नहीं है। इस दौरान मंत्री ने एनएसओ ग्रुप द्वारा जारी बयान के एक अंश का भी जिक्र किया था।

एनएसओ ने अपने बयान में कहा था कि अज्ञात स्रोतों द्वारा फॉरबिडन स्टोरीज के लिए किए गए दावे, एचएलआर लुकअप सेवाओं जैसी सुलभ और स्पष्ट बुनियादी जानकारी से डेटा भ्रामक व्याख्याओं पर आधारित हैं। पेगासस या किसी अन्य एनएसओ उत्पादों के ग्राहकों के लक्ष्यों की सूची पर इसका कोई असर नहीं है। ऐसी सेवाएँ किसी के लिए भी, कहीं भी और कभी भी खुले तौर पर उपलब्ध हैं। आमतौर पर सरकारी एजेंसियों द्वारा कई उद्देश्यों के लिए साथ ही साथ दुनिया भर में निजी कंपनियों द्वारा इस्तेमाल की जाती हैं।

एनएसओ ग्रुप ने अपने बयान में कहा, ”हम उनकी रिपोर्ट में लगाए गए झूठे आरोपों का पूरी तरह से खंडन करते हैं। उनके सूत्रों ने उन्हें ऐसी जानकारी प्रदान की है, जिसका कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। उनके कई दावों में साक्ष्यों की कमी साफ दिखाई देती है।”

‘पेगासस प्रोजेक्ट’ पर भ्रामक रिपोर्ट के लिए आईटी मंत्री ने द वायर की खिंचाई की

संसद के मॉनसून सत्र को संबोधित करते हुए आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ‘पेगासस प्रोजेक्ट’ पर घटिया रिपोर्ट के लिए अति-वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कल रात एक बेहद सनसनीखेज खबर के रूप में भ्रामक जानकारी देने वाले मीडिया आउटलेट को लोकसभा में तर्कसंगत करारा जवाब दिया।

बीजेपी: द वायर फेक न्यूज फैलाने में माहिर

‘द वायर’ की तथ्य रहित सनसनीखेज रिपोर्ट के खिलाफ पूर्व आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि ‘द वायर’ को झूठ फैलाने की आदत है। इससे पहले भी इस वेबसाइट ने फर्जी खबरों और गलत सूचनाओं पर आधारित कई लेख प्रकाशित किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अतीत में भी इसी तरह के दावे किए गए हैं और उनका अंत में सिरे से खंडन भी किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की सनसनीखेज खबरें संसद को बाधित करने के लिए मॉनसून सत्र से एक दिन पहले जानबूझकर प्रकाशित की गई हैं।

एनएसओ ने ‘अपमानजनक आरोपों’ को लेकर ‘द वायर’ के खिलाफ मानहानि का मुकदमा

एक दिन पहले ऑपइंडिया ने आपको बताया था कि कैसे तेल अवीव स्थित एक फर्म एनएसओ, जो स्पाईवेयर पेगासस का मालिक है, उसने रविवार को वामपंथी मीडिया आउटलेट ‘द वायर’ को फटकार लगाई थी। उसने ‘द वायर’ को फर्जी खबरें प्रकाशित करने के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने की धमकी दी है।

बता दें कि ‘द वायर’ ने 18 जुलाई, 2021 को एक कथित ‘फैक्ट’ रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें उसने सरकार द्वारा 300 सत्यापित भारतीय मोबाइल टेलीफोन नंबरों की जासूसी करने के लिए इजरायली स्पाइवेयर पेगासस का इस्तेमाल करने का दावा किया था। उसने बताया कि इसमें केंद्रीय मंत्रियों, विपक्षी नेताओं, पत्रकारों, सुप्रीम कोर्ट के जज, कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ता और कई बड़े कारोबारियों के फोन की जासूसी की जा रही थी।

‘आप क्रोनोलॉजी समझिए! तथाकथित रिपोर्ट के लीक होने का समय और संसद में ये व्यवधान’: अमित शाह

संसद का मानसून सत्र शुरू होते ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पेगासस (Pegasus) फोन हैकिंग रिपोर्ट के सामने आने पर संदेह जताया है। शाह ने कहा कि इसके लीक होने के पीछे किसी बड़ी साजिश का इशारा है। अमित शाह ने कहा, “कुछ लोग देश के लोकतंत्र को बदनाम करना चाहते हैं। उनका मकसद भारत की विकास यात्रा को पटरी से उतारना है। लेकिन, इन ताकतों के मंसूबों को सरकार सफल नहीं होने देगी। मानसून सत्र देश में विकास के नए पैमाने स्‍थापित करेगा।”

उन्होंने कहा, “इस वाक्य को अक्सर लोग हल्के-फुल्के अंदाज में मेरे साथ जोड़ते रहे हैं, लेकिन आज मैं गंभीरता से कहना चाहता हूँ- इस तथाकथित रिपोर्ट के लीक होने का समय और फिर संसद में ये व्यवधान… आप क्रोनोलॉजी समझिए!”

शाह ने कहा कि यह भारत के विकास में विघ्न डालने वालों की भारत के विकास के अवरोधकों के लिए एक रिपोर्ट है। कुछ विघटनकारी वैश्विक संगठन हैं जो भारत की प्रगति को पसंद नहीं करते हैं। ये अवरोधक भारत के वो राजनीतिक षड्यंत्रकारी हैं जो नहीं चाहते कि भारत प्रगति कर आत्मनिर्भर बने। भारत की जनता इस क्रोनोलोजी और रिश्ते को बहुत अच्छे से समझती है।

अपने बयान में अमित शाह ने कहा कि आज संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ और आज के घटनाक्रम को पूरे देश ने देखा। देश के लोकतंत्र को बदनाम करने के लिए मानसून सत्र से ठीक पहले कल देर शाम एक रिपोर्ट आती है, जिसे कुछ वर्गों द्वारा केवल एक ही उद्देश्य के साथ फैलाया जाता है कि कैसे भारत की विकास यात्रा को पटरी से उतारा जाए और अपने पुराने नैरेटिव के तहत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को अपमानित करने के लिए जो कुछ भी करना पड़े, किया जाए।

शाह ने कहा कि कुछ ऐसी देशविरोधी ताकतें हैं जो मोदी जी द्वारा महिलाओं और समाज के पिछड़े व वंचित वर्ग को दिए गए सम्मान को पचा नहीं पा रही हैं। ये वही लोग हैं जो निरंतर देश की प्रगति को बाधित करने का प्रयास करते रहते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि ये लोग किसके इशारे पर भारत की छवि को धूमिल करने का काम कर रहे हैं? उन्हें बार-बार भारत को नीचा दिखाने में क्या खुशी मिलती है? 

कॉन्ग्रेस खो चुकी है राजनीतिक महत्व

उन्होंने कहा कि अपना जनाधार व राजनीतिक महत्व खो चुकी कॉन्ग्रेस को इसमें कूदते देखना न तो अप्रत्याशित लगता है और ना ही आश्चर्यजनक। कॉन्ग्रेस के पास लोकतंत्र को कुचलने का अच्छा अनुभव है। लोकतंत्र एवं विकास की अवरोधक कॉन्ग्रेस खुद आंतरिक कलह से जूझ रही है इसलिए वो संसद में आने वाले किसी भी प्रगतिशील कार्य को पटरी से उतारने की हर सम्भव कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘मैं देश की जनता को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि मोदी सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट हैः ‘राष्ट्रीय कल्याण’ और हम इसकी सिद्धि के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे चाहे कितनी भी बाधाएँ आए।’

जब कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने प्रणब मुखर्जी, अमर सिंह समेत अन्य नेताओं की बेशर्मी से की जासूसी: RTI से खुला राज

वामपंथी पोर्टल द वायर ने रविवार (जुलाई 18, 2021) को 40 भारतीय पत्रकारों की एक सूची शेयर की, जिसमें दावा किया गया था कि पेगासस (Pegasus) नामक इजरायली स्पाइवेयर की मदद से उनकी जासूसी की जा रही थी।

भारत सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया में रिपोर्ट को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि रिपोर्ट में लगाए गए आरोप अनुमानों और अपुष्ट सिद्धांतों पर आधारित हैं। इससे पहले आज, पेगासस स्पाइवेयर के मालिक एनएसओ ग्रुप ने कहा कि वह उनके खिलाफ अपमानजनक आरोप लगाने के लिए द वायर के खिलाफ मानहानि मुक़दमा दायर करने पर विचार कर रहे हैं।

वामपंथी ऑनलाइन पोर्टल लंबे समय से मोदी सरकार के खिलाफ पूर्वाग्रही सामग्री प्रकाशित करने के लिए जाना जाता है। जासूसी की इस फर्जी आरोपों के बीच वह समय एक बार फिर से सुर्खियों में है, जब केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार हुआ करती थी और वह राजनेताओं पर निगरानी रखा करती थी, जिसमें उनके अपने नेता भी शामिल होते थे।

UPA-II ने 9,000 से अधिक फोन और 500 ईमेल अकाउंट की निगरानी की

2013 में दायर एक आरटीआई के जवाब से पता चला कि केंद्र की यूपीए सरकार 9,000 फोन और 500 ईमेल अकाउंट्स की बारीकी से निगरानी कर रही थी। न्यूजरूम पोस्ट में प्रकाशित एक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है। यह जवाब प्रोसेनजीत मंडल नाम के एक आरटीआई के जवाब में था।

आरटीआई के जवाब में कहा गया है, “केंद्र सरकार द्वारा प्रति माह औसतन 7,500 से 9,000 के बीच टेलीफोन इंटरसेप्शन और ईमेल इंटरसेप्शन के लिए 300 से 500 ऑर्डर जारी किए गए।”

यूपीए सरकार में हर महीने 10 या 20 नहीं बल्कि 9000 फोन टैप किए जाते थे। इसमें न केवल प्रतिष्ठित व्यक्ति बल्कि उनके अपने नेता भी शामिल थे, जिनमें कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता प्रणब मुखर्जी भी शामिल थे।

कॉन्ग्रेस ने तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी समेत अपने नेताओं की भी जासूसी की

जनवरी 2006 में, समाजवादी पार्टी के तत्कालीन महासचिव, तेजतर्रार राजनेता अमर सिंह ने आरोप लगाया कि 2004 में सत्ता में आई मनमोहन सिंह सरकार ने उनका फोन टैप किया था। सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद, अन्य राजनेताओं जैसे सीताराम येचुरी, जयललिता, सीबी नायडू आदि ने भी यूपीए सरकार के खिलाफ इसी तरह के आरोप लगाए।

हालाँकि, इस घटना की सबसे दिलचस्प बात पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की ओर से दी गई प्रतिक्रिया है। उन्होंने कहा कि फोन टैपिंग उनकी सरकार ने नहीं बल्कि एक निजी एजेंसी ने की थी। बाद में इस मामले में भूपिंदर सिंह नाम के एक शख्स को गिरफ्तार भी किया गया था।

अक्टूबर 2009 में, तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की सीपीएम सरकार पर जासूसी करने का आरोप लगाया। बनर्जी के आरोपों ने एक बार फिर केंद्र द्वारा अपने विरोधियों और पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ निगरानी के उपयोग के आसपास की बहस को फिर से जगा दिया। तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने तब कहा था कि सरकार जासूसी के आरोपों पर सफाई देगी। हालाँकि, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मामले में जेपीसी की माँग को खारिज कर दिया।

एक साल बाद, दिसंबर 2010 में, पीएम सिंह ने कॉरपोरेट दिग्गजों के फोन टैप करने के लिए अपनी सरकार के कदम का बचाव किया। उन्होंने फोन टैपिंग को सही ठहराने के कारणों के रूप में राष्ट्रीय सुरक्षा, कर चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के आधार का हवाला दिया। अगले दिन, उन्होंने कथित तौर पर अपने कैबिनेट सचिव से फोन टैपिंग मामले को देखने और इस तरह के लीक को रोकने के लिए कानूनी ढाँचे को मजबूत करने के लिए कहा।

जून 2011 में, तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखकर उनसे अपने कार्यालय की गड़बड़ी की गुप्त जाँच कराने के लिए कहा। रिपोर्टों के अनुसार, मुखर्जी को संदेह था कि उनके कार्यालय को खराब करने के लिए उनका एक कैबिनेट सहयोगी जिम्मेदार था।

इससे पहले पिछले महीने राजस्थान के एक कॉन्ग्रेस विधायक ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर उनका फोन टैप करने का आरोप लगाया था। राजस्थान के दौसा जिले के चाकसू से कॉन्ग्रेस विधायक वेद प्रकाश सोलंकी ने कहा कि ‘कई अधिकारियों’ ने उन्हें बताया कि विधायकों के फोन टैप किए जा रहे हैं। सोलंकी ने तब आरोप लगाया था कि विधायकों को फँसाने के भी प्रयास चल रहे हैं।

पेगासस के विरोध में सैकड़ों कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने किया नंग-धड़ंग प्रदर्शन, उड़ाई COVID मानदंडों की धज्जियाँ: देखें वीडियो

कथित फोन टैपिंग मामले को लेकर सोमवार (जुलाई 19, 2021) को ‘युवा नेता’ श्रीनिवास बीवी के नेतृत्व में सैकड़ों कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। कोविड-19 मानदंडों की धज्जियाँ उड़ाते हुए पुरुष कार्यकर्ता शर्टलेस हो गए। इस दौरान उन्होंने ‘जासूस मोदी डाउन-डाउन’ का नारा लगाया

प्रदर्शनकारियों ने एक संयुक्त संसदीय समिति और उच्चतम न्यायालय की निगरानी में मामले की जाँच की भी माँग की।

श्रीनिवास का दावा, राहुल गाँधी थे ‘संभावित निशाना’

मीडिया रिपोर्टों को साझा करते हुए, श्रीनिवास ने अपने ट्वीट्स के माध्यम से यह भी दावा किया कि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए जासूसी करने के लिए एक ‘संभावित लक्ष्य’ थे।

सिर्फ वे ही नहीं, श्रीनिवास की कथित सूची में राहुल गाँधी के सहयोगी भी थे। हालाँकि प्रदर्शन के दौरान श्रीनिवास की टीशर्ट की बाईं तरफ राहुल गाँधी की तस्वीर देखी जा सकती है।

कॉन्ग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया

इस बीच, द वायर द्वारा इसे ‘विस्फोटक कहानी’ (explosive story) के रूप में प्रकाशित किए जाने के बाद, भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस पार्टी वर्तमान में पेगासस स्नूपगेट (Pegasus snoopgate) पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया।

नेटिजन्स ने इसे साजिश बताया

इस बीच, नेटिज़न्स ने मानसून सत्र से ठीक पहले इस मुद्दे को उठाने के लिए कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाया है। नेटिज़न्स ने दो दिन पहले राहुल गाँधी के अस्पष्ट ट्वीट को नोटिस किया, जिसमें उन्होंने पूछा था, “मैं सोच रहा हूँ कि आप इन दिनों क्या पढ़ रहे हैं।”

द वायर द्वारा कथित फोन टैपिंग की कहानी को सामने लाने के बाद, राहुल गाँधी ने आज अपने पहले के ट्वीट का हवाला दिया और टिप्पणी की, “हम जानते हैं कि वह क्या पढ़ रहा है, आपके फोन पर सब कुछ। #Pegasus.”

द वायर का दावा

रविवार (जुलाई 19, 2021) शाम को, वामपंथी पोर्टल द वायर ने बताया कि 40 भारतीय पत्रकारों के नाम एक कथित लीक सूची में हैं, जो इजरायली स्पाइवेयर पेगासस का उपयोग कर निगरानी में थे। 40 भारतीय जाहिर तौर पर तथाकथित लीक सूची में उल्लिखित हजारों लोगों में शामिल हैं, जिन्हें पहले द गार्जियन द्वारा रिपोर्ट किया गया था।

हालाँकि, द वायर या अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों ने इस तथाकथित लीक का कोई सबूत नहीं दिया है। इसके अलावा, इस ‘लीक’ की रिपोर्ट करने वाले किसी भी मीडिया हाउस ने यह नहीं बताया कि यह डेटा कहाँ से लीक हुआ था, कौन सी सरकार कथित तौर पर उन लोगों की जासूसी कर रही थी। सूची में स्पष्ट रूप से कई देशों के नाम शामिल हैं, तो ऐसे में सूची को सही मानते हुए, यह बताना मुश्किल है कि किस देश द्वारा किसकी जासूसी की जा रही थी।

सरकार ने दावे से किया इनकार

भारत सरकार ने कथित लीक के बारे में एक प्रश्नावली के जवाब में एक बयान जारी किया। बयान में कहा गया है, “कहानी तैयार की जा रही है जो न केवल तथ्यों से रहित है बल्कि पूर्व-कल्पित निष्कर्षों में भी स्थापित है। ऐसा लगता है कि आप एक अन्वेषक और अभियोजक के साथ ही जज की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं।”

बयान में कहा गया है कि आरटीआई जवाब और संसद दोनों में, सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी एजेंसियों द्वारा कोई अनधिकृत अवरोधन नहीं किया गया है। बयान में कहा गया है, “विशिष्ट लोगों पर सरकारी निगरानी के आरोपों का कोई ठोस आधार या इससे जुड़ी सच्चाई नहीं है।”

हालाँकि, INC और उसके वामपंथी इकोसिस्टम ने इसे एक अवसर के रूप में देखते हुए ‘स्पष्टता’ की माँग करते हुए मोदी सरकार के खिलाफ तीखा हमला किया है।

हिंदू जागरण मंच के विरोध के बाद ईसाई धर्मांतरण करा रहे 5 लोगों को यूपी पुलिस ने किया ​गिरफ्तार: 6 के खिलाफ FIR

उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में धर्मांतरण का प्रयास कर रहे 5 लोगों को ​गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने धर्म परिवर्तन करा रहे लोगों के पास से आपत्तिजनक साहित्य भी बरामद किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिकंदरपुर वैश्य थाना क्षेत्र गाँव गंगपुर में रविवार (18 जुलाई) को हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं को ईसाई धर्म का प्रचार करने वाले लोगों द्वारा धर्मांतरण कराने की सूचना मिली। इसके बाद दर्जनों कार्यकर्ता गाँव में पहुँचे और उन्होंने इसका विरोध किया।

हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जब उन्होंने ईसाई धर्मांतरण का विरोध किया, तो उन लोगों ने उनके साथ मारपीट की। उन्होंने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर आरोपितों की तलाशी ली। इस दौरान धर्मांतरण करा रहे लोगों के पास से पुलिस को एक कॉपी में हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणियाँ लिखी हुई मिली।

हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं के विरोध के बाद पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है और 5 लोगों को धर्मांतरण मामले में गिरफ्तार कर लिया है। हिंदू जागरण मंच के पदाधिकारी अरविंद गुप्ता ने इन लोगों के खिलाफ थाना सिकंदरपुर वैश्य में एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने श्रीनिवास, कुलदीप निवासी लधौली, राहुल कुमार निवासी कपिपुरा जैथरा, शिवकुमार निवासी गाँव नगला रामजीत, दुर्गेश निवासी हरौड़ा, रामपाल निवासी गंगपुर और किशन निवासी नगला बोडार पर धर्म ​परिवर्तन का आरोप लगाया है। 

बता दें कि उत्तर प्रदेश से हर रोज धर्मांतरण के नए मामले सामने आ रहे हैं। सोमवार (19 जुलाई) को बागपत जिले में 15 साल की दलित किशोरी के साथ गैंगरेप, धर्मांतरण और गोमांस खिलाने का मामला सामने आया। पीड़िता के 7 महीने की गर्भवती होने के बाद मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने मुख्य आरोपित शहजाद और उसके अम्मी-अब्बू को गिरफ्तार कर लिया है।

‘वामपंथी लिबरल गिरोह में खुद को मोदी विरोधी साबित करने की होड़’: पेगासस लिस्ट में खंगाले जा रहे नाम

“अरे सर, हम मानते हैं कि हमारे फ़ोन की जासूसी नहीं हुई बाकी लिस्ट में हमारा नाम भी डलवा देते तो आपका क्या चला जाता? हमने भी अपने ट्विटर बायो में खुद को इंडिपेंडेंट पत्रकार बताया है। और तो और, बायो में राहत इंदौरी का शेर भी लिख कर डिक्लेअर किया है कि; “किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़े है” सुधीर विनोद चिरौरी करते हुए बोले।

टेबल के इस तरफ वे बैठे थे और दूसरी तरफ एडिटर साहब जिनके पोर्टल को उस तथाकथित लिस्ट को छापने का अधिकार मिला था जिसमें उन पत्रकारों का नाम था जिनकी जासूसी सरकार ने पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिए करवाई थी। इधर एडिटर साहब सफाई दिए जा रहे थे; “देखो, बात को समझो, हम टूलकिट से बगावत नहीं कर सकते। तुमको भी पता है कि कितना स्ट्रिक्ट नियम है। किसको कब कहाँ प्रमोट करना है इसका फैसला टूलकिट करता है। अब देखो, सबको तो स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं मिल सकता न।”

एडिटर साहब ने सुधीर विनोद को अपनी मजबूरी बताई पर सुधीर उनकी बात मानने के लिए राजी नहीं थे। एडिटर साहब की बात सुनकर भड़क गए। बोले; “ये सही बात नहीं है। आप हमसे ढाई बरस से वादा कर रहे हैं कि समय देखकर हमारा भी प्रमोशन होगा। आप ही बोले थे कि नीचे वाले व्हाट्सएप्प ग्रुप से प्रमोट करके सब सीनियर वाले ग्रुप में डलवा देंगे। बाकी आज तक कुछ नहीं किए। आज भी क्या ट्वीट करना है वह भी हमको डायरेक्ट नहीं मिलता। किसी न किसी के वाया ही मिलता है।”

एडिटर साहब इस समय पीछा छुड़ाना चाहते थे पर समझ में नहीं आ रहा था कि क्या कह कर उसे भगाएँ। बोले; “देखो, सब काम समय से होता है। समय से पहले किसी को कुछ नहीं मिलता।”

सुधीर अपनी बात पर टिके रहे। बोले; “आप खुद ही सोचिए, इस लिस्ट में नाम आ जाता तो हमको भी कुछ एक्स्ट्रा मिल जाता। अच्छा चलिए एक्स्ट्रा नहीं भी मिलता तो कम से कम लोग ये तो जान जाते कि सरकार हमसे भी डरती है और हमारी भी जासूसी कराती है।”

एडिटर साहब बोले; “मैं समझ रहा हूँ तुम्हारी बात। बस तुम मेरी मज़बूरी नहीं समझ रहे हो। अगली बार किसी लिस्ट में नाम डलवा दिया जाएगा। “

सुधीर विनोद के सब्र का बाँध टूट गया। बोले; “अरे अगली बार पता नहीं कौन सी लिस्ट बनेगी। ये पेगासस वाली लिस्ट में नाम आने की अलग इज़्ज़त है न। पेगासस है भी इसराइली सॉफ्टवेयर। इस वाली लिस्ट में नाम आता तो उससे ये मेसेज भी जाता कि मैं मोदी के खिलाफ तो लड़ रहा ही हूँ, इसराइल के खिलाफ भी लड़ रहा हूँ। इस लिस्ट में नाम आता तो भविष्य के लिए अच्छा रहता।”

अब तक एडिटर साहब पस्त से हो चुके थे। झिड़कते हुए बोले; “अरे यार तुम तो कुछ सुनने के लिए तैयार ही नहीं हो।”

सुधीर विनोद अभी अड़ गए। बोले; “क्या समझें? ऐसा क्या है जो आप हमें समझाइएगा? हमको नहीं पता है कि चालीस की लिस्ट में चार आपके यहाँ से है? और उधर लिस्ट छपा और इधर आप लोग का अपील शुरू हो गया कि कंट्रीब्यूशन दीजिए काहे कि चार हमारा पोर्टल का हैं। माने ये क्या बात हुई कि जिनका नाम आया है सब आपके ही अगल-बगल के लोग है?”

एडिटर साहब को कुछ न सूझा तो डेढ़ मिनट के लिए चुप हो गए। फिर आगे बोले; “अरे भाई, सेनिओरिटी भी कुछ होती है। जिनका नाम आया है वे सीनियर लोग हैं। हमारे पोर्टल वालों से सरकार सच में डरती है।”

सुधीर विनोद ने इधर-उधर देखा और जोर से बोले; “बताइए, सरकार को अगर टेलीफोन की स्पाइंग करनी ही थी तो शेखर जी के फोन का काहे नहीं की सरकार? हम मान लें कि सरकार बैंजल से डरती है और राजदीप से नहीं डरती? रोहिणी से डरती है और रवीश से नहीं डरती है? ये तो अजीब विडंबना है!”

उनकी बात सुनकर एडिटर साहब के मुँह से निकला; “अरे भाई, डर का माहौल है। ऐसे में सरकार तो डरेगी ही।”

सुधीर विनोद को लगा कि ये मानने से रहे। ऐसे में उन्होंने खुद को मन ही मन कुछ समझाया और बोले; “अच्छा, एक बात बताइए, अगली बार ऐसे लोगों की लिस्ट बनी तो मेरा नाम डलवाने का जिम्मेदारी लेते हैं?”

एडिटर साहब बोले; “अरे ये क्या बात हुई? लिस्ट बनने का एक प्रोसेस होता हैं। उस प्रोसेस को हम थोड़ी बायपास कर सकते हैं। और अब तो सब कुछ टूलकिट से होता है। बड़ी प्लानिंग करनी पड़ती है। उसके बाद भी देख ही रहे हो कि कोई ये मानने के लिए ही तैयार नहीं है कि पेगासस से किसी की जासूसी हुई। फिर भी कोशिश करेंगे कि अगली बार वाली लिस्ट में तुम्हारा भी नाम हो। सब ठीक रहा तो अगली बार कुछ करेंगे तुम्हारे लिए।”

सुधीर विनोद ने उनसे वचन लेते हुए कहा; “बस, अगली बार लिस्ट में डलवा दीजिएगा। मेरा भी भला हो जाएगा। ये कितने दिन तक जूनियर ट्रीट किए जाएँगे? बस एक बार किसी लिस्ट में नाम आ जाए तो लोग यह एक्सेप्ट कर लें कि सरकार हमसे भी डरने लगी है तो मैं भी उसके एवज में कुछ वसूल कर लूँगा।”

यह कह कर सुधीर निकल गए। अब अगली लिस्ट के छपने का इंतज़ार है।

‘कॉन्ग्रेस का जासूसी कराने का रहा है इतिहास’: रविशंकर प्रसाद ने पेगासस फोन टैपिंग के आरोपों को बताया निराधार

कॉन्ग्रेस ने केंद्र सरकार पर इजरायल के पेगासस (pegasus) सॉफ्टवेयर के जरिए फोन टैपिंग का आरोप लगाया है। वहीं, पूर्व आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कॉन्ग्रेस के इन आरोपों को निराधार और स्तरहीन बताया है। उन्होंने इसे देश विरोधी एजेंडा चलाने की साजिश कहा है। बीजेपी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कॉन्ग्रेस के सभी आरोपों को स्तरहीन बताते हुए कहा, ”कॉन्ग्रेस का इतिहास जासूसी का रहा है। हरियाणा के दो सिपाही जब राजीव गाँधी के आस-पास देखे गए तो उन्होंने केंद्र में चंद्रशेखर की सरकार गिरा दी थी।”

प्रसाद ने कहा कि दुनिया में लाखों डाटा बेस (DATA BASE) हैं। जब तक इसका कोई लिंक नहीं देगा तब तक यह कैसे प्रमाणित किया जा सकता है कि फोन की टैपिंग हुई है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने स्टोरी ब्रेक की है, उनके पास डाटा बेस होने का मतलब ये नहीं कि फोन टैप किए गए हैं। उन लोगों ने खुद कहा है कि ये फोन नंबर का डाटा बेस में होना इस बात का संकेत नहीं है कि इसे है​क किया गया है। उन्होंने कहा कि वायर की खबरें पहले भी झूठी साबित हो चुकी हैं। इसी तरह एम्नेस्टी इंटरनेशनल का रवैया भी हमेशा से भारत खिलाफ रहा है।

रविशंकर ने इस दौरान कॉन्ग्रेस से सवाल पूछा कि पूर्व वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने उस वक्त के गृहमंत्री चिदम्बरम के खिलाफ स्नूपिंग का आरोप लगाया था। उस बारे में आपका क्या कहना है। उन्होंने आगे कहा, “साल 2013 में हजारों लोगों के फोन टैप होते थे, उसके बारे में कॉन्ग्रेस का क्या कहना है?”

बता दें कि उन्होंने मॉनसून सत्र से पहले इस मामले पर कॉन्ग्रेस द्वारा बवाल करने पर सवाल उठाया है। प्रसाद ने कहा कि सारा मामला सामने आने के पीछे कॉन्ग्रेस का क्या एजेंडा है, यह देश को इस बारे में पता चलना चाहिए।

‘परिसर में चल रही दुकानें बन ही गई हैं शॉपिंग सेंटर’: हिंदू मंदिरों की संपत्ति के गलत इस्तेमाल पर मद्रास HC नाराज

हिंदू मंदिरों की संपत्ति का इस्तेमल पूजा-पाठ से हटकर अन्य कार्यों के लिए होता देख मद्रास हाई कोर्ट की मदुरई बेंच ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। जस्टिस टीएस शिवांगन्नम और जस्टिस एस अनंथी की पीठ ने संबंधित केस पर सुनवाई करते हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त विभाग की आलोचना की।

पीठ ने कहा कि विभाग द्वारा मंदिर की संपत्ति पर व्यापारिक गतिविधियों को अनुमति मिलने से वहाँ चल रहीं दुकानें यदि शॉपिंग मॉल नहीं बनीं तो शॉपिंग सेंटर तो बन ही गई हैं। पीठ ने आदेश में कहा,

“प्रशासन ने विभिन्न मंदिरों की विरासत मूल्यों की कदर किए बिना मंदिर के परिसर और उनके प्रांगण व बरामदों को व्यापारिक गतिविधियों के लिए लीज पर दे दिया, जहाँ ऐसी चीजों का धंधा हो रहा है जिसका मंदिर या पूजा पाठ से कोई लेना-देना नहीं है। ये दुकानें वस्तुत: शॉपिंग सेंटर बन चुकी हैं अगर शॉपिंग मॉल नहीं बनीं।

कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि लोगों को मदुरई मीनाक्षी अम्मान मंदिर के बाहर हुई आगजनी की घटना देखने के बाद भी सबक नहीं मिला है, जहाँ एक दुकान में लगी आग से अन्य 30 दुकानें नष्ट हो गई थीं। कोर्ट ने कहा कि इस दयनीय स्थिति के लिए केवल हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त विभाग (एचआर एंड सीई विभाग) को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए है बल्कि इसके लिए वह ठेकेदार भी जिम्मेदार हैं जिन्होंने बिना पर्याप्त फंड के मंदिरों को छोड़ा।

कोर्ट ने टिप्पणी की, कि उनकी राय में कई लोग हैं जिनकी वजह से मंदिर को फंड की कमी हो रही है, पुजारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा और अन्य रीति रिवाज भी फंड की कमी के चलते नहीं हो पा रहे। कोर्ट ने कहा कि ये पट्टेदार/ठेकेदार वो मुख्य लोग हैं जिन्हें इन हालातों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। कोर्ट ने बताया कि अदालत में कई ऐसे मामले हैं जहाँ इन ठेकेदारों ने इस संबंध में दावा किया है कि वे किराए या लाइसेंस शुल्क के रूप में एक मामूली राशि का भुगतान करके मंदिर की संपत्ति में अनिश्चित काल तक बने रहने के हकदार हैं।

उल्लेखनीय है कि मद्रास हाईकोर्ट की बेंच ने अपनी टिप्पणी के सुरेश द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए की। ये याचिका कन्याकुमारी के आदिकेशव मंदिर में होने वाली पूजा के संबंध में थी। सुरेश, धर्म सेना नामक संगठन के उपाध्यक्ष हैं जो चाहता है कि मंदिर में पूजा और अनुष्ठान करने के लिए विशेष मठ हो। हालाँकि न्यायाधीशों ने इस पर कहा कि अदालत इस पर फैसला नहीं कर सकती और उन्हें उचित मंच से संपर्क करने का निर्देश दिया।

यूपी में बकरीद पर गोवंश या प्रतिबंधित जानवर की कुर्बानी पर रोक, 50 से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर होगी कार्रवाई: CM योगी

कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बकरीद पर सख्ती बरतने का निर्देश दिया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने टीम-09 के साथ समीक्षा बैठक में कहा कि प्रदेश में 21 जुलाई को किसी भी सार्वजनिक स्थल पर कुर्बानी बर्दाश्त नहीं होगी। इसके साथ ही किसी भी जगह पर 50 या इससे अधिक लोगों को एकत्र नहीं होने दिया जाएगा। बकरीद का त्योहार 21 जुलाई को मनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस के साथ जिला प्रशासन के अधिकारी भी नजर रखें कि बकरीद पर गोवंश, ऊँट व प्रतिबंधित पशु की कुर्बानी न हो। इसके साथ ही उन्होंने आदेश जारी कर स्पष्ट कहा कि कुर्बानी सार्वजनिक स्थलों पर नहीं की जाएगी। इसके लिए चिन्हित स्थलों या फिर निजी परिसरों का ही उपयोग किया जाएगा। उत्तर प्रदेश में गोवंश या ऊँट की कुर्बानी पूरी तरह प्रतिबंधित है। प्रदेश में कहीं पर भी ऐसा होने पर संबंधित व्यक्ति या परिवार पर कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाए।

वहीं, इस्लामिक सेन्टर आफ इण्डिया के चेयरमैन और इमाम ईदगाह मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने भी मुस्लिमों से अपील की कि कुर्बानी की फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर न डालें। उन्होंने अपील की कि सड़क, गली या खुले में कुर्बानी न करें। उन्होंने कहा कि कोविड-19 को देखते हुए इस बीमारी को काबू करने के लिए सावधानी बरतना जरूरी है। मस्जिदों में उतने ही नमाजी जाएँ जितनों की अनुमति है। उन्होंने कहा कि त्योहार पर भी सरकारी गाइडलाइन का पालन हम सबको करना है।

कैराना में जामा मस्जिद के खतीब मौलाना ताहिर हसन ने बकरीद के त्योहार के मद्देनजर मुस्लिम समाज से अपील की है। उन्होंने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए इस वर्ष भी नमाज ईदगाह में नहीं होगी। मस्जिदों में नमाज अदा की जाएगी। उन्होंने अपील की कि सभी अपनी मस्जिदों में गाइडलाइन का पालन करते हुए नमाज अता करें।