Home Blog Page 3583

छावनी क्षेत्रों में अब बनेेंगे मेट्रो-फ्लाईओवर: मोदी सरकार ने बदली 250 वर्ष पुरानी अंग्रेजों की बनाई रक्षा भू नीति

केंद्र की मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए 250 वर्षों से चली आ रही अंग्रेजों के समय की रक्षा भूमि नीति में बदलाव करते हुए नये नियमों को मंजूरी दी है। नया नियम सार्वजनिक परियोजनाओं व अन्य गैर-सैन्य गतिविधियों के लिए सशस्त्र बलों से खरीदी गई भूमि के बदले में उनके लिए समान मूल्य के बुनियादी ढाँचे के विकास (ईवीआई) की अनुमति प्रदान की जाएगी। इस नियम के लागू होने के बाद अब रक्षा मंत्रालय की भूमि के बदले दूसरे विभाग उन्हें भवन या अन्य बुनियादी सुविधाएँ भी तैयार करके दे सकेंगे।

रक्षा मंत्रालय (MoD) के अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि नए नियमों के तहत प्रमुख सार्वजनिक परियोजनाओं जैसे मेट्रो, सड़क, रेलवे और फ्लाईओवर के निर्माण आदि के लिए आवश्यकता के अनुसार रक्षा भूमि दी जाएगी। इसके बदले में उतनी ही कीमत की जमीन ली जाएगी या उसके बाजार मूल्य के अनुसार कीमत ली जाएगी। ऐसे आठ ईवीआई परियोजनाओं की पहचान की गई है, जिसके भूमि का आदान-प्रदान किया जा सकता है।

नए नियमों के अनुसार, छावनी क्षेत्रों में आने वाली जमीनों का मूल्य स्थानीय सैन्य प्राधिकरण की अध्यक्षता वाली एक समिति द्वारा निर्धारित किया जाएगा। वहीं, अगर जमीन छावनी के बाहर है तो उसके मूल्य का निर्धारण जिलाधिकारी द्वारा किया जाएगा।

दरअसल, पहले भूमि के बदले भूमि देने का नियम था। इसकी वजह से भूमि हस्तांतरण में काफी समय लग जाता था। हालाँकि, अब केंद्र सरकार ने रक्षा भूमि हस्तांतरण के नए नियमों को मंजूरी दे दी है, जिससे रक्षा मंत्रालय भूमि हस्तांतरण नियम से अपने संसाधनों में बढ़ोत्तरी कर सकेंगे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे पहले ब्रिटिश शासन काल में भारत में सेना के अलावा किसी भी उद्देश्य के लिए रक्षा भूमि का इस्तेमाल करने की अनु​मति नहीं थी। अंग्रेजों ने 1765 में बंगाल के बैरकपुर में पहली छावनी स्थापित की थी, तब से यह नियम लागू था।

इसके बाद अप्रैल 1801 में ईस्ट इंडिया कंपनी के गवर्नर जनरल-इन-काउंसिल ने आदेश दिया था, “किसी भी छावनी क्षेत्र के बंगले और क्वार्टर को किसी ऐसे व्यक्ति को बेचने या रहने देने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जो सेना से संबंधित नहीं है।”

हालाँकि, इस नीति में 2021 में बदलाव किया गया, क्योंकि सरकार रक्षा भूमि सुधारों पर विचार कर रही है। वह छावनी विधेयक 2020 को अंतिम रूप देने की दिशा में भी काम कर रही है, जिसका उद्देश्य छावनी क्षेत्रों में विकास करना है।

नए नियम से रक्षा महकमे को अपने बुनियादी ढाँचों को मजबूत बनाने के लिए संसाधन मिल सकेंगे। इससे रक्षा मंत्रालय के खर्च में भी बचत होगी। साथ ही साथ भूमि हस्तांतरण का कार्य भी जल्दी हो जाएगा और विकास योजनाओं को भी गति मिलेगी।

‘…भिंडरावाले मोदी को गले से पकड़ लेता’: सिंघू बॉर्डर पर प्रदर्शन के नाम पर खालिस्तानी आतंकियों का गुणगान करता बैनर, पोस्टर, गीत

सितंबर 2020 में केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर लगभग 8 महीनों से कथित किसानों का प्रदर्शन जारी है। अगर यह आंदलोन वास्तव में कृषि कानूनों के खिलाफ होती तो इसका समाधान हो चुका होता और चीजें सुलझ गई होती, लेकिन अलगाववादी तत्वों और प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठनों के हस्तक्षेप ने चीजों को और अधिक अस्पष्ट बना दिया है।

हाल ही में, ऑपइंडिया ने उन कारणों को सूचीबद्ध किया जिनके खिलाफ इन तथाकथित किसानों ने विरोध किया, जिसमें कट्टर अपराधियों और नक्सलियों को मुक्त करने की माँग शामिल थी।

विरोध प्रदर्शन के शुरुआती दिनों से ही एक बात स्पष्ट हो गई है कि खालिस्तानियों सहित अलगाववादी शक्तियों ने आंदोलन में घुसपैठ की है। पत्रकार स्वाति गोयल ने 18 जुलाई को सिंघू बॉर्डर पर बने पिंड अखाड़े की तस्वीर शेयर की। इन ‘अखाड़ों’ की स्थापना इसलिए की गई है ताकि किसान केंद्र सरकार के विरोध में रहकर व्यायाम कर सकें। सुनने में काफी दिलचस्प लगता है न?

चीजें अपेक्षा से अधिक गंभीर हैं। अखाड़े के बैनर में पंजाबी में एक कोटेशन है, जिसमें लिखा गया है, “आज हुंदा भिंडरांवाला जे, मोदी नु गल टन फड़ लंदा” जिसका अर्थ है “अगर भिंडरावाले यहाँ होता, तो वह मोदी को गले से पकड़ लेता।”

पंजाब में भिंडरांवाले के लिए भावनाएँ कभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुईं और पिछले कुछ सालों से राजनीतिक तत्वों और विदेशी संगठनों द्वारा लगातार यही भावनाएँ भड़काई गई हैं। ये किसान विरोध पोस्टर, बैनर, भाषणों और भिंडरांवाले और अन्य की प्रशंसा करने वाले गीतों से भरे हुए हैं, जिन्हें उस समय भारतीय सेना और पंजाब पुलिस ने मार गिराया था।

बैनर पर लिखे लिरिक्स उसी एक गीत से प्रेरित हैं। गाना सितंबर 2020 के आसपास लॉन्च किया गया था जब पूरे पंजाब में विरोध प्रदर्शन बढ़ रहे थे। यूके के जगोवाला जत्था द्वारा रिलीज किए गए इस गाने में भिंडरांवाले की तारीफ की गई है। इसमें लिखा है, “वह राजसी नेता, जिसमें अकेले सिस्टम से लड़ने की हिम्मत थी, आज अगर वह जिंदा होता तो पीएम मोदी को गले से पकड़ लेता।”

गाने में आगे कहा गया है कि भिंडरांवाले निडर था और उसने भारत सरकार की बात पर ध्यान नहीं दिया। अगर वह वहाँ होता तो मोदी सरकार के साथ भी ऐसा ही करता। इसमें कहा गया है, ”उसने विरोध का रास्ता नहीं चुना होता। अगर उन्होंने हथियार उठाकर अपने अनुयायियों को बुलाया होता, तो सरकार कोठरी में छिप जाती।”

इसमें आगे दावा किया गया है कि हालाँकि किसान अपना सारा जीवन खेतों में बिता देते हैं, लेकिन उन्हें उपज का सही मूल्य नहीं मिलता है। जाहिर है, खालिस्तान आंदोलन भी किसानों के विरोध और उपज के सही मूल्य की माँग के कारण शुरू हुआ माना जाता है। ऐसा लगता है कि गोली चलाने के लिए किसानों के कंधों का इस्तेमाल करना भारत विरोधी ताकतों के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने का सबसे आसान तरीका है।

विडंबना यह है कि तीन किसान कानून किसानों को अपनी उपज कहीं भी और किसी को भी बेचने का अधिकार देते हैं, उन्हें मंडियों के चंगुल से मुक्त करते हैं और उन्हें मूल्य निर्धारण और बातचीत के संबंध में शक्ति भी देते हैं।

भिंडरांवाले के गुणगान करने वाले गीतों की पहुँच

चौंकाने वाली बात यह है कि ये गाने सिर्फ Youtube या WhatsApp पर फॉरवर्ड करने तक ही सीमित नहीं हैं। ये Spotify, Amazon Music, Gaana, Hungama और Wynk जैसे कई म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर ‘कानूनी रूप से’ उपलब्ध हैं।

हिंदू युवती को फँसाने के लिए जाबिर हाथ में कलावा बाँधकर बना जय, रेप करने के बाद उगली सच्चाई

मध्य प्रदेश के इंदौर में लव-जिहाद (ग्रूमिंग जिहाद) का एक मामला सामने आया है। वहाँ 30 साल की युवती ने जाबिर फारुखी नाम के युवक पर दुष्कर्म का आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि फारुखी ने उसका 10 साल तक शारीरिक शोषण किया और उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाता रहा। पुलिस ने अब इस मामले में दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है।

पुलिस का कहना है कि 30 वर्षीय पीड़िता नयापुर निवासी है। वह विजयनगर स्थित टेलीपरफार्मेंस कंपनी में काम करती थी। उसी दौरान उसकी मुलाकात जाबिर फारुखी से हुई। जाबिर उससे जय बनकर मिला। उस समय उसने हाथ में कड़ा पहना हुआ था और कलावा बाँधा हुआ था। जाबिर ने युवती को जूना रिसाला स्थित कंपनी में नौकरी दिलाने का झाँसा दिया और इस तरह उससे करीबियाँ बढ़ाईं।

बातचीत बढ़ने के बाद एक दिन वह उसके घर गया और युवती के माता-पिता को वहाँ न पाकर उसका चाकू की नोक पर रेप किया। इस दौरान उसने उसकी अश्लील वीडियो भी बनाई, जिसको दिखा दिखाकर उसने युवती का आगे भी शारीरिक शोषण किया। युवती का आरोप है कि जब रेप करने के बाद जाबिर घर से भागने लगा, तब उसने उसके घर से पैसे उठाए और जाते समय अपनी असली पहचान बताई। उसके बाद से वह उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था।

युवती कहती है कि ये सब उसके साथ 10 साल से हो रहा था। इससे पहले भी पीड़िता ने अपनी शिकायत थाने में दी थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई, दूसरी ओर जाबिर उस पर तेजाब फेंकने की धमकी देने लगा। हाल में युवती हिंदू जागरण मंच के पदाधिकारी सोहन जोशी के संपर्क में आई और धीरज यादव व बेटी बचाओ प्रमुख प्रदीप नंदनवार, राजा कोठारी, सोनू कल्याणे के साथ थाने पहुँची, जहाँ उसने मामले की सारी जानकारी दी। अब पुलिस आरोपित की तलाश में दबिश दे रही है। जल्द ही आरोपित को गिरफ्तार किया जाएगा।

आगरा के निजी अस्पताल ने इलाज के नाम पर मरीज से वसूले लाखों रुपए, सीएम योगी के फटकार के बाद वापस हुई वसूली गई अवैध रकम

अस्पतालों में मरीजों को इलाज के नाम पर किस तरह से ठगा जाता है यह किसी से छिपा नहीं है। इसी कड़ी में आगरा के एक निजी अस्पताल ने इलाज के नाम पर मरीज से भारी रकम वसूले थे। मरीज के बेटे ने आगरा के यशवंत अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर के खिलाफ शिकायत प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके जनता दर्शन कार्यक्रम में की। मामले में सीएम द्वारा हस्तक्षेप करने के बाद अस्पताल को राशि लौटानी पड़ी।

सीएम योगी के हस्तक्षेप के बाद आगरा के जिलाधिकारी ने तुरंत एक्शन लेते हुए मामले की जाँच की और अस्पताल को दोषी पाया गया। इसके बाद अतिरिक्त राशि को बरामद कर प्रशासन ने उसी दिन उसे आगरा के खंडौली थाना क्षेत्र के मौरई गाँव निवासी आशीष पाठक को लौटा दिया।

मामला कुछ यूँ है कि मौरई गाँव के रहने वाले आशीष पाठक की माँ का इलाज 23 अप्रैल से 11 मई तक इस अस्पताल में हुआ था। इस दौरान अस्पताल ने उनसे अधिक फीस चार्ज की। बीते शुक्रवार (16 जुलाई 2021) को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दर्शन कार्यक्रम में आशीष पाठक गए और सीएम से बताया कि अस्पताल ने कैसे उनकी माँ के इलाज के लिए अधिक शुल्क लिया था।

उन्होंने शिकायत की कि उनकी माँ को वेंटिलेटर पर नहीं रखा गया था, फिर भी अस्पताल ने उनसे छह दिनों के लिए लेवल थ्री वेंटिलेटर के लिए 1.50 लाख रुपए लिए। उन्होंने कहा कि अस्पताल ने जनरल वार्ड में एक बेड के लिए 18 दिनों के लिए कुल 90,000 रुपए का शुल्क लिया।

इसके अलावा डॉक्टर का हर दिन का विजिटिंग चार्ज 2 हजार रुपए था। आठ दिनों के लिए डॉक्टर का विजिटिंग चार्ज 16,000 रुपए हुए, लेकिन उनसे डॉक्टर की फीस के रूप में 34,000 रुपए वसूला गया।

आशीष पाठक ने सीएम को बताया कि उनकी माँ को दी गई दवा के लिए भी बाजार मूल्य से डेढ़ गुना अधिक कीमत वसूल की गई। उन्होंने बताया कि अस्पताल ने दवा के लिए कुल 1.49 लाख रुपए उनसे वसूल किए।

सीएम से शिकायत के तुरंत बाद वसूले गए अतिरिक्त पैसे आशीष को वापस मिल गए। इसके लिए आशीष और उनके परिवार ने सीएम योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद दिया।

‘मॉनसून सत्र के 1 दिन पहले सनसनीखेज खबर, संयोग नहीं’: संसद में ‘Pegasus’ पर विपक्ष को मोदी के नए IT मंत्री ने धोया

मीडिया के गिरोह विशेष ने भारत सरकार पर इजरायल की कंपनी के सॉफ्टवेयर ‘Pegasus’ के जरिए कुछ पत्रकारों, विपक्षी नेताओं और सुप्रीम कोर्ट के जजों की जासूसी कराने का आरोप लगाया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी (IT) मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन आरोपों का जवाब देते हुए इस तरह की रिपोर्ट्स पर संदेह जताया। उन्होंने कहा कि संसद के मॉनसून सत्र के ठीक एक दिन पहले इस तरह की खबर का आना संयोग नहीं हो सकता।

उन्होंने सोमवार (19 जुलाई, 2021) को संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन विपक्ष के हंगामे के बीच उन्होंने इस मुद्दे पर जवाब दिया। अश्विनी वैष्णव ने कहा, “रविवार रात एक वेब पोर्टल पर बेहद सनसनीखेज स्‍टोरी चली। इस स्‍टोरी में बड़े-बड़े आरोप लगाए गए। संसद के मॉनसून सत्र से ठीक एक दिन पहले ये मीडिया रिपोर्ट सामने आई। यह संयोग नहीं हो सकता। इसमें जो तथ्य हैं, वो गुमराह करने वाले हैं।”

उन्होंने इन आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि डेटा का जासूसी से कोई सम्बन्ध ही नहीं है। उन्होंने आरोपों को निराधार करार देते हुए कहा कि पहले भी इस तरह के आरोपों को दो बार ख़ारिज किया जा चुका है। संसद में CPI के बिनोय बिस्वास, राजद के मनोज झा और AAP के संजय सिंह सहित कुछ विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे को उठाया था। राहुल गाँधी ने भी ट्वीट कर के सरकार पर तंज कसा था।

उधर इजरायली जासूसी सॉफ्टवेयर ‘Pegasus’ को बनाने वाली कंपनी NSO ग्रुप ने भारतीय वामपंथी मीडिया संस्थान ‘The Wire’ को मानहानि का मुकदमा दायर करने की धमकी दी है।कंपनी के अनुसार, ये लेख एकदम झूठे हैं और कंपनी की छवि को नुकसान पहुँचाने वाले हैं। कंपनी ने कहा कि ये लेख गलत धारणाओं पर आधारित हैं और बिना किसी सबूत के अपुष्ट बातें लिखी गई हैं। साथ ही इन्हें वास्तविकता से दूर भी बताया

वहीं केंद्र ने स्पष्ट किया है कि जो सवाल उससे पूछे जा रहे हैं, उसके जवाब सार्वजनिक रूप से लंबे समय से उपलब्ध हैं। सरकार का कहना है कि पेगासस को लेकर पहले ही जवाब दिया जा चुका है और इस कंपनी के साथ भारत सरकार के कथित संबंधों की बात करना एक दुर्भावनापूर्ण आरोप है। बता दें कि संसद में MeitY ने कहा था कि कोई भी सरकारी एजेंसी किसी भी प्रकार की जासूसी में अनधिकृत रूप से प्रतिभागी नहीं है।

राजदूत की बेटी को अगवा किए जाने के बाद अफगानिस्तान ने पाकिस्तान से सारे राजनयिक बुलाए

इस्लामी मुल्क पाकिस्तान से अफगानिस्तान ने अपने राजदूत स​हित सभी राजनयिकों को रविवार (18 जुलाई 2021) को वापस बुला लिया। सिलसिला अलीखिल को अगवा कर प्रताड़ित किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है। सिलसिला पाकिस्तान में अफगान राजदूत नजीबुल्लाह अलीखिल की बेटी हैं। अगवा कर उन्हें कई घंटे तक टॉर्चर किया गया और फिर सड़क किनारे फेंक दिया गया था।

अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है, “राजदूत की बेटी के अपहरण के बाद अफगानिस्तान ने राजदूत और वरिष्ठ राजनयिकों को पाकिस्तान से तब तक के लिए वापस बुला लिया, जब तक कि अपहरण के दोषियों की गिरफ्तारी और उन पर मुकदमा चलाने सहित सभी सुरक्षा खतरों का समाधान नहीं हो जाता।” बयान में आगे कहा गया है, “एक अफगान प्रतिनिधिमंडल मामले और सभी संबंधित मुद्दों का आकलन और पालन करने के लिए जल्द ही पाकिस्तान का दौरा करेगा, निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

अफगान उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने स्वीकार किया कि अपहरण के मामले ने राष्ट्र की अंतरात्मा को घायल और प्रताड़ित किया था। उन्होंने ट्वीट किया, “राष्ट्रपति अशरफ गनी ने विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया कि इस्लामाबाद से हमारे राजदूत को सभी वरिष्ठ राजनयिकों के साथ वापस बुला लें। अफगान राजदूत की बेटी के अपहरण और उसके बाद की यातना ने हमारे देश के मानस को ठेस पहुँचाई है। हमारे राष्ट्रीय मानस को प्रताड़ित किया गया है।”

पाकिस्तान में अफगान राजदूत नजीबुल्लाह अलीखिल की बेटी सिलसिला अलीखिल का 16 जुलाई को इस्लामाबाद में अपहरण कर लिया गया था। अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया था कि सिलसिला को कैद के दौरान प्रताड़ित किया गया। इस्लामाबाद के जिन्ना सुपर से अज्ञात लोगों ने उनका अपहरण कर लिया था। अज्ञात स्थान पर प्रताड़ित करने के बाद उन्हें इस्लामाबाद के ब्लू एरिया में तहजीब बेकरी के पास छोड़ दिया गया था।

मेडिकल रिपोर्ट में बताया गया था कि सिलसिला को बर्बर तरीके से टॉर्चर किया गया। उसके पैरों की हड्डियों को तोड़ दिया गया है और कलाइयों में कई फ्रैक्चर हैं। उसके घुटनों में काफी चोट है। मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक सिलसिला की कलाई में काफी जोर से रस्सी बाँधी गई थी और मुँह में कपड़ा ठूँसकर उसे बहुत बुरी तरह से पीटा गया था। मेडिकल रिपोर्ट में आशंका जताई गई थी कि सिलसिला के शरीर की कई और हड्डियाँ टूटी हो सकती हैं, जिसका पता एक्सरे और दूसरी जाँच के बाद चल सकेगा।

इस बीच, पाकिस्तानी प्रधान मंत्री इमरान खान ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों, इस्लामाबाद पुलिस और आंतरिक मंत्री शेख रशीद को अपहरण मामले की जाँच 48 घंटे के भीतर करने का निर्देश दिया था। उन्होंने सभी एजेंसियों से आरोपितों को पकड़ने के लिए संघीय पुलिस के साथ मिलकर काम करने का भी अनुरोध किया। रविवार को अफगानों के एक बड़े समूह ने काबुल में पाकिस्तान दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सिलसिला अलीखिल की रक्षा करने में विफल रहने के लिए पाकिस्तानी सेना के खिलाफ नारे लगाए।

बांग्लादेशी-रोहिंग्या छोड़िए, भारत में अवैध रूप से रह रहे ईरान के भी नागरिक: फर्जी आधार कार्ड भी मिले

तमिलनाडु में चेन्नई पुलिस ने भारत में अवैध रूप से रहकर लूट-पाट करने वाले 9 ईरानी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से फर्जी आधार कार्ड भी बरामद किया गया है। इसका खुलासा उस वक्त हुआ, जब चेन्नई पुलिस एक सोमालियाई नागरिक से हुई लूट के मामले की जाँच कर रही थी।

दरअसल, इन विदेशी ठगोें ने चेन्नई में अपनी आँखों का इलाज कराने आए सोमालिया के एक नागरिक को रोक लिया और खुद को सेंट्रल पुलिस बताकर उससे 3,800 अमेरिकी डॉलर (करीब 2,84,866 रुपए) ऐंठ लिए थे।

पुलिस ने मामले में जिन 9 आरोपितों को गिरफ्तार किया है, उनमें 3 महिलाएँ भी शामिल हैं। ये सभी समंदर के किनारे बसे शहर कोवलम के एक रिसॉर्ट में अवैध रूप से ठहरे थे। इसके साथ ही पुलिस टीम ने लूट के लिए इस्तेमाल की गई कार का भी पता लगा लिया है।

इस मामले में केंद्रीय पुलिस ने कहा है कि तीन ईरानी नागरिकों ने सोमालियाई नागरिक से नार्कोटिक्स की जाँच के बहाने रोका और लूट की वारदात को अंजाम दिया। इस मामले में चेन्नई की सिटी पुलिस ने बताया कि ये आरोपित कोवलम के रिसॉर्ट्स में अवैध रूप से रह रहे थे।

सोमालिया का 61 वर्षीय पीड़ित व्यक्ति यहाँ अपनी आँख का इलाज कराने के लिए आया था। लूट के मामले में उसने थाउजेंड लाइट्स पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इस केस की जाँच के लिए चेन्नई सिटी पुलिस ने एक स्पेशल टीम गठित की है।

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा लगता है कि ईरानी ठगों का यह गिरोह काफी लंबे समय से शहर और उसके आसपास के इलाकों में इसी तरह की वारदातों को अंजाम देने में लिप्त थे।

चेन्नई सिटी पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया है कि आरोपितों के पास से फर्जी आधार कार्ड निकले हैं। इतना ही नहीं इन सभी लोगों के पास भारत की यात्रा करने का भी कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला है।

‘बकरीद पर बेजुबान जानवरों की कुर्बानी रोंके’: महंत नरेंद्र गिरी ने कहा- आगे आएँ मुस्लिम

ईद उल-अजहा यानी बकरीद बुधवार (21 जुलाई) को है। इससे पहले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने सोमवार (19 जुलाई) को मुस्लिम धर्मगुरुओं से अपील की है कि कोरोना संकटकाल में वे मस्जिदों से ऐलान करें कि लोग अपने घरों में ही बकरीद की नमाज अदा करें। इस दिन ज्यादा भीड़-भाड़ नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बेजुबान जानवरों की कुर्बानी पर भी रोक लगनी चाहिए। ‌इसके लिए भी मुस्लिम धर्मगुरुओं को आगे आना होगा और अपने लोगों को समझाना होगा।

महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि पहले सनातन धर्म में भी देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए पशुओं की बलि देने की प्रथा थी, लेकिन अब हिंदू समाज ने इस कुप्रथा को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। अब पशुओं की जगह नारियल फोड़ने की परंपरा निभाई जाती है। इससे न किसी की धार्मिक आस्था को ठेस पहुँची है, न ही हमारी परंपरा से छेड़छाड़ हुई और जीव हत्या भी रुक गई है। उन्होंने कहा कि ऐसा ही प्रयास मुस्लिम धर्मगुरुओं को करना चाहिए। बकरीद पर लाखों बेजुबान जानवरों की कुर्बानी दी जाती है, इसे रोकने जरूरत है। मुस्लिम समुदाय के लोगों को इसे रोकने के लिए आगे आना होगा।

महंत ने कहा, ”कोई भी धर्म किसी भी जीव की हत्या करना नहीं सिखाता, बल्कि सभी दूसरों के जीवन की रक्षा करना सीखाते हैं। मुस्लिम धर्मगुरु अपने समुदाय के लोगों को जीव हत्या करने से रोकेंगे तो समाज में बेहतर माहौल बनेगा।”

वहीं, महंत ने कोरोना महामारी के चलते यूपी की योगी सरकार द्वारा कांवड़ यात्रा पर रोक लगाने के फैसले का स्वागत किया है। नरेंद्र गिरि ने कहा, ”धार्मिक आस्था और परंपरा जरूरी है, लेकिन लोगों का जीवन बचना उससे कहीं ज्यादा जरूरी है।” बता दें कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, कांवड़ संघों और दूसरे साधु संतों ने सीएम योगी ​आदित्यनाथ से इस वर्ष कांवड़ यात्रा पर रोक लगाने की माँग की थी।

मुंबई: बोरिवली में दिनदहाड़े वकील पर तलवार से जानलेवा हमला, 3 गिरफ्तार, देखें Video

मुंबई के बोरिवली के दहिसर कंदरपाड़ा इलाके में रविवार (जुलाई 18, 2021) को दिनदहाड़े एक वकील पर तलवार से हमले की घटना सामने आई है। वकील की पहचान सत्यदेव जोशी के तौर पर हुई है। हमले में उनको गंभीर चोटें लगीं। उनके अलावा उनके जूनियर भी घायल हुए। पुलिस ने इस मामले में 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं, 20 लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की गई है।

इस घटना के संबंध में एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आई है। वीडियो में देख सकते हैं कि हमला दिनदहाड़े हुआ और उस जगह किया गया जहाँ गाड़ियों की आवाजाही बराबर बनी हुई थी। वकील पर कई लोगों को बीच सड़क पर हमला करते देखा जा सकता है। इस बीच जब आसपास के लोग उन्हें बचाने आते हैं तो हमलावर उन सब पर भी अटैक करने से पीछे नहीं हटते। सभी उपद्रवियों के हाथ में तलवार और डंडे साफ देखे जा सकते हैं।

मुंबई के दहिसर वेस्ट इलाके के पुलिस स्टेशन में इस मामले में आईपीसी की धारा 307, 326, 324, 504 और 506 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि ये मामला प्रॉपर्टी को लेकर है। मामले में जाँच की जा रही है। आरोपितों पर हत्या का केस लगेगा, 3 लोग गिरफ्तार किए गए हैं।

टीवी 9 हिंदी के अनुसार, यह पूरा मामला दहिसर कंदरपाड़ा इलाके में मैदान के पास निजी भूमि विवाद का है। आरोप है कि कुछ लोग निजी संपत्ति पर कब्जा करना चाहते थे। इसीलिए केस से संबंधित कुछ लोगों ने केस लड़ने वाले वकील पर सरेआम तलवार से हमला किया। वकील सत्यदेव के अलावा उनके जूनियर भी घायल हुए हैं।

उत्तर भारत से पाकिस्तान तक ‘मुस्लिम पट्टी’ बनाने की साजिश, हरियाणा से लेकर बंगाल तक के इलाके शामिल: लेख में दावा

उत्तर भारत में एक ‘मुस्लिम पट्टी (Muslim Belt)’ बनाने की साजिश चल रही है। इस पट्टी में पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा जैसे राज्यों के इलाके होंगे जो पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़ा होगा। यह दावा ‘दैनिक जागर’ण में प्रकाशित एक लेख में किया गया है। इसे लिखा है बिहार के पूर्व विधान पार्षद हरेंद्र प्रताप ने। लेख में उन्होंने कहा है कि जहाँ देश में मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ती चली गई, वहीं बाकी मतावलंबियों की आबादी कम हुई है।

इसका कारण बताते हुए कहा कि अन्य मतों के लोग स्वतः दो बच्चों वाली नीति का पालन करते रहे हैं, जबकि मुस्लिम घुसपैठियों ने अपनी जनसंख्या बढ़ाने पर जोर दिया है। साथ ही उन्होंने इसका कारण बताते हुए कहा कि जहाँ अन्य मतों के लोग स्वतः दो बच्चों वाली नीति का पालन करते रहे, मुस्लिम घुसपैठियों ने अपनी जनसंख्या बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने बड़ा दावा किया कि पाकिस्तान और बांग्लादेश को जोड़ने के लिए भारत में एक ‘मुस्लिम पट्टी (Muslim Belt)’ बनाने की कट्टरपंथियों की साजिश है।

‘मुस्लिम गलियारा’ बना पाकिस्तान-बांग्लादेश को जोड़ने की साजिश: पूर्व MLC

‘दैनिक जागरण’ में लिखे इस लेख में उन्होंने बताया है कि उत्तर भारत में मुस्लिम षड्यंत्रकारियों ने जिस मुस्लिम गलियारे को तैयार करने की साजिश रची है, वो बांग्लादेश से सटे पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा होते हुए पाकिस्तान से मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस गलियारे में मुस्लिमों को बड़ी संख्या में बसाने का काम शुरू किया जा रहा है और असम में घुसपैठियों के खिलाफ हुए आंदोलन के बाद वहाँ के कई मुस्लिमों को भी इधर ही बसाया गया है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में शासन के संरक्षण और भाषाई अनुकूलता के कारण वो खुले रूप से अपना काम कर रहे हैं, लेकिन यूपी-बिहार में इसकी अनदेखी आश्चर्यजनक है। उन्होंने कैराना से हिन्दुओं के पलायन की खबर याद दिलाते हुए लिखा है कि 2011 की जनगणना में जहाँ हिंदू जनसंख्या वृद्धि दर राष्ट्रीय से आधा यानी 9.19% तथा मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि हिंदू से तीन गुना यानी 29.81% थी।

उन्होंने आँकड़ा पेश किया कि 2001-11 में पश्चिम बंगाल से 35 लाख हिन्दुओं के पलायन की बात सामने आई है। उन्होंने पूर्णिया के बायसी विधानसभा में एक दलित बस्ती को जलाए जाने की घटना को भी याद किया और कहा कि वहाँ से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने जीत दर्ज की है। बकौल हरेंद्र प्रताप, ओवैसी हैदराबाद को कश्मीर बनाना चाहते हैं और वहाँ हिन्दू जनसंख्या पहले से घटी है।

‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव हरेंद्र प्रताप ने अपने लेख में नेपाल सीमा पर मरदसों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण गिरोह की सक्रियता को भी इसी साजिश का हिस्सा बताया। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम बहुल इलाकों मुजफ्फरनगर (50.14%), मुरादाबाद (46.77%), बरेली (50.13%), सीतापुर (129.66%), हरदोई (40.14%), बहराइच (49.17%) और गोंडा (42.20%) से ‘मुस्लिम पट्टी’ बनाने की साजिश है। 

‘चिकेन्स नेक’ को काटने की बात

दिल्ली के शाहीन बाग़ में कई महीनों तक हिन्दू विरोधी प्रदर्शन चला था। इस विरोध प्रदर्शन के सरगना शरजील इमाम ने असम को हिंदुस्तान से अलग करने की बात की थी। उसने कहा था कि अब वक्त आ गया है कि हम गैर-मुस्लिमों से बोलें कि अगर हमारे हमदर्द हो तो हमारी शर्तों पर आकर खड़े हो। साथ ही धमकी दी थी कि अगर वो हमारी शर्तों पर खड़े नहीं होते तो वो हमारे हमदर्द नहीं हैं।

इसके बाद उसने बड़ी साजिश का खुलासा करते हुए कहा था कि अगर 5 लाख लोग हमारे पास संगठित रूप से हों तो हम उत्तर-पूर्व और शेष भारत को हमेशा के लिए काट सकते हैं। उसने कहा था, “परमानेंटली नहीं तो कम से कम एक-आध महीने के लिए असम को हिंदुस्तान से काट ही सकते हैं। मतलब इतना मवाद डालो पटरियों पर, रोड पर कि उनको हटाने में एक महीना लगे। जाना हो तो जाएँ एयरफोर्स से।”

उसने कहा था, असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है। असम और इंडिया कटकर अलग हो जाए, तभी ये हमारी बात सुनेंगे। अगर हमें असम की मदद करनी है तो हमें असम का रास्ता बंद करना होगा फौज के लिए और जो भी जितना भी सप्लाई जा रहा है बंद करो उसे। बंद कर सकते हैं हम उसे, क्योंकि चिकन नेक जो इलाका है, वह मुस्लिम बहुल इलाका है। बता दें कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर को चिकन नेक कहा जाता है।

इस चिकन नेक के माध्यम से ही उत्तर-पूर्वी भारत शेष भारत से जुड़ा हुआ है। इस गलियारे की लंबाई 21 से 24 किलोमीटर है। इससे भूटान, म्यामार, बांग्लादेश और चीन जैसे देशों की सीमा जुड़ती है। यहीं से भारत में घुसपैठ सबसे अधिक होती है। कई इलाकों से ऐसी ख़बरें आती हैं जहाँ इस तरह के मुस्लिम बहुल इलाकों से हिन्दुओं के पर्व-त्योहारों के दौरान उन पर पत्थरबाजी होती है। उन्हें उधर से गुजरने नहीं दिया जाता।

घुसपैठ और इस्लामी कट्टरता की कई घटनाएँ

इसी साल जून में उत्तर प्रदेश एटीएस ने अवैध रूप से भारत में बांग्लादेशियों की घुसपैठ कराने के मामले में 4 रोहिंग्या को गिरफ्तार किया था। हाफिज शफीक नामक व्यक्ति मेरठ में एक गिरोह चला रहा था, जो भारत में लाए गए रोहिंग्याओं के आधार, वोटर आईडी, पासपोर्ट आदि बनवाते थे। इसी तरह हरियाणा का मेवात इस्लामी कट्टरता के लिए कुख्यात हो चुका है, जहाँ से आए दिन कई घटनाएँ सामने आती रहती हैं।

मीडिया रिपोर्ट में ये भी सामने आया था कि हरियाणा के मेवात जिले के नूँह में कथित तौर पर बड़ी संख्या में रोहिंग्या बसाए जा रहे हैं। यह इलाका पशुओं की तस्करी सहित विभिन्न तरह की आपराधिक गतिविधियों के लिए भी पहचान रखता है। रिपोर्ट्स का कहना था कि 600-700 रोहिंग्या परिवार राज्य में बसे हैं। करीब 2 हजार रोहिंग्या के अकेले मेवात जिले में होने की बात कही जा रही है। VHP तो इसे वास्तविकता से कम बताती है।

दरभंगा में बम ब्लास्ट, महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती पर हमला और अलकायदा के नेटवर्क का खुलासा भी पिछले कुछ दिनों में ही हुआ है। केरल और पश्चिम बंगाल से आतंकियों के मॉड्यूल का खुलासा पहले ही हो चुका है। धर्मांतरण गिरोह के मौलाना मोहम्मद उमर गौतम और जहाँगीर काजी धराए, जिन्होंने 1000 मूक-बधिर हिन्दुओं का धर्म-परिवर्तन कराया था। कैराना, मुर्शिदाबाद और एर्नाकुलम जैसे जगह आतंकियों के हॉटस्पॉट बने

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले रोहिंग्या मुसलमानों को राज्य में बसाने को लेकर एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश भी हुआ है। इनके फर्जी आधार कार्ड, वोटर कार्ड सहित अन्य दस्तावेज तैयार करवाए जा रहे हैं ताकि वे वोट डाल सकें। एजेंसियों को पता चला है कि दिल्ली के खजूरी खास इलाके के एक वेंडर ने रोहिंग्याओं को उत्तर प्रदेश में बसाया था। रोहिंग्या मुस्लिम फर्जी राशन कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड के साथ प्रदेश के विभिन्न स्थानों में बसने लगे हैं। आर्थिक मदद भी मिल रही।