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बकरीद पर गाय, बछड़े और ऊँट की कुर्बानी नहीं: जम्मू-कश्मीर प्रशासन हुआ सख्त, भारत सरकार ने भेजी थी चिट्ठी

बकरीद से पहले जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने जानवरों की कुर्बानी को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के पशु/भेड़पालन और मत्स्य पालन विभाग ने ईद के मौके परे गायों, बछड़ों, ऊंटों की कुर्बानी पर प्रतिबंध लगाने का आदेश किया है। इस मामले में विभाग ने जम्मू-कश्मीर के संभागीय आयुक्त और आईजीपी को एक पत्र लिखा है।

दरअसल, बकरीद पर बड़े पैमाने पर जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। इसी की संभावनाओं को देखते हुए भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय व भारत सरकार के पशु कल्याण बोर्ड की ओर से राज्य को अवैध रूप से जानवरों की कुर्बानी को रोकने के संबंध में एक पत्र लिखा गया था।

इसमें कहा गया है कि बकरीद के मौके पर जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में बड़ी संख्या में कुर्बानी के लिए जानवरों की हत्या किए जाने की संभावना है। इसे देखते हुए पशु कल्याण बोर्ड ऑफ इंडिया ने सभी एहतियाती उपायों को लागू करने का अनुरोध किया है।

पत्र में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम-1960, पशु परिवहन कल्याण नियम-1978, पशु परिवहन (संशोधित) नियम-2001, स्लॉटर हाउस नियम-2001 (जिसके तहत ऊंटों की कुर्बानी नहीं दी जा सकती) का कड़ाई से पालन करने का निर्देश म्युनिसिपल लॉ एंड फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने दिया है।

पत्र में आगे कहा गया है – “पशुओं की हत्या को रोकने के लिए पशु कल्याण कानूनों से जुड़े सभी अधिनियमों और नियमों के प्रावधानों के अनुसार सभी उपाय करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा इन नियमों का उल्लंघन करने वाले आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस लेटर की एक कॉपी भारतीय पशु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष को भी भेजी गई है।

पशुओं की कुर्बानी को रोकने के लिए राज्य के सभी जिलाधिकारियों, आयुक्त, एसएमसी/जेएमसी, पशुपालन विभाग के निदेशक, जम्मू-कश्मीर भेड़पालन विभाग के निदेशक, जम्मू-कश्मीर के शहरी निकायों के निदेशकों और सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को पत्र की एक कॉपी भेजी गई है।

एक साल की दोस्ती, लड़की ने खत्म किए रिश्ते तो इलियास ने उँगलियाँ काट डालीं, पंजों-एड़ियों को भी काट किया अलग

मध्य प्रदेश के इंदौर के साँवेर गाँव में एक युवती पर सिरफिरे पूर्व प्रेमी ने जानलेवा हमला कर दिया। आरोपित ने पहले लड़की के साथ जबर्दस्ती की, लेकिन उसमें नाकाम होने के बाद उसने दोस्तों के साथ मिल कर लड़की पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। आरोपितों ने युवती के पैरों की उंगली और एड़ियों को काट डाला।

पीड़िता के चीखने पर आरोपित दोस्तों संग वहाँ से फरार हो गया। पीड़िता को परिजनों ने उठाया और घायल हाल में सांवेर सीएचसी लेकर गए, जहाँ से उसे एमवाय अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के बाद पीड़िता के परिजनों ने सांवेर पुलिस को शिकायत की थी, लेकिन समय पर उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।

करीब 36 घंटे बीतने के बाद जब ये मामला इंदौर के आईजी हरिनारायण मिश्रा चारी के संज्ञान में आया तो उनके निर्देश पर पुलिस एक्टिव हुई। आईजी ने महिलाओं से जुड़े सभी मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश पुलिस को दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने हत्या की कोशिश की बजाय आरोपित के खिलाफ सामान्य धाराओं के तहत घर में घुस कर और मारपीट करने का मामला दर्ज किया है।

आरोपित से पिछले साल हुई थी दोस्ती

पीड़ित युवती के परिजनों के मुताबिक, राजा उर्फ इलियास से लड़की की पिछले साल दोस्ती हुई थी। कुछ समय तक दोनों साथ रहे, लेकिन इस बीच उनमें किसी बात को लेकर मनमुटाव हो गया। इसके बाद लड़की ने उससे अपने रिश्ते को तोड़ने की कोशिश की, जिससे वो नाराज हो गया था। 2 दिन पहले आरोपित उनके घर आया था। इस दौरान उसने पीड़िता के साथ जबर्दस्ती करने की कोशिश की। लड़की ने इसका विरोध किया तो हमला कर उसके पैरों की उंगलियों और एड़ियों को काट दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक 15 दिन पहले भी आरोपित पीड़िता के घर आय़ा था। उस दौरान भी उसने उसके साथ जोर जबर्दस्ती की थी।

असम: सिर्फ 2 महीने में 15 अपराधी एनकाउंटर में ढेर, CM हिमंत बिस्व सरमा ने कहा- ‘कड़ी कार्रवाई के लिए पुलिस स्वतंत्र’

असम पुलिस द्वारा अपराधियों के एनकाउंटर की हो रही आलोचना और विपक्ष के हमलों का मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने जवाब दिया है। उन्होंने गुरुवार (15 जुलाई 2021) को विधानसभा में पुलिस का बचाव करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि कानून के दायरे में रहकर पुलिस को अपराधियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की पूरी आजादी है।

विधानसभा में विपक्ष के नेता देवव्रत सैकिया द्वारा मुठभेड़ों पर उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए सरमा ने विधायकों से यह संदेश देने की अपील की कि सदन किसी भी तरह के अपराधों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सदन के नेता के तौर पर वो पुलिस को उसके कार्यों, खास तौर पर उनके कार्यकाल में किए गए काम के लिए बधाई देते हैं।

सीएम सरमा ने डीजीपी को संबोधित करते हुए कहा, “मैं डीजीपी से कहना चाहता हूँ कि निर्दोष लोगों पर अत्याचार न करें। जब तक आप कानून के मुताबिक काम करते रहेंगे, आपको किसी भी अभियान के चलाने की पूरी स्वतंत्रता होगी।”

सदन को मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने बताया कि बीते दो महीने में मुठभेड़ के दौरान कुल 15 अपराधियों की मौत हुई है। जबकि हिरासत के दौरान 23 लोगों घायल हुए, इनमें से 5 लोगों की मौत हुई है, जिन्होंने हिरासत के दौरान पुलिस के हथियार छीनकर भागने की कोशिश की थी। इसके अलावा 10 उग्रवादियों का एनकाउंटर किया गया।

सीएम हिमंता बिस्व सरमा ने कहा, “मेरी सरकार अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करेगी और मैं किसी भी तरह की आलोचना का सामना करने के लिए तैयार हूँ। मेरा स्पष्ट निर्देश (पुलिस को) है कि कानून तोड़ना नहीं है, लेकिन कानून के भीतर रहकर आप कड़ी से कड़ी कार्रवाई करते हैं तो भी असम सरकार आपकी रक्षा करेगी।”

उन्होंने आगे कहा, “2 महीने में मवेशियों की तस्करी में शामिल 504 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की फायरिंग के दौरान केवल चार घायल हुए। सभी का पुलिस ने अच्छे से अच्छा इलाज करवाय़ा है।” आलोचना को लेकर भाजपा नेता ने कहा कि सहानुभूति अच्छी बात है, लेकिन गलत सहानुभूति बहुत ही खतरनाक है।

गौरतलब है कि असम मानवाधिकार आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर इस पुलिस एनकाउंटर के मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। 7 जुलाई 2021 को राज्य मानवाधिकार आय़ोग ने राज्य सरकार से उन परिस्थितियों की जाँच करने को कहा था, जिनके कारण आरोपितों की पुलिस फायरिंग में मौत हुई या फिर वो घायल हुए था। एएचआरसी के सदस्य नबा कमल बोरा ने बताया, “समाचार रिपोर्ट्स के अनुसार सभी आरोपित हिरासत में थे और हथकड़ी में थे, इसलिए हमें यह जानने की जरूरत है कि क्या हुआ था।”

मकबूल शेरवानी: Pak हमलावरों को जिसने अकेले छकाया-भटकाया, उनकी कब्र का भारतीय सेना से जीर्णोद्धार और श्रद्धांजलि

उत्तरी कश्मीर में झेलम किनारे स्थित ओल्ड टाउन बारामुला में शहीद मकबूल शेरवानी की कब्र और स्मारक के जीर्णाेद्धार का काम गुरुवार (जुलाई 15, 2021) को पूरा हो गया। इस अवसर पर सेना ने बलिदानी को श्रद्धांजलि अर्पित की और प्रार्थना सभा का आयोजन किया।

शहीद मकबूल शेरवानी वही शख्स हैं, जिन्होंने 1947 में कश्मीर पर कब्जा करने के घुसे पाकिस्तानी सैनिकों को बारामुला से आगे बढ़ने से रोका था। वह उन्हें श्रीनगर तक पहुँचने का गलत रास्ता बताते रहे। हमलावरों ने उस समय बारामुला और उसके साथ सटे इलाकों में लूटमार मचा रखी थी, वह कश्मीरी औरतों के साथ दुराचार कर रहे थे, लोगों को कत्ल कर रहे थे। मकबूल शेरवानी को लगा था कि अगर यह श्रीनगर तक पहुँच गए तो फिर कश्मीर पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।

मकबूल शेरवानी ने हमलावरों को श्रीनगर एयरपोर्ट तक जल्द पहुँचाने का झाँसा देते हुए उन्हें गलत रास्ते पर भटकाया। इस बीच, मकबूल शेरवानी और उसके साथियों ने कई जगह सड़कों पर अवरोधक भी लगाए और पुलों को तोड़ा ताकि पाकिस्तानी हमलावरों को ज्यादा से ज्यादा समय तक श्रीनगर से दूर रखा जा सके।

प्रसिद्ध उपन्यासकार मुल्कराज आनंद मक़बूल शेरवानी से इतने प्रभावित हुए थे कि उन्होंने उसके ऊपर एक उपन्यास लिखा जिसका शीर्षक था: Death of a Hero. इस उपन्यास में एक स्थान पर मकबूल शेरवानी से एक फैक्ट्री का मालिक सय्यद मुरातिब अली कहता है कि हालात खराब हैं और कश्मीर छोड़कर भाग जाना चाहिए। इस पर मकबूल उत्तर देते हैं कि वो नहीं भागेंगे। मकबूल कहते हैं, “यदि हमें ‘मुस्लिम कट्टरपंथियों’ से उसी तरह आज़ादी चाहिए जैसे अंग्रेज़ों की गुलामी से ली थी तो हमें संघर्ष करना होगा।”

मकबूल का यह संघर्ष उसकी साँसें चलने तक चला था। जब पाकिस्तानियों को पता चला कि एक उन्हें एक किशोर ने बेवकूफ बना दिया था तब वे लौटे और मुल्कराज आनंद के इस हीरो को वास्तव में इतना मारा कि हैवानियत की भी रूह काँप गई। मारने से पहले उन्होंने मक़बूल को पाकिस्तानी फौज में शामिल होने का न्योता भी दिया था लेकिन मकबूल ने साफ इनकार कर दिया था। तब उन्होंने मक़बूल को मार कर सलीब पर टाँग दिया था ताकि देखने वाले हमेशा ख़ौफ़ में रहें। इतने पर भी खूनी खेल खेलने से मन नहीं भरा तो उसके मृत शरीर में दस पंद्रह गोलियाँ और दाग दीं। वह सात नवंबर, 1947 को वीरगति को प्राप्त हो गए।

उनके बलिदान के लगभग दो सप्ताह बाद महात्मा गाँधी ने दिल्ली में एक प्रार्थना सभा में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की थी। भारतीय सेना ने मकबूल शेरवानी के बलिदान को सलाम करते हुए ही जम्मू कश्मीर लाइट इन्फैंट्री की दूसरी वाहिनी का नाम ‘शेरवानी पलटन’ रखा है। बलिदानी मकबूल शेरवानी को ओल्ड टाउन बारामुला में दफनाया गया था। उनकी कब्र की देखभाल भारतीय सेना ही करती आई है। बलिदानी की कब्र और स्मारक का जीर्णाेद्धार कार्य भारतीय सेना ने अप्रैल माह में शुरू किया था और अब पूरा हो गया है।

‘मुझे मेरे 9 साल के बेटे से मिला दो… मेरी मुस्लिम पत्नी उसका खतना करवा देगी’ – सिख युवक की गुहार

“मैं अपने बेटे से बहुत प्यार करता हूँ। मुझे मेरे बेटे से मिला दो। वह बहुत छोटा है। वह सिर्फ 9 साल का है। वह बहुत डरा हुआ है। वह बहुत तकलीफ में है। वह उसे इस्लाम में परिवर्तित करवाना चाहते हैं। उसका खतना करवाना चाहते हैं। मेरे बेटे को बचा लीजिए, मुझे और कुछ नहीं चाहिए।”

ये शब्द हैं 36 वर्षीय पीड़ित सिख व्यक्ति के। नाम है- तरलोचन सिंह संधु (Tarlochan Singh Sandhu)। अपने बेटे को वापस पाने की गुहार लगाते हुए फफक-फफक कर रो पड़ते हैं तरलोचन सिंह। 

कहा था-धर्म कभी भी आड़े नहीं आएगा

मूल रूप से अमृतसर के रहने वाले एक सिख युवक ने 17 नवंबर 2008 को मुस्लिम युवती नगीना से शादी की थी। नगीना से वह 2007 में मिले थे। दोनों एक साथ एक ही कंपनी में पंचकुला में नौकरी करते थे। यहीं पर दोनों की मुलाकात हुई और जान-पहचान बढ़ी। फिर उन्होंने अमृतसर के गुरुद्वारा साहिब में लव मैरिज कर ली। इसके बाद उन्होंने कोर्ट मैरेज भी किया। तरलोचन सिंह बताते हैं कि नगीना ने ही जल्दी शादी करने का दबाव बनाया। नगीना ने उन्हें काफी इमोशनल ब्लैकमेल किया था, जिससे वो उसकी बातों में आ गए थे। इस दौरान दोनों के बीच इस बात को लेकर एक राय बनी थी कि उनकी जिंदगी में उन दोनों का धर्म कभी भी आड़े नहीं आएगा।

शुरुआत में तो नगीना के परिजनों ने थोड़ा-बहुत धर्म परिवर्तन के लिए बोलना शुरू किया तो वो तंग आकर दिल्ली में जाकर जॉब करने लगे। इसके बाद वह अमृतसर में नौकरी करने लगे। लेकिन पिछले 6 साल से उनके ससुराल वाले काफी परेशान कर रहे हैं। यही नहीं, पिछले डेढ़ साल से तो नगीना भी अपने अम्मी-अब्बू की साइड लेकर धर्म परिवर्तन के लिए बोलने लगी है। युवक का कहना है कि उसकी शादी को 13 साल हो गए हैं, लेकिन कभी भी पत्नी पर सिख धर्म अपनाने के लिए दबाव नहीं बनाया।

पत्नी के वादे पर चंडीगढ़ आया था

तरलोचन सिंह ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि वह चंडीगढ़ में पिछले 6 साल से किराए के मकान में रहते हैं। वह पहले अमृतसर में जॉब करते थे। नगीना वहाँ से चंडीगढ़ आने के लिए लगातार बोलने लगी। मगर तरलोचन ने यह कह कर मना कर दिया कि वहाँ पर उसके परिजन फिर से धर्म परिवर्तन के लिए बोलेंगे। इस पर नगीना ने उन्हें वादा किया कि वह और उसके मायके वाले ऐसा नहीं करेंगे। तरलोचन का कहना है कि बीबी के वादे पर वह यहाँ आ गए, लेकिन यहाँ आने के बाद फिर से वही सब शुरू हो गया और इसमें नगीना की भी मौन सहमति थी और पिछले डेढ़ साल से तो वह भी खुल कर बोलने लगी है।

पगड़ी फाड़ा, कलमा-नमाज पढ़ने के लिए कहा

अब तरलोचन के ससुराल वाले अपना घर छोड़ कर उनके किराए के घर में आकर रहने लगे हैं, ताकि वह उन पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बना सकें और उनकी गतिविधियों पर नजर रख सकें, उन्हें उनका धर्म पालन करने से रोक सकें। यह सब कुछ इतना ज्यादा बढ़ गया कि तरलोचन को अपना घर छोड़ना पड़ गया। वो उन्हें पाठ नहीं करने देते, कड़ा उतारने और बाल कटवाने के लिए कहते। तरलोचन जब भी पाठ करने बैठते तो उनसे कहा जाता कि तुम ‘कलमा’ क्यों नहीं पढ़ते, ‘नमाज’ क्यों नहीं पढ़ते। इससे तुम्हारा सारा काम हो जाएगा। दो बार तो उन्होंने उनकी पगड़ी भी फाड़ दी।

30 मई की रात को इनका अत्याचार कुछ ज्यादा ही बढ़ गया और ससुराल पक्ष के लोगों ने और भी लोगों को इकट्ठा करके इनकी पिटाई कर दी। जिसके बाद इन्होंने 112 नंबर पर कॉल करके बताया कि इनकी जान को खतरा है। पुलिस आई और दोनों पक्षों को थाने ले गई। जब पुलिस उन लोगों को पकड़ी थी, तब भी उनका साला नवाबुद्दीन माँ-बहन की गाली दे रहा था और जान से मारने की धमकी दे रहा था। जब पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया तो उन लोगों ने रास्ते में फिर से लाठी-डंडे, रॉड से पिटाई कर दी। 

एक फोन पर 150 बंदे इकट्ठे होने की मिल रही धमकी

उन्होंने किसी तरह से भाग कर अपनी जान बचाई। इसके बाद जब उन्होंने पुलिस को दोबारा काल किया तो पुलिस ने फिर पिटाई की और कहा कि उन्हें रात को बार-बार क्यों परेशान कर रहा है। जब उन्होंने पुलिस से बचाने की गुहार लगाई तो जवाब मिला कि घर चले जाओ या पार्क में सो जाओ। इसके बाद उन्होंने दो दिन (30 और 31 मई) शिवालिक पार्क में रात बिताई। इसके बाद 1 जून को अपना रूम ले लिया। यहाँ पर भी वो धमकी देते रहते हैं कि एक फोन करेंगे तो 150 बंदा इकट्ठा हो जाएगा, क्योंकि उनको पता है कि वो अमृतसर के रहने वाले हैं। यहाँ पर उनका कोई जान-पहचान का नहीं है। जहाँ पर ये पहले रह रहे थे, वहाँ पर 75 फीसदी मुस्लिम हैं।

2 जून को उन्होंने SSP ऑफिस में शिकायत दर्ज करवाई। 5 जून को SSP ऑफिस से शिकायत रिसीव करने के बाद भी मनीमाजरा थाने वालों ने उन्हें कॉल नहीं किया और कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद उन्होंने 1 जुलाई को फिर से शिकायत दर्ज करवाई। फिर भी उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने उनके साले को बुलाया, उससे लिखित में कुछ देने के लिए कहा और घर भेज दिया। इसी तरह तरलोचन सिंह को भी बुलाया और काफी देर तक बैठाने के बाद घर भेज दिया। अंततः 9 जुलाई को फिर से शिकायत दर्ज करवाई।

‘मेरा नाम बदलकर ताहिर रखना चाहते हैं’

तरलोचन सिंह ने एक वाकया शेयर करते हुए बताया,

“2019 में मैं जॉब करने के लिए दुबई गया था। इसी बीच ईद आई और उन लोगों ने मेरे बेटे को मुस्लिम रीति-रिवाज में पहनने वाली टोपी पहनाकर फोटो खींचकर मुझे भेज दी। मैंने पूछा तो बोले-ईद थी इसलिए टोपी पहनाई। इसके बाद मैंने पूछा कि क्या मैंने अपने बेटे को कभी पगड़ी पहनाई? इसके बाद मैं बहुत डर गया और 5 महीने में ही वहाँ से लौट आया। वहाँ पर मैं 2-3 साल के लिए जॉब करने के लिए गया था लेकिन डर से मैं 4-5 महीने में ही लौट आया।”

दुबई जाने का खर्च तरलोचन के माता-पिता ने ही दिया था। वह आगे बताते हैं कि अब ये लोग उनके बेटे का खतना करवाना चाहते हैं और नाम भी बदलवाना चाहते हैं। ये लोग उनका नाम भी ताहिर रखना चाहते थे।

तरलोचन सिंह ने बताया कि वो लोग उनके 9 साल के बेटे हनी सिंह का नाम बदल कर हनीफ रखना चाहते थे। वहीं नगीना की चाची सायरा हमेशा उन्हें रेप के केस में फँसाने की धमकी दिया करती थी। वह हमेशा कहती थी, “मैं अपने कपड़े फाड़ कर पुलिस स्टेशन चली जाऊँगी और बोल दूँगी कि तूने मेरे साथ छेड़छाड़ किया तो तुझे कोई नहीं बचा पाएगा। जिंदगी भर जेल में सड़ेगा। इसलिए भलाई इसी में है कि तुझसे जैसा कहा जा रहा है वैसा कर और अपनी हद में रह।”

उन्होंने बताया कि ससुरालियों ने उनके बेटे का 4-5 कड़ा उतार कर फेंक चुके हैं और पूछने पर एक ही जवाब मिलता कि गुम हो गया होगा। जब वो अपने बेटे से इस बारे में पूछते थे तो वह बताता था कि नानू उतार देते हैं, पहनने नहीं देते। जब वो अंतिम बार अपने बेटे से मिले थे तो उसने कहा था- “पापा मुझे ये लोग अच्छे नहीं लगते। मुझे यहाँ से अमृतसर ले चलो। मुझे यहाँ पर अच्छा नहीं लगता। मुझे दादू के पास जाना है।”

सिंह ने बताया कि ना तो वो लोग उन्हें उनके बेटे से मिलने देते हैं और न ही फोन पर बात करवाते हैं और जब उन्होंने यह बात SHO को बताया तो उन्होंने कहा कि 100 नंबर पर कॉल करने पर वह मिलवा देंगे। उन्होंने रविवार (जुलाई 11, 2021) को ऐसा ही किया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें उनके बेटे से 1 मिनट के लिए मिलवाया। उस समय भी उसका मामा उसका हाथ पकड़े हुए था और वह काफी डरा-सहमा हुआ था, कुछ भी बोल नहीं रहा था।

बीबी ने फर्जी शिकायत दर्ज करवाई

उन्होंने बताया कि इन लोगों के व्यवहार से परेशान होकर वह मार्च 2019 में अपने बेटे को लेकर अमृतसर चले गए थे। मगर उन्हें वहाँ से 1 महीने में ही वापस आना पड़ा क्योंकि इनकी बीबी नगीना ने महिला सेल (Women Cell) में फर्जी शिकायत दर्ज करवा दी कि वह मारपीट करते हैं। जिसके बाद उन्हें महिला सेल वालों का हर दिन कॉल जाने लगा कि वह बेटे को लेकर ऐसे कैसे जा सकते हैं, आपको जेल में डाल देंगे। इससे डर कर वह वापस आ गए। वापस आने के बाद वह बोलने लगी कि इसका नाम बदलना है और उसका कड़ा भी लेकर फेंक दिया था।

वहाँ से आने के कुछ दिन बाद यानी आज से लगभग डेढ़ साल पहले उनकी साली (नगीना की चाची की बेटी) की एक हिंदू युवक से शादी हुई थी। इसके बाद उस हिंदू युवक ने अपना नाम बदल कर इस्लामिक शादी (निकाह) भी किया। हिंदू युवक का नाम अमन कौशल था, जिसे बदल कर सलीम कर दिया गया। इसके बाद से तरलोचन सिंह को धर्म परिवर्तन के लिए और भी मजबूर किया जाने लगा कि जब वो बदल सकता है तो तुम क्यों नहीं।

‘मेरे मम्मी-पापा ने उसकी जिंदगी बचाई’

उन्होंने शुरुआती दिनों की घटना शेयर करते हुए बताया कि उनके यहाँ रिवाज है कि पहला बच्चा नानसे (ननिहाल) में ही होता है। इसलिए नगीना चंडीगढ़ गई थी। तरलोचन सिंह अमृतसर में थे, उन्होंने एक दिन पहले ही फोन कर देने के लिए कहा था, वो आ जाएँगे, लेकिन जब बच्चे का जन्म हुआ तो उन लोगों ने चार दिन तक फोन ऑफ कर लिया। उन्होंने तरलोचन को तब बताया, जब नगीना की तबियत काफी खराब हो गई। डॉक्टर ने जवाब दे दिया था। उन्होंने कह दिया था कि अब ये बचने वाली नहीं है। उस समय तरलोचन के माता-पिता ने सारी जिम्मेदारी ली और सारा खर्च भी उन्होंने ही किया। उन्होंने वहाँ के अस्पताल में इलाज करवाया। 

इसमें तकरीबन 30-40 हजार का खर्च आया। इससे जब उसकी सेहत में सुधार नहीं आया तो तरलोचन अमृतसर से एंबुलेंस लेकर आए और फिर अमृतसर के सिंघानिया अस्पताल में इलाज करवाया। इस दौरान नगीना के परिवार से कोई भी उसके साथ नहीं आया। नगीना के अब्बा ने तो यहाँ तक कह दिया था कि अगर यह नहीं बचे तो एंबुलेंस में इसकी लाश भेजवा देना, हम लोग वहाँ नहीं आएँगे।

वो कहते हैं, “मेरे मम्मी-पापा मुझसे नाराज हैं, क्योंकि मैंने इससे (नगीना) से शादी की। मेरी पत्नी उनकी बिल्कुल भी इज्जत नहीं करती। इसके बावजूद मेरे मम्मी-पापा ने इसकी जान बचाई। मगर इसके आँख में इस बात का कोई पानी नहीं है। इसने तो शुक्रिया अदा भी नहीं किया उनका। उल्टे उन्हें गालियाँ देती हैं और मुझे भी उकसाती है कि मैं हाथ उठाऊँ। मेरे मम्मी-पापा ने ऐसी क्या गलती कर दी कि वो इतनी गंदी-गंदी गालियाँ देती है। वो लोग तो यहाँ आते भी नहीं हैं। एक बार बस आए थे… वो भी मेरे बेटे को देखने। उसी दिन वो वापस अमृतसर भी चले गए।”

बीबी समेत 11 ससुरालियों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज

तरलोचन सिंह ने चंडीगढ़ सेक्टर 9 में SSP के समक्ष शिकायत दर्ज करवाई है। इसमें उन्होंने 11 लोगों को नामित किया है। उन्होंने अपनी बीबी नगीना, ससुर महताबुद्दीन, सास रहीसा, साले नवाबुद्दीन और कमालुद्दीन के अलावा नगीना के चाचा राजू, चाची सायरा, चचेरे भाई राजा, समर के अलावा अमन (धर्मांतरण के बाद अब सलीम) और मुस्कान के खिलाफ शिकायत दायर करवाई है और साथ ही केस भी दर्ज करवाया है, जिस पर 20 जुलाई को सुनवाई होनी है।

तरलोचन सिंह अपने छोटे से बच्चे को लेकर काफी चिंतिंत हैं। वो किसी भी हालत में उसे वहाँ से निकालना चाहते हैं। उन्हें डर है कि वो उनका भी धर्मांतरण करवा देंगे। जब से वो अपने बेटे से मिल कर आए हैं, उसकी हालत देख कर उनके मुँह के अंदर ठीक से खाना भी नहीं जा रहा। वो बताते हैं कि मनीमाजरा के बीजेपी युवा मोर्चा के प्रमुख ने उनका काफी सपोर्ट किया है। उनकी बस एक ही गुहार है कि उनका बेटा उनके पास आ जाए।  

वेनेश्वर महादेव मंदिर: महमूद गजनवी का आक्रमण, दो भागों में विभक्त शिवलिंग और हिंदू राजकुमारी की रक्षा

सोमनाथ के प्रभास पाटन क्षेत्र में स्थित है वेनेश्वर महादेव मंदिर, जहाँ इस्लामिक आक्रांता महमूद गजनवी से अपनी अनन्य भक्त की रक्षा करने के लिए भगवान शिव ने उसे अपने भीतर समाहित कर लिया था और जिसके नाम से ही महादेव वेनेश्वर कहलाए। वेनेश्वर महादेव मंदिर में आज भी इस अद्भुत घटना के प्रमाण मिलते हैं क्योंकि यहाँ स्थापित शिवलिंग को दो टुकड़ों में विभाजित देखा जा सकता है।

मंदिर का इतिहास

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम पूज्य सोमनाथ भी इसी प्रभास पाटन क्षेत्र में स्थित हैं। यह स्थान पौराणिक महत्व का है और यहाँ स्थित हैं कई ऐसे मंदिर, जिनका कोई न कोई पौराणिक इतिहास अवश्य रहा है। यह स्थान कई बार इस्लामिक आक्रान्ताओं का शिकार भी बना। वेनेश्वर महादेव मंदिर में भी कई बार निर्माण कार्य कराए गए और मंदिर का जीर्णोद्धार भी हुआ, इसलिए इस मंदिर के निर्माण के बारे पुख्ता जानकारी प्राप्त नहीं है। सन् 1025 में गजनी के महमूद के आक्रमण के समय में यह मंदिर मौजूद था, ऐसे में यह अंदाजा लगाया जाता है कि इस मंदिर का इतिहास 1,000 साल से भी अधिक पुराना है।

महमूद गजनवी से राजकुमारी वेनी की रक्षा

सन् 1025 का समय था। महमूद गजनवी सोमनाथ को लूटने के इरादे से भारत आया हुआ था। सोमनाथ के वैभव के कारण ही यह क्षेत्र अक्सर इस्लामिक आक्रान्ताओं के निशाने पर रहा। जब महमूद गजनवी सोमनाथ को लूटने के लिए आगे बढ़ा तो उसे सोमनाथ के स्थानीय राजपूत शासक से कड़ी टक्कर मिली। राजपूत शासक किसी भी हालत में समर्पण करने को तैयार नहीं थे। सोमनाथ की सुरक्षा में जुटे शासक के साहस के आगे महमूद गजनवी बेबस नजर आ रहा था और उसे सोमनाथ को लूटने का अपना स्वप्न भी अधूरा लगने लगा। ऐसे में उसने अपनी वही कट्टर इस्लामिक प्रवृत्ति अपनाई।

महमूद गजनवी ने राजपूत शासक की बेटी राजकुमारी वेनी के अपहरण की योजना बनाई। महमूद गजनवी की योजना थी कि राजकुमारी का अपहरण करके राजा पर दबाव बनाया जाए। राजकुमारी वेनी एक प्रखर शिवभक्त मानी जाती थीं और प्रभास पाटन किले के बाहर स्थित भगवान शिव के मंदिर में रोज उनकी आराधना करने जाया करती थीं। जब महमूद गजनवी और उसकी इस्लामिक फौज ने राजकुमारी वेनी का अपहरण करने की कोशिश की, तब वेनी ने खुद को उसी मंदिर के अंदर बंद कर लिया और भगवान शिव से अपनी रक्षा करने की प्रार्थना की। कहा जाता है कि उस दिन भगवान शिव ने वो चमत्कार दिखाया, जो संभवतः कभी भी देखा नहीं गया था। राजकुमारी वेनी की प्रार्थना सुनने के बाद मंदिर में स्थापित शिवलिंग दो भागों में विभक्त हो गया और उसने राजकुमारी वेनी को अपने अंदर समाहित कर लिया।

मंदिर में स्थापित शिवलिंग (फोटो : स्पीकिंग ट्री)

राजकुमारी वेनी से जुड़ा हुआ यह इतिहास महान साहित्यकार केएम मुंशी के द्वारा लिखे गए एक उपन्यास में वर्णित है। उसी दिन से इस मंदिर में भगवान शिव, अपनी अनन्य भक्त के नाम से वेनेश्वर महादेव कहलाए। भगवान शिव ने न केवल अपनी भक्त की रक्षा की बल्कि उसे अमर भी कर दिया। इस मंदिर के शिवलिंग में वेनी की निशानियाँ आज भी देखी जा सकती हैं।

कैसे पहुँचें?

पौराणिक रूप से देव पाटन कहा जाने वाला प्रभास पाटन क्षेत्र गिर सोमनाथ जिले के वीरावल में स्थित है। यहाँ से नजदीक स्थित हवाईअड्डे दीव और राजकोट में हैं, जहाँ से मुंबई समेत कई अन्य शहरों के लिए उड़ाने उपलब्ध हैं। वेनेश्वर महादेव मंदिर से इन दोनों हवाईअड्डों की दूरी क्रमशः 86 किलोमीटर (किमी) और 199 किमी है। इसके अलावा वीरावल शहर और सोमनाथ में रेलवे स्टेशन हैं, जहाँ से गुजरात के कई शहरों से रेलमार्ग के द्वारा पहुँचा जा सकता है। खुद प्रभास पाटन क्षेत्र का रेलवे स्टेशन अपनी मंदिर जैसी संरचना के लिए एक दर्शनीय स्थल माना जाता है।

रेल और वायु मार्ग के अलावा वीरावल और सोमनाथ गुजरात के लगभग सभी बड़े शहरों से सड़क मार्ग से जुड़े हुए हैं। यहाँ से वेनेश्वर महादेव मंदिर पहुँचना बहुत आसान है। प्रभास पाटन मुख्यालय से मंदिर की दूरी मात्र आधा किमी है, जबकि सोमनाथ मंदिर से वेनेश्वर महादेव मंदिर की दूरी लगभग 1 किमी है। वीरावल से मंदिर 8 किमी की दूरी पर स्थित है।

हरियाणा: डिप्टी स्पीकर पर हमले में 100 से अधिक किसान प्रदर्शनकारियों पर राजद्रोह का केस, 5 गिरफ्तार

कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के बीच रिपोर्ट आई है कि हरियाणा के डिप्टी स्पीकर और भाजपा नेता रणबीर गंगवा पर हमला करने और उनके सरकारी वहाँ को नुकसान पहुँचाने के आरोप में करीब 100 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एफआईआर में किसान नेताओं हरचरन सिंह और प्रह्लाद सिंह का नाम भी है। हरियाणा के डिप्टी स्पीकर के ऊपर यह हमला 11 जुलाई 2021 को सिरसा जिले में हुआ था। हमले के बाद ही आईपीसी की धारा 124-A (राजद्रोह) और 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया गया।

सिरसा के पुलिस अधीक्षक अर्पित जैन ने मीडिया को बताया कि घटना का वीडियो देखने के बाद मिले सबूतों के आधार पर 5 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि घटना में शामिल बाकी लोगों की भी पहचान की जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हमले के समय हरियाणा के डिप्टी स्पीकर कार में ही मौजूद थे और किसी तरह वह बचने में सफल रहे। यह घटना तब हुई गंगवा, भाजपा की कार्यसमिति की बैठक में शामिल होने के लिए सिरसा गए हुए थे। बैठक खत्म होने के बाद गंगवा अपनी गाड़ी में बैठकर वहाँ से बाहर निकले, लेकिन भारी सुरक्षा के बाद भी प्रदर्शकारियों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया और हमला कर दिया। पुलिस ने बताया कि गंगवा की गाड़ी पर पत्थर भी बरसाए गए।

पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा, जिसके बाद गंगवा की गाड़ी वहाँ से निकल पाई। इस घटना में प्रदर्शनकारियों को रोकने में असमर्थ रहने पर सिविल लाइन थाना के एसएचओ विक्रम सिंह को निलंबित कर दिया गया है। डेप्युटी स्पीकर रणबीर गंगवा ने कहा कि जिन्होंने पथराव किया वो किसान नहीं कहे जा सकते। हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि प्रदर्शनकारी किसान दिन-ब-दिन हिंसक होते जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एक लोकतान्त्रिक और शांतिप्रिय देश में हिंसक प्रदर्शन कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

हालाँकि, संयुक्त किसान मोर्चा ने आरोपों को गलत बताया है। किसान आंदोलनों का नेतृत्व करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि किसान नेताओं, हरचरन सिंह और प्रह्लाद सिंह समेत 100 किसानों के खिलाफ राजद्रोह जैसे गंभीर धारा लगाकर गलत मामले में केस दर्ज किया गया है, क्योंकि वो सिरसा में हरियाणा के डिप्टी स्पीकर के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।

बढ़े प्रदर्शनकारियों के हमले:

भले ही किसान नेता आरोपों को गलत और बेबुनियाद बता रहे हों, लेकिन पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। महीने के शुरू में ही ऑपइंडिया ने रिपोर्ट दी थी कि कैसे प्रदर्शनकारी किसानों ने पंजाब के बरनाला जिले के धनौला गाँव में भाजपा नेता हरजीत सिंह ग्रेवाल की 1.5 एकड़ जमीन में लगी धान की फसल को नष्ट कर दिया था। इसमें महिलाएँ भी शामिल थीं। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे किसानों ने फसल नष्ट करते हुए और भाजपा विरोधी नारा लगाते हुए वीडियो भी बनाया था।

किसान प्रदर्शनकारियों की हिंसक गतिविधियों के संबंध में यह भी आरोप लगता रहा है कि इन्हें पंजाब में पुलिस और राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार का पूरा समर्थन प्राप्त है। इसी तरह मई में हरियाणा के हिसार में भी किसान प्रदर्शनकारी हिंसा पर उतारू हो गए थे और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर Covid-19 अस्पताल के उद्घाटन के कार्यक्रम को बाधित कर दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस जगह कार्यक्रम होना था वहाँ अचानक भारी भीड़ इकट्ठा हो गई थी और पुलिस के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़प भी हुई थी, जिसमें डीएसपी अभिमन्यु गंभीर रूप से घायल हो गए थे। संयुक्त किसान मोर्चा ने भी इस प्रदर्शन का समर्थन किया था।

टीवी वाले ‘चाचा चौधरी’ की पत्नी ने कर्ज और गहने गिरवी रख काटी जिंदगी, कहा- 5 महीने नहीं मिला गुजारा भत्ता

टीवी पर ‘चाचा चौधरी’ का किरदार निभाकर मशहूर हुए एक्टर रघुबीर यादव पर उनकी पत्नी ने एलीमनी रकम (गुजारा भत्ता) नहीं देने का आरोप लगाया है। एक्टर की पत्नी पूर्णिमा यादव ने बताया है कि पिछले साल उन्हें 5 महीने तक गुजारा भत्ता नहीं मिला। इसके कारण उन्हें काफी अपमान का सामना करना पड़ा और वह अपने गहने गिरवी रखकर, पैसे उधार लेकर जीवन जीने को मजबूर हुईं।

इंटरटेनमेंट टाइम्स से बात करते हुए मोनिका ने अपने पति रघुबीर यादव पर उत्पीड़न का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रघुबीर उनको इस तरह समय से पैसे न देकर प्रताड़ित करते हैं। मोनिका कहती हैं,

“पिछले साल ऐसा वक्त आया कि मुझे 5 माह पैसे नहीं दिए गए। इसकी कीमत मुझे मेरे यारी रोड पर स्थित घर से चुकानी पड़ी। मैं किराया नहीं भर सकती थी और अपमान झेल रही थी। उसके बाद से मैं लोन पर हूँ। मैंने अपने गहने भी गिरवी रखे हैं। इस साल भी मुझे 4 महीने पैसे नहीं मिले। कोर्ट की तारीख से 2 माह पहले मुझको 80 हजार रुपए दिए गए थे जो कि दो माह के लिए थे।”

इस मामले में रघुबीर यादव की वकील शालिनी देवी ने कहा कि दोनों के बीच के मामले को घटिया बनाने की आवश्यकता नहीं है। पूर्णिमा ‘अत्यधिक राशि’ माँग रही है, नहीं तो मामला सुलझा लिया गया होता। वकील ने कहा, “रघुबीर 71 साल के हैं और पूर्णिमा को समझना चाहिए।”

वहीं, पूर्णिमा की वकील इशिका तोलानी ने पलटवार करते हुए कहा कि रघुबीर यादव अपने करियर में अच्छा कर रहे हैं और उनका यह रुख कि वह पूर्णिमा की माँग की गई राशि का भुगतान करने की स्थिति में नहीं है, बेतुका है। वह कहती हैं, “मेरे मुवक्किल को ऐसी कठिन जिंदगी जीकर खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। रघुबीर को उनकी उम्मीदों के मुताबिक भुगतान करना चाहिए। पूर्णिमा ने अपने बेटे को माता और पिता दोनों के रूप में देखा है।”

उल्लेखनीय है कि पूर्णिमा यादव और रघुबीर यादव ने सन 1988 में शादी की थी और साल 1995 से दोनों अलग रह रहे हैं। इससे पहले मोनिका को गुजारा भत्ता न देने का मामला साल 2012 में प्रकाश में आया था। तब मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट मोनिका सरोहा ने रघुबीर यादव की संपत्ति कुर्क करने के आदेश दे दिए थे। यहाँ बता दें कि रघुबीर यादव से अलग होने के बाद पत्‍‌नी पूर्णिमा यादव व बेटे अंचल यादव ने गुजारा भत्ता के लिए वर्ष 2006 में अदालत का दरवाजा खटखटाया था। मगर अदालत ने इनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए 5 अक्टूबर 2011 को की और रघुबीर यादव को 11 लाख रुपए का गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था। साथ ही 40 हजार रुपए मासिक गुजारा भत्ता देने का आदेश भी दिया था। अदालत के आदेश के बाद रघुबीर यादव ने राहत माँगते हुए पुनर्विचार याचिका भी डाली थी, लेकिन कोर्ट ने इस पर सुनवाई नहीं की और समय से गुजारा भत्ता न दिए जाने के कारण उनकी संपत्ति कुर्क करवा ली गई थी।

15 से बड़ी लड़की-45 से कम की हो बेवा, लिस्ट जारी करें इमाम और मौलवी: तालिबान का फरमान, लड़ाकों का कराएगा निकाह

अमेरिकी सैनिकों की वापसी और तालिबान के बढ़ते प्रभाव के साथ अफगानिस्तान में फिर से इस्लामी कट्टरपंथ का वही दौर लौट आया है। तालिबान ने देश के 85 फीसदी हिस्से पर कब्जे का दावा किया है। अब उसने इन इलाकों के लिए मजहबी नियम-कायदे भी तय कर दिए हैं। तालिबान ने दावा किया है कि उसके राज में मानवाधिकारों की सुरक्षा की जाएगी। खासकर महिलाओं की, लेकिन इस्लामिक मूल्यों के हिसाब से और उसका पालन नहीं करने पर कड़ी सजा भी दी जाएगी।

उत्तरी अफगानिस्तान में कब्जा करने के बाद तालिबान ने स्थानीय इमामों को पत्र लिखकर नियम-कायदे लागू करने की बात कही है। 25 वर्षीय सेफातुल्लाह ने बताया कि कलफगान में कहा गया है कि बिना पुरुषों के महिलाएँ बाजार नहीं जा सकती हैं। पुरुषों को भी अपनी दाढ़ी हटाने की इजाजत नहीं है। ऐसा ही कुछ आदेश शीर खान बंदार में भी दिया गया है। एक स्थानीय फैक्ट्री में काम करने वाली सजेदा ने एएफपी को दिए गए इंटरव्यू में बताया कि तालिबान ने महिलाओं को घर से बाहर न निकलने का आदेश दिया है। ऐसे में उन महिलाओं पर संकट आ गया है जो कढ़ाई, सिलाई और जूते बनाने का काम करती हैं। तालिबान के शहर में आने से पहले ही सजेदा भागकर कुंडुज आ गई थीं, क्योंकि उनके जैसे लोगों के लिए तालिबान के शासन में जीना संभव नहीं हो पाएगा।

मुजाहिदों के साथ निकाह करो

तालिबान के सांस्कृतिक आयोग के नाम पर ग्रामीणों को चिट्ठी लिखकर कहा गया है कि वो अपनी बेटियों और बेवा (विधवा) का निकाह तालिबानी मुजाहिदों के साथ करें। पत्र में कहा गया है कि उनके कब्जे वाले सभी क्षेत्रों के इमामों और मौलवियों को आदेशित किया जाता है कि वे 15 साल से अधिक उम्र की लड़कियों और 45 वर्ष से कम उम्र की बेवा की सूची जारी करें, जिनका निकाह तालिबानी लड़ाकों के साथ किया जा सके।

तालिबानी आतंकियों ने धूम्रपान (स्मोकिंग) पर भी प्रतिबंध लगाया है। कहा है कि अगर कोई भी इसका उल्लंघन करेगा तो उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी। एएफपी से बातचीत करते हुए 32 वर्षीय नजीर मोहम्मद ने बताया कि सभी पुरुषों को कहा गया है कि वे पगड़ी पहनें और किसी भी पुरुष को अपनी दाढ़ी कटवाने की इजाजत नहीं है। इसके अलावा, रात में किसी के भी घर से निकलने पर रोक लगाई गई है।

ताजिकिस्तान सीमा पर स्थित यवन जिले में मस्जिद में लोगों को इकट्ठा कर यह फैसला सुनाया गया। लोगों को हरा या लाल रंग के कपड़े पहनने से भी मना किया गया है, क्योंकि ये दोनों रंग अफगानी झंडे के रंग हैं। साथ ही लड़कियों को भी स्कूल जाने से रोकने की बात भी कही गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कहा गया है कि 6वीं कक्षा से ऊपर लड़कियों को स्कूल जाने की कोई इजाजत नहीं है।

हालाँकि, तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने तालिबान के द्वारा जारी किए गए आदेशों की खबरों को निराधार बताया है और कहा है कि कई फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से तालिबान के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है।

तालिबान का शासन

दरअसल, साल 1996 से 2001 तक तालिबान ने अफगानिस्तान पर कट्टरपंथी विचारधारा के तहत शासन किया था। इस दौरान महिलाओं और लड़कियों को कई तरह के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता था। तालिबान के बनाए नियमों को तोड़ने की सजा बहुत बुरी है, जिसमें पत्थर मारकर मौत की सजा भी शामिल है। तालिबान ने अपने शासनकाल के दौरान टीवी देखने पर भी प्रतिबंध लगाया था, ताकि जनता न तो खुद को शिक्षित कर पाए और न ही किसी से संपर्क स्थापित कर पाए। तालिबान की आलोचना भी गंभीर अपराध थी, जिसकी सजा मौत के तौर पर भी मिलती थी।

UP में फिर से बजा सकेंगे DJ: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद HC का फैसला पलटा, साथ में दी है हिदायत भी

सुप्रीम कोर्ट (SC) ने गुरुवार (जुलाई 15, 2021) को इलाहाबाद हाई कोर्ट के साल 2019 के एक फैसले को न्यायोचित न करार देते हुए उत्तर प्रदेश (यूपी) में डीजे (DJ) पर लगे पूर्ण प्रतिबंध को हटा दिया। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए हिदायत दी कि डीजे बजाते समय ध्वनि प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन किया जाए।

जानकारी के मुताबिक, इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में कई लोगों ने चुनौती दी थी। ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय में जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस विनीत सरन ने उनकी याचिका पर सुनवाई कर हाई कोर्ट के आदेश को रद्द किया और कहा कि आवश्यक लाइसेंस प्राप्त करने के बाद डीजे सेवाएँ यूपी में फिर से शुरू हो सकती हैं।  

इस सुनवाई में प्रतिबंध हटाने की फैरवी करने वाले वकील दुष्यंत पराशर ने तर्क दिया कि राज्य में डीजे ऑपरेटर शादी, जन्मदिन पार्टी और खुशी के अन्य मौकों पर अपनी सेवाएँ देकर घर चलाते हैं। ऐसे में हाई कोर्ट के आदेश से उनकी आजीविका पर संकट आ गया है। याचिका में इस बात का जिक्र किया गया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश डीजे के पेशे से जुड़े लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और इससे वह बेरोजगार हुए हैं।

इसके अलावा इसमें बताया गया कि साल 2019 में याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय के समक्ष कार्यवाही में अपने पड़ोस में लाउडस्पीकर के अंधाधुंध उपयोग की शिकायत की थी, और इसके बाद उच्च न्यायालय ने पूरे राज्य के लिए एक सामान्य निर्देश पारित करने में गलती की। आवेदकों के मुताबिक, उस समय याचिकाकर्ता ने सिर्फ एक इलाके में हो रहे शोर का मामला सामने रखा था। मगर हाई कोर्ट ने पूरे राज्य के लिए आदेश दे दिया। ऐसा करते समय प्रभावित पक्षों को सुना भी नहीं गया।

आज इसी संबंध में SC ने सभी डीजे संचालकों को राहत दी और यूपी से डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध हटाते हुए निर्देश जारी किए कि संबंधित अधिकारियों को डीजे संचालकों की तरफ से (लाइसेंस के लिए) दाखिल प्रार्थनापत्र स्वीकार करने होंगे। अगर वे कानून के लिहाज से सारे मानक पूरे करते हैं तो उन्हें अपनी सेवाएँ संचालित करने की इजाजत देनी होगी।

बता दें कि साल 2019 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में डीजे के उपयोग पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया था। कोर्ट ने शादी समारोहों में डीजे बजने से पैदा होने वाले शोर को अप्रिय और बेहूदा स्तर का बताते हुए इन्हें पूरी तरह प्रतिबंधित करने का आदेश जारी किया था। इसी के बाद इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों ने शीर्ष अदालत में अपनी याचिका दी और फैसले को अनुच्छेद 19 का उल्लंघन बताया था क्योंकि फैसले में न्यूनतम स्तर भी डीजे संचालन की अनुमति नहीं थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस फैसले से वह बेरोजगार हो गए हैं।