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लॉकडाउन में लिए पैसे, वापस माँगे तो 72 साल की महिला के किए टुकड़े-टुकड़े: बैग में भर शव नाले में फेंका

दिल्ली पुलिस ने एक बुजुर्ग महिला के गायब होने की गुत्थी सुलझाते हुए उनकी हत्या का चौंकाने वाला खुलासा किया है। महिला की पहचान 72 वर्षीय कविता ग्रोवर के तौर पर हुई है। वह द्वारका के मोहन गार्डेन में रहती थीं। उनकी हत्या उसी दंपती ने की थी, जिसकी लॉकडाउन के दौरान उन्होंने मदद की। आरोपित दंपती को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपितों ने बुजुर्ग महिला की हत्या के बाद शव के करीब 15 से 18 टुकड़े कर दिए और उसे तीन बैग में डालकर नजफगढ़ नाले में फेंक दिया था। 

पुलिस ने आरोपित दंपती को यूपी के बरेली से गिरफ्तार किया है। आरोपितों की पहचान रानीखेत, उत्तराखंड निवासी कामिनी आर्य उर्फ तन्नू और उसके पति अनिल आर्य के रूप में हुई है। आरोपितों की निशानदेही पर नाले से शव के अवेशष, वारदात में इस्तेमाल चाकू और बुजुर्ग महिला कविता ग्रोवर (72) का बैग, बुजुर्ग की आईडी, चेकबुक व अन्य कागजात भी बरामद कर लिए हैं। तीन दिन की रिमांड पर लेकर पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है। 

जानकारी के मुताबिक आरोपित पति-पत्नी ने बुजुर्ग महिला से एक लाख रुपए उधार लिए थे। अब वह अपने पैसे वापस माँग रही थीं। इससे नाराज होकर दंपती ने उनका कत्ल कर दिया। हत्या के बाद उन्होंने बुजुर्ग महिला का वह बैग भी ले लिया, जिसमें चेक बुक, आईडी और अन्य कागजात थे। साथ ही कुछ जूलरी और मोबाइल फोन भी ले लिया। आरोपितों ने लूटी हुई ज्वेलरी गिरवी रख 70 हजार रुपए लिए। इन पैसों से कामिनी ने पहले से गिरवी रखे अपने गहने छुड़ाए। पुलिस के मुताबिक आरोपित दंपती ने ज्वैलरी के बदले एक फर्म से कर्ज लिया था।

दिल्ली के मोहन गार्डेन में यह वारदात 30 जून को हुई थी। जब बुजुर्ग महिला ने आरोपित दंपति से उधार का पैसा माँगा तो आर्य ने महिला को एक मुक्का मारा जिससे वह बेहोश हो गईं। इसके बाद नायलॉन की रस्सी से महिला का गला दबा दिया। रसोई के चाकू से महिला के टुकड़े किए।

लाश के टुकड़े करने के बाद आरोपितों ने 3 बैग में उन्हें डाला और नजफगढ़ के नाले में फेंक दिया। वारदात अंजाम देने के बाद 3 जुलाई तक अपने घर में रहे, ताकि किसी को कोई शक न हो। इसके बाद दोनों उत्तराखंड चले गए थे। जब महिला के परिजन वापस लौटे तो देखा कि वह घर पर नहीं हैं। फिर पुलिस में मिसिंग कंप्लेन दर्ज कराई गई। पुलिस ने खोजबीन शुरू की। आरोपितों ने अपराध के निशान को मिटाने के लिए घर की कई बार अच्छी तरह से सफाई की थी। लेकिन, वे फ्रिज पर खून की कुछ बूँदों के छींटे नहीं देख पाए, जिससे पुलिस को सुराग मिल गया। 

पुलिस ने टीम बनाकर महिला को ढूँढना शुरू किया। पुलिस टीम ने टेक्निकल सर्विलांस और सीसीटीवी से पड़ताल की। जाँच के दौरान पुलिस को एक जुलाई को दंपती बुजुर्ग महिला के घर के पास से तीन भारी बैग लेकर निकलते दिखे। पुलिस बुजुर्ग महिला के घर से दो गली छोड़कर रहने वाले दंपती के घर पहुँची तो वहाँ ताला लगा मिला।

जाँच के दौरान पता चला कि वे एक ऑटो से फरार हुए थे। पुलिस ने ऑटो वाले को ढूँढ निकाला। ऑटो चालक ने बताया कि दंपती उनके रेगुलर ग्राहक हैं। एक जुलाई को उन्होंने उसे अपने घर बुलाया था। बैग से खून निकल रहा था। पूछने पर बताया कि इसमें चिकन है। एक दोस्त के फार्म हाउस में पार्टी के लिए चिकन ले जाना है। दंपति को नजफगढ़ नाला रोड पर छोड़कर ऑटो वाला वापस आ गया। 

पुलिस को आरोपितों की आखिरी लोकेशन उत्तराखंड के रानीखेत की मिली। पुलिस जब वहाँ पहुँची तो आरोपित लगातार लोकेशन बदलते रहे। आखिरकार पुलिस को उनकी लोकेशन बरेली में मिली। जहाँ दोनों ने अपना फोन स्विच ऑफ कर दिया था। एक टोल नाके पर जिस कार से आरोपित सफर कर रहे थे उसका नम्बर सीसीटीवी से मिला। इसके बाद पुलिस उस नंबर पर रजिस्टर्ड पते पर पहुँची जहाँ दोनों आरोपित छुपे हुए थे। पुलिस ने बरेली पहुँचकर दोनों पति-पत्नी को गिरफ्तार कर लिया। एक अधिकारी ने बताया कि पीड़ित के सिर और शरीर के कुछ भाग मिले हैं, लेकिन धड़ अभी भी गायब है। मिले हुए टुकड़े भी गल गए हैं, उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है, जल्द ही डिटेल की पुष्टि होगी।

असली नाम: लियाकत खान, फेसबुक प्रोफाइल में ‘रोहिणी’: दोस्ती और प्यार का झाँसा दे 50 को लूटा

फेसबुक पर हनीट्रैप के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बनाने के मामले में छत्तीसगढ़ की रायपुर पुलिस ने राजस्थान के अलवर से लियाकत खान को गिरफ्तार किया है। आरोपित फेसबुक के जरिए पहले लड़कियों की फेक आईडी बनाकर दोस्ती करता था और उसके बाद व्हाट्सएप पर अश्लील वीडियो रिकॉर्ड कर लोगों को ब्लैकमेल करता था।

फिलहाल, रायपुर पुलिस उसे अलवर से छत्तीसगढ़ लेकर आई है, जहाँ उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। हनीट्रैप और साइबर ठगी के इस मामले में रायपुर के आरंग थाने में एक पीड़ित युवक ने शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस को आपबीती में उसने बताया था कि 24 जून 2021 को उसके फेसबुक आई़डी पर रोहिणी शर्मा नाम की एक लड़की की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई थी। लड़की की रिक्वेस्ट आने पर उसने एक्सेप्ट कर लिया।

पुलिस को उसने बताया कि दोनों के बीच बातचीत होने लगी। कुछ दिन तक फेसबुक पर बात करने के बाद रोहिणी (लियाकत खान) ने पीड़ित युवक से व्हाट्सएप पर बात करने की इच्छा जताई, उसके बाद दोनों व्हाट्सएप पर कनेक्ट हो गए। बाद में रोहिनी (फेक आईडी) ने उसे प्यार के जाल में फँसा लिया।

इस बीच 28 जून 2021 को रोहिणी ने पीड़ित को व्हाट्सएप पर अश्लील वीडियो कॉल की। इस दौरान उसने युवक के निजी पलों को रिकॉर्ड कर लिया। इसके दो दिन बाद लियाकत ने पीड़ित युवक को उसी की अश्लील क्लिप भेज दिया और उसे ब्लैकमेल करने लगा। बदनामी के डर से युवक ने रोहिणी (लियाकत खान) के खाते में 37 हजार रुपए जमा कर दिया, लेकिन जब दोबारा उसने पैसा नहीं दिया तो आरोपित ने उस क्लिप को उसके दोस्तों के पास भेज दिया।

इसके बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत की। पुलिस ने छानबीन की तो पता चला कि आरोपित राजस्थान के अलवर का है। इसके बाद पुलिस की चार सदस्यीय टीम राजस्थान गई और उसे गिरफ्तार कर रायपुर ले आई। राजस्थान में लियाकत खान अपनी पहचान को छुपाकर रहता था। उसने मोबाइल और बैंक खाते तक फर्जी दस्तावेज से बनवाए थे। उसके पास से ओडिशा और असम के मोबाइल नंबर मिले हैं।

आरोपित ने पुलिस के सामने अपना गुनाह भी कबूल कर लिया है। उसने बताया कि वह इसी तरह से अब तक 50 से अधिक लोगों से लाखों रुपये लूट चुका है। पुलिस ने आरोपित के पास से दो मोबाइल फोन, 3 सिम कार्ड, एटीएम और नकद रुपये बरामद किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, लियाकत खान ने जिस तरीके से ठगी की है वह पैटर्न मेवाती गैंग का है। राजस्थान, हरियाणा औऱ उत्तर प्रदेश में ये गैंग इसी तरीके से लोगों को ठगी का शिकार बनाता है। इसलिए पुलिस को लियाकत के मेवाती गैंग से जुड़े होने का शक भी है।

तमिलनाडु के कोयंबटूर में 7 मंदिरों पर चला बुलडोजर: देखिए Video, झील का कायाकल्प करने के नाम पर कार्रवाई

तमिलनाडु के कोयंबटूर में निगम ने मंगलवार (जुलाई 13, 2021) को शहर के मुथन्ननकुलम तालाब के उत्तरी बाँध पर मौजूद 7 मंदिरों को विकास के नाम पर ध्वस्त कर दिया। प्रशासन ने कथिततौर पर यह फैसला स्मार्ट सिटीज मिशन के तहत झील के कायाकल्प और विकास के लिए लिया।

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, निगम अधिकारियों ने अम्मान कोविल, बन्नारी अम्मान कोविल, अंगला परमेश्वरी, करुपरायण कोविल, मुनीस्वरन कोविल और कुछ अन्य मंदिरों को ध्वस्त करने के लिए अर्थमूवर और भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया।

प्रशासन ने इस कदम को उठाने से पहले साल 2020 में झील के आस-पास अतिक्रमण का हवाला देते हुए अपनी कार्रवाई की थी। उस समय करीब 2,400 परिवारों को वहाँ से हटाकर उनके घर ध्वस्त किए गए थे। इन सभी लोगों को स्लम क्लीयरेंस बोर्ड परियोजनाओं में वैकल्पिक आवास प्रदान किया गया था।

मीडिया खबरों की मानें तो निगम सूत्रों ने बताया है कि मुथन्ननकुलम बाँध को सभी अतिक्रमणों से मुक्त कराने के लिए प्रशासन ने मंदिरों पर कार्रवाई की। इससे पहले कानून व्यवस्था को देखते हुए आस-पास के इलाकों से लोगों को स्थानांतरित कर दिया गया था।

बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात था जिसका काम विरोध करने वाले लोगों पर एक्शन लेना था। कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस दौरान 150 लोगों को विरोध करने पर हिरासत में लिया गया, कुछ का कहना है कि 250 लोगों को पकड़ा गया।

उल्लेखनीय है कि हिंदू मंदिरों के टूटने से हिंदूवादी संगठनों में रोष है। इनके एक नेता केसी धनपाल ने कहा, “जब हम निगम से मूर्तियों की पूजा के लिए एक वैकल्पिक स्थल उपलब्ध कराने की माँग कर रहे थे, उसी दौरान सुबह छह बजे कुमारसामी नगर निगम ने मंदिरों को गिराना शुरू कर दिया।”

वहीं, इस मामले के प्रकाश में आने के बाद नेटीजन्स सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा दिखा रहे हैं। एक सोशल मीडिया यूजर ने दावा किया कि ध्वस्त किए गए मंदिरों में से एक मंदिर सौ साल से भी ज्यादा पुराना था। एक अन्य यूजर ने तमिलनाडु में सरकारी और निजी पार्टियों द्वारा अतिक्रमण की गई 5 लाख एकड़ से अधिक मंदिर भूमि की स्थिति पर सवाल उठाया है।

एक यूजर ने कहा ने बताया कि इसी तरह कुछ माह पहले शिवमंदिर पर बुलडोजर चला दिया गया था वो भी ये कहकर कि वो रेलवे ट्रैक के पास है, इसका क्या मतलब हुआ। सिर्फ 5-6 लोग प्रदर्शन करने आए।

इसके अलावा कुछ लोग रेलवे स्टेशन के पास बने मजार की तस्वीरें शेयर करके भी प्रशासन से सवाल कर रहे हैं। उनका पूछना है कि आखिर इनपर कार्रवाई क्यों नहीं होती। लोगों का दावा है कि प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर बीच में एक मजाक बनी हुई है।

6 राज्यों के CM, पीएम मोदी का 4 ‘T’ मंत्र: कोरोना की तीसरी लहर से बचने के लिए ग्रामीण इलाकों पर फोकस करने को कहा

कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (16 जुलाई 2021) को तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, केरल और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों के साथ वर्चुअल मीटिंग की। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों को कोरोना की तीसरी लहर को लेकर आगाह किया। मीटिंग के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी उपस्थित रहे।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने कहा कि हम सभी कोरोना की संभावित तीसरी लहर को लेकर बात कर रहे हैं। बीते कुछ दिनों के दौरान हम उस बिंदु पर हैं जहां COVID की संभावित तीसरी लहर के बारे में बात हो रही है। पिछले कुछ दिनों में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, केरल और ओडिशा समेत 6 राज्यों से अकेले कोरोना के 80 फीसद मामले सामने आए हैं।

हालिया दिनों में जिन राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामलों में तेजी आई है, वहाँ तीसरी लहर की संभावना को रोकने के लिए पीएम ने सक्रिय रूप से उपाय करने की बात की। इसके साथ ही कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए उन्होंने फोर ‘टी’ (टेस्ट-ट्रैक-ट्रीट-टीका) का मंत्र दिया। प्रधानमंत्री ने उच्च संक्रमण दर वाले इन 6 राज्यों को इसी दृष्टिकोण के आधार पर आगे बढ़ने का सुझाव दिया है।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कोरोना को नियंत्रित करने रणनीति की सराहना करते हुए पीएम ने कहा कि महामारी से बचाव के लिए उत्तर प्रदेश ने टेस्ट, ट्रेस, ट्रीट की तकनीक पर काम किया है। पीएम के मुताबिक, विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक संक्रमण बढ़ने से वायरस के म्युटेशन का खतरा बढ़ जाता है।

मुख्यमंत्रियों से बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत सरकार ने COVID19 की चुनौतियों से निपटने के लिए 23,000 करोड़ रुपए के आपातकालीन पैकेज का एलान किया है। उन्होंने स्वास्थ्य के बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि राज्यों को पैकेज से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल स्वास्थ्य के बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने के लिए करना चाहिए। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों पर भी ध्यान देने की विशेष आवश्यकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाने पर भी जोर दिया है। साथ ही, उन्होंने कहा कि देश के सभी राज्यों को नए आईसीयू बेड बनाने और टेस्टिंग कैपिसिटी को बढ़ाने के लिए आवश्यक फंड मुहैया कराया जा रहा है।

17 साल पहले मुस्लिम महिला से निकाह के लिए बदला धर्म, अब बेटा हिंदू लड़की को लेकर फरार: बाप कॉन्स्टेबल, बेटा 10वीं का छात्र

उत्तर प्रदेश के संभल में धर्मांतरण से जुड़ा एक अजीब मामला सामने आया है। वहाँ एक हिंदू युवक ने 17 साल पहले मुस्लिम महिला से निकाह करने के लिए इस्लाम कबूला था और अब उसी व्यक्ति का बेटा हिंदू धर्म की एक लड़की से प्रेम में पड़कर उसे अपने साथ भगा ले गया है। लड़की की माँ ने इस बाबत थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस की टीमें दिल्ली, मुरादाबाद और अमरोहा में दोनों की तलाश कर रही हैं।

जानकारी के अनुसार, पूरी घटना मोहल्ला हल्लू सराय की है। लड़का-लड़की के बीच प्रेम प्रसंग पिछले 6 माह से चल रहा था। दोनों 2-2 किलोमीटर की दूरी पर रहते थे। इनमें आरोपित लड़का 10वीं का स्टूडेंट है और लड़की 9वीं की छात्रा है। दोनों 15 हजार रुपए लेकर फरार हुए हैं। लड़की के परिजनों का कहना है कि लड़का उसे बहला फुसला कर अपने साथ ले गया।

दैनिक भास्कर की खबर में बताया गया है कि हल्लू सराय में अरविंद कुमार सिपाही का घर है। लगभग 17 साल पहले उन्होंने अपना धर्म बदलकर एक मुस्लिम महिला से निकाह किया था। इसके बाद दोनों का एक बेटा हुआ जिसका एडमिशन कुछ समय पहले सिपाही ने पास के स्कूल में करवाया था। जहाँ उसका 16 साल की एक हिंदू लड़की से अफेयर शुरू हो गया।

6 माह तक दोनों के बीच में प्रेम प्रसंग चलता रहा, लेकिन उसके बाद परिजनों को इसका पता लग गया। विरोध होने पर गुरुवार को सिपाही का बेटा लड़की को अपने साथ भगा ले गया। संभल थाने के प्रभारी विकास सक्सेना ने इस बाबत सिपाही को बुलाकर उससे पूछताछ की। अब दिल्ली मुरादाबाद और अमरोहा में उनकी तलाश चल रही है। इसके अलावा शहर के मुख्य चौराहों के सीसीटीवी भी खँगाले जा रहे हैं।

लड़की के घरवाले जल्द से जल्द अपनी बच्ची की बरामदगी की माँग कर रहे हैं। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि उसे जल्द ढूँढ लिया जाएगा। वहीं संभल के एएसपी आलोक जायसवाल ने बताया कि अरविंद कुमार सिपाही के धर्म बदलने का पूरा मामला 2004 का है। उसका सर्विस रिकॉर्ड चेक हो रहा है। पड़ताल में जो भी सामने आएगा उस पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस को अभी तक यही पता चला है कि अरविंद ने मुस्लिम महिला से शादी की हुई है। आगे की पड़ताल चल रही है। उन्हें पता चला है कि धर्मांतरण के बाद भी सिपाही ने रिकॉर्ड में अपना नाम नहीं बदला और हर जगह उसका नाम अरविंद ही दर्ज है।

रात 9 बजे के बाद बाहर निकलने वाली महिलाएँ वेश्या, उन्हें मार देना चाहिए: केरल का मौलवी

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जो केरल में कट्टरपंथी इस्लामी मौलवियों के बढ़ते प्रभाव को दिखाता है। इस आपत्तिजनक वीडियो में ‘इस्लामिक विद्वान’ सलीह बथेरी का महिला विरोधी बयान सुना जा सकता है। वीडियो में बथेरी कह रहे हैं कि रात 9 बजे के बाद बाहर जाने वाली महिलाएँ वेश्या हैं और उन्हें मार दिया जाना चाहिए। बच्चे की तरह दिखने वाले सलीह की उम्र 27 साल है।

यह केरल की श्रृंखलाबद्ध घटनाओं में से एक है, जो कट्टरपंथी इस्लामी मौलवियों के बढ़ते प्रभाव और कम्युनिस्ट शासित राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध में बढ़ोतरी को दर्शाती है। विवादास्पद वीडियो में सलीह ने क्रूर बलात्कारी गोविंदाचामी की हरकतों को सही ठहराया, जिसने सौम्या नाम की लड़की का बलात्कार करने के बाद हत्या कर दी। सलीह ने अदालत के फैसले और सौम्या मामले की सुनवाई करने वाले न्यायाधीश की आलोचना की।

सलीह के मुताबिक, गोविंदाचामी ने कहा था कि उसने सौम्या का रेप इसलिए किया क्योंकि वह रात में सफर कर रही थी और उसके मुताबिक रात में सफर करने वाली हर लड़की वेश्या होती है। ‘इस्लामिक विद्वान’ के इस वायरल वीडियो ने केरल में बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। हालाँकि, सलीह बथेरी के महिला विरोधी बयान को लेकर पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 23 वर्षीय सौम्या से बर्बर बलात्कार और उसकी हत्या करने के दोषी गोविंदाचामी की मौत की सजा को निरस्त कर दिया था और उसके खिलाफ लगे हत्या के आरोपों को हटाकर उसे सात साल कैद की सजा सुनाई। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति पीसी पंत और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने आईपीसी की धाराओं 376, 394, 325 के तहत लगे आरोपों को बरकरार रखा।

केरल उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने सौम्या हत्या मामले में तमिलनाडु के विरदनगर से ताल्लुक रखने वाले गोविंदाचामी को फास्ट ट्रैक अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा की 17 दिसंबर 2013 को पुष्टि की थी। घटना एक फरवरी 2011 को उस समय हुई जब कोच्चि में एक शॉपिंग मॉल में काम करने वाली सौम्या एर्नाकुलम-शोरनपुर पैसेंजर ट्रेन के महिला डिब्बे में सफर कर रही थी। गोविंदाचामी ने उस पर हमला किया दिया था और चल रही ट्रेन से उसे धक्का दे दिया।

इसके बाद हमलावर भी ट्रेन से कूद गया और घायल पड़ी महिला को उठाकर वल्लातोल नगर में रेल पटरी के पास एक जंगल क्षेत्र में ले गया तथा वहाँ उसके साथ बलात्कार किया। चोटों के चलते 6 फरवरी 2011 को राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल, त्रिशूर में सौम्या की मौत हो गई।

अर्बन नक्सल के सम्मान में झारखंड के CM ने उतारे जूते: स्टेन स्वामी की तुलना बिरसा मुंडा से की, कहा- युगों बाद ऐसे लोग आते हैं

फादर स्टेन स्वामी। एक एक्टिविस्ट पादरी। एक अर्बन नक्सल, जिसे राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने भीमा-कोरेगाँव हिंसा मामले में गिरफ्तार किया था। जिनकी मौत 5 जुलाई 2021 को उस अस्पताल में हो गई जिसे न्यायिक हिरासत में रहते हुए भी दाखिल होने के लिए उन्होंने खुद चुना था। मौत के बाद से ही लिबरल गैंग ‘शहीद’ बता उन पर लगे गंभीर आरोपों पर पर्दा डालने की कोशिश में है। इस कड़ी में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एक कदम और आगे निकल गए हैं। उन्होंने फादर स्टेन स्वामी की तुलना उस बिरसा मुंडा से की है जिसे आदिवासी भगवान मानते हैं।

सीएम सोरेन ने उन्हें शहीद बताते हुए कहा कि समाज के लिए उनका ‘अमूल्य योगदान’ हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने यह बात फादर स्टेन स्वामी की याद में राँची के नामकुम बगीचा में आयोजित सभा में कही। इतना ही नहीं आप तस्वीरों में देख सकते हैं कि इस दौरान वहाँ मौजूद पादरी तक जूते में हैं पर सीएम नंगे पैर हैं। इससे उन पर नक्सलियों से सहानुभूति रखने वाले इस पादरी के प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। ध्यान रहे कि स्टेन स्वामी पर लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार के खिलाफ वामपंथी आतंकियों के साथ मिलकर साजिश करने और देश में अशांति फैलाने का आरोप था।

रिपोर्ट के मुताबिक, सोरेन ने गुरुवार (15 जुलाई 2021) को आयोजित सभा में कहा कि झारखंड बलिदान देने में कभी पीछे नहीं रहा। स्टेन स्वामी जैसे लोगों को समाज में ‘अमूल्य योगदान’ के लिए याद किया जाएगा। युगों बाद ऐसे लोग आते हैं, जिनके किए कामों की छाप नहीं मिटती। इतना ही नहीं सीएम ने अपने ट्विटर हैंडल से कार्यक्रम की तस्वीरों को शेयर करते हुए स्टेन स्वामी के सम्मान में रवीन्द्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कविता भी लिखी।

सोरेन ने सभा के दौरान यह भी कहा कि स्टेन स्वामी ने दलितों, वंचितों और आदिवासियों की लड़ाई लड़ी थी। इसलिए आने वाली पीढ़ी को उनके जीवन से ‘प्रेरणा’ लेगी। उन्होंने कहा, “फादर स्टेन स्वामी से व्यक्तिगत तौर पर मुलाकात की थी। उस दौरान यह नहीं पता था कि वह अपने जीवनकाल में एक अमिट छाप छोड़ जाएँगे… उनका जीवन आसान नहीं था। वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे। अपने जीवन काल में उन्होंने एक राह दिखाई है और ऐसे लोगों द्वारा किए गए कार्यों की छाप हमेशा रहती है।” इस कार्यक्रम में राँची के आर्क बिशप थियोडोर मस्कारेनहास, सहायक बिशप टेलोस्फर बिलुंग समेत कई अन्य लोग शामिल थे।

भारतीय रोमन कैथोलिक जेसुइट पादरी रहे स्टेन स्वामी लंबे वक्त से असामाजिक गतिविधियों में लिप्त थे। वर्ष 2018 में एल्गार-परिषद मामले की जाँच के दौरान स्वामी के देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की जानकारियाँ सामने आई थीं। जब उनकी गिरफ्तारी हुई थी तब भी कॉन्ग्रेस और झामुमो ने उनका बचाव किया था। हेमंत सोरेन ने उस समय कहा था, “गरीब, वंचितों और आदिवासियों की आवाज़ उठाने’ वाले 83 वर्षीय वृद्ध ‘स्टेन स्वामी’ को गिरफ्तार कर केंद्र की भाजपा सरकार क्या संदेश देना चाहती है?”

इसी तरह स्टेन स्वामी की मौत के बाद ट्वीट कर कहा था, “फादर स्टेन स्वामी के निधन के बारे में जानकर स्तब्ध हूँ। उन्होंने अपना जीवन आदिवासियों के अधिकारों के लिए काम करने में समर्पित कर दिया था। मैंने उनकी गिरफ्तारी और उन्हें कैद करने का कड़ा विरोध किया था। उन्हें समय पर इलाज नहीं करवाने और उदासीनता बरतने के लिए केंद्र सरकार को जवाबदेह होना चाहिए।”

विधानसभा में MLA रिवॉल्वर निकाल ले तो क्या केस दर्ज नहीं होगा: सदन में हंगामे पर केरल सरकार से सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट (SC) ने साल 2015 में केरल विधानसभा में हंगामे के लिए जिम्मेदार माकपा (CPI) नेताओं पर से केस वापस लेने की अनुमति माँगने वाली केरल सरकार की याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। याचिका में सत्तारूढ़ एलडीएफ सरकार के शिक्षा मंत्री वी. शिवकुट्टी समेत 6 सदस्यों के खिलाफ अभियोजन रद्द करने की माँग की गई थी। साल 2015 में विपक्ष में रहते हुए इन सदस्यों ने विधानसभा में तोड़फोड़ की थी।

गुरुवार (जुलाई 15, 2021) को सुनवाई के दौरान जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने केरल सरकार से पूछा, “क्या लोकतंत्र के मंदिर में चीजों को फेंकना और उन्हें बर्बाद करना न्याय के हित में है?” उन्होंने कहा, “तथ्य यह है कि ये सार्वजनिक संपत्ति हैं और सरकार सार्वजनिक संपत्ति की संरक्षक है।”

राज्य की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार से उन्होंने कहा कि सदन के भीतर बोलने की आजादी है, इसमें कोई संदेह नहीं। सुप्रीम कोर्ट में भी अक्सर वकीलों में गर्मागर्म बहस होती है, लेकिन क्या इससे अदालत की संपत्ति को नुकसान पहुँचाना जायज हो जाएगा?

उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि विधानसभा में हो या सुप्रीम कोर्ट में, सभी संपत्तियाँ सरकार की हैं और सरकार ही सभी सार्वजनिक संपत्तियों की संरक्षक है। बचाव में दलीलें देकर सरकार केस क्यों वापस लेना चाहती है, यह तो आरोपितों को करना चाहिए?

सुप्रीम कोर्ट ने एक और उदाहरण देते हुए केरल सरकार से सवाल किया कि अगर एक विधायक विधानसभा में रिवॉल्वर निकाल ले और उसे चला दे तो क्या उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं होगा। क्या कोई कह सकता है कि सदन के भीतर का कृत्य होने के कारण उनके खिलाफ केस दर्ज नहीं किया जा सकता और क्या कोई सदन की सर्वोच्चता का दावा करेगा। 

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रखते हुए केरल सरकार से पूछा कि क्या सदन के ऐसे सदस्यों के खिलाफ मामलों को वापस लेने की माँग करना न्यायोचित होगा, जिन्होंने लोकतंत्र के मंदिर में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया। 

रंजीत कुमार ने इसे राजनीतिक अभिव्यक्ति का मामला बताते हुए कहा कि यह विरोध था और बोलने की तरह विरोध के अधिकार को भी सदन में मान्यता प्राप्त है। उन्होंने विशेषाधिकार और छूट हासिल होने का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा, “शायद फर्नीचर टूटे थे, लेकिन यह भी अभिव्यक्ति और विरोध का एक रूप है।” इस पर न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह संपत्ति निजी संपत्ति नहीं थी।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (5 जुलाई 2021) को कहा था कि चुने हुए प्रतिनिधियों के सदन में अनियंत्रित व्यवहार को माफ नहीं किया जा सकता है और उन्हें सदन के अंदर सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करने के लिए मुकदमे का सामना करना होगा। 

सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राहत देने से इनकार करते हुए आगे की सुनवाई के लिए 15 जुलाई की तारीख तय की थी। कोर्ट ने विधायकों द्वारा विधानसभा में माइक तोड़ने और हंगामा करने पर सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था, “ये संगीन मामला है। विधायकों पर मुकदमा चलना चाहिए। आपने पब्लिक प्रॉपर्टी को बर्बाद किया है। आप जनता को क्या संदेश देना चाह रहे हैं।” 

बता दें कि 13 मार्च, 2015 को तत्कालीन विपक्ष के एलडीएफ सदस्यों ने तत्कालीन वित्त मंत्री केएम मणि को बजट पेश करने से रोकने के लिए सदन में तोड़फोड़ की थी। उन्होंने स्पीकर की कुर्सी को पोडियम से उठाकर फेंक दिया था और पीठासीन अधिकारी की डेस्क पर लगे कंप्यूटर, की-बोर्ड और माइक जैसे इलेक्ट्रानिक उपकरणों को क्षतिग्रस्त कर दिया था।

T-Series के MD भूषण कुमार पर रेप केस: काम के बहाने बलात्कार का आरोप, वीडियो-फोटो लीक कर देने की धमकी

टी-सीरीज कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर भूषण कुमार के खिलाफ रेप का मामला दर्ज किया गया है। भूषण पर 30 वर्षीय महिला के साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया गया है और दावा किया गया है कि उन्होंने अपनी कंपनी के प्रोजेक्ट में काम देने के बहाने पीड़िता का फायदा उठाया। 

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि काम देने के नाम पर भूषण कुमार ने 2017 से अगस्त 2020 तक करीब तीन साल तक उनके साथ इस हरकत को अंजाम दिया है। महिला ने आरोप लगाया कि उसे अलग-अलग जगहों पर भी ले जाया गया।

पीड़ित लड़की ने अपनी श‍िकायत में यह भी कहा है कि भूषण कुमार ने उन्‍हें धमकी दी कि यदि वह इसके ख‍िलाफ जाती हैं तो उसके वीडियोज और फोटोज लीक कर दिए जाएँगे। हालाँकि अभी तक इस मामले में भूषण कुमार या उनकी टीम की तरफ से कोई स्टेटमेंट नहीं आया है।

मुंबई पुलिस अब भूषण कुमार से पूछताछ और बयान दर्ज करने वाली है। वे मामले की जाँच कर रहे हैं। भूषण कुमार फिलहाल मुंबई में नहीं हैं। उनके खिलाफ ये रेप केस मुंबई के डीएन नगर पुलिस ने दर्ज किया है। पुलिस सूत्र के अनुसार, भूषण कुमार पर आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार), 420 (धोखाधड़ी), 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अभी तक केस में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

पहले भी लगे हैं आरोप

बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब भूषण कुमार पर इस तरह के आरोप लगे हैं। इससे पहले मीटू मूवमेंट के जरिए मॉडल मरीना कुंवर ने भी भूषण कुमार पर शीरीरिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। हालाँकि, उन्‍होंने इस आरोप को बेबुनियाद बताया था।

पिता की हत्‍या के बाद सँभाली ‘टी-सीरीज’ की बागडोर

भूषण कुमार, टी-सीरीज के संस्‍थापक गुलशन कुमार के बेटे हैं। वह ऐक्‍ट्रेस और प्रड्यूसर दिव्‍या खोसला कुमार के पति हैं। भूषण कुमार ने पिता गुलशन कुमार की हत्‍या के बाद चाचा कृष्‍ण कुमार के साथ टी-सीरीज की बागडोर अपने हाथ में ली। साल 2001 में भूषण कुमार ने फिल्म ‘तुम बिन’ से बतौर प्रड्यूसर भी काम शुरू किया। इसके बाद उन्‍होंने अपने प्रोडक्‍शन हाउस से एक के बाद एक कई बड़ी हिट फिल्‍में दीं। इनमें ‘भूल-भुलैया’ से लेकर ‘आशिकी 2’, ‘बादशाहो’ से लेकर ‘तुम्हारी सुलु’, ‘भारत’ से लेकर ‘सत्यमेव जयते’ तक शामिल है। 

‘रोने’ वाला राकेश टिकैत अब दे रहा देश में जंग की धमकी, UP चुनाव पर बोला – ‘खेला’ जरूर होगा

रामपुर में किसान आंदोलन पर भारतीय किसान यूनियन के प्रमुख राकेश टिकैत का एक बार फिर विवादित बयान सामने आया है। राकेश टिकैत ने कहा है – “किसान तो वापस नहीं आएगा, किसान वहीं रहेगा। सरकार को बातचीत करनी चाहिए। 5 सितंबर को बड़ी पंचायत बुलाई है। आगे का जो भी निर्णय होगा, उसमें लेंगे। दो महीने का सरकार को भी टाइम है। अपना फैसला सरकार भी कर ले, किसान भी कर लेंगे। जंग होगी देश में, ऐसा लग रहा है, युद्ध होगा।”

टिकैत ने कहा कि सरकार जो कानून लाई है, इससे और ज्यादा नुकसान होगा। राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार कानून वापसी ले और किसानों से बैठ कर बात करे, नहीं तो ये आंदोलन जारी रहेगा। किसानों में गर्माहट है। किसानों के धरने पर बोलते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि वो शांतिपूर्ण तरिके से धरना दे रहे, इसलिए सरकार नही सुन रही है। क्रांतिकारी तरीके से धरना दें तो सुन लेगी।

किसानों के संसद का घेराव करने पर राकेश टिकैत ने कहा किसान संसद भवन का रास्ता जानते हैं। अभी 22 तारीख से 200 लोग वहाँ जाएँगे। जब तक पार्लियामेंट चलेगी, तब तक हर रोज 200 लोग जाएँगे। अब जब भी किसान जाएगा, तो लाल किला नहीं संसद भवन ही जाएगा। डीटीसी बस से टिकट लेकर जाएगा।

2022 के चुनाव को लेकर राकेश टिकैत ने कहा, “हमारी क्या तैयारी हो, हम एक ही बार बताएँगे। हम आदेश देंगे, वो लग जाएँगे।” ट्रैक्टर अभियान पर राकेश टिकैत ने कहा, “हमने यह कहा कि ट्रैक्टर पर रंग रोगन करा लो बढ़िया सा बंपर लगवा लो, क्योंकि दिल्ली आना जाना तो लगा रहेगा।”

पश्चिम बंगाल में खेला हुआ क्या यूपी में भी ‘खेला’ होगा, इस पर राकेश टिकैत ने कहा, “उत्तर प्रदेश में भी ‘खेला’ होगा अगर ‘खेला’ करवाना चाहेंगे तो ‘खेला’ होगा। इनके पास 2 महीने का टाइम है। 5 सितंबर को हमारी पंचायत है, उससे पहले पहले बातचीत करके हमारा समाधान कर दें नहीं तो इनका ‘खेला’ जरूर होगा।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार से कहा था कि महीनों से चल रहे किसान आंदोलन को या तो बातचीत से खत्म किया जाए या गोलियों से। टिकैत ने कहा था कि किसान बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन बिना किसी शर्त के। टिकैत ने कहा था कि सरकार चाहती है कि किसान उससे सशर्त बातचीत करे लेकिन ऐसा नहीं होगा क्योंकि किसान पिछले 8 महीनों से सरकार की बात मानने के लिए प्रदर्शन में नहीं बैठे हैं।

इससे पहले राकेश टिकैत के रोने की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल किए गए थे। टिकैत के रोने से 2 दिन पहले गणतंत्र दिवस (जनवरी 26, 2021) के दिन दिल्ली की ‘ट्रैक्टर रैली’ में जम कर हिंसा हुई थी।

मीडिया पोर्टल ‘Kreatey’ पर प्रकाशित एक खबर के अनुसार, राकेश टिकैत के रोने से पहले खालिस्तानियों ने टेंट के भीतर ही उनकी पिटाई की थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले कुछ कट्टर सिखों ने उन्हें थप्पड़ और लातों से तो मारा ही था, साथ ही उनसे पैसे वापस लेने की भी धमकी दी थी। जबकि राकेश टिकैत ने रोते हुए दावा किया था कि प्रशासन किसानों का दमन कर रहा है और उनका आत्महत्या करने का मन कर रहा है।