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‘बंगाल में कानून का शासन नहीं, शासक का कानून चल रहा’: हिंसा पर NHRC की रिपोर्ट, CBI जाँच की सिफारिश; भड़कीं CM ममता

पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद बड़े पैमाने पर हुई हिंसा की जाँच कर रहे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने अपनी फाइनल रिपोर्ट कलकत्ता हाईकोर्ट को सौंप दी है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि राज्य में ‘कानून का शासन’ नहीं बल्कि ‘शासक का कानून’ है। करीब 50 पेज की NHRC की इस रिपोर्ट में राज्य प्रशासन की कड़ी आलोचना की गई है और कहा गया है कि राज्य प्रशासन ने जनता में अपना विश्वास खो दिया है।

NHRC की 7 सदस्यीय टीम ने 20 दिन में 311 से अधिक जगहों का मुआयना करने के बाद राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा पर अपनी रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में हिंसा की जाँच सीबीआई से कराने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा, यह भी कहा गया है कि मामलों की सुनवाई राज्य के बाहर फास्ट ट्रैक अदालत गठित कर हो। रिपोर्ट में पीड़ितों की आर्थिक सहायता के साथ पुनर्वास, सुरक्षा और आजीविका की व्यवस्था करने को कहा गया है।

रिपोर्ट के अंश

रिपोर्ट के मुताबिक, जाँच के दौरान टीम को राज्य के 23 जिलों से 1979 शिकायतें मिलीं। इनमें ढेर सारे मामले गंभीर अपराध से संबंधित थे। इनमें से अधिकांश शिकायतें कूच बिहार, बीरभूम, बर्धमान, उत्तरी 24 परगना और कोलकाता की हैं। इनमें से अधिकांश मामले दुष्कर्म, छेड़खानी व आगजनी की हैं और ये शिकायतें टीम के दौरा के वक्त लोगों ने बताई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि उसे महिलाओं पर हुए अत्याचार की 57 शिकायतें राष्ट्रीय महिला आयोग से मिली हैं।

आयोग ने बताया कि लोगों से मिलने दौरान उसे मिली शिकायतों की संख्या और राज्य की पुलिस द्वारा दर्ज की गई शिकायतों की संख्या में भारी अंतर है। अधिकतर शिकायतें पुलिस ने दर्ज ही नहीं की हैं। टीम के निष्कर्ष में यह बात निकलकर आई है कि राज्य में लोगों को पुलिस पर विश्वास नहीं रह गया है। रिपोर्ट कहती है कि हिंसा के अधिकांश मामलों में या तो कोई गिरफ्तारी नहीं हुई या जिनकी गिरफ्तारी हुईं वे जमानत पर रिहा हो गए।

रिपोर्ट के अंश

रिपोर्ट में कहा गया है कि 9,300 आरोपितों में से पश्चिम बंगाल पुलिस ने केवल 1,300 को गिरफ्तार किया और इनमें से 1,086 जमानत पर रिहा हो गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मामलों में पीड़ितों को इंसाफ दिलाने की बजाय पुलिस ने उन्हीं पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दायर कर दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि टीएमसी के गुंडों को बचाने के लिए प्राथमिक मामले से पहले की तारीख में पीड़ित के खिलाफ केस दर्ज किए गए, जो बेहद गंभीर धाराओं के अंतर्गत दर्ज किए गए हैं।

रिपोर्ट के अंश

जाँच टीम ने यह भी पाया कि हिंसा में पीड़ित लोगों की सुनवाई करने की बजाय बंगाल पुलिस तमाशा देखती रही, जबकि टीएमसी के गुंडे एक जगह से दूसरी जगह हिंसा फैलाते रहे। रिपोर्ट में कहा गया है कि बंगाल पुलिस पर किसी प्रकार का दबाव था या फिर वह खुद इतनी लापरवाह थी कि उसने कार्रवाई नहीं की। इसके अलावा, टीम ने यह भी पाया कि बंगाल में हुई राजनीतिक हिंसा पर न तो किसी पुलिसकर्मी ने और न ही किसी राजनेता ने इन घटनाओं की निंदा की। टीम ने कहा कि चुनावी नतीजों के बाद हुई हिंसा किसी पॉलिटकल-ब्यूरोक्रेटिक-क्रिमिनल नेक्सस की ओर इशारा करती है। इस हिंसा ने लोकतंत्र के कई स्तंभों पर भी हमला किया है। आयोग ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की पीड़ितों को अकेला और उनके हाल पर छोड़ दिया गया।

ममता ने रिपोर्ट लीक होने पर निकाला गुस्सा

उल्लेखनीय है कि बंगाल में चुनावों के बाद हुई हिंसा पर NHRC की रिपोर्ट मीडिया में लीक होने से ममता बनर्जी नाराज हैं। उन्होंने कहा है कि एनएचआरसी को न्यायपालिका का सम्मान करना चाहिए और उसे चुनाव बाद हुई हिंसा से संबंधित रिपोर्ट लीक नहीं करनी चाहिए थी और इसे सिर्फ उच्च न्यायालय को सौंपना चाहिए था। अपना गुस्सा जाहिर करते हुए ममता बनर्जी पूरे मामले में उत्तर प्रदेश को बीच में ले आईं।

वह बोलीं कि प्रधानमंत्री अच्छी तरह जानते हैं कि यूपी में कानून का राज नहीं है। ऐसी हालत में वहाँ पर कितने आयोग भेजे गए हैं? यूपी के हाथरस से लेकर उन्नाव तक कई घटनाएँ हो चुकी हैं और हालात ये हैं कि वहाँ पत्रकारों को भी नहीं बख्शा गया। उन्होंने कहा कि बंगाल को बदनाम किया है और ज्यादातर हिंसा चुनाव से पहले हुई है।

NHRC की अंतरिम रिपोर्ट देखने के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा था कि प्रशासन आँखें मूंदे बैठा था और चुनाव के बाद हिंसा हुई थी। कोर्ट ने कहा था कि सरकार ने झूठ बोला था कि चुनाव के बाद हुई हिंसा की उसे कोई शिकायत नहीं मिलीं, जबकि मानवाधिकार आयोग के पास शिकायतों की भरमार आई। कोर्ट ने 2 जुलाई को टीएमसी गुंडों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश कोलकाता पुलिस को दिए थे। आदेश में कहा गया था कि मानवाधिकार आयोग की सिफारिश पर ये शिकायतें दर्ज होनी चाहिए।

3 बेटियॉं जो बनीं ‘लाडली योजना’ की प्रेरणा, उनका कन्यादान करेंगे CM शिवराज सिंह चौहान: 1998 में लिया था गोद

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की गोद ली हुई तीन बेटियाँ प्रीति, राधा और सुमन की शादी आज (गुरुवार 15 जुलाई 2021) शाम को होगी। ये शादी विदिशा के सेवाश्रम में होगी। तीनों लड़कियाँ यहीं पर पली बढ़ी हैं। सीएम शिवराज अपनी पत्नी साधना सिंह के साथ तीनों बेटियों का कन्यादान करेंगे।

बुधवार को सीएम की बेटियों की हल्दी की रस्म थी, जिसको लेकर साधना सिंह पहले ही विदिशा पहुँच गई थीं। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी कभी भी पूरी नहीं होती है, क्योंकि ये बेटियाँ हैं और माँ इन्हें कभी भी अकेला नहीं छोड़ सकती है। वहीं, शादी का जायजा लेने के लिए शिवराज सिंह भी बुधवार को विदिशा पहुँचे।

1998 में तीनों को ढाई साल की उम्र में आश्रम में रखवाया था

रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों बेटियों की शादी को लेकर बात करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 1998 में जब वो इन लड़कियों को लेकर आए थे तो ये सभी ढाई-तीन साल की थीं। इनके अभिभावकों का पता नहीं था, इसलिए इनके लालन-पालन की जिम्मेदारी सेवाश्रम को दी गई थी। उन्होंने बताया कि साधना सिंह (सीएम की पत्नी) ने इन्हें बड़े ही लाड़-प्यार से पाला और दोनों मिलकर अपनी बेटियों का कन्यादान करेंगे।

सीएम ने कहा कि उन्होंने इन लड़कियों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए लगातार कोशिश किया। उन्होंने बताया कि उनकी बेटियों के भावी जीवनसाथी को लेकर संतोष है, साथ ही उनकी विदाई का दुख भी है। उन्होंने ये भी बताया कि ये शादी पूरे वैदिक रीति-रिवाजों के साथ होगी।

इससे पहले भी करा चुके हैं बेटियों की शादी

रिपोर्ट के अनुसार, सीएम शिवराज इससे पहले भी कई बेटियों का कन्यादान कर चुके हैं। उनकी एक गोद ली हुई बेटी भारती की शादी हो चुकी थी, लेकिन साल 2019 में हार्ट अटैक के कारण भारती की मौत हो गई। सीएम ने बताया है कि जब वो सांसद थे तब से वे बेटियों का विवाह करा रहे हैं। उनका कहना है कि वे अकेले एक सीमा तक कर सकते हैं, इसलिए मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने ‘मुख्यमंत्री लाडली योजना’ की शुरुआत की।

ओवैसी के बाप तक पहुँचे माँ वाले शायर मुनव्वर राणा, आतंकियों की गिरफ्तारी से हैं आहत: धर्मांतरण गिरोह के पर्दाफाश पर भी उगला था जहर

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश एटीएस ने अलकायदा के दो आतंकियों को गिरफ्तार कर बड़े हमले की साजिशों को नाकाम किया। उसके बाद से लगातार आतंकियों की धर-पकड़ हो रही है। साथ ही उनके खतरनाक मंसूबे भी सामने आ रहे हैं। हालाँकि राजनीतिक वजह से राज्य के दो पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मायावती इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठा चुकी हैं। अब इनमें शायर मुनव्वर राणा का भी नाम जुड़ गया है, जो यूपी की योगी सरकार के प्रति अपनी नफरत के लिए समय-समय पर चर्चा में रहते हैं। इस बार उन्होंने आतंकियों पर कार्रवाई को चुनाव से जोड़ते हुए AIMIM प्रमुख सांसद असदुद्दीन ओवैसी को भी लपेटे में लिया है। यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।

नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से बात करते हुए मुनव्वर राना ने आतंकियों पर कार्रवाई को चुनावी बताते हुए कहा है कि यह कुछ और नहीं है बल्कि चुनाव की तैयारी में टूथब्रश का इस्तेमाल है। गिरफ्तार आतंकियों को जमीयत उलेमा-ए-हिन्द द्वारा कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के प्रश्न पर राना ने AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ असभ्य भाषा का उपयोग किया।

राना ने कहा कि इसके लिए उलेमा-ए-हिन्द से अधिक जिम्मेदारी सलाउद्दीन ओवैसी की औलाद (असदुद्दीन ओवैसी) की है जो हैदराबाद से यहाँ आकर वोटों के लिए मारा-मारा घूम रहा है। राना यहीं नहीं रुके और उन्होंने ओवैसी को यह भी कहा कि यहाँ जो मुसलमान मारे जा रहे हैं, पीटे जा रहे हैं, गिरफ्तार किए जा रहे हैं उनकी जिम्मेदारी क्या उसका (असदुद्दीन ओवैसी) बाप लेगा कब्र से आकर?

इससे पहले जब यूपी एटीएस ने दो मौलाना की गिरफ्तारी कर धर्मांतरण गिरोह का पर्दाफाश किया था तब भी राना ने सीएम आदित्यनाथ के खिलाफ जहर उगला था। राना ने कहा था कि ATS को ही ख़त्म कर देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि ATS को 1000 से ऊपर गिनती ही नहीं आती है, वरना वो इसे 4000 भी बना देते। उन्होंने यह भी पूछा था कि जब धर्मांतरण का आँकड़ा 100 पहुँचा होगा, तब क्या ATS बैठ कर गाँजा पी रही थी?

राना ने कहा था कि योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री बनने की इतनी जल्दी है कि 1,000 क्या, वो ये भी कह सकते हैं कि यूपी में 1 करोड़ हिन्दू धर्मांतरण कर के मुस्लिम बन गए हैं। उन्होंने कहा, “बेचारे हिन्दू इतने कमजोर हो गए हैं कि वो कुछ पैसों के लालच के लिए मुस्लिम हो जाते हैं।” राना ने कहा कि चुनाव के लिए ये सब ‘कहानी’ गढ़ी जा रही है और हिन्दू-मुस्लिम नफरत के लिए ये सब किया जा रहा है। साथ ही दावा किया था कि कल को 20 महिलाओं को बिठा कर ये भी कहवाया जा सकता है कि मुस्लिमों ने उनका रेप किया है। राना ने यह भी कहा था कि जिस मठ में बैठ कर सीएम आदित्यनाथ मुस्लिमों को गालियाँ देते हैं, उस मठ की जमीन मुस्लिमों ने ही दी है।

ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश में 11 जुलाई को गिरफ्तार हुए दो आतंकियों मिनहाज और मसीरुद्दीन से पूछताछ के बाद यह बात सामने आई थी कि ये आतंकी मात्र 3 हजार में प्रेशर कुकर बम तैयार करने में लगे थे और 15 अगस्त से पहले किसी आतंकी गतिविधि को अंजाम देने वाले थे। इनसे पूछताछ के बाद ही ATS ने बुधवार (जुलाई 14, 2021) को अलकायदा से जुड़े तीन और संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया था। तीनों लखनऊ निवासी हैं और इनकी पहचान शकील, मो मुस्तकीम और मुईद के तौर पर हुई।

मिलिए BJP की सोनिया से: UP के जिस ब्लॉक में पति हैं सफाई कर्मचारी, वहीं की प्रमुख बन कराया लोकतंत्र की ताकत का अहसास

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में रहने वाली सोनिया बलियाखेड़ी ब्लॉक की प्रमुख बन गई हैं। खास बात यह है कि सोनिया के पति सुनील कुमार इसी क्षेत्र में सफाईकर्मी हैं। सुनील ने सपने में भी कभी नहीं सोचा था कि जिस ब्लॉक क्षेत्र में वह रोज सफाई करते हैं, एक दिन उनकी पत्नी सोनिया वहीं की ब्लॉक प्रमुख बन जाएँगी। 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक सोनिया का कहना है कि ब्‍लॉक प्रमुख के नाते वह गाँवों के विकास के लिए काम करेंगी, लेकिन घर तो पति की तनख्वाह से ही चलता है। उनके पति ने भी निर्णय लिया है कि वह नौकरी करते रहेंगे। वह ब्लॉक प्रमुख तो सिर्फ 5 साल के लिए बनी हैं, लेकिन नौकरी तो पूरे 60 साल के लिए है।

बीए पास हैं सोनिया

बता दें कि नल्हेडा गुर्जर गाँव में रहने वाले सुनील कुमार विकासखंड बलियाखेड़ी में सफाई कर्मचारी के पद पर अपने ही गाँव में कार्यरत हैं। सोनिया ने बीए किया है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में बीडीसी की सीट आरक्षण की वजह से अनुसूचित जाति वर्ग के लिए सुरक्षित हो गई। ग्रामीणों के कहने पर सफाईकर्मी सुनील कुमार ने बीडीसी सदस्य के लिए अपनी पत्नी सोनिया को चुनाव लड़ाया, जिसमें उन्हें जीत हासिल हुई।

निर्विरोध निर्वाचित हुईं

ब्लॉक प्रमुख पद भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुआ तो बीजेपी नेता व जिला पंचायत सदस्य मुकेश चौधरी ने पढ़ी-लिखी सोनिया को बीजेपी की ओर से प्रमुख पद का प्रत्याशी बनवा दिया। नामांकन करने के साथ ही 26 वर्षीय सोनिया निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित हो गईं।

पति करते रहेंगे नौकरी

ब्लॉक प्रमुख बनने के बाद सोनिया ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय पति सुनील कुमार और परिवार को दिया। सोनिया का कहना है कि उनकी प्राथमिकता गाँवों का विकास है। वह गाँवों के विकास के लिए काम करेंगी। वहीं, पति की नौकरी को लेकर कहा कि वह नौकरी करते रहेंगे, क्योंकि घर तो पति की तनख्वाह से ही चलता है। सुनील ने भी कहा कि वह अपनी नौकरी नहीं छोड़ेंगे।

गौरतलब है कि हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी विधायक बनीं चंदना बाउरी की भी पृष्ठभूमि इसी तरह की थी। बाउरी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में किस्मत आजमा रहे सबसे निर्धन उम्मीदवारों में से एक थीं। बीजेपी ने उन्हें सल्तोरा से मैदान में उतारा था। वह जीत हासिल करने में कामयाब रहीं। 30 साल की चंदना एक दिहाड़ी मजदूर की पत्नी और तीन बच्चों की माँ हैं। बांकुरा जिले की सल्तोरा विधानसभा सीट पर चंदना बाउरी ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के प्रत्याशी संतोष कुमार मण्डल को 4,145 मतों से हराया था। 

पाकिस्तान से लगी सीमा पर ता​लिबान के हाथ लगा खजाना, चौकी पर कब्जे के बाद मिले 300 करोड़

पाकिस्तान और अफगानिस्तान सीमा पर स्थित स्पिन बोल्डाक इलाके में बनी एक सीमा चौकी पर कब्जा करने के बाद तालिबान को वहाँ से 3 अरब पाकिस्तानी रुपए मिले हैं। यह अफगानी सेना का पैसा है, जो चौकी में रखा हुआ था और तालिबान के साथ संघर्ष के दौरान अफगान सेना यह पैसा भी छोड़कर भाग गई।

पाकिस्तान की सीमा पर स्थित कंधार शहर सीमाई व्यापार के लिहाज से अफगानिस्तान का महत्वपूर्ण शहर है। कंधार के ही स्पिन बोल्डाक इलाके में स्थित सीमा चौकी पर तालिबान ने हमला किया, जिसके बाद अफगानी सेना इस चौकी को छोड़कर भाग गई। तालिबान ने यहाँ अफगानी सेना का झंडा हटाकर अपना झंडा लगा दिया है। इसी चौकी से तालिबान को 3 अरब पाकिस्तानी रुपए (लगभग 1.4 अरब रुपए) प्राप्त हुए, जो कथित तौर पर अफगानी सेना को तस्करों से घूस के तौर पर प्राप्त हुए थे।

इस बारे में अफगानिस्तान के तालिबान ने अपना बयान भी जारी किया है। तालिबान के प्रवक्ता जबिउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि तालिबान के मुजाहिदों ने कंधार के महत्वपूर्ण सीमाई कस्बे वेश में कब्जा कर लिया है, जिसके साथ ही स्पिन बोल्डाक और चमन के बीच स्थित महत्वपूर्ण सड़क तालिबान के नियंत्रण में आ गई है। इससे कंधार कस्टम विभाग पर भी तालिबानियों का नियंत्रण स्थापित हो गया है। जियो टीवी के अनुसार, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने भी सीमा क्षेत्रों में तालिबान का नियंत्रण होने की पुष्टि की है।

तालिबान द्वारा लगातार यह दावा किया जा रहा है कि अफगानिस्तान में लगभग 85% क्षेत्र अब तालिबान के कब्जे में आ चुका है। इसी के साथ अब तालिबान सीमाई क्षेत्रों में भी कब्जा करने की कोशिश कर रहा है, जिससे व्यापारिक मार्गों से होने वाली कमाई पर भी उसका आधिपत्य स्थापित हो सके।

ज्ञात हो कि अफगानिस्तान से अमेरिका ने जब से वापस जाने का फैसला किया है, तब से वहाँ संकट और भी गहरा होता जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से अफगानिस्तान से जारी अमेरिकी सैनिकों के पलायन के साथ ही तालिबान और अफगानी सेना के बीच संघर्ष बढ़ गया है। हाल ही में तालिबानी कट्टरपंथियों द्वारा 22 अफगानी सेना के कमांडो को क्रूरता से मारने की खबर आई थी, जिसका वीडियो भी सामने आया था। घटना उत्तरी फरयाब प्रांत के दौलताबाद की है जहाँ अफगानी सेना के जवानों ने तालिबान के सामने आत्म-समर्पण कर दिया था और वो निहत्थे थे, लेकिन आतंकियों ने उनकी एक न सुनी। इसके बाद उन्होंने ‘अल्लाहु अकबर’ का नारा लगाते हुए सभी को मार डाला।

इंदौर पुलिस की वेबसाइट पर भारत विरोधी बातें: मोहम्मद बिलाल का कनेक्शन, जासूस बहनों से भी जुड़े हैं तार

मध्य प्रदेश की इंदौर पुलिस की मंगलवार (13 जुलाई 2021) को हुई वेबसाइट हैकिंग मामले में मोहम्मद बिलाल नाम के पाकिस्तानी हैकर के शामिल होने की बात सामने आई है। ये वही मोहम्मद बिलाल है, जिसका नाम पाकिस्तान के संपर्क में रहने वाली महू में पकड़ी गईं दो संदिग्ध युवतियों के मामले आया था। हालाँकि, पुलिस इसकी पुष्टि नहीं कर रही है, लेकिन आशंका जता रही है कि यह वही मोहम्मद बिलाल हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, बिलाल ने पुलिस को चैलेंज करने के लिए वेबसाइट को मंगलवार को हैक कर लिया था। हालाँकि, पुलिस की आईटी टीम ने 6 घंटे में वेबसाइट को रिकवर कर लिया।

वेबसाइट को हैक करने के बाद हैकर्स ने डीजीपी, मध्य प्रदेश सहित तमाम बड़े अधिकारियों के नामों की ‘हैक्ड बाय मोहम्मद बिलाल टीम पीसीई – फ्री कश्मीर पाकिस्तान जिंदाबाद’ लिख दिया था। इसके अलावा, राज्य के डीजीपी और इंदौर आईजी की प्रोफाइल की जगह तिरंगे को गलत तरीके से लगा दिया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, इंदौर के आईजी हरिनारायण मिश्रा चारी ने बताया है “पुलिस टीम ने हैकर के खिलाफ अहम जानकारियाँ हासिल कर ली हैं। विशेषज्ञों की टीम हैकर के आईपी एड्रेस तक पहुँच गई है। वेबसाइट को रिस्टोर करने के बाद उसे लॉक कर दिया गया है। इसके साथ अज्ञात हैकर के खिलाफ केस भी रजिस्टर किया गया है।”

आईजी ने आगे कहा, ” हम सभी जानते हैं कि साइबर की दुनियाँ ऐसी है कि दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर अपराध किया जा सकता है। अपराध करना आसान है, लेकिन ये भी सही है कि इससे बच पाना बहुत ही मुश्किल है, क्योंकि जैसे ही कोई अपराध करता है तो उसकी बहुत सारी गतिविधियाँ और सूचनाएँ साइबर वर्ल्ड में कैद हो जाती हैं। उन्हीं पदचिन्हों के आधार पर पुलिस आरोपित तक पहुँचती है। इस मामले को पुलिस ने गंभीरता से लिया है।”

इस मामले में एक्सपर्ट हिमांशु की शिकायत के आधार पर आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद बिलाल दिल्ली BJP की वेबसाइट भी हैक कर चुका है। उसने नंवबर 2019 में दिल्ली BJP की वेबसाइट हैक कर उस पर पाकिस्तान और कश्मीर जिंदाबाद लिख दिया था। उसने बड़े शब्दों में लिखा था- ’27 फरवरी याद है न।’ दरअसल, 27 फरवरी को ही मुसलमानों की भीड़ ने गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में आग लगा दी थी। इसके बाद गुजरात सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे।

इसके अलावा, 15 अक्टूबर 2018 को गोवा BJP की वेबसाइट और अप्रैल 2018 में आंध्रा यूनिवर्सिटी की वेबसाइट को भी बिलाल और उसकी टीम ने हैक कर लिया था।

हीं, दो महीने पहले महू आर्मी छावनी एरिया में पाकिस्तान के लगातार संपर्क में रहने वाली दो महिलाओं को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार यासीन और हीना सेना के रिटायर चांद खां की बेटी हैं और दोनों ने सैन्य विज्ञान की पढ़ाई की है। जब एटीएस, एनआईए समेत कई एजेंसियों ने उनसे पूछताछ शुरू की तो उन्होंने बताया कि फेसबुक के जरिये वे पाकिस्तानी युवक से बात करती हैं और उनसे निकाह करना चाहती हैं। उस दौरान भी मोहम्मद बिलाल का नाम ही सामने आय़ा था।

सुरसा की तरह बढ़ती आबादी, मजहबी कुतर्कों से नहीं टलेगा खतरा: योगी सरकार के इस कदम पर बात करनी ही होगी

विश्व जनसंख्या दिवस पर उत्तर प्रदेश सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण से संबंधित एक बिल का ड्राफ्ट पेश किया। राज्य विधि आयोग द्वारा जारी किए गए ड्राफ्ट के अनुसार प्रस्तावित कानून का नाम उत्तर प्रदेश जनसंख्या (नियंत्रण, स्थिरीकरण और कल्याण) विधेयक 2021 होगा। विधि आयोग की विज्ञप्ति के अनुसार विधेयक के ड्राफ्ट को सार्वजनिक कर उस पर जनता की ओर से प्रतिक्रिया और सुझाव आमंत्रित किया गया है। सरकार के अनुसार कानून लाने का उद्देश्य राज्य के सीमित संसाधनों का उचित इस्तेमाल कर प्रदेश के नागरिकों के लिए भोजन, पेयजल, शिक्षा, आवास और रोजगार की समुचित व्यवस्था करना है। इसके अलावा माँग है कि जनसंख्या वृद्धि में स्थिरता लाकर राज्य के संसाधनों का न्यायोचित उपयोग कर विकास की एक दीर्घकालीन योजना को आयाम दिया जा सके।

बिल के मुख्य बिंदु के अनुसार दो या एक संतान नीति पर विशेष बल दिया गया है। नीति का पालन करने वाले नागरिकों के लिए सरकार ने विशेष सरकारी लाभ देने का प्रस्ताव रखा है। दो संतान वाले दंपती, जो पहले से सरकारी कर्मचारी हैं, उनके लिए विशेष वेतन वृद्धि, मकान बनाने के लिए जमीन की खरीद पर सब्सिडी, कर्ज पर ब्याज की दर में विशेष छूट, सरकारी संसाधनों जैसे बिजली, पानी और नगरपालिका के बिलों पर विशेष छूट और यहाँ तक कि भविष्य निधि में सरकार की ओर से जमा किए जाने वाले अंश पर अधिक भुगतान भी शामिल हैं। इसके अलावा मैटरनिटी या पेटर्निटी लीव के दौरान 12 महीनों की वेतन के साथ छुट्टी जैसे प्रावधान भी हैं।

इसके साथ ही एक संतान नीति को अपनाने वाले सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को बीस वर्ष की उम्र तक बीमा और मुफ्त स्वास्थ्य सेवा का लाभ, स्नातक तक की मुफ्त शिक्षा, राज्य के शिक्षण संस्थानों में प्रवेश में वरीयता, उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति (scholarship) और सरकारी नौकरियों में वरीयता देने जैसे प्रस्ताव भी शामिल हैं। बिल में इन प्रावधानों को रखकर सरकारी कर्मचारियों को दो या एक संतान पॉलिसी अपनाने के लिए प्रेरित करने की योजना है। राज्य के जो नागरिक सरकारी कर्मचारी नहीं हैं पर यदि वे भी दो या एक संतान नीति को अपनाते हैं तो उनके लिए भी बिल में कई तरह के लाभ देने का प्रावधान रखा गया है।

ड्राफ्ट में सरकारी कर्मचारियों या सामान्य नागरिकों द्वारा दो संतान नीति न अपनाये जाने पर नुकसान के प्रावधान भी रखे गए हैं। ड्राफ्ट बिल में किए गए प्रावधान के अनुसार कानून पास होने के बाद दो संतान नीति न अपनाने वाले सरकारी कर्मचारियों को पदोन्नति नहीं मिलेगी। सामान्य नागरिकों के लिए इस नीति को न अपनाने पर सरकारी नौकरी में आवेदन पर रोक, सरकारी योजनाओं में मिलने वाली सब्सिडी का लाभ मिलने पर रोक, स्थानीय निकायों का चुनाव लड़ने पर रोक, सरकार की ओर से चलाए जा रहे लोककल्याण कार्यक्रमों का लाभ मिलने पर रोक और परिवार में राशन कार्ड की संख्या चार तक सीमित किए जाने का प्रावधान है।

इनके अलावा ड्राफ्ट में वे सारे प्रावधान हैं जो एक कानून के ड्राफ्ट में होते हैं।

जब से यह ड्राफ्ट सार्वजनिक हुआ है, इस पर चर्चा हो रही है। समाज के किसी छोर से इसे समर्थन मिल रहा है तो किसी से इसका विरोध हो रहा है। जिस विरोध की सबसे अधिक चर्चा हो रही है वह मुस्लिम समाज की ओर से है। दुर्भाग्यवश मुस्लिम समाज से आए विरोध के समर्थन में तर्क की कमी दिखती है। अधिकतर विरोध के पीछे दिए जा रहे तर्क मजहबी हैं। इसके अलावा भी विरोध का एक और आधार यह है कि चूँकि यह बिल भाजपा शासित राज्य या फिर योगी आदित्यनाथ जैसे मुख्यमंत्री की सरकार ने प्रस्तुत किया है, यह मुस्लिम विरोधी ही होगा।

ऐसा नहीं कि विरोध केवल मुस्लिम समुदाय की ओर से ही आया। विश्व हिन्दू परिषद (VHP) की ओर से भी बिल के मुख्य बिंदु यानि दो या एक संतान नीति में व्याप्त संभावित त्रुटि की ओर ध्यान आकर्षित किया गया और कहा गया कि सन्तानोपत्ति को लेकर भारत के अलग-अलग समुदायों की सोच में खासी असमानता है, क्योंकि सभी जनसंख्या नियंत्रण की बात को एक तरह से नहीं देखते। ऐसे में एक कानून सभी समुदायों पर लागू करना किसी भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। परिषद की ओर से यह भी कहा गया कि कैसे चीन की एक संतान नीति को बाद में वापस लिया गया, क्योंकि वह नीति ही काम करने वाली जनसंख्या के कम होने का कारण बन गई थी।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए इस ड्राफ्ट के मुख्य बिंदु यानी दो संतान नीति जैसा ही प्रस्ताव पिछले दिनों असम सरकार की ओर से भी आया और वो भी इसी तरह से चर्चा का विषय बना। दोनों सरकारों की प्रस्तावों में मूल अंतर यह है कि असम सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार की तरह जनसंख्या नियंत्रण को लेकर एक कानून का ड्राफ्ट नहीं आया था। असम सरकार द्वारा प्रस्तावित नीति का उद्देश्य दो से अधिक संतान वाले दंपतियों के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ रोकने की बात कहकर उन्हें इस नीति को अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

एशिया में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर राजनीतिक या सामाजिक विमर्श कोई नई बात नहीं है। चीन द्वारा लाई गई एक संतान की नीति पुरानी है और अब तो उसके कुप्रभावों के कारण उसे चीन सरकार द्वारा वापस भी ले लिया गया है। भारत में भी 1990 के दशक तक जनसंख्या नियंत्रण एक बहुत बड़ा विषय था पर तब के राजनीतिक पटल पर अचानक उभरे दो विषयों ने इस समस्या को सरकारों की प्राथमिकता की सूची में कहीं पीछे ढकेल दिया।

पहला था भारतीय राजनीति में अल्पसंख्यक तुष्टिकरण और दूसरा कारण था 1991 में भारतीय अर्थव्यवस्था में उदारीकरण की नीति। जहाँ अल्पसंख्यक तुष्टिकरण ने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर ‘सेक्युलर’ दलों की प्राथमिकता को उजागर किया, वहीं आर्थिक उदारीकरण के पश्चात केवल विदेशी कंपनियों को ही नहीं बल्कि हमारी सरकारों को भी भारतीय नागरिक में एक उपभोक्ता दिखाई देने लगा। मेरे विचार से ये दो कारण थे जिनकी वजह से पिछले तीस वर्षों में जनसंख्या नियंत्रण पर न तो कोई गंभीर विमर्श हुआ और न ही हमारी सरकारों को जनसंख्या बढ़ने की दर एक समस्या के रूप दिखाई दी।

किसी राज्य विधि आयोग द्वारा ही सही, अब जब ऐसे कानून का मसौदा तैयार किया गया है तो अगला कदम इस पर समुचित बहस ही होना चाहिए। ऐसे बिल या प्रस्तावों के गुण अवगुण पर बहस हो सकती है पर इसके पीछे सरकारों की मंशा पर सवाल उठाना उचित नहीं जान पड़ता और उस पर होने वाले विरोध की स्क्रूटिनी सामाजिक विमर्श का हिस्सा होनी चाहिए। ऐसे प्रस्तावों को केवल यह कहकर नहीं नकारा जा सकता कि इसके पीछे किसी सरकार या उसके मुख्यमंत्री की मंशा पर किसी को संदेह है।

यदि इतिहास देखें तो जनसंख्या नियंत्रण को लेकर हमारे सामने चीन का मॉडल है जिसे एक समय के बाद वहाँ की सरकार को वापस लेना पड़ा। देखा जाए तो चीन की नीति की जो परिणति हुई यह स्वाभाविक भी थी। शायद ही कोई इस बात से इनकार करेगा कि आधुनिक वैश्विक व्यवस्था में भी और एक औद्योगिक राष्ट्र या उद्योग प्रधान अर्थव्यवस्था के लिए भी, जिस तरह के मानव संसाधन की आवश्यकता होती है। जनसंख्या नियंत्रण के लिए अपनाई गई ऐसी नीति उसके लिए तार्किक नहीं हो सकती। आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था चलाने के लिए जिस तरह के और जितने तरह के मानव संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है, एक संतान नीति उसके खिलाफ जाती है। आखिर आधुनिक मानव संसाधन के लिए प्रतिभाएँ एक बहुत बड़े पूल से ली जाती हैं और ऐसे में यदि पूल का साइज ही छोटा रहा तो उसमें से निकलने वाली प्रतिभाओं की अपनी सीमाएँ होंगीं।

इसके अलावा कालांतर में जो सबसे बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है वह ये है कि केवल जनसंख्या नियंत्रण के चक्कर में हम धीरे-धीरे न केवल योग्यता की बलि दे देंगे, बल्कि औसत योग्यता वालों को ऐसे स्थानों पर बैठाते नजर आएँगे जहाँ बैठने लायक वे शायद न हों। भारत जैसे विशाल देश में आरक्षण की जरूरत, उसके स्वरुप और उसके गुण-दोष पर होनेवाली बहसें पहले से ही हमारे सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का हिस्सा हैं। यदि जनसंख्या नियंत्रण के इस रस्ते को अपना लिया जाए तो इसका असर देश के भविष्य पर क्या होगा उस पर एक समग्र विमर्श की आवश्यकता है।

ग्रामीण भारत को लेकर पहले से यह कहा जाता रहा है कि वह भारत है और इंडिया का हिस्सा अभी तक नहीं बन पाया है। जनसंख्या नियंत्रण के इस तरीके का ग्रामीण भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसपर भी एक बहस की आवश्यकता है। कारण यह है कि आज भी ग्रामीण भारत में ही दो संतान नीति का सबसे कम पालन होता है। ऐसे में आर्थिक रूप से पहले से ही हाशिए पर रहने वाले इस भारत का जनसंख्या नियंत्रण के ऐसे प्रस्ताव पर क्या प्रतिक्रिया होगी? जिस भारत के लिए सरकारी नौकरी या सरकारी कल्याण योजनाएँ आज भी जीवनयापन का एक बड़ा साधन हैं, उनके लिए दो संतान या एक संतान नीति का अर्थ हमें समझने की आवश्यकता है। इसपर विमर्श केवल सरकार की ही नहीं, नागरिकों की भी जिम्मेदारी है।

सब कुछ के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार को इस बात के लिए दिया जाना चाहिए कि उसने जनसंख्या नियंत्रण की बात को एक बार पुनः विमर्श की मुख्यधारा में खड़ा कर दिया है। सरकार द्वारा ऐसा किया जाना यह सन्देश देता है कि जनसंख्या आज भी हमारे लिए एक समस्या है, जिस पर न केवल विचार विमर्श होना चाहिए बल्कि इसका समाधान भी खोजा जाना चाहिए। बढ़ती जनसंख्या के आर्थिक और राजनीतिक आयाम आज भी वही हैं जो पहले थे, हमें यह समझने की आवश्यकता है कि इससे पैदा होनेवाले प्रश्न और खतरों को हम और पीछे नहीं फेंक सकते।

जैकी चैन ने जताई चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ने की इच्छा: यूजर्स ने जमकर सुनाया, कहा- ये आदमी बिलकुल गंभीर नहीं… नाटक करता है

अपने मार्शल आर्ट की कला से पूरी दनिया में मशहूर होने वाले हॉलीवुड फिल्मों के सुपरस्टार जैकी चैन ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) से जुड़ने की इच्छा जाहिर की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चैन ने गुरुवार (जुलाई 15, 2021) को बीजिंग के चीन फिल्म एसोसिएशन में इस संबंध में बयान दिया।

M वीडियो न्यूज द्वारा पब्लिश की गई वीडियो के अनुसार ऑडियंस को संबोधित करते हुए चैन ने अपने चीनी होने पर गर्व होने की बात कही। उन्होंने कहा, “मुझे जलन होती है कि आप कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य हैं। मुझे लगता है कि कम्युनिस्ट पार्टी में होना बहुत महान चीज है। सीसीपी जो कहती है, जो वादे करती है उसे कुछ दशकों में पूरा करके दिखाती है।” इसके बाद अपनी स्पीच उन्होंने लोगों का आभार जताते हुए ये कहकर खत्म की कि वह भी कम्युनिस्ट पार्टी का सदस्य होना चाहते हैं।

कम्युनिस्ट पार्टी के समर्थक जैकी चैन से नाखुश

अब चैन का पूरा बयान चीन और वहाँ की कम्युनिस्ट पार्टी के समर्थन में था लेकिन फिर भी चीन के लोग उनसे नाराज हो गए। वैसे तो 67 वर्षीय अभिनेता चीनी पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस के सदस्य भी हैं, जो बीजिंग में एक विधायी सलाहकार निकाय है और बड़े पैमाने पर कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों से बना है। लेकिन इस तरह एक मंच से उनका बयान सुनकर कम्युनिस्ट पार्टी के समर्थक भड़क गए।

सीना वीबो नाम की चीनी माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट पर चीनी यूजर्स ने चैन की इच्छा जानने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने चैन को कम्युनिस्ट पार्टी के लिए बिलकुल लायक नहीं बताया। एक यूजर ने बड़ी बैलेंस प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मुझे जैकी चैन के राष्ट्रवाद और प्रोफेशनलिज्म पर कोई शक नहीं है लेकिन इसकी लाइफस्टाइल…हमारे पार्टी के सदस्यों को पॉजिटिव उदाहरण सेट करना है।” एक अन्य पोस्ट में यूजर ने लिखा, “जहाँ तक है ये आदमी बिलकुल गंभीर नहीं है। ये सिर्फ अलग अलग मौकों पर नाटक करता है।”

कम्युनिस्ट पार्टी को समर्थन देने से नाराज हुए चैन के फैन

बता दें, चैन का इस प्रकार चीनी यूजर्स द्वारा विरोध शायद उनकी निजी जिंदगी के कारण है, जिसे लेकर बात अक्सर उठती है कि उनके एक्स्ट्रमैरिटल अफेयर थे, उनका बेटे जेस चैन ड्रग मामले में पकड़ा गया था और 6 माह की उसे जेल भी हुई थी।

उल्लेखनीय है कि एक ओर जहाँ कम्युनिस्ट पार्टी के समर्थक चैन के बयान पर उन्हें ट्रोल कर रहे हैं, वहीं उनके अपने फैन भी उनके सीसीपी को सपोर्ट करने के कारण खुश नहीं है। कुछ ने चैन की फिल्मों के बॉयकॉट की बात की हैं, कुछ ने एक्टर के बर्ताव पर अपनी नाराजगी दिखाई है।

स्वतंत्रता के विरोध में जैकी चैन के बयान

इससे पहले साल 2019 में चैन ने हॉन्ग कॉन्ग के हालातों को दुखद और निराशाजनक बताया था। उन्होंने उम्मीद की थी कि जल्दी वहाँ शांति लौटे। 2009 में ‘बहुत अधिक स्वतंत्रता’ पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए, चैन ने कहा था, “मुझे यकीन नहीं है कि स्वतंत्रत होना अच्छा है या नहीं। मैं अब वास्तव में भ्रमित हूँ। यदि आप बहुत अधिक स्वतंत्र हैं, तो आप वैसे ही हैं जैसे हॉन्ग कॉन्ग अभी है। यह बहुत अराजक है। ताइवान भी बहुत अराजक है।”

पूरे देश में कोरोना के 41806 नए मामले: केरल में अकेले 15637 और महाराष्ट्र में 8602 – तीसरी लहर इन्हीं 2 राज्यों से?

देश में में जारी कोरोना संकट के बीच चार महीने बाद मंगलवार (जुलाई 13, 2021) को सबसे कम 31,443 नए मरीज मिले थे। इसके अगले दिन से ही कोविड के मामलों में वृद्धि जारी है, जिसे तीसरी लहर से जोड़कर देखा जा रहा है। गुरुवार (जुलाई 15, 2021) को देश में बीते 24 घंटे में 41,806 नए कोरोना मरीज मिले हैं और 581 लोगों की इस संक्रमण से मौत हो गई है। इससे एक दिन पहले, यानी बुधवार (जुलाई 14, 2021) को देश में 38,792 कोरोना के नए मरीज मिले थे और 624 लोगों की मौत हुई थी।

हालाँकि, नए मामलों के आँकड़ें 50,000 से लगातार नीचे बने हुए हैं, लेकिन केरल और महाराष्ट्र में कोरोना के आँकड़े कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। कुल नए मामलों का 37.4 फीसदी अकेले केरल में दर्ज किया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा गुरुवार की सुबह जारी किए गए आँकड़ों के मुताबिक, देश में कोरोना के 41,806 नए मामले दर्ज किए गए हैं। साथ ही 581 मरीजों ने पिछले 24 घंटे में दम तोड़ दिया है।

देश में कोरोना के दर्ज किए गए कुल मामलों की संख्या 3,09,87,880 है। वहीं, इस महामारी के कारण अब तक 4,11,989 मरीजों की मौत हो चुकी है। पिछले 24 घंटों में कोरोना के 39,130 मरीज डिस्चार्ज हुए, जिसके बाद कोरोना को हराने वाले लोगों की संख्या 3,01,43,850 पर पहुँच गई। देश में सक्रिय मामलों की कुल संख्या 4,32,041 है।

सबसे ज्यादा नए मामलों वाले 5 राज्य

सबसे ज्यादा नए कोरोना मामलों वाले राज्यों में केरल सबसे ऊपर है, जहाँ 15,637 नए केस मिले हैं। इसके बाद महाराष्ट्र में 8,602 मामले, आंध्र प्रदेश में 2,591 मामले, तमिलनाडु में 2,458 मामले और ओडिशा में 2,074 मामले दर्ज किए गए हैं। सिर्फ इन 5 राज्यों से देश में आए नए मामलों के 75.02 प्रतिशत मामले सामने आए हैं, जिनमें अकेले केरल 37.4% नए मामलों के लिए जिम्मेदार है।

महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मौतें

पिछले 24 घंटे के आँकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 170 मरीजों की मौत हुई है। वहीं ,केरल में 128 लोग कोरोना की वजह से मौत के मुँह में समा गए। वर्तमान में देश में कोरोना वायरस का रिकवरी रेट बढ़कर 97.28 प्रतिशत हो गया है और दैनिक पॉजिटिविटी रेट 2.15 फीसदी है। देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस की 34,97,058 वैक्सीन लगाई गईं, जिसके बाद कुल वैक्सीनेशन का आँकड़ा 39,13,40,491 पहुँच गया। भारत में बुधवार को कोरोना वायरस के 19,43,488 सैंपल टेस्ट किए गए, जिसके बाद कुल टेस्टिंग का आँकड़ा 43.80 करोड़ हो गया।

कोरोना की तीसरी लहर को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने राज्यों के लिए नियमावली जारी की है। केंद्रीय गृह सचिव ने राज्यों को कोरोना के नियमों का उल्लंघन होते हुए देख कर तुरंत कठोर कदम उठाने का निर्देश दिया है। कोरोना प्रतिबंधात्मक नियमों के पालन में अगर लापरवाही दिखाई दे तो संबंधित विभाग और जगह से संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। 

जब दंगाइयों के सामने दीवार बन गए यशपाल शर्मा और चेतन चौहान: 1984 में ऐसे बचाई सिद्धू, योगराज जैसे सिख क्रिकेटरों की जान

1983 की विश्वविजेता भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य रहे यशपाल शर्मा का मंगलवार (13 जुलाई, 2021) को 66 साल की उम्र में निधन हो गया था। उनकी मौत के बाद से कई लोग उस घटना को याद कर रहे हैं जब उन्होंने चेतन चौहान के साथ मिल तीन क्रिकेटरों को दंगाइयों से बचाया था। ये तीन क्रिकेटर थे, कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू, किसान आंदोलन के दौरान हिंदू घृणा का प्रदर्शन करने वाले योगराज सिंह और राजिंदर घई। उत्तर प्रदेश की सरकार में मंत्री रहे पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान का कोरोना संक्रमण की वजह से 16 अगस्त 2020 को निधन हो गया था। वे अमरोहा से 2 बार सांसद भी रहे थे।

रिपोर्ट के मुताबिक शर्मा और चौहान के साथ सिख खिलाड़ी सिद्धू, योगराज और घई नॉर्थ जोन की टीम में थे। ये लोग ट्रेन से यात्रा कर रहे थे जब सिख विरोधी दंगे चल रहे थे। तीनों सिख खिलाड़ी को कपार्टमेंट में छिपाने के बाद शर्मा और चौहान दंगाइयों के सामने डटकर खड़े हुए और यह सुनिश्चित किया कि उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुँचा सके।

अक्टूबर 31, 1984 में इंदिरा गाँधी की हत्या हुई और उसके बाद पूरे देश में कॉन्ग्रेस नेताओं ने सिख दंगों को भड़काया, जिसमें कई बड़े नेताओं पर भी आरोप लगे। जगदीश टाइटलर और सज्जन सिंह जैसों ने इसके लिए जेल की हवा खाई, वहीं कमलनाथ जैसे लोगों पर अभी भी आरोप लगते हैं कि वो जेल में क्यों नहीं हैं। ये कहानी उसी सिख दंगों के दौरान की है।

1984 में दिलीप ट्रॉफी का सेमीफइनल पुणे में हुआ था। इसके बाद सेंट्रल और नॉर्थ जोन के खिलाड़ी झेलम एक्सप्रेस से लौट रहे थे। मैच 30 अक्टूबर को ख़त्म हुआ और अगले दिन जब वे लोग ट्रेन पकड़ने के लिए तैयार हो रहे थे तो उन्हें सुबह इंदिरा गाँधी की हत्या समाचार प्राप्त हुआ।

हरियाणा के पूर्व ऑफ स्पिनर सरकार तलवार ने इस घटना के सम्बन्ध में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ से बातचीत करते हुए बताया था कि टीम मैनेजर प्रेम भाटिया ने उन सबके लिए झेलम एक्सप्रेस के फर्स्ट क्लास की टिकट कराई थी। उन्होंने कहा कि वो डरावनी यात्रा थी, जिसमें उन्हें दिल्ली पहुँचने में 4 दिन लग गए थे। एक स्टेशन पर जैसे ही ट्रेन रुकी, 40-50 लोग सिखों को ढूँढ़ते हुए ट्रेन में घुस गए।

नवजोत सिंह सिद्धू, राजिंदर घई और योगराज सिंह- उस समय ये तीन सिख क्रिकेटर उन लोगों के साथ ही थे। तलवार ने बताया था कि चेतन चौहान ने आगे बढ़ कर दंगाई भीड़ के साथ बहस की और उन्हें समझाया। जब उन्हें पता चला कि ये भारतीय क्रिकेटरों की टीम है तो दंगाई वहाँ से चले गए। इस दौरान यशपाल शर्मा भी उनके साथ थे, जो आगे आए। सभी खिलाड़ी काफी डरे हुए थे।

नवजोत सिंह सिद्धू और राजिंदर घई तो ट्रेन कम्पार्टमेंट की सबसे निचली सीट के नीचे बैग के पीछे छिपे हुए थे। योगराज सिंह ने सिद्धू से कहा कि वो अपने बाल कटवा लें, जिससे दंगाई भीड़ उन्हें सिख न समझे। योगराज सिंह बताते हैं कि सिद्धू ने तब ये कह कर बाल कटवाने से इनकार कर दिया था कि वो एक सरदार पैदा हुए हैं और सरदार ही मरेंगे। योगराज ने उस घटना की तुलना ‘बर्निंग ट्रेन’ से करते हुए बताया था कि चेतन चौहान और यशपाल ने दंगाइयों से बहस की थी।

एक दंगाई ने चेतन चौहान पर चिल्लाते हुए कहा कि वो लोग यहाँ सिर्फ सरदारों को खोजने के लिए आए हैं और उन्हें कुछ भी नहीं किया जाएगा। इस पर चेतन चौहान ने पलट कर जवाब देते हुए कहा था कि ये सभी उनके भाई हैं और कोई भी दंगाई उन्हें छू भी नहीं सकता। योगराज सिंह ने कहा कि चेतन चौहान जिस तरह से दंगाइयों से निपटे थे, वो काबिले तारीफ था। दूसरे कम्पार्टमेंट में रहे गुरशरण सिंह को भी ये घटना याद है।

उनका तो यहाँ तक कहना है कि अगर उस दिन चेतन चौहान और यशपाल शर्मा नहीं होते तो उनमें से एक भी सरदार शायद ज़िंदा नहीं बचता। उन्होंने बताया कि वो और उत्तर प्रदेश के लेग स्पिनर राजिंदर हंस दूसरी बोगी में थे और उन्हें जब इस घटना के बारे में पता चला तो सभी काफी डर गए थे। इसके बाद चेतन चौहान उनकी बोगी में आए और उन्होंने खिलाड़ियों को आश्वासन दिया कि वो सब सुरक्षित हैं और उन लोगों को दंगाई भीड़ कुछ नहीं करेगी।