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‘बेटों के साथ देखती हूँ पोर्न… पूछती हूँ कैसा लगा’: इंडोनेशियाई सिंगर ने कहा बताती भी हूँ- सेक्स के दौरान क्या करें, क्या न करें

इंडोनेशिया की मशहूर पॉप सिंगर वायू सेतयानिंग ने हाल में दावा किया है कि वो अपने दोनों बेटों के साथ बैठकर पोर्न फिल्म देखती हैं। ऐसा करने के पीछे उनका तर्क है कि वह ऐसा केवल उन्हें सेक्स एजुकेशन के बारे में जागरूक करने के लिए करती हैं। 

49 साल की वायू सेतयानिंग देश में यूनी शारा के नाम से मशहूर हैं। उन्होंने अपने दोनों लड़कों केविन ओब्रिएंट सलोमो सियाहान और सेलो ओबिएंट को सेक्स एजुकेशन देने पर अपने विचार वेन्ना मेलिंदा के सामने रखे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उन्हें अजीब कहते हैं, लेकिन ये सब बिलकुल नॉर्मल बात है।

शारा ने कहा कि आज के समय में नामुमकिन है कि बच्चे पोर्न न देखें। वह कहती हैं, “अगर माता-पिता उन्हें ऐसी सामग्री देखते हुए पकड़ते हैं तो उन्हें बताना चाहिए।” उन्होंने साक्षात्कार में कहा, “मेरे बच्चे भी खुले विचारों वाले हैं। आजकल हमारे बच्चों के लिए पोर्न नहीं देखना असंभव है, चाहे वह ‘एनीमे’ हो या कोई अन्य प्रकार जो आजकल उपलब्ध है।”

द सन के मुताबिक शारा ने कहा कि वह अपने जवान लड़कों को स्वतंत्र रूप से पोर्न देखने की अनुमति देती है और यहाँ तक ​​कि उन्हें सेक्स के बारे में शिक्षित करने के लिए उनके साथ भी ऐसी फिल्में देखती है। साथ ही बताती हैं कि सेक्स के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं।

वह खुद के पुराने ख्यालत वाली होने से इनकार करती हैं और अपने बच्चों को भी खुले दिमाग का होने पर जोर डालती हैं। वह अपने लड़कों से पूछती भी हैं क्या उन्हें ऐसे साथ में पोर्न देखना पसंद है। इंटरव्यू में वह कहती हैं, “मुझे लगता है कि ये अच्छा है कि मैंं उनसे पूछूँ कि उन्हें ऐसे पोर्न देखना कैसा लगता है? लेकिन वह कहते हैं, ‘माँ ऐसे मत पूछो’।”

शारा की अनूठी पेरेंटिंग पर सिंगर की छोटी बहन उन्हें सराहती हैं और कहती हैं कि ये जरूरी है कि बच्चों को सही सेक्स की जानकारी दी जाए। वहीं कुछ अन्य लोग हैं जो इस तरह की पेरेंटिंग की बात सुन कर असहज हो गए और इस पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। एक मनोवैज्ञानिक के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि जब हम बच्चों को अश्लील सामग्री देखते हुए पकड़ते हैं तो चाहे स्थिति कितनी असहज हो हमें गुस्सा नहीं करना चाहिए, क्योंकि अगर ऐसा किया तो वो दोबारा इस काम को चुपके से करेंगे।

गुजरात से दबोचा गया उमर गौतम का साथी सलाहुद्दीन शेख, 4 साल में NGO को ₹10 करोड़ की विदेशी फंडिंग

इस्लामी धर्मांतरण के बड़े गिरोह का पर्दाफाश करने के बाद से ही उत्तर प्रदेश एटीएस इस मामले में लगातार कार्रवाई कर रही है।इसी क्रम में छठी गिरफ्तारी हुई है। गुजरात और यूपी एटीएस ने संयुक्त कार्रवाई में सलाहुद्दीन शेख को दबोचा है।

देश गुजरात की रिपोर्ट के अनुसार सलाहुद्दीन शेख वडोदरा के AFMI के चैरिटेबल ट्रस्ट का मैनेजिंग ट्रस्टी है। वह इस्लामिक धर्मांतरण के लिए उमर गौतम को विदेशी फंडिंग उपलब्ध कराता था।

इंडियन एक्सप्रेस से इस बारे में चर्चा करते हुए गुजरात एटीएस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपित सलाहुद्दीन शेख को वडोदरा से गिरफ्तार कर बुधवार (30 जून) की शाम को अहमदाबाद की अदालत में पेश किया गया जहाँ से 3 जुलाई तक की हिरासत मिली उसे यूपी एटीएस टीम को सौंप दिया गया है।

यूपी एटीएस ने भी अपने वक्तव्य में यह सूचना दी है कि शेख ने कबूल किया है कि वह उमर गौतम को जानता है और धर्मांतरण के लिए उसे हवाला का पैसा उपलब्ध कराता था। शेख ने कथित तौर पर उमर गौतम को 30 लाख रुपए उपलब्ध कराए हैं। उमर गौतम इस्लामिक दावाह केंद्र का संस्थापक है जो इस मामले में जाँच के दायरे में है।

फंडिंग की डिटेल

FCRA के अनुसार 2016-21 के दौरान सलाहुद्दीन शेख के एनजीओ को लगभग 10 करोड़ रुपए की विदेशी फंडिंग मिली। देश गुजरात की रिपोर्ट के अनुसार शेख के संगठन AFMI को 2016-17, 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के दौरान क्रमशः 1.62 करोड़, 1.4 करोड़, 2.75 करोड़ रुपए और 4 करोड़ रुपए की फंडिंग प्राप्त हुई। हालाँकि अभी 2020-21 के आँकड़े प्राप्त नहीं हो सके हैं।

अधिकांश फंड यूके और अमेरिका के संगठनों से प्राप्त हुए हैं। इनमें यूके के जुलेखा जिंगा फाउंडेशन, मजिलिस अल फतह ट्रस्ट, फ़िरदौस फाउंडेशन, इखार विलेज वेल्फेयर ट्रस्ट, नॉर्थ वेस्ट रिलीफ़ ट्रस्ट और गुजराती मुस्लिम एसोसिएशन ऑफ अमेरिका शामिल हैं।   

यह फंड अस्पतालों के संचालन, गरीबों की शिक्षा और विधवाओं को मासिक तौर पर राशन प्रदान करने के नाम पर लिए गए हैं। यह दावा किया गया है कि AFMI चैरिटेबल ट्रस्ट छोटा उदयपुर के जनजातीय इलाकों में अंग्रेजी मीडियम स्कूल चलाता है।

इससे पहले रिपब्लिक टीवी ने एक रिपोर्ट में बताया था कि कट्टरपंथी जाकिर नाईक और उसके सहयोगी बिलाल फिलिप्स के साथ उमर गौतम के संबंध हैं। ये दोनों ही आतंकी संगठनों तालिबान और हमास से जुड़े हुए हैं।

दिल्ली दंगों में शामिल मोहम्मद सिराज को क्राइम ब्रांच ने पकड़ा: ढाबे में कैसे दबोचा, कैसे गिराया- सब वीडियो में कैद; Fact Check

दिल्ली दंगों के डेढ़ साल बाद आज (जुलाई 1, 2021) एक वीडियो सामने आई है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि गुजरात की क्राइम ब्रांच ने दिल्ली दंगों के आरोपितों को ऑन कैमरा बिलकुल फिल्मी अंदाज में पकड़ा। ये वीडियो मुंबई तेज न्यूज नाम के यूट्यूब चैनल पर 1 जुलाई 2021 को ही डाली गई है। इसके विवरण में बताया गया है कि ये ऑपरेशन भरूच में हुआ। वहाँ सिराज मोहम्मद अनवर को पकड़ने के लिए पुलिस ने जाल बिछाया फिर जानकारी होते ही उसे पकड़ लिया।

वीडियो को लेकर दावे

वीडियो में देख सकते हैं कि 4 लोग खाने की टेबल पर बैठे हैं लेकिन थोड़ी देर में वहाँ अलग-अलग दिशा से 5-7 लोग इकट्ठा होते हैं और मौका पाते ही युवकों को दबोच लेते हैं। कुल मिलाकर जिस प्रकार वीडियो में नजर आ रहा है उस हिसाब से आरोपितों को पकड़ने के इस अंदाज की तारीफ होनी बनती है, लेकिन सही तथ्यों के साथ। दरअसल, वीडियो को लेकर चैनल पर किए गए दावे हकीकत से अलग हैं।

ये घटना गुजरात की ही है। लेकिन आरोपित पर चोरी और रेप जैसे 14 केस दर्ज हैं। आरोपित का नाम सिराज नहीं, किशोर लुहार है। उसके साथ 3 अन्य पकड़े गए हैं। पुलिस ने उसके पास से पिस्तौल बरामद की और उसके बाद लुहार को जमीन पर लिटाया। इस बीच अन्य लोगों की तलाशी की गई। इसके बाद लुहार की चेकिंग हुई।

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज 27 जून की शाम का है। क्राइम ब्रांच के बयान के अनुसार 29 साल का लुहार दीसा का निवासी है और अहमदाबाद नगर में हुए 7, बवसकंठा में हुए 5, सिरोही और झालोर में हुए 2 अपराधों में शामिल हैं। पुलिस ने उसके पास से 1 मैग्जीन, 5 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।

इसके अलावा मालूम हो कि मुंबई तेज न्यूज पर जो वीडियो अपलोड की गई है उसमें भरूच में हुई गिरफ्तारी की बात है। बता दें कि ये घटना फर्जी नहीं है, बस इसके साथ जोड़कर दिखाई गई वीडियो दूसरी घटना से संबंधित है।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, भरूच में भी लोकल क्राइम ब्रांच अधिकारियों ने मंगलवार को एक आदमी को गिरफ्तार किया था। इसकी पहचान सिराज मंजूर आलम अंसारी के तौर पर हुई है जो बिहार के भीमपुरा इलाके का निवासी है। भरूच पुलिस ने दरोल चोकड़ी हाइवे से उसे पड़का। सिराज की गिरफ्तारी आर्म्स एक्ट के तहत हुई है। उसके पास से  कथित तौर पर दो पिस्तौल, 7.65 मिमी के 19 कारतूस सहित हथियार जब्त किए। भरूच एलसीबी, पुलिस निरीक्षक जेएन जाला ने कहा, “प्राथमिक पूछताछ के बाद, आरोपित ने कबूल किया कि वह उन्हें (हथियार) बेचने के लिए अपने पैतृक स्थान से हथियार लाए थे।”

सिख धर्मांतरण मामला: लड़की की उम्र पर ‘द क्विंट’ का गड़बड़झाला, पकड़े जाने पर चुपके से कर दी एडिटिंग

फर्जी खबर फैलाने के मामले में अपनी पहचान बना चुके वामपंथी पोर्टल ‘द क्विंट’ ने इस बार सिख लड़की के अपहरण और उसके धर्मांतरण पर झूठ परोसा है। अपनी हालिया रिपोर्ट में उसने अपहृत और इस्लाम में धर्मांतरित सिख लड़की की उम्र को लेकर झूठ बोला और जब पकड़ा गया तो चुपके से एडिटिंग करके सच लिख दिया।

मंगलवार (29 जून 2021) को ‘द क्विंट’ ने इस मामले पर एक रिपोर्ट छापी, जिसमें बताया गया कि जम्मू-कश्मीर में इस्लाम में धर्मांतरित करने के बाद मुस्लिम व्यक्ति से शादी करने वाली दो लड़कियों में से एक मनप्रीत कौर की मंगलवार को दोबारा एक सिख व्यक्ति से शादी कर दी गई है। यह शादी श्रीनगर निवासी मनप्रीत को उसके परिवार को सौंपने के सिर्फ दो दिन बाद हुई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मनप्रीत 18 साल की नहीं, बल्कि 26 साल की है और मुस्लिम व्यक्ति 60 साल का नहीं 29 साल का है।

साभार: संदीप सिंह

पोर्टल ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस के बयान का हवाला देकर शाहिद की उम्र के बारे में फैलाई गई अफवाहों को खारिज किया और इसे निराधार बताया। इस झूठ का सिलसिला यहीं नहीं रुका। दो दिन बाद मनप्रीत की शादी जब सिख लड़के सुखबीर सिंह से करवाई गई तो द क्विंट ने ऐसे दिखाया जैसे लड़की की शादी उसकी इच्छा के विरुद्ध करवाई गई हो।

बाली ने किया ‘द क्विंट’ के झूठ का भंडाफोड़

सोशल मीडिया पर ‘द क्विंट’ द्वारा परोसे गए इस झूठ की सिख एक्टिविस्ट अमान बाली ने पोल खोली। बाली वही शख्स हैं जिन्होंने इन अपहरण मामलों पर आगे बढ़कर रिपोर्ट की। उन्होंने ट्विटर पर मामला उठाते हुए ‘द क्विंट’ पर फेक न्यूज फैलाने का आरोप लगाया।

बाली ने कई ट्विट्स के माध्यम से बताया कि क्विंट ने मनप्रीत की उम्र के बारे में जानबूझकर गलत जानकारी दी और अपराध को कम दिखाने का प्रयास किया गया। उनके अनुसार, मनप्रीत को एक कश्मीरी मुसलमान ने अगवा करके धर्म परिवर्तन करवाकर उससे निकाह कर ली थी।

बाली ने क्विंट के दावों को खारिज करते उसे 18 और 19 का बताया और ये भी कहा कि इन तथ्यों की पुष्टि परिवार ने की है। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने भी यही कहा है। अपने लगातार ट्वीटों में अमान ने प्रूफ देकर बताया कि लड़की 26 साल की नहीं बल्कि 18 की है। अपने ट्वीट में बाली ने अपनी उस गलती को भी स्वीकार किया, जहाँ अपने बयान में वो ये कह रहे थे कि लड़की की उम्र 26 साल है। 

सिख एक्टिविस्ट ने कई डॉक्यूमेंट्स जैसे आधार कार्ड, एंट्रेंस एग्जाम, एडमिशन टिकट आदि दिखाते हुए लड़की को 18 साल का साबित किया। उन्होंने बताया कि मामले में बरगलाने के लिए क्विंट ने ऐसी अफवाह उड़ाई, जबकि कागज बताते हैं कि लड़की सिर्फ 18 साल 3 माह की है।

बाली द्वारा पेश किए गए मनप्रीत कौर की उम्र के प्रमाण नीचे हैं। सबमें उसकी उम्र 18 साल की है।

मनमीत कौर का आधार कार्ड
जम्मू कश्मीर सरकार द्वारा जारी मनप्रीत का डोमिसाइल सर्टिफिकेट (साभार: अमान बाली)
मनप्रीत कौर का कॉलेज डॉक्यूमेंट (साभार:अमान बाली)

अब इन डॉक्यूमेंट्स में जहाँ लड़की की उम्र देखकर स्पष्ट पता चलता है कि वो 18 साल की है, ऐसे में ‘द क्विंट’ ने अपने झूठ को चुपके से एडिट कर दिया और बिना कोई माफी माँगे या नोटिस दिए अपनी रिपोर्ट भी पब्लिश कर दी।

क्विंट की रिपोर्ट पहले और अब

उक्त तस्वीर से साफ है कि क्विंट ने मनप्रीत कौर पर झूठ फैलाय ताकि ये बताया जा सके कि मनप्रीत बड़ी हैं और उन्होंने अपनी मर्जी से एक मुस्लिम व्यक्ति से निकाह किया।

मुस्लिम व्यक्ति की उम्र पर अटकलें

बता दें कि एक ओर जहाँ मनप्रीत की उम्र को लेकर सवाल जबाव के बाद हकीकत सामने आई, वहीं मुस्लिम व्यक्ति की उम्र पर भी बातें हो रही हैं। अमान बाली ने लड़की के परिवार के हवाले से कहा था कि शाहिद की उम्र 60 साल है, जबकि ‘द क्विंट’ उसे सिर्फ 29 साल का बता रहा है। अब इन कयासों पर भी बाली ने विराम लगा दिया है। उन्होंने कहा है कि शाहिद की उम्र 29 साल की है। कई बयानों के कारण उनसे गलती हुई थी और उन्होंने गलत उम्र बता दी थी।

सिख ‘कार्यकर्ता’ ने यह भी कहा कि वह क्विंट के लेखक जहांगीर के खिलाफ अपहृत सिख लड़की की उम्र के बारे में गलत सूचना देने के लिए कानूनी कार्रवाई भी करेंगे। अमान बाली ने बताया कि क्विंट ने अपनी रिपोर्ट में कहीं भी परिवार का बयान नहीं छापा, सिर्फ पुलिस स्टेटमेंट के हवाले से रिपोर्ट की है।

सिख समुदाय के खिलाफ भड़काया

अपनी रिपोर्ट में क्विंट ने कई बार एडिटिंग की है। इनमें एक दनमीत नाम की लड़की का बयान जोड़ा गया है, जिसने मर्जी से 2014 में एक कश्मीरी मुसलमान से शादी की और द क्विंट को ये बताया कि वो अपने बैचमेट से शादी करने के बाद खुश है।

क्विंट ने ये भी लिखा कि शादी के बाद उसे सिख समुदाय के लोगों ने धमकियाँ दीं और उसके पति के ख़िलाफ़ ब्रेनवॉश कर भड़काया। मनमीत कौर के पूरे मामले में इस बयान को छापकर क्विंट ने दिखाना चाहा कि कैसे सिख समुदाय के लोग मुस्लिम व्यक्ति से शादी होने पर बेटियों को डराते-धमकाते हैं।

अपनी रिपोर्ट में दनमीत का बयान जोड़कर क्विंट बताना चाहता था कि मनमीत ने दोबारा शादी सिख समुदाय के दबाव में की है। इसी तरह जहाँ कोर्ट में लड़की के माता-पिता को अदालत में जाने की इजाजत नहीं मिली और उन्हें बाहर बैठाया गया, उसे भी ‘द क्विंट’ ने बताना चाहा कि ये तो आम बात है। कहीं भी ऐसा प्रावधान नहीं है कि महिला के माता-पिता उसके पास रहें तभी वह बयान दर्ज होगा।

परिवार के बयान को किया दरकिनार

क्विंट ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से सभी आरोपों को खारिज किया था कि लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन करवाया गया। उसके मुताबिक, इस बात के सबूत नहीं हैं कि लड़कियों पर दबाव बनाया गया और उन्होंने जो भी किया अपनी मर्जी से किया।

उन्होंने रिपोर्ट के लिए सिख नेता जगमोहन सिंह रैना से भी बात की, जिन्होंने अपहरण के ख़िलाफ शुरू प्रदर्शन को बेबुनियाद बताया और साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली कोशिश कहा। रैना ने कहा, “हमने (कश्मीरी सिख और मुस्लिम) दशकों से अपने सुख और दुख साझा किए हैं। मैं कश्मीर में कुछ हिंदू दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं के पहुँचने की परेशान करने वाली खबरें सुन रहा हूँ। वे हमारे बीच सांप्रदायिक दरार पैदा करना चाहते हैं, लेकिन हम उन्हें सफल नहीं होने देंगे।”

सिख कार्यकर्ता ने बताई सच्चाई

बाली ने जम्मू-कश्मीर पुलिस पर भ्रामक बयान जारी करने के बारे में अपने ट्वीट में बताया। उन्होंने कहा, “पुलिस का बयान पूर्ण सत्य नहीं है और हम सभी जानते हैं कि पुलिस का पक्ष क्या हैं जहाँ चीजें हाथ से निकल रही हैं।” उन्होंने क्विंट पर मामले में भाई कृष्णजीत सिंह के बयान की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया और वेबसाइट पर इस बात को तूल देने का आरोप लगाया कि जैसे किसी प्रकार का कोई जबरन धर्म परिवर्तन नहीं हुआ।

अमान बाली  ने यह भी कहा कि कश्मीर के जीपीसी और जगमोहन सिंह रैना का उल्लेख हास्यास्पद है क्योंकि वे नेशनल कॉन्फ्रेंस का हिस्सा थे और उन्हीं लोगों में से थे जिन्होंने चित्तिसिंहपोरा और महजूर नगर हत्याकांड में बयान जारी कर जाँच की प्रगति में भी बाधा डाली। बाली ने ट्वीट में कहा कि एक कश्मीरी सिख ढूँढ के दिखाओ जिसे रैना पर यकीन हो।

इसके बाद अगले ट्वीट में बाली ने ये भी दावा किया कि क्विंट ने अपनी रिपोर्ट में ये तक नहीं बताया कि मामले की सुनवाई में मुस्लिम परिवार को कोर्ट में जाने की इजाजत दी गई, लेकिन लड़की के घरवालों को अंदर नहीं जाने दिया गया।

सिख लड़कियों के अपहरण का मामला

बता दें कि 26 जून को जम्मू कश्मीर में सिख लड़कियों के अपहरण का मामला सामने आया था। एक मामला बड़गाम से था और दूसरा महजूर नगर से था। एक केस में लड़की ने अपनी मुस्लिम सहेली के घर निकाह फंक्शन को अंटेंड किया और वहीं से उसका अपहरण कर लिया गया। बाद में धर्म परिवर्तन करवाकर उसका निकाह करवा दिया गया।

घाटी में लड़कियों के अपहरण की बात जैसे ही सिख समुदाय में पहुँची मामले ने तूल पकड़ लिया। प्रदर्शन करके माँग की जाने लगी कि सिख लड़कियों को लव जिहाद से बचाया जाए। शिरोमणि अकाली दल नेता मंजिंदर सिंह सिरसा और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने ये मामला सोशल मीडिया पर उठाया कि उनके समुदाय की लड़कियाँ वापस की जाएँ।

पूरी घटना बताने वाले गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी-बडगाम के अध्यक्ष सरदार संतपाल सिंह के मुताबिक, दोनों में से एक लड़की मानसिक रूप से विक्षिप्त थी जिसे मुस्लिम युवक ने उसे प्यार और शादी का झाँसा देकर उसका धर्म परिवर्तन कराया। उन्होंने कहा, “सिख समुदाय की एक लड़की का जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया है। वह मानसिक रूप से स्थिर नहीं है। युवक ने उसे प्यार का झाँसा दिया। यह कोई लव अफेयर नहीं बल्कि लव जिहाद का साफ मामला है। सरकार हमारे खिलाफ नकारात्मक काम कर रही है।”

इतना ही नहीं लड़की के परिजनों को कोर्ट में अनुमति नहीं दी गई। लड़की के परिवार और रिश्तेदार अदालत के बाहर बैठे थे क्योंकि उन्हें कोविड नियमों के कारण अदालती कार्यवाही में शामिल होने से रोक दिया गया था। हालाँकि, दूसरी ओर अदालत ने मुस्लिम परिवार के बयान दर्ज किए।

‘हिंदू बच्चों पर थोप रहे इस्लामी तरीके से कटा माँस’: देहरादून का वेल्हम स्कूल हलाल मीट के टेंडर पर फँसा

26 जून 2021 को देहरादून के एक लोकल अखबार में प्रकाशित वेल्हम बॉयज स्कूल के टेंडर नोटिस ने क्षेत्र में बवाल मचा दिया। इस नोटिस में स्कूल ने हलाल मीट और अन्य प्रोडक्ट्स के लिए सप्लॉयर्स को आमंत्रित किया था। टेंडर के प्रकाश में आने के बाद बजरंग दल इसे लेकर प्रदर्शन कर रहा है। संगठन ने इसे हिंदू विद्यार्थियों को जबरन हलाल खिलाने के षड्यंत्र जैसा बताया है।

पूरे विवाद की बाबत जब ऑपइंडिया ने बजरंग दल के नगर संयोजक विकास वर्मा से बात की तो उन्होंने कहा, “स्कूल में अधिकांश छात्र हिंदू समुदाय के हैं। हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि स्कूल इस्लामी तरीके से काटे गए माँस को हिंदू बच्चों पर क्यों थोपना चाहता है।”

बजरंग दल ने अपनी शिकायत डलानवाला पुलिस थाने में दर्ज की है। प्रदेश सीएम को भी मामले से अवगत करवाया है। शिकायत में बताया गया है कि स्कूल में हर तरह के बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे में हलाल माँस के लिए निविदा हिंदू छात्रों और समुदाय का अपमान है। मामले को संज्ञान में लाने का मकसद यही है कि टेंडर वापस लेने के लिए तत्काल कार्रवाई हो।

संगठन ने इस केस में प्रशासन और पुलिस की विफलता को भी उजागर करते हुए कहा कि वे मामले को सड़कों तक ले जा गे और प्रदर्शन करेंगे। विकास बताते हैं कि ये सब क्षेत्र में विवाद बढ़ाने की कोशिश है। पुलिस को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। स्कूल का कहना है कि वो हलाल और झटका दोनों मीट देते हैं। हालाँकि जब इसके प्रमाण माँगे गए तो स्कूल कोई दस्तावेज नहीं दिखा पाया।

शिकायत की कॉपी

विवाद पर वाइस प्रिंसिपल महेश कांडपाल ने News18 को बताया कि हलाल के लिए टेंडर पहले ही मँगाए जा चुके हैं, लेकिन झटका के लिए शनिवार को टेंडर निकाला जाएगा। वहीं जागरण से बात करते हुए स्कूल के प्राचार्य ने बताया कि सप्ताह में तीन दिन क्रमश: हलाल और झटका मीट परोसा जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि हलाल और झटका माँस के लिए उनके पास अलग-अलग आपूर्तिकर्ता हैं।

हमने जब टेंडर नोटिस को देखा तो पता चला कि सूची में रोटी, दाल, चावल जैसे कई चीजों का उल्लेख था। फिर आखिर सिर्फ झटका मीट को इस टेंडर से क्यों हटाया गया, ये समझ से बाहर है। डालनवाला के थाना प्रभारी मणिभूषण श्रीवास्तव ने कहा कि उन्हें शिकायत मिली है और पुलिस मामले की जाँच करेगी।

पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाते बजरंग दल कार्यकर्ता (साभार: विकास वर्मा)

‘यह नरमी का हकदार नहीं’: अब्दुल मर्चेंट और अब्दुल राशिद को उम्रकैद, गुलशन कुमार की हत्या का मामला

टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार की हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (1 जुलाई 2021) को अब्दुल रऊफ मर्चेंट की याचिका को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने उसे सेशन कोर्ट द्वारा दिए आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। सेशन कोर्ट ने 1997 में हुई गुलशन कुमार की हत्या के मामले में आतंकवादी दाऊद इब्राहिम के सहयोगी अब्दुल रऊफ को वर्ष 2002 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

इस मामले में कोर्ट ने TIPS इंडस्ट्रीज के मालिक रमेश तौरानी को बरी करने के फैसले को बरकरार रखते हुए महाराष्ट्र सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। तौरानी को बरी करने के सेशन कोर्ट के फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की थी।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एसएस जाधव और जस्टिस एनआर बोरकर की बेंच ने कहा कि अब्दुल रऊफ मर्चेंट का ‘आपराधिक इतिहास’ रहा है। बेंच ने कहा, “वह किसी तरह का छूट पाने के लायक नहीं है। वर्ष 2009 में गिरफ्तारी के बाद फरलो पर बाहर आने के बाद वह फरार हो गया था। उसके बाद भी उसने अपने आपराधिक कृत्यों को जारी रखा। इसलिए न्याय के हित में यही है कि वह किसी भी तरह का नरमी का अधिकारी नहीं है।” बता दें कि परोल पर बाहर आने के बाद वह बांग्लादेश भाग गया था।

गुलशन कुमार के हत्यारे की सजा को बरकरार रखते हुए हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “अब्दुल रऊफ मर्चेंट के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 307 के तहत सत्र अदालत के न्यायाधीश के 29 अप्रैल 2002 के फैसले को बरकरार रखा गया है। इसके अलावा, अपीलकर्ता (रऊफ) को आईपीसी की धारा 120-बी के तहत दोषी पाया गया है। हालाँकि, याचिकाकर्ता को आईपीसी की धारा 392 (डकैती) और 397 (डकैती या मौत के प्रयास में मौत का कारण बनना) के आरोपों से बरी कर दिया गया है।”

इसके साथ ही बॉम्बे हाई कोर्ट ने अब्दुल रऊफ के भाई अब्दुल राशिद मर्चेंट को बरी किए जाने के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया है। हालाँकि, अब्दुल राशिद को आजीवन कारावास की सजा काटनी ही होगी।

गौरतलब है कि 12 अगस्त 1997 को मुंबई के जुहू के जीत नगर में मंदिर से बाहर निकलते समय गुलशन कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हमलावरों ने 16 गोलियाँ मारी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इस मामले में संगीतकार नदीम का नाम सामने आया था।

रिपोर्ट के मुताबिक गुलशन कुमार की कंपनी टी-सीरीज ने नदीम-श्रवण की जोड़ी को म्यूजिक इंडस्ट्री में सफलता दिलाई थी। कुछ समय बाद गुलशन कुमार और नदीम के बीच विवाद हो गया, जिसके बाद नदीम को इंडस्ट्री में काम मिलना ही बंद हो गया था। कहा जाता है कि नदीम ने गैंगस्टर अबु सलेम से मदद माँगी और अबु सलेम ने अपने गुर्गों से गुलशन कुमार की हत्या करवा दी। वारदात के बाद नदीम भारत से फरार हो गया। वह अभी भी वह मुंबई पुलिस की पकड़ से बाहर है।

पंजाब को दिल्ली बना दूँगा… वादा ही वादा, होर्डिंग ही होर्डिंग, चेहरा ही चेहरा

भारतीय लोकतंत्र के नए अलिखित सिद्धांत के अनुसार किसी राज्य में चुनावी वातावरण मापने के दो बैरोमीटर हैं। पहला, जब राज्य का मुख्यमंत्री प्रशांत किशोर को अपना राजनीतिक सलाहकार नियुक्त कर दे। दूसरा, अरविन्द केजरीवाल दिल्ली छोड़कर उस राज्य में पहुँच जाएँ। राजनीतिक सलाहकार के रूप में प्रशांत किशोर की नियुक्ति बताती है कि चुनाव आठ-दस महीने रह गए हैं और केजरीवाल के दिल्ली चलकर उस राज्य में पहुँचने का अर्थ होता है कि चुनाव अब बस चार-पाँच महीने दूर हैं। कह सकते हैं कि प्रशांत किशोर और केजरीवाल इस सदी में चुनावी दबाव नापने के सबसे सटीक बैरोमीटर हैं।

इस सिद्धांत के अनुसार देखें तो पंजाब में चुनाव आने वाले हैं।

एक समय था जब चुनावी दबाव के सबसे निपुण बैरोमीटर स्वर्गीय रामविलास पासवान हुआ करते थे। कुछ लोग तो उन्हें बैरोमीटर से भी आगे का मानते थे और उन्हें ‘मौसम वैज्ञानिक’ कहते थे। पासवान भी अपने लिए मौसम वैज्ञानिक जैसे विशेषण सुनकर प्रसन्न भी होते थे। चुनावी दबाव मापने की उनकी इसी क्षमता का प्रताप था कि वे अधिकतर समय सत्ता में ही रहे। यह शोध का विषय हो सकता है कि मौसम वैज्ञानिक बड़ा होता है या बैरोमीटर, पर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि आनेवाली संभावित राजनीतिक आँधी, तूफ़ान या बर्फबारी वगैरह की आहट सबसे पहले पासवान तक ही पहुँचती थी और वे आवश्यकतानुसार छाता, कम्बल वगैरह से लैस हो लेते थे।

कुछ इतिहासकारों का मानना है कि पासवान का राजनीतिक काल चुनावी मौसम के पूर्वानुमान की दृष्टि से भारतीय राजनीति का स्वर्णकाल था।

बैरोमीटर के रूप में केजरीवाल और प्रशांत किशोर की इस क्षेत्र में एंट्री फिलहाल नई है। इस क्षेत्र में इन महान बैरोमीटरों के पदार्पण के साथ ही पिछले सात-आठ वर्षों से चुनावी मौसम की जानकारी अब केवल चुनाव आयोग के कंट्रोल में नहीं रहती। अब चुनावी सरगर्मियों की खबर के लिए लोगों का विश्वास चुनाव आयोग के नियमों से अधिक केजरीवाल के ट्रेवल प्लान पर है। केजरीवाल आज पंजाब में। केजरीवाल कल गोवा में। केजरीवाल परसों गुजरात में। मतलब यह कि इन राज्यों में चुनाव दूर नहीं हैं।

वे जहाँ जाते हैं, बिजली प्रधान भाषण देते हैं। उनकी बात सुनकर लगता है कि ये आदमी राजनेता है या बिजली मिस्त्री? कभी-कभी तो लगता है कि पिछले आठ वर्षों से इस आदमी का सलाहकार कोई ज्योतिषी है जो ज्योतिषी बनने से पहले बिजली मिस्त्री का काम करता था और उसी की सलाह के अनुसार ही इनका भाषण लिखा जाता है। जैसे ज्योतिषी ने सलाह दी हो; पुत्र, जहाँ जाना बिजली की बात करना। पंजाब गए तो कहना; आज देश में सबसे महँगी बिजली पंजाब में है। गुजरात गए तो कहना; आज देश में सबसे महँगी बिजली गुजरात में है। उत्तर प्रदेश गए तो कहना; आज देश में सबसे महँगी बिजली उत्तर प्रदेश में है। अभी हाल में उन्हें पंजाब के किसी शहर में चलते देखा। देखकर लगा अभी पीछे से कोई वहीं गाना न शुरू कर दे; बाबूजी जरा धीरे चलो, बिजली खड़ी यहाँ बिजली खड़ी।

आज पूरे भारत में सबसे महँगी बिजली इसी प्रदेश में है का अगला कदम होता; हम आपको मुफ्त में बिजली देंगे। इकोनॉमिस्ट सुनकर सोचता है; ओ भाई, महँगी बिजली का विलोम सस्ती बिजली होता है या मुफ्त की बिजली? मुझे तो लगता है कि कोई पूछ लेगा तो पास खड़े राघव चढ्ढा या आतिशी मार्लेना फट से कहेंगे; महँगी बिजली का विलोम मुफ्त बिजली होता है, यह हमने स्कूल में पढ़ा था। आपको कुछ नहीं पता है, हमारे एजुकेशन मिनिस्टर सिसोदिया जी यही कहते हैं।

मुझे तो कभी-कभी लगता है कि सुप्रीम कोर्ट ने ऑक्सीजन ऑडिट करवा कर इनका प्लान चौपट कर दिया नहीं तो दिल्ली में आवश्यकता का चार गुना ऑक्सीजन माँगने के पीछे शायद इनका प्लान था कि पंजाब के चुनाव को केवल बिजली प्रधान न रखकर इस बार ऑक्सीजन प्रधान भी रखेंगे। ये ऑडिट न हुई होती तो शायद ये बताने में नहीं हिचकते कि देखिए, पूरे भारत में राज्य सरकारों ने कोरोना के मरीजों के लिए जितना ऑक्सीजन उपलब्ध कराया, हमने दिल्ली में उसका चार गुना उपलब्ध करवाया। ये आम आदमी पार्टी है, ये कुछ भी कह सकती है।

वैसे पंजाब को देखकर केजरीवाल की बाँछें खिल जाती होंगी। वे यह सोचकर मन ही मन खुद होते होंगे कि; इत्ते बड़े-बड़े शहर। इनमें विज्ञापन की कितनी होर्डिंग लगेंगी। हर होर्डिंग पर मैं खड़ा रहूँगा। लोगों से पूछते हुए; वैक्सीन लिया क्या? या फिर ये बताते हुए कि; हमारे पंजाब की मोहल्ला क्लिनिक की नक़ल कनाड्डे की सरकार भी करना चाहती है। या फिर; पंजाब सरकार को काम करने दीजिए प्रधानमंत्री सर। पंजाब सरकार सही काम कर रही है। कितने होर्डिंग होंगे। ओय होय होय।

सपनों में खो जाते होंगे; यहाँ तो गुरुमुखी में भी अखबार छपते हैं। कितने विज्ञापन छपेंगे। हर अखबार के फ्रंट पेज पर मैं। कहीं हाथ हिलाते हुए तो कहीं हाथ जोड़ते हुए। बस दिखने का तो मज़ा ही आ जाएगा। यहाँ यूनिवर्सिटी भी ढेरों हैं। यहाँ के पत्रकारों को यूनिवर्सिटी की एडमिशन कमेटी में रखने का मज़ा ही आ जाएगा। राज्य बड़ा तो बजट बड़ा। यहाँ लेफ्टिनेंट गवर्नर भी नहीं है। यहाँ गवर्नर है। वो हमें परेशान नहीं करेगा, बल्कि हम उसे परेशान करेंगे।

दिल्ली में तो एक ही जल बोर्ड है। यहाँ तो कई शहर हैं तो कई जल बोर्ड होंगे। सब जगह मुफ्त पानी दूँगा। पानी मुफ्त हुआ तो टैंकर का बिजनेस गज़ब होगा। एक दिल्ली में इतने टैंकर होते हैं तो यहाँ तो शहर ही शहर। टैंकर का टेंडर करवा दिया जाएगा। कॉन्ट्रैक्ट ही कॉन्ट्रैक्ट। विज्ञापन ही विज्ञापन। हर तरफ मेरा ही चेहरा। दिल्ली तो केवल एक शहर है। यहाँ शहर ही शहर हैं। ज्यादा शहर तो ज्यादा सड़क। ज्यादा सड़क तो ज्यादा स्पीड ब्रेकर। ज्यादा स्पीड ब्रेकर तो ज्यादा उद्घाटन। ज्यादा उद्घाटन तो ज्यादा होर्डिंग।  

दिल्ली में तो एक ही नदी है तो केवल उसको साफ़ करने का वादा कर पाता हूँ। यहाँ तो नदियाँ ही नदियाँ। हर बरस सबको साफ़ करने का वादा करूँगा। दिल्ली अकेला शहर है तो केवल उसे लन्दन बनाने का वादा कर पाता हूँ। यहाँ तो शहर ही शहर। किसी को न्यूयॉर्क बनाने का वादा करूँगा तो किसी को लास वेगास बनाने का। बस वादा ही वादा, होर्डिंग ही होर्डिंग, चेहरा ही चेहरा। पंजाब को दिल्ली बना दूँगा।

पंजाब को दिल्ली बना दूँगा!!!

मुस्लिमों के लिए हर राज्य में रिजर्व हो उपमुख्यमंत्री का पद: UP चुनाव से पहले ओवैसी की पार्टी के नेता की डिमांड

असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुसलमीन (AIMIM) के नेता असीम वकार ने कहा है कि सभी राज्यों में उपमुख्यमंत्री का पद पूरी तरह से मुस्लिमों के लिए आरक्षित होना चाहिए। उन्होंने सपा, बसपा और कॉन्ग्रेस से इस मुद्दे पर अपने विचार स्पष्ट करने को भी कहा है। एआईएमआईएम नेता का कहना है कि पार्टियाँ मुसलमानों से वोट तो माँगती है, लेकिन जब उसके बदले डिप्टी सीएम पद की माँग की जाती है तो उन्हें समस्या होने लगती है।

यह पूछे जाने पर कि क्या उत्तर प्रदेश में एआईएमआईएम के गठबंधन साथी इस पर सहमत होंगे, वकार ने कहा कि ओम प्रकाश राजभर उन्हें ‘ना’ नहीं कहेंगे। उन्होंने कहा कि देर-सबेर सभी राजनीतिक दलों को मुसलमानों को डिप्टी सीएम पद देना ही होगा।

कॉन्ग्रेस नेता राशिद अल्वी ने वकार के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि असदुद्दीन ओवैसी को पता होना चाहिए कि इस तरह के सांप्रदायिक बयानों से बीजेपी को फायदा होता है। अल्वी ने कहा, “यदि आप वास्तव में मुस्लिम समुदाय के शुभचिंतक हैं, तो कृपया खुद को यूपी की राजनीति से दूर रखें।”

सपा ने कहा कि अगर किसी में अपने समुदाय का नेतृत्व करने की क्षमता है, तो वह अल्पसंख्यक या दलित समुदाय से हो, उसे नेतृत्व करने का मौका दिया जाना चाहिए। वकार पर मुस्लिम समुदाय को बेवकूफ बनाने का आरोप लगाते हुए AAP प्रवक्ता वैभव माहेश्वरी ने कहा कि चुनी हुई सरकार को उनके मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, उन्हें शिक्षित करना चाहिए, गरीबी और बेरोजगारी को दूर करना चाहिए। उन्होंने कहा, “सिर्फ डिप्टी सीएम की बात कर, अगर आप पूरे समुदाय के प्रतिनिधि बनने की कोशिश कर रहे हैं, तो आप उन्हें बेवकूफ बना रहे हैं।”

दरअसल मुसलमानों के लिए डिप्टी सीएम पद के आरक्षण को बढ़ावा देने वाला वकार का यह बयान राजभर द्वारा पावर-शेयरिंग फॉर्मूले के बाद आया है। राजभर ने उल्लेख किया कि 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में संकल्प मोर्चा गठबंधन की जीत होने पर हर साल अलग-अलग समुदाय से मुख्यमंत्री (CM) हो। इससे गठबंधन के सभी भागीदारों के लिए समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। .

उन्होंने कहा, “अगर हम 2022 में सरकार बनाते हैं, तो हम स्पष्ट हैं कि पाँच साल में पाँच मुख्यमंत्री होंगे। एक मुस्लिम, एक राजभर, एक चौहान, एक कुशवाहा और एक पटेल होगा। हमारे पास एक साल में चार डिप्टी सीएम और पाँच साल में 20 होंगे।”

सुलेमान युवकों को घर लाता और अपनी ही बीवी का करवाता रेप, प्राइवेट पार्ट पर रगड़ देता था मिर्च और झंडू बाम

राजस्थान के धौलपुर से गैंगरेप का एक मामला सामने आया है, जहाँ पर पैसों के लिए एक शौहर ने अपनी नवविवाहिता बीवी का दोस्तों से गैंगरेप करवाया। इतना ही नहीं, विरोध करने पर शौहर सुलेमान ने महिला के प्राइवेट पार्ट में मिर्ची और झंडू बाम लगाकर असहनीय दर्द तक दिया। पुलिस ने इस मामले में शिकायत दर्ज कर आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है। 

यह मामला धौलपुर जिले के बसेड़ी थाना इलाके के एक गाँव का है। बताया जा रहा है कि दहेज के लालच में नवविवाहिता से उसके शौहर ने ऐसी दरिंदगी करवाई। पीड़िता का आरोप है कि ससुराल वालों ने उससे तीन लाख रुपए की माँग की। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई। 

23 साल की पीड़िता ने इस घटना को लेकर थाने में मामला दर्ज कराया है। पुलिस को बताया कि 14 जनवरी 2021 को उसकी निकाह हुआ था और उसके बाद से ही ससुराल वाले उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे थे। 26 जून की रात करीब 12 बजे उसके शौहर के साथ एक अनजान युवक घर पर आया और शौहर के सामने ही युवक ने उसके मुँह में कपड़ा ठूँस दिया और रेप किया।

दूसरे दिन भी पति कुछ युवकों को घर लेकर आया और उन्होंने भी गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया। पीड़िता ने रिपोर्ट में बताया कि विरोध करने पर उसके पति ने उसके प्राइवेट पार्ट में मिर्च और झंडू बाम लगा कर उसे बेहोश तक कर दिया था। पीड़िता का आरोप है रेप के बदले उसके पति ने युवकों से पैसे भी लिए थे। 

दुष्कर्म की घटना की सूचना मिलते ही पीड़िता के परिजन उसके पास पहुँचे। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के रहने वाले परिजन अपनी बेटी के पास पहुँचे तो उसकी हालत देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। परिजनों ने बेटी को साथ लेकर बसेड़ी थाने में मामला दर्ज कराया।

पीड़िता ने पति और अन्य लोगों के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज कर पीड़िता का मेडिकल कराया और आरोपितों की तलाश में जुट गई है। पीड़िता के ससुराल वालों को पकड़ने के लिए दबिश दी गई, लेकिन सभी आरोपित फरार हैं।

हेल्थ बजट डबल, 7 साल में 15 नए AIIMS का काम: डॉक्टर्स डे पर बोले PM मोदी- जो काम पिछली शताब्दी में होना था वह अब हो रहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (01 जुलाई) डॉक्टर्स डे (डॉक्टर दिवस) के अवसर पर देश के सभी डॉक्टरों को बधाई दी और उनकी सेवा और समर्पण के लिए अपनी कृतज्ञता प्रकट की।

पीएम मोदी ने कोरोना वायरस के इस संकट के दौरान डॉक्टरों द्वारा दिए गए योगदान पर कहा कि पिछले डेढ़ सालों से जब देश कोरोना वायरस से इतनी बड़ी जंग लड़ रहा है तब तब डॉक्टरों ने दिन-रात एक कर लाखों लोगों का जीवन बचाया। ऐसा करते हुए कई डॉक्टर्स ने देश के लिए अपना जीवन भी समर्पित कर दिया। पीएम मोदी ने ऐसे डॉक्टर्स को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवारजनों के प्रति अपनी संवेदना भी प्रकट की।

पीएम मोदी ने कहा कि जिस तरह से कोरोना वायरस अपने रूप बदल रहा है और नए स्ट्रेन सामने आ रहे हैं, देश के डॉक्टर्स लगातार प्रोटोकॉल्स बनाने में सहायता कर रहे हैं। साथ ही इन डॉक्टर्स का ज्ञान एवं अनुभव भी इस वायरस से लड़ने में हमारी सहायता कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने डॉक्टर्स को भगवान का दूसरा रूप बताते हुए कहा कि कई बार अनेकों लोगों का जीवन किसी बीमारी या दुर्घटना के कारण संकट में आया होगा अथवा कई बार यह भी लगा होगा कि कोई अपना बिछड़ने वाला है, ऐसे में डॉक्टर देवदूत बनकर सामने आ जाते हैं।

पिछले कुछ दशकों में चिकित्सा के क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर पर जिस तरीके से पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, उसके विषय में पीएम मोदी ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में जितना ध्यान दिया जाना चाहिए था, वह नहीं दिया गया। साथ ही पीएम मोदी ने बढ़ी हुई जनसंख्या के विषय में भी कहा कि जिस प्रकार जनसंख्या का बोझ लगातार बढ़ता गया उसके बावजूद देश में संक्रमण की दर और मृत्यु दर कई विकसित देशों की तुलना में सँभली हुई नजर आई और इसका श्रेय परिश्रमी डॉक्टर्स और फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को जाता है।

इसके अलावा पीएम मोदी ने चिकित्सा क्षेत्र में वर्तमान एनडीए सरकार के द्वारा किए गए व्यय पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस साल हेल्थ सेक्टर के लिए बजट का एलोकेशन दोगुने से भी ज्यादा अर्थात 2 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक हुआ है, साथ ही चिकित्सा सुविधाओं की कमी वाले क्षेत्रों में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की वृद्धि के लिए 50,000 करोड़ रुपए की क्रेडिट गारंटी स्कीम भी लाई गई है।

पीएम मोदी ने यह भी बताया कि पिछले कुछ सालों में देश में मेडिकल कॉलेज विशेषकर एम्स की संख्या में बढ़ोतरी हुई है जिससे देश में अंडरग्रेजुएट्स सीट्स में डेढ़ गुणा से ज्यादा जबकि पीजी सीट्स में 80 फीसदी का इजाफा हुआ है। पीएम मोदी ने यह भी कहा है कि मेडिकल फील्ड के लोग योग के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए भी आगे आए हैं और जो काम पिछली शताब्दी में किया जाना चाहिए था, वह अब किया जा रहा है।

ज्ञात हो कि भारत में हर साल 1 जुलाई को राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। डॉक्टर्स डे प्रसिद्ध चिकित्सक और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉ. बीसी रॉय की स्मृति में मनाया जाता है। डॉ. रॉय का जन्म 1 जुलाई 1882 को हुआ था और उनकी मृत्यु भी 1 जुलाई को ही सन् 1962 में हुई थी। 1961 में डॉ. रॉय को भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था। हालाँकि दुनिया के कई अन्य देश में भी डॉक्टर्स डे मनाया जाता है लेकिन प्रत्येक देश में इसके लिए अलग तारीखें तय की हैं।