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शकील ने सुमैय्या से की लव मैरिज, पहली बीवी और बच्चों का राज खुला तो हत्या कर दी: घर में लाश बंद कर कई राज्यों में घूमता रहा

महाराष्ट्र के पुणे में नाई का काम करने वाले एक मुस्लिम व्यक्ति ने अपनी दूसरी पत्नी की हत्या कर दी। इसके बाद आरोपित शव को घर में बंद कर फरार हो गया। जब स्थानीय लोगों को उसके घर से आ रही दुर्गंध ने परेशान किया तो उन्होंने इसकी शिकायत की। उसके बाद 18 जून 2021 को महिला का शव घर से बरामद किया गया। आशंका जताई जा रही है कि आरोपित ने 13-14 जून 2021 की रात में वारदात को अंजाम दिया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, घटना पुणे के भवानी पेठ इलाके के सप्कल कॉम्प्लेक्स की है। यहीं पर आरोपित का घर स्थित है, जहाँ उसने शव को रखा हुआ था। 33 वर्षीय आरोपित की पहचान सलीम शकील शेख के रूप में हुई है, जबकि मृतक (दूसरी पत्नी) महिला की पहचान सुमैय्या सलीम शेख (46) के रूप में हुई है। सलीम के साथ उसकी 15 साल की बहन भी रहती थी। सलीम की बहन ने ही उसे गिरफ्तार करने में पुलिस की मदद की। फिलहाल उसे लोकल कोर्ट ने पुलिस की हिरासत में भेज दिया है।

पुलिस के मुताबिक, “सलीम पहले से विवाहित था और उसके तीन बच्चे भी थे। डेढ़ साल पहले उसने सुमैय्या से लव मैरिज की थी। उसकी पहली बीवी और बच्चे मुंधवा में रहते थे, जबकि दूसरी बीवी भवानी पेठ में रहती थी। जब दूसरी बीवी को आरोपित की पहली बीवी के बारे में पता चला तो दोनों के बीच झगड़ा होने लगा। झगड़े के दौरान ही सलीम ने दूसरी बीवी का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद घर को बंद कर फरार हो गया।”

गिरफ्तारी से बचने के लिए कई राज्यों में भागा

हत्या करने के बाद आरोपित सलीम शकील 15 साल की नाबालिग लड़की को लेकर उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ स्थित अपने रिश्तेदार के घर चला गया। इसके बाद वह गिरफ्तारी से बचने के लिए मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात भाग गया। बाद में वह फिर से पुणे लौटा।

समर्थ पुलिस स्टेशन के निरीक्षक (क्राइम) उल्हास कदम ने बताया, “आरोपित ने अपना मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर रखा था। इस बीच मृतक महिला की दोस्त तलाश में उसके घर आई। हमें 15 वर्षीय किशोरी के बारे में पता चलने के बाद हम उत्तर प्रदेश गए और उसे वहाँ से वापस लाए। इसके बाद लड़की ने सारी कहानी बयाँ की। मुंधवा में रहने वाला आरोपित का परिवार भी उसके जोर देने पर पुणे छोड़कर भाग गया था। इसके बाद हम उन्हें ढूँढकर पुणे लाए और आरोपित को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। उसे धोखे से पुणे बुलाया गया और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।” उस पर धारा 302 (हत्या) और 342 (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

8 साल की उम्र में AK-47 और कुरान: अब्बू-अम्मी-भाई-बहन की मौत के बाद 13 साल के ‘आतंकी’ को लंदन की याद

ISIS में बर्बरता की कहानियों में आज मामला एक 13 साल के लड़के का है, जिसे ISIS आतंकियों ने तब से अपने कब्जे में रखा, जब से वो 8 साल का था। अब्दुल्ला नाम का ये बच्चा मूलत: तो पाकिस्तान से है लेकिन पला-बढ़ा ये लंदन में। बाद में इसे इसके अब्बू-अम्मी छोटी बहन और 2 भाइयों के साथ सीरिया ले आए। आज वो सब मर चुके हैं और ये अकेला लड़का डिटेंशन कैंप में है, जहाँ से वह अपने ब्रिटेन वाले घर लौटना चाहता है।

अब्दुल्ला की कहानी पत्रकार एंड्रियू ड्रूरी के माध्यम से हम तक पहुँचती है, जिन्होंने जून की शुरुआत में अपनी आने वाली फिल्म ‘डेंजर जोन’ के लिए वहाँ जाकर अबदुल्ला से बात की। डेलीमेल की खबर के अनुसार, अब्दुल्ला ने बात करते हुए बताया कि वह फुटबॉल क्लब चेल्सी (chelsea) और फास्टफूड चेन मैकडोनल्ड (mcdonalds) का फैन है।

अब्दुल्ला के अनुसार उसके परिवार के अधिकांश लोग मार्च 2019 में अमेरिकी हवाई हमलों में मारे गए। उसे अब कुर्द द्वारा संचालित होरी सेंटर में रखा जा रहा है। ये एक तरह से उन लड़कों के लिए पुनर्वास सुविधा है, जो ISIS की हिंसा में आरोपित हैं।

अब्दुल्ला अपनी ठीक-ठाक अंग्रेजी में ये बताने की कोशिश करता है कि उसे सीरिया में आए 1 साल से भी कम का समय हुआ था, जब उसे एके-47 राइफल का इस्तेमाल करना सिखाया गया। वह ये भी दावा करता है कि उसने कभी इसका इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन आईएसआईएस चाहता था कि वह और अन्य बच्चे ऐसा करें।

अब्दुल्ला उन बच्चों में से एक है, जिन्हें ISIS ने ‘खिलाफत कब्स’ के रूप में बिलकुल उसी तरह बढ़ावा दिया, जैसे हिटलर ने युवाओं को दिया था। उसने बताया कि जब वह पहली बार ISIS स्कूल गया तो उसे सिखाया ये गया था कि कैसे हथियार चलाना है। यह बात अब्दुल्ला ने अपनी अम्मी को बताई थी।

अब्दुल्ला ने अपनी अम्मी से कहा था,

“मैं ये सब नहीं कर सकता। मेरी अम्मी ने मुझे कहा कि मैं दूसरे स्कूल जाऊँ। फिर दूसरे स्कूल में भी मुझे कुरान और यही सब चीजें सिखाई गईं। मैं लंदन से हूँ और मूलत: पाकिस्तान से। लेकिन मेरे पास पासपोर्ट लंदन का है। मुझे याद ही नहीं है कि बघौज (जहाँ उसकी माँ-बहन मारी गई) में कब आए। यहाँ बहुत एयरस्ट्राइक होती थी। इनमें से कई को तो मैं भूल चुका हूँ।”

डेली मेल की खबर के अनुसार अब्दुल्ला का झुकाव जापानी कार्टून बनाने की ओर है। हालाँकि उसे ये तक नहीं मालूम कि उसका जन्मदिन कब आता है। अब्दुल्ला के अनुसार, उसे पहले इसकी जानकारी थी लेकिन अब वो भूल चुका है। वह कहता है,

“लंदन में जब हम थे तो जन्मदिन मनाते थे, केक खाते थे। लेकिन यहाँ कभी ऐसा नहीं हुआ। मैं अपनी माँ को याद करता हूँ। उन्हें बघौज में मारा गया। कई लोगों ने मुझे बताया कि वो मर गई हैं। दो बहनें थीं। एक मुझसे बड़ी और एक छोटी और दो भाई थे। बड़ा भाई अल शद्दादी में मरा और छोटा मेरी माँ और बहन के साथ। मेरी बड़ी बहन की शादी हुई थी और वह आदमी ISIS का था, मैं उस आदमी के साथ रह रहा था, लेकिन फिर उसकी हत्या कर दी गई।”

वह बताता है कि उसके जीजा की मौत के बाद लोगों ने उसे कहा कि वह बघौज से बाहर आए क्योंकि ये जगह उसके लिए सही नहीं है। वह ये भी मानता है कि ISIS का कोई अपना भविष्य नहीं है। बघौज में उसने एक आदमी को खुद को उड़ाते हुए देखा था।

आज अब्दुल्ला और उसके जैसे 50 लड़कों के पुनर्वास के लिए उन्हें 9 घंटे डिटेंशन सेंटर में बंद रखा जाता है, जहाँ कुर्द डेमोक्रेटिक यूनियन पार्टी (पीवाईडी) युवाओं के लिए काम कर रही है। लेकिन अब्दुल्ला को अब उसका लंदन वाला घर याद आता है। वह कम्प्यूटर और फास्टफूड को मिस करता है। प्लेस्टेशन पर गेम खेलने की सोचता है। लेकिन वह ये नहीं कर सकता क्योंकि वह एक तरह की जेल में है।

उसके मुताबिक, वहाँ 9 बजे दरवाजे बंद हो जाते हैं और उन्हें 6 बजे उठा दिया जाता है। इसके बाद उन्हें खिलाया जाता है। फिर ब्रेकफास्ट और फिर लंच और इसके बाद फिर वो खाली बैठते हैं और मिल कर आपस में बात करते हैं। इस डिटेंशन सेंटर में अब्दुल्ला डेढ़ साल है। इससे पहले एक साल रक्का में भी रहा, जो बघौज से बेहतर जगह थी। वहाँ उसे इंटरनेट मिला और कार भी। लेकिन अब जहाँ वह है, वहाँ मैकडॉनल्ड भी नहीं है।

भारतीय कूटनीति का असर: 8 यूरोपीय देशों ने कोविशील्ड को ‘ग्रीन पासपोर्ट’ में शामिल किया, अब क्वारंटाइन अनिवार्य नहीं

भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा बनाई गई कोविशील्ड वैक्सीन लगवाने वाले लोगों को यूरोप की यात्रा के दौरान कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा। यूरोपीय यूनियन के सात देशों और स्विटजरलैंड ने अपने ‘ग्रीन पास’ में भारत की कोविशील्ड वैक्सीन को भी शामिल कर लिया है। इससे लोग इन देशों की यात्रा बिना किसी रोक-टोक के कर सकेंगे।

दरअसल, इस मामले में भारत ने यूरोपीय यूनियन से कहा था कि वह केवल पारस्परिकता के आधार पर भारत की यात्रा करने वाले यूरोपीय यूनियन के यात्रियों को अनिवार्य क्वारंटाइन से छूट देगा। इसके लिए यूरोपीय यूनियन के देशों को वहाँ जुलाई से लागू होने वाले ग्रीन पास में भारत में बनी कोविशील्ड और कोवैक्सिन को भी शामिल करने की आवश्यकता है।

इससे पहले भारत ने यूरोपीय यूनियन को अपने वैक्सीन पासपोर्ट में भारत में बनी वैक्सीन को स्वीकार करने में आनाकानी करने पर आगाह किया था। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा था कि वह यूरोपीय संघ के डिजिटल कोविड प्रमाण पत्र को तब तक मान्यता नहीं देगी, जब तक कि यूरोपीय यूनियन भारतीय वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सिन को मान्यता नहीं देते।

वैक्सीन राष्ट्रवाद पहला ऐसा कूटनीतिक कदम है, जिसके तहत भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि वह केवल पारस्परिक आधार पर ही यूरोपीय यूनियन के डिजिटल कोविड प्रमाण पत्रों को मान्यता देगी।

पारस्परिक स्वीकृति का मतलब यह है कि यूरोपीय यूनियन के वैक्सीन प्रमाण पत्र देश में तब तक स्वीकार नहीं किए जाएँगे, जब तक कि ‘ग्रीन पास’ कहे जाने वाले डिजिटल प्रमाण पत्र में वह भारतीय वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सिन को शामिल नहीं कर लेता। ऐसी स्थिति में भारत की यात्रा करने वाले यूरोपीय यूनियन के लोगों को अनिवार्य क्वारंटाइन का सामना करना पड़ता।

विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया, “हमने यूरोपीय यूनियन के सदस्य देशों से व्यक्तिगत रूप से उन सभी लोगों को छूट देने पर विचार करने का अनुरोध किया था, जिन्होंने भारत में कोविड-19 का टीका कोविशील्ड और कोवैक्सीन का डोज और कोविन पोर्टल द्वारा जारी वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट लिया है।”

यूरोपीय यूनियन का डिजिटल कोविड सर्टिफिकेट या ‘ग्रीन पास’ एक जुलाई से लागू होने की उम्मीद है। इसके तहत यात्रा के दौरान केवल उन्हीं लोगों को अनिवार्य क्वारंटाइन से छूट मिलेगी, जिन्होंने यूरोपीय यूनियन द्वारा स्वीकृत टीके लगवाए हैं।

इस मामले में यूरोपीय यूनियन ने दावा किया है कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी के पास स्वीकृति के लिए पहले आवेदन ही नहीं किया था। यूरोपीय यूनियन ने वादा किया था कि अगर संस्था आवेदन करती है तो इस पर यथाशीघ्र विचार किया जाएगा। हालाँकि, इस मामले में भारत ने तर्क दिया है कि यूरोपीय मेडिकल एजेंसी को एप्लीकेशन के बजाय CoWin प्रमाणपत्र को स्वीकार करके देश में बने टीकों पर विचार करना चाहिए।

मंगलवार (29 जून 2021) को सीरम इंस्टीट्यूट ने अपने यूरोपीय पार्टनर एस्ट्राजेनेका के जरिए कोविशील्ड के लिए यूरोपीय संघ के प्राधिकरण में आवेदन किया। हालाँकि, यूरोपियन मेडिसिन एजेंसी ने कहा कि उससे कोविशील्ड को मंजूरी देने के लिए अनुरोध ही नहीं किया गया।

विदेश मंत्री ने उठाया था ‘वैक्सीन पासपोर्ट’ का मुद्दा

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार (29 जून 2021) को यूरोपीय यूनियन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अपनी बैठक में टीकाकरण पासपोर्ट पहल में कोविशील्ड को शामिल करने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने ट्वीट किया, “टीके के उत्पादन और उसके एक्सेस के लिए चर्चा की। यूरोप की यात्रा के लिए ‘कोविशील्ड’ के लिए अनुमति ली। इसे फॉलो किया जाएगा।”

यूरोपीय संघ के ‘वैक्सीन पासपोर्ट’ कार्यक्रम के तहत केवल चार वैक्सीनों वैक्सजेवरिया (ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका), कोमिरनाटी (फाइजर-बायोएनटेक), स्पाइकवैक्स (मॉडर्ना) और जानसेन – जॉनसन एंड जॉनसन को मंजूरी मिली है। हैरानी की बात यह है कि एस्ट्राजेनेका – वैक्सजेवरिया की तरह होने के बाद भी कोविशील्ड इसमें शामिल नहीं किया गया था। वहीं, कोवैक्सिन पर अभी इसलिए विचार नहीं किया गया, क्योंकि इसे WHO की मंजूरी मिलना बाकी है।

इस बीच, यूरोपीय संघ ने मंगलवार (29 जून 2021) को यह भी कहा कि यूरोप की यात्रा करने के लिए ‘ग्रीन पास’ अनिवार्य शर्त नहीं है, क्योंकि यूनियन के देश डब्ल्यूएचओ द्वारा मान्यता प्राप्त टीकों जैसे कोविशील्ड को स्वीकार करने के लिए स्वतंत्र हैं।

गणतंत्र दिवस दंगा: लाल किले पर ‘केसरी झंडा’ लगाने वाले जुगराज सिंह के परिवार को SGPC ने दिए ₹1 लाख

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC), अमृतसर ने इस साल गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर ‘केसरी झंडा’ लगाने वाले जुगराज सिंह के परिवार को 30 जून 2021 को सम्मानित किया। राष्ट्रीय राजधानी में 26 जनवरी को हुए किसानों के प्रदर्शन के दौरान दंगाइयों ने लाल किले पर कब्जा कर उस पर झंडा फहराया था। दंगाइयों ने पुलिस पर भी हमला किया था और ऐतिहासिक स्मारक में तोड़फोड़ की थी।

SGPC ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “SGPC ने लाल किले पर केसरी झंडा फहराने वाले सिख युवक भाई जुगराज सिंह के परिवार को 1 लाख रुपए से सम्मानित किया। SGPC सदस्य भाई मंजीत सिंह ने यह प्रशंसा राशि भाई जुगराज सिंह के परिवार को सौंपी।”

यह पहली बार नहीं है जब एसजीपीसी ने जुगराज सिंह के परिवार को ‘सम्मान’ दिया है। इसी साल मार्च में स्वर्ण मंदिर में दंगाई नवरीत सिंह की याद में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। 26 जनवरी के दंगों के दौरान बैरिकेड तोड़ने की कोशिश में ट्रैक्टर पलटने से उसकी मौत हुई थी।

उस मौके पर 21 वर्षीय दंगाई के पिता जुगरत सिंह को समिति द्वारा सम्मानित किया गया। जुगराज सिंह पंजाब के तरनतारन जिले के वान तारा सिंह गाँव का रहने वाला है। गणतंत्र दिवस दंगों को लेकर दिल्ली पुलिस ने उसके खिलाफ दंगा और देशद्रोह का मामला दर्ज किया था। 

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने 29 जून को बूटा सिंह को तलवंडी साबो से गिरफ्तार किया था। 25 वर्षीय सिंह ने गणतंत्र दिवस दंगों के दौरान जुगराज सिंह को झंडा फहराने में मदद की थी। उसकी गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपए का इनाम था। पुलिस को बूटा सिंह को गिरफ्तार करने से रोकने के लिए ग्रामीणों ने गाँव के अंदर की सड़कों को जाम कर दिया था। हालाँकि मौके पर मौजूद पंजाब पुलिस के अधिकारियों की मदद से दिल्ली पुलिस उसे गिरफ्तार कर सकी। एक अन्य आरोपित गुरजोत सिंह को भी 28 जून को गिरफ्तार किया गया था।

गणतंत्र दिवस दंगा

26 जनवरी को कथित किसानों के समूह ट्रैक्टर रैली के बहाने दिल्ली में जबरदस्ती घुस आए। उन्होंने दंगे जैसी स्थिति पैदा कर दी जिसमें 300 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए और करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ। दंगों से सामने आए दृश्यों में देखा गया था कि कथित किसानों ने ट्रैक्टरों से पुलिसकर्मियों को कुचलने की कोशिश की। उन पर तलवारों, डंडों और अन्य हथियारों से हमला किया और लाल किले में पुलिसकर्मियों पर बेरहमी से हमला किया। 

दीप सिद्धू, गुरजोत सिंह, जुगराज सिंह और अन्य सहित दंगाइयों का एक समूह लाल किले पर पहुँचा और पवित्र सिख चिह्न के साथ दो झंडे फहराए। दिलचस्प बात यह है कि यह झंडा आतंकवादी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ के उकसावे में आकर फहराया गया था, जिसके संस्थापक ने लाल किले पर झंडा फहराने वाले व्यक्ति के लिए नकद पुरस्कार की घोषणा की थी। दंगों के संबंध में कुल 43 मामले दर्ज किए गए थे।

महाराष्ट्र: 55 साल के शिक्षक को अपना ही डेथ सर्टिफिकेट ले जाने के लिए नगर निगम से कॉल

कैसा लगे कि आप सुबह-सुबह रोजमर्रा के काम में व्यस्त हों और नगर निगम कार्यालय से आपका ही मृत्यु प्रमाण पत्र लेने का कॉल आ जाए? है न अजीब? महाराष्ट्र के ठाणे में ऐसा ही 55 वर्षीय शिक्षक चंद्रशेखर देसाई हुआ है। ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (TMC) से देसाई के पास खुद का मृत्यु प्रमाण-पत्र कलेक्ट करने के लिए फोन आ गया।

ठाणे के मानपाडा के रहने वाले चंद्रशेखर देसाई घाटकोपर के एक स्कूल में पदस्थ हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास एक महिला का फोन आया जो खुद को TMC के स्वास्थ्य विभाग की कर्मचारी बता रही थी। देसाई ने कहा कि महिला ने फोन पर कहा कि उसने चंद्रशेखर देसाई के नाम से मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए फोन किया है। देसाई ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जब महिला ने यह जाना कि वह चंद्रशेखर देसाई से ही बातचीत कर रही है तो वह आश्चर्यचकित रह गई और उसने प्रश्न किया कि देसाई के घर में किसी की मृत्यु Covid-19 संक्रमण के चलते हुई है? इसके बाद फोन कट गया।

देसाई ने बताया कि पिछले साल अगस्त में वह कोरोना वायरस से संक्रमित हुए थे। हालाँकि वह घर पर ही आइसोलेशन में रहे और वहीं उनका इलाज भी चला। इसके बाद वह पूरी तरह स्वस्थ भी हो गए थे। देसाई ने यह भी बताया कि आइसोलेशन के दौरान उनके पास स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए फोन भी आया था।

TMC से फोन आने के बाद देसाई कार्यालय गए और वहाँ यह पाया कि उनके बारे में जो भी जानकारियाँ वहाँ दर्ज की गई थीं वह सब सही थीं। देसाई ने यह भी कहा कि उन्होंने अधिकारियों के पास अपनी शिकायत दर्ज करा दी है क्योंकि यदि इस गलती को नहीं सुधारा गया तो रिकॉर्ड के अनुसार वह मृत घोषित हैं, ऐसे में भविष्य में उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

ठाणे के मेयर नरेश ने बताया कि राज्य सरकार के द्वारा सूची जारी की गई थी जो आईसीएमआर पुणे से आई थी। इस सूची में उन सभी लोगों के नाम थे जिनकी मृत्यु ठाणे से बाहर हुई है लेकिन वे ठाणे के निवासी थे। उन्होंने कहा कि किसी गलती के कारण देसाई का नाम भी इस सूची में आ गया। हालाँकि TMC ने कोई मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं किया था। यह एक वैरिफिकेशन कॉल था और हमने इस गलती का संज्ञान ले लिया है।

TMC के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा है कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण ऐसा हुआ है और हम इसे सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसमें TMC की इसमें कोई भूमिका नहीं है, बल्कि यहाँ से तो सिर्फ वैरिफिकेशन कॉल ही किया जाता है। देसाई का कहना है कि अच्छा हुआ कि वो अपना फोन घर पर नहीं भूले अन्यथा TMC से आए इस कॉल को अगर उनकी पत्नी या उनकी बूढ़ी माँ रिसीव कर लेती तो ये उनके लिए सही नहीं होता।

3 बच्चे, उम्र: 2, 5 और 7 साल; मोहम्मद नौशाद ने आइसक्रीम में चूहे मारने वाला जहर मिला खिला दी

महाराष्ट्र के मुंबई में मोहम्मद अली नौशाद ने अपने तीन बच्‍चों को आइसक्रीम में चूहे मारने वाला जहर मिलाकर खिला दिया। इससे 5 साल के अलीशान मोहम्मद अली की मौत हो गई। दो अन्य बच्चे जिनकी 2 और 7 है, उनका इलाज चल रहा है।

नौशाद की बीबी की शिकायत पर मानखुर्द पुलिस ने आईपीसी की धारा 302 समेत विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मियाँ-बीबी में झगड़ा हुआ था, जिसके बाद 27 वर्षीय आरोपित ने इस वारदात को अंजाम दिया।

मानखुर्द पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर प्रकाश चौगले ने बताया, “घटना 25 जून 2021 की है। हमें सायन अस्पताल से कॉल आया था कि बच्चों को जहर दिया गया है। अभिभावकों ने हमें बताया कि जब वे सो रहे थे, तब बच्चों ने चूहे का जहर खा लिया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।”

उन्होंने कहा कि तीनों बच्चों की पहचान सात वर्षीय अलीना अंसारी, 5 वर्षीय अलीशान अंसारी और 2 साल के अरमान अंसारी के तौर पर हुई है। 29 जून, 2021 को अस्पताल से फिर कॉल आया और बताया गया कि अलीशान की मौत हो गई है। चौगले ने कहा, “हम फिर अस्पताल गए और उस दौरान बच्चों की माँ नाजिया बेगम ने खुलासा किया कि उसके शौहर ने बच्चों को जहर दिया था।”

पुलिस को पता चला है कि पैसे को लेकर नाजिया और नौशाद रोज झगड़ते थे। नाजिया के मुताबिक, नौशाद एक कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करता है। उसे वहाँ रोज 500 रुपए मिलते हैं। लेकिन घर चलाने के लिए वह उसे हर रोज केवल 100-150 रुपए ही देता था। इसी बात पर दोनों के बीच लड़ाई हुई तो आरोपित अपने सभी बच्चों को लेकर साली के घर चला गया। साथ में चूहा मारने का जहर भी ले गया था। रास्ते में बेटी अलीना ने जब आइसक्रीम खिलाने को कहा तो उसने जहर मिलाकर उन्हें खिला दिया।

संतोष जब हो गया अनाथ… तो उसे बना दिया गया अब्दुल्ला: अब सगे हिंदू भाइयों को गुंडों से मरवाने की चाहत

देश में इस्लामिक धर्मान्तरण की एक के बाद एक खबर आ रही है। अब गुजरात से भी धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया है। राज्य के सूरत शहर स्थित आजाद नगर का रहने वाला संतोष पंढारे धर्मान्तरण कर अब्दुल्ला बन गया है। इस मामले की जानकारी मिलते ही उसके बड़े भाइयों ने उसे वापस लाने की कोशिश की लेकिन वो नाकाम रहे।

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, सूरत का रहने वाला संतोष धर्मान्तरण का शिकार हो गया है। वह आजाद नगर में अपने दो बड़े भाइयों के साथ रहता था। तीनों के माता-पिता का बेचपन में देहांत हो गया था। अनाथ होने के बाद तीनों का जीवन गरीबी में कट रहा था। वर्ष 2013 में एक दिन 16 वर्षीय नाबालिग संतोष (अब अब्दुल्ला) घर से काम की तलाश में निकला तो वापस नहीं लौटा।

उसके भाइयों ने उसे काफी ढूँढा, लेकिन वो नहीं मिला। करीब 7-8 साल बीतने के बाद एक दिन वह अपने भाइयों के माोबाइल पर फोन करता है और अपने बारे में बताता है। फोन पर बात होने के बाद उसके भाइयों राजेश और दिनेश ने उसे सूरत वापस लाने की काफी कोशिश की, लेकिन वो उसमें सफल नहीं हुए।

संतोष के भाई राजेश के मुताबिक, उस दौरान वो नाबालिग था, इसलिए उसे पहला-फुसला कर कुछ लोग अपने साथ ले गए और धर्मान्तरण करवा दिया। उसने ये भी बताया कि दो साल पहले उसे सूरत लाया गया था, जहाँ उसने अपने ही भाइयों को मारने के लिए गुंडे बुलाए थे। हालाँकि, एक दिन अचानक से वो गायब हो गया था।

संतोष के भाइयों के मुताबिक, उन्होंने बजरंग दल के देवी प्रसाद दुबे से मदद माँगी थी। इसके अलावा सूरत के तत्कालीन कमिश्नर सतीश शर्मा ने मामले में संज्ञान लिया था। जिसके बाद क्राइम ब्राँच की टीम उसे सूरत वापस लाई थी। फिलहाल वो उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में कहीं रह रहा है।

इस्लामिक धर्मान्तरण

गौरतलब है कि रविवार (27 जून 2021) को उत्तर प्रदेश की फिरोजाबाद पुलिस ने गुजरात की 15 साल की नाबालिग लड़की से रेप और धर्मांतरण के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था।

इससे पहले उत्तर प्रदेश एटीएस ने गाजियाबाद मोहम्मद उमर गौतम और मौलाना जहांगीर काजी कासमी को धर्मान्तरण के मामले में गिरफ्तार किया था। इन्होंने कबूल किया था कि आरोपितों ने अब तक 1000 से ज्यादा लोगों के धर्मान्तरण कराए हैं। दिल्ली के जामिया नगर में इस्लामिक सेंटर से ये रैकेट चला रहे थे।

इसके अलावा जम्मू कश्मीर में सिख लड़कियों के जबरन धर्मान्तरण के मामले के बाद भी उत्तर प्रदेश में भी सिख धर्मान्तरण का मामला सामने आया। इन मामलों के सामने आने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने कड़े एक्शन लेने की बात कही थी।

200 ‘किसानों’ के खिलाफ FIR: गाजीपुर बॉर्डर पर BJP नेता-कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट, वीडियो से खोज रही UP पुलिस

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर बॉर्डर पर मंगलवार (जून 29, 2021) को ‘किसानों’ और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच हुई भिड़ंत के बाद पुलिस ने अब तक भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के 200 अज्ञात कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज करवाई है। इन सबके खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 148, 223, 352, 427 और 506 के तहत केस दर्ज किया गया है। मामले में कौशांबी पुलिस थाने में बीजेपी के जनरल सेक्रटरी अमित वाल्मिकी ने शिकायत दर्ज करवाई है, जिनके स्वागत के दौरान ही यह हंगामा हुआ। 

अमित बाल्मीकि ने दर्ज करवाई एफआईआर

दरअसल, बुधवार (जून 30, 2021) को भाजपा कार्यकर्ता अपने नेता अमित बाल्मीकि का स्वागत करने के लिए गाजीपुर बॉर्डर पर पहुँचे थे। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं की वहाँ कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे ‘किसानों’ के साथ झड़प हो गई। इसके बाद दोनों ओर से डंडे चलने लगे। किसान अधिक थे, इसलिए वह भारी पड़े और भाजपा कार्यकर्ताओं को भागना पड़ा।

अब इस मामले में बीजेपी नेता अमित बाल्मीकि की शिकायत पर 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ कौशाम्बी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि झड़प के दौरान पुलिस ने वीडियो भी बनाया था, जिसके आधार पर आरोपितों की शिनाख्त की जा रही है।

बीजेपी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मौजूद ‘किसानों’ ने पहले गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए और फिर कार्यकर्ताओं पर तलवार, भाले, लाठी-डंडों से हमला किया। वहीं ‘किसान’ नेता इसे बीजेपी की साजिश बता रहे हैं। तनाव बढ़ता देख मौके पर तैनात पुलिस ने फटाफट बीजेपी के काफिले को वहाँ से रवाना किया।

बीजेपी कार्यकर्ता महेश नेगी ने कहा था, ”हम लोग गाजीपुर बॉर्डर पर स्वागत कार्यक्रम कर रहे थे, इसी दौरान किसानों ने हम पर अचानक हमला कर दिया। इस हमले में अमित बाल्मीकि को चोट आई है।” महेश ने कहा कि उन्होंने कार्यक्रम की सूचना पुलिस को दी थी और वो वहाँ पर मौजूद भी थी। लेकिन इसके बावजूद किसानों ने उन पर हमला कर दिया।

राकेश टिकैत ने दी धमकी

इस झड़प पर ‘किसान’ नेता राकेश टिकैत ने कहा, “भाजपा के लोग जानबूझकर मंच पर आ गए थे, अगर मंच पर आना है तो बीजेपी छोड़कर आओ, लेकिन यह दिखाना कि हमने गाजीपुर के मंच पर भाजपा का झंडा फहरा कर कब्जा कर लिया, यह गलत है, ऐसे लोगों के बक्कल उधेड़ दिया जाएगा, प्रदेश में फिर कहीं भी नहीं जा सकते हैं, याद रख लेना।”

SDPI नेता सैयद अब्बास गिरफ्तार: बेंगलुरु दंगों का मुख्य साजिशकर्ता, पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ पोस्ट पर शहर में लगाई थी आग

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पिछले साल अगस्त में बेंगलुरु में हुए दंगा मामले के मुख्य साजिशकर्ता को बुधवार (जून 30, 2021) को गिरफ्तार कर लिया। दंगे के दौरान चार लोगों की मौत हो गई थी। एनआईए के एक प्रवक्ता ने बताया कि गोविंदपुर निवासी 38 वर्षीय सैयद अब्बास को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया।

उन्होंने बताया कि अब्बास को बेंगलुरु की विशेष एनआईए अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से उसे 6 दिन के लिए एजेंसी की हिरासत में भेज दिया गया। अब्बास बेंगलुरु में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) का नागवाड़ा वार्ड का अध्यक्ष है। 

गौरतलब है कि इससे पहले बेंगलुरु में हुई हिंसा मामले में फरार चल रहे कॉन्ग्रेस नेता व पूर्व मेयर संपत राज को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। संपत राज को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया था। उन पर हिंसक भीड़ को उकसा कर दंगे भड़काने का आरोप है। पिछले दिनों कोरोना के इलाज के दौरान संपत एक निजी अस्पताल में भर्ती होने के बाद फरार हो गए थे। इसके बाद से पुलिस लगातार इनकी तलाश कर रही थी।

क्या था मामला?

बता दें कि पिछले साल 11 अगस्त को बेंगलुरू में हजारों लोगों ने विधायक के एक रिश्तेदार के जरिए सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट साझा करने को लेकर कॉन्ग्रेस विधायक आर अखंड श्रीनिवास मूर्ति और उनकी बहन जयंती के घरों में आग लगा दी थी। गुस्साई भीड़ ने डीजे हल्ली और केजी हल्ली पुलिस थानों को इस संदेह में अगा लगा दी थी कि विधायक का रिश्तेदार हवालात में है।

इस मामले को लेकर एनआईए ने कहा कि जाँच में सामने आया है कि आरोपित अब्बास ने अन्य साजिशकर्ताओं के साथ मिलकर वाहनों में आग लगाई और पुलिस अधिकारियों पर हमला किया। दरअसल, आरोप लगा था कि विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के भाँजे ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट लिखी थी। ये खबर फैलने के बाद शाम साढ़े 7 बजे के करीब मुस्लिम समुदाय के सैकड़ों लोगों की भीड़ उनके घर के बाहर जमा हो गई थी।

इस मामले पर एनआईए ने कहा कि जाँच में सामने आया है कि आरोपित अब्बास ने अन्य साजिशकर्ताओं के साथ मिलकर वाहनों में आग लगाई और पुलिस अधिकारियों पर हमला किया। दंगे के पीछे SDPI का नाम सामने आने के बाद कर्नाटक सरकार ने इसे बैन करने की बात कही थी।

‘क्लीवेज और थाई’ दिखाने को बोलता था फिल्म डायरेक्टर, ‘आश्रम’ की हिरोइन ने बताई कास्टिंग काउच की कहानी

कास्टिंग काउच बॉलीवुड का घिनौना सच है, जहाँ काम देने के बहाने अभिनेत्रियों के साथ अश्लील बर्ताव किए जाते हैं। इसी को लेकर वेब सीरीज ‘आश्रम’ की एक्ट्रेस रही प्रीती सूद ने अपने कड़वे अनुभवों को साझा किया है। उन्होंने कास्टिंग काउच को लेकर खुलासा किया कि जब वो फिल्ममेकर के पास काम के लिए गई थीं तो उसने क्लीवेज दिखाने और थाई (जाँघ) को एक्सपोज करने वाले कपड़े पहनने के लिए कहा।

प्रीती ने कहा कि उन्हें ये सब सुन कर अपने कानों पर यकीन ही नहीं हुआ और मैं वहाँ से चली गईं। बता दें कि आश्रम सीरीज को डायरेक्टर प्रकाश झा ने निर्देशित किया था। ई टाइम्स को दिए इंटरव्यू में प्रीती ने अपने अनुभवों को याद किया।

एक्ट्रेस ने कहा, “ऑडिशन के दौरान कोई मुझे बूढ़ी कहता था तो कोई कहता था कि मैं इस फिल्म के लिए बनी ही नहीं हूँ। हद तो तब हो गई, फिल्म के आखिर में यह कह कर बाहर कर दिया गया कि मैं लीड एक्ट्रेस से अधिक खूबसूरत हूँ।”

फिल्मों में आने को लेकर प्रीती ने कहा, “मैं छोटे से शहर से आती हूँ, जहाँ मेरी उम्र में पैरेंट्स लड़कियों की शादी करा देते हैं। इसलिए मैंने जब उनसे कहा कि मुझे फिल्मों में करियर बनाना है तो वो इसके लिए सहमत नहीं हुए थे। ऐसा इसलिए क्योंकि छोटी जगहों वाले लोग ये सोचते हैं कि आप टीचर या दूसरी गवर्नमेंट जॉब करके सेटल हो जाओ, घर की रोटी खा के निकलो।”

सुरवीन चावला भी हुई थीं कास्टिंग काउच की शिकार

हाल ही में बॉलीवुड अभिनेत्री सुरवीन चावला ने भी कास्टिंग काउच को लेकर अपने अनुभव शेयर किए थे। एक्ट्रेस ने वर्ष 2019 में पिंकविला को दिए इंटरव्यू में बताया था कि “मैं दक्षिण की फिल्मों में काम कर रही थी। इसी दौरान एक निर्देशक ने मुझसे कहा कि मैं तुम्हारे शरीर का इंच-इंच देखना चाहता हूँ। मैंने उसके फोन कॉल्स को रिसीव करना बंद कर दिया था। इसके बाद एक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित निर्देशक ने मुझे परेशान किया। वो मेरे करीब आना चाहता था।”