देश का बड़ा कारोबारी समूह अडानी ग्रुप पूर्वोत्तर राज्यों में बड़े निवेश की तैयारी कर रहा है। अडानी समूह ने ऐलान किया है कि वह पूर्वोत्तर राज्यों में ₹1 लाख करोड़ का निवेश करेगा। अडानी समूह यह निवेश अगले 10 वर्षों में करने वाला है। पूर्वोत्तर के 7 राज्यों में यह निवेश स्मार्ट एनर्जी, हाईवे, डिजिटल कनेक्टिविटी और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा।
इस निवेश योजना का ऐलान ‘राइजिंग नॉर्थईस्ट इन्वेस्टर्स समिट’ में अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने किया है। यह समिट पूर्वोत्तर राज्यों में निवेश लाने के लिए की जा रही है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार (23 मई, 2025) को किया है। इस समिट का आयोजन नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में हो रहा है।
गौतम अडानी ने इस निवेश का ऐलान करते हुए कहा, “पिछले दशक में पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ियों और घाटियों में भारत के विकास का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है — विविधता, जिजीविषा और असीम संभावनाओं से भरी यह धरती अब आर्थिक और रणनीतिक उन्नति का केंद्र बन चुका है।”
गौतम अडानी ने पीएम मोदी के पूर्वोत्तर भारत के विकास को लेकर विजन कि सराहना भी की है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी का ‘एक्ट ईस्ट, एक्ट फास्ट, एक्ट फर्स्ट’ का मंत्र इस क्षेत्र के लिए नींव का पत्थर साबित हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि पीएम मोदी की पूर्वोत्तर भारत में हुई 65 व्यक्तिगत यात्राएँ सफलता का अलग स्तर लाई हैं।
पीएम मोदी के कार्यकाल में पूर्वोत्तर राज्यों में ₹6.2 लाख करोड़ का निवेश हुआ है और 16,000 किलोमीटर तक फैला हुआ सड़क नेटवर्क बनाया गया है। इसके अलावा 18 हवाई अड्डों का निर्माण भी हुआ है। इसे गौतम अडानी ने प्रतिबद्धता का द्योतक बताया है।
गौरतलब है कि इससे पहले मार्च 2025 में अडानी समूह ने असम में ₹50,000 करोड़ के निवेश की घोषणा की थी। अब, इस समिट में अडानी ने उस राशि को दोगुना करते हुए कुल निवेश को ₹1 लाख करोड़ तक पहुँचा दिया है।
अडानी समूह का यह निवेश ग्रीन एनर्जी, हाइड्रो और पंप्ड स्टोरेज, पावर ट्रांसमिशन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट मीटर, सड़क और राजमार्ग, लॉजिस्टिक्स, कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों पर केंद्रित होगा।
अडानी समूह ने यह स्पष्ट किया है कि इस निवेश का फोकस स्थानीय लोग होंगे। समूह ने बताया है कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार, स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा और समुदाय की सहभागिता को प्राथमिकता दी जाएगी।
इंदौर की ड्रीम ओलंपिक शूटिंग एकेडमी के कोच मोहसिन खान की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र में 2 और महिलाओं ने मोहसिन खान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, जिनमें से एक पेशे से वकील हैं और दूसरी जनजातीय समाज की महिला है। पुलिस ने दोनों शिकायतों पर तुरंत केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।
FIR filed against Shooting Academy owner Mohsin Khan for raping Hindu girls, after trapping them in Love Jihad and few girls are lure in the pretext of teaching shooting.#Indore#LoveJihadpic.twitter.com/Yfdzu2z3cj
पहली पीड़िता एक वकील है, जो LLM की पढ़ाई कर रही है। उसने बताया कि फरवरी 2021 में वह शूटिंग सीखने के लिए मोहसिन खान की एकेडमी गई थी। पीड़िता का आरोप है कि जुलाई 2022 में कोच ने उसे अपने फ्लैट पर बुलाया और जबरदस्ती बलात्कार किया।
पीड़िता ने विरोध किया तो कोच ने धमकी दी कि अगर उसने किसी को बताया तो उसकी बदनामी होगी और कोई उससे शादी नहीं करेगा। पीड़िता के मुताबिक, फरवरी 2022 से दिसंबर 2023 के बीच मोहसिन ने कई बार जबरन शारीरिक संबंध बनाए। इतना ही नहीं, शादी के बाद भी मोहसिन उसे ब्लैकमेल करता रहा।
अप्रैल 2025 में जब पीड़िता पति के साथ इंदौर लौटी, तो मोहसिन ने उसे फिर से धमकी देकर रेप किया और कहा कि अगर उसकी बात नहीं मानी तो वह उसके फोटो और वीडियो वायरल कर देगा। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान मोहसिन ने उसे जबरन नॉनवेज खिलाया और उसका कलावा उतरवा लिया।
आदिवासी महिला ने लगाए छेड़छाड़ और जातिसूचक गालियों के आरोप
दूसरी पीड़िता एक जनजातीय समाज की महिला है, जो शूटिंग एकेडमी में काम करने आई थी। पीड़िता का आरोप है कि मोहसिन उसे बार-बार अपने फ्लैट में बुलाता था और 16 मई 2025 को उसके साथ अश्लील बातें करते हुए उसके पैर छूने जैसी हरकतें कीं। जब महिला ने विरोध किया, तो मोहसिन ने उसे नीचे ही बैठने का दबाव डाला।
महिला ने यह भी बताया कि कोच दूसरी लड़कियों से भी गलत बातें करता था और जाति विशेष को लेकर आपत्तिजनक शब्द कहता था। उसने जुलाई 2024 में नौकरी छोड़ दी थी, लेकिन जब उसने अपनी सैलरी माँगी तो मोहसिन ने उसे जातिसूचक गालियाँ देकर धमकाया।
150 से ज़्यादा हिंदू लड़कियों के फोटो-वीडियो मिले- बजरंग दल
बजरंग दल के जिला मंत्री ने बताया कि उन्हें कुछ समय पहले गुप्त सूचना मिली थी कि ड्रीम ओलंपिक शूटिंग एकेडमी में कुछ गलत हो रहा है। बजरंग दल ने कई दिनों तक एकेडमी पर नजर रखी और जाँच के दौरान उन्हें कई वीडियो और बयान मिले। इन सबूतों से यह साबित होता है कि कोच मोहसिन खान मासूम लड़कियों को अपने जाल में फँसाकर उनका शोषण करता था।
बजरंग दल ने यह भी बताया कि मोहसिन खान एकेडमी के नीचे के फ्लोर पर शूटिंग सीखने वाली लड़कियों को बुलाकर उनके साथ आपत्तिजनक हरकतें करता था और उनके वीडियो भी बनाता था। मोहसिन के फोन में 150 से भी ज़्यादा हिंदू युवतियों के फोटो और वीडियो मिले हैं, जो इस मामले को और गंभीर बनाते हैं।
पुलिस ने महिला वकील की शिकायत पर बलात्कार, धमकी और ब्लैकमेलिंग की धाराओं में केस दर्ज किया है, वहीं आदिवासी महिला की शिकायत पर छेड़छाड़ और जातिगत टिप्पणी की धाराओं में FIR दर्ज की गई है। पुलिस अब आरोपित से और पूछताछ करने के लिए दोबारा रिमांड लेने की तैयारी में है।
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में हुए एक एनकाउंटर में हाल ही में नक्सलियों का शीर्ष नेता बसावराजू मार गिराया गया। उसके साथ 26 और नक्सली सुरक्षाबलों ने मार गिराए। यह मुठभेड़ अबूझमाड़ के जंगलों में हुई। पिछले कुछ दशकों के सबसे महत्वपूर्ण इस ऑपरेशन को डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) के जवानों ने अंजाम दिया।
DRG के भी 2 जवान इस मुठभेड़ में बलिदान हो गए। इस सफल ऑपरेशन के बाद वापस लौटे जवानों का स्वागत आरती और तिलक लगा कर हुआ है। जवानों ने इस सफल ऑपरेशन के बाद नाच-गा कर जश्न भी मनाया। उन्होंने होली भी खेली। इनके वीडियो भी सामने आए हैं।
#WATCH | Chhattisgarh: DRG jawans celebrate after the successful elimination of 27 naxals during an encounter in the forest area of Abujhmad in Narayanpur on 21st May. pic.twitter.com/zN5ofmgJ8n
ऐसे ही एक वीडियो में DRG जवानों के एक समूह का स्वागत महिलाएँ आरती करके कर रही हें। महिलाएँ ऑपरेशन से लौटे जवानों को टीका भी लगाती हैं। उन्हें मालाएँ भी पहनाई जाती हैं। जवान इस वीडियो में नाचते गाते दिखते हैं।
एक और ऐसे ही वीडियो में जवान होली खेलते हुए दिखते हैं। DRG जवान इस वीडियो में एक साथ मिलकर बज रहे गानों पर नाचते हैं। DRG जवानों के साथ इस दौरान और भी परिजन नाचते दिखते हैं। नक्सलियों के सफाए पर प्रसन्न जवान बारिश में भी अपना डांस नहीं रोकते।
#WATCH | Chhattisgarh: DRG jawans celebrate after the successful elimination of 27 naxals during an encounter in the forest area of Abujhmad in Narayanpur on 21st May.
ऐसी ही एक और वीडियो अहि जिसमे DRG जवानों का बड़ा समूह नाचता है और बाकी लोग यहाँ उनका वीडियो बनाते हैं। इस दौरान स्थानीय संगीत भी बजता है। DRG जवानों ने ही नक्सलियों के खिलाफ इस सफल ऑपरेशन को अंजाम दिया है।
HUGE: There was a time when Naxals danced after massacring jawans, & civilians. ~ Today, it's DRG jawans dancing after eliminating their top commander of Rs. 1.5 Crore Bounty❤️
From fear to fire – this is the real transformation of Bharat ??
— The Analyzer (News Updates?️) (@Indian_Analyzer) May 23, 2025
DRG जवान इस ऑपरेशन में आगे थे जबकि उनके सपोर्ट के लिए CRPF और बाकी सुरक्षाबल मौजूद थे। DRG इससे पहले भी कई सफल ऑपरेशन कर चुकी है। DRG छत्तीसगढ़ की एक विशेष पुलिस यूनिट है। इस नक्सलियों से लड़ने के लिए ही बनाया गया था।
DRG में स्थानीय युवाओं को ही भर्ती किया जाता है। DRG में इसके साथ ही वह नक्सली भी भर्ती किए जाते हैं जो आत्मसमर्पण कर चुके हैं। यह भी बताया जाता है कि DRG में सलवा जुडूम संगठन के उन युवाओं को भी भर्ती किया गया है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने बैन लगा दिया गया था।
सलवा जुडूम को छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का सामना करने के लिए बनाया गया था। इसमें स्थानीय लोगों को भर्ती किया गया था। गाँव के लोगों को इस दौरान हथियार दिए गए थे। हालाँकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। DRG जवान स्थानीय होने के चलते नक्सलियों के तौर तरीके से वाकिफ हैं और वह इनको लगातार खत्म कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश में भोपाल के ‘मुस्लिम गैंग’ के लव जिहाद के बाद अब उज्जैन में भी 11 मुस्लिम लड़कों ने हिंदू लड़कियों के साथ लव जिहाद किया। हिंदू संगठनों और ग्रामीणों ने आरोपितों के घर न तोड़े जाने पर आक्रोश जताया है। ग्रामीणों ने प्रशासन को 20 मई तक सभी आरोपितों के घर तोड़ने का अल्टीमेटम दिया है। इसके बाद प्रदर्शन को आंदोलन का रूप दिया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि वह कई दिन से इस मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन पुलिस ध्यान नहीं दे रही है। इसे लेकर गुरुवार (22 मई 2025) को उन्होंने उज्जैन- झालावाड़ नेशनल हाईवे पर उतरकर चक्काजाम कर दिया। 6 घंटे तक वहाँ का यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
सड़क पर धूप तेज होने लगी तो ग्रामीणों ने बीच सड़क पर ही टेंट लगा लिया। चक्काजाम के कारण छोटी गाड़ियों के साथ ट्रकों की भी कतार सड़क पर खड़ी रही। इस दौरान पुलिस के साथ एसडीएम राजाराम करजरे और कई अन्य अधिकारियों ने भी ग्रामीणों के मान मनौव्वल की कोशिश की।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एसडीएम ने ग्रामीणों को बताया कि अवैध निर्माण को तोड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन की आवश्यकता होती है। उसी के अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला
उज्जैन से लगभग 30 किलोमीटर दूर बिछड़ोद गाँव में 6 मई 2025 को एक हिंदू लड़की और एक मुस्लिम लड़के का वीडियो साथ में वायरल हुआ था। गाँव के लोगों ने मुस्लिम लड़के का मोबाइल चेक किया तो उसमें कई अश्लील वीडियो और कॉल रिकॉर्डिंग मिले। ग्रामीणों ने लड़के को घटिया थाने की पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने ने पूरे मामले में अब तक 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।
रिपोर्ट के अनुसार पुलिस जाँच में पता चला है कि आरोपितों का सरगना फरमान है। गैंग ने लड़कियों को अश्लील फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर कई बार दुष्कर्म किया था। यह मुस्लिम गैंग पिछले डेढ़ वर्षों से लड़कियों को अपने निशाने पर रखे था।
मामले में अब तक चार लड़कियों के पीड़ित होने का पता चला है। एक 14 वर्ष की नाबालिग लड़की भी पीड़ित है जिसके साथ दुष्कर्म किया गया है।
11 लोगों की ‘मुस्लिम गैंग’
इस मामले में ग्रामीणों और हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। गुस्साए लोगों ने आरोपितों के घरों को आग के हवाले करने की कोशिश की, जिसे पुलिस और फायर ब्रिगेड ने बुझा दिया। फिलहाल तनाव को देखते हुए अब तक गाँव में भारी पुलिस बल तैनात है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने इस लव जिहाद मामले में फरमान, इकरार, उजैर पठान, राजा रंगरेज, जुबेर मंसूरी, जुनैद मंसूरी, फैज खान, मुश्ताक और अल्ताफ समेत 11 लोगों को नामदज किया है। सभी को गिरफ्तार किया जा चुका है। एक आरोपित रेहान फरार है। उसकी टीम तलाश में पुलिस की टीम राजस्थान के झालावाड़ और आसपास के शहरों में भी दबिश दे रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, फरमान उज्जैन आरटीओ में एजेंट का काम करता है। महँगी गाड़ियों में घूमता है और वीडियो दिखाकर सोशल मीडिया पर लड़कियों से दोस्ती करता है। यह पूरा मुस्लिम गैंग संगठित तौर पर काम करता है। इन लोगों ने बिछड़ोद के बाहर भी कई अन्य लड़कियों से भी संपर्क किया लेकिन सफल नहीं हो पाए।
हाल ही में ATS ने तीन पाकिस्तानी जासूसों को पकड़ा है। ये गिरफ्तारियाँ यूपी के वाराणसी, मुरादाबाद और दिल्ली के सीलमपुर से हुई हैं, और ये तीनों ही मामलों में देश की सुरक्षा से खिलवाड़ का आरोप है।
वाराणसी से तुफैल गिरफ्तार
वाराणसी से तुफैल नाम के एक जासूस को गिरफ्तार किया गया है। उस पर आरोप है कि वह पाकिस्तान के लिए जासूसी कर रहा था और भारत की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियाँ पाकिस्तान में अपने संपर्कों को भेज रहा था। तुफैल के तार 600 से अधिक पाकिस्तानी फोन नंबरों से जुड़े पाए गए हैं।
UP ATS arrests one Tufail s/o Maqsood Alam from Varanasi, on charges of spying for Pakistan. He was sharing important information about India's internal security with Pakistan.
On developing this intelligence, ATS Field Unit Varanasi confirmed that Tufail was in contact with… pic.twitter.com/cw18siTAeI
तुफैल फेसबुक के जरिए पाकिस्तान के फैसलाबाद की एक महिला नफीसा से भी संपर्क में था, जिसका मियाँ पाकिस्तानी फौज में सेवारत हैं। आरोपित के पास से उसका मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी बरामद कर लिया गया है।
तुफैल ने कथित तौर पर पाकिस्तानी आतंकी समूह तहरीक-ए-लब्बैक के नेता मौलाना शाह रिज़वी के वीडियो वॉट्सऐप ग्रुप में साझा किए। इन संदेशों में ‘गज़वा-ए-हिंद’ (भारत पर इस्लामी कब्ज़ा), बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेने और भारत में शरिया कानून लागू करने जैसी भड़काऊ बातें शामिल थीं।
जाँच में यह भी पता चला है कि जासूस तुफैल राजघाट, नमो घाट, ज्ञानवापी, रेलवे स्टेशन और लाल किले जैसे संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें पाकिस्तान में भेज रहा था। इसके अलावा, उसने वाराणसी में ऐसे वॉट्सऐप ग्रुप के लिंक भी बांटे थे, जिनसे स्थानीय लोग पाकिस्तानी नेटवर्क से जुड़ सकें।
मुरादाबाद से शहज़ाद गिरफ्तार
दूसरा मामला मुरादाबाद का है, जहाँ शहज़ाद नाम के एक जासूस को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) के लिए जासूसी करने और सीमा पार तस्करी में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली थी कि शहज़ाद भारत-पाकिस्तान सीमा पर सक्रिय है और पाकिस्तानी एजेंसी के समर्थन से तस्करी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त है। इस सूचना के आधार पर, रामपुर जिले के टांडा इलाके के रहने वाले शहज़ाद को मुरादाबाद से गिरफ्तार कर लिया गया। उस पर भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने सहित कई आरोप लगाए गए हैं।
जाँच में ये भी पता चला है कि शहज़ाद कथित तौर पर ISI के निर्देश पर भारत में एजेंटों को पैसे देता था। उस पर आरोप है कि वह रामपुर और उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों से लोगों की भर्ती करता था। वह उन्हें यह कहकर गुमराह करता था कि वे तस्करी के लिए पाकिस्तान जा रहे हैं, जबकि असल में उन्हें ISI के लिए काम करना था। ISI के लोग उनके वीजा और यात्रा दस्तावेजों का इंतज़ाम करते थे। अधिकारियों का कहना है कि शहज़ाद इन एजेंटों को भारतीय सिम कार्ड भी मुहैया कराता था ताकि वे भारत में जासूसी गतिविधियों को अंजाम दे सकें।
दिल्ली से मोहम्मद हारुन गिरफ्तार
वहीं दिल्ली का रहने वाला मोहम्मद हारुन कबाड़ी का काम करता है और उस पर पाकिस्तान उच्चायोग में तैनात कर्मचारी मुजम्मल हुसैन के साथ मिलकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप है।
एटीएस के मुताबिक, हारुन और मुजम्मल हुसैन मिलकर पाकिस्तान का वीजा दिलाने के नाम पर अलग-अलग खातों से अवैध वसूली भी करते थे। जाँच में पता चला है कि हारुन की पाकिस्तान में रिश्तेदारी है, जिसके चलते वह अक्सर वहाँ आता-जाता रहता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात मुजम्मल हुसैन से हुई। मुजम्मल के कहने पर हारुन ने उसे कई बैंक खाते भी मुहैया कराए थे, जिनमें वीजा चाहने वाले लोगों से पैसे डलवाए जाते थे।
ये तीनों गिरफ्तारियाँ दिखाती हैं कि पाकिस्तान अपनी खुफिया एजेंसियों के ज़रिए भारत में घुसपैठ और जासूसी की लगातार कोशिश कर रहा है। उत्तर प्रदेश ATS इन मामलों की गहराई से जाँच कर रही है ताकि इन नेटवर्कों का पूरी तरह से पर्दाफाश किया जा सके और देश की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इंदौर में शूटिंग सिखाने के नाम पर मोहसिन खान लड़कियों को निशाना बना रहा था। उसके खिलाफ तीन लड़कियों ने यौन शोषण का मामला दर्ज करवाया है। गिरफ्तारी के बाद उसके फोन से कई लड़कियों के साथ अश्लील हरकतें करते हुए वीडियो बरामद हुए हैं। इनमें किसी को वह किस कर रहा है तो किसी के शरीर को गलत तरीके से छू रहा है।
यह पूरा मामला एक पीड़िता की FIR के बाद खुला था। पुलिस ने इस मामले में कोच मोहसिन खान को गिरफ्तार कर लिया है। अब उसके फोन की जाँच की जा रही है। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस की जाँच में पता चला है कि आरोपित के मोबाइल में 100 से ज्यादा अश्लील वीडियो हैं।
एडिशनल पुलिस कमिश्नर अमित सिंह ने बताया कि आरोपित का मोबाइल जब्त कर लिया गया है और डिलीट की गई फोटोज व वीडियो को फॉरेंसिक टीम की मदद से रिकवर किया जा रहा है। वही पुलिस इस एंगल से भी जाँच कर रही है कि कहीं यह किसी बड़े गिरोह का हिस्सा तो नहीं है। मामले में गुरुवार (22 मई, 2025) को 2 और पीड़िताओं ने FIR करवाई है।
वहीं बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कहा है कि मोहसिन खान ने 100 से अधिक युवतियों को अपना शिकार बनाया है और इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि यदि और पीड़िताएँ सामने आती हैं तो जाँच का दायरा बढ़ाया जाएगा।
मोहसिन की रिकॉर्ड की हुई कुछ वीडियो भी सामने आई हैं। एक वीडियो में वह एक लड़की को अश्लील तरीके से उठाते हुए दिखता है। दूसरे में वह एक कमरे में लड़की को छूते हुए दिखता है। एक और वीडियो में भी वह लड़की के साथ अश्लील हरकत करते देखा जा सकता है।
पीड़िता की आपबीती
मोहसिन के खिलाफ इससे पहले एक नाबालिग ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। छात्रा ने बताया कि वह साल 2021 से नवंबर 2023 तक मोहसिन की एकेडमी में शूटिंग प्रैक्टिस करती थी। एक दिन मोहसिन कोचने राइफल पकड़ने के बहाने उसके शरीर को गलत तरीके से छुआ और जांघ को दबाया।
पीड़िता ने बताया कि उसने जब विरोध किया तो मोहसिन ने करियर बर्बाद करने की धमकी दी। पीड़िता ने घटना के बाद एकेडमी जाना बंद कर दिया और कुछ समय बाद परिजनों को जानकारी दी। पीड़िता को हाल ही में और भी हिन्दू लड़कियों के साथ ऐसी ही घटनाओं की जानकारी मिली।
इसके बाद छात्रा ने अपने परिवार और हिंदू संगठनों की मदद से थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस की कार्रवाई
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बताया है कि मोहसिन खान ने 100 से अधिक युवतियों को अपना शिकार बनाया है और इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस को जाँच के दौरान मोहसिन के भाई के बारे में भी पता चाल, जो एक और स्कूल में शूटिंग कोच है। पुलिस फिलहाल सभी पहलुओं पर गंभीरता से जाँच कर रही है।
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ के जंगलों में बुधवार (21 मई 2025) को हुई मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। इस मुठभेड़ में नक्सल आतंकवाद के सरगना नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू मारा गया। बसवराजू भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का महासचिव था और भारत के सबसे प्रमुख माओवादी नेताओं में शामिल था।
70 वर्षीय बसवराजू के सिर पर ₹1.5 करोड़ का इनाम था। वह 2010 में छत्तीसगढ़ के चिंतलनार में CRPF के 76 जवानों की हत्या और 2013 में झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड था, जिसमें कई कॉन्ग्रेस नेता मारे गए थे। बसवराजू उन 26 नक्सल आतंकवादियों में शामिल था, जिन्हें सुरक्षा बलों ने इस मुठभेड़ में ढेर किया।
छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर नक्सलियों की कमर तोड़ने के लिए सुरक्षा बलों ने 21 अप्रैल से 11 मई 2025 तक ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ चलाया था। इस 21 दिवसीय अभियान को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और राज्य पुलिस के संयुक्त बलों ने कर्रेगुट्टालु हिल के पास अंजाम दिया।
इस ऑपरेशन में कुल ₹1.72 करोड़ रुपये के इनामी 31 नक्सली मारे गए थे। इसके साथ ही 214 नक्सली ठिकाने और बंकर नष्ट किए गए। तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने 450 आईईडी, 818 बीजीएल गोले, 899 बंडल कोडेक्स वायर, बड़ी मात्रा में डेटोनेटर और अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद की। इसके अलावा करीब 12,000 किलोग्राम खाद्य आपूर्ति भी जब्त की गई।
इसके कुछ ही दिनों बाद 21 मई को अबूझमाड़ के जंगलों में हुई मुठभेड़ में शीर्ष माओवादी नेता नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू को मार गिराया गया। गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में 21 मई को हुए मुठभेड़ ऑपरेशन को नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में ‘ऐतिहासिक उपलब्धि’ बताया है।
उन्होंने कहा, “आज हमारे सुरक्षा बलों ने नारायणपुर में एक बड़े ऑपरेशन के तहत 27 खूंखार माओवादियों को मार गिराया है, जिनमें सीपीआई (माओवादी) के महासचिव और नक्सल आंदोलन की रीढ़ माने जाने वाले नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू भी शामिल हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की नक्सलवाद के खिलाफ तीन दशकों की लड़ाई में यह पहली बार है कि सुरक्षा बलों ने महासचिव स्तर के माओवादी नेता को ढेर किया है। शाह ने इस सफलता के लिए सुरक्षा बलों और एजेंसियों की सराहना की।
A landmark achievement in the battle to eliminate Naxalism. Today, in an operation in Narayanpur, Chhattisgarh, our security forces have neutralized 27 dreaded Maoists, including Nambala Keshav Rao, alias Basavaraju, the general secretary of CPI-Maoist, topmost leader, and the…
इसके साथ ही गृह मंत्री ने हाल ही में समाप्त हुए ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट की भी प्रशंसा की। उन्होंने दोहराया कि मोदी सरकार 31 मार्च 2026 से पहले भारत से नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया करने के लिए प्रतिबद्ध है।
गृह मंत्री शाह ने कहा, “मुझे यह बताते हुए भी खुशी हो रही है कि ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट के पूरा होने के बाद छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र में 54 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है और 84 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। मोदी सरकार 31 मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
Proud of our forces for this remarkable success. Our Government is committed to eliminating the menace of Maoism and ensuring a life of peace and progress for our people. https://t.co/XlPku5dtnZ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी माओवादी आतंकी नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू को मार गिराने पर सुरक्षा बलों की सराहना की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कार्रवाई नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है और उनकी सरकार देश से नक्सली खतरे को खत्म करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
अब नक्सलवाद का ‘लाल किला’ अबूझमाड़ ढह चुका है, इसलिए दशकों से माओवादी आतंक से ग्रस्त इस क्षेत्र के रक्तरंजित इतिहास को भी जानना जरूरी है।
अबूझमाड़: आखिरी नक्सल किला और 40 साल बाद उसका पतन
‘अबूझमाड़’ नाम दो शब्दों से मिलकर बना है ‘अबूझ’ यानी जिसे समझा न जा सके, और ‘माड़’ यानी पहाड़ी। यह भारत का एकमात्र ऐसा भू-भाग है जिसका आज तक कोई राजस्व मानचित्र नहीं बनाया गया है। यहाँ के ग्रामीणों के पास अपनी जमीन का कोई स्वामित्व प्रमाण (पट्टा) नहीं है, जबकि यह क्षेत्र लगभग 4,000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।
नक्सलवाद के कारण दशकों तक यहाँ सरकार का दखल दशकों तक शून्य रहा है। अबूझमाड़ मुख्य रूप से नारायणपुर जिले के ओरछा ब्लॉक के हिस्सों में फैला है। इस क्षेत्र की आबादी करीब 40 से 45 हज़ार है, जिनमें अधिकांश अबूझमाड़िया जनजाति से संबंध रखते हैं।
अबूझमाड़िया समुदाय छत्तीसगढ़ के विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों (PVTGs) में से एक है। इन्हें सरकार द्वारा लुप्तप्राय जनजातीय समूहों के लिए निर्धारित विशेष अधिकारों और लाभों का हकदार माना गया है।
यह क्षेत्र न केवल भौगोलिक रूप से कठिन है, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक रूप से भी बेहद संवेदनशील रहा है, और नक्सलवाद ने इसके विकास को लंबे समय तक बाधित किया। अबूझमाड़ केवल नारायणपुर और ओरछा ब्लॉक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार छत्तीसगढ़ केदंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों के कुछ हिस्सों तक भी होता है।
इसके अलावा, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के कुछ इलाके भी अबूझमाड़ क्षेत्र में शामिल हैं। यह पूरा क्षेत्र घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ियों और सीमित प्रशासनिक पहुँच के कारण लंबे समय से नक्सल प्रभावित और रणनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है।
अबूझमाड़ क्षेत्र में आज तक सड़कें, अस्पताल और अन्य बुनियादी सुविधाएँ नहीं पहुँच पाई हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि माओवादियों ने इस क्षेत्र को मुख्यधारा से जुड़ने नहीं दिया और हर प्रकार के विकास कार्य का विरोध किया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, नक्सली गाँवों तक पहुँचने वाली बसों को आग लगा देते थे और बाहरी लोगों या सरकारी कर्मचारियों के प्रवेश को हिंसा करके रोक देते थे। माओवादियों ने यह सुनिश्चित किया कि यहाँ कोई गाड़ी चलने लायक सड़क तक ना बने। उन्होंने किसी ग्रामीण को पट्टा भी नहीं मिलने दिया।
आज़ादी के बाद 1947 में छत्तीसगढ़ के ओरछा और नारायणपुर जैसे इलाकों में कुछ हद तक विकास हुआ और 1980 के दशक तक गाड़ी चलने लायक सड़कें भी बन गईं। लेकिन अबूझमाड़ के पहाड़ी क्षेत्र जानबूझकर लोगों की पहुँच से दूर रखा गया, जिससे यहाँ की जनजातीय संस्कृति और परंपराएँ कमजोर होती गईं।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब 1990 के दशक में माओवादियों ने इस अनजाने और जनजातीय बहुल क्षेत्र की ओर रुख किया। 2000 के दशक तक उन्होंने अबूझमाड़ को अपना गढ़ बना लिया। इसके बाद माओवादियों ने न केवल सड़कों को नष्ट किया, बल्कि 50 से ज्यादा स्कूल जला दिए, जिससे यह क्षेत्र मुख्यधारा से पूरी तरह कट गया।
माओवादियों ने यहाँ ‘जनता सरकार’ की स्थापना कर ली और अबूझमाड़ को अपने वैकल्पिक शासन का केंद्र बना लिया। उन्होंने मुरुमवाड़ा और बोटोर जैसे इलाकों में अपने स्कूल शुरू किए, यहाँ पर माओवादी पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता था, यह सिलसिला हाल के वर्षों तक जारी रहा।
विकास को रोकने के लिए माओवादी हिंसा के साथ-साथ दुष्प्रचार का भी इस्तेमाल करते हैं। उनका मकसद यह रहा है कि अबूझमाड़ के पहाड़ी गाँव पूरी तरह अलग-थलग और उनके प्रभाव में बने रहें। अबूझमाड़, छत्तीसगढ़ के नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है, लेकिन इसका लगभग 90% क्षेत्र आज भी राजस्व सर्वेक्षण से वंचित है।
अप्रैल 2017 में IIT रुड़की की मदद से अकाबेड़ा और कुछ अन्य गाँवों में सर्वेक्षण शुरू किया गया था, परंतु सुरक्षा चिंताओं और बुनियादी ढाँचे की कमी के चलते इसमें कोई खास प्रगति नहीं हो सकी। 2023 में अबूझमाड़ को पहली बार एक ऑपरेशन थियेटर और दो मोबाइल टावर मिल पाए थे। हालाँकि, अब भी बड़े इलाके में मोबाइल नेटवर्क नहीं आते।
चुनाव आयोग अबूझमाड़ को चुनावी प्रक्रिया से जोड़ने के प्रयास कर रहा है। 2018 से यहाँ की मतदाता सूची में 300 से अधिक नाम जोड़े गए हैं, इससे पता चलता है कि यह इलाका कितना अलग-थलग रहा है।
हालाँकि, माओवादी आज भी इस क्षेत्र में लोकतांत्रिक और प्रशासनिक प्रयासों को चुनौती देते है। दिसंबर 2024 में कोहकामेटा में एक मुठभेड़ के दौरान माओवादियों ने डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) के एक हेड कांस्टेबल की हत्या कर दी थी। माओवादी अपने प्रभाव वाले इलाकों में पूर्व सरपंचों और नेताओं को भी निशाना बना रहे हैं।
2023 में, अबूझमाड़ के ज़ारा गाँव में पूर्व सरपंच रामजी डोडी और उनके दो भतीजों को माओवादियों ने अगवा कर लिया था। इसके बाद उन्हें जंगल ले जाकर उनकी गला घोंटकर हत्या कर दी थी। उन पर पुलिस का मुखबिर होने का आरोप लगाया गया था।
इसके अलावा, बीजापुर(दक्षिण बस्तर) में एक भाजपा पदाधिकारी और दो पूर्व सरपंचों की भी माओवादियों ने हत्या कर दी थी। यह सिलसिला बताता है कि माओवादी अब भी स्थानीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कुचलने का प्रयास कर रहे हैं।
इन चुनौतियों के बावजूद, सुरक्षा बलों और सरकार ने अबूझमाड़ सहित पूरे दंडकारण्य क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों को खत्म करने के लिए लगातार अभियान चला रखे हैं। फरवरी 2025 में, एक पूर्व माओवादी गिरिधर ने टाइम्सऑफ इंडिया को बताया कि माओवादियों का कभी अजेय गढ़ माना जाने वाला अबूझमाड़ अब गिर चुका है।
गिरिधर पहले PLGA (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) का कमांडर था और 2024 में आत्मसमर्पण कर चुका है। गिरिधर ने बताया, “अबूझमाड़ अब अभेद्य नक्सली किला नहीं रहा… कमांडो दंडकारण्य के जंगलों के हर इंच पर कब्जा कर रहे हैं। माओवादी कादर का आधार खत्म हो गया है।”
यह बयान दर्शाता है कि सुरक्षा बलों के अभियान अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुके हैं और अबूझमाड़, जो कभी माओवादियों का सबसे मजबूत गढ़ था, अब तेजी से उनकी पकड़ से बाहर हो रहा है।
पूर्व माओवादी गिरिधर ने 2009 में राजनांदगाँव के एसपी विनोद चौबे की हत्या की साजिश रची थी। उन्होंने कहा, “हमारा कैडर बेस तेजी से कम हो रहा था। पुलिस अब अपने नागरिक कार्यों, मुफ्त सुविधाओं, नौकरियों और बेहतर जीवन के वादे के साथ लोगों में प्रभाव छोड़ रही थी।”
गिरिधर ने यह भी बताया कि शिक्षा, बेहतर जीवन और शहरी चकाचौंध के आकर्षण ने युवाओं को माओवादी रास्ते से दूर कर दिया है। उन्होंने बताया कि कोई भी युवा माओवादियों के साथ जुड़ना नहीं चाहता।
इस बयान से साफ है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएँ, शिक्षा और रोजगार के अवसर, और सहायता वाले दृष्टिकोण ने नक्सलवाद की जड़ें कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
नक्सलवाद के खिलाफ जारी है लड़ाई
इस महीने की शुरुआत में छत्तीसगढ़ तेलंगाना सीमा पर कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर सुरक्षा बलों ने नक्सलवाद के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा अभियान चलाया। इस ऑपरेशन में 31 इनामी नक्सलियों को मार गिराया गया था। इस कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने कर्रेगुट्टा पहाड़ी का 1200 स्क्वायर किलोमीटर का इलाका खाली करवाया था।
इस ऐतिहासिक ऑपरेशन की सफलता के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों, आधुनिक उपकरणों और अन्य जरूरी रसद को काफी मेहनत से इकट्ठा किया गया था। ऑपरेशन की शुरुआत से पहले एक संयुक्त ब्रीफिंग में बलों को कर्रेगुट्टा पहाड़ी (केजीएच) के कठिन और चुनौतीपूर्ण भू भाग के बारे में विस्तार से चेतावनी दी गई थी।
इसमें सैकड़ों गुफाओं, एम्बुश के बिंदुओं और IED जैसे खतरों की विशेष जानकारी शामिल थी। नक्सल विरोधी अभियान के तहत, सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के 4 कारखानों को भी नष्ट कर दिया। यहाँ बीजीएल गोले, घरेलू हथियार, आईईडी और अन्य घातक हथियार बनाए जा रहे थे।
2024 में नक्सल विरोधी अभियानों की बड़ी सफलताओं के बाद, 2025 में भी सुरक्षा बलों ने नक्सलवाद के खिलाफ अपना अभियान तेज़ी से जारी रखा है। पिछले चार महीनों में ही 197 कट्टर नक्सलियों को ढेर किया गया है, जो इस संघर्ष की तीव्रता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की संख्या में भी ऐतिहासिक गिरावट देखी गई है। 2014 में जहाँ 35 जिले गंभीर रूप से नक्सल प्रभावित थे, वहीं 2025 तक यह संख्या घटकर सिर्फ 6 रह जाएगी। इसी तरह, इसी तरह कुल नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 126 से घटकर अब केवल 18 रह गई है।
नक्सली हिंसा की घटनाओं में भी बड़ा अंतर आया है। 2014 में 76 जिलों के 330 थानों में 1080 नक्सली घटनाएँ दर्ज की गई थीं, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 42 जिले तक सिमट गई। यहाँ के 151 थानों में इस दौरान 374 घटनाएँ ही हुई है। इसी अवधि में सुरक्षा बलों के नुकसान की संख्या 88 से घटकर 19 हो गई है।
साथ ही, मुठभेड़ों में मारे गए नक्सलियों की संख्या 2014 के 63 से बढ़कर अब 2089 हो चुकी है, जो इस अभियान की आक्रामकता और सफलता को दर्शाता है। आत्मसमर्पण की दर में भी बड़ी वृद्धि देखी गई है, 2024 में 928 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि 2025 के पहले चार महीनों में ही 718 नक्सली हथियार छोड़ चुके हैं।
2019 से 2025 के बीच, केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस ने नक्सल प्रभावित राज्यों में 320 सुरक्षा कैंप स्थापित किए, जिनमें 68 नाइट लैंडिंग हेलीपैड शामिल हैं। फोर्टिफाइड (सुरक्षित) पुलिस स्टेशनों की संख्या भी 2014 में 66 से बढ़कर अब 555 हो गई है।
ये आँकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि सरकार और सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों से नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है, और अब यह समस्या अपने अंत के कगार पर है।
नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियानों का बड़ा असर अब साफ़ नजर आने लगा हैं। बड़ी और सशस्त्र नक्सली इकाइयों का विभाजन हो गया है और वो छोटे-छोटे दलों में बंट गए हैं। सुरक्षा बलों की नक्सली क्षेत्रों पर पकड़ अब कहीं अधिक मजबूत हो गई है। बीजापुर और नारायणपुर में धीमे-धीमे नक्सली एक-एक इंच से भगाए जा रहे हैं।
ऑपरेशन ‘कगार’ के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में CRPF, DRG और पुलिस सहित लगभग एक लाख अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है। इन सुरक्षाकर्मियों को सूचना एकत्र करने के लिए ड्रोन, खुफिया विश्लेषण के लिए एआई, और सैटेलाइट इमेजरी जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है।
कर्रेगुएटा के बाद अबूझमाड़ के पतन के साथ, भारत वामपंथी उग्रवाद और नक्सलवाद को समाप्त करने और इन विचारधाराओं से प्रभावित क्षेत्रों को शांति, समृद्धि, शिक्षा और विकास की मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में प्रगति कर रहा है।
ऑपइंडिया ने इससे पहले बताया था कि वामपंथी समूहों ने एक खुले पत्र के माध्यम से माओवादी आतंकवादियों का समर्थन किया और सरकार से नक्सल विरोधी अभियान को बंद करने की अपील की थी। हालाँकि, सरकार ने इस पर ध्यान दिए बिना यह लड़ाई जारी रखी थी।
यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में श्रद्धा पाण्डेय ने लिखी है। इसका हिंदी में अनुवाद विवेकानंद मिश्रा ने किया है।
बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के मुखिया मुहम्मद युनुस ने चीन यात्रा के दौरान भारत के सिलिगुड़ी चिकन नेक पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत के साथ पूर्वोत्तर राज्य लैंडलॉक्ड यानी जमीन से घिरे हैं ऐसे में चीन को बांग्लादेश में अपना आर्थिक प्रभाव अधिक बढ़ाना चाहिए।
इसके बाद क तुर्की इस्लामिक समूह ‘सल्तनत-ए-बांग्ला’ ने ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ नाम से एक नक्शा जारी किया। इसमें भारत के पूर्वोत्तर और पूर्वी हिस्सों को शामिल किया गया है।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के इस बयान और तथाकथित नक्शे से गुस्साए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बांग्लादेश को चेतावनी दी है। डेरगांव में प्रेस ब्रीफिंग में सीएम सरमा ने कहा कि हमारे पास एक चिकन एक है लेकिन बांग्लादेश के पास दो चिकन नेक्स हैं। अगर बांग्लादेश हमारे चिकन नेक पर हमला करता है तो हम बांग्लादेश के दोनों चिकन नेक्स पर हमला करेंगे।
सरमा ने आगे कहा कि बांग्लादेश का चिकन नेक मेघालय से सटा है और बांग्लादेश की चटगाँव बंदरगाह को जोड़ता है। यह भारत के चिकन नेक से भी पतला है और बस पत्थर फेंकने की दूरी पर स्थित है।
इस बीच एक रिपोर्ट ये भी आई कि चीन बांग्लादेश को सिलीगुड़ी के पास भारतीय सीमा के करीब लालमुनिरहाट में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान बनाए गए एयरबेस को फिर से तैयार करने में मदद कर रहा है। वर्तमान में इस बंद पड़े एयरबेस पर बांग्लादेश की वायु सेना का नियंत्रण है। हालाँकि यह दशकों से बेकार पड़ा हुआ है।
14 बार जन्म ले तब बांग्लादेश कर पाएगा हमला
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, “कोई भी देश यह भ्रम न पाले कि वह भारत का चिकन नेक छीन सकता है। ऑपरेशन सिंदूर से भारत ने यह पहले ही साबित कर दिया है कि वह कितना मजबूती से खड़ा है। बांग्लादेश को भारत पर हमला करने से पहले 14 बार जन्म लेना होगा।”
इसके बाद बांग्लादेश में जारी किए गए तथाकथित ग्रेटर बांग्लादेश वाले मानचित्र पर सीएम हिमंत सरमा ने कहा कि बांग्लादेश एक ‘छोटा सा देश’ है। उसे पर इतना ध्यान देने की जरूरत नहीं है। लोग ऐसा नक्शा बना सकते हैं और छाप सकते हैं। हम भी बांग्लादेश को असम का हिस्सा दिखाने वाला नक्शा बना सकते हैं, लेकिन किसी के नक्शा बना देने भर से असलियत नहीं बदलती।
कौन से हैं बांग्लादेश के दो चिकन नेक
भारत के सिलीगुड़ी गलियारा को चिकन नेक नाम से भी जाना जाता है। लगभग 22 किलोमीटर चौड़ा और 60 किलोमीटर लंबा ये वह रास्ता है जो पूरे पूर्वोत्तर को भारत से जोड़ता है। इसी तरह बांग्लादेश के पास भी दो चिकन नेक्स है।
बांग्लादेश का पहला चिकन नेक चटगाँव बंदरगाह से बांग्लादेश के अन्य हिस्सों को जोड़ता है। त्रिपुरा के पास स्थित यह चिकन नेक मिरसराय उपजिले में लगभग 40 किलोमीटर की भूमि है।
बांग्लादेश का दूसरा चिकन नेक रंगपुर डिवीजन के दक्षिणी कॉरिडोर है जो मेघालय के पास है। यह चिकन नेक दक्षिण पश्चिम गौराहिल्स से पश्चिम बंगाल में दक्षिण दिनाजपुर तक रंगपुर को बाकी हिस्सों से जोड़ता है और यह लगभग 90 किलोमीटर लंबा है।
बांग्लादेश को कैसे नुकसान पहुँचा सकती है उसी की चिकन नेक
दक्षिण त्रिपुरा के पास वाला बांग्लादेश का चिकन नेक काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर इसे बंद कर दिया जाए तो बांग्लादेश का लगभग 20% हिस्सा देश से कट जाएगा। दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि चटगाँव बांग्लादेश का सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह है।
बांग्लादेश के दो चिकन नेक्स (फोटो साभार- इंडिया टुडे)
चटगाँव शहर भी बांग्लादेश के लिए काफी जरूरी शहर है। हालाँकि जंगल और नदियों से भरा यह इलाका भारत के लिए एक मुसीबत ही है क्योंकि म्यांमार के घुसपैठियों, अवैध बांग्लादेशियों समेत अन्य उग्रवादियों के लिए बहुत ही उपयुक्त जगह रही है।
अब बात करते हैं बांग्लादेश के दूसरे चिकन नेक की। दूसरा चिकन नेक बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन में है। असल में यह बांग्लादेश का पूरा उत्तरी भू-भाग है जो लगभग 16,000 वर्ग किलोमीटर से भी ज्यादा में फैला है। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के लिए रंगपुर काफी अहम है। रंगपुर में ही जूट, चीनी, चावल और तंबाकू की मिल और बड़ी-बड़ी कंपनियां मौजूद हैं।
अगर बांग्लादेश के इन दोनों चिकन नेक बांग्लादेश के साथ से निकल जाता है तो बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी और उसका असल नक्शा ही पलट सकता है।
भारत ने जब से आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया है तब से पाकिस्तान बौखला गया है। हर रोज भारत के खिलाफ एक नई चाल चलने की पाकिस्तान नाकाम कोशिशें कर रहा है।
इसके तहत सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से सूचना मिली है कि करीब 37 पाकिस्तानी और बांग्लादेशी आतंकी इस समय नेपाल में मौजूद हैं और भारत में घुसपैठ करने की ताक में हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बहराइच से बलरामपुर तक की नेपाल सीमा पर एसएसबी के 1500 अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया है। एसएसबी 42वीं वाहिनी ने सीमा क्षेत्र में दोहरी गश्त भी शुरू कर दी है। सुरक्षा के मद्देनजर वन क्षेत्र में अतिरिक्त चौकी भी बनाई गई है।
बलरामपुर के एएसपी योगेश कुमार का कहना है कि एसएसबी और पुलिस की संयुक्त टीम सीमा पर 24 घंटे नजर रख रही है। इसके अलावा ग्राम सुरक्षा समितियों को भी सक्रिय किया गया है। 42 वीं बटालियन के कमांडेंट गंगा सिंह उदावत का कहना है कि जिन 37 लोगों के बारे में सूचना मिली है, वो सभी बांग्लादेश से नेपाल पहुँच चुके हैं और सभी भारत और नेपाल की खुली सीमा का फायदा उठाते हुए भारत मे घुसने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए सीमा पर कड़े इंतजाम के साथ लगातार निगरानी रखी जा रही है।
37 लोगों में 10 बांग्लादेशी और 27 पाकिस्तानी बताए जा रहे हैं। सूचना के बाद सीमा पर 24 घंटे पेट्रोलिंग चल रही है ताकि कोई अवांछित नागरिक भारत में प्रवेश न कर सके। सभी के परिचय पत्र की भी चेकिंग की जा रही है। नेपाल से लगते उत्तर प्रदेश के महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, पीलीभीत व लखीमपुर खीरी में अलर्ट भी जारी कर दिया गया है।
इन लोगों के भारत में दाखिल होने की कोशिश करने का मकसद साफ है कि पाकिस्तान कोई बड़ी साजिश रच रहा है और फिर किसी नापाक हरकत को अंजाम देने की फिराक में है।
दिल्ली पुलिस और भारतीय जाँच एजेंसियों ने एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम देते हुए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के दो जासूसों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक नेपाली मूल का अंसारुल मिया अंसारी है, जिसे दिल्ली के एक होटल से पकड़ा गया। यह ऑपरेशन जनवरी से मार्च 2025 तक चला, जिसमें खुफिया जानकारी के आधार पर अंसारुल को 15 फरवरी 2025 को हिरासत में लिया गया। उसके पास से भारतीय सशस्त्र बलों से जुड़े कई गोपनीय दस्तावेज बरामद हुए, जो वह पाकिस्तान भेजने की फिराक में था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अंसारुल 2008 से कतर में कैब ड्राइवर के रूप में काम कर रहा था। वहाँ उसकी मुलाकात एक ISI हैंडलर से हुई, जिसने उसे लालच और वैचारिक उकसावे के जरिए अपने जाल में फँसाया। जून 2024 में अंसारुल को पाकिस्तान के रावलपिंडी ले जाया गया, जहां ISI के वरिष्ठ अधिकारियों ने उसे जासूसी की ट्रेनिंग दी। उसे खास तौर पर भारतीय सेना से जुड़े गोपनीय दस्तावेज, तस्वीरें और जियोलोकेशन डेटा इकट्ठा करने का काम सौंपा गया। इसके बाद उसे नेपाल के रास्ते भारत भेजा गया, ताकि वह दिल्ली में आतंकी हमले की साजिश को अंजाम दे सके।
जाँच एजेंसियों को जनवरी 2025 में खुफिया सूचना मिली थी कि एक ISI जासूस नेपाल के रास्ते दिल्ली में घुसने वाला है। इसके आधार पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और केंद्रीय एजेंसियों ने मिलकर एक सीक्रेट ऑपरेशन शुरू किया। सूत्रों के मुताबिक, यह जासूसी कला का एक शानदार नमूना था, जिसमें भारतीय एजेंसियाँ हर कदम पर अंसारुल से आगे रहीं। जाँच में यह भी सामने आया कि दिल्ली में एक बड़े आतंकी हमले की साजिश रची जा रही थी, जिसमें सैन्य ठिकानों की गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल होना था।
अंसारुल को भारत में मदद करने वाला राँची का रहने वाला अखलाक अजाम था, जिसे मार्च 2025 में गिरफ्तार किया गया। अखलाक ने अंसारुल को लॉजिस्टिक सपोर्ट और दस्तावेज इकट्ठा करने में मदद की। दोनों के मोबाइल फोन की जाँच में पाकिस्तानी हैंडलरों के साथ संदिग्ध बातचीत के सबूत मिले, जो एक बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा करते हैं। दिल्ली पुलिस ने दोनों के खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (Official Secrets Act) के तहत मामला दर्ज किया और मई 2025 में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
अंसारुल और अखलाक को दिल्ली की तिहाड़ जेल के हाई-सिक्योरिटी वार्ड में रखा गया है। अधिकारियों ने उनकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी है, ताकि वे जेल में अन्य कैदियों को प्रभावित न कर सकें। जाँच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हैं।