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फायरिंग, अल्लाहू अकबर, भागते हिंदू… हवा में झूल रहे जिस शख्स के कैमरे में रिकॉर्ड हुआ पहलगाम अटैक, उसे जमीन पर गिरती लाशों की भनक तक न लगी: देखिए Video

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए खौफनाक आतंकी हमले ने पूरी दुनिया को हिला दिया। अनंतनाग जिले के बैसरन घाटी में उस दिन पाँच हथियारबंद आतंकियों ने हमला बोला, जिसमें 26 हिंदुओं की जान चली गई और 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए। मरने वालों में 25 भारतीय पर्यटक, एक नेपाली नागरिक और एक स्थानीय मुस्लिम समेत कुल 27 लोग थे। अब इस हमले का एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें एक जिप-लाइन ऑपरेटर को गोलियों की आवाज के बीच ‘अल्लाहू अकबर’ चिल्लाते और एक पर्यटक को जिप-लाइन पर धक्का देते देखा गया है।

यह वीडियो पर्यटक ऋषि भट्ट ने खुद रिकॉर्ड किया था, जो बैसरन के खूबसूरत नजारे को कैमरे में कैद करना चाहते थे। वीडियो में साफ दिखता है कि जैसे ही गोलियों की आवाज गूँजती है, जिप-लाइन ऑपरेटर तीन बार ‘अल्लाहू अकबर‘ चिल्लाता है और ऋषि को जिप-लाइन पर भेज देता है। नीचे अफरा-तफरी मच जाती है, लोग जान बचाने के लिए भागते हैं, कुछ जमीन पर गिरते हैं क्योंकि गोलियाँ उनकी तरफ आ रही होती हैं। इस वीडियो ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या स्थानीय लोग भी इस हमले में शामिल थे।

हमले के दिन आतंकियों ने एम4 कार्बाइन और एके-47 जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया। उन्होंने पहले पर्यटकों से उनकी धर्म पूछा, इस्लामी कलमा पढ़ने को कहा और जो गैर-मुस्लिम थे, उन्हें गोली मार दी। पुरुषों को पैंट उतारकर यह भी चेक किया गया कि वे मुस्लिम हैं या नहीं। यह हमला इतना भयानक था कि कई लोग सिर में गोली लगने से मरे। आतंकियों ने औरतों और बच्चों को छोड़ दिया, लेकिन पुरुषों को निशाना बनाया। हमले की जिम्मेदारी पहले द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली, जो पाकिस्तान की लश्कर-ए-तैयबा का हिस्सा है, लेकिन बाद में उसने अपना बयान वापस ले लिया।

भारतीय जाँच एजेंसियों ने पाया कि हमले के तार पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद और कराची से जुड़े हैं। तीन संदिग्धों के स्केच जारी किए गए और उनकी जानकारी देने वालों के लिए 60 लाख रुपये का इनाम रखा गया। भारत ने जवाब में सख्त कदम उठाए, इसमें पाकिस्तान के साथ 1960 की सिंधु जल संधि को रद्द करना, अटारी बॉर्डर बंद करना और पाकिस्तानी राजनयिकों को निकाल देना। पाकिस्तान ने भी जवाब में भारतीयों के वीजा रद्द कर दिए और हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया, और नियंत्रण रेखा पर झड़पें भी हुईं।

दुनिया भर के नेताओं ने इस हमले की निंदा की और भारत के साथ एकजुटता दिखाई। लेकिन इस हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कश्मीर में शांति कितनी नाजुक है। बैसरन की खूबसूरत घाटी, जो कभी पर्यटकों की पसंदीदा जगह थी, आज खून से सनी है। इस हमले ने न सिर्फ मासूम लोगों की जान ली, बल्कि वहाँ के स्थानीय लोगों पर भी सवाल खड़े कर दिए, क्योंकि ये वीडियो खुद ब खुद बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या स्थानीय लोगों को इस हमले की जानकारी नहीं थी?

शरिया अदालत, कोर्ट ऑफ काजी, दारुल कजा… जो भी कहना हो कहिए, पर इनकी कानूनी औकात कुछ भी नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने किया साफ, कहा- इनका आदेश मानने की बाध्यता नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में साफ कर दिया है कि भारत में शरिया अदालत, काजी कोर्ट, दारुल कजा या इसी तरह के किसी भी संस्थान की कोई कानूनी मान्यता नहीं है। इनके द्वारा दिए गए कोई भी आदेश या फैसले कानूनन लागू नहीं किए जा सकते। यह फैसला जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अहसनुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच ने सुनाया।

इस मामले में एक महिला शहजाहन ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा गया था। फैमिली कोर्ट ने शहजाहन को भरण-पोषण देने से इनकार कर दिया था, क्योंकि उसने एक काजी कोर्ट के समझौता पत्र के आधार पर यह माना था कि शहजाहन ही वैवाहिक विवाद की जिम्मेदार थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान फैमिली कोर्ट के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि काजी कोर्ट या शरिया अदालत का कोई कानूनी आधार नहीं है। जस्टिस अहसनुद्दीन अमानुल्लाह ने अपने फैसले में लिखा, “काजी कोर्ट, दारुल कजा कजियत कोर्ट, शरिया कोर्ट आदि, चाहे इन्हें किसी भी नाम से पुकारा जाए, इनकी कानून में कोई मान्यता नहीं है। जैसा कि विश्व लोचन मदन बनाम भारत सरकार (2014) में कहा गया, ऐसे संस्थानों द्वारा दी गई कोई भी घोषणा या फैसला किसी पर बाध्यकारी नहीं है और इसे जबरन लागू नहीं किया जा सकता। ऐसी घोषणा या फैसला तभी कानूनी जाँच में टिक सकता है, जब संबंधित पक्ष इसे स्वीकार करें और उसका पालन करें, बशर्ते यह किसी अन्य कानून से टकराव न पैदा करे। फिर भी, ऐसी घोषणा या फैसला केवल उन पक्षों के बीच ही मान्य होगा, जो इसे स्वीकार करते हैं, न कि किसी तीसरे पक्ष पर।”

यह मामला शहजाहन और उनके शौहर के बीच निकाह और तलाक से जुड़ा है। शहजाहन का निकाह 24 सितंबर 2002 को उत्तर प्रदेश के एक व्यक्ति के साथ इस्लामी रिवाजों से हुई थी। यह दोनों का दूसरा निकाह था। साल 2005 में शौहर ने भोपाल, मध्य प्रदेश के काजी कोर्ट में ‘तलाक मुकदमा नंबर 325’ दायर किया, जो 22 नवंबर 2005 को दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के आधार पर खारिज हो गया। समझौते में दोनों ने साथ रहने और एक-दूसरे को शिकायत का मौका न देने का वादा किया था।

साल 2008 में शौहर ने दारुल कजा कजियत कोर्ट में फिर से तलाक के लिए मुकदमा दायर किया। उसी साल शहजाहन ने फैमिली कोर्ट में आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की माँग की। साल 2009 में दारुल कजा कोर्ट ने तलाक को मंजूरी दे दी और तलाकनामा जारी हुआ। लेकिन फैमिली कोर्ट ने शहजाहन की भरण-पोषण की माँग को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि शौहर ने शहजाहन को नहीं छोड़ा, बल्कि उनके स्वभाव और व्यवहार की वजह से ही विवाद हुआ और वह खुद घर छोड़कर चली गईं।

सुप्रीम कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के इस तर्क को गलत ठहराया। कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने यह मान लिया कि चूँकि यह दोनों का दूसरा निकाह था, इसलिए दहेज की माँग की संभावना नहीं थी। जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा, “फैमिली कोर्ट का यह तर्क कानून के सिद्धांतों से परे है और केवल अनुमान पर आधारित है। कोर्ट को यह मान लेना कि दूसरे निकाह में दहेज की माँग नहीं हो सकती, गलत है।”

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि 2005 के समझौता पत्र में शहजाहन ने अपनी गलती स्वीकार नहीं की थी, जैसा कि फैमिली कोर्ट ने माना था। समझौता पत्र में केवल यह लिखा था कि दोनों पक्ष साथ रहेंगे और एक-दूसरे को परेशान नहीं करेंगे। कोर्ट ने कहा कि इस आधार पर शहजाहन को भरण-पोषण से वंचित करना गलत है।

सुप्रीम कोर्ट ने शौहर को आदेश दिया कि वह शहजाहन को हर महीने 4,000 रुपये भरण-पोषण के रूप में दे, और यह राशि उस तारीख से लागू होगी, जब शहजाहन ने फैमिली कोर्ट में आवेदन दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि बच्चों के लिए दी गई भरण-पोषण राशि भी आवेदन की तारीख से लागू होगी, लेकिन बेटी के लिए यह केवल तब तक लागू होगा, जब तक वह नाबालिग थी। शौहर को चार महीने के भीतर फैमिली कोर्ट में यह राशि जमा करने का निर्देश दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि धारा 125 एक कल्याणकारी कानून है, जिसका मकसद बीवी और बच्चों को बेसहारा होने से बचाना है। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में देरी की वजह से आवेदक को नुकसान नहीं होना चाहिए। इस फैसले ने न केवल शरिया अदालतों की कानूनी स्थिति को स्पष्ट किया, बल्कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एक मजबूत संदेश भी दिया।

₹63000 करोड़ में भारत ने खरीदे परमाणु बम दागने में सक्षम 26 राफेल मरीन: जानिए कब तक मिलेगा पहला फाइटर जेट, कैसे फ्रांस के साथ इस डील से बदल जाएँगे समंदर के समीकरण?

भारत ने अपनी नौसेना को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। नई दिल्ली में सोमवार (28 अप्रैल 2025) को भारत और फ्रांस के बीच 63 हजार करोड़ रुपए की मेगा डील साइन हुई, जिसमें भारत को 26 राफेल मरीन फाइटर जेट्स मिलेंगे। ये विमान न सिर्फ समुद्र में भारत की ताकत बढ़ाएँगे, बल्कि दुश्मन देशों जैसे पाकिस्तान और चीन के लिए भी एक सख्त संदेश होंगे।

ये डील इसलिए भी खास है, क्योंकि ये फ्रांस के साथ भारत की अब तक की सबसे बड़ी हथियार डील है। राफेल मरीन विमानों को INS विक्रांत जैसे विमानवाहक पोत पर तैनात किया जाएगा, जो भारत को समुद्र में एक नई ताकत देगा। आइए इस डील को, राफेल मरीन की खासियतों को और इसके महत्व को आसान भाषा में समझते हैं।

राफेल मरीन की विशेषताएँ: एक ताकतवर फाइटर जेट

राफेल मरीन एक ऐसा फाइटर जेट है, जो समुद्र में भारत की ताकत को कई गुना बढ़ा देगा। इसकी खासियतों को समझें:

डिज़ाइन और ताकत: राफेल मरीन की लंबाई 50.1 फीट और चौड़ाई 10.80 मीटर है। इसका वजन 15 हजार किलो तक हो सकता है। इसमें 11,202 किलो फ्यूल भर सकता है, जिससे ये लंबे समय तक उड़ान भर सकता है। ये 52 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है और इसकी रफ्तार 2205 किमी प्रति घंटा है।

रेंज और ताकत: इसकी रेंज 3700 किमी है, यानी ये इतनी दूर तक हमला कर सकता है। इसमें 30 एमएम की ऑटो कैनन गन और 14 हार्ड प्वाइंट्स हैं, जहां हथियार लगाए जा सकते हैं।

खास फीचर्स: ये विमान सिर्फ एक मिनट में 18 हजार मीटर की ऊंचाई तक पहुंच सकता है। इसमें फोल्डिंग विंग्स हैं, जो इसे विमानवाहक पोत पर आसानी से रखने में मदद करते हैं। ये बहुत कम जगह पर भी लैंड कर सकता है।

हथियारों की ताकत: राफेल मरीन में कई तरह की मिसाइलें लगाई जा सकती हैं, जैसे स्काल्प (Scalp) मिसाइल, जो 300 किमी तक मार कर सकती है, और मेटियोर (Meteor) मिसाइल, जो हवा में 120-150 किमी दूर तक दुश्मन के विमानों को मार गिरा सकती है। इसके अलावा, इसमें 70 किमी रेंज वाली एक्सोसेट (Exocet) एंटी-शिप मिसाइल भी है, जो समुद्र में दुश्मन के जहाजों को तबाह कर सकती है।

एडवांस टेक्नोलॉजी: ये विमान परमाणु हथियार दागने में सक्षम है। इसमें एडवांस रडार है, जो पनडुब्बियों को खोजकर उन्हें नष्ट कर सकता है। साथ ही, ये 10 घंटे तक फ्लाइट रिकॉर्ड कर सकता है।

बीच हवा में रीफ्यूलिंग: राफेल मरीन को हवा में ही रीफ्यूल किया जा सकता है, जिससे इसकी रेंज और बढ़ जाती है।

भारत के लिए कस्टमाइजेशन: दसॉ एविएशन ने इन विमानों को भारत की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया है। इसमें एंटी-शिप स्ट्राइक, न्यूक्लियर हथियार लॉन्च करने की क्षमता और मजबूत फ्रेम जैसे फीचर्स शामिल हैं। कंपनी भारत को हथियार प्रणाली, स्पेयर पार्ट्स और जरूरी टूल्स भी देगी।

राफेल मरीन क्यों जरूरी था?

भारतीय नौसेना के पास अभी INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत जैसे दो विमानवाहक पोत हैं, जहाँ पुराने मिग-29के फाइटर जेट्स तैनात हैं। लेकिन इन मिग-29के विमानों में कई समस्याएँ हैं, जैसे रखरखाव की ज्यादा जरूरत और कम उपलब्धता। नौसेना को 2022 में ही कहना पड़ा था कि INS विक्रांत को मिग-29के के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन अब उसे एक बेहतर डेक-बेस्ड फाइटर जेट चाहिए। राफेल मरीन इस कमी को पूरा करेगा।

एडवांस टेक्नोलॉजी की जरूरत: राफेल मरीन में मिग-29के से कहीं ज्यादा एडवांस रडार, सेंसर और हथियार ले जाने की क्षमता है।

पुराने विमानों का विकल्प: मिग-29के की जगह लेने के लिए राफेल मरीन एकदम सही है, क्योंकि भारत पहले से ही वायुसेना के लिए 36 राफेल जेट्स इस्तेमाल कर रहा है। इससे रखरखाव और ट्रेनिंग में आसानी होगी।

सामरिक जरूरत: भारत की समुद्री सीमाओं पर पाकिस्तान और चीन जैसे देशों का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में राफेल मरीन जैसे मॉडर्न जेट्स की जरूरत थी।

स्वदेशी विमान में देरी: भारत का अपना ट्विन-इंजन डेक-बेस्ड फाइटर (TEDBF) बनने में अभी 10 साल लग सकते हैं। तब तक राफेल मरीन एक अंतरिम समाधान है।

ट्रायल में जीत: 2022 में नौसेना ने गोवा में राफेल मरीन और अमेरिका के F/A-18 सुपर हॉर्नेट का ट्रायल किया था। राफेल मरीन ने इसमें बाजी मारी, जिसके बाद भारत ने इसे चुना।

इंडियन नेवी को क्या ताकत मिलेगी?

राफेल मरीन की तैनाती से भारतीय नौसेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।

समुद्र में मजबूत पकड़: INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य पर राफेल मरीन की तैनाती से भारत समुद्र में अपनी पकड़ मजबूत करेगा। ये विमान समुद्र, जमीन और हवा में हमला करने में सक्षम हैं।

एडवांस हथियार और रडार: राफेल मरीन के एडवांस रडार और हथियार दुश्मन की पनडुब्बियों, जहाजों और विमानों को आसानी से निशाना बना सकते हैं।

लंबी रेंज और रीफ्यूलिंग: 3700 किमी की रेंज और हवा में रीफ्यूलिंग की सुविधा से ये विमान लंबे मिशन पर जा सकते हैं।

न्यूक्लियर स्ट्राइक की ताकत: परमाणु हथियार दागने की क्षमता इसे एक रणनीतिक हथियार बनाती है।

पाकिस्तान और चीन पर कैसे भारी पड़ेगा?

राफेल मरीन की ताकत पाकिस्तान और चीन जैसे दुश्मन देशों के लिए एक बड़ा खतरा है।

पाकिस्तान के F-16 से बेहतर: राफेल मरीन पाकिस्तान के F-16 से कहीं ज्यादा एडवांस है। इसकी मेटियोर मिसाइल 120-150 किमी दूर तक दुश्मन के विमानों को मार सकती है, जो F-16 की रेंज से बाहर है।

चीन के J-20 को टक्कर: चीन का J-20 विमान भी राफेल मरीन की रडार टेक्नोलॉजी और हथियारों के सामने कमजोर पड़ सकता है। राफेल की लंबी रेंज और सटीक हमले की क्षमता इसे बेहतर बनाती है।

समुद्र में बढ़त: समुद्र में चीन और पाकिस्तान की नौसेना पर भारत की पकड़ मजबूत होगी। राफेल मरीन की एंटी-शिप मिसाइलें दुश्मन के जहाजों को आसानी से नष्ट कर सकती हैं।

रणनीतिक दबाव: परमाणु हथियार दागने की क्षमता दुश्मन देशों पर रणनीतिक दबाव बनाएगी।

भारत और फ्रांस के बीच सोमवार (28 अप्रैल 2025) को नई दिल्ली में 26 राफेल मरीन विमानों की डील साइन हो गई। भारत की तरफ से रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने डील पर साइन किए। डील के तहत भारत, फ्रांस से 22 सिंगल सीटर विमान और 4 डबल सीटर विमान खरीदेगा। इन फाइटर जेट्स की खरीद को 23 अप्रैल 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में मंजूरी मिली थी। यह मीटिंग पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद बुलाई गई थी।

राफेल मरीन डील भारत के लिए एक गेम-चेंजर है। ये न सिर्फ नौसेना को मॉडर्न बनाएगा, बल्कि समुद्र में भारत की ताकत को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। 2028 से शुरू होने वाली इसकी डिलीवरी 2031 तक पूरी हो जाएगी और तब तक भारत समुद्र में एक नई ताकत के रूप में उभरेगा।

‘गायत्री मंत्र नहीं बोलने पर मुस्लिम को मार डाला’: पहलगाम अटैक पर LinkedIn यूजर के झूठ को The Quint ने दी हवा, बाद में चुपके से खबर हटाई

कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले में हिन्दुओं की हत्या के बाद अब लिबरल और वामपंथी जमात वापस अपने काम में लग गई है। हिन्दुओं की पीड़ा बताने के बजाय उसका पूरा ध्यान अब सोशल मीडिया पर कश्मीरियों के ‘उत्पीड़न’ की झूठी और पुरानी कहानियाँ साझा करने पर है। 24 हिन्दुओं की हत्या के बाद भी उसका फोकस ‘मुस्लिम विक्टिम’ बनाने पर है।

शुक्रवार (25 अप्रैल 2025) को सोशल मीडिया वेबसाइट LinkedIn पर ईशान सक्सेना नाम के एक यूजर ने एक फर्जी पोस्ट डाली। पोस्ट में उसने दावा किया कि उसका एक करीबी मुस्लिम दोस्त बेंगलुरु के अस्पताल में ICU में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है।

ईशान ने लिखा कि उसका मुस्लिम दोस्त (जिसका नाम उसने नहीं बताया) एक प्रसिद्ध वाहन निर्माता फैक्ट्री में काम करता है। ईशान ने दावा किया कि उसके मुस्लिम दोस्त को उसके सहकर्मियों ने बुरी तरह पीटा है। ईशान का दावा था कि मारपीट करने वाले हिंदू लोग थे और उन्होंने मुस्लिम युवक के गायत्री मंत्र न बोलने और पहलगाम आतंकी हमले पर कुछ न कहने के कारण उसके मुस्लिम दोस्त को पीटा।

ईशान सक्सेना के पोस्ट का स्क्रीनशॉट

अपनी पोस्ट में ईशान ने लिखा, “उसने (मुस्लिम दोस्त) अपने स्थानीय दोस्तों के साथ लंच के समय हाल ही में हुए पहलगाम हमले के बारे में कुछ न बोलना ठीक समझा। उसने शांति से इस पर कुछ भी कहने से मना कर दिया और चर्चा में भाग न लेकर उससे दूरी बनाई। बाद में जब उसकी शिफ्ट खत्म हुई तो कुछ लोग उसके पास आए और उससे गायत्री मंत्र बोलने को कहा। उसने मना किया तो उसके साथ बुरी तरह मारपीट की गई।”

ईशान ने आगे लिखा कि इस पूरे मामले पर अब तक कोई FIR भी दर्ज नहीं की गई है। उसने आगे लिखा, “पिछली रात उसकी पत्नी का मेरे पास फोन आया। वह टूट चुकी है। इससे भी अधिक बुरी बात है कि कोई FIR नहीं लिखी गई। और जिस संस्थान में उसे ईमानदारी के साथ काम किया उसने भी कोई बयान नहीं दिया।”

लिंक्डइन पोस्ट का स्क्रीनशॉट

ईशान की ये पोस्ट तुरंत वायरल हो गई। कुछ ही समय में यह 400 से भी अधिक लाइक पा गई। एक अन्य LinkedIn यूजर ने जब मुस्लिम पीड़ित के बारे में पूछा तो ईशान ने दावा किया कि उसकी मौत हो चुकी है। पोस्ट पर उसने कमेंट किया, “वह अब नहीं रहा। 30 मिनट पहले उसकी मौत हो गई।”

बेंगलुरु जैसे विविधता वाले शहर में एक मुस्लिम कॉर्पोरेट कर्मचारी से जबरन गायत्री मंत्र बुलवाना और पहलगाम आतंकी हमले पर कुछ न बोलने पर हत्या कर देना काफी संवेदनशील मामला बनता। पहलगाम हमले जैसी राष्ट्रीय समस्या के समय इससे सामाजिक तनाव और सांप्रदायिक अशांति फैलाने का भी खतरा था।

हालाँकि, अंग्रेजी मीडिया में इस तरह के उत्पीड़न (या हत्या) पर कहीं भी कोई रिपोर्ट नहींं दिखी। यहाँ तक कि कन्नड़ न्यूज चैनल या अखबारों में भी इस तरह की विस्फोटक खबर का अता पता नहीं था। इसके कारण इस पोस्ट की सच्चाई पर शक और अधिक बढ़ गया।

ऑपइंडिया जर्नलिस्ट द्वारा लिया गया ट्वीट का स्क्रीनशॉट

ऑपइंडिया अंग्रेजी के सहायक संपादक दिबाकर दत्ता ने इस मामले को लेकर बेंगलुरू पुलिस से संपर्क किया। उन्होंने अलग-अलग जोन के डिप्टी कमिश्नर के एक्स (पहले ट्विटर) हैंडल को टैग कर इससे सम्बन्धित जानकारी माँगी लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके कुछ ही घंटे बाद ईशान सक्सेना वह LinkedIn पोस्ट डिलीट कर दी।

इसके बाद ईशान ने अपना LinkedIn अकाउंट भी डिएक्टिवेट कर दिया। इसके बाद लगातार सामने आई जानकारियों से स्पष्ट होता गया कि ईशान की ‘करीबी मुस्लिम दोस्त’ के पहलगाम हमले पर कुछ न बोलने पर हिंदू साथियों द्वारा हत्या की कहानी झूठी है।

ईशान ने अपने LinkedIn में दावा था कि वह ‘कैश करो’ कम्पनी के HR विभाग में काम करता था। इस मामले में दिबाकर दत्ता और कुछ स्थानीय लोगों ने भी कंपनी से संपर्क करने की कोशिश की। शनिवार (26 अप्रैल 2025) को कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा कि ईशान सक्सेना ‘कैश करो’ कंपनी का वर्तमान में कर्मचारी नहीं है।

कैश करो ने कहा,”हमारे संज्ञान में आया है कि सोशल मीडिया पर ईशान सक्सेना (पूर्व-कैश करो कर्मचारी) द्वारा एक पोस्ट की गई है। हम इस बात को स्पष्ट करना चाहते हैं कि ईशान सक्सेना को कैश करो कंपनी की जिम्मेदारियों से 27 अप्रैल 2025 को मुक्त कर दिया गया है।”

उन्होंने आगे बताया, “उनकी ओर से साझा किए गए पोस्ट व्यक्तिगत थे और इसका कंपनी के विचार, मूल्य और स्थिति से कोई लेना देना नहीं है। कैश करो सम्मामनजनक, समावेशी और जिम्मेदार वातावरण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, चाहे वह हमारे संगठन के भीतर हो या उन समुदायों में जिनके लिए हम काम करते हैं।”

ईशान सक्सेना के झूठे दावों का बढ़ावा देता द क्विंट

शुक्रवार (25 अप्रैल 2025) को द क्विंट ने इस खबर को ‘मुस्लिमों को पीड़ित दिखाने की’ खबरों की सीरीज में शामिल किया। मामले के तथ्यों को जाने बिना उसने ईशान सक्सेना के पोस्ट को दोबारा प्रकाशित किया।

द क्विंट में छपी खबर का स्क्रीनशॉट

क्विंट ने इसके लिए सब हेड लगाते हुए खबर लिखी, “एक ऑटो कंपनी के कर्मचारी को कथित तौर पर बुरी तरह से पीटा गया।” (इसे अब हटा दिया गया है।)

क्विंट की ‘पत्रकार’ अलीज़ा नूर ने न तो पुलिस से संपर्क किया और न ही कोई अन्य पुष्टि करने वाले स्रोतों को ढूँढने की कोशिश की।

‘द उम्माह इनसाइट’ की इंटाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

ईशान सक्सेना के झूठे दावों को इंस्टाग्राम पर एक इस्लामी पेज ‘द उम्माह इनसाइट’ (The Ummah Insights) ने दिल को झकझोर देने वाले ग्राफिक्स के साथ रीपोस्ट किया। खबर के लिखने के समय तक इसे 1428 लाइक्स मिल चुके थे।

ईशान सक्सेना ने इश पर क्या कहा

ऑपइंडिया ने इस मामले में तह तक जाने के लिए शनिवार (26 अप्रैल 2025 को) को ईशान सक्सेना से बात की। उसने दावा किया कि उसने लिंक्डइन के एक अन्य यूजर की इस पोस्ट को कॉपी किया लेकिन उसे उस यूजर का नाम नहीं याद है।

जब उससे ‘मुस्लिम दोस्त’ की मौत पर सवाल पूछा गया तो ईशान सक्सेना ने दावा किया कि उसने एक अन्य व्यक्ति के कमेंट में ऐसा लिखा देखा था तो उसने भी वही लिख दिया। उसने इस बात को माना कि ये घटना झूठी हो सकती है। उसने हमें बताया यह बताया कि बेंगलुरू पुलिस ने उससे पूछताछ की थी।

ईशान सक्सेना के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि इस तरह की कोई भी घटना संज्ञान में नहीं आई है। पुलिस ने ईशान से इस पोस्ट को डिलीट करने और भविष्य में इस तरह के सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील कंटेंट को बिना जाँच किए पोस्ट करने से मना किया है।

ईशान सक्सेना ने ऑपइंडिया को अपना आधिकारिक बयान दिया, “मेरा नाम ईशान है और हाल ही में मैंने लिंक्डइन पर एक मुस्लिम व्यक्ति पर उसके साथियों द्वारा हमले की बात लिखी थी। असल में ये पोस्ट लिंक्डइन पर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा लिखी गई थी जिसे मैंने कॉपी किया था।”

आगे ईशान ने कहा, “मैंने इसे हमारे देश में हो रही घटनाओं के प्रति दुखी महसूस करते हुए जल्दबाजी में साझा कर दिया। मुझे इस घटना के तथ्यों की जाँच परख करनी चाहिए थी जो मैंने नहीं किया और इसलिए मैं अपने कृत्य के लिए माफी माँगता हूँ कि मैंने बिना जाँच किये ऐसी पोस्ट लिखी जिसके बारे में मुझे लगा कि सत्य होगी।”

ऑपइंडिया को गूगल कैशे में ईशान सक्सेना के अलावा इस तरह की किसी भी अन्य पोस्ट की जानकारी नहीं मिली, जिसमें मुस्लिम कॉर्पोरेट कर्मी की गायत्री मंत्र न बोलने और पहलगाम पर चुप रहने के लिए मार दिये जाने की जानकारी हो। अन्य सोशल मीडिया पोस्ट भी सिर्फ ईशान की लिंक्डइइन प्रोफाइल और दावे के बारे में ही बताती दिखी।

निष्कर्ष

बार-बार, सोशल मीडिया पर ऐसी फर्जी कहानियाँ सामने आती हैं, जिनका उद्देश्य हिंदू समुदाय को बदनाम करना या इसकी छवि को धूमिल करना होता है। उपरोक्त उदाहरण में भी एक कहानी चली जिसमें ना तो नामों का उल्लेख किया गया और न ही अपराध के बारे में बताया गया। फिर भी एक प्रमुख मीडिया संगठन (द क्विंट) ने केवल इस कारण से सामने रखा क्योंकि यह ‘मुस्लिम पीड़ित’ दिखाने की धारणा में फिट बैठती थी।

पहलगाम आतंकी हमले में 24 हिंदुओं के इस्लामिक आतंकियों द्वारा मारे जाने पर से ध्यान हटाने के लिए ‘द क्विंट’ ने ऐसा किया। पहलगाम में में हिंदुओं को अपना नाम बताने, पहचान पत्र दिखाने, कलमा पढ़ने और यहाँ तक ​​कि ‘खतना’ का सबूत दिखाने के लिए अपनी पैंट उतारने तक के लिए मजबूर किया गया।

पहलगाम की सच्चाई बताने की बजाय क्विंट का फोकस पीड़ा की फर्जी खबरगढ़ने पर रहा। इस तरह की खबरों के जरिए आतंकी हमलों के पीड़ितों की ‘धार्मिक पहचान’ को छुपाने की भी कोशिश की जा रही है। द क्विंट ने ईशान सक्सेना की साझा की गई फेक न्यूज को बढ़ावा देने के बावजूद कोई माफी नहीं माँगी और चुपचाप खबर को हटा दिया।

इससे पहले भी हिंदू त्योहारों को बदनाम करने के इरादे से होली पर वीर्य से भरे गुब्बारे फेंके जाने जैसी कई झूठी कहानियाँ फैलाई गई। बाद में जाँच करने पर पता चला कि इस तरह की घटना हुई ही नहीं। तब भी बिना किसी माफीनामे के चुपचाप खबर हटा दी गई।

हिंदू लड़की का रेप कर रहा था फरहान, फोन पर चीखें सुन रहा था भाई: इंदौर तक फैला है भोपाल के ‘मुस्लिम गैंग’ का जाल, कहा- गिरफ्तारी का पता होता तो वायरल कर देता Video

मध्य प्रदेश के भोपाल में लव जिहाद के मामले में रोज नई परतें खुल रही हैं। जाँच के दौरान अब पुलिस को पता चला है कि इस केस का कनेक्शन इंदौर के कॉलेज तक था। मुख्य आरोपित फरहान ने वहाँ भी कई छात्राओं को फँसाया था और उनको टॉर्चर करता था। उसके फोन से लगभग 6 आपत्तिजनक वीडियोज मिली हैं। वहीं सारे आरोपितों के फोन की जाँच में कुल वीडियो 10 से 12 वीडियोज बरामद की गई हैं।

पूछताछ में फरहान कबूला है कि अगर उसे थोड़ा भी अंदेशा होता कि वो गिरफ्तार होने वाला है तो वो सबकी गंदी वीडियोज वायरल कर देता, लेकिन उसे इसका भान नहीं था। छानबीन में ये भी सामने आया है फरहान ने दो सगी बहन समेत 3 लड़कियों को फँसाया हुआ था। इनमें एक ऐसी नाबालिग थी जो फरहान को भाई-भाई कहती थी। मगर, जब ‘मुस्लिम गैंग’ ने उसे भी अपना निशाना बनाया।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता ने बातचीत में बताया कि साल 2022 में उसकी उम्र मात्र 16 साल थी। उस समय वह अपनी बहन के आईटी कॉलेज जाती थी। फरहान से उसकी मुलाकात वहीं हुई थी। एक दिन फरहान ने कहा – “मैं तुझे पसंद करता हूँ और मुझसे बात करने में बुराई क्या है।”

शुरू में बच्ची ने मना किया, मगर बार-बार कहने दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। एक दिन फरहान नाबालिग पीड़िता को अपने साथ अशोक गार्डन अपने रूम पर ले गया। पीड़िता के अनुसार, रूम पर पहुँचते ही वहाँ फरहान ने अपने कपड़े उतारे। लड़की ने मना किया तो उसे धमकी देते हुए उसका बलात्कार कर लिया। और आखिर में उसे कहा भी अगर किसी को ये सब बताया तो उसके फोटो-वीडियो उसके बाप को भेज दिए जाएँगे और भाई को भी मार दिया जाएगा।

इतना ही नहीं फरहान ने एक पीड़िता को निकाह के लिए और धर्मांतरण के लिए बहुत ज्यादा दबाव बनाया था। वह साफ कहता था- “तुमको बुर्का पहनना होगा, इस्लाम अपनाना होगा।” जब लड़की फरहान से दूरी बनाने लगी तो वो एक दिन उसके रूम पर आ धमका। तब, लड़की अपने भाई से बात कर रही थी।

फरहान ने पहले कहा कि उसे बस माफी माँगनी है। हालाँकि कमरे में घुसते ही उसने फिर पीड़िता से रेप किया। रिपोर्ट्स बताती हैं कि रेप के वक्त जब लड़की चीख रही थी तब फोन ऑन रह गया था और ये चीखें उसके भाई ने भी सुनी थीं। भाई ने हड़बड़ी में पुलिस को मदद के लिए कॉल भी की, लेकिन वहाँ से कोई जवाब नहीं आया।

अब पुलिस इस मामले में फरहान समेत मुस्लिम गैंग के अन्य सदस्यों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। वहीं महिला पुलिस अधिकारी भी अपने काम में जुटी है और पीड़िताओं की काउंसलिंग करते हुए उन्हें शिकायत दर्ज करने को कहा जा रहा है।

अब पुलिस इस मामले में फरहान समेत मुस्लिम गैंग के अन्य सदस्यों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। वहीं महिला पुलिस अधिकारी भी अपने काम में जुटी है और पीड़िताओं की काउंसलिंग करते हुए उन्हें शिकायत दर्ज करने को कहा जा रहा है।

अभी तक इस मामले में 12 नामजद आरोपितों समेत कई अन्य का नाम जोड़ा गया है। केस शहर के अलग-अलग पाँच थानों (बागसेवनिया, अशोक गार्डन, जहाँगीराबाद, बैरागढ़, श्यामा हिल्स) में दायर हुआ है। पुलिस ने फरहान, साहिल, शाहरुख, जोया समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। केस में पहली शिकायत कराने वाली पीड़िता का कहना है कि उसने फरहान की हरकतों से तंग आकर केस दर्ज कराया था।

वहीं बाकी पीड़िताओं ने भी खुलासे किए कि ये गैंग उनका ब्रेनवॉश करती थी। उन्हें बुर्का पहनने को, रोजा रखने को मजबूर करती थी और निकाह व धर्मांतरण का दबाव बनाती थी। इतना ही नहीं गाँजा पिलाकर रेप किया जाता था, चलती कार में बलात्कार होता था, पोर्न देखने को मजबूर किया जाता था, बात न सुनने पर गले पर छुरी रखकर दुष्कर्म होते थे, और मीट भी जबरन खिलाया जाता था।

पुलिस अब आरोपितों को पकड़कर बिहार से बंगाल तक दबिश दे रही है। मामले की जाँच के लिए एसआईटी भी गठित है। वहीं मुख्यमंत्री यादव ने स्कूल, कॉलेज की छात्राओं के हुए घिनौने काम पर चिंता जताते हुए इस मामले में सख्त एक्शन लेने के निर्देश दिए हैं।

कॉन्ग्रेस नेताओं को उन हिंदू पीड़ितों के कहे पर नहीं भरोसा, जिनके अपनों को पहलगाम में इस्लामी आतंकियों ने मारा: कहा- नहीं पूछा धर्म, TMC नेता बोली- BJP ने करवाया हमला

पहलगाम आतंकी हमले पर कॉन्ग्रेस और विपक्ष के नेता विवादित बयान देने से रुक नहीं रहे हैं। महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के एक बड़े नेता ने अब दावा किया है कि आंतकियों ने पहलगाम में लोगों को धर्म पूछ कर नहीं मारा। उनका दावा है कि पहलगाम में आतंकियों के पास धर्म पूछने का समय नहीं था। वहीं तृणमूल कॉन्ग्रेस की एक नेता ने भाजपा को इस हमले का जिम्मेदार बताया है।

महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के नेता विजय वडेट्टीवार ने यह विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा, “आतंकियों के पास इतना टाइम कहाँ होता है कि वह लोगों के कान में जाकर पूछें कि तुम्हारा धर्म क्या है?” विजय वडेट्टीवार ने यह भी दावा किया कि आतंकियों का कोई मजहब नहीं होता। उन्होंने कहा कि धर्म पूछने के बारे में लोग अलग-अलग बातें कर रहे हैं।

वडेट्टीवार ने इस बीच सुरक्षाबलों पर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि आतंकियों के धर्म पूछ कर मारने वाली बात असल मुद्दे से ध्यान भटकाना है। विजय वडेट्टीवार के इस बयान पर अब विवाद हो रहा है। हालाँकि, वह अकेले ऐसे नेता नहीं है जो इस मामले पर ऐसी बातें कर रहे हैं।

TMC नेता ने बताया भाजपा की साजिश

TMC नेता मरजीना खातून ने भी पहलगाम हमले को लेकर ऐसी ही विवादित टिप्पणी की है। मालदा में एक कार्यक्रम में मरजीना खातून ने पहलगाम हमले को भाजपा का काम बताया और दावा किया कि यह सब वक्फ कानून से ध्यान हटाने को लेकर करवाया गया है।

मरजीना खातून ने कहा, “भाजपा ने नए वक्फ कानून से जनता का ध्यान हटाने के लिए यह हमला किया..बीजेपी आतंकियों को पनाह देती है, इसलिए वहाँ सेना नहीं लगाई गई थी।” मरजीना खातून ने दावा किया कि जल्द ही चुनाव होने वाले हैं इसलिए यह सब करवाया गया है।

कॉन्ग्रेस नेता बोला- पाक का पानी मत रोको

जम्मू कश्मीर से आने वाले नेता और पूर्व केन्द्रीय सैफुद्दीन सोज ने भारत सरकार से सिंधु जल समझौता ना रोकने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि सिंधु नदी पाकिस्तान की लाइफलाइन है और इस डाइवर्ट नहीं किया जा सकता। सोज ने दावा किया है कि इससे पंजाब और कश्मीर डूब जाएँगे।

उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत को पाकिस्तान की पहलगाम हमले में शामिल ना होने की बात भी स्वीकार कर लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कभी कभार बंदूकधारी पगला जाते हैं। उन्होंने लगातार पाकिस्तान की सारी बातें मानने का अनुरोध भारत सरकार से किया।

कॉन्ग्रेस के मंत्री ने भी पीड़ितों को झुठलाया था

इससे पहले कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री RB तिम्मापुर ने पहलगाम हमले के पीड़ितों को झुठलाया था। तिम्मापुर ने दावा किया था कि आतंकियों ने हमले से पहले किसी का धर्म नहीं पूछा था और यह सब इस मामले को एक मजहबी रंग देने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने नाम पूछने वाली बात को खुफिया तंत्र की विफलता छुपाने का बहाना बताया था।

तिम्मापुर ने कहा था, “मुझे निजी तौर पर नहीं लगता कि हमलावरों ने पर्यटकों का नाम और धर्म पूछा होगा…यह खुफिया विफलता में मजहबी रंग जोड़ने के लिए है। कारगिल, कारगिल, पुलवामा और अब पहलगाम केंद्रीय एजेंसियों की विफलता का परिणाम हैं।”

तिम्मापुर ने कहा कि हमले के चलते एक विशेष मजहब को निशाने पर नहीं लिया जाना चाहिए। मंत्री तिम्मापुर ने यह बयान तब दिया है जब कर्नाटक के ही कई लोग पहलगाम में मारे गए हैं और उन्होंने स्पष्ट तौर पर इस बात की पुष्टि की है कि इस्लामी आतंकियों ने हिन्दू बताने पर ही उनके परिजनों की हत्या की।

‘पाकिस्तान से हुआ जंग तो नहीं लड़ेगे सिख सैनिक’: खालिस्तानी आतंकी पन्नू को ‘हथियार’ बना पाकिस्तानी मीडिया कर रहा प्रोपेगेंडा, पहलगाम अटैक को बताया भारत की साजिश

पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल आजाद सियासत ने रविवार (27 अप्रैल 2025) को भारत-विरोधी खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू का इंटरव्यू किया। इस इंटरव्यू में गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कई जहरीले, बेबुनियाद और उत्तेजक दावे किए, जो भारत की एकता और अखंडता को तोड़ने की उसकी नापाक मंशा को साफ दिखाते हैं। इसने दावा किया कि पंजाब के दो करोड़ सिख भारत सरकार को कभी भी पाकिस्तान पर हमला करने की इजाजत नहीं देंगे।

साथ ही इसने हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले को भारतीय खुफिया एजेंसियों की साजिश करार दिया और कहा कि इसका मकसद बिहार विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को फायदा पहुँचाना था। यह इंटरव्यू उस वक्त सामने आया, जब पहलगाम हमले में 27 मासूम हिंदू पर्यटकों की जान चली गई थी, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया।

इस आतंकी ने इंटरव्यू में पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित इस्लामी आतंकवाद को बचाने की घटिया कोशिश की। पन्नू ने बेशर्मी से दावा किया कि पहलगाम हमला पाकिस्तान का काम नहीं, बल्कि भारतीय एजेंसियों की करतूत थी। इसके मुताबिक, यह हमला बीजेपी को बिहार चुनाव में वोटों का ध्रुवीकरण करने और राजनीतिक फायदा लेने के लिए करवाया गया। इस नीच ने यह भी कहा कि ऐसे हमले अक्सर तब होते हैं, जब अमेरिका के बड़े नेता भारत आते हैं, ताकि पाकिस्तान की छवि अंतरराष्ट्रीय मंच पर खराब की जा सके। इसके इन दावों का कोई सबूत नहीं है, और ये सिर्फ भारत को बदनाम करने की इसकी साजिश का हिस्सा हैं।

गुरपतवंत सिंह पन्नू नाम के इस देशद्रोही ने एक और घिनौना दावा किया कि पंजाब के लोग और भारतीय सेना में तैनात सिख सैनिक और अधिकारी इसके इशारे पर पाकिस्तान के साथ खड़े हैं। इसने भारत के उस फैसले का जिक्र किया, जिसमें कहा गया कि भारत अब सिंधु जल संधि का पूरी तरह पालन नहीं करेगा। इस आतंकी ने इसे भारत की आक्रामकता बताते हुए दावा किया कि भारत-पाकिस्तान का पानी रोकना चाहता है।

पन्नू ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख और प्रधानमंत्री के उन बयानों का हवाला दिया, जिनमें पानी रोकने को युद्ध की कार्रवाई माना गया है। पन्नू ने भारतीय पंजाब में रहने वाले सिखों की आड़ लेकर सवाल उठाया कि अगर भारत-पाकिस्तान में जंग हुई, तो सिखों का क्या होगा? यह साफ दिखाता है कि यह आतंकी सिख समुदाय को भारत के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रहा है।

गुरपतवंत सिंह पन्नू ने दावा किया कि सिख समुदाय पाकिस्तान के साथ खड़ा होगा और भारत को पंजाब के रास्ते हमला करने से रोकेगा। इसने कहा कि 2025 में हालात 1965 और 1971 जैसे नहीं हैं, और सिख अब इसके साथ हैं। लेकिन इसने यह शर्त रखी कि सिख तभी पाकिस्तान का साथ देंगे, अगर पाकिस्तान खुलकर खालिस्तान की माँग का समर्थन करे। इस आतंकी ने पाकिस्तानी सरकार से माँग की कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में खालिस्तान का मुद्दा उठाए और खालिस्तान रेफरेंडम को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के रूप में मान्यता दे। यह साफ है कि यह भारत को तोड़ने की साजिश में पाकिस्तान को उकसा रहा है।

पन्नू ने आगे कहा कि अगर पाकिस्तान खालिस्तान का समर्थन करता है, तो दुनिया भर के सिख इसके साथ एकजुट हो जाएँगे। उसने 1971 के युद्ध का जिक्र किया, जब भारत की मदद से बांग्लादेश बना। इस नीच ने आरोप लगाया कि अब भारत बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करना चाहता है, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बयानों में जिक्र किया। इसने दावा किया कि खालिस्तान का समर्थन पाकिस्तान का सबसे बड़ा हथियार हो सकता है। उससे भारत के पंजाब में लाखों सिख इसके साथ आ जाएँगे। यह भारत की एकता के लिए खुला खतरा है, और इसकी मंशा साफ है कि यह सिखों को भारत के खिलाफ हथियार बनाना चाहता है।

इस खालिस्तानी आतंकी ने दावा किया कि इसने भारतीय सेना के सिख सैनिकों को भारत के प्रति वफादारी छोड़ने के लिए उकसाने की कोशिश की है। इसने कहा कि इसके इन गंदे कामों की वजह से भारत में इस पर देशद्रोह के कई मामले दर्ज हैं। इस नीच ने भारतीय सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सिखों को अब समझ आ गया है कि उनका असली दुश्मन पाकिस्तान नहीं, बल्कि भारत सरकार है। इसने 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार का जिक्र किया, जब भारतीय सेना ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके अलावा, इसने नवंबर 1984 के सिख विरोधी दंगों और 1984 से 1995 तक पंजाब में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाइयों का हवाला दिया, जिनमें हजारों सिख युवा मारे गए। यह साफ है कि यह आतंकी पुरानी घटनाओं को तोड़-मरोड़कर सिखों में भारत के खिलाफ नफरत फैलाना चाहता है।

इंटरव्यू के दौरान पन्नू ने पाकिस्तान सरकार की तारीफ की, जो सिख तीर्थयात्रियों को करतारपुर साहिब जाने की इजाजत देती है, लेकिन भारतीयों को वीजा नहीं देती। इसने इसे एक अच्छा कदम बताया, लेकिन कहा कि भारत की कथित आक्रामकता को रोकने के लिए यह काफी नहीं है। इसने फिर जोर दिया कि पाकिस्तान को खालिस्तान का खुलकर समर्थन करना चाहिए, ताकि सिख इसके साथ खड़े हों। यह साफ दिखाता है कि यह आतंकी भारत के खिलाफ पाकिस्तान को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है।

गुरपतवंत सिंह पन्नू ने खालिस्तान रेफरेंडम का जिक्र किया और कहा कि यह सिख समुदाय के दम पर चल रहा है, भले ही किसी सरकार का समर्थन न हो। इसने बताया कि जल्द ही यह रेफरेंडम भारत के पंजाब में होगा, जिसमें हिंदू और मुस्लिम भी वोट दे सकेंगे। उसने 17 अगस्त 2025 को वाशिंगटन डीसी में होने वाले रेफरेंडम को अहम बताया और कहा कि यह ‘पंजाब वोट फॉर इंडिपेंडेंस’ कैंपेन के तहत व्हाइट हाउस और अमेरिकी कॉन्ग्रेस में लॉबिइंग कर रहा है। यह साफ है कि यह आतंकी विदेशी धरती पर बैठकर भारत के खिलाफ साजिश रच रहा है।

इस नीच ने भारत पर खालिस्तानी आतंकियों और समर्थकों के खिलाफ सख्ती का आरोप लगाया। इसने कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या और यूके में इसके सहयोगी परमजीत सिंह पम्मा पर हुए कथित हमले का जिक्र किया। पन्नू ने दावा किया कि एक बीजेपी सांसद ने उसके सिर पर 5 लाख डॉलर का इनाम रखा है, लेकिन वो मौत से नहीं डरता। पन्नू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बेशर्मी से चुनौती दी कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और सिखों के बीच सीधा मुकाबला करें। यह इसकी हिमाकत दिखाता है कि यह भारत के नेतृत्व को खुलेआम धमकी दे रहा है।

इस आतंकी ने कश्मीर के तथाकथित आजादी आंदोलन का समर्थन किया और जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वालों को ‘आजादी का लड़ाका’ बताया। लेकिन इसने अमेरिका, यूके और कनाडा में रहने वाले कश्मीरियों पर निशाना भी साधा, जो कश्मीर में सक्रिय आतंकियों के समर्थन में भारतीय दूतावासों के बाहर प्रदर्शन नहीं करते। यह दिखाता है कि यह आतंकी न सिर्फ खालिस्तान, बल्कि कश्मीर में भी अशांति फैलाने की कोशिश कर रहा है।

बता दें कि पहलगाम आतंकी हमला 22 फरवरी को हुआ था, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी द रेसिस्टेंस फोर्स (टीआरएफ) ने 27 मासूम हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाया। हमलावरों ने पीड़ितों से उनकी धार्मिक पहचान पूछी, कलमा पढ़ने को कहा और उनके कपड़े उतारकर जाँच की कि उनका खतना हुआ है या नहीं। जो इस जाँच में ‘फेल’ हुए, उन्हें बेरहमी से गोली मार दी गई।

गौरतलब है कि गुरपतवंत सिंह पन्नू एक अमेरिकी-कनाडाई नागरिक है, जो खुद को वकील बताता है। यह सिखों के अधिकारों की आड़ में खालिस्तानी भावनाएँ भड़काता है और भारत के खिलाफ जहरीली धमकियाँ देता है। भारत ने इसे गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकी घोषित किया है। इसका संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस‘ भी भारत में आतंकी संगठन की सूची में है। यह भारत का कट्टर दुश्मन है, जो विदेशी धरती से भारत की एकता और शांति को भंग करने की साजिश रच रहा है।

BBC को मोदी सरकार ने फटकारा, पहलगाम हमले के बाद आतंकवादियों को बताया था ‘मिलिटेंट’: कश्मीर को भी लेकर प्रोपेगेंडा करता रहा है ब्रिटिश मीडिया संस्थान

ब्रिटिश समाचार संस्थान BBC को मोदी सरकार ने करारी लताड़ लगाई है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भी BBC लगातार प्रोपेगेंडा कर रहा था। वह इस्लामी आतंकियों को ‘मुजाहिद’ बता रहा था। उसे अब विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है। BBC की इस संबंध में कोई प्रतिक्रया सामने नहीं आई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विदेश मंत्रालय की XP डिवीजन ने BBC को पहलगाम हमले की रिपोर्टिंग को लेकर पत्र लिखा है। विदेश मंत्रालय ने यह पत्र भारत में BBC के मुखिया जैकी मार्टिन को लिखा है। इसमें विदेश मंत्रालय ने पहलगाम हमले को लेकर भारतीयों की भावना को स्पष्ट कर दिया है।

विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा है कि वह आगामी समय में इस मामले पर BBC की रिपोर्टिंग को ‘मॉनिटर’ करेगा। BBC को यह पत्र उसकी रिपोर्टिंग के भारत विरोधी रवैये को लेकर लिखा गया है। BBC पहलगाम में हमला करने वाले आतंकियों को ‘मिलिटेंट’ (लड़ाके) लिखता है। वह इन हमलावरों को आतंकी लिखने से बचता आया है।

BBC रिपोर्ट
BBC लगातार हमले को लेकर प्रोपेगेंडा कर रहा है

मिलिटेंट शब्द का एक मतलब ‘मुजाहिद’ भी होता है। मुजाहिद का अर्थ जिहाद के लिए लड़ने वाला होता है। इस तरह से वह एक तरह से आतंकियों को सही ठहरा रहा होता है। हिंदी की वेबसाइट पर भी BBC आतंकी ना लिख कर ‘चरमपंथी’ लिखता है। चरमपंथी शब्द किसी गैर हिंसक व्यक्ति के लिए भी लिखा जा सकता है।

पहले भी फैलाता आया है प्रपंच

BBC की करतूतें सिर्फ यहीं तक नहीं रुकती बल्कि वह कश्मीर को लेकर बाकी मामलों में भी प्रोपेगेंडा करता आया है। वह अपनी रिपोर्टिंग में लगातार भारत को ‘इंडियन एडमिनिस्टर्ड कश्मीर’ या ‘भारत प्रशासित कश्मीर’ लिखता आया है। जबकि असल में बात यह है कि भारत प्रशासित कश्मीर जैसी कोई जगह नहीं है। जम्मू कश्मीर भारत का एक अभिन्न अंग है।

BBC पाकिस्तान द्वारा कब्जाए गए कश्मीर को पाकिस्तान एडमिनिस्टर्ड यानी प्रशासित कश्मीर लिखता है। BBC यह नहीं बताता कि PoK पर पाकिस्तान का अनाधिकृत कब्जा है और यह इलाका कानूनी तौर पर भारत का है। वह कश्मीर ही नहीं बल्कि बाकी मुद्दों को लेकर भी फर्जी नैरेटिव फैलाता है।

उसने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर डाक्यूमेंट्री भी बनाई थी। इसमें गुजरात दंगों का दोषी पीएम मोदी को बताने की कोशिश की गई थी जबकि हर बार पीएम मोदी को देश की अदालतें क्लीन चिट दे चुकी हैं। यह डॉक्यूमेंट्री भारत में बैन कर दी गई थी।

बाकी विदेशी मीडिया संस्थान भी नहीं पीछे

BBC के अलावा बाकी कई और विदेशी मीडिया संस्थान भी पहलगाम हमले के बाद लगातार प्रोपेगेंडा कर रहे हैं। क़तर के सरकारी मीडिया संस्थान ‘अल जज़ीरा’, पाकिस्तान के ‘द डॉन’, अमेरिका के ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ (NYT) और ब्रिटेन के सरकारी मीडिया BBC ने शब्दों का हेरफेर करके आतंकियों का महिमामंडन करने का प्रयास किया है।

किसी मीडिया संस्थान ने आतंकियों को बंदूकधारी लिखा तो किसी ने उन्हें चरमपंथी बताया। उन्होंने घटना की भी कई जानकारियाँ छुपा ली थीं। उन्होंने यह भी नहीं बताया था कि हमले के दौरान इस्लामी आतंकियों ने धर्म पूछ कर हत्याएँ की थीं।

मोदी सरकार ने 16 पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल पर लगाया बैन, भारत से कमाई कर चलाते थे पाक फौज का प्रोपेगेंडा : पहलगाम हमले के बाद हुई ‘डिजिटल स्ट्राइक’

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की पाकिस्तान पर कार्रवाई जारी है। भारत ने इसी कड़ी में पाकिस्तान पर ‘डिजिटल स्ट्राइक’ की है। मोदी सरकार ने अब पाकिस्तान के कई यूट्यूब चैनल का प्रसारण भारत में रोक दिया है। इन्हें दिखाने पर भारत में बैन लगा दिया गया है। यह काम गृह मंत्रालय की सिफारिश के बाद किया गया है।

भारत ने पाकिस्तान के 16 यूट्यूब चैनल को भारत में दिखाने पर रोक लगाई है। अब यह चैनल भारतीय दर्शक यूट्यूब पर एक्सेस नहीं कर सकेंगे। भारत ने डॉन न्यूज, जियो टीवी, ARY न्यूज, SAMAA टीवी, GNN समेत 16 चैनल बंद कर दिए हैं। इनमें से कई न्यूज चैनल हैं और कई पत्रकारों के खुद के चैनल।

कुछ स्पोर्ट्स चैनल पर भी भारत ने यह पाबंदी लगाई है। इन सबके कुल मिलाकर 63 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर हैं। इनके दर्शकों में एक बड़ा हिस्सा भारतीय है और इससे यह मोटी कमाई करते हैं। कुछ चैनल्स की 50% से अधिक व्यूअरशिप भारत से आती है।

इसके बावजूद यह चैनल लगातार पाकिस्तानी फ़ौज का प्रोपेगेंडा चलाते हैं। इन पर फर्जी खबरें भी लगातार प्रसारित होती हैं। यह भारतीय सेना के खिलाफ भी झूठी खबरें प्रसारित करते हैं। हालिया पहलगाम हमले को भी इन चैनलों ने झूठा करार देने का प्रयास किया था।

कई मौकों पर इन चैनल के ऊपर भारतीय नेताओं को लेकर अभद्र टिप्पणियाँ भी की जाती हैं। हालाँकि, अब यह भारत में यूट्यूब पर दिखेंगे ही नहीं।

इन चैनल को यूट्यूब पर सर्च करने पर एक मैसेज प्रसारित हो रहा है। इसमें लिखा है, “राष्ट्रीय सुरक्षा या कानून व्यवस्था से संबंधित सरकार के आदेश के कारण यह कंटेंट वर्तमान में इस देश में उपलब्ध नहीं है।” इन चैनल का कोई भी वीडियो यूट्यूब पर नहीं दिख रहा है।

कुछ ऐसे चैनल भी हैं जिनका नाम इस प्रतिबन्ध वाली लिस्ट में नहीं शामिल है, लेकिन वह भी अब भारत में एक्सेस नहीं हो रहे। इसका एक उदारहण ‘वासे और इफ्फी’ का यूट्यूब चैनल है। यह स्पोर्ट्स को लेकर वीडियो जारी करते थे और भारतीय क्रिकेट प्रशंसक इन्हें बड़ी संख्या में देखते थे।

यूट्यूब चैनल से पहले भारत पाकिस्तान के सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी कार्रवाई कर चुका है। यह लगातार भारतीय सेना, सरकार और बाकी मामलों से जुड़ी झूठी खबरें फैलाया करते थे। इसके अलावा भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद अटारी वाघा सीमा से होने वाला व्यापार भी बंद कर दिया है।

पाकिस्तान लौटने की मियाद पूरी, 600+ वापस गए, जो नहीं गए उन्हें हो सकती है 3 साल की जेल-₹3 लाख जुर्माना भी: 800+ भारतीय स्वदेश लौटे





पहलगाम आतंकी हमले के बाद केन्द्र सरकार ने पाकिस्तानियों को भारत छोड़ने की जो मियाद दी थी वो पूरी हो गयी है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में पाकिस्तानी भारत नहीं छोड़ पाए हैं। भारत छोड़ने में विफल रहने वाले पाकिस्तानियों को 3 साल की जेल या 3 लाख रुपए का जुर्माना या दोनों का सामना करना पड़ सकता है।

रविवार (27 अप्रैल 2025) अटारी बॉर्डर से लगभग 627 लोग पाकिस्तान लौटे। इनमें 9 डिप्लोमैट और अधिकारी शामिल हैं। भारत ने 12 कटैगरी के अंतर्गत सार्क वीजा रखने वाले पाकिस्तानियों को रविवार तक भारत छोड़ने का आदेश दिया था। हालाँकि मेडिकल वीजा रखने वालों के लिए अंतिम तिथि 29 अप्रैल है।

जिन 12 कटैगरी के वीजा धारकों को रविवार तक भारत छोड़ना था, वे हैं – आगमन पर वीजा, व्यवसाय, फिल्म, यात्रा, तीर्थयात्रा, ग्रुप तीर्थयात्रा, पर्यटन, सम्मेलन, पर्वतारोहण, स्टूडेंट्स वीजा और मेडिकल वीजा।

महाराष्ट्र में 5 हजार से ज्यादा पाकिस्तानी हैं जिनमें से करीब 1 हजार शॉर्ट टर्म वीजा पर हैं। इनलोगों को पाकिस्तान भेजा जा रहा है। बिहार सरकार ने 27 अप्रैल की डेडलाइन तक 19 पाकिस्तानियों को वापस भेजा।

तेलंगाना में 208 पाकिस्तानियों की उपस्थिति की जानकारी है जिनमें से 156 लॉन्ग टर्म वीजा और 13 शॉर्ट टर्म वीजा और 39 मेडिकल और व्यापार वीजा पर आए हुए हैं जिन्हें वापस भेजा गया है। केरल में 104 पाकिस्तानी के होने की जानकारी मिली है जिनमें से 99 लॉन्ग टर्म वीजा और बाकी टूरिस्ट और मेडिकल वीजा पर हैं।

राजस्थान की बात करें तो यहां सीमावर्ती क्षेत्रों में पाकिस्तानियों की संख्या काफी है। जैसलमेर में 6 हजार से अधिक पाकिस्तानी लॉन्ग टर्म वीजा पर हैं। कुल पाकिस्तानी नागरिक की बात करें तो ये आँकड़ा करीब 20 हजार है।

भारत ने पाकिस्तान से अपने लोगों को वापस बुलाया है। रविवार को 116 भारतीय जिनमें एक डिप्लोमैट शामिल हैं, वो भारत पहुंचे। 26 अप्रैल को 342 भारतीय जिनमें 13 डिप्लोमैट्स शामिल हैं, भारत की धरती पर कदम रखा। 25 अप्रैल को 287 भारतीय वापस लौटे जबकि 24 अप्रैल को 105 भारतीय पाकिस्तान से वापस आए थे यानी 27 अप्रैल तक कुल 849 भारतीय वापस स्वदेश लौट चुके हैं।