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‘कॉन्ग्रेसी’ साकेत गोखले ने पूर्व CM के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत, शिवसेना नेता कहा- ‘फडणवीस के मुँह में डाल देता कोरोना’

महाराष्‍ट्र में कोराना संक्रमण का प्रकोप और सियासी पारा बढ़ता ही जा रहा है। इसी बीच, शिवसेना के विधायक संजय गायकवाड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्‍होंने कहा है कि अगर उन्हें कहीं कोरोना वायरस मिल जाता, तो वह उसे भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस के मुँह में डाल देते।

बताया जा रहा है कि रेमडेसिविर का उत्पादन करने वाली एक दवा कंपनी के शीर्ष अधिकारी से दवा की कथित जमाखोरी को लेकर मुंबई पुलिस ने पूछताछ की है। इसे लेकर ठाकरे सरकार राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साध रही है। वहीं कॉन्‍ग्रेस समर्थक और बेबाकी से फेक न्यूज फैलाने में माहिर साकेत गोखले ने आज राज्य के गृह मंत्री दिलीप वालसे पाटिल के साथ मिलकर देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ रेमडेसिविर स्टॉक की जमाखोरी को लेकर शिकायत दर्ज कराई है।

मीडिया से बातचीत में बुलडाना से विधायक गायकवाड से पूछा गया था कि कोराना महामारी के इस दौर में अगर फडणवीस मुख्यमंत्री होते तो वह क्या करते? इस पर गायकवाड भड़क गए और कहा , “राज्य के मंत्रियों का समर्थन करने के बजाय भाजपा नेता उनका मजाक बना रहे हैं। वे सोच रहे हैं कि किस तरह प्रदेश सरकार को विफल किया जा सकता है।” गायकवाड ने आगे कहा, “अगर मुझे कोरोना वायरस मिल जाता, तो मैं उसे देवेंद्र फडणवीस के मुँह में डाल देता।”

गायकवाड ने आरोप लगाया कि फडणवीस, भाजपा नेता प्रवीण दारेकर और चंद्रकांत पाटिल रेमडेसिविर इंजेक्शन के वितरण को लेकर तुच्छ राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने महाराष्ट्र की रेमडेसिविर निर्माता कंपनियों से कहा है कि वे राज्य में दवा की आपूर्ति नहीं करें। गायकवाड की टिप्पणी के विरोध में रविवार को बुलडाना में कई स्थानों पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए और विधायक के पुतले जलाए।

बता दें कि साकेत गोखले ने बेबुनियाद ट्वीट्स की सीरीज में आरोप लगाया था कि भाजपा ने महाराष्ट्र में अपने पार्टी कार्यालय में 4.75 करोड़ रुपए की रेमडेसिविर (Remdesivir) की जमाखोरी की है। गोखले ने यह आरोप मुंबई पुलिस द्वारा शनिवार को दमन स्थित ब्रुक फार्मा कंपनी के रेमडेसिविर सप्लायर को हिरासत में लेने और सवाल पूछे जाने के बाद लगाया था। बीजेपी की महाराष्ट्र इकाई ने कंपनी से रेमडेसिविर को महाराष्ट्र में लोगों को आपूर्ति करने का आदेश दिया था, लेकिन पुलिस ने कंपनी के डायरेक्टर को हिरासत में ले लिया था। हालाँकि, देवेंद्र फडणवीस द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद उसे रिहा कर दिया गया। 

गोखले ने सवाल किया था कि कैसे देवेंद्र फडणवीस जैसे ‘निजी व्यक्ति’ गुजरात से रेमडेसिविर का स्टॉक खरीद सकते हैं, जब बिक्री केवल सरकार को करने की अनुमति है? वहीं, देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया से बात करते हुए कहा था, “चार दिन पहले, हमने ब्रुक फार्मा को महाराष्ट्र में रेमडेसिविर इंजेक्शन के स्टॉक की आपूर्ति करने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि वे अनुमति नहीं दे सकते थे। मैंने केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया से बात की और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) से रेमडेसिविर सप्लाई के लिए अनुमति ली, जिसके बाद अप्रैल 17, 2021 लगभग नौ बजे, पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।”

क्या है मामला

रेमडेसिविर का उत्पादन करने वाली एक दवा कंपनी के शीर्ष अधिकारी से दवा की कथित जमाखोरी को लेकर मुंबई पुलिस द्वारा पूछताछ करने के मामले में महाराष्ट्र की ठाकरे सरकार पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साध रही है। प्रदेश की महाविकास अघाड़ी सरकार में मंत्री नवाब मलिक के उस बयान पर भी हंगामा बरपा हुआ है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि केंद्र की तरफ से कुछ रेमडेसिविर सप्लायर पर दवाब बनाया जा रहा है।

1 मई से अब 18 साल से अधिक उम्र वालों को भी लगेगी वैक्सीन: मोदी सरकार का तीसरे चरण में बड़ा फैसला

कोरोना वायरस के बिगड़ते हालात के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। देश में वैक्सीनेशन के तीसरे चरण के तहत सोमवार को सरकार ने 18 साल से अधिक आयु के सभी लोगों को टीकाकरण की इजाजत दे दी है। बता दें कि देश में 1 मई से वैक्सीनेशन के तीसरे चरण की शुरुआत हो रही है।

दरअसल, कोविड की सेकेंड वेव के कारण आश्चर्यजनक तरीके से संक्रमितों की संख्या में तेजी से उछाल आया है। इसके हालात को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दवा कंपनियों और डॉक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चर्चा की थी। इसके बाद ही केंद्र सरकार ने यह आदेश जारी किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉक्टरों और कंपनियों के साथ चर्चा के दौरान कहा कि कोरोना महामारी तेजी से छोटे शहरों में भी अपने कदम फैला रही है। ऐसे में इन जगहों पर संसाधनों को उन्नत करने की कोशिश करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने लोगों को कोरोना पर फैलाई जा रही अफवाहों से भी बचने की सलाह दी है।

सरकार ने कहा है कि वैक्सीनेशन के पहले चरण में फ्रंट लाइन वर्कर्स और दूसरे चरण में 40 साल से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण हुआ था। अब तीसरे चरण में वैक्सीनेशन की पात्रता को और अधिक लचीला किया जा रहा है। केंद्र ने कहा है कि यह व्यवस्था ऐसे ही चलती रहेगी। बता दें कि भारत में विश्व का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है।

केंद्र ने कहा है कि कोरोना वैक्सीनेशन के तीसरे चरण में वैक्सीन निर्माता अपनी मासिक सेंट्रल ड्रग्स लेबोरेटरी की 50 फीसदी खुराक भारत सरकार को जारी करेंगे और शेष 50 फीसदी खुराक राज्य सरकार और खुले बाजार में बेच सकेंगे।

भारत सरकार अपने हिस्से से टीकों को बढ़ने पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को देगी। यह वैक्सीन सक्रिय मामलों की कोरोना के मामलों और प्रशासन के प्रदर्शन के आधार दी जाएगी। इसमें केंद्र सरकार वैक्सीन की बर्बादी को भी जोड़ेगा।

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि टीकाकरण के तीसरे चरण में भी भारत सरकार के टीकाकरण केंद्रों में पहले की तरह टीकाकरण जारी रहेगा, जो पहले से लोगों को नि: शुल्क दिया जाता रहा है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 26 अप्रैल तक 5 शहरों में लगाए कड़े प्रतिबन्ध, योगी सरकार ने पूर्ण लॉकडाउन से किया इनकार

19 अप्रैल को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के पाँच शहरों- प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, कानपुर नगर, और गोरखपुर में 26 अप्रैल तक कड़े प्रतिबंधों की एक लिस्ट जारी की। हाई कोर्ट की जस्टिस अजीत कुमार और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ कोरोना के बढ़े मामलों से खुश नहीं थे। अदालत ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री आईसोलेशन में हैं और यह राज्य के लिए कठिन समय है। कोर्ट के निर्देश पर एसीएस सूचना, नवनीत सहगल ने कहा, “यूपी सरकार शहरों में पूर्ण तालाबंदी नहीं करेगी बल्कि कड़े प्रतिबंध लगाएगी। यूपी सरकार अपनी टिप्पणियों पर न्यायालय के समक्ष अपना जवाब प्रस्तुत कर रही है।”

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने क्या कहा था

अपने आदेश में [PDF], अदालत ने कहा, “हम सरकारी अस्पतालों के हाल देख रहे हैं कि वहाँ आईसीयू में मरीजों को वीआईपी लोगों की सिफारिश पर लिया जा रहा है। यहाँ तक ​​की जीवनरक्षक एंटीवायरल दवा रेमेडिसिविर भी वीआईपी की सिफारिश पर ही दी जाती है। राज्य के मुख्यमंत्री लखनऊ में आईसोलेशन में हैं। ”

महामारी व्यवस्था को दिखा रही आँख- इलाहाबाद उच्च न्यायालय

अदालत ने कहा, “ऐसा लगता है कि महामारी सरकारी व्यवस्था को आँख दिखा रही है। लोगों को अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहे हैं। उन्हें इधर-उधर दौड़ना पड़ रहा है, जिससे मरीजों की देखभाल करने वाले भी संक्रमित हो रहे हैं। इससे दूसरे लोग भी संक्रमित हो रहे हैं और एक पूरी चेन बन गई है।”

अदालत ने आगे कहा कि चिकित्सा के बुनियादी ढाँचे में विकास की कमी स्पष्ट दिखाई देती है, क्योंकि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाएँ चुनौतियों का सामना करने में सक्षम नहीं हैं, और लोग सही दवा के इंतजार में मर रहे हैं। अदालत ने कहा, “शासन के मामलों में उन लोगों को दोषी ठहराया जा सकता है, जो मौजूदा घटिया स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दोषी हैं। जब यहाँ प्रजातंत्र है, तो इसका अर्थ यह है कि जनता की सरकार, जनता के द्वारा और जनता के लिए।”

अदालत ने कहा कि वह समझती है कि एक राजनीतिक मजबूरी है जो राज्य को संपूर्ण लॉकडाउन लगाने से रोक रही है। इसीलिए अदालत को कदम उठाना पड़ा। “हम कुछ लोगों की लापरवाही के कारण फैल रही महामारी से निर्दोष लोगों को बचाने के लिए अपने संवैधानिक कर्तव्य से दूर नहीं हो सकते।”

राज्य में बेड बढ़ रहे हैं, लेकिन वे पर्याप्त नहीं हो सकते हैं

अदालत ने नोटिस किया है कि राज्य सरकार आईसीयू बेड की संख्या बढ़ाने और मेक-शिफ्ट कोविड सेंटर्स की स्थापना के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रही है। लेकिन, राज्य में जनसंख्या को देखते हुए अदालत ने आशंका जताई है कि ये बेड पर्याप्त नहीं हो सकते हैं, भले ही आबादी का केवल 10% संक्रमित हो।

कोर्ट के बिंदुवार निर्देश

  1. वित्तीय संस्थानों और वित्तीय विभागों, चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं, औद्योगिक और वैज्ञानिक प्रतिष्ठानों, नगर निगम के कार्यों और सार्वजनिक परिवहन सहित आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सभी प्रतिष्ठान सरकारी या निजी हों, 26 अप्रैल, 2021 तक बंद रहेंगे। न्यायपालिका हालाँकि अपने स्वयं के विवेक पर कार्य करें।

2.सभी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और मॉल 26 अप्रैल, 2021 तक बंद रहेंगे।

3.सभी किराने की दुकानें और अन्य वाणिज्यिक दुकानें मेडिकल दुकानों को छोड़कर, 26 अप्रैल, 2021 तक बंद रहेंगे।

  1. सभी होटल, रेस्टोरेंट और यहाँ तक ​​की ठेले आदि पर खाने के छोटे प्वाइंट भी 26 अप्रैल, 2021 तक बंद रहेंगे।

5.सभी संस्थान जैसे कि अन्य विषयों और गतिविधियों से संबंधित शिक्षण संस्थान और अन्य संस्थाएँ यह सरकारी हों, अर्ध सरकारी या निजी उनके शिक्षकों और प्रशिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के लिए 26 अप्रैल, 2021 तक बंद रहेंगे (यह दिशा निर्देश पूरे उत्तर प्रदेश के लिए है)

6. 26 अप्रैल, 2021 तक विवाह समारोहों सहित किसी भी सामाजिक समारोह और समारोहों की अनुमति नहीं होगी। हालाँकि, पहले से तय विवाह के मामले में संबंधित जिले के जिला मजिस्ट्रेट से आवश्यक अनुमति लेनी होगी। और अनुमति केवल 25 लोगों तक ही सीमित होगी और संबंधित जिला मजिस्ट्रेट कोविड 19 के प्रभाव की मौजूदा स्थिति पर गहन विचार करने के बाद निर्णय लेंगे, जिसमें उस क्षेत्र में नियंत्रण क्षेत्र की अधिसूचना भी शामिल है, जहाँ इस तरह की शादी होनी है।

7. किसी भी तरह की सार्वजनिक एवं धार्मिक गतिविधियों को 26 अप्रैल, 2021 तक निलंबित रखने का निर्देश दिया गया है।

8.सभी प्रकार के धार्मिक प्रतिष्ठानों को 26 अप्रैल, 2021 तक बंद रहने के लिए निर्देशित किया जाता है।

9.फल और सब्जी विक्रेताओं, दूध विक्रेताओं और रोटी विक्रेताओं सहित सभी फेरीवाले 26 अप्रैल, 2021 तक हर दिन सुबह 11 बजे तक सड़क पर उतरेंगे।

10.प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, कानपुर नगर/देहात और गोरखपुर जिलों में व्यापक प्रसार वाले दो प्रमुख हिंदी और अंग्रेजी समाचार पत्रों में हर दिन कंटेनमेन्ट जोन अधिसूचित किए जाएंगे।

11.सड़कों पर सभी सार्वजनिक आवागमन को पूरी तरह से प्रतिबंधित रखा जाएगा, जो उपरोक्त निर्देशों के अधीन है। चिकित्सा सहायता और आपात स्थिति के मामले में आवागमन को अनुमति दी जाएगी।

12.उपरोक्त निर्देशों के अलावा कहा कि राज्य सरकार वर्तमान टीकाकरण कार्यक्रम को मजबूती से लागू करेगी।

अदालत ने आगे कहा, “इस आदेश में अगर हमने लॉकडाउन नहीं लगाया है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि हम इस पर विश्वास नहीं करते हैं। हम अभी भी देख रहे हैं कि यदि हम कोविड की चेन को तोड़ना चाहते हैं, तो कम से कम दो सप्ताह की अवधि के लिए लॉकडाउन एक आवश्यक है।” कोर्ट ने राज्य सरकार के दो सप्ताह में पूरे राज्य में पूर्ण लॉकडाउन लागू करने पर विचार करने को भी कहा है।

झारखंड में PM CARES फंड के तहत मिले 60 वेंटिलेटर बेकार पड़े, राज्य ने माँगे अतिरिक्त 1500 वेंटिलेटर

देशभर में कोरोना वायरस का कहर लगातार जारी है। इसी कड़ी में झारखंड कोरोना की दूसरी लहर से सबसे ज्यादा प्रभावित देश का छठा राज्य है। संक्रमण के हालात इतने बुरे हैं कि बीते 24 घंटे में ही राज्य में 4000 नए मामले सामने आए हैं और 50 लोगों की मौत हुई है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में कोरोना के कारण स्थिति बेहद गंभीर है, लेकिन लापरवाही के चलते सात जिलों में पीएम केयर फंड के तहत मिले 60 वेंटिलेटर धूल फाँक रहे हैं।

बीते पाँच महीने से लातेहार सदर अस्पताल में 12 वेंटिलेटर धूल खा रहे हैं। जबकि, गुमला में मशीनों को चलाने के लिए टेक्नीशियन नहीं होने के कारण 21 वेंटिलेटर ऐसे ही बेकार हालत में पड़े हुए हैं। बोकारो में वेंटिलेटर होने के बाद भी यहाँ के जिला सदर अस्पताल के आईसीयू वार्ड में ताला लगा दिया गया। हालाँकि, गुरुवार को अस्पताल की उप अधीक्षक डॉ रेणु भारती ने एक मरीज को भर्ती किया।

इसी तरह से हजारीबाग जिले के पीएचसी और सीएचसी में 9 वेंटिलेटर लगाए गए हैं, लेकिन ये बेकार हैं। वहीं रामगढ़, चतरा और सिमडेगा में ट्रेंड टेक्नीशियन नहीं होने के कारण वेंटिलेटर का कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है। एनटीपीसी, डीएमएफटी और एनएचआरएम फंड से मिले 28 अन्य वेंटिलेटर भी पैक रखे हुए हैं।

जानकारी मिली है कि लातेहार जिले में अक्टूबर 2020 में ये वेंटिलेटर लाए गए थे, लेकिन इन्हें पैक कर एक कमरे में बंद कर दिया गया। ऑक्सीजन पाइप कनेक्शन नहीं होने के कारण ये मशीनें धूल खा रही हैं। कोरोना की दूसरी लहर के कहर के बाद अब प्रशासन ने ऑक्सीजन कनेक्शन को ठीक करने का काम शुरू किया है।

बोकारो जिला सदर अस्पताल के उप अधीक्षक ने जानकारी दी कि सदर अस्पताल में 45 वेंटिलेटर थे, जिसमें से 20 को दूसरी जगहों पर भेजा गया है और अन्य 20 को लगा दिया गया है। वहीं गुमला के नोडल अधिकारी ने बताया कि टेक्नीशियन की कमी के कारण वेंटिलेटर नहीं लगाए गए हैं, लेकिन एक-दो दिन में उन्हें लगवा दिया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग ने माँगे 1500 वेंटिलेटर

पीएम केयर फंड से खरीदे गए वेंटिलेटर प्रशासनिक लापरवाही के कारण कमरों में पड़े धूल खा रहे हैं। वहीं राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने केंद्र सरकार से कोविड से मरीजों के लिए अतिरिक्त 1,500 वेंटिलेटर की माँग की है।

इस मामले में झारखंड के स्वास्थ्य सचिव केके सोहन ने अतिरिक्त सचिव, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय वंदना गुरनानी को पत्र लिखकर कहा है कि मौजूदा समय में कोरोना तेजी से बढ़ा है। ऐसे में राज्य में लगभग 33,000 से 35,000 केस हैं। इस कारण राज्य को महीने के अंत तक अधिक वेंटिलेटर की जरूरत होगी।

केंद्र ने दिया मदद का आश्वासन

कोरोना के कहर से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों को केंद्र सरकार ने मदद का आश्वासन दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन सिंह जानकारी दी है कि 1,121 वेंटिलेटर महाराष्ट्र, 1,700 उत्तर प्रदेश, 1,500 झारखंड, 1,600 गुजरात, 152 मध्य प्रदेश और 230 छत्तीसगढ़ दिए जाएँगे।

केंद्रीय मंत्री ने 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक में कोरोना के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए राज्यों को अग्रिम योजना तैयार करने को कहा है। कोरोना के मामलों में आई तेजी से निपटने के लिए कोविड अस्पतालों में ऑक्सीजन युक्त बेड समेत दूसरे बुनियादी ढाँचे सुविधाओं को बढ़ाने की सलाह केंद्रीय मंत्री ने दी है।

पंजाब में बेकार पड़े वेंटिलेटर

एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना वायरस की दूसरी लहर के कहर के बीच मार्च के अंत तक 250 से अधिक वेंटिलेटर पंजाब राज्य सरकार के गोदामों में बेकार ही पड़े हुए थे। बताया गया कि इन मशीनों को इंस्टाल करने के लिए टेक्नीशियनों की कमी थी।

ऐसा पहली बार नहीं है, जब राज्य के अस्पतालों में वेंटिलेटर ऐसे ही पड़े रहे हों। करीब 5 साल पहले 10 वेंटिलेटर को लुधियाना के सिविल अस्पताल में भेजा गया था, लेकिन जब तक महामारी का कहर नहीं बरपा ये ऐसे ही पड़े रहे। उस दौरान इसे एक स्थानीय अस्पताल को सौंपने की तैयारी थी।

गौरतलब है कि पंजाब में कॉन्ग्रेस की सरकार है और झारखंड में वह गठबंधन में है।

केरल में नहीं थम रहा नन के मरने का सिलसिला, सेंट जोसेफ कॉन्वेंट के कुएँ में मिला एक और शव: जाँच जारी

केरल में शुक्रवार (16 अप्रैल, 2021) को सेंट जोसेफ कॉन्वेंट के कुएँ में एक 42 वर्षीय कैथोलिक नन मृत पाई गई। यह घटना दक्षिण केरल के कुरीपुझा जिले की बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि सुबह की प्रार्थना में नन मेबल जोसेफ के न दिखाई देने पर उनकी तलाश शुरू की गई। यहाँ करुणागप्पाली की निवासी और कॉन्वेंट में रहने वाली एक अन्य महिला ने सुबह परिसर के भीतर मौजूद कुएँ में जोसेफ का शव देखा, तो उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी।

पुलिस ने बताया कि प्राथमिक जाँच में यह मामला आत्महत्या का लगता है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जाँच होने के बाद ही अन्य जानकारी मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि नन के कमरे से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसे हो सकता है उन्होंने ही लिखा हो। सुसाइड नोट के अनुसार नन की मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है।

उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से चलते आत्महत्या जैसा कदम उठाया। पुलिस ने बताया, जाँच की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और शव को पोस्टमार्टम के लिए तिरुवनंतपुरम के सरकारी मेडिकल कॉलेज में भेज दिया गया है।

केरल में कॉन्वेंट के भीतर मौजूद कुओं के अंदर इससे पहले भी कई नन मृत पाई गई हैं। इस साल फरवरी में एक 45 वर्षीय नन, जो एर्नाकुलम जिले के वाझक्कल में एक कॉन्वेंट में रह रही थी। वह कॉन्वेंट के पास एक खदान के अंदर मृत पाई गई थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 1989 से अब तक केरल में कम से कम 20 निर्दोष नन कुएँ में मृत पाई गई हैं। इस सनसनीखेज खुलासे में अभय मर्डर केस भी शामिल है, जो 1992 में हुआ था।

पिछले साल मई में नन बनने के लिए अध्ययन कर रही 21 वर्षीय दिव्या पी जॉनी को तिरुवल्ला में अपने कॉन्वेंट के एक कुएँ में मृत पाया गया था। सितंबर 2018 में पठानपुरम की एक अन्य नन को उसके कॉन्वेंट के पास एक कुएँ में मृत पाया गया था। यह 55 वर्षीय नन सुसान मैथ्यू पठानपुरम के सेंट स्टीफन स्कूल में शिक्षक थीं।

वामपंथियों के गढ़ जेएनयू में फैला कोरोना, 74 छात्र और स्टाफ संक्रमित: 4 की हालत गंभीर

कोरोना वायरस के कहर के बीच वामपंथियों के गढ़ माने जाने वाले जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली में भी कोविड ने एंट्री मार ली है। विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक 74 छात्र और स्टाफ संक्रमित पाए गए हैं।

संक्रमितों में 11 विश्वविद्यालय के स्टाफ हैं। 4 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। क्रिटिकल कंडीशन में दो को फोर्टिस तो एक को बीएल कपूर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बाकी सभी को झज्जर एम्स और सुल्तानपुरी के क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्वविद्यालय के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था करने वाले व्यक्ति ने बताया कि संक्रमण की हालत इतनी बुरी है कि 18 अप्रैल को एक छात्र की हालत खराब होने के बाद उसे 3 अस्पतालों में ले गए, लेकिन कहीं भी भर्ती नही किया जा सका। इसके बाद अंत में बीएल कपूर अस्पताल में उसे एडमिट कराया जा सका। ड्राइवर ने बताया कि छात्र का ऑक्सीजन लेवल 40 से भी नीचे पहुँच गया था। वहीं फोर्टिस में 3-4 घंटे लंबे इंतजार के बाद दो अन्य को एंट्री मिली।

एक स्वास्थ्यकर्मी के मुताबिक क्वारंटाइन सेंटर में रखे गए छात्रों में से एक दो को छोड़कर सभी को ऑक्सीजन के सपोर्ट पर रखा गया है। अधिकतर लोगों का ऑक्सीजन लेवल 40 से नीचे आ गया था और उनकी नाक से खून निकलने लगा था। हालाँकि, अभी सभी की हालात बेहतर है।

विश्वविद्यालय में हालात हुए बदतर

कोरोना की सेकेंड वेव से देश में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में दिल्ली भी शामिल हैं। यहाँ वामपंथ की पाठशाला जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में कोविड के चलते हालात बेहद बुरे हो गए हैं। विश्वविद्यालय में 3,000 छात्र, 1000 स्टाफ और 350 गार्ड समेत 4,350 कर्मचारी हैं। संक्रमण तेजी से फैलने के कारण बाकियों पर भी इसका खतरा मंडरा रहा है।

बदतर होते हालात को देखते हुए यूनिवर्सिटी ने कोविड-19 रिस्पांस कमेटी बना दी है। 9 सदस्यीय कमेटी में रजिस्ट्रार इसके अध्यक्ष हैं। कमेटी के सदस्य डॉ सौरभ शर्मा ने बताया है कि वो लोग लगातार छात्रों के संपर्क में बने हुए हैं।

‘वाजिद के हिबानामा में बच्चों को संपत्ति में हक़ नहीं’: साजिद और उनकी अम्मी के खिलाफ बॉम्बे HC पहुँची पारसी बीवी कमलरुख

दिवंगत संगीतकार वाजिद खान की पत्नी कमलरुख ने पारिवारिक संपत्ति के विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने वाजिद के भाई साजिद खान और उनकी अम्मी के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाल ही में ये खबर भी आई थी कि पिछले साल जून में वाजिद खान के इलाज के दौरान साजिद की बीवी ने अपनी किडनी दी थी। खान परिवार वाजिद की मौत के बाद से ही विवादों में है।

वाजिद खान की पत्नी ने कहा है कि उनके शौहर ने अपने निधन से पहले अपनी संपत्ति को बीवी और बच्चों के नाम किया था। उन्होंने कोर्ट में दावा किया कि बीवी-बच्चों के अलावा उस संपत्ति में कोई और दावेदार नहीं है। वाजिद की मौत कोरोना की वजह से हुई थी। उन्होंने साजिद और उनकी अम्मी पर उन्हें अकेले करने से खिलाफ भी कार्रवाई की माँग की। साथ ही खुद की और बच्चों के हितों की रक्षा की माँग की।

बता दें कि पारसी कमलरुख धर्मांतरण के दबावों के कारण बाकी परिवार से अलग रहती थीं। वाजिद भी बीवी के साथ ही रहते थे। 2014 में विवाद इतना बढ़ गया था कि वाजिद ने तलाक की अर्जी भी बांद्रा कोर्ट में दायर कर दी थी। कमलरुख ने कहा कि वाजिद ने अपनी संपत्ति उस दौरान जिन शर्तों पर हस्ताक्षर किया था, उसमें अपनी संपत्ति के रखरखाव की जिम्मेदारी बीवी-बच्चों को दी थी और कुछ अचल संपत्ति उनके नाम भी की थी।

कमलरुख ने आरोप लगाया कि साजिद खान ने भाई की मौत के बाद वाजिद की संपत्ति जिन-जिन सोसाइटीज में थी, उन सब से संपर्क कर के अकाउंट मैनेजर्स को कमलरुख का फोन कॉल न उठाने को कहा। आरोप है कि साजिद ने संपत्ति हड़पने के लिए अपना नाम ‘साजिद वाजिद’ रखने की भी कोशिश की। जबकि साजिद और उनकी अम्मी का कहना है कि वाजिद के ‘हिबानामा’ के हिसाब से बच्चों को कुछ नहीं मिलने वाला है।

बता दें कि नवंबर 2020 में अपने शुरुआती रिश्ते की बातें बताते हुए कमलरुख ने कॉलेज दिनों को याद किया और बताया कि जब उन्होंने शादी करने का फैसला किया, उस समय मजहब परिवर्तन की बात उठी थी। कमलरुख के मुताबिक, वाजिद एक ऐसे परिवार से आते थे, जिनका मानना था कि यदि कमलरुख को उनके परिवार में शादी करनी है, तो धर्मांतरण जरूरी होगा। हालाँकि वह इस बात से नाखुश थीं और वाजिद को ये सब चीजें अपनी शादी में बाधा लग रही थी।

‘मंदिर वहीं बन रहा… बेड माँग शर्मिंदा न करें’: अब कोरोना की आड़ में मंदिर और मोदी के लिए स्वरा भास्कर ने दिखाई घृणा

मुद्दा कोई भी हो स्वरा भास्कर का एकमात्र एजेंडा है, हिंदूफोबिया। वह अक्सर राम मंदिर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर अपनी घृणा का प्रदर्शन सोशल मीडिया में करती रहती हैं। अब उन्होंने अपना यह एजेंडा कोरोना की आड़ लेकर बढ़ाया है।

स्वरा भास्कर ने इंस्टाग्राम स्टोरी में एक फोटो शेयर किया है। फोटो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की है। तस्वीर में पीएम मोदी हाथ जोड़े नजर आ रहे हैं। इसके साथ ही तस्वीर पर लिखा है, “मंदिर वहीं बन रहा है। अस्पताल में बेड माँग कर शर्मिंदा न करें। धन्यवाद।” फोटो के कोने में स्वरा ने ‘वाया वाट्सएप’ लिखा है। 

swara bhasker  prime minister narendra modi
स्वरा भास्कर के इंस्टाग्राम स्टोरी का स्क्रीनशॉट

बता दें कि कोरोना के बढ़ते प्रकोप को लेकर कोहराम मचा हुआ है। अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, दवाई आदि की काफी किल्लत हो रही है। हालाँकि केंद्र सरकार हर राज्य की माँग की पूर्ति कर रही है, मगर फिलहाल स्थिति भयावह दिख रही है। ऐसे समय में देश के साथ खड़े होने के बजाय कुछ लोग प्रोपेगेंडा फैलाने से बाज नहीं आ रहे।

ऐसे लोगों में कॉमेडियन रोहन जोशी जैसे नाम भी शामिल हैं। खुद को कॉमेडियन बताने वाली यह जमात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्षी प्रोपेगेंडा को धार देती है। लेकिन सत्ता के खिलाफ बोलने का दंभ भरने वाले ये कॉमेडियन उद्धव ठाकरे के खिलाफ चूँ तक करने की हिम्मत नहीं रखते, क्योंकि इनमें से अधिकतर मुंबई में ही रहते हैं।

रोहन जोशी ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा था, “वो सभी भक्त जिन्होंने इस महामारी के दौरान अपने किसी परिचित को खोया, आप मजबूत बने रहिए। आपके पापा और अक्षय कुमार मिल कर एक सुन्दर सा मंदिर बना रहे है, जहाँ जाकर आप अपने मृत परिजनों की आत्माओं की शांति के प्रार्थना कर सकते हैं।”

अव्वल तो ये कि रोहन जोशी ने अपनी अगली स्टोरी में इस बयान का खुल कर बचाव भी किया। उसने लिखा, “लोग मेरी पिछली इंस्टाग्राम स्टोरी को अभद्र बता रहे हैं। मुझे लगता है कि आप सब ने मेरे क्रोध और अपमान को कम कर आँका है। F@#k Bhakts! इस परिस्थिति के लिए सीधे वही जिम्मेदार हैं। मैं अब भी देख रहा हूँ कि उनमें से अधिकतर अभी भी उनका (पीएम मोदी) बचाव कर रहे हैं। मुझे उनके लिए जरा सी भी सहानुभूति नहीं है, बल्कि केवल अवमानना का भाव है।” आप इन शब्दों पर गौर कीजिए।

मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति, रेमेडेसिविर एवं अन्य दवाओं के पर्याप्त स्टॉक हों सुनिश्चित: CM योगी ने दिया सख्त आदेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश में कोरोना वायरस प्रकोप की दूसरी लहर के बीच मेडिकल ऑक्सीजन की बिना किसी रुकावट की आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाया है। यूपी सरकार ने राज्य के सभी अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति के लिए 10 ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने का आदेश दिया है।

यूपी सरकार के सूत्रों के अनुसार, संयंत्र राज्य भर में विभिन्न स्थानों पर स्थापित किए जा रहे हैं और वे एक सप्ताह के भीतर पूरी तरह फंक्शन में आ जाएँगे। कोरोना वायरस के मामलों में लगातार वृद्धि के साथ, योगी आदित्यनाथ ने रविवार (अप्रैल 18, 2021) को अधिकारियों को राज्य के प्रत्येक अस्पताल में न्यूनतम 36 घंटे का ऑक्सीजन बैकअप सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा उपकरणों का निरीक्षण करने का भी निर्देश दिया।

सरकार ने पहले ही निर्देश जारी किए हैं कि उद्योग के काम के लिए आपूर्ति की जा रही सभी मेडिकल ऑक्सीजन को तुरंत रोक दिया जाना चाहिए, और पूरी आपूर्ति केवल अस्पतालों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए, योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को COVID समर्पित अस्पतालों के लिए तेजी से ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य अधिकारियों को ऑक्सीजन की 15 दिनों की माँग का आकलन करने के बाद जल्दी से कार्य करना चाहिए। सीएम ने विशेष रूप से चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना से कहा कि वे राज्य में ऑक्सीजन की आपूर्ति पर नज़र रखें।

रेमेडेसिविर इंजेक्शन और अन्य चिकित्सा सप्लाई सुनिश्चित हो

राज्य के अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति की निगरानी के अलावा, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने संबंधित विभागों से कहा है कि वे राज्य में रेमेडेसिविर इंजेक्शन की उपलब्धता पर कड़ी निगरानी रखें, ताकि दवाओं की कोई कमी न हो।

मुख्यमंत्री ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि कोविड -19 के मरीजों को होम आइसोलेशन में दवाओं की कमी का सामना न करना पड़े। उन्होंने एफडी कंट्रोल रूम को रेमेडेसिविर स्टॉक की बारीकी से निगरानी करने का निर्देश दिया और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह से कहा कि वे रेमेडेसिविर की आपूर्ति शृंखला सुनिश्चित करें। इसके अलावा यूपी सरकार ने 24/7 कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है जहाँ अधिकारी दैनिक आधार पर स्टॉक की उपलब्धता का मूल्यांकन करेंगे।

योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को दिया सख्त निर्देश दिया

अपने वर्चुअल मीटिंग में, योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को COVID-19 प्रकोप से प्रभावित क्षेत्रों में आईसीयू और आइसोलेशन बेड की क्षमता का विस्तार करने के लिए भी कहा। सीएम ने कहा कि कानपुर के जीएसवी मेडिकल कॉलेज, रामा मेडिकल कॉलेज और नारायण मेडिकल कॉलेज में सुविधाओं को अपग्रेड किया जाना चाहिए।

इसके अलावा, सीएम ने वीकेंड में लॉकडाउन और अन्य राज्यों से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग को सख्ती से अंजाम देने के दौरान स्वच्छता अभियान चलाने और फॉगिंग करने की भी सिफारिश की। उन्होंने कहा कि कोविड​​-19 से संक्रमित लोगों को पर्याप्त सुविधाओं से लैस किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे जल्द से जल्द मामलों का पता लगाने और वायरस के प्रसार को रोकने के लिए RTPCR टेस्ट करें।

इसके अलावा, योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा न रहने और अपने घरों से बाहर निकलने वाले लोगों के लिए मास्क लगाने के ड्राइव को तेज करने के लिए कहा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें, जैसे कि मास्क न पहनने पर 1000 रुपए का जुर्माना लगाएँ।

‘मई में दिखेगा कोरोना का सबसे भयंकर रूप’: IIT कानपुर की स्टडी में दावा- दूसरी लहर कुम्भ और रैलियों से नहीं

देश के सबसे बड़े शैक्षिक संस्थानों में से एक IIT कानपुर में कोरोना को लेकर किए गए एक अध्ययन में पाया है कि कुम्भ में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ या चुनावी रैलियों में आए लोगों से इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। रिसर्च के अनुसार, मई 2021 कोरोना की दूसरी लहर का सबसे भयंकर रूप देखने को मिलेगा। कुछ राज्यों में यह अप्रैल के अंत में पीक पर होगा। IIT कानपुर के प्रोफेसर पद्मश्री मणिंद्र अग्रवाल ने इस अध्ययन में सभी राज्यों में अलग-अलग कोरोना के पीक टाइम और ग्राफ गिरने की तारीख का अनुमान लगाया है

प्रोफेसर मणिन्द्र और उनकी टीम ने पूरे देश के डेटा का अध्ययन किया और अलग-अलग राज्यों में मिलने वाले कोरोना के साप्ताहिक आँकड़ों को भी देखा। एक कम्प्यूटर आधारित मॉडल पर ये सब कुछ किया गया। ‘दैनिक भास्कर’ ने उनसे बातचीत की, जिसमें उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में कोरोना का उच्चतम स्तर आ चुका है और राज्य में अब अगले कुछ दिनों में संक्रमितों की संख्या बढ़ने की बजाए घटने लगेगी। 

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और राजस्थान में 20 से 30 अप्रैल के बीच सबसे ज्यादा कोरोना के मरीज मिलेंगे। अध्ययन में जुटाए गए आँकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में एक दिन में सबसे ज्यादा 32,000 केस आने की आशंका है। इसके बाद दिल्ली में यह आँकड़ा 30,000, पश्चिम बंगाल में 11,000, राजस्थान में 10,000 और बिहार में 9,000 के आसपास रह सकता है।

इस रिसर्च में सबसे बड़ी बात कुम्भ और चुनावी रैलियों को लेकर पता चली। प्रोफेसर मणिंद्र अग्रवाल ने कहा कि इन दोनों आयोजनों से कोरोना के प्रसार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में जरूर बढ़ोतरी होगी, लेकिन कोई ऐसा असर नहीं दिखेगा जिससे देश की स्थिति बिगड़ जाए। साथ ही उन्होंने पूछा कि जो लोग बंगाल, केरल, तमिलनाडु में केस बढ़ने का कारण रैली और सभाओं को बता रहे हैं वो महाराष्ट्र और दिल्ली के लिए क्या कारण बताएँगे? 

कोरोना को लेकर IIT कानपुर का अध्ययन

उन्होंने कारण बताया कि खुली जगह में आयोजित इन कार्यक्रमों से कोरोना वायरस नहीं फैलेगा। उन्होंने पाया कि पहले चरण में सामान्य और गरीब लोगों को कोरोना ने ज्यादा निशाना बनाया था, क्योंकि एक तो वो बाहर रह कर काम कर रहे थे और दूसरा बचाव के लिए उनके पास संसाधन नहीं थे। अपार्टमेंट्स और बड़े घरों में रहने वाले लोग तो उसमें ही कैद हो गए थे। टीकाकरण शुरू हुआ तो ये लोग निकले। उन्होंने बताया कि इसी कारण दूसरे हमले में ज्यादा से ज्यादा लोग इसके शिकार हो रहे हैं।

उन्होंने जानकारी दी कि गुजरात, मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों का डेटा भी अभी साफ नहीं है, जबकि तमिलनाडु में 6 मई को सबसे ज्यादा मामले आने की आशंका है। अध्ययन में पाया गया कि कोरोना के मामले कम होने पर लोगों ने भी खूब लापरवाही की।

बता दें कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में स्वतः आगे कर अखाड़ों ने कुम्भ के समाप्ति की घोषणा की है और इसे अब प्रतीकात्मक ही रखा गया है। उत्तराखंड और हरिद्वार को कोरोना वायरस से सुरक्षित रखने और इसके लिए जारी सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन ठीक से हो, इसीलिए अखाड़ों ने ये फैसला लिया है। निरंजनी अखाड़ा, आनंद अखाड़े और जूना अखाड़ा ने ये घोषणा की, जिसका अन्य साधुओं ने अनुमोदन किया।