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जब तक इस्लाम है दुनिया में आतंकवाद रहेगा, गैरमुस्लिम और महिलाएँ रहेंगी असुरक्षित: तस्लीमा नसरीन, लेखिका को कट्टरपंथियों के कारण छोड़ना पड़ा था बांग्लादेश

बांग्लादेश से निर्वासित और भारत में शरण लेने वाली लेखिका तस्लीमा नसरीन ने इस्लाम और आतंकवाद का कनेक्शन जोड़ा है। उनका कहना है कि “जब तक इस्लाम रहेगा, आतंकवाद भी जिंदा रहेगा। गैर-मुसलमानों को कोई सुरक्षा नहीं मिलेगी, स्वतंत्र विचारकों और तर्कवादियों को कोई सुरक्षा नहीं मिलेगी, महिलाओं को कोई सुरक्षा नहीं मिलेगी।”

उन्होने आगे कहा कि “जब तक इस्लाम जीवित रहेगा, फूल मुरझाते रहेंगे, बच्चे मरते रहेंगे, लाखों मरे हुए कबूतर की तरह गिरते रहेंगे। इस्लाम की कोख से नफरत पैदा होती रहेगी, बदसूरत राक्षस पैदा होते रहेंगे।”

दिल्ली साहित्य महोत्सव में अपने विचार रखते हुए तस्लीमा नसरीन ने कहा कि इस्लाम पिछले 1400 सालों में थोड़ा भी नहीं बदला इसलिए बच्चों को सिर्फ धार्मिक किताबें पढ़ाना बेहद खतरनाक है। तस्लीमा नसरीन ने भारत को अपना घर बताते हुए कहा कि जब वो यूरोप या अमेरिका में रही तो हमेशा पराई रही, लेकिन जब कोलकाता आई तो लगा कि जैसे अपने घर लौटी हैं।

इस्लामी कट्टरता, महिला अधिकार, मानवाधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करते हुए उन्होने कहा कि
“जब तक इस्लाम जीवित रहेगा, कोई भी राज्य सभ्य नहीं बन पाएगा, कट्टरता हावी रहेगा “

यूनिफॉर्म सिविल कोड का समर्थन करते हुए तस्लीमा नसरीन ने कहा कि भारत, बाग्लादेश जैसे देशों में सभी नागरिकों के लिए एक जैसा कानून होना चाहिए। मदरसों की शिक्षा पर सवाल उठाते हुए उन्होने कहा कि बच्चों को संपूर्ण ज्ञान यहाँ नहीं मिल सकता।

तस्लीमा नसरीन ने कहा कि 2016 के ढाका हमले में मुसलमानों को इसलिए मार दिया गया क्योंकि वे कलमा नहीं पढ़ पाए थे। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में भी आतंकवादियों ने पर्यटकों को कलमा पढ़ने के लिए कहा। जब आस्था को तर्क और मानवता पर हावी होने दिया जाता है, तो यही होता है।”

पहले हिन्दू संत चिन्मय दास की बेल पर लगाई रोक, अब उन्हें मर्डर मामले में भी किया गिरफ्तार: 6 महीने से जेल में किया है बंद, बांग्लादेश में हिन्दुओं का उत्पीड़न जारी

बांग्लादेश में हिन्दुओं के उत्पीड़न में पूरा सरकारी तंत्र शामिल हो गया है। उनके निशाने पर वे लोग हैं, जो हिन्दुओं के लिए आवाज उठा रहे हैं। हिन्दुओं के अधिकारों के लिए बोलने वाले ISKCON संत चिन्मय दास को भी जेल में रखने के लिए बांग्लादेश का पूरा तंत्र लगा गया है। उन्हें एक और मुकदमे में गिरफ्तार दिखाने का आदेश बांग्लादेश के एक कोर्ट ने दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चटगाँव के एक कोर्ट में जज SM अलाउद्दीन ने यह आदेश सोमवार (5 मई, 2025) को दिया है। जज ने आदेश दिया है कि चिन्मय कृष्ण दास को एक वकील की हत्या के मामले में आरोपित का दर्जा दिया जाए और उन्हें इसमें भी गिरफ्तार दिखाया जाए।

इस वकील की मौत चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद हुए प्रदर्शन में हुई थी। पुलिस ने चटगाँव की अदालत से कहा है कि वह 3 और केस में चिन्मय कृष्ण दास को गिरफ्तार दिखाने का आदेश दे। इन पर सुनवाई मंगलवार (5 मई, 2025) को होनी है।

वकील की हत्या के मामले में चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई के लिए प्रदर्शन करने वाले और भी कई हिन्दू आरोपित बनाए गए हैं। चिन्मय कृष्ण दास पर यह कार्रवाई उनकी जमानत रद्द करने के बाद की है। बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 30 अप्रैल, 2025 को हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में संत चिन्मय दास को जमानत दे दी थी। लेकिन इसके एक दिन बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा कर चिन्मय कृष्ण दास के जेल से बाहर आने के रास्ते बंद कर दिए थे। अब उन्हें और भी मामलों में आरोपित बना दिया गया है, अब उनके रिहा होने की उम्मीदें और भी कम हो गई हैं।

क्यों गिरफ्तार हुए थे चिन्मय कृष्ण दास?

25 अक्टूबर, 2024 को बांग्लादेश के चटगाँव में हिन्दुओं ने एक रैली आयोजित की थी। इस रैली का नेतृत्व चिन्मय कृष्ण दास कर रहे थे। यह रैली चटगाँव में ऐतिहासिक लाल दीघी मैदान में आयोजित की गई थी। इसमें हजारों हिन्दू शामिल हुए थे। चटगाँव में यह रैली हिंदुओं पर इस्लामी कट्टरपंथियों के हमलों के विरोध में आयोजित की गई थी।

इस रैली के दौरान हिन्दुओं ने भगवा झंडे लहराए और सरकार से कार्रवाई की माँग की। चटगाँव में हुई इस रैली के कारण इस्लामी कट्टरपंथी बिदक गए। उन्होंने इस रैली में एक जगह पर एक भगवा झंडा, बांग्लादेश के झंडे से ऊँचा लहराता हुआ देख लिया।

इसी के आधार पर फिरोज खान नाम के एक शख्स ने चटगाँव में ही चिन्मय कृष्ण दास समेत 19 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी। फिरोज खान ने आरोप लगाया था कि बांग्लादेश का झंडा नीचे करके लहराया जा रहा था जो इसका अपमान है और यह देशद्रोह का कार्य है। फिरोज ने आरोप लगाया था कि इससे चिन्मय कृष्ण दास देश में अशांति लाना चाहते हैं।

इसके बाद चिन्मय कृष्ण दास को गिरफ्तार कर लिया गया तगा। उन्हें चटगाँव की अदालत में पेश किया गया। यहाँ मजिस्ट्रेट काजी नजरुल इस्लाम ने उन्हें देशद्रोह का आरोपित मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया और जेल भेज दिया था।


सुप्रीम कोर्ट के किस जज के पास कितनी प्रॉपर्टी, कैसे हुई नियुक्ति… पहली बार सार्वजनिक: जस्टिस वर्मा के घर लगी आग में मिले थे जले हुए नोटों के बंडल

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधीशों की संपत्ति का विवरण वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। वेबसाइट पर 33 में से केवल 21 जजों की जानकारी दी गई है। बाकी जजों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा सुप्रीम कोर्ट को सौंपा है। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिल्ली हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर से कैश मिलने के विवाद के बाद लिया था।

वेबसाइट में सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्त होने वाले जजों के नाम, अनुभव, उनकी नियुक्ति की समेत उनका किसी पहले से सेवा दे रहे जज के साथ रिश्ते आदि की जानकारी भी सार्वजनिक की है।

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (5 मई 2025) को कहा है कि उसने न्यायाधीशों की संपत्ति का विवरण अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। यह जानकारी न्यायालय के उस फैसले को देखते हुए लिया गया है जिसमें संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक डोमेन में लाने की बात कही गई है, हालाँकि वेबसाइट पर 33 में से केवल 21 जजों की जानकारी ही देखी जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि “भारत के सर्वोच्च न्यायालय की पूर्ण अदालत ने 1 अप्रैल, 2025 को निर्णय लिया है कि इस न्यायालय के न्यायाधीशों की संपत्ति का विवरण इस न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड करके सार्वजनिक डोमेन में रखा जाएगा। न्यायाधीशों की संपत्ति का विवरण जो पहले से उपलब्ध है, उसे अपलोड किया जा रहा है। बाकी जजों की जानकारी मिलने पर अपलोड की जाएगी।”

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिल्ली हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर से कैश मिलने के विवाद के बाद लिया था। जस्टिस वर्मा के सरकारी बंगले में 14 मार्च को आग लगी थी। आग बुझाने के लिए आई फायर सर्विस टीम को जस्टिस वर्मा के घर से अधजले नोट मिले थे।

सुप्रीम कोर्ट ने किया नियुक्ति की प्रक्रिया को सार्वजनिक

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में नियुक्तियों की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी है जिसमें राज्य सरकारों और केन्द्र सरकार से मिलनेवाला इनपुट और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के रोल के बारे में बताया गया है। इसका मकसद पारदर्शिता लाना और जनता को जागरूक बनाना है।

इसमें 9 नवंबर 2022 से अब तक हाईकोर्ट के जजों की नियुक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जो प्रस्ताव रखा था उसे अपलोड किया गया है। कॉलेजियम ने 221 नामों की सिफारिश पिछले ढ़ाई साल में की थी। इनमें से 29 उम्मीदवारों के नामों को सरकार ने मंजूरी दी। इसमें ओबीसी 21, अत्यंत पिछड़ा वर्ग 7, एससी 7 और एसटी 5 शामिल हैं।

इसमें जानकारी दी गई है कि कोई भी उम्मीदवार किसी रिटायर्ड या मौजूदा सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के जज का रिश्तेदार या परिवार तो नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने जिन नामों की सिफारिश की थी उनमें से 11 जजों में 6 के पिता, 3 के रिश्तेदार और 1-1 के भाई या ससुर पूर्व में या वर्तमान में जज हैं।

राज ठाकुर बन इकरार पाशा ने हिन्दू महिला को फँसाया, भेद खुलते ही मारपीट कर इस्लाम कबूलने का बनाने लगा दबाव: भाइयों से करवाया रेप, UP के मुरादाबाद की घटना

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में रहने वाली एक हिंदू महिला ने लव जिहाद का मामला दर्ज कराया है। पीड़ित हिंदू महिला का कहना है कि इकरार पाशा ने अपना नाम राज ठाकुर बताकर पीड़िता से शादी की। शादी के बाद पता चला कि उसका असली नाम इकरार है और वह मुस्लिम है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़ित महिला ने आरोप लगाया कि आरोपित इकरार और उसके परिवार वाले उस पर धर्म बदलने का दबाव बना रहे हैं। पीड़िता ने बताया है कि जब उसने मना किया तो उन लोगों ने उसे जबरदस्ती मांस खिलाया और उसके साथ मारपीट की।

पीड़ित महिला ने यह भी आरोप लगाया कि इकरार के भाइयों ने उसके साथ दुष्कर्म किया और उसके बच्चों को बंदूक दिखाकर डराया-धमकाया। पीड़िता ने बताया कि उसकी इकरार पाशा से मुलाकात 2022 में हुई थी। उसने बताया कि इकरार पाशा तब राज ठाकुर बनकर माथे पर तिलक लगाया करता था और हाथ में कलावा भी बाँधता था।

पीड़िता ने यह भी बताया कि हिंदू बनकर ही उसने पीड़िता से दोस्ती की और अपने प्रेमजाल में फंसाया। पीड़ित हिन्दू महिला से आरोपित इकरार पाशा ने मंदिर में शादी की थी। यह भी सामने आया है कि किसी को इकरार के मुस्लिम होने का पता ना चले, इसके लिए वह घर में पूजा-पाठ किया करता था।

पीड़िता ने आगे बताया कि शादी होने के ढाई साल तक इकरार पाशा ने अपने घर वालों से नहीं मिलाया था। लेकिन शक के आधार पर पीड़िता ने इकरार के विषय में खोजबीन की तो पता चला कि उसका पति हिंदू नहीं मुस्लिम है। यह भी पता चला कि इकरार पाशा पहले से शादीशुदा है और उसके 3 बच्चे भी है।

पीड़िता ने जब इसका विरोध किया और इकरार पाशा के पास जवाब माँगने पहुँची, तो उसने जान से मारने की धमकी दी और धर्म परिवर्तन के लिए कहा। महिला ने इस विषय में मझोला थाने में शिकायत की थी। हिन्दू संगठनों ने इस मामले में SSP मुरादाबाद से मिलकर कार्रवाई करने की माँग की है।

SSP सतपाल अंतिल ने कहा है कि महिला की शिकायत की जाँच की जाएगी और उचित कार्रवाई की जाएगी।

पहलगाम अटैक करवा भारत से लिया पंगा, अब दाने-दाने को मोहताज हो जाएगा पाकिस्तान: अमेरिकी एजेंसी ने चेताया, एशियन बैंक से पैसा मिलना भी हो सकता है बंद

एक तो पाकिस्तान पहले से ही कंगाल होने की कगार पर है और दुनिया भर में भीख का कटोरा लेकर घूमता रहता है, अब पहलगाम आतंकी हमला करवा के उसने अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मार ली है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के और खस्ताहाल होने की उम्मीद है। भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित कर रखा है, पाकिस्तान से आयात-निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया गया है और पाकिस्तानियों के लिए वीजा सेवा भी रोक दी है। इन सब कार्रवाइयों का पाकिस्तान की इकॉनमी पर असर पड़ना शुरू हो गया है।

इधर भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी बेनकाब करने के लिए कमर कस ली है। भारत ने ‘एशियन डेवलपमेंट बैंक’ (ADB) से निवेदन किया है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली वित्तीय सहायता रोकी जाए। ADB के मुखिया व जापानी नौकरशाह मासातो कांडा से मुलाक़ात के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ये माँग रखी। निर्मला सीतारमण फ़िलहाल ADB की 58वीं वार्षिक बैठक में हिस्सा लेने के लिए इटली के मिलान में हैं। पाकिस्तान के विषय में वो इटली समेत अन्य यूरोपियन देशों के साथ भी बातचीत कर चुके हैं।

साथ ही भारत ने माँग है कि पाकिस्तान को ‘फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स’ की ग्रे लिस्ट में डाला जाए। साथ ही इस्लामाबाद जा रही फंडिंग को रोकने की भी माँग की गई। अब तक ADB द्वारा पाकिस्तान को 53 लोन और 3 ग्रांट्स दिए जा चुके हैं, 9.13 बिलियन डॉलर (भारतीय रुपयों में 76,900 करोड़ रुपए) के। मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद से निपटने में विफल रहने वाले देशों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। ग्रे लिस्ट में शामिल देशों की स्क्रूटनी गहनता से होती है, वहाँ निवेश पर नकारात्मक असर पड़ता है।

उधर वैश्विक वित्तीय सेवा संस्था Moody’s ने अपने अध्ययन में पाया है कि भारत से तनाव के बीच पाकिस्तान पर ज़्यादा नकारात्मक असर पड़ेगा। संस्था ने कहा है कि इससे पाकिस्तान के फॉरेक्स रिजर्व दबाव में आ सकता है और इसके विकास पर असर पड़ेगा। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी कह चुके हैं कि पाकिस्तान को मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो देशवासियों की इच्छा है, वो पूरी होगी। उधर पाकिस्तान के नेता बौखलाहट में भारत को भला-बुरा कहने में लगे हुए हैं।

मूडीज रेटिंग्स ने पाकिस्तान को ये भी चेताया है कि उसकी आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है और सरकार के वित्तीय सुधारों की प्रक्रिया को भी गहरा नुकसान हो सकता है। मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता की दिशा में जो भी प्रगति हुई है, वो रुक सकती है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ेगा, जो फिलहाल आने वाले वर्षों की विदेशी ऋण ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। वहीं भारत की अर्थव्यवस्था की तारीफ़ करते हुए एजेंसी ने कहा है कि स्थिर विकास दर, बड़े सरकारी निवेश और मजबूत उपभोक्ता माँग भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं।

जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर नोटों की जली गड्डियाँ मिलने का मामला: जाँच कमेटी ने CJI संजीव खन्ना को सौंपी रिपोर्ट, इलाहाबाद HC किए गए थे ट्रांसफर

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित घर पर के एक कमरे में करोड़ों रुपए नकद जलकर खाक हो गए थे। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। तीन सदस्यीय कमेटी ने एक महीने सात दिन में अपनी जाँच पूरी करके 4 मई 2025 को सीजेआई संजीव खन्ना को रिपोर्ट सौंपी, हालाँकि अभी तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तीन सदस्यों वाली समिति में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जी एस संधावालिया और कर्नाटक हाईकोर्ट की जस्टिस अनु शिवरामन शामिल थीं। अब देखना होगी कि CJI संजीव खन्ना इस पर क्या और कब फैसला लेंगे क्योंकि वह 13 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

इससे पहले 28 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से कहा था कि वह जाँच पूरी होने तक फिलहाल जस्टिस वर्मा को कोई न्यायिक कार्य न सौंपें। यही आदेश दिल्ली हाईकोर्ट को भी मिला था।

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीश रहते हुए यशवंत वर्मा के घर पर 14 मार्च 2025 को देर रात आग लग गई थी। आग बुझाने आए कर्मचारियों को एक कमरे में भारी मात्रा जली हुई नकदी मिली थी। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। न्यायमूर्ति वर्मा ने आरोपों को खारिज कर दिया था और कहा कि उनके या उनके परिवार के किसी सदस्य द्वारा स्टोररूम में कभी भी कोई नकदी नहीं रखी गई।  

इस मामले पर एक इन हाउस इंक्वायरी भी हुई लेकिन कोई खास नतीजा सामने नहीं आया। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय का मानना था कि इस मामले की गहन जाँच की जानी चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने जाँच समिति का गठन किया था। समिति ने 25 मार्च से जाँच शुरू की थी और 3 मई को रिपोर्ट पूरी कर दी।

थार, बलेनो, ऑल्टो… उस्मान की ‘लाल गाड़ियों’ से जुटाए गए फॉरेंसिक सबूत, मेडिकल रिपोर्ट में बच्ची से रेप का खुलासा: सड़क पर उतरी महिलाओं ने कहा – मृत्युदंड दो

नैनीताल में बच्ची के साथ दुष्कर्म मामले में पुलिस के हाथों पुख्ता सुराग लगे हैं। रविवार (5 मई, 2025) को फॉरेंसिक टीम ने आरोपित उस्मान के घर की जाँच की। इस दौरान कई सैंपल जमा किए गए। इसके अलावा घर में लगी CCTV की रिकॉर्डिंग को भी कब्जे में ले लिया है। पुलिस इन सैंपल को कोर्ट में पेश करेगी।

बता दें कि फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ हेमंत होल्कर के नेतृत्व में हल्द्वानी और रुद्रपुर की टीम नैनीताल पहुँची। विशेषज्ञों ने रेप के आरोपित उस्मान के घर से काफी सैंपल इकट्ठा किए। खासकर उस्मान की गैराज से सबूत लिए गए, जहाँ बच्ची के साथ दुष्कर्म किया गया था।

रुद्रपुर फॉरेंसिक लैब के साइंटफिक ऑफिसर हेमंत कुमार ने बताया कि रुकुट कंपाउंड स्थित घर के गैराज की जाँच की गई। यहाँ से कई अहम सैंपल जुटाए गए हैं। आरोपित के ऑल्टो गाड़ी से सबूत मिले हैं। इसके साथ ही दो अन्य वाहन बलैनो और थार से भी सैंपलिंग की गई। गाड़ियों के सैंपल बच्ची के बयान के आधार पर लिए गए। इसमें पीड़िता ने बताया था कि उसके साथ लाल गाड़ी में दुष्कर्म हुआ था। हालाँकि, उस्मान के पास सभी गाड़ियाँ लाल रंग की है।

ऑफिसर ने आगे बताया कि सभी सैंपल एकत्र करने के बाद नैनीताल पुलिस को सौंप दिए गए हैं। अब पुलिस पीड़ित के मेडिकल जाँच रिपोर्ट और सभी सैंपल को एक साथ मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करेगी। इसके बाद इनकों DNA मैचिंग के लिए रुद्रपुर लैब भेजा जाएगा। इससे मामले में कई अहम खुलासे होंगे।

मेडिकल रिपोर्ट में रेप का खुलासा

पीड़िता की माँ की तहरीर में रेप की बात कही गई थी। इसके बाद बच्ची की मेडिकल जाँच कराई गई। रिपोर्ट में आरोपित उस्मान का सच सामने आ गया है। मेडिकल रिपोर्ट में 12 साल की बच्ची के साथ रेप की पुष्टि हो गई है। मामला अब भी कोर्ट में विचाराधीन है इसीलिए अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

गौरतलब है कि नैनीताल के मल्लीताल इलाके में बुधवार (30 अप्रैल, 2025) को एक रेप की घटना सामने आई थी। ठेकेदारी करने वाले 67 वर्षीय बुजुर्ग उस्मान ने 12 साल की हिन्दू बच्ची के साथ कार में रेप किया था। उसने बच्ची को डराया-धमकाया भी था।

पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था और इसके बाद उसके घर पर बुल्डोजर चलाने का नोटिस नगर पालिका ने दिया था। हालाँकि, इस मामले में हाई कोर्ट ने उस्मान का घर गिराए जाने पर रोक लगा दी थी। उस्मान के वकील डॉ कार्तिकेय हरि गुप्ता ने हाई कोर्ट में इस नोटिस को चुनौती दी थी। इस पर नगर पालिका ने अपनी गलती मानते हुए नोटिस वापस ले लिया।

घटना के विरोध में सड़क पर उतरे लोग

इस मामले में नैनीताल में तनाव का माहौल हो गया था। उस्मान द्वारा हिंदू बच्ची से रेप की बात फैलते ही लोग रात के समय ही सड़कों पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन किया। आरोपित के खिलाफ धरना प्रदर्शन करते हुए कार्रवाई की माँग की गई।

वहीं, हलद्वानी में महिला संगठनों ने सरकार और शासन से पीड़िता को जल्द न्याय दिलाने की गुहार लगाई। प्रदर्शन करते हुए अपराध को अक्षम्य बताया और सरकार से आरोपित को मृत्युदंड देने की माँग भी की। महिलाओं ने कहा कि घटना के बाद पिछले तीन दिनों से नैनीताल में सांप्रदायिक सौहार्द भी बिगड़ा है।

जिस मुश्ताक ने की थी पूजा की हत्या, उसने कब्ज़ा रखी थी ST समाज के शख्स की जमीन: मृतका की बेटी पर भी गड़ा रखी थी नज़र, अब धामी सरकार ने लिया एक्शन

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर में पूजा बिश्वास की हत्या करने वाले मुश्ताक अहमद की सम्पत्ति पर बुलडोजर चलाया गया है। उत्तराखंड की धामी सरकार ने यह एक्शन लिया है। मुश्ताक के अब्बू ने एक जनजातीय समाज के व्यक्ति की जमीन कब्जा रखी थी। मुश्ताक ने अपने साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाली पूजा का गला काट कर हत्या कर दी थी।

यह कार्रवाई सोमवार (5 मई, 2025) को की गई। यहाँ सितारगंज कोतवाली इलाके में स्थित गाँव गौरीखेड़ा में एक जमीन पर यह कार्रवाई की गई। इस पर मुश्ताक के अब्बू अली अहमद ने मकान बना रखा था। यह जमीन मथुरा सिंह के नाम पर दर्ज थी। मथुरा सिंह जनजातीय समाज के हैं।

मुश्ताक हत्या बुलडोजर

यह जमीन मथुरा सिंह के पिता के नाम पर थी और उनकी मृत्यु के बाद उनके नाम पर दर्ज हो गई थी। लेकिन अली अहमद ने यहाँ कब्जा करके मकान बना लिया था। इसको लेकर जिला प्रशासन से शिकायत की गई थी। जिला प्रशासन ने इसको लेकर पहले भी नोटिस जारी की थी।

मुश्ताक और उसके अब्बू ने इसके बाद भी यह कब्जा नहीं हटाया था। ऐसे में प्रशासन ने बुलडोजर चला कर यह जमीन समतल कर दी और कब्जा खाली करवा दिया। वहीं मुश्ताक अहमद अभी हत्या के मामले में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है।

गौरतलब है कि मुश्ताक को 30 अप्रैल, 2025 को पुलिस ने पूजा की हत्या करने के मामले में गिरफ्तार किया था। मुश्ताक ने अपना नाम अजीत बता कर तलाकशुदा पूजा से दोस्ती की थी। इसके बाद वह उसके साथ गुरुग्राम में लिव इन रिलेशनशिप में रहने लगा था।

मुश्ताक पूजा से मिलने से पहले पंचर बनाता था और बाद में टैक्सी चलाने लगा था। वह पूजा से पैसे ऐंठता था। पूजा की बेटी पर भी मुश्ताक की नजर थी। पूजा ने मुश्ताक से शादी करने की बात की थी। मुश्ताक इस बीच पहले ही एक महिला से निकाह कर लिया था।

इसको लेकर पूजा ने उससे प्रश्न पूछे तो उसने उधम सिंह नगर में एक जगह घुमाने के बहाने ले जाकर हत्या कर दी। उसने पूजा का सिर धड़ से अलग कर दिया था और नाले में बहा दिया था। उसने बाकी शव भी छुपा दिया था। उसने यह हत्या नवम्बर, 2024 में की थी।

गाय के गोबर से बने पेंट से रंगी जाएँगी यूपी की इमारतें: प्राकृतिक रंगों को बढ़ावा देने के लिए CM योगी का आदेश, भड़के अखिलेश यादव

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार (4 अप्रैल, 2025) को पशुपालन और डेयरी विकास विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान प्रदेश में गौसेवा, डेयरी उद्योग और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।

उन्होंने सरकारी इमारतों पर गोबर आधारित प्राकृतिक पेंट के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही और डेयरी क्षेत्र को तकनीक तथा नवाचार से सशक्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के गौ संरक्षण केंद्रों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ठोस योजनाएँ तैयार करने का निर्देश दिया। हालाँकि, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव इससे भड़क गए और उन्होंने तंज कसते हुए इसे ‘गोबरनामा’ बताया और ‘भाजपा का का नया कारनामा’ करार दिया। जबकि यादव समाज पशुपालक रहा है। इससे पहले अखिलेश यादव ने गोबर से दुर्गन्ध आने की बात कही थी।

उन्होंने मंडल स्तर पर स्वदेशी गायों की नस्लों के लिए प्रतियोगिताएँ आयोजित करने और उत्कृष्ट गौ आश्रय स्थलों को सम्मानित करने का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही गाय आधारित उत्पादों का निर्माण करने वाले संगठनों के लिए नवाचार और उत्कृष्टता को बढ़ावा देने हेतु प्रतियोगिताएँ आयोजित करने का सुझाव भी दिया।

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि अब तक 40,968.29 हेक्टेयर चरागाह भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है, जिसमें से 12,168.78 हेक्टेयर भूमि को हरे चारे के उत्पादन के लिए समर्पित किया गया है। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं, जिनमें महिला स्वयं सहायता समूहों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अब तक 21,884 “गौसेवकों” को प्रशिक्षण देकर तैनात किया गया है।

बरेली में आईएफएफसीओ, आवंला के सहयोग से जैविक खाद और गोमूत्र प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना प्रगति पर है। राज्यभर के 7,693 गौ आश्रय स्थलों में लगभग 11.49 लाख गायों को आश्रय प्रदान किया गया है, जिनकी निगरानी सीसीटीवी कैमरों और नियमित निरीक्षणों के माध्यम से की जा रही है। मुख्यमंत्री ने आश्रयों में पशु चिकित्सा सुविधाएँ नियमित रूप से उपलब्ध कराने, भूसा बैंक की स्थापना, और चारा, चोकर व पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

राहुल गाँधी कहाँ के नागरिक? हाई कोर्ट ने कहा – 10 दिन में तय करे मोदी सरकार: दोहरी नागरिकता को लेकर दायर याचिका पर निर्देश

कॉन्ग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी की नागरिकता को लेकर दायर याचिका को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सोमवार (5 मई 2025) को इस याचिका को निस्तारित कर दिया, यानी मामला अपने स्तर पर खत्म कर दिया।

जस्टिस एआर मसूदी और जस्टिस राजीव सिंह की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह जल्द से जल्द इस मामले में अंतिम फैसला ले और याचिकाकर्ता को सूचित करे। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर केंद्र सरकार फैसला नहीं लेती, तो इसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा।

कर्नाटक के बीजेपी कार्यकर्ता और याचिकाकर्ता एस विग्नेश शिशिर ने दावा किया था कि राहुल गाँधी के पास ब्रिटेन की नागरिकता है। उनके मुताबिक, उनके पास ब्रिटिश सरकार के दस्तावेज और ई-मेल हैं, जो यह साबित करते हैं कि राहुल गाँधी ब्रिटिश नागरिक हैं।

शिशिर ने माँग की थी कि राहुल गाँधी की भारतीय नागरिकता रद्द की जाए और सीबीआई इसकी जाँच करे। उन्होंने कहा कि दोहरी नागरिकता भारतीय संविधान, भारतीय न्याय संहिता और पासपोर्ट एक्ट का उल्लंघन है। शिशिर ने यह भी बताया कि उन्होंने दो बार गृह मंत्रालय को शिकायत भेजी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

हाई कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार याचिकाकर्ता की शिकायत पर फैसला लेने की समय सीमा नहीं बता पा रही है। इसलिए इस याचिका को विचाराधीन रखने का कोई मतलब नहीं है। कोर्ट ने शिशिर को अन्य कानूनी रास्ते अपनाने की छूट दी है। अगर केंद्र फैसला लेता है, तो याचिकाकर्ता फिर से हाई कोर्ट आ सकते हैं।

इससे पहले, सुब्रमण्यम स्वामी ने भी दिल्ली हाई कोर्ट में राहुल गाँधी की नागरिकता को लेकर याचिका दायर की थी। हालाँकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि वह इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के बाद ही सुनवाई करेगा।

बता दें कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 9 के तहत दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है। इस मामले में अब सबकी नजर केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी है।