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कारगिल हो या 26/11… बरखा दत्त जैसों ने खतरे में डाल दी थीं जिंदगियाँ, मीडिया को सैन्य मूवमेंट के लाइव कवरेज से रोकने का फैसला यूँ ही नहीं

पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के चार दिन बाद शनिवार (26 अप्रैल 2025) को भारत सरकार के सूचना एवँ प्रसारण मंत्रालय ने एक सख्त चेतावनी जारी की है। मंत्रालय ने सभी मीडिया चैनलों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी सैन्य अभियान या सुरक्षा बलों की गतिविधियों की लाइव कवरेज न करें। इस चेतावनी का मकसद देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना और शत्रुओं को किसी भी तरह का फायदा न पहुँचने देना है। मंत्रालय ने साफ कहा कि रक्षा और सुरक्षा से जुड़े अभियानों की रिपोर्टिंग में मौजूदा कानूनों और नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।

मंत्रालय ने अपने पत्र में कहा कि रियल-टाइम कवरेज, विजुअल्स का प्रसारण या सूत्रों के हवाले से खबरें चलाना पूरी तरह बंद करना होगा। ऐसा करना शत्रुओं की मदद कर सकता है और सैन्य अभियानों को नुकसान पहुँचा सकता है।

बता दें कि कारगिल युद्ध, 26/11 मुंबई हमले और कंधार हाईजैकिंग जैसी घटनाओं के दौरान मीडिया की लाइव कवरेज ने देश को भारी नुकसान पहुँचाया था। इन घटनाओं से सबक लेते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि किसी भी आतंक-विरोधी अभियान की लाइव कवरेज नहीं होनी चाहिए। खबरों को सिर्फ सरकारी प्रेस ब्रीफिंग तक सीमित रखने का निर्देश दिया गया है। ऐसा न करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

मंत्रालय ने कहा कि मीडिया एक जिम्मेदार भूमिका निभाए, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है। संवेदनशील जानकारियों को सार्वजनिक करना सैनिकों की जान को खतरे में डाल सकता है। मंत्रालय ने केबल टेलीविजन नेटवर्क्स (संशोधन) नियम, 2021 का हवाला देते हुए कहा कि सभी टीवी चैनलों को इन नियमों का पालन करना होगा। इसमें साफ लिखा है कि आतंक-विरोधी अभियानों की लाइव कवरेज नहीं होनी चाहिए और खबरें सिर्फ सरकारी ब्रीफिंग तक सीमित रहें। मंत्रालय ने सभी हितधारकों से सतर्कता और संवेदनशीलता बरतने की अपील की है।

आपको याद ही होगा कि 26/11 मुंबई हमले के लाइव कवरेज ने आतंकियों को मदद पहुंचाई थी। 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने मुंबई को चार दिनों तक बंधक बनाए रखा। इस हमले में 166 लोग मारे गए, जिनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे। नौ आतंकी मारे गए, जबकि अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा गया। इस हमले की साजिश हाफिज सईद और जकीउर्रहमान लखवी ने रची थी, जो आज भी पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहे हैं। उस वक्त की मनमोहन सिंह सरकार ने पाकिस्तान को कई डोजियर सौंपे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इस हमले के दौरान मीडिया की भूमिका पर सवाल उठे थे। खासतौर पर पत्रकार बरखा दत्त की रिपोर्टिंग को लेकर काफी विवाद हुआ। उस समय बरखा एनडीटीवी के लिए काम करती थीं और उनकी लाइव कवरेज पर गंभीर सवाल खड़े हुए। 2012 में न्यूजलॉन्ड्री को दिए एक इंटरव्यू में बरखा ने खुद स्वीकार किया कि उनकी और अन्य पत्रकारों की रिपोर्टिंग की वजह से सैकड़ों लोगों की जान खतरे में पड़ गई थी। उन्होंने यह भी माना कि उनकी कवरेज से सुरक्षा बलों को भी नुकसान हुआ। न्यूजलॉन्ड्री की मधु त्रेहान ने इंटरव्यू में बरखा से इस बारे में सवाल किए थे।

मुंबई हमले के दौरान बरखा पर आरोप लगा कि उन्होंने एक फंसे हुए व्यक्ति के रिश्तेदार को फोन करके उसकी लोकेशन लाइव टीवी पर उजागर कर दी। इससे आतंकियों को उसकी जगह का पता चल गया और उसकी जान चली गई। ब्लॉगर चैतन्य कुंते ने बरखा से पत्रकारिता की नैतिकता पर सवाल उठाए, जिसके जवाब में बरखा ने उन्हें लीगल नोटिस भेज दिया। चैतन्य ने यह भी आरोप लगाया कि बरखा की वजह से हेमंत करकरे की मौत हुई, हालांकि बरखा ने इससे इनकार किया और कहा कि उस वक्त वे दिल्ली में थीं।

बरखा ने इंटरव्यू में यह भी बताया कि उन्हें और अन्य पत्रकारों को अपनी गलती का एहसास हुआ, जिसके बाद उन्होंने दूसरे दिन से लाइव विजुअल्स को 15 मिनट की देरी से दिखाना शुरू किया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता था कि आतंकी भी टीवी देख रहे हैं। एक अन्य घटना में बरखा पर आरोप लगा कि उन्होंने ओबेरॉय होटल के मैनेजर को कॉल किया, जिससे आतंकियों को पता चल गया कि वहाँ कई लोग बंधक हैं। इन सभी घटनाओं ने मीडिया की लाइव कवरेज के खतरों को उजागर किया।

इसी तरह, कारगिल युद्ध के दौरान भी मीडिया की लाइव रिपोर्टिंग ने सेना की रणनीति को प्रभावित किया था। 1999 में हुए इस युद्ध में पाकिस्तानी घुसपैठियों ने कारगिल की चोटियों पर कब्जा कर लिया था। भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय चलाकर उन्हें खदेड़ा, लेकिन इस दौरान मीडिया की पल-पल की कवरेज ने सेना की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। कंधार हाईजैकिंग की घटना में भी यही हुआ। 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 को हाईजैक कर लिया गया था। इस दौरान मीडिया की कवरेज ने हाईजैकर्स को यात्रियों की स्थिति और सरकारी रणनीति की जानकारी दी, जिससे बातचीत और ऑपरेशन में दिक्कत हुई।

इन सभी घटनाओं से सबक लेते हुए सरकार ने अब सख्त रुख अपनाया है। मंत्रालय ने कहा कि मीडिया को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखना होगा। यह कदम भविष्य में होने वाले किसी भी नुकसान को रोकने के लिए उठाया गया है।

‘बेहूदा साइंस मंत्री, इसीलिए तुम्हारे नाम के आगे Ch लगा है’: पाकिस्तानी नेता को अदनान सामी ने पियानो की तरह बजाया, हो गई ‘गजब बेइज्जती’

जम्मू कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। इस कड़ी में सबसे बड़ा फैसला भारत में रहने वाले पाकिस्तानियों को वापस भेजने पर लिया गया है। हर तरह के वीजा लिए हुए पाकिस्तानियों को अधिकतम 1 मई, 2025 तक अपने वतन लौट का आदेश दिया गया है। इस बीच पाकिस्तान में इमरान सरकार के पूर्व मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने लोकप्रिय गायक अदनान सामी की वापसी पर तंज कसा है। इसके बाद सामी ने हुसैन को जमकर लताड़ लगाई।

वतन वापसी के आदेश से कई पाकिस्तानी नागरिक मीडिया के सामने भी अपना खीझ उतार रहे हैं। कुछ इलाज के लिए यहाँ आने का दावा कर रहे हैं तो किसी का मायका या ससुराल भारत में है। कुछ पाकिस्तानी अन्य कारणों से भी भारत में रह रहे हैं। वहीं, पहलगाम हमले के बाद भारतीयों ने पाकिस्तानी अभिनेताओं की फिल्मों का बॉयकॉट करने की भी बात कही है।

भारत सरकार ने पाकिस्तानियों का वीजा रद्द करते हुए उन्हें वापस लौट जाने का आदेश दिया है, जिसपर चुटकी लेते हुए फवाद ने ‘X’ पर लिखा, “अदनान सामी का क्या होगा?” इस पर अदनान ने फवाद पर तंज कसते हुए जवाब दिया, “इस अनपढ़ को कौन समझाए?” हालाँकि, फवाद हुसैन ने अपनी बेइज्जती का बदला लेने के लिए फिर कुछ लिखा लेकिन इस बार भी ‘भारतीय’ अदनान सामी के आगे टिक नहीं पाए।

अदनान के ट्वीट के जवाब में फवाद उनकी बॉडी शेमिंग पर उतर आए। फवाद ने लिखा, “हमारे अपने लाहौरी अदनान ऐसे लग रहे हैं जैसे गुब्बारे से हवा निकाल दी गई हो। आप जल्दी ठीक हो जाइए।”

इसके जवाब में अदनान ने फवाद को ठीक-ठाक ज्ञान का पाठ पढ़ा दिया। फवाद को जवाब देते हुए अदनान ने लिखा, “तुम्हें तो इतना भी नहीं पता मूर्ख इंसान, मेरी जड़ें पेशावर से हैं, लाहौर से नहीं। ये सोचकर कि तुम सच में सूचना मंत्रालय के मंत्री थे और जानकारी तुम्हारे पास किसी भी बात की नहीं, मेरी सच में हवा निकल गई। तुम तो गुब्बारे जैसे फूले हुए हो न? और तुम विज्ञान और प्रौद्योगिकी के मंत्री थे- क्या बेहूदगी है, साइंस के मंत्री। अब मुझे पता चला कि तुम्हारे नाम के आगे CH क्यों लिखा है और इसका असल अर्थ क्या है।”

अदनान सामी ने 2016 में भारतीय नागरिकता ले ली है। उनका परिवार मुंबई में रहता है। हालाँकि, कई लोग इस बात से खबर या बेखबर उनका मजाक बनाने से बाज नहीं आते। अदनान सामी को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है।

‘अल-मतीन मस्जिद का विस्तार होकर रहेगा’: ब्रह्मपुरी में अवैध निर्माण में जुटी मुस्लिम जमात को दिल्ली पुलिस-MCD का भी डर नहीं, ‘मकान बिकाऊ’ के पोस्टर लगाने को मजबूर हिन्दू

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सीलमपुर है। इसी में है ब्रह्मपुरी नाम इलाका, जहाँ की गली नंबर 12 में बनी अल-मतीन मस्जिद लंबे समय से विवादों में है। उसके विस्तार का विरोध हिंदू कर रहे हैं। स्थानीय हिंदू समुदाय का आरोप है कि मस्जिद को धोखे से बनाया गया था और अब इसे और बड़ा करने की कोशिश एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। मस्जिद का नया गेट गली नंबर-12 में खोलने की योजना है, जो ठीक सामने 1984 से बने शिव मंदिर के पास पड़ता है।

इस मुद्दे ने हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच तनाव को बढ़ा दिया है। ऑपइंडिया ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट्स में बताया था कि किस तरह से अल-मतीन मस्जिद के नाम पर स्थानीय हिंदू लोगों में डर फैलाया जा रहा है। इस मस्जिद के विस्तार में किस तरह से काले धन और विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल हो रहा है, उसका भी खुलासा ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में किया था।

इसी बीच, इस मस्जिद के विस्तार का काम फिर से शुरू करने की कोशिश की गई। मस्जिद के निर्माण कार्य के फिर से शुरू होने पर स्थानीय लोग खड़े हो गए। उनका आरोप है कि जब उन्होंने पुलिस प्रशासन से मस्जिद के निर्माण कार्य को रोकने की माँग की, तो एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा ने उनसे कहा कि मस्जिद से जुड़े लोगों ने 2 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, ऐसे में निर्माण कार्य चलेगा। पुलिस ने साफ तौर पर कहा कि निर्माण कार्य को रोका नहीं जाएगा।

MCD और पुलिस पर प्रशासन की मिलीभगत के आरोप

मस्जिद के विस्तार का मामला 2023 से चल रहा है। पहले जब काम शुरू हुआ तो लोगों ने पुलिस में शिकायत की और निर्माण रुक गया। फिर मस्जिद कमेटी ने 23 नवंबर 2024 को MCD से परमिशन ली। फरवरी 2025 में काम दोबारा शुरू हुआ, लेकिन 13 फरवरी 2025 को उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस को शिकायत मिली। जाँच में पता चला कि मस्जिद का नक्शा गलत तरीके से पास कराया गया था। MCD ने काम रोक दिया और मस्जिद कमेटी को नोटिस भेजा।

हालाँकि, ऑपइंडिया की 25 अप्रैल 2025 की फॉलोअप रिपोर्ट में स्थिति और गंभीर दिखी। स्थानीय लोग गुस्से में थे क्योंकि रोक के बावजूद मस्जिद का निर्माण कार्य चल रहा था। एक बोर्ड लगा था, जिसमें लिखा था, “समिति की ओर से निजी लिया गया कोई दस जगह पर कोई मस्जिद नहीं बनवाई जाएगी। पर कोई आपस में हिंदू-मुस्लिम तकी अड़चनें नहीं रहे!” लेकिन इसके बावजूद लोग काम करते पाए गए। हिंदुओं ने हंगामा किया, तो पुलिस हिंदू पक्ष के ही दो लोगों को पकड़कर थाने ले गई, हालाँकि अगले दिन उन्हें छोड़ दिया गया।

मस्जिद निर्माण न होने का बोर्ड, फिर भी चल रहा था निर्माण कार्य

पुलिस और प्रशासन के इस रवैये के विरोध में गली नंबर-13 में लोगों ने अपने घरों के बाहर पोस्टर लगा दिए, जिनमें लिखा था, “मकान नंबर एल-11, गली नंबर 12 ब्रह्मपुरी पर पुलिस के बड़े अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध मस्जिद का निर्माण करवाया जा रहा है। 112 पर कॉल पर पुलिस उल्टा हमें बंद कर रही है। अब हम अपने घरों के सामने बैठकर धरना दे रहे हैं। पुलिस हमें गोलियाँ मार दे या झूठे केस लगाकर बंद कर दे। पुलिस, MCD हमारे मकानों को बिकवाने पर मजबूर कर रही है।”

हिंदुओं का आरोप है कि प्रशासन मस्जिद कमेटी के साथ मिला हुआ है। गौतम कहते हैं, “MCD ने पहले गलत नक्शा पास किया, अब बोर्ड लगाकर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। यह सब ऊपरी दबाव में हो रहा है।”

मुस्लिमों के भरोसे पर खरा उतर रहा प्रशासन

मस्जिद कमेटी और स्थानीय मुस्लिमों ने पहले भी भरोसा जताया था कि वे अपना काम (मस्जिद निर्माण का काम) पूरा कर लेंगे। ऑपइंडिया की 7 मार्च 2025 की रिपोर्ट में मस्जिद के डिप्टी ईमाम सद्दाम हुसैन ने कहा था, “विवाद ठंडा पड़ने के बाद प्रशासन खुद मस्जिद बनाने में मदद करेगा।” इस बात की पुष्टि स्थानीय लोगों से बातचीत में भी हुई थी। 25 अप्रैल 2025 को जब ऑपइंडिया दोबारा ब्रह्मपुरी पहुँचा, तो हिंदुओं का गुस्सा साफ दिखा क्योंकि प्रशासन वाकई निर्माण में सहयोग दे रहा था।

वैसे, मस्जिद के नायब इमाम सद्दाम हुसैन ने कहा भी था, “हमें भरोसा है कि मामला ठंडा होने के बाद निर्माण कार्य जरूर पूरा होगा। अभी पुलिस और MCD का दबाव है, लेकिन ये ज्यादा दिन नहीं चलेगा।” कुछ मुस्लिमों का कहना है कि वे मौके का इंतजार कर रहे हैं। एक दुकानदार ने कहा, “अभी सब चुप हैं, लेकिन मौका मिलते ही काम शुरू हो जाएगा। हमें अपनी मस्जिद चाहिए।” हिंदुओं का ये डर सही साबित हो रहा है, क्योंकि मस्जिद का काम चुपके से बढ़ाया जा रहा है। इसका विरोध हिंदू कर रहे हैं।

विवाद की जड़ को समझें

ब्रह्मपुरी की अल-मतीन मस्जिद की कहानी 2013 से शुरू होती है। स्थानीय निवासी पंडित शंकर लाल गौतम बताते हैं, “2013 में गली नंबर-13 में कुछ मुस्लिम लोगों ने एक फ्लैट खरीदा था। शुरू में वहाँ नमाज पढ़ी जाने लगी, जिससे किसी को आपत्ति नहीं थी। लेकिन धीरे-धीरे उस फ्लैट को मस्जिद में बदल दिया गया।” गौतम के अनुसार, यह एक आम घर था, लेकिन बाद में इसे चार मंजिला मस्जिद बना दिया गया। उनका मानना है कि यह सब सोच-समझकर किया गया ताकि इलाके में मुस्लिमों की पकड़ मजबूत हो। शुरू में किसी को शक नहीं हुआ, लेकिन 2020 के दिल्ली दंगों के बाद लोगों की आँखें खुल गईं।

अल-मतीन मस्जिद से चली थी हिंदुओं पर गोलियाँ

साल 2020 के फरवरी महीने में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे ब्रह्मपुरी के लोगों के लिए आज भी एक डरावना सपना हैं। सीलमपुर, जाफराबाद और ब्रह्मपुरी जैसे इलाकों में हिंसा ने 53 लोगों की जान ले ली और सैकड़ों घायल हुए। इस दौरान अल-मतीन मस्जिद का नाम खास तौर पर सामने आया। गौतम बताते हैं, “25 फरवरी को मस्जिद से गोलियाँ चली थीं। वहाँ अचानक हजारों लोग जमा हो गए। झूठ फैलाया गया कि मस्जिद में आग लगाई गई। इसके बाद गली नंबर-13 में गोलीबारी हुई, जिसमें तीन हिंदू लड़के घायल हुए।” इस घटना के बाद हिंदुओं में डर बैठ गया। कई परिवार इलाका छोड़कर चले गए और अपने घर बेच दिए।

मस्जिद के विस्तार को साजिश मानते हैं हिंदू

साल 2020 के बाद मस्जिद को बड़ा करने की कोशिश शुरू हुई। 2023 में मस्जिद कमेटी ने गली नंबर-12 में इसके बगल का एक प्लॉट खरीदा, जो पहले एक हिंदू परिवार का था। गौतम कहते हैं, “पहले उस घर को खरीदा, फिर तोड़ दिया और वहाँ मस्जिद का हिस्सा बनाने लगे। यह सब बहुत सोच-समझकर हुआ।” योजना थी कि मस्जिद का नया गेट गली नंबर-12 में खोला जाए, जो ठीक सामने बने शिव मंदिर के पास पड़ता है। इस मंदिर में 1984 से पूजा होती है, हर सोमवार को भक्त जमा होते हैं, और होली पर होलिका दहन होता है। हिंदुओं को डर है कि मस्जिद का गेट सामने खुलने से रोज झगड़ा होगा और 2020 जैसी घटना दोहराई जा सकती है।

ब्रह्मपुरी की गली नंबर 13 में यहीं पर खोला जाना है मस्जिद का नया गेट

मस्जिद के नायब ईमाम सद्दाम हुसैन का कहना है, “हमारी आबादी बढ़ रही है। मस्जिद छोटी पड़ गई थी। इसमें गलत क्या है? हम शांति से रहना चाहते हैं।” लेकिन हिंदुओं को यह बात साजिश लगती है। गली नंबर-12 में रहने वाले सोनू (नाम बदला हुआ) कहते हैं, “अगर मस्जिद दो गुनी बड़ी हो गई तो सोचो, कितने लोग यहाँ जमा होंगे। यह हमारे लिए खतरे की घंटी है।”

‘मकान बिकाऊ’ के पोस्टर और डेमोग्राफी बदलाव का डर

मस्जिद के विस्तार के विरोध में गली नंबर-12 के करीब 60 हिंदू परिवारों में से 25-30 ने अपने घरों पर ‘मकान बिकाऊ’ के पोस्टर लगा दिए। स्थानीय निवासी दिनेश शर्मा (नाम बदला हुआ) बताते हैं, “2020 के बाद यहाँ का माहौल बदल गया। दंगों में हमने अपने लोगों को खोया, घर जले, और डर ऐसा बैठा कि कई लोग यहाँ से चले गए। अब मस्जिद का विस्तार देखकर लगता है कि फिर वही सब होगा।” हिंदुओं का आरोप है कि यह इलाके की डेमोग्राफी बदलने की साजिश है। उनका कहना है कि पहले मस्जिद बनती है, फिर माहौल बदलता है, और हिंदू पलायन को मजबूर हो जाते हैं।

मुस्लिम पक्ष का कहना है कि लोग अपनी मर्जी से घर बेच रहे हैं। सद्दाम हुसैन कहते हैं, “हम अच्छे पैसे दे रहे हैं, इसलिए लोग बेच रहे हैं। कोई जबरदस्ती नहीं है।” लेकिन हिंदुओं का मानना है कि यह डर की वजह से हो रहा है। एक बुजुर्ग निवासी कहते हैं, “पहले यहाँ हिंदू-मुस्लिम साथ रहते थे। दंगों के बाद सब बदल गया। अब मस्जिद का विस्तार देखकर लगता है कि हमें यहाँ से भगाने की तैयारी है।”

कम्युनिटी सेंटर का झूठ फैला रही कमेटी, स्थानीय लोग बता रहे सच

बहरहाल, मस्जिद कमेटी अब दावा कर रही है कि गली नंबर-12 में मस्जिद नहीं, बल्कि कम्युनिटी सेंटर बनाया जा रहा था। सद्दाम हुसैन कहते हैं, “हम बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य के लिए जगह बनाना चाहते थे। यह कोई साजिश नहीं है।” लेकिन हिंदुओं को यह बात हजम नहीं हो रही। गौतम कहते हैं, “यह सब बहाना है। पहले मस्जिद बनाने की बात थी, अब जब विरोध हुआ तो कहानी बदल दी।” कुछ स्थानीय मुस्लिम भी मानते हैं कि असल में मस्जिद ही बन रही थी। एक शख्स ने कहा, “कम्युनिटी सेंटर की बात बस लोगों को चुप कराने के लिए है।”

ब्रह्मपुरी का यह विवाद सिर्फ मस्जिद निर्माण तक सीमित नहीं है। यह 2020 के दंगों का जख्म, डेमोग्राफी बदलाव का डर, धार्मिक त्योहारों का टकराव और प्रशासन पर अविश्वास की कहानी है।

अल-मतीन मस्जिद प्रकरण से जुड़ी अन्य ग्राउंड रिपोर्ट्स पढ़ें-

मस्जिद को बढ़ाना, शिव मंदिर के सामने उसका गेट खोलना… दिल्ली सीलमपुर (ब्रह्मपुरी) की इसी अल-मतीन मस्जिद से 2020 हिंदू-विरोधी दंगों में चली थी गोलियाँ: समझिए हिंदू क्यों लगा रहे ‘मकान बिकाऊ’ के पोस्टर

ब्रह्मपुरी की अल मतीन मस्जिद भी धोखे से बनी, अब मंदिर के सामने गेट खोलने की कोशिश: MCD का बोर्ड लगा मामले को दबाने की कोशिश, आखिर क्यों मस्जिद को बड़ा करने की जिद?

सीलमपुर के अल-मतीन मस्जिद मामले से समझिए, कैसे मुस्लिम आपके इलाके में घुसते हैं… खुद को फैलाते हैं और एक दिन आपको लगाना पड़ता है ‘मकान बिकाऊ’ का पोस्टर

अल-मतीन मस्जिद के विस्तार के लिए कहाँ से आ रहा पैसा? ₹40 लाख की जमीन दान करने वाला लगाता है जूते-चप्पल की दुकान: क्या विदेशी फंडिंग से बन रही मस्जिद?

गाँजा पिलाकर, पोर्न दिखाकर, गले पर छुरी रख हिंदू लड़कियों का बलात्कार: वीडियो भी सर्कुलेट करता था भोपाल का ‘मुस्लिम गैंग’

मध्य प्रदेश के भोपाल में हिंदू लड़कियों को फँसाकर रेप करने और ब्लैकमेल करने के मामले में नए खुलासे हुए हैं। पुलिस को पता चला है कि मुस्लिम गैंग के सदस्यों ने पीड़िताओं का रेप करने के लिए उन्हें न केवल गांजा पिलाया, बल्कि गले पर छुरी रखकर, पोर्न दिखाकर उनका बलात्कार किया।

केस का मुख्य आरोपित फरहान खान है। पुलिस उसके साथ मोहम्मद साद, अरबाज, अयान, शाहरुख, जावेद उर्फ भय्यू, जोया, फैजान को गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा केस में मोहम्मद अली, अबरार खान, हामिद, अरशद और सिराज समेत कुछ अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी तलाश में पुलिस बंगाल तक दबिश दे रही है।

पुलिस को आरोपितों के फोन की जाँच में और पीड़िताओं का नाम भी पता चला है। इनमें दो तो सगी बहनें हैं। अब पीड़िताओं के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। छानबीन में पता चला है कि फरहान और उसके साथी अश्लील वीडियोज बनाने के बाद एक दूसरे को भेजते थे। फिर पीड़िताओं से अन्य लड़कियों से मिलवाने के लिए कहते थे। इनके मोबाइल से लड़कियों को भेजे गए धमकियों के सबूत भी मिले हैं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता ने बताया कि फरहान से उसकी मुलाकात कॉलेज में सहेली के जरिए हुई थी। इसके बाद फरहान एक दिन उसे हामिद के घर लेकर गया और वहाँ रेप करके वीडियो बना ली। उसने विरोध किया तो उसे धमकाकर नॉनवेज तक खिलाया गया। बाद में फरहान ने पीड़िता की छोटी बहन को निशाना बनाया। उसकी जान-पहचान अली से करवाई। अली भी पीड़िता की छोटी बहन को घुमाने के लिहाज से ले गया और बाद में उसके संबंध बनाकर वीडियो बना ली।

पीड़िता ने यह भी बताया कि फरहान उससे अन्य सहेलियों को मिलवाने के लिए डिमांड करता था। न बात सुनने पर ब्लैकमेल करता था। एक बार डर से पीड़िता अपनी सहेली को लाई तो उसकी मुलाकात साहिल से करवाई गई। साहिल ने भी लड़की के साथ वही किया, जो फरहान ने उसके साथ किया था।

पीड़िता के अनुसार, उसे जबरन पोर्न दिखवाया जाता था। बात न मानने पर कार में पीटा जाता था। गले पर छुरी रखकर धमकी दी जाती थी। धर्म बदलकर शादी करने के लिए दबाव डाला जाता था।

इसी प्रकार एक पीड़िता ने शाहरुख, अयान, जोया का नाम अपने बयान में लिया। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता ने बताया कि भोपाल के बैरागढ़ के शाहरुख ने उसे अपने प्रेमजाल में फांसा। उसके बाद उससे दुष्कर्म किया। कुछ समय बाद उसकी एक नाबालिग दोस्त के साथ शाहरुख ने अपने दोस्त अयान के साथ रिश्ता बनवाने का दबाव बनाया। अयान ने दोस्ती होने के बाद नाबालिग के साथ रेप किया। इसका वीडियो भी बनाया।

इसके बाद वीडियो वायरल करने की धमकी देकर शाहरुख ने पीड़ित को उसके दूसरे दोस्त अरबाज के पास जाने को कहा। अरबाज ने भी उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि शाहरुख उसे बाणगंगा में रहने वाले जोया और उसके पति फैजान के किराए के कमरे पर लेकर जाता था। फैजान के साथ जावेद नाम का भी एक शख्स वहाँ होता था।

फरहान की शिकार हुई पीड़िता बताती है कि भोपाल छोड़ने पर भी उसके साथ ब्लैकमेलिंग का सिलसिला खत्म नहीं हुआ। अंत में तंग आकर उसने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई। इसी के बाद पुलिस ने और पीड़िताओं को खोजा और कुल छह पीड़िताओं की डिटेल सामने आई। पुलिस ने सबकी काउंसलिंग की और इन सबकी शिकायत पर शहर के पाँच थानों में 12 लोगों पर नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। अब पुलिस एसआईटी गठित करके हर एंगल से जाँच कर रही है।

मीडिया को भोपाल के पुलिस आयुक्त हरिनारायणचारी मिश्र ने बताया ये एक सोचा- समझा पैटर्न है। मामले की गंभीरता को देखकर अन्य लड़कियों से भी संपर्क किया जा रहा है। पकड़े गए आरोपितों के मोबाइल से लड़कियों के अश्लील वीडियो भी मिले हैं। अन्य फरार आऱोपितों को भी पकड़ने की कोशिश जारी है।

गौरतलब है कि इससे पहले ऐसे मामले अजमेर और ब्यावर से सामने आ चुके थे। हाल में इस मामले का खुलासा होने के बाद भोपाल भी सुर्खियों में आया। पीड़िताएँ निजी कॉलेज की छात्राएँ हैं। वहीं फरहान व कुछ आरोपित उसी कॉलेज में MBA के छात्र हैं।

20 शवों की पतलून उतरी हुई, दिखाई दे रहे थे अंडरवियर और प्राइवेट पार्ट्स: पहलगाम के चश्मदीदों ने जो बताया उसपर जाँच टीम की भी मुहर, आतंकियों ने लिया था ‘ट्रिपल टेस्ट’

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 26 निर्दोषों की जान ले ली। इस घटना में जीवित बचे कई पीड़ितों ने बताया कि आतंकी पुरुषों की पैंट खुलवाकर चेक कर रहे थे कि उनका खतना हुआ है या नहीं। जिनका खतना नहीं हुआ था, उनकी हत्या कर दी जा रही थी। अब शुरुआती जाँच में भी इसकी पुष्टि हो गई है। जहाँ कट्टर मुस्लिम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने भी स्वीकारा था कि मजहब पूछकर लोगों को मारा गया, वहीं सोशल मीडिया पर कई प्रपंची दावा का रहे थे कि मृतकों में एक मुस्लिम है, इसीलिए सारे पीड़ित व मृतकों के परिजन झूठ बोल रहे हैं।

26 शवों की प्रारंभिक जाँच करने वाली टीम ने पाया है कि इनमें से 20 पुरुषों के पैंट की चेन खुली हुई थी। साथ ही उनके पैंट आधे उतार लिए गए थे। इससे इसकी पुष्टि हो जाती है कि आतंकियों का इरादा हिन्दुओं को चिह्नित कर उन्हें निशाना बनाए जाने का था। भारतीय सेना, जम्मू कश्मीर पुलिस और प्रशासन की टीम ने पाया है कि पुरुषों के पैंट कुछ इस तरह खोले गए थे कि किसी का अंडरवियर तो किसी का प्राइवेट पार्ट खुले में दिखाई दे रहा था। मृतकों के परिजन उन्हें इस अवस्था में देखकर सदमे में थे।

प्रशासन के कर्मचारियों ने भी इन शवों को उसी अवस्था में जाँच के लिए पहुँचाया, जैसे वो उस समय थे। इस दौरान उन्हें चादरों से ढँक दिया गया था। FIR में डालने के लिए उन शवों के अंतिम विवरण दर्ज किए गए। एक तरह से इन आतंकियों ने मध्यकाल के बर्बर तौर-तरीकों को आजमाया, हत्या से पहले धर्म की पुष्टि के लिए। कई चश्मदीदों ने भी इसकी पुष्टि की है। साथ ही लोगों से उनका आईडी कार्ड दिखाने को भी कहा गया था, ताकि नाम देखकर पता लगाया जा सके कि वो हिन्दू हैं या नहीं।

इतना ही नहीं, लोगों को कलमा पढ़ने के लिए भी कहा गया। जो कलमा नहीं पढ़ पाए, उन्हें मार डाला गया। यानी, हिन्दू पहचान की पुष्टि के लिए 3 ‘टेस्ट’ लिए गए – खतना चेक किया, आईडी कार्ड देखा और कलमा पढ़ने के लिए कहा। घाटी में आतंकियों से जुड़े 70 लोगों को गिरफ़्तार कर पहलगाम आतंकी हमले के संबंध में पूछताछ की जा रही है। 1500 को हिरासत में लिया गया था, लेकिन अब उनमें से 70 सबसे बड़े संदिग्धों से पूछताछ चल रही है। FIR में हर एक डिटेल दर्ज की गई है, ताकि आतंकियों को सज़ा मिल सके।

‘पाकिस्तान समर्थकों को असम बिलकुल नहीं करेगा बर्दाश्त’ : पहलगाम आतंकी हमले के बाद जहर उगलने वाले 8 गिरफ्तार, विपक्षी MLA अमीनुल इस्लाम को भी पुलिस ने उठाया

पहलगाम आतंकी हमला 22 अप्रैल को हुआ था। इसमें 28 पर्यटकों की मौत हो गई थी। मृतकों में देश भर के सैलानियों के साथ दो विदेशी पर्यटक भी थे। इस हमले पर दुनिया भर के लोग निंदा जता रहे हैं तो वहीं असम के विपक्षी विधायक अमीनुल इस्लाम ने इसे ‘सरकार की साजिश’ बता दी। हालाँकि इसके बाद उन्हें असम पुलिस ने कानून का पाठ पढ़ाया और गिरफ्तार कर लिया। उनके साथ 8 अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि उन सभी पर कार्रवाई की जाएगी जो आतंकी हमले के बाद किसी भी तरह से पाकिस्तान का समर्थन कर रहे हैं। इस तरह के लोगों की गिरफ्तारी आगे भी चलती रहेगी। उन्होंने एक्स पर लिखा, “असम ऐसे किसी भी व्यक्ति को बर्दाश्त नहीं करेगा, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पाकिस्तान का समर्थन करता हो।”

23 अप्रैल 2025 को विपक्षी पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के विधायक अमीनुल इस्लाम ने दावा किया कि 14 फरवरी 2019 में पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल पर हुआ हमला और पहलगाम का आतंकी हमला सरकार की साजिश थी। नागाँव के निवासी अमीनुल इस्लाम को इसके बाद असम पुलिस ने भड़काऊ टिप्पणी के लिए गिरफ्तार कर लिया गया।

विधायक के अलावा सात अन्य लोगों को भी सोशल मीडिया पर हमले के समर्थन में बात करने वालों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से एक असम विश्वविद्यालय का छात्र भी है। उसने सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक और भड़काऊ पोस्ट करने के साथ ABVP की शिकायत के सदस्यों को भी अपना निशाना बनाया था। ABVP की शिकायत के बाद उसे गिरफ्तार किया गया है। अन्य गिरफ्तार लोगों में दो सिलचर के कछार और हाइलाकांडी, मोरीगाँव, नागाँव और शिवसागर जिले से एक-एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है।

गुजरात में घुसपैठियों के खिलाफ अबतक की सबसे बड़ी कार्रवाई, 500+ हिरासत में: पुलिस ने निकाली परेड, पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुई धर-पकड़

गुजरात में घुसपैठियों के ख़िलाफ़ अबतक की सबसे बड़ी कार्रवाई की गई है। गुजरात पुलिस ने विभिन्न शहरों से अबतक 500 से भी अधिक घुसपैठियों को हिरासत में लिया है। बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले में 28 निर्दोषों की जान चली गई थी, जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात करके उनके यहाँ रह रहे पाकिस्तानियों वापस भेजने के लिए कहा था। भारत में रह रहे सभी पाकिस्तानियों का वीजा रद्द कर दिया गया है। गुजरात के अहमदाबाद और सूरत जैसे शहरों से 500 से भी अधिक घुसपैठियों को हिरासत में लिया गया है।

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के DCP सजीत राजियान ने जानकारी दी कि अकेले अहमदाबाद में अभियान चलाकर 400 से अधिक संदिग्ध प्रवासियों को हिरासत में लिया गया है। उधर सूरत में 100 से भी अधिक अवैध प्रवासी पकड़े गए हैं। गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने जानकारी दी है कि सिन सभी को डिपोर्ट किया जाएगा। इससे पहले 2 FIR करके 127 बांग्लादेशी घुसपैठियों को हिरासत में लिया गया था। इनमें से 70 को डिपोर्ट किया जा चुका है, बाकियों को भी वापस उनके मुल्क़ भेजा जा रहा है। इधर हिरासत में लिए गए 500+ प्रवासियों से पूछताछ की जा रही है।

ये पता लगाया जा रहा है कि वो भारत में कैसे घुसे, उन्होंने फ़र्ज़ी दस्तावेज कैसे बनवाए और वो किन-किन लोगों से संपर्क में थे। इन सभी के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं। इनमें से कइयों के पास फ़र्ज़ी आधार कार्ड तक मिले हैं। शनिवार (26 अप्रैल, 2025) को तारीख़ बदलते ही रात के 12 बजे के बाद सघन छापेमारी शुरू कर दी गई। सुबह 6 बजे तक ये अभियान चला। पुलिस ने इन घुसपैठियों की परेड निकाली और इन सबको लेकर हेडक़्वार्टर पहुँची। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएँ भी शामिल हैं। धर-पकड़ का वीडियो भी सामने आया है।

गुजरात में घुसपैठियों की धर-पकड़ का ये अभियान अब भी जारी है। एक फुटबॉल ग्राउंड में सभी घुसपैठियों को जमा किया गया, क्योंकि उनकी संख्या अधिक थी। अधिकतर घुसपैठिए अहमदाबाद के चंदोला क्षेत्र से पकड़े गए। वहीं सूरत के उन पटिया व भिंडी बाजार क्षेत्र से बड़ी संख्या में ये घुसपैठिए पकड़े गए। इसके बाद अन्य राज्यों में भी इस तरह का अभियान चलाने की माँग की जा रही है। बता दें कि भारत में बड़ी संख्या में घुसपैठिए हैं जो अक्सर कई आपराधिक कृत्यों में भी लिप्त पाए जाते हैं।

लगातार दूसरी रात LOC के पार से गोलीबारी, पाकिस्तानी राजनयिक ने किया भारतीयों का गला रेतने का इशारा: इधर कश्मीर में 5 आतंकियों के घर मिट्टी में मिलाए गए

पाकिस्तान पोषित आतंकियों ने मंगलवार (22 अप्रैल, 2025) पहलगाम के बैसरन घाटी में हमला करके 28 निर्दोषों की जान ले ली। इसके बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया, अटारी-वाघा बॉर्डर बंद कर दिया, पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा सेवा स्थगित कर दी और पाकिस्तानी रक्षा विभाग के अधिकारियों को भारत छोड़ने के लिए कह दिया। इधर पाकिस्तान की तरफ से लगातार दूसरी रात LOC (लाइन ऑफ कंट्रोल) के उस पार से गोलीबारी की गई।

LOC के पास एक नहीं बल्कि कई जगहों पर पाकिस्तानी फ़ौज ने गोलीबारी की, जिसका भारतीय सेना ने भी छोटे हथियारों से मुँहतोड़ जवाब दिया। हालाँकि, इसमें किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। बताया जाता है कि भारत में पाकिस्तान को सबक सिखाने की माँग के बीच पाकिस्तानी फ़ौज ये जाँच रही थी कि भारतीय सेना कितनी सतर्क है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही चेता चुके हैं कि पहलगाम हमला और इसकी साजिश रचने वालों को कल्पना से परे सबन सिखाया जाएगा। इस हमले की जिम्मेदारी LeT (लश्कर-ए-तैय्यबा) से सम्बद्ध आतंकी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ़ोर्स’ (TRF) ने ली है।

भारत ने अपने घर से कार्रवाई की शुरुआत भी कर दी है। शुक्रवार (25 अप्रैल, 2025) को जम्मू कश्मीर में 5 आतंकियों के घर ध्वस्त किए गए। शोपियाँ, कुलगाम और पुलवामा जिलों में ये कार्रवाई की गई।शोपियाँ के चोटीपोरा में LeT कमांडर शाहिद अहमद कुट्टे के घर को मलबे में तब्दील कर दिया गया। वो पिछले 3-4 वर्षों से आतंकी गतिविधियों में सक्रिय है। पुलवामा ने मुर्रन में 2018 में पाकिस्तान से प्रशिक्षण लेकर हाल ही में कश्मीर वापस लौटे आतंकी अहसान-उल-हक़ का घर ध्वस्त किया गया।

2023 से आतंकी गतिविधियों में सक्रिय एहसान अहमद शेख की दोमंजिला इमारत को भी मिट्टी में मिला दिया गया। ये कार्रवाई पुलवामा के काचीपोरा में की गई। इससे पहले गुरुवार को आदिल हुसैन ठोकर और आसिफ शेख नामक आतंकियों के घर ज़मींदोज़ किए गए थे। पूरे कश्मीर घाटी में आतंकियों के विरुद्ध सघन अभियान चलाया जा रहा है। उधर नई दिल्ली में उच्च-स्तरीय बैठकों का दौर जारी है। याद दिला दें कि ख़ुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह घटनास्थल पर पहुँचे थे और पीड़ित परिजनों से मुलाक़ात की थी।

दुनिया भर में भारतीय समाज पहलगाम आतंकी हमले के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रहा है। इसी क्रम में UK में भी पाकिस्तानी उच्चायोग के सामने भारतीय समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पाकिस्तानी राजनयिक तैमूर राहत भीतर से लोगों को उकसाता रहा। उसने स्कवाड्रन लीडर अभिनंदन की तस्वीर पर ‘Chai Is Fantastic’ लिखवाकर उसे लहराया। बता दें कि 2019 में पुलवामा हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई में अभिनंदन (तब विंग कमांडर) को पाकिस्तान ने बंधक बना लिया था।

हालाँकि, भारत की चेतावनी के बाद पाकिस्तान को अभिनंदन को छोड़ना पड़ा था। पाकिस्तानियों ने इस दौरान अभिनंदन का चाय पीते हुए वीडियो शेयर करके भारत का मजाक बनाया था। पाकिस्तानी राजनयिक ने लंदन में इस दौरान भारतीयों की तरफ इशारा करते हुए उनका गला रेतने का भी इशारा किया। इसके बाद इस राजयनयिक को वापस भेजने की माँग हो रही है। पाकिस्तान की तरफ से लगातार भारत को उकसाने वाली गतिविधियाँ की जा रही हैं।

जेल में ‘लेडी डॉन’ जिकरा, फिर भी खौफ में कुणाल का परिवार: पहले भी हो चुकी है 6 हिंदुओं की हत्या, सीलमपुर से पलायन को मजबूर लोग माँग रहे ‘योगी मॉडल’

दिल्ली का सीलमपुर इलाका इन दिनों दहशत के साये में है। यहाँ 17 साल के हिंदू नौजवान कुणाल की निर्मम हत्या ने न सिर्फ एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि पूरे इलाके में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों की भयावह तस्वीर को सामने ला दिया। स्थानीय लोगों का दावा है कि सीलमपुर में हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है, जिसके चलते कई परिवार पलायन को मजबूर हो रहे हैं। कुणाल के पिता राजवीर सिंह ने ऑपइंडिया से बातचीत में इंसाफ की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि उनके बेटे को सुनियोजित तरीके से मारा गया, और इस हत्याकांड के पीछे इलाके की कुख्यात ‘लेडी डॉन’ जिकरा और उसका गैंग है।

कुणाल को पहले गले पर चाकू से मारा, फिर पेट में किए अनगिनत वार

बीते गुरुवार (17 अप्रैल 2025) की शाम करीब 7:38 बजे सीलमपुर के जे-ब्लॉक में कुणाल पर चाकुओं से हमला किया गया। वह घर से दूध और समोसे लाने निकला था, लेकिन उसे क्या पता था कि यह उसकी जिंदगी का आखिरी सफर होगा।

कुणाल के लिए न्याय की माँग वाले पोस्टर

कुणाल के पिता राजवीर सिंह ने ऑपइंडिया को बताया कि कुछ बदमाशों ने उनके बेटे को बुलाकर गली के बाहर ले गए। वहाँ जिकरा और उसके साथियों ने उस पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला किया। पहला वार कुणाल के गले पर हुआ। वह जैसे-तैसे भागकर स्थानीय क्लीनिक पहुँचा, जहाँ उसकी पट्टी की गई। लेकिन जिकरा का गैंग कहाँ रुकने वाला था? उन्होंने कुणाल को फिर से घेर लिया और उसके पेट पर अनगिनत वार किए। जब तक वह जेपीसी अस्पताल पहुँचा, डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मृतक कुणाल की माँ और पिता

कुणाल की माँ इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं। वह बार-बार बेहोश हो रही हैं और राजवीर उन्हें संभाल रहे हैं। रोते हुए राजवीर ने कहा, “मेरा बेटा तो दूध लेने गया था। उसने किसी का क्या बिगाड़ा था? जिकरा और उसके गुंडों ने मेरे बच्चे को मार डाला। हमें इंसाफ चाहिए।”

कौन है जिकरा, जिसके नाम से काँपता है सीलमपुर?

इस हत्याकांड का आरोप जिस जिकरा पर है, उसे सीलमपुर के इलाके में ‘लेडी डॉन’ के नाम से जाना जाता है। जिकरा 27 साल की है, पूरी तरह से एक दबंग महिला है। वह सीलमपुर की गलियों में 8-10 लोगों के गैंग के साथ घूमती है और खास तौर पर हिंदुओं को निशाना बनाती है। जिकरा का एक बच्चा भी है, लेकिन उसकी गुंडागर्दी की कहानियाँ इलाके में मशहूर हैं। वह हमेशा अपने साथ पिस्तौल रखती थी और सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ उसकी तस्वीरें और वीडियो भी वायरल हैं।

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, जिकरा के खिलाफ पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं। अभी 2-3 महीने पहले ही वह अवैध हथियार बरामदगी के एक मामले में जेल से छूटी थी। सूत्रों के अनुसार, जिकरा जेल में बंद गैंगस्टर हाशिम बाबा की बीवी जोया के साथ रहती थी। जोया के जेल जाने के बाद जिकरा ने अपना खुद का गैंग बनाया, जिसमें कुछ नाबालिग लड़के भी शामिल थे।

लेडी डॉन जिकरा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल

कुणाल की हत्या का कारण जिकरा की पुरानी रंजिश थी। जिकरा का मानना था कि कुणाल उस शख्स ‘लाला’ का दोस्त था, जिसने उसके भाई को कुछ समय पहले पीटा था। हालाँकि, कुणाल नाबालिग होने के कारण उस मामले में बच गया था, लेकिन जिकरा ने उसे जिम्मेदार ठहराया और बदला लेने के लिए उसकी हत्या कर दी।

सीलमपुर में हिंदुओं की दयनीय स्थिति

ऑपइंडिया की टीम ने ग्राउंड रिपोर्ट के लिए सीलमपुर का दौरा किया। कुणाल के घर के पास ही संत रविदास मंदिर है, जहाँ उसका परिवार शरण लिए हुए है। मंदिर के आसपास की गलियों में ‘हिंदू पलायन करने को मजबूर’ और ‘घर बिकाऊ है’ जैसे पोस्टर चिपके हुए हैं। ऑपइंडिया के पास इन पोस्टरों की तस्वीरें भी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि 2008 से 2025 के बीच सीलमपुर में कम से कम 7 हिंदुओं की हत्या मुस्लिमों द्वारा की गई है। इनमें से कई मामले पुरानी रंजिश या सांप्रदायिक तनाव से जुड़े हैं।

कुणाल का घर और जिकरा का घर सिर्फ दो गलियों के फासले पर हैं। ऑपइंडिया की टीम जिकरा के घर भी गई, जो उसकी नानी का बताया जाता है। लेकिन वहाँ ताले और जंजीरें लटक रही थीं। जिकरा और उसका पूरा परिवार फरार है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिकरा का गैंग आए दिन हिंदुओं को धमकाता था। एक व्यक्ति ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “यहाँ हिंदू सुरक्षित नहीं हैं। जिकरा और उसके गुंडे हमें जीने नहीं दे रहे। कोई सिर फोड़ देता है, कोई आँख निकाल देता है।”

जिकरा की नानी का घर, गुस्साए लोगों ने तोड़फोड़ की कोशिश भी की थी

कई लोगों ने जिकरा की नानी के घर के आसपास भी जिकरा का जिक्र करने से मना कर दिया। यहाँ तक कि ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम जब मौके पर पहुँची, तो लोगों ने जिकरा के घर की पहचान तक करने से इनकार कर दिया। जिकरा की नानी का घर जिस गली में है, उसकी शुरुआत में ही एक मस्जिद है और उसमें मदरसा भी चलता है। यहीं से पढ़कर निकले लोग आज जिकरा की ताकत बने हुए हैं। जिकरा के डर की इंतिहाँ तो देखिए, कि उसकी गली में खड़े लोग भी उसका घर बताने से बचते दिखे।

मस्जिद वाली गली में जिकरा की नानी का घर, इसी से 2 गली पीछे ही कुणाल का घर है

पलायन को मजबूर हो रहे हिंदू परिवार, पोस्टर भी लगाया

स्थानीय लोगों से बातचीत में पता चला कि सीलमपुर कभी हिंदू बाहुल्य इलाका हुआ करता था, लेकिन अब यहाँ मुस्लिम आबादी हावी हो रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, जिकरा जैसे दबंगों की गुंडागर्दी से तंग आकर कई हिंदू परिवार अपने घर बेचकर पलायन कर रहे हैं। संत रविदास मंदिर वाली गली में ही कम से कम 3 हिंदू परिवारों ने अपने घर मुस्लिमों को बेच दिए हैं। 50-60 लाख रुपये में मकान खरीदकर मुस्लिम परिवार इलाके की डेमोग्राफी को तेजी से बदल रहे हैं।

‘राम राम’ लिखे इस घर का मालिक अब एक मुस्लिम

स्थानीय लोगों ने विरोध में प्रदर्शन भी किए। ‘हिंदू पलायन करने को मजबूर’ जैसे पोस्टर लगाकर उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर की। एक बुजुर्ग ने ऑपइंडिया को बताया, “हमारे बच्चे यहाँ सुरक्षित नहीं हैं। हर दिन डर में जीते हैं। सरकार और पुलिस कुछ नहीं करती। हम मजबूरन अपने घर बेचकर जा रहे हैं।”

पलायन थामने के लिए योगी मॉडल की माँग करने वाले पोस्टर कई घरों पर लगे

जिकरा पर कार्रवाई पहले ही हो जाती, तो शायद कुणाल जिंदा होता

कुणाल हत्याकांड के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की। 18 अप्रैल को जिकरा को गिरफ्तार किया गया, और 20 अप्रैल तक कुल 9 आरोपितों को हिरासत में लिया गया। इनमें दो महिलाएँ (जिकरा और जाहिदा) और दो नाबालिग शामिल हैं। गिरफ्तार अन्य आरोपितों में साहिल (18), सोहैब (35), नफीस (32), अनीश (19), और विकास (29) शामिल हैं। पुलिस ने दिल्ली-एनसीआर, गाजियाबाद, मेरठ, मुरादाबाद और अमरोहा में छापेमारी कर इन लोगों को पकड़ा।

पुलिस के मुताबिक, कुणाल और साहिल के बीच पुरानी रंजिश थी, जिसके चलते जिकरा, साहिल और दो नाबालिगों ने मिलकर हत्या की साजिश रची। बाकी आरोपितों ने मुख्य आरोपितों को फरार होने और छिपने में मदद की। पुलिस अभी हत्या में इस्तेमाल हथियारों की तलाश कर रही है। ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्रम में ऑपइंडिया की टीम सीलमपुर थाने भी पहुँची। उस समय एसएचओ मौके पर मौजूद नहीं थे। एक सिपाही ने कहा, “अब सबकुछ खत्म हो चुका है, तब आप आए हैं। जिकरा और उसका गैंग जेल भेजा जा चुका है।”

सीलमपुर थाने के गेट की तस्वीर, एसएचओ से नहीं हुई मुलाकात

हालाँकि, स्थानीय लोग पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जिकरा जैसे अपराधी बार-बार जेल से छूटकर और बड़े जुर्म करते हैं। एक व्यक्ति ने गुस्से में कहा, “जिकरा को पहले भी पकड़ा गया था, लेकिन वह फिर छूट गई। अगर पुलिस ने पहले सख्ती की होती, तो शायद हमारा कुणाल आज जिंदा होता।”

सीएम ने दिया बयान, लेकिन कार्रवाई चाहते हैं लोग

कुणाल हत्याकांड के बाद सीलमपुर में कई दिनों तक तनाव रहा। स्थानीय लोगों के विरोध और पलायन की खबरों ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी बयान देने के लिए मजबूर किया। लेकिन हिंदू समुदाय का मानना है कि सरकार और मुख्यधारा की मीडिया इस मुद्दे को दबाने की कोशिश कर रही है। एक बार मामले की कवरेज के बाद मेनस्ट्रीम मीडिया गायब हो चुका है। सरकार और प्रशासन से कोई पहुँचा नहीं। बीजेपी नेता मौके पर पहुँचते हैं और सहायता की बात भी कर रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से कोई खास कदम नहीं उठाया गया। सिवाय 9 आरोपितों को पकड़ने के। सरकार चाहती तो पीड़ित परिवार की आर्थिक मदद भी कर सकती थी।

कुणाल के पिता राजवीर सिंह ने ऑपइंडिया से कहा, “मेरे बेटे को मारने वालों को सजा मिलनी चाहिए। जिकरा और उसके गैंग ने हमारे परिवार को बर्बाद कर दिया। हम चाहते हैं कि सरकार हिंदुओं की सुरक्षा के लिए कुछ करे, ताकि कोई और परिवार हमारी तरह न टूटे।”

न्याय की माँग को लेकर लगे हस्तलिखित पोस्टर

सीलमपुर में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और पलायन की यह घटना सिर्फ एक हत्याकांड की कहानी नहीं है। यह उस डर और असुरक्षा की कहानी है, जो एक समुदाय को अपने ही घरों से बेघर कर रही है। सवाल यह है कि आखिर कब तक हिंदू परिवार इस तरह डर के साये में जीने को मजबूर रहेंगे? और कब तक जिकरा जैसे अपराधी बेखौफ होकर गलियों में गुंडागर्दी करते रहेंगे?

दिल्ली में भाजपा की ‘ट्रिपल इंजन’ की सरकार: MCD में ‘आप’ का किला ध्वस्त, BJP के राजा इकबाल सिंह बने मेयर

दिल्ली नगर निगम (MCD) के मेयर पद के लिए हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार सरदार राजा इकबाल सिंह ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की है। उन्हें कुल 133 वोट मिले, जबकि कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार मनदीप को मात्र 8 वोटों पर संतोष करना पड़ा है। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस चुनाव से खुद को अलग रखा।

बीजेपी ने चुनाव से पहले ही सरदार राजा इकबाल सिंह को मेयर और जय भगवान यादव को डिप्टी मेयर पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था। बता दें कि राजा इकबाल सिंह इस समय नगर निगम में नेता विपक्ष की भूमिका निभा रहे थे।

अकाली राजनीति से बीजेपी

राजा इकबाल सिंह की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत शिरोमणि अकाली दल से हुई थी। उनका पारिवारिक संबंध भी अकाली राजनीति से गहरा रहा है। उनके ससुर जीटीबी नगर से पार्षद रहे हैं, जबकि उनके साले आज भी अकाली दल से जुड़े हुए हैं। खुद राजा इकबाल सिंह भी जीटीबी नगर से पार्षद रह चुके हैं।

सितंबर 2020 तक वे दिल्ली नगर निगम के सिविल लाइंस जोन के प्रमुख थे। इसी दौरान जब केंद्र सरकार के कृषि कानूनों का विरोध हुआ और अकाली दल ने एनडीए से समर्थन वापस लिया, तब पार्टी ने इकबाल सिंह से इस्तीफा देने को कहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इसके नौ महीने बाद बीजेपी ने उन्हें उत्तर दिल्ली नगर निगम का मेयर बना दिया।

जहाँगीरपुरी में कार्रवाई से आए थे सुर्खियों में

हनुमान जयंती के दिन 16 अप्रैल 2020 में दिल्ली के जहाँगीरपुरी इलाके में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद नगर निगम ने अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसमें अधिकांश निर्माण मुस्लिम समुदाय के थे। उस समय उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर राजा इकबाल सिंह ही थे। यह कार्रवाई उन्हें राजनीतिक रूप से चर्चा में ले आई थी।