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‘सेवा ही परमात्मा है’: दूसरी बार डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित हुईं ‘अडानी फाउंडेशन’ की अध्यक्ष प्रीति अडानी, उधर अडानी को निशाना बनाते-बनाते ख़ुद तबाह हो गया हिंडेनबर्ग

फरवरी 2022 में उन्हें फेडरेशन ऑफ इंडियन चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) फिक्की लेडीज ऑर्गनाइजेशन (FLO) अवॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस फॉर सोशल इम्पैक्ट से भी नवाज़ा गया था।

‘अडानी फाउंडेशन’ की अध्यक्ष प्रीति अडानी को दूसरी बार डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया है। उन्हें मंगलवार (6 मई, 2025) को महाराष्ट्र के वर्धा स्थित दत्ता मेघे इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च (डीम्ड यूनिवर्सिटी) की तरफ से डॉक्टर ऑफ साइंस (D.Sc.) ऑनोरिस कॉसा की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।

बताते चलें कि यह फाउंडेशन अडानी समूह की सामाजिक कल्याण और विकास शाखा है। अडानी समूह भारत का सबसे तेज़ी से बढ़ता व्यापार समूह है। यह सम्मान उन्हें DMIHER के माननीय चांसलर दत्ता मेघे द्वारा संस्थान के 16वें दीक्षांत समारोह में दिया गया। इस अवसर पर डॉ अडानी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थीं।

सम्मान स्वीकार करते हुए डॉ प्रीति अडानी ने कहा, “मैं डॉक्टरेट की उपाधि को पाकर गौरवान्वित महसूस कर रही हूँ। यह मेरे उस विश्वास को मजबूत करता है कि ‘सेवा साधना है, सेवा प्रार्थना है और सेवा ही परमात्मा है।’ मैं ऐसे समाधानों और प्रणालियों के विकास के लिए समर्पित हूँ, जो समाज में स्थायी बदलाव लाएँ, जरूरतमंदों को सशक्त बनाएँ, शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएँ बढ़ाएँ और समुदायों को आगे लाएँ।”

याद दिलाते चलें कि इससे पहले फरवरी 2020 में उन्हें अहमदाबाद स्थित गुजरात लॉ सोसाइटी यूनिवर्सिटी द्वारा भी सामाजिक कार्यों में उनके योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया गया था। जनवरी 2019 में डॉ प्रीति अडानी को रोटरी क्लब ऑफ पालनपुर, गुजरात द्वारा बनास रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। फरवरी 2022 में उन्हें फेडरेशन ऑफ इंडियन चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) फिक्की लेडीज ऑर्गनाइजेशन (FLO) अवॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस फॉर सोशल इम्पैक्ट से भी नवाज़ा गया था।

जानकारी के लिए बता दें कि डॉ प्रीति अडानी एक क्वालिफाइड डेंटल सर्जन हैं, लेकिन उन्होंने निजी प्रैक्टिस की जगह जनसेवा का रास्ता चुना। कहा जाता है कि 1996 में स्थापित अडानी फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने भारत में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) की परिभाषा ही बदल दी। उनके नेतृत्व में फाउंडेशन ने 5 मुख्य क्षेत्रों में स्थायी बदलाव लाने का कार्य किया है – शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण, सतत आजीविका, जलवायु संरक्षण और सामुदायिक विकास शामिल है।

अडानी समूह को तबाह करने के लिए ‘हिंडेनबर्ग रिसर्च’ नामक अमेरिका की एक संस्था ने जमकर प्रयास किया था और इसके ख़िलाफ़ रिपोर्ट्स जारी कर-कर के शेयर बाजार से शॉर्ट सेलिंग कर कमाई की थी। हालाँकि, हिंडेनबर्ग ने जब दोबारा रिपोर्ट प्रकाशित किया तो इसका कोई असर नहीं हुआ। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प की जीत के बाद ये संस्था ही बंद हो गई। ‘हिंडेनबर्ग’ के खिलाफ कई देशों में आपराधिक मामले भी चल रहे हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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