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गाय के गोबर से बने पेंट से रंगी जाएँगी यूपी की इमारतें: प्राकृतिक रंगों को बढ़ावा देने के लिए CM योगी का आदेश, भड़के अखिलेश यादव

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार (4 अप्रैल, 2025) को पशुपालन और डेयरी विकास विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान प्रदेश में गौसेवा, डेयरी उद्योग और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।

उन्होंने सरकारी इमारतों पर गोबर आधारित प्राकृतिक पेंट के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही और डेयरी क्षेत्र को तकनीक तथा नवाचार से सशक्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के गौ संरक्षण केंद्रों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ठोस योजनाएँ तैयार करने का निर्देश दिया। हालाँकि, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव इससे भड़क गए और उन्होंने तंज कसते हुए इसे ‘गोबरनामा’ बताया और ‘भाजपा का का नया कारनामा’ करार दिया। जबकि यादव समाज पशुपालक रहा है। इससे पहले अखिलेश यादव ने गोबर से दुर्गन्ध आने की बात कही थी।

उन्होंने मंडल स्तर पर स्वदेशी गायों की नस्लों के लिए प्रतियोगिताएँ आयोजित करने और उत्कृष्ट गौ आश्रय स्थलों को सम्मानित करने का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही गाय आधारित उत्पादों का निर्माण करने वाले संगठनों के लिए नवाचार और उत्कृष्टता को बढ़ावा देने हेतु प्रतियोगिताएँ आयोजित करने का सुझाव भी दिया।

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि अब तक 40,968.29 हेक्टेयर चरागाह भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है, जिसमें से 12,168.78 हेक्टेयर भूमि को हरे चारे के उत्पादन के लिए समर्पित किया गया है। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं, जिनमें महिला स्वयं सहायता समूहों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अब तक 21,884 “गौसेवकों” को प्रशिक्षण देकर तैनात किया गया है।

बरेली में आईएफएफसीओ, आवंला के सहयोग से जैविक खाद और गोमूत्र प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना प्रगति पर है। राज्यभर के 7,693 गौ आश्रय स्थलों में लगभग 11.49 लाख गायों को आश्रय प्रदान किया गया है, जिनकी निगरानी सीसीटीवी कैमरों और नियमित निरीक्षणों के माध्यम से की जा रही है। मुख्यमंत्री ने आश्रयों में पशु चिकित्सा सुविधाएँ नियमित रूप से उपलब्ध कराने, भूसा बैंक की स्थापना, और चारा, चोकर व पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

राहुल गाँधी कहाँ के नागरिक? हाई कोर्ट ने कहा – 10 दिन में तय करे मोदी सरकार: दोहरी नागरिकता को लेकर दायर याचिका पर निर्देश

कॉन्ग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी की नागरिकता को लेकर दायर याचिका को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सोमवार (5 मई 2025) को इस याचिका को निस्तारित कर दिया, यानी मामला अपने स्तर पर खत्म कर दिया।

जस्टिस एआर मसूदी और जस्टिस राजीव सिंह की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह जल्द से जल्द इस मामले में अंतिम फैसला ले और याचिकाकर्ता को सूचित करे। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर केंद्र सरकार फैसला नहीं लेती, तो इसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा।

कर्नाटक के बीजेपी कार्यकर्ता और याचिकाकर्ता एस विग्नेश शिशिर ने दावा किया था कि राहुल गाँधी के पास ब्रिटेन की नागरिकता है। उनके मुताबिक, उनके पास ब्रिटिश सरकार के दस्तावेज और ई-मेल हैं, जो यह साबित करते हैं कि राहुल गाँधी ब्रिटिश नागरिक हैं।

शिशिर ने माँग की थी कि राहुल गाँधी की भारतीय नागरिकता रद्द की जाए और सीबीआई इसकी जाँच करे। उन्होंने कहा कि दोहरी नागरिकता भारतीय संविधान, भारतीय न्याय संहिता और पासपोर्ट एक्ट का उल्लंघन है। शिशिर ने यह भी बताया कि उन्होंने दो बार गृह मंत्रालय को शिकायत भेजी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

हाई कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार याचिकाकर्ता की शिकायत पर फैसला लेने की समय सीमा नहीं बता पा रही है। इसलिए इस याचिका को विचाराधीन रखने का कोई मतलब नहीं है। कोर्ट ने शिशिर को अन्य कानूनी रास्ते अपनाने की छूट दी है। अगर केंद्र फैसला लेता है, तो याचिकाकर्ता फिर से हाई कोर्ट आ सकते हैं।

इससे पहले, सुब्रमण्यम स्वामी ने भी दिल्ली हाई कोर्ट में राहुल गाँधी की नागरिकता को लेकर याचिका दायर की थी। हालाँकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि वह इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के बाद ही सुनवाई करेगा।

बता दें कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 9 के तहत दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है। इस मामले में अब सबकी नजर केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी है।

नाम बताता है धीरज सक्सेना, पर घर में मिली 5 मजार… झाड़-फूँक की आड़ में इस्लामी धर्मांतरण: पब्लिक ने समतल किया ढाँचा

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में नेपाल सीमा के पास बिलसंडा थाना क्षेत्र का सिम्बुआ गाँव में एक हिंदू धीरज सक्सेना के घर में पाँच मजारें मिलने से हड़कंप मच गया। गाँव में सिर्फ एक मुस्लिम परिवार रहता है, ऐसे में धीरज के घर में मजारें बनवाने की खबर ने सभी को चौंका दिया।

राष्ट्रीय योगी सेना ने इसे धर्मांतरण की साजिश और अंधविश्वास फैलाने का प्रयास बताकर मजारों को शुक्रवार (2 मई 2025) को तुड़वा दिया। पुलिस ने मामले की जाँच की और स्थिति को नियंत्रित किया। धीरज का कहना है कि मजारें परिवार की सुरक्षा और आस्था के लिए बनवाई थीं, न कि धर्म बदलने के लिए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, धीरज (35) ने बताया कि उनकी 17 साल की बहन सीता की 15 साल पहले मौत हो गई थी। सीता हमेशा बीमार रहती थी। वह चलते-चलते गिर जाती, चिल्लाती और कहती कि कोई उसका गला दबा रहा है। बरेली और कई अस्पतालों में इलाज के बाद भी आराम नहीं मिला। परिवार के बुजुर्गों के कहने पर धीरज उसे अम्बेडकरनगर की किछौछा शरीफ दरगाह ले गए। वहाँ उतारा और झाड़-फूँक से सीता को थोड़ा फायदा हुआ, लेकिन कुछ समय बाद उसकी मौत हो गई।

धीरज का कहना है कि बहन की मौत के बाद घर में अजीब घटनाएँ होने लगीं। खाने की थाली गायब हो जाती, चारपाई खिसकती और अजीब आवाजें सुनाई देतीं। इससे डरकर परिवार ने किछौछा शरीफ के पीर बाबा के नाम पर घर में पाँच मजारें बनवाईं। धीरज ने 15 हजार रुपये खर्च कर ये मजारें घर के एक अलग कमरे में बनवाईं, जहाँ हरा पेंट किया गया था।

धीरज ने साफ किया कि मजारों के नीचे कोई कब्र नहीं है। वह रोज मजारों पर फूल चढ़ाते और धूपबत्ती जलाते हैं, लेकिन घर में बने मंदिर में भी लक्ष्मी जी की पूजा करते हैं। धीरज का कहना है, “मैं हिंदू हूँ और हमेशा रहूँगा। मजारें सिर्फ परिवार की सुरक्षा के लिए बनवाई थीं।” गाँव वालों ने इसे काला जादू से जोड़ा और कहा कि धीरज की बहन पर जादू-टोना था। उन्होंने पहले भी मजारों का विरोध किया था, लेकिन धीरज ने उनकी बात नहीं मानी।

राष्ट्रीय योगी सेना को सूचना मिली कि धीरज के घर में मजारें हैं और वह झाड़-फूँक के जरिए लोगों को गुमराह कर धर्मांतरण की कोशिश कर रहा है। संगठन के महंत सरोजनाथ और पीलीभीत जिलाध्यक्ष सुमित शर्मा ने बिलसंडा थाने में शिकायत की। पुलिस और हिंदू संगठन के लोग धीरज के घर पहुँचे। वहाँ मजारों के साथ झाड़-फूँक का सामान भी मिला। संगठन ने इसे अंधविश्वास और धर्मांतरण की साजिश बताया। महंत सरोजनाथ ने कहा, “यह सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि गाँव में इस्लामिक तरीकों से लोगों को जोड़ने की योजना थी। अगर पुलिस समय पर नहीं पहुँचती, तो माहौल बिगड़ सकता था।”

बिलसंडा थाना प्रभारी सिद्धांत शर्मा ने बताया कि धीरज से पूछताछ में कोई साजिश का सबूत नहीं मिला। यह मामला धार्मिक भावना और अंधविश्वास से जुड़ा है। धीरज ने खुद मजारें हटाने का फैसला किया। गाँव में स्थिति सामान्य है, लेकिन पुलिस नजर रख रही है। धीरज के परिवार के सदस्य सुमेर सक्सेना ने कहा, “मजारें हमारी निजी श्रद्धा का हिस्सा थीं। इन्हें तोड़ने से हमें दुख हुआ। हमने किसी को बाध्य नहीं किया।”

यह मामला अंधविश्वास और धार्मिक संवेदनशीलता का मिश्रण है। झाड़-फूँक और काला जादू जैसी मान्यताएँ आज भी ग्रामीण इलाकों में लोगों को प्रभावित करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी प्रथाएँ अंधविश्वास को बढ़ावा देती हैं और सामाजिक तनाव का कारण बन सकती हैं। इस घटना ने धर्मांतरण के आरोपों को भी हवा दी, जिससे गाँव में तनाव पैदा हुआ।

सेना की कस्टडी से भागा… नदी में कूद कर मर गया लश्कर का OGW इम्तियाज: Video वायरल, जंगल में छिपे आतंकियों को दिए थे खाना और अन्य सामान

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले मे लश्कर-ए-तैय्यबा के ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) ने नदी में कूदकर जान दे दी। इम्तियाज अहमद माग्रे ने सुरक्षा बलों की पूछताछ से बचने के लिए यह कदम उठाया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। इसके बाद इम्तियाज के परिवार और कुछ राजनीतिक दलों ने सेना पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

सुरक्षाबलों के अनुसार, अहरबल क्षेत्र निवासी इम्तियाज अहमद माग्रे को शनिवार (03 मई 2025) को पुलिस ने हिरासत में लिया था। उस पर आतंकियों से जुड़े होने का शक था। पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने कुलगाम के तंगीमार्ग जंगल में छिपे आतंकियों को भोजन और अन्य सामग्री उपलब्ध कराई थी। साथ ही उसे लश्कर आतंकियो के ठिकानों की जानकारी भी थी।

रविवार (04 मई 2025) की सुबह जब अहमद पुलिस और सेना की संयुक्त टीम को तंगीमार्ग के जंगल में आतंकी ठिकाने की ओर ले जा रहा था। तभी अचानक सुरक्षा बलो के हाथों से वह भाग निकला और वैशव नदी में छलाँग लगा दी। नदी में डूबने से अहमद की मौत हो गई।

इस पूरी घटना का वीडियो ड्रोन कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। 38 सेकेंड के इस वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है जंगल के पास एक व्यक्ति खड़ा है। फिर अचानक दौड़ते हुए नदी में कूद जाता है। नदी का बहाव तेज होने के चलते वह उसी के साथ बहता चला जाता है। आगे चलकर वह नदी में डूब जाता है, जिससे उसकी मौत हो जाती है। वीडियो में उसके आसपास कोई भी सुरक्षाबल का जवान या अन्य व्यक्ति नहीं दिख रहा है।

मामले में न्यायिक जाँच की माँग

वीडियो सामने आने के बाद परिजनों ने सेना का विरोध किया। अहमद के परिवार ने दावा किया कि इम्तियाज को सेना ने शुक्रवार (02 मई 2025) को उनके घर से उठाया था। दो दिन बाद उसकी लाश नदी में मिली। परिवार ने इसे हिरासत में हत्या का मामला बताया।

वहीं, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने इस घटना को साजिश करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, कुलगाम में एक और लाश नदी से बरामद हुई है, जिससे साजिश के गंभीर आरोप उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इम्तियाज माग्रे को सेना ने दो दिन पहले उठाया था और अब रहस्यमयी तरीके से उसका शव नदी में मिला है।”

महबूबा मुफ्ती के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

उन्होंने आगे लिखा, “पहलगाम आतंकी हमले के बाद कश्मीर में शांति को पटरी से उतारने, पर्यटन को बाधित करने और पूरे देश में सांप्रदायिक सद्भाव को कमजोर करने की एक सोची-समझी कोशिश प्रतीत होती है।” अध्यक्ष ने हमले के बाद मनमाने ढँग से गिरफ्तारियों और कार्रवाईयों पर आपत्ति जताई है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद सैयद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने भी माग्रे की मौत को मानवाधिकार का उल्लंघन करार दिया। उन्होंने कहा, “कश्मीरियों को पहलगाम हमले के बाद सामूहिक सजा के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। हिरासत में हत्या और मनमानी गिरफ्तारी लोकतांत्रिक सिद्धांतो का उल्लंघन है।”

मामला तूल पकड़ने के बाद सामाजिक कल्याण मंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता साकिना इट्टू ने इम्तियाज के परिवार से मुलाकात की। उन्होने घटना की न्यायिक जाँच की माँग की। उन्होंने कहा, “माग्रे एक गरीब परिवार से था और हाल ही में मजदूरी करके लौटा था। उसकी मौत ने स्थानीय लोगों में डर पैदा कर दिया है। सच सामने आना चाहिए।”

अफवाहों पर सेना का बयान

वहीं, घटना के बार में फैली अफवाहों पर सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेना ने कहा कि अहमद की मौत के लिए सुरक्षा बलों को गलत तरीके से जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। ये गलत है। पुलिस ने इस मामले की जाँच शुरू कर दी है और ड्रोन वीडियो को सबूतों के तौर पर पेश किया जा रहा है।

‘घर में घुस पिता-पुत्र को काट डाला, अब विधवाओं को धमका रही बंगाल पुलिस और TMC के गुंडे’: मुर्शिदाबाद के हिन्दू परिवार ने राज्यपाल से लगाई सुरक्षा की गुहार

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के गुंडे और पुलिस हिंसा में मारे गए हिन्दू पिता-पुत्र की पत्नियों को धमकी दे रहे हैं। चंदन दास और उनके पिता हरगोबिन्द दास को इस्लामी कट्टरपंथियों ने मुर्शिदाबाद में घर से खींच कर मार दिया था। पीड़ित महिलाओं ने अब सुरक्षा के लिए पश्चिम बंगाल के राज्यपाल CV आनंद बोस को पत्र लिखा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता पिंकी दास और पारुल दास ने 4 पन्ने का पत्र अपनी समस्याएँ बताते हुए राज्यपाल बोस को लिखा है। उन्होंने बताया है कि पुलिस ने उन्हें किडनैप करने का प्रयास किया। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि यह पत्र एक छुपी हुई जगह से लिखा है।

उन्होंने पत्र में लिखा, “हम, हरगोबिंद दास और चंदन दास की दो विधवाएँ, टूटे हुए दिल और काँपते हाथों से आपको न्याय और सुरक्षा की माँग करते हुए पत्र लिख रही हैं। हम यह पत्र एक गुप्त स्थान से लिख रही हैं, ना केवल सत्ताधारी पार्टी बल्कि पुलिस भी हमें लगातार धमका रही है।”

दोनों महिलाओं ने पत्र में बताया कि उन्हें राज्यपाल बोस सुरक्षा उपलब्ध करवाएँ। दोनों महिलाएँ वर्तमान में मुर्शिदाबाद स्थित अपने घर में भी नहीं रह रहीं। उन्होंने दूसरी जगह शरण ले रखी है। दोनों महिलाएँ रविवार (4 मई, 2025) को कोलकाता पहुँची।

यहाँ उन्होंने अपने साथ हुई प्रताड़ना को बताया। उनके साथ इस दौरान कई भाजपा नेता भी मौजूद थे। पीड़ित महिलाओं ने सारी समस्याएँ बताते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायाधीशों और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को भी पत्र लिखा है।

वहीं पश्चिम बंगाल पुलिस ने इस मामले पीड़ित हिन्दू महिलाओं के आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने दावा किया है कि वह शनिवार (3 मई, 2025) को महिलाओं के घर के एक शिकायत के बाद पहुँची थी और वह दोनों वहाँ नहीं मिलीं। पुलिस बताया कि दोनों महिलाएँ इस दौरान एक घर में ठहरी हुई थीं।

गौरलतब है कि 11 अप्रैल, 2025 को मुर्शिदाबाद के धुलियान और शमशेरगंज इलाकों में वक्फ कानून के विरोध के नाम पर इस्लामी भीड़ ने भारी हिंसा की थी। इस हिंसा के दौरान हिन्दुओं के घरों-दुकानों को निशाना बनाया गया था। 3 हिन्दू मार भी दिए गए थे।

चंदन दास और हरगोबिंद दास को उनके घर से खींच कर मारा गया था। वह दोनों मूर्तियाँ बनाने का काम करते थे। इसके बाद उनका परिवार भागने पर विवश हो गया था। पीड़ित परिवार को अपने परिजनों के संस्कार के लिए नाई और पंडित भी नहीं मिले थे।

’10 रुपए की चाउमीन और मोबाइल रिचार्ज के झाँसे में न आएँ बेटियाँ’: ‘लव जिहाद’ पर कथावाचक प्रदीप मिश्रा की दो टूक, बोले – माता और पिता को दें कन्यादान का मौका

कथावाचक प्रदीप मिश्रा अपने बयानों के लिए अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। अब जयपुर के विद्याधर नगर में चल रही शिवमहापुराण कथा के चौथे दिन पर उन्होंने लव जिहाद पर एक बयान दिया है। अपने बयान से उन्होंने लड़कियों को आगाह करने की कोशिश की है।

प्रदीप मिश्रा ने कहा कि लड़कियों को ऐसे लड़कों से बचना चाहिए जो 10 रुपए की चाउमीन खिलाकर, 50 रुपए का पेट्रोल और 60 रुपए का मोबाइल बैलेंस डलवाकर आपको फंसा लें। उनसे बच कर रहें और अपने माता-पिता पर भरोसा रखें। उन्हें कन्यादान का अधिकार दें।

प्रदीप ने आगे कहा कि कभी-कभी थोड़े से स्टाइल, मोबाइल रिचार्ज और झूठे प्यार के दिखावे में आकर युवतियाँ उन लड़कों से प्रभावित हो जाती हैं और ये उनकी सबसे बड़ी भूल बन जाती है।

लव जिहाद पर लड़कियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “बड़े आश्चर्य की बात है कि जिन मां-बाप ने पूरी जिंदगी निकाल दी,पढ़ाया-लिखाया, खर्च किया, जमीन और जेवर गिरवी रख दिए और जिस मां-बाप के लिए तुम चाँद का टुकड़ा थी, आज तुम्हें वो दूसरा चाँद पसंद आ रहा है। इसलिए थोड़ा समझो, दोस्ती किसी से भी करो, कहीं पर भी पढ़ो, पर कह दो कि मेरे माता-पिता अगर चाहेंगे और कन्यादान करेंगे, तो ही मैं शादी करूँगी, वरना मेरे लिए सब धूल है।”

कथा के दौरान प्रदीप मिश्रा ने लड़कियों ,लव जिहाद, बेटियों की सुरक्षा, संस्कार, शिक्षा और पाकिस्तान समेत कई मुद्दों पर अपनी बातें रखी।

प्रदीप मिश्रा ने शिक्षा की महत्ता पर कहा कि बेटों से दोगुणा अधिक बेटियों को पढ़ाओ। यदि बेटियों को अच्छे संस्कार दिए जाएँ तो वे झांसी की रानी, जीजाबाई और अहिल्याबाई जैसी बन सकती हैं।

प्रदीप मिश्रा की कथा सुनने के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी परिवार के साथ पहुँचे। सीएम के साथ केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, हवामहल विधायक बालमुकुंदाचार्य और सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा भी शामिल हुए।

कथा के दौरान पाकिस्तान पर कार्रवाई के विषय पर कथावाचक बोले कि लोग सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं कि आठ दिन निकल गए, दस दिन निकल गए, लेकिन बदला जल्दबाजी में नहीं लिया जाएगा। एक युद्ध बम और गोले से लड़ा जाता है, लेकिन दूसरा युद्ध बुद्धि से। उन्होंने युवाओं को संयम और समझदारी बनाए रखने की बात कही।

श्रीनगर और जम्मू की जेलों पर आतंकी हमले का ख़तरा, बंद हैं कई खतरनाक आतंकी: जारी हुआ हाई अलर्ट, पहलगाम नरसंहार के दौरान मौजूद थी आतंकियों की एक और टीम

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर की जेलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। खुफिया सूत्रों ने चेतावनी दी है कि आतंकी जेलों पर हमला कर सकते हैं, खासकर श्रीनगर की सेंट्रल जेल और जम्मू की कोट बलवाल जेल पर खतरा मंडरा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जम्मू और कश्मीर जोन की इन जेलों में कई बड़े आतंकी और स्लीपर सेल के सदस्य बंद हैं, जो आतंकियों को लॉजिस्टिक मदद, ठिकाना और उनकी आवाजाही में सहायता देते हैं। बता दें कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए हिंदुओं के नरसंहार के मामले की जाँच जारी है, जिसमें इस आतंकी हमले का अंदेशा जताया गया है और अलर्ट जारी कर दिया गया है।

खुफिया जानकारी के आधार पर जम्मू और कश्मीर की जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है। रविवार (4 मई 2025) को सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) के डायरेक्टर जनरल ने श्रीनगर में वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक की। CISF ने अक्टूबर 2023 में CRPF से जम्मू-कश्मीर की जेलों की सुरक्षा का जिम्मा लिया था। बैठक में जेलों की सुरक्षा का जायजा लिया गया और किसी भी तरह की चूक रोकने के लिए कदम उठाए गए।

पहलगाम हमले की जाँच में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने आतंकी सहयोगियों निसार और मुश्ताक से पूछताछ की, जो पहले एक सेना की गाड़ी पर हुए हमले से भी जुड़े थे। सूत्रों का कहना है कि दक्षिण कश्मीर के जंगलों में अभी भी आतंकी छिपे हो सकते हैं। खुफिया जानकारी के मुताबिक, पहलगाम हमले के दौरान कुछ आतंकी दूर से कवर फायर देने के लिए तैनात थे, ताकि सुरक्षाबलों को जवाबी कार्रवाई से रोका जा सके। इसका मतलब है कि पहलगाम में हमले के दौरान हमला करने वाले आतंकियों के अलावा बैकअप में भी आतंकियों का ग्रुप मौजूद था।

सूत्रों ने बताया कि इन आतंकियों के पास खाने-पीने का सामान और अन्य जरूरी चीजें हैं, जिससे वे जंगलों में लंबे समय तक टिक सकते हैं। इस खतरे को देखते हुए जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि किसी भी संभावित हमले को रोका जा सके।

‘नाम और मजहब पूछकर पीटा’: गाड़ियों की टक्कर में भी फर्जी ख़बर फ़ैलाने वालों ने ढूँढा ‘पीड़ित मुस्लिम’, उत्तराखंड पुलिस ने चेताया

सोशल मीडिया पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने एक बार फिर एक मुस्लिम को पीड़ित दिखाने का प्रयास किया है। गाड़ियों की टक्कर को लेकर हुए विवाद को उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम विवाद की तरह दिखाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल की। इस वीडियो में एक मुस्लिम शख्स घायल अवस्था में दिखाई दे रहा है। यह मामला उत्तराखंड के देहरादून का है।

इस वीडियो को शेयर करने वाले यूजर ने दावा किया कि मुस्लिम शख्स से उसका नाम पूछा गया और फिर मजहब भी पूछा गया और उसकी पिटाई कर दी गई, इसके बाद बेरहमी से पीटा। दावा किया गया कि यह वीडियो उत्तराखंड के देहरादून का है।

एक एक्स यूजर Mr Haque ने ट्वीट कर लिखा, “देहरादून, उत्तराखंड। एक मुस्लिम परिवार डोईवाला से देहरादून (चंचक बंजारावाला) शादी समारोह में जा रहे थे। 5 से 6 लोगों ने बंजारावाला में उनसे नाम और मजहब पूछकर लोहे की रॉड और चाकूओं से उन पर हमला कर दिया।”

एक्स पोस्ट का स्क्रीनशॉट

ट्वीट में एक वीडियो भी अटैच किया गया है, जिसमें एक घायल व्यक्ति खून से लथपथ दिखाई दे रहा है। इस फर्जी खबर का प्रचार-प्रसार जफरुल इस्लाम खान ने भी किया है, वो पहले भी हिंदुओं को धमकी दे चुका है। ये फर्जी खबर एक्स पर भी वायरल हो गई।

वीडियो का सच सामने आने पुलिस ने दी चेतावनी

अब आपको वीडियो के पीछे का सच बताते हैं। देहरादून पुलिस ने ‘Mr Haque’ द्वारा किए गए इस दावे को झूठा बताया है। असलियत में यह मामला सड़क पर हुई आम कहासुनी का है। जिसको कुछ इस्लामी कट्टरपंथी बता रहे हैं कि मुस्लिम शख्स पर मजहब पूछ कर किया गया हमला बता रहे हैं।

पुलिस के अनुसार, यह घटना 1 मई 2025 की है। वीडियो में दिख रहा खून से लथपथ शख्स की पहचान अनिश अली के रूप में हुई है। अनिश और उसका परिवार एक शादी समारोह में जा रहा था। इस दौरान सड़क के बीचीबोच उनकी कार लड़ गई, जिसके चलते ट्रैफिक बाधित हो गया।

इसी कारण अली और अन्य व्यक्ति संजय रावत के बीच झड़प हो गई। दोनों ने एक दूसरे पर हाथ छोड़ दिया, इसके चलते दोनों को चोटें आईं। घटना के बाद पुलिस भी मौके पर पहुँची। पुलिस ही घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले गई।

इसके बाद पुलिस की टीम को इलाके में तैनात किया गया था। पुलिस ने इस मामले में CCTV भी खँगाला। इसी के आधार पर कुछ लोगों पर FIR भी दर्ज की गई थी।

देहरादून पुलिस ने चेतावनी देते हुए कहा, “यह घटना एक कार के खराब होने और ट्रैफिक जाम लगने के कारण हुए विवाद के कारण हुई। हालाँकि, सोशल मीडिया के जरिए कुछ लोग इस घटना को मजहबी रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस लगातार सोशल मीडिया पर नजर रख रही है और ऐसे लोगों की पहचान कर रही है, ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

ऐसा पहली बार नहीं है…

ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब हिंदुओं का बदनाम करने की कोशिश की गई हो। हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के बाद से ही सोशल मीडिया पर ‘मुस्लिम पीड़ित’ होने की झूठी कहानियों का जमावड़ा लग गया। जहाँ इस्लामी आतंकवादियों ने हिंदुओं का कत्लेआम किया था।

ये मनगढ़ंत कहानियाँ इस तरह से गढ़ी गई हैं कि हिंदुओं को शैतान की तरह पेश किया जाए। अब इस ‘मुस्लिम पीड़ित’ कार्ड का इस्तेमाल आतंकी हमले की धार्मिक घृणा से प्रेरित होकर प्रकृति से सार्वजनिक बहस को हटाने के लिए किया जाता है।

J&K के पुंछ में सेना को मिला आतंकी ठिकाना, IED-वायरलेस बरामद: पहलगाम हमले के बाद चल रहा सर्च ऑपरेशन, रक्षा मंत्री बोले- आप जो चाहते हैं वो होगा

जम्मू-कश्मीर के पुंछ में सुरक्षा बलों ने एक आतंकी ठिकाना खोजा है। सोमवार (5 मई 2025) को पुंछ के सूरनकोट इलाके के मारहोट गाँव में सुरक्षा बलों ने इस ठिकाने से 5 IED बम, 2 वायरलेस सेट और कुछ कपड़े बरामद किए हैं। आशंका जताई जा रही है कि यह ठिकाना आतंकी छुपने के लिए इस्तेमाल कर रहे थे।

यह आतंकी ठिकाना मिलने के बाद इलाके में सर्च ऑपरेशन चालू कर दिया है। इस इलाके में बीते कुछ महीनों में आतंकियों की गतिविधियाँ तेजी से बढ़ी हैं। आतंकी कश्मीर से निकल कर अब जम्मू इलाके में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कई बार सुरक्षाबलों के वाहनों को निशाना बनाया है।

इस बरामदगी होने के बाद जम्मू और श्रीनगर जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक बढ़ा दिया गया है। इन जेलों में कई आतंकी बंद हैं। वहीं, NIA ने अपनी जाँच में 2023 में डांगरी में हुए आतंकी हमलों में गिरफ्तार हुए लश्कर से जुड़े निसार अहमद और मुश्ताक हुसैन से पूछताछ की है। इनके भी पहलगाम हमले के से जुड़े होने की आशंका है।

वहीं पहलगाम आतंकी हमले के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि जैसा देश चाहता है पाक को वैसा ही जवाब मिलेगा।रविवार (4 मई 2025) को दिल्ली के भारत मंडपम में हुए एक कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने आतंकी हमले की निंदा की।

उन्होंने कहा, “भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आप सभी जानते हैं। उनके पास जोखिम उठाने की क्षमता है। वे जानते हैं कब और कैसे निर्णय लेना है। अब जैसा देश चाहता है, वैसा ही जवाब पाकिस्तान को दिया जाएगा।”

अपने बयान में राजनाथ सिंह ने आगे कहा, “रक्षा मंत्री के तौर पर यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं अपने सैनिकों के साथ मिलकर काम करूं और देश की सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करूं। यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं सेना के साथ मिलकर देश की ओर आँख उठाने वालों को मुंहतोड़ जवाब दूं।”

पहलगाम आतंकी हमले में कुल 28 लोगों को मार दिया गया था और कई लोग घायल हुए थे। मरने वालों में 24 हिंदुओं समेत दो विदेशी नागरिक भी शामिल थे। इस हमले के बाद पाकिस्तान के लिए देश में काफी गुस्सा भरा हुआ है। लोगों का कहना है कि इस हमले के लिए कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और पाकिस्तान को उसके किए का बदला मिलना चाहिए।

पहलगाम हमले के बाद पीएम मोदी ने भी कड़ी कार्रवाई और बदला लेने की बात कही थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का ये बयान भी इसी ओर इशारा कर रहा है कि जल्द ही भारत की ओर से कोई बड़ा कदम उठाया जाएगा।

UNSC में होगी भारत-पाक के लिए बैठक

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सोमवार (5 मई 2025) को भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव पर अहम बैठक भी की जाएगी। इसमें दोनों देश अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी-अपनी बात रखेंगे। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अपना बयान जारी कर एक बार फिर भारत की ‘शिकायत’ करने की बात कही है।

पाक के विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान UNSC को भारत की कथित आक्रामक कार्रवाइयों, उकसावे और भड़काऊ बयानों के बारे में बताएगा। पाकिस्तान सिंधु जल संधि को निलंबित करने और चिनाब के पानी को रोकने की जानकारी भी देगा।

NIA की जाँच जारी

पहलगाम आतंकी हमलों को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NIA) अपनी जाँच शुरू कर चुका है। हमलों से जुड़े कई पहलुओं पर लगातार पूछताछ की जा रही है। NIA को जाँच में पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा, ISI और पाकिस्तानी सेना से जुड़े कुछ अहम सुराग भी हाथ लगे हैं।

पहलगाम हमले के बाद सरकार ने जम्मू-कश्मीर में 14 स्थानीय आतंकियों की लिस्ट जारी की थी। इनमें लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM), हिजबुल मुजाहिदीन (HM) और द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) के आतंकी शामिल हैं।

तनवीर ने 8 साल तक किया हिन्दू लड़की से बलात्कार, नाजिम के साथ मिलकर भी किया गैंगरेप, इस्लाम कबूलने का बनाया दबाव: उत्तराखंड के हरिद्वार का मामला

उत्तराखंड में एक हिन्दू लड़की से रेप और धर्मांतरण के मामले में तनवीर और नाजिम नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

दरअसल हिन्दू लड़की को प्रेम जाल में फँसाकर पिछले 8 सालों से उसका रेप किया जा रहा था और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जा रहा था। इतना ही नहीं तनवीर और नाजिम लड़की को नेपाल ले जाने के फिराक में थे।

घटना जून 2017 की है जब नाबालिग लड़की से पहली बार तनवीर ने रेप किया। अगले दिन लड़की को वकील नाजिम के पास ले गया और निकाह की बात कहने लगा। तनवीर और नाजिम ने मिलकर लड़की पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया। लड़की का कहना है कि 2017 से उसकी तनवीर के साथ दोस्ती है।

हरिद्वार के बहादराबाद की ये घटना का पता तब चला जब 1 मई को परिजनों ने बेटी की गुमशुदगी की शिकायत स्थानीय थाने में दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने लड़की को हरिद्वार बस स्टैंड से बरामद किया। लड़की के बयान पर पुलिस ने वकील नाजिम को बहादराबाद से गिरफ्तार किया। लड़की के परिजनों का कहना है कि जब 1 मई को सुबह कॉलेज जाने के बाद शाम को बेटी घर वापस नहीं आई तो उन्हें चिंता होने लगी और उन्होने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। लड़की के मुताबिक 2 मई को उसके साथ तनवीर और नाजिम ने गैंगरेप किया। वो लोग उसे नेपाल ले जाना चाहते थे।

पुलिस ने शिकायत के बाद 48 घंटे के भीतर लड़की को ढूँढ निकाला। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कई सीसीटीवी फुटेज खंगाले इसमें लड़की की जानकारी मिली। इसके लिए पुलिस ने अलग अलग टीमें गठित की और संभावित ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान सभी जगहों के सीसीटीवी के फुटेज चेक किए गए। वहीं से पुलिस को युवती के बारे में सुराग मिला।

लड़की जब दो मई को हरिद्वार बस स्टैंड गई थी तो तनवीर अनवर भी उसके साथ था। पुलिस ने वहाँ से तनवीर को गिरफ्तार किया। पीड़िता ने घटना की जानकारी देते हुए कहा है कि 2017 में तनवीर से उसकी दोस्ती है और उसने उस वक्त ‘संबंध’ बनाए थे। 2017 में लड़की नाबालिग थी।