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दिल्ली में भाजपा की ‘ट्रिपल इंजन’ की सरकार: MCD में ‘आप’ का किला ध्वस्त, BJP के राजा इकबाल सिंह बने मेयर

दिल्ली नगर निगम (MCD) के मेयर पद के लिए हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार सरदार राजा इकबाल सिंह ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की है। उन्हें कुल 133 वोट मिले, जबकि कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार मनदीप को मात्र 8 वोटों पर संतोष करना पड़ा है। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस चुनाव से खुद को अलग रखा।

बीजेपी ने चुनाव से पहले ही सरदार राजा इकबाल सिंह को मेयर और जय भगवान यादव को डिप्टी मेयर पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था। बता दें कि राजा इकबाल सिंह इस समय नगर निगम में नेता विपक्ष की भूमिका निभा रहे थे।

अकाली राजनीति से बीजेपी

राजा इकबाल सिंह की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत शिरोमणि अकाली दल से हुई थी। उनका पारिवारिक संबंध भी अकाली राजनीति से गहरा रहा है। उनके ससुर जीटीबी नगर से पार्षद रहे हैं, जबकि उनके साले आज भी अकाली दल से जुड़े हुए हैं। खुद राजा इकबाल सिंह भी जीटीबी नगर से पार्षद रह चुके हैं।

सितंबर 2020 तक वे दिल्ली नगर निगम के सिविल लाइंस जोन के प्रमुख थे। इसी दौरान जब केंद्र सरकार के कृषि कानूनों का विरोध हुआ और अकाली दल ने एनडीए से समर्थन वापस लिया, तब पार्टी ने इकबाल सिंह से इस्तीफा देने को कहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इसके नौ महीने बाद बीजेपी ने उन्हें उत्तर दिल्ली नगर निगम का मेयर बना दिया।

जहाँगीरपुरी में कार्रवाई से आए थे सुर्खियों में

हनुमान जयंती के दिन 16 अप्रैल 2020 में दिल्ली के जहाँगीरपुरी इलाके में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद नगर निगम ने अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसमें अधिकांश निर्माण मुस्लिम समुदाय के थे। उस समय उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर राजा इकबाल सिंह ही थे। यह कार्रवाई उन्हें राजनीतिक रूप से चर्चा में ले आई थी।

‘मेरा एक भाई मुजाहिद (जिहाद करने वाला) और एक भाई जेल में’: बोली पहलगाम हमले के मुख्य आरोपित आदिल की बहन, 2 आतंकियों के घरों पर चला बुलडोजर

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भयावह आतंकवादी हमले में 28 लोगों की मौत के बाद सुरक्षाबलों की कार्रवाई तेज कर दी है। इस हमले में शामिल लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादियों- आसिफ शेख और आदिल हुसैन थोकर उर्फ आदिल गुरी के मकानों को सुरक्षाबलों ने ध्वस्त कर दिया है। इनमें से एक आतंकी का घर पुलवामा के त्राल में है और दूसरे का अनंतनाग जिले के बिजबेहरा में है।

आदिल पहलगाम हमले का मुख्य आरोपित है। आदिल साल 2018 में वैध रूप से पाकिस्तान गया था। वहाँ उसने आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़कर आतंकी प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद वह पिछले साल जम्मू-कश्मीर लौट आया है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि वह आतंकियों के स्थानीय गाइड का काम कर रहा था। दोनों आतंकियों पर 20-20 लाख रुपए के इनाम घोषित किए गए हैं।

इस बीच, इस्लामी आतंकी आदिल गुरी के परिवार वालों ने खुद को इस पूरे मामले से अलग बताया है। आदिल की बहन ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मेरा एक भाई जेल में है और दूसरा मुजाहिद (इस्लाम के लिए लड़ने वाला या जिहाद करने वाला) है, लेकिन हमारा परिवार निर्दोष है। हमें इस हमले की कोई जानकारी नहीं है।”

आदिल की बहन ने आरोप लगाया है कि जब वह अपने घर में मौजूद थीं, तब सुरक्षाबल के जवान आए और उसे पड़ोसियों के घर जाने को कहा। इसके बाद जवानों ने मकान में बम जैसी कोई चीज रखकर उसे उड़ा दिया। उसका यह भी आरोप है कि परिवार के लोगों को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आदिल गुरी की गतिविधियाँ लंबे समय से संदिग्ध थीं। वह लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ है।पहलगाम हमले के बाद से वह फरार है। उसके खिलाफ बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। सरकारी एजेंसियाँ अब आदिल गुरी के नेटवर्क और उसके पाकिस्तानी कनेक्शन की गहन जाँच में जुटी हैं।

पहलगाम आतंकी हमला का बलूचिस्तान के जाफर एक्सप्रेस हाईजैक से तुलना: न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने चलाया खतरनाक नैरेटिव, The Hindu ने बढ़ाया पाकिस्तानी प्रोपगेंडा

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में चुन-चुन कर हिंदुओं के नरसंहार से देश भर में गुस्सा है। इस्लामी आतंकियों ने हिंदुओं से कलमा पढ़वाया, उनके नाम और धर्म पूछा, कुछ को कपड़े भी उतरवाए और इसके बाद सिर्फ पुरुषों को गोली मार दी। मृतकों का पूरा परिवार आतंकित होकर परिवार के सदस्य का नरसंहार होता देखकर रहा। इसके बावजूद ‘न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ इस नरसंहार को अलग दिशा देने की कोशिश की। वहीं, ‘द हिंदू’ अखबार ने भारत के खबरों में पाकिस्तान को तरजीह दी।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के हालिया लेख में एक बेतुकी कहानी को बढ़ावा देकर आतंक को उचित ठहराने का छुपा हुआ प्रयास किया गया है। इस में यह दर्शाने का प्रयास किया गया है कि पहलगाम में भारतीय नागरिकों पर पाकिस्तान का हमला किसी-न-किसी रूप में बलूचिस्तान के क्वेटा में बलूच विद्रोहियों द्वारा जाफर एक्सप्रेस ट्रेन के अपहरण का ‘प्रतिशोध’ था।

इस लेख की लेखिका नीना गोपाल ने ‘कश्मीरी गर्मी का अंत: क्या पहलगाम जाफर एक्सप्रेस अपहरण का बदला है?’ शीर्षक से लिखा है। इस विचार स्तंभ में तथ्य और मामले की गंभीरता को पीछे छोड़ दिया गया है और झूठी बातों को प्राथमिकता दी गई है। दरअसल, यह पत्रकारिता नहीं है। यह पाकिस्तान की प्रेस विज्ञप्तियों को दोहराना है।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस में लिखा गया लेख

दरअसल, झूठे नैतिक समानताओं का बनाकर करके भारत के खिलाफ पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को वैध बनाने का एक दुर्भाग्यपूर्ण मामला है। बलूचिस्तान में जो लड़ाई है, वह पंजाबी आधिपत्य से खुद को अलग करने की बलूचों की लड़ाई है। हालाँकि, लेख के जरिए पाकिस्तानी सेना द्वारा आंतरिक मामलों में भारतीय हस्तक्षेप के दावों को इसमें सही ठहराने की कोशिश की गई है।

पाकिस्तान हमेशा से बलूचिस्तान के अलगाववादी विद्रोह में भारत का हाथ होने का दावा करता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 में स्वतंत्रता दिवस के भाषण में बलूचिस्तान का जिक्र किया, तब से पाकिस्तान अपने दावे को और सही ठहराने लगा। हालाँकि, इसके पक्ष में वह आज तक कोई सबूत दुनिया के सामने पेश नहीं कर सका। इसके बजाय वह इस्लामी आतंकियों को प्रश्रय देकर भारत में हमले जरूर करवाता रहा है।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस का लेख अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुँचा सकते हैं। पाकिस्तानी राजनयिकों द्वारा संयुक्त राष्ट्र में इस तरह के लेखों को हाथों-हाथ लेकर लहराया जाएगा और इसे सबूत बताकर पेश किया जाएगा और कहा जाएगा कि भारत आतंकवाद को उचित ठहराता है और पाकिस्तान में दखल देता है। यह लेख देश के लिए एक रणनीतिक मूर्खता है।

‘The Hindu’ का पाकिस्तान प्रेम

वहीं, हिंदू और भारतीय संस्कृति से नफरत के लिए पहचाना जाने वाला अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ ने भी खबरों के साथ कलाकारी की है। पहलगाम में नाम और धर्म पूछकर हिंदुओं का नर संहार किया गया और 28 लोगों को सरेआम हत्या कर दी गई। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी भी आतंकी को बख्शा नहीं जाएगा और उनकी उम्मीद से बढ़कर सजा दी जाएगी।

इस खबर का हिंदू अखबार के लिए कम महत्व है। उसके लिए ज्यादा महत्व पाकिस्तान की खबरों का है। इसलिए उसने प्रधानमंत्री मोदी की चेतावनी से ऊपर पाकिस्तान की खबर को तरजीह दी। उसने लीड खबर में लिखा, ‘पाकिस्तान ने अपना हवाई क्षेत्र बंद किया और भारत के साथ अपने व्यापारिक संबंध को तोड़ा’। वहीं, उसके नीचे सिर्फ दो कॉलम में प्रधानमंत्री मोदी के छापा।

अखबार के इस बौद्धिक बदमाशी का सोशल मीडिया में जमकर आलोचना हो रही है। हिंदू पब्लिशिंग ग्रुप के डायरेक्टर एन. राम को टैग करते हुए सोशल मीडिया यूजर अंकुर सिंह ने लिखा, “एन. राम और कितना नीचे गिरोगे? द हिंदू तो पाकिस्तान के ‘द डॉन’ से भी बदतर हो गया है। देखिए, कितनी बेशर्मी से यह पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा चला रहा है।” वहीं, अनुपम मिश्रा नाम के एक यूजर ने लिखा कि अखबार में पाकिस्तान की ख़बर लीड लगी है और प्रधानमंत्री का बयान उसके नीचे है।

वामपंथी सोच वाला द हिंदू अखबार चीन का प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए भी कुख्यात रहा है। जून 2022 में चीन के राजदूत सन वेइदॉन्ग (Chinese Ambassador Sun Weidong) ने वामपंथी आउटलेट द हिंदू के मुख्यालय का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने संपादक सुरेश नंबथ और स्टाफ के अन्य सदस्यों से मुलाकात की थी। वेइदॉन्ग ने इस मुलाकात का वीडियो अपने ट्विटर हैंडल पर भी शेयर किया था।

इतना ही नहीं, अखबार द हिंदू ने 1 जुलाई 2021 को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की शताब्दी की वर्षगाँठ पर पूरे पृष्ठ का विज्ञापन प्रकाशित किया था। यह पेड कंटेंट समाचार पत्र के तीसरे पेज पर था। दिलचस्प बात यह है कि चीन द्वारा जो पेड कंटेंट प्रकाशित किया गया था, वह नियमित रिपोर्ट की तरह ही दिखाई दे रहा था, लेकिन बारीकी से देखने पर पता चला कि यह चीन द्वारा पेड कंटेंट था।

‘माथे की बिंदी हटाई, अल्लाह हू अकबर के नारे लगाए… फिर भी पति को मार दी गोली’: पहलगाम हमले में बची महिला ने सुनाई इस्लामी आतंकियों की बर्बरता

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले में मारे गए पुणे के दो दोस्तों, कौस्तुभ गुनबोटे और संतोष जगदाले का गुरुवार (24 अप्रैल 2025) की सुबह पुणे के वैकुंठ श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। गुनबोटे और जगदाले अपने परिवार के साथ जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में छुट्टियाँ मनाने के लिए गए थे। इसी दौरान इस्लामी आतंकियों ने उनका धर्म पूछकर गोली मारकर हत्या कर दी।

घटना के समय दोनों का परिवार भी मौके पर मौजूद था। मौके पर उपलब्ध मौजूद 58 साल के कौस्तुभ गुनबोटे की पत्नी संगीता गुनबोटे ने बताया, “हमने डर के मारे माथे से टिकुली (बिंदी) हटा ली और ‘अल्लाह हु अकबर’ का नारा भी लगाया कि शायद हमारी जान बच जाए, लेकिन उन्होंने मेरे पति, उनके दोस्त और एक अन्य व्यक्ति को हमारे सामने ही बेरहमी से मार डाला।”

संगीता ने बताया कि जैसे ही हमला हुआ, वे सब घबराकर बाजार की ओर भागे। हालाँकि, उनकी जान नहीं बच पाई। वहीं, 54 वर्षीय संतोष जगदाले से आतंकियों ने कलमा पढ़ने के लिए कहा, लेकिन वे कलमा नहीं सुना पाए। इसके बाद आतंकियों ने उन्हें गोली मार दी। किसी तरह घायलों को इनके परिजनों ने पहलगाम के मुख्य बाजार तक पहुँचाया। वहाँ अधिकारियों से संपर्क की गई।

कुछ ही देर में सेना और पुलिस के जवान मौके पर पहुँच गए। सेना के हेलिकॉप्टर से घायलों को अस्पताल पहुँचाया गया। एनसीपी प्रमुख शरद पवार, बीजेपी नेता चंद्रकांत पाटिल और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण संगीता से मिलने पहुँचे। वहीं केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल और राज्य मंत्री माधुरी मिसाल भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए। मृतकों के पार्थिव शरीर गुरुवार तड़के 4 बजे फ्लाइट से पुणे लाए गए थे।

बंगाल की प्रियंका दत्ता को रेप की धमकी, पहलगाम आतंकी हमले के खिलाफ डाला था पोस्ट: अधिकारी बोले – डिलीट करो वरना माता-पिता भुगतेंगे अंजाम

पश्चिम बंगाल के अशोकनगर कल्याणगढ़ में रहने वाली युवती प्रियंका दत्ता को लगातार धमकियाँ मिल रही हैं। उसने सोशल मीडिया पर पहलगाम आतंकी हमले के विरोध में पोस्ट साझा किया था जिसमें आतंकियों को सबक सिखाने की बात कही थी। वीडियो के बाद युवती ने दावा किया है कि उसे टीएमसी से जुड़े मुस्लिमों ने अपहरण और रेप की धमकियाँ दी।

सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में पीड़िता कहती हुई सुनाई दे रही है, “मैंने कश्मीर घटना पर बहुत सारी बातें शेयर की थीं। कुछ लोगों ने मेरे विचार का समर्थन किया, तो कुछ ने मुझे और मेरे समर्थकों को गालियाँ दीं। मैं अब भी यही कहूँगी कि आतंकी हमला बेहद निंदनीय था और बर्दाश्त करने लायक नहीं था।”

इस दौरान रोते हुए युवती ने कहा, “जब वे तर्क और दलीलों का उपयोग करके मुझसे नहीं लड़ सके, तो वे मेरे डीएम में गए और बार-बार मुझे बलात्कार की धमकियाँ दीं।” युवती ने आगे जोर देकर कहा, “उन्होंने मुझे मेरे घर से अगवा करने की धमकियाँ दी, मैसेंजर पर बार-बार कॉल किया और बलात्कार की धमकी दी।”

प्रियंका दत्ता ने एक आरोपी की पहचान एमजे मारूफ के रूप में की है। उनके द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट में से एक में मारूफ को वॉयस नोट भेजते और कुछ ‘अश्लील शब्द’ लिखते हुए देखा गया। एक दूसरा आरोपित लड़का जिसने अपना छद्म नाम ‘मिस्टी माये दूष्टो छेला ‘ नाम से अकाउंट रखा है, उसके फेसबुक प्रोफाइल से टीएमसी से जुड़े होने का पता चलता है।

युवती का एक और वीडियो सामने आया है जिसमें उसने कहा है कि पुलिस अधिकारी घर पर आए और धमकी दी कि उस वीडियो को डिलीट करें जिसमें आरोप लगाए गए हैं।

वो कह रही है कि अधिकारी उसके घर आए और धमकी दी कि अगर उसने वीडियो डिलीट नहीं किया तो उसे झूठे आरोपों में गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी धमकी दी है कि अगर उसने अपना वीडियो डिलीट नहीं किया तो उसके माता-पिता को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

‘नाबालिग बेटी को मुस्लिम को किसी हालत में नहीं सौंपूँगी’: लापता बेटी को बुर्के में लाई बिहार पुलिस तो भड़की माँ, ‘लव जिहाद’ की घटनाओं से तनाव

बिहार के मुजफ्फरपुर में ढाई महीने से लापता एक हिंदू लड़की को मुस्लिम युवक मोहम्मद आजाद ने बुर्का पहनाकर अदालत में पेश किया। इसको लड़की की माँ का आक्रोश फूट पड़ा और अदालत परिसर में बेटी को छुड़ाने के लिए पुलिस से उलझ गई। उसने कहा कि उसकी बेटी 16 साल की नाबालिग है और वह किसी भी हालत में अपनी बेटी को किसी मुस्लिम को नहीं सौंपेगी।

यह मामला बिहार के मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, यहाँ की एक हिंदू युवती 6 फरवरी 2025 को घर से लापता हो गई। परिजनों ने पता लगाया तो पता चला कि मोहल्ले का ही रहने वाला मोहम्मद आजाद उसको लेकर लापता हुआ है। इसके बाद युवती के परिजनों ने मोहम्मद आजाद और उसके भाई शहजाद के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कराया था।

हालाँकि, पुलिस युवती को ढाई महीने बाद बरामद की। इसके बाद पुलिस युवती का बयान दर्ज कराने के लिए बुधवार (23 अप्रैल 2025) को कोर्ट लेकर आई। लड़की के साथ मोहम्मद आजाद भी था। अपनी बेटी को बुर्के में देखकर माँ का गुस्सा फूट पड़ा। वह बेटी को छुड़ाने के लिए पुलिसकर्मियों के साथ उलझ गई और बेटी को उसे सौंपने के लिए कहा।

पीड़ित माँ ने कहा, “मैं किसी भी सूरत में अपनी बेटी को एक मुस्लिम परिवार के हाथ में नहीं सौंपूँगी।” परिजनों का कहना है कि लड़की की उम्र 16 साल है, लेकिन जाँच अधिकारियों ने मुस्लिम पक्ष से 2 लाख रुपए लेकर युवती की उम्र आधार कार्ड में 18 साल कर दी है। वहीं, कोर्ट परिसर में मौजूद हिंदू संगठनों ने भी इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई है।

पीड़िता की माँ ने यह भी कहा कि उसके पति की लगभग पाँच पहले मौत हो गई चुकी है। घर में उसके चार बच्चे हैं। उसने बताया कि साल 2023 में ही उसकी लड़की ने एक हिंदू युवक से कोर्ट मैरिज कर ली थी। उस लड़़के साथ वह लगभग डेढ़ साल तक रही और फिर आकर अपने मायके रहने लगी। इसी दौरान मोहल्ले में रहने वाला मोहम्मद आजाद उसे अपनी बातों में फँसा लिया।

हिंदू संगठन के लोगों ने पुलिसवालों पर आरोप लगाया है कि वह मामले को गंभीरता से नहीं ले रही और एक हिंदू लड़की को बुर्का पहनाकर कोर्ट में पेश कर रही है। वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि युवती की सुरक्षा के लिए उसे बुर्का पहनाया गया था। हालाँकि, युवती के परिजन और हिंदू संगठन इससे संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने इसकी उच्चस्तरीय जाँच की माँग की है।

इस मामले को लेकर वकीलों के दो गुट भी कोर्ट परिसर में ही भिड़ गए। वकीलों के एक गुट ने दूसरे गुट पर आरोप लगाया कि वे लव जिहाद मामले में मुस्लिम युवक का पक्ष ले रहे हैं। मानवाधिकार मामलों के वकील ने कहा कि मुजफ्फरपुर में लव जिहाद के मामले लगातार बढ़ रहे है। इस्लामी संगठन के कार्यकर्ता लगातार हिंदू लड़कियों को टारगेट कर उनका ब्रेनवॉश कर रहे हैं।

बता दें कि इससे पहले भी मुजफ्फरपुर में धर्म परिवर्तन के कई मामले सामने आ चुके हैं। 16 अप्रैल 2025 को मुस्लिम युवक एक हिंदू युवती का धर्मांतरण करा कर उससे निकाह करने की कोशिश कर रहा था। युवती का नाम सरस्वती था और उसका नाम बदलकर मुस्कान खान कर दिया गया था। इसी नाम से उसके नए दस्तावेज भी तैयार करवाए गए थे।

वहीं, 22 अप्रैल 2025 को शमशाद नाम का युवक सूरज बनकर नेहा नाम की हिंदू युवती को अपने प्रेमजाल में फँसा लिया। युवती ने जब उससे शादी करने की बात कही तो उसने अपना असली नाम शमशाद बताया और उसे धर्मांतरण करने के लिए कहा। जब युवती ने मना किया तो वह जान से मारने की धमकी देने लगा। इसके बाद युवती ने शमशाद के खिलाफ मामला दर्ज कराया।

गाँधी भी ख़ुद को बताते थे अंग्रेज वायसराय का ‘वफादार सेवक’: वीर सावरकर पर टिप्पणी को लेकर राहुल गाँधी को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, कहा – आपकी दादी भी करती थीं तारीफ़

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (25 अप्रैल, 2025) को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी द्वारा स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर पर की गई टिप्पणी को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। राहुल गाँधी ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान कहा था कि सावरकर अंग्रेजों के सहयोगी थे और उन्हें उनसे पेंशन मिलती थी।

इस पर न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और मनमोहन की पीठ ने नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे बयान स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान के खिलाफ हैं और पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में राहुल गाँधी इस प्रकार के बयान देंगे, तो न्यायालय स्वतः संज्ञान लेते हुए उचित कार्रवाई करेगा।

कोर्ट ने कहा, “हमारे स्वतंत्रता सेनानियों पर एक शब्द भी नहीं। उन्होंने हमें आज़ादी दिलाई और क्या हम उनके साथ ऐसा व्यवहार करेंगे?” कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि विवादास्पद बयानों के चलते मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा जारी किए गए समन आदेश पर फिलहाल रोक लगाई जाती है।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि “क्या आपके मुवक्किल को पता है कि महात्मा गाँधी ने भी वायसराय को संबोधित करते समय ‘आपका वफादार सेवक’ शब्द का इस्तेमाल किया था? क्या आपके मुवक्किल को पता है कि उनकी दादी (इंदिरा गाँधी) जब प्रधानमंत्री थीं, तो उन्होंने भी स्वतंत्रता सेनानी सावरकर की प्रशंसा करते हुए एक पत्र भेजा था?”

पीठ ने राहुल गाँधी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कहा, “क्या उन्हें ये बातें पता हैं? उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास और योगदान को समझे बिना इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान नहीं देने चाहिए।” मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें राहुल गाँधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा जारी समन को रद्द करने से इनकार किया गया था।

हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि राहुल गाँधी को पहले दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 397 के तहत सत्र न्यायालय में अपील करनी चाहिए थी। अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे ने नवंबर 2022 में राहुल गाँधी की टिप्पणी को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि गाँधी की टिप्पणियाँ समाज में नफरत फैलाने के इरादे से की गई थीं।

ट्रायल कोर्ट ने इन बयानों को प्रथम दृष्टया अपराध मानते हुए गाँधी को समन जारी किया था। बाद में कोर्ट ने गैर-हाजिर रहने पर उन पर 200 रुपए का जुर्माना भी लगाया। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने समन पर रोक लगाते हुए, यह भी स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में स्वतंत्रता सेनानियों पर कोई भी गैर-जिम्मेदाराना बयान अदालत की नजर में आएगा।

तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (25 अप्रैल 2025) को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी द्वारा स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर पर की गई टिप्पणी को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। राहुल गाँधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कहा था कि सावरकर अंग्रेजों के सहयोगी थे और उन्हें उनसे पेंशन मिलती थी।

इस पर न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और मनमोहन की पीठ ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे बयान स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान के खिलाफ हैं और पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में राहुल गाँधी इस प्रकार के बयान देंगे, तो न्यायालय स्वतः संज्ञान लेते हुए उचित कार्रवाई करेगा।

कोर्ट ने कहा, “हमारे स्वतंत्रता सेनानियों पर एक शब्द भी नहीं। उन्होंने हमें आज़ादी दिलाई और क्या हम उनके साथ ऐसा व्यवहार करेंगे?” कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि विवादास्पद बयानों के चलते मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा जारी किए गए समन आदेश पर फिलहाल रोक लगाई जाती है।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि “क्या आपके मुवक्किल को पता है कि महात्मा गाँधी ने भी वायसराय को संबोधित करते समय ‘आपका वफादार सेवक’ शब्द का इस्तेमाल किया था? क्या आपके मुवक्किल को पता है कि उनकी दादी (इंदिरा गाँधी) जब प्रधानमंत्री थीं, तो उन्होंने भी स्वतंत्रता सेनानी सावरकर की प्रशंसा करते हुए एक पत्र भेजा था?”

पीठ ने राहुल गाँधी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कहा, “क्या उन्हें ये बातें पता हैं? उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास और योगदान को समझे बिना इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान नहीं देने चाहिए।” मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें राहुल गाँधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा जारी समन को रद्द करने से इनकार किया गया था।

हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि राहुल गाँधी को पहले दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-397 के तहत सत्र न्यायालय में अपील करनी चाहिए थी। अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे ने नवंबर 2022 में राहुल गाँधी की टिप्पणी को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी।

अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि गाँधी की टिप्पणियाँ समाज में नफरत फैलाने के इरादे से की गई थीं। ट्रायल कोर्ट ने इन बयानों को प्रथम दृष्टया अपराध मानते हुए गाँधी को समन जारी किया था। बाद में कोर्ट ने गैर-हाजिर रहने पर उन पर 200 रुपए का जुर्माना भी लगाया।

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने समन पर रोक लगते हुए, यह भी स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में स्वतंत्रता सेनानियों पर कोई भी गैर-जिम्मेदाराना बयान अदालत की नजर में आएगा। तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

‘नाले में फेंको हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीर, ईसाई बनो’: राजस्थान के कोटा में हो रहा था 50+ लोगों का धर्मांतरण, पुलिस ने 1 विदेशी समेत 2 को दबोचा

राजस्थान के कोटा जिले के मोतीपुरा गाँव में ईसाई मिशनरी द्वारा 50 महिलाओं, बच्चों और पुरुषों का धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा था । इतना ही नहीं हिन्दू देवी देवताओं की तस्वीरों को नाले में फेंकने की बात कह रहे थे। पुलिस ने इस मामले में ईसाई मिशनरी के जॉन मैथ्यू के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को आहत करने, धमकाने और लालच देकर धर्मपरिवर्तन करवाने का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि जॉन मैथ्यू ने भील समाज के गरीबों को विदेश घुमने का मौका देने, घर बनाने और आर्थिक मदद देने का प्रलोभन दिया था। भील समाज के दो लोगों ने पुलिस को इसकी शिकायत की थी।

सोमवार (21 अप्रैल 2025) की रात बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने ईसाई प्रार्थना सभा में हंगामा किया। बजरंग दल के प्रांत संयोजक योगेश रेनवाल के मुताबिक ” सूचना मिली थी कि ईसाई मिशनरी जॉय मैथ्यू कुछ विदेशी नागरिकों के साथ हिंदुओं का धर्मांतरण करवा रहा है। जब वे मौके पर पहुँचे तो देखा कि ईसाई मिशनरी के साथ विदेशी नागरिकों में 3 बच्चे और पत्नी शामिल है। भील समाज के 50 लोगों को इकट्ठा करके हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहा है। भील समाज के लोगों में 50 महिलाएँ, बच्चें और पुरुष शामिल थे।”

वहीं भील समाज के लोगों ने बताया कि उनके गांव में जॉय मैथ्यू नाम का ईसाई मिशनरी का व्यक्ति रहता है। वहाँ उसका एक बड़ा प्लॉट है, जहाँ विश्राम घर बनाया हुआ है। ईसाई मिशनरी लोगों को राशन, पैसे देने की बात कहता है। कई लोगों के तो मकान भी बनवा कर दिए है। जॉय मैथ्यू लोगों से हिंदू देवी-देवताओं की फोटो नाले में फेंकने के लिए कहता है।

रेनवाल ने आरोप लगाया कि जॉय मैथ्यू उन लोगों से ईसाई प्रार्थना करवा रहा था और धर्मांतरण करके क्रॉस पहना रहा था। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इस गतिविधि का विरोध किया और प्रार्थना सभा को तत्काल रोकने की माँग की, जिसके बाद हंगामा हुआ।

पुलिस ने बताया कि विदेशी नागरिकों में जॉय मैथ्यू का बेटी- दामाद और बच्चे हैं, जो टूरिस्ट वीजा पर अमेरिका से कोटा आए हैं। पुलिस ने मैथ्यू और उसके दामाद को हिरासत में ले लिया है।

पुलिस दामाद कॉलीन के खिलाफ विदेशी विषयक अधिनियम 1946 के तहत मामला दर्ज कर जाँच कर रही है। वहीं गाँव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान का शेयर बाजार धड़ाम, विकास दर भी लुढ़का: 1 दिन में ही भारत के एक्शन का दिखा असर, पड़ोसी मुल्क पर छाया भुखमरी का खतरा

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 28 लोगों की मौत के बाद भारत ने कई कड़े कदम उठाए हैं। इनमें से एक पाकिस्तान के साथ सन 1960 में हुई सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णय भी शामिल है। इस कदम का पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ने वाला है। पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था, जलविद्युत उत्पादन और पेयजल आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित होगी।

पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है। इस कदम के बाद पाकिस्तान में महंगाई, खाद्य संकट, बिजली कटौती जैसी समस्याएँ और तेज़ हो जाएँगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन हालातों के चलते पाकिस्तान की आर्थिक विकास दर में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। पाकिस्तान के स्टॉक मार्केट लगातार इसकी झलक दे रहा है। वहाँ का बाजार भी क्रैश कर गया है।

वर्तमान स्थिति को देखकर अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक संगठनों ने भी पाकिस्तान की विकास दर को घटा दिया है। विश्व बैंक ने एक रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान के एक करोड़ लोग अब भूखमरी के कगार पर खड़़े हो गए हैं। उसने वर्तमान वित्त वर्ष के लिए पाकिस्तान के विकास दर को भी घटाकर 2.7 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले विश्व बैंक ने 2.8 प्रतिशत विकास दर का अनुमान लगाया था।

वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 22 अप्रैल 2025 को पाकिस्तान के विकास दर को घटाकर 2.6 कर दिया। लगभग तीन महीने पहले IMF ने पाकिस्तान की विकास के लिए 3 प्रतिशत का पूर्वानुमान लगाया था। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच ने पाकिस्तान से संरचनात्मक सुधारों के लिए कहा था, जो वर्तमान परिस्थिति में पाकिस्तान के असंभव दिख रहा है।

वाघा, हुसैनीवाला सहित तीन बॉर्डर बंद करने के भारत के फैसले से भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे पाकिस्तान में रोजमर्रा के सामानों का भी अभाव हो जाएगा। इस बॉर्डर से छोटे व्यापारियों द्वारा बड़े पैमाने पर व्यापार किया जाता था। अटारी-वाघा क्रॉसिंग पर 2023-24 वित्तीय वर्ष में 38.86 अरब भारतीय रुपए का व्यापार हुआ था।

जल संकट और आर्थिक मंदी के कारण पाकिस्तान में खाद्य आपूर्ति बाधित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, सिंधु जल संधि को निलंबित करने के कारण पाकिस्तान की कृृषि पर व्यापक एवं गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर ही आधारित है। ऐसे में भारत की कड़ी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान का विकास दर और गिरने की संभावना है।

‘बार-बार मना करने के बावजूद जबरन ऊपर ले गए घोड़े वाले, तमाशा देख रहे थे कश्मीर पुलिस के जवान’: पहलगाम के मृतक के परिजनों ने सुनाया पूरा वाकया

पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों के दुःख में पूरा देश गमगीन है। वहीं, दूसरी ओर इस हमले में शामिल और आतंकियों को नेस्तनाबूत करने की कार्रवाई भारतीय सशस्त्र बलों ने शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश के कानपुर से कश्मीर घूमने गए शुभम द्विवेदी की मौत के बाद परिवार उनके शव के साथ कानपुर आया। उनकी पत्नी ऐशान्या समेत परिजनों को सांत्वना देने के लिए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ भी पहुँचे।

सीएम योगी से मुलाकात करते ही ऐशान्या के सब्र का बाँध भी टूट गया। उन्होंने रोते-रोते सीएम को सारी घटना बताई। साथ ही उन्होंने कुछ ऐसी बातें भी कहीं जिसके बाद पहलगाम आतंकी हमले में कुछ स्थानीय स्लीपर सेल के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।

अमर उजाला‘ की रिपोर्ट के अनुसार, ऐशान्या ने बताया कि शुभम और वो घोड़े से ऊपर की ओर जा रहे थे। हालाँकि उन्हें दूर तक जाने का मन नहीं था। इसलिए घोड़ेवाले से ऊपर ले जाने से मना भी किया। ऐशान्या ने कहा कि वे लोग थक गए हैं और इससे ऊपर नहीं जाना चाहते। इसके बावजूद घोड़े वाले ने रुकना जरूरी नहीं समझा और कहा ऊपर तक तो चलना पड़ेगा। शुभम ने ये भी कहा कि चाहे तो पूरे पैसे ले लो पर हमें नीचे लेकर चलो। फिर भी घोड़े वाले ने उनकी बात नहीं मानी।

परिजनों ने भी सीएम को बताया कि पर्यटकों को टट्टू वाले ऊपर पहाड़ी पर बैठा के ले जा रहे थे। पर वे अपनी मर्जी से चल रहे थे। इसी तरह जब गोलियाँ चलने लगीं तो लोग इधर उधर भाग रहे थे। उस दौरान वहाँ पर तीन स्थानीय पुलिस कर्मी खड़े दिखाई पड़े थे। लेकिन उन्होंने किसी तरह की मदद नहीं की। लोग चिल्ला रहे थे कि उन्हें सुरक्षा दीजिए, कैंप तक ले चलिए लेकिन किसी ने भी उनकी मदद नहीं की।

शुभम के पिता ने बताया कि पहलगाम के जिस होटल में वे लोग रुके थे वहाँ पर कुछ लोग थे जो पर्यटकों के निवास स्थान और उनकी संख्या आदि की पूछताछ कर रहे थे। इन सभी बातों से ऐसा लग रहा था कि वे लोग हमारी रेकी कर रहे थे।

परिजनों से मिलकर आने के बाद सीएम योगी ने मीडिया से कहा कि आतंकवाद का जड़ से सफाया होगा। शुभम के परिजनों से जो जानकारी मिली है उससे ऐसा लगता है कि वहाँ टट्टुओं से सफर कराने वालों समेत कुछ अन्य स्थानीय आतंकी संगठनों से जुड़े हो सकते हैं। इन सभी को मुँहतोड़ जवाब मिलेगा।

उधर एक अन्य महिला पर्यटक ने बताया कि एक घोड़े वाला बार-बार उनके डिटेल्स पूछ रहा था, कुरान को लेकर बोल रहा था। महिला पर्यटक ने ये भी बताया कि घोड़े वाला ये भी पूछ रहा था कि उनके साथ आए लोग हिन्दू हैं या मुस्लिम, महिला ने उसके इरादे भाँप लिए थे इसीलिए उसे बता दिया कि वो सब मुस्लिम हैं। साथ ही वो ये भी कह रहा था कि अभी अमरनाथ आइए तो वो बिना रजिस्ट्रेशन यात्रा करा देगा। महिला ने उसकी तस्वीर दिखाते हुए बताया कि उसने फोन निकाला, वो 35 बंदूकों की बात भी कर रहा था।