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कमलनाथ ने अलका लाम्बा से कहा- ‘अभी तो मैं जवान हूँ’, बीजेपी नेता की चुटकी- उनकी जवानी के चक्कर में कॉन्ग्रेस बूढ़ी हो गई

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोमवार (मार्च 8, 2021) को महिला कॉन्ग्रेस के एक कार्यक्रम में पहुँचे। यहाँ उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता अलका लांबा की तारीफ की और अपने जवान होने का दावा भी। अब कमलनाथ के इस बयान पर भाजपा नेता चुटकी ले रहे हैं। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है कि कमलनाथ बार-बार खुद के जवान होने के दावे करते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि उनकी जवानी के चक्कर में कॉन्ग्रेस पार्टी बूढ़ी हो गई।

महिला दिवस के अवसर पर सोमवार को महिला कॉन्ग्रेस ने एक सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें अलका लांबा मुख्य अतिथि थीं। इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ ने अलका लांबा की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा, ”मैं अलका लांबा को तब से जानता हूँ जब वह 18 साल की थी। मैं इसकी शादी में भी गया था।” पीछे से अलका लांबा ने बताया कि 27 साल हो गए। इस पर कमलनाथ ने कहाकि बताओ 27 साल हो गए।

फिर पूर्व मुख्यमंत्री ने मजाकिया लहजे में अलका लांबा की ओर इशारा करते हुए कहा, ”भई अब समय को कोई नहीं रोक सकता। तुम्हारी भी उम्र हो गई और मेरी भी उम्र हो गई, लेकिन यह मत सोचिएगा कि जवानी मुझे छोड़ गई, जवानी नहीं छोड़ गई है।” नरोत्तम मिश्रा ने मंगलवार (मार्च 10, 2021) सुबह मीडियाकर्मियों से बातचीत में महिला दिवस के मौके पर कमलनाथ के बयान को आपत्तिजनक बताया।

उन्होंने कहा कि कमलनाथ बार-बार खुद को जवान साबित करने की कोशिश करते रहते हैं। पहले भी सागर में वह मंच से कूद गए थे। नरोत्तम मिश्रा ने ऐक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस को लेकर दिए उनके बयान को भी याद किया। मध्य प्रदेश के गृहमंत्री ने कहा कि वह इस तरह के बयानों पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते, लेकिन सच्चाई यह है कि कमलनाथ की जवानी के चक्कर में कॉन्ग्रेस पार्टी बूढ़ी हो गई।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दिया इस्तीफा, नए CM के लिए इन नामों की अटकलें हुईं तेज

उत्तराखंड बीजेपी में चल रहे घमासान के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मंगलवार (मार्च 9, 2021) शाम राज्यपाल बेबी रानी मौर्य से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपा। बताया जा रहा है कि रावत कुछ देर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसके बारे में जानकारी भी देंगे।

ऐसा कहा जा रहा है कि सीएम के इस्तीफा देने के बाद पर्यवेक्षकों की देख रेख में विधायकों की बैठक में नया सीएम चुना जाएगा। त्रिवेंद्र सिंह रावत के पद छोड़ने की अटकलों के साथ ही इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि उत्तराखंड का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?

सीएम की रेस में ये नाम आगे

उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री के तौर पर तीन नाम सामने आ रहे हैं। राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी, नैनीताल से लोकसभा सांसद अजय भट्ट और कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत का नाम सीएम की रेस में आगे है। तीनों में से किसी एक को नया मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। हालाँकि, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने इस सिलसिले में संघ के प्रमुख नेताओं से मुलाकात भी की थी। कहा जा रहा है कि नए सीएम के लिए सतपाल महाराज के नाम पर भी चर्चा चल रही है।

बता दें कि सीएम रावत ने सोमवार (मार्च 8, 2021) को दिल्ली में बीजेपी के केंद्रीय नेताओं से मुलाकात की। बीजेपी उपाध्यक्ष रमन सिंह और पार्टी महासचिव दुष्यंत सिंह गौतम ने राज्य के दौरे से वापस आने के बाद पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। दोनों केंद्रीय नेताओं ने राज्य में बीजेपी कोर समूह के सदस्यों से बातचीत की थी। सीएम रावत सांसद अनिल बलूनी के आवास पर भी गए थे।

‘मेरे पति की हत्या में शामिल है सचिन वाजे’: हिरेन की पत्नी के बयान के बाद महाराष्ट्र विधानसभा में गूँजा ‘खूनी सरकार’ का नारा

भारत के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित बहुमंजिला घर एंटीलिया के बाहर खड़ी मिली संदिग्ध कार के मालिक मनसुख हिरेन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मुद्दा अब महाराष्ट्र विधानसभा में भी गूँज रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने इस मामले में मुंबई पुलिस के अधिकारी सचिन वाजे की गिरफ़्तारी की माँग की है। विधानसभा में ‘ये सरकार खूनी है’ का नारा भी गूँजा।

सचिन वाजे वही पुलिस अधिकारी हैं, जिन्होंने अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तार किया था। सचिन वाजे को 90 के दशक के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में जाना जाता है। अब तक 60 से अधिक अपराधियों के एनकाउंटर में उनका नाम आया है। कोल्हापुर जिले से आने वाले सचिन 1990 बैच के IPS अधिकारी हैं। 1992 में उनका ट्रांसफर ठाणे में हुआ और उसके बाद वो क्राइम ब्रांच का हिस्सा बन गए।

ख्वाजा यूनिस के मौत के मामले में 2004 में उन्हें निलंबित भी किया गया था। इसके बाद 2007 में उन्होंने पुलिस सेवा से इस्तीफा देकर 2008 में शिवसेना जॉइन कर ली थी। जब उद्धव ठाकरे की सरकार आई तो उन्हें फिर से पुलिस सेवा में वापस लाया गया क्योंकि उनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ था। उन्होंने एक मराठी किताब भी लिखी है और उन पर ‘रेगे’ नामक मराठी फिल्म भी बन चुकी है। अंबानी को धमकी वाला ममला उन्हें ही सौंपा गया था।

अब मृतक मनसुख हिरेन की पत्नी ने इस मामले में सचिन वाजे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी सचिन वाजे ही उनके पति की उस स्कॉर्पियो कार का प्रयोग कर रहे थे, जो एंटीलिया के बाहर मिली थी। बकौल विमला हिरेन, वाजे ने उनके पति से इस मामले में गिरफ्तार हो जाने को कहा था और जमानत दिलाने का आश्वासन भी दिया था। ATS ने इस मामले में उनका बयान दर्ज किया है।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर में उस बयान और FIR की कॉपी के आधार पर दावा किया गया है कि विमला हिरेन के अपने पति की हत्या होने की आशंका जताई है और कहा है कि इसमें सचिन वाजे का भी हाथ है। मनसुख हिरेन ने बताया था कि उक्त गाड़ी फरवरी 17 को ही चोरी हो गई थी। उसमें से जिलेटिन की छड़ें भी मिली थीं, जिससे बम बनाया जाता है। विमला ने कहा कि उनके पति तनाव में रहते थे क्योंकि वाजे उन पर गिरफ्तार होने का दबाव बना रहे थे।

उनका कहना है कि मार्च 4 को उनके पति ने बताया था कि वो कांदिवली पुलिस थाने में इंस्पेक्टर तावड़े से मिलने जा रहे हैं। उन्होंने अपने बेटे को वाजे का नंबर भेजा था और कहा था कि अगर कोई भी समस्या हो तो उन्हें कॉल कर ले। अगले दिन उनके गायब होने की रिपोर्ट परिजनों ने दर्ज कराई और कुछ ही घंटों बाद उनकी लाश मिली। उनके बयान के बाद फड़नवीस ने वाजे की गिरफ़्तारी की माँग की है।

उन्होंने कहा कि वाजे को हत्या नहीं तो सबूत मिटाने के आरोप में गिरफ्तार किया ही जाए और अगर ऐसा नहीं होता है तो इसका अर्थ है कि कोई उन्हें बचा रहा है। उन्होंने कहा कि मनसुख हिरेन के मोबाइल फोन का अंतिम लोकेशन धनंजय तावड़े के घर के बाहर बता रहा था, जो 2017 में वाजे के साथ एक रंगदारी के मामले में फँसा था। जबकि तावड़े अब कह रहा है कि वो वाजे को नहीं जानता और वाजे ने अपन ऊपर लगे आरोपों की जानकारी होने से इनकार किया है।

इन सबके अलावा ये भी पता चला था कि मनसुख हिरेन ने मौत से पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा था। उन्होंने इस पत्र में कहा था कि पीड़ित होने के बावजूद उनके साथ आरोपित की तरह व्यवहार किया जा रहा है। इसमें उन्होंने पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ एक पत्रकार का नाम भी लिया था। उन्होंने कहा था कि उनसे हिरासत में भी पूछताछ की गई, जिससे उनकी मानसिक प्रताड़ना हो रही है।

न्यूड फोटोशूट के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से शर्लिन चोपड़ा को मिली अंतरिम जमानत, थाने में प्रतिदिन देनी होगी हाजिरी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा को गिरफ़्तारी से राहत देते हुए उन्हें प्री-अरेस्ट बेल प्रदान किया है। सोमवार (मार्च 8, 2021) को उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंतरिम प्रारंभिक जमानत दी। उनके खिलाफ मुंबई पुलिस की साइबर सेल ने मामला दर्ज किया था। उन पर न्यूड फोटोशूट और इंटरनेट पर अश्लील वीडियो अपलोड करने के आरोप हैं। अगर शर्लिन चोपड़ा को गिरफ्तार किया जाता है, तो उन्हें 25,000 रुपए के व्यक्तिगत मुचलके पर छोड़ा जाएगा।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा को जमानत देते हुए आदेश दिया है कि वो मुंबई पुलिस की जाँच में सहयोग करें। उन्हें मार्च 15-17 तक प्रत्येक दिन पुलिस थाने में उपस्थिति दर्ज करानी पड़ेगी। इसके बाद पुलिस मार्च 23 को कोर्ट को इस बारे में रिपोर्ट सौंपेगी। सुनवाई के लिए अगली तारीख़ मार्च 23 को तय की गई है। अंतरिम जमानत की याचिका पर जस्टिस PD नाइक के कोर्ट ने सुनवाई की। अभिनेत्री ने अधिवक्ता चरणजीत चंद्रपाल के माध्यम से याचिका दायर की थी।

पुलिस ने कोर्ट को बताया कि वो अपनी जाँच के दौरान इन फोटोग्राफी को निर्देशित करने वाले डायरेक्टर से पूछताछ करना चाहते थे, जिसने उन दृश्यों को शूट किया था। उन्हीं दृश्यों के खिलाफ ये केस दर्ज किया गया था। उन्होंने कहा कि जब तक शर्लिन चोपड़ा उस बारे में पूरा विवरण साझा नहीं करती हैं, तब तक वो इस अश्लील कंटेंट्स की तह तक नहीं पहुँच पाएँगे, जो कई वेबसाइट्स पर मुफ्त में उपलब्ध हैं।

पुलिस द्वारा बार-बार समन दिए जाने के बावजूद शर्लिन चोपड़ा उसके समक्ष पेश नहीं हो रही थीं। उन्होंने डर जताया था कि अगर वो पूछताछ में शामिल होने थाने जाती हैं तो उन्हें वहाँ गिरफ्तार किया जा सकता है। महिला अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दायर किया गया ये मामला पिछले साल का है। शर्लिन चोपड़ा पहले सेशन कोर्ट गई थीं, जहाँ उन्हें राहत नहीं मिली। रिटारर्ड कस्टम ऑफिसर मधुकर केनी ने शिकायत दर्ज कराई थी।

मधुकर केनी ने अपनी शिकायत में कहा था कि शर्लिन चोपड़ा फ्री वेबसाइट्स पर अश्लील कंटेंट पोस्ट करती हैं जो गलत है। उन्होंने शिकायत में कहा था कि अगर गूगल पर शर्लिन चोपड़ा का नाम डाला जाए तो अश्लील वीडियो आते हैं। इसके बाद उन्होंने कुछ वीडियोज डाउनलोड कर साइबर सेल को सौंपे थे। वहीं इस पूरे मामले में शर्लिन चोपड़ा के वकील ने उनका पक्ष रखते हुए कहा है कि अभिनेत्री ने किसी को भी इस बात की अनुमति नहीं दी है कि उनके आर्टिकल्स को पब्लिश करे और वो वीडियो चुराए हुए हैं।

पंजाब के पूर्व AAP विधायक सुखपाल सिंह खैरा के ठिकानों पर ED की छापेमारी: मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी केस में एक्शन

मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता और पंजाब के मौजूदा विधायक सुखपाल सिंह खैरा के चंडीगढ़ स्थित घर समेत कई ठिकानों पर धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत छापेमारी की है।

रिपोर्टों के अनुसार, PMLA मामला मादक पदार्थों की तस्करी और नकली पासपोर्ट से जुड़ा हुआ है। ईडी के अधिकारी खैरा के बैंक लेनदेन और संपत्ति के कागजात को भी देख रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, पंजाब के पाँच स्थानों, दिल्ली के दो स्थानों और चंडीगढ़ के एक स्थान पर तलाशी ली गई। ईडी के अधिकारी मंगलवार (मार्च 9, 2021) सुबह चंडीगढ़ के सेक्टर-5 में सुखपाल सिंह खैरा के घर पहुँचे और उनकी संपत्ति की तलाशी ली। कपूरथला में उनके पैतृक घर पर भी छापा मारा गया। उनका बेटा, महिताब सिंह, जो चंडीगढ़ में रहता है, अपने पैतृक गाँव में था।

ईडी अधिकारियों के वाहनों को मौके पर पहुँचने के बाद महिताब ने अपनी कार निकाली और वहाँ से चले गए। इस बीच, खैरा ने निर्दोष होने की दलील दी और कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं है। प्रवर्तन निदेशालय ने उसके चचेरे भाई सह कोषाध्यक्ष कुलबीर सिंह से भी पूछताछ की।

खैरा AAP के साथ अपने कार्यकाल के दौरान पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता थे। 2019 में, उन्होंने अपनी पंजाब एकता पार्टी शुरू की और राज्य विधानसभा में 2 सीटें जीतीं। वह केंद्र सरकार द्वारा किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने में मदद करने के लिए बनाए गए नए कृषि कानूनों के भी मुखर आलोचक रहे हैं। खैरा के वकील ने अब आरोप लगाया है कि उन्हें किसानों का समर्थन करने के लिए निशाना बनाया जा रहा है।

यह पहली बार नहीं है जब खैरा विवादों में हैं। इससे पहले वर्ष 2015 में उनके खिलाफ ड्रग्स तस्करी के मामले में भी मामला दर्ज किया गया था। फाजिल्का कोर्ट ने कुछ ड्रग्स तस्करों की गिरफ्तारी के बाद खैरा को समन किया था। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए तस्करों से 2 किलो हेरोइन, 24 जीबी बिस्किट, दो पाकिस्तानी सिम कार्ड और एक देशी पिस्टल बरामद की थी। खैरा पर आरोप है कि वह अपने पर्सनल सेक्रेटरी के फोन से तस्करों से बात किया करते थे।

इस मामले में खैरा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने भी उनकी माँग ठुकरा दी थी जिसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट गए। जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट पर रोक लगा दी थी। इस मामले में 9 ड्रग्स तस्कर गिरफ्तार किए गए थे। वहीं खैरा को समन किए जाने के बाद पीईपी के विधायक को अतिरिक्त आरोपित बनाया गया था।

रिम्स के गद्दे और तकिए लेकर रफूचक्कर हो गए लालू यादव के 10 सुरक्षाकर्मी, अस्पताल प्रबंधन ने राँची SSP से लगाई गुहार

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव अक्सर अजीबोगरीब कारणों से विवादों में रहते हैं। अब खुलासा हुआ है कि लालू यादव की सुरक्षा में लगे जवान अपने साथ तकिया और गद्दा भी लेकर चले गए हैं। बता दें कि चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता लालू यादव के अधिकतर दिन राँची के RIMS में गुजरे हैं और वहाँ उन्हें खास सुविधाएँ दी गई थीं। अब RIMS अस्पताल ने राँची के SSP को पत्र लिख कर गद्दे और तकिए वापस करने की माँग की है।

झारखंड के पुलिस विभाग में इस चिट्ठी के बाद से गहमागहमी देखने को मिल रही है। लालू यादव काफी दिनों तक RIMS निदेशक के बँगले में शिफ्ट किए गए थे। इसका कारण ये था कि कोरोना संक्रमण में उन्हें खतरा था और कुत्तों के भौंकने से उन्हें परेशानी होती थी। उनकी सुरक्षा में तैनात 10 पुलिसकर्मियों की भी सुविधाओं का ध्यान RIMS ही रख रहा था, इसीलिए गद्दे और तकिए भी उन्हें दिए गए थे।

लालू यादव इस दौरान बिहार के विधायकों को फोन कॉल कर-कर के नीतीश कुमार की सरकार गिराने के चक्कर में लग गए, जिसके बाद कोर्ट केस हुआ और उन्हें फिर से पेइंग वॉर्ड में शिफ्ट कर दिया गया। लालू यादव और उनके सुरक्षाकर्मियों ने बँगला खाली तो किया, लेकिन वहाँ से तकिए और गद्दे भी लेकर चले गए। RIMS प्रबंधन ने जब उन जवानों से संपर्क किया तो उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। तब SSP को पत्र लिखा गया।

अब पुलिस के आला अधिकारियों ने उन पुलिसकर्मियों को आदेश दिया है कि वो अस्पताल की चीजें वापस करें। इनमें 2 हवलदार और 8 आरक्षी पुलिसकर्मी शामिल हैं। उन जवानों को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा गया है अगर वो आदेश का पालन नहीं करते हैं तो उन पर कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही उनसे स्पष्टीकरण भी माँगा गया है। खास बात तो ये है कि ये गद्दे और तकिए भी RIMS प्रबंधन ने एक टेंट हाउस से भाड़े पर लिया था। अब रिम्स को उसका अतिरिक्त भाड़ा देना पड़ेगा।

बता दें कि एक वायरल ऑडियो क्लिप में लालू यादव ने विधायक से कहा था, “अच्छा सुनो। हम लोग तुमको आगे भी आगे बढ़ाएँगे। कल जो स्पीकर का चुनाव है, उसमें हम लोगों का साथ दो। हम लोग तुम्हें मंत्री बनाएँगे। कल तो इसको हम गिरा देंगे।” जब विधायक ने कहा था कि वो पार्टी में हैं तो लालू यादव ने जवाब दिया था कि पार्टी में हो तो अनुपस्थित हो जाओ, कह दो कि कोरोना हो गया है। इस ऑडियो के वायरल होने के बाद कोर्ट में केस भी हुआ था।

1 साल में 1000+ मर्द बन गए महिला: विदेश नहीं, भारत के इस शहर में बढ़ रही सेक्स सर्जरी की माँग

गुजरात में एक खास प्रकार की सर्जरी को लेकर नया ट्रेंड शुरू हुआ है। ये कोई आम सर्जरी नहीं है, बल्कि इसके द्वारा किसी पुरुष को महिला बनाया जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो अहमदाबाद में लिंग परिवर्तन कराने के हाल के दिनों में कई मामले सामने आए हैं। सर्जरी करा कर पुरुष खुद को महिला बना रहे हैं। ऐसे 20 व्यक्ति सामने आए हैं, जिन्होंने दोहरे व्यक्तित्व की बात करते हुए पुरुष से महिला बनने की सर्जरी कराई है।

इसके लिए किसी एक सर्जरी की ज़रूरत नहीं होती है, बल्कि कई स्टेज की सर्जरी करानी होती है। इनमें से कई लोग सर्जरी के अलग-अलग स्टेजों पर हैं। हालाँकि, उन्हें समाज का भी डर है।

सामाजिक डर के कारण वो गाँव-शहर में अपनी पहचान छुपा कर जीवन व्यतीत कर रहे हैं। समाज में कुछ लोगों ने उन्हें सहजता से स्वीकार भी किया है। ‘जेंडर चेन्ज सर्जरी’ बहुत कम ही अस्पतालों में होती है क्योंकि इसकी प्रक्रिया जटिल है।

प्लास्टिक सर्जन डॉक्टर हर्ष अमीन ने बताया, “2020-21 में सिर्फ अहमदाबाद में ही पुरुष से महिला बनाने वाली लिंग परिवर्तन सर्जरी का आँकड़ा 1000 पहुँच गया है। 1 वर्ष में 50-60 मरीजों ने पूछताछ की, जिनमें से 14 पुरुषों की सर्जरी मैं कर चुका हूँ। मेरी तरह अहमदाबाद में 80 से अधिक प्लास्टिक सर्जन हैं।”

इस तरह से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि लिंग परिवर्तन कराने वालों की संख्या किस हिसाब से बढ़ती ही जा रही है।

अहमदाबाद के वरिष्ठ प्लास्टिक सर्जन डॉक्टर श्रीकांत लागवणकर ने जानकारी दी, “कॉर्पोरेट अस्पतालों में इस तरह की सर्जरी के लिए 8 लाख रुपए तक का खर्च आता है। ज्यादातर लोग पहचान उजागर होने से बचने के लिए विदेश में ऐसी सर्जरी कराने जाते थे, लेकिन अब ट्रेंड बदल रहा है। बीते 15 दिनों में ही अहमदाबाद में ही ऐसी 6 लोगों की सर्जरी की जा चुकी है।”

रूस से MBBS करने वाली एक ट्रांसवूमन का जन्म एक पुरुष के रूप में हुआ था, लेकिन वो मन से खुद को महिला मानती हैं। उन्होंने पहले कभी अपने घर-परिवार में ये बात नहीं बताई थी लेकिन अब वो निःसंकोच इन चीजों का सामना करती हैं और अपना लिंग बदलवा कर पूरी तरह महिला बनना चाहती हैं।

उन्होंने अपना सीमन फ़्रीज कराने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। ऐसा करने से बच्चा जैविक तौर पर उन्हीं का होगा, क्योंकि पिता के तौर पर यह उनके सीमन में मौजूद स्पर्म से ही जन्म लेगा। उनका नाम डॉक्टर जेनसूर दायरा है।

‘200 वर्षों के इतिहास को बदनाम कर रही है आलिया की फिल्म’: कॉन्ग्रेस MLA ने कहा – शीर्षक बदलो

कॉन्ग्रेस के एक विधायक ने अभिनेत्री आलिया भट्ट की आगामी फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ का नाम बदलने की माँग की है। महाराष्ट्र के मुम्बादेवी विधानसभा क्षेत्र से तीसरी बार विधायक बने अमीन पटेल ने फिल्म के शीर्षक पर विरोध दर्ज कराया है।

विधायक अमीन पटेल ने कहा कि इस फिल्म का शीर्षक काठियावाड़ शहर को बदनाम करता है, इसीलिए इसे बदला जाना चाहिए। फिल्म में मुंबई के रेड लाइट एरिया की पुरानी कहानी दिखाई गई है। महाराष्ट्र की सत्ता में साझीदार कॉन्ग्रेस के विधायक ने कहा

“अब ये शहर ऐसा नहीं है जैसा 50 के दशक में हुआ करता था। यहाँ महिलाएँ अब कई अलग-अलग क्षेत्रों में बड़ा मुकाम हासिल कर रही हैं। इस फिल्म का टाइटल काठियावाड़ (कामतीपुर) शहर को बदनाम करता है। इसका नाम बदला जाना चाहिए।”

जुलाई 30 को रिलीज होने जा रही इस फिल्म को हुसैन जैदी की पुस्तक ‘माफिया क्वींस ऑफ मुंबई’ के आधार पर बनाया गया है। इस फिल्म का निर्देशन संजय लीला भंसाली ने किया है, जो अक्सर अपनी पिछली फिल्मों की वजह से विवादों में रहे हैं।

कॉन्ग्रेस विधायक ने महाराष्ट्र विधानसभा में बोलते हुए ये मुद्दा उठाया। उस क्षेत्र के लोगों ने भी फिल्म के शीर्षक पर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने इस फिल्म पर इलाके को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के 200 वर्षों के इतिहास को ये फिल्म बदनाम कर रही है।

गंगूबाई काठियावाड़ी 60 के दशक में मुंबई के अपराध जगत में एक बहुत बड़ा नाम थी। कहा जाता है कि उनके पति ने उन्हें मात्र 500 रुपए के लिए बेच डाला था। इसके बाद वो वेश्यावृत्ति में लिप्त हो गई थी।

ऐसा कहा जाता है कि गंगूबाई ने मजबूर लड़कियों के लिए भी काफी अच्छे काम किए थे। फिल्म में उनके किरदार में आलिया भट्ट को रखा गया है। पहली बार गैंगस्टर का किरदार निभा रहीं आलिया की संजय लीला भंसाली के साथ भी ये पहली फिल्म है।

खास बात ये है कि जिस महिला पर ये फिल्म बन रही है, उसके ही परिवार वालों ने निर्देशक और अभिनेत्री को मुकदमे में घसीटा है। दिसंबर 2020 में आलिया भट्ट और संजय लीला भंसाली के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, जिसके बाद कोर्ट ने इन दोनों से जवाब माँगा था।

त्रिवेंद्र सिंह रावत नहीं रहेंगे उत्तराखंड के CM? BJP आलाकमान में मंथन का दौर जारी, मीडिया में अटकलों का बाजार गर्म

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को लेकर कुछ दिनों से भाजपा में उहापोह की स्थिति बनी हुई थी क्योंकि कुछ विधायकों के उनसे नाराज़ होने की खबरें सामने आई थीं। खबरों में कहा जा रहा था कि भाजपा के राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी या मंत्री सतपाल महाराज में से किसी एक को उनकी जगह लेने के लिए चुना जा सकता है। अब संभावना जताई जा रही है कि भाजपा आलाकमान ने उन्हें हटाने का फैसला लिया है।

उत्तराखंड भाजपा के प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम से जब इस बाबत सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, “क्यों नहीं रहेंगे वो (रावत) मुख्यमंत्री? क्या कारण है जो हटाए जाएँगे? वो एक अच्छे मुख्यमंत्री हैं। भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है उन पर। वो हैं मुख्यमंत्री अभी। अच्छा कार्य किया है उन्होंने। केंद्र की सभी योजनाओं को उन्होंने निचले स्तर तक पहुँचाया है। आयुष्मान भारत कार्ड उत्तरखंड में हर व्यक्ति को मिला हुआ है।”

उन्होंने कहा कि सीएम रावत के कार्यकाल में मात्र 1 रुपए में पानी का कनेक्शन दिया गया है। उन्होंने ये भी कहा कि त्रिवेंद्र सिंह रावत की कार्यशैली पर प्रश्न उठाना ठीक नहीं है। वहीं ABP न्यूज़ के विकास भदौरिया ने दावा किया कि उतराखंड पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर पार्टी ने सीएम त्रिवेंद्र रावत को मुख्यमंत्री से हटाने का फ़ैसला किया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही पर्लियामेंट्री बोर्ड की मुहर लगेगी और विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए विधायक दल की बैठक जल्द बुलाई जाएगी।

इस मामले में संसद भवन में पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री के साथ संगठन महासचिव बीएल संतोष की पर्यवेक्षक डॉ. रमन सिंह और प्रभारी दुष्यंत गौतम की रिपोर्ट पर मैराथन बैठक हुई। वहीं कुछ ख़बरों में ये भी कहा जा रहा था कि उन्हें नहीं हटाया जाएगा और मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए मामले को सुलझाया जाएगा। ‘अमर उजाला’ की खबर में कहा गया था कि राज्य में राजपूत-ब्राह्मण संतुलन और विधानसभा चुनाव से पहले नए चहेरे के खतरे के आकलन के बाद ही फैसला होगा।

उत्तराखंड हाल ही में प्रकृति के एक बड़े प्रकोप से उबरा है, जो भीषण आपदा का रूप ले सकती थी। इसमें 200 से अधिक लोग मारे गए। हालाँकि, उस दौरान सीएम रावत खुद घटनास्थल का दौरा कर के स्थिति की समीक्षा करते हुए चौकस दिखे थे।

‘भारतीय सेना रेप करती है’: DU में आपत्तिजनक पोस्टर, विरोध करने पर ABVP छात्रा के कपड़े फाड़े

दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस में भारतीय सेना पर अपमानजनक टिप्पणी का मामला सामने आया है। इस पर ABVP ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए शिकायत भी दायर की है। संगठन ने आरोप लगाया कि कुछ पूर्व छात्रों और बाहरी लोगों द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में ‘भारतीय सेना हमारा रेप करती है’ लिखे पोस्टर्स लहराए गए। ABVP ने बिना अनुमति आयोजित इस कार्यक्रम का विरोध किया है।

जब ये सब हो रहा था, तब DU छात्र संघ की जॉइंट सेक्रेटरी शिवांगी खड़वाल वहाँ से गुजर रही थीं। तभी उस कार्यक्रम के कार्यकर्ताओं द्वारा आपत्तिजनक नारे लगाए गए। भारतीय सेना विरोधी पोस्टर को देख कर जब शिवांगी खड़वाल ने आयोजकों से इस कार्यक्रम के उद्देश्य के बारे में पूछा तो जवाब में वहाँ पर उपस्थित कार्यक्रम के लोगों ने शिवांगी और उनके साथियों पर हमला कर दिया। इस हमले के बाद छात्र और बाहरी लोगों के बीच बुरी तरह से हाथापाई हुई।

दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने शिवांगी को बधाई देते हुए कहा कि ये पोस्टर देख कर वो वहाँ घुस गईं और अकेले भीड़ में घुस के उस पोस्टर को उखाड़ फेंका। शिवांगी ने दिल्ली पुलिस के समक्ष दायर की गई शिकायत में कहा है कि भारतीय सेना के अपमान वाले पोस्टर का विरोध करने पर उन्हें धक्का मारा गया और उनके कपड़े फाड़ डाले गए। शिकायत में भारतीय सेना को ‘बलात्कारी’ कहे जाने के आरोप भी लगाए गए।

बताया जा रहा है कि उक्त कार्यक्रम ‘भगत सिंह छात्र एकता मंच’ नामक संस्था द्वारा आयोजित किया गया था। ABVP ने एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें उक्त कार्यक्रम में एक वक्ता कह रही होती हैं, “जब पुलिस आपका रेप करती है, भारतीय सेना आपका रेप करती है, फिर आप अपनी फरियाद लेकर जिस कोर्ट में जाते हो, वहाँ भी लोग बिके हुए होते हैं।” एक ही वाक्य में पुलिस, सेना और जजों को लपेट लिया गया।

ABVP ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ ऐसे कार्यक्रमों का पुरजोर विरोध करता है, जिसे बिना किसी अनुमति के आयोजित किया जाता है तथा जिसमें सेना के विरुद्ध गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता हो। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन से ऐसे कार्यक्रम के आयोजकों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की माँग की, जिन्होंने महिला दिवस के शुभ अवसर पर सेना की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया।”