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LoC पर युद्धविराम समझौते के लिए भारत-पाक तैयार, दोनों देशों ने जारी किया संयुक्त बयान

भारत और पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर अब गोलीबारी नहीं होगी। दोनों देशों के डीजीएमओ यानी डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन के बीच आज हॉटलाइन पर हुई बातचीत में बॉर्डर पर शांति बनाए रखने के लिए सहमति बनी है। इसके साथ ही, दोनों देश हॉटलाइन से संपर्क रखने और सीमा पर होने वाली फ्लैग मीटिंग पर भी सहमत हुए हैं। इसके जरिए किसी गलतफहमी को दूर करने में मदद मिलेगी और तनावपूर्ण स्थिति को भी काबू में रखा जा सकेगा।

बता दें कि दोनों देशों के बीच 2003 का युद्धविराम समझौता अब सख्ती से लागू होगा। और इसी समझौते के तहत भारत और पाकिस्तान की सेना ने इसे मानने और एलओसी पर सीजफायर की कड़ी निगरानी करने को लेकर सहमति जताई। बातचीत के दौरान जिन फैसलों पर सहमति बनी, वे 24-25 फरवरी की आधी रात लागू होंगे। दोनों पक्षों ने एक जॉइंट स्टेटमेंट में कहा कि बातचीत बेहद सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई और काफी सफल रही।

भारत-पाकिस्तान के एक संयुक्त बयान में इस बातचीत से जुड़ी जानकारी दी गई। संयुक्त बयान के मुताबिक, “इस वार्ता में सीमाओं के साथ पारस्परिक रूप से लाभप्रद और स्थायी शांति प्राप्त करने के हित में दोनों DGsMO एक-दूसरे के प्रमुख मुद्दों और चिंताओं पर ध्यान देने के लिए सहमत हुए। जिनमें शांति भंग करने और हिंसा को कम करने की बात कही गई है।”

संयुक्त बयान में बताया गया, “दोनों पक्षों ने सभी समझौतों, समझ और नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम की स्थिति का कड़ाई से पालन करने के लिए 24/25 फरवरी 2021 की मध्यरात्रि से नियंत्रण रेखा और अन्य सभी क्षेत्रों में गोलीबारी न करने पर आपसी सहमति जताई है।”

बयान में यह भी कहा गया है कि, “दोनों पक्षों ने दोहराया कि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति या गलतफहमी को हल करने के लिए हॉटलाइन संपर्क और बॉर्डर फ्लैग मीटिंग के मौजूदा तंत्र का उपयोग किया जाएगा।”

गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम 2003 में लागू हुआ था। हालाँकि, पाकिस्तान लगातार युद्धविराम का उल्लंघन करता आया है। साल 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति मुशर्रफ के बीच ये समझौता हुआ था, लेकिन आतंकियों को पनाह देने वाला पाकिस्तान अक्सर आतंकवादियों की भारत में घुसपैठ कराने की कोशिश करता आया है और यह किसी से छिपा नहीं है। इसी कारण वह युद्धविराम का उल्लंघन करता आया है।

उल्लेखनीय है कि सीजफायर तोड़ने के मामले में पाकिस्तान ने 2020 में पिछले 17 साल के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। इस साल पाकिस्तान की तरफ से 5,133 से ज्यादा बार सीजफायर तोड़ा जा चुका है। 2019 में 3,479 बार सीजफायर का उल्लंघन हुआ था। 2018 में 2,140 बार सीजफायर का उल्लंघन किया गया था।

यहाँ के CM कॉन्ग्रेस आलाकमान के चप्पल उठा कर चलते थे.. पूरे भारत में लोग उन्हें नकार रहे हैं: पुडुचेरी में PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (फरवरी 25, 2021) को पुडुचेरी में विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस मौके पर पुडुचेरी की उपराज्यपाल तमिलसाई सुंदरराजन भी उपस्थित रहीं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान पुडुचेरी विकास के लिए हर संभव समर्थन का आश्वासन दिया और साथ ही उन्होंने कॉन्ग्रेस पर हमला भी किया। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे 2016 में पुडुचेरी के लोगों ने बहुत उम्मीद के साथ कॉन्ग्रेस के लिए वोट किया। 

पीएम मोदी ने कहा कि जनता को लगा था कि कॉन्ग्रेस की सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करेगी, लेकिन 5 साल बाद लोग निराश हैं और जनता के सपने और उम्मीदें टूट चुकी हैं। पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस दूसरों को लोकतंत्र विरोधी कहने का कोई मौका नहीं छोड़ती, लेकिन उस पार्टी को खुद को शीशे में देखने की जरूरत है। बकौल पीएम मोदी, कॉन्ग्रेस ने हर संभव तरह से लोकतंत्र का अपमान किया।

पीएम मोदी ने बताया कि कैसे पुडुचेरी में नारायणसामी की सरकार ने पंचायत के चुनाव कराने से इनकार कर दिया। पार्टी ने हर सेक्टर को नुकसान पहुँचाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस लोगों के लिए काम करने में विश्वास नहीं करती है, मुझे समझ नहीं आता कि कॉन्ग्रेस क्यों नहीं चाहती कि कोई दूसरा लोगों के लिए काम करे। उन्होंने कहा कि प्रदेश को एक ऐसी सरकार मिली थी जो दिल्ली में कॉन्ग्रेस आलाकमान की सेवा में व्यस्त थी। उन्होंने कहा:

“कॉन्ग्रेस सरकार के नेताओं की प्राथमिकताएँ अलग थीं। पूरे भारत में लोग कॉन्ग्रेस को खारिज कर रहे हैं। संसद में उनकी सीटें इतिहास में अब तक सबसे कम हैं। सामंती राजनीति, वंशवाद की राजनीति, संरक्षण की राजनीति की कॉन्ग्रेस संस्कृति समाप्त हो रही है। हेल्थकेयर सेक्टर आने वाले समय में मुख्य भूमिका निभाएगा। जो देश स्वास्थ्य में निवेश करेंगे वो चमकेंगे। इस साल के बजट में स्वास्थ्य सेक्टर को बड़ी बढ़त मिली है। सभी को क्वालिटी वाली स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने के उद्देश्य के अनुरूप, वे JIPMER में ब्लड सेंटर का उद्घाटन कर रहा हूँ।”

इस दौरान पीएम मोदी ने मछुआरों के बीच राहुल गाँधी द्वारा बोले गए झूठ पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि पहले एक महिला जब मुख्यमंत्री के बारे में शिकायत कर रही थी, पूरी दुनिया ने महिला की आवाज में उसका दर्द सुना लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री ने सच बताने की बजाए अपने ही नेता को गलत अनुवाद बताया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ‘बाँटो, झूठ बोलो और राज करो’ की रणनीति से काम करती है।

पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस के नेता ने यहाँ आकर दावा किया कि वो मत्स्य मंत्रालय बनाएँगे, लेकिन हमारी सरकार ने पहले ही ये मंत्रालय बना चुकी है जो लोगों के लिए काम कर रहा है, ऐसे में कॉन्ग्रेस के नेता यहाँ लोगों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ के सीएम कॉन्ग्रेस आलाकमान की चप्पल उठा कर चलते थे। उन्होंने कहा कि टूरिज्म, बिजनेस और हेल्थ के क्षेत्र में पुडुचेरी को भाजपा आगे ले जाएगी।

राहुल गाँधी ने पुडुचेरी में दावा किया था कि जैसे भूमि के किसान होते हैं, ऐसे ही वो मछुआरों को समुद्र का किसान मानते हैं। साथ ही उन्होंने पूछा था कि जब भूमि के किसानों के लिए मंत्रालय है तो फिर समुद्र के किसानों के लिए दिल्ली में मंत्रालय क्यों नहीं? उन्होंने यही बात केरल के कोल्लम स्थित थांगसेरी बीच पर वहाँ के मछुआरों से बात करते हुए दोहरा दी थी। उन्होंने उन मछुआरों से कहा था कि दिल्ली में आपके लिए बोलने वाला कोई नहीं है।

narendra modi in puducherry rahul gandhi fisheries ministry cm narayanasamy translation

‘लोकतंत्र सेनानी’ आज़म खान की पेंशन पर योगी सरकार ने लगाई रोक, 16 सालों से सरकारी पैसों पर कर रहे थे मौज

‘भू-माफिया’ घोषित किए जा चुके उत्तर प्रदेश के रामपुर से सांसद आजम खान को ‘लोकतंत्र सेनानी’ के रूप में हर महीने पेंशन मिल रही थी, जिस पर योगी आदित्यनाथ की सरकार ने रोक लगा दी है। आजम खान और उनके ट्रस्ट के नाम पर करोड़ों की संपत्ति और कई अवैध निर्माण व कब्जाई गई जमीनें हैं। उन पर कई आपराधिक मुक़दमे चल रहे हैं। ‘लोकतंत्र सेनानी पेंशन’ के रूप में वो हर माह 20,000 रुपए अलग से उठा रहे थे, जिसे रोक दिया गया है।

इंदिरा गाँधी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा 1975 में लगाए गए आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले नेताओं को ‘लोकतंत्र सेनानी’ का दर्जा देकर उन्‍हें मासिक पेंशन दिए जाने का प्रावधान किया गया था, जिसका आजम खान भी जम कर फायदा उठा रहे थे। 2005 में उत्तर प्रदेश की सरकार ने उन्हें ‘लोकतंत्र सेनानी’ घोषित करते हुए उनके लिए पेंशन की व्यवस्था की थी। तब लखनऊ में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव की सरकार थी।

शुरुआत में इस पेंशन के तहत 500 रुपए प्रतिमाह मिलते थे लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 20,000 रुपए कर दिया गया। कहा जा रहा है कि कई मुकदमों में उनके आरोपित होने की वजह से यूपी सरकार ने उन्हें मिलने वाली पेंशन पर रोक लगाई है। इमरजेंसी के काल में आजम खान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्र संघ से जुड़े हुए थे और उन्हें पकड़ कर जेल में डाल दिया गया था। उन्होंने तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार का विरोध किया था।

अब बुधवार (फरवरी 24, 2021) को रामपुर के जिला प्रशासन ने जब ‘लोकतंत्र सेनानियों’ की सूची जारी की तो उसमें आजम खान का नाम शामिल नहीं था। इस सूची में जिले के 35 लोगों के नाम थे। इससे पहले 37 लोगों को ये पेंशन दी जा रही थी। रामपुर के डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने कहा कि आपराधिक मुकदमों की वजह से आजम की पेंशन रोकी गई है। सरकार ने इस सम्बन्ध में जानकारी भी माँगी थी।

हाल ही में उनके जौहर ट्रस्ट की 173 एकड़ (70 हेक्टेयर) जमीन यूपी सरकार के नाम दर्ज हो गई थी। राजस्व अभिलेखों में जमीन से जौहर ट्रस्ट का नाम काट कर यूपी सरकार के नाम पर चढ़ा दिया गया था। अखिलेश सरकार में जौहर ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीन पर जौहर यूनिवर्सिटी बनी हुई है। इसकी खरीद के दौरान उचित शर्तों का पालन नहीं किया गया। ट्रस्ट की जमीन पर पिछले दस सालों में चैरिटी का कोई कार्य न होने की बात भी सामने आई है।

RSS कार्यकर्ता नंदू की हत्या के लिए SDPI ने हिन्दूवादी संगठन को ही बताया जिम्मेदार: 8 गुंडे पुलिस हिरासत में, BJP ने किया बंद का ऐलान

केरल के अलप्पुझा में बुधवार (24 फरवरी 2021) को दो गुटों के बीच हुए संघर्ष के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ता नंदू कृष्णा की हत्या कर दी गई थी। भारतीय जनता पार्टी ने आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या के विरोध में अलप्पुझा जिले में सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक ‘हड़ताल’ का आह्वान किया है। भाजपा के अलावा कई हिन्दू संगठनों ने भी इस बंद के ऐलान का समर्थन किया है।

भाजपा और अन्य हिन्दू संगठनों द्वारा घोषित किए गए इस बंद के बाद अलप्पुझा की कई तस्वीरें भी सामने आई हैं। तस्वीरों में सड़कों और चौराहों पर बंद का प्रभाव स्पष्ट रूप से नज़र आ रहा है। केरल भाजपा के अध्यक्ष के सुरेन्द्रन ने भी आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया है कि इस हत्या के पीछे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफआई) का हाथ है। गौरतलब है कि एसडीपीआइ इस्लामी संगठन PFI की ही एक राजनीतिक इकाई है।

पुलिस ने इस मामले में पूछताछ के लिए 8 एसडीपीआई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है। पुलिस की शुरूआती जाँच में यह बात सामने आई है कि हिरासत में लिए गए एसडीपीआई के सभी कार्यकर्ता हत्या में शामिल हैं। बता दें एसडीपीआई (सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया), इस्लामी कट्टरपंथी समूह पीएफ़आई का राजनीतिक संगठन है। पुलिस घटनाक्रम के तमाम पहलुओं को मद्देनज़र रखते हुए जाँच कर रही हैं।

इस घटना पर एसडीपीआई की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई है, उनका कहना है कि इस मामले की जाँच होनी चाहिए। SDPI ने आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या के लिए आरएसएस को ही जिम्मेदार ठहराते हुए दावा किया कि कई आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला किया जिसमें उनके भी कई कार्यकर्ता बुरी तरह घायल हो चुके हैं। फ़िलहाल घटनास्थल पर भारी मात्रा में पुलिसबल तैनात कर दिया गया है। बुधवार (फरवरी 24, 2021) को ‘सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI)’ ने एक रैली निकाली थी, जिसमें हिंसा हुई थी। इसमें 6 लोग घायल भी बताए गए थे।

इसके अलावा 22 वर्षीय RSS कार्यकर्ता नंदू कृष्णा की हत्या कर दी गई थी। नंदू कृष्णा को वायलार में RSS का स्थानीय प्रमुख बनाया गया था। RSS के शाखा प्रमुख नंदू को इलाज के लिए एर्नाकुलम अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पुलिस ने सुरक्षा कड़ी कर दी है क्योंकि भाजपा ने दिन भर हड़ताल की घोषणा की थी।

रैली दोपहर में ही निकाली गई थी, लेकिन शाम को विरोध प्रदर्शन के बाद हिंसा हुई। बताया जा रहा था कि SDPI की रैली में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी, जिसके खिलाफ हिन्दू कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे। नंदू के एक साथी पर भी चाकू से वार किया गया, जिनका इलाज चल रहा है। भाजपा चेरथला निर्वाचन क्षेत्र के अध्यक्ष अभिलाष मपरमपिल ने आरोप लगाया था कि पुलिस की मौजूदगी में ही इस घटना को अंजाम दिया गया।

दिल्ली दंगों का 1 साल: मस्जिदों को राशन, पीड़ित हिन्दुओं को लंबी कतारें, प्रत्यक्षदर्शी ने किया खालसा व केजरीवाल सरकार की करतूत का खुलासा

दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों को एक साल पूरा हो चुका है। महीनों तक चला यह हिंसक CAA विरोधी उपद्रव भयावह रूप से हिंसक हो पड़ा था। लगभग 3 दिनों तक चली इस हिंसा में 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। अब जब इस हिंसा को एक वर्ष पूरे हो चुके हैं, ऑपइंडिया ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के स्थानीय लोगों से बातचीत की, जिन्होंने हमारे साथ इस एक साल के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने हमें दिल्ली के AAP सरकार के दोहरे रवैये के बारे में भी बताया।

दिल्ली दंगों के एक पीड़ित ने हमें बताया कि खालसा ऑर्गनाइजेशन के लोगों ने मदद देते समय हिन्दुओं और मुस्लिमों में खासा भेदभाव किया, अधिकतर हिन्दुओं को नज़रअंदाज़ किया गया। ऑपइंडिया से बातचीत करते हुए राहुल शर्मा (बदला हुआ नाम) ने बताया कि खालसा वालों ने केवल मुस्लिमों की ही सहायता की और हिन्दुओं को मदद के नाम पर टोकन दे दिया। वो चांँदबाग इलाके के रहने वाले हैं।

चाँदबाग वही क्षेत्र है, जहाँ आईबी अधिकारी रहे अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। उन्हें ‘अल्लाहु अकबर’ का मजहबी नारा लगाती हुई भीड़ घसीट कर ले गई थी। दिल्ली की गलियों में हो रही इस हिंसा में इस्लामी भीड़ ने ऐसा क्रूर प्रदर्शन किया है, जैसा हाल के दिनों में नहीं देखने को मिला है। अंकित शर्मा और दिलबर नेगी की हत्या का मामला सबसे ज्यादा चर्चा में आया था। दिलबर नेगी को ज़िंदा आग में झोंक दिया गया था।

एक पीड़ित ने बताया, “दिल्ली में हुए दंगों के कुछ महीनों बाद खालसा वालों को सहायता बाँटते हुए देखा गया था। उन्होंने पीड़ितों के पुनर्वास का जिम्मा उठाया हुआ था। हालाँकि, उनका समर्थन भेदभाव से भरा हुआ था। खालसा वालों ने हिन्दुओं के खिलाफ भेदभाव किया और मुस्लिमों को सहायता दी।” उसने यहाँ तक दावा किया कि 100 में से 90% के औसत से उन्होंने मुस्लिमों की मदद की और हिन्दुओं को नज़रअंदाज़ किया।

दंगे के प्रत्यक्षदर्शियों ने दिल्ली में चल रही अरविंद केजरीवाल की AAP सरकार पर भी पक्षपात के आरोप लगाए। इस व्यक्ति ने कहा कि दिल्ली सरकार ने भी हिन्दू पीड़ितों पर ध्यान नहीं दिया। उसने बताया कि केजरीवाल सरकार ने मस्जिदों में अनाज और फल भेजे, जबकि हिन्दुओं को दुकानों के बाहर लंबी लाइनें लगा कर संघर्ष करना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि मस्जिदों में सरकार से आई सामग्रियों का मुस्लिमों में वितरण किया गया।

प्रत्यक्षदर्शी ने ये भी बताया कि इलाके में अभी भी शांति कायम नहीं है, बल्कि तनाव और हिन्दुओं के बीच डर का माहौल है। उसने हमें बताया कि मुस्तफाबाद में मुस्लिम भीड़ ने बाइक से जा रहे एक हिन्दू युवक की पिटाई की, जिसके बाद तनाव फ़ैल गया। उसने बताया कि इस खबर को मीडिया ने भी प्राथमिकता नहीं दी। हिन्दुओं को वहाँ जाना पड़ा, ताकि मामला शांत हो।

दिल्ली दंगों के दौरान ‘शिव विहार’ के लोगों ने भी बताया था कि चौक के पास की सड़क के एक तरफ मुस्लिमों के घर सलामत थे, दूसरी तरह हिन्दुओं की दुकानें ख़ाक में मिली हुई थीं। लोगों ने बताया था कि हमले इन्हीं मुस्लिमों के घर से हुए थे और मुस्लिम महिलाएँ भी अपनी छतों पर खड़े होकर पुलिस बलों पर एसिड से हमले कर रही थीं। बताया गया कि राजधानी स्कूल की छत पर काफ़ी ऊँचाई पर थे, जहाँ से हिन्दू ही अधिकतर निशाना बने।

केजरीवाल की रैली में ₹500 देने का वादा कर जुटाई भीड़, रूपए ना मिलने पर मजदूरों का हंगामा

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की रैली में आए लोगों ने दावा किया है कि वो मजदूर हैं और उन्हें 500-500 रुपए देने का वादा कर के यहाँ बुलाया गया था। उनका कहना है कि अब तक मजदूरों को पैसों का भुगतान भी आम आदमी पार्टी (AAP) नेताओं द्वारा नहीं किया गया है। एक वीडियो सामने आया है, जिसमें ये मजदूर रुपए देने का वादा करने वाले AAP नेताओं को ढूँढ रहे है और एक नेता उन्हें किसी दूसरे के पास जाने की सलाह दे रहा है।

‘Newsroom Post’ के इस वीडियो में देखा जा सकता है कि रैली में आने के लिए तय किए गए रुपए न मिलने के कारण मजदूर भड़के हुए हैं और पैसों की माँग कर रहे हैं। उनमें महिलाएँ भी शामिल हैं, जिन्हें AAP के झंडे लेकर बुलाया गया था। महिला ने कहा कि गरीबों से वादा करने के बाद ये नेता उन्हें रुपए नहीं दे रहे हैं। इसी तरह से कई अन्य मजदूरों ने भी रैली के बाद अपना विरोध दर्ज किया।

बता दें कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के शालीमार बाग़ में हाल ही में रोड शो किया, जिसमें किसानों के प्रति एकता दिखाने की कोशिश की गई। हालाँकि, इस रोड शो में कोरोना के नियमों की भी जम कर धज्जियाँ उड़ाई गईं और सोशल डिस्टेंसिंग तो दूर की बात, किसी के चेहरे पर मास्क तक नहीं दिखा। सम्बोधन में केजरीवाल ने कहा भी कि दिल्ली में कोरोना ख़त्म हो गया है और दिल्ली वालों ने कोरोना को हरा दिया है।

वहीं अब AAP के मुखिया ‘किसान आंदोलन’ की आड़ में उत्तर प्रदेश में भी दस्तक देने वाले हैं। राज्य के पश्चिमी हिस्से में स्थित मेरठ में फरवरी के अंतिम दिन ‘किसान महापंचायत’ होनी है, जहाँ दिल्ली के सीएम जनसभा को सम्बोधित करेंगे। इसके लिए दिल्ली पुलिस की टीम ने वहाँ जाकर सुरक्षा व्यवस्था का भी जायजा लिया है। तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ होने वाली इस रैली को सफल बनाने के लिए केजरीवाल ने किसान नेताओं के साथ दिल्ली में बैठक भी की।

ममता की पुलिस ने ओवैसी को नहीं दी कोलकाता में रैली की परमिशन, मुस्लिम बहुल इलाके में होना था पहला कार्यक्रम

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव बेहद नज़दीक हैं। ऐसे में प्रदेश के भीतर सियासी खींचतान का दौर चरम पर है। सबसे ताज़ा झटका मिला है ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी को। दरअसल आज गुरुवार (25 फरवरी 2021) को प्रदेश की राजधानी कोलकाता में उनकी रैली का आयोजन होना था लेकिन पुलिस ने अनुमति नहीं दी। नतीजतन असदुद्दीन ओवैसी की रैली रद्द हो गई। 

हैदराबाद सांसद और एआईएमआईएम के मुखिया ओवैसी चुनावी अभियान की शुरुआत करने के लिए मुस्लिम बाहुल्य मटियाब्रुज में रैली करने वाले थे। यह क्षेत्र तृणमूल सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र में आता है। हालाँकि पुलिस ने इस पहलू पर कोई टिप्पणी नहीं की है, टीएमसी नेताओं ने भी अनुमति नहीं मिलने में अपनी भूमिका होने की बात से इनकार किया है। 

वहीं एआईएमआईएम के प्रदेश सचिव जमीर उल हसन ने तृणमूल कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा, “पुलिस ने हमें कोलकाता में रैली की इजाज़त नहीं दी है। हमने रैली की अनुमति के लिए लगभग 10 दिन पहले आवेदन दिया था लेकिन रैली से ठीक एक दिन पहले हमें सूचित किया गया कि हम रैली नहीं कर सकते हैं। टीएमसी शुरू से ही ऐसे हथकंडे अपना रही है लेकिन हम इनके आगे झुकने वाले नहीं हैं। अब हम इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे और कार्यक्रम की नई तारीख बताएंगे।” 

फ़िलहाल इस मुद्दे पर कोलकाता पुलिस की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं तृणमूल सांसद सौगात राय ने इस तरह के तमाम आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है, “एआईएमआईएम की रैली को अनुमति नहीं मिलने पर हमारी कोई भूमिका नहीं है। वह बंगाल में सिर्फ भाजपा की परोक्ष प्रतिनिधि के अलावा कुछ अलग नहीं कर रही है। यहाँ के ज़्यादातर मुसलमान बंगाली भाषी हैं वो एआईएमआईएम का समर्थन करेंगे। वह किसी भी सूरत में ममता बनर्जी के साथ ही रहने वाले हैं। 

एआईएमआईएम पश्चिम बंगाल चुनावों को लेकर सियासी समीकरण सहेजने में जुटी हुई है। पार्टी के मुखिया की निगाह ऐसी तमाम सीटों पर हैं जो मुस्लिम बाहुल्य हैं। ऐसे क्षेत्रों में मालदा, दक्षिण 24 परगना, दिनाजपुर और मुर्शिदाबाद शामिल हैं। बिहार विधानसभा चुनावों में उल्लेखनीय प्रदर्शन के बाद ही एआईएमआईएम के मुखिया ओवैसी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया था। ओवैसी ने बिहार में जीत हासिल करने वाले 5 विधायकों को पश्चिम बंगाल में बतौर आब्जर्वर नियुक्त किया है। इसके अलावा तेलंगाना के दो विधायक भी चुनावी अभियान में जुटे हुए हैं।

हैदराबाद: अपने अपहरण और रेप की झूठी FIR कराने वाली छात्रा ने की आत्महत्या, घर से दूर रहने के लिए बनाई थी कहानी

हैदराबाद में एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली है। इस छात्रा ने दो हफ्ते पहले ही कथित तौर पर अपने अपहरण और रेप का झूठा मामला दर्ज कराया था, जिसमें एक ऑटो ड्राइवर पर कई आरोप लगाए गए थे। ये घटना बुधवार (फरवरी 24, 2021) को घाटकेसर में हुई। मलकजगिरी के ‘डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP)’ ने कहा कि ये एक संवेदनशील मामला है और पुलिस जाँच के बाद बाद ही विस्तृत विवरण साझा करेगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, छात्रा ने अपने रिश्तेदार के घर पर अज्ञात पदार्थ का सेवन कर आत्महत्या की। कुछ ही दिनों पहले उसने कॉलेज से वापस लौटते समय अपहरण और रेप की शिकायत दर्ज कराई थी। रचाकोंडा पुलिस थाना ने कहा था कि झूठी शिकायत दर्ज कराने के मामले में उन्होंने टीनएजर के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया अभी शुरू नहीं की थी। पुलिस ने कहा था कि सबसे पहले कोर्ट को सूचित कर के मामले को बंद करना आवश्यक था।

दरअसल, उस दिन छात्रा ने शाम को 5:40 बजा रामपल्ली के लिए ऑटो लिया था। इसके 21 मिनट बाद ही उसने अपनी माँ को फोन कॉल कर के बताया कि उसके बार-बार कहने के बावजूद ऑटो ड्राइवर ने ऑटो रोकने से इनकार कर दिया है। शाम को 6:29 में परिजनों ने पुलिस को छात्रा के अपहरण की सूचना दी। इसके अगले 1 घंटे में पुलिस ने उसे बरामद कर के अस्पताल में शिफ्ट किया। अगले दिन अपहरण और गैंगरेप सहित कई मामले दर्ज हुए।

इसके अगले दिन पुलिस ने पाया कि ये पूरा का पूरा मामला झूठा था। जब पुलिस ने उसे कई CCTV फुटेज दिखाए तो छात्रा ने स्वीकार कर लिया कि उसने अपहरण और रेप का ये पूरा मामला खुद से बनाया था और ये सच नहीं है। छात्रा की शिकायत पर लगभग 3 दिनों तक रचाकोंडा पुलिस थाने की पुलिस जाँच करती रही। हैदराबाद पुलिस ने कहा कि रेप का झूठा मामला दर्ज कराने वाली छात्रा ने अवसाद की वजह से आत्महत्या की। घटना के बाद परिवार ने उसका फोन भी ले लिया था।

फर्जी आरोप की इस घटना को लेकर सोशल मीडिया में कई मीम्स भी बने थे, जिनमें उस पर निशाना साधा गया था। छात्रा का फोन ले लिया गया था और उसे टीवी देखने से भी मना कर दिया गया था, ताकि बाहर क्या हो रहा है ये उसे पता न चले। बी फार्मा की छात्र को फरवरी 10 की फुटेज में खुद से ऑटो से उतरता हुआ देखा गया था, जिससे उसके आरोप झूठे साबित हुए। उसने घर से दूर जाने के लिए ये सब किया था। छात्रा ने जिस ऑटो ड्राइवर की शिनाख्त की थी, वो भी उस वक़्त कहीं और मौजूद था।

उत्तराखंड पुलिस से जुड़ा ‘महिला कमांडो’ दस्ता, CM रावत ने कहा- बेटियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने के लिए चलाएँगे कार्यक्रम

उत्तराखंड देश का चौथा ऐसा राज्य बन गया है जिसने पुलिस विभाग में महिला कमांडो को शामिल किया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार (24 फरवरी 2021) को महिला कमांडो फ़ोर्स (women commando force) और स्मार्ट चीता फ़ोर्स (smart cheetah) को लॉन्च किया। बुधवार को कठिन प्रशिक्षण के बाद कुल 22 महिला कमांडो राज्य के आतंकवादी रोधी दस्ते (एटीएस) गुलदार में शामिल हो गईं।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कमांडो प्रशिक्षक शिफू शौर्य भारद्वाज, सेना अधिकारी रुबीना कोर्की, पीटीसी नरेन्द्र नागर, प्रशिक्षक हितेश कुमार, कमांडो इन्स्पेक्टर नीरज कुमार और प्रशिक्षित महिला पुलिस कमांडो को सम्मानित भी किया। 

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा, “आज महिला कमांडो को प्रदेश पुलिस का हिस्सा बनाया गया है। उत्तराखंड देश का चौथा ऐसा राज्य होगा जहाँ पुलिस विभाग में महिला कमांडो शामिल की जा रही हैं। इसके पहले उनका प्रशिक्षण भी किया गया है।”

गौरतलब है कि उत्तराखंड से पहले नागालैंड, केरल और पश्चिम बंगाल में महिला कमांडो दस्ते पुलिस में शामिल किए जा चुके हैं। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि महिला पुलिस कमांडो दस्ते तथा चीता पुलिस दल के गठन से राज्य की महिलाओं में पुलिस के प्रति विश्वास एवं मनोबल बढ़ेगा। उन्होंने कहा, “वह अपनी परेशानियों को महिला पुलिस से साझा कर सकेंगी जिससे महिला अपराधों को नियंत्रित किया जा सकेगा।”

मुख्यमंत्री के मुताबिक़, “स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राओं आत्मरक्षा की तकनीक सिखाना बहुत ज़रूरी है। बेटियों को प्रेरणा देना ज़रूरी है, यह समाज की ज़रूरत है। उन्हें आत्मरक्षा की मूलभूत जानकारी होनी चाहिए। हमारा प्रयास है कि आने वाले समय में बेटियों को आत्मरक्षा के लिहाज़ से प्रशिक्षित करना चाहिए।” देहरादून पुलिस लाइन की 22 महिला कमांडो को प्रशिक्षण दिया गया और उन्होंने कार्यक्रम के दौरान इसका प्रदर्शन भी किया।  

इसके बाद मुख्यमंत्री ने चमोली जिले में आई आपदा के दौरान शहीद हुए दो पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। इस मौके पर विधायक विनोद चमोली, महिला आयोग (women commission) की मुखिया विजया बर्थलवाल, मुख्यमंत्री के सेवानिवृत्त सेना सुरक्षा सलाहकार जेएस नेगी, गृह सचिव नितेश झा, डीजीपी अशोक कुमार समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।   

CAA विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज 500+ मामले वापस लेगी केरल की वामपंथी सरकार

केरल की ‘लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF)’ की सरकार ने CAA विरोधी प्रदर्शनों और सबरीमाला विवाद के दौरान हुए प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया है। मई 2021 में राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले लिए गए इस फैसले का राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी कॉन्ग्रेस ने भी स्वागत किया है। बुधवार (फरवरी 24, 2020) को ही कैबिनेट की बैठक में इस पर मुहर लगी।

ये बैठक मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अध्यक्षता में हुई। दोनों विरोध प्रदर्शनों से जुड़े ऐसे सभी मामले वापस लिए जाएँगे, जो ‘गंभीर आपराधिक प्रकृति’ के न हों। 2018-19 में सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश सम्बन्धी विवाद के दौरान हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान करीब 68000 श्रद्धालुओं के खिलाफ विभिन्न जिलों में शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। नेता प्रतिपक्ष रमेश चेन्निथला ने इसे देर से लिया गया अच्छा निर्णय करार दिया।

सबरीमाला विरोध प्रदर्शन के दौरान ‘नायर सर्विस सोसाइटी (NSS)’ नामक संगठन खासा मुखर रहा था और उसने हाल ही में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की अपील भी की थी। इस माँग को लेकर संगठन ने पूरे राज्य भर में ‘नामजप यात्रा’ चलाई थी। केरल में कॉन्ग्रेस ने भी सबरीमाला को राजनीतिक मुद्दा बनाया था। अपने घोषणापत्र में भी पार्टी ने सबरीमाला के श्रद्धालुओं के पक्ष में फैसले का वादा किया है।

सबरीमाला मंदिर में जब सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी, तब कम से कम 3300 लोगों को इसका विरोध करने पर गिरफ्तार किया गया था। साथ ही लगभग 17,000 केस दर्ज किए गए थे। CAA विरोधी प्रदर्शनकारियों के प्रति तो वामपंथी सरकार पहले से उदार रही है और मुख्यमंत्री खुद कई बार कह चुके थे कि उन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। फरवरी 16, 2020 को ऐसे 46 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था।

कोझिकोड ठाणे की पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को समन किया था। फरवरी 17, 2020 को हुए इस प्रदर्शन में हिंसा हुई थी। एक NGO द्वारा दायर की गई RTI से पता चला था कि 2020 में जनवरी से लेकर मार्च के बीच CAA विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ 519 मामले दर्ज किए गए थे। ‘सबरीमाला कर्मा समिति’ ने कहा है कि वामपंथी सरकार आँख में धूल झोंकने का काम कर रही है। वहीं भाजपा ने CAA विरोधियों के केस वापस लेने के बहाने सबरीमाला को घसीटने का आरोप लगाया।

इसी बीच, केरल के अलप्पुझा में दो गुटों के बीच हुए संघर्ष में एक RSS कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई है। ये घटना चेरथला के वायलार में हुई। बुधवार (फरवरी 24, 2021) को ‘सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI)’ ने एक रैली निकाली थी, जिसमें हिंसा हुई। इसमें 6 लोग घायल भी हुए हैं। इसमें 22 वर्षीय RSS कार्यकर्ता नंदू कृष्णा की हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में SDPI कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज कराने का आश्वासन दिया है।