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मोदी सरकार ने कोर्ट में ‘सेम सेक्स मैरिज’ का किया विरोध, कहा- समलैंगिकों का साथ रहना ‘भारतीय फैमिली’ नहीं हो सकती

समलैंगिक विवाह को मंजूरी देने को लेकर आज केंद्र की मोदी सरकार ने अपना रुख दिल्ली हाईकोर्ट में साफ कर दिया है। केंद्र सरकार ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत सेम सेक्स मैरिज को वैध बनाने के मामले में दायर याचिकाओं पर जवाब देते हुए इसका विरोध किया है। केंद्र सरकार ने कहा कि सेम सेक्स के जोड़े का पार्टनर की तरह रहना, भारतीय परिवार नहीं माना जा सकता और इसे मान्यता देने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है।

रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र सरकार ने यह तर्क दिया है कि सेम सेक्स के जोड़े का पार्टनर की तरह रहना और यौन संबंध बनाने की तुलना भारतीय परिवार से नहीं हो सकती है। इस प्रकार मोदी सरकार द्वारा माँग की गई है कि अभिजीत अय्यर और अन्य द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी जाए।

हिंदुस्तान टाइम्स के पत्रकार के अनुसार, उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार ने कहा कि शादी दो व्यक्तियों के निजी जीवन का मामला हो सकता है जिसका असर उनके निजी जीवन पर होता है। लेकिन इसे निजता की अवधारणा में नहीं छोड़ा जा सकता है।

भारतीय परिवार इकाई से सेम सेक्स के लोगों के साथ रहने और यौन संबंध बनाने की तुलना नहीं की जा सकती है, जहाँ भारतीय परिवार इकाई में पति, पत्नी और बच्चे होते हैं। इस इकाई में एक सामान्य रूप से पुरुष तथा दूसरी सामान्य रूप से महिला होती है, जिनके मिलन से संतान की उत्पत्ति होती है।

केंद्र सरकार ने आगे कहा, “हमारे देश में, एक पुरुष और एक महिला के बीच विवाह के संबंध की वैधानिक मान्यता के बावजूद, विवाह आवश्यक रूप से उम्र, रीति-रिवाजों, प्रथाओं, सांस्कृतिक लोकाचार और सामाजिक मूल्यों पर निर्भर करता है।”

गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय में सितंबर 2020 में, एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें हिंदू विवाह अधिनियम के तहत समान लिंग विवाह को मान्यता देने की माँग की गई थी। यह याचिका अभिजीत अय्यर मित्रा, गोपी शंकर एम, गीति थडानी और जी ओरवसी द्वारा दायर की गई और इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने की थी।

याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि हिंदू विवाह अधिनियम किसी भी दो हिंदुओं को शादी करने की अनुमति देता है और इसलिए, समलैंगिकों को भी शादी करने का अधिकार होना चाहिए और उनकी शादी को मान्यता दी जानी चाहिए।

हालाँकि, याचिकाकर्ताओं का दावा निराधार है। धारा 5 (iii) में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि दूल्हे की उम्र 21 वर्ष और दुल्हन की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होने पर ही दो हिंदुओं के बीच विवाह किया जा सकता है। यह एक स्पष्ट संकेत है कि अधिनियम केवल एक पुरुष और एक महिला के बीच विवाह को मान्यता देता है।

याचिका की पहली सुनवाई में 14 सितंबर को केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उन्होंने याचिका का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि समलैंगिक विवाह हमारे कानूनों और संस्कृति द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू मैरिज एक्ट खुद समान सेक्स मैरिज को मान्यता नहीं देता है। कानून के अनुसार, विवाह केवल पति और पत्नी के बीच होता है।

कोर्ट ने यह कहते हुए जवाब दिया था कि सरकार को इस मामले को खुले दिमाग से देखना होगा न कि किसी कानून के अनुसार यह कहते हुए कि दुनिया भर में बदलाव हो रहे हैं। वहीं एसजी तुषार मेहता ने कहा कि याचिका हलफनामा दाखिल करने के लायक भी नहीं है।

‘लियाकत और रियासत के रिश्तेदार अब भी देते हैं जान से मारने की धमकी’: दिल्ली दंगा में भारी तबाही झेलने वाले ने सुनाया अपना दर्द

दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों को एक साल पूरे हो चुके हैं। अब भी उत्तर-पूर्वी दिल्ली के उन इलाकों में हिन्दुओं के मन में मुस्लिम भीड़ की हिंसा का मंजर ज्यों का त्यों हैं। वो आज भी डर के साए में जी रहे हैं। एक प्रत्यक्षदर्शी ने ऑपइंडिया को बताया कि हिन्दुओं के मन में अभी भी भय व्याप्त है कि उनके साथ कभी भी कुछ भी हो सकता है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में ही हिन्दुओं को सबसे ज्यादा निशाना बनाया गया था।

उक्त प्रत्यक्षदर्शी ने हमें बताया, “इस क्षेत्र में रह रहे हिन्दू अभी भी मुस्लिमों के प्रभाव वाले या मुस्लिम बहुल इलाकों में जाने से या उस तरफ से गुजरने से डरते हैं। उनके मन में भय बना रहता है कि खून की प्यासी भीड़ उन पर कभी भी हमला कर सकती है, जैसे फरवरी 2020 के अंतिम हफ्ते में हुआ था।” उक्त प्रत्यक्षदर्शी खुद पिछले साल के दंगों का पीड़ित भी है। वो उन दंगों मे बाल-बाल बच गए थे, कई अन्य हिन्दुओं की तरह।

उन्होंने बताया, “लियाकत खान और रियासत खान के परिवार वाले अभी भी हमें धमकी देते हैं। दोनों बाप-बेटों को पिछले साल पत्थरबाजी और दंगों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। दोनों मुझे जान से मार डालने की धमकी देते हैं।” उसने बताया कि हिन्दुओं को मुस्लिम बहुल इलाकों की तरफ से गुजरने से मनाही की गई है। उन्होंने मुस्तफाबाद में हाल ही में एक हिन्दू बाइक सवार की मुस्लिम भीड़ द्वारा पिटाई की घटना को भी याद किया।

गौरतलब है कि प्रदीप कुमार वर्मा नामक एक हिन्दू व्यक्ति के गैराज को ताहिर हुसैन व अन्य इस्लामी भीड़ द्वारा तबाह कर दिया गया था। उन्होंने पुलिस को बताया था कि शाह आलम, गुलफाम और रियासत अली ने अपने साथियों के साथ उनकी पार्किंग का शटर तोड़ डाला था और गाड़ियों को तोड़-फोड़ करके गैराज में आग लगा दी थी। साथ ही 20 हजार रुपए भी लूट लिए थे। जब ये सब हो रहा था, ताहिर और लियाकत पेट्रोल बम व पत्थर फेंकने में व्यस्त थे।

प्रदीप ने ये भी बताया कि उन्होंने मुस्लिम भीड़ को ‘हिन्दू है, मारो’ कहते हुए सुना था। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि चाँदबाग में स्थित ताहिर हुसैन के घर को सील कर दिया गया था, लेकिन 5-6 महीने पहले ही उसका सील खोला जा चुका है। हिन्दुओं के खिलाफ हिंसा के लिए इसी घर का उपयोग हुआ था। यहाँ की छत से मुस्लिम भीड़ को हिन्दुओं के घर की तरफ पेट्रोल बम व पत्थर फेंकने का वीडियो उस वक़्त भी वायरल हुआ था।

आईबी अधिकारी रहे अंकित शर्मा को भी घसीट कर ताहिर हुसैन की इमारत की तरफ ही लेकर जाया गया था। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शी का कहना है कि ED कुछ दिनों पहले जाँच के लिए आई थी, जिसके बाद ये घर खुला हुआ है। उसने बताया कि ताहिर हुसैन की बीवी इस घर की मालकिन है और फिलहाल उसके लोग और रिश्तेदार यहाँ रह रहे हैं। जिनके भी परिजन दंगों के कारण जेल में बंद हैं, उनके परिजन/रिश्तेदार यहाँ रह रहे हैं।

एक अन्य ग्राउंड रिपोर्ट में हमने बताया था कि दंगे के प्रत्यक्षदर्शियों ने दिल्ली में चल रही अरविंद केजरीवाल की AAP सरकार पर भी पक्षपात के आरोप लगाए हैं। एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि दिल्ली सरकार ने भी हिन्दू पीड़ितों पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने बताया कि केजरीवाल सरकार ने मस्जिदों में अनाज और फल भेजे, जबकि हिन्दुओं को दुकानों के बाहर लंबी लाइनें लगा कर संघर्ष करना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि मस्जिदों में सरकार से आई सामग्रियों का मुस्लिमों में वितरण किया गया।

28 दिनों तक हिंदू युवती को बंधक बना कर रखने वाला सलमान कुरैशी गिरफ्तार: जीजा मुईन, दोस्त इमरान ने की थी मदद

उत्तर प्रदेश में आगरा के शाहगंज जिले के लव जिहाद के मामले में आरोपित सलमान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही पुलिस ने 28 दिन बाद अगवा की गई हिन्दू लड़की को भी बरामद कर लिया है। आरोप है कि सलमान कुरैशी बहला फुसलाकर कर युवती भगा ले गया था। युवती का कहना है कि आरोपित ने उसे अपने रिश्तेदारो और परिचितों के यहाँ जबरन बंधक बनाकर रखा था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सलमान कुरैशी की धर-पकड़ में जुटी पुलिस को मुखबिर से बुधवार को तीसरे पहर सलमान और युवती के आइएसबीटी पर पहुँचने का पता चला था। जिसके बाद दबिश देते हुए पुलिस ने बस से आरोपित को युवती के साथ उतरते ही पकड़ लिया।

वहीं पुलिस पूछताछ में आरोपित ने बताया कि युवती को अगवा करने के बाद वह पुलिस से बचने के लिए प्रयागराज भाग गया था। लेकिन मामले के तूल पकड़ने और हिन्दू संगठनों द्वारा किए जा रहे धरना प्रदर्शन के बारे में जानने के बाद वह दिल्ली भाग गया।

आरोपित ने बताया कि पुलिस की पकड़ से बचने के लिए लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था। उसने दिल्ली, मध्य प्रदेश के होशंगाबाद, महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक में युवती को अपने साथ लेकर अलग-अलग रिश्तदारों के घर छिपता रहा। रिपोर्ट के मुताबिक वह युवती को किसी अन्य स्थान पर ले जाने के फिराक में था। इस पूरे खेल में सलमान के रिश्तेदार और दोस्त उसकी मदद कर रहे थे।

थाना प्रभारी निरीक्षक सत्येंद्र सिंह राघव के मुताबिक, पूछताछ में युवती ने बताया कि सलमान उसे बहला-फुसलाकर ले गया था। उसे रिश्तेदार और परिचितों के यहाँ पर बंधक बनाकर रखा गया था।

सलमान की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया। जिसके बाद रात तकरीबन नौ बजे आरोपित को जेल के सलाखों के पीछे डाल दिया गया। वहीं युवती के बयान दर्ज करने के बाद मेडिकल कराया गया। युवती को अब आशा ज्योति केंद्र में रखा गया है।

बता दें, सलमान को पकड़ने के लिए पुलिस की तीन टीमें अलग-अलग स्थान पर दबिश दे रही थी। पुलिस ने पहले आलमगंज निवासी उसके जीजा मुईन, दोस्त इमरान उर्फ अयान सहित तीन आरोपितों को जेल भेजा था।

गौरतलब है कि शाहगंज क्षेत्र निवासी युवती 27 जनवरी की रात अपने घर से लापता हो गई थी। खोजबीन के बाद परिजनो ने सोरों कटरा निवासी सलमान कुरैशी के खिलाफ अगवा करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि सलमान ने उनकी पुत्री को लव जिहाद का शिकार बनाया।

वहीं मामले में लव जिहाद का पता लगने पर आक्रोशित हिंदू संगठनों ने 28 जनवरी की दोपहर को सोरो कटरा और रूई की मंडी का बाजार बंद करा दिया था। जिसके बाद पुलिस अधिकारियों द्वारा मौके पर पहुँचकर आरोपित को गिरफ्तार कर युवती को बरामद करने के आश्वासन बाद लोग धरने से उठे थे।

PM मोदी के विरोध में ई-स्कूटर पर निकली ममता बनर्जी हुईं सोशल मीडिया पर ट्रोल, लोगों ने जमकर उड़ाया मजाक

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पेट्रील-डीजल की बढ़ती कीमतों के विरोध में गुरुवार (25 फरवरी, 2021) को कोलकाता में एक ई-स्कूटर रैली निकाली।

हालाँकि, यह रैली थी तो मोदी सरकार के विरोध में लेकिन सोशल मीडिया पर यह उन्हीं पर भारी होती हुई नजर आई। पेट्रोल डीजल से प्रकृति को हो रहे नुकसान के मद्देनजर यूँ तो इलेक्ट्रिक स्कूटर पर्यावरण के अनुकूल एक बेहतर विकल्प है। इसलिए कई सोशल मीडिया यूज़र्स इस अजीबोगरीब प्रदर्शन को देख कर आश्चर्यचकित रह गए।

बता दें, प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी इलेक्ट्रॉनिक वाहन बाजार को लगातार बढ़ावा दे रहे है। हाल ही में, इलेक्ट्रिक कार दिग्गज टेस्ला ने भी इस साल की शुरुआत में बेंगलुरु में अपना एक ऑफिस खोला है।

एक तरफ जहाँ ममता बनर्जी के इस प्रदर्शन को देखते हुए लोगों ने उनका मजाक बनाया तो वहीं कुछ ने यह भी सुझाव दिया कि ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ विरोध करने का इससे सटीक तरीका क्या होगा।

कुछ लोगों ने उम्मीद जताई कि लोग सीएम बनर्जी के नक्शेकदम पर चलते हुए ईंधन के साथ-साथ पैसे बचाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर भी अपना रुख कर सकते हैं।

तो वहीं एक यूज़र ने मीम्म के साथ बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के लिए न्याय की उम्मीद की भी आस लगाई। बता दें, राजपूत की 2020 में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर तृणमूल कॉन्ग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच जुबानी जंग लगातार जारी है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे है दोनों पार्टियाँ एक दूसरे पर हमलावर होते हुए नजर आ रही हैं। आज सुबह पश्चिम बंगाल पुलिस ने AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी को रैली आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। ऐसा माना जाता है कि ममता बनर्जी को डर है कि बंगाल की राजनीति में एआईएमआईएम एंट्री होते ही वह टीएमसी के मुस्लिम वोट बैंक को निगल जाएगी।

3 महीनों के भीतर लागू होगी सोशल, डिजिटल मीडिया और OTT की नियमावली: मोदी सरकार ने जारी की गाइडलाइन्स

सोशल मीडिया पर साझा किया जाने वाला कंटेंट और OTT प्लैटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट सरकार के लिए अभी तक बड़ी बहस का मुद्दा था। केंद्र सरकार अब इस मुद्दे पर प्रभावी दिशा निर्देश लेकर आई है, जिसके दायरे में पूरा डिजिटल मीडिया, OTT और सोशल मीडिया होगा। चाहे वह एक तरफ फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर, इन्स्टाग्राम हों या दूसरी तरफ अमेज़न प्राइम, नेटफ्लिक्स, ऑल्ट बालाजी, ज़ी फाइव, एमएक्स प्लेयर। ये सभी दिशा निर्देश आगामी 3 महीने के भीतर लागू कर दिए जाएँगे।

पहले सोशल मीडिया के मुद्दे पर दिशा निर्देशों की जानकारी देते हुए केन्द्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कई अहम बातें बताई। उन्होंने कहा कि भारत में हर सोशल मीडिया मंच का स्वागत है लेकिन दो आयामी कार्यप्रणाली स्वीकार नहीं की जाएगी। अगर कैपिटल हिल पर हमला हुआ तब सोशल मीडिया ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया। जब लाल किले पर भीषण हमला हुआ तब सोशल मीडिया ने दोतरफ़ा चरित्र का उदाहरण दिया। इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

रविशंकर प्रसाद के मुताबिक़, “सोशल मीडिया को 2 श्रेणियों में बाँटा गया है, एक इंटरमीडियरी और दूसरा सिग्निफिकेंट सोशल ​मीडिया इंटरमीडियरी। सिग्निफिकेंट सोशल ​मीडिया इंटरमीडियरी पर अतिरिक्त कर्तव्य है, हम जल्दी इसके लिए यूजर संख्या का नोटिफिकेशन जारी करेंगे।” इसके अलावा केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री ने कहा, “OTT प्लेटफॉर्म के लिए त्रि-स्तरीय तंत्र होगा। OTT प्लेटफॉर्म और डिजिटल ​मीडिया को अपने बारे में जानकारी देनी होगी, उनके लिए एक शिकायत निवारण तंत्र होना चाहिए।”

इसके बाद क़ानून मंत्री ने कहा, “एक ग्रीवांस मैकेनिज्म (grievance mechanism) बनाना होगा और इसके तहत एक ग्रीवांस ऑफिसर (निराकरण अधिकारी) का नाम भी रखना होगा। ये अधिकारी अनिवार्य रूप से भारत का ही होना चाहिए। जिसे मिलने वाली शिकायत को 24 घंटे के भीतर दर्ज करना होगा और 15 दिन के अंदर निराकरण करना होगा। उसे इसका भी ध्यान रखना होगा कि उसे कितनी शिकायतें प्राप्त हुई और कितनों का निराकरण हुआ।” 

  • आपत्तिजनक विषयवस्तु की शिकायत मिलने पर न्यायालय या सरकार जानकारी माँगती है तो वह भी अनिवार्य रूप से प्रदान करनी होगी। 
  • महिलाओं पर किसी भी तरह की आपत्तिजनक विषयवस्तु (विशेष रूप से उनके शरीर को लेकर) को एक दिन के भीतर हटाना होगा। 
  • सोशल मीडिया के लिए तीन स्तर की श्रेणी बनाई जाएगी- U, UA7, UA13
  • किसी भी यूज़र का पोस्ट हटाने के बाद उसे सूचित करना होगा कि ऐसा क्यों किया गया। 
  • पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया का उपयोग आतंकवादी भी करते हुए नज़र आए हैं। 
  • सोशल मीडिया ही फ़ेक न्यूज़ की जड़ है, इसकी अनगिनत शिकायतें मिली हैं। सरकार सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल के खिलाफ़ है। 
  • सोशल मीडिया को भी मीडिया की तरह नियमों का पालन करना होगा। 
  • आगामी तीन महीनों के भीतर सोशल मीडिया के नियम लागू होंगे। 

OTT प्लैटफॉर्म से जुड़े दिशा निर्देश

  • OTT प्लैटफॉर्म्स को ‘सेल्फ रेगुलेशन’ (खुद से नियमों को लागू करके पालन) करना पड़ेगा। 
  • OTT प्लैटफॉर्म्स के लिए 3 स्तरीय व्यवस्था होगी। 
  • डिजिटल मीडिया से लेकर OTT प्लैटफॉर्म्स तक, पंजीयन अनिवार्य होगा। पंजीयन के संबंध में सरकार को भी सूचित करना होगा। 
  • संसद के दोनों सदनों में कुल मिला कर इस मुद्दे पर 50 से अधिक सवाल पूछे गए। 
  • OTT प्लैटफॉर्म्स वालों को कई बार निर्देश दिया गया फिर भी उन्होंने अपने लिए नियमावली नहीं बनाई। 

TMC के दोहरे रवैये के कारण ममता पर भड़के ओवैसी, पूछा- बंगाल में कैसे होंगे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव?

पश्चिम बंगाल में सभा की इजाजत न मिलने पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के खिलाफ़ अपनी नाराजगी जाहिर की है। ओवैसी ने कहा है कि टीएमसी के दो चेहरे हैं जो दिल्ली में संसद में अभिव्यक्ति की आजादी, संविधान व सहमति के अधिकार की बात करते हैं लेकिन बात बंगाल की आती है तो उल्टा करते हैं।

उन्होंने अपनी बात रखते हुए पूछा , “मैं वहाँ सभा करना चाहता हूँ, लेकिन मुझे इजाजत क्यों नहीं दी जा रही है।” गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में अभी आचार संहिता नहीं लगी है। उसके पहले ही सभा की इजाजत नहीं दी जा रही है। ऐसे में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कैसे होंगे?

वह आगे पूछते हैं कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा रैली कर सकते हैं, कॉन्ग्रेस, माकपा और टीएमसी खुल कर रैली निकाल सकती है तो आखिर हम क्यों नहीं?

वह बोले टीएमसी सांसद जब भाषण देते हैं तो जो धर्मनिरपेक्ष व उदारवादी लोग तालियाँ बजाते हैं, उन्हें इस पर सोचना चाहिए। रैली की इजाजत नहीं देने से टीएमसी सांसदों का दोमुँहापन व खोखलापन सामने आ गया है। 

गौरतलब है कि AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को अल्पसंख्यक बहुल मेतियाब्रुज इलाके में रैली के जरिए बंगाल विधान सभा चुनाव से पहले पार्टी के प्रचार अभियान की शुरुआत करनी थी, लेकिन प्रदेश सचिव ने बताया कि पुलिस ने उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी।

प्रदेश सचिव ने कहा, “हमने इजाजत के लिए 10 दिन पहले आवेदन दिया था, मगर रैली से ठीक एक दिन पहले पुलिस ने सूचित किया कि वे हमें रैली करने की इजाजत नहीं देंगे। हम टीएमसी के ऐसे हथकंडों के आगे झुकेंगे नहीं। हम चर्चा करेंगे और कार्यक्रम की नई तारीख बताएँगे।”

अविश्वास और डर के समय तबलीगी जमात ने किया अपराध: मरकज के कार्यक्रम में शामिल 49 विदेशियों पर जुर्माना

उत्तर प्रदेश में कोरोना प्रोटोकॉल्स का उल्लंघन करते हुए पकड़े गए तबलीगी जमात के मरकज़ में शामिल 49 विदेशी नागरिकों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है, जिसके बाद बुधवार (फरवरी 24, 2021) को सुनवाई के दौरान यूपी कोर्ट ने इन्हें जेल में बिताई अवधि के कारावास और 1500 रुपए के जुर्माने से दंडित किया।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कोरोना महामारी की असामान्य परिस्थितियों में अभियुक्तों ने उस समय अपराध किया, जब समाज में अविश्वास व डर का माहौल था। इसलिए सभी विदेशी अभियुक्तों को दंडित किया जाता है।

मालूम हो कि अदालत में आईपीसी की धारा 188, 269, 270, 271 व महामारी अधिनियम, पासपोर्ट अधिनियम, विदेशियों विषयक अधिनियम तथा आपदा प्रबंधन की अलग अलग धाराओं में आरोप पत्र दाखिल किया गया था।

सुनवाई में अभियुक्तों ने भी स्वीकारा कि कोविड-19 महामारी एक असामान्य परिस्थिति थी। वे सभी विदेशी हैं जो टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे। उनके सभी कागजात वैध हैं और उन्होंने जानबूझकर कोई अपराध नहीं किया। वो बस अपने देश वापस जाना चाहते हैं इसलिए उन्हें कम से कम दंड से दंडित किया जाए।

गौरतलब है कि पिछले साल कोरोना की शुरुआत के समय जब सरकार इन कोशिशों में जुटी थी कि किसी प्रकार से ये कोरोना चेन टूट जाए उस समय दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज में तबलीगी जमात के मजहबी कार्यक्रम हुए, जिसमें प्रशासन के दिशा-निर्देशों और लॉकडाउन का खुला उल्लंघन किया गया।

इसके बाद हज़ारों लोग अलग-अलग राज्यों में जाकर छिप गए। उन्हें खोजने गए पुलिसकर्मियों और उनकी स्क्रीनिंग के लिए गई मेडिकल टीम पर हमले हुए। ऐसी एक-दो नहीं बल्कि दसियों घटनाएँ हुईं। कई विदेशी इस दौरान अलग-अलग प्रदेशों में छिपे मिले। जिसके बाद इनके ख़िलाफ़ आवश्यक कार्रवाई हुई।

मामले के तूल पकड़ने के बाद गृह मंत्रालय ने भी आगे कुछ पाबंदियाँ लगाईं। वीजा उल्लंघन मामले का पता लगने के बाद मंत्रालय ने जमात से जुड़े 2200 से अधिक विदेशियों के 10 साल तक भारत में प्रवेश करने पर रोका।

अधिकारियों के मुताबिक किर्गिस्तान के 77 नागरिक, 75 मलेशियाई, 65 थाईलैंड, 12 वियतनाम, 9 सऊदी अरब और 3 फ्रांसीसी नागरिक भी वीजा नियमों का उल्लंघन करने वालों में शामिल थे। गृहमंत्रालय ने इन सभी विदेशियों के अगले 10 वर्षों के लिए भारत में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगा दिया।

शैतान की आजादी के लिए पड़ोसी के दिल को आलू के साथ पकाया, खिलाने के बाद अंकल-ऑन्टी को भी बेरहमी से मारा

अमेरिका के ओक्लाहोमा राज्य में तीन लोगों की हत्या करने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। इस पर आरोप है कि इसने पहले अपने एक शिकार को मारा फिर उसका दिल निकाल कर आलू के साथ पकाया और अन्य दो लोगों को मारने से पहले उन्हें खाने को दिया।

आरोपित की पहचान 42 साल के लॉरेंस पॉल एंडरसन के तौर पर की गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसने पहले अपनी एक 41 वर्षीय पड़ोसी एंड्रिया पर 12 फरवरी को चाकू से हमला किया और उसे मारने के बाद उसका सीना चीरकर दिल निकाल लिया। 

बाद में अपने मृत पड़ोसी के दिल को लेकर वह अपने अंकल के घर गया जहाँ उसने इस दिल को पकाया। फिर अपने अंकल और उनकी पत्नी को इसे सर्व किया। थोड़ी देर बाद एंडरसन ने उन्हें भी मार दिया और उनकी पत्नी को अधमरा कर दिया। इसके अलावा उसने अपने अंकल की 4 साल की पोती को भी मौत के घाट उतार दिया।

जाँच अधिकारियों ने अपनी पड़ताल में कुकिंग पैन पाया, जिसमें थोड़ा खाना पड़ा हुआ था। पूरी जाँच होने पर सर्च वारंट में लिखा गया, “उसने राक्षसों को आजाद कराने के लिए दिल को आलू के साथ पकाकर अपने परिवार को खिलाया।”

बता दें कि अमेरिका में ऐसा घृणित अपराध एंडरसन की रिहाई के कुछ हफ्ते बाद ही हुआ है। उससे पहले वह लंबे समय तक जेल में था। उसे साल 2017 में ड्रग से जुड़े किसी मामले में 20 साल की सजा सुनाई गई थी। घटना को अंजाम देने के बाद उसने अपने जुर्म मंगलवार को कोर्ट में स्वीकार कर लिया। उस पर तीन हत्या और एक महिला पर धारधार हथियार से हमला करने का आरोप लगा है।

अधिकारियों ने बताया है कि एंडरसन उस दिन अपने अंकल आंटी की बिना मर्जी उनके घर गया था। वह उसे देख अचंभित थे कि वह जेल से बाहर आ गया। वह उसे अपने घर का एड्रेस नहीं बताना चाहते थे न ही उसे वहाँ बुलाना चाहते थे।

वहीं एंड्रिया की बेटी ने अपनी माँ की बर्बर हत्या को लेकर कहा कि वह चाहती है कि एंडरसन पूरा जीवन इस बारे में सोचते हुए गुजारे जबतक कि उसे वैसी मौत न मिले जैसी उसने लोगों को दी।

भगोड़े नीरव मोदी भारत लाया जाएगा: लंदन कोर्ट ने दी प्रत्यर्पण को मंजूरी, जताया भारतीय न्यायपालिका पर विश्वास

PNB घोटाले मामले में भगौड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की याचिका को लंदन की अदालत ने गुरुवार (फरवरी 25, 2021) को ठुकराते हुए उसके भारत प्रत्यर्पित किए जाने को मंजूरी दे दी। अदालत ने फैसला सुनाते हुए भारत की न्यायपालिका को निष्पक्ष कहा।

वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के जज सैमुअल गोजी ने कहा कि यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि नीरव मोदी को भारत में कई सवालों के जवाब देने हैं। उन्होंने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि अगर उन्हें प्रत्यर्पित किया गया तो उनके साथ न्याय नहीं होगा। 

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नीरव की मानसिक सेहत को लेकर लगाई गई याचिका को ठुकरा दिया। साथ ही ये मानने से इंकार किया कि नीरव मोदी की मानसिक स्थिति और स्वास्थ्य प्रत्यर्पण के लिए फिट नहीं है। कोर्ट ने भारत में जेलों की हालात को लेकर संतुष्टि जताई।

प्रत्यर्पण को मंजूरी देते हुए कोर्ट ने कहा कि नीरव मोदी का मामला प्रत्यर्पण कानून के सेक्शन 137 की अपेक्षाओं को पूरा करता है। इसी के साथ नीरव मोदी की तरफ से भारत में सरकारी दबाव, मीडिया ट्रायल और अदालतों की कमज़ोर स्थिति को लेकर दी गई दलीलों को वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने खारिज किया

बता दें कि इससे पहले खबर आई थी भगोड़े नीरव मोदी की बहन पूर्वी मोदी और उनके पति मयंक मेहता सरकारी गवाह बन गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूर्वी और उनके पति मयंक ने मुंबई के विशेष पीएमएलए कोर्ट के समक्ष एक अर्जी दायर करते हुए अदालत से सीआरपीसी की धारा 306 और 307 के तहत माफी माँगी थी।

इसी के साथ प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार पूर्वी और मयंक ने बैंक धोखाधड़ी के मामले में नीरव मोदी की 579 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त करने में मदद की। इसमें न्यूयॉर्क में दो फ्लैट, लदंन और मुंबई में 1-1 फ्लैट, दो स्विस बैंक खाते और मुंबई में एक खाता शामिल है। इसके बाद दोनों ने सरकारी गवाह बनने की अनुमति माँगी।

मस्जिदों में लाउडस्पीकर हटाने के लिए बजरंग दल ने शुरू किया राष्ट्रव्यापी कैंपेन: 1 लाख हस्ताक्षरों की दरकार

उत्तर प्रदेश के कानपुर में हिंदू संगठनों ने बजरंग दल के नेतृत्व में सिग्नेचर कैंपेन की शुरुआत की है। ये कैंपेन मस्जिदों पर लगे अवैध लाउडस्पीकर के ख़िलाफ़ शुरू किया गया है जिनसे अजान के समय तेज आवाजें आती हैं।

ये कैंपेन 22 फरवरी 2021 से शुरू किया गया है। अभियान के तहत संगठन का मकसद एक लाख लोगों का समर्थन पाना है। इसके लिए, संगठन ने कानपुर में 1 लाख लोगों के हस्ताक्षर एकत्र करने और भारत के राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने की योजना बनाई है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए राष्ट्रीय बजरंग दल के राष्ट्रीय सचिव रामजी तिवारी ने कहा कि कैंपेन 22 फरवरी को घंटाघर स्थित भारत माता मंदिर से शुरू किया गया, जहाँ हिंदू संगठनों के सदस्यों ने उस असुविधा पर बात की जो मस्जिदों में लगे अवैध लाउडस्पीकरों के कारण होती है।

दरअसल, लाउडस्पीकर्स के ख़िलाफ़ इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी अजान के समय होते लाउडस्पीकर के इस्तेमाल से लोगों को दिक्कतें होने लगी हैं। इसलिए हिंदू संगठन ने जागरूकता फैलाकर इस प्रैक्टिस को रोकने के लिए कदम उठाया है। तिवारी ने यह भी बताया कि संगठन का उद्देश्य कानपुर के 1 लाख लोगों द्वारा हस्ताक्षरित भारत के राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर उन्हें इस मुद्दे से अवगत कराना है।

इस बीच कानपुर की एक वकील ने भी ट्विटर पर बताया है कि अवैध लाउडस्पीकर्स को हटवा कर रहेंगी इसलिए कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने पूछा है कि उनके इस अभियान में कौन-कौन उनके साथ है। 

हालाँकि, एक मुस्लिम मौलवी ने कहा है कि ये कैंपेन फर्जी है और केवल लोगों को भ्रमित करके एक पार्टी को फायदा पहुँचाने के लिए चलाया जा रहा है।  उन्होंने बोला कि संविधान उन्हें अजान चलाने का अधिकार देता है और इसे करने से उन्हें कोई नहीं रोक सकता।

यहाँ गौरतलब रहे कि हिंदू संगठनों में कोई भी अजान रोकने की बात नहीं कर रहा है, बस उनका कहना है कि वह लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के ख़िलाफ़ हैं। इसके अलावा ये भी ज्ञात हो कि पिछले साल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ये कहा था कि मस्जिद से मौलवी का अजान पढ़ना इस्लाम का हिस्सा है लेकिन साउंड डिवाइस जैसे लाउडस्पीकर इसका हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा था कि ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल आर्टिकल 25 के तहत किसी को नहीं मिलता। 

कोर्ट ने कहा था कि अजान के समय लाउडस्पीकर के प्रयोग से वह सहमत नहीं है। इसके लिए कोर्ट ने मस्जिदों से लाउडस्पीकर से अजान पर रोक को भी वैध माना। साथ ही कोर्ट ने जिला प्रशासन से रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देने को कहा था।