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तीरथ सिंह रावत: उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री, कल त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दिया था इस्तीफा

उत्तराखंड में पिछले 24 घंटे में सियासी उलट फेर के बाद राज्य में मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी तीरथ सिंह रावत को दी गई है। बुधवार (मार्च 10, 2021) को देहरादून में भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल की बैठक के बाद यह नाम सामने आया। कहा जा रहा है कि वह आज शाम तक पद की शपथ ले लेंगे।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, सीएम की कुर्सी छोड़ने के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह घोषणा की है कि भाजपा सांसद तीरथ सिंह रावत ही उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री होंगे। तीरथ सिंह, उत्तराखंड के गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। वह उत्तराखंड बीजेपी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। फिलहाल बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव हैं।

गौरतलब है कि उत्तराखंड बीजेपी में चल रहे घमासान के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य के मुख्यमंत्री पद से कल इस्तीफा दे दिया था। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मंगलवार (मार्च 9, 2021) शाम राज्यपाल बेबी रानी मौर्य से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपा था। इस इस्तीफे के बाद से अटकलें लग रही थीं सीएम के इस्तीफा देने के बाद पर्यवेक्षकों की देख-रेख में विधायकों की बैठक में नया सीएम चुना जाएगा।

2 ने हाथ पकड़े, तीसरे ने गुदाद्वार में पंप से हवा भरी… 16 साल के लड़के का स्थानीय डॉक्टर भी इलाज नहीं कर पाए

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले 16 साल के बच्चे के साथ की गई एक घटिया हरकत ने उसकी जान ले ली। जानकारी के मुताबिक, राइस मिल में काम करने वाले कुछ युवकों ने उसके गुदाद्वार में हाई पावर एयर कम्प्रेसर से इतनी हवा भरी कि नाबालिग के भीतर के अंग खराब हो गए और घटना के मात्र दो दिन के बाद उसकी मौत हो गई।

पीड़ित ने बरेली के अस्पताल में आखिरी साँस ली। तीनों आरोपितों की उम्र 22 से 26 साल के बीच की है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने बच्चे की मौत के बाद इनके खिलाफ़ पीलीभीत में रविवार को मुकदमा दर्ज किया।

पड़ताल की जा रही है कि आखिर ऐसे बर्बर कृत्य के पीछे कारण क्या था… क्या सिर्फ़ अपने ‘आनंद’ के लिए युवकों ने ये सब किया या फिर उनकी बच्चे से कोई निजी दुश्मनी थी। आरोपितों की पहचान अमित, सूरज और कमलेश के तौर पर हुई है।

पीलीभीत पुरनपुर कोतवाली इलाके के निवासी व बच्चे के पिता ने बताया कि उनका बेटा उनकी जगह चावल की मिल में काम करता था। 4 मार्च को जब वह दोपहर का खाना खाने जा रहा था, तभी तीनों मजदूरों- अमित, सूरज और कमलेश ने उनके बेटे को पकड़ लिया। अमित और सूरज ने उसके हाथ पकड़े और कमलेश ने उसके गुदाद्वार में चावल मिल में इस्तेमाल होने वाले एयर कंप्रेसर से हवा भरी।

घटना के बाद लड़के की हालत ऐसी हो गई कि स्थानीय डॉक्टर उसका इलाज ही नहीं कर पाए। उन्होंने पीलीभीत के जिला अस्पताल में उसे शिफ्ट किया। वहाँ डॉक्टरों ने उसकी आंत फटने की बात कही, जिसके बाद आगे के इलाज के लिए बरेली के डॉक्टरों के पास रेफर किया। लेकिन शनिवार तक लड़का बच न सका। उसने वहीं अस्पताल में दम तोड़ दिया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, एसएचओ ने बताया कि तीनों आरोपितों के ख़िलाफ़ धारा 304 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। इनमें से दो को हिरासत में लेकर पूछताछ भी चल रही है।

एबीपी न्यूज की दो दिन पुरानी रिपोर्ट के अनुसार पहले खबर थी कि पीड़ित पक्ष और आरोपित पक्ष एक ही गाँव के है। इसलिए सुलह की बात चल रही है और वह आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई को हामी नहीं भर रहे। हालाँकि, शनिवार को पता चला कि बच्चे के अंतिम संस्कार के बाद इस संबंध में शिकायत हुई व आरोपित हिरासत में ले लिए गए।

पैगंबर मोहम्मद के कार्टून बिना ही काट डाला सैमुअल पैटी का सर, अब्बा के डर से 13 साल की बच्ची ने बोला था झूठ

फ्रांस में कुछ दिन पहले कथित तौर पर पैगंबर मोहम्मद का कार्टून कक्षा के छात्रों को दिखाने पर सैमुअल पैटी नाम के शिक्षक की बेरहमी से हत्या का मामला सामने आया था। अब खबर है कि ये पूरा हमला एक झूठ पर आधारित था, जिसे बच्ची ने अपने पिता के डर से बोला था।

7 मार्च 2021 को 13 साल की एक फ्रांसीसी लड़की ने इस बात को स्वीकार किया कि उसने अपने अब्बा के गुस्से से बचने के लिए अपने शिक्षक पर तोहमत लगाई थी जबकि हकीकत यह थी कि वह उस दिन क्लास में ही नहीं थी।

फ्रांसीसी अखबर Le Parisien में बताया गया कि लड़की ने न्यायाधीश के सामने घटना को लेकर कहा कि उसने अपने पिता से झूठ बोला था और वह उस दिन कक्षा में भी मौजूद नहीं थी, जहाँ पैटी ने पैगंबर मुहम्मद का चित्रण करते हुए छात्रों के सामने विवादास्पद कार्टून दिखाए। 

दरअसल, बच्ची नहीं चाहती थी कि उसके घर में ये बात पता चले कि उसे क्लास में अनुपस्थित होने के कारण निलंबित कर दिया गया था। इसलिए उसने अपने टीचर को लेकर कहानी गढ़ी। लड़की ने अपने पिता को बताया कि पैटी ने मुस्लिम छात्रों को कक्षा छोड़ कर जाने को कहा क्योंकि वह एक पाठ पढ़ाते हुए शार्ली एब्दो न्यूजपेपर में छपे पैगंबर मोहम्मद के व्यंगात्मक चित्र को दिखा रहे थे।

अब यहाँ इस तथ्य को जानने के बाद यह स्पष्ट है कि 13 साल की एक बच्ची के झूठ के कारण उन घटनाओं ने जन्म लिया, जिससे पूरी घटना घटी व सैमुअल पैटी की निर्मम हत्या को अंजाम दिया गया।

पहले तो लड़की के पिता ने उसकी झूठी कहानी की सच्चाई जाने बिना सोशल मीडिया पर स्कूल व शिक्षक के विरुद्ध अभियान चलाया। फिर पैटी को टारगेट करते हुए उसे बर्खास्त करने की माँग की। जिसके बाद शिक्षक को मारने की धमकियाँ मिलने लगीं। नतीजतन केवल 10 दिन के भीतर एक अन्य कट्टरपंथी ने उन्हें मौत के घाट भी उतार दिया।

पड़ताल में बाद में पता चला कि लड़की के पिता, पैटी के हत्यारे अब्बुदलाख अंजोरोव के साथ संपर्क में थे। अभियोजन पक्ष का ये भी दावा है कि दोनों के बीच सीधा संपर्क था। हत्यारे ने पैटी को मारने से पूर्व लड़की के पिता को एक मैसेज किया था कि वह पैटी को किचन वाले चाकू से मारने वाला है।

बता दें कि साल 2020 में फ्रांस में घटी इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हर ओर इस्लामी कट्टरपंथियों के विरुद्ध आवाज उठी थी। इसके बाद राष्ट्रपति मैक्रों ने इस्लामी कट्टरपंथ पर अपना मत साफ किया था। अब इसी मामले में हत्यारे के अलावा दो अन्य किशोरों के विरुद्ध जाँच चल रही है। 

बताया जा रहा है कि इस गवाही से पहले तक लड़की बार-बार अपनी झूठे बयान देने पर अड़ी थी, लेकिन उसके क्लासमेट कुछ और कह रहे थे। उन्होंने ही ये बात भी बताई थी कि जिस लड़की ने शिक्षक पैटी पर इल्जाम लगाए, वो वास्तविकता में कक्षा में ही मौजूद नहीं थी।

गौरतलब है कि पेरिस में अक्टूबर 16, 2020 को सैम्युल पैटी नामक शिक्षक की हत्या की गई थी। उनकी हत्या के बाद उस स्कूल को भी धमकी मिली थी, जहाँ वह पढ़ाया करते थे। इस्लामी कट्टरपंथियों ने स्कूल में लिखा था “तुम सभी मारे जाओगे। स.. सैमुअल पैटी.. अल्लाहु अकबर”।

राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने भी कहा था कि इस्लाम के नाम पर हिंसा और हत्याओं को बढ़ावा दिया जा रहा है और ऐसे लोग हैं, जो इस्लाम के नाम पर हिंसक अभियान चलाते हुए हत्याओं और नरसंहार को जायज ठहरा रहे हैं। 

पश्चिम बंगाल के DGP हटाए गए, ‘प्रतिकूल’ रिपोर्ट के बाद EC का फैसला, कहा – ‘चुनाव संबंधी नहीं मिले कोई भी पोस्टिंग’

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने एक बड़ा निर्णय लिया है। आयोग ने राज्य में डीजीपी वीरेंद्र का तत्काल प्रभाव से तबादला करते हुए उनकी जगह 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी नीरंजन को नियुक्त किए जाने के आदेश दिए हैं।

यह फैसला अधिकारी के व्यवहार बर्ताव की ‘प्रतिकूल’ रिपोर्ट मिलने पर लिया गया। आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि तबादला होने के बाद भी वीरेंद्र को चुनाव से संबंधित कोई भी जिम्मेदारियाँ न दी जाएँ। 

बता दें कि पोल पैनल ने मंगलवार (मार्च 10, 2021) को तमिलनाडु के दो अन्य अधिकारियों के ख़िलाफ़ भी एक्शन लिया। इसमें चेन्नई में इनकम टैक्स के ज्वाइंट कमिश्नर के जी अरुणराज और चेंगलपत्तू एसपी डी कन्नन भी शामिल हैं। इनके ख़िलाफ़ भी प्रतिकूल रिपोर्ट पाने के बाद आयोग ने इनके विरुद्ध कार्यवाही की।

मुख्य सचिव को भेजा गया पत्र

कन्नन का तबादला एक एफआईआर के कारण हुआ, जिसमें एक महिला आईपीएस ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया हुआ था। इसी शिकायत को देखते हुए कमीशन ने न केवल कन्नन को तत्काल प्रभाव से निलंबन पर भेजा, साथ ही इस केस में आवश्यक कार्रवाई करने को भी कहा।

चुनाव आयोग ने बंगाल के मुख्य सचिव से डीजीपी वीरेंद्र की पोस्टिंग को लेकर बुधवार 10 बजे तक अनुपालन रिपोर्ट माँगी है। वहीं सीबीडीटी को अरुणराज से संबंधित रिपोर्ट भेजने को भी सुबह 10 बजे तक का समय दिया गया है। इसी तरह कन्नन को लेकर रिपोर्ट की माँग तमिलनाडु के मुख्य सचिव से की गई है। लेकिन समय उन्हें बुधवार को सुबह 11 बजे तक का दिया गया है।

तृणमूल कॉन्ग्रेस ने इस फैसले के बाद इसे राजनीतिक हस्तक्षेप करार दिया है। पार्टी सांसद सौगात रॉय ने कहा, “हमने ये पहले ही कहा था कि हमें आयोग के निर्णय में राजनीतिक प्रभाव लग रहा है। आयोग वो कर रहा है, जो भाजपा की माँग है। पहले उन्होंने आठ चरणों में वोटिंग तय की। अब ट्रांसफर। वीरेंद्र एक अच्छे अधिकारी हैं। वह जो भी कर लें, टीएमसी ये चुनाव जरूर जीतेगी।”

वहीं भाजपा के प्रवक्ता क्षमिक भट्टाचार्या ने इस फैसले का स्वागत किया। वह बोले, “जब हमारे राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर हमला हो रहा था, वह मारे जा रहे थे, हमें प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली। ऐसा जाहिर है चलने वाला नहीं था। हमें उम्मीद है, इस निर्णय से प्रशासन में निष्पक्षता आएगी।”

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, संभव है अभी और अधिकारियों पर तबादलों की गाज गिरे। पश्चिम बंगाल के स्पेशल जनरल ऑब्जर्वर अजय नायक और स्पेशल पुलिस ऑब्जर्वर विवेक दुबे और मृणाल कांती दास ने आयोग को कुछ दिन पहले इस बाबत रिपोर्ट भेजी थी और वीरेंद्र की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए थे। रिपोर्ट में वीरेंद्र का झुकाव टीएमसी की ओर बताया गया था।

मालूम हो कि बीजेपी पहले से ही डीजीपी वीरेंद्र पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी होने व उनके निर्देश पर काम करने का आरोप लगाती रही है। दूसरी ओर, बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ भी डीजीपी वीरेंद्र के खिलाफ लगातार हमलावर रहे हैं।

कुछ महीने पहले जब बंगाल के सीमावर्ती मुर्शिदाबाद जिले से राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने अलकायदा के कई आतंकियों को गिरफ्तार किया था तो राज्यपाल ने सीधे तौर पर डीजीपी की भूमिका पर सवाल उठाए थे। राज्यपाल का कहना था कि एनआइए दिल्ली से आकर आतंकियों को गिरफ्तार कर ले जाती है लेकिन राज्य पुलिस को कोई जानकारी नहीं थी।

BSP के पूर्व MLC मो. इकबाल की ₹1097 करोड़ की संपत्ति अटैच: UP चीनी मिल घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश में बीएसपी शासनकाल में हुए 1100 करोड़ के चीनी मिल घोटाला केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने बसपा के पूर्व एमएलसी और सहारनपुर के खनन माफिया हाजी मोहम्मद इकबाल की 1097 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अटैच किया। ईडी ने मोहम्मद इकबाल की कुल सात संपत्तियों को अटैच किया है। हाजी इकबाल पर कई और भी आरोप हैं, जिनमें अवैध खनन से नामी, बेनामी संपत्ति खरीदने जैसे मामले हैं। बताया जा रहा है कि 2500 करोड़ की संपत्तियाँ ईडी के निशाने पर हैं।

बीएसपी चीफ मायावती के शासनकाल में वर्ष 2010 से लेकर 2011 के दौरान करीब 11 चीनी मिलों को औने- पौने दाम पर बेचा गया था। पूरे प्रदेश में कुल 21 से ज्यादा चीनी मिल को बेहद कम दाम पर बेचने का आरोप है। इनमें से कई चीनी मिलों की बिक्री पर अब भी जाँच चल रही है। आरोप है कि इस फर्जीवाड़े से केंद्र और राज्य सरकार को करीब 1,179 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने 12 अप्रैल, 2018 को चीनी मिल घोटाले की सीबीआई जाँच कराने की सिफारिश की थी। सीबीआइ लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच ने अप्रैल, 2019 में चीनी मिल घोटाले का केस दर्ज किया था। सीबीआई ने लखनऊ के गोमतीनगर थाने में सात नवंबर 2017 को दर्ज कराई गई एफआईआर को अपने केस का आधार बनाते हुए सात चीनी मिलों में हुई धांधली में रेगुलर केस दर्ज किया था, जबकि 14 चीनी मिलों में हुई धांधली को लेकर 6 प्रारंभिक जाँच दर्ज की गईं थीं। 

करोड़ों के भ्रष्टाचार के इस मामले में सीबीआई के साथ-साथ ईडी ने भी सक्रियता बढ़ा दी थी। घोटाले में सीबीआई के बाद प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत केस दर्ज किया था। लखनऊ स्थित ईडी के जोनल कार्यालय ने यह कार्रवाई की थी।

सीबीआई ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए देवरिया, बरेली, लक्ष्मीगंज, हरदोई, रामकोला, छितौनी व बाराबंकी स्थित सात चीनी मिल खरीदने के मामले में दिल्ली निवासी राकेश शर्मा, उनकी पत्नी सुमन शर्मा, गाजियाबाद निवासी धर्मेंद्र गुप्ता, सहारनपुर निवासी सौरभ मुकुंद, मोहम्मद जावेद, मोहम्मद वाजिद अली व मोहम्मद नसीम अहमद के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया था। 

‘चाय वाले को झेल लो, गाय वाला आ गया तो झेला नहीं जाएगा’: डिजिटल हिंदू कॉन्क्लेव में कपिल मिश्रा

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने हाल ही में हैदराबाद में डिजिटल हिंदू कॉन्क्लेव में भाग लिया जहाँ उन्होंने कई मुद्दों पर अपने स्पष्ट विचारों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिनमें हिंदू समाज का लचीलापन, पीएम मोदी और योगी आदित्यनाथ का नेतृत्व, शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों समेत कई अन्य बातें शामिल थी।

रविवार 7 मार्च, 2020 को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के विभिन्न मुद्दों पर नागरिकों, नीति निर्माताओं, डोमेन विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और टिप्पणीकारों द्वारा उद्देश्य अध्ययन और गहन विश्लेषण को प्रोत्साहित करने के लिए पहल के रूप में ‘भारतनीति’ एक डिजिटल हिंदू कॉन्क्लेव का आयोजन किया था। इस सम्मेलन में मिश्रा के अलावा लेखक शेफाली वैद्य, पत्रकार प्रदीप भंडारी, मेजर सुरेंद्र पूनिया, पूर्व आईपीएस नागेश राव जैसे कई अन्य गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया।

हालाँकि, कॉन्क्लेव का मुख्य आकर्षण भाजपा नेता कपिल मिश्रा द्वारा दिया गया तीक्ष्ण भाषण था। मिश्रा ने तीखे और बेबाक तरीके से अपनी बात रखी। बीजेपी नेता ने भारत विरोधी ताकतों और पीएम मोदी और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व से प्रभावित लोगों पर भी हमला बोला।

मिश्रा द्वारा कॉन्क्लेव में की गई कुछ टिप्पणियाँ इस प्रकार हैं:-

‘तुमको मिलती होगी कुदरती बिरयानी, हम तो मेहनत करके खाते हैं’

मिश्रा विशेष रूप से शाहीन बाग ब्रिगेड की आलोचना कर रहे थे, जिसने नागरिकता संशोधन अधिनियम के पारित होने के विरोध में दिल्ली के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक पर कब्जा कर लिया था। उस समय, जब एक पत्रकार ने शाहीन बाग में एक प्रदर्शनकारी से पूछा था कि इतने सारे लोगों के लिए सभी भोजन कहाँ से आ रहे हैं और जो 40 से अधिक दिनों से बैठ रहे हैं, तो उन्होंने कहा था कि ये अल्लाह का चमत्कार है।

उस प्रदर्शनकारी ने कहा था, “हमें नहीं पता पैसे का। हमें तो रात को (खाना) रखा मिलता है एक जगह। हम उसे उठाते हैं और बाँट देते हैं। कुदरती मिल रहा है।”

इस पर तंज कसते हुए मिश्रा ने कहा, “अरे तुमको मिलती होगा कुदरती बिरयानी, हम तो मेहनत करके खाते हैं। जो केवल वोट देता है और पाँच साल शांति से अपना काम धंधा करता है, क्या उसका कोई अधिकार नहीं होगा इस देश में?”

ये तो केवल अँगड़ाई है, अभी तो हमने सिर्फ आँखें खोली है। अभी तो हम उठके खड़े नहीं हुए। अभी तो हमने चलना शुरू नहीं किया।

मिश्रा ने हिंदू समाज के लचीलापन पर बात करते हुए कहा कि भारतीय समाज दुनिया की एकमात्र सभ्यता है जिसने दो बुरी शक्तियों से खतरे को सफलतापूर्वक भगाया है, जिसमें इस्लामी आक्रमण और ईसाई धर्म प्रचार शामिल है। 

मिश्रा ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि हमारे पूर्वजों ने इतिहास को उसके प्राचीन रूप में संरक्षित करने में कैसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, “पिछले 500 वर्षों से देश में एक भी सरकार नहीं थी, जो प्रयागराज का असली नाम बताती हो, लेकिन फिर भी, हमारे पूर्वजों ने चुपचाप एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को प्रयागराज का सच्चा इतिहास बताया और 500 वर्षों के बाद, इलाहाबाद कहीं गंगा में बह गया और आज वह प्रयागराज बनकर खड़ा है।”

इस बात पर जोर देते हुए कि यह भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की शुरुआत है, मिश्रा ने कहा, “ये तो केवल अँगड़ाई है। अभी तो हमने सिर्फ आँखें खोली है। अभी तो हम उठके खड़े नहीं हुए। अभी तो हमने चलना शुरू नहीं किया।”

‘ये चाय वाले को झेल लो, कहीं वो गाय वाला आ गया तो तुमसे झेला नहीं जाएगा’

कपिल मिश्रा ने ऐसे लोगों के एक वर्ग को भी निशाने पर लिया, जिन्हें पीएम मोदी को देश का प्रधानमंत्री स्वीकार करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने उन्हें यह कहते हुए पीएम मोदी के शासन को सहन करने की सलाह दी कि अगर योगी सत्ता में आए, तो उन्हें उनके नेतृत्व को बर्दाश्त करने में और भी मुश्किल होगी। उन्होंने कहा, “ये चाय वाले (पीएम मोदी) को झेल लो, कहीं वो गाय वाला (सीएम योगी) आ गया तो तुमसे झेला नहीं जाएगा।”

‘चायवाले का क्या बिगाड़ लोगे और योगवाला आ गया तो तुम कुछ उखाड़ नहीं पाओगे’

पीएम मोदी को ‘चायवाला’और योगी आदित्यनाथ को ‘योगवाला’ के रूप में संदर्भित करते हुए, मिश्रा ने यह कहते हुए विरोधियों पर कटाक्ष किया कि वे पीएम मोदी को नुकसान नहीं पहुँचा सकते क्योंकि उनके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है और दूसरी ओर, अगर योगी आदित्यनाथ जीते तो उन्हें कुछ नहीं करने देंगे। मिश्रा ने कहा, “चायवाले का क्या बिगाड़ लिए और योगवाला आ गया तो तुम उसका कुछ उखाड़ नहीं पाओगे।”

NDTV ने राजस्थान में कोरोना वैक्सीन की कमी को लेकर फैलाया झूठ: PIB ने खोली पोल, बताया फर्जी

देश भर में कोरोना टीकाकरण का काम जोरों पर है। देश भर में सभी राज्य कोरोना टीकाकरण को भारत सरकार के निर्देश पर लगातार चला रहे हैं। भारत सरकार की तरफ से हर प्रदेश सरकार को कोरोना का टीका उनकी माँग के अनुरूप मुहैया कराया जा रहा है। राजस्थान में भी कोरोना का टीकाकरण कार्यक्रम शानदार तरीके से चलाया जा रहा है। 

इस सब के बीच NDTV की एक खबर ने सनसनी फैला दी। इस खबर में इस बात का दावा किया गया कि कोरोना के टीके का स्टॉक राजस्थान के पास खत्म हो रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार की तरफ से अभी राजस्थान की माँग के बाद भी उसे टीका मुहैया नहीं कराया गया है। अगर दो दिन के अंदर टीके का स्टॉक राजस्थान के पास नहीं पहुँचा तो राज्य में टीकाकरण अभियान रूक जाएगा।

Screengrab of the tweet by NDTV

इसको लेकर राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर रघु शर्मा के बयान का हवाला दिया गया। डॉक्टर रघु शर्मा ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय से मार्च महीने के लिए 67 लाख कोरोना वैक्सीन डोज की खपत की बात बताई थी और कहा था कि उनको 60 लाख कोरोना वैक्सीन डोज की जरूरत है। 

उन्होंने ये भी कहा था कि राज्य के पास केवल मंगलवार तक के टीकाकरण के लिए कोरोना वैक्सीन की डोज पड़ी हुई है। उन्होंने ये भी कहा था कि राजस्थान की देश के कुल वैक्सीनेशन में पच्चीस फीसदी भागीदारी है। यह भागीदारी आबादी के हिसाब से है। ऐसे में प्रदेश को ज्यादा मात्रा में कोरोना के टीके की डोज चाहिए।

पीआईबी की फैक्ट चेक टीम ने भी NDTV के इस दावे को फेक बताया है। राजस्थान के पास कोरोना वैक्सीन के टीके की कमी नहीं है और ना ही उसके टीकाकरण की गति को धीमा किया जाएगा। जितनी आवश्यकता होगी उतना वैक्सीन डोज राज्य को उपलब्ध कराया जाएगा। केंद्र सरकार की तरफ से साफ कर दिया गया कि यह हर राज्य के लिए लागू है। माँग के हिसाब से उनकी आवश्यकताओं पर ध्यान रखकर उसकी पूर्ति करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है और सरकार इसके लिए हर राज्य सरकार के साथ लगातार संपर्क में है।

खास कर राजस्थान को लेकर स्थिति को स्पष्ट करते हुए केंद्र सरकार ने कहा कि वर्तमान में राज्य में COVID-19 वैक्सीन की कोई कमी नहीं है। राजस्थान को 37.61 लाख खुराक की आपूर्ति की गई है और अभी तक केवल 24.28 लाख खुराक का उपयोग किया गया है। इसके बाद भी केंद्र सरकार नियमित रूप से वैक्सीन आपूर्ति की व्यवस्था बनाए हुए है। इसके साथ ही केंद्र सरकार की तरफ से यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि केंद्र ने पहले ही राज्य को कोरोना वैक्सीन की 85,000 आपातकालीन खुराक मुहैया करा दी है।

कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में कोरोना वायरस वैक्सीन की कमी के फर्जी दावे को डीडी न्यूज ने भी खारिज कर दिया।

NDTV ने स्पष्टीकरण जारी कर विरोधाभास की वजह बताई

पोल खुलने के बाद NDTV ने इस मामले पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि एनडीटीवी ने राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री की टिप्पणी की सूचना दी। उन्होंने कहा, “हमारे पास तीन दिनों के लिए टीके हैं… हमें ड्राइव के रूप में जारी रखने के लिए मार्च में 60 लाख वैक्सीन चाहिए। यदि हमें टीके नहीं लगे, तो ड्राइव बीच में ही रुक सकती है।”

पहले मंच से चंडी पाठ फिर मजार पर चादरपोशी: नंदीग्राम महासंग्राम में ममता ने खेला ‘हिन्दू-मुस्लिम कार्ड’

बंगाल विधानसभा चुनाव की सबसे हाई प्रोफाइल सीट नंदीग्राम से ममता बनर्जी ने हुँकार भर दी है। पश्चिम बंगाल की सीएम और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बीजेपी के उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी को चुनौती देते हुए कहा कि हिंदू कार्ड नहीं खेले। वह भी हिंदू धर्म की ही बेटी हैं। हालाँकि, इसके कुछ देर बात ही वह शमशाबाद मजार पर भी पहुँची और चादरपोशी भी की। इसके बाद ममता बनर्जी ने हरि मंदिर और दुर्गा मंदिर में भी दर्शन किया। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ममता बनर्जी हर वर्ग के मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही हैं।

ममता बनर्जी बुधवार (मार्च 10, 2021) को यहाँ से पर्चा दाखिल करेंगी और फिर वापस नंदीग्राम आ जाएँगी और 11 मार्च को शिवरात्रि के अवसर पर शिव की पूजा कर कोलकाता जाएँगी और उसी दिन चुनावी घोषणा पत्र जारी करेंगी।

इससे पहले मंगलवार (मार्च 9, 2021) को एक जनसभा में ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर जमकर निशाना साधा। साथ ही बीजेपी को हिंदुत्व की राजनीति पर नसीहत भी दी। इस अवसर पर ममता बनर्जी ने चंडी पाठ किया और शिव की भी स्तुति की। 

बीजेपी के हिंदू कार्ड पर ममता बनर्जी ने कहा, “मैं भी हिंदू हूँ और मेरे साथ हिंदू कार्ड मत खेलो! मैं सुबह चंडी पाठ करके घर से निकलती हूँ। मैं चंडी पाठ सुना रही हूँ, जो हिंदू-मुसलमान कर रहे हैं सुन लें। पाँव खींच खींचकर झूठ मत बोलिए। आने वाले दिनों में नंदीग्राम का मॉडल तैयार करूँगी। जनता से ममता ने कहा कि एक अप्रैल को उनको अप्रैल फूल कर दीजिएगा। एक अप्रैल को खेला होबे। चुनाव बाद देखूँगी कि जीभ में कितना जोर है। मिठाई खाइए जीभ की कटुता मिटेगी।”

ममता बनर्जी ने कहा कि मुझे बाहरी लोग कहा जाता है, गुजरात के लोग बाहरी नहीं हैं। गुजरात के गुंडा बाहरी नहीं है। यदि मैं बाहर की हूँ, तो मुख्यमंत्री कैसे हूँ? मेरे साथ हिंदू कार्ड नहीं खेलें। मैं भी हिंदू बेटी हूँ। पहले आप बताएँ कि आप हिंदू हैं या नहीं। मैं भी सुबह घर से चंडी पाठ करके ही निकलती हूँ। मुझसे हिंदू धर्म को लेकर प्रतियोगिता करें।

गौरतलब है कि पिछले दिनों शुभेंदु अधिकारी ने भाजपा के पितृ-पुरुष श्यामा प्रसाद मुखर्जी को याद करते हुए कहा कि उनके योगदान के बिना हमारा भारत एक इस्लामी मुल्क बन गया होता। उन्होंने कहा कि अगर मुखर्जी नहीं होते तो हम बांग्लादेश में रह रहे होते। बेहला के मुचिपारा में आयोजित रैली में उन्होंने ये बातें कहीं। उन्होंने लोगों को चेताया कि अगर TMC तीसरी बार सत्ता में आ जाती है तो वो बंगाल को कश्मीर बना देगी।

‘औरंगजेब ने हिंदुओं को नहीं मारा’: Rutgers यूनिवर्सिटी ने वामपंथी इतिहासकार के बतोलेबाजी को बताया- अकादमिक स्वतंत्रता

छात्रों के एक समूह ने रटगर्स-नेवार्क विश्वविद्यालय (Rutgers-Newark University) को एक याचिका देते हुए विवादित इतिहासकार और प्रोफेसर ऑड्रे ट्रूस्के (Audrey Truschke) के खिलाफ हिंदू धर्म के अपमान के लिए कड़ी कार्रवाई करने के लिए आग्रह किया, मगर संस्थान ने कार्रवाई करने के बजाय ‘हिंदू विरोधी’ टिप्पणी को ‘अकादमिक स्वतंत्रता’ बताते हुए इसे सही ठहराया। ‘Hindu on Campus’ ग्रुप ने याचिका को ट्विटर पर शेयर किया।

याचिका में सभी हिंदुओं को ‘कामुक और सेक्स के लिए आसक्त’ एवं ‘गाय का पेशाब पीने वालों’ के रूप में प्रदर्शित करने का आरोप लगाया गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रोफेसर ऑड्रे ट्रूस्के ने मुगल राजा औरंगजेब द्वारा हिंदुओं के नरसंहार को नजरअंदाज किया गया है।

मंगलवार (मार्च 9, 2021) को जारी एक बयान में, विश्वविद्यालय ने प्रोफेसर ऑड्रे ट्रूस्के का समर्थन किया है। इसमें प्रोफेसर को हटाने की माँग की गई है। विवादास्पद इतिहासकार के समर्थन को और अधिक सही ठहराने के लिए, रटगर्स ने छात्रवृत्ति में शामिल ‘अकादमिक स्वतंत्रता’ के महत्व का हवाला दिया।

विश्वविद्यालय ने कहा, “छात्रवृत्ति कभी-कभी विवादास्पद होती है, खास कर तब जब यह इतिहास और धर्म के इंटरफेस पर होती है, लेकिन प्रोफेसर ट्रुस्के के रूप में इस तरह की छात्रवृत्ति को आगे बढ़ाने की स्वतंत्रता, कठोर रूप से अकादमिक उद्यम के केंद्र में है।” हिंदू विरोधी प्रोफेसर पर नकेल कसने के बजाय रटगर्स ने हिंदू समुदाय को सांत्वना देने का विकल्प चुना।

Statement released by Rutgers-Newark

इसमें कहा गया है, “रटगर्स ने न सिर्फ दृढ़ता से हिंदू समुदायों के सभी सदस्यों के कैंपस में पढ़ाई करने की व्यवस्था की है, बल्कि ऐसा माहौल दिया है जिसमें वे न केवल सुरक्षित रहेंगे बल्कि अपनी धार्मिक पहचान को भी समर्थन दे सकते हैं।” विवादित इतिहासकार के हिंदूफोबिक टिप्पणी के लिए निंदा करने की बजाय उसका पूर्ण समर्थन किया।

Screengrab of Audrey Truschke’s tweet

‘इतिहासकार’ ने जोर दिया, “रटगर्स प्रशासन ने समर्थन का एक बयान जारी किया है। रटगर्स विवादास्पद विषयों सहित अकादमिक स्वतंत्रता का समर्थन करता है। मेरे द्वारा निर्देशित चिंताओं और खतरों को तत्काल समाप्त करने के लिए मैं अपने विश्वविद्यालय प्रशासन को धन्यवाद देती हूँ।”

ऑड्रे ट्रूस्के ने हिंदू नरसंहार से इनकार किया, रटगर्स ने इसे ‘अकादमिक स्वतंत्रता’ बताया

विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों के समूह ने याचिका में बताया कि ऑड्रे ट्रुस्के ने मुगल अत्याचारी औरंगजेब द्वारा किए गए हिंदू नरसंहार को नकारने और उसे कम करके दिखाने की दिखाने की भरपूर कोशिश की। उसने दावा किया था, “इस तरह की संख्या अक्सर अतिरंजित होती है क्योंकि वास्तव में यह जानने का कोई तरीका नहीं था कि उस समय भारत में कितने लोग मौजूद थे; और उस समय के लोगों ने यह संख्याएँ बताई!”

जबकि सच्चाई यह है कि कई भरोसेमंद सोर्स का अनुमान है कि अकेले औरंगजेब द्वारा कुल 4.6 मिलियन हिंदुओं की हत्या कर दी गई थी। याचिका में जोर दिया गया, एक जिम्मेदार इतिहासकार होने का दावा करने वाली प्रोफेसर ट्रुस्के ने ऐसे भयावह आँकड़ों को व्हाइटवॉश करने का फैसला किया।

अन्य उदाहरणों में, प्रोफेसर ट्रुस्के ने मुगल राजा का यह कहकर बचाव किया कि उसने नष्ट करने की तुलना में अधिक हिंदू मंदिरों की रक्षा की और उसने मुगल राज्य के कुलीन स्तरों पर हिन्दुओं की भागीदारी बढ़ाई।” ऑड्रे ट्रूस्के का हिंदू-विरोधी रुख नया नहीं है। 2018 में, ‘प्रख्यात’ इतिहासकार ने यह दावा किया था कि भगवान राम को ‘अग्निपरीक्षा’ के दौरान देवी सीता ने एक ‘मेसोजिनिस्ट पिग’ कहा था। इस टर्म का प्रयोग अक्सर खुद को बहुत ज़्यादा फेमिनिस्ट घोषित करने वाली वामपंथी सोच की महिलाएँ करती हैं। ऊपर अपने इसी घटिया सोच का माँ सीता पर थोपा गया है।

गोरखपुर ‘लव जिहाद’ मामले में मोइनुद्दीन गिरफ्तार, मुन्नू यादव बनकर की थी हिंदू युवती से शादी

गोरखपुर में एक शख्स के खिलाफ लव जिहाद का केस दर्ज हुआ है। आरोप है कि मोइनुद्दीन नाम के युवक ने नाम बदलकर एक हिंदू युवती को प्रेम जाल में फँसाया और फिर शादी की। बाद में जब भेद खुला तो युवती ने शिकायत दर्ज कराई।

घटना गोरखपुर के बुदहट थाना क्षेत्र का है, यहाँ रहने वाली एक युवती की संत कबीर नगर के भेलाभार गाँव के मुन्नू (मोइनुद्दीन) से मुलाकात हुई। दोनों को प्यार हुआ और घर से भाग कर शादी कर ली। कुछ दिनों बाद जब मोइनुद्दीन ने युवती पर धर्म परिवर्तन का दवाब बनाना शुरू किया तो युवती को सच्चाई का पता चला। मुन्नू यादव के मोइनुद्दीन निकलने पर युवती के पैरों तले जमीन खिसक गई।

दूसरी शादी की तैयारी में था मोइनुद्दीन

धर्म परिवर्तन से इनकार करने के बाद युवती अपने मायके में रह रही थी। इसी बीच युवती को मोइनुद्दीन के दूसरे विवाह की तैयारी की बात पता चली। शनिवार को वह निकाह करने के लिए बारात लेकर जा रहा था। युवती ने इसकी सूचना डायल 112 पर दे दी। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

मुकदमा दर्ज कर भेजा गया जेल

एसपी साउथ एके सिंह ने बताया कि रविवार को युवती की तहरीर पर मोइनुद्दीन उर्फ मुन्नू यादव के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध ऐक्ट 2020 की धाराओं समेत जालसाजी, मारपीट, धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया।

गौरतलब है कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के महोबा से ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) का मामला सामने आया। महोबा शहर की कोतवाली पुलिस ने आरोपित मुन्ना खाँ उर्फ असफाक खान को गिरफ्तार किया। उत्तर प्रदेश धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत उसकी गिरफ्तारी हुई थी। उस पर हिंदू बनकर 21 साल की एक लड़की को प्रेम जाल में फँसाने और फिर किडनैप कर उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने का आरोप था।

वहीं उत्तर प्रदेश के बलिया में 14 साल की एक लड़की का रेप करने के बाद उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के आरोप में पुलिस ने 22 साल के अब्दुल रहमान को पकड़ा था। रहमान ने 11 जनवरी 2021 को जबरन लड़की के घर में घुस कर उसके साथ दुष्कर्म किया था। इस दौरान उसने उसकी वीडियो क्लिप भी बनाई थी, जिसे दिखा कर वह बार-बार उससे शारीरिक संबंध बनाने की बात कर रहा था। रहमान का अब्बा पीड़िता पर धर्म-परिवर्तन का दबाव बना रहा था।