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केरल में RSS कार्यकर्ता की हत्या: योगी आदित्यनाथ की रैली को लेकर SDPI द्वारा लगाए गए भड़काऊ नारों का किया था विरोध

केरल के अलप्पुझा में दो गुटों के बीच हुए संघर्ष में एक RSS कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई। ये घटना चेरथला के वायलार में हुई। बुधवार (फरवरी 24, 2021) को ‘सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI)’ ने एक रैली निकाली थी, जिसमें हिंसा हुई। इसमें 6 लोग घायल भी हुए हैं। इसमें 22 वर्षीय RSS कार्यकर्ता नंदू कृष्णा की हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में SDPI कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज कराने का आश्वासन दिया है।

नंदू कृष्णा को वायलार में RSS का स्थानीय प्रमुख बनाया गया था। RSS के शाखा प्रमुख नंदू को इलाज के लिए एर्नाकुलम अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पुलिस ने सुरक्षा कड़ी कर दी है क्योंकि भाजपा ने दिन भर हड़ताल की घोषणा की है। ये घटना रात को नागामकुलंगरा रेलवे स्टेशन पर हुई। रैली दोपहर में ही निकाली गई थी, लेकिन शाम को विरोध प्रदर्शन के बाद हिंसा हुई।

बताया जा रहा है कि SDPI की रैली में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी, जिसके खिलाफ हिन्दू कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे। नंदू के एक साथी पर भी चाकू से वार किया गया, जिनका इलाज चल रहा है। भाजपा चेरथला निर्वाचन क्षेत्र के अध्यक्ष अभिलाष मपरमपिल का आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में ही इस घटना को अंजाम दिया गया। बता दें कि SDPI, ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI)’ का ही राजनीतिक संगठन है।

ये सारा मामला उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की केरल रैली से जुड़ा हुआ है, जो रविवार को हुई थी। उस दौरान भी SDPI वालों ने भड़काऊ नारे लगाए थे और उसके बाद विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे। ये सभी सीएम योगी के खिलाफ बहिष्कार अभियान चला रहे थे। संघ ने भड़काऊ बयानबाजी पर आपत्ति जताई तो कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया गया। RSS के 3 अन्य कार्यकर्ता भी घायल हुए हैं।

हाल ही में मलप्पुरम के तेनियापलम में PFI की  रैली में कुछ लोगों ने RSS की यूनिफॉर्म पहनी थी। परेड में आरएसएस की यूनिफार्म में शामिल लोगों को जंजीर से भी बाँधा गया था। इस रैली के कई वीडियो और फोटो सामने आए थे, जिसमें देखा जा सकता है कि इस दौरान अल्लाह-हू-अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर रसूलुल्लाह जैसे कई अन्य इस्लामी नारे लगाए गए। जुलूस के दौरान कुछ नारे काफी भड़काऊ और उत्तेजक थे।

गोडसे की पूजा करने वाले हिन्दू महासभा के नेता को कमलनाथ ने दिलाई कॉन्ग्रेस की सदस्यता

मध्य प्रदेश में निकाय चुनाव की सुगबुगाहट अब तेज़ हो चली है। अब ग्वालियर के वार्ड-44 से पार्षद बाबूलाल चौरसिया पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की मौजूदगी में कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए। चौरसिया हिन्दू महासभा के नेता हैं और महात्मा गाँधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे में विश्वास रखते हैं। जब बाबूलाल चौरसिया ने ग्वालियर में गोडसे की मूर्ति की पूजा कर हिंदू महासभा भवन की स्थापना की थी, तब यही कॉन्ग्रेस इन पर राजद्रोह का मामला चलाने की माँग कर रही थी‌।

ग्वालियर हाल ही में राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार गिरा कर भाजपा में शामिल होने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया का गढ़ माना जाता है, जो फ़िलहाल राज्यसभा सांसद हैं। बाबूलाल चौरसिया नाथूराम गोडसे की प्रतिमा का अभिषेक भी कर चुके हैं और पूजा भी करते रहे हैं। इस मौके पर ग्वालियर दक्षिण से विधायक प्रवीण पाठक और ब्लॉक अध्यक्ष संतोष शर्मा सहित कई अन्य कॉन्ग्रेस के स्थानीय नेता भी उपस्थित रहे।

बता दें कि बाबूलाल चौरसिया पहले भी कॉन्ग्रेसी ही हुआ करते थे, लेकिन पिछले निकाय चुनाव में टिकट न मिलने के कारण वो बागी हो गए थे और जीत भी दर्ज की थी। वार्ड-44 से पिछली बार कॉन्ग्रेस ने शम्मी शर्मा को टिकट दिया था, जिन्हें हार का मुँह देखना पड़ा था। उन्हें चौरसिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। कॉन्ग्रेस से पुराने जुड़ाव के कारण उनके पार्टी में आने की अटकलें कई दिनों से लगाई जा रही थीं।

इस मौके पर बाबूलाल ने कहा कि कॉन्ग्रेस ही उनकी पार्टी है और युवाओं को इससे जोड़ने के लिए वो पूरी मेहनत करेंगे। नवंबर 2019 में चौरसिया ने गोडसे की तस्वीर की आरती उतार कर माल्यार्पण किया था और उनके अंतिम अदालती बयान को पाठ्यक्रम में शामिल करने की माँग की थी। उन्होंने इस बयान को 1 लाख लोगों तक पहुँचाने का संकल्प लिया था। इसके लिए प्रशासन को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया था।

हिन्दू महासभा ने तब ‘नाथूराम गोडसे का 70वाँ बलिदान दिवस’ नामक कार्यक्रम का आयोजन किया था। तब कॉन्ग्रेस पार्टी ने इसके खिलाफ धरना प्रदर्शन की चेतावनी देते हुए भाजपा पर आरोप लगाए थे। शहर के कॉन्ग्रेस कमिटी की आपात बैठक बुला कर विरोध की रणनीति तय की गई थी। दूध, शहद और गंगाजल से हिन्दू महासभा ने गोडसे की प्रतिमा का अभिषेक किया था। आज वही कॉन्ग्रेस उनका स्वागत कर रही है।

राहुल गाँधी ने केरल की जनता से ‘उत्तर-दक्षिण’ कर वही किया जो उनके नेता उनसे करते हैं, जो उनको पसंद है – चापलूसी

जब छाछ फूँक कर पीने की आदत पड़ जाती है तो क्या होता है – केरल में राहुल गाँधी का कार्यक्रम इसकी मिसाल है। पुडुचेरी में दूध के जले राहुल गाँधी को मलप्पुरम में इंडिपेंडेंट ट्रांसलेटर की मदद लेनी पड़ी क्योंकि कॉन्ग्रेस नेताओं की हरकतें अब उनको समझ में आने लगी हैं। ऐसा लगता है वी नारायणसामी का ट्रांसलेशन सुनने के बाद राहुल गाँधी को पहली बार लगा है कि कॉन्ग्रेस नेता कैसे अपने स्वार्थ के लिए उनकी आँखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रहे हैं।

असल में कॉन्ग्रेस नेता तो झूठ और सच के फेर में भी नहीं फँसते – वे तो वही बोलते हैं जो राहुल गाँधी को पसंद होता है। कॉन्ग्रेस में राहुल गाँधी की चौकड़ी के बाहर बचे खुचे नेता तो यही मान कर चलते होंगे जब उनको अपने ‘निजी चमचों’ से फुर्सत मिलेगी तभी तो मुखातिब होंगे – और मन से मुखातिब तो उनके करीबियों को तभी समझ में आता है जब वो कुछ अलग करने के बाद नजर मिलते ही आँख भी मार देते हैं।

विधानसभा चुनाव के लिए केरल के लोगों की तारीफ में कसीदे पढ़ते हुए राहुल गाँधी ने ‘अमेठी’ के लोगों को लेकर जो कुछ भी कहा है, उनकी संसदीय प्रतिद्वंद्वी स्मृति ईरानी ने उसके लिए कॉन्ग्रेस नेता को ‘एहसान फरामोश’ करार दिया है – लेकिन ऐसा नहीं लगता। अगर राहुल गाँधी ऐसे होते तो कॉन्ग्रेस का ये हाल न हुआ होता – हो सकता है कॉन्ग्रेस में अपने पसंदीदा चौकड़ी के नेताओं से घिरे हुए जिन चीजों की आदत बन चुकी हो, केरल के मतदाताओं से उसी अंदाज में जुड़ने की कोशिश कर रहे हों – क्योंकि चापलूसी की लत ही ऐसी होती है।

अमेठी से ऐसी भी क्या नाराजगी

उत्तर भारतीयों की राजनीतिक समझ और मुद्दों को लेकर राहुल गाँधी की टिप्पणी आने के महज 24 घंटे पहले ही स्मृति ईरानी ने अमेठी में अपने जमीन की रजिस्ट्री का कागज शेयर किया था और बताया कि जल्द ही वो अपने संसदीय क्षेत्र में अपना मकान बनवाने जा रही हैं। उन्होंने ये भी बताया कि गृह प्रवेश के मौके पर सबको बुलाएँगी। स्मृति ईरानी ने घर बनवाने के लिए 15 हजार वर्ग मीटर जमीन खरीदी है और उसे अपना चुनावी वादा पूरा करना बता रही हैं।

अमेठी पहुँच कर जमीन का कागज लेने के बाद स्मृति ईरानी ने ये खुशखबरी शेयर की। जाहिर है निशाने पर तो राहुल गाँधी होने ही थे। नाम नहीं लेने से क्या होता है। स्मृति ईरानी ने कहा, “अमेठी की जनता के मन में हमेशा ये सवाल रहा कि क्या उनका सांसद यहाँ मकान बनाकर रहेगा? 2019 के चुनाव में मैंने क्षेत्र के लोगों से वादा किया था कि मैं अमेठी में अपना मकान बनाऊँगी और जनता के सारे काम यही से होंगे। उसी वादे को पूरा करने के लिए मैंने आज मकान की जमीन की रजिस्ट्री कराई है।”

राहुल गाँधी को स्मृति ईरानी का ये दाँव चुनावी हार के जख्मों को कुरेदने जैसा लगा होगा। 2019 के आम चुनाव में स्मृति ईरानी ने राहुल गाँधी को करीब 55 हजार वोटों से हरा दिया था। स्मृति ईरानी 2014 में भी अमेठी से चुनाव लड़ी थीं, लेकिन राहुल गाँधी से शिकस्त झेलनी पड़ी थी। आम चुनाव में राहुल गाँधी अमेठी के साथ साथ वायनाड से भी मैदान में थे और फिलहाल केरल के संसदीय सीट से भी लोक सभा सांसद हैं। केरल में भी पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के साथ ही विधानसभा चुनाव होने हैं और राहुल गाँधी फिलहाल चुनावी दौरे पर ही हैं।

केरल के लोगों से कनेक्ट होने की कोशिश में राहुल गाँधी बोल पड़े, “पहले 15 साल तक मैं उत्तर से सांसद था। मुझे एक अलग तरह की राजनीति की आदत हो गई थी। मेरे लिए केरल आना बहुत नया था – क्योंकि मुझे अचानक लगा कि यहाँ के लोग मुद्दों को लेकर दिलचस्पी रखते हैं और सिर्फ सतही तौर पर नहीं बल्कि विस्तार से समझते हैं।”

ऐसी टिप्पणी तो नहीं, लेकिन राहुल गाँधी ने वायनाड से चुनाव जीतने के बाद भी केरल के लोगों की आत्मीयता की तारीफ की थी। राहुल गाँधी की वो तारीफ भी अमेठी के लोगों से शिकायत जैसी ही समझ में आ रही थी, लेकिन चूँकि राहुल गाँधी ने अभी की तरह खुल कर कुछ नहीं कहा था इसलिए ऐसे किसी ने रिएक्ट भी नहीं किया।

उत्तर भारत के लोगों को लेकर राहुल गाँधी की टिप्पणी बीजेपी ने घेर लिया है। स्मृति ईरानी का रिएक्शन तो स्वाभाविक है, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, विदेश मंत्री एस जयशंकर और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कॉन्ग्रेस नेता पर जोरदार हमला बोला है। एस जयशंकर ने बताया है कि कैसे दक्षिण के रहने वाले होकर वो पढ़े-लिखे और पले-बढ़े उत्तर में और सब कुछ उनको बराबर लगता है। जेपी नड्डा ने जहाँ राहुल गाँधी पर बँटवारे की राजनीति करने का आरोप लगाया है वहीं योगी आदित्यनाथ ने अपने तरीके से नसीहत दे डाली है।

2019 के नतीजे आने के बाद राहुल गाँधी सीधे वायनाड गए थे और बोले कि ऐसा लगता है जैसे मैं बचपन से यहाँ का हूँ – स्वाभाविक भी था। पहली बार उनको गोद में लेने वाली नर्स भी तो केरल से ही थी। कुछ ही दिन बाद जब राहुल गाँधी कोझिकोड गए तो राजम्मा से मुलाकात भी की।

पहले तो लगा कि राहुल गाँधी भी अपनी दादी इंदिरा गाँधी की तरह अमेठी से वैसे ही तौबा कर लेंगे जैसे वो रायबरेली से की थीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इंदिरा गाँधी 1977 में राज नारायण से अपनी सीट रायबरेली से हार गईं तो दक्षिण का रुख कर लिया था। 1980 में वो आंध्र प्रदेश की मेडक (अब तेलंगाना में) लोक सभा सीट से संसद पहुँची, लेकिन रायबरेली से उनकी नाराजगी ताउम्र कायम रही।

देर से ही सही, लेकिन राहुल गाँधी अमेठी गए जरूर लेकिन काफी अनमने अंदाज में लोगों से बात की। राहुल गाँधी ने अमेठी के लोगों को बात बात पर एहसास कराया कि वो बहुत बड़ी गलती कर चुके हैं और वो हमेशा ही उनसे नाराज रह सकते हैं। राहुल गाँधी ने कहा कि वो उनके प्रतिनिधि नहीं रहे, इसलिए अब खुद उनको अपनी लड़ाई लड़नी होगी, लेकिन अगर वे उनकी किसी तरह की कोई मदद चाहते हैं तो महज एक फोन कॉल दूर समझें।

एक तरीके से राहुल गाँधी ने अमेठी के लोगों को संकेत दे दिया कि वो स्मृति ईरानी के खिलाफ नहीं बोलेंगे, क्योंकि वो तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बोलते हैं और स्मृति ईरानी उनके मुकाबले बराबरी में नहीं आतीं। अमेठी के लोगों का ये सवाल हो सकता था कि मोदी से भी वो क्यों लड़ते हैं, वो कोई पूरे देश का प्रतिनिधित्व करते नहीं – वो तो सिर्फ वायनाड से सांसद हैं। कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष जब थे तब थे।

अमेठी के लोगों से राहुल गाँधी की नाराजगी स्वाभाविक है। जिन लोगों पर वो आँख मूँद कर भरोसा करते थे, उनको लगता है उन लोगों ने उनको धोखा दिया है। हालाँकि, वो भूल जाते हैं कि अमेठी के लोगों को लगने लगा होगा कि राहुल गाँधी ही उनकी तरफ से आँखें मूँद लिए हैं और फिर उन लोगों ने एक बार आईना दिखाने का फैसला कर लिया।

राजनीति विरोधी होने के नाते स्मृति ईरानी भले जो भी कहें, लेकिन राहुल गाँधी अगर एहसान फरामोश होते तो क्या कॉन्ग्रेस का ये हाल हुआ होता। कॉन्ग्रेस के इस हाल में पहुँचने के पीछे क्या राहुल गाँधी की अपनों के प्रति भलमनसाहत का हाथ नहीं है।

अगर राहुल गाँधी एहसान फरामोश होते तो अशोक गहलोत और कमलनाथ कितना भी दबाव बनाते वो उनके बेटों को टिकट देकर कॉन्ग्रेस की बर्बादी का रास्ता साफ नहीं करते। वो तो उनकी बातें सुनते हैं और तारीफ भरी बातें अच्छी लगती हैं – तभी तो अशोक गहलोत प्रिय हैं और सचिन पायलट निकम्मा और नकारा हो जाते हैं – पीठ में छुरा भोंकने वाले बन जाते हैं। निश्चित तौर पर ये सब तो इसलिए होता होगा क्योंकि अशोक गहलोत के एहसान सचिन पायलट के मुकाबले ज्यादा होंगे!

कॉन्ग्रेस ने हालाँकि राहुल के बयान का बचाव करते हुए कहा कि वह मुद्दों की राजनीति की बात कर रहे हैं। लेकिन कॉन्ग्रेस के लिए उत्तर भारत के लोगों को यह समझाना बहुत मुश्किल होने वाला है कि क्या वह उत्तर भारतीयों की समझ पर सवाल खड़े कर रहे हैं या फिर वह यह मानते हैं कि इससे पहले उत्तर भारत में कॉन्ग्रेस को मिला समर्थन भी किसी बदलाव के लिए या मुद्दों के लिए नहीं था।

कुछ दिन पहले केरल में पंचायत व स्थानीय निकास चुनावों में कॉन्ग्रेस का पस्त हाल भी क्या इसीलिए था कि वहाँ के लोग मुद्दों की बात करते हैं। यह नतीजे तब आए जबकि वहाँ की वामपंथी सरकार पर भ्रष्टाचार के कई मामले थे। केरल से लोकसभा में बड़ी जीत हासिल करने वाली कॉन्ग्रेस की यह दशा क्यों हुई क्या इसे राहुल नहीं समझ पाए। बात इतनी ही नहीं है। राहुल के नए बयान ने जहाँ यह स्पष्ट कर दिया कि अमेठी पर परिवार का पारंपरिक दावा खत्म हो गया है वहीं दूसरी पारंपरिक सीट रायबरेली में भी काँटे बिछा सकता है। 

गौरतलब है कि अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड में राहुल गाँधी छात्राओं से संवाद कर रहे थे। तभी राहुल गाँधी ने छात्राओं से पूछा कि क्या अपनी इच्छा से किसी को उनके भाषण के मलयालम में अनुवाद में दिलचस्पी होगी, “मैं जो कह रहा हूँ- क्या यहाँ मौजूद कोई स्टूडेंट उसका अनुवाद करना चाहेगा?”

ये सुनते ही एक स्कूली छात्रा स्टेज पर चढ़ गई और राहुल गाँधी के भाषण का मलयालम में अनुवाद करने लगी। भाषण खत्म हुआ तो राहुल गाँधी ने उसे धन्यवाद तो दिया ही, चॉकलेट भी दिया। वो छात्रा भी बेहद खुश थी और बोली कि उसने कभी सोचा न था कि उसे कभी ऐसा मौका मिलेगा। छात्रा तो खुश थी लेकिन राहुल गाँधी के साथ मौजूद नेता काफी हैरान थे। अब तक उन नेताओं में से ही कोई न कोई राहुल गाँधी के भाषणों का अनुवाद करता रहा।

समझना ज्यादा मुश्किल नहीं है कि राहुल गाँधी ने ऐसा क्यों किया? केरल से पहले पुडुचेरी में जब सत्ता को लेकर उठापटक चल रही थी तभी राहुल गाँधी दौरे पर गए थे। उसी दौरान राहुल गाँधी से मिलने एक बुजुर्ग महिला पहुँची थी। राहुल गाँधी के हाल चाल पूछने पर उसने अपनी पीड़ा बताई, लेकिन भाषाई बाधा आड़े आ गई और निवर्तमान मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने मौके का फायदा उठाने में जरा भी देर नहीं की।

महिला ने शिकायत की थी कि तूफान के दौरान मुख्यमंत्री उन लोगों से मिलने तक नहीं पहुँचे, लेकिन वी. नारायणसामी ने राहुल गाँधी को इसका उलटा समझा दिया। वी. नारायणसामी ने राहुल गाँधी को समझाया कि महिला बता रही है कि तूफान के दौरान वो उन लोगों से मिलने गए और राहत के सामान भी भिजवाए।

अब अगर राहुल गाँधी पुडुचेरी के वाकये से सबक लेते हैं और आगे भी ये समझने की कोशिश करते हैं कि उनके करीबी नेता वी नारायणसामी की ही तरह झूठ तो नहीं बोल रहे हैं, तो कॉन्ग्रेस का काफी हद तक कल्याण हो सकता है, लेकिन अगर गुस्से में अमेठी के लोगों जैसा सलूक करते हैं और अपनी टिप्पणी को चुनावी जुमला नहीं साबित करते हैं तो लेने के देने पड़ने ही हैं।

बंगाल: PM मोदी ने जिस मैदान में रैली की, TMC नेताओं ने वहाँ किया गंगाजल छिड़ककर ‘शुद्धिकरण’

बंगाल में आगामी चुनावों को लेकर सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस किस स्तर की राजनीति पर उतर आई है, इसका एक बेहद घिनौना उदाहरण सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (फ़रवरी 22, 2021) को पश्चिम बंगाल के हुगली में जिस मैदान में जनसभा को संबोधित किया था वहाँ रैली के अगले ही दिन TMC के कार्यकर्ताओं ने जाकर गंगाजल छिड़का और उसका ‘शुद्धिकरण’ किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 24 फरवरी को बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी इसी मैदान में चुनावी सभा को संबोधित करना था। ऐसे में टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा गंगाजल छिड़क कर मैदान को साफ सुथरा किया गया ताकि मोदी के बाद रैली करने पहुँची सीएम ममता बनर्जी ‘साफ-सुथरे’ मैदान में जनसभा को संबोधित करे। टीएमसी के नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा मंगलवार को गंगाजल छिड़ककर पूरे मैदान का शुद्धिकरण किया गया था। हुगली में TMC के जिलाध्यक्ष दिलीप यादव की अगुवाई में यह अभियान चला गया।

वहीं, जनसभा स्थल के शुद्धिकरण को लेकर टीएमसी के समर्थकों का कहना था कि बीजेपी के इस मैदान में पैर पड़ते ही मैदान अपवित्र हो गया। भाजपा एक अशुभ शक्ति है, जिसे बंगाल से भगान के लिए छिड़क कर शुद्धिकरण किया जा रहा है, ताकि अशुभ शक्ति के प्रभाव से बंगाल को मुक्ति मिल सके। इसके अलावा, तृणमूल कॉन्ग्रेस के समर्थकों ने गंगाजल का छिड़काव करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ ‘मोदी सरकार दूर हटो’ के नारे लगाए।

गौरतलब है कि आज पश्चिम बंगाल की सीएम एवं तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने जहाँ एक तरफ पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर प्रदेश सरकार की तरफ से कोरोना के टीकों की खरीद को लेकर मदद माँगी है तो वहीं दूसरी ओर, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘सबसे बड़ा दंगाबाज’ करार दिया है।

दरअसल, टीएमसी कार्यकर्ताओं ने हुगली जिले के जिस मैदान पर गंगाजल छिड़क कर उसे शुद्ध किया था, वहाँ मुख्यमंत्री ने एक रैली को संबोधित करते हुए भारत के पीएम के खिलाफ काफी अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने कहा, मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पूरे देश में झूठ और नफरत फैला रहे हैं। “नरेंद्र मोदी देश के सबसे बड़े दंगाबाज हैं। ट्रंप के साथ जो हुआ, उनके (मोदी के) साथ उससे भी बुरा होगा। हिंसा से कुछ हासिल नहीं किया जा सकता।”

उन्होंने आगे कहा, “हमेशा आप (बीजेपी) कहते हैं कि तृणमूल कॉन्ग्रेस ‘तोलाबाज’ है, लेकिन मैं आज कहती हूँ आप (बीजेपी) ‘दंगाबाज और ढंगाबाज’ है। बंगाल पर बंगाल शासन करेगा। बंगाल पर गुजरात शासन नहीं करेगा। हमें बंगाल नहीं, बांग्ला चाहिए। मोदी बंगाल पर राज नहीं करेंगे। बंगाल पर गुंडे और बदमाश राज नहीं करेंगे।”

वोटर समझदार होता है, हमें उनका सम्मान करना चाहिए: राहुल के उत्तर-दक्षिण वाले बयान पर कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा उत्तर भारत की राजनीति पर दिए गए बयान पर घमासान जारी है। भाजपा नेताओं के बाद अब उनके ही पार्टी के सदस्य उन पर हमलावर होते हुए नजर आ रहे है। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने राहुल गाँधी को नसीहत दी कि सभी मतदाताओं का सम्मान करना चाहिए, चाहे वो उत्तर से हो या दक्षिण से, वोटर्स समझदार होते हैं। साथ ही, वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता सिब्बल ने कहा कि मैं कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करना चाहता हूँ मगर मतदाता कहीं का भी हो उसे इज्जत देनी चाहिए।

दरअसल, कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने केरल दौरे के दौरान त्रिवेंद्रम में एक विवादित बयान दिया था। जिस पर जमकर बहस छिड़ गई। केरल के तिरुवनंतपुरम में वायनाड से सांसद राहुल ने कहा था कि वो 15 साल तक उत्तर भारत से सांसद रहे, लेकिन केरल आने पर उन्हें अलग अनुभव हुआ। उन्होंने कहा कि यहाँ के लोग मुद्दों में दिलचस्पी रखते हैं, सिर्फ सतही तौर पर बात नहीं की जाती है, बल्कि संजीदगी से उस पर विचार करते हैं।

बता दें कि राहुल गाँधी का यह बयान उत्तर भारत और खासकर उन्हें आज देते रहने वाले मतदाताओं पर ही कटाक्ष था। इसी बयान पर सवाल खड़ा करते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि, हमें मतदाताओं का सम्मान करना चाहिए, चाहे वो उत्तर से हो या दक्षिण से। कपिल सिब्बल ने कहा कि मतदाताओं को अपने अधिकारों का पता होता है, किसे वोट करना है कैसे वोट करना है उन्हें मालूम होता है, चाहे वो दक्षिण से हो, उत्तर के राज्यों से हो, पश्चिम बंगाल से या फिर किसी अन्य इलाके से।

उन्होंने आगे राहुल गाँधी के बयान पर लीपापोती करते हुए कहा कि,”बंटवारे की राजनीति तो भाजपा करती है। मतदाता चाहे उत्तर भारत का हो या फिर दक्षिण भारत का सभी मतदाताओं को वोट देने की समझ है। मैं कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करना चाहता हूँ। मुझे नहीं लगता कि कॉन्ग्रेस किसी भी चुनाव में किसी भी तरह का अपमान करेगी। हमें देश में इलेक्टर्स का सम्मान करना चाहिए और हमें उनकी बुद्धिमत्ता को नहीं नकारना चाहिए।”

गौरतलब है कि इससे पहले राहुल गाँधी की विवादित टिप्पणी पर केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने भी उन्हें लताड़ा। राहुल को अमेठी में हराने वाली बीजेपी सांसद स्मृति ईरानी ने उन्हें एहसान फरामोश तक करार देते हुए ट्वीट किया, “एहसान फरामोश! इनके बारे में तो दुनिया कहती है- थोथा चना बाजे घना।”

इसके अलावा ईरानी ने गाँधी परिवार पर हमला बोलते हुए कहा था कि अगर गाँधी परिवार को उत्तर भारत के लोगों के प्रति हीन भावना है तो फिर ये लोग उत्तर भारत में राजनीति क्यों कर रहे हैं। राहुल गाँधी जिस उत्तर भारत का अपमान कर रहे हैं, उसी इलाके से उनकी माँ सोनिया गाँधी सांसद हैं। राहुल गाँधी ने जो बयान दिया है वो माफी के लायक नहीं है।

ममता के मंत्री जाकिर हुसैन पर बम से हमला करने वाला निकला बांग्लादेशी नागरिक, CID ने पकड़ा

पश्चिम बंगाल अपराध जाँच विभाग (CID) ने पिछले हफ्ते बांग्लादेश की सीमा से सटे मुर्शिदाबाद के नीमतिता रेलवे स्टेशन में हुए विस्फोट के सिलसिले में एक बांग्लादेशी नागरिक को हिरासत में लिया है। बता दें कि इस हमले में राज्य मंत्री जाकिर हुसैन और 20 से अधिक अन्य लोग हमले में घायल हुए थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, सीआईडी अधिकारियों ने हमले के सिलसिले में एक व्यक्ति को हिरासत में लेने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि जाँच अभी चल रही है।

17 फरवरी को एक जानलेवा हमले में, राज्य सरकार के मंत्री जाकिर हुसैन पर बम फेंका गया था। जाकिर हुसैन कोलकाता जाने के लिए यहाँ पहुँचे थे। जब वह अपनी ट्रेन का प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर इंतजार कर रहे थे, तभी अज्ञात हमलवारों ने मंत्री पर बम से हमला कर दिया। बम हमले के दौरान हुसैन और अन्य को गंभीर चोटें आई थीं। फिलहाल शहर के एक सरकारी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

सोशल मीडिया पर घटना का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में मंत्री अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ स्टेशन की ओर जा रहे थे कि तभी पीछे से अचानक धमाका होता है और चिल्लाने की आवाजें आती हैं।

इस हमले के बाद, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने दावा किया था कि जाकिर हुसैन पर बम हमला एक साजिश का हिस्सा था क्योंकि कुछ लोग उन पर दूसरी पार्टी में शामिल होने का दबाव बना रहे थे।

ममता बनर्जी ने कहा, “यह मंत्री जाकिर हुसैन पर एक पूर्व नियोजित हमला था। कुछ लोगों ने दावा किया है कि विस्फोट को दूर से नियंत्रित किया गया था। यह एक साजिश है। कुछ लोग पिछले कुछ महीनों से जाकिर हुसैन पर पार्टी में शामिल होने का दबाव बना रहे थे। मैं कुछ भी खुलासा नहीं करना चाहती, क्योंकि जाँच जारी है।”

गौरतलब है कि यह धमाका ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ जोरों शोरों पर है। घटना को लेकर राज्य भाजपा अध्यक्ष ने कहा, “यह घटना इस बात का प्रमाण है कि राज्य में कानून व्यवस्था नहीं है। यहाँ तक ​​कि मंत्री भी सुरक्षित नहीं हैं।”

कर्नाटक: चलती बस में छात्रा को छेड़ने वाला अरबी स्कूल का शिक्षक मोहम्मद सैफुल्ला गिरफ्तार

कर्नाटक की उप्पिनंगडी (Uppinangady) पुलिस ने 23 फरवरी को 32 वर्षीय अरबी शिक्षक मोहम्मद सैफुल्ला को बस में एक छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में में गिरफ्तार किया है। ‘Daijiworld’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरोपित सैफुल्ला सुल्लिया के एक अरबी स्कूल में पढ़ाता है। सैफुल्ला ने धर्मशाला से उप्पिनंगडी की ओर जा रही एक बस में लड़की के साथ छेड़खानी की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोहम्मद सैफुल्ला बस में यात्रा करते समय लगातार लड़की को गलत तरीके से छू रहा था और परेशान कर रहा था। जिसके बाद लड़की ने उसके व्यवहार पर आपत्ति जताई और बस कंडक्टर को सूचित किया।

वहीं लड़की की शिकायत पर ड्राइवर ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बस को उप्पिनंगडी पुलिस स्टेशन के सामने बस को रोक दिया। सैफुल्ला को पुलिस के हवाले कर दिया गया। छात्रा ने फिर थाने में सैफुल्ला के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद उप्पिनंगडी पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।

गौरतलब है कि एक ऐसी ही घटना 22 फरवरी को भी सामने आई थी जब बेंगलुरु से मंगलुरु जा रही एक छात्रा को रफीक नाम के एक व्यक्ति ने अपनी आपत्तिजनक हरकतों से परेशान किया था। वहीं जब लड़की के एक रिश्तेदार ने उप्पिनंगडी बस अड्डे पर उसकी हरकतों पर आपत्ति जताई, तो एक गिरोह ने तुरंत आरोपित का समर्थन करते हुए रिश्तेदार पर हमला कर दिया। जिसके बाद परिजनों ने उप्पिनंगडी पुलिस को इस घटना के बारे में सूचित किया। जिस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपित को धर लिया और चेतावनी देने के बाद उसे छोड़ दिया।

बंगाल: फ्री वैक्सीन बाँटने के लिए दीदी ने ‘दंगाबाज’ मोदी से माँगी मदद, भाषण में उगला जहर

पश्चिम बंगाल की सीएम एवं तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने जहाँ एक तरफ पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर प्रदेश सरकार की तरफ से कोरोना के टीकों की खरीद को लेकर मदद माँगी है तो वहीं दूसरी ओर, उन्होंने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘सबसे बड़ा दंगाबाज’ करार दिया है।

कोरोना वैक्सीन के लिए माँगी मदद

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य सरकार की ओर से कोरोना के टीकों की खरीद को लेकर मदद माँगी। दरअसल, टीएमसी अध्यक्ष राज्य के सभी लोगों को मुफ्त वैक्सीन लगाना चाहती है इस कारण बड़े पैमाने पर टीका खरीदना चाहती है।

ममता बनर्जी ने लिखा, ”पश्चिम बंगाल सरकार राज्य के सभी लोगों को मुफ्त वैक्सीनेशन के लिए टीका खरीदना चाहती है। मैं पीएम मोदी से अपील करती हूँ कि टीकों की खरीद में हमारी मदद करें जिससे की राज्य के लोगों को मुफ्त में यह वैक्सीन दिया जाए।”

ममता बनर्जी ने पीएम मोदी को लिखा है, “राज्य सरकार ने कोरोना टीकाकरण का कार्यक्रम शुरू किया है। सभी स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिसकर्मियों, नगरपालिका के कर्मचारियों और राजस्व के अधिकारियों के साथ-साथ फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीका दिया जा रहा है। राज्य सरकार आम लोगों तक शीघ्र ही टीका पहुँचना चाहती है। इस बाबत वह टीका निश्चित प्राधिकरण से खरीदना चाहती है, ताकि आम लोगों को निःशुल्क टीका दे सके।

बता दें, पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए ममता बनर्जी का यह पत्र सियासी माना जा रहा है। बिहार में भाजपा की राजनीतिक रणनीति को देखते हुए ममता बनर्जी ने भी चुनाव के मद्देनजर राज्य में फ्री वैक्सीन की घोषणा की थी।

सीएम ममता ने पीएम मोदी को कहा दंगाबाज

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हुगली जिले के शाहगंज में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पूरे देश में झूठ और नफरत फैला रहे हैं। उन्होंने कहा, “नरेंद्र मोदी देश के सबसे बड़े दंगाबाज हैं। ट्रंप के साथ जो हुआ, उनके (मोदी के) साथ उससे भी बुरा होगा। हिंसा से कुछ हासिल नहीं किया जा सकता।”

उन्होंने आगे कहा, “हमेशा आप (बीजेपी) कहते हैं कि तृणमूल कॉन्ग्रेस ‘तोलाबाज’ है, लेकिन मैं आज कहती हूँ आप (बीजेपी) ‘दंगाबाज और ढंगाबाज’ है। बंगाल पर बंगाल शासन करेगा। बंगाल पर गुजरात शासन नहीं करेगा। हमें बंगाल नहीं, बांग्ला चाहिए। मोदी बंगाल पर राज नहीं करेंगे। बंगाल पर गुंडे और बदमाश राज नहीं करेंगे।”

बनर्जी ने कहा, “मैं विधानसभा चुनाव में गोलकीपर रहूँगी और तुम (भाजपा) एक भी गोल नहीं कर पाओगे। सभी शॉट गोल पोस्ट के ऊपर से चले जाएँगे।” इसके अलावा मुख्यमंत्री ने कोयले की हेराफेरी से जुड़े एक घोटाले के सिलसिले में तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजीरा बनर्जी से सीबीआई पूछताछ की भी आलोचना की और इसे एक महिला का अपमान बताया।

भाषण के दौरान पीएम मोदी पर ममता बनर्जी इस कदर बौखलाई की उन्होंने सारी मर्यादा तार तार करते हुए पीएम मोदी व अमित शाह को रावण व दानव तक करार कर दिया। उन्होंने कहा, “बहुत ज्यादा बोल रहे हैं और दो माह बाकी हैं, देखें कौन बाद में बोलता है। नरेंद्र मोदी झूठ बोल रहे हैं। बोल रहे हैं, बंगाल ले लेंगें, लेकिन बंगाल को लेना इतना आसन नहीं है। इस चुनाव में खेला होबे.. खेला तो होबे.. (खेल होगा) बीजेपी देखो खेला होबे..”

ममता बनर्जी ने कहा, “हमें सीबीआई की धमकी दे रहे हैं, लेकिन गिरफ्तार करके दिखाए। कितने लोगों को गिरफ्तार करेंगे। 20 लाख लोगों को गिरफ्तार करना होगा। तुम मुझे यहां दबाओगे, मैं दिल्ली में पेड़ बनकर उठूँगी। एक घायल बाघिन खतरनाक होती है। खेल जारी है। ममता बनर्जी ने लोगों से कहा, “यदि आप उन्हें बंगाल में हरा सकते हैं, तो जान लें कि वे भारत से गायब हो जाएँगे।”

महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस ने मुस्लिम और मराठा आरक्षण के समर्थन में किया प्रस्ताव पारित

महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस की संसदीय समिति की एक बैठक ने मंगलवार (23 फरवरी, 2021) को राज्य में मुस्लिम और मराठा आरक्षण के समर्थन में एक प्रस्ताव पारित किया है। वहीं कृषि कानून का विरोध करते हुए कॉन्ग्रेस पार्टी ने यह भी कहा कि राज्य में केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि कानूनों को लागू नहीं किया जाना चाहिए।

संसदीय समिति की बैठक की अध्यक्षता महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले द्वारा पार्टी के राज्य प्रभारी एचके पाटिल की उपस्थिति में आयोजित की गई थी। बैठक में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता बाबासाहेब थोराट, अशोक चव्हाण, पृथ्वीराज चव्हाण और सुशीलकुमार शिंदे जैसे कई दिग्गज नेता मौजूद रहे।

प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने बैठक के दौरान कहा कि कॉन्ग्रेस राज्य में सभी समुदायों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और मुस्लिम समुदाय के लिए आरक्षण लागू करना महाविकास अघाड़ी सरकार के प्रोग्राम का हिस्सा है, ताकि सभी समुदायों के कल्याण हो सके।

कॉन्ग्रेस ने मुस्लिम आरक्षण के अलावा, केंद्र द्वारा पारित कृषि कानूनों को रद्द करने, राज्य में अलग-अलग कृषि कानूनों के निर्माण, राज्य में वैधानिक बोर्ड्स के लिए धन के संवितरण और धन के आवंटन के लिए वीजेएनटी और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रस्तावों की माँग को भी पारित किया। इसके अलावा पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के लिए कई अन्य कार्यक्रमों की भी चर्चा की। पार्टी ने संकल्प अभियान शुरू करने का फैसला किया, जिसके तहत राज्य के नेता अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने के लिए प्रयास करेंगे।

बता दें कि संसदीय समिति की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि पार्टी महागठबंधन (MVA) के सहयोगियों – शिवसेना और NCP के साथ स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी की स्थानीय इकाइयों के साथ परामर्श करेगी।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में जब से महाविकास अघाड़ी ने गठबंधन से सरकार बनाई है, तब से गठबंधन से जुड़ी दूसरी पार्टियाँ राज्य में मुस्लिमों के लिए आरक्षण लाने का दबाव बना रही हैं। उद्धव ठाकरे के जनवरी 2020 में मुख्यमंत्री बनने के एक महीने बाद, मीडिया में ऐसी कई रिपोर्ट्स सामने आईं, जिसमें कहा गया था कि महाविकास अघाड़ी सरकार राज्य में मुस्लिमों के लिए आरक्षण लागू करने की तैयारी कर रही है।

वहीं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नवाब मलिक ने फरवरी 2020 में कहा था कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली MVA सरकार जल्द ही अध्यादेश लाएगी ताकि राज्य में शैक्षणिक संस्थानों में मुस्लिमों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण का विस्तार किया जा सके। इसके अलावा उन्होंने राज्य विधान परिषद को आगामी शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत और प्रवेश प्रक्रिया से पहले इस संबंध में ‘उचित कार्रवाई’ करने का आश्वासन भी दिया था।

UP: लव-जिहाद के खिलाफ विधेयक विधानसभा में ध्वनि मत से पास, नाम बदलकर निकाह करने वालों के ‘अच्छे दिन’ समाप्त

उत्तर प्रदेश में जबरन धर्म परिवर्तन और लव-जिहाद (Love Jihad) के मामलों पर रोक लगाने के लिए बनाया गया उत्तर प्रदेश अवैध धर्म परिवर्तन विधेयक 2021 विधानसभा में ध्वनि मत से पारित हो गया है। योगी सरकार ने प्रदेश में धर्मांतरण जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए ये ड्राफ्ट तैयार किया था। ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2021’ के मुताबिक, जबरदस्ती धर्मांतरण कराने वाले को अलग-अलग श्रेणी में एक साल से 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। साथ ही कम से कम 50,000 रुपए का जुर्माना भी पीड़ित पक्ष को देना होगा।

बुधवार (फरवरी 24, 2021) को योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में अपने सबसे महत्वपूर्ण विधेयक उत्तर प्रदेश अवैध धर्म परिवर्तन विधेयक 2021 यानी एंटी लव जिहाद विधेयक ध्वनि मत से पारित किया। हालाँकि अभी यह विधेयक विधान परिषद में पास होने के बाद राज्यपाल के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। उसके बाद ही ये कानून का रूप लेगा।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ के खिलाफ बने विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 पर हस्ताक्षर कर इसे मंजूरी दे दी थी। इसके मुताबिक अगर कोई सामूहिक धर्म परिवर्तन करवाता है तो उसे 3 साल से 10 साल तक सजा दी जाएगी। अध्यादेश के उल्लंघन की दोषी किसी संस्था या संगठन के विरुद्ध भी सजा का प्रावधान होगा।

इसके अलावा कम से कम 50,000 रुपए का जुर्माना भी देना होगा। साथ ही, धर्म परिवर्तन में शामिल संगठनों का रजिस्ट्रेशन कैंसल कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। नाम छिपा कर छद्म नाम से शादी करने वालों को 10 साल तक की सज़ा मिलेगी। इसके साथ ही यह अपराध संज्ञेय अपराध की श्रेणी में होगा और गैर जमानती (Non Bailable) होगा। अभियोग का विचारण प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की कोर्ट में किया जाएगा।

अध्यादेश के अनुसार, नाबालिग लड़की, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति की महिला का जबरन धर्म परिवर्तन कराए जाने के मामले में कम से कम दो वर्ष तथा अधिकतम 10 वर्ष तक का कारावास तथा कम से कम 25 हजार रुपए जुर्माना होगा।

योगी आदित्यनाथ ने पहले ही कहा था, “यह अध्यादेश ऐसे लोगों के लिए चेतावनी है, जो अपनी पहचान छिपा कर हमारी बहनों के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास करते हैं। हमने जो कहा था, वह करके दिखाया है। साथ ही यह भी कहने के लिए आए हैं कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश दिया है शादी ब्याह के लिए धर्म परिवर्तन आवश्यक नहीं है। ऐसा नहीं किया जाना चाहिए और न ही इसे मान्यता मिलनी चाहिए। इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार भी निर्णय ले रही है कि हम लव जिहाद को सख्ती से रोकने का प्रयास करेंगे।”