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ई-कॉमर्स कंपनी के डिलीवरी बॉय ने 66 महिलाओं को बनाया शिकार: फीडबैक के नाम पर वीडियो कॉल, फिर ब्लैकमेल और रेप

पश्चिम बंगाल के हुगली में एक ई-कॉमर्स वेबसाइट के डिलीवरी बॉय को गिरफ्तार किया गया है, जिसने 66 महिलाओं को ब्लैकमेल कर उनका रेप किया। उसे वहाँ पर लोग ‘सीरियल रेपिस्ट’ भी कह रहे हैं। महिलाओं ने उसके खिलाफ कड़ी सजा की माँग की है। उसका नाम विशाल बरमा है, जो डिलीवरी के बाद फीडबैक लेने के नाम पर महिलाओं को वीडियो कॉल करता था। महिलाओं को विश्वास में लेकर उन्हें कई बार कॉल करता था और तस्वीरें ले लेता था।

उन्हीं के जरिए आरोपित डिलीवरी मैन महिलाओं के साथ ब्लैकमेल और रेप की घटनाओं को अंजाम दिया करता था। वो उन महिलाओं को अपने साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए विवश करता था। क्योटा के त्रिकोण पार्क में रहने वाले उक्त युवक पर आरोप है कि उसने 66 महिलाओं का रेप किया। चंदन नगर कमिश्नरेट के अंतर्गत चुचुड़ा थाने की पुलिस ने उसे और उसके साथी सुमन मंडल को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है। उसकी माँ ने भी अपने बेटे के अपराध को स्वीकार किया है।

वीडियो कॉल के दौरान वो महिलाओं के साथ बात करते हुए स्क्रीनशॉट्स ले लिया करता था। शनिवार (फरवरी 20, 2021) को इन दोनों को गिरफ्तार कर के अगले ही दिन अदालत में पेश किया गया, जहाँ न्यायाधीश ने उन्हें 5 दिनों की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। उसने ज्यादातर गृहणियों को अपना शिकार बनाया। वो हथियार दिखा कर रुपए और गहने भी छीन लेता था। एक गृहिणी ने गहने छीनने की शिकायत लिखाई थी, जिसके बाद जाँच शुरू हुई।

‘सीरियल रेपिस्ट’ डिलीवरी बॉय को किया गया गिरफ्तार (वीडियो साभार: ABP Ananda)

जब पुलिस आरोपित डिलीवरी बॉय को पकड़ने गई, तब भी वो किसी महिला के साथ ही था। उस महिला को भी उसी तरह से डराया गया था। पुलिस को उसके पास से मोबाइल फोन और माइक्रोचिप्स पर कई महिलाओं की आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियोज मिले। वहीं उसका दोस्त और पेशे से पेंटर सुमन भी उसके साथ इन कृत्यों में शामिल था। उसके परिवार को इस बारे में कुछ नहीं पता। आरोपित ने दावा किया है कि उसके पास जो बंदूक है वो नकली है।

‘आप दोनों बंगाल और महाराष्ट्र को अलग देश घोषित कर PM बन जाएँ, भारत से लें आज़ादी’: SFJ की ममता और उद्धव को सलाह

खालिस्तानी संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ)’ ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से अपील की है कि आप अपने-अपने राज्यों को ‘भारत से आज़ाद’ घोषित करें। यूट्यूब पर ‘फ्री बंगाल फ्री महाराष्ट्र’ नाम से चैनल बना कर पहला वीडियो भी अपलोड कर दिया गया है, जिसमें SFJ के गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कहा कि वो मानवाधिकार के लिए लड़ रहा है और पंजाब को ‘कब्ज़ा से मुक्ति’ दिलाने के लिए लड़ रहा है।

वीडियो में उसने कहा, “मैं महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के नागरिकों को संदेश देना चाहता हूँ। मराठी और बंगाली भाई-भाई होते हैं। मैंने ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे को पत्र लिख कर कहा है कि वो एकतरफा रूप से दोनों राज्यों को भारत से आज़ाद घोषित करें। दोनों राज्यों की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को बचाने के लिए भारत की प्रधानता का खत्म होना ज़रूरी है। भारत इन सब को ख़त्म कर उन पर राज़ करना चाहता है।”

SFJ के इस वीडियो में गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कहा कि दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री वहाँ के आधिकारिक मुखिया हैं, ऐसे में उनके पास अधिकार है कि वो ‘आज़ादी की घोषणा’ करें। उसने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून भी इसका समर्थन करेगा और विवाद की स्थिति में ‘इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस’ निर्णय करेगा। पन्नू ने दावा किया कि पिछले 73 वर्षों से भारत सरकारों ने दोनों राज्यों के प्राकृतिक संसाधनों का ‘दोहन’ किया है।

SFJ ने भारत के ‘टुकड़े-टुकड़े’ करने की बात की

उसने वहाँ के लोगों की गरीबी के लिए भी भारत सरकार को ही जिम्मेदार ठहराया। पन्नू ने कहा कि पिछले 20 वर्षों से महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में किसानों की आत्महत्या के आँकड़े बढ़ते जा रहे हैं और वो देश में सर्वाधिक हैं क्योंकि भारत सरकार ने हमेशा ‘महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल विरोधी नीतियाँ’ बनाई हैं। उसने कहा कि ममता और उद्धव को इतिहास में ऐसे नेता के रूप में सम्मान देकर याद किया जाएगा, जिन्होंने ‘अपने नागरिकों का साथ’ दिया।

SFJ के पन्नू ने कहा, “आप दोनों (ममता और उद्धव) के पास क्षमता है कि आप पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र को अलग-अलग देश घोषित करें। अभी आप मुख्यमंत्री हैं, लेकिन ऐसा होते ही आप दोनों अपने-अपने देशों के प्रधानमंत्री बन जाएँगे। अभी वो समय यही जब आप अपनी शक्ति, कलम और जनता के वोटों का इस्तेमाल करे। हम लोग अंतरराष्ट्रीय मंच पर आपका समर्थन करेंगे। कोसोवा को ऐसे ही हमने आज़ादी दिलाई।”

बता दें कि गणतंत्र दिवस हिंसा से पहले प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ)’ ने ऐलान किया था कि जो भी दिल्ली के लाल किला पर खालिस्तानी झंडा फहराएगा, उसे 2.5 लाख डॉलर (1.83 करोड़ रुपए) इनाम के रूप में दिए जाएँगे। लाल किले पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ चढ़ भी गई थी और वहाँ तिरंगे का अपमान भी किया गया। पन्नू ने हिंसा करने वालों का भी जम कर समर्थन किया था।

300 वाला हॉलीवुड का सुपरस्टार गेरार्ड बटलर ने गर्लफ्रेंड सहित अपना लिया हिंदू धर्म – Fact Check

सोशल मीडिया पर एक नया दावा सुर्खियाँ बटोर रहा है कि हॉलीवुड अभिनेता गेरार्ड बटलर (Gerard Butler) ने हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया है। 

हॉलीवुड अभिनेता के हिन्दू धर्म स्वीकारने को लेकर किया गया ट्वीट

तमाम ट्वीट में दावा किया गया कि हॉलीवुड स्टार ने हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया है। एक ही कैप्शन के साथ एक ही तस्वीर कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने साझा किया।

हॉलीवुड अभिनेता के हिन्दू धर्म स्वीकारने को लेकर किया गया ट्वीट

एक ट्विटर यूज़र ने हॉलीवुड अभिनेता की ऐसी तस्वीर साझा की, जिसमें उनके पास भगवत गीता थी। 

हॉलीवुड अभिनेता के हिन्दू धर्म स्वीकारने को लेकर किया गया ट्वीट

एक ऑनलाइन पोर्टल ने भी अपनी रिपोर्ट में कुछ इस तरह के ही दावे किए, जो कि जनवरी 2020 में प्रकाशित की गई थी। इसमें कहा गया था कि बटलर ने अपनी गर्लफ़्रेंड के साथ हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया है।     

ऑनलाइन पोर्टल द्वारा किया गया दावा

जबकि इस तरह के तमाम दावे सही नहीं हैं। दिसंबर 2019 से जनवरी 2020 के दौरान बटलर भारत में छुट्टियाँ मनाने के लिए आए थे। इस दौरान वह वाराणसी, ऋषिकेश और कर्नाटक गए थे, जहाँ उन्होंने दलाई लामा से भी मुलाक़ात की थी। 

ऊपर साझा की गई तमाम तस्वीरें उस समय की ही हैं। 

ऋषिकेश में उद्योगपति यश बिड़ला हॉलीवुड अभिनेता बटलर से मिले थे। उन्होंने साथ में कई तस्वीरें भी खिंचवाई थी। 

एक और तस्वीर जिसमें दावा किया जा रहा है कि बटलर ने हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया, उसी यात्रा की है, जब वो कर्नाटक स्थित Ganden Shartse Monastery गए थे। यहीं पर उनकी मुलाक़ात दलाई लामा से हुई थी। 

बटलर ने भारत की यात्रा के दौरान वाराणसी के घाटों और योग केंद्रों का भी दौरा किया था। बटलर लगभग 10 साल पहले भी वाराणसी आए थे और उनका कहना था कि वो अनुभव अद्भुत था। पिछले साल वाराणसी की यात्रा के दौरान वह फिर से वाराणसी के घाटों पर घूमे और पूजा भी कराई।   

इस्लामी मुल्क ने वॉलीबॉल में बिकनी पर लगाया प्रतिबंध, अंतरराष्ट्रीय महिला खिलाड़ियों ने टूर्नामेंट का किया बहिष्कार

इस्लामी मुल्क क़तर में बिकनी पर प्रतिबंध के कारण वहाँ होने वाले वॉलीबॉल टूर्नामेंट का खिलाड़ी बॉयकॉट कर रहे हैं। जर्मनी की स्टार वॉलीबॉल खिलाड़ी कार्ला बोर्गर और जूलिया सुडे ने इस टूर्नामेंट के बहिष्कार की घोषणा कर दी है।

कार्ला बोर्गर और जूलिया सुडे ने कहा कि क़तर अकेला ऐसा देश है, जहाँ वॉलीबॉल कोर्ट में बिकनी पहनने की अनुमति नहीं है। कार्ला ने कहा कि वहाँ जाकर उन्हें अपना ही काम करना है, लेकिन उस काम के लिए जो कपड़े पहनने होते हैं, उस पर ही लगाम लगाई जा रही है।

उन्होंने कहा कि ये दुनिया की अकेली ऐसी सरकार है, जो खिलाड़ियों पर अपने विचार थोपते हुए बता रही है कि उन्हें उनका कार्य कैसे करना है, जिसकी वो आलोचना करते हैं।

मार्च में होने वाला ये टूर्नामेंट क़तर का पहला बीच वॉलीबॉल इवेंट होने वाला है। 7 साल पहले यहाँ पुरुषों का खेल हुआ था। जबकि इस बार सभी महिला खिलाड़ियों को निर्देश दिया गया है कि वो शर्ट और लंबे ट्रॉउज़र पहनें, जिसका विरोध हो रहा है।

‘वर्ल्ड बीच वॉलीबॉल फेडरेशन (FIVB)’ ने कहा है कि मेजबान देश की संस्कृति और नियम-कायदों को देखते हुए ये चीजें तय की जाती हैं। लेकिन, जर्मनी की दोनों खिलाड़ियों ने इन नियमों के विरोध में क़तर जाने से इनकार कर दिया है।

दोनों खिलाड़ियों ने कहा कि वो हर देश के माहौल के प्रति ढल सकती हैं, लेकिन दोहा में इतनी गर्मी रहती है कि बिकनी के बिना ये खेल नहीं हो पाएगा। सुडे ने कहा कि 2019 वर्ल्ड एथलिट चैंपियनशिप में क़तर ने कुछ रियायतें दी थीं।

बता दें कि मार्च में क़तर में बहुत ज्यादा गर्मी नहीं रहती है, लेकिन फिर भी तापमान 30C (86F) के आसपास घूमता रहता है। बोर्गर ने इस पर भी सवाल उठाए कि क्या इस खेल के आयोजन के लिए क़तर एक योग्य मेजबान देश है भी?

क़तर में मानवाधिकार की समस्या और इसके स्पोर्टिंग इतिहास को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं, जिन्हें हाल के दिनों में ठीक करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन, फिर भी पेंच फँस रहा है।

क़तर में इस्लामी कानून चलता है, जहाँ महिलाओं को हिजाब और बुर्का पहनने को कहा जाता है। लेकिन, हाल के दिनों में कई पर्यटक वहाँ पर पहुँचे हैं, जिन्हें नियमों में ढील की उम्मीद है।

क़तर के स्विमिंग पूल और पाँच सितारा होटलों में महिलाएँ बिकनी पहनती रही हैं। जर्मनी वॉलीबॉल फेडरेशन ने भी अपने खिलाड़ियों का समर्थन किया है। 2006 एशियन गेम्स में इसी खेल में खिलाड़ियों को बिकनी पहनने की अनुमति मिली थी।

स्वरा भास्कर ने कंगना को लेकर फैलाया झूठ, आइटम नंबर पर कसा तंज: भंसाली और खान के नाम से मिला करारा जवाब

लिबरल्स की एक बड़ी जमात अक्सर बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ दुष्प्रचार में जुटी रहती है। हाल ही में कंगना ने ऐलान किया कि उन्होंने कभी कोई आइटम नंबर नहीं किया। इस पर स्वरा भास्कर ने एक फ़ेक न्यूज़ साझा की, जिसे आधार बना कर मुख्यधारा की मीडिया (मेनस्ट्रीम मीडिया) ने कंगना को निशाना बनाना शुरू कर दिया। 

स्वरा भास्कर ने दावा किया कि कंगना ‘रज्जो’ फिल्म के आइटम नंबर ‘जुल्मी रे जुल्मी’ में नज़र आई थीं। स्वरा ने तंज करते हुए लिखा, “रज्जो फिल्म के इस आइटम नंबर में तुम्हारा डांस बहुत पसंद आया था। तुम शानदार परफ़ॉर्मर और अद्भुत डांसर हो, तुम्हारे अगले (आइटम नंबर) का इंतज़ार है।”

(साभार : ट्विटर)

मुख्यधारा की मीडिया ने इस मौके को भुनाने में ज़रा भी देरी नहीं की। मीडिया के मुताबिक़ स्वरा ने कंगना को ‘करारा जवाब’ दिया। इसमें हिन्दुस्तान टाइम्स से लेकर द क्विंट तक शामिल थे। ऐसे प्रतिष्ठित मीडिया समूहों ने घनघोर वामपंथी और कथित अभिनेत्री के दावों की पुष्टि करना तक ज़रूरी नहीं समझा।

इसे देख कर ऐसा लगा, जैसे मीडिया स्वरा भास्कर के झूठे और आधारविहीन दावों का पक्ष लेने के लिए उतावला था।  

जबकि सच्चाई कुछ और ही है! असल में यह गाना ‘आइटम नंबर’ है ही नहीं। कंगना रनौत ने रज्जो फिल्म में मुख्य किरदार की भूमिका निभाई थी। फिल्म में उनका किरदार ‘रज्जो’ एक डांसर का ही होता है। ये स्वरा भास्कर के दावे से अलग था, गाने में डांस कहानी के अनुरूप रखा गया था यानी कि वो आइटम नंबर नहीं था। 

फिल्मों में आइटम नंबर की भूमिका स्पष्ट होती है। उनका फिल्म की कहानी से कम ही सरोकार होता है। लेकिन जब फिल्म का किरदार कहानी के प्लॉट की ज़रूरत के हिसाब से किसी गाने में नाचता है, तो वह आइटम नंबर की श्रेणी में नहीं आ सकता है।

बॉलीवुड इंडस्ट्री से होने के नाते स्वरा भास्कर से इतनी उम्मीद की जाती है कि उन्हें इतना तो पता ही होगा। लेकिन ‘करारा जवाब’ देने की तलब में स्वरा ने इतनी बड़ी भूल कर दी। इसके बाद मीडिया कई कदम और आगे बढ़ गया। इन दावों की तस्दीक किए बिना स्वरा के बात को बढ़ावा देना शुरू कर दिया।    

इसके अलावा कंगना ने स्वरा भास्कर का जवाब देते हुए कहा था, “मुझे संजय लीला भंसाली और फराह खान ने आइटम नंबर का ऑफर दिया था लेकिन मैंने ठुकरा दिया था। इसके बाद तमाम ए लिस्टर्स रातों रात सेंसेशन बन गए थे। मैं आज जो कुछ भी हूँ, उसके लिए बहुत कुछ दाँव पर लगाया है। पीछे हटो बी ग्रेड भेड़ियों, अगर ये डायरेक्टर्स तुम्हें ऐसा ऑफर देंगे, तो तुम लपक कर ये ऑफर स्वीकार कर लोगे।”    

15 मई के बाद नहीं यूज कर पाएँगे WhatsApp: प्राइवेसी पॉलिसी पर बवाल के बावजूद कंपनी का ‘चायनीज’ रुख बरकरार

तमाम विवादों के बावजूद इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Whatsapp अपने रुख पर कायम है। कंपनी ने ऐलान किया है कि भारत में जो भी यूजर उसकी नई प्राइवेसी पॉलिसी को स्वीकार नहीं करेंगे, वो मई 15, 2020 के बाद Whatsapp का प्रयोग नहीं कर पाएँगे। उसने यूजरों को सिक्यॉरिटी देने का वादा करते हुए कहा है कि वो अपने अपडेट से पीछे नहीं हटेगा। इस बीच कई लोग सिग्नल और टेलीग्राम जैसे एप्स पर शिफ्ट हो गए हैं।

अब व्हाट्सएप्प ने कहा है कि वो ‘धीरे-धीरे’ अपने यूजर्स से कहेगा कि वो उसके नए टर्म्स एंड कंडीशंस को स्वीकार करें। ऐसा न करने पर वो एप का प्रयोग ही नहीं कर पाएँगे। वो कॉल करने और रिसीव करने में तो सक्षम होंगे, लेकिन उन्हें मैसेज भेजने और देखने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। Whatsapp ने कहा है कि नई प्राइवेसी पॉलिसी को स्वीकार न करने के बावजूद कुछ दिनों तक यूजर्स को एप का प्रयोग करने दिया जाएगा।

उसने अब यूजर्स को आश्वस्त करने के लिए नया तरीका निकाला है। चैट विंडो के टॉप पर एक एड दिखाया जाएगा, जिसमें नई प्राइवेसी पॉलिसी के बारे में लोगों को ‘शिक्षित’ किया जाएगा। एकाध सप्ताह में ये फीचर काम करने लगेगा। इसमें बताया जाएगा कि उसे कौन सी सूचनाएँ चाहिए और कैसे इसका गलत उपयोग नहीं हो सकता है। यूजर्स को इस पॉलिसी के रिव्यू के लिए भी विकल्प दिए जाएँगे, ताकि वो और अधिक जानें।

व्हाट्सएप्प का ये रुख एकदम उन चीनी कंपनियों की तरह है, जो भारत में प्रतिबंधित होने से पहले सरकार और यूजर्स की बातों को अनसुना करते थे। Helo जैसे एप जहाँ चीन विरोधी कंटेंट्स को जम कर सेंसर किया करते थे, वहीं भारत विरोधी प्रोपेगंडा के लिए वहाँ जगह ही जगह थी। PUBG ने भी सरकार से बात कर के मामले को उलझना चाहा। TikTok भी कोई भी बात मानने को राज़ी नहीं हुआ था।

नतीजा ये हुआ कि चीन पर ‘डिजिटल स्ट्राइक’ के क्रम में इन एप्स को प्रतिबंधित कर दिया गया। इन्होंने सरकार के सवालों का जवाब देने की बजाए बातों को गोलमोल घुमाना शुरू कर दिया।  TikTok, Alibaba का UC Browser और Tencent का WeChat सहित 59 एप्स को केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) मंत्रालय ने हमेशा के लिए बैन कर दिया। मामला उस बार भी सिक्योरिटी और प्राइवेसी से ही जुड़ा था।

शरिया की शिक्षा देने के लिए वेब सीरीज, अंग्रेजी और उर्दू में लीगल जर्नल भी: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का निर्णय

‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB)’ अब मुस्लिमों को शरिया कानून का पाठ पढ़ाने के लिए वेब सीरीज बनाएगा। साथ ही उर्दू और अंग्रेजी में इसके लिए जर्नल भी लॉन्च किए जाने की योजना तैयार की गई है।

AIMPLB ने सोमवार (फरवरी 22, 2021) को इसकी घोषणा की। मुस्लिमों और इस्लाम के मामले में अदालतों द्वारा किए गए जजमेंट्स के बारे में भी ‘जागरूकता’ फैलाई जाएगी। संस्था के अध्यक्ष मोहम्मद रबी हसन नवेदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में ये फैसला लिया गया।

AIMPLB की वर्किंग कमिटी ने ‘शरिया को लेकर जागरूकता फैलाने’ वाली वेब सीरीज बनाने पर मुहर लगाई। साथ ही दो भाषाओं में कानूनी जर्नल के प्रकाशन का निर्णय लिया गया। संस्था के महासचिव सैयद मोहम्मद वली रहमानी ने कहा कि इस सीरीज को इंटरव्यू-डिस्कशन फॉर्मेट में बनाया जाएगा। इसमें चर्चाएँ होंगी, विशेषज्ञों से बातें होंगी।

उन्होंने कहा कि मुस्लिमों और इस्लाम के मामलों में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट्स ने किस तरह के फैसले सुनाए हैं, उसके बारे में लोगों को शिक्षित किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि आम आदमी को शिक्षित बनाने के लिए न सिर्फ शरिया, बल्कि भारत के कानूनों को लेकर भी इस वेब सीरीज को जानकारी दी जाएगी।

बोर्ड के सदस्य आसमाँ ज़हरा को इस वेब सीरीज का खाका तैयार करने के लिए कहा गया है। बोर्ड में शामिल अधिवक्ताओं, जैसे युसूफ हातिम मुछाला, ज़फ़रयाब जिलानी और एमआर शमशाद जैसों ने इस फैसले का समर्थन किया है और कहा है कि वो अपना समय देंगे।

लीगल जर्नल को लेकर योजना तैयार करने का टास्क शमशाद को ही दिया गया है। पूरे देश में वक़्त की संपत्तियों की सुरक्षा के लिए अभियान चलाने पर भी मुहर लगाई गई। बोर्ड ने कहा कि वक़्फ़ की संपत्तियों को बेचने की कोशिशों को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।

‘हाथ-पाँव बाँध कर महिलाओं को इंजेक्शंस, दिखाते हैं पोर्न’: केरल के ईसाई ‘कन्वर्जन सेंटर्स’, जो LGBTQI को करते हैं ‘ठीक’

केरल में ईसाई मिशनरियों द्वारा LGBTQI कन्वर्जन थेरेपी संस्थान (कन्वर्जन सेंटर्स) चलाए जा रहे हैं। इसके तहत एलेक्स (बदला हुआ नाम) नामक एक व्यक्ति को आईना दिया गया और ये कहने को कहा गया, “मैं पापी हूँ। मैं समलैंगिक हूँ। मैं कभी स्वर्ग नहीं जा सकता। जीसस क्राइस्ट मुझसे घृणा करते हैं। मुझे खुद को बदलना होगा।” अदिचिरा स्थित विन्सेंटियन कॉन्ग्रिगेशन द्वारा संचालित परित्राणा रीट्रीट सेंटर में अलेक्स सहित 30 लोग भर्ती थे। ये जगह केरल में कोट्टायम-एट्टुमन्नूर हाइवे पर स्थित है।

इस सेंटर की स्थापना 1990 में हुई थी। ‘द न्यूज़ मिनट’ में प्रकाशित खबर के अनुसार, अलेक्स को जब पता चला कि वो समलैंगिक है तो उसने खुद को ‘ठीक करने के लिए’ इस रिट्रीट सेंटर से संपर्क किया, जहाँ उसे 21 दिन के कोर्स में पंजीकृत किया गया। उसे एक बाइबिल, सफ़ेद कपड़े और एक नोटबुक दिया गया। रिट्रीट सेंटर से काफी दूर एकांत में ‘गे कन्वर्जन सेंटर’ स्थित है। 25000 रुपए जमा कराने और एक कंसेंट फॉर्म भरने के बाद वहाँ भेजा जाता है।

वहाँ 18 से 27 वर्ष की उम्र के कई पुरुष एवं महिलाएँ थीं। उन्हें एक-दूसरे से बातचीत की अनुमति नहीं थी और खाली समय में होली मेरी (Holy Mary) की तस्वीर के सामने प्रार्थना करने को कहा जाता था।

वहाँ सेशन लेने वाले पादरी खुद को साइकेट्रिस्ट और साइकोलॉजिस्ट बताते थे। उन सबका दावा था कि वो पहले ‘Gay’ थे, लेकिन अब जीसस की राह पर चल कर ‘ठीक हो गए’ हैं। सभी को सुबह में ‘मर्दानगी बढ़ाने’ वाला व्यायाम कराया जाता था।

फिर प्राइवेट काउंसलिंग सेशंस होते थे, जहाँ उनसे उनकी यौन इच्छाओं और पसंदीदा सेक्स पॉजिशंस के बारे में सवाल पूछे जाते थे। साथ ही उन्हें लेस्बियन पोर्न देखने को कहा जाता था। जबकि लेस्बियनों को गे पोर्न देखने का निर्देश दिया जाता था। अलेक्स का कहना है कि इन सबके बावजूद वो और उसके साथ भर्ती अन्य लोग ‘ठीक नहीं’ हो पाए और सभी गहरी मानसिक प्रताड़ना और दबाव से गुजरे।

उनमें से कोई अपने माता-पिता की हत्या में जेल चला गया, कुछ घर से भाग निकले, कुछ ने आत्महत्या की तो कुछ ने इसी तरह जीवन बिताने की सोची। इसी तरह एक अन्य ट्रांस ईसाई महिला भी इस ‘थेरेपी’ से गुजरीं। उक्त महिला को तिरुवनंतपुरम के एक ऐसे ही सेंटर में भर्ती कराया गया था। उक्त संस्था की वेबसाइट दावा करती है कि उन्हें केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय से फंड्स मिलते हैं।

महिला ने बताया कि सेंटर में भर्ती लोगों को प्रताड़ित किया जाता है। उन्हें चारों तरफ से 4 मीटर ऊँची दीवारों के बीच रखा जाता है। 4 पुरुष कर्मचारियों ने उक्त महिला के हाथ-पाँव बाँध कर जबरन बेहोश कर दिया। अर्ध-बेहोशी की अवस्था में उसे कई इंजेक्शंस दिए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की ‘कन्वर्जन थेरेपी’ अवैध है। लेकिन, लोगों को इन सेंटरों में अजीबोगरीब पलों से गुजरना पड़ता है।

मोहम्मद फिरोज 2 महीने से कर रहा था 16 साल की बेटी का रेप, हुई गर्भवती: पीड़िता की माँ करती थी वहीं मजदूरी

16 साल की नाबालिग लड़की को डरा धमका कर उससे महीनों तक बलात्कार करने का मामला सामने आया है। इस वारदात को अंजाम देने वाले व्यक्ति का नाम मोहम्मद फ़िरोज़ है और पेशे से ठेकेदार है।

पंजाब पुलिस आरोपित पर आईपीसी की धारा 376 और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत मामला दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं नाबालिग पीड़िता का मेडिकल कराने पर पता चला कि वह गर्भवती हो चुकी है। 

दरअसल रात के वक्त अचानक पीड़िता की माँ की नींद टूटी और वो अपनी बेटी के पास गई। बिस्तर पर ठेकेदार फ़िरोज़ भी मौजूद था और उसकी बेटी के साथ बलात्कार कर रहा था। पीड़िता की माँ को देखते ही ठेकेदार वहाँ से फ़रार हो गया।

इस घटना के बाद माँ ने अपनी बेटी से पूछा तो उसने बताया कि ठेकेदार पिछले दो महीने से धमकी देकर उसके साथ बलात्कार कर रहा है। आरोपित ठेकेदार फ़िरोज़ ईडीएन सिटी खरड़, पंजाब का रहने वाला है और मूल रूप से बिहार स्थित माधेपुर के फोरफना का निवासी है। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ नाबालिग पीड़िता की माँ ने शिकायत में बताया था कि उसका पति 15 साल पहले उसे छोड़ कर चला गया था। तब से वह अपने पूरे परिवार का गुज़ारा मजदूरी के सहारे ही करती है। उसके दो बच्चे हैं, एक लड़का और एक लड़की।

वह जिस ठेकेदार मोहम्मद फ़िरोज़ के पास काम करती थी, उसी ठेकेदार ने उसकी 16 साल की बेटी से बलात्कार किया। घटना वाली 20 फरवरी की रात लगभग 1 बजे उसकी नींद खुली। तब ठेकेदार मोहम्मद फ़िरोज़ उसकी बेटी के साथ बलात्कार कर रहा था लेकिन उसे देख कर तुरंत फ़रार हो गया। 

आरोपित लगभग दो महीने से लगातार नाबालिग का बलात्कार कर रहा था। आरोपित ने पीड़िता की माँ को धमकी भी दी कि अगर उसने इस बारे में किसी को भी बताया तो वह उसे जान से मार देगा। पीड़िता की माँ ने सिविल अस्पताल खरड़ में मेडिकल कराया तो पता चला कि उसकी बेटी दो महीने की गर्भवती है।

पंजाब पुलिस आरोपित ठेकेदार मोहम्मद फ़िरोज़ को गिरफ्तार कर चुकी है, मंगलवार (23 फरवरी 2021) को उसे अदालत में पेश किया जाएगा।   

   

धराया लईक खान, जबरन निकाह से मना करने पर नीतू के सिर और चेहरे पर हथौड़े से किया था 1 दर्जन वार

दिल्ली के बेगमपुर में निकाह से मना करने पर नीतू नाम की 17 वर्षीय लड़की की हत्या करने वाले लईक खान को पुलिस ने धर-दबोचने में कामयाबी पाई है। नाबालिग की हत्या के आरोपित को उत्तर प्रदेश के हरदोई से गिरफ्तार किया गया। लईक खान मृतका के परिवार का कभी विश्वासपात्र हुआ करता था, लेकिन कुछ दिन पहले उसने नीतू को जबरन निकाह से इनकार करने पर मौत के घाट उतारने की धमकी दी थी।

शुक्रवार (फरवरी 19, 2021) को वो नीतू के घर पहुँचा और उसके कजन कौशल को चिकेन खरीदने के लिए बाजार भेज दिया। जब कौशल वापस आया तो उसने देखा कि लईक खान घर में ताला लगा रहा है और उसके हाथ में हथौड़ा है। इसके बाद वो भाग खड़ा हुआ। पुलिस ने घटना के 3 दिन बाद उसे गिरफ्तार करने में कामयाबी पाई है। नीतू के सिर और चेहरे पर उस हथौड़े से कम से कम 12 बार वार किया गया था।

घटनास्थल पर ही नीतू की तुरंत ही मौत हो गई थी। रोहिणी के DCP पीके मिश्र ने कहा कि हरदोई में उसका मूल निवास है, जहाँ पुलिस की 4 टीमों को कैम्पिंग के लिए लगाया गया था। सोमवार को जैसे ही वो दिखा, उसे दबोच लिया गया। फिर आधी रात को लेकर पुलिस दिल्ली लेकर आई। हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार की बरामदगी के लिए प्रयास जारी है। लईक खान दिल्ली से बाइक से भागा था।

इसके बाद वो अपने एक रिश्तेदार के घर चला गया, लेकिन उक्त रिश्तेदार ने उसे अपने घर में जगह नहीं दी। इसके बाद वो 1 दिन तक खुले में ही घूमता रहा और अपनी पहचान छिपाता रहा। किसी ने उसे नेपाल भाग जाने की सलाह दी, जिसके बाद वो अपने गाँव पहुँचा था। लेकिन, उसके घर में ताला जड़ा हुआ था और उसके माता-पिता बाहर थे। उसने पुलिस को बताया है कि नीतू की शादी ठीक होने से गुस्से में आकर उसने ऐसा किया।

कौशल ने बताया, “शुक्रवार को शाम 5 बजे मैं अपनी बहन के पास गया था। लईक वहाँ उससे बात करने आया था। पिछले 2-3 महीने से वो निकाह के लिए दबाव बना रहा था। मेरी बहन ने उसके प्रस्ताव को ठुकरा दिया था और कहा था कि वो उसे बस एक दोस्त की तरह समझती है।” शाम को 6 बजे उसने कौशल से चिकेन व कुछ अन्य खाने की चीजें लाने के लिए 200 रुपए दिए। उसके बाद उसने हत्या कर डाली।

परिवार जब वहाँ पहुँचा तो उन्होंने पड़ोसी से हथौड़ा माँग कर ताला तोड़ा। अंदर नीतू खून से लथपथ पड़ी हुई थी। उसके सिर और चेहरे पर गहरे जख्म थे। संजय गाँधी अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। लईक कई दिनों तक पीड़ित परिवार के घर में रहता था और वहीं से काम करने भी जाता था। पीड़ित पिता ने कहा था कि लईक को उन लोगों ने अपने बेटे से भी बढ़ कर माना, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि वो इतना बड़ा विश्वासघात करने वाला है।