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मौलाना पर सवाल तो लगाया कुरान के अपमान का आरोप: मॉब लिंचिंग पर उतारू इस्लामी भीड़ का Video

पाकिस्तान के सिंध प्रान्त की राजधानी कराची में एक व्यक्ति की मॉब लिंचिंग की कोशिश की गई। आरोप है कि उसने कुरान का अपमान किया। पुलिस अधिकारियों के सामने ही इस्लामी भीड़ ने ईशनिंदा का आरोप लगा उसे मारने की कोशिश की। साउथ एशिया मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट (SAMRI) के अनुसार, कराची की गारमेंट्स फैक्ट्री में घुसी भीड़ उक्त व्यक्ति को बाहर खींच कर ले आई।

उक्त व्यक्ति का कहना है कि उसने कुरान का अपमान नहीं किया है, बल्कि मौलानाओं से कुछ सवाल पूछे क्योंकि वे पैसे लेकर समस्याओं के समाधान का झूठा दावा करते हैं। जेबी गारमेंट्स नामक फैक्ट्री के बाहर हुए इस वारदात का वीडियो भी वायरल हो गया। इसमें देखा जा सकता है कि किस तरह भीतर आक्रोशित इस्लामी भीड़ घुस रही है, ताकि उस व्यक्ति की हत्या की जा सके।

इस्लामी भीड़ इसके साथ ही ‘नारा-ए-तकबीर’ और ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे भी लगा रही थी। हालाँकि, इस हमले में वो व्यक्ति तो किसी तरह बच गया लेकिन उसे गहरी चोटें आईं। पुलिस उसे बचाने में अक्षम रही, जबकि वहाँ कई पुलिसकर्मी और रेंजर्स उपस्थित थे। इस घटना के कई अन्य वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। लोग इस कट्टरता का विरोध कर रहे हैं।

पीड़ित ने अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर कहा कि उसके परिवार में कुछ समस्याएँ आ गई थीं, जिसके बाद उसने एक मौलाना से समाधान के लिए संपर्क किया था। उसका कहना है कि मौलाना ने पैसे तो ले लिए लेकिन समस्या के समाधान के लिए कोई प्रयास नहीं किया। उसके एक दोस्त ने उससे उसकी बीवी के बारे में पूछा था, जिसके उत्तर में उसने बताया था कि मौलाना से संपर्क करने के बावजूद उसकी बीवी ने उससे 7 महीनों से संपर्क नहीं किया है।

इस पर उसके दोस्त ने बताया कि वह एक अन्य मौलाना को जानता है, जो उसकी मदद कर सकता है। इस पर इस व्यक्ति ने कहा कि मौलाना लोग पैसे ले लेते हैं और बाद में कहते हैं कि उसे भूल जाओ। उसने कहा कि वह नए मौलाना को दोगुनी धनराशि देने के लिए तैयार है, लेकिन काम हो जाने के बाद ही। उसने पूछा कि इसमें कुरान के प्रति क्या आपत्तिजनक हो गया? उसने कुरान का नाम तक नहीं लिया था।

नवंबर 2020 में पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान ने ईशनिंदा पर टिप्पणी करते हुए कहा था, “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में ईशनिंदा अस्वीकार्य और असहनीय है।” इसके जवाब में यूएन वॉच ने अपने ट्वीट में लिखा था, “संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में आपकी (पाकिस्तान) की मौजूदगी ही असहनीय है।”

आज मनसुख हिरेन, 12 साल पहले भरत बोर्गे: अंबानी के खिलाफ साजिश में संदिग्ध मौतों का ये कैसा संयोग!

कुछ दिन पहले मुंबई में मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर विस्फोटक लदी एक एसयूवी खड़ी मिली थी। यह कार जिस मनसुख हिरेन की बताई जा रही थी, वह शुक्रवार (5 मार्च 2021) को संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिले थे। इस मामले में ‘संयोगों’ पर सवाल उठ रहे हैं और हिरेन की मौत के पीछे साजिश की आशंका जताई जा रही है। लेकिन, यह अंबानी से जुड़ा पहला मामला नहीं जब केस की महत्वपूर्ण कड़ी की संदिग्ध मौत हुई हो। 2009 में हेलिकॉप्टर टेक्नीशियन भरत बोर्गे की संदिग्ध परिस्थितियों में ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। यह मामला अनिल अंबानी से जुड़ा था।

इस बीच मिडडे ने मनसुख के भाई विनोद हिरेन के हवाले से एक सनसनीखेज दावा किया है। इसके मुताबिक हत्या कर मनसुख को पानी में फेंका गया था। विनोद का दावा है यह बात उन्हें खुद पुलिस ने बताई है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों ने डूबने को मौत का कारण बताया और साथ ही ये भी कहा था कि पानी में फेंके जाने से पहले ही उन्हें मार डाला गया था।

इससे पहले मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि परिजनों ने मनसुख का शव लेने से इनकार कर दिया है। इसके मुताबिक परिवार के सदस्यों ने शव लेने से इनकार करते हुए ऑटोप्सी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की माँग की है। यह भी कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसका स्पष्ट जिक्र होना चाहिए कि हिरेन की मौत कैसे हुई। इसके बाद DCP (जोन 1) ने दावा किया कि उन्होंने परिजनों के घर जाकर रिपोर्ट में बताए गए मौत के कारण के बारे में समझाया है। मनसुख हिरेन गाड़ियों के पार्ट-पुर्जों की दुकान चलाते थे।

शुक्रवार को जब हिरेन की सुसाइड की खबरें सामने आई थी तो उनकी पत्नी विमला ने इसे खारिज कर दिया था। उनका कहना था कि उनके पति को क्राइम ब्रांच के किसी अधिकारी तावड़े का फोन आया था। उससे मिलने के लिए ही वे घर से निकले थे। उनके अनुसार जाँच के सिलसिले में यह मुलाकात घोड़बंदर में होनी थी। एंटीलिया के बाहर मिले कार को लेकर परिजनों का कहना है कि वह चोरी हो गई थी और इसकी रिपोर्ट भी लिखाई गई थी।

ये भी पता चला है कि मनसुख हिरेन ने मौत से पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा था। उन्होंने इस पत्र में कहा था कि पीड़ित होने के बावजूद उनके साथ आरोपित की तरह व्यवहार किया जा रहा है। इसमें उन्होंने पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ एक पत्रकार का नाम भी लिया था। उन्होंने कहा कि कि उनसे हिरासत में भी पूछताछ की गई, जिससे उनकी मानसिक प्रताड़ना हो रही है।

एक और बात याद करने लायक है कि आज से 12 वर्ष पहले मुकेश अंबानी के छोटे भाई अनिल अंबानी के मामले में भी इसी तरह के ‘संयोग’ देखने को मिले थे। तब लगभग $15 बिलियन की संपत्ति के मालिक अनिल अंबानी भारत के शीर्ष कारोबारियों में गिने जाते थे। हालाँकि, अब उनकी संपत्ति इससे 10 गुना कम होकर $1.5 बिलियन रह गई है। तब उनका हैलिकॉप्टर क्रैश कराने की साजिश रची गई थी। उस मामले में भी जो व्यक्ति मुख्य कड़ी था, उसकी मौत हो गई थी।

अप्रैल 2009 में इस साजिश का खुलासा हुआ था। अनिल अंबानी की कंपनी द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के कुछ ही दिनों बाद हेलिकॉप्टर के टेक्नीशियन भरत बोर्गे की ट्रेन से कट कर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। हैलिकॉप्टर की देखरेख के लिए तैनात 2 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया था। मौत से पहले उक्त टेक्नीशियन ने एक पत्र लिखा था। साजिश का खुलासा होता, उससे पहले उसकी मौत हो गई।

अनिल अंबानी के हेलिकॉप्टर के पेट्रोल टैंक (फ्यूल टैंक) में पत्थर और रेत मिली थी। इससे उड़ान के दौरान हेलिकॉप्टर का इंजन बंद हो सकता था। उनका हैलिकॉप्टर क्रैश कराने की कोशिश थी। बता दें कि अनिल अंबानी के हेलिकॉप्टर की देखरेख का जिम्मा एयरवर्क्स इंजीनियरिंग को दिया गया था। पुलिस ने टेक्नीशियन की मौत को एक्सीडेंट करार दिया था। उसके पत्र के कंटेंट्स को लेकर भी कुछ खास साफ़ नहीं हुआ था।

जम्मू-कश्मीर: ‘होल्डिंग सेंटर’ भेजे गए 155 रोहिंग्या, पुलिस ने कहा- सभी घुसपैठियों का होगा प्रत्यर्पण

जम्मू-कश्मीर में 155 ऐसे रोहिंग्या मिले हैं, जो म्यांमार में अपनी सज़ा से बच कर यहाँ रह रहे थे। उन सभी को ‘होल्डिंग सेंटर’ भेज दिया गया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शनिवार (मार्च 6, 2021) को ये कार्रवाई की। पुलिस ने फॉरेनर्स एक्ट के अनुच्छेद-3(2)e के तहत ये कार्रवाई की। साथ ही पासपोर्ट एक्ट के अनुच्छेद-3 के तहत प्रवासियों के पास पुष्ट ट्रैवल दस्तावेज होने चाहिए, जो उनके पास नहीं थे।

इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (जम्मू जोन) ने कहा कि मार्च 5, 2021 को गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन का पालन करते हुए रोहिंग्या मुस्लिमों को होल्डिंग सेंटर में भेजा गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कानूनी कार्रवाई नियम-कायदों के तहत की गई है। उन्होंने ये भी बताया कि ऐसे अन्य अवैध घुसपैठियों की पहचान करने की कोशिशें भी जारी हैं। रोहिंग्या मुस्लिमों के बायोमेट्री व अन्य डिटेल्स जुटाए जा रहे हैं।

उन्हें होल्डिंग सेंटर में भेजे जाने के बाद उनकी राष्ट्रीयता की पहचान की जाएगी। जब पहचान हो जाएगी कि ये किस देश के नागरिक हैं, इसके बाद उन्हें वहाँ प्रत्यर्पित कर दिया जाएगा। MA स्टेडियम में रोहिंग्या मुस्लिमों के वेरिफिकेशन का कार्य चल रहा है। एक बुर्कानशीं महिला ने बताया कि उससे उसका नाम और माता-पिता के बारे में पूछा गया। एक अन्य रोहिंग्या मुस्लिम ने बताया कि पुलिस ने पूरे परिवार को MA स्टेडियम में बुलाया है।

पुलिस ने उन सभी के UNHCR कार्ड्स के डिटेल्स भी लिए और साथ ही कोरोना वायरस टेस्टिंग भी कराई। MA स्टेडियम में कुल 200 रोहिंग्या मुस्लिमों को वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया था। हालाँकि, इस प्रक्रिया में मीडिया को अनुमति नहीं दी है। उन रोहिंग्या मुस्लिमों के अंगूठे की छाप भी ली गई। एक रोहिंग्या मुस्लिम ने कहा कि वो 12 वर्षों से यहाँ है और अब तक ऐसे 50 वेरिफिकेशन प्रक्रिया में शामिल हो चुका है।

भाजपा ने इसे रोहिंग्या मुस्लिमों के प्रत्यर्पण की शुरुआत बताया है। पार्टी के प्रवक्ता ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) अनिल गुप्ता ने कहा कि अब एक लंबा इंतजार ख़त्म होने वाला है। उन्होंने कहा कि इन सभी को संभवतः एक कैम्प में शिफ्ट किया जाएगा। इससे पहले PDP-BJP सरकार के दौरान ही इन रोहिंग्या मुस्लिमों के आँकड़े जुटा लिए गए थे। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व ख़ुफ़िया एजेंसियाँ पहले से ही उन्हें लेकर सतर्क हैं।

पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर के नरवाल की एक मस्जिद में मौलवी बनकर रहने वाले रोहिंग्या और उसके साथी को पकड़ा गया था। उनके पास से फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट बरामद किया गया था। वहीं, उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (UP ATS) ने उन्नाव से रोहिंग्या भाइयों को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि ये दोनों भारत में अवैध तरीके से रोहिंग्या की एंट्री करवाते थे। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त कार्यालय (UNHCR) में उनका पंजीकरण करा कर देश के अलग-अलग शहरों में उनके रहने और रोजगार की व्यवस्था करते थे। इसके लिए फर्जी दस्तावेज भी तैयार कराते थे।

CM योगी से मिला किसानों का प्रतिनिधिमंडल, कहा- कृष‍ि कानूनों पर भड़का रहे लोग, आंदोलन से आवागमन बाधित होने की शिकायत

उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने किसानों के हितों की रक्षा का भरोसा दिलाते हुए शनिवार (मार्च 6, 2021) को दावा किया कि नए कृषि कानून उनकी आय दोगुनी करने के उद्देश्य से लागू किए गए हैं और इससे कृषकों की आय में निरंतर वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री ने यहाँ पाँच कालिदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा किसानों को ध्यान में रखकर नीतियाँ बनाई हैं।

शनिवार को जारी एक सरकारी बयान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसान राज्य सरकार की प्राथमिकता हैं और प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में किसानों की खुशहाली के लिए गंभीरता से प्रयास कर रही है। उन्‍होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों से जुड़े कार्यक्रमों और योजनाओं को पूरी गंभीरता से लागू कर रही है और इसी का नतीजा है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत देश में सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उत्तर प्रदेश को प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया है।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा लागू किए गए कृषि कानून किसान हितैषी हैं। यह कानून किसानों को सशक्त करने का प्रयास हैं। इन कानूनों का सबसे ज्यादा लाभ छोटे और सीमांत किसानों को मिलेगा। इसलिए वे इन कानूनों का समर्थन करते हैं। प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री द्वारा कृषि एवं किसान कल्याण के लिए गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं।

किसानों के प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि कुछ लोग किसान आन्दोलन के माध्यम से किसानों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। इससे आवागमन बाधित होता है और लोगों को असुविधा होती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि किसी भी समस्या का समाधान मिल बैठकर संवाद के जरिए किया जा सकता है।

वहीं शनिवार को एक समारोह में बोलते हुए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, “किसानों का अहित कर अपने राजनीतिक मंसूबे को पूरा करना ठीक नहीं है। देश में लंबे समय से कृषि क्षेत्र में सुधार की जरूरत महसूस की जा रही थी, जिसे कानून बनाकर पूरा किया गया।” इसके साथ ही विपक्षी दलों पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध का अपना स्थान है। लेकिन मतभेद और विरोध देश को क्षति पहुँचाने की कीमत पर नहीं किया जाना चाहिए।

पिछले 1000-1200 वर्षों से बंगाल में हो रही गोहत्या, कोई नहीं रोक सकता: ममता के मंत्री सिद्दीकुल्लाह का दावा

तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक सिद्दीकुल्ला चौधरी ने शनिवार (मार्च 6, 2021) को हिंदू भावनाओं का मजाक उड़ाते हुए एक नया विवाद खड़ा कर दिया। टीवी 9 भारतवर्ष के मुताबिक उन्होंने पश्चिम बंगाल में गोहत्या के मुद्दे पर धमकी दी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में गोहत्या को कोई नहीं रोक सकता।

आगामी राज्य विधान सभा चुनावों से पहले उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने यहाँ आकर कहा था कि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो वह राज्य में गोहत्या को समाप्त कर देगी।” उन्होंने आरोप लगाया, “पिछले 1000-1200 वर्षों से बंगाल में गोहत्या हो रही है। हर कोई गोमांस खाता है, जिसमें मुसलमान और अन्य शामिल हैं। गोमांस को वोट से क्या मिला? यह कोशिश हिंदू मानसिकता को आगे बढ़ाने की है।” 

यह पूछे जाने पर कि क्या वो गोहत्या का समर्थन करते हैं, चौधरी ने दावा किया कि 5-स्टार रेस्टॉरेंट और विदेशी पर्यटकों के बीच भारत में गोमांस खाना आम है। उन्होंने कहा, “अगर गोमांस पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो बंगालियों को 100% गुस्सा आएगा। यदि हम इसे नहीं खाते हैं, तो हम इसे कहाँ रखेंगे? फिर हमें जबरदस्ती खाना खिलाना होगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में ज्यादातर बीफ निर्यातक हिंदू मारवाड़ी हैं, मुसलमान नहीं।

सिद्दीकुल्ला चौधरी ने दावा किया कि राम मंदिर के फैसले में पीएम मोदी का हाथ है

इसके अलावा, उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर के फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि धूमिल हुई है। Tv9 Bharatvarsh के रिपोर्टर द्वारा सूचित किए जाने पर कि निर्णय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया था, फिर भी उन्होंने न्यायपालिका की अखंडता पर सवाल उठाए।

सिद्दीकुल्ला चौधरी ने टिप्पणी की, “पीएम का पद सर्वोच्च न्यायालय से बड़ा है। पीएम मोदी कॉलेजियम के गठन, जजों की नियुक्ति और उनके ट्रांसफर में शामिल हैं… मुसलमान मोदी को वोट नहीं देंगे। बाबरी मस्जिद का मुद्दा और राम मंदिर निर्माण स्थल पर मुसलमानों को मोदी के लिए वोट देने से पहले 10 बार सोचना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँची है। हम सच बोलने से नहीं डरते। बाबरी अभी भी एक मुद्दा है।”

सिद्दीकुल्ला चौधरी ने कहा कि कुरान संविधान पर हावी रहेगा

सिद्दीकुल्लाह वही व्यक्ति है जिसने सितंबर 2018 में कहा था कि कुरान संविधान पर हावी रहेगा। वह जमीयत उलेमा-ए-हिंद (पश्चिम बंगाल) के अध्यक्ष भी हैं। ट्रिपल तलाक पर प्रतिबंध लगाने वाले अध्यादेश के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा था, “हमारे लिए हमारा पवित्र ग्रंथ, कुरान शरीफ सर्वोच्च है और यदि कोई संवैधानिक प्रावधान या कोई कानून कुरान का खंडन करता है, तो हमारा धर्मग्रंथ प्रबल होगा, कानून या संविधान नहीं। बीजेपी धर्म कार्ड खेल रही है और संविधान के साथ खिलवाड़ कर रही है। अध्यादेश का मुसलमानों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। कोई भी इसका पालन नहीं करेगा, लेकिन धर्म और पवित्र पुस्तक का पालन करेगा”

‘फेक न्यूज फैक्ट्री’ कॉन्ग्रेस का पैतरा फेल: असम में BJP को बदनाम करने के लिए शेयर किया झारखंड के मॉकड्रिल का पुराना वीडियो

असम में 27 मार्च से 6 अप्रैल तक होने वाले 15 वें पंचवार्षिकी विधान सभा चुनाव लड़ने के लिए राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है, राजनीतिक क्षेत्र में फर्जी खबरों को फैलाने और राज्य में भाजपा सरकार की नकारात्मक छवि बनाने के लिए जोरदार प्रयास हो रहा है। कॉन्ग्रेस को एक बार फिर से ऐसा ही करते हुए धरा गया है।

असम कॉन्ग्रेस ने ट्विटर पर 4 मार्च को एक वीडियो शेयर किया जिसमें दो पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों को दो गोलियाँ लगने के बाद उन्हें गिरते हुए देखा गया। असम कॉन्ग्रेस ने वीडियो को शेयर करते हुए असमिया में कैप्शन दिया, जिसका अनुवाद है, “प्रिय मतदाताओं, यह असम में चुनावी मौसम है। क्या आपने तय किया है कि 2021 के चुनाव में किसे वोट देना है? वोट डालने से पहले नीचे दिए गए वीडियो को एक बार देखें और तय करें कि किसे वोट देना है।”

विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ, असम कॉन्ग्रेस अनिवार्य रूप से राज्य सरकार के खिलाफ जनता को भड़काना चाहती थी, और ऐसा करने के लिए उसने 2017 के वीडियो को असम पुलिस के खिलाफ कथित ज्यादती दिखाने के लिए 2019 के वीडियो के रूप में जारी किया, जिन लोगों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध किया था।

हालाँकि, बीजेपी नेता और असम के वरिष्ठ मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस झूठ का पर्दाफाश कर दिया। उन्होंने कॉन्ग्रेस द्वारा शेयर किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट और टाइम्स नॉउ की खबर का स्क्रीनशॉट शेयर किया, जिसका 2019 में फैक्ट-चेक किया गया था। कॉन्ग्रेस को फेक न्यूज की फैक्ट्री कहते हुए बीजेपी के मंत्री ने लिखा, “वीडियो में 2 मिनट पर देखें, किस तरह से झारखंड के मॉक ड्रिल को असम पुलिस द्वारा शूटिंग बताया जा रहा है।”

क्या है वीडियो की सच्चाई

मोदी सरकार को बदनाम करने की जल्दबाजी में, असम कॉन्ग्रेस शायद अपना होमवर्क करना भूल गई। 2019 में  Times Now और  India TV सहित विभिन्न मीडिया एजेंसियों ने इस वीडियो का पहले ही फैक्ट चेक कर दिया था। यह फर्जी वीडियो प्रेस सूचना ब्यूरो की फैक्ट चेक द्वारा भी दिसंबर 2019 में फैक्ट-चेक किया गया था।

आश्चर्य की बात यह है कि हालाँकि इस वीडियो का 2019 में फैक्ट-चेक किया गया था, इसके बावजूद कॉन्ग्रेस ने न केवल इसे फिर से शेयर किया, बल्कि बेशर्मी से वही फर्जी दावे भी किए, जो उस समय किया गया था।

जबकि सच्चाई यह है कि असम में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों पर असम पुलिस द्वारा गोली चलाने का जो वीडियो कॉन्ग्रेस ने जारी किया, वह वास्तव में नवंबर 2017 में झारखंड पुलिस द्वारा की गई एक मॉक ड्रिल का पुराना वीडियो है।

‘ड्रामा क्वीन’ की बायोपिक बनाना चाहते हैं जावेद अख्तर, राखी सावंत के दावे पर गीतकार ने लगाई मुहर

अक्सर विवादों में रहने वाली ‘ड्रामा क्वीन’ राखी सावंत हाल ही में रियलिटी शो ‘बिग बॉस 14’ में नजर आई थीं। इस दौरान उन्होंने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया साथ ही खूब हंगामा भी मचाया। वह टॉप 5 फाइनलिस्ट में शामिल हुईं। हालाँकि, राखी सावंत ने आगे न खेलते हुए 14 लाख की रकम लेकर बिग बॉस के घर से बाहर निकलने में ही भलाई समझी। अब बिग बॉस के घर से बाहर आने के बाद एक तरफ कहा जा रहा है कि वह कैंसर से जूझ रही अपनी माँ का इलाज करवा रही हैं। वहीं दूसरी तरफ उन्होंने खुद के बायोपिक का जिक्र कर भी लोगों को चौका दिया है।

राखी सावंत को चर्चा में रहना खूब आता है अब इसके लिए चाहे कोई विवाद खड़ा करना पड़े या फिर चाहे अभिनव शुक्ला संग उनकी हालिया फ्लर्टिंग हो या फिर जूली का भूत, राखी ने हर तरह से खुद को खबरों में बनाए रखने का जरिया ढूँढ लेती हैं। अब हाल ही में उन्होंने एक दावा करके लोगों को चौंका दिया कि मशहूर गीतकार जावेद अख्तर उनकी बायोपिक बनाना चाहते हैं। पहले तो राखी के इस दावे पर किसी को यकीन नहीं हो रहा था, लेकिन अब जावेद अख्तर ने खुद राखी के दावे पर अपनी सहमति की मुहर लगा दी है।

राखी सावंत के दावे को सच बताते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि वह सच में राखी सावंत की बायोपिक बनाना चाहते हैं। जावेद अख्तर राखी सावंत की जिंदगी पर स्क्रिप्ट लिखना चाहते हैं और उन पर फिल्म बनाने की ख्वाहिश भी रखते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जावेद अख्तर ने SpoltboyE से बात करते हुए इस बात की पुष्टि करते हुए कहा- “यह सच है कि मैं उसकी जिंदगी पर फिल्म बनाना चाहता हूँ कुछ चार-पाँच साल पहले हम एक ही फ्लाइट में सफर कर रहे थे। तब उसने मुझे अपने बचपन के बारे में बताया था और तभी मैंने सोचा था कि मैं एक दिन उसकी जिंदगी पर एक स्क्रिप्ट जरूर लिखूँगा।”

राखी सावंत का यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर काफी चर्चा चलने लगी कि जावेद अख्तर क्या वास्तव में राखी सावंत की बायोपिक बनाना चाहते हैं? जिसका जवाब देकर जावेद अख्तर ने खुद इस बात की पुष्टि कर दी है।

जावेद अख्तर ने किया था राखी सावंत को कॉल

गौरतलब है कि हाल ही में राखी सावंत ने India TV.com से बात करते हुए यह दावा किया था कि गीतकार और लेखक जावेद अख्तर उनकी जिंदगी पर फिल्म बनाना चाहते हैं। उन्होंने हाल ही में राखी को फोन भी किया था और एक मीटिंग फिक्स करने की भी बात कही थी। जिसमें वह उनकी बायोपिक पर चर्चा करेंगे। हालाँकि राखी ने कहा, “मैं उस समय उनसे मिल नहीं पाई थी। मेरी जिंदगी बहुत विवादों से भरी रही है पता नहीं लोग इसे देखना चाहेंगे या नहीं।”

कौन निभाएगा राखी सावंत का किरदार

हालाँकि, जावेद अख्तर का इशारा तो राखी के रोल के लिए खुद उन्हीं के तरफ है लेकिन कलाकार के मुद्दे पर राखी सावंत का कहना है कि उनकी बायोपिक में उनका किरदार आलिया भट्ट निभा सकती हैं। इसके बाद उन्होंने आगे यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि उनकी भूमिका कौन सी अभिनेत्री निभाने वाली है। आलिया भट्ट, प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण या करीना कपूर खान यह कोई भी कर सकती हैं, क्योंकि सभी उनकी फेवरेट हैं।

नंदीग्राम में ममता और शुभेंदु के बीच महामुकाबला: बीजेपी ने पहले और दूसरे फेज के लिए 57 कैंडिडेट्स के नामों का किया ऐलान

पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 57 सीटों पर कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी कर दी है। नंदीग्राम सीट से शुभेंदु अधिकारी को टिकट दिया गया है। जबकि मोइना से अशोक डिंडा चुनाव लड़ेंगे। 

8 फेज में होगा पश्चिम बंगाल का चुनाव

पश्चिम बंगाल की 294 विधान सभा सीटों पर 8 चरणों में चुनाव होगा। पहला चरण- 27 मार्च, दूसरा चरण- 1 अप्रैल, तीसरा चरण- 6 अप्रैल, चौथा चरण- 10 अप्रैल, पाँचवा चरण- 17 अप्रैल, छठा चरण- 22 अप्रैल, सातवाँ चरण- 26 अप्रैल और आठवाँ चरण- 29 अप्रैल को होगा। 

इस दौरान रिटायर्ड पुलिस अधिकारी विवेक दुबे और एमके दास को ऑब्जर्वर बनाया गया है। पश्चिम बंगाल में 2016 में 77,413 चुनाव केंद्र थे, जबकि इस बार 1,01,916 चुनाव केंद्र होंगे। 2 मई को रिजल्ट आएगा।

इससे पहले कल (शुक्रवार) तृणमूल कॉन्ग्रेस ने 291 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की। साथ ही कॉन्ग्रेस, लेफ्ट और आइएसएफ गठबंधन ने भी 60 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया था। 

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी खुद इस बार नंदीग्राम से चुनावी मैदान में होंगी। ऐसे में बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को भी नंदीग्राम से टिकट देकर मुकाबले को दिलचस्प कर दिया है। शुभेंदु ने यहाँ से सीएम ममता को चुनाव हराने का दावा किया है। 

कल तृणमूल कॉन्ग्रेस ने कुल 291 उम्मीदवारों की लिस्ट में 50 महिला उम्मीदवारों को मौका दिया। इनके अलावा 42 मुस्लिम उम्मीदवार, 79 SC उम्मीदवार और 17 ST उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है। क्रिकेटर मनोज तिवारी को शिबपुर से टिकट मिला है, जबकि अभिनेत्री कंचन मलिक को उत्तरपाड़ा से मौका मिला है। 

‘केजरीवाल सरकार ने स्कूल बनाने के लिए दान की गई जमीन अस्वीकारा’: छात्रों के हित में भूस्वामी पहुँचे हाईकोर्ट

दिल्ली में एक अनोखा मामला सामने आया है। यहाँ पर तीन भाई-बहनों ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। भाई-बहनों ने आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार स्कूल बनाने के लिए उनके द्वारा दान की गई भूमि को स्वीकार नहीं कर रही है। वे पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली के AAP सरकार को, एक उच्च माध्यमिक स्तर के सरकारी स्कूल के निर्माण के लिए करावल नगर में 5,000 वर्ग गज की करोड़ों की अपनी निजी जमीन के एक टुकड़े को हस्तांतरित करने के इच्छुक हैं। 

2012 से, भूस्वामी अधिकारियों को उस पर एक सरकारी स्कूल बनाने के उद्देश्य से सरकार को भूमि के स्वामित्व को हस्तांतरित करने के लिए कह रहे हैं, हालाँकि, अधिकारी देरी कर रहे हैं। भाई-बहन ने इस मामले को सुलझाने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। बता दें कि भाई-बहन इस जमीन के असली मालिक मनसा राम के कानूनी उत्तराधिकारी हैं। मनसा राम की 2009 में मृत्यु हो गई थी।

अब, मनसा राम के दो बेटों और बेटी द्वारा दायर एक याचिका के आधार पर, दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह सरकारी स्कूल बनाने के लिए भूमि के हस्तांतरण के लिए परिवार के अनुरोध पर शीघ्र निर्णय ले।

न्यायमूर्ति प्रथिबा एम सिंह ने याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिका को एक असामान्य मामला बताया और कहा कि याचिकाकर्ताओं ने अदालत से एक ‘अनोखी प्रार्थना’ के साथ संपर्क किया है जहाँ वे अपनी निजी भूमि को ‘सामाजिक उद्देश्य के लिए’ सरकार को देना चाहते हैं। उन्होंने दिल्ली सरकार को इस मामले में ‘शीघ्र निर्णय’ लेने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति प्रथिबा एम सिंह ने कहा कि चूँकि याचिकाकर्ता एक अनोखी प्रार्थना के साथ आए हैं, जहाँ वे एक निजी भूमि पर सरकार को अपना अधिकार देना चाहते हैं, इसलिए अधिकारी इस याचिका पर शीघ्रता से विचार करेंगे।

याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील अशोक अग्रवाल ने अदालत को सूचित किया कि उनके क्लाइंट्स ने दिल्ली में AAP सरकार को जून 2019 में राज्य को भूमि का स्वामित्व हस्तांतरित करने के लिए एक अनुरोध पत्र भेजा था, लेकिन दुर्भाग्य से अधिकारियों ने कोई नोटिस नहीं लिया। पिछले डेढ़ साल से इस मामले को लेकर बैठे हैं।

अग्रवाल ने अदालत को यह भी बताया कि यह जमीन तब से खाली पड़ी है, जिसकी वजह से इलाके के असामाजिक तत्व इसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता भूमि का स्वामित्व बिना शर्त केजरीवाल सरकार को हस्तांतरित करना चाहते हैं।

इस संबंध में AAP सरकार से आखिरी बार जून 2019 में अनुरोध किया गया था

1976 में, मनसा राम ने करावल नगर में 2,000 वर्ग गज भूमि पर आलोक पुंज माध्यमिक विद्यालय बनाया था। 1995 से, यह 100% सरकारी अनुदान पर चल रहा था। हालाँकि, भवन की खराब स्थिति के कारण, 2018 में उच्च न्यायालय ने छात्रों को किसी अन्य भवन में स्थानांतरित करने का आदेश दिया।

मनसा राम के बच्चों द्वारा दायर याचिका के अनुसार, सितंबर 2018 से उस जमीन पर कोई गतिविधि नहीं हुई है जहाँ स्कूल मूल रूप से स्थित है, जिसके कारण असामाजिक तत्वों द्वारा इसका दुरुपयोग किया जा रहा है।

याचिका में तीन भाई-बहनों, अनूप सिंह, सतीश कुमार और अनूपी ने कहा कि जमीन के हस्तांतरण के लिए उनके अनुरोध पर केजरीवाल सरकार की निष्क्रियता स्कूल में नामांकित हजारों छात्रों की शिक्षा को प्रभावित कर रही है और जो लोग सरकारी स्कूल में प्रवेश लेना चाहते हैं।

विदेशों में भारत की प्रतिष्ठा धूमिल करने के लिए ईसाई NGO ‘Persecution Relief’ के खिलाफ NCPCR करेगी कार्रवाई

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने बताया कि भारत की छवि खराब करने के लिए ‘Persecution Relief’ नाम के ईसाई NGO के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

प्रियंक कानूनगो ने ट्वीट करते हुए कहा, “बाल संरक्षण क़ानूनों के दुरुपयोग की झूठी रिपोर्ट प्रकाशित एवं 150 देशों में वितरित कर दुनिया भर में भारत का अपमान करके मेरे देश की छवि खराब करने के कुत्सित प्रयास का माकूल जवाब दिया जाएगा। मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह इस तरह के मामले में बहुत सख्त हैं।”

उन्होंने आगे लिखा, “उल्लेखनीय है कि पर्सिक्युसन रिलीफ़ नामक संस्था की भोपाल से प्रकाशित उक्त रिपोर्ट को अमेरिकन कमीशन USCIRF ने संज्ञान में लिया था, जिससे देश की छवि खराब हुई थी। मुख्य सचिव मध्य प्रदेश शासन की निर्देश द्वारा प्रस्तुत जाँच रिपोर्ट में उक्त संस्था के सभी आरोप झूठे पाए गए हैं।”

‘Persecution Relief’ ने ‘धार्मिक कट्टरपंथियों’ के रूप में भारतीयों को दिखाने की कोशिश की

इससे पहले, कानूनी अधिकार संरक्षण मंच (LRPF) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हत्या और आत्महत्या की घटनाओं को सांप्रदायिक रंग देने के लिए ‘Persecution Relief’ पर कार्रवाई करने को कहा था। क्रिश्चियन एनजीओ ने यूएस-आधारित फेडरेशन ऑफ इंडियन अमेरिकन क्रिश्चियन ऑर्गेनाइजेशन (FIACONA) के साथ हाथ मिलाया था और इसकी रिपोर्ट को वार्षिक अमेरिकी कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) रिपोर्ट में शामिल किया गया था।

बता दें कि 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के कार्यान्वयन के बाद भारत को ‘विशेष चिंता वाले देश’ की सूची में रखा गया था। ‘Persecution Relief’ ने भारत में अपराध की घटनाओं के बारे में भी जानकारी एकत्र की और इसे विभिन्न अमेरिकी ईसाई धर्म प्रचारक संगठनों के साथ साझा किया। हालाँकि, इस दौरान उन्होंने घटनाओं को सांप्रदायिक ट्विस्ट दे दिया और भारतीयों को ‘धार्मिक कट्टरपंथी’ करार दिया। स्वराज्य से बात करते हुए, ‘Persecution Relief’ ने दावा किया कि उनका उद्देश्य ईसाई समुदाय के खिलाफ ‘हेट क्राइमों’ के लिए सरकार का ध्यान आकर्षित करना था।

हालाँकि, LRPF के कार्यकारी अध्यक्ष एएस संतोष ने जोर देकर कहा कि मुख्यधारा के मीडिया और पुलिस अधिकारियों ने ‘Persecution Relief’ की 8 ऐसी घटनाओं में सांप्रदायिक एंगल को खारिज कर दिया, जिसमें ईसाई एनजीओ ने ‘धार्मिक एंगल’ का आरोप लगाया था। सबसे विचित्र उदाहरण राजस्थान में करंट लगने से मरने वाले एक पादरी का था। इस मामले को भी ‘ईसाई उत्पीड़न’ के एक उदाहरण के रूप में उल्लेखित किया गया था। अपने बचाव में, ‘Persecution Relief’ के संस्थापक ने कहा, “मेरा सताए गए ईसाई भाइयों और बहनों के लिए नि:स्वार्थ भाव से काम करने और एकजुट होकर आवाज उठाने के अलावा दूसरा कोई एजेंडा नहीं है।”