पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा आम बात है। इसी तरह की एक घटना बैरकपुर थाना क्षेत्र के भाटपाड़ा में जून 25, 2019 को भी हुई थी, जब रिलायंस जूट मिल पर कुछ गुंडों ने बम फेंके थे। पुलिस ने उसके बाद अंधाधुंध फायरिंग शुरू की, जिसमें रामबाबू साव नामक एक व्यक्ति की सिर में गोली लगने से मौत हो गई। यानी, पुलिस ने बिना कुछ किसी को बताए गोलीबारी की और युद्ध की स्थिति बनाते हुए नियम-कायदों का पालन नहीं किया।
ऑपइंडिया के संपादक अजीत भारती ने मृतक रामबाबू साव की माँ के साथ बातचीत की, जिन्होंने बताया कि जब उन्हें अपने बेटे को गोली लगने की खबर मिली, तब दिन के साढ़े 10 बज रहे थे और वो रोटी बना रही थीं। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने अपने बेटे से पूछा था कि वो रोटी खाएगा, तो उसने आराम से बनाने को कहा था और साथ ही घूम कर जल्द आने की बात कही थी। लेकिन, लौटी तो सिर्फ उनकी लाश।
रामबाबू साव कि उम्र 18 वर्ष के करीब थी। जून महीने में ही 12 तारीख को उनका जन्मदिन था। पाँचवीं के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी और एक दुकान में बैठ कर कमाते थे। रामबाबू की चाची ने बताया कि वो अपने बच्चे को लेकर स्कूल गई थीं, तभी रामबाबू ने कहा कि वो कचौड़ी लेकर आ रहे हैं, जिसके बाद सीधा खबर आई कि दंगा हो गया है और उसे गोली लगी है। जब चाची वहाँ गई तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
रामबाबू को अस्पताल में भर्ती कराया गया। ये सब कुछ दंगों के बीच ही हो रहा था। उन्होंने बताया कि उन्हें अस्पताल में रामबाबू के मृत होने की बात कही गई। मृतक की चाची का कहना है कि दंगा न तो हिन्दू-मुस्लिम का था और न ही दो पक्षों का, बम फेंकने के बाद ये शुरू हो गया। उन्होंने बताया कि रामबाबू पार्टी-पॉलिटिक्स में नहीं रहता था। उन्होंने बताया कि केस कहाँ तक पहुँचा है, उन्हें नहीं पता। कभी कोर्ट में भी उन्हें नहीं बुलाया गया।
चाची ने बताया कि नेताओं ने आकर 10 लाख रुपए देने का आश्वासन दिया था, लेकिन ममता सरकार की तरफ से कुछ नहीं आया। हाँ, भाजपा नेताओं ने उन्हें 4.5 लाख रुपए दिए हैं। जबकि TMC वाले देखने और समाचार लेने तक नहीं आए – ऐसा परिजनों का कहना है। पीड़ित परिवार दशकों से उसी इलाके में बसा हुआ है। परिजनों का सोचना है कि वो कोर्ट-कचहरी के झमेले में नहीं पड़ते हैं, नहीं तो वो दूसरे को गोली मार देंगे।
दिल्ली के अमन विहार का वार्ड संख्या 41। यहाँ एक शादी को लेकर हुए बवाल का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि एक नाबालिग हिंदू लड़की का धर्मांतरण कर निकाह 40 साल के मोहम्मद इंतजार हुसैन से करावाया जा रहा था। वे दिल्ली पुलिस पर सहयोग नहीं करने का भी आरोप लगा रहे हैं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा है कि दोनों बालिग हैं।
घटना शुक्रवार (मार्च 5, 2021) की है। निकाह कार्यक्रम में पहुँच कर हिन्दू संगठनों ने इस कृत्य का विरोध किया। हंगामे के बाद इलाके में पुलिस तैनात कर दी गई है। धारा-144 लागू कर बैरिकेडिंग कर दी गई है।
इस मामले में ऑपइंडिया ने विभिन्न पक्षों से बात की। मोहम्मद इंतजार के परिवार ने इस मामले में मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया है। ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ता विशाल सिंह चंदेल ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि लड़की की आयु 17 वर्ष है और वह 7वीं कक्षा में पढ़ती है। उसकी शादी 40 साल के एक व्यक्ति से कराई जा रही है।
ऑपइंडिया को विशाल ने बताया पीड़ित लड़की एक पब्लिक स्कूल में 7वीं कक्षा में पढ़ती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि 7वीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़की की उम्र आखिर 18 वर्ष कैसे हो सकती है? उन्होंने कहा कि उनके पास ये भी जानकारी है कि लड़की का फर्जी आधार कार्ड रुपए देकर कहाँ से बनवाया गया है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस इसी फर्जी आधार कार्ड को देख कर लड़की को बालिग़ बता रही।
उन्होंने कहा कि उनके मन में मुस्लिमों के खिलाफ कोई पूर्वाग्रह नहीं है। इसे ‘लव जिहाद’ का मामला बताते हुए कहा कि एक हिन्दू बहुल क्षेत्र में टेंट लगा कर और डीजे बजा कर सार्वजनिक तौर पर निकाह पढ़ा गया। उन्होंने इस्लामी धर्मांतरण का भी दावा करते हुए इसे हिन्दू समाज के मुँह पर तमाचा बताया। उन्होंने पूछा कि जब ये सब हो रहा था तो इलाके के हिन्दू कहाँ थे?
विशाल सिंह चंदेल ने कहा, “पीड़ित परिवार को पुलिस-प्रशासन ने इसीलिए हटाया है, ताकि हम हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता उनसे मिल न सकें। पुलिस के आला अधिकारियों ने हमें थाने बुलाया था, जहाँ हमारी उनके साथ बैठक हुई। बैठक में उन्होंने कहा कि आधार कार्ड की जाँच होगी और स्कूल आईडी कार्ड की जाँच कराएँगे। लेकिन अब तक दिल्ली पुलिस ने कोई जाँच नहीं की और सहयोग करने की बजाए उल्टा बैरिकेडिंग कर दी है।”
वहीं ‘सुदर्शन न्यूज़’ से बात करते हुए उन्होंने कहा, “पुलिस ने इसे छावनी में क्यों तब्दील कर दिया है? क्या हिन्दू समाज आतंकवादी है? क्या हिन्दू समाज पत्थरबाजी करता है? हम तो एक सभ्य समाज हैं, जो किसी से लड़ते-झगड़ते नहीं।” वहीं एक विहिप पदाधिकारी ने कहा, “मैंने लड़की के पिता से बात कर कहा था कि अगर उन पर कोई दबाव है तो हमारा संगठन उनके साथ है और हम आपका अब तक का पूरा खर्च वापस कर इसी टेंट में किसी हिन्दू लड़के से आपकी बेटी की शादी कराएँगे।”
उक्त विहिप पदाधिकारी ने आगे कहा कि उस लड़की के नाम पर हम एक 15 लाख रुपए का प्लॉट देने के लिए भी तैयार हैं। उन्होंने कहा कि मोहम्मद इंतजार तो चप्पल तक एक बेढंगी पहन कर आया था, ऐसे में वो क्या उस लड़की की देखभाल करेगा? उन्होंने कहा कि उक्त परिवार लड़की को रोटी तक नहीं खिला सकता। एक स्थानीय व्यक्ति का भी दावा है कि उक्त मुस्लिम परिवार गरीब है और उसकी वित्तीय स्थिति खराब है।
उन्होंने इसमें माइंडवॉश की आशंका जताई। उसने लड़की के चाची के हवाले से बताया कि कोई भी रिश्तेदार इसके लिए राजी नहीं था। पड़ोसियों का कहना है कि इसके पीछे ज़रूर कोई न कोई बात है। स्थानीय लोगों का दावा है कि लड़की नाबालिग है। ‘बजरंग दल’ के कई कार्यकर्ता अब भी इलाके में हैं। उन्होंने कहा कि शादी के समय उपस्थित परिवार के रिश्तेदार खुश नहीं थे।
‘बजरंग दल’ के विभागीय संयोजक सतीश गुप्ता ने कहा कि लड़की के परिवार को कहाँ शिफ्ट किया गया है, ये बताया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि DCP ने इस मामले में कानूनी जाँच का आश्वासन दिया गया था लेकिन अब इस मामले में बड़े स्तर पर उठाया जाएगा। इस पूरे मामले का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक ‘हिन्दू मोहल्ले में लव जिहाद’ की बात करते हुए रिश्तेदारों से बात की जा रही थी।
‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर मामले को रफा-दफा करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करते हुए कहा कि पुलिस ने पूरे इलाके में छावनी में तब्दील कर दिया गया है। विशाल चंदेल ने तो कहा कि उन्होंने हिन्दू बहुल इलाके में इतनी धूमधाम से ‘लव जिहाद’ वाली पहली घटना देखी है। साथ ही उन्होंने लड़की का जाली सर्टिफिकेट बनवाने का भी आरोप लगाया।
यह इलाका किराड़ी विधानसभा क्षेत्र में आता है। ऑपइंडिया ने यहाँ के पूर्व विधायक व भाजपा नेता अनिल झा से बात की। उन्होंने कहा कि ‘लव जिहाद’ के तहत ये शादी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने बताया कि वे अभी-अभी दिल्ली पहुँचे हैं और मामले पर नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा, “ये तो पूरा पैसे के लेनदेन का मामला है। लड़की के परिवार वालों को पैसे दिए गए हैं। हम ये शादी इस तरह से नहीं होने देंगे।” उन्होंने कहा कि भाजपा इस्लामी धर्मांतरण के खिलाफ है।
हमने किराड़ी के वर्तमान विधायक और AAP नेता ऋतुराज झा से भी संपर्क किया। लेकिन उन्होंने इस बारे में बात करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे फोन पर कोई बयान नहीं देते हैं और दफ्तर में आने पर ही इस बाबत कुछ बोल पाएँगे। वहीं DCP प्रमोद कुमार मिश्रा ने पुलिस पर लगे आरोपों को नकारते हुए कहा कि इस मामले में अफवाहें चल रही हैं, जबकि और लड़का और लड़की दोनों ही बालिग़ हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने विजय पाल सिंह के नाम के 98 वर्षीय व्यक्ति को ‘आत्मनिर्भर’ होने के लिए सम्मानित किया। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक बूढ़े बाबा की वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रही है। वीडियो में दिखाई दे रहे बाबा उत्तर प्रदेश के रायबरेली के रहने वाले हैं और उनकी उम्र 98 साल है। हैरानी की बात ये है कि 98 की उम्र में भी ये बाबा आत्मनिर्भर हैं और अपनी दो वक्त की रोटी के लिए खुद मेहनत करते हैं।
बाबा का नाम विजयपाल सिंह है, जो किसी मजबूरी की वजह से नहीं बल्कि अपनी मर्जी से गाँव के बाहर चने बेचते हैं। विजयपाल के पास चने खरीदने गए एक ग्राहक ने उनके साथ बातचीत करते हुए वीडियो बनाई, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।
98yr old Vijay Pal Singh from UP was honoured with a cheque of ₹11000 by the district administration for being self-reliant & independent at his age. Asked why he troubled himself with a job at this age, he said he is doing this not for money but to keep fit. Never say die! pic.twitter.com/CwFTNGCCCU
— Priti Gandhi – प्रीति गांधी (@MrsGandhi) March 5, 2021
बाबा ने ग्राहक को बताया कि उनके दो बेटे हैं और दोनों अच्छा-खासा पैसा कमाते हैं। उन्होंने कहा कि वे बिल्कुल फिट हैं, लिहाजा वे परिवार के किसी भी सदस्य पर बोझ नहीं बनना चाहते हैं और अपने दम पर कुछ काम करके पैसा कमाना चाहते हैं। बाबा ने बताया कि उन्हें घर पर खाली बैठे रहना बिल्कुल पसंद नहीं है, यही वजह है कि वे गाँव के बाहर चने बेचते हैं। ग्राहक द्वारा बनाई गई बाबा की ये वीडियो सोशल मीडिया पर इस कदर वायरल हुई कि खुद सीएम ऑफिस ने इस मामले में संज्ञान लिया और डीएम को जरूरी निर्देश दिए।
सीएम योगी के निर्देश पर रायबरेली के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने विजयपाल सिंह जी को अपने कार्यालय में आमंत्रित किया। जिलाधिकारी ने बाबा को 11 हजार रुपए नकद, शॉल, सहारे वाली लाठी और शौचालय का स्वीकृति पत्र और फूलों का गुलदस्ता प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया। जिलाधिकारी वैभव ने अपने ट्विटर अकाउंट पर विजयपाल सिंह जी को सम्मानित करते हुए एक वीडियो भी शेयर की है।
विकास खण्ड हरचंदपुर,ग्राम पंचायत कण्डौरा निवासी 98 वर्षीय बुजुर्ग विजयपाल सिंह जी के सोशल मीडिया पर वायरल वीडियों को संज्ञान में लेकर आज कार्यालय में आमंत्रित कर शाल, छड़ी व 11 हजार रूपये नगद देकर सम्मानित किया व शौचालय का स्वीकृति पत्र प्रदान किया गया ।@CMOfficeUP@ShishirGoUPpic.twitter.com/Z1KAJdfTQx
वैभव श्रीवास्तव ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ”विकास खण्ड हरचंदपुर, ग्राम पंचायत कण्डौरा निवासी 98 वर्षीय बुजुर्ग विजयपाल सिंह जी के सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को संज्ञान में लेकर कार्यालय में आमंत्रित कर शॉल, छड़ी और 11 हजार रुपए नकद देकर सम्मानित किया और शौचालय का स्वीकृति पत्र प्रदान किया गया।”
उन्होंने कहा कि बाबा की जो भी अन्य मदद होगी, वो की जाएगी। बाबा हम सब के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। बाबा किसी मजबूरी में चने की दुकान नहीं लगाते हैं, बल्कि वो ऐसा इसलिए करते हैं कि आत्मनिर्भर बने रहें, जो एक अच्छा संदेश है।
मनसुख हिरेन का शव लेने से परिजनों ने इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि पुलिस और प्रशासन की ओर से पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने के बाद ही वे शव लेंगे। मनसुख हिरेन उस एसयूवी कार के मालिक थे, जो विस्फोटक के साथ पिछले दिनों मुकेश अंबानी के घर ‘एंटीलिया’ के बाहर मुंबई में खड़ी मिली थी। शुक्रवार (5 मार्च 2021) को उनका शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था।
न्यूज 18 लोकमत की एक रिपोर्ट के अनुसार परिवार के सदस्यों ने शव लेने से इनकार करते हुए ऑटोप्सी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की माँग की है। यह भी कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसका स्पष्ट जिक्र होना चाहिए कि हिरेन की मौत कैसे हुई। उनका कहना है कि माँग पूरी होने पर ही वे शव लेंगे। हिरेन के बड़े भाई विनोद मनसुख और उनकी पत्नी विमला शव नहीं लेने पर अड़े हुए हैं।
रिश्तेदारों ने हिरेन द्वारा लिखे एक पत्र की ओर भी इशारा किया है जिसमें उन्होंने कथित तौर पर एंटीलिया मामले में मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने का भी आरोप लगाया था। परिजनों ने हिरेन के आत्महत्या करने के दावों को भी नकार दिया। उनके अनुसार, हिरेन की आर्थित स्थिति अच्छी थी और वे एक शानदार तैराक भी थे। परिजन उनकी मौत के पीछे साजिश का आरोप लगा रहे हैं।
शुक्रवार को जब हिरेन की सुसाइड की खबरें सामने आई थी तो उनकी पत्नी विमला ने इसे खारिज कर दिया था। उनका कहना था कि उनके पति को क्राइम ब्रांच के किसी अधिकारी तावड़े का फोन आया था। उससे मिलने के लिए ही वे घर से निकले थे। उनके अनुसार जाँच के सिलसिले में यह मुलाकात घोड़बंदर में होनी थी। एंटीलिया के बाहर मिले कार को लेकर परिजनों का कहना है कि वह चोरी हो गई थी और इसकी रिपोर्ट भी लिखाई गई थी।
यह भी कहा जा रहा है कि मनसुख हिरेन के शव की जाँच के दौरान उनके मुँह से 5 रुमाल भी निकले हैं। रुमाल वाले मामले में मुंबई पुलिस का कहना है कि ये रुमाल चेहरे से बँधे हुए मिले थे। वहीं महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि अंबानी के घर के बाहर मिले कार के मालिक का नाम सैम पीटर न्यूटन है, मनसुख का तो उस पर कब्ज़ा भर था।
इस मामले में संयोगों को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। हिरेन के कथित सुसाइड की खबर आने से कुछ घंटों पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एंटीलिया मामले को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए थे। उन्होंने कहा था कि एंटीलिया के बाहर मिले कार का मालिक एक नंबर के संपर्क में था जो मुंबई पुलिस के अधिकारी और ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ सचिन वाजे के नाम पर था। फडणवीस ने यह भी बताया था कि एक नहीं बल्कि दो कारें थीं- एक स्कॉर्पियो और एक इनोवा और दावा किया कि दोनों कारें ठाणे से आई थीं और उसी रास्ते से चलकर लोकेशन तक पहुँची थीं। उन्होंने कहा कि मुकेश अंबानी के आवास के पास विस्फोटकों के साथ एक स्कॉर्पियो खड़ी थी, जबकि इनोवा इसे छोड़कर आगे बढ़ गई थी।
फडणवीस ने कहा था कि यह संयोग नहीं हो सकता कि कार ठाणे से चोरी हुई, उसने ठाणे का रूट फॉलो किया और मामले के जाँच अधिकारी भी ठाणे में रहते हैं। उन्होंने कहा कि मौके पर पहुँचने वाले वाजे पहले पुलिस अधिकारी थे। उन्हें जाँच अधिकारी (IO) भी बनाया गया। तीन दिन बाद उन्हें हटा दिया गया। मैं यह नहीं समझ पा रहा कि उन्हें आईओ से क्यों हटाया गया और वे कैसे स्थानीय पुलिस से पहले मौके पर पहुँच गए थे।
नए कृषि कानूनों को लेकर मोदी सरकार का विरोध करने के लिए धनसा राजमार्ग पर डेरा डाले तथाकथित किसानों ने एक युवा महिला के सवाल करने पर इस कदर तिलमिला गए कि कोई उसका नाम पूछने लगा तो किसी ने माइक ही छीन ली। इतना ही नहीं, गणतंत्र दिवस के दौरान दिल्ली में हुए दंगों में आरोपित राकेश टिकैत से सवाल करने पर उन्हें धमकाया भी।
शुक्रवार (मार्च 5, 2021) को राकेश टिकैत ने हरियाणा-दिल्ली सीमा के साथ धनसा विरोध स्थल का दौरा किया था, जहाँ केंद्र द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शनकारी पिछले तीन महीनों से डेरा डाले हुए हैं। टिकैत के विरोध स्थल पर दिखाई देते ही एक युवा महिला, जो कथित तौर पर एक छात्र कार्यकर्ता है, ने किसान नेता के विरोध प्रदर्शन, नाकाबंदी और गणतंत्र दिवस के दौरान हुए दंगों जैसे मुद्दों पर सवाल किया।
Look at the way All of them PОUNCЕD on her When this Young Girl asked VALID but uncomfortable questions from Dakait pic.twitter.com/RW85Vf7JTM
वायरल वीडियो में युवती को धनसा बॉर्डर पर किसान विरोध पर बोलते हुए देखा जा सकता है। युवती के बगल में तथाकथित किसान नेता खड़े हैं। इस दौरान युवती ने राकेश टिकैत से किसानों के विरोध प्रदर्शन के भविष्य के बारे में पूछा और कथित किसान विरोध प्रदर्शनों के समाधान के लिए किसान नेताओं से सवाल किया।
युवा लड़की ने राकेश टिकैत और मंच पर मौजूद अन्य ‘किसान नेताओं’ से सवाल किया, “मैं राकेश टिकैत से अपेक्षित समाधान चाहती हूँ जो विरोध प्रदर्शनों से निकलने वाला है। इन विरोधों का हल ढूँढा जाना चाहिए ताकि युवाओं और किसानों दोनों को नुकसान न हो। क्या आप मुझे बता सकते हैं कि इस समस्या का समाधान क्या है? आपने कहा है कि जब तक सरकार आपकी माँगों पर सहमत नहीं होती आंदोलन समाप्त नहीं होगा। मैं पूछना चाहती हूँ कि अगर सरकार और किसान दोनों इस पर चर्चा के लिए सहमत नहीं होते हैं तो क्या होगा? समाधान क्या होगा? सभी लोग इस सवाल का जवाब जानना चाहते हैं।”
गणतंत्र दिवस के दंगों में उनकी भूमिका के लिए राकेश टिकैत से सवाल करते हुए युवा लड़की ने उनसे पूछा कि 26 जनवरी को राष्ट्रीय राजधानी में हुई हिंसा की जिम्मेदारी कौन लेगा। मुझे नहीं पता कि हिंसा के लिए कौन जिम्मेदार है, लेकिन इस तरह की हिंसा हमारे समाज को प्रभावित करेगी।
जैसे ही युवा लड़की ने गणतंत्र दिवस के दंगों के बारे में टिकैत से सवाल किया, मंच पर मौजूद किसान नेताओं ने माइक छीन लिया। गुस्साए ‘किसान नेताओं’ ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया।। एक किसान नेता को उसका नाम भी पूछते हुए देखा जा सकता है, जिस पर युवा लड़की ने बहादुरी से जवाब दिया। वीडियो में आप देख सकते हैं कि माइक छीन लिए जाने के बाद भी युवती अपना संबोधन जारी रखती है।
दिल्ली में गणतंत्र दिवस के दौरान दंगे
इस साल गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। बड़े पैमाने पर किसानों ने दिल्ली में प्रवेश किया था और इस दौरान हिंसा भड़क गया था, जिसमें लगभग 400 पुलिसकर्मी घायल हुए। उन दंगाइयों में से कई, ट्रैक्टर चलाते हुए लाल किले पर पहुँचे और राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करते हुए लाल किले के गुंबद पर धार्मिक और कथित तौर पर खालिस्तानी झंडे फहराए।
पुलिस ने गणतंत्र दिवस की हिंसा के संबंध में अब तक 38 FIR दर्ज की हैं और 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कथित ’किसान नेताओं’ सहित 44 लोगों के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया था, जिनके बारे में मानना था कि उन्होंने दंगाइयों को हिंसा में लिप्त होने के लिए उकसाया था।
पश्चिम बंगाल में 27 मार्च को चुनाव होना है। इस दौरान एक तरफ जहाँ राज्य में बीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमला किया जा रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ राजनेताओं का तृणमूल कॉन्ग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल होने का सिलसिला जारी है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में लगातार सियासी उलटफेर हो रहे हैं। इस बीच टीएमसी के पूर्व सांसद दिनेश त्रिवेदी ने शनिवार (मार्च 6, 2021) को बीजेपी का दामन थाम लिया। बीजेपी में शामिल होने को स्वर्णिम पल बताते हुए दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि बीजेपी जनता के परिवार जैसी है। यहाँ पार्टी की सेवा के लिए नहीं बल्कि जनता की सेवा के लिए काम होता है।
Delhi: Dinesh Trivedi, who had resigned as TMC MP in Rajya Sabha on February 12th, joins BJP in the presence of the party’s national president JP Nadda. Union Minister Piyush Goyal also present. pic.twitter.com/wCHlDbrcAz
वहीं खबरों के मुताबिक, शुक्रवार (मार्च 5, 2021) देर रात दक्षिण 24 परगना जिले के रामपुर गाँव में एक कथित बम विस्फोट में 6 भाजपा कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जब वो लोग एक शादी से वापस आ रहे थे तो टीमएमसी कार्यकर्ताओं ने उन पर बम फेंका। बताया जा रहा है कि घायलों को इलाज के लिए कैनिंग उपखंड अस्पताल लाया गया। घायल 6 में से दो की हालत बेहद गंभीर है।
जब भाजपा कार्यकर्ता देर रात एक शादी समारोह में भाग लेकर वापस लौट रहे थे, तभी यह घटना घटी। सड़क पर बम फेंका गया, जिसमें 6 लोग घायल हो गए। स्थानीय भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि हमले के पीछे टीएमसी कार्यकर्ता थे। हालाँकि, टीएमसी नेताओं ने आरोप से इनकार किया है और आरोप लगाते हुए कहा कि यह विस्फोट बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा बम बनाने के दौरान हुई। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।
तृणमूल कॉन्ग्रेस के सदस्यों द्वारा भाजपा कार्यकर्ता की माँ की पिटाई
गौरतलब है कि पिछले महीने गोपाल मजूमदार नाम के एक भाजपा कार्यकर्ता की बुजुर्ग माँ को टीएमसी कार्यकर्ताओं ने कथित रूप से पीटा था। उन पर और उनकी माँ पर बंदूक के पिछले भाग का इस्तेमाल करते हुए हमला किया गया और इतना पीटा गया कि दोनों के चेहरे सहित शरीर के कई अंगों पर गहरी चोट आई है। निमता पुलिस थाने में इस मामले में FIR दर्ज की जा चुकी है। पीड़ित भाजपा कार्यकर्ता ने 3 TMC गुंडों पर हिंसा का आरोप लगाया था।
गोपाल मजूमदार ने कहा कि तीनों उनके घर में घुस गए और मारपीट शुरू कर दी थी। आरोप है कि उन्होंने पहले घर में घुस कर अपशब्दों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया और पूछने लगे कि भाजपा में उक्त कार्यकर्ता की क्या भूमिका है।
पीड़ित ने बताया कि कुछ गुंडे घर के बाहर भी खड़े थे, जिन्हें वो पहचान नहीं पाए। उन्होंने बताया कि गुंडों ने उनकी माँ को धक्का देकर गिरा दिया और मारपीट के बाद घर से निकल कर चले गए। पीड़ित ने बताया, “मैं भाजपा की मंडल कमिटी का सदस्य हूँ। सबसे पहले तो उन्होंने हाथों का इस्तेमाल करके मुझे मारा, फिर रिवॉल्वर के हुड का इस्तेमाल करके मेरे सिर पर जोरदार वार किया। जब मैं जमीन पर गिर गया तो उन्होंने मुझे लात-घूसों से मारना शुरू कर दिया।”
हाल ही में आयकर (IT) विभाग ने अभिनेत्री तापसी पन्नू और फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप सहित कई के ठिकानों पर रेड की थी। बताया जाता है कि इस दौरान 650 करोड़ रुपए की गड़बड़ी का मामला सामने आया। अब तापसी पन्नू ने इस मामले में चुप्पी तोड़ी है। सबसे बड़ी बात ये है कि उन्होंने एक तरह से स्वीकार किया है कि IT विभाग ने उनके मामले में 5 करोड़ रुपए की गड़बड़ी पाई है। तापसी ने एक के बाद एक 3 ट्वीट्स किए।
उन्होंने लिखा कि 3 दिनों तक चले सघन तलाशी अभियान में मुख्य रूप से 3 चीजों ही खोज की गई। उन्होंने लिखा कि पेरिस के उस बँगले की चाभी खोजी गई, जो कथित रूप से उनकी है। साथ ही उन्होंने लिखा कि गर्मी की छुट्टियाँ लगभग आने ही वाली हैं, इसीलिए ऐसा किया गया। तापसी ने आगे लिखा कि कथित रूप से 5 करोड़ रुपए की रसीद की खोज की गई जो मैंने लेने से इनकार कर दिया था। उन्होंने लिखा कि भविष्य में उन्हें परेशान करने के लिए ऐसा किया गया।
तापसी ने आगे लिखा, “माननीय वित्त मंत्री ने याद दिलाया कि मेरे यहाँ 2013 में भी छापे पड़े थे। अब मैं उतनी सस्ती नहीं रही।” सच्चाई ये है कि फ़िल्मी हस्तियों पर पड़े छापे को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किसी का नाम लिए बिना ही कहा था कि 2013 में भी इनमें से कुछ के यहाँ छापेमारी हुई थी। एक तरह से तापसी पन्नू ने इन ट्वीट्स के जरिए बयान देकर IT विभाग की कार्रवाई का मजाक भी बनाया और खुद को जनता के सामने निर्दोष साबित करने की कोशिश की।
तापसी पन्नू ने IT विभाग की छापेमारी पर दिया बयान
साथ ही तापसी पन्नू ने इसके साथ गुस्से वाली इमोजी भी ट्ववीट की। हाल ही में तापसी पन्नू के बॉयफ्रेंड भारतीय बैडमिंटन युगल टीम के कोच मैथियस बो (Mathias Boe) ने अनुराग कश्यप और तापसी मामले में हस्तक्षेप करते हुए ट्विटर पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से इनकम टैक्स छापों के बारे में ‘कुछ’ करने का आग्रह किया। इस पर किरण रिजुजू ने उन्हें फटकार लगाई थी।
गौरतलब है कि चार मार्च को सीबीडीटी ने बताया था कि 4 शहरों- मुंबई, पुणे, दिल्ली और हैदराबाद के 28 ठिकानों पर आयकर विभाग ने कार्रवाई की। इसके मुताबिक आयकर विभाग के सर्च और सर्वे ऑपरेशंस की शुरुआत मुंबई में 2 फिल्म निर्माण कंपनियों, एक अभिनेत्री और दो टैलेंट मैनेजमेंट कंपनियों से 3 मार्च को हुई थी।
यह भी बताया गया था कि 5 करोड़ रुपए कैश पेमेंट लेने की रसीदें तापसी पन्नू के घर से बरामद हुई थी। कथित तौर पर टैक्स बचाने के लिए यह पेमेंट कैश के तौर पर ली गई थी। यही नहीं फिल्म प्रोडक्शन हाउस फैंटम फिल्म्स ने बॉक्स ऑफिस पर जितने कलेक्शन की बात कही थी, उससे ज्यादा रकम की जानकारी इस दौरान मिली। कंपनी के अधिकारी 300 करोड़ रुपए का हिसाब नहीं दे पाए। छापे के दौरान फर्जी खर्च के भी सबूत मिले।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक प्राइवेट अस्पताल का अमानवीय चेहरा सामने आया है। इसके कारण 3 वर्षीय खुशी की मौत हो गई। आरोप है कि अस्पताल ने पूरे रुपए न मिलने के कारण बच्ची के पेट की स्टिचिंग नहीं की और फटे पेट के साथ ही उसे बाहर निकाल दिया। निजी अस्पताल की इस हरकत के बाद आक्रोशित लोगों ने हंगामा किया, लेकिन अस्पताल वालों ने दरवाजा नहीं खोला। इस मामले में DM ने जाँच के आदेश दे दिए हैं।
परिजनों का आरोप है कि बच्ची की सर्जरी के बाद उसे पेट में टाँके नहीं लगाए गए और उसे अस्पताल ने निकाल बाहर किया। करेली के करेंहदा निवासी मुकेश मिश्र ने अपनी बेटी ख़ुशी को पेट दर्द की शिकायत के बाद 15 फरवरी को इस अस्पताल में दाखिल कराया था। डॉक्टरों ने बताया कि उसकी आंतें सिकुड़ रही हैं, जो ऑपरेशन बाद ठीक होगी। 2 दिनों बाद ऑपरेशन तो हुआ, लेकिन डॉक्टरों पर इसे ठीक तरीके से अंजाम नहीं देने का आरोप है।
इसके बाद ख़ुशी को कोई आराम न मिलने के कारण 5 दिन बाद फिर से सर्जरी की गई। आरोप है कि इसके बाद डॉक्टरों ने टाँके भी नहीं लगाए और उसे कहीं और लेकर जाने को कहा। बच्ची उस समय दर्द से कराह रही थी। ख़ुशी को इसके बाद चिल्ड्रन होम ले जाया गया, लेकिन वहाँ भी डॉक्टरों ने इलाज से इनकार कर दिया। हार कर परिजन शुक्रवार (मार्च 5, 2021) को बच्ची को लेकर पुनः उसी अस्पताल में पहुँचे।
NCPCR asks Dist Collector to conduct inquiry into the case, lodge FIR under relevant IPC sections & recommend strict action against doctors & staff. It also asks that deceased child’s family be provided compensation. It has also asked for factual action taken report within 24 hrs
वहाँ उन्हें दरवाजे पर ही रोक दिया गया। वे अपनी बच्ची को गोद में लेकर इधर-उधर भटकते रहे लेकिन अंदर नहीं जाने दिया गया। दर्द से तड़प रही बाकी ने अस्पताल गेट पर पिता की गोद में ही दम तोड़ दिया। परिजनों और रिश्तेदारों के आक्रोश के बाद कई थानों की पुलिस वहाँ पहुँची। मंझनपुर में शव का पोर्टमॉर्टम हुआ। प्रयागराज के जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया है कि बच्ची की मौत के मामले में लापरवाही सामने आने पर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई होगी।
उक्त अस्पताल रावतपुर में स्थित है। पिता ने आरोप लगाया है कि अस्पताल ने सर्जरी के नाम पर उनसे 1.5 लाख रुपए ऐंठ लिए थे और तब भी अस्पताल द्वारा 5 लाख की डिमांड की जा रही थी। आरोप है कि पेट में टाँके न लगे होने के कारण दूसरे अस्पतालों ने बच्ची की गंभीर स्थिति को देख कर उसे दाखिल करने से इनकार कर दिया। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) ने डीएम से इस बाबत रिपोर्ट माँगी है और अस्पताल कर्मचारियों व डॉक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज करने को कहा है।
उत्तर प्रदेश के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी यूँ तो पंजाब की जेल में है और वहाँ की कॉन्ग्रेस सरकार पर उसके यूपी प्रत्यर्पण में बाधा डाल कर उसे बचाने के आरोप लग रहे हैं, लेकिन राजधानी लखनऊ में उसकी अवैध सम्पत्तियों पर कार्रवाई जारी है। मुख़्तार अंसारी के करीबी शाहिद के हजरतगंज स्थित अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया है। ये कार्रवाई लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने की है।
हजरतगंज स्थित साहू सिनेमा के बगल में रानी सल्तनत प्लाजा की चौथी मंजिल पर बुलडोजर चला। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए वहाँ भारी पुलिस बल की तैनाती भी की गई थी। जिलाधिकारी (DM) और लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अभिषेक प्रकाश के निर्देश के बाद उक्त मंजिल पर स्थित सभी 10 दुकानों को तोड़ दिया गया। चौथी मंजिल अवैध तरीके से बनाया गया था।
डीएम ने जानकारी दी कि इस मंजिल को पास कराए गए मानचित्र के विपरीत बनाया गया था और इस सम्बन्ध में कई बार नोटिस भेजी जा चुकी थी। कॉम्प्लेक्स के मालिक को इस अवैध निर्माण को तोड़ने को कहा गया था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसलिए, शनिवार (मार्च 6, 2021) की सुबह LDA ने ये कार्रवाई की। पहले दुकानें तोड़ी गईं, फिर दीवारों को ध्वस्त किया गया। छत को सबसे अंत में जमींदोज किया गया।
Lucknow Development Authority begins demolition of the illegal properties of people associated with gangster-turned-politician Mukhtar Ansari. Visuals from Hazratganj. pic.twitter.com/l9lCx68f7S
कार्रवाई करने के लिए सुबह का वक़्त इसीलिए चुना गया क्योंकि तब हजरतगंज में भीड़भाड़ कम होती है और बाजार बंद रहता है। प्रशासन का कहना है कि राजधानी क्षेत्र में बनी ऐसी अवैध संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से तोड़ा जा रहा है। उक्त इमारत का नाम ‘रानी सल्तनत’ है, जो गाँधी आश्रम के बगल में स्थित है। यूपी सरकार मुख़्तार अंसारी और उसके पूरे गैंग के अवैध कामकाज को ख़त्म करने में लगी हुई है।
उधर माफिया नेता के दोनों बेटे गुरुवार को हजरतगंज कोतवाली दोबारा पहुँचे। लगभग 45 मिनट तक पूछताछ किए जाने के बाद उन्हें 2 सप्ताह बाद आने का निर्देश दिया गया। पुराने दरोगा के रिटायर होने के कारण नए विवेचक को पूरे मामले का नए सिरे से अध्ययन करना पड़ रहा है। मामला अगस्त 2020 में हुए धोखाधड़ी के मामले के FIR से जुड़ा है। आरोपितों को दस्तावेजों के साथ फिर बुलाया गया है।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से पंजाब सरकार ने कहा था कि यूपी की योगी आदित्यनाथ की सरकार को अंसारी को रूपनगर जेल से उत्तर प्रदेश के बाँदा जेल में ट्रांसफर करने की माँग करने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। वहीं यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से पंजाब की अमरिंदर सरकार और रूपनगर जेल प्रशासन को निर्देश देने की माँग की कि मऊ के विधायक मुख़्तार अंसारी की हिरासत जल्द से जल्द यूपी के बाँदा जिला जेल को सौंप दी जाए।
ओडिशा के सिमिलिपाल अभयारण्य में लगी आग ने पर्यावरणविदों की चिंताएँ बढ़ा दी हैं। सिमिलिपाल बाघों के लिए भी लोकप्रिय है, लेकिन इसमें अक्सर लगने वाली आग ने जंगल के अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर दिए हैं। फरवरी में इसके बायोस्फेयर रिजर्व एरिया में आग लग गई और 1 सप्ताह तक जंगल जलता रहा। हालाँकि, अब इसे नियंत्रित कर लिए जाने की बात कही जा रही है। ये उत्तरी ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित है।
सिमिलिपाल का नाम ‘सिमुल’ से आया है, जिसका अर्थ है सिल्क कॉटन के वृक्ष। ये एक राष्ट्रीय अभयारण्य और टाइगर रिजर्व है। 5569 वर्ग किलोमीटर में फैले इस जंगल का इकोसिस्टम पूर्वी घाट के पूर्वी छोर पर स्थित है, जिसे जून 22, 1994 में केंद्र सरकार ने बायोस्फेयर रिजर्व घोषित किया गया था। ये 94 खास किस्म के फूलों और 3000 तरह के पौधों का घर है। 264 तरह की चिड़िया, 42 किस्म के मैमल्स और 29 किस्म के रेप्टाइल्स इसे खास बनाते हैं।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि जंगल से लगे सीमावर्ती इलाकों में 399 फायर पॉइंट्स चिह्नित किए गए हैं। उनका कहना है कि ये पॉइंट्स गाँवों के नजदीक हैं और आग को नियंत्रित करने के लिए हर जगह प्रयास किया जा रहा है, जिससे स्थिति कंट्रोल में है। हर साल पतझड़ के बाद जब वसंत ऋतु आता है तो आग की खबरें सामने आती हैं। इससे पहले यहाँ 2015 में आग की बड़ी घटना हुई थी। गिरी हुई पत्तियों में आग पकड़ने के बाद ये जंगल में फ़ैल जाता है।
इनमें कई बार प्राकृतिक कारणों, जैसे बिजली वगैरह गिरने से ऐसा होता है। सूखी हुई पत्तियों में जरा सी चिंगारी भी आग का रूप ले लेती है। कई बार शिकारी भी जंगल के एक खास क्षेत्र में आग लगा देते हैं, ताकि उनके मनचाहे इलाके से सारे जानवर भाग कर जाएँ। पशु तस्कर अपना काम निकलने के बाद आग को बुझाने की कोशिश तक नहीं करते। महुआ चुनने के लिए भी ग्रामीण सूखी पत्तियों को जलाते हैं।
इससे उन्हें महुआ के फूल चुनने में आसानी होती है। महुआ का उपयोग मदिरा किस्म के पेय को तैयार करने में किया जाता है, जिसे पीकर ग्रामीण मदमस्त हो जाते हैं। ग्रामीणों का ये भी मानना है कि कुछ पेड़ों की शाखाएँ जलने से उनमें बाद में अच्छा विकास होता है। 1200 गाँवों और 4.5 लाख की जनसंख्या पूरे ट्रांजिशन जोन में आती है, जिनमें से 73% आदिवासी हैं। इस बार गर्मी पहले आने और गर्म हवाएँ चलने को भी इसका कारण माना जा रहा है।
Scathing analysis of the devastating #SimlipalFires in Odisha’s largest forest. A big cause: the state govt’s apathy about increased poaching & timber mafia. Contrast with Assam, where 5 years of tough actions have ended Rhino poaching & revived Kazirangahttps://t.co/D8577cyxwu
ये आग सामान्यतः प्राकृतिक रूप से हुई बारिश के बाद ही नियंत्रण में आते हैं। शिकारियों पर शिकंजा कस कर और सूखे डाल-पत्तियों को हटाना भी इस प्रक्रिया में शामिल है। इस बार पाँचों डिवीजन में 21 स्क्वाड्स बना कर आग पर नियंत्रण के लिए काम पर लगाया गया। 40 फायर टेंडर और 240 ब्लोअर लगाए गए। 250 फॉरेस्ट गार्ड्स काम पर लगे। ग्रामीणों के बीच जागरूकता अभियान की भी शुरुआत की गई है।
भाजपा नेता विजयंत जय पांडा ने भी आग की इस घटना पर दुःख जताते हुए कहा कि ओडिशा के इस सबसे बड़े जंगल में आग लगने का सबसे बड़ा कारण है कि सरकार शिकारियों और टिम्बर माफिया के बढ़ते प्रभावों को लेकर सतर्क नहीं है। उन्होंने इसके लिए असम का उदाहरण दिया, जहाँ भाजपा ने 5 वर्षों के कार्यकाल में राइनो तस्करी पर रोक लगाई और काजीरंगा को बचाया। ओडिशा में नवीन पटनाटक के नेतृत्व में बीजद की सरकार है।
मयूरभंज के राजपरिवार खानदान से ताल्लुक रखने वाली अक्षिता एम भंज देव ने इस आग की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा, “2000 हेक्टेयर आग की चपेट में है। 1000 से अधिक चिड़ियों, पशु और पेड़-पौधों की स्पीसीज खतरे में है। ये 11 दिनों से ऐसा ही चल रहा है।” उन्होंने फोटोग्राफर देबाशीष मिश्रा की तारीफ की, जो इन तस्वीरों को सामने लाकर सरकार व दुनिया का ध्यान आगाह कर रहे हैं।