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मुजफ्फरनगर में भाजपा कार्यकर्ता और लोकदल समर्थक किसान भिड़े: तीन घायल, तेरहवीं में शामिल होने गए थे मंत्री संजीव बालियान

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में भाजपा नेताओं और किसानों के बीच चर्चा के दौरान जयंत चौधरी की पार्टी लोकदल के कार्यकर्ताओं के नारेबाजी के कारण विवाद हुआ। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों में मारपीट होने लगी, मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, घटना में कई लोग घायल हो गए हैं। फिलहाल घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहाँ उनका उपचार हुआ। इसके बाद घटनास्थल पर भारी संख्या में पुलिसबल भी तैनात किया गया। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान सोमवार (22 फरवरी 2021) को मुजफ्फरनगर जनपद के सोरम गाँव में तेरहवीं में शामिल होने के लिए पहुँचे थे। राज्य मंत्री सोरम की ऐतिहासिक चौपाल पर किसानों को समझाने भी वाले थे। इस दौरान लोकदल के कार्यकर्ताओं ने उनका विरोध किया, विरोध के बाद मंत्री जी समर्थकों और लोकदल के उपद्रवियों के बीच टकराव की स्थिति बनी। थोड़ी ही देर में वहाँ मारपीट होने लगी जिसमें कुल 3 लोग घायल हो गए।

इसके बाद ही शाहपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत सोरम गाँव में पंचायत शुरू हो गई। इसके अलावा लोकदल के किसानों का कहना है कि भाजपा नेताओं पर एफ़आईआर दर्ज की जाए। घटना को लेकर डॉ. संजीव बालियान का कहना है कि वह तेरहवीं में गए थे। वह अंदर बैठे थे तभी बाहर से चार पाँच युवक आए और सभी ने नारेबाज़ी की, उन सभी युवकों को ग्रामीणों ने खदेड़ दिया था। हम सिर्फ चर्चा करना चाहते थे, हंगामा करने वाले राष्ट्रीय लोकदल के समर्थक बताए गए हैं।    

केंद्रीय राज्य मंत्री संजीव बालियान ने इस पर ट्वीट करते हुए लिखा, “आज जब सोरम में स्वर्गीय श्री राजबीर सिंह जी की शोकसभा एवं रस्म पगड़ी में शामिल हुआ, इस दौरान लोकदल के 5-6 नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने बदतमीजी तथा गाली गलौज की। जिस पर स्थानीय निवासियों ने उन्हें ऐसा करने को मना किया तथा वहाँ से भगा दिया। लोकदल पार्टी जिस तरह से किसानों की आड़ में आपसी भाईचारा खराब करने का प्रयास किया वह निंदनीय है।”

इस घटना पर राष्ट्रीय लोकदल के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने भी ट्वीट किया था। उन्होंने ट्वीट में लिखा था, “मुजफ्फरनगर के सोरम गाँव में भाजपा नेताओं और किसानों के बीच हुए संघर्ष में कई लोग घायल हो चुके हैं। किसान के पक्ष में बात नहीं तो कम से कम व्यवहार तो अच्छा रखो। किसान की इज्जत तो करो। इन क़ानूनों के फ़ायदे बताने जा रहे सरकार के नुमाइंदों की गुंडागर्दी बर्दाश्त करेंगे गाँव वाले?” 

श्रीधरन के भाजपा में शामिल होने पर शुरू लिबरल्स का विलाप: लोकतंत्र विरोधी बता कर खारिज किया मेट्रो का योगदान

जब से मेट्रो मैन ई श्रीधरन ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली है, तभी से ‘लिबरल’ जमात का प्रलाप चालू है। जैसे वह भूल ही चुके हैं कि मेट्रो रेल नेटवर्क के लिए उन्होंने कितनी अहम भूमिका निभाई थी। ऐसा करने वालों में ही शामिल है कोचि के अस्पताल का एक कार्डियोलोजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ)। कोचि स्थित मेडिकल ट्रस्ट हॉस्पिटल के डॉक्टर वरुण ने दावा किया कि श्रीधरन एक औसत ‘कट्टर ऊँची जाति’ वाले हिन्दू अंकल का प्रतिरूप हैं, जिसे तमाम विशेषाधिकार प्राप्त हैं। 

डॉक्टर वरुण का डिलीट किया गया ट्वीट

इसके बाद डॉक्टर ने ट्वीट में लिखा, “श्रीधरन जैसे लोग भारत को ऐसा क्षेत्र समझते हैं जिसे सिर्फ सड़कों और ट्रेन की ज़रूरत है। बल्कि ये नहीं देखते हैं कि इस देश के लाखों करोड़ों लोगों के कितने सपने और आकांक्षाएँ हैं।” पता नहीं ये दो बेहद अलग बातें आपस में कैसे जुड़ी हुई हैं क्योंकि लाखों लोग जिनके सपने हैं वो उन सड़कों और ट्रेनों से होकर ही जाते हैं और अपने सपने पूरे करते हैं। 

इसके बाद तमाम इंटरनेट यूज़र्स ने इस मुद्दे पर दी गई दलील में कमियाँ बताई। 

कुछ नेटिज़न्स ने तो डॉक्टर से पूछा कि क्या वो अपने मरीजों को देखने से पहले या उन्हें दवा बताने से पहले उनकी जाति पूछता है। क्योंकि उसके ट्वीट में मेट्रो ट्रेन पर दिए गए जाति के संदर्भ का कोई मतलब नहीं बनता है। 

इस तरह की तमाम आलोचनाओं के बाद डॉक्टर ने अपना ट्वीट डिलीट करके अपना अकाउंट सुरक्षित कर लिया। लेकिन डॉक्टर वरुण इकलौते ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो श्रीधरन के भाजपा में शामिल होने पर वैचारिक विलाप कर रहे हैं। 

सम्राट नाम के ट्विटर यूज़र ने तो दिल्ली मेट्रो के लिए श्रीधरन का योगदान ही खारिज कर दिया। क्योंकि बतौर दिल्ली मेट्रो रेलवे कॉरपोरेशन के मुखिया, अलग-अलग सेक्शन समय से पूरे किए गए थे या निर्धारित अवधि से पहले। इस दौरान निर्धारित बजट का भी विशेष ध्यान रखा गया था लेकिन ‘लिबरल्स’ इसकी तरफ शायद ही ध्यान दें। 

ऐसे ही फिल्म अभिनेता सिद्धार्थ ने श्रीधरन की उम्र पर टिप्पणी करके उनके भाजपा में शामिल होने का मज़ाक बनाया। 

निखिल वागले नाम के मीडिया पर्सन ने तो उनकी तुलना जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर से कर दी। 

कुछ ने तो यहाँ तक कह दिया कि भाजपा की सदस्यता लेकर श्रीधरन ने लोकतंत्र का विरोध किया है। 

भाजपा में आधिकारिक रूप से शामिल होने के बाद मेट्रो मैन श्रीधरन ने बताया था कि वह पिछले काफी समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए थे। उन्होंने बताया कि वो अपने स्कूल के दिनों से ही एक स्वयंसेवक थे और संघ ने ही उनके जीवन के मूल्यों को तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।         

ट्रैक्टर मार्च हिंसा: लाल किले के गुंबद पर चढ़े उपद्रवी जसप्रीत को भी दिल्ली पुलिस ने किया गिरफ्तार

कृषि कानून के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों द्वारा 26 जनवरी को निकाली गई ट्रैक्टर रैली के दौरान लाल किले पर हुई हिंसा मामले में पुलिस ने एक और आरोपित जसप्रीत को गिरफ्तार कर लिया है। जसप्रीत सिंह ऊर्फ सनी पर आरोप है कि वह 26 जनवरी के दिन लाल किले के गुंबद पर चढ़ा था और उस वक्त उसके हाथों में स्टील का रॉड था। पुलिस ने जसप्रीत (29) पुत्र रघुबीर सिंह निवासी स्वरूप दिल्ली को आज (फरवरी 22, 2021) दिल्ली से ही पकड़ा है। दिल्ली पुलिस ने 26 जनवरी के कुछ वीडियोज-फोटोज के आधार पर उसे गिरफ्तार किया है।

जसप्रीत वह शख्स है जो पूर्व में गिरफ्तार हुए आरोपित मनिंदर सिंह के पीछे खड़ा थाा। मनिंदर वही शख्स है जिसका लाल किला पर दो तलवार लहराता वीडियो वायरल हुआ था। अभी हाल ही में उसे भी दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है और वह भी स्वरूप नगर का ही रहने वाला है। जब लाल किले की प्राचीर पर भीड़ घुस आई थी तब जसप्रीत ही वो शख्स था जो लाल किला के प्राचीर की दोनों तरफ बने गुंबदों में से एक गुंबद पर चढ़ गया था। वह वहाँ पर स्टील की छड़ को पकड़े हुए आपत्तिजनक इशारे भी कर रहा था। 

ट्रैक्टर रैली के दौरान 26 जनवरी को लाल किला पर हुई हिंसा के मामले में शनिवार (फरवरी 20, 202) को दिल्ली पुलिस ने 20 और उपद्रवियों के फोटो जारी किए। इससे पहले भी पुलिस 200 उपद्रवियों के फोटो जारी कर चुकी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बेहद वैज्ञानिक जाँच और पूरी तरह साफ होने के बाद ही इनके फोटो जारी किए गए हैं। 

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जाँच के बाद जिन लोगों की पहचान होती जा रही है पुलिस उन तक पहुँच रही है। आरोपितों का पता न चलने की सूरत में उनके फोटो जारी किए जा रहे हैं। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि 26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद अपराध शाखा की एसआईटी ने मामले की जाँच की।

इसके लिए उस दिन के फोटो, वीडियो और सीसीटीवी फुटेज जुटाए गए। इसकी मदद से लगातार आरोपितों की पहचान की जा रही है। इसके लिए पुलिस फेशियल रिकग्निशन, जियो लोकेशन समेत अन्य तरीकों से पहचान कर रही है। वहीं उपद्रवियों के वाहन नंबरों से भी उनकी पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

गौरतलब है कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च के दौरान यह हिंसा हुई थी। इसमें प्रदर्शनकारी किसान लाल किले में दाखिल हो गए थे। वहाँ उन्होंने धार्मिक निशान वाला झंडा भी फहराया था। पुलिस ने कहा था कि प्रदर्शनकारी किसान तय ट्रैक्टर मार्च रूट को तोड़कर लाल किले पहुँचे थे। इस हिंसा में 400 के करीब पुलिसवाले जख्मी हुए थे। फिलहाल पुलिस इस मामले में तेजी से कार्रवाई कर रही है।

बागपत में चाट के लिए दो गुट हुए खून के प्यासे: जमकर चले लाठी-डंडे-रॉड, 8 गिरफ्तार, 12 घायल, देखें वीडियो

उत्तर प्रदेश के बागपत से एक बेहद ही हैरान कर देना वाला वीडियो सामने आया है। बागपत जिले के बड़ौत थाना क्षेत्र में दो चाट की दुकान चलाने वालों की बीच जमकर लाठी-डंडे चले हैं। इस मामले में पुलिस ने 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन चाट स्टॉल वालों ने एक दूसरों को पाइप और डंडों से जमकर पीटा। इस दौरान भरे बाजार में लोग तमाशबीन बने देखते रहे। दोनों पक्षों के बीच झगड़ा एक ग्राहक को दूसरे दुकानदार द्वारा बुलाए जाने के बाद शुरू हुआ।

पुलिस ने बताया कि, जिले के बड़ौत कस्बे के अतिथि भवन बाजार इलाके में नव दुर्गा व दुर्गा के नाम से पास-पास ही दो चाट की दुकान है। सोमवार (फरवरी 22, 2021) की दोपहर कुछ ग्राहक चाट खाने पहुँचे थे। दोनों दुकानदार ग्राहकों को बुलाने लगे। एक दुकानदार जबरन ग्राहकों को अपनी दुकान पर लेकर चला गया। इसी बात को लेकर दोनों दुकानदारों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। पहले दोनों में गाली-गलौच होती रही, इसके बाद एक पक्ष हिंसक हो गया। जिसके बाद दो चाट दुकानों के दुकानदारों और श्रमिकों के बीच जमकर मार पीट हुई।

दोनों पक्षों के बीच बीच सड़क पर लगभग 20 मिनट तक लड़ाई होती रही। इस दौरान दोनों पक्षों ने एक दूसरो के डंडों और रॉड से जमकर पीटा। सरेआम बाजार में लाठी-डंडे चलने से भगदड़ मच गई। दुकानों के शटर बंद हो गए। अफरा-तफरी का माहौल हो गया। इस दौरान काफी देर तक लोग एक दूसरे पर डंडे बरसाते रहे। वहीं इस दौरान दर्जनों लोग सड़कों पर मूक दर्शक बने इस घटना को देखते रहे। 

बागपत पुलिस ने कहा कि झड़प में 12 लोग घायल हुए हैं और आठ को गिरफ्तार किया गया है। हालाँकि, लड़ाई में किसी को कोई गंभीर चोट नहीं लगी। इस दौरान पास ही खड़े किसी शख्स ने मोबाइल में इस पूरी घटना को कैद कर लिया। घायलों को नगर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ तहरीर दी।

रतन लाल ड्यूटी पर थे, अंकित ड्यूटी से लौटे थे… नितिन चाउमीन खाने निकला था: दिल्ली में ऐसे हुआ था हिन्दू-विरोधी दंगा

दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों को 1 वर्ष पूरे हो चुके हैं और साथ ही इस दंगे में मारे गए हिन्दुओं के परिवारों के लिए न्याय का इंतजार भी बढ़ता जा रहा है। इस मामले में ताहिर हुसैन समेत सभी आरोपितों के खिलाफ कोर्ट में सुनवाई चल रही है। दिल्ली पुलिस चार्जशीट पर चार्जशीट पेश कर रही है, लेकिन दिल्ली के हिन्दुओं के ऊपर अब भी डर का साया मँडरा रहा है। आंदोलनों से जूझती दिल्ली में कब दंगे हो जाए, कहा नहीं जा सकता।

गणतंत्र दिवस के दिन जिस तरह से किसान आंदोलन के नाम पर हिंसा की गई, उससे ये डर बार-बार सामने आ जाता है। तब मुस्लिमों को बरगलाया गया था, अब सिखों के साथ यही किया जा रहा है। अंत में या तो किसी अपने को पराया कर दिया जाता है, या किसी पराए पर दोषारोपण हो जाता है। जैसे, दिल्ली दंगों में कह दिया गया कि ये कपिल मिश्रा के कारण हुआ। जबकि लाल किला हिंसा के लिए उन्होंने कह दिया कि दीप सिद्धू उनके गिरोह का नहीं है।

दिल्ली दंगों की भी बात करें तो 4 मुख्य चरणों में इसकी साजिश रची गई थी। पहले चरण में PFI सहित अन्य इस्लामी संगठनों ने विश्वविद्यालयों में CAA के खिलाफ प्रदर्शन किया और छात्रों को भड़काया। दूसरे फेज में शाहीन बाग़ जैसे धरने, जिसकी चर्चा हम आगे करेंगे। तीसरे चरण में हिन्दू-विरोधी प्रतीकों और गतिविधियों की बाढ़ आ गई। चौथे चरण में वारिस पठान जैसों के घृणास्पद बयानों के बाद हिन्दुओं पर हमले शुरू हो गए।

मुस्लिम महिलाओं ने भी अपनी छतों से ईंट-पत्थर फेंके थे। मुस्लिम परिवार के लोग अपने छात्रों को पहले ही स्कूलों से ले गए थे। फैसल फारूक का स्कूल दंगाइयों का अड्डा बना। ताहिर हुसैन की फैक्ट्री दंगाइयों का बसेरा बनी। हिन्दुओं की दुकानों को चुन-चुन कर जलाया गया। पेट्रोल बम और पत्थरों का इस्तेमाल हुआ – कश्मीर की तर्ज पर। फिर मीडिया ये दिखाने में लग गई कि कैसे मुस्लिमों ने हिन्दुओं को बचाया। लेकिन, किससे?

दिल्ली हिंसा: विकिपीडिया और कपिल मिश्रा

किसी भी चीज को लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रोपेगंडा फैलाने का एक आसान सा तरीका है कि उसे विकिपीडिया पर उसी नैरेटिव के साथ डाल दिया जाए, या फिर किसी विदेशी खबरिया पोर्टल पर उसे छपवा दिया जाए। दिल्ली दंगा के विकिपीडिया पेज पर जब आप जाएँगे तो वहाँ लिखा हुआ है कि इस दंगे में मुख्यतः मुस्लिमों को निशाना बनाया गया और भाजपा नेता कपिल मिश्रा के ‘भड़काऊ बयान’ के कारण ये दंगा हुआ।

उस भड़काऊ बयान का जिक्र भी किया गया है – “हम सड़कों पर आएँगे।” साथ ही इसे धमकी भी बताया गया है। अब आप देखिए, जो सैकड़ों लोग 100 दिनों से दिल्ली की कई मुख्य सड़कों पर जाम करके बैठे थे, उन्होंने दंगा नहीं किया। लेकिन, किसी व्यक्ति ने सड़क पर बैठने की बात कर दी तो वो दंगाई हो गया? ये कैसा समीकरण है? दरअसल, यही वामपंथी नैरेटिव है, जिसके तहत इस दंगे में हिन्दू पीड़ितों का दर्द छिपा लिया गया।

कपिल मिश्रा के इस बयान से पहले ही दिल्ली में दंगा शुरू हो गया था, ये एक व्यक्ति के फेसबुक लाइव से भी पता चलता है – जिस बारे में तब ऑपइंडिया ने भी आपको बताया था। उक्त व्यक्ति का ये वीडियो कपिल मिश्रा के बयान से आधे घंटे पहले का ही था, जिसमें ईंट-पत्थर चलाते हुए लोगों की करतूतें कैद हैं। इसी तरह कई अन्य इलाकों में भी हालात बदतर होते चले गए। कहीं किसी हिन्दू की छत पर तो पेट्रोल बम नहीं मिला?

मामला कोर्ट में गया और वहाँ कपिल मिश्रा के साथ-साथ अनुराग ठाकुर जैसे नेताओं को भी घसीट लिया गया। उनका दोष इतना था कि उन्होंने भाषण दिया था। जो 3 महीने से अराजकता फैला रहे थे, उन्हें बचाने के लिए उनलोगों को निशाना बनाया गया – जो उन अराजकतावादियों का विरोध कर रहे थे। जबकि हमारे ग्राउंड रिपोर्ट में पता चला था कि कई इलाकों में मंदिरों तक को नहीं बख्शा गया।

याद कीजिए उन्हें, जो इस्लामी हिंसा की भेंट चढ़ गए

दिल्ली दंगों में इस्लामी कट्टरवादियों ने किस तरह से हिन्दुओं को बेरहमी से बेरहमी से मारा था, उसके बारे में जानने के लिए हमें 1 साल पीछे चलना पड़ेगा। तत्कालीन विंग कमांडर अभिनन्दन की तरह मूँछें रखने वाले हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल को पीट-पीट कर मार डाला गया था। वो पहले हिन्दू थे, उन दंगों के दौरान जिनकी हत्या हुई। रतनलाल को कट्टरपंथी इस्लामिक भीड़ द्वारा उस समय बेरहमी से मारा गया था, जब वह चाँद बाग के वजीराबाद रोड पर अपनी ड्यूटी कर रहे थे।

शिव विहार में दिल्ली हिंदू विरोधी दंगे के दौरान शिव विहार में राहुल सोलंकी की हत्या मामले में मुस्तकीम उर्फ समीर सैफी अपना जुर्म कबूल कर चुका है। सैफी फरुखिया मस्जिद के पास हो रहे सीएए विरोध प्रदर्शनों में भी सक्रिय था। राहुल सोलंकी गाजियाबाद के एक निजी कॉलेज से एलएलबी कर रहे थे। वह दूध लेने के लिए अपने घर से निकले थे, तभी दंगाइयों ने उनके गले के पास दाहिने कंधे में गोली मार दी थी।

अंकित शर्मा की इतनी बेरहमी से हत्या की गई थी कि उनके शरीर पर जख्म के दर्जनों निशान थे और उन्हें कई बार चाकुओं से गोदा गया था। उन्हें घसीटते हुए ताहिर हुसैन (तब AAP के पार्षद) की इमारत में ले जाया गया और वहाँ कई लोगों ने मिल कर उनकी हत्या कर दी। आईबी में कार्यरत रहे अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर के अलावा अनस, फिरोज, जावेद, गुलफाम, शोएब आलम, सलमान, नजीम, कासिम, समीर खान शामिल हैं।

26 फरवरी को खाना खाने के बाद घर से बाहर निकले आलोक तिवारी अपने घर दोबारा न लौट सके। उन्हें दंगाइयों ने पत्थर मारकर घायल किया और जीटीबी अस्पताल में उन्होंने अपनी आखिरी साँस ली। मुस्तफाबाद के रहने वाले हरि सिंह सोलंकी ने अपना बेटा रोहित सोलंकी खो दिया। रोहित की शादी अप्रैल 2020 में होने वाली थी। दिलबर सिंह नेगी को दंगाइयों की भीड़ ने तलवार से काटने के बाद जलते हुए घर में आग के हवाले कर दिया था। बाद में जलकर राख हुए दिलबर नेगी की विडियो भी वायरल हुई थी।

इसी तरह विनोद कुमार अल्लाह-हू-अकबर और नारा ए तकबीर का एलान करती भीड़ के शिकार हुए। गोकुलपुरी में 26 फरवरी को 15 साल का नितिन अपने घर से चाउमिन लेने निकला था। उसे किसी चीज से मारा गया और चोट इतनी गहरी थी कि अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। 19 साल के विवेक पर हमला किया और उसके सिर में ड्रिल मशीन से छेद कर दी गई थी। दलित दिनेश बच्चों के लिए दूध लेने निकले थे, लेकिन उन्हें सिर में गोली मार दी गई।

शाहीन बाग़ में पनपा था दिल्ली दंगों का बीज

शाहीन बाग़ आंदोलन की वजह से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था। 100 दिनों से भी अधिक समय तक चले इस उपद्रव के दौरान उस सड़क को इतने ही दिनों तक रोक कर रखा गया, जहाँ से प्रतिदिन 1 लाख से भी ज्यादा गाड़ियाँ गुजरती थीं। बच्चों को स्कूल के लिए देर होती थी, मरीज सही समय पर अस्पताल न पहुँचने के कारण मरते थे और कामकाजी लोगों को दूसरे रास्तों से दफ्तर जाना पड़ता था।

फ़रवरी 2020 आते-आते छात्रों की बोर्ड परीक्षाएँ भी शुरू हो गई थीं। कई बार सुप्रीम कोर्ट में सड़क खाली कराने की याचिका डाली गई, लेकिन शुरू में इसे पुलिस का मामला बता कर ख़ारिज कर दिया गया। कोरोना वायरस के संक्रमण और लॉकडाउन के दौरान महामारी एक्ट का खुलेआम उल्लंघन हुआ। अंत में दिल्ली पुलिस ने उन्हें वहाँ से हटाया। दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद उनका उद्देश्य भी सफल हो ही गया था।

लेकिन, क्या आपने आज तक किसी वामपंथी मीडिया संस्थान को ये पूछते देखा है कि शाहीन बाग़ में आम जनमानस को क्यों परेशान किया गया? विकिपीडिया पर लिखा गया है कि ये CAA विरोधी आंदोलन ‘महिला उत्पीड़न विरोधी, लोकतंत्र समर्थक, तानाशाही विरोधी और गरीबी-बेरोजगार विरोधी’ – सबका आंदोलन बन गया। क्या ये समस्याएँ मोदी सरकार लेकर आई? ये तो पहले से थीं, जिन्हें मोदी सरकार ने कम किया।

जिनके नेताओं ने किया दंगा, उनसे नहीं पूछे गए सवाल

कपिल मिश्रा का नाम चिल्लाने वालों ने कभी भी आम आदमी पार्टी से सवाल नहीं पूछा, जिसके एक तत्कालीन पार्षद को ही दंगा का मुख्य साजिशकर्ता पाया गया। किसी ने इशरत जहाँ से सवाल नहीं पूछा, जो कॉन्ग्रेस की पार्षद हुआ करती थीं। कॉन्ग्रेस और AAP की जगह उलटा भाजपा को निशाना बनाया गया। विभिन्न स्रोतों पर आपको इन दोनों दलों के नेताओं के बयानों के हवाले से बताया जाएगा कि कैसे दोषी भाजपा नेता ही थे।

दिल्ली को अब भी सावधान रहने की ज़रूरत है। यहाँ का मुख्यमंत्री एक तरह से खुलेआम लोगों से कहता है कि यहाँ आकर आंदोलन करो। उपद्रवियों को दाना-पानी मुहैया कराया जाता है। चूँकि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है और भाजपा के अध्यक्ष रहे अमित शाह केंद्रीय गृहमंत्री हैं, इसीलिए सारा नाटक यहीं चलता है। जो CAA विरोधी थे, वही दिल्ली के दंगाई हैं और अब वही कृषि कानूनों के नाम पर हिंसा का खेल खेल रहे।

गुजरात राज्य सभा उपचुनाव में भाजपा ने जीतीं दोनों सीटें, कॉन्ग्रेस ने गँवाई अहमद पटेल की खाली सीट

गुजरात से राज्यसभा की दोनों सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमा लिया है। भाजपा के दिनेशचंद्र जमलभाई अननवदिया और रामभाई हरजीभाई मोकरिया ने जीत हासिल की है। गुजरात की ये दोनों सीटें कॉन्ग्रेस के अहमद पटेल और भाजपा के अभय गणपतराय भारद्वाज के निधन के बाद खाली हो गई थीं।

राज्यसभा सांसद रामभाई मोकारिया मारुति कोरियर्स के संस्थापक सीएमडी हैं और राजकोट में भाजपा के पुराने कार्यकर्ता रहे हैं। रामभाई 1974 से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य थे और बाद में 1978 में जनसंघ में शामिल हो गए। तब से वह भाजपा के साथ हैं। मोकारिया ब्राह्मण समुदाय से हैं।

साभार: Twitter

राज्यसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस को झटका लगा है। कॉन्ग्रेस के हिस्से की एक सीट भी बीजेपी के पास चली गई। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और सोनिया गाँधी के खास अहमद पटेल का पिछले साल 25 नवंबर को निधन हो गया था। उनके निधन के बाद ही ये सीट खाली हो गई थी। वे 2017 के चुनाव में राज्यसभा के लिए चुने गए थे। उनका कार्यकाल अगस्त 2023 तक था। वे पाँच बार राज्यसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। वहीं भाजपा के अभय भारद्वाज का निधन एक दिसंबर को हुआ था।

गौरतलब है कि 8 अगस्त 2017, कॉन्ग्रेस ने गुजरात में अपने नेता अहमद पटेल की राज्यसभा सीट को बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। राज्य में तीन सीटों पर दोबारा चुनाव होने थे और दावेदार 4 थे। यही वो समय था जब गुजरात 1996 के बाद पहली दफा राज्यसभा चुनावों को देख रहा था क्योंकि इससे पहले हर राज्यसभा चुनाव निर्विरोध होता आ रहा था।

उस साल दो सीटों पर अमित शाह और स्मृति ईरानी की जीत सुनिश्चित थी, लेकिन तीसरी सीट के लिए भाजपा ने गुजरात में कॉन्ग्रेस के अहमद पटेल के सामने कॉन्ग्रेस के ही पूर्व चीफ व्हिप बलवंत सिंह राजपूत को उतार दिया था।

चुनावों के लिए चली गई चाल का ड्रामा मतदान के बाद भी आधी रात तक चला। कॉन्ग्रेस ने अपना सारा पैसा, सारी ताकत एक राज्यसभा सीट को बचाने में लगा दिया। इस चुनाव में अहमद पटेल तो जीत गए लेकिन कॉन्ग्रेस राज्य को हार गई। अब कॉन्ग्रेस के हाथ से वो सीट भी जाती रही।

कॉन्ग्रेस MLA के ठिकानों पर IT रेड में बरामद हुए ₹8.10 करोड़ कैश, 100 करोड़ के हेरा-फेरी के सबूत

आयकर विभाग (Income Tax) की टीमें बीते 3 दिनों से मध्य प्रदेश के बैतूल से कॉन्ग्रेस विधायक निलय डागा के अलग-अलग राज्यों में स्थित ठिकानों पर छापेमारी अभियान चला रही थीं। कॉन्ग्रेस विधायक के ठिकाने मध्य प्रदेश के अलावा भी कई प्रदेशों में मौजूद हैं, जिनमें से एक है महाराष्ट्र का सोलापुर। आयकर विभाग ने कॉन्ग्रेस विधायक के उस ठिकाने से 7.5 करोड़ रुपए नगद बरामद किए हैं। आयकर विभाग की टीमें शनिवार (20 फरवरी 2021) को कॉन्ग्रेस विधायक निलय डागा के यहाँ पहुँची थीं, तभी से इनके तमाम ठिकानों पर छापेमारी जारी है। 

दरअसल, रविवार को कॉन्ग्रेस विधायक के महाराष्ट्र स्थित सोलापुर ठिकाने पर छापा मारा गया था। वहाँ से इतनी करेंसी बरामद की गई कि अधिकारियों को नोट गिनने की मशीन लगानी पड़ी। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ वहाँ से लगभग 7.5 करोड़ रुपए नगद बरामद किए गए थे। इसके अलावा छापे के दौरान वहाँ मौजूद एक कर्मचारी बैग के साथ भागते हुए पकड़ा गया था। बैग नोटों से भरा हुआ था, खोजबीन के दौरान इसी ठिकाने से नोटों से भरे कई बैग बरामद किए गए। कार्रवाई के बाद आयकर अधिकारियों ने निलय डागा से पूछताछ की और उतनी राशि का कोई स्रोत नहीं बता सके। नतीजतन आयकर विभाग ने रकम जब्त कर ली। 

इसके पहले हुई छापेमारी की कार्रवाई में कॉन्ग्रेस विधायक के बैतूल समेत अन्य ठिकानों से 60 लाख रुपए मिले थे। ये और सोलापुर में बरामद किए गए रुपए मिला कर कुल राशि 8.10 करोड़ हो चुकी है। आयकर विभाग द्वारा जब्त की गई राशि इतनी ज़्यादा थी कि रविवार (21 फरवरी 2021) होने के बावजूद इन रुपयों को जमा कराने के लिए सोलापुर बैंक की दो शाखाओं को विशेष रूप से खुलवाया गया। आयकर विभाग की भोपाल शाखा द्वारा मारे गए छापों में पहली बार इतनी भारी मात्रा में नगद बरामद किया गया है। 

रिपोर्ट्स में यहाँ तक दावा किया गया है कि कॉन्ग्रेस विधायाक निलय डागा और उनके भाइयों का कोलकाता की 24 कंपनियों से फर्जी लेनदेन जारी था। इसके पीछे की मूल वजह टैक्स की चोरी बताई जा रही है, बरामद दस्तावेज़ों के मुताबिक़ डागा बंधुओं ने इन कंपनियों से लगभग 100 करोड़ रुपए तक का लेन देन किया था। इसके अलावा उन्होंने कई बड़े भुगतान नगद रूप से किए हैं। छापेमारी के दौरान आयकर विभाग के अधिकारियों को इस बात के सबूत मिले हैं कि निलय डागा की कंपनियों ने हवाला के ज़रिए विदेशों में भी रुपयों का लेन- देन किया।       

इसके पहले 2019 में आम चुनावों के दौरान मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के सहयोगियों के ठिकानों पर छापा पड़ा था। इस छापे में लगभग 12 करोड़ रुपए की राशि बरामद की गई थी लेकिन यह छापा दिल्ली आयकर विभाग ने मारा था। इस छापे के बाद भी कॉन्ग्रेस की काफी बड़े पैमाने पर किरकिरी हुई थी।

टूलकिट केस में दिशा रवि को कोर्ट ने 1 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा, आमने-सामने बिठाकर होगी पूछताछ

टूलकिट केस में दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार (फरवरी 22, 2021) जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस ने दिशा रवि की 5 दिन की अतिरिक्त पुलिस हिरासत की माँग की थी।

पुलिस टूलकिट केस में अन्य आरोपितों के साथ आमने-सामने बैठाकर दिशा रवि से पूछताछ करना चाहती है। आज ही दिल्ली पुलिस ने वकील निकिता जैकब और इंजीनियर शांतनु मुलुक से पूछताछ की है। अधिकारी ने बताया, ‘‘जैकब और मुलुक को जाँच में शामिल होने के लिए नोटिस दिए गए थे और टूलकिट मामले में उनकी कथित भूमिका के संबंध में फिलहाल उनसे पूछताछ की जा रही है।’’

दिल्ली पुलिस की तरफ से अदालत में पेश हुए अतिरिक्त लोक अभियोजक (APP) ने दावा किया कि पूछताछ में दिशा ने अपने ऊपर लगे सारे आरोप अन्य आरोपित निकिता जैकब और शांतनु मुलुक पर डाल दिया। केस के सिलसिले में सोमवार को शांतनु और निकिता दिल्ली पुलिस के सामने पेश हुए। 

अभियोजक पक्ष ने अदालत को बताया, “मुझे अन्य आरोपितों, निकिता और शांतनु के साथ आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करना है। वे आज (सोमवार) सुबह दिल्ली आए।” एपीपी ने कहा, “निकिता की ट्रांजिट ज़मानत तीन सप्ताह में और शांतनु की दस दिनों में समाप्त होने के सात दिन और हैं। उन दो आरोपितों को सुरक्षा दी गई है इसलिए हम यहाँ असहाय हैं।”

उन्होंने कहा, “जूम पर बैठक में भाग लेने वाले 60-70 और लोग थे। हम मामले की जाँच कर रहे हैं और हमें इसकी जाँच के लिए साइबर विशेषज्ञों की भी जरूरत है। जब तक हम उससे पूछताछ नहीं कर लेते, हम सबूतों को नजरअंदाज नहीं कर सकते।”

बता दें कि दिल्ली पुलिस किसानों के आंदोलन के समर्थन में पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग द्वारा साझा किए गए ‘‘टूलकिट गूगल डॉक्यूमेंट’’ की जाँच कर रही है। दिशा रवि को शुक्रवार (फरवरी 19, 2021) को अदालत ने तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। न्यायिक हिरासत की अवधि खत्म होने के बाद आज (फरवरी 22, 2021) दिशा को अदालत में पेश किया गया। इससे पहले अदालत ने 14 फरवरी को दिशा को पाँच दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया था। दिल्ली पुलिस ने  जलवायु कार्यकर्ता को 13 फरवरी को बेंगलुरू से गिरफ्तार किया था।

दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया था कि दिशा ने टूलकिट को एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर शेयर किया फिर सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई गई। उन्होंने कहा कि टूलकिट को विश्वस्तर पर फैलाने की योजना थी और इसमें गलत जानकारियाँ दी गईं थीं। इस टूलकिट का संबंध खालिस्तानी संगठन Poetic Justice Foundation (पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन) से है और इस टूलकिट को चार फरवरी को बनाया गया था। टूलकिट में ‘भारत की पहचान योग और चाय’ की छवि को नुकसान पहुँचाने से लेकर दूतावासों को भी नुकसान पहुँचाने की बात है। इससे भारत की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की गई।

Air vistara देता है सिर्फ हलाल मीट, कहा- यही नियम: BJP नेता गौरव भाटिया ने फिर आगे बढ़ाया झटका-हलाल डिबेट

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने सोमवार (फरवरी 22, 2021) को एयर विस्तारा से हवाई यात्रा के बाद हलाल बनाम झटका मीट की बहस को दोबारा चर्चा में ला दिया। उन्होंने यात्रा के दौरान हुआ वाकया साझा करते हुए बताया कि एयर विस्तारा में सिर्फ़ और सिर्फ़ हलाल मीट ही सर्व किया जाता है और ये उन्हें स्वयं वहाँ के कर्मचारियों ने बताया है।

उन्होंने बताया कि सोमवार को यात्रा के दौरान जब उनसे खाने के लिए पूछा गया तो उन्होंने विमान में माँसाहारी भोजन के बारे में जानकारी ली कि वह झटका है या हलाल। जिसके जवाब में उन्हें बताया गया कि वे केवल हलाल मीट ही यात्रियों को परोसते हैं क्योंकि कंपनी का यही नियम है।

अब भाटिया ने अपने ट्विटर से सवाल किया है कि क्या नियम भेदभाव करने वाला नहीं है। उनका क्या जो विमान में झटका मीट खाना चाहते हैं? दूसरे की भावनाओं का सम्मान क्यों नहीं किया जा रहा है?  

भाजपा नेता ने इस मामले में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी से ध्यान देने और इस गलत काम को सुधारने का अनुरोध किया है।

बता दें कि पिछले कुछ समय से हलाल बनाम झटका का मुद्दा गरमाया हुआ है। बीते दिनों पहले कई लोगों ने मीट के उत्पादों से हलाल शब्द हटाने के लिए एक ऑनलाइन अभियान शुरू किया था, जिसके परिणामस्वरूप एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथारिटी (एपीईडीए) ने अपने ‘रेड मीट मैन्युअल’ से हलाल शब्द हटा दिया। 

इस कदम पर एआईएमआईएम समेत कई संगठनों ने आपत्ति जाहिर की थी। एआईएमआईएम ने कहा था, “मुस्लिम देश से लेकर जहाँ-जहाँ मुसलमान हैं वे इस गोश्त को खाने से परहेज करेंगे। मीट एक्सपोर्ट का बिजनेस डैमेज होगा और मीट के व्यापारियों को इससे नुकसान होगा।”

माँ दुर्गा की पूजा से रोकने वालों को जनता माफ नहीं करेगी, बना लिया परिवर्तन का मन: हुगली में PM मोदी

असम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के हुगली पहुँचे। यहाँ पीएम मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि बंगल ने परिवर्तन का मन बना लिया है। यहाँ का जन उत्साह बड़ा संदेश दे रहा है। विकसित देशों ने सही समय पर इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाया, अब बंगाल में भी इस तरह की तैयारी है। इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया जा रहा है।

पीएम ने कहा कि जितनी भी सरकारें पश्चिम बंगाल में रहीं, उन्होंने इस ऐतिहासिक क्षेत्र को अपने ही हाल में छोड़ दिया। यहाँ के इंफ्रास्ट्रक्चर को, यहाँ की धरोहर को बेहाल होने दिया गया। वंदे मातरम भवन जहाँ बंकिमचंद जी 5 साल रहे, उसका हाल बेहाल है।

इंफ्रास्ट्रक्चर का उपहार देने आया हूँ- पीएम मोदी

हुगली की रैली में नरेंद्र मोदी ने कहा, “आज इस वीर धरा से पश्चिम बंगाल अपने तेज विकास के संकल्प को सिद्ध करने के लिए एक बड़ा कदम उठा रहा है। पिछली बार आपको गैस कनेक्टिविटी का, इंफ्रास्ट्रक्चर का उपहार देने आया था। आज रेल और मेट्रो कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण काम शुरू होने जा रहे हैं।”

पीएम मोदी ने किया महापुरुषों का जिक्र

पीएम मोदी ने इस दौरान महर्षि अरविंदो घोष, विपिन बिहारी, रामकृष्ण परमहंस जैसे आदर्श पुरुषों का भी जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि अब हमें और देर नहीं करनी है। हमें एक पल भी रुकना नहीं है। हमें एक पल भी गँवाना नहीं है। इसी सोच के साथ आज देश में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर अभूतपूर्व जोर दिया जा रहा है, अभूतपूर्व निवेश किया जा रहा है।

पीएम मोदी ने किया दुर्गा पूजा का जिक्र

पीएम मोदी ने कहा कि यहाँ पर तुष्टिकरण को बल दिया जा रहा है। पीएम ने इस दौरान दुर्गापूजा और विसर्जन का भी जिक्र किया। ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा कि तुष्टीकरण की राजनीतिक बंगाल के लोगों को दुर्गा पूजा से रोकती है।

उन्होंने कहा कि बंगाल के लोग अपनी संस्कृति का अपमान करने वाले ऐसे लोगों को कभी माफ नहीं करेंगे। बंगाल में अगर बीजेपी की सरकार बनेगी तो हर बंगालवासी अपनी संस्कृति का गौरवगान कर सकेगा। कोई उसे डरा नहीं पाएगा।

उन्होंने कहा कि माँ माटी मानुष की बात करने वाले लोग बंगाल के विकास के सामने दीवार बनकर खड़े हो गए हैं। टोलेबाजों ने प्रदेश का विकास रोक रखा है। पीएम मोदी ने टीएमसी पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ताधारी पार्टी के नेताओं की शान-ओ-शौकत बढ़ती जा रही है और लोग गरीब होते जा रहे हैं। बंगाल के लाखों गरीब किसान सम्मान निधि, आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से वंचित हैं।

उन्होंने कहा कि विकास कार्यों को कैसे रोका जाए, इसका एक और उदाहरण है। जन जीवन मिशन चल रहा है। गाँवों तक हर व्यक्ति को नल से जल पहुँचाने का कार्य किया जा रहा है। ताकि माताओं व बहनों को पानी के लिए दूर न जाना पड़े, प्रदूषित पानी बच्चों को नहीं पीना पड़े।

देश में अभियान चलने के बावजूद, पश्चिम बंगाल में इसे नहीं होने दिया जा रहा है। तीन करोड़ से अधिक लोगों को देश भर में नल से जल पहुँचा है। केंद्र सरकार ने पूरा जोर लगाया, लेकिन अब तक पौन दो करोड़ घरों में से महज नौ लाख घरों में ही पश्चिम बंगाल में नल से जल पहुँच सका है।

इससे पहले प्रधानमंत्री ने असम के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि नीति सही हो, नीयत साफ हो तो नियति भी बदलती है। आज देश में जो गैस पाइपलाइन का नेटवर्क तैयार हो रहा है, देश के हर गाँव तक ऑप्टिकल फाइबर बिछाया जा रहा है, हर घर जल पहुँचाने के लिए पाइप लगाया जा रहा है, वो भारत माँ की नई भाग्य रेखाएँ हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भर बनते भारत के लिए लगातार अपने सामर्थ्य, अपनी क्षमताओं में भी वृद्धि करना आवश्यक है। बीते वर्षों में हमने भारत में ही, रिफाइनिंग और इमरजेंसी के लिए ऑयल स्टोरेज कैपेसिटी को काफी ज्यादा बढ़ाया है।

उन्होंने कहा कि इन सारे प्रोजेक्ट्स से असम और नॉर्थ ईस्ट में लोगों का जीवन आसान होगा और नौजवानों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। जब किसी व्यक्ति को उसकी मूलभूत सुविधाएँ मिलती हैं, तो उसका आत्मविश्वास भी बढ़ता है। बढ़ता हुआ ये आत्मविश्वास क्षेत्र का भी और देश का भी विकास करता है।