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महिला ने ब्राह्मण व्यक्ति पर लगाया था रेप का झूठा आरोप: SC/ST एक्ट में 20 साल की सज़ा के बाद हाईकोर्ट ने बताया निर्दोष

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐसे व्यक्ति को निर्दोष करार दिया है, जो पिछले 20 वर्षों से जेल में कैद था। व्यक्ति को बलात्कार के आरोप और अनुसूचित जाति/ जनजाति अधिनियम (एससीएसटी एक्ट) के तहत गिरफ्तार किया गया था। हाईकोर्ट ने आरोपित की रिहाई की बात कहते हुए मामले पर तल्ख़ टिप्पणी भी की है। हाईकोर्ट के मुताबिक़ दुराचार का आरोप साबित नहीं हो पाया। मेडिकल रिपोर्ट में ज़बरदस्ती के कोई सबूत नहीं मिले हैं। मामले की रिपोर्ट भी घटना के तीन दिन बाद लिखाई गई थी। 

इसके बाद हाईकोर्ट ने सरकार के रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आजीवन कारावास की सज़ा भुगत रहे कैदियों की 14 साल बाद रिहाई पर विचार न करना दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को 14 साल से जेल में बंद कैदियों की रिहाई क़ानून के क़ानून का पालन चाहिए। यह आदेश न्यायाधीश जेके ठाकुर और न्यायाधीश गौतम चौधरी की खंडपीठ ने सुनाया है। उन्होंने यह आदेश ललितपुर के विष्णु की जेल अपील को स्वीकार करते हुए सुनाया है। 

खंडपीठ ने आदेश सुनाते हुए कहा, “हमें इस बात से निराशा है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 432 और 433 के तहत राज्य और केंद्र सरकार को अधिकार है कि वह 10 से 14 साल की सज़ा भुगतने के बाद आरोपित की रिहाई पर विचार करे। इसके अलावा संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को मिली शक्तियों का भी इस्तेमाल नहीं किया गया, हालाँकि, सज़ा कम करने के मामले में तमाम पाबंदियाँ भी हैं। इस मामले में विचार किया जा सकता था लेकिन नहीं किया गया। इस मामले को तथ्यात्मक दृष्टिकोण से देखने पर पता चलता है कि सरकार ने इस मामले में जेल मैनुअल के मुताबिक़ कार्रवाई की। यह भी देखा जा सकता है कि अपील करने वाले का मामला इतना भी संगीन नहीं था कि इस पर विचार ही नहीं किया जाए।” 

अदालत का फैसला उस मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर सुनाया गया था जिसमें ये जानकारी मौजूद थी कि पीड़िता के साथ ज़बरदस्ती के कोई सबूत नहीं मिले थे। जो कि उस समय 5 महीने की गर्भवती थी। इसके अलावा उसने पूछताछ में ऐसे कई बयान दिए थे जिससे यह स्पष्ट हो गया कि वह ‘सटीक चश्मदीद’ नहीं है। हाईकोर्ट ने फैसले में यह भी कहा, “पीड़िता के ससुर ने कहा था कि सभी पक्षों ने पंचायत बुलाई थी। लेकिन इसका कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है कि पंचायत में कौन कौन बुलाया गया था। पाँच महीने की गर्भवती महिला के साथ किसी भी तरह की ज़बरदस्ती की जाती है तो उसे चोट लगना स्वाभाविक है। लेकिन पीड़िता के शरीर पर इस तरह की कोई चोट मौजूद नहीं थी।” 

रिपोर्ट के मुताबिक़ इस मामले में पीड़ित पक्ष का आरोप था कि रामेश्वर तिवारी के बेटे विष्णु ने अनुसूचित जाति की महिला के साथ बलात्कार किया था। लगाए गए आरोपों के मुताबिक़ विष्णु ने वारदात को अंजाम देने के बाद महिला को इस बारे में किसी से बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी थी। हाईकोर्ट ने पूरे प्रकरण में यह भी पाया कि दोनों परिवारों के बीच ज़मीन का विवाद भी था। अंत में अदालत का कहना था, “हमारे निरीक्षण के अनुसार मेडिकल साक्ष्यों से स्पष्ट है कि डॉक्टर्स को जाँच के दौरान स्पर्म नहीं मिला था। इसके अलावा जबरन ज्यादती के सबूत भी नहीं मिले हैं। इसके अलावा महिला को भी किसी तरह की चोट नहीं आई थी।”        

62 वर्षीय सांसद मौलाना सलाउद्दीन अयूबी ने 14 साल की नाबालिग से किया निकाह, पुलिस को दिए गए जाँच के आदेश

एक तरफ पूरी दुनिया में बाल विवाह को लेकर जागरूकता फैलाई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हैरान करने वाली घटना सामने आई है। पड़ोसी मुल्क के 62 वर्षीय सांसद मौलाना सलाउद्दीन अयूबी ने 14 साल की नाबालिग बच्ची से निकाह कर लिया। सलाउद्दीन बलूचिस्तान के चित्राल से जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पार्टी का सांसद है, रिपोर्ट्स के मुताबिक़ एक एनजीओ ने इस निकाह की जानकारी सार्वजनिक की। फ़िलहाल, सरकार ने पुलिस को इस मामले की जाँच के आदेश दे दिए हैं। 

निकाह की घटना कुछ समय पुरानी है लेकिन अभी चर्चा में आई है। पाकिस्तान में निकाह के क़ानून की बात करें तो लड़कियों की शादी की उम्र 16 साल है। इससे कम उम्र में शादी होने पर उसे आपराधिक माना जाता है और सज़ा का प्रावधान भी है। मौलाना अयूबी, मौलाना फजल-उर-रहमान की पार्टी से सांसद है और रहमान पाकिस्तान डेमोक्रेटिक फ्रंट का नेता है। ये फ्रंट पाकिस्तान में इमरान सरकार के खिलाफ़ अभियान चला रहा है। 

‘द डॉन’ की रिपोर्ट में बताया गया है कि बच्ची के स्कूल ने उसका जन्म प्रमाणपत्र मीडिया के सामने पेश किया था। जिसमें नाबालिग की जन्म की तिथि 28 अक्टूबर 2006 बताई गई है। इसके बाद एनजीओ ने इस मामले की शिकायत पुलिस से की, पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। घटना पिछले साल की बताई जा रही है, इससे जुड़ी तमाम ख़बरें सामने आई थीं लेकिन उस वक्त सारी जानकारी की पुष्टि नहीं हो पाई थी। न तो मौलाना सलाउद्दीन ने इस पर कुछ कहा था और न ही नाबालिग पीड़िता के परिवार वालों ने। 

चित्राल पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर सज्जाद ने शिकायत दर्ज होने की पुष्टि की है लेकिन एफ़आईआर की बात अभी तक स्पष्ट नहीं है। घटना की शिकायत मिलने पर पुलिस पीड़िता के घर पहुँची, पूछताछ में उसके पिता ने अपनी बेटी के निकाह की बात को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा मेरी बेटी की शादी नहीं हुई है। दूसरी तरफ पुलिस के डीपीओ का ये भी कहना है कि नाबालिग के पिता ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वह अपनी बेटी को सांसद अयूबी के पास कभी नहीं भेजेंगे।   

कृषि कानूनों के खिलाफ जर्मनी में कॉन्ग्रेस के विरोध प्रदर्शन में फहराए गए पाकिस्तानी झंडे: BJP का दावा

मुंबई के बीजेपी प्रवक्ता सुरेश नखुआ ने आरोप लगाया है कि जर्मनी में इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस द्वारा नए भारतीय कृषि कानूनों के विरोध में आयोजित प्रदर्शन में पाकिस्तानी झंडा फहराया गया था। यह कार्यक्रम दिसंबर 2020 के महीने में आयोजित किया गया था।

सुरेश नखुआ ने राज शर्मा के नाम का उल्लेख किया था, जो कथित रूप से इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस के एक पदाधिकारी हैं। नखुआ ने यह भी कहा था कि IOC ने हाल ही में ‘किसान विरोध प्रदर्शन’ के लिए 1 करोड़ रुपए दान किए थे।

इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस का दावा है कि उनके सदस्य उस समय मौजूद नहीं थे जब पाकिस्तानी झंडा फहराया गया था। वो इससे पहले ही वे वहाँ से चले गए थे। हालाँकि, नखुआ का दावा है कि उनके पास इसका वीडियो सबूत है, जिसे वह जल्द ही जारी करेंगे।

‘किसान विरोध प्रदर्शन’ ने भारतीय राष्ट्रीय हितों को कमजोर करने और विदेशों में भारत की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए दुनिया भर में भारत को बदनाम करने का काम किया।

ग्रेटा थनबर्ग द्वारा साझा किए गए टूलकिट ने भारत के खिलाफ वैश्विक अभियान के षणयंत्रों का खुलासा किया था। पॉपस्टार रिहाना ने एक ट्वीट भी किया था, जिसका कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने हालिया रैली में समर्थन किया था।

दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर टूलकिट के बारे में जानकारी देते हुए बताया था कि दिशा ने टूलकिट को एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर शेयर किया फिर सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई गई। उन्होंने कहा कि टूलकिट को विश्वस्तर पर फैलाने की योजना थी और इसमें गलत जानकारियाँ दी गईं थीं।

इस टूलकिट का संबंध खालिस्तानी संगठन Poetic Justice Foundation (पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन) से है और इस टूलकिट को चार फरवरी को बनाया गया था। टूलकिट में ‘भारत की पहचान योग और चाय’ की छवि को नुकसान पहुँचाने से लेकर दूतावासों को भी नुकसान पहुँचाने की बात है। इससे भारत की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की गई।

टूलकिट केस: दिशा रवि को पटियाला हाउस कोर्ट से मिली जमानत, भरना होगा एक-एक लाख के दो मुचलके

‘टूलकिट गूगल डॉक्यूमेंट’ मामले में दिशा रवि को पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत मिल गई है। दिशा को एक-एक लाख रुपए के दो मुचलके पर जमानत दी गई है। दिशा रवि की जमानत को लेकर आज पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई हुई, इसके बाद दिशा रवि को बेल देने का फैसला सुनाया गया।

इससे पहले अदालत ने उसको 10 दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया था। बाद में दिल्ली पुलिस ने अदालत से और रिमांड की अपील की थी, जिसमें अदालत ने उसको एक दिन की रिमांड पर भेजा था। उस पर आरोप है कि किसान आंदोलन में खालिस्तानी कनेक्शन में वो भी शामिल थी।

इससे पहले पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि किसानों के आंदोलन के समर्थन को लेकर तैयार की गई ‘टूलकिट गूगल डॉक्यूमेंट’ की जाँच के मामले में मंगलवार को दिल्ली पुलिस के साइबर सेल के कार्यालय पहुँची। पुलिस ने आरोप लगाया था कि कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के नाम पर भारत में हिंसा और अशांति फैलाने की साजिश के तहत यह टूलकिट तैयार की गई। केंद्र के तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की माँग को लेकर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

पुलिस ने कहा था कि दिशा का मामले में अन्य आरोपितों निकिता जैकब और शांतनु मुलुक के साथ आमना-सामना कराना है। जैकब और मुलुक सोमवार को जाँच में शामिल हुए थे। द्वारका में दिल्ली पुलिस के साइबर प्रकोष्ठ के कार्यालय में उनसे पूछताछ की गई।

बता दें कि दिशा रवि को किसान आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने के लिए टूलकिट बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली पुलिस का दावा है कि इसके पीछे खालिस्तान से जुड़े संगठनों की साजिश थी। पुलिस ने बताया कि 17 और 18 जनवरी को भी जूम मीटिंग की गई और 23 को टूलकिट तैयार हुआ।

दिल्ली पुलिस का दावा है कि कनाडा के पोएटिक जस्टिक फाउंडेशन से जुड़ा एमओ धालीवाल भारत में किसानों की आड़ में माहौल खराब करने की फिराक में था। अगर वो सीधे कोई कार्रवाई करता तो एक्सपोज़ हो जाता इसलिए उसने भारत मे कुछ चेहरों का सहारा लिया। दिशा रवि ने टूलकिट में एडिट किया है। इनका सहयोगी शान्तनु दिल्ली आया था और 20 से 27 तक दिल्ली में था।

दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया कि दिशा की तरफ से सबूतों को मिटाया गया है। दिशा ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ की है, 60 से 70 लोग Zoom मीटिंग में थे जिसमें एमओ धालीवाल शामिल था, दिशा रवि को तमाम हो रही चीजों की जानकारी थी। उनको यह पता था कि किस प्रकार लोगों को भ्रमित किया जा सकता है। दिशा ने ही टेलीग्राम के जरिए ग्रेटा थनबर्ग को टूलकिट भेजा था।

चाट बेचता है बागपत का ‘आइंस्टाइन अंकल’, बताया क्यों हुई थी मारपीट: UP पुलिस ने ‘अपने तरीके से’ शांत कराया मामला

उत्तर प्रदेश के बागपत में सोमवार (22 फरवरी 2021) को मारपीट की एक घटना हुई थी। दो चाट की दुकान चलाने वाले गुटों के बीच जम कर लाठी डंडे चले थे। इन चाट स्टॉल वालों ने एक दूसरों को पाइप और डंडों से जमकर पीटा था। इस घटना का एक वीडियो कल से ही सोशल मीडिया पर चर्चा में बना हुआ था। अब उस वीडियो में नज़र आने वाले एक व्यक्ति ने मारपीट के पीछे की वजह बताई है। 

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए व्यक्ति ने अपना नाम हरिंदर बताया। वह चाट की दुकान लगाता है और जिनसे उसकी लड़ाई हुई उन्होंने दो महीने पहले वहीं पर चाट की दुकान शुरू की थी। हरिंदर के मुताबिक़, चाट की नई दुकान खोलने वालों ने उसके ग्राहकों को ‘छीनने का’ प्रयास किया और उनसे ये भी कहा कि हरिंदर एक रात पुराने बासी चाट खिलाता है। इसकी वजह से हरिंदर के ग्राहक चाट खाने से मना कर देते थे और नाराज़ होकर चले जाते थे। 

सोमवार को हरिंदर और अन्य चाट वालों के बीच हुई मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। वीडियो में तमाम लोग एक दूसरे को लाठी डंडों से पीट रहे थे और बाज़ार में मौजूद लोग तमाशबीन बने हुए थे। इस घटना के वीडियो पर लोगों ने खूब मीम्स बनाए। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने इसमें शामिल 8 लोगों को गिरफ्तार किया। हरिंदर के लुक्स की वजह से उन्हें लोग ‘आइंस्टाइन अंकल’ भी कह रहे हैं।

स्मृति ईरानी ने निभाया अमेठी की जनता से अपना वादा, अब नहीं रहेंगी किराए के मकान में: ग्रामीणों ने कहा- हमारे भाग्य की बात!

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अमेठी में अपने आशियाने की नींव रख दी है, उन्होंने अमेठी की जनता से वादा किया था कि वह अमेठी में अपना घर बनाएँगी, इसे ‘रिमोट’ से नहीं चलाएँगी और सारे काम उस घर से ही करेंगी। इस वादे को पूरा करने के लिए स्मृति ईरानी ने शहर के गौरीगंज तहसील स्थित उप निबंधक कार्यालय में 11 बिस्वा ज़मीन की रजिस्ट्री कराई 

2019 के आम चुनावों के ठीक पहले केंद्रीय मंत्री ने अमेठी स्थित गौरीगंज के जामो रोड पर किराए का मकान लिया था। यही मकान उनका क्षेत्रीय आवास और सांसद कार्यालय भी था, राहुल गाँधी को चुनाव में हराने के बाद से इस घर में उनका आना जाना लगा रहता था। इस मकान में ही बैठ कर भाजपा सांसद के स्थानीय प्रतिनिधि जन सुनवाई करते हैं। उनकी ज़मीन शहर से कुछ किलोमीटर दूर सराय भागमानी गाँव में मौजूद है। उन्होंने सोमवार (22 फरवरी 2021) को 11 बिस्वा यानी लगभग 15000 स्क्वायर फीट ज़मीन की रजिस्ट्री कराई है। 

इस ज़मीन की कीमत लगभग 12 लाख रुपए आँकी जा रही है। ज़मीन के सारे दस्तावेज़ लिखे जा चुके हैं। इसके बाद मीडियाकर्मियों से बात करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा, “अमेठी के लोग इस बात की कल्पना करते थे कि क्या उनका सांसद घर बना कर उनके बीच रहेगा? मैंने 2019 के आम चुनावों के दौरान अमेठी के लोगों से वादा किया था कि मैं यहाँ अपने लिए एक घर का निर्माण कराऊंगी और वहीं से काम करूँगी। इसके लिए मैंने ज़मीन की रजिस्ट्री कराई है। मैं अभी तक किराए की जगह में रह रही थी, जल्द ही यहाँ के लोगों के बीच इस का भूमि पूजन भी कराया जाएगा।” 

भाजपा सांसद के मुताबिक़ उन्होंने जो वादा किया था वो करके दिखाया। उन्होंने पूछा कि गाँधी परिवार के सदस्यों ने चुनाव जीतने के बावजूद अभी तक यहाँ घर क्यों नहीं बनाया, उन्हें जनता को इस सवाल का जवाब ज़रूर देना चाहिए। अमेठी की जनता ने उन्हें (स्मृति ईरानी) स्वीकार किया है, यहाँ के लोगों ने उनसे अपील की थी कि वो यहाँ आएँ उसकी वजह से ही यह सब हो पाया। कॉन्ग्रेस में नेता सिर्फ खुद को मज़बूत करने में जुटे रहते हैं जबकि भाजपा जनता को मज़बूत करने का प्रयास करती है, यही दोनों पार्टियों के बीच का फ़र्क है। 

दरअसल, 2014 में अमेठी से लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद स्मृति ईरानी ने अमेठी के लोगों का साथ नहीं छोड़ा। वह सक्रियता से क्षेत्र में काम करती रहीं, उन्होंने शहर के तमाम दौरे किए थे। नतीजतन 2019 के आम चुनाव में गाँधी परिवार के गढ़ माने जाने वाले अमेठी के लोगों ने स्मृति ईरानी पर भरोसा जताया था। 2019 में अमेठी से चुनाव हारने के बाद राहुल गाँधी सिर्फ एक बार यहाँ का दौरा करने के लिए आए थे। अमेठी में घर बना कर वह स्पष्ट संदेश देना चाहती हैं कि गाँधी परिवार ने सिर्फ इस जगह का फ़ायदा उठाया है इसके विपरीत वह लोगों के बीच रहने वाली हैं। 

इस पर ज़मीन की मालिक रही फूलमती के बेटे गया प्रसाद पाण्डेय का कहना है, “हमारा विकास, हमारे गाँव का विकास, हमारे क्षेत्र का विकास हो इसलिए हम स्मृति ईरानी को ज़मीन दे रहे हैं। आगे सब कुछ उन पर निर्भर करता है। हमारे क्षेत्र का जितना विकास उन्होंने (स्मृति ईरानी) किया है उतना अभी तक किसी और ने नहीं किया है। हमारे पास कुछ लोग आए और उन्होंने हमसे पूछा कि आप दीदी को ज़मीन कब देंगे? हमने कहा, हमें तो बेचना ही था अब ये तो हमारे लिए भाग्य की बात है कि ज़मीन स्मृति ईरानी ले रही हैं। इससे हमारे गाँव और हमारे क्षेत्र का विकास सुनिश्चित होगा। इसलिए हमने ज़मीन दी।”        

‘धरना स्थल खाली करो’: किसान नेताओं ने पुलिस पर लगाया बदले की कार्रवाई का आरोप, समर्थन नहीं मिलने से घबराए नेता

दिल्ली पुलिस ने अब सीमा पर आंदोलन में लगे ‘किसानों’ पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जहाँ गाजीपुर बॉर्डर पर उन्हें जगह खाली करने को कहा गया है, वहीं टिकरी बॉर्डर पर कुछ प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया गया है। ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ के नेता इसे केंद्र सरकार की ‘बदले की कार्रवाई’ बता रहे हैं और पुलिस के खिलाफ लगातार किसानों को भड़काने में लगे हुए हैं। हालाँकि, अब उन्हें समर्थन नहीं मिल रहा।

संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से नेता डॉक्टर दर्शन पाल ने बयान जारी करते हुए इस कार्रवाई को किसानों को बदनाम करने की साजिश करार दिया है। लेकिन, उन्होंने ये भी दावा कर डाला कि इस तरह की कार्रवाई से किसान आंदोलन कमजोर होने के बजाए और मजबूत ही होता जाएगा। उन्होंने दो नेताओं के समर्थकों के बीच हुई झड़प को ‘भाजपा नेताओं द्वारा किसानों से मारपीट’ करार दिया। बता दें कि मुजफ्फरनगर में भाजपा सांसद संजीव बालियान और RLD नेता जयंत चौधरी भिड़ गए थे।

‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, किसान नेताओं ने दावा किया है कि टिकरी धरने पर दिल्ली पुलिस द्वारा कुछ पोस्टर लगाए गए है जिसमें किसानों से धरना खाली करने की चेतावनी दी गई है। उनका कहना है कि इस तरह के पोस्टर प्रासंगिक नहीं है जहाँ किसान अपने मौलिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे है। दिल्ली की सीमा पर दो महीने से अधिक समय से किसान धरना देकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

गणतंत्र दिवस के दिन 26 जनवरी को हिंसा होने के बाद किसान संगठनों में फूट पड़ गई थी और उनमें से कई आंदोलन में अलग हो गए थे। किसान नेताओं का कहना है कि वो पुलिस के इस कदम का विरोध करते हैं और किसानों से अपील करते है कि शांतिपूर्ण विरोध जारी रखे। इस तरह की धमकियाँ और चेतावनी से किसान आंदोलन को खत्म करने की साजिशों का सख्त विरोध किया जाएगा व इससे किसान संघर्ष को और मजबूती मिलेगी। 

उधर पंजाब के किसान नेताओं ने आरोप लगाया था कि पुलिस किसानों को परेशान करने के लिए झूठे नोटिस भेज रही है। साथ ही सभी किसानों से अपील की गई कि वो दिल्ली पुलिस के साथ बिलकुल भी सहयोग न करें। उग्रहान ने कहा था, “हमारे संगठन से किसी को भी गिरफ्तार करना बहुत मुश्किल है। अगर सरकार इस तरह कार्रवाई करती है तो ये ठीक नहीं होगा।” उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों को सब पहले से ही पता है और चुनौती दी कि दिल्ली पुलिस लोगों को गिरफ्तार कर के दिखाए।

350 बनाम 45: गुजरात पंचायत चुनाव में कॉन्ग्रेस का सूपड़ा साफ़, क्लीन स्वीप करने की ओर बढ़ रही BJP

गुजरात पंचायत चुनाव में भाजपा का क्लीन स्वीप होता हुआ दिख रहा है। खबर लिखे जाने तक पार्टी ने राजकोट म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में 78 सीटों पर विजय हासिल करने (बढ़त/जीत) की स्थित में है। वहीं कॉन्ग्रेस मात्र 2 सीटों पर आगे है। सूरत में 17 सीटें जीत कर AAP दूसरे नंबर की पार्टी बन कर उभरी है, जबकि भाजपा को 51 सीटें मिली हैं। कॉन्ग्रेस वहाँ भी खाता खोलने की बाट ही जोह रही है।

वड़ोदरा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में भी भाजपा ने 76 में से 44 सीटें जीत कर बहुमत हासिल कर लिया है। वहीं कॉन्ग्रेस को मात्र 7 सीटें मिली हैं। जामनगर में जहाँ भाजपा 40 सीटें जीत गई, कॉन्ग्रेस मात्र 5 सीटों पर अटक गई। बसपा को यहाँ 3 सीटें मिलीं। अहमदाबाद राज्य का सबसे बड़ा कॉर्पोरेशन है और वहाँ भी भाजपा ने 192 में से 60 सीटें जीत कर बहुमत की तरफ कदम बढ़ा दिया है। कॉन्ग्रेस यहाँ भी फिसड्डी है।

खबर लिखे जाने तक गुजरात के 6 म्युनिसिपल कॉर्पोरेशंस की 576 सीटों में से 418 के नतीजे आ गए थे और उनमें से 300 भाजपा ने जीत ली थी। कॉन्ग्रेस मात्र 45 पर अटकी हुई है और AAP ने 21 सीटें हासिल की है। राजकोट मुख्यमंत्री विजय रुपाणी का गृह क्षेत्र है, ऐसे में यहाँ से भाजपा की प्रतिष्ठा भी जुडी हुई थी। वहाँ कॉन्ग्रेस का सबसे बुरा प्रदर्शन रहा है। हाल ही में राज्य की दो राज्यसभा सीटें भी भाजपा के खाते में गई है।

भाजपा के दिनेशचंद्र जमलभाई अननवदिया और रामभाई हरजीभाई मोकरिया ने जीत हासिल की थी। गुजरात की ये दोनों सीटें कॉन्ग्रेस के अहमद पटेल और भाजपा के अभय गणपतराय भारद्वाज के निधन के बाद खाली हो गई थीं। राज्यसभा सांसद रामभाई मोकारिया मारुति कोरियर्स के संस्थापक सीएमडी हैं और राजकोट में भाजपा के पुराने कार्यकर्ता रहे हैं। रामभाई 1974 से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य थे और बाद में 1978 में जनसंघ में शामिल हो गए।

NIA कोर्ट में अलगाववादी आसिया अंद्राबी पर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और देशद्रोह के आरोप तय

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) कोर्ट ने कश्मीरी अलगाववादी आसिया अंद्राबी और उसके दो सहयोगियों के खिलाफ भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने, देश में आतंकी काम करने के लिए देशद्रोह में संलिप्त रहने और देश विरोधी साजिश रचने के आरोप तय किए हैं।

बता दें कि आसिया अंद्राबी अलगाववादी संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत से जुड़ी हुई है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने अंद्राबी और दुख्तरान-ए-मिल्लत की दो अन्य महिलाओं को राजद्रोह के आरोप में 5 जुलाई 2018 को गिरफ्तार किया था। आसिया अंद्राबी और उसकी सहयोगियों के खिलाफ कश्मीर में टेरर फंडिंग करने से लेकर पत्थरबाजी के लिए महिलाओं को उकसाने तक के गंभीर आरोप हैं।

पिछले दिनों एनआईए ने अलगाववादी आसिया अंद्राबी के श्रीनगर स्थित घर को अटैच किया था। आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने के कारण यूएपीए के तहत यह कार्रवाई की गई। आसिया अंद्राबी के इस घर का इस्तेमाल आतंकी संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत की गतिविधियों के लिए किया गया। अब आसिया अंद्राबी अपने इस घर को तब तक नहीं बेच सकती है, जब तक इस पूरे मामले की जाँच खत्म न हो जाए।

आसिया वही है, जिसने 2015 में गाय काटी थी, जिसका वीडियो वायरल होने के बाद उसे गिरफ्तार भी किया गया था। एजेंसी ने बताया है कि आसिया, पाक फौज में काम करने वाले एक अधिकारी के जरिए जमात-उद-दावा और लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज़ सईद के संपर्क में भी थी।

गौरतलब है कि अलगाववादी समूह की संस्थापक आसिया भारत से कश्मीर के अलगाव के लिए काम कर रही है। आसिया को राष्ट्र के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने के मामले में पिछले वर्ष जुलाई में गिरफ्तार भी किया जा चुका है।

जाँच और पूछताछ में मालूम चला था कि आसिया के कुछ रिश्तेदार दुबई और सउदी अरब में भी रहते हैं। इन लोगों ने भी आसिया को भारत में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए पैसे पहुँचाए थे। यह धन पत्थरबाजों और हुर्रियत के समर्थकों में बाँटे गए थे, जिन्होंने श्रीनगर और घाटी के अन्य हिस्सों में सरकार के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन किए। आसिया अंद्राबी के साथ ही दो सहयोगी नाहिदा नसरीन और सोफी फहमीदा फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है।

गैंगस्टर रवि पुजारी को 9 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेजा गया, बुर्के में देख लोगों ने सोशल मीडिया पर लिए मजे

अंडरवर्ल्ड डॉन रवि पुजारी को आज (फरवरी 23, 2021) ग़ज़ाली होटल फायरिंग मामले में मकोका कोर्ट में पेश किया गया। इस मामले में अदालत (MCOCA Court) ने रवि पुजारी को 9 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। रवि पुजारी पर मुंबई समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में कई मुकदमे दर्ज हैं। 

इस दौरान रवि पुजारी को बुर्के में देखा गया, जिसको लेकर लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर गैंगस्टर बुर्के में क्यों है? सोशल मीडिया यूजर्स ने इसको लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएँ दी हैं।

एक सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि अरे इसे बुर्का क्यों पहना दिया। इसके साथ ही उन्होंने हँसने वाला इमोजी शेयर किया है।

वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा कि सहानुभूति प्राप्त करने के लिए बुर्का का इस्तेमाल करना, बहुत ही विचारशील है।

एक सोशल मीडिया यूजर ने सवाल उठाया कि रवि पुजारी बुर्के में क्यों है?

वहीं मिर्ची सेठ नाम के सोशल मीडिया यूजर ने भी गैंगस्ट को बुर्के में दिखाए जाने को लेकर प्रतिक्रिया व्यक्त की। इसके साथ ही उन्होंने हँसने वाला इमोजी भी लगाया।

एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा कि ये रवि पुजारी है या दिशा रवि?

वहीं एक अन्य सोशल मीडिया यूजर ने सवाल उठाया कि उसने बुर्का क्यों पहना है? इससे बेहतर होता कि वह फेस मास्क पहन लेता।

गौरतलब है कि रवि पुजारी को करीब दो साल पहले सेनेगल में गिरफ्तार किया गया था। उसके कुछ महीनों बाद उसे भारत प्रत्यर्पित किया गया था। पहले कर्नाटक पुलिस ने उसकी कस्टडी ली थी। अब मुंबई पुलिस (Mumbai Police) को उसकी हिरासत मिली है।

मुंबई में उस पर कुल 78 केस दर्ज हैं। इनमें से 49 केसों में उसका सीधा जुड़ाव सामने आया था। मुंबई क्राइम ब्रांच एक-एक कर उसकी अलग-अलग केसों में कस्टडी लेगी। अगले कुछ महीनों तक मुंबई पुलिस के लॉकअप रहेगा। बाद में उसे जेल भेजा जाएगा। कर्नाटक में उसके खिलाफ 97 केस दर्ज हैं।

रवि पुजारी मुंबई से जुड़े जिन केसों में वॉन्टेड दिखाया गया था, उनमें से एक केस फिल्म फाइनैंसर अली मोरानी के बंगले पर हुई गोलीबारी से भी जुड़ा था। इस केस में कुछ महीने पहले रवि पुजारी के साथी ओबेद रेडियोवाला को अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। मोरानी केस के अलावा महेश भट्ट की हत्या की साजिश रचने के मामले में भी रवि पुजारी आरोपित है।