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पैदा हुआ तैमूर का भाई: 41 साल की करीना कपूर खान का दूसरा बेटा, 51 के सैफ का चौथा बच्चा

बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर खान ने एक लड़के को जन्म दिया है। शनिवार (20 फरवरी 2021) को करीना कपूर खान को ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रविवार (21 फरवरी 2021) को भोर के वक्त उन्होंने बच्चे को जन्म दिया।

इसके साथ ही सैफ अली खान एक बार फिर से पिता बन गए हैं और तैमूर बड़े भाई। सैफ अली खान और उनका पूरा परिवार इस ख़बर से काफी उत्साहित है। सैफ और करीना ने 12 अगस्त 2020 को प्रेगनेंसी के बारे में जानकारी दी थी। 

प्रेगनेंसी के दौरान करीना कपूर की तमाम तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। इसके अलावा करीना कपूर इस बीच काम करती हुई भी नज़र आई थीं, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई थी।

तैमूर के बाद ये करीना कपूर का दूसरा बच्चा है जबकि सैफ अली खान चौथी संतान के पिता बने हैं। वह खुद पैटरनीटी लीव (बच्चा सम्भालने की छुट्टी) पर थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ माँ बनने से पहले करीना कपूर से जुड़े तमाम लोगों ने उन्हें उपहार भेजे थे। 

हाल ही में करीना, सैफ और तैमूर अपने नए घर में भी शिफ्ट हुए थे। इन्होंने सोशल मीडिया पर अपने नए की तस्वीर भी साझा की थी, जो कि इनके पिछले घर से काफी बड़ा है। 

करीना कपूर खान और सैफ अली खान की शादी 2012 में हुई थी और दिसंबर 2016 में तैमूर का जन्म हुआ था। सैफ अली खान के अमृता सिंह से दो बच्चे हैं, सारा अली खान और इब्राहिम अली खान। वहीं करीना कपूर खान की आगामी फिल्मों की बात करें तो वह अद्वैत चंदन की लाल सिंह चड्ढा और करण जौहर की तख़्त में नज़र आएंगी।   

चीनी सैनिकों के मरने की खबर के बाद गालियों की बौछार, कोस रहे अपनी वामपंथी सरकार को: एक को कर लिया गिरफ्तार

गलवान में हुए खूनी संघर्ष में कई चीनी सैनिकों के मारे जाने की खबर तो आज से 8 महीने पहले ही आ गई थी, लेकिन भारत में बैठे चीन के टट्टुओं और खुद चीन ने इससे इनकार कर दिया था। अब जब पर्दा हटा है और चीन ने इस संघर्ष में मारे गए PLA (पीपल्स लिबरेशन आर्मी) के सैनिकों को सम्मान देना शुरू किया है, तो चीनी बौखला गए हैं। चीनी नागरिक भारत विरोधी गालियाँ बक रहे हैं और भारतीय दूतावास को निशाना बनाया जा रहा है।

चीन की सोशल मीडिया में भारत के खिलाफ अपशब्दों की बाढ़ आ गई है और कई घृणास्पद संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं। चीन ने स्वीकार किया है कि गलवान की झड़प में उसके 4 सैनिकों की जान गई थी और 1 रेस्क्यू के दौरान मर गया था। बीजिंग में भारतीय दूतावास है और वहाँ की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उसका हैंडल भी है, जिसे टैग कर के चीनी अपशब्दों का प्रयोग कर रहे हैं और अपनी खीझ निकाल रहे हैं।

गलवान के संघर्ष में भारत के 20 सैनिकों ने बलिदान दिया था। चीन के सैनिकों की मौत का आँकड़ा कहीं ज्यादा होने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन अब तक उसने 5 के मरने की पुष्टि की है – वो भी 8 महीने बाद। चीन के नागरिकों में इस खबर के सामने आने के बाद भारत-विरोधी भावनाएँ उबाल मार रही हैं और कट्टर चीनी लोगों को भड़काने में लगे हुए हैं। भड़काऊ संदेशों के जरिए भारत को भला-बुरा कहा जा रहा है।

गलवान में मारे गए चीनी सैनिकों की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है। साथ ही चीनी नागरिक तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। ये स्थिति इसलिए है, क्योंकि पिछले कई वर्षों में किसी चीनी नागरिक ने अपने सैनिकों के किसी दूसरे देश के साथ संघर्ष में मारे जाने की ख़बरें नहीं सुनी थी। चीन के शैक्षणिक संस्थानों में उन सैनिकों के लिए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जा रहा है और भारत विरोधी भाषण हो रहे हैं।

ऐसा नहीं है कि विरोध सिर्फ भारत का हो रहा है। चीन की सरकार और PLA भी वहाँ के युवाओं के निशाने पर है। नानजिंग से एक व्यक्ति को PLA पर टिप्पणी करने के कारण गिरफ्तार किया गया। वहाँ के लोग कम्युनिस्ट पार्टी से पूछ रहे हैं कि उसने इतने दिनों तक ये बात क्यों छिपाई? पार्टी मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने सरकार का बचाव करने का बीड़ा उठाते हुए कहा है कि उस समय सीमा पर स्थिरता के लिए ये आवश्यक था।

उसने कहा है कि हताहतों के आँकड़े छिपाए गए, क्योंकि उस समय स्थिति के अनुकूल यही था और अब उन ‘नायकों’ को सम्मान देने के लिए जानकारी सार्वजनिक की गई है। ‘ग्लोबल टाइम्स’ का कहना है कि चीनी युवाओं के लिए सैनिकों का मरना नई बात है, क्योंकि 1995 के बाद जन्में युवाओं ने इससे पहले इस तरह की खबर नहीं देखी। इस खुलासे के कारण वहाँ के लोग झल्लाए हुए हैं। चीन को दशकों में पहली बार करारा जवाब मिला है।

दरअसल यह गुस्सा सिर्फ सैनिकों को लेकर नहीं है। बाजार संबंधित भी है। भारत में चीनी एप्स के प्रतिबंधित होने के बाद उनका शेयर 29% गिरा है। जहाँ चीनी एप्स के इन्स्टॉल्स का शेयर 38% हुआ करता था, वहीं 2020 में ये मात्र 29% ही रह गया है। वहीं इसका फायदा भारतीय एप्स को मिला, जिनका वॉल्यूम 39% हो गया। इजरायल, यूएस, रूस और जर्मनी के एप्स को भी फायदा हुआ। भारत में इन चीनी एप्स के प्रतिबंधित होने से उनके बाजार पर भी बुरा असर पड़ा है।

बता दें कि चीनी सैनिकों के कब्र की तस्वीर वायरल होने के ठीक बाद AltNews ने उन सैनिकों की कब्रों का फैक्ट चेक किया था, जो गलवान घाटी संघर्ष के दौरान मारे गए थे। लेख की हेडलाइन में लिखाथाहै, “इंडिया टुडे ग्रुप, टाइम्स नाउ ने पीएलए कब्रिस्तान की पुरानी तस्वीरों को गलवान में मारे गए चीनी सैनिकों की कब्रों के रूप में दिखाया है।” इस लेख को प्रतीक सिन्हा, मोहम्मद जुबैर और उनके एक अन्य प्रोपेगेंडाबाज ने लिखा था।

कृषि कानून के विरोध में मंच पर लगा ‘लैला मैं लैला’ पर ठुमके: कॉन्ग्रेसी मंत्री आलम गीर की ‘जन आक्रोश रैली’

देश के तमाम विपक्षी दल केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि सुधार क़ानूनों का विरोध कर रहे हैं। इसी कड़ी में झारखंड के सरायकेला क्षेत्र में कॉन्ग्रेस के मंत्री आलमगीर आलम की ओर से ‘जन आक्रोश रैली’ का आयोजन किया गया था।

मंत्री आलमगीर आलम की रैली के दौरान विरोध का तो नहीं पता लेकिन मजाल है कि ठुमकों में कोई कमी रह गई हो! जिस मंच पर पार्टी के नेता और पदाधिकारी मौजूद थे, उससे ही ‘लैला मैं लैला’ गाने पर लटकों-झटकों से भरपूर विरोध किया गया। 

‘जन आक्रोश रैली’ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और पार्टी की पर्याप्त फ़ज़ीहत हुई। इस घटना पर भाजपा के तमाम नेताओं ने भी कॉन्ग्रेस की आलोचना की है।

18 फरवरी 2021 को सरायकेला के कुकड़ू हाट मैदान में पार्टी के ‘माइनॉरिटी सेल’ ने जन आक्रोशित रैली आयोजित की थी। इसमें कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता और ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने की बात कही जा रही है। 

हालाँकि वायरल होने वाले वीडियो में जिस मंच पर ठुमके लगाए जा रहे हैं, उस पर पार्टी का कोई वरिष्ठ पदाधिकारी या नेता नज़र नहीं आ रहा है। वीडियो में तमाम स्थानीय नेताओं के साथ-साथ कई महिलाएँ भी नज़र आ रही हैं।

वीडियो में चर्चित गाना ‘लैला मैं लैला, ऐसी हूँ लैला’ बज रहा है और एक युवती उस गाने पर ठुमके लगा रही है। मंच पर ही कृषि क़ानून के विरोध में ‘जन आक्रोश रैली’ का पोस्टर भी लगा हुआ है। इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर भी तमाम तरह की प्रतिक्रियाएँ देखने को मिली। 


कृषि क़ानून विरोध के ठुमके वाले वीडियो को झारखंड भाजपा ने भी ट्वीट किया। उसके साथ लिखा, “ये हैं कॉन्ग्रेस के संस्कार! जन समर्थन नहीं मिलने पर भीड़ को बुलाने के लिए इस तरह का आयोजन कर आखिर क्या दर्शाना चाह रही है ये पार्टी?”

वहीं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और पूर्व विधायक कुणाल षारंगी ने लिखा, “ये कॉन्ग्रेस है। ये राहुल गाँधी के सभी बड़े नेताओं की फोटो है, ये इन लोगों के किसान हैं और ये इनकी पावरी (पार्टी) हो रही है। प्लीज़ डोंट डिस्टर्ब।”                

थूक लगा कर तंदूरी रोटी सेंकने वाला नौशाद उर्फ सोहैल गिरफ्तार, शादी में कई लोगों ने खाया था खाना

मेरठ में एक शादी समारोह में थूक लगा कर रोटी बनाने वाले एक शख्स को गिरफ्तार किया गया है। आरोपित का नाम नौशाद उर्फ़ सुहैल है, जिसका वीडियो वायरल होने के बाद उसे मेरठ पुलिस ने दबोचा। इस मामले में ‘हिन्दू जागरण मंच’ के सचिन सिरोही ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। उक्त वीडियो अरोमा गार्डन गढ़ रोड का है, जिसके बारे में हाजा थाने में मामला दर्ज कराया गया था।

उन्होंने अपनी लिखित तहरीर में बताया था कि नौशाद उर्फ़ सोहैल शादी समारोह में तंदूर की रोटियाँ बनाते समय थूक कर तंदूर में सेंक रहा था। उन्होंने अपनी शिकायत में कोरोना वायरस संक्रमण महामारी का भी जिक्र किया था। ऐसे कृत्यों को महामारी एक्ट के तहत जानबूझ कर संक्रमण फैलाने के प्रयास में गिना जा सकता है। साथ ही उन्होंने इसे समाज के विरुद्ध भी करार दिया था। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर कार्रवाई की।

महामारी अधिनियम के तहत इस मामले को पंजीकृत कर पुलिस ने विवेचना की। कई हिन्दू संगठनों और कार्यकर्ताओं ने इस मामले में रोष जताया। पुलिस ने बताया है कि कानून-व्यवस्था को बनाने रखने के लिए कार्रवाई की गई और इस दौरान ये तथ्य सामने आया कि ये वीडियो मंगलवार (फरवरी 16, 2021) का है। आरोपित लिसाड़ी गेट मेरठ थाना क्षेत्र स्थित डहर स्मार गार्डन मोहल्ला का निवासी है।

मेरठ में थूक लगा कर रोटी बनाने के मामले में गिरफ्तार नौशाद के पिता का नाम अख्तर है। हिरासत में लेकर जब पुलिस ने उससे पूछताछ की तो उसने कबूल किया कि इस वीडियो में दिख रहा शख्स वही है और उसने ही इस तरह की हरकत की है। पुलिस ने बताया कि उसकी गिरफ़्तारी के बाद आगे की कार्रवाई की जा रही है। ये वीडियो मेडिकल क्षेत्र स्थित एक मैरिज हॉल का है। फ़िलहाल नौशाद उर्फ़ सुहैल को जेल भेज दिया गया है और उससे कड़ी पूछताछ की गई है।

निकाह के लिए मना करने पर 17 साल की लड़की का मर्डर, हथौड़े से मारने वाला लईक खान फरार: दिल्ली में ‘लव जिहाद’

दिल्ली के बेगमपुर इलाके में शुक्रवार (फरवरी 19, 2021) को ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया। 17 वर्ष की नाबालिग लड़की की उसके घर में ही हथौड़े से वार कर के हत्या कर दी गई। वारदात के बाद आरोपित घर में ताला लगा कर फरार हो गया। लड़की का परिवार छोटा-मोटा काम कर के पेट पालता था, जबकि आरोपित लईक खान एक फैक्ट्री में कार्यरत है। दोनों के परिवार एक-दूसरे को जानते हैं।

आरोपित युवक ने लड़की के सामने शादी का प्रस्ताव रखा था, जिसे लड़की ने ठुकरा दिया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर के उसकी तलाश शुरू कर दी है। पुलिस ने कहा है कि लईक खान ने हथौड़े से मृतका के सर पर वार किया था, जिससे उसकी जान चली गई। जब ये वारदात हुई, तब मृतका के परिजन सामान लेने बाजार गए हुए थे। माता-पिता जब वापस आए तो लड़की को जल्दी-जल्दी में अस्पताल लेकर गए, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

रोहिणी के डीसीपी पीके मिश्रा ने बताया कि बवाना में आरोपित और लड़की के परिवार पड़ोसी थे। एक वर्ष पूर्व से लड़की का परिवार बेगमपुर में रहने लगा था। उन्होंने जानकारी दी कि लईक खान को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की कई टीमों का गठन किया गया है। हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है। कहा जा रहा है कि शादी का प्रस्ताव ठुकराने के कारण गुस्से में आकर लईक खान ने इस वारदात को अंजाम दिया।

दिल्ली के पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दिल्ली में हुआ ये भयानक हत्याकांड दर्दनाक भी है और सबक भी। उन्होंने कहा कि ये एक ऐसा कड़वा सच है, जिसके बारे में बात करना भी गुनाह है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में अब तक यौन शोषण की कोई बात सामने नहीं आई है। पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को शव सौंप दिया गया। लड़की का अंतिम संस्कार भी हो चुका है।

कासगंज में सिपाही का हत्यारा UP पुलिस एनकाउंटर में ढेर: पुलिसकर्मियों को नंगा कर की थी पिटाई, ₹1 लाख का था इनाम

कासगंज कांड के मुख्य आरोपित मोती सिंह यूपी पुलिस के साथ हुए एनकाउंटर में ढेर हो गया। दरोगा की गायब पिस्टल भी उसके पास से बरामद की गई है। मोती सिंह सिढ़पुरा थाने के सिपाही की हत्या और दरोगा को गंभीर रूप से जख्मी करने के मामले में फरार चल रहा था। इस मामले में वो मुख्य आरोपित था और पिछले कई दिनों से पुलिस को उसकी तलाश थी। पुलिस की कई टीमें आस-पास के जिलों में दबिश दे रही थी।

मोती सिंह 1 लाख रुपए का इनामी बदमाश था। शनिवार (फरवरी 20, 2021) को हुई मुठभेड़ के बाद पुलिस उसे लेकर अस्पताल गई, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया। कासगंज मामले का एक अन्य आरोपित भी एनकाउंटर में मारा जा चुका है। मोती के भाई एलकार को पुलिस ने कावी नदी के किनारे घेरा था, जहाँ उसने गोलीबारी शुरू कर दी तो पुलिस को भी जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। एलकार भी मारा गया था।

इस मामले मे अन्य अपराधियों कि गिरफ़्तारी भी हुई है। मामला तब का है, जब सिढ़पुरा के धीमर में अवैध शराब बनाने की खबर सुन कर पुलिस छापेमारी के लिए पहुँची थी। वहाँ सिपाही देवेन्द्र सिंह की हत्या कर दी गई थी। मुख्य आरोपित की माँ रूपमती को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। ओ सरावल के पास से जिला छोड़ कर भागने की फिराक में थी, लेकिन पुलिस ने उसे धर-दबोचा। उसके पास से वो भाला भी बरामद हुआ, जिससे सिपाही की हत्या की गई थी।

खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले को संज्ञान में लिया था और आरोपितों के खिलाफ NSA लगाने का निर्देश दिया था। दरोगा अशोक पाल शराब माफिया के खिलाफ छापेमारी का नेतृत्व कर रहे थे। आरोपितों ने लाठी और भाले से पुलिसकर्मियों को लहूलुहान कर दिया था। मोती और उसके साथियों ने छापेमारी करने आए पुलिसकर्मियों को बंधक बना कर नंगा किया, फिर उनकी पिटाई की थी।

जहाँ इस मामले में सिपाही देवेन्द्र सिंह ने अस्पताल में उपचार के दौरान ही दम तोड़ दिया था, दरोगा अशोक पाल को स्थिति गंभीर होने के कारण अलीगढ़ रेफ़र कर दिया गया था। अभी भी उनका इलाज वहीं चल रहा है। घटना के बाद STF की पांच टीमों समेत पुलिस और SOG की कुल 12 टीमें गठित की गई थीं और DGP एचसी अवस्थी मामले की निगरानी कर रहे थे। घटना के 12 दिन बाद पुलिस को ये सफलता मिली।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के कासगंज में शराब माफिया को पकड़ने गई पुलिस पर बेरहमी से हुए हमले और हत्याकांड के मामले में पुलिस ने नवाब नाम के एक आरोपित को गिरफ्तार किया था। वो भी कांस्टेबल देवेंद्र सिंह की हत्या में शामिल था। नवाब इस खौफनाक कांड के मुख्य आरोपित मोती सिंह का दाहिना हाथ था। नवाब ने अपने आका के कहने पर ही पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला किया था।

इंडिया टुडे ने PFI के ‘हेट परेड’ को दी क्लीन चिट, RSS की वर्दी में जंजीरों में जकड़े होने को बताया ‘सामान्य’

कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने केरल के मलप्पुरम में एक हेट परेड का आयोजन किया। जिसमें कुछ लोगों को आरएसएस के यूनिफॉर्म में जंजीर से जकड़ कर परेड करते हुए दिखाया गया। यह परेड मोपला नरसंहार के ‘शताब्दी समारोह’ को मनाने के लिए प्रदर्शन किया गया था। अब, इंडिया टुडे ने उन्हें अपराधमुक्त करने के लिए उसके बचाव में सामने आया है।

इंडिया टुडे ने सभी को यह बताने के लिए एक ’फैक्ट चेक’ प्रकाशित किया है कि आरएसएस की वर्दी में सड़कों पर परेड करने वाले लोग वास्तव में आरएसएस के सदस्य नहीं थे और पीएफआई ने अपने इवेंट के लिए संगठन के सदस्यों को आरएसएस की वर्दी में तैयार किया। हैरानी की बात यह है कि किसी भी शख्स ने यह दावा नहीं किया कि आरएसएस की वर्दी वाले लोग वास्तव में आरएसएस के सदस्य थे। ऐसा लगता है कि इंडिया टुडे का ‘एंटी फेक न्यूज वॉर रूम’ (AWRA) को पीएफआई द्वारा हेट परेड को व्हाइटवॉश करने के लिए उपयुक्त पोस्टों का उपयोग करने के लिए इंटरनेट की गहराइयों को खँगालना होगा।

The India Today ‘fact check’

चौंकाने वाली बात यह है कि इंडिया टुडे को इसमें कुछ भी गलत नहीं लगा। ऐसा लगता है कि यह उनके लिए पूरी तरह स्वीकार्य है कि मुस्लिम पुरुष आरएसएस की वर्दी पहने लोगों को जंजीरों में जकड़ के ले जा रहे हैं। ‘फैक्ट चेक’ यह बताता है कि पीएफआई के कार्यों में कुछ भी गलत नहीं है क्योंकि इसमें आरएसएस का कोई भी सदस्य शामिल नहीं था।

फैक्ट चेक में कहा गया है, “दो पुरुषों ने औपनिवेशिक युग की ब्रिटिश वर्दी पहन रखी है और पारंपरिक मालाबार मुस्लिम पोशाक पहने और पीएफआई झंडे ले जाने वाले समूह द्वारा परेड की जा रही है।” यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि इंडिया टुडे ने सोशल मीडिया अकाउंट्स के सबसे अस्पष्ट ‘फैक्ट चेक’ जाँचने में कामयाबी हासिल की है।

यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि इंडिया टुडे ने इस घटना पर कोई अन्य रिपोर्ट नहीं की है। इस प्रकार, संपादकों ने अपने ‘धर्मनिरपेक्ष’ एजेंडे से समझौता किए बिना कहानी को कैसे कवरअप किया जाए, इस पर गहन विचार किया जा सकता है।

निष्कर्ष के रूप में रिपोर्ट में कहा गया, “17 फरवरी को, पीएफआई ने उनकी सालगिरह के रूप में मार्च आयोजित किया था। मार्च शांतिपूर्ण था और हिंसा की कोई घटना नहीं हुई। जो वीडियो वायरल हुआ है वह मार्च के हिस्से के रूप में आयोजित एक प्रदर्शन था। हमें पीएफआई कार्यकर्ताओं द्वारा आरएसएस कार्यकर्ताओं पर हमला करने की किसी भी घटना के बारे में नहीं पता चला है।”

यहाँ तक ​​कि इंडिया टुडे ने संघ की केरल इकाई से भी संपर्क किया। उनके वरिष्ठ अधिकारियों में से एक ने रिपोर्टर को बताया, “सोशल मीडिया पोस्ट में इस तरह की कोई घटना हमारे संज्ञान में नहीं आई है। अगर पीएफआई ने वायरल वीडियो में हमारे सदस्यों को जबरन मार्च कराने की कोशिश की होती, तो हम निश्चित रूप से प्रतिक्रिया देते। वीडियो में दिख रहे पुरुष आरएसएस के सदस्य नहीं हैं। यह PFI का कुछ प्रदर्शन रहा होगा।” पूरा ‘फैक्ट चेक’ निश्चित रूप से पीएफआई के हेट परेड को व्हाइटवॉश करने की एक कोशिश है।

गौरतलब है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने केरल में एक रैली निकाली थी। इस रैली में कुछ लोगों ने RSS की यूनिफॉर्म पहनी थी। परेड में आरएसएस की यूनिफार्म में शामिल लोगों को जंजीर से भी बाँधा गया था। इस रैली के कई वीडियो और फोटो सामने आए हैं, जिसमें देखा जा सकता है कि इस दौरान अल्लाह-हू-अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर रसूलुल्लाह जैसे कई अन्य इस्लामी नारे लगाए गए।

बक्कल उतारने की धमकी देने वाले राकेश टिकैत डरे एक फर्जी कॉल से, यवतमाल का ‘किसान रैली’ किया रद्द

दिल्ली की सीमाओं पर ‘किसान विरोध प्रदर्शन’ का नेतृत्व कर रहे भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत को महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में एक मेगा रैली करनी थी। हालाँकि, एक अज्ञात फर्जी कॉल की वजह से बक्कल उतारने की धमकी देने वाले को अपनी यात्रा को मजबूरन रद्द करना पड़ा। दरअसल, फर्जी कॉल करने वाले ने खुद को SP बताया और यहाँ आने पर उन्हें 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन में रखने की चेतावनी दी। जिसके बाद राकेश टिकैत को अपना फैसला बदलना पड़ा

कार्यक्रम के आयोजकों के अनुसार, बीकेयू नेता राकेश टिकैत द्वारा संबोधित एक रैली में भाग लेने के लिए शनिवार (फरवरी 20, 2021) को राज्य भर से 1 लाख से अधिक किसान यवतमाल पहुँचने वाले थे। चूँकि, महाराष्ट्र में फिर से कोरोना का प्रकोप बढ़ रहा है तो इसे देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने रैली के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया। 

इसके बाद किसान मोर्चा ने नया आवेदन देते हुए कहा कि रैली में 50 से अधिक लोग शामिल नहीं होंगे। हालाँकि, दूसरे आवेदन को भी महाराष्ट्र सरकार ने खारिज कर दिया। हालाँकि, आयोजन के आयोजकों ने एसपी के नाम पर एक फर्जी कॉल को कार्यक्रम को रद्द करने के लिए जिम्मेदार ठहराया, जिन्होंने टिकैत को राज्य में आने पर 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन में भेजने की चेतावनी दी थी। 

किसान मोर्चा के महाराष्ट्र विंग से संदीप गिद्दी पाटिल के अनुसार, टिकैत को एक कॉल आई थी, जिसने खुद को यवतमाल का एसपी बताया था। उन्होंने टिकैत को जिले का दौरा करने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि अगर बीकेयू नेता यवतमाल का दौरा करते हैं, तो उन्हें दो सप्ताह के लिए क्वारंटाइन में रखा जाएगा। जिसके बाद राकेश टिकैत ने डर से यहीं रखने का फैसला किया कि क्वारंटाइन में रहने पर गाजीपुर साइट पर विरोध प्रदर्शन बाधित हो जाएगा।

पाटिल ने आगे कहा कि जब यह पुष्टि की गई कि यवतमाल एसपी दिलीप भुजबल द्वारा कॉल नहीं किया गया था, तो यह स्पष्ट हो गया कि टिकैत को महाराष्ट्र में एक रैली को संबोधित करने से रोकने के लिए एक फर्जी कॉल किया गया था। हालाँकि, पाटिल ने कहा कि टिकैत अब एक ऑनलाइन संबोधन करेंगे और बाकी के कार्यकर्ता यवतमाल में बैठक में भाग लेंगे।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए, यवतमाल एसपी ने कहा कि उन्होंने केवल आयोजकों को कॉल कर उनसे कड़ा रुख अपनाने को कहा था। भुजबल ने कहा कि उन्होंने आयोजकों से कहा था कि अगर वे अपनी बैठक को आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, तो पुलिस इस स्थिति से निपट लेगी। लेकिन, भुजबल ने यह भी कहा कि उन्होंने नेताओं को एक जिम्मेदार फैसला लेने और टिकैत को यवतमाल न आने के लिए मनाने की सलाह दी थी। भुजबल ने स्वीकार किया कि राकेश टिकैत को ढोंगी ने जिले का दौरा करने से मना कर दिया।

TIME ने की भाजपा समर्थक महिलाओं को #डी कहने वाले चंद्रशेखर की तारीफ़, 100 प्रभावशाली लीडर में किया शामिल

TIME पत्रिका ने बुधवार (17 फरवरी 2021) को 2021 TIME-100 Next जारी की, TIME फ्रैंचाइज़ी का मुख्य संस्करण जिसमें 100 प्रभावशाली लोगों की सूची मौजूद है। 100 ऐसे लोग जो TIME के मुताबिक़ आने वाले कल की रूपरेखा तय करने में अहम भूमिका निभाएँगे। मज़े की बात है कि सूची में भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ का नाम भी मौजूद है

सूची में यूके के वित्त मंत्री ऋषि सुनक (Rishi Sunak), ट्विटर के मुख्य अधिवक्ता विजया गड्डे, इन्स्टाकार्ट (instacart) के संस्थापक और सीईओ अपूर्व मेहता, डॉक्टर और नॉन प्रॉफिट GET US PPE की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर शिखा गुप्ता और नॉन प्रॉफिट अपसॉल्व (Upsolve) के संस्थापक रोहन पवुलूरी का नाम भी मौजूद है। सूची के बारे में बात करते हुए TIME-100 के एडिटोरियल डायरेक्टर डैन मैक्सी ने कहा, “सूची में शामिल हर नाम इतिहास बनाने के लिए तैयार है, बल्कि कुछ ने बना भी दिया है।” 

TIME के अनुसार हाथरस मामले में चंद्रशेखर ने चलाया था अभियान

TIME के भीतर चंद्रशेखर के लिए कहा गया है कि वो भीम आर्मी का नेता है और दलितों के लिए स्कूल चलाता है, जिससे वह अत्याचार के विरुद्ध मुखर हो सकें। इसके अलावा वह गाँवों में जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव से पीड़ित लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाता है। 

इसके बाद चंद्रशेखर के बारे में कहा गया है कि उसने उत्तर प्रदेश के हाथरस में 19 वर्षीय युवती के साथ हुए रेप के मामले में न्याय दिलाने के लिए अभियान चलाया था क्योंकि पुलिस इस मामले की जाँच में देरी कर रही थी। TIME के मुताबिक़ चंद्रशेखर ने तमाम कथित देशहित के आंदोलनों का समर्थन भी किया था, इसमें हालिया किसान आंदोलन भी शामिल है। चंद्रशेखर के ‘औरा’ का वर्णन करते हुए TIME में कहा गया है, “आज़ाद की शानदार मूछें, प्रतिरोध का प्रतीक हैं।”      

कैसे चंद्रशेखर ने किया हाथरस मामले में दखल 

चंद्रशेखर की भीम आर्मी ने हाथरस मामले की जाँच को प्रभावित करने का पूरा प्रयास किया था। यह तब पता चला जब ये बात सामने आई कि भीम आर्मी के 3 लोग पीड़िता के परिवार वालों के साथ रह रहे थे और सच्चाई सामने आने पर कहने लगे कि वह पीड़िता के रिश्तेदार हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इन तीन लोगों में एक महिला भी शामिल थी जो मूल रूप से मध्य प्रदेश की रहने वाली थी। पीड़िता की मृत्यु के 2 दिन पहले (27 सितंबर 2020) चंद्रशेखर ने उससे मुलाक़ात की थी और मामले का राजनीतिकरण करने का प्रयास किया था। 

पीड़िता के परिवार के साथ रह रहे तीन लोग लगातार मीडिया को बयान दे रहे थे और प्रदेश सरकार, प्रशासन को निशाना बना रहे थे। जैसे ही पीड़िता के परिवार के हर सदस्य को सुरक्षा देने की बात हुई वैसे ही पुलिस को पूरे मामले पर शक हुआ और पुलिस ने सभी को संदेह की दृष्टि से देखना शुरू किया। ठीक यहीं पर भीम आर्मी पूरे मामले से गायब हो गई।

जब वायरल हुए थे चंद्रशेखर के गाली भरे ट्वीट 

पिछले साल जून में ट्विटर पर चंद्रशेखर के गाली वाले कई ट्वीट वायरल हुए थे। इसमें ज़्यादातर ट्वीट 2018 के थे जिसमें उसने बेहद अपमानजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था। उसने अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का समर्थन करने वाली हर महिला के लिए “दल्ला” और #डी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। ट्वीट में यह भी लिखा था कि इन सभी ने खुद को भाजपा को बेच दिया है। ट्वीट पर विवाद बढ़ने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने इनका संज्ञान लिया था। 

ठीक इसी महीने में चंद्रशेखर पर आरोप लगा था कि उसने दिल्ली एम्स में अपने ब्लड कैंसर के बारे में डॉक्टर्स को बताए बिना रक्त दान किया था। चंद्रशेखर के फिजिशियन डॉ हरजीत सिंह भाटी ने भी यह बताए छुपाए रखी, बाद में यह पता चला कि वह एक तरह के ब्लड कैंसर (polycythemia vera) से पीड़ित है। इसी तरह पिछले साल TIME ने सीएए और एनआरसी का विरोध करने वाली 82 वर्षीय बिलकिस 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया था।         

लाल किला हिंसा में कार्रवाई हुई तेज: दिल्ली पुलिस ने जारी की 20 अन्य उपद्रवियों की तस्वीरें

गणतंत्र दिवस पर देश की राजधानी दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली के लाल किला पर हिंसा फैलाने वालों की पुलिस पहचान कर रही है। दिल्ली पुलिस ने हिंसा में कथित तौर पर शामिल 20 अन्य उपद्रवियों की तस्वीर जारी की है।

इसके पहले दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार (फरवरी 19, 2021) को लाल किला हिंसा मामले में 200 लोगों की तस्वीर जारी की थी। इन सभी पर हिंसा में शामिल होने का आरोप है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि उसने विभिन्न स्रोतों से मिले वीडियो को स्कैन करने के बाद आरोपितों की तस्वीर जारी की है।

पुलिस ने बताया कि तस्वीरें जारी करने के साथ ही इनकी पहचान करने का काम भी किया जा रहा है। इसके लिए पुलिस की टीमें जुट गई हैं। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने 26 जनवरी को जब देश का गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा था उसी दिन ट्रैक्टर परेड निकाला था। ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा भड़क गई थी और एक गुट लाल किले पर पहुँच गया था। इस दौरान वहाँ पुलिस वालों के साथ मारपीट करते हुए लाल किले पर निशान साहिब फहरा दिया गया था। दिल्ली में अन्य कई जगहों पर भी पुलिस और किसानों के बीच संघर्ष हुआ था।

ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई थी। इसका प्रमाण है कि पुलिस को जो फुटेज मिले हैं उसमें से ज्यादातर हमलावर नकाबपोश थे। पुलिस अधिकारियों की माने तो इसमें पचास से अधिक लोग नकाबपोश थे। पुलिस उन फोटोग्राफ को फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक के जरिए बेनकाब करने में जुट गई है। साथ ही पुलिस डंप डाटा के जरिए भी संदिग्धों के लोकेशन तलाशने में जुटी है।

बता दें कि नकाबपोश उपद्रवियों को लाल किला में हिंसा के दौरान पुलिस कर्मियों पर हमला करते हुए देखा गया है। कई तो पुलिसकर्मियों को घेरकर उन पर हमला कर रहे थे। पुलिस फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक और मुखबिर के जरिए इन आरोपितों की पहचान करने में जुटी है। ज्यादातर फोटोग्राफ में नकाबपोश उपद्रवियों के पास हथियार या फिर लाठी डंडे थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए क्राइम ब्रांच को अब तक डेढ़ हजार वीडियो मिल चुके हैं। जिसके जरिए हिंसा में शामिल एक-एक लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। 

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने हिंसा करने वाले 12 उपद्रवियों की तस्वीरें जारी की थी। चिन्हित किए गए इन उपद्रवियों को हिंसा के दौरान हाथ में लाठी डंडे लिए, पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और लाल किला समेत कई जगहों पर जमकर उत्पात और पुलिस वालों पर हमला करते हुए देखा गया।