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आमिर की बीवी ने अपने फैन को कहा ‘लेस्बियन’ तो लोगों ने ‘होमोफोबिक’ कह कर लताड़ा

पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश बॉक्सर आमिर खान की पत्नी फरयाल मखदूम पर होमोफोबिक (एक तरह का डर है, जो विशेषकर समलैंगिकों को देखकर पैदा होता है) होने का आरोप लगा है। इतना ही नहीं, उन्हें इसके लिए काफी आलोचना का सामना भी करना पड़ा। इसकी वजह ये थी कि उन्होंने अपनी एक फैन के लिए ‘लेस्बियन’ शब्द का इस्तेमाल किया

29 वर्षीय मॉडल ने अपनी एक तस्वीर साझा की थी, जिसमें उन्होंने lilac satin नाम की ड्रेस पहनी थी, इसके अलावा उन्होंने एक हिजाब भी पहन रखा था। बॉक्सर आमिर की पत्नी फरयाल ने तस्वीर के कैप्शन में लिखा था, “मैं जितने की हक़दार हूँ मुझे उससे ज़्यादा देने के लिए भगवान का शुक्रिया।” 

इस पर एक महिला ने लिखा, “आगे क्या, बिकनी?” इस टिप्पणी के साथ बिकनी का एक इमोजी भी मौजूद था। इसके जवाब में फरयाल ने टिप्पणी की और लिखा, ‘लेसबियन’। 

फरयाल की पोस्ट पर की गई ‘बिकनी’ वाली टिप्पणी

इसके बाद एक और यूज़र ने टिप्पणी करते हुए लिखा, “व्हाट द फ़#? क्या तुम होमोफ़ोबिक हो?” 

इस टिप्पणी के बाद बहुत से लोग फरयाल के बचाव में भी उतरे। कथित तौर पर होमोफ़ोबिक टिप्पणी का बचाव करते हुए एक अन्य यूज़र ने लिखा, “उसने सिर्फ लेसबियन कहा है। सिर्फ एक शब्द, मामले को तूल दिया जा रहा है।” 

फरयाल की पोस्ट पर की गई अन्य टिप्पणी

लेकिन इंटरनेट की जागरूक जनता शब्दों के मायने और उद्देश्य समझना अच्छे से जानती है। तस्वीर पोस्ट किए जाने के ठीक 10 मिनट के अंदर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। लोगों ने फरयाल मखदूम की टिप्पणी की जमकर आलोचना की है। फरयाल की हो रही आलोचना में से कुछ टिप्पणयाँ नीचे दी गई हैं-  

“अगर तुम्हें उसकी बातों से इतना ही फ़र्क पड़ता है तो क्यों नहीं उसको अनफॉलो कर देती हो। क्या वो तुम्हारे हिस्से का किराया देती है या पोस्ट पर बुरा बनने के लिए तुम्हारी आत्मा को बढ़ावा देती है।” 

“वह जो चाहे वो लिख सकती है। उसे परेशान करना बंद करो और उसके पेज से बाहर आओ।” 

वहीं कुछ ऐसे भी थे जो फरयाल की तारीफ़ में जुटे हुए थे। लेकिन इन तमाम टिप्पणियों में ज़्यादातर ऐसी ही थीं जिनमें फरयाल को उनकी टिप्पणी के लिए तिरस्कार का सामना करना पड़ा था।

इसके पहले फरयाल ने ब्रिटिश सरकार को ‘तानाशाही’ बताया था, जब वहाँ की सरकार ने दुबई से आने और वहाँ के लिए यात्रा करने पर पाबंदी लगाई गई थी। जनवरी में ख़बर आई थी कि यूके ने यूएई को अपनी ‘ट्रेवल कॉरिडोर लिस्ट’ से बाहर कर दिया था।

इसके अलावा, यूके वापस आने वालों पर नियत अवधि के लिए क्वारनटाइन होना पड़ेगा क्योंकि पिछले कुछ समय में वहाँ कोरोना वायरस के मामलों में 52 फ़ीसदी की बढ़ोतरी आई थी। इस पर फरयाल ने लिखा था, “हर जगह नए नियम लागू कर दिए गए हैं, वो भी बिना चेतावनी के। ऐसा लग रहा है जैसे तानाशाही में जी रही हूँ।”       

‘हिंसा रोकने के लिए पाकिस्तान से बातचीत जरूरी, हमारे कब्रिस्तान भर चुके हैं…’ – महबूबा मुफ्ती

अक्सर अपने विवादित बयानों के चलते सुर्ख़ियों में बनी रहने वाली महबूबा मुफ़्ती ने एक बार फिर सुर्खियाँ बटोरने लायक बयान दिया है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की मुखिया महबूबा मुफ़्ती ने शनिवार (20 फरवरी 2021) को कहा कि जम्मू और कश्मीर में ‘हिंसा रोकने’ के लिए भारत को पाकिस्तान से वार्ता शुरू करनी चाहिए। महबूबा मुफ़्ती ने अपने बयान में कहा:

“आखिर कब तक जम्मू और कश्मीर के लोग, पुलिसकर्मी और सेना के जवानों को अपनी जान गँवानी पड़ेगी। भाजपा बार-बार इस बात पर ज़ोर देती है कि पाकिस्तान यहाँ के आतंकवादी तत्वों को बढ़ावा देता है, उन्हें प्रायोजित करता है। इसके आधार पर भारत को हिंसा पर काबू पाने के लिए पड़ोसी मुल्क से बातचीत शुरू करनी चाहिए। केंद्र सरकार को यहाँ के लोगों के बारे में सोचना पड़ेगा और उसके लिए पाकिस्तान से बात करना ज़रूरी है।” 

इसके बाद महबूबा मुफ़्ती ने कहा, “ये (जम्मू और कश्मीर में होने वाली हिंसा) एक बड़ा मुद्दा है और जल्द से जल्द इसका हल निकाला जाना चाहिए। ये ख़ून-ख़राबा रुकना चाहिए, जिससे घाटी के लोग शांति से रह पाएँ। हमारे कब्रिस्तान भर चुके हैं, भाजपा की सरकार को चिंता करनी पड़ेगी कि यहाँ के हालात कैसे सामान्य होंगे।”

पीडीपी मुखिया ने श्रीनगर के बरजुला इलाके में हुए आतंकवादी हमले में वीरगति को प्राप्त जम्मू कश्मीर पुलिस के हवलदार सुहैल अहमद के परिजनों से भी मुलाक़ात की। दरअसल पिछले कुछ दिनों के दौरान श्रीनगर में दो आतंकी हमले हुए थे, जिसमें दो पुलिसकर्मी वीरगति को प्राप्त हुए थे। इस घटना के बाद जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री का बयान सामने आया है। 

दरअसल शुक्रवार (19 फरवरी 2021) को श्रीनगर के ही बारजुला क्षेत्र में शिव शक्ति मिष्ठान भंडार पर आतंकवादियों ने हमला किया था। आतंकियों द्वारा अंजाम दी गई गोलीबारी की इस वारदात में दो पुलिसकर्मी वीरगति को प्राप्त हुए थे।

इस घटना का वीडियो भी सामने आया था। इसमें साफ तौर पर देखा गया था कि कैसे आतंकवादी बेख़ौफ़ होकर पुलिसकर्मियों पर गोली चला रहे हैं। बलिदानी पुलिसकर्मियों की पहचान हवलदार सुहैल अहमद और मोहम्मद युसूफ के रूप में हुई थी। 

इसी तरह 17 फरवरी 2021 को आतंकवादियों ने कश्मीर के श्रीनगर स्थित डलगेट इलाके में एक मशहूर शाकाहारी ढाबे के मालिक पर गोली चला दी थी। यह ढाबा होटल ललित से महज़ कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित था जहाँ जम्मू कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर आए विदेशी राजनयिक रुके हुए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ आतंकवादियों ने मशहूर कृष्णा ढाबा मालिक रमेश कुमार मेहरा के बेटे आकाश मेहरा (22) पर गोली चलाई थी। यह शाकाहारी ढाबा श्रीनगर के अति सुरक्षित इलाके में मौजूद है।

TMC सांसद और दीदी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के घर पहुँची CBI, कोयला घोटाले का है मामला

कोयला घोटाला मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) के अधिकारी TMC सांसद और मुख्यमंत्री ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिरा बनर्जी को तलब करने के लिए उनके घर पहुँच गई है। सीबीआई की तीन सदस्यीय दल ने अभिषेक बनर्जी की पत्नी को जाँच में शामिल होने के लिए कहा है। हालाँकि, नोटिस में अभिषेक बनर्जी का नाम शामिल नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार, सीबीआई की टीम उन्हें कोयला तस्करी मामले में समन देने के लिए उनके घर गई है। समन में लिखा है कि उन्हें 24 घंटे के अंदर सीबीआई दफ्तर उपस्थित होना होगा। सीबीआई की टीम दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर निर्वाचन क्षेत्र से टीएमसी सांसद अभिषेक से पूछताछ भी करेगी।

गौरतलब है कि कोयला घोटाला मामले में सीबीआई पहले से ही अभिषेक बनर्जी के कई करीबियों के खिलाफ छापेमारी कर रही है। दिसंबर 31, 2020 को कोलकाता में तृणमूल यूथ कॉन्ग्रेस के जनरल सेक्रेटरी विनय मिश्रा के खिलाफ पशु तस्करी और अवैध कोयला खनन के मामले में तलाशी अभियान चलाया गया था और उनके खिलाफ एजेंसी ने लुक आउट नोटिस तक जारी किया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, कोयला माफिया द्वारा बंगाल की सत्ताधारी पार्टी TMC के नेताओं को नियमित तौर पर रूपए भेजने के आरोप हैं। यह रूपए पार्टी के युवा नेता विनय मिश्रा के जरिए पहुँचाया जाता है। विनय मिश्रा फिलहाल इस मामले में फरार चल रहे हैं।

PFI के शाहीनबाग़ ऑफिस समेत कई ठिकानों पर UP STF की छापेमारी, CAA-विरोध से लेकर हाथरस तक में भूमिका

हाथरस कांड में दंगा भड़काने के लिए हुई टेरर फंडिंग के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने आज रविवार (फरवरी 21, 2021) को दिल्ली के शाहीन बाग में PFI के कार्यालय पर छापा मारा है। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) PFI के अन्य कार्यालयों पर भी छापेमारी कर रही है। PFI का ये ऑफिस उसी जगह के करीब है, जहाँ शाहीनबाग में सीएए के खिलाफ महिलाएँ धरने पर बैठी थीं।

उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स हाल ही में PFI एजेंट रऊफ शरीफ को केरल से प्रॉडक्शन वारंट पर लेकर आई है। उस पर नागरिकता कानून और NRC विरोध प्रदर्शन भड़काने का भी आरोप है। रऊफ को इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट ने त्रिवेंद्रम से उस समय गिरफ्तार किया था, जब वो भारत छोड़कर भागने की कोशिश कर रहा था।

PFI एजेंट रऊफ शरीफ पर राजद्रोह सहित दंगा फैलाने की साजिश रचने का भी आरोप है। रउफ अब तक मथुरा जेल में बंद था। यह PFI की छात्र विंग ‘कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया’ (CFI) का पदाधिकारी है। इस पर दंगे के लिए विदेशी फंडिंग का भी आरोप है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित हाथरस मामले में जाँच कर रही पुलिस को पता चला था कि दंगे भड़काने के लिए PFI के सदस्य कप्पन और उसके साथियों को पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी रऊफ शरीफ व पी कोया द्वारा फंडिंग की गई थी। आरोपितों को 1.36 करोड़ रुपए ओमान व कतर में बैठे पीएफआइ सदस्यों के जरिए रऊफ तक पहुँचाई गई थी।

‘ऊँट का मूत्र परोसने वाला इस्लामी कैफे’: वीडियो सामने आने के बाद बहस शुरू, एक ने कहा – दिन में 3 बार पियो

सऊदी अरब में एक वीडियो को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जिसके आधार पर ‘ऊँट का मूत्र परोसने वाला पहला इस्लामी कैफे’ खोले जाने की बात कही जा रही है। सोशल मीडिया में भी यह वीडियो खासा वायरल हो रहा है।

‘ऊँट का मूत्र’ को कई लोगों ने इस्लाम के खिलाफ माना है। इस वीडियो को सबसे पहले ‘टुगेदर अगेंस्ट रिलिजन ट्रेडर्स’ नामक पेज ने शेयर किया था। इस वीडियो के बारे में अभी कुछ खास पुष्टि नहीं हो सकी है।

इसमें देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति रेगिस्तान में बैठा हुआ है और एक गाड़ी से कुछ ड्रिंक्स बेच रहा है। वहाँ कई दाढ़ी वाले लोग भी हैं, जो उससे वो ड्रिंक्स खरीद रहे हैं।

ये साफ़ नहीं है कि ये कौन सी जगह है, या फिर इसकी भी पुष्टि नहीं हुई है कि ये वीडियो असली है या फिर इससे कोई छेड़छाड़ हुई है। सऊदी अरब के लेखक और राजनीतिक विश्लेषक तुर्की अल हमद ने चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे लोगों की मौजूदगी में इस्लाम सचमुच खतरे में है।

सऊदी अरब में ऊँट का मूत्र पीने को लेकर अभी भी समाज दो हिस्सों में बँटा हुआ है और इस पर अक्सर वाद-विवाद होता रहता है, ताज़ा कैफे विवाद नया नहीं है।

‘सऊदी सेंटर फॉर मेडिकल रिसर्च’ ने 2009 में दावा किया था कि ऊँट के मूत्र का इस्तेमाल उस कैप्सूल को बनाने में किया जा सकता है, जो कैंसर व अन्य बीमारियों के खिलाफ लड़ाई में कारगर सिद्ध होगा। ईरान के एक इस्लामी मेडिकल विशेषज्ञ ने कोरोना से लड़ने के लिए ईरान के लोगों को ऊँट का पेशाब पीने की सलाह दी थी।

ईरान में ‘इस्लामी मेडिसिन’ का खूब चलन है और इसे लेकर अजीबोगरीब दावे होते रहे हैं। वहाँ ‘साइंटिफिक एजुकेशनल एसोसिएशन ऑफ इमाम सदगेहज मेडिसिन’ के इंस्टाग्राम पर 60000 फॉलोवर्स हैं और मेहदी सबिली इसके मुखिया हैं।

मेहदी सबिली ने लोगों को दिन भर में 3 बार ऊँट का मूत्र पीने की सलाह दी थी। उत्तरी ईरान में एक मौलवी ने कोरोना के मरीजों को एक खास परफ्यूम सूँघने को दिया था। उनमें से एक कुछ दिनों बाद चल बसा।

रिंकू शर्मा हमले में नया वीडियो: हाथ में साफ दिख रहा चाकू, The Print का झूठ बेनकाब – 4 और हुए गिरफ्तार

दिल्ली के मंगोलपुरी में परिवार के सामने ही रिंकू शर्मा की बेरहम हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार किया था। वहीं अब 4 अन्य आरोपितों को दबोचा गया है। इस तरह अब 9 आरोपित पुलिस के शिकंजे में आ गए हैं।

दिल्ली पुलिस का क्राइम ब्रांच गवाहों और CCTV फुटेज के आधार पर आरोपितों की पहचान कर के उनके खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। मंगोलपुरी निवासी 40 साल के दीन मोहम्मद उर्फ सकरुद्दीन पुत्र सलाउद्दीन, 22 साल के दिलशान उर्फ आफताब पुत्र दीन मोहम्मद, 21 साल के फैयाज उर्फ सदरी पुत्र मोहम्मद कमरे आलम और 21 साल के ही फैजान उर्फ निराले पुत्र कमरे आलम – ये ताज़ा गिरफ्तार किए गए आरोपित हैं।

फुटेज में ये चारो रिंकू शर्मा और उसके परिवार पर हमला करते हुए दिख रहे हैं। ये सभी उन्हें घेर कर लाठी-डंडों से वार करते दिख रहे हैं। वहीं आरोपितों के हाथ में चाक़ू भी देखा जा सकता है। सोशल मीडिया पर भी वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक आरोपित रिंकू शर्मा के घर के बाहर हाथ में चाकू लिए हमला करता दिख रहा है। इसका मतलब है कि वो इन हथियारों से लैस होकर ही वहाँ पहुँचे थे।

दशहरा पर राम मंदिर पार्क में विवाद और विहिप की रैली में राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने को परिजनों ने हत्या की वजह बताया था। वहीं शेखर गुप्ता के ‘द प्रिंट’ ने भी इस मामले में चाकू वाला प्रपंच फैलाया था।

‘द प्रिंट’ के लेख में बताया गया था कि रिंकू की हत्या जिस चाकू से हुई, वो चाकू वो खुद लेकर आया था और उसी ने लड़ाई शुरू की थी। इतना ही नहीं, इस रिपोर्ट में आरोपित नसरुद्दीन के परिजनों का हवाला देकर कहा गया था कि रिंकू ने उस दिन शराब भी पी रखी थी और विवाद तब शुरू हुआ, जब वह जाहिद को जबरदस्ती शराब पिलाने लगा। ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में भी ये बात झूठ निकली थी।

रिंकू के भाई मन्नू ने कहा था कि ये सब पूरी तरह फर्जी बातें हैं। रिंकू शर्मा ने न तो शराब पी थी, न पिलाई थी और न ही उनका जाहिद (आरोपितों में से एक) से झगड़ा था। जाहिद किसी और के साथ पार्टी में आया था और उसका झगड़ा भी किसी और से था। रिंकू शर्मा से कोई बात नहीं हुई थी। उन्होंने बताया कि दूसरे पक्ष के सब लोग पहले लाठी डंडे लेकर घर में आए थे और उन्होंने ही गेट खोला था और रिंकू ने जब बचाव के लिए सिलिंडर उठाया तो तस्वीर वायरल कर दी गई।

कुल कोरोना वैक्सीन डोज में UP सबसे आगे, फ्रंट लाइन वर्कर्स के टीकाकरण में दिल्ली-पंजाब फिसड्डी – 50% से भी कम

भारत कोरोना वैक्सीन की 1.08 करोड़ से ज्यादा डोज़ जारी कर चुका है। यह आँकड़ा शनिवार (20 फरवरी 2021) की शाम तक का है। उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य कर्मचारियों और ‘फ्रंट लाइन वर्कर्स’ को कोरोना वैक्सीन की सबसे अधिक 11.52 लाख डोज़ प्रदान की है। जबकि कर्नाटक इसी आँकड़े में दूसरे नंबर पर है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ कर्नाटक ने अभी तक कुल 1.11 लाख स्वास्थ्य कर्मचारियों का टीकाकरण (दोनों डोज़) किया है। इसके बाद तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के 86648 और 85752 स्वास्थ्य कर्मचारियों के दूसरे डोज के टीकाकरण का आँकड़ा है। 

उत्तर प्रदेश में 10.66 लाख लोगों को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज दी जा चुकी है और 85752 लोगों को दूसरी डोज़ प्रदान की गई है। दोनों वैक्सीन दिए जाने के बीच लगभग 4 से 6 हफ़्तों का अंतर रखा गया है। 

पूरे देश की बात करें तो अभी तक 1.08 करोड़ से ज्यादा डोज़ दी जा चुकी है। इसमें 63.52 लाख स्वास्थ्य कर्मचारियों को और 36.11 लाख फ्रंट लाइन वर्कर्स को दी गई है। इसके अलावा 8.73 लाख स्वास्थ्य कर्मचारियों को कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज़ भी प्रदान की जा चुकी है।

कुल पंजीकृत लाभार्थियों के फ़ीसदी की बात करें तो बिहार में सबसे अधिक 85 फ़ीसद स्वास्थ्यकर्मी लाभान्वित हो चुके हैं। कुल 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 75 फ़ीसदी स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज़ दी जा चुकी है।  

वहीं फ्रंट लाइन वर्कर्स की बात करें तो उनका टीकाकरण 2 फरवरी से शुरू हुआ था। इस अभियान के तहत 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 50 फ़ीसदी से अधिक फ्रंट लाइन वर्कर्स को वैक्सीन दी जा चुकी है।

इस पूरे अभियान में दादर और नगर हवेली, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, त्रिपुरा, उड़ीसा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड शामिल है। दूसरी तरफ 7 राज्यों में 50 फ़ीसदी से कम फ्रंट लाइन वर्कर्स का टीकाकरण हुआ है, जिसमें लद्दाख, तमिलनाडु, दिल्ली, पंजाब, चंडीगढ़, नागालैंड और पुडुचेरी शामिल है।  

पैदा हुआ तैमूर का भाई: 41 साल की करीना कपूर खान का दूसरा बेटा, 51 के सैफ का चौथा बच्चा

बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर खान ने एक लड़के को जन्म दिया है। शनिवार (20 फरवरी 2021) को करीना कपूर खान को ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रविवार (21 फरवरी 2021) को भोर के वक्त उन्होंने बच्चे को जन्म दिया।

इसके साथ ही सैफ अली खान एक बार फिर से पिता बन गए हैं और तैमूर बड़े भाई। सैफ अली खान और उनका पूरा परिवार इस ख़बर से काफी उत्साहित है। सैफ और करीना ने 12 अगस्त 2020 को प्रेगनेंसी के बारे में जानकारी दी थी। 

प्रेगनेंसी के दौरान करीना कपूर की तमाम तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। इसके अलावा करीना कपूर इस बीच काम करती हुई भी नज़र आई थीं, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई थी।

तैमूर के बाद ये करीना कपूर का दूसरा बच्चा है जबकि सैफ अली खान चौथी संतान के पिता बने हैं। वह खुद पैटरनीटी लीव (बच्चा सम्भालने की छुट्टी) पर थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ माँ बनने से पहले करीना कपूर से जुड़े तमाम लोगों ने उन्हें उपहार भेजे थे। 

हाल ही में करीना, सैफ और तैमूर अपने नए घर में भी शिफ्ट हुए थे। इन्होंने सोशल मीडिया पर अपने नए की तस्वीर भी साझा की थी, जो कि इनके पिछले घर से काफी बड़ा है। 

करीना कपूर खान और सैफ अली खान की शादी 2012 में हुई थी और दिसंबर 2016 में तैमूर का जन्म हुआ था। सैफ अली खान के अमृता सिंह से दो बच्चे हैं, सारा अली खान और इब्राहिम अली खान। वहीं करीना कपूर खान की आगामी फिल्मों की बात करें तो वह अद्वैत चंदन की लाल सिंह चड्ढा और करण जौहर की तख़्त में नज़र आएंगी।   

चीनी सैनिकों के मरने की खबर के बाद गालियों की बौछार, कोस रहे अपनी वामपंथी सरकार को: एक को कर लिया गिरफ्तार

गलवान में हुए खूनी संघर्ष में कई चीनी सैनिकों के मारे जाने की खबर तो आज से 8 महीने पहले ही आ गई थी, लेकिन भारत में बैठे चीन के टट्टुओं और खुद चीन ने इससे इनकार कर दिया था। अब जब पर्दा हटा है और चीन ने इस संघर्ष में मारे गए PLA (पीपल्स लिबरेशन आर्मी) के सैनिकों को सम्मान देना शुरू किया है, तो चीनी बौखला गए हैं। चीनी नागरिक भारत विरोधी गालियाँ बक रहे हैं और भारतीय दूतावास को निशाना बनाया जा रहा है।

चीन की सोशल मीडिया में भारत के खिलाफ अपशब्दों की बाढ़ आ गई है और कई घृणास्पद संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं। चीन ने स्वीकार किया है कि गलवान की झड़प में उसके 4 सैनिकों की जान गई थी और 1 रेस्क्यू के दौरान मर गया था। बीजिंग में भारतीय दूतावास है और वहाँ की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उसका हैंडल भी है, जिसे टैग कर के चीनी अपशब्दों का प्रयोग कर रहे हैं और अपनी खीझ निकाल रहे हैं।

गलवान के संघर्ष में भारत के 20 सैनिकों ने बलिदान दिया था। चीन के सैनिकों की मौत का आँकड़ा कहीं ज्यादा होने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन अब तक उसने 5 के मरने की पुष्टि की है – वो भी 8 महीने बाद। चीन के नागरिकों में इस खबर के सामने आने के बाद भारत-विरोधी भावनाएँ उबाल मार रही हैं और कट्टर चीनी लोगों को भड़काने में लगे हुए हैं। भड़काऊ संदेशों के जरिए भारत को भला-बुरा कहा जा रहा है।

गलवान में मारे गए चीनी सैनिकों की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है। साथ ही चीनी नागरिक तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। ये स्थिति इसलिए है, क्योंकि पिछले कई वर्षों में किसी चीनी नागरिक ने अपने सैनिकों के किसी दूसरे देश के साथ संघर्ष में मारे जाने की ख़बरें नहीं सुनी थी। चीन के शैक्षणिक संस्थानों में उन सैनिकों के लिए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जा रहा है और भारत विरोधी भाषण हो रहे हैं।

ऐसा नहीं है कि विरोध सिर्फ भारत का हो रहा है। चीन की सरकार और PLA भी वहाँ के युवाओं के निशाने पर है। नानजिंग से एक व्यक्ति को PLA पर टिप्पणी करने के कारण गिरफ्तार किया गया। वहाँ के लोग कम्युनिस्ट पार्टी से पूछ रहे हैं कि उसने इतने दिनों तक ये बात क्यों छिपाई? पार्टी मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने सरकार का बचाव करने का बीड़ा उठाते हुए कहा है कि उस समय सीमा पर स्थिरता के लिए ये आवश्यक था।

उसने कहा है कि हताहतों के आँकड़े छिपाए गए, क्योंकि उस समय स्थिति के अनुकूल यही था और अब उन ‘नायकों’ को सम्मान देने के लिए जानकारी सार्वजनिक की गई है। ‘ग्लोबल टाइम्स’ का कहना है कि चीनी युवाओं के लिए सैनिकों का मरना नई बात है, क्योंकि 1995 के बाद जन्में युवाओं ने इससे पहले इस तरह की खबर नहीं देखी। इस खुलासे के कारण वहाँ के लोग झल्लाए हुए हैं। चीन को दशकों में पहली बार करारा जवाब मिला है।

दरअसल यह गुस्सा सिर्फ सैनिकों को लेकर नहीं है। बाजार संबंधित भी है। भारत में चीनी एप्स के प्रतिबंधित होने के बाद उनका शेयर 29% गिरा है। जहाँ चीनी एप्स के इन्स्टॉल्स का शेयर 38% हुआ करता था, वहीं 2020 में ये मात्र 29% ही रह गया है। वहीं इसका फायदा भारतीय एप्स को मिला, जिनका वॉल्यूम 39% हो गया। इजरायल, यूएस, रूस और जर्मनी के एप्स को भी फायदा हुआ। भारत में इन चीनी एप्स के प्रतिबंधित होने से उनके बाजार पर भी बुरा असर पड़ा है।

बता दें कि चीनी सैनिकों के कब्र की तस्वीर वायरल होने के ठीक बाद AltNews ने उन सैनिकों की कब्रों का फैक्ट चेक किया था, जो गलवान घाटी संघर्ष के दौरान मारे गए थे। लेख की हेडलाइन में लिखाथाहै, “इंडिया टुडे ग्रुप, टाइम्स नाउ ने पीएलए कब्रिस्तान की पुरानी तस्वीरों को गलवान में मारे गए चीनी सैनिकों की कब्रों के रूप में दिखाया है।” इस लेख को प्रतीक सिन्हा, मोहम्मद जुबैर और उनके एक अन्य प्रोपेगेंडाबाज ने लिखा था।

कृषि कानून के विरोध में मंच पर लगा ‘लैला मैं लैला’ पर ठुमके: कॉन्ग्रेसी मंत्री आलम गीर की ‘जन आक्रोश रैली’

देश के तमाम विपक्षी दल केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि सुधार क़ानूनों का विरोध कर रहे हैं। इसी कड़ी में झारखंड के सरायकेला क्षेत्र में कॉन्ग्रेस के मंत्री आलमगीर आलम की ओर से ‘जन आक्रोश रैली’ का आयोजन किया गया था।

मंत्री आलमगीर आलम की रैली के दौरान विरोध का तो नहीं पता लेकिन मजाल है कि ठुमकों में कोई कमी रह गई हो! जिस मंच पर पार्टी के नेता और पदाधिकारी मौजूद थे, उससे ही ‘लैला मैं लैला’ गाने पर लटकों-झटकों से भरपूर विरोध किया गया। 

‘जन आक्रोश रैली’ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और पार्टी की पर्याप्त फ़ज़ीहत हुई। इस घटना पर भाजपा के तमाम नेताओं ने भी कॉन्ग्रेस की आलोचना की है।

18 फरवरी 2021 को सरायकेला के कुकड़ू हाट मैदान में पार्टी के ‘माइनॉरिटी सेल’ ने जन आक्रोशित रैली आयोजित की थी। इसमें कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता और ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने की बात कही जा रही है। 

हालाँकि वायरल होने वाले वीडियो में जिस मंच पर ठुमके लगाए जा रहे हैं, उस पर पार्टी का कोई वरिष्ठ पदाधिकारी या नेता नज़र नहीं आ रहा है। वीडियो में तमाम स्थानीय नेताओं के साथ-साथ कई महिलाएँ भी नज़र आ रही हैं।

वीडियो में चर्चित गाना ‘लैला मैं लैला, ऐसी हूँ लैला’ बज रहा है और एक युवती उस गाने पर ठुमके लगा रही है। मंच पर ही कृषि क़ानून के विरोध में ‘जन आक्रोश रैली’ का पोस्टर भी लगा हुआ है। इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर भी तमाम तरह की प्रतिक्रियाएँ देखने को मिली। 


कृषि क़ानून विरोध के ठुमके वाले वीडियो को झारखंड भाजपा ने भी ट्वीट किया। उसके साथ लिखा, “ये हैं कॉन्ग्रेस के संस्कार! जन समर्थन नहीं मिलने पर भीड़ को बुलाने के लिए इस तरह का आयोजन कर आखिर क्या दर्शाना चाह रही है ये पार्टी?”

वहीं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और पूर्व विधायक कुणाल षारंगी ने लिखा, “ये कॉन्ग्रेस है। ये राहुल गाँधी के सभी बड़े नेताओं की फोटो है, ये इन लोगों के किसान हैं और ये इनकी पावरी (पार्टी) हो रही है। प्लीज़ डोंट डिस्टर्ब।”