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लाल किला हिंसा में कार्रवाई हुई तेज: दिल्ली पुलिस ने जारी की 20 अन्य उपद्रवियों की तस्वीरें

गणतंत्र दिवस पर देश की राजधानी दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली के लाल किला पर हिंसा फैलाने वालों की पुलिस पहचान कर रही है। दिल्ली पुलिस ने हिंसा में कथित तौर पर शामिल 20 अन्य उपद्रवियों की तस्वीर जारी की है।

इसके पहले दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार (फरवरी 19, 2021) को लाल किला हिंसा मामले में 200 लोगों की तस्वीर जारी की थी। इन सभी पर हिंसा में शामिल होने का आरोप है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि उसने विभिन्न स्रोतों से मिले वीडियो को स्कैन करने के बाद आरोपितों की तस्वीर जारी की है।

पुलिस ने बताया कि तस्वीरें जारी करने के साथ ही इनकी पहचान करने का काम भी किया जा रहा है। इसके लिए पुलिस की टीमें जुट गई हैं। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने 26 जनवरी को जब देश का गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा था उसी दिन ट्रैक्टर परेड निकाला था। ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा भड़क गई थी और एक गुट लाल किले पर पहुँच गया था। इस दौरान वहाँ पुलिस वालों के साथ मारपीट करते हुए लाल किले पर निशान साहिब फहरा दिया गया था। दिल्ली में अन्य कई जगहों पर भी पुलिस और किसानों के बीच संघर्ष हुआ था।

ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई थी। इसका प्रमाण है कि पुलिस को जो फुटेज मिले हैं उसमें से ज्यादातर हमलावर नकाबपोश थे। पुलिस अधिकारियों की माने तो इसमें पचास से अधिक लोग नकाबपोश थे। पुलिस उन फोटोग्राफ को फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक के जरिए बेनकाब करने में जुट गई है। साथ ही पुलिस डंप डाटा के जरिए भी संदिग्धों के लोकेशन तलाशने में जुटी है।

बता दें कि नकाबपोश उपद्रवियों को लाल किला में हिंसा के दौरान पुलिस कर्मियों पर हमला करते हुए देखा गया है। कई तो पुलिसकर्मियों को घेरकर उन पर हमला कर रहे थे। पुलिस फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक और मुखबिर के जरिए इन आरोपितों की पहचान करने में जुटी है। ज्यादातर फोटोग्राफ में नकाबपोश उपद्रवियों के पास हथियार या फिर लाठी डंडे थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए क्राइम ब्रांच को अब तक डेढ़ हजार वीडियो मिल चुके हैं। जिसके जरिए हिंसा में शामिल एक-एक लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। 

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने हिंसा करने वाले 12 उपद्रवियों की तस्वीरें जारी की थी। चिन्हित किए गए इन उपद्रवियों को हिंसा के दौरान हाथ में लाठी डंडे लिए, पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और लाल किला समेत कई जगहों पर जमकर उत्पात और पुलिस वालों पर हमला करते हुए देखा गया।

शिवसेना ने सजायाफ्ता हत्यारों रहमतुल्ला खान, इंडिन शेख और अनवर शेख को पार्टी में किया शामिल: पैरोल रद्द करने की माँग

आरपीआई के वरिष्ठ नेता नरेश गायकवाड़ की हत्या के लिए दोषी तीन लोगों को मंगलवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा शिवसेना में शामिल किया गया है। इस फैसले ने विवादों को हवा दे दी है।

रिपोर्टों के अनुसार, तीनों दोषी – रहमतुल्ला खान उर्फ पापा खान, इंडिन शेख और अनवर शेख पार्टी नेता विधायक बालाजी किणीकर और ठाणे ग्रामीण अध्यक्ष गोपाल लांडगे की उपस्थिति में शिवसेना में शामिल हुए हैं। तीनों दोषी फिलहाल COVID-19 के कारण पैरोल पर हैं। तीनों अपराधी अंबरनाथ नगरपालिका परिषद चुनाव से पहले पार्टी में शामिल हुए हैं।

ठाणे जिले के दलित नेता नरेश गायकवाड़ को 2000 में 6 मुस्लिम लोगों ने मार डाला, जिनमें तीन मुस्लिम युवक शामिल थे, जो अब शिवसेना में शामिल हो गए हैं। सभी 6 आरोपितों को दलित नेता की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

दलित नेता के बेटे ने जताया शोक

नरेश गायकवाड़ के बेटे कबीर गायकवाड़ ने हत्याकांड में शामिल तीन लोगों को अपनी पार्टी में शामिल करने के लिए शिवसेना की निंदा की। नरेश गायकवाड़ राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) से जुड़े हैं। गायकवाड़ ने कहा, “मैं शिवसेना के फैसले से हैरान हूँ जिन्होंने तीन दोषियों को अपनी पार्टी में शामिल किया। उन्होंने मेरे पिता को मार डाला।”

दिवंगत नेता के बेटे ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सीएम उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी शिवसेना से इन गुंडों को बाहर निकालने के लिए कहेंगे। उन्होंने जेल अधिकारियों से दोषियों की पैरोल को रद्द करने की भी अपील की।

शहर के एक वरिष्ठ शिवसेना नेता ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए कहा कि पार्टी को नागरिक चुनाव में दलित वोटों का नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को अपने फैसले के बारे में सोचना चाहिए। इस बीच, शिवसेना विधायक बालाजी किणीकर ने कहा कि इन दोषियों को पार्टी में शामिल होने की अनुमति देना उनके वरिष्ठ नेताओं का निर्णय था।

मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा ने राम मंदिर के लिए दिया ₹11 लाख का दान, कहा- ‘अतीत के लिए मैं जिम्मेदार नहीं’

अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के सहयोग के लिए राजनीति से तमाम चेहरे आगे आए हैं। समाजवादी पार्टी के संरक्षक और बतौर मुख्यमंत्री कारसेवकों पर गोली चलवाने के आरोपित मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव ने राम मंदिर निर्माण के लिए 11 लाख रुपए का आर्थिक सहयोग किया है। इसके बाद उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया भी दी, अपर्णा यादव ने कहा कि उन्होंने ये काम अपनी स्वेच्छा से किया है। वह अपने परिवार की जिम्मेदारी नहीं ले सकती हैं, अतीत कभी भी आने वाले कल के बराबर नहीं हो सकता है। 

इसके बाद अपर्णा यादव ने यह भी कहा, “राम भारत के चरित्र, संस्कार और सभी की आस्था का केंद्र हैं। यह सिर्फ राम का मंदिर ही नहीं बल्कि राष्ट्र का मंदिर है। मुझे ऐसा लगता है कि भारत के हर नागरिक को श्रीराम मंदिर के लिए दान करना चाहिए इसलिए मैंने भी दान किया है। मैं आशा करता करती हूँ अयोध्या में श्रीराम का भव्य मंदिर निर्मित होगा।” अपर्णा यादव ने स्पष्ट किया कि वह अतीत के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, ये दान उनकी जिम्मेदारी थी। यानी ये आर्थिक सहयोग उनके परिवार की तरफ से नहीं है। 

यहाँ अतीत से अपर्णा यादव का तात्पर्य सम्भवतः बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान मुलायम सिंह यादव का कारसेवकों पर गोली चलवाने का आदेश था। उन्होंने कहा, “अतीत कभी भविष्य के बराबर नहीं हो सकता है इसलिए समझा जाना चाहिए कि मैंने अपनी जिम्मेदारी निभाई है। मैं अपने परिवार की जिम्मेदारी नहीं ले सकती हूँ।” अपर्णा यादव के विचार अक्सर उनकी पार्टी लाइन से हट कर ही होते हैं। उन्होंने कई बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यों की प्रशंसा की है। इसके अलावा उन्होंने कई बार उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सार्वजनिक रूप से आलोचना भी की है। 

अपर्णा यादव सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव की पत्नी हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी के ही टिकट पर 2017 के दौरान लखनऊ कैंट विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें भाजपा नेता रीता बहुगुणा जोशी ने उन्हें हरा दिया था। वहीं दूसरी तरफ अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए देशव्यापी धन संग्रह अभियान चल रहा है। देश भर से तमाम लोग आर्थिक सहयोग करने के लिए आगे आ रहे हैं। अब तक लगभग 1500 करोड़ से अधिक की धनराशी इकट्ठा हो चुकी है। 

‘केरल में PFI ने RSS के लोगों को हथकड़ी लगाकर निकाली रैली’: अल्लाह-हू-अकबर नारे के साथ मोपला हिन्दू नरसंहार की दिलाई याद

कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने केरल में एक रैली निकाली। इस रैली में कुछ लोगों ने RSS की यूनिफॉर्म पहनी थी। परेड में आरएसएस की यूनिफार्म में शामिल लोगों को जंजीर से भी बाँधा गया था। इस रैली के कई वीडियो और फोटो सामने आए हैं, जिसमें देखा जा सकता है कि इस दौरान अल्लाह-हू-अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर रसूलुल्लाह जैसे कई अन्य इस्लामी नारे लगाए गए।

रैली केरल के मलप्पुरम जिले के तेनियापलम शहर में आयोजित की गई थी और वीडियो में शहर के मुख्य वाणिज्यिक केंद्र चेलारी से गुजरने वाले जुलूस को दिखाया गया है।

जुलूस के दौरान कुछ नारे काफी भड़काऊ और उत्तेजक थे। इसमें आरएसएस के यूनिफार्म वाले सदस्यों को जंजीर में बँधा हुआ दिखाना भी शामिल है। रैली में आरएसएस की यूनिफार्म में लोगों के साथ कुछ लोग ब्रिटिश अधिकारियों की भी भेष-भूषा में थे। इन लोगों के हाथ में भी रस्सी बँधी और इसका दूसरा छोर लूँगी और जालीदार टोपी (skullcaps) पहने लोगों के हाथ में थी। आरएसएस और ब्रिटिश अधिकारियों का कपड़ा पहने लोग जालीदार टोपी और लूँगी पहने लोगों का अनुसरण कर रहे थे। उनके हाथ में लाठियाँ भी थी।

कुछ सूत्रों का कहना है कि पीएफआई की रैली आज ‘1921 मालाबार हिंदू नरसंहार’ या मोपला नरसंहार की शताब्दी को ‘मनाने’ के लिए की गई थी, जिसे इतिहास में 1921 के मालाबार विद्रोह के रूप में जाना जाता है। मोपला नरसंहार में तकरीबन 10,000 हिंदुओं को मौत के घाट उतारा गया। यह माना जाता है कि दंगों के मद्देनजर 1,00,000 हिंदुओं को केरल छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था। इस दौरान हिंदू मंदिरों को ध्वस्त किया गया। जबरन धर्मांतरण हुए और कई प्रकार के ऐसे अत्याचार हिंदुओं पर किए गए, जिन्हें शब्दों में बयान कर पाना लगभग नामुमकिन है।

एनी बेसेंट ने इस घटना का जिक्र अपनी किताब ‘द फ्यूचर ऑफ इंडियन पॉलिटिक्स’ में करते हुए बताया कि कैसे धर्म न त्यागने पर हिंदुओं पर अत्याचार हुए। उन्हें मारा-पीटा गया। उनके घरों में लूटपाट हुई। एनी बेंसेंट ने अपनी किताब में बताया कि करीब लाख से ज्यादा हिंदू लोगों को उस दौरान अपने घरों को तन पर बाकी एक जोड़ी कपड़े के साथ छोड़ना पड़ा था। उन्होंने लिखा, “मालाबार ने हमें सिखाया है कि इस्लामिक शासन का क्या मतलब है, और हम भारत में खिलाफत राज का एक और नमूना नहीं देखना चाहते हैं।”

बाबा साहेब अंबेडकर अपनी किताब में इस नरसंहार का जिक्र करते हैं। वे पाकिस्तान ऑर पार्टिशन ऑफ इंडिया नाम की अपनी किताब में लिखते हैं कि हिन्दुओं के खिलाफ मालाबार में मोपलाओं द्वारा किए गए खून-खराबे के अत्याचार अवर्णनीय थे। दक्षिणी भारत में हर जगह हिंदुओं के ख़िलाफ़ लहर थी। जिसे खिलाफत नेताओं ने भड़काया था।

पिछले साल जनवरी में, यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एंटी-सीएए दंगों के दौरान पीएफआई द्वारा की गई हिंसा के कारण पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहा था। केंद्र सरकार ने एंटी-सीएए हिंसा के कारण पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने को स्थगित कर दिया था।

‘जिस लुटेरे ने मठ-मंदिर तोड़े, उसके नाम से नगर का नाम मंजूर नहीं’, होशंगाबाद हुआ नर्मदापुरम: CM शिवराज का ऐलान

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की तर्ज पर शहर का नाम बदले जाने की राह पर अब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह भी चल पड़े हैं। शिवराज सिंह चौहान ने सबसे पहले होशंगाबाद का नाम बदलकर ‘नर्मदापुरम’ किए जाने की घोषणा की है। माँ नर्मदा की जयंती के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज अपनी पत्नी संग शामिल हुए और मंच से उन्होंने होशंगाबाद का नाम बदलकर नर्मदापुरम रखने की बात भी कह दी।

ये नेता कर चुके हैं माँग 

उन्होंने कहा कि जल्द ही केंद्र को होशंगाबाद का नाम बदलने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। सीएम की इस घोषणा के बाद बीजेपी नेताओं में खुशी की लहर है। बता दें कि साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने होशंगाबाद का नाम नर्मदापुरम किए जाने की माँग की थी। दोनों बीजेपी नेताओं ने कहा था कि कब तक लुटेरे हुशंगशाह के नाम से होशंगाबाद को पहचाना जाए? जिस लुटेरे ने हमारे मठ-मंदिर तोड़े, भगवान भोले के मंदिर भोजपुर का शिखर तोड़ा उसके नाम से नगर का नाम मंजूर नहीं? मोक्ष दायिनी पुण्य सलिला माँ नर्मदा जिनके दर्शन मात्र से पुण्य मिलता हो, जिनके आशीर्वाद से मध्य प्रदेश के खेत लहलहाते हों उनके नाम से नगर पहचाना जाना चाहिए। शिवराज सरकार ने पहले ही संभाग का नाम नर्मदापुरम संभाग रखा है। अब नगर का नाम भी नर्मदापुरम रखा जाए।

नए नाम का ऐलान करते हुए सीएम ने कहा कि होशंगाबाद के अस्पताल को सभी सुविधा युक्त अस्पताल बनाया जाएगा। साथ ही ऑडिटोरियम, दशहरा मैदान का उन्नयन किया जाएगा। नर्मदा के तट पर एक सभा को संबोधित करते हुए चौहान ने लोगों से पूछा कि क्या सरकार को होशंगाबाद का नाम बदलना चाहिए। इस पर लोगों ने उनको हाँ में जवाब दिया। 

चौहान ने इसके आगे लोगों से से पूछा, ‘‘नया नाम क्या होना चाहिए? इस पर लोगों ने उत्तर दिया– ‘‘नर्मदापुरम’’। इसके बाद चौहान ने कहा कि अब हम केन्द्र को होशंगाबाद का नाम बदलकर नर्मदापुरम करने का प्रस्ताव भेज रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार नर्मदा नदी के किनारे सीमेंट कंक्रीट का जंगल बनाने की अनुमति नहीं देगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नर्मदा किनारे पर बसे शहरों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाए जा रहे हैं।

मध्य प्रदेश विधानसभा के अस्थायी अध्यक्ष रामेश्वर शर्मा के नेतृत्व में मुख्यमंत्री की इस घोषणा पर खुशी जताते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं ने शनिवार (फरवरी 20, 2021) सुबह को फटाखे फोड़े। शर्मा ने कहा, ‘‘यह एक ऐतिहासिक क्षण है। नर्मदा नदी मध्य प्रदेश की जीवन रेखा है। होशंगाबाद अब तक एक हमलावर होशांगशाह के नाम से जाना जाता था लेकिन अब मध्य प्रदेश की जीवन रेखा माँ नर्मदा के नाम से जाना जाएगा। ये खुशी की बात है। मैं जन भावनाओं का सम्मान करते हुए यह घोषणा करने के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद देता हूँ।’’

अब होशंगाबाद शहर का नाम बदलने पर कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने इसका स्वागत किया है। उन्होंने कहा, “मैं सीएम शिवराज को बधाई देता हूँ। उन्होंने होशंगाबाद का नाम बदलने की बात कही है। मैं भी समर्थन करता हूँ। चाहे हलाली डैम हो या कोई और… ऐसे स्थानों का नाम बदला जाना चाहिए, जो गुलामी के नाम के परिचायक हैं।”

भयंकर आर्थिक संकट से जूझ रही कॉन्ग्रेस: बैठकों में चुनाव की जगह फंड इकट्ठा करना पार्टी के लिए बना बड़ा सिरदर्द

देश के इतिहास के सबसे पुराने राजनीतिक दलों में से एक कॉन्ग्रेस ने पिछले कुछ समय में शायद ही कोई अच्छी ख़बर सुनी हो। इस तरह की तमाम बुरी ख़बरों के बीच कॉन्ग्रेस से जुड़ी एक और बुरी ख़बर सामने आई है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ पार्टी गम्भीर आर्थिक संकट से जूझ रही है। यहाँ तक दावा किया जा रहा है कि ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमेटी की प्रदेश ईकाईयों की बैठकों में आर्थिक संकट चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा है। संगठन के तमाम शीर्ष नेताओं ने इस आर्थिक संकट से निपटने के लिए पिछले महीने महाराष्ट्र, झारखंड और पंजाब के नेताओं से मुलाक़ात की थी। 

अमूमन इन बैठकों में संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती है, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष का चयन और अन्य पदों का वितरण शामिल है। लेकिन कॉन्ग्रेस की पिछली कुछ बैठकों में आर्थिक मुद्दा चिंता का विषय बना रहा। बैठक में शामिल होने वाले नेताओं और पदाधिकारियों को कहा गया कि वह आर्थिक संकट से निपटने की जिम्मेदारी को गम्भीरता से लें। रिपोर्ट के मुताबिक़ कॉन्ग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी के आर्थिक विकल्प पिछले कुछ समय में सीमित हुए हैं इसलिए बैठकों में उन पर चर्चा ज़रूरी हो गई थी।

कॉन्ग्रेस के लिए यह आर्थिक संकट बड़ा इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं, केरल, असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुदुचेरी। इस पर पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना था कि 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में संगठन की प्रबंधन क्षमता की परीक्षा होगी। इस बात को मद्देनज़र रखते हुए प्रदेश संगठन से मदद माँगी गई है। इसी दौरान राजधानी दिल्ली स्थित पार्टी का नया मुख्यालय भी एक चर्चा का विषय है। आगामी कुछ समय तक उसका निर्माण कार्य जारी रहेगा। 

2014 के आम चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद से ही कॉन्ग्रेस के लिए फंड इकट्ठा करना चुनौती से कम नहीं है। इस दौरान देश के कई बड़े राज्यों में भाजपा ने चुनाव जीत कर सत्ता हासिल की है। पंजाब, छत्तीसगढ़ और राजस्थान ही तीन ऐसे राज्य हैं जहाँ कॉन्ग्रेस की सरकार बची है। बाकी महाराष्ट्र और झारखंड में कॉन्ग्रेस सहयोगी दल की भूमिका में है, जहाँ बड़े चेहरे शिवसेना, एनसीपी और जेएमएम हैं।

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि फंडिंग एक राजनीतिक दल के लिए अहम बिंदुओं में से एक है। रिपोर्ट के मुताबिक़ कॉन्ग्रेस आर्थिक सहयोग इकट्ठा करने के लिए प्रतिनिधि नियुक्त करने की योजना पर काम कर रही है। इस आर्थिक संकट की वजह से पार्टी के सांसद और विधायक भी काफी दबाव में हैं।  

‘लड़कियों का रेप हुआ, जबरन जला दिया’: उन्नाव मामले पर कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने फैलाई फेक न्यूज़, यूपी पुलिस ने दर्ज की FIR

कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने उन्नाव में दो लड़कियों की मौत और एक की गंभीर स्थिति वाली घटना को लेकर रेप की झूठी अफवाह फैलाई है। यूपी पुलिस ने कॉन्ग्रेस नेता के इस झूठ का पर्दाफाश किया है। उदित राज ने दावा किया था कि उनकी पूर्व सांसद सावित्रीबाई फुले से बात हुई है और पुलिस ने उन्हें बड़ी मुश्किल से उन्नाव के पीड़ित परिजनों से मिलने दिया। उदित राज ने लिखा, “पीड़ित परिजनों ने बताया है कि बच्चियों के साथ बलात्कार हुआ है।”

उन्होंने ये भी दावा कर डाला कि मर्जी के खिलाफ मृतक लड़कियों की लाशें जला दी गईं। उन्नाव पुलिस ने प्रेस रिलीज के माध्यम से इस झूठ का भंडाफोड़ करते हुए बताया कि असोहा थाना अंतर्गत बबुरहा में हुई घटना में उदित राज ने भ्रामक, गलत और साक्ष्यों की उपेक्षा करके आक्रोश फैलाने वाली पोस्ट की है। ‘मृतकों के साथ बलात्कार होने और उनकी लाशें बिना मर्जी के जलाने’ वाली बात झूठी अफवाह है।

उन्नाव पुलिस ने कहा कि जनमानस को भड़काने के लिए इस तरह का बयान दिया गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दोनों लड़कियों के साथ किसी भी प्रकार के बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई है। ऊपर से सच्चाई ये है कि शवों को जलाया भी नहीं गया है, उन्हें दफनाया गया है। ये काम पुलिस ने नहीं, परिजनों ने ही किया है। पुलिस ने कहा कि ये सब बिना किसी दबाव के स्वेच्छापूर्ण तरीके से किया गया। उदित राज ने फेक न्यूज़ फैलाई।

उन्नाव पुलिस ने झूठी अफवाहों का किया भंडाफोड़

उन्नाव पुलिस ने कहा है कि पूर्व सांसद ने उक्त ट्वीट जानबूझ कर मनगढंत और फर्जी ख़बरें फैलाने के लिए किया गया। सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई गई। इसीलिए, उनके खिलाफ कोतवाली सदर उन्नाव थाना में IPC की धारा-155 और आईटी एक्ट 66 के तहत FIR दर्ज करके आगे की कार्रवाई की जा रही है। उदित राज ने पुलिस पर केस की लीपापोती का आरोप लगाया था। उन्होंने यूपी भवन पर प्रदर्शन भी किया।

बता दें कि पड़ताल में पता चला है कि पूरा मामला एक तरफा प्रेम का था। लड़कियों की कीटनाशक पिलाकर हत्या करने की कोशिश हुई थी, जिनमें 2 की मौत हो गई। इस बात को आरोपित विनय ने स्वयं स्वीकार किया है। उसने बताया कि लड़की के इंकार करने पर उसने पानी की बोतल में कीटनाशक मिलाकर उसे पिलाया, लेकिन वह पानी अन्य दोनों लड़कियों ने भी पी लिया। तीनों लड़कियाँ दोनों आरोपित लड़कों को जानती थीं।

केजरीवाल के स्वास्थ्य मंत्री के कोरोना इलाज में हुए ₹2.5 लाख खर्च, सरकारी खजाने से भरा निजी अस्पताल का बिल: RTI में खुलासा

कोरोना महामारी के दौरान दिल्ली में एक ओर जहाँ गरीबों को बिस्तर और दवाई नसीब नहीं हो पा रही थी, वहीं दूसरी ओर दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री के कोरोना वायरस के इलाज के दौरान 2,54,898 रुपए का खर्च आया है। एक आरटीआई के जवाब में इस बात की जानकारी मिली है। आरटीआई कार्यकर्ता विवेक पांडेय ने एक आरटीआई दायर कर इस मामले में जानकारी माँगी थी।

विवेक पांडेय 10 जनवरी 2021 को आरटीआई डाल कर दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र कुमार जैन के इलाज पर दिल्ली सरकार द्वारा किए गए खर्चों का विवरण माँगा था। जिसका जवाब देते हुए कहा गया है कि राजीव गाँधी सुपर स्पेशेलिटी अस्पताल में हुए इलाज का बिल ऑफिस में उपलब्ध नहीं है। वहीं, साकेत के मैक्स सुपर स्पेशेलिटी अस्पताल में उनके इलाज के दौरान 2,54,898 रुपए दिल्ली सरकार की तरफ से भरे गए थे। केजरीवाल सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन का इलाज इस अपस्ताल में 19 जून 2020 से 26 जून 2020 तक चला था।

उस समय मैक्स अस्पताल दैनिक रूप से रूटीन जनरल वार्ड के 25,090 रुपए, रूटीन ट्विन-शेयरिंग के लिए 27,190 रुपए, रुटीन वार्ड प्लस प्राइवेट रूम के लिए 30,490 रुपए, बिना वेंटीलेटर के आईसीयू के लिए 53,050 रुपए और वेंटीलेटर के साथ आईसीयू के लिए 72,550 रुपए चार्ज कर रहा था।

गौरतलब है कि दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन में कोविड-19 के लक्षण दिखने के बाद उन्हें राजीव गाँधी सुपर स्पेशेलिटी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार (जून 15, 2020) को उन्हें साँस लेने में दिक्कत शुरू हुई थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। वहाँ उन्हें कुछ समय तक ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया। सत्येंद्र जैन ने दिल्ली सरकार से ये बिल वसूल किया था।

सत्येंद्र जैन के अस्पतला में भर्ती होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने पूछना शुरू कर दिया कि आखिर वो घर पर क्यों नहीं है? दरअसल लोगों ने उनसे यह सवाल इसलिए किया था क्योंकि इससे पहले सत्येंद्र जैन ने कोविड-19 के मरीजों को लेकर इस बात को स्पष्ट किया था कि अगर कोरोना किसी को हो भी जाता है, तो वह अस्पताल की ओर न भागें, क्योंकि उसका इलाज घर में रखकर किया जाएगा, उसे प्रॉपर गाइड किया जाएगा, डॉक्टर उसे घर पर आकर देखेंगे। हालत बहुत बिगड़ने पर ही अस्पताल में एडमिट किया जाएगा। 

बता दें कि सत्येंद्र जैन ने दिल्ली में कोरोना के बढ़ते प्रकोप के लिए बाहरी लोगों को जिम्मेदार ठहराया था। स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने इसकी जिम्मेदारी लेने के बजाय बाहरी लोगों पर इसका दोष मढ़ना शुरू कर दिया था। न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उनका कहना था कि सक्रिय मामलों की संख्या में वृद्धि का कारण दिल्ली के बाहर के लोग हैं। जो कोरोना वायरस का टेस्ट दिल्ली में करा रहे हैं।

फायरिंग करते हुए भाग रहा था 4 साल की बच्ची से रेप करने वाला अपराधी, अब ज़िंदगी भर लँगड़ाते हुए चलेगा: UP पुलिस का कमाल

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शलभ मणि त्रिपाठी ने एक वीडियो ट्विटर पर शेयर किया, जो चर्चा का विषय बना हुआ है। उसमें एक अपराधी लँगड़ा कर चलता हुआ दिख रहा है और उसके पाँव में पट्टी बँधी हुई है। पुलिस उसे सहारा देकर चला रही है। दरअसल, ये घटना मेरठ के सिंभावली थाना क्षेत्र की है और उक्त अपराधी पर बलात्कार का आरोप है।

उसने एक 4 वर्षीय नाबालिग बच्ची का अपहरण कर के उसके साथ दरिंदगी की थी। पुलिस की गश्त के दौरान उससे मुठभेड़ हुई। शलभ मणि त्रिपाठी ने बताया, “UP पुलिस की गोली के असहनीय दर्द से कराहते इस दानव ने अपने परिचित परिवार की बालिका से गुनाह किया। नतीजा सामने है। डाक्टरों के मुताबिक, जान तो बच गई पर ये ताउम्र घिसट-घिसट कर ही चल पाएगा। बताते हैं, भागते वक्त फायरिंग कर रहा था, लिहाजा पुलिस को भी मजबूरन गोली दागनी पड़ी।”

बता दें कि एक स्थानीय किसान की 2 पुत्रियाँ ट्यूशन पढ़ कर आ रही थीं, लेकिन रास्ते में उसकी 4 वर्षीय पुत्री का एक बाइक सवार ने अपहरण कर लिया। बाद में बच्ची कोतवाली किठौर क्षेत्र अंतर्गत गाँव महलवाला के जंगल में बदहवास अवस्था में पड़ी हुई मिली थी। सिंभावली और किठौर थानों की पुलिस ने बच्ची को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ रेप की पुष्टि हुई। ग्रामीणों के आक्रोश के बाद पुलिस ने आश्वासन दिया था कि 24 घंटे में आरोपित को धर-दबोचा जाएगा।

शनिवार (फरवरी 20, 2021) को गुप्त सूचना के आधार पर यूपी पुलिस ने मध्य गंग नहर पटरी पर वाहन चेकिंग शुरू की, लेकिन बाइक पर सवाल अपराधी ने रुकने की बजाए फायरिंग शुरू कर दी और भागना की कोशिश की। पुलिस की जवाबी गोलीबारी में उसके पैर में गोली लगी और वो घायल हो गया। अनुज कुमार नामक ये अपराधी किला परीक्षितगढ़ स्थित गोविंदपुरी का निवासी है। उससे पूछताछ जारी है।

राम मंदिर-RSS के खिलाफ जहर उगलकर मुस्लिमों को डराने वाले PFI नेता अनीस अहमद के खिलाफ होगी कार्रवाई, कर्नाटक के गृहमंत्री ने भाषण को बताया देशविरोधी

कर्नाटक (Karnataka) के गृहमंत्री बासवराज बोम्मई (Basavaraj Bommai) ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के महासचिव अनीस अहमद के भाषण को ‘देश विरोधी’ और ‘नफरत भरा’ करार दिया है। शुक्रवार (फरवरी 19, 2021) को बोम्मई ने कहा कि उन्होंने पुलिस से इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहा है।

मुस्लिमों को डराने की कोशिश करते हुए आरएसएस-राम मंदिर के खिलाफ उगला था जहर

बासवराज बोम्मई मंगलुरू के नजदीक उल्लाल में गुरुवार को ‘पॉपुलर फ्रंट डे’ के अवसर पर पीएफआई के महासचिव अनीस अहमद (Anees Ahmed) के भाषण पर प्रतिक्रिया जता रहे थे। 7 फरवरी को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के स्थापना दिवस पर मंगलुरू में PFI महासचिव अनीस अहमद ने जहरीला भाषण दिया। भाषण में अनीस अहमद ने केंद्र की भाजपा सरकार और आरएसएस के खिलाफ जमकर जहर उगला था।

अहमद ने आरोप लगाए कि पीएफआई को लगातार निशाना बनाया जाता रहेगा। उन्होंने पीएफआई के गिरफ्तार कार्यकर्ताओं को ‘हीरो’ बताया। साथ ही उन्होंने अनुयायियों व मुस्लिमों से कहा कि उन लोगों का बहिष्कार करें जो राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा कर रहे हैं, जिस तरह उन्होंने एनआरसी का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह ‘आरएसएस का मंदिर है न कि राम का मंदिर है।’

बोम्मई ने कहा, ‘‘उन्होंने देश के खिलाफ बोला है, संविधान के खिलाफ बोला है। यह देश विरोधी भाषण है, नफरत भरा भाषण है जो देश के लोगों के बीच विभाजन करने का प्रयास है। खासकर उन्होंने आरएसएस के बारे में बात की है, जो देश के सबसे अधिक देशभक्त संगठनों में एक है।’’

राज्य के गृहमंत्री ने संवाददाताओं से कहा कि पीएफआई नेता ने राम मंदिर के बारे में बात की जबकि उच्चतम न्यायालय ने इसके निर्माण की अनुमति दी है। मंत्री ने कहा, ‘‘पीएफआई ने कई बार अपना असली रंग दिखाया है। यह सर्वाधिक देश विरोधी और गैर जिम्मेदाराना बयान है। मैंने स्थानीय पुलिस से पूरे मामले का संज्ञान लेने और कार्रवाई करने के लिए कहा है।’’

गौरतलब है कि कर्नाटक के मंगलुरू में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के महासचिव अनीस अहमद ने आरएसएस और राम मंदिर के नाम पर भड़काऊ भाषण दिया था। अनीस अहमद ने मुसलमानों को RSS के नाम पर डराया भी और भड़काया भी। इसके बाद मुसलमानों ये ये भी कहा कि अगर अपनी आवाज़ नहीं उठाई, तो उन्हें कुचल दिया जाएगा।

उसने CAA से लेकर दिल्ली दंगे और किसान आंदोलन हर चीज़ का ज़िक्र किया और एजेंडा बिल्कुल साफ था मुसलमानों के मन में जहर घोलना। अनीस ने कहा- “इंडिया का असल दुश्मन बिना किसी संदेह के आरएसएस है। कोविड आया चला गया… पोलिया आया चला गया। इसके लिए वैक्सीन भी आ जाती है लेकिन आरएसएस ऐसा एक वायरस है जिसके लिए अभी कोई वैक्सीन नहीं आई है। इंशा अल्लाह वो वैक्सीन पॉपुलर फ्रंट लेकर आएगा।”