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पाकिस्तानी नैरेटिव के लिए वाड्रा कॉन्ग्रेस और एंटी-रिपब्लिक ने की थी बैटिंग, देशहित से किया था खिलवाड़: अर्णब

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी (Arnab Goswami) ने पिछले कुछ दिनों से उन पर लगाए जा रहे तमाम आरोपों का मुँहतोड़ जवाब दिया है। दरअसल, यह विवाद अर्णब गोस्वामी के व्हाट्सएप्प संदेशों के लीक होने से शुरू हुआ और आरोप लगाए गए कि अर्णब को बालाकोट पर वायुसेना की एयरस्ट्राइक की जानकारी पहले से ही थी।

इन संदेशों की जो भ्रामक व्याख्या भारत के कुछ ‘फैक्ट चेकर्स’ द्वारा की गई, उसके ही आधार पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी अब भारत सरकार पर सैन्य ऑपरेशंस का इस्तेमाल चुनाव जीतने के लिए करने जैसे आरोप लगाए हैं।

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क ने अर्णब गोस्वामी (Arnab Goswami) की ओर से एक बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद बालाकोट वाली जवाबी कार्रवाई का इन्तजार सिर्फ एक ही व्यक्ति को नहीं बल्कि पूरे भारत को था और सभी राष्ट्रभक्त नागरिक जानते थे कि केंद्र सरकार कुछ ‘बड़ा’ कर सकती है।

अर्णब गोस्वामी ने कहा कि इमरान खान ने शुरू में किसी भी तरह की एयरस्ट्राइक से मना किया था लेकिन बाद में स्वीकार किया कि भारत ने कार्रवाई की और बाद में कहा कि बालाकोट फर्जी ‘फ्लैग ऑपरेशन’ नहीं थे।

उन्होंने लिखा कि मुझे यह देखकर ज्यादा हैरानी हुई है कि वाड्रा कॉन्ग्रेस के साथ मिलकर रिपब्लिक मीडिया विरोधियों ने पाकिस्तान के नैरेटिव को हवा देने की कोशिश की। अर्णब ने अपने इस जवाब का अंत ‘सत्यमेव जयते’ के सन्देश के साथ किया है।

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर ऑल्ट न्यूज़ नाम के कथित फैक्ट चेकर गिरोह द्वारा लगातार ही अर्णब की चैट की भ्रामक व्याख्या की जा रही हैं। इन्हीं का फायदा उठाकर कॉन्ग्रेस ने भी सरकार के खिलाफ माहौल खड़ा करने की कोशिश की और इन सबका फायदा कुल मिलाकर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने उठाया है।

अर्णब गोस्वामी की चैट ‘लीक’ होने के बाद बढ़ा विवाद

लीक हुई व्हाट्सएप्प चैट अर्णब गोस्वामी और BARC के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता के बीच चर्चा से संबंधित है। हाल ही में इंटरनेट पर लीक हुई चैट ‘चमत्कारिक रूप से’ सामने आई है और मीडिया में विपक्षी दलों एवं उनके कठपुतलियों के बीच हॉट डिबेट का विषय रहा है। अब ये बात सामने आ गई है कि निजी चैट को मुंबई पुलिस ने ही लीक किया था।

अपनी आदत के अनुसार विपक्षी दल मोदी सरकार के खिलाफ जाते हुए चैट को लेकर जाँच की माँग कर रहे हैं। वो चैट के जिन हिस्सों को लेकर जाँच की माँग कर रहे हैं, वह बालाकोट एयरस्ट्राइक से संबंधित है।

विपक्षी दलों के अनुसार, अर्णब गोस्वामी को हवाई हमलों से तीन दिन पहले ही पता था कि भारत सरकार, पाकिस्तान के खिलाफ कोई ‘बड़ी कार्रवाई’ करने वाली है। लीक हुई चैट में अर्णब कहते हैं, “एक सामान्य हवाई हमले से भी बड़ा हमला होने वाला है और इसी समय कश्मीर पर कुछ बड़ा होने वाला है। पाकिस्तान पर भारत सरकार इस तरह से हमला करने के लिए आश्वस्त है, जिससे लोगों को गौरव महसूस होगा।”

यहाँ एकमात्र समस्या यह है कि विपक्षी दल के राजनेता जो भी आरोप लगा रहे हैं, वह किसी भी आरोप को साबित नहीं करता है। कॉन्ग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने ट्विटर पर कहा, “अगर मीडिया का एक वर्ग रिपोर्टिंग कर रहा है, तो यह सही है, यह बालाकोट हवाई हमलों और 2019 के आम चुनावों के बीच सीधे संबंध की ओर इशारा करता है। क्या राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनावी उद्देश्यों के लिए नजरअंदाज कर दिया गया था? जेपीसी जाँच की जरूरत है।”

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से पूछा, “क्या एक पत्रकार (और उनके दोस्त) को वास्तविक एयर स्ट्राइक से तीन दिन पहले बालाकोट शिविर में जवाबी हमले के बारे में पता था? यदि हाँ, तो इस बात की क्या गारंटी है कि उनके ‘सोर्स’ ने दूसरों के साथ-साथ पाकिस्तान के लिए काम करने वाले जासूसों या मुखबिरों के साथ जानकारी साझा नहीं की? ‘For Your Eyes Only’ निर्णय सरकार-समर्थक पत्रकार के पास कैसे पहुँचा?”

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने टिप्पणी की, “व्हाट्सएप्प चैट का ट्रांसक्रिप्ट स्पष्ट रूप से दिखाता है कि सरकार ने बालाकोट हमलों और धारा 370 को खत्म करने वाले दोनों निर्णय के बारे में टीवी एंकर को पूर्व सूचना दी थी। क्या हो रहा है? क्या मैं अकेली हूँ जो सोचती है कि मोदी-शाह हमें जवाब देते हैं?”

सोनिया गाँधी ने किया था वादा, लेकिन पार्टी में चुनाव का अब तक कुछ पता नहीं: कपिल सिब्बल

कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव को लेकर पार्टी नेताओं का एक खेमा लगातार आवाज उठा रहा है। पिछले महीने सक्रिय नेतृत्व और व्यापक संगठनात्मक बदलाव की माँग को लेकर पार्टी के 23 नेताओं ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को पत्र लिखा था। लेकिन, अब एक माह बाद भी उस विषय पर स्पष्ट जवाब न मिलने के कारण पार्टी के दिग्गज नेता कपिल सिब्बल ने दोबारा सवाल उठाए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से मैं उस बैठक में नहीं था। मैं कहीं जा रहा था। लेकिन मुझे लगता है कि हमने खुली बातचीत की थी, और जाहिर है, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने कहा था कि चुनाव होगा। हालाँकि, अब तक ये स्पष्ट नहीं है कि ये चुनाव कब और कैसे होंगे। हमारा मानना है कि पार्टी के आंतरिक चुनाव संविधान के प्रावधानों के हिसाब से ही कराए जाएँगे।”

वह बोले, “जिन लोगों को लगता है कि वह पहले से ही एक राजनीतिक शक्ति हैं और बहुत मजबूत राजनीतिक ताकत हैं और वह सब कर रहे हैं या यह पुनरुद्धार की प्रक्रिया शुरू हो गई है, तो मुझे लगता है, विभिन्न राज्यों में क्या हो रहा है, इस पर ध्यान देने की जरूरत है। पार्टी को लेकर लोग मायूस हैं। नेताओं का पार्टी से मोहभंग हो रहा है। मैं दिल्ली के बारे में बात कर सकता हूँ। कई नेता मेरे पास आए हैं और दिल्ली में प्रक्रियाओं के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त की है और चाहते हैं कि पार्टी तेजी से कार्य करे। लेकिन अभी तक हमें उस तरह की प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिसकी हम उम्मीद कर रहे थे।”

राहुल गाँधी के दोबारा अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा वाले सवाल पर कपिल सिब्बल ने कहा, “हम चर्चाओं-अटकलों का जवाब नहीं देते, हम वास्तविकाता का जवाब देते हैं। जब चर्चा के टेबल पर यह बात आएगी, तो हम इसका जवाब देंगे।”

इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि क्या राहुल गाँधी की वापसी से पार्टी में बदलाव की संभावना है। इस पर सिब्बल ने कहा, “मुझे लगता है कि यह सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि पार्टी में किस तरह से संविधान की प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है। इसमें कॉन्ग्रेस के सभी महत्वपूर्ण लोगों के साथ विचार विमर्श भी काफी अहम है।”

अपने साक्षात्कार में उन्होंने किसान आंदोलन पर बात की। सिब्बल ने कहा कि इन सबसे बचने का एक ही उपाय है कि किसान को उसकी उपज के लिए सही एमएसपी दी जाए। वह बोले कि ऐसे वक्त में जब इंडस्ट्री को मैक्सिमम सपोर्ट मिल रहा है, किसान न्यूनतम समर्थन की मूल्य की माँग के लिए आंदोलन कर रहे हैं।

सिब्बल ने हमला बोलते हुए कहा कि सरकार ने जो कुछ भी किया है, वह बिना सोचे समझे किया है। चाहे फिर वह नोटबंदी हो, जीएसटी या फिर कृषि कानून हो। मुद्दों को भटकाना इस सरकार के डीएनए में है। यह एक सल्तनत के निर्णयों की तरह है। हम मध्यकालीन भारत के दिनों में वापस भेज दिए गए हैं।

26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर रैली होगी या नहीं – पुलिस तय करेगी: SC ने कहा – ‘कानून-सम्मत कार्रवाई के लिए स्वतंत्र’

सुप्रीम कोर्ट ने ‘किसान आंदोलन’ को लेकर सोमवार (जनवरी 22, 2021) को सुनवाई की। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने कहा कि गणतंत्र दिवस के दिन किसान संगठनों की ट्रैक्टर रैली को लेकर दिल्ली पुलिस निर्णय लेगी। उन्होंने अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल से कहा कि किसे दिल्ली की सीमा के भीतर रैली निकालने की अनुमति देनी है, किसे नहीं या कितने लोग आएँगे – ये सब कुछ पुलिस तय करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो इन कानून-व्यवस्था के मसलों पर फैसला लेने के लिए ‘फर्स्ट अथॉरिटी’ नहीं है, पुलिस इन मामलों को निपटेगी। दिल्ली पुलिस ने सर्वोच्च न्यायालय में इन्जंक्शन एप्लीकेशन देकर अपील की थी कि 26 जनवरी के दिन प्रस्तावित किसान संगठनों की ट्रैक्टर रैली पर रोक लगाई जाए। जनवरी 12 को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया था, जिस पर आज सुनवाई हुई। वहीं अब किसान नेताओं के भी तेवर बदले नजर आए।

जहाँ मीडिया के सामने किसान संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट की कमिटी के साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया था, वहीं अब भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) ने एक याचिका देकर समिति के पुनर्गठन की माँग की है, जिसके एक सदस्य भूपिंदर सिंह मान ने इससे खुद को अलग कर लिया था। पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों के लागू होने पर रोक लगा दी थी।

इस बार CJI बोबडे के साथ जस्टिस एलएन राव और जस्टिस विनीत शरण की पीठ ने इस मामले को सुना। इससे पहले जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यन ने सुनवाई की थी। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि गणततंत्र दिवस के दिन बिना अनुमति 5000 प्रदर्शनकारियों का इस तरह से राजधानी में घुस जाना अवैध है। इस पर CJI ने कहा कि आप अपने अधिकार-क्षेत्र में से हर प्रकार की कानून-सम्मत कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं।

AG का जोर इस बात पर था कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आदेश पारित करे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या अब केंद्र सरकार को वो ये कहेंगे कि आपके पास कानून के अंतर्गत शक्तियाँ हैं या नहीं? इस पर AG ने स्पष्ट किया कि फ़िलहाल यूनियन ऑफ इंडिया एक ऐसी समस्या और परिस्थिति से गुजर रहा है, जैसा पहले नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जब इस मामले को हाथ में लिया है तो उसे ये आदेश देना चाहिए।

इस पर CJI बोबडे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले को अपने हाथ में नहीं लिया है और सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप को इस मामले में लोगों ने ठीक से समझा नहीं है। चूँकि आज अलग पीठ सुनवाई कर रही थी, इसीलिए सुप्रीम कोर्ट अब बुधवार को इस मामले को सुनेगा। किसान संगठनों की तरफ से अधिवक्ता दुष्यंत दवे सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे। CJI ने कहा कि वो बुधवार को सभी पक्षों को सुनेंगे।

इससे पहले अदालत की चिंता को दरकिनार करते हुए किसान नेताओं ने बयान दिया था कि किसान आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा था, “कानून अपना काम करता रहेगा, लेकिन हमारा आंदोलन चलता रहेगा। हम संतुष्ट नहीं हैं। जब तक बिल वापसी नहीं होगी। हमारी भी घर वापसी नहीं होगी। कानून तो इन्हें वापस करना होगा।” 26 जनवरी की ट्रैक्टर रैली को लेकर भी वो अड़े हुए हैं।

‘कॉन्ग्रेस से ₹10 करोड़ लेकर किसान नेता ने की खट्टर सरकार गिराने की डील, टिकट भी माँगा’: संयुक्त मोर्चा की बैठक में हंगामा

केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ कई सप्ताह से विरोध प्रदर्शन कर आम लोगों के नाक में दम करने वाले किसान संगठनों के नेता अब आपस में ही सिर-फुटव्वल पर उतर आए हैं। रविवार (जनवरी 17, 2021) को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में ये फूट तब सतह पर आ गई, जब भारतीय किसान यूनियन (हरियाणा) के अध्यक्ष गुरनाम चढूनी पर आंदोलन के नाम पर एक कॉन्ग्रेस नेता से 10 करोड़ रुपए लेने के आरोप लगे।

अन्य संगठनों ने आरोप लगाया कि गुरनाम चढूनी ने ‘किसान आंदोलन’ को राजनीति का अड्डा बना कर रख दिया है और इसमें कॉन्ग्रेस नेताओं को बुला रहे हैं। आरोप लगाया गया कि हरियाणा के कॉन्ग्रेस नेता से उन्होंने रुपए लिए और वो दिल्ली में सक्रिय हैं। आरोप लगा कि वो कॉन्ग्रेस के चुनावी टिकट के एवज में हरियाणा में भाजपा-जजपा की सरकार गिराने के लिए भी डील कर रहे हैं। हालाँकि, चढूनी ने इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया है।

‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, ‘किसान आंदोलन’ के 54वें दिन सभी किसान संगठनों ने मिल कर ऐलान किया कि उनका कोई भी नेता NIA के समन का पालन नहीं करेगा और किसी भी जाँच एजेंसी के समक्ष पेश नहीं होगा। वहीं ‘ऑल इंडिया किसान सभा’ के नेता और 8 बार के सांसद हन्नान मुला ने खुद को सुप्रीम कोर्ट से की जा रही उस माँग से अलग कर लिया है, जिसमें बातचीत के लिए दोबारा समिति बनाने की बात कही जा रही है।

वहीं गुरनाम चढूनी से सारे किसान नेता चिढ़े हुए और आक्रोशित दिखे। उन्हें आंदोलन से निकाल बाहर किए जाने की माँग की गई। अंततः जाँच के लिए 3 सदस्यीय कमिटी बनाई गई, जिसे बुधवार तक मोर्चे के समक्ष रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। इससे 1 दिन पहले केंद्र सरकार के साथ बैठक भी है, ऐसे में वो उसमें शामिल होंगे या नहीं – ये स्पष्ट नहीं है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर उन्हें मोर्चे में रखने या निकालने का निर्णय लिया जाएगा।

चढूनी पर आरोप है कि एक तो वो मोर्चे से अलग फंडिंग का जुगाड़ लगाते हैं, लेकिन इसका कोई हिसाब-किताब नहीं देते। हरियाणा के बड़े कॉन्ग्रेस नेता से धनराशि लेकर ये बात सबसे छिपाने के आरोप उन पर लगे हैं। साथ ही आंदोलन स्थल पर अपने टेंट में राजनेताओं को लाने के आरोप लगाए गए। कहा गया कि दिल्ली में ‘किसान संसद’ के नाम पर उन्होंने जनवरी में 10, 14 और 17 तारीख को कई राजनेताओं को बुलाया।

‘दैनिक भास्कर’ में प्रकाशित खबर (साभार)

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की कमिटी से किसान नेता भूपिंदर सिंह मान ने अपना नाम वापस ले लिया था। उन्होंने कहा कि उन्होंने सत्ता पक्ष, विदेशी संस्थाओं या किसी संगठन के दबाव के बिना ही ये फैसला लिया है और उन्हें मिल रही धमकियों की खबरें अफवाह मात्र हैं। उन्होंने पूछा कि जब किसान कमिटी से बात ही नहीं करना चाहते तो वो कैसे सदस्य बने रह सकते हैं? मान ने कहा कि वो कानूनों के पक्ष में नहीं हैं और किसानों की माँगें जायज हैं।

बलदेव सिंह सिरसा भी NIA के समक्ष समन मिलने के बावजूद पेश नहीं हुए। सिरसा ने दावा किया था कि केंद्र सरकार गणतंत्र दिवस के दिन प्रस्तावित किसानों की ट्रैक्टर रैली से डर गई है और इसीलिए वो ‘पंजाब के लोगों को डराने-धमकाने’ के लिए NIA के नोटिस का इस्तेमाल कर रही है। बकौल सिरसा, इस समन का एक ही उद्देश्य है – किसान आंदोलन को पटरी से उतारना। समन की खबर फैलते ही उनके समर्थक भी उग्र हो गए थे और अमृतसर के एक मॉल के बाहर जमा हो कर जम कर हंगामा किया था।

‘नंगा कर परेड कराऊँगा… ऋचा चड्ढा की जुबान काटने वाले को ₹2 करोड़’: भीम सेना का ऐलान, भड़कीं स्वरा भास्कर

बॉलीवुड अभिनेत्री ऋचा चड्ढा की आने वाली फिल्म ‘मैडम चीफ मिनिस्टर’ विवादों में फँस गई है। ‘भीम सेना’ नामक संगठन ने इसे दलित-विरोधी बताते हुए अभिनेत्री की जुबान काट लेने की धमकी दी है, जिसके बाद स्वरा भास्कर सरीखों ने इस फिल्म का समर्थन किया है। स्वरा भास्कर ने इसे निंदनीय और शर्मनाक करार देते हुए कहा कि किसी फिल्म के साथ वैचारिक मतभेद हो सकते हैं लेकिन आपराधिक धमकियाँ और हिंसा के लिए भड़काना जायज नहीं है।

दरअसल, गुरुग्राम में ‘भीम सेना’ के प्रमुख नवाब सतपाल तँवर ने अभिनेत्री ऋचा चड्ढा की जुबान काट कर लाने वालों को इनाम देने की घोषणा की है। उन्होंने ऐलान किया है कि जो इस फिल्म के निर्देशक सुभाष कपूर का अपहरण कर के उनके पास लेकर आएगा, उसे भी इनाम दिया जाएगा। ‘भीम सेना’ के मुखिया ने अपने आधिकारिक फेसबुक हैंडल से वीडियो जारी कर ये घोषणा की। उन्होंने इस फिल्म को प्रतिबंधित करने की माँग भी की।

दलित संगठनों का कहना है कि इस फिल्म को उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व बसपा सुप्रीमो मायावती के जीवन पर बनाया गया है और लुक्स भी उनके ही लिए गए हैं। इसमें मायावती के जीवन को तोड़-मरोड़ कर दिखाने के साथ ही उनके चरित्र हनन, बेहूदगी, बेशर्मी और अश्लीलता दिखाते हुए उनके अपमान का आरोप भी लगा है। ‘नौजवानों मैं कुँवारी हूँ, तेज कटारी हूँ’ वाले बोल पर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है।

‘भीम सेना’ प्रमुख ने कहा, “जो भी ऋचा चड्ढा की जीभ काट कर लाएगा, उसे 2 करोड़ रुपए की कीमत वाली बाबासाहब भीमराव आंबेडकर की सोने की शील्ड से सम्मानित किया जाएगा। अगर फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई तो थिएटरों को जलाया जाएगा और पोस्टरों को फाड़ डाला जाएगा। सुभाष कपूर को तो मैं नंगा कर के सड़क पर परेड कराऊँगा।” ये फिल्म शुक्रवार (जनवरी 22, 2021) को रिलीज होने वाली है।

इस बयान पर भड़कीं स्वरा भास्कर ने सभी अम्बेडकरवादियों, दलित एक्टिविस्ट्स, दलित फेमिनिस्ट्स और ‘अच्छे लोगों’ से अपील की है कि वो खड़े हों और इसकी निंदा करें। ‘मैडम चीफ मिनिस्टर’ में ‘मेट्रो बनाने वाले हार जाते हैं, मंदिर बनाने वाले जीतते हैं’ जैसे कई डायलॉग्स के जरिए नैरेटिव बनाने की कोशिश की गई है। साथ ही दिखाया गया है कि दलितों को मंदिर में नहीं जाने दिया जाता। ऋचा के झाड़ू पकड़े एक दृश्य को लेकर दलित संगठनों में आक्रोश है।

बता दें कि टी-सीरीज फिल्म्स और काँगड़ा टॉकीज़ द्वारा निर्मित इस फिल्म के पोस्टर में ऋचा चड्ढा अपने हाथ में झाड़ू लिए देखी जा सकती हैं और उनके साथ मानव कौल और सौरभ शुक्ला नजर आ रहे हैं। साथ ही एक टैगलाइन है, ‘Untouchable, Unstoppable’ यानी, ‘अछूत, अजेय’। दलित संगठनों का कहना है कि यह एक जातिवादी फिल्म है और बेचने के लिए दलितों के प्रतिनिधित्व को इस्तेमाल किया जा रहा है।

योगी सरकार का किसानों के लिए काम: खरीदा लक्ष्य से ज्यादा धान, गन्ना-गेहूँ-धान का किया रिकॉर्ड भुगतान

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने तय समय से करीब 2 महीने पहले ही धान खरीद का कार्यकारी लक्ष्‍य पूरा करके अपने नाम एक नया रिकॉर्ड दर्ज किया है। जानकारी के मुताबिक योगी सरकार के सामने 55 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य था। लेकिन उन्होंने 60 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद कर रिकॉर्ड कायम किया। 

लक्ष्य से अधिक हासिल करने के बाद भी सरकार ने कहा कि वह धान खरीद को जारी रखेंगे। बता दें कि अब तक की धान खरीद पिछले वर्ष इस अवधि के मुकाबले हुई धान खरीद से लगभग डेढ़ गुना ज्यादा है। वहीं यूपी कार्यकारी लक्ष्य पूरा करने वाला पहला राज्य बन गया है। 

गेहूँ और धान किसानों को योगी सरकार ने किया कितना भुगतान?

सरकारी आँकड़ों के मुताबिक राज्‍य सरकार ने लगभग 8 लाख धान किसानों को अब तक लगभग ₹7800 करोड़ का भुगतान किया। वहीं पिछले चार सालों की बात करें तो धान किसानों को कुल ₹32000 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है।

योगी सरकार ने अपनी इसी निरंतरता के साथ गेहूँ किसानों को भी भुगतान करने के मामले में पिछली सरकारों को पीछे छोड़ दिया है। 4 साल के कार्यकाल में राज्‍य सरकार ने 33 लाख से ज्‍यादा गेहूँ किसानों की फसल के लिए ₹29017.45 करोड़ का भुगतान किया है।

कुल मिलाकर राज्‍य सरकार ने 14 दिसंबर तक प्रदेश के गेहूँ और धान किसानों को ₹60922.23 करोड़ का भुगतान किया है। ये आँकड़ा बताता है कि योगी सरकार ने 4 साल में प्रदेश के धान और गेहूँ किसानों को अब तक का सबसे अधिक भुगतान किया है।

किसानों की फसल के दाने-दाने का भुगतान करने की नीति के तहत राज्‍य सरकार ने कार्यकाल के पहले वर्ष 2017-18 में 42.90 लाख मीट्रिक टन धान खरीद के लिए ₹6663.32 करोड़ का भुगतान किया। 2018-19 में 48.25 लाख मीट्रिक टन के लिए ₹8449.39 करोड़ का भुगतान। वर्ष 2019-20 में 56.47 लाख मीट्रिक टन के लिए ₹10274.25 करोड़ का भुगतान किया गया।

किसानों के बदलते हालात और योगी सरकार की नीतियाँ

बता दें कि योगी सरकार ने किसानों को उनकी ऊपज की बेहतर कीमत देने के लिए सत्ता में आते ही कई कदम उठाए थे। यही वजह है कि धान और गेहूँ किसानों को खाद्यान्‍न की सीधी, पारदर्शी और त्‍वरित भुगतान प्रक्रिया के पीछे मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के प्रयासों को बड़ा कारण माना जा रहा है। 

उन्होंने बिचौलियों की भूमिका को खत्म करते हुए किसानों से सीधे खरीद प्रक्रिया को शुरू किया। ई-उपार्जन पोर्टल बनाया गया और किसानों को सीधे पंजीकृत किया गया। इसके बाद इसे राजस्‍व पोर्टल से लिंक कराया गया।

सीमांत एवं लघु किसानों के लिए कदम उठाए गए। 100 क्विंटल तक खरीद को राजस्‍व विभाग के सत्‍यापन से मुक्‍त रखा गया और 100 क्विंटल से अधिक बिक्री करने वाले किसानों को राजस्‍व विभाग से सत्‍यापन की सुविधा दी गई। लघु व सीमांत किसानों को खाद्यान्‍न बेचने के लिए दो दिन योगी सरकार ने आरक्षित किए। महिला किसानों को खाद्यान्‍न बेचने में योगी सरकार ने प्राथमिकता दी।

याद दिला दें कि इससे पहले गन्‍ना किसानों को भी योगी सरकार ₹111063.34 करोड़ का भुगतान करके नया रिकॉर्ड बना चुकी है। अखिलेश सरकार के कार्यकाल में गन्‍ना किसानों के ₹10659.42 करोड़ के बकाए का भुगतान भी योगी सरकार ने किसानों को किया ।

बुंदेलखंड में शुरू हुई स्ट्रॉबेरी की खेती

यूपी के बुंदेलखंड में स्ट्रॉबेरी की खेती भी योगी शासनकाल में दर्ज की गई नई उपलब्धि है। सीएम योगी ने इसके लिए किसानों को बधाई दी। उन्होंने स्ट्रॉबेरी महोत्सव का वर्चुअल शुभारंभ करते इस नए प्रकार की खेती को चमत्कार जैसा बताकर दावा किया कि इससे न के केवल बुंदेलखंड को नई पहचान मिलेगी बल्कि यहाँ के लोगों का पलायन भी रुकेगा।

उन्होंने कहा कि स्ट्रॉबेरी महोत्सव पूरे बुंदेलखंड के किसानों के लिए नई प्रेरणा का केंद्र बिंदु बनेगा। यह किसानों की आमदनी को कई गुना बढ़ाने के साथ ही मार्केट की माँग के अनुरूप आपूर्ति करने में सहायक साबित होगा।

बता दें कि झाँसी में पहली बार स्ट्रॉबेरी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से स्ट्रॉबेरी महोत्सव का शुभारंभ करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “आज यह भी तय हो ही गया कि बुंदेलखंड में सब कुछ है। झाँसी में स्ट्रॉबेरी का उगाया जाना तो हमारे बुंदेलखंड के किसानों के परिश्रम का परिणाम है। मैं इसके लिए सभी किसान बंधुओं को हृदय से बधाई देता हूँ।” 

उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में स्ट्रॉबेरी का उत्पादन कार्य घर की छत से प्रारम्भ किया गया था। इसके बाद इसे वहाँ के खेतों में रोपित किया गया। किसानों की मेहनत का यह परिणाम, अब यह एक महोत्सव के रूप में पूरे झाँसी व बुंदेलखंड में एक नई पहचान दिलाने का काम करेगा। 

सीएम ने बुंदेलखंड के नागरिकों में कार्य करने की दृढ़ इच्छाशक्ति को सराहा और वहाँ की उर्वरा भूमि की तारीफ की। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले तक इस प्रतिभा को उचित मंच नहीं मिल पा रहा था। जिसके चलते वहाँ के लोगों को पलायन करना पड़ता था। लेकिन सरकार ने वहाँ उचित माहौल देने का बीड़ा उठाया।

बुंदेलखंड की पिछड़े क्षेत्र के रूप में स्थापित छवि को समाप्त कर विकास की नई धारा शुरु की। वर्षों से रुकी पड़ी सिंचाई परियोजनाओं को शुरू कराया। कोरोना काल में प्रदेश भर के किसानों की दिक्कतों को दूर किया और उन्हें बीज से लेकर बाजार तक उपलब्ध कराया।

Pak को तोड़ कर सिंधूदेश बनाने की माँग, PM मोदी की फोटो के साथ हजारों-लाखों पाकिस्तानियों ने निकाली रैली

पाकिस्तान के बलूचिस्तान के बाद अब सिंध में भी स्वतंत्रता के लिए आंदोलन तेज़ हो गया है। सिंध प्रांत के सन्न शहर में हजारों प्रर्दशनकारी पाकिस्तान से आज़ादी की माँग करते हुए सड़कों पर उतरे। इस दौरान उनके हाथों में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पोस्टर भी थे। ये रैली रविवार (जनवरी 17, 2021) को हुई। लोगों ने ‘आज़ादी-आज़ादी’ के नारे लगाए और पाकिस्तान से काट कर एक अलग स्वतंत्र राष्ट्र सिंधुदेश बनाने की माँग की।

उन लोगों ने अपने हाथों में कुछ अन्य वैश्विक नेताओं के पोस्टर्स भी ला रखे थे, जिन्हें वो लहरा रहे थे। इनमें जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल, रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बायडेन शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों ने इन वैश्विक नेताओं से माँग करते हुए कहा कि वो हस्तक्षेप कर के सिंधुदेश के गठन की वकालत करें। इन पोस्टरों पर लिखा था -‘सिंध, पाकिस्तान से आज़ादी चाहता है।’

ये पहली बार नहीं है, जब सिंधी लोगों ने आज़ादी की माँग की हो। वो वर्षों से इसके लिए संघर्ष कर रहे हैं। जीएम सैयद को आधुनिक सिंध राष्ट्रवाद का जनक माना जाता है और इस रैली को उनकी ही 117वीं जयंती के मौके पर आयोजित किया गया गया। दिवंगत नेता के गृह क्षेत्र जमसोरो में इस विशाल रैली का आयोजन हुआ। जेई सिंध मुत्तहिदा महाज के अध्यक्ष शफी मुहम्मद बुरफात सहित कई नेताओं ने इसका नेतृत्व किया।

उन्होंने सिंधियों को अलग, बहुलवादी, सहिष्णु और सामंजस्यपूर्ण समाज बताते हुए कहा कि तमाम बर्बर हमलों के बीच सिंध ने अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित कर के रखा है। उन्होंने कहा कि मानव सभ्यता को सिंध ने नई पहचान दी है। रैली में मौजूद लोगों ने सिंध को ‘सिंधु घाटी सभ्यता और वैदिक धर्मों का घर’ बताते हुए कहा कि पहले अंग्रेजों ने इस पर जबरन कब्ज़ा किया, फिर 1947 में पाकिस्तान के इस्लामी हाथों में पहुँचा दिया।

बरफात ने आगे कहा, “उद्योग, दर्शन, समुद्री नेविगेशन, गणित और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी सिंध ने भारत को अपना नाम दिया। आज पाकिस्तान के सिंध ने एक फासीवादी इस्लामी जंजीर में इस क्षेत्र व यहाँ के लोगों को बाँध कर रखा है। पाकिस्तान न सिर्फ यहाँ के संसाधनों का दोहन कर रहा है, बल्कि मानवाधिकार का भी लगातार उल्लंघन करने में लिप्त है। सिंध के कई संगठन आज़ादी के समर्थन में हैं और वो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस माँग को उठाते रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि सिंध के नागरिक अब उस पाकिस्तान का हिस्सा बन कर रहना ही नहीं चाहते, जो दमनकारी नीतियों पर चलता है। उन्होंने फासीवाद से मुक्ति दिलाने के लिए पूरी दुनिया के बड़े नेताओं से अपील की। जेई सिंध मुत्तहिदा महाज के अध्यक्ष ने कहा कि पाकिस्तान एक आतंकवादी और इस्लामी राज्य है। सैयद के साथ-साथ 1967 में पीर अली मोहम्मद रश्दी ने भी इस आंदोलन की शुरुआत की थी।

पाकिस्तान कई सालों से बलूचिस्तान और अपने जबरन कब्जे वाले कश्मीर में भी इसी तरह के प्रदर्शनों का सामना कर रहा है। पाकिस्तान में रहने वाले बलूचिस्तान के बलूच चीन के बढ़ते निवेश के कारण भी नाराज़ हैं। 2020 में कोरोना काल के मध्य ही चीन की एक कंपनी की नज़र बलूचिस्तान में सोने और ताम्बे के खदानों पर थी, जिसके बाद उसने खनन का ठेका भी ले लिया। 40 करोड़ टन सोने की खान को चीन को सौंप दिया गया।

राम मंदिर के लिए डोनेशन माँग रहे हिन्दू कार्यकर्ताओं पर हमला: घेर कर लगाई आग, बचाने आई गुजरात पुलिस पर भी पत्थरबाजी

पिछले कुछ दिनों में राम मंदिर संकल्प निधि के लिए दान माँग रहे हिन्दू कार्यकर्ताओं पर देश के कई हिस्सों में हमले की खबरें आई हैं। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद अब ताज़ा मामला गुजरात के कच्छ का है, जहाँ गाँधीधाम के किदाना गाँव में इसे लेकर दो समुदायों के बीच संघर्ष हो गया, जो दंगे में बदल गया। ये घटना रविवार (जानवर 17, 2021) की शाम की है, जब हिन्दू कार्यकर्ता अयोध्या में निर्माणाधीन राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने निकले थे।

गाँधीधाम के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) वीआर पटेल ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए बताया कि ये दो समूहों के बीच के संघर्ष का मामला है और पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँच कर स्थिति को नियंत्रण में कर लिया है। पुलिस ने कहा है कि इस मामले में आगे जाँच की जा रही है। पुलिस ने बताया कि गाँव में राम रथयात्रा पर कुछ शरारती तत्वों द्वारा पत्थरबाजी के बाद ये संघर्ष शुरू हुआ, जो हिंसक हो गया।

पुलिस ने दोनों समूहों में से कई लोगों को गिरफ्तार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बी डिवीजन पुलिस थाना के इंचार्ज सुमित देसाई ने कहा कि अभी पुलिस शिकायत लिखने में ही व्यस्त है, इसीलिए इस घटना में घायलों की संख्या का अनुमान नहीं लगाया जा सका है। FIR दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, स्थिति इतनी भयंकर हो गई कि ये दंगेबाजी में बदल गई।

भगवान श्रीराम के रथ के पास एक समूह जमा हो गया और उसने वहाँ आगजनी शुरू कर दी। इस रैली का आयोजन विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने किया था। इस दौरान हिंसक भीड़ ने एक ऑटो और 2 बाइकों को भी आग के हवाले कर दिया। वो हिंसा पर उतारू थे। किदाना गाँव में IPC की धारा-144 लगा दी गई है और कर्फ्यू जैसा माहौल है। पुलिस को स्थिति शांत करने के लिए आँसू गैस के गोले के इस्तेमाल करना पड़ा।

वहीं मुंद्रा तालुका के सडाऊ गाँव में भी इसी तरह की घटना हुई। कच्छ के रेंज इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IGP) जेआर मोथालिया ने कहा कि किदाना के राम रथयात्रा के पास अचानक से एक बड़ी भीड़ जमा हो गई, जिन्होंने पत्थरबाजी शुरू कर दी। TOI के सूत्रों का कहना है कि पुलिस को भी नहीं छोड़ा गया और जवानों पर भी भारी पत्थरबाजी हुई, जिसमें कुछ घायल भी हुए हैं। इसी तरह अंजार में भी तनाव हो गया, जहाँ के मार्ग से कई कंपनियों के कर्मचारी दफ्तर जाते हैं।

इसी तरह मुंबई पुलिस ने मालवणी में विश्व हिन्दू परिषद् (VHP) के 3 नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था। इन विहिप नेताओं ने ‘राम मंदिर समर्पण निधि’ अभियान के लिए पोस्टर लगाए थे, जिसके बाद मुंबई पुलिस ने ये कार्रवाई की थी। मुंबई पुलिस ने भगवान राम के पोस्टर को भी फाड़ डाला था, जिसका वीडियो और तस्वीरें वायरल होने के बाद लोग आक्रोशित हो गए थे। राम मंदिर निर्माण के लिए धन जुटाने हेतु विहिप अभियान चला रहा है, जिसके तहत लोगों से चंदा माँगा जा रहा है।

‘1 इंच भी नहीं देंगे’: CM उद्धव के ‘कर्नाटक का क्षेत्र मिलाएँगे महाराष्ट्र में’ ऐलान पर भड़के कन्नड़ नेता और लोग

कर्नाटक के मंत्री सुरेश कुमार ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को जम कर खरी-खोटी सुनाई है। उन्होंने रविवार (जनवरी 17, 2021) को कहा कि उद्धव ठाकरे का बयान राजनीतिक रूप से खुद को श्रेष्ठ दिखाने की उनकी कोशिश को प्रदर्शित करता है। दरअसल, सीएम उद्धव ने कहा था कि वो कर्नाटक के उन क्षेत्रों को महाराष्ट्र में मिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जहाँ मराठी भाषी रहते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए कइयों ने ‘बलिदान’ दिया है, जिन्हें ये सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

अब कर्नाटक के मंत्री और कन्नड़ एक्टिविस्ट्स ने उन्हें सलाह दी है कि वो दोनों राज्यों के बीच सीमा-विवाद को बढ़ावा देने के बदले अपने राज्य में कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई पर ध्यान दें, विकास परियोजनाओं पर अपना फोकस रखें। राज्य के शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार ने कहा कि सीमा-विवाद पहले ही अच्छी तरह सुलझा लिया गया है और सीएम उद्धव सही मुद्दों पर ध्यान दें। उन्होंने सलाह दी कि ऐसे मुद्दों को लेकर हंगामा करने से कुछ नहीं होने वाला है।

उद्धव ठाकरे ने अपनी ट्वीट्स में कहा था, “कर्नाटक द्वारा कब्ज़ा किए गए मराठी भाषी लोगों और मराठा संस्कृति के क्षेत्रों को हम महाराष्ट्र में मिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सीमा-विवाद के बलिदानियों के लिए यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हम इसके लिए एक हैं। इस वादे के साथ हम बलिदानियों को सम्मान देते हैं।” बता दें कि बेलगावी सहित कुछ हिस्से कभी बॉम्बे प्रेसिडेंसी का हिस्सा हुआ करते थे। यहाँ मराठी भाषी बहुमत में हैं।

इसी विवाद में 1956 में कई लोगों की मौत हो गई थी, जिन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए ‘महाराष्ट्र एकीकरण समिति’ सहित अन्य मराठा संस्थाएँ जनवरी 17 को ‘बलिदान दिवस’ के रूप में मनाती आ रही हैं। उत्तरी कर्नाटक के बेलगाम के बेलगावी में कर्नाटक ने विधान सौधा की तर्ज पर एक ‘सुवर्ण विधान सौधा’ बना रखा है, ताकि इस क्षेत्र को राज्य का अभिन्न अंग दिखाया जा सके। यहाँ साल में एक बार विधान सौधा का सेशन भी होता है।

उधर ‘बेलगावी डस्ट्रिक्ट कन्नड़ आर्गेनाईजेशन एक्शन कमिटी’ के अध्यक्ष अशोक चंडारगी ने कहा कि महाराष्ट्र ने सुप्रीम कोर्ट में एक सूट दायर किया हुआ है। उन्होंने कहा कि सीमा-विवाद 2004 में ही सुलझा लिया गया था लेकिन महाराष्ट्र सरकार यहाँ आवागमन पर प्रतिबंध लगाती है। उन्होंने सलाह दी कि महाराष्ट्र सरकार इस लड़ाई को या तो सड़क पर लड़े, या कोर्ट में। सीमा-विवाद के मामले को देखने के लिए कर्नाटक में एक अलग से मंत्री बनाए जाने की भी माँग की जा रही है।

उधर राज्य के जल संसाधन मंत्री रमेश जारखीहोली ने कहा कि महाराष्ट्र को कर्नाटक एक इंच जमीन भी नहीं देगा। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार पर इस मामले में ‘गैर-ज़रूरी कन्फ्यूजन’ पैदा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि महाजन कमीशन की रिपोर्ट स्वीकृत हो गई है और अब एक इंच जमीन भी देने का सवाल नहीं उठता। ‘कन्नड़ डेवलपमेंट अथॉरिटी (KDA)’ के अध्यक्ष टीएस नागभरण ने भी इसे दोहराया। वहीं कुछ एक्टिविस्ट्स ने कहा कि महाराष्ट्र को शोलापुर कर्नाटक को दे देना चाहिए।

‘बीवी को चुम्मा भी नहीं ले सकता… जबकि दिल चाहता है’ – फारूक अब्दुल्ला ने महामारी के डर पर कही बात

नेशनल कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने रविवार (जनवरी 17, 2021) को जम्मू में एक किताब विमोचन कार्यक्रम के दौरान बताया कि कोरोना महामारी के कारण वह अपनी पत्नी का चुम्मा भी नहीं ले सके। उनके इस हास्यास्पद बयान की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। वीडियो में अन्य लोग उनकी बात सुन कर ठहाके लगाते भी नजर आ रहे हैं।

बता दें कि गुर्जर देश चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित कार्यक्रम में फारूक अब्दुल्ला ने महामारी पर बात करते हुए अपनी यह बात रखी। उन्होंने कहा स्थिति यह है कि कोई भी हाथ मिलाने या गले लगने तक से डरता है। अब्दुल्ला ने कहा, “यहाँ तक कि मैं अपनी पत्नी का किस तक नहीं ले सकता। गले लगने का तो सवाल ही नहीं है जबकि दिल ऐसा करना चाहता है। मैं बिलकुल सही कह रहा हूँ।”

गौरतलब है कि अपनी इच्छा जाहिर करते समय अब्दुल्ला कोरोना वैक्सीन व देश में फैली महामारी पर बात कर रहे थे। उन्होंने अपनी इस बात को कहने से पहले यह भी कहा कि कोरोना की वैक्सीन आ गई है। लेकिन ये वक्त ही बताएगा कि ये वैक्सीन कितनी असरदार है। अल्लाह करे ये बीमारी दफा हो जाए। उन्होंने बताया कि कैसे जब भी उनकी बेटी उन्हें बिना मास्क के देखती है तो वह उनसे घर लौटने को कहती है।

इसके अतिरिक्त उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केंद्र शासित प्रदेश में 4जी इंटरनेट सेवा बहाल करने की बात कहने के बहाने निशाना साधा। वह बोले, “प्रधानमंत्री कहते हैं कि भारत में 5जी आ रहा है, जबकि हम 4जी (मोबाइल इंटरनेट सेवा) से भी वंचित हैं। वह कुर्सी छोड़ने के बाद यहाँ आएँ और रह कर देखें कि हम 2जी (सेवा) के साथ कैसे जी रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “छात्र अपने घर पर हैं और वे इंटरनेट के जरिए पढ़ाई कर रहे हैं तथा व्यावसायी भी इंटरनेट सेवा पर निर्भर हैं। मेरा प्रधानमंत्री से अनुरोध है कि यदि आप कहते हैं कि यह स्थान विकास के पथ पर है तो हमें अल्लाह की खातिर 4जी दीजिए ताकि हम भी और हमारे बच्चे भी आगे बढ़ सकें।”