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‘टॉप और ब्रा उतारो’ – साजिद खान ने जिया को कहा था, 16 साल की बहन को बोला – ‘…मेरे साथ सेक्स करना है’

यौन शोषण के आरोपित व बॉलीवुड फिल्म निर्माता साजिद खान के ख़िलाफ़ एक बार फिर सोशल मीडिया पर आवाज उठनी शुरू हो गई है। इस बार दिवंगत अभिनेत्री जिया खान की बहन करिश्मा की एक वीडियो क्लिप शेयर करके बताया जा रहा है कि साजिद खान ह्यूमर के नाम पर किस तरह लड़कियों से सेक्स की बातें किया करता था।

ये क्लिप बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री का एक हिस्सा है। इसमें करिश्मा कहती हैं, “मुझे याद है कि मैं अपनी बहन(जिया) के साथ साजिद खान के घर गई थी। उस समय मैं शायद सिर्फ़ 16 साल की थी। हम लोग किचन टेबल के पास थे। मैंने पतली स्ट्रिप वाला टॉप पहना था और टेबल पर झुकी हुई थी।” 

वीडियो में आगे जिया की बहन कहती हैं, “वो मुझे लगातार देख रहा था और उसने अचानक कहा- “ओह इसे मेरे साथ सेक्स करना है।” मेरी बहन जिया फौरन मेरे पक्ष में आई और कहा, “तुम क्या कह रहे हो।”

साजिद खान ने कहा, “देखो- ये कैसे बैठी है।” इस पर मेरी बहन ने कहा, “अरे नहीं। ये मासूम है और छोटी भी। वो ये सब नहीं चाहती।” इसके बाद करिश्मा ने बताया कि वो अपनी बहन के साथ वहाँ से चली आई। लेकिन उन्होंने वीडियो में बताया कि उन्हें बहुत हैरानी और घिनौना महसूस हो रहा था। जिया की बहन कहती हैं कि जब साजिद खान ने उनकी बहन से टॉप उतारने को कहा था, तब वह घर आकर बहुत रोईं थीं।

जिया खान की बहन करिश्मा बताती हैं:

“वो रिहर्सल का समय था। वह स्क्रिप्ट पढ़ रही थी, तभी उसने (साजिद) ने उससे उसका टॉप और ब्रा हटाने को कहा। उसे नहीं समझ आया कि वो क्या करे। उसने कहा था कि अभी तो फिल्म शुरू भी नहीं हुई और ये सब अभी से हो रहा है। वो घर आकर बहुत रोई थी। उसका कहना था कि उनके पास कॉन्ट्रैक्ट हैं। अगर मैंने छोड़ा तो मुझ पर मुकदमा होगा। अगर नहीं छोड़ा तो मेरा यौन उत्पीड़न होगा। हर स्थिति हारने वाली है।'”

बीबीसी की इस वीडियो क्लिप को सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। इसे अभिनेत्री कंगना रनौत ने शेयर करके लिखा है, “उन्होंने जिया को मार डाला, उन्होंने सुशांत को मार डाला और उन्होंने मुझे मारने की कोशिश की, लेकिन वे आजाद घूमते हैं, माफिया का पूरा समर्थन है, हर साल मजबूत और सफल हो रहे हैं। पता है कि दुनिया आदर्श नहीं है या तो आप शिकार या शिकारी हैं। आपको कोई नहीं बचाएगा, आपको खुद को बचाना होगा।”

गौरतलब है कि अभी हाल में बीबीसी ने ‘डेथ इन बॉलीवुड’ शीर्षक के साथ जिया खान की मृत्यु पर तीन वीडियो डॉक्यूमेंट्री की है। ये सीरीज केवल यूके में देखी जा सकती है। इसी सीरीज में एक वीडियो क्लिप जिया खान की बहन करिश्मा की है। जिसमें उन्होंने साजिद पर उक्त आरोप लगाए हैं

जानकारी के लिए बता दें कि साजिद खान के साथ जिया ने हाउसफुल 4 में काम किया था। इस फिल्म में कई अन्य नामी कलाकार थे। साल 2018 में साजिद के ऊपर मी टू के तहत आरोप लगने शुरू हुए और देखते ही देखते इस सूची में कई नाम जुड़े। आज करिश्मा की वीडियो शेयर करके यही कहा जा रहा है कि इतने आरोपों के बाद भी साजिद को आज तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।

कोरोना टीका से हुई मुरादाबाद ज‍िला अस्‍पताल के वार्ड ब्‍वॉय की मौत? जानिए, क्या है सच

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिला अस्पताल के वार्ड ब्‍वॉय महिपाल सिंह (46 साल) की कोरोना वैक्सीन लगने के 24 घंटे बाद अचानक हालत बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि कोविड-19 से बचाव के लिए अस्पताल में शनिवार को वैक्सीन लगी थी। इसके बाद ही महिपाल की हालत बिगड़ी और मौत हुई। 

हालाँकि मुख्य चिकित्सा अधिकारी एमसी गर्ग ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए मृतक के परिजनों के दावों को खारिज किया है। उनका कहना है कि कोविड वैक्सीन के टीकाकरण से किसी की मौत संभव नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, महिपाल की मौत हार्ट अटैक से हुई है।

16 जनवरी को महिपाल को लगी थी वैक्सीन

16 जनवरी से पूरे भारत में कोविड-19 टीकाकरण की शुरुआत हुई थी। मुरादाबाद जिला अस्पताल में भी स्वास्थ कर्मचारियों को वैक्सीन का टीका लगाया गया था। जिला अस्पताल में तैनात महिपाल सिंह ने भी 16 जनवरी को 12 बजे के करीब कोविड वैक्सीन लगवाया था। जिसके बाद बेटे को अस्पताल बुलाकर घर वापस आ गए। उसी रात में इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी भी की थी। रविवार (जनवरी 17, 2021) को ड्यूटी से घर वापस आने के बाद अचानक महिपाल की तबीयत बिगड़ गई। जिसके बाद महिपाल को जिला अस्पताल लाया गया। जहाँ डॉक्टर ने उनको मृत घोषित कर दिया।

परिजनों का यह है आरोप

परिजनों का आरोप है कि कोरोना वैक्सीन की वजह से ही महिपाल की हालत बिगड़ी और मौत हो गई। ड्यूटी करके घर वापस आए तो तबीयत खराब थी। मृतक महिपाल के बेटे विशाल ने बताया कि जब सुबह पिता अस्पताल में ड्यूटी कर घर वापस आए तो उनकी तबीयत खराब थी। मैं घर पर नहीं था। मेरे पास फोन आया कि पापा की तबीयत बहुत खराब है। परिवार वाले उनको जिला अस्पताल ले गए जहाँ उनकी मृत्यु हो गई। पापा को निमोनिया थी। उनकी साँस फूल रही थी।

महिपाल सिंह की मौत के बाद मुख्य चिकित्साधिकारी एमसी गर्ग भी उनके घर पहुँचे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा, “महिपाल सिंह हमारे जिला चिकित्सालय में वार्ड ब्‍वॉय के पद पर तैनात थे। उनकी शाम 6 बजे मृत्यु हो गई। मृतक को दोपहर में सीने में दर्द और साँस फूलने में दिक्कत हुई थी और उसके बाद उन्हें जिला चिकित्सालय में मृत अवस्था में ले जाया गया। 16 जनवरी को उनको करीब बारह बजे कोरोना वैक्सीन दी गई थी।”

सीएमओ ने आगे कहा, ” इनको दिन में सीने में जकड़न और साँस फूलने में दिक्कत हुई थी, इनकी उम्र 46 वर्ष थी। मृत्यु के कारण की जाँच की जा रही है। पोस्टमार्टम कराएँगे। ये पहले कोरोना संक्रमित नहीं थे। वैक्सीन का कोई रिएक्शन प्रतीत नहीं होता है। रात में इन्होंने नाइट ड्यूटी भी की थी, कोई दिक्कत नहीं थी।”

सीएमओ ने जारी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट

बाद में सीएमओ की तरफ से पोस्टमार्टम रिपोर्ट जारी करते हुए बताया गया कि मौत का वैक्सीन से कोई संबंध नहीं है। डॉ. शशि भूषण, डॉ. आरपी मिश्रा, डॉ. निर्मल ओझा की टीम ने पोस्टमार्टम किया। वार्ड ब्‍वॉय की हार्ट अटैक से मौत होने की पुष्टि हुई। बुखार नहीं था, फेफड़ों में पस पाया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एमसी गर्ग ने बताया कि तीन डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया है। हार्ट अटैक की वजह से वार्ड ब्‍वॉय की मौत हुई है। कोरोना वैक्सीनेशन की वजह से मौत नहीं हुई है। 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट (साभार: News18)

पोस्‍टमार्टम र‍िपोर्ट में एक ओर चौंकाने वाला सच सामने आया है। च‍िक‍ित्‍सकों के मुताब‍िक सामान्‍य मनुष्‍य का हर्ट 800 ग्राम का होता है, लेकिन वार्ड ब्‍वॉय का द‍िल 500 ग्राम का निकला। इसका कारण क्‍या है, यह जाँच का व‍िषय है। उन्होंने यह भी बताया कि मुरादाबाद में 479 स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना का टीका लगाया गया था। महिपाल के अलावा सभी की हालत ठीक है।

महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक के दामाद समीर खान को कोर्ट से राहत नहीं, ड्रग्स मामले में एनसीबी ने किया था गिरफ्तार

एनसीपी नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक के दामाद समीर खान को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उसे ड्रग केस में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। सोमवार (जनवरी 18, 2021) को उसे मेडिकल के लिए ले जाया गया। इसके बाद कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ उसे कोई राहत नहीं मिली।

नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने 13 अक्टूबर को समीर खान को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने एनसीबी को समीर खान की 18 जनवरी तक कस्टडी दी थी। अब उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

दामाद की गिरफ्तारी के बाद नवाब मलिक ने कहा था, ”कोई भी आदमी कानून से ऊपर नहीं है। इसे बिना किसी भेदभाव के लागू किया जाना चाहिए। मैं अपनी न्यायपालिका में बहुत विश्वास और इसका सम्मान करता हूँ।”

दरअसल, ड्रग्स और बॉलीवुड से जुड़े मामलों की जाँच के दौरान एनसीबी को यह पता चला था कि इस मामले के एक आरोपित और समीर खान के बीच 20,000 रुपयों का ऑनलाइन लेन-देन हुआ है। इस मामले में ब्रिटिश नागरिक करण सजनानी और दो अन्य आरोपितों को 200 किलो प्रतिबंधित ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया गया था। दो अन्य आरोपितों में रहिला फर्नीचरवाला और उनकी बहन शाइस्ता फर्नीचरवाला थे। रहीला फर्नीचरवाला फिल्म अभिनेत्री दीया मिर्जा के पूर्व प्रबंधक हैं।

बता दें कि इसी ड्रग केस को रिपब्लिक मीडिया समूह ने प्रमुखता से अपने टीवी चैनल पर चलाया था। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार पर भी कई तरह के सवाल उठे और एडिटर अर्नब गोस्वामी पर उद्धव सरकार शिकंजा कसती गई। पिछले साल अक्टूबर में महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक ने दावा किया था कि रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी खुद पर लगे आरोपों और महाराष्ट्र सरकार द्वारा दर्ज कराए गए मामलों से निराश होकर आत्महत्या कर लेंगे।

शिवलिंग पर कंडोम: बंगाली अभिनेत्री सायानी घोष के खिलाफ ‘शिव भक्त’ नेता ने की कंप्लेन

बंगाली फिल्म अभिनेत्री सायानी घोष के ख़िलाफ़ मेघालय के पूर्व राज्यपाल व भाजपा के वरिष्ठ नेता तथागत रॉय ने शिकायत दर्ज करवाई है। यह शिकायत कोलकाता के रबींद्र सारोबार पुलिस थाने में शनिवार को दर्ज हुई।

16 जनवरी 2021 को दायर अपनी शिकायत मेंरॉय ने कहा, “मैं भगवान शिव का एक भक्त हूँ और मैंने 1996 में तिब्बत में कैलाश-मानसरोवर की यात्रा की ताकि उनकी पूजा कर सकूँ। संलग्न की गई तस्वीर में गंभीर रूप से मेरी धार्मिक मान्यताओं का अपमान किया गया। यह आईपीसी की धारा 295A के तहत अपराध है। मैं अनुरोध करता हूँ कि इस अपराध पर ध्यान दिया जाए और सायानी घोष के ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई करें।”

बता दें कि शिकायत कराने से पहले भाजपा नेता ने सायानी घोष को ट्विटर पर चेतावनी दी थी कि उन्हें इस कृत्य के बदले अब परिणामों के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने लिखा था, “मिस सायानी घोष, आपने एक शिवलिंग पर कंडोम डाला है, जिसे मेरे सहित सभी हिंदू पवित्र से भी पवित्रतम मानते हैं!”

उन्होंने कहा था कि यह भारतीय दंड संहिता की धारा 295 ए के तहत एक संज्ञेय, गैर-जमानती अपराध है। इसलिए वह अब परिणाम के लिए तैयार रहें। उनके अलावा सायानी के ख़िलाफ़ गुवाहटी के पलटन बाजार थाने में भी शिकायत दर्ज हुई थी।

गौरतलब है कि साल 2015 में ट्विटर पर साझा किए गए एक हिंदूफोबिक ट्वीट के लिए सायानी घोष को सोशल मीडिया पर आलोचनाओं को सामना करना पड़ रहा है। 18 फरवरी 2015 को अभिनेत्री ने एक तस्वीर पोस्ट की थी, जिसमें एक महिला को पवित्र हिंदू प्रतीक शिवलिंग के ऊपर कंडोम डालते हुए दिख रही थी। उन्होंने इस तस्वीर को कैप्शन दिया था ‘Gods cudnt have been more useful’ (भगवान अब और उपकारी नहीं हो सकते)।

बता दें कि ट्वीट पर विवाद होने के बाद अभिनेत्री ने इस हिंदूफोबिक ट्वीट को हैकर द्वारा किया गया ट्वीट बताया था। उन्होंने दावा किया था कि अपमानजनक पोस्ट हैकर की करतूत थी। उन्होंने खुद के ट्वीट को ‘अप्रिय’ करार देते हुए लिखा था,

“डिअर ऑल, 2015 के एक पोस्ट मेरे ध्यान में लाया गया है जो अत्यंत अप्रिय है। आपकी सभी जानकारी के लिए बता दूँ कि मैंने 2010 में ही ट्विटर ज्वाइन कर लिया था लेकिन कुछ ही दिनों तक उपयोग करने के बाद मैंने उपयोग करना छोड़ दिया। हालाँकि अकाउंट बना रहा।”

ट्विटर पर भारी विरोध झेलने के बाद उनका कहना था कि वो लोगों की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने वाली सामग्री को रोकने के लिए सख्त कदम उठाएँगी। बस उन्हें गलत न समझा जाए, क्योंकि उनके लिए धर्म बहुत मायने रखता है। हालॉंकि बाद में नेटिजन्स ने प्रमाणों के साथ अकाउंट हैक करने के उनके दावे का खंडन करते हुए उनकी मंशा पर सवाल उठाए थे।

कनाडाई सांसद ने की कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की निंदा, कहा- पुनर्वास के लिए PM मोदी के प्रयास सराहनीय

मार्खम यूनियनविले, कनाडा के सांसद बॉब सरोया (Bob Saroya) ने जनवरी, 1990 में सरहद पार के इस्लामी आतंकवादियों द्वारा कश्मीर की हिन्दू आबादी के नरसंहार की निंदा की और कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उनके पुनर्वास के लिए किए जा रहे प्रयासों का समर्थन किया है।

समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, कश्मीर की हिंदू आबादी पर हमले की 31वीं वर्षगांठ पर कनाडा स्थित ओंटारियो इलाके के मार्खम यूनियनविले से सांसद ने एक बयान में लिखा, “मैं अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसे रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने और मानवता के खिलाफ इस प्रकार के अपराधों को रोकने का आग्रह करता हूँ। कश्मीरी हिन्दुओं को अपने घर सुरक्षित वापस लौटने के लिए मैं भारत सरकार की मदद करने की योजना का समर्थन करता हूँ।”

Tahir Aslam Gora ताहिर गोरा طاہر گورا (@TahirGora) | Twitter
कनाडाई सांसद द्वारा दिया गया बयान सोशल मीडिया पर भी खूब शेयर किया जा रहा है

दुनियाभर में विस्थापित कश्मीरी पंडित हर साल 19 जनवरी को ‘प्रलय दिवस’ (होलोकॉस्ट/एक्सोडस डे) के रूप में मनाते हैं। यह जनवरी 1990 में कश्मीर घाटी की हिंदू आबादी पर बर्बर हमले की 31वीं वर्षगाँठ है, जो पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित सीमा पार इस्लामी आतंकवादियों द्वारा किया गया था।

जनवरी, 1990 में कश्मीरी पंडितों के भीषण नरसंहार और जातीय सफाए को याद करते हुए बॉब सरोया (Bob Saroya) ने लिखा, “मैं इस हत्याकांड में मारे गए, बलात्कार का शिकार हुए और घायल हुए सभी लोगों के परिवारों और दोस्तों के प्रति संवेदना व्यक्त करना चाहूँगा।”

बॉब सरोया ने कश्मीर में प्राचीन हिंदू मंदिरों की बदहाली की निंदा के साथ ही स्थानीय पंडित समुदाय की निष्ठा और साहस की सराहना की। सोशल मीडिया पर भी कनाडाई सांसद के कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार पर दिए गए इस बयान की तारीफ हो रही है।

उल्लेखनीय है कि कश्मीरी पंडितों ने अपना निर्वासन (बलपूर्वक निकाल देना) खत्म कराकर उनकी घर वापसी कराने की अपील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से की थी। इस नर संहार के परिणामस्वरुप कश्मीरी पंडितों की करीब 07 लाख की जनसंख्या पूरे विश्व में फैल गई और तबसे आज तक अपनी शर्तों पर अपनी मातृभूमि लौटने का इंतजार कर रही है।

19 जनवरी, 1990 के दिन मस्जिदों से घोषणाएँ कीं गईं कि कश्मीरी पंडित काफ़िर हैं और पुरुषों को या तो कश्मीर छोड़ना होगा, इस्लाम में परिवर्तित होना होगा या फिर उन्हें मार दिया जाएगा। मई, 1990 तक करीब 05 लाख कश्मीरी पंडित जान बचाने के लिए अपनी मातृभूमि छोड़ कश्मीर से पलायन कर चुके थे, जो स्वतंत्रता के बाद भारत का सबसे बड़ा पलायन माना जाता है।

PM मोदी का मसाज करने वाले महमूद हसन ने राम मंदिर के लिए दिया डोनेशन, कहा – ‘मुसीबत में हिन्दू ही काम आते हैं’

उत्तराखंड के मसूरी स्थित भट्टा क्यारकुली गाँव के महमूद हसन की वहाँ के लोग खूब वाहवाही कर रहे हैं। इसका कारण है कि उन्होंने घर की माली हालत ठीक न होते हुए भी स्वेच्छा से अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर के लिए 1100 रुपए की धनराशि दान में दी। 70 वर्षीय महमूद हसन ने स्वेच्छा से ये कार्य किया। महमूद हसन ने दावा किया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मसूरी प्रवास पर गए थे, तो उन्होंने ही उनका मसाज किया था।

‘अमर उजाला’ में प्रकाशित खबर के अनुसार, महमूद हसन खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बड़ा प्रशंसक मानते हैं और खुद को हिन्दू-मुस्लिम एकता का पक्षधर भी कहते हैं। उन्होंने कहा कि 1100 रुपए तो उन्होंने अपनी क्षमतानुसार दिया है, लेकिन अगर उनके पास 11,000 रुपए भी होते तो वो ख़ुशी से भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए दान दे देंगे। उन्होंने अपना इतिहास बताते हुए कहा कि जब वो मसूरी आए थे, तो उनके पास महज 20 रुपए थे।

उन्होंने जानकारी दी कि 1972 में जब वह मसूरी आए थे तो क्यारकुली गाँव के डालू भाई, रतन और प्रेम सिंह ने उनकी बहुत सहायता की थी। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में जब भी कोई संकट आता है तो हिन्दू भाई ही उनकी मदद के लिए आगे आते हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण जैसी वैश्विक महामारी के काल में जब लॉकडाउन लगा, तब भी गाँव के राकेश रावत सहित अन्य हिन्दुओ ने उनकी सहायता की।

महमूद हसन मसूरी के एक होटल में कार्यरत हैं। उन्होंने दावा किया कि जब 2009 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी मसूरी आए थे, तब वो उनसे मिले थे। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी एक बहुत अच्छे इंसान हैं, इसका उनके पास व्यक्तिगत अनुभव है। बकौल महमूद, गाँव में कुछ युवा राम मंदिर के लिए कूपन बाँट रहे थे, तो उन्होंने भी सहयोग की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि लोगों के संकोच के बावजूद उन्होंने दान दिया।

महमूद हसन ने कहा कि राकेश रावत ने भी उनके इस दान पर ख़ुशी जताई है। उन्होंने कहा, “भगवान श्रीराम के मंदिर के लिए दान देने के बाद मुझे भी बहुत प्रसन्नता महसूस हो रही है। मैंने इच्छा जताई तो गाँव के लोगों ने हामी भरते हुए कहा कि आप भी क्षमतानुसार स्वैच्छिक सहयोग कर सकते हैं।” मूल रूप से उत्तर प्रदेश के छुटमलपुर के रहने वाले महमूद के बेटे नौशाद ने भी अपने पिता के इस कार्य पर ख़ुशी जताई।

ये अच्छी खबर तब आई है, जब हाल ही में इंदौर, मुंबई और कच्छ से राम मंदिर संकल्प निधि के लिए डोनेशन माँग रहे हिन्दू कार्यकर्ताओं पर हमले की खबरें आईं। गुजरात के गाँधीधाम के किदाना गाँव में भगवान श्रीराम के रथ के पास एक समूह जमा हो गया और उसने वहाँ आगजनी शुरू कर दी। इस रैली का आयोजन विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने किया था। इस दौरान हिंसक भीड़ ने एक ऑटो और 2 बाइकों को भी आग के हवाले कर दिया।

स्वदेशी तेजस के बाद MiG-29, सुखोई-30 MKI फाइटर प्लेनों की खरीद की तैयारी

सीमा पर चीन और पाकिस्तान के साथ जारी तनाव के मद्देनजर भारत अपनी सामरिक क्षमता में लगातार इजाफा कर रहा है। भारतीय वायु सेना (IAF) में नए लड़ाकू विमानों को शामिल करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। स्वदेश निर्मित 83 तेजस लड़ाकू विमानों की खरीद को सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद रूस से भारत मिग-29 एवं सुखोई 30 एमकेआई खरीदने की तैयारी कर रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक भारत आने वाले दिनों में रूस से 21 मिग-29 और 12 सुखोई-30 एमकेआई फाइटर प्लेन खरीदेगा।

रूस को शीघ्र जाएगा RFP

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि 21 मिग-29 विमानों के लिए RFP (request for proposal)  शीघ्र ही रूस की कंपनी रोकोबोर्नोएक्पोर्ट को जारी किया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार रूस से खरीदे जाने वाले इस मिग-29 की कीमत अपेक्षाकृत कम है। भारतीय वायु सेना में इन विमानों के शामिल हो जाने से इस तरह के विमानों की संख्या बढ़कर 59 हो जाएगी। 12 सुखोई के आने से इस तरह के लड़ाकू विमानों की संख्या 272 हो जाएगी। भारत 272 सुखोई में से अब तक 268 को अपने बड़े में शामिल कर चुका है।

IAF को चाहिए 42 स्क्वॉड्रन

विगत सालों में हुए हादसों में कम से कम 9 सुखोई दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं। 83 नए तेजस वायु सेना में जनवरी 2024 से दिसंबर 2028 के बीच शामिल होंगे। इनके अलावा मिग-29 और सुखोई के शामिल होने से वायु सेना को अपनी स्क्वॉड्रन को बरकरार रखने में आसानी होगी। वायु सेना के बेड़े में शामिल मिग-21, मिग-23 और मिग-27 पुराने पड़ गए हैं और ये धीरे-धीरे सेवा से बाहर हो रहे हैं। 

आने वाले समय में आईएएफ के पास लड़ाकू विमानों की करीब 30 स्क्वॉड्रन (एक स्क्वॉड्रन में 16 से 18 विमान) रह जाएगी। चीन और पाकिस्तान दोनों के साथ एक साथ निपटने के लिए आईएएफ के पास लड़ाकू विमानों की कम से कम 42 स्क्वॉड्रन होनी चाहिए। बताया जाता है कि मिग-21 बाइसंस के चार स्क्वॉड्रन 2024 तक सेवा से बाहर हो जाएँगे। 

मिग विमान रूस से और जगुआर ब्रिटेन से आए

वायु सेना में लड़ाकू विमानों की कमी पूरी करने के लिए भारत सरकार ने अपनी रक्षा खरीद प्रक्रिया को पहले से ज्यादा आसान किया है। इसी क्रम में उसने फ्रांस के साथ 36 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा किया है। राफेल दुनिया के बेहतरीन लड़ाकू विमानों में शामिल है। फ्रांस से भारत को राफेल मिलने शुरू भी हो गए हैं। 

अब तक भारत सरकार मुख्य रूप से रूस और ब्रिटेन से लड़ाकू विमान खरीदते आई है। सुखोई एमकेआई को 1990 के अंतिम दशक और मिग-29 को 1980 की शुरुआत में रूस से खरीदा गया था। ब्रिटेन से जगुआर भी 1980 के दशक की शुरुआत में हासिल किए गए थे। 

बीच-बीच में उन्नत हुए हैं लड़ाकू विमान

भारत के पास इस समय लड़ाकू विमानों की करीब 33 स्क्वॉड्रन है। प्रत्येक स्क्वॉड्रन में 16 लड़ाकू विमान और दो ट्रेनर विमान शामिल होते हैं। कुल मिलाकर भारत के पास 500 से ज्यादा फाइटर प्लेन हैं। हालाँकि, चीन और पाकिस्तान दोनों की चुनौती से एक साथ निपटने के लिए आईएएफ को 42 स्क्वॉड्रन रखने की मँजूरी मिली हुई है। आईएएफ के बेड़े में अभी मिग-21 बीआईएस, जगुआर, मिराज 2000, मिग-29, सुखोई एमकेआई और स्वदेश निर्मित तेजस के स्क्वॉड्रन शामिल हैं। ब्रिटिश हॉक को साल 2004 में शामिल किया गया। मिग-21 बीआईएस, जगुआर, मिराज 2000 और मिग-29 बीच-बीच में उन्नत हुए हैं। 

पाक के पास 450, चीन के पास 200 से ज्यादा लड़ाकू विमान

पाकिस्तान और चीन के लड़ाकू विमानों की संख्या की अगर बात करें तो पड़ोसी देश पाक के पास करीब 450 लड़ाकू विमान हैं। पाकिस्तान के पास मौजूदा समय की तकनीक वाले 18 एफ-16 फाइटर प्लेन हैं। पाकिस्तानी वायु सेना के बेड़े के ज्यादातर लड़ाकू विमानों की तकनीक पुरानी हो गई है। चीन के पास दो हजार से ज्यादा लड़ाकू विमान हैं। चीन के साथ दिक्कत है कि वह अपनी वायु सेना के सभी लड़ाकू विमानों को भारत के खिलाफ नहीं लगा सकता। उसे अपनी वायु सुरक्षा के लिए अपने लड़ाकू विमानों को अलग-अलग इलाकों में तैनात करनी होती है।

राफेल ने भारत की क्षमता बढ़ाई

भारत में राफेल लड़ाकू विमानों के आ जाने से वायु सेना की ताकत में कई गुना इजाफा हो गया है। इससे चीन और पाकिस्तान की वायु सेना पर बढ़त बनाने में मदद मिली है। आज के समय में केवल लड़ाकू विमानों की संख्या ज्यादा रखना बड़ी बात नहीं है, बल्कि ये विमान आधुनिक एवं उन्नत तकनीक पर आधारित और स्टील्थ फीचर्स में युक्त एवं बेजोड़ होने चाहिए।

‘तांडव’ से हटाएँ भावनाओं को आहत करने वाले दृश्य: BSP सुप्रीमो मायावती

वेब सीरिज ‘तांडव’ में हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने वाले दृश्यों तथा डायलॉग को लेकर मचे बवाल के बाद बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि सीरीज से विवादित दृश्यों को हटा देना ही सबसे उचित होगा।

बसपा प्रमुख मायावती ने लिखा, “तांडव वेब सीरिज में धार्मिक व जातीय आदि भावना को आहत करने वाले कुछ दृश्यों को लेकर विरोध दर्ज किए जा रहे हैं। जो भी आपत्तिजनक है उन्हें हटा दिया जाना उचित होगा ताकि देश में कहीं भी शांति, सौहार्द व आपसी भाईचारे का वातावरण खराब न हो।”

बता दें कि सोशल मीडिया पर मायावती की ओर से टिप्पणी आने के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स उनपर अलग अलग-आरोप लगा रहे हैं। माजिद खान ने मायावती का यह ट्वीट देखकर कहा, “वाह बुआ जी। वेब सीरिज नज़र आ गई और ना जाने कितनी बार इस्लाम धर्म पर गलत टिप्पणी कर हमारी भावनाओं को आहत किया गया वो आपको नज़र नहीं आया। बहुत ख़ूब।”

अंकित शर्मा लिखते हैं, “आप भी BJP का पल्लू पकड़ कर राजनीति रूपी गंगा में एक बार और डुबकी लगाना चाहती हैं। बिहार में नीतीश कुमार के पंख कतर दिए गए। अगला नम्बर आपका होगा। कब तक ED और CBI से डरकर सरकार की नीतियों का विरोध करने से खुद को बचाएँगी, आपका अपना समुदाय भी आपको वोट नहीं देगा, मुस्लिम की बात छोड़िए।”

आशिक उन्नावी लिखते हैं, “आंटी जी देश में पहले भी ऐसी कई सारे वेब सीरिज़ बनती थी और बहुत सारी फिल्मों में भी बहुत कुछ दिखाया गया है। (हालाँकि ये धर्म में नाजायज़ है मगर) अगर ऐसे ही चलता रहा तो वो दिन दूर नही जब कुछ भी दिखाने के लिए सरकार की मंजूरी और उसको राजी करना जरूरी हो।”

उल्लेखनीय है कि हिंदूफोबिक कंटेंट के चलते तांडव वेब सीरिज विवादों में है। सोशल मीडिया पर दर्शक सीधे आरोप लगा रहे हैं कि इसमें भगवान शिव और भगवान राम का अपमान किया गया। ऐसे में मायावती का इस विषय पर प्रतिक्रिया देना यूपी विधानसभा चुनावों से पहले एक स्टंट कहा जा रहा है। उनसे पहले कई बीजेपी नेताओं ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से अपील की थी कि ‘तांडव’ को बैन किया जाए। जिसके बाद अमेजन प्राइम वीडियो के अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया

इसके अलावा यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा कि जन-भावनाओं के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस वेब सीरिज पर मनोरंजन की आड़ में नफरत फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसकी पूरी टीम के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर के जल्द गिरफ़्तारी की तैयारी की जा रही है। 

इस बाबत लखनऊ मध्य के हजरतगंज थाने में रविवार (जनवरी 17, 2021) को केस दर्ज किया गया था। ‘इंडिया ओरिजिनल कंटेंट अमेज़न’ की हेड अपर्णा पुरोहित के अलावा निर्देशक अली अब्बास, प्रोड्यूसर हिमांशु कृष्ण मेहरा और लेखक गौरव सोलंकी सहित अन्य को इस मामले में आरोपित बनाया गया है।

पाकिस्तानी नैरेटिव के लिए वाड्रा कॉन्ग्रेस और एंटी-रिपब्लिक ने की थी बैटिंग, देशहित से किया था खिलवाड़: अर्णब

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी (Arnab Goswami) ने पिछले कुछ दिनों से उन पर लगाए जा रहे तमाम आरोपों का मुँहतोड़ जवाब दिया है। दरअसल, यह विवाद अर्णब गोस्वामी के व्हाट्सएप्प संदेशों के लीक होने से शुरू हुआ और आरोप लगाए गए कि अर्णब को बालाकोट पर वायुसेना की एयरस्ट्राइक की जानकारी पहले से ही थी।

इन संदेशों की जो भ्रामक व्याख्या भारत के कुछ ‘फैक्ट चेकर्स’ द्वारा की गई, उसके ही आधार पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी अब भारत सरकार पर सैन्य ऑपरेशंस का इस्तेमाल चुनाव जीतने के लिए करने जैसे आरोप लगाए हैं।

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क ने अर्णब गोस्वामी (Arnab Goswami) की ओर से एक बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद बालाकोट वाली जवाबी कार्रवाई का इन्तजार सिर्फ एक ही व्यक्ति को नहीं बल्कि पूरे भारत को था और सभी राष्ट्रभक्त नागरिक जानते थे कि केंद्र सरकार कुछ ‘बड़ा’ कर सकती है।

अर्णब गोस्वामी ने कहा कि इमरान खान ने शुरू में किसी भी तरह की एयरस्ट्राइक से मना किया था लेकिन बाद में स्वीकार किया कि भारत ने कार्रवाई की और बाद में कहा कि बालाकोट फर्जी ‘फ्लैग ऑपरेशन’ नहीं थे।

उन्होंने लिखा कि मुझे यह देखकर ज्यादा हैरानी हुई है कि वाड्रा कॉन्ग्रेस के साथ मिलकर रिपब्लिक मीडिया विरोधियों ने पाकिस्तान के नैरेटिव को हवा देने की कोशिश की। अर्णब ने अपने इस जवाब का अंत ‘सत्यमेव जयते’ के सन्देश के साथ किया है।

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर ऑल्ट न्यूज़ नाम के कथित फैक्ट चेकर गिरोह द्वारा लगातार ही अर्णब की चैट की भ्रामक व्याख्या की जा रही हैं। इन्हीं का फायदा उठाकर कॉन्ग्रेस ने भी सरकार के खिलाफ माहौल खड़ा करने की कोशिश की और इन सबका फायदा कुल मिलाकर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने उठाया है।

अर्णब गोस्वामी की चैट ‘लीक’ होने के बाद बढ़ा विवाद

लीक हुई व्हाट्सएप्प चैट अर्णब गोस्वामी और BARC के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता के बीच चर्चा से संबंधित है। हाल ही में इंटरनेट पर लीक हुई चैट ‘चमत्कारिक रूप से’ सामने आई है और मीडिया में विपक्षी दलों एवं उनके कठपुतलियों के बीच हॉट डिबेट का विषय रहा है। अब ये बात सामने आ गई है कि निजी चैट को मुंबई पुलिस ने ही लीक किया था।

अपनी आदत के अनुसार विपक्षी दल मोदी सरकार के खिलाफ जाते हुए चैट को लेकर जाँच की माँग कर रहे हैं। वो चैट के जिन हिस्सों को लेकर जाँच की माँग कर रहे हैं, वह बालाकोट एयरस्ट्राइक से संबंधित है।

विपक्षी दलों के अनुसार, अर्णब गोस्वामी को हवाई हमलों से तीन दिन पहले ही पता था कि भारत सरकार, पाकिस्तान के खिलाफ कोई ‘बड़ी कार्रवाई’ करने वाली है। लीक हुई चैट में अर्णब कहते हैं, “एक सामान्य हवाई हमले से भी बड़ा हमला होने वाला है और इसी समय कश्मीर पर कुछ बड़ा होने वाला है। पाकिस्तान पर भारत सरकार इस तरह से हमला करने के लिए आश्वस्त है, जिससे लोगों को गौरव महसूस होगा।”

यहाँ एकमात्र समस्या यह है कि विपक्षी दल के राजनेता जो भी आरोप लगा रहे हैं, वह किसी भी आरोप को साबित नहीं करता है। कॉन्ग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने ट्विटर पर कहा, “अगर मीडिया का एक वर्ग रिपोर्टिंग कर रहा है, तो यह सही है, यह बालाकोट हवाई हमलों और 2019 के आम चुनावों के बीच सीधे संबंध की ओर इशारा करता है। क्या राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनावी उद्देश्यों के लिए नजरअंदाज कर दिया गया था? जेपीसी जाँच की जरूरत है।”

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से पूछा, “क्या एक पत्रकार (और उनके दोस्त) को वास्तविक एयर स्ट्राइक से तीन दिन पहले बालाकोट शिविर में जवाबी हमले के बारे में पता था? यदि हाँ, तो इस बात की क्या गारंटी है कि उनके ‘सोर्स’ ने दूसरों के साथ-साथ पाकिस्तान के लिए काम करने वाले जासूसों या मुखबिरों के साथ जानकारी साझा नहीं की? ‘For Your Eyes Only’ निर्णय सरकार-समर्थक पत्रकार के पास कैसे पहुँचा?”

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने टिप्पणी की, “व्हाट्सएप्प चैट का ट्रांसक्रिप्ट स्पष्ट रूप से दिखाता है कि सरकार ने बालाकोट हमलों और धारा 370 को खत्म करने वाले दोनों निर्णय के बारे में टीवी एंकर को पूर्व सूचना दी थी। क्या हो रहा है? क्या मैं अकेली हूँ जो सोचती है कि मोदी-शाह हमें जवाब देते हैं?”

सोनिया गाँधी ने किया था वादा, लेकिन पार्टी में चुनाव का अब तक कुछ पता नहीं: कपिल सिब्बल

कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव को लेकर पार्टी नेताओं का एक खेमा लगातार आवाज उठा रहा है। पिछले महीने सक्रिय नेतृत्व और व्यापक संगठनात्मक बदलाव की माँग को लेकर पार्टी के 23 नेताओं ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को पत्र लिखा था। लेकिन, अब एक माह बाद भी उस विषय पर स्पष्ट जवाब न मिलने के कारण पार्टी के दिग्गज नेता कपिल सिब्बल ने दोबारा सवाल उठाए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से मैं उस बैठक में नहीं था। मैं कहीं जा रहा था। लेकिन मुझे लगता है कि हमने खुली बातचीत की थी, और जाहिर है, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने कहा था कि चुनाव होगा। हालाँकि, अब तक ये स्पष्ट नहीं है कि ये चुनाव कब और कैसे होंगे। हमारा मानना है कि पार्टी के आंतरिक चुनाव संविधान के प्रावधानों के हिसाब से ही कराए जाएँगे।”

वह बोले, “जिन लोगों को लगता है कि वह पहले से ही एक राजनीतिक शक्ति हैं और बहुत मजबूत राजनीतिक ताकत हैं और वह सब कर रहे हैं या यह पुनरुद्धार की प्रक्रिया शुरू हो गई है, तो मुझे लगता है, विभिन्न राज्यों में क्या हो रहा है, इस पर ध्यान देने की जरूरत है। पार्टी को लेकर लोग मायूस हैं। नेताओं का पार्टी से मोहभंग हो रहा है। मैं दिल्ली के बारे में बात कर सकता हूँ। कई नेता मेरे पास आए हैं और दिल्ली में प्रक्रियाओं के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त की है और चाहते हैं कि पार्टी तेजी से कार्य करे। लेकिन अभी तक हमें उस तरह की प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिसकी हम उम्मीद कर रहे थे।”

राहुल गाँधी के दोबारा अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा वाले सवाल पर कपिल सिब्बल ने कहा, “हम चर्चाओं-अटकलों का जवाब नहीं देते, हम वास्तविकाता का जवाब देते हैं। जब चर्चा के टेबल पर यह बात आएगी, तो हम इसका जवाब देंगे।”

इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि क्या राहुल गाँधी की वापसी से पार्टी में बदलाव की संभावना है। इस पर सिब्बल ने कहा, “मुझे लगता है कि यह सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि पार्टी में किस तरह से संविधान की प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है। इसमें कॉन्ग्रेस के सभी महत्वपूर्ण लोगों के साथ विचार विमर्श भी काफी अहम है।”

अपने साक्षात्कार में उन्होंने किसान आंदोलन पर बात की। सिब्बल ने कहा कि इन सबसे बचने का एक ही उपाय है कि किसान को उसकी उपज के लिए सही एमएसपी दी जाए। वह बोले कि ऐसे वक्त में जब इंडस्ट्री को मैक्सिमम सपोर्ट मिल रहा है, किसान न्यूनतम समर्थन की मूल्य की माँग के लिए आंदोलन कर रहे हैं।

सिब्बल ने हमला बोलते हुए कहा कि सरकार ने जो कुछ भी किया है, वह बिना सोचे समझे किया है। चाहे फिर वह नोटबंदी हो, जीएसटी या फिर कृषि कानून हो। मुद्दों को भटकाना इस सरकार के डीएनए में है। यह एक सल्तनत के निर्णयों की तरह है। हम मध्यकालीन भारत के दिनों में वापस भेज दिए गए हैं।