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‘हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान’: TANDAV की पूरी टीम के खिलाफ यूपी में FIR, सैफ अली खान को मुंबई पुलिस का प्रोटेक्शन

‘अमेज़न प्राइम वीडियो’ पर आई अली अब्बास जफ़र निर्देशित ‘तांडव’ में सैफ अली खान और मोहम्मद जीशान अयूब ने मुख्य किरदार निभाए हैं। इस वेब सीरीज में भगवान शिव का अपमान किए जाने और जातीय वैमनस्य को बढ़ावा देने के कारण अब उत्तर प्रदेश में केस दर्ज किया गया है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा कि जन-भावनाओं के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने इस वेब सीरीज पर मनोरंजन की आड़ में नफरत फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसकी पूरी टीम के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर के जल्द गिरफ़्तारी की तैयारी की जा रही है। लखनऊ मध्य के हजरतगंज थाने में रविवार (जनवरी 17, 2021) को ये केस दर्ज किया गया। ‘इंडिया ओरिजिनल कंटेंट अमेज़न’ की हेड अपर्णा पुरोहित के अलावा निर्देशक अली अब्बास, प्रोड्यूसर हिमांशु कृष्ण मेहरा और लेखक गौरव सोलंकी सहित अन्य को इस मामले में आरोपित बनाया गया है।

FIR में इन सभी के खिलाफ IPC की धारा- 153A (उपद्रव पैदा करने वाले बयान देना या द्वेषभाव से निशाना बनाना), 295 (किसी धर्म के पवित्र स्थल का अपमान), 505(1)(b) (अशांति और अपराध को बढ़ावा देने वाला प्रसारण), 505(2) (विभिन्न वर्गों में शत्रुता/घृणा पैदा करने वाले कथन) और 469 (दस्तावेजी या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किसी का अपमान) के अलावा IT एक्ट की धारा- 66 (आपत्तिजनक कंटेंट्स), 66 F और 67 के तहत मामला दर्ज किया गया है। FIR में लिखा है:

“उच्चाधिकारियों के निर्देश पर उक्त वेब सीरीज को देखा गया तो पाया गया कि प्रथम एपिसोड के 17वें मिनट में हिन्दू देवी-देवताओं का विद्रूप ढंग से रूप धारण कर धर्म से जोड़ के अमर्यादित तरीके से उनका अपमान किया गया है और निम्न-स्तरीय भाषा का प्रयोग हुआ है। ये धार्मिक भावनाओं को आघात पहुँचाने वाला और लोगों को भड़काने वाला है। 22वें मिनट में जातिगत विद्वेष वाले डायलॉग हैं। सीरीज में ऐसे कई बयान हैं। भारत के पीएम के गरिमामयी पद का चित्रण अत्यंत अशोभनीय ढंग से किया गया है। जातियों को छोटा-बड़ा दिखाने और महिलाओं के अपमान के दृश्य हैं।”

यूपी पुलिस ने ये भी पाया कि इस वेब सीरीज में एक समुदाय को निशाना बना कर उनकी धार्मिक भावनाएँ भड़काने का काम किया गया है। इसे समाज के लिए हानिकारक भी बताया गया है, क्योंकि इसका इंटरनेट के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार हो रहा है। शासकीय व्यवस्था की क्षति और अश्लीलता फैलाने के भी आरोप लगे हैं। इस वेब सीरीज के निर्माण में सम्मिलित टीम के लोगों का आरोपित के रूप में नाम दर्ज किया गया है।

देश की पुलिस-फोर्स और सुरक्षाबलों की छवि को लेकर यूपी सरकार पहले से ही सख्त है। ऐसे में वेब सीरीज तांडव में फोर्स को शराब पीकर दंगा भड़काते हुए दिखाए जाने पर उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई। और इसे अभिव्यक्ति की आजादी का जुमला दिया गया। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने इस पर सख्त कार्रवाई करने के संबंध में ट्वीट किया है।

उधर विरोध-प्रदर्शन के बीच मुंबई में पुलिस ने सैफ अली खान के घर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी है। करीना कपूर भी उसी घर में रहती हैं। सैफ-करीना ने अपने पुराने घर के पास ही एक नया घर खरीदा है और उनके सारे कर्मचारी घर के सामान को स्थानांतरित करने में लगे हुए हैं। इन सबके बीच मुंबई पुलिस के कई जवान उनके घर के बाहर देखे गए। सोशल मीडिया से लेकर पुलिस थानों तक ‘तांडव’ का विरोध जारी है।

उधर वेब सीरिज तांडव को लेकर अमेजन प्राइम वीडियो के अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है। केंद्रीय सूचना मंत्रालय ने रविवार (जनवरी 17, 2021) को नोटिस जारी किया। इस मसले पर सोमवार तक जवाब देने को कहा गया है। बता दें कि इससे पहले भाजपा नेता राम कदम की शिकायत पर मुंबई पुलिस की तरफ से ‘तांडव’ के मेकर्स को समन जारी किया गया था। सीरिज के खिलाफ धारा 295A, आईटी एक्ट धारा 67 ए के तहत मामला दर्ज किया गया है।

‘तांडव’ पर मोदी सरकार सख्त, अमेजन प्राइम से I&B मिनिस्ट्री ने माँगा जवाब: रिपोर्ट्स

वेब सीरिज तांडव को लेकर अमेजन प्राइम वीडियो के अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार केंद्रीय सूचना मंत्रालय ने रविवार (जनवरी 17, 2021) को नोटिस जारी किया। इस मसले पर सोमवार तक जवाब देने को कहा गया है।

हिंदूफोबिक कंटेंट को लेकर यह सीरिज विवादों में है। सोशल मीडिया पर दर्शक सीधे आरोप लगा रहे हैं कि इसमें भगवान शिव और भगवान राम का अपमान किया गया है। कई बीजेपी नेताओं ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से अपील की थी कि ‘तांडव’ को बैन किया जाए।

बता दें कि इससे पहले भाजपा नेता राम कदम की शिकायत पर मुंबई पुलिस की तरफ से ‘तांडव’ के मेकर्स को समन जारी किया गया था। सीरिज के खिलाफ धारा 295A, आईटी एक्ट धारा 67 ए के तहत मामला दर्ज किया गया है।

मुंबई पुलिस को दी शिकायत में कदम ने कहा था, “मैं आपको बताना चाहूँगा कि वेब सीरिज तांडव में हिंदू देवताओं का अपमान किया गया है। इससे हिंदुओं की भावनाएँआहत हुई है। वेब सीरिज के निर्देशक अली अब्बास वामपंथी विचारधारा का महिमामंडन कर रहे हैं। जीशान ने भगवान शिव का अपमान किया है। आपसे अनुरोध है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म, निर्देशक, निर्माता, लेखक और अभिनेताओं पर शिकायत दर्ज करें और सीरिज की स्ट्रीमिंग बंद करें। इसके अलावा सीरिज में विशिष्ट समुदायों का भी अपमान किया गया है। इसलिए आवश्यक कार्रवाई करें।”

हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करने वाले ‘तांडव’ के बहिष्कार का ऐलान करते हुए महाराष्ट्र के भाजपा नेता राम कदम ने पूछा था कि आखिरकार क्यों हर बार फिल्मों और वेब सीरिज में हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानित करने का काम किया जाता है? उन्होंने कहा, “सैफ अली खान एक बार फिर ऐसी फिल्म या सीरिज का हिस्सा हैं, जो हिन्दू भावनाओं को ठेस पहुँचाता है।”

राम कदम ने कहा कि निर्देशक अली अब्बास जफर को इस सीरिज से भगवान शिव का मजाक बनाने वाला हिस्सा हटाना होगा और अभिनेता जीशान अयूब को माफ़ी माँगनी पड़ेगी। भाजपा नेता ने ऐलान किया कि जब तक जरूरी बदलाव नहीं होते, तब तक ‘तांडव’ का बहिष्कार किया जाएगा। जिस दृश्य पर आपत्ति जताई जा रही है, उसे पहले ही एपी​सोड में दिखाया गया है। जहाँ भगवान शिव बना ज़ीशान अयूब सोशल मीडिया पर प्रोफ़ाइल पिक बदलने की बात करता है, क्योंकि ‘रामजी के फॉलोवर्स बढ़ रहे हैं।’

गौरतलब है कि भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी इस सीरिज के कंटेंट पर एतराज जताया था। उन्होंने केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से वेब सीरिज पर प्रतिबंध लगाने की अपील की थी। मिश्रा ने एक वीडियो जारी करते हुए आरोप लगाया था कि वेब सीरिज के जरिए देश में हिंसा फैलाने की साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीरिज में दलितों का अपमान किया गया है।

इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट के वकील आशुतोष दुबे ने अली अब्बास जफर और अमेजन प्राइम वीडियो को हिंदूफोबिक कंटेंट के लिए कानूनी नोटिस भेजा था।

मुंबई के आजाद मैदान में लगे ‘आजादी’ के नारे, ‘किसानों’ के समर्थन के नाम पर जुटे हजारों मुस्लिम प्रदर्शनकारी

NRC और CAA विरोधी प्रदर्शनों की तरह ही अब कथित किसान आंदोलन को हवा देने की तैयारी की जा रही है। मुंबई के आजाद मैदान में शनिवार (16 जनवरी, 2021) को हजारों मुस्लिम प्रदर्शनकारी जुटे। ये कथित तौर पर केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के विरोध का समर्थन करने को इकट्ठा हुए थे।

एबीपी न्यूज के अनुसार, मुंबई के आजाद मैदान में में किसानों के समर्थन में ‘किसान अलायंस मोर्चा’ का आयोजन किया गया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘आजादी’ के नारे लगाए। मंच पर लगे बैनर पर आप साफतौर लिखा देख सकते हैं, ” मुंबईकर किसानों के विरोध का समर्थन करते हैं।” कथित तौर पर, कई सामाजिक संगठनों के प्रदर्शनकारियों ने कृषि कानूनों के खिलाफ यह आंदोलन किया।

वीडियो साभार: Youtube/ABP News

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस विरोध-प्रदर्शन को एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप देने की तैयारी की जा रही है, जैसा दिसंबर 2019 से फरवरी 2020 के बीच सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान देखा गया था। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स (NRC) के बहाने मुसलमानों की नागरिकता छीन ली जाएगी, यह कह कर दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों को अंजाम दिया गया था। दंगों में 52 लोगों की हत्या कर दी गई थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे।

अब सवाल यह उठता है कि क्या किसान विरोध प्रदर्शन भी एंटी-सीएए विरोध की तरह किसी साजिश के तौर पर रचा तो नहीं जा रहा?

गौरतलब है कि इस वक्त सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कृषि कानून का विरोध कर रहे एक प्रदर्शनकारी को ट्रिपल तालक, आसिफा बलात्कार और NRC के मुद्दे को उठाते हुए तथाकथित किसानों के लिए समर्थन जुटाते हुए देखा जा सकता है। मुस्लिम प्रदर्शनकारी कहता है, “आज, हम परेशान हैं। गली-गली जाकर माँ-बहनों को उनके घरों से बाहर निकालना हमारी जिम्मेदारी है। कल हम सबको मिलकर आजाद मैदान पहुँचना होगा और मस्जिद के पास इकट्ठा होना होगा। हमने बस यात्रा, भोजन और पानी की व्यवस्था कर रखी है। हम सभी माँ-बहनों की सुरक्षा को सुनिश्चित करेंगे।” हालाँकि यह वीडियो कब की है, अभी यह पता नहीं लग पाया है।

कई सोशल मीडिया यूज़र्स के अनुसार, किसान समर्थन में उक्त आदमी ने एक बार भी कृषि कानूनों का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उसकी जगह शनिवार को विरोध-प्रदर्शनों के लिए समर्थन जुटाने के लिए आजाद मैदान में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जरूर बताया।

कॉन्ग्रेस ने कबूला मुंबई पुलिस ने लीक किया अर्नब गोस्वामी का चैट: जानिए, लिबरलों की थ्योरी में कितना दम

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने स्वीकार किया है कि मुंबई पुलिस ने ही रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी के निजी चैट को लीक किया है।

Prithviraj Chavan admits Mumbai Police leaked private WhatsApp chats of Arnab Goswami
Prithviraj Chavan admits Mumbai Police leaked private WhatsApp chats of Arnab Goswami

पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा, “मुंबई पुलिस द्वारा जारी किए गए अर्नब गोस्वामी के चैट्स की ट्रांस्क्रिप्ट काफी परेशान कर रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर संवैधानिक संशोधनों और राजनीतिक नियुक्तियों तक ऐसी संवेदनशील जानकारी की एक्सेस किसने दी?” उन्होंने कहा, “भारत सरकार को पूरी जाँच शुरू करनी चाहिए। साथ ही रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति को इस मामले को अत्यंत प्राथमिकता के साथ लेना चाहिए।”

पृथ्वीराज चव्हाण के इस खुलासे के बाद एक बार फिर से उस तरफ ध्यान जाता है जब मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र पुलिस अर्नब गोस्वामी को टॉर्चर करने के लिए किस हद तक पहुँच गई थी।

लीक हुई व्हाट्सएप चैट अर्नब गोस्वामी और BARC के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता के बीच चर्चा से संबंधित है। हाल ही में इंटरनेट पर लीक हुई चैट ‘चमत्कारिक रूप से’ सामने आई है और मीडिया में विपक्षी दलों एवं उनके कठपुतलियों के बीच हॉट डिबेट का विषय रहा है। अब ये बात सामने आ गई है कि निजी चैट को मुंबई पुलिस ने ही लीक किया था।

अपनी आदत के अनुसार विपक्षी दल मोदी सरकार के खिलाफ जाते हुए चैट को लेकर जाँच की माँग कर रहे हैं। वो चैट के जिन हिस्सों को लेकर जाँच की माँग कर रहे हैं, वह बालाकोट एयरस्ट्राइक से संबंधित है।

विपक्षी दलों के अनुसार, अर्नब गोस्वामी को हवाई हमलों से तीन दिन पहले ही पता था कि भारत सरकार, पाकिस्तान के खिलाफ कोई ‘बड़ी कार्रवाई’ करने वाली है। लीक हुई चैट में अर्नब कहते हैं, “एक सामान्य हवाई हमले से भी बड़ा हमला होने वाला है और इसी समय कश्मीर पर कुछ बड़ा होने वाला है। पाकिस्तान पर भारत सरकार इस तरह से हमला करने के लिए आश्वस्त है, जिससे लोगों को गौरव महसूस होगा।”

यहाँ एकमात्र समस्या यह है कि विपक्षी दल के राजनेता जो भी आरोप लगा रहे हैं, वह किसी भी आरोप को साबित नहीं करता है। कॉन्ग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने ट्विटर पर कहा, “अगर मीडिया का एक वर्ग रिपोर्टिंग कर रहा है, तो यह सही है, यह बालाकोट हवाई हमलों और 2019 के आम चुनावों के बीच सीधे संबंध की ओर इशारा करता है। क्या राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनावी उद्देश्यों के लिए नजरअंदाज कर दिया गया था? जेपीसी जाँच की जरूरत है।”

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से पूछा, “क्या एक पत्रकार (और उनके दोस्त) को वास्तविक एयर स्ट्राइक से तीन दिन पहले बालाकोट शिविर में जवाबी हमले के बारे में पता था? यदि हाँ, तो इस बात की क्या गारंटी है कि उनके ‘सोर्स’ ने दूसरों के साथ-साथ पाकिस्तान के लिए काम करने वाले जासूसों या मुखबिरों के साथ जानकारी साझा नहीं की? ‘For Your Eyes Only’ निर्णय सरकार-समर्थक पत्रकार के पास कैसे पहुँचा?”

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने टिप्पणी की, “व्हाट्सएप चैट का ट्रांसक्रिप्ट स्पष्ट रूप से दिखाता है कि सरकार ने बालाकोट हमलों और धारा 370 को खत्म करने वाले दोनों निर्णय के बारे में टीवी एंकर को पूर्व सूचना दी थी। क्या हो रहा है? क्या मैं अकेली हूँ जो सोचती है कि मोदी-शाह हमें जवाब देते हैं?”

बालाकोट चैट एक नॉन-स्टोरी क्यों है

अर्नब गोस्वामी के चैट केवल भारतीयों के बड़ी उम्मीदों की ओर इशारा करते हैं कि पाकिस्तान को इस बार छोड़ा नहीं जाएगा, उसे मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा। 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक से लोगों की उम्मीदें बढ़ गई थी और 2019 तक लोगों ने स्वीकार कर लिया था कि मोदी सरकार सार्वजनिक आक्रोश का दमदार जवाब देगी। 

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पुलवामा आतंकी हमले के तत्काल बाद की गई टिप्पणियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि इसका परिणाम सामने आएगा। नरेंद्र मोदी ने 15 फरवरी, 2019 को आतंकी हमले के एक दिन बाद कहा था कि लोगों का खून उबल रहा है। आतंकवादियों ने ‘गंभीर गलती’ की है और इसके लिए उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा था, “हमारा पड़ोसी देश यह भूल जाता है कि यह (भारत) एक ऐसा देश है, जिसकी नई मंशा और नई नीति है।” पीएम की बातों से स्पष्ट हो रहा था कि भारत कुछ बड़ा करने वाला है।

प्रधानमंत्री मोदी ने हमले के 3 दिन पहले 23 फरवरी को कहा था, “देश के बहादुर सैनिकों पर भरोसा करें और मोदी सरकार पर भरोसा रखें। इस बार सभी को न्याय दिया जाएगा और पूरा न्याय किया जाएगा। प्रधान सेवक आतंक को खत्म करने में व्यस्त है… अगर मेरा आतंक की फैक्ट्री में ताले लगाने की नियति है, तो वह हो।”

इस तरह की टिप्पणियों से स्पष्ट था कि हमला होना निश्चित है। करण थापर ने हिंदुस्तान टाइम्स के लिए अपने 24 फरवरी के कॉलम में भी इस तरफ इशारा किया था कि हमला होना निश्चित है। उन्होंने कहा, “सवाल यह है कि वे कैसे जवाब देंगे? क्या यह एक कदम बढ़ाने का अवसर है, क्योंकि यह मोदी सरकार को शर्मिंदा करेगा या क्या यह उन्हें पुनर्विचार करने का कारण देगा, क्योंकि वे जानते हैं कि मोदी कड़ा जवाब देंगे?”

इतना ही नहीं, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान खुद संयुक्त राष्ट्र से इस स्थिति को टालने की दलील दे रहे थे। ऐसी परिस्थितियों में जब नरेंद्र मोदी की टिप्पणियाँ पब्लिक डोमेन में है, तो क्या अर्नब गोस्वामी का चैट किसी साजिश की तरफ इशारा करता है? यह मानना बिल्कुल बेतुका है कि उन्होंने जो कुछ भी कहा, वह प्रधानमंत्री ने पहले जनता के नाम अपने संदेश में नहीं कहा।

कंगना रनौत चैट

एक चैट में अर्नब गोस्वामी ने ऋतिक रौशन को ‘dumb’ और कंगना रनौत को ‘schizophrenic’ कहा। यह चैट 2017 की थी। 2019 में दोनों ने कंगना रनौत पर चर्चा की जब अर्नब गोस्वामी ने उन्हें ‘बड़े पैमाने पर रेटिंग क्रंचर’ कहा।

लोगों ने किसी तरह से इस चैट को कंगना द्वारा 2020 में सुशांत सिंह राजपूत मामले में रिपब्लिक टीवी को दिए गए इंटरव्यू से जोड़ दिया। आकाश बनर्जी भी किसी तरह से 2019 की चैट को सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जोड़ते हुए दिखाई देते हैं, जो कि एक हास्यास्पद दावा है।

स्मृति ईरानी चैट

उनकी एक और चैट जिसने बहुत ध्यान आकर्षित किया है, वह यह है कि अर्नब गोस्वामी का कहना था कि स्मृति ईरानी 2017 में नई IB मंत्री होंगी और वह उनके लिए खुश थे, क्योंकि वह उनकी बहुत अच्छी दोस्त हैं। अब, आरोप यह है कि रिपब्लिक टीवी के संपादक को नियुक्ति के बारे में पहले से पता था।  

लेकिन उनका यह दावा भी औंधे मुँह गिर जाता है, क्योंकि अर्नब गोस्वामी का चैट प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया पर स्मृति ईरानी की नियुक्ति के कम से कम 5 मिनट बाद का है।

नरेंद्र मोदी ने 18 जुलाई 2017 की सुबह 10.51 बजे ट्वीट किया और अर्नब ने इसी दिन के 10.57 बजे पूर्व BARC सीईओ को सूचित किया। अब यह उन लोगों की बौद्धिक क्षमताओं के बारे में क्या कहता है जो इसके आधार पर षड्यंत्रकारी निष्कर्ष पर पहुँच रहे हैं?

चैट लीक करने का असली कारण 

मुंबई पुलिस का अर्नब की चैट को लीक करने का असली कारण उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करना था, जिससे कि विपक्षी पार्टियों और उनकी कठपुतलियों को अपने दुश्मन का निंदा करने के लिए अधिक गोला-बारूद उपलब्ध हो सके।

मीडिया और राजनीतिक प्रतिष्ठान में निहित स्वार्थों को आसानी से नजरअंदाज किया जाने वाला मूल संदेश यह है कि चैट में कुछ भी नहीं है। यदि वास्तव में भड़काऊ सामग्री होती, तो निरर्थक साजिश के सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित नहीं किया गया होता।

एक और बात जिसे नजरअंदाज किया जा रहा है वह यह है कि ऐसी कोई भी परिस्थिति नहीं है जिसके तहत मुंबई पुलिस एक पत्रकार की निजी चैट को लीक कर सकती है। यह गोपनीयता का एक बड़ा उल्लंघन है जो कि निंदनीय है। इसके अलावा, लीक हुई चैट से यह भी पता चलता है कि अर्नब गोस्वामी को सरकार के अंदरूनी कामकाज के अलावा सामान्य राजनीतिक रूप से सूचित नागरिकों के बारे में कुछ भी पता नहीं था।

पूरे टीआरपी घोटाले के दौरान महाराष्ट्र सरकार की कार्रवाई गंभीर चिंता का विषय रही है। आरोप लगाए गए हैं कि मुंबई पुलिस गोस्वामी के खिलाफ प्रतिकूल बयान देने के लिए गवाहों के साथ जबरदस्ती कर रही। पार्थो दासगुप्ता के परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि रिपब्लिक टीवी के संपादक के खिलाफ बयान देने के लिए पार्थो को तलोजा जेल में टॉर्चर किया जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में, गोस्वामी के निजी चैट को लीक करना उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए उनके खिलाफ मुंबई पुलिस की एक और संवेदनशील कार्रवाई प्रतीत होती है।

रॉबर्ट वाड्रा को हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहती है ED, राजस्थान हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बेनामी संपत्ति मामले में रॉबर्ट वाड्रा को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर खंडपीठ ने सुनवाई करने का फैसला लिया है।

खबरों के अनुसार, ED ने बीकानेर बेनामी संपत्ति के मामले में रॉबर्ट वाड्रा और उनके सहयोगी महेश नागर से पूछताछ के लिए उच्च न्यायालय की अनुमति माँगी है। ईडी की अर्जी पर सोमवार को जस्टिस पीएस भाटी की एकलपीठ सुनवाई करेगी।

गौरतलब है कि यह मामला वाड्रा के सहयोगी कंपनी महेश नगर द्वारा कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी की ओर से जमीन खरीदने से संबंधित है, जिसके ओनर सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा हैं। नागर के पास कंपनी द्वारा जारी किया गया पावर ऑफ अटॉर्नी था, जिसके उपयोग से उन्होंने कंपनी की ओर से जमीन की खरीदारी की थी। रिपब्लिक टीवी द्वारा किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन में महेश नागर ने कहा था कि रॉबर्ट वाड्रा ने अपने भूमि सौदों के लिए विभिन्न स्रोतों और नामों का इस्तेमाल किया।

इसके अलावा ईडी, वाड्रा की कंपनी द्वारा बीकानेर में किसानों से लूट और धोखाधड़ी कर प्राप्त की गई जमीन के सौदे की भी जाँच-पड़ताल करेगी। बता दें राज्य सरकार ने हस्तांतरित किए गए 374.44 हेक्टेयर जमीन का आवंटन रद्द कर दिया था, जब यह पाया गया कि उसे कथित रूप से ‘अवैध निजी लोगों’ के नाम पर हस्तांतरित किया गया था।

बात दें राज्य पुलिस ने स्थानीय तहसीलदार द्वारा एक शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज करने के बाद सौदे में जालसाजी का आरोप लगाया था। जिसके तहत ED ने 2015 में इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया था। आरोप है कि स्काईलाइट ने 69.55 हेक्टेयर भूमि को एलेगेनी फिनलीज को 7.41 लाख प्रति हेक्टेयर में बेचा था, लेकिन इसने भूमि को 1 लाख प्रति हेक्टेयर की दर से खरीदा था। महेश नागर ने स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी की ओर से जमीन खरीदी और बेची थी।

उल्लेखनीय है कि भूमि खरीदने के लिए एलेगेनी फिनलेज़ द्वारा इस्तेमाल की गई राशि भूषण पावर एंड स्टील कंपनी (बीएसपीएल) द्वारा दिए लोन से ली गई थी। उसी वर्ष बीएसपीएल को इनकम टैक्स सेटलमेंट कमीशन (ITCS) द्वारा 500 करोड़ की छूट दी गई थी, जिस वजह से इस मामले में शक पैदा हुआ।

इससे पहले ऑपइंडिया ने दस्तावेजों के साथ एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें बताया गया था कि महेश नागर ने रॉबर्ट वाड्रा की ओर से खरीद दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। उसने कहा था कि उसे एचएल पाहवा से पैसा मिला था जो गाँधी-वाड्रा परिवार के जमीन के सौदों से करीब से जुड़ा हुआ था।

‘तांडव’ के मेकर्स को समन, हिंदू घृणा से सने कंटेंट को लेकर बीजेपी नेता राम कदम ने की थी शिकायत

अमेजन प्राइम वीडियो पर 15 जनवरी को रिलीज हुई वेब सीरिज तांडव (Tandav) को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। इस वेब सीरिज पर हिंदू धर्म की गलत छवि दिखाने का आरोप है। दर्शकों का कहना है कि इसमें न केवल जातिवादी कंटेंट है, बल्कि भगवान शिव और भगवान राम का अपमान भी किया गया है।

शो के स्टारर सैफ अली खान की बढ़ती आलोचना के बीच बीजेपी नेता राम कदम ने अभिनेता ज़ीशान अय्यूब के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है और वेब सीरीज में हिंदू देवताओं का अपमान करने के लिए माफी की माँग की है। साथ ही उन्होंने पूछा कि आखिर क्यों फिल्मों और वेब सीरिज में लगातार हिन्दू घृणा से सना कंटेंट परोसा जा रहा है।

मुंबई पुलिस को दी शिकायत में कदम ने कहा है, “मैं आपको बताना चाहूँगा कि वेब सीरिज तांडव में हिंदू देवताओं का अपमान किया गया है। इससे हिंदुओं की भावनाएँआहत हुई है। वेब सीरिज के निर्देशक अली अब्बास वामपंथी विचारधारा का महिमामंडन कर रहे हैं। जीशान ने भगवान शिव का अपमान किया है। आपसे अनुरोध है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म, निर्देशक, निर्माता, लेखक और अभिनेताओं पर शिकायत दर्ज करें और सीरिज की स्ट्रीमिंग बंद करें। इसके अलावा सीरिज में विशिष्ट समुदायों का भी अपमान किया गया है। इसलिए आवश्यक कार्रवाई करें।”

राम कदम की शिकायत

भाजपा नेता कदम की शिकायत के बाद पुलिस ने तांडव के मेकर्स को समन जारी किया है। सीरिज के खिलाफ धारा 295A, आईटी एक्ट धारा 67 ए के तहत मामला दर्ज किया गया है।

गौरतलब है कि भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी इस मामले पर अपनी राय रखी थी। उन्होंने केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से वेब सीरिज पर प्रतिबंध लगाने की अपील की थी। मिश्रा ने एक वीडियो जारी करते हुए आरोप लगाया था कि वेब सीरिज के जरिए देश में हिंसा फैलाने की साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीरिज में दलितों का अपमान किया गया है।

वहीं इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट के वकील आशुतोष दुबे ने अली अब्बास जफर और अमेजन प्राइम वीडियो को हिंदूफोबिक कंटेंट के लिए कानूनी नोटिस भेजा था।

उल्लेखनीय है कि अमेज़न प्राइम ने हाल ही में सैफ अली खान स्टारर राजनीतिक ड्रामा सीरीज़ ‘तांडव’ को अपने प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया है। इसे निर्देशित किया है अली अब्बास ज़फ़र ने।

नेटिज़न्स ने कई उदाहरणों से यह साबित किया है, वेब सीरीज में हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाते हुए हिंदू समाज के विभिन्न संप्रदायों के बीच जानबूझकर विभाजन के बीज बोने का प्रयास कर हिंदुओं की भावनाओं को आहत किया गया है।

बांग्लादेश से भागकर दिल्ली में ठिकाना बना रहे रोहिंग्या, आनंद विहार और उत्तम नगर से धरे गए

सुरक्षा एजेंसियों ने गणतंत्र दिवस को देखते हुए घुसपैठियों के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ा है। इसके तहत दिल्ली में छुपकर रह रहे रोहिंग्या घुसपैठियों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है।

आनंद विहार रेलवे स्टेशन के बाहर रविवार (जनवरी 17, 2021) को 6 संदिग्ध रोहिंग्या को हिरासत में लिया गया। दिल्ली पुलिस ने बताया कि उनके खिलाफ पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। ये ट्रेन से 6 जनवरी को दिल्ली पहुँचे थे। इन सभी को लामपुर डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया है।

इन रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस भेजने के लिए FRRO को जानकारी दे दी गई है। पुलिस के मुताबिक, ये सभी ट्रेन के जरिए त्रिपुरा से दिल्ली आए थे। इनके पास भारतीय होने का कोई दस्तावेज नहीं था। विदेश मंत्रालय के जरिए इन्हें वापस भेजा जाएगा।

इससे पहले उत्तम नगर थाना पुलिस ने हस्तसाल इलाके में पिछले करीब ढाई महीने से रह रहे म्यांमार के दो नागरिकों को गिरफ्तार किया। दोनों रोहिंग्या हैं। दोनों आरोपितों की पहचान हामिद हुसैन और नबी हुसैन के रूप में हुई। दाेनों म्यांमार के बुथीडोंग इलाके के रहने वाले हैं। नवंबर महीने में ये बांग्लादेश की सीमा पार करने के बाद भारत में दाखिल हुए और फिर दिल्ली पहुँचे। ये किस मकसद से यहाँ रह रहे थे, पुलिस अभी इसकी तहकीकात कर रही है।

पुलिस को इनके इलाके में होने की सूचना सूत्रों से प्राप्त हुई। इसके बाद पुलिस ने दोनों के बारे में पता किया, जिसके बाद इन्हें पकड़ा। दोनों एक ही कमरे में रह रहे थे। पुलिस ने जब इनसे पूछताछ शुरू की तो ये कुछ स्पष्ट तौर पर नहीं बोल रहे थे। इनसे जब कागजात की माँग की गई तो ये पुलिस के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर पाए। पकड़े गए दोनों लोगों को जेल भेज दिया गया है।

पुलिस के बयान के मुताबिक, “15 जनवरी को फॉरेनर्स एक्ट की धारा 14 के तहत एक केस दर्ज किया गया था, जिसके बाद जाँच शुरू की गई थी। जाँच के दौरान पता चला कि दोनों आरोपी म्यांमार के स्थायी निवासी हैं और एक नवंबर, 2020 को बांग्लादेश बॉर्डर के जरिए अवैध तरीके से भारत में घुस आए थे।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों रेलवे पुलिस ने बिहार के किशनगंज से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन पर 10 रोहिंग्या मुस्लिमों को गिरफ्तार किया था। ये सभी बुधवार (13 जनवरी 2021) की दोपहर 02501 अगरतला-नई दिल्ली राजधानी स्पेशल ट्रेन से गिरफ्तार किए गए। इसमें 3 पुरुष, 2 महिला और 5 बच्चे शामिल थे। गिरफ्तार किए गए सारे रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश के कॉक्स बाज़ार स्थित कुटूपालंग शिविर से फरार हुए थे।

‘जेल में मेरे पति को कर रहे टॉर्चर’: BARC के पूर्व सीईओ की पत्नी ने NHRC से की शिकायत

BARC के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता को तलोजा जेल के अधिकारियों द्वारा जेजे अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती कराने के बाद उनकी पत्नी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने कहा है कि रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को झूठे तरीके से फँसाने के लिए महाराष्ट्र पुलिस उनके पति को हिरासत में टॉर्चर कर रही है।

NHRC को लिखे पत्र में पार्थो दासगुप्ता की पत्नी समरजनी दासगुप्ता ने उल्लेख किया है कि उनके पति को तलोजा अधिकारियों द्वारा जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने कहा कि दासगुप्ता को 15  जनवरी को दोपहर 1 बजे अस्पताल लेकर जाया गया। उनका शुगर लेवल भी काफी उच्च स्तर (516) पर पहुँच गया था। वह अर्ध-बेहोशी की हालत में थे। वे बोल भी नहीं पा रहे थे।

समरजनी दासगुप्ता ने बताया, ”होश में आने के बाद उन्होंने नवी मुंबई के पुलिस अधिकारी के साथ मेरा नंबर साझा किया। मुझे उनकी गंभीर स्थिति के बारे में 16 जनवरी को सुबह 3.20 बजे सूचित किया गया था। जब हम अस्पताल पहुँचे, तो हमने उन्हें आपातकालीन वार्ड में गंभीर हालत में पाया। ना तो उनके बेड और न ही ओढ़ने का चादर था। इसके साथ ही उन्हें कोई तकिया भी नहीं दिया गया था। उन्होंने हमें बताया कि उन्हें 15 जनवरी से खाने के लिए कुछ नहीं दिया गया है। उन्होंने हमें बताया कि तलोजा जेल में भी उन्हें बेरहमी से पीटा गया था।”

पूर्व BARC CEO की पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि मुंबई पुलिस अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक टीवी को फँसाने के लिए उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए तलोजा जेल के अंदर किसी को भुगतान कर रही है। अपने पत्र में, समरजनी ने कहा कि पार्थो को तलोजा जेल में मानसिक रूप से भी परेशान किया गया है।

समरजनी ने पत्र में बताया, “उन्हें 6.30/7:00 बजे आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया था। तब से हम उन्हें देख नहीं पाए या उनसे बात नहीं कर पाए। जेजे के डॉक्टरों ने किए गए टेस्ट और दी गई दवा की किसी भी रिपोर्ट को साझा करने से इनकार कर दिया।”

महाराष्ट्र सरकार पर अपने पति को प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए, समरजनी दासगुप्ता ने अपनी शिकायत में कहा है कि उनके पति को मिला इलाज उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है, क्योंकि वे उचित इलाज के लायक हैं। दूसरी बात उन्होंने यह कही कि परिवार को बताया जाना चाहिए कि उनको क्या उपचार दिया जा रहा है।

उन्होंने सवाल किया, “मेरी बेटी तलोजा जेल को अपने पिता के साथ एक कॉल करने के लिए लगातार ईमेल भेज रही है, जो कि जेल के नियमों के अनुसार आरोपित का अधिकार है। इस ईमेल में उसने हमेशा अपना फोन नंबर साझा किया है। 15 जनवरी की शाम 6 बजे, जब उसने जेल को ईमेल भेजा, तब भी हमें उनकी स्थिति के बारे में सूचित नहीं किया गया। जब अधिकारियों के पास परिवार तक पहुँचने के सभी साधन मौजूद हैं तो फिर उनके परिवार को अँधेरे में क्यों रखा जा रहा है?”

समरजनी दासगुप्ता ने पूछा कि शुरू से ही हर कदम पर सहयोग करने के बावजूद उन्हें परेशान क्यों किया जा रहा है। उनके मौलिक अधिकार को अस्वीकार क्यों किया जा रहा है। हम पार्थो को सुरक्षित चाहते हैं। उन्होंने एनएचआरसी को एक शिकायती पत्र में लिखा कि उन्हें नुकसान नहीं पहुँचाया जाना चाहिए और लोगों के निहित स्वार्थों को पूरा करने के लिए एक गलत बयान देने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए।

मुंबई पुलिस और सिटी क्राइम ब्रांच ने 25 दिसंबर 2020 को फर्जी TRP घोटाले के सिलसिले में ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता को गिरफ्तार किया था। यह आरोप लगाया जा रहा है कि BARC के पूर्व सीईओ को अर्नब गोस्वामी के खिलाफ झूठे बयान देने के लिए कथित रूप से प्रताड़ित किया गया था ताकि उन्हें मामले में फँसाया जा सके।

बेटी ने PM से लगाई गुहार

इससे पहले पार्थो दासगुप्ता की बेटी प्रत्यूषा ने एक पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई थी। उन्होंने इस पत्र में अपने पिता की ज़िंदगी बचाने की अपील की। प्रत्यूषा का कहना था कि उनके पिता शुक्रवार (जनवरी 15, 2021) से ही बेहोशी की अवस्था में अस्पताल में भर्ती हैं।

प्रत्यूषा ने कहा कि जनवरी 15, 2021 को दोपहर 1 बजे उन्हें अस्पताल लेकर जाया गया और अगले दिन 3 बजे दोपहर को परिजनों को इसकी सूचना दी गई, अर्थात 15 घंटे तक इस बात को छिपा कर रखा गया।

उन्होंने बताया कि जब वो अस्पताल पहुँचीं तो उनके पिता इमरजेंसी रूम में पड़े हुए थे। प्रत्यूषा ने सोशल मीडिया के माध्यम से शेयर किए गए पत्र में लिखा है कि उनके पिता कुछ कहना चाहते थे और बातें करना चाहते थे, लेकिन वो कुछ बोल नहीं पा रहे थे। उनका शुगर लेवल भी काफी उच्च स्तर (516) पर पहुँच गया था। डायबिटीज, हाइपरटेंशन और एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस नामक एक ऑटो इम्यून डिसऑर्डर जैसी बीमारियों से वो कई सालों से पीड़ित हैं।

ऑपइंडिया ने स्थिति की वास्तविकता को जानने के लिए पार्थो दासगुप्ता के परिवार से संपर्क किया। परिवार ने ऑपइंडिया को बताया कि दासगुप्ता 15 जनवरी 2021 की दोपहर के बाद से गंभीर हालत में थे और उन्हें जेजे अस्पताल ले जाया गया। हालाँकि, तलोजा जेल के अधिकारियों ने नवी मुंबई पुलिस को उसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी। लगभग 15 घंटे तक उनकी हालत के बारे में परिवार से संपर्क नहीं किया गया। दोपहर बाद, जब दासगुप्ता को जेजे अस्पताल ले जाया गया, तब सत्र न्यायालय में जमानत की सुनवाई चल रही थी, जहाँ उनकी बेटी और पत्नी दोनों मौजूद थे।

ऑपइंडिया से बात करते हुए प्रत्यूषा ने सवाल किया कि जब दासगुप्ता अस्पताल में बेहोश थे, तब अधिकारियों ने परिवार को इतने समय तक सूचित क्यों नहीं किया। उन्हें संदेह है कि अधिकारियों ने उस समय उनके गंभीर स्वास्थ्य के बारे में जानकारी छिपा दी थी, क्योंकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति जमानत के लिए वैध होगी और पुलिस यह नहीं चाहती थी कि सुनवाई के दौरान ही ये जानकारी सामने आए।

परिवार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की

समरजनी दासगुप्ता ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर पार्थो और उनकी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के कारण होने वाली मानसिक और शारीरिक यातना का विवरण भी दिया है। हलफनामे में उन्होंने कहा कि जब वह अस्पताल पहुँची, तो ‘स्ट्रेचर पर खून था’ जहाँ पर पार्थो लेटे हुए थे। उनके पैर बर्फ से ठंडे थे। उन्होंने कहा कि यहाँ तक कि डॉक्टरों ने उनकी तत्काल चिकित्सा के उनके अनुरोध को नजरअंदाज कर दिया। हलफनामे में उन्होंने कहा है कि 16 जनवरी की सुबह 6:30 बजे आईसीयू में ले जाया गया, जबकि वह 15 जनवरी की दोपहर से अस्पताल में थे। उन्होंने दावा किया कि उसके बाद भी उन्हें उनकी बीमारी या स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में सूचित नहीं किया गया।

फेक टीआरपी घोटाला

अक्टूबर 2020 में मुंबई पुलिस ने कुछ टीवी चैनलों के खिलाफ सनसनीखेज दावे किए थे कि वे टीआरपी रेटिंग्स में हेरफेर कर रहे थे। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुंबई पुलिस कमिश्नर ने कहा था कि रिपब्लिक टीवी सहित तीन टीवी चैनल BARC के दर्शकों के डेटा में हेरफेर करने में शामिल थे, जिन घरों में बार-ओ-मीटर, टीवी व्यूअरशिप को ट्रैक करने वाले डिवाइस इंस्टॉल किए गए हैं।

पुलिस ने विशेष रूप से उल्लेख किया था कि हंसा रिसर्च ने पुलिस में शिकायत दर्ज की थी। हंसा ग्रुप एक ऐसा संगठन है जिसने BARC के लिए TRP रिकॉर्ड करने के लिए उपकरणों को विनियमित किया है। दिलचस्प बात यह है कि हंसा रिसर्च द्वारा दर्ज की गई इस एफआईआर में एक बार भी रिपब्लिक टीवी का जिक्र नहीं किया गया था। जिस चैनल का जिक्र कई बार किया गया वह इंडिया टुडे था।

जाँच के दौरान, कई सबूत और गवाह सामने आए कि कथित मुंबई पुलिस रिपब्लिक टीवी के खिलाफ बोलने के लिए उन्हें डरा रही है, जिसमें हंसा के अधिकारी भी शामिल हैं। हंसा ने यह भी शिकायत की है कि उन्हें मुंबई पुलिस द्वारा रिपब्लिक टीवी के खिलाफ बयान देने के लिए परेशान किया जा रहा है।

डिमांड में ‘कॉमेडियन’ मुनव्वर फारूकी, यूपी पुलिस को चाहिए कस्टडी

भगवान राम-सीता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर अभद्र टिप्पणी करने को लेकर गिरफ्तार कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी की मुश्किलें और बढ़ने वाली है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुनव्वर के खिलाफ पिछले साल अप्रैल में दर्ज एक मामले को लेकर प्रोडक्शन वारंट जारी किया है। बता दें हाल ही में मध्यप्रदेश हाइकोर्ट ने मुनव्वर फारूकी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तरप्रदेश पुलिस ने कॉमेडियन फारूकी को अपनी गिरफ्त में लेने के लिए इंदौर सेंट्रल जेल और सीजेएम कोर्ट के समक्ष 7 जनवरी को प्रोडक्शन वारंट प्रस्तुत किया। बताया जा रहा है कि 19 अप्रैल, 2020 में आशुतोष मिश्रा नामक एक अधिवक्ता की शिकायत पर प्रयागराज जिले के जॉर्ज टाउन पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ दर्ज एक मामले में यह प्रोडक्शन वारंट पेश किया गया है।

साभार: Newsroom Post

पुलिस ने आरोपित पर भारतीय दंड संहिता (IPC) धारा 153A (धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295A (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य, धर्म का अपमान कर किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने का इरादा) और धारा 65 और 66 आईटी एक्ट, 2008 के तहत मामला दर्ज किया था।

बता दें यह मामला फारूकी द्वारा अपलोड एक यूट्यूब वीडियो पर आधारित है। इसमें उसने हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करते हुए, गोधरा ट्रेन जलने के मामले में हिंदुओं की मौत का मजाक उड़ाते हुए और नरसंहार में आरएसएस और अमित शाह की भूमिका पर जोर दिया था।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को मुनव्वर की जमानत याचिका पर सुनवाई अगले सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दी। इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार इरम सिद्दीकी ने ट्विटर पर जानकारी दी कि इंदौर में उच्च न्यायालय में जमानत की सुनवाई स्थगित कर दी गई क्योंकि पुलिस द्वारा उसकी केस डायरी पेश नहीं की गई।

उल्लेखनीय है कि हिंदू भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले मुनव्वर फारूकी ने हाल ही जमानत के लिए मध्यप्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट में उसकी याचिका खारिज की गई थी और सत्र न्यायालय ने भी जमानत देने से मना कर दिया था।

न्यायिक मजिस्ट्रेट अमन सिंह भूरिया ने भी 15 फरवरी को फारूकी की न्यायिक हिरासत को 27 जनवरी तक बढ़ा दिया था। यहाँ बता दें कि 1 जनवरी को स्थानीय भाजपा विधायक मालिनी लक्ष्मणसिंह गौड़ के बेटे एकलव्य सिंह गौड़ ने फारूकी और आयोजन से जुड़े 4 अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था। उनका आरोप था कि फारूकी ने कार्यक्रम में हिंदू देवी-देवताओं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और गोधरा कांड को लेकर अभद्र टिप्पणियाँ की।

हार्वर्ड वाले स्टीव जार्डिंग के NDTV से लेकर राहुल-अखिलेश तक से लिंक, लेकिन निधि राजदान को नहीं किया खबरदार!

साइबर क्राइम के एक से एक मामले आपने देखे-सुने होंगे। लेकिन पत्रकार निधि राजदान के साथ जो हुआ वो एकदम अलग है और अनोखा भी। निधि राजदान के ट्वीट के मुताबिक हैकर्स ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के नाम पर उन्हें ‘फिशिंग अटैक’ का शिकार बनाया। मगर इसको लेकर अब भी कई सवालों के जवाब आने बाकी है। 

उन्होंने शनिवार (जनवरी 16, 2021) को इस मामले पर एक ब्लॉग लिखा। हालाँकि इस ब्लॉग ने जवाब से ज्यादा सवाल खड़े किए। ऐसा ही एक सवाल जिसका जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है, वो यह है कि कैसे उनके सर्किल के लोगों ने उनसे नहीं बताया कि यह स्कैम हो सकता है। उनकी सर्किल में हार्वर्ड एलुमनी और हार्वर्ड प्रोफेसर भी थे। उनमें से एक हैं- स्टीव जार्डिंग।

निधि राजदान के साथ स्टीव जार्डिंग कौटिल्य स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी (KSPP) के सलाहकार बोर्ड में हैं। वह हार्वर्ड केनेडी स्कूल में प्रोफेसर हैं। वह NDTV पर अमेरिकी राजनीति पर टिप्पणी करने के लिए आते रहे हैं। NDTV ने अपनी आदत के मुताबिक स्टीव जार्डिंग को प्रोफेसर और एक राजनीतिक विश्लेषक के रूप में पेश किया और डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ उनके लंबे समय के एसोसिएशन को छिपाने का प्रयास किया।

स्टीव जार्डिंग अमेरिकी सीनेट, कई डेमोक्रेट उम्मीदवारों के चुनावी अभियानों का हिस्सा रहे हैं। खबरों के मुताबिक, उन्होंने कम से कम एक बार डेमोक्रेटिक पार्टी में एक पद भी सँभाला है। उन्होंने 2016 में हिलेरी क्लिंटन के राष्ट्रपति अभियान में भी काम किया और रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने स्पेनिश प्रधानमंत्री मारियानो राजोय, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और अन्य के अभियानों में भी काम किया है।

स्टीव जार्डिंग ने भारतीय राजनीति में भी दबदबा बनाया है। उन्होंने 2017 के उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी को अपनी सेवाएँ प्रदान की थीं। उन्होंने पहले हिलेरी और फिर अखिलेश के राजनीतिक अभियान में हिस्सा लिया था।

उनके लीक हुए एक आंतरिक ईमेल से यह भी पता चला है कि अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम सिंह यादव के बीच का स्पष्ट टकराव राजनीतिक रणनीति के तहत जार्डिंग की सलाह के हिस्से के रूप में किया गया था।

Leaked email from Steve Jarding, Rahul Kanwal shared the image in December 2016
Leaked email from Steve Jarding, Rahul Kanwal shared the image in December 2016

सिर्फ अखिलेश यादव ही नहीं, स्टीव जार्डिंग ने राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पार्टी को भी 2019 के लोकसभा चुनावों पर सलाह देने का प्रयास किया। ऐसी अटकलें थीं कि वह वास्तव में कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ काम कर रहे थे, लेकिन उन्होंने कहा कि दोनों के बीच केवल एक बैठक हुई थी।

उनके हालिया ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए, यह शायद कुछ स्मार्ट फैसलों में से एक हो सकता है, जिसे राहुल गाँधी ने अपने राजनीतिक जीवन में लिया है। यह भी बताया गया कि वह 2019 के चुनावों के लिए जनसेना प्रमुख पवन कल्याण के साथ काम करेंगे। निधि राजदान मामले में यह समझ से बाहर है कि हार्वर्ड के प्रोफेसर और डेमोक्रेट पोल सलाहकार उन्हें सचेत करने में विफल रहे कि वह एक संभावित स्कैम की शिकार हो सकती हैं।

वह संयुक्त राज्य अमेरिका से एक अच्छी तरह से जुड़े हुए शख्स हैं। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि उन्हें विश्विद्यालय के बुनियादी विवरणों की जानकारी होगी। जैसे कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने निधि राजदान द्वारा विश्वविद्यालय में शामिल होने की घोषणा करने से दो महीने पहले अप्रैल 2020 में ही नई नियुक्तियों पर रोक का ऐलान कर दिया था। हालाँकि निधि इस मामले से तब तक बेखबर रही जब इस महीने यूनिवर्सिटी ने ऐसी किसी नियुक्ति से इनकार किया।