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‘फेकबुक निष्पक्ष नहीं, हम सब राजनीति से प्रभावित’ – कंपनी के बड़े अधिकारी ने स्वीकारी बात, डोनॉल्ड ट्रंप मामले में किया ट्वीट

इंस्टाग्राम के प्रमुख एडम मोसेरी (Adam Mosseri, the head of Instagram) ने स्वीकारा है कि फेसबुक एक न्यूट्रल प्लेटफॉर्म बिलकुल भी नहीं है और उसके अपने राजनीतिक झुकाव हैं। मोसेरी ने यह बयान उस समय दिया है, जब विश्व भर में फेसबुक समेत अन्य प्लेटफॉर्मों की डोनॉल्ड ट्रंप का अकॉउंट हटाने के लिए आलोचना की जा रही है। दिलचस्प यह है कि खुद इंस्टाग्राम का स्वामित्व भी फेसबुक के पास है।

इंस्टाग्राम के प्रमुख का कहना है, “हम तटस्थ नहीं हैं। कोई भी मंच तटस्थ नहीं है। हम सभी के मूल्य (वैल्यू) हैं और वे मूल्य हमारे निर्णयों को प्रभावित करते हैं। हम अराजनैतिक होने का प्रयास करते हैं, लेकिन यह बहुत मुश्किल है, विशेष रूप से अमेरिका में जहाँ लोग अधिक से अधिक ध्रुवीकृत हैं।” 

Head of Instagram admits Facebook is not a neutral platform

बता दें कि मोसेरी ने इस बात को फेसबुक के वाइस प्रेसीडेंट के ट्वीट पर कहा है। जिसमें निक क्लेग (फेसबुक के उपाध्यक्ष) ने खुशी जाहिर की थी कि नागरिक अधिकारों के अटॉर्नी रॉय एल ऑस्टिन जूनियर को कंपनी में नागरिक अधिकारों के पहले उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया। ऑस्टिन के बारे में मालूम हो कि वह पहले ओबामा प्रशासन में काम कर चुके हैं और उन्हें ही लेकर क्लेग ने कहा कि ऑस्टिन फेसबुक की नई नागरिक अधिकार टीम स्थापित करेंगे।

गौरतलब है कि फेसबुक के राजनीतिक झुकाव को लेकर इंस्टाग्राम प्रमुख की यह स्वीकृति उस समय आई है, जब कई टेक कंपनियों द्वारा डोनाल्ड ट्रंप और उनके समर्थकों के अकॉउंट सेंसर किए जा रहे हैं। यहाँ तक एप्पल, गूगल, अमेजॉन सबने मिल कर डोनॉल्ड ट्रंप के कारण parler नाम की एप को भी बंद करवा दिया, क्योंकि उन्होंने डोनॉल्ड ट्रंप को अपना पक्ष रखने की जगह दी थी।

आज स्थिति ये है कि ये सभी टेक दुनिया के महारथी इस बात को साबित करने में जुटे हुए हैं कि आखिर कैपिटल हिल में जो भी दंगे देखने को मिले, उसके लिए इस तरह की सेंसरशिप की आवश्कता थी। लेकिन अब एडम मोसेरी ने राजनीतिक झुकाव की बात को स्वीकार करके इस बात को साबित कर दिया है कि राजनीतिक मतभेद इस फैसले की वजह थे।

आज हम देखें तो इन प्लेटफॉर्मों ने कभी उस वामपंथी भीड़ पर अपनी नहीं कार्रवाई नहीं की, जिन्होंने अपनी मतलब के लिए मामले को तूल दिया और डेमोक्रेट पार्टी भीड़ को उकसा कर दंगों को उचित ठहराया।

10 देशों ने कोरोना वैक्सीन के लिए भारत से किया अनुरोध, नेपाल को भी चाहिए 1.2 करोड़ डोज: पहली खेप पहुँची दिल्ली

कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में भारत अब अंतिम वार की तैयारी में जुट गया है। कोरोना वैक्सीन की पहली बड़ी खेप पुणे के सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया से दिल्ली पहुँच गई है। वैक्सीन की खेप को संस्थान से पुणे एयरपोर्ट पहुँचाया गया, जहाँ से फ्लाइट से उसे दिल्ली ले जाया गया। मंगलवार (जनवरी 12, 2021) को तड़के ये प्रक्रिया शुरू की गई। सुबह 8 बजे वैक्सीन लदे ट्रक्स एयरपोर्ट पहुँचे और 10:15 में दिल्ली लाए गए।

स्पाइसजेट की फ्लाइट संख्या SG 8937 का इसमें इस्तेमाल किया गया। मंगलवार तक ऐसे कम से कम एक दर्जन फ्लाइट्स के जरिए वैक्सीन की कई खेप दिल्ली पहुँचने वाली है। वैक्सीन Covishield की खेप SII से लोहेगाँव एयरपोर्ट से होकर दिल्ली भेजी गई। जनवरी 16 से फ्रंटलाइन वर्कर्स का टीकाकरण शुरू हो जाएगा। ऐसे 3 करोड़ कोरोना वारियर्स के टीकाकरण का पूरा खर्चा केंद्र सरकार उठाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही कह चुके हैं कि ये विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान होगा। वैक्सीन के रखरखाव और उसे कहीं ले जाने के लिए -8° C से -70° C तक के विशेष तापमान के अंतर्गत रखना होता है। ट्रांसपोर्टेशन और रखरखाव के लिए ये तमाम चीजें एयरपोर्ट्स प्रशासन और फ्लाइट सेवाओं को बता दिया गया है। इसके लिए ड्राई आइस की व्यवस्था करने को भी कह दिया गया है। डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने सारे दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

ऐसे सभी फ्लाइट्स में कार्बन डाईऑक्साइड रखने को अनिवार्य कर दिया गया है। ये ऐसा रेफ्रिजरेंट मटेरियल है, जो आसानी से उपलब्ध है और इसका उपयोग भी सामान्य है। ‘मेड इन इंडिया’ वैक्सीन को लेकर देश भर में तो जोश का माहौल है ही, दुनिया भर के कई अन्य देश भी इसकी माँग कर रहे हैं। कई गैर-एशियाई देश भी इसके लिए भारत को अनुरोध कर रहे हैं। WHO में भारत ने गरीब देशों की मदद के लिए प्रतिबद्धता जताई थी, जिसका पालन किया जाएगा।

अब तक ब्राजील, मोरक्को, सऊदी अरब, म्यांमार, बांग्लादेश, दक्षिण अफ्रीका, मंगोलिया और श्रीलंका जैसे देशों ने आधिकारिक रूप से भारत से वैक्सीन के लिए अनुरोध किया है। भारत इसमें पड़ोसी और गरीब देशों को पहले प्राथमिकता देगी। कई देशों ने भारत से अनुरोध किया है कि वे सरकारी स्तर पर (गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट के आधार पर) या सीधे वैक्सीन डेवलपर्स के साथ समझौते की छूट दी जाए। नेपाल ने भी 1.2 करोड़ डोज माँगे हैं।

पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में कहा कि दो वैक्सीन्स के अलावा चार और वैक्सीन पर भी काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस टीकाकरण में कई विदेशी ताकतें लोगों को गुमराह करने का प्रयास करेंगी, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी तरह के ‘इफ़ या बट’ की गुंजाइश ना रहे और टीकाकरण अभियान सफलतापूर्वक सम्पन्न हो। पीएम मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि यह वैक्सीन स्वदेशी हैं और अगर हमें यह बाहर के किसी देश से मँगानी होतीं तो यह समस्या और बड़ी हो सकती थी।

कॉन्ग्रेसी नेता कामरान अंसारी ने आदिवासी युवक को दौड़ा-दौड़ा कर मारा, माँ माँग रही थी छोड़ देने की भीख: वीडियो वायरल होने पर FIR

छत्तीसगढ़ में एक कॉन्ग्रेस नेता की सरेआम दबंगई कैमरे में कैद हो गई, जिसके बाद उसकी जम कर थू-थू हुई। वीडियो में रायपुर के पार्षद कामरान अंसारी अपने समर्थकों के साथ एक युवक को दौड़ा-दौड़ा कर पीटते हुए नजर आ रहा है, जबकि पीड़ित की माँ लगातार उसे छोड़ देने के लिए मिन्नतें कर रही हैं। बावजूद इसके सब मिल कर युवक को पीटते रहे। पीड़ित आदिवासी समुदाय का है। कॉन्ग्रेसी पार्षद ने ‘उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे’ की तर्ज पर युवक के खिलाफ FIR भी लिखवा दी।

रविवार (जनवरी 10, 2021) को हुई इस घटना के बाद अगले दिन भाजपा नेता हरकत में आए और अनुसूचित जाति-जनजाति थाने पहुँचे, जहाँ पार्षद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। युवक की माँ ने बताया कि कामरान अंसारी के समर्थकों ने घर पर आकर भी धमकाया है। माँ का कहना है कि उनका बेटा अब तक घर वापस नहीं आया है और लापता है, जिससे परिजन डर के माहौल में जी रहे हैं।

परिजनों का कहना है कि लगातार गुहार लगाने के बावजूद युवक को नहीं छोड़ा गया और जब वो पुलिस में शिकायत दर्ज कराने गए तो वहाँ से भी भगा दिया गया। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार चल रही है। परिजन फिर से थाने जाकर शिकायत दर्ज कराने के प्रयास में लगे हुए हैं। वहीं पार्षद का कहना है कि युवक नशे में था और कार्यालय में आकर तोड़फोड़ करने लगा व हत्या की धमकी देने लगा।

कामरान अंसारी ने युवक को लात मारने की बात स्वीकार करते हुए दावा किया कि परिस्थिति ही ऐसी हो गई थी और उसे दफ्तर से बाहर निकालने के लिए ऐसा किया गया। पार्षद ने अपनी शिकायत में युवक पर नशे के कारोबार से जुड़े होने और अवैध गतिविधियाँ चलाने का आरोप लगाया है। राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा, “सत्ता के नशे में चूर कॉन्ग्रेस पार्टी के जनप्रतिनिधि द्वारा आदिवासी समाज की महिला एवं उसके पुत्र के साथ इस प्रकार का अत्याचार कॉन्ग्रेस पार्टी का जनजातीय समाज के प्रति सोच को दर्शाता है।”

उन्होंने कहा कि इस घटना की जितनी भत्सना कि जाए, उतनी कम है और साथ ही आश्वासन दिया कि भाजपा परिवार पीड़ित परिवार के साथ ‘सदैव खड़ी’ है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के साथ इस प्रकार का अन्याय सहन नही किया जाएगा और साथ ही माँग की कि दोषियों के विरुद्ध तीव्र कार्यवाही की जाए। पुलिस ने पीड़ित युवक जय और उसके साथियों सोहन व इंदर के खिलाफ सिविल लाइन थाने में FIR दर्ज की है।

इससे पहले तेलंगाना के आदिलाबाद शहर में 18 दिसंबर को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता फारूक अहमद द्वारा अंधाधुंध गोलीबारी की गई थी। घटना में घायल हुए तीन लोगों में से एक व्यक्ति ने 1 सप्ताह बाद इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। यह घटना क्रिकेट खेलने के दौरान हुई थी, जो हाथापाई में बदल गई। फारूक ने अपने विरोधियों पर बहुत करीब से गोलीबारी शुरू कर दी थी।

‘हिन्दू धर्म ही सम्पूर्ण विश्व का धर्म बन सकता है, अन्य धर्म व्यक्ति विशेष के जीवन-आधार पर खड़े… उनमें तत्व की कमी’

आज पूरा राष्ट्र स्वामी विवेकानंद की 158वीं जयंती ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के तौर पर मना रहा है। 12 जनवरी 1863 को बंगाल के कलकत्ता में माता भुवनेश्वरी देवी और पिता विश्वनाथ दत्त के घर जन्में नरेंद्रनाथ दत्त जो बाद में स्वामी विवेकानंद के नाम से जाने गए, मात्र 39 वर्ष 5 महीने और 24 दिन के जीवन में, अगर उन्हीं के शब्दों में कहूँ तो 1500 वर्ष का कार्य कर गए।

स्वामी विवेकानंद को अनेक कार्यों के लिए जाना जाता है। लेकिन अगर एक कार्य जो उन्होंने जीवन भर अनेकों कष्ट, कठिनाइयों को सहते हुए भी किया, तो वह है नि:स्वार्थ भाव से अपने राष्ट्र ‘भारत’ और अपनी संस्कृति से अत्यंत स्नेह और प्रेम। भारतवासियों में आत्मविश्वास जगाने का कार्य स्वामीजी जीवन भर करते रहे क्योंकि उनको स्पष्ट था कि बिना आत्मविश्वास के, बिना चरित्र निर्माण के, बिना मनुष्य निर्माण के आत्मनिर्भर बनना संभव नहीं है।

मनुष्य निर्माण के कार्य में अपना जीवन समर्पित करने वाले स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व और चरित्र का लोहा भारत ने ही नहीं बल्कि पूरे विश्व ने 11 सितंबर, 1893 को अमेरिका के शहर शिकागो में आयोजित विश्व धर्म महासभा में माना, जब स्वामी विवेकानंद स्वागत का उत्तर देने के लिए खड़े होते हैं और अपने मात्र पाँच शब्दों से “अमेरिकावासी बहनों तथा भाइयों” से भारत को विश्व विजयी बना देते हैं। सामने बैठे विश्व भर से आए हुए लगभग 7 हज़ार लोग दो मिनट से ज्यादा समय तक तालियाँ बजाते रहते हैं।

प्रो. शैलेन्द्रनाथ धर द्वारा लिखित पुस्तक “स्वामी विवेकानंद समग्र जीवन दर्शन” के अनुसार विश्व धर्म महासभा में दुनिया भर के दस प्रमुख धर्मों के अनेक प्रतिनिधि आए हुए थे, जिसमें यहूदी, हिन्दू, इस्लाम, बौद्ध, ताओ, कनफयूशियम, शिन्तो, पारसी, कैथोलिक तथा प्रोटेस्टेंट इत्यादि शामिल थे, लेकिन स्वामीजी का वक्तव्य सबसे अधिक सफल हुआ था, जो हमें धर्म महासभा के सामान्य समिति के अध्यक्ष डॉक्टर जेएच बैरोज के शब्दों से पता लगता है।

उन्होंने कहा था, “स्वामी विवेकानंद ने अपने श्रोताओं पर अद्भुत प्रभाव डाला” और मरविन-मेरी स्नेल महासभा की विज्ञान सभा के अध्यक्ष थे, वो लिखते हैं- “निःसंदेह स्वामी विवेकानन्द धर्म महासभा के सर्वाधिक लोकप्रिय एवं प्रभावशाली व्यक्ति थे। कट्टर से कट्टर ईसाई भी उनके बारे में कहते हैं कि वे मनुष्य में महाराज हैं।”

विश्व धर्म महासभा के बाद स्वामीजी का अमेरिका के अनेक प्रांतो में, इंग्लैंड में और यूरोप के अनेक देशों में प्रवास हुआ। सभी धर्मों और पंथों के लोगों और धर्म उपदेशकों के साथ अपने प्रत्यक्ष अनुभव के बाद स्वामी विवेकानंद उद्घोष करते हैं, ”वेदांत – सिर्फ वेदांत को ही सार्वजनीन मानता हूँ। वेदांत के सिवा कोई अन्य धर्म सार्वजनीन नहीं कहला सकता।”

आज के तमिलनाडु प्रान्त के एक नगर कुम्भकोणम में दिए हुए अपने भाषण ”वेदांत का उद्देश्य” में स्वामीजी कहते हैं:

”हमारे धर्म के सिवा दुनिया के सभी धर्म, सब किसी न किसी व्यक्ति विशेष या धर्म-संस्थापक के जीवन के आधार पर ही खड़े हैं और उसी से वे अपने आदेश, प्रमाण और शक्ति ग्रहण करते हैं। आश्चर्य तो यह है कि उसी अधिष्ठाता-विशेष के जीवन की ऐतिहासिकता पर ही उन धर्मों की सारी नींव प्रतिष्ठित हैं। यदि किसी तरह उनके जीवन की ऐतिहासिकता पर आघात लगे और उसकी नींव हिल जाए या ध्वस्त हो जाए तो उस पर खड़ा धर्म का सम्पूर्ण भवन भरभराकर गिर पड़ता है और सदा के लिए अपना अस्तित्व खो देता है।”

स्वामीजी के अनुसार हिन्दू धर्म के सिवा संसार के अन्य सभी धर्म ऐतिहासिक जीवनियों के आधार पर खड़े हैं। परन्तु हिन्दू धर्म कुछ तत्वों की नींव पर खड़ा है। स्वामीजी कहते हैं, ”पृथ्वी पर कोई भी व्यक्ति – स्त्री हो या पुरुष, वेदों के निर्माण करने का दम नहीं भर सकता है।” इसीलिए हमारा धर्म किसी व्यक्ति विशेष पर निर्भर नहीं करता, यहाँ तो अनेकों ऋषि-ऋषिकाओं ने और महापुषों ने जन्म लिया है और आगे भी लेते रहेंगे।

स्वामीजी के अनुसार, “हिन्दू धर्म इसलिए भी सत्य है कि उसकी सर्वोच्च शिक्षा है त्याग और युगों के अनुभव से प्राप्त अगाध विज्ञान। बाकि जातियाँ (धर्म) इन्द्रिय-जनित सुखों के गुलाम, भोग-विलास की लालसा और संसार की माया में लिपटे हैं। हम हिन्दुओं की तुलना में वह अभी दुधमुँहे बच्चे के बराबर हैं। त्याग से ही मनुष्य अभीष्ट तक पहुँच सकता है, भोग-विलास द्वारा नहीं। इसीलिए हमारा धर्म ही सच्चा धर्म है। स्वामीजी यह भी कहते हैं कि दुनिया में अनेकों राष्ट्र बने और विलीन हो गए, अनेकों सभ्यताओं ने जन्म लिया और आज उनका नामों-निशान नहीं हैं लेकिन हम यहाँ इस तरह से जीवित हैं, मानो हमारा जीवन अनंत है।

पाश्चात्य देश वाले ”बलिष्ट की अतिजीविता (Survival of the fittest)” के सिद्धांत पर बहुत लम्बी-चौड़ी बातें करते हैं। उनके अनुसार जिसकी भुजाओं में सबसे अधिक बल है, वही अधिक जीवित रहेगा। किंतु हमारी हिन्दू जाति ने कभी किसी जाति या राष्ट्र को पराजित नहीं किया लेकिन फिर भी हम करोड़ों हिन्दू जीवित हैं।

स्वामीजी मद्रास के अपने अंतिम व्याख्यान ”भारत का भविष्य” में बताते हैं कि विदेशी आक्रांताओ ने हमारे अनेकों मंदिर तोड़े लेकिन मंदिर के कलश फिर खड़े हो गए। दक्षिण के कुछ मंदिर और गुजरात के सोमनाथ जैसे मंदिर हमें विपुल ज्ञान प्रदान करेंगे। पता नहीं कितने सैकड़ों बार यह तोड़े गए आक्रांताओ द्वारा और न जाने कितने बार यह पुनः वापस खड़े हो गए। बार-बार नष्ट हुए और बार-बार नवीन जीवन प्राप्त कर अटल रूप से वापस खड़े हो गए। स्वामीजी आगे कहते हैं:

”इस धर्म में ही हमारे राष्ट्र का मन है, हमारे राष्ट्र का जीवन प्रवाह है। इसका अनुसरण करोगे तो यह तुम्हें गौरव की ओर ले जाएगा। इसे छोड़ोगे तो मृत्यु निश्चित है।”

आज अगर हम विश्व भर में देखें तो हमें धर्म के नाम पर अनेकों लड़ाइयाँ दिखती हैं। धर्म को आतंकवाद से जुड़ते हुए भी हमने अनेकों बार देखा है। हर व्यक्ति अपने धर्म या पंथ को श्रेष्ठ बताने में लगा है। इसी बीच विश्व को स्वामीजी के इस विचार को धारण करने की जरूरत है, जो हिन्दू धर्म को इसलिए श्रेष्ठ और दुनिया का धर्म बनने का माद्दा रखने वाला नहीं बताते हैं क्योंकि वह सबसे श्रेष्ठ है, बल्कि इसलिए क्योंकि हिन्दू धर्म में सबसे ज़्यादा स्वीकार्यता है।

हिन्दू धर्म सभी धर्मों के प्रति केवल सहिष्णुता में ही विश्वास नहीं करता बल्कि, सभी धर्मों को सच्चा मान कर स्वीकार करता है। इसीलिए हिन्दू जाति सैकड़ों सदियों से कहते और जीवन में उतारते हुए आ रहे हैं – एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्त्यग्निं (”ऋग्वेद के प्रथम मण्डल के 164वें सूक्त की 46वीं ऋचा”) सत्ता केवल एक ही है, ऋषि लोग उसे भिन्न-भिन्न नामों से पुकारते हैं। इसीलिए सबको मात्र सहने वाला नहीं बल्कि स्वीकार करने वाला हिन्दू धर्म ही विश्व का धर्म बन सकता है।

बिलाल खान से की थी प्रेम विवाह, वही बना हत्यारा: झारखंड पुलिस ने जारी की फोटो, काट डाला था सिर और गुप्तांग भी

झारखण्ड के ओरमाँझी के वीभत्स हत्याकांड का पुलिस जल्द ही खुलासा करने वाली है। फिलहाल इस घटना के मुख्य आरोपित और मृत पीड़िता की पुलिस ने पहचान कर ली है। रविवार (जनवरी 10, 2021) को जिराबार जंगल से एक युवती की सर कटी हुई लाश मिली थी, जो नग्न अवस्था में थी। सिर न मिलने के कारण मृतका की पहचान नहीं हो सकी थी। अब पुलिस इस मामले में आरोपित बिलाल खान उर्फ शेख बेलाल की तलाश में जुट गई है।

सुबह-सुबह जैसे ही स्थानीय लोगों ने लाश को इस अवस्था में देखा था, हड़कंप मच गया। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी, जिसने मौके पर पहुँच कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। ग्रामीण एसपी नौशाद आलम, सिल्ली डीएसपी चंद्रशेखर आजाद और थाना प्रभारी श्याम किशोर महतो ने घटनास्थल पर जाकर मुआयना किया। फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वाड तक की भी मदद ली गई। फिर पुलिस ने एक सप्ताह के अंदर की सारी मिसिंग रिपोर्ट्स खँगाली।

मंगलवार के दिन पुलिस इस मामले में बड़ा खुलासा करते हुए बताएगी कि इस हत्याकांड की जाँच में अब तक क्या पता चला है। बिलाल खान उर्फ़ शेख बेलाल हाल ही में जेल से निकला था, जिसके बाद वो फिर से फरार चल रहा है। जिस युवती की लाश मिली थी, उसका वो पहला पति है। उसकी तलाश में पुलिस जगह-जगह छापे मार रही है। दूसरे पति खालिद को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। युवती 2 महीने से लापता थी।

चान्‍हो इलाके के चटवल गाँव के एक दंपती ने मृतका की पहचान की थी। दम्पति के डीएनए सैम्पल को जाँच के लिए भेजा गया। इसके बाद लाश की पहचान हो गई। जहाँ से ये लाश मिली थी, वो जगह साईं नाथ विश्वविद्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित है। मुख्य आरोपित बिलाल खान उर्फ़ शेख बेलाल के पोस्टर जारी कर दिए गए हैं। युवती का रेप किए जाने के बाद उसकी हत्या की गई थी। हत्या आरोपित बिलाल पिठोरिया के चंदवे बस्ती का रहने वाला है।

जाँच में मृतका चान्हो दम्पति की बेटी पाई गई। दम्पति ने बताया है कि युवती ने बिलाल खान उर्फ़ शेख बेलाल से प्रेम विवाह किया था। जल्द ही दोनों में लड़ाई-झगड़े होने लगे। युवती ने पिठोरिया थाने में उसके विरुद्ध दहेज़ प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया था। फिर मई 2020 में उसे गिरफ्तार किया गया था। फिर युवती अपने मौके रहने लगी। इसके बाद उसकी दोस्ती खालिद से हुई, जो शादी में बदल गई।

खालिद पहले से शादीशुदा था। वो युवती को लेकर दिल्ली गया, लेकिन वहाँ दोनों में अनबन होने के कारण वो फिर वापस लौट आई। अब परिजनों ने आरोप लगाया है कि शेख बेलाल ही युवती का हत्यारा है। इससे पहले वो कुख्यात सरजा जावेद उर्फ़ बम्बइया की हत्या के मामले में भी जो जेल जा चुका है। उस पर आर्म्स एक्ट के कई मामले लंबित हैं। वो 2 महीने से फरार चल रहा है। पुलिस ने उसकी जल्द गिरफ़्तारी का आश्वासन दिया है।

सिर गायब-गुप्तांग भी काटा था

लाश मिलने के बाद राँची के पुलिस अधीक्षक नौशाद आलम ने बताया था, “निर्वस्त्र अवस्था में महिला की सिर कटी लाश मिली है। डेड बॉडी को ऑटोप्सी के लिए भेजा गया है। पोस्टमॉर्टम के बाद ही खुलासा हो पाएगा कि युवती के साथ दुष्कर्म हुआ है या नहीं। मामले में जाँच जारी है।”

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि पुलिस को घटनास्थल पर खाना बनाने के लिए चूल्हा और कई बीयर की खाली बोतलें भी मिलीं। इससे भी अनुमान लगाया जा रहा है कि युवती के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या की गई है और साक्ष्य छुपाने की नीयत से उसके कपड़े और सर को गायब कर दिया गया।

घटनास्थल के पास नदी है। युवती की हत्या करने के बाद अपराधियों ने घटनास्थल पर पानी डाल दिया था ताकि खून और पुलिस को साक्ष्य नहीं मिल पाए। अपराधियों ने युवती का गुप्‍तांग भी काट दिया था।

ओरमाँझी में लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान गुस्साए लोगों ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के काफिले को राँची के किशोरगंज चौक के पास रोक दिया। वहाँ से गुजर रहे सीएम के काफिले को रास्‍ता बदल कर रवाना होना पड़ा था।

दिसंबर 2020 में भी झारखंड में सामूहिक दुष्कर्म की घटना सामने आई थी। दुमका में 5 बच्चों की माँ के साथ कुल 17 लोगों ने बलात्कार की घटना को अंजाम दिया था। वारदात के दौरान आरोपितों ने पीड़िता के पति को बंधक बना लिया था। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने 17 लोगों पर कार्रवाई की थी। लड़कों ने पीड़िता के पति को और 2 ने पीड़िता को पकड़ लिया था, जिसके बाद वो उसे झाड़ियों की तरफ ले गए और रात के 12 बजे तक सभी ने उसके साथ बलात्कार किया। 

‘पहले कानूनों को निरस्त करें, फिर करेंगे बात’: सुप्रीम कोर्ट की कमेटी से भी किसान संगठनों ने बनाई दूरी

तीन नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों का अड़ियल रवैया केंद्र सरकार के साथ बातचीत में भी कई बार सामने आ चुका है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले भी उन्होंने अपने इसी रवैए का प्रदर्शन किया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सोमवार शाम किसान संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की जाने वाली समिति से बातचीत करने से इनकार कर दिया। इससे पहले शीर्ष अदालत ने तीनों कृषि कानूनों पर रोक के संकेत दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा था कि अगर उसने कृषि कानूनों पर रोक नहीं लगाई, तो उसे खुद ये काम करना होगा। सर्वोच्च न्यायालय ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणी की। इन याचिकाओं पर CJI एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह इस मामले से निपटने के सरकार के तौर-तरीकों से निराश है। पूरे मामले पर कोर्ट अपना फैसला मंगलवार (12 जनवरी 2020) को सुना सकता है।

इस बीच केंद्र सरकार की ओर से अदालत में हलफनामा दायर किया गया है। इसमें कहा गया है कि कृषि कानूनों को उन्होंने जल्दबाजी में नहीं बनाया, बल्कि यह दो दशकों से हो रहे विचार-विमर्श का परिणाम है। हलफनामे में इस बात का भी जिक्र है कि नए कानूनों से देश के किसान खुश हैं, क्योंकि इसमें उन्हें विकल्प दिए गए हैं। साथ ही केंद्र ने यह भी कहा है कि उसने अपनी ओर से किसानों से जुड़ने का पूरा प्रयास किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से पूछा था कि वो इन कृषि कानूनों पर रोक क्यों नहीं लगा रहे? उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार जिम्मेदारी दिखाते हुए इसे रोकने का आश्वासन देती है तो सुप्रीम कोर्ट एक समिति बना कर इसे देखने को कहेगा। तब तक इसे रोक कर रखा जाए।

लेकिन, अब मीडिया खबरों के अनुसार संयुक्त किसान मोर्चा ने सोमवार देर शाम एक बयान जारी करके ऐलान किया है कि वो सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित किसी कमेटी से भी बात नहीं करेगा। मोर्चा ने अपने बयान में कहा है कि उसे कृषि कानूनों को वापस लेने से कम कोई शर्त मँजूर नहीं है और कानूनों की वापसी से पहले उसे किसी बातचीत में दिलचस्पी नहीं है।

बयान में संगठन की ओर कहा गया, “हम सुप्रीम कोर्ट से नियुक्त होने वाली कमेटी की किसी कार्यवाही में शामिल होना नहीं चाहते। पहले कानूनों को निरस्त कीजिए, फिर हम बात करेंगे।”

‘अल्लाहु अकबर’ के लगाए नारे और 3 की चाकू घोंपकर कर दी हत्या: सादुल्लाह को लंदन की अदालत ने दी उम्रकैद

लंदन के रीडिंग पार्क में तीन लोगों की बेरहमी से हत्या करने वाले शख्स को सोमवार (जनवरी 11, 2021) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। 26 साल के खैरी सादुल्लाह ने पिछले साल 20 जून को फोर्बरी गार्डन में 36 साल के डेविड फर्लांग, 49 वर्षीय डेविड वेल्स और 39 वर्षीय जो रिची बेनेट की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। 

जानकारी के मुताबिक उसने ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाते हुए तीनों की चाकू घोंपकर हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि उसने ‘मजहबी जिहाद’ के लिए इस नृशंस वारदात को अंजाम दिया। न्यायमूर्ति स्वीनी ने कहा कि उसके सभी अपराधों का ‘आतंकवादी संबंध था।’

खैरी सादुल्लाह ने 60 सेकेंड के भीतर चाकू से लोगों को मार डाला था। इसके अलावा स्टीफन यंग, पैट्रिक एडवर्ड्स और निशित निसुदन समेत तीन अन्य लोग घायल भी हो गए। कुछ ही समय बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

अभियोजन पक्ष ने कहा कि सादुल्लाह को चरमपंथ में लंबे समय से दिलचस्पी थी। 2019 में उसके मोबाइल पर मोहम्मद इमाज़ी के बारे में कुछ मैटेरियल आया था। आईएसआईएस प्रोपेगेंडाबाज को वीडियो में पीड़ितों को मारने से पहले उपहास उड़ाते हुए देखा गया। उस पर 2017 में जेल की सजा काटते हुए एक चरमपंथी इस्लाम प्रचारक के साथ जुड़े होने का आरोप लगा था।

सादुल्लाह लीबिया से है और वहाँ की अशांति से भागकर ब्रिटेन आया था। अभियोजन पक्ष ने कहा कि वह एक आतंकवादी था जिसे तब तक जेल में रखा जाना चाहिए जब तक वह मर नहीं जाता है। उसने इस घटना को तब अंजाम दिया था जब पहली बार लॉकडाउन में मिली राहत के बाद तीन दोस्त शाम में पार्क में बैठे थे।

ट्रंप का अकाउंट बैन किए जाने के बाद ट्विटर के स्टॉक में गिरावट, फैसले पर दुनिया भर में उठे थे सवाल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अकाउंट शुक्रवार को (जनवरी 9, 2021)  बैन करने के बाद ट्विटर के शेयर सोमवार (जनवरी 11, 2021) को 10 फीसदी तक गिर गए। धीरे-धीरे इस नुकसान की रिकवरी हुई, लेकिन पूर्ण रूप से भरपाई अभी तक नहीं हुई है। 10 फीसद का नुकसान खबर लिखने तक 7.42 प्रतिशत रह गया था।

Twitter shares stumbled on Monday

ट्विटर द्वारा साझा किए गए ग्राफ में हम सोमवार को अचानक गिरे शेयर्स की तस्वीर साफ देख सकते हैं।

The fall in prices of Twitter shares was steep

 

बता दें कि शुक्रवार को डोनाल्ड ट्रंप का अकाउंट सस्पेंड करने के बाद ट्विटर ने कहा था, “डोनाल्ड ट्रंप के अकाउंट के हालिया ट्वीट को देखने के बाद हमने उनके अकाउंट को स्थायी रूप से हिंसा को और भड़काने के जोखिम को देखते हुए सस्पेंड कर दिया है।”

उनके अकाउंट निलंबन पर कई लोगों ने आपत्ति जाहिर की थी। जर्मनी चांसलर के प्रवक्ता ने इस निर्णय को समस्याग्रस्त बताया था। प्रवक्ता स्टीफन सीबेरट के अनुसार, “मौलिक अधिकारों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप किया जा सकता है, लेकिन कानून के अनुसार और विधायकों द्वारा परिभाषित ढाँचे के अंतर्गत, न कि सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के प्रबंधन द्वारा लिए एक निर्णय के अनुसार।” उन्होंने कहा कि चांसलर इस को बेहद समस्याग्रस्त मानते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति के अकाउंट को स्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया गया।

इसी प्रकार वामपंथी मैक्सिकन राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज ओब्रेडोर (Andres Manuel Lopez Obrador) तक ने इस पर आपत्ति जाहिर करते हुए कहा, “आप किसी को सेंसर कैसे कर सकते हैं?” उन्होंने सवाल किया कि हम किसी को दंड कैसे दे सकते हैं वो भी सिर्फ़ इस आधार कि हमें लगता है कि सामने वाले ने गलत किया है। आखिर इस बीच कानून कहाँ है? रेगुलेशन्स कहाँ है? मानदंड कहाँ है? यह सरकार से संबंधी मुद्दा है। ये निजी कंपनियों का कोई मुद्दा नहीं है।

भाजपा के युवा नेता तेजस्वी सूर्या ने भी इस पर लिखा, “यह उन सब लोगों के लिए सजग होने का समय है जो अब तक नहीं समझते हैं कि ये अनियंत्रित बड़ी टेक कंपनियाँ हमारे लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। यदि वे POTUS (अमेरिका के राष्ट्रपति) के साथ ऐसा कर सकती हैं तो किसी के साथ भी ऐसा कर सकती हैं। हमारे लोकतंत्र के बेहतरी के लिए भारत जल्द ही इन कंपनियों से जुड़े नियमों की समीक्षा करे।” 

‘भड़^*$# करना बंद करो, जाकर धंधे पर बैठ जाओ’: एक सोमनाथ भारती, बदजुबानी के किस्से अनेक

आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक सोमनाथ भारती आज (जनवरी 11, 2021) सुबह से चर्चा में हैं। रायबरेली में उनके चेहरे पर स्याही फेंके जाने की घटना के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मारने की धमकी दी। पुलिस अधिकारियों के साथ अभद्रता करने पर उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

इस बीच AAP के कई नेता उनके लिए आवाज बुलंद कर रहे हैं। सीएम केजरीवाल ने भी उनके पक्ष में पोस्ट किया है। मगर, AAP के सभी दिग्गज शायद भुला रहे हैं कि जिस सोमनाथ भारती की बदजुबानी को वह आज योगी सरकार की नाकामयाबी कहकर छिपा रहे हैं, उनसे जुड़े विवादों की फेहरिस्त बहुत लंबी है।

हालिया मामलों से हम अच्छे से वाकिफ हैं कि उन्होंने कैसे पुलिस को धमकाया। कैसे योगी आदित्यनाथ की मौत की धमकी दी। कैसे यूपी के अस्पतालों में पैदा हो रहे बच्चों की तुलना कुत्ते के बच्चों से की। लेकिन, थोड़ा फ्लैशबैक में जाएँ तो उनके कई कारनामे हैं जो मीडिया में कई दिन तक चर्चा में रहे।

बीवी को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप

सोमनाथ भारती पर अपनी बीवी को कुत्ते से कटवाने का आरोप 2015 में सामने आया था। आप विधायक की पत्नी लिपिका ने मीडिया के सामने मदद की गुहार लगाते हुए घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना आदि का आरोप लगाया था। 

लिपिका ने दिल्ली महिला आयोग में दर्ज कराई अपनी शिकायत में कहा था, “भारती ने कुत्ते से मुझे कटवाया। जब कुत्ते ने मुझ पर हमला किया, तब सोमनाथ भारती वहीं खड़े रहे और देखते रहे। कुत्ते ने मुझे पेट में और कई अन्य हिस्सों पर काटा। भारती ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं और मुझे तत्काल कोई प्राथमिक चिकित्सा तक मुहैया नहीं करवाई।”

जब महिला एंकर से कहा- धंधे पर बैठ जाओ

महिलाओं के साथ बदसलूकी करने वाले सोमनाथ भारती के रवैये का खुलासा 2018 में महिला एंकर से बातचीत के दौरान भी हुआ था। सुदर्शन न्यूज की महिला पत्रकार से बात करते हुए उन्होंने ‘ये भड़^*$# करना बंद करो। जाकर धंधे पर बैठ जाओ’ कहा था। इसके बाद आप विधायक ने 2019 के चुनावों का इंतजार करने के लिए महिला एंकर से कहा और बोले, “ये भड़*%गिरि” नहीं चलेगी, 2019 का इंतजार कर लो।

विदेशी महिलाओं को प्रताड़ित किया

दिल्ली के ख़िड़की एक्सटेंशन मामले में भी सोमनाथ भारती पर अपने समर्थकों के साथ खिड़की एक्सटेंशन में युगांडा मूल के 9 लोगों के घर में घुसकर उनके साथ मारपीट करने का आरोप है। महिलाओं ने उनके ऊपर छेड़खानी और बदसलूकी के भी आरोप लगाए थे। सोमनाथ भारती ने सफाई में कहा था कि उन्हें शिकायत मिली थी कि युगांडा के नागरिक उस इलाके में ड्रग्स और वेश्यावृत्ति का व्यापार कर रहे हैं। लिहाजा दिल्ली के कानून मंत्री के तौर पर उन्होंने वहाँ पुलिस के साथ मिलकर रेड की।

पुलिस की वर्दी उतारने की धमकी

हालिया मामलों की बात करें तो आज ही सोमनाथ भारती ने पुलिस अधिकारी से नोंकझोंक के दौरान अपना रसूख दिखाते हुए कहा, “आपकी वर्दी उतरवाएँगे हम। हम पहचान रहे हैं आपको। जो-जो आज बद्तमीजी कर रहा है मेरे साथ, सबकी वर्दी उतरवाऊँगा मैं। आप हट जाइए यहाँ से।”

मुख्यमंत्री योगी के लिए पुलिस से भारती ने कहा, “ये सब करने से कुछ नहीं होगा अतुल, योगी की मौत सुनिश्चित है। उसको अरेस्ट करिए। मेरी बात समझ लो। योगी से बोल दो ये सब करने से कुछ नहीं होगा। आप समझ लीजिए। यही सब करवा रहे हैं आप?”

इसी प्रकार यूपी अस्पतालों में पैदा होने वाले बच्चों की तुलना सोमनाथ भारती ने कुत्तों से की थी। उन्होंने कहा, “हम उत्तर प्रदेश में आए हैं। हम यहाँ के स्कूलों को देख रहे हैं। यहाँ के अस्पताल को देख रहे हैं। ऐसी बदतर हालत में हैं कि अस्पतालों में बच्चे तो पैदा हो रहे हैं, लेकिन कुत्तों के बच्चे पैदा हो रहे हैं।”

जाह्नवी कपूर ने समर्थन में स्टेटस लिखा फिर माने ‘किसान’, पंजाब में शूटिंग में डाल दिया था अड़ंगा

केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर रहे किसान रोजाना नया बवाल खड़ा कर रहे हैं। इस बार कथित किसानों के उपद्रव और दादागिरी की शिकार और कोई नहीं बल्कि दिवंगत बॉलीवुड अभिनेत्री श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी कपूर (Janhvi Kapoor) हुई है।

जाह्नवी कपूर स्टारर फिल्म ‘गुड लक जेरी’ (Good Luck Jerry) की शूटिंग पंजाब में रविवार (जनवरी 10, 2021) से शुरू हो चुकी है। लेकिन पंजाब के बस्सी पठाना में शुरू हुई इस फिल्म की शूटिंग के पहले ही दिन, कलाकारों को किसानों के विरोध का सामना करना पड़ गया। बताया जा रहा है कि इस कारण फिल्म की शूटिंग भी रोकनी पड़ी जाह्नवी कपूर द्वारा किसानों के आंदोलन के समर्थन में बयान देने के बाद ही शुरू हुई।

मीडिया द्वारा जाह्नवी कपूर के हवाले से यह खबर भी जमकर प्रकाशित की गई और दावा किया गया कि अब एक और ‘बड़ी हस्ती’ ने किसान आंदोलन का समर्थन किया है।



‘दैनिक भास्कर’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म ‘गुड लक जेरी’ की शूटिंग के लिए पहुँची टीम को किसान प्रदर्शनकारियों ने रोक दिया। लोगों ने किसानों को समझाने का काफी प्रयास भी किया। इस मौके पर वहाँ पुलिस भी पहुँच गई। आखिरकार, जाह्नवी कपूर ने किसान आंदोलन के पक्ष में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसके बाद फिल्म की शूटिंग शुरू हो सकी।

यह मामला रविवार का है, जब फिल्म ‘गुड लक जेरी’ की शूटिंग शुरू होनी थी। इस बीच किसान आंदोलन से जुड़े युवाओं का एक समूह घटनास्थल पर पहुँचा। युवाओं ने केंद्र सरकार के साथ-साथ बॉलीवुड अभिनेताओं के खिलाफ कृषि कानूनों का विरोध करते हुए नारे लगाए।

फिल्म की शूटिंग रोककर धरने पर बैठे किसान सरकार और बॉलीवुड कलाकारों के खिलाफ नारे लगाते हुए।
शूटिंग के दौरान प्रदर्शन करते किसान (चित्र साभार- दैनिक भास्कर)

इन किसान आंदोलनकारियों ने कहा कि पंजाबी फिल्म उद्योग के सभी लोग उनका समर्थन कर रहे हैं, लेकिन बॉलीवुड के सितारे सिर्फ शूटिंग के लिए वहाँ आते हैं लेकिन किसान आन्दोलन के पक्ष में कुछ नहीं कहते, जिस कारण वो नाराज हैं। यह हंगामा काफी देर तक जारी रहा। बाद में जब जाह्नवी कपूर ने किसान आंदोलन के समर्थन में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर स्टेटस पोस्ट किया, तब जाकर यह हंगामा बंद हो सका।

किसान प्रदर्शनकारियों की गुंडई के बाद, जाह्नवी कपूर ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में किसान आंदोलन के समर्थन में लिखा, “किसान हमारे देश के दिल में हैं। मैं देश का पेट भरने में उनके योगदान और उनकी भूमिका को जानती हूँ। उम्मीद करती हूँ कि वह जल्द ही किसी नतीजे पर पहुँचेंगे जो किसानों के हित में होगा।”

अभिनेत्री जाह्नवी कपूर की तरफ से किसानों के हक में लगाया गया स्टेटस, जिसके बाद काम फिर से शुरू करने की अनुमति मिली और किसान वापस लौट गए।
चित्र साभार- दैनिक भास्कर