मुंबई के मालवाणी में अपहरण और हत्या की साजिश रचने के आरोप में पुलिस ने यास्मीन नाम की एक महिला समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यास्मीन ने सादिक नाम के युवक की मौत के लिए पूरा जाल बिछाया और अपने भाई अल्ताफ की हत्या का बदला लेने के लिए उसका एंबुलेंस में अपहरण किया।
इस बीच पूरी घटना वहाँ मौजूद एक शख्स को खटकी और उसने पुलिस को फोन कर दिया। बाद में पुलिस के प्रयासों से सादिक जिंदा मिल गया। मुंबई पुलिस ने एक्शन में आते हुए अन्य सभी आरोपितों को हिरासत में ले लिया।
नवभारत टाइम्स में प्रकाशित खबर के अनुसार, पूछताछ में आरोपित महिला ने बताया कि 9 जून 2020 को मालवाणी में लोकल ग्रुप एमएम कंपनी और साजिद 313 ग्रुप में ऑटोरिक्शा पार्किंग को लेकर हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना में एमएम कंपनी के मो. सादिक उर्फ मेंटल ने साजिद-313 ग्रुप के मेंबर 24 वर्षीय अल्ताफ शेख की हत्या कर दी और मुंबई से फरार हो गया।
हनी ट्रैप कर दिल्ली से मुंबई बुलाया, हत्या कर लेना चाहती थी भाई की हत्या का बदला, पुलिस बनी भगवानhttps://t.co/CA2M7rkoWy
एक दिन अल्ताफ की बहन को मालूम हुआ कि उसके भाई का कातिल सादिक दिल्ली में छिपा हुआ है। जिसके बाद उसने बदला लेने की ठानी। उसने पहले मालवाणी में रहने वाले भाई के दोस्तों से संपर्क किया और फिर अल्ताफ को मारने का षड्यंत्र रचा। इस पूरी वारदात को अंजाम तक पहुँचाने में यास्मीन का साथ फारूख शेख, ओवेश नबिउल्लाह शेख, मो मानिस सैयद, निहाल जाकिर खान और सत्यम पांडे ने दिया।
यास्मीन ने सबको अपने प्लान में शामिल करके पहले इंस्टाग्राम की एक फेक आईडी बनाई और सादिक से दोस्ती का भरोसा दिला कर उसे मुंबई बुला लिया। जब कुछ दिन पहले सादिक वहाँ आया तो यास्मीन ने उसको 9 जनवरी 2021 को छोटा कश्मीर गार्डन के पास मिलने बुलाया। उसी दिन दोपहर में सादिक वहाँ पहुँचा तो पाँचों ने चाकू दिखा कर उसका एंबुलेंस में अपहरण कर लिया।
सबको लगा कि उनका काम प्लान मुताबिक हो गया। मगर, इस बीच घटनास्थल से दूर खड़े आदमी को यह पूरा दृश्य खटका और उसने पुलिस को कॉल लगा दी। इसके बाद जोनल डीसीपी डॉ स्वामी ने इलाके की नाकाबंदी की। अलग-अलग चौराहों पर जाँच शुरू हुई। नतीजतन सारे आरोपित उसी शाम के 7:30 बजे तक पकड़ लिए गए।
पुलिस के अनुसार, जानकारी के बाद उन्हें सादिक के अपहरण का वीडियो मिल गया था। इसके बाद उन्होंने यास्मीन के नंबर का पता लगाया और फिर उसे ट्रेस करते हुए एंबुलेंस का पीछा किया। कुछ ही समय में आरोपित पकड़ में आ गए।
पुलिस का कहना है कि एंबुलेंस का पेट्रोल खत्म होने पर सभी ने एक इनोवा का इंतजाम कर लिया था। उसमें बैठ कर वह नायगाँव जाने वाले थे। आरोपित महिला की योजना थी कि वह वहाँ के जंगल में ही सादिक की हत्या करेंगे।
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर अक्सर आरोप लगते रहे हैं कि उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा के लिए कुछ नहीं किया और न ही कोई महिला उनके शासन में सुरक्षित है। हालाँकि, विपक्षियों के आरोपों से उलट, NCRB (राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो) के आँकड़े कुछ और ही बयान करते हैं। यही वजह है कि राज्य पुलिस भी अपनी सरकार से खुश है और सार्वजनिक तौर पर उनकी तारीफ करने से नहीं चूक रही।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 2017 में उत्तर प्रदेश की कमान संभालने के बाद, राज्य को राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के नवीनतम आँकड़ों में देश में महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित स्थान बताया गया है। NCRB की इस रिपोर्ट के अनुसार, देश के 21 प्रमुख राज्यों की तुलना में यूपी में महिलाओं के खिलाफ अपराध के सबसे कम मामले हैं।
मंगलवार (जनवरी 12, 2021) को ही उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर बताया, “योगी आदित्यनाथ के निर्देशों पर उत्तर प्रदेश को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने के लिए हम सबने बहुत मेहनत की और महिलाओं के विरुद्ध हो रहे अपराधों को कम करने के लिए काम किया।”
आगे पुलिस ने NCRB की 2019 की रिपोर्ट को शेयर करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश महिलाओं के विरुद्ध हो रहे अपराधों में 15वें स्थान पर है। वहीं, बलात्कार के मामले में 26 वें स्थान पर और दोष सिद्धि (Convictions) मामले पर 1 रैंक पर है।
On the directions of Hon’ble CM UP Sri @myogiadityanath ji to make UP safer for women,we have worked hard on all aspects to reduce crime against women. A/c to NCRB report(2019),on crime rate, UP ranks 15th in the country in crime against women, 26th in rape & 1st in convictions. pic.twitter.com/M324TBjQCH
उल्लेखनीय है कि आज हम राजनैतिक झुकाव के चलते राज्यों के विकास पर बात करते रहे हैं। लेकिन वास्तविकता ये है कि यदि किसी सरकार की कामयाबी को आँकना है तो इसे हर नजरिए से देखा जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश राज्य की तुलना यदि दिल्ली से की जाए, वो भी सरकार की कामयाबी या असफलता के आधार पर, तो वह पूर्ण रूप से बेईमानी और धूर्तता है। बात चाहे क्षेत्रफल की हो या फिर जनसंख्या की। उत्तर प्रदेश हर मायनों में कई राज्यों से बड़ा है। ऐसे में, वहाँ की सरकार पर चुनौतियाँ भी उसी हिसाब से हैं। बावजूद इसके, पूरे राज्य की महिलाओं की सुरक्षा पर काम करना और बाकायदा आँकड़ों के जरिए भी सफलता को सिद्ध करना बड़ी बात है।
एनसीआरबी की रिपोर्ट बताती है कि भारत में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों का फीसद 2018 साल के मुकाबले बढ़ा है। जो क्राइम रेट प्रति लाख महिलाओं की जनसंख्या पर 58.8 था, वही 2019 में बढ़कर 62.4 हो गया। लेकिन उत्तर प्रदेश में यह रेट 55.4 प्रति लाख (महिला जनसंख्या) रही। जबकि महाराष्ट्र में ये रेट 63.1 था और बंगाल में 64 था। इसी प्रकार मध्यप्रदेश में रेट 69 है और राजस्थान में 110 है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अन्य राज्यों के मुकााबले यूपी की इस सफलता के लिए राज्य सरकार द्वारा लाई गई योजनाओं को मददगार बताते हैं। ‘टाइम्स ऑफ़ इण्डिया’ की रिपोर्ट के अनुसार साल 2016 मेें आँकड़े 3,289 थे। लेकिन 2020 में ये कम होकर 2, 232 हो गए। यानी मामलों में 32 फीसद की गिरावट हुई।
इसी तरह, यदि लड़कियों के अपहरण के मामले देखें तो साल 2016 में करीब 11,121 केस सामने आए थे। वहीं, योगी सरकार के काल में ये आँकड़ा बढ़ने की बजाय नीचे उतरकर 11,057 पर आ गया। यानी, 27% की गिरावट। अधिकारी कहते हैं राज्य सरकार ने सिर्फ़ पुलिस प्रशासन को मजबूत नहीं किया बल्कि तकनीकों को सशक्त भी किया है, जिससे जाँच पड़ताल में त्वरित सहायता संभव होती है।
यूपी पुलिस द्वारा शेयर की गई रिपोर्ट में एडीजी आशू पांडे कहते हैं, “हमने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में खुद को बेहतर और सशक्त बनाया है। इससे महिलाओं व लड़कियों के विरुद्ध हो रहे अपराधों के मामलों में न्याय दिलाने में सहायता हुई है।”
एडीजी ने कहा कि अभियोजन विभाग द्वारा किए गए प्रयासों से बलात्कार में 89, शादी के लिए अपहरण में 15, दहेज हत्या में 97 और यौन उत्पीड़न में 13 मामलों में 1 जनवरी से 15 दिसंबर, 2020 के बीच सफलतापूर्वक आरोपितों को दोषी ठहराया गया है। उनके मुताबिक, इनमें से 5 दोषियों को अभी तक फाँसी की सजा हुई है, जबकि 193 अन्य मामलों में दोषी आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार के मजबूत डिफेंस के कारण 721 मामलों में दोषियों को सजा दी गई।
वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो राज्य में ‘एंटी रोमिया स्क्वायड’ के कारण, महिला पुलिसकर्मियों की वजह आदि से भी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हुई हैं। इसी प्रकार, महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष महिला पुलिस दस्ता ‘पिंक पैट्रोल’ पर मौजूद महिला कॉन्स्टेबल व ‘पिंक बूथ’ और पुलिस थानों में महिलाओं के लिए हेल्पडेस्क ने भी महिलाओं को सुरक्षित महसूस करवाया है।
बता दें कि हाथरस, बलरामपुर आदि मामलों के बाद से चर्चा में आ रहे उत्तर प्रदेश में 2019 में 3065 मामले दर्ज किए गए और पीड़िताओं की संख्या 3131 रही। यानी प्रतिदिन औसत वहाँ करीब 8 मामले रिकॉर्ड हुए। हालाँकि प्रदेश में प्रति लाख जनसंख्या पर यदि अपराध के आँकड़े देखें तो दर 2.8 है। साथ ही सूची में उत्तर प्रदेश का स्थान कुल 36 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में 24वाँ है।
तीसरे नंबर पर मध्यप्रदेश है। यहाँ कुल 2485 मामले रिकॉर्ड किए गए। पीड़िताओं की संख्या 2490 दर्ज की गई और प्रति लाख जनसंख्या के हिसाब से अपराध की दर 11.1 रही। प्रतिदिन औसत प्रदेश में 6.8 थी। महाराष्ट्र 2299 रेप के मामलों के साथ चौथे नंबर पर आता है। यहाँ रेप पीड़िताओं की संख्या 2305 है। प्रतिदिन औसतन 6 रेप हुए और प्रति लाख जनसंख्या पर अपराध का दर 3.9 रहा।
इसके बाद सूची के अनुसार केरल में 2023 मामले आए। इसी तरह असम में 1773, हरियाणा में 1480, झारखंड में 1416 और ओडिशा में 1382 मामले सामने आए। देश की राजधानी दिल्ली में 1253 रेप के मामले दर्ज किए गए। सिक्किम में यह संख्या 11, पुडुचेरी में 10, नागालैंड में 8 और दादर नगर हवेली तथा लक्षद्वीप में 0 मामले सामने आए।
दिल्ली के रोहिणी इलाके में अपना धर्म छोड़ करके एक मुस्लिम युवक सोहेल से कोर्ट मैरिज करने वाली लड़की ने अपने शौहर के अलावा ससुर पर बलात्कार का आरोप लगाया है। लड़की का कहना है कि वह सोहेल को 3 साल से जानती थी। दोनों स्कूल में पढ़ते थे। 3 माह पहले उसने धर्म बदल कर सोहेल से तीस हजारी कोर्ट में शादी की। लेकिन, अब उसे वेश्यावृत्ति में ढकेलने की कोशिश हो रही है।
पीड़िता का कहना है कि स्कूल में पढ़ने के दौरान उसकी मुलाकात सोहेल से हुई थी। उस समय वह नाबालिग थी। एक दिन सोहेल ने नशीला पदार्थ पिला कर उसका रेप कर लिया। बाद में शादी हुई तो सोहेल के अब्बा ने भी उसका बलात्कार किया। वहीं सास उसको वेश्यावृत्ति में धकेलने का प्रयास करती रही।
आजतक की खबर के अनुसार, रोहिणी की डीसीपी पीके मिश्रा का कहना है कि लड़की और लड़के के बीच दोस्ती स्कूल के समय से थी। दोनों एक दूसरे को 3 साल से जानते थे। 3 महीने पहले दोनों ने एक दूसरे से शादी की। लेकिन, अब लड़की का कहना है कि उसके ससुर शफीक अहमद ने उसका रेप किया। वहीं पति ने भी 17 साल की उम्र में एक पार्टी में उसका बलात्कार किया था।
पुलिस के मुताबिक, वर्तमान में लड़की बालिग है और अपने बयान पर कायम है। इसी आधार पर अमन विहार थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। साथ ही उसके पति सोहेल और ससुर शफीक को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।
गौरतलब है कि पुलिस ने उक्त मामले को लव जिहाद से संबंधित नहीं बताया है। लेकिन पिछले दिनों कई ऐसे केस आए हैं, जहाँ महिला के साथ धोखेधड़ी करके उसे प्रेम जाल में फँसाया गया और फिर उसका धर्म परिवर्तन करवाने का प्रयास हुआ।
हाल का मामला देखें तो दिल्ली में ही पुलिस ने शोएब खान (18) को पहचान बदल कर नाबालिग लड़की को झाँसा देने, अपहरण और जबरन निकाह की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किया था। शोएब खान ने फेसबुक पर फर्ज़ी नाम के ज़रिए 15 साल की लड़की से दोस्ती की थी।
इसके बाद उसने नाबालिग का अपहरण किया और जबरन निकाह करने का दबाव बनाया। लेकिन बहुत जल्द नाबालिग लड़की को खोज लिया गया। बाद में पीड़िता के पिता की शिकायत के आधार पर राजौरी पुलिस गार्डेन पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की और आरोपित को गिरफ्तार करके न्यायिक हिरासत में भेजा।
बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा जोनास का कहना है कि वह अपने पॉप स्टार पति निक जोनास के साथ कई बच्चे पैदा करना चाहती हैं। प्रियंका चोपड़ा से जब पूछा गया कि लगभग कितने? तो इसके जवाब में अभिनेत्री ने कहा- “एक क्रिकेट टीम!”
प्रियंका चोपड़ा ने कहा, “जितने बच्चे हो सकते हैं मुझे उतने ही चाहिए। एक क्रिकेट टीम? मैं श्योर नहीं हूँ कि आखिर कितने!” अभिनेत्री ने अपने परिवार और भविष्य को लेकर ‘द संडे टाइम्स’ के साथ बातचीत में ये बातें सामने रखीं।
उल्लेखनीय है कि प्रियंका चोपड़ा ने सगाई करने के पाँच माह बाद ही दिसंबर, 2018 में निक जोनास से भारत में शादी कर ली थी। उन्होंने अपने संबंधों के बीच भिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और दोनों के बीच उम्र के अंतराल को लेकर भी खुलकर बातें कीं।
प्रियंका चोपड़ा जोनास ने कहा, “हमें कोई समस्या नहीं हुई। निक ने भारत को ऐसे अपना लिया जिस तरह मछली पानी को अपना लेती है। लेकिन एक सामान्य जोड़े की तरह आपको एक-दूसरे की आदतों को समझना होता है और ये भी कि एक-दूसरे को क्या पसंद है। ये एक एडवेंचर जैसा होता है।”
गौरतलब है कि कुछ ही दिनों पहले प्रियंका चोपड़ा लन्दन में कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन के नियमों के उल्लंघन को लेकर भी चर्चा में आई थी। दरअसल, ब्रिटेन में COVID-19 के कारण जारी लॉकडाउन के बीच 38 वर्षीय प्रियंका चोपड़ा जोनास को उनकी माँ डॉ मधु चोपड़ा, और उनकी पालतू कुतिया ‘डायना’ के साथ शाम 4.55 बजे सेलिब्रिटी स्टाइलिस्ट जोश वुड के सैलून जाते देखा गया था।
इसके बाद कई लोगों ने सोशल मीडिया पर प्रियंका चोपड़ा की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि सेलिब्रेटी ये क्यों सोचते हैं कि वो बाकी लोगों से हटकर हैं? साथ ही, ये सवाल भी उठाए कि क्या लॉकडाउन के निर्देश सिर्फ आम लोगों के ही लिए हैं?
स्थानीय लोगों ने प्रियंका चोपड़ा द्वारा गाइडलाइंस का उल्लंघन किए जाने पर स्थानीय पुलिस को सतर्क कर दिया और फ़ौरन वहाँ पुलिस पहुँच गई। पुलिस द्वारा सैलून में मौजूद उसके मालिक जोश वुड को मौखिक चेतावनी दी गई। हालाँकि, COVID-19 प्रोटोकॉल के उल्लंघन के लिए कोई जुर्माना नहीं लगाया गया।
अभिनेत्री के एक प्रवक्ता ने कहा कि सरकारी दिशानिर्देशों के बाद, प्रियंका चोपड़ा जोनास के बाल फिल्म के लिए जोश वुड द्वारा कलर कर लिए गए थे और वह वर्तमान में शूटिंग कर रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक तीन कृषि कानूनों को लागू करने पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने संसद द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों को चुनौती देने और दिल्ली की सीमाओं से किसानों को हटाने की कई याचिकाओं पर मंगलवार (जनवरी 12, 2021) को सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा, “कानून पर हम एक समिति बना रहे हैं ताकि हमारे पास एक स्पष्ट तस्वीर हो। हम यह तर्क नहीं सुनना चाहते कि किसान समिति में नहीं जाएँगे। हम समस्या को हल करना चाहते हैं। यदि आप (किसान) अनिश्चित काल के लिए आंदोलन करना चाहते हैं, तो आप ऐसा कर सकते हैं।”
वकील एमएल शर्मा ने कहा कि किसान यह भी कह रहे हैं कि सब आ रहे हैं, पीएम बैठक में क्यों नहीं आते। इस पर सीजेआई ने कहा कि हम पीएम मोदी से नहीं कहेंगे कि वह बैठक में आएँ। वह इस मामले में पक्षकार नहीं हैं।
Farm laws: Advocate ML Sharma says, the farmers are saying many persons came for discussions, but the main person, the Prime Minister did not come.
We cannot ask the Prime Minister to go. He is not a party in the case, says CJI. https://t.co/GWoZtGd1Zg
कोर्ट ने कहा कि वो कृषि कानूनों को टालना चाहते हैं, लेकिन तभी जब प्रदर्शन की जगह बदली जाएगी। वहाँ कोई भी एक्टिविटी नहीं चाहते। भारतीय किसान यूनियन (भानू) के वकील ने CJI को बताया, “हम बुजुर्ग, बच्चे और महिलाओं को आंदोलन से हटा लेंगे। अब वो इसका हिस्सा नहीं होंगे।”
इस बात पर चीफ जस्टिस ने कहा है कि उनके बयान को रिकॉर्ड पर ले रहे हैं। इसके बाद CJI ने कहा कि किसान संगठनों के वकील दुष्यंत दवे, भूषण, गोंजाल्विस स्क्रीन पर नज़र नहीं आ रहे हैं। कल दवे ने कहा था कि सुनवाई टाली जाए। वह किसानों से बात करेंगे। आज वो कहाँ गए? इस पर साल्वे ने कहा कि दुर्भाग्य से लगता है कि लोग समाधान नहीं चाहते। फिर उन्होंने CJI से कहा कि आप कमिटी बना दीजिए। जो जाना चाहते हैं, जाएँगे।
CJI ने कहा, “कल इन लोगों ने कहा था कि वह किसान से बात करके प्रोटेस्ट के बारे में बताएँगे। वह अभी तक नहीं आए। क्या बात है।” हरीश साल्वे ने कहा, “यही मैं कह रहा हूँ कि इतना आसान नहीं है। इतने सारे संगठन हैं। किसी का कुछ पता नहीं। Sikhs for Justice एक अलग तरह का संगठन है। वह लोग वहाँ मौजूद हैं। कैसे बात होगी आगे। इसलिए कोर्ट ये कह दे कि जो कमिटी में आना चाहता है, वह आए।”
कमिटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया, “यह कमिटी हमारे लिए होगी। इस मुद्दे से जुड़े लोग कमिटी के सामने पेश होंगे। कमिटी कोई आदेश नहीं देगी, न ही किसी को सजा देगी। यह सिर्फ हमें रिपोर्ट सौंपेगी। हमें कृषि कानूनों की वैधता की चिंता है। साथ ही किसान आंदोलन से प्रभावित लोगों की जिंदगी और संपत्ति की भी फिक्र करते हैं। हम अपनी सीमाओं में रह कर मुद्दा सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।”
We will say in the order that farmers may apply for permission to the Delhi Police Commissioner for protests at Ramlila Maidan or other locations, says CJI during the hearing on farm laws pic.twitter.com/5sdJLRPPNe
किसान संगठनों के वकील विकास सिंह ने कहा कि किसान प्रदर्शन स्थल से उस जगह जा सकते हैं, जहाँ से प्रदर्शन दिखे। अन्यथा प्रदर्शन का मतलब नहीं रह जाएगा। रामलीला मैदान दिया जाए प्रदर्शन के लिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रामलीला मैदान या कहीं और पर प्रदर्शन के लिए पुलिस कमिश्नर से किसान इजाजत के लिए आवेदन दे सकते हैं, लेकिन कोर्ट ऐसा ऑर्डर नहीं करेगा।
Farm laws: If there is infiltration by a banned organisation & somebody is making an allegation here before us, you have to confirm it. File an affidavit by tomorrow: CJI to Attorney General
We will file an affidavit in this regard and place the IB records, says Attorney General https://t.co/qy0UEuFAQ1
चीफ जस्टिस ने पूछा कि उनके पास एक आवेदन है, जिसमें कहा गया है कि प्रतिबंधित संगठन इस प्रदर्शन में मदद कर रहे हैं। क्या अटॉर्नी जनरल इसे मानेंगे या इनकार करेंगे? इस पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि प्रदर्शन में खालिस्तानियों की घुसपैठ है। इस पर कोर्ट ने कहा कि ऐसा है, तो ऐसे में केंद्र सरकार कल तक हलफनामा दे। जवाब में अटॉर्नी जनरल ने बताया कि वो हलफनामा देंगे और आईबी रिकॉर्ड भी देंगे।
सांसद तिरुचि सीवा की ओर से जब वकील ने कानून रद्द करने की अपील की तो चीफ जस्टिस बोबडे ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि साउथ में कानून को समर्थन मिल रहा है। जिस पर वकील ने कहा कि दक्षिण में हर रोज इनके खिलाफ रैली हो रही है।
Farm laws: The committee is part of the judicial process in this case. We are planning to suspend the laws but not indefinitely, says CJI
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने फिर कहा, “हम कृषि कानून का अमल स्थगित करेंगे, लेकिन अनिश्चित काल के लिए नहीं। हमारा मकसद सिर्फ सकारात्मक माहौल बनाना है। उस तरह की नकारात्मक बात नहीं होनी चाहिए, जैसी एमएल शर्मा ने आज सुनवाई के शुरू में की।” बता दें कि किसानों के वकील शर्मा ने कहा था कि किसान कमिटी के पास नहीं जाएँगे। कानून रद्द हो।
गायिका रेनू शर्मा ने महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार में मंत्री धनंजय मुंडे के खिलाफ रेप की शिकायत की है। उन्होंने मुंबई के पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को पत्र लिख कर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि ओशिवारा पुलिस थाना उनकी शिकायत नहीं दर्ज कर रहा है। गायिका ने अपनी जान खतरे में होने की बात भी बताई।
रेनू शर्मा ने शिकायत की कॉपी सोशल मीडिया पर ट्वीट कर के लोगों को इस सम्बन्ध में जानकारी दी। मुंबई के पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह को लिखे पत्र में उन्होंने धनंजय मुंडे पर बलात्कार, यौन शोषण और उत्पीड़न के आरोपों के साथ-साथ जानमाल की सुरक्षा की भी गुहार लगाई है। उन्होंने खुद को अविवाहित और देश के कानून का पालन करने वाली नागरिक बताते हुए लिखा कि धंनजय मुंडे ने शादी का झाँसा देकर उनके साथ बलात्कार, अप्राकृतिक सेक्स, धोखाधड़ी और यौन उत्पीड़न किया।
गायिका ने बताया कि वो और धनंजय मुंडे एक-दूसरे को 1997 से ही जानते हैं, जब वो नाबालिग थीं। उन्होंने बताया कि तब उनकी उम्र मात्र 16-17 वर्ष ही थी। गायिका रेनू शर्मा ने दावा किया है कि उनकी बहन करुणा का धनंजय मुंडे के साथ प्रेम विवाह हुआ था और बहन के घर पर ही मध्य प्रदेश में उनकी पहली मुलाकात मुंडे से हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि 2006 में उनकी बहन डिलीवरी के लिए इंदौर गई थी, तब धनंजय मुंडे उनके घर पर आ धमके। शिकायत में लिखा है:
“धनंजय पंडितराव मुंडे को पता था कि मैं घर पर अकेली हूँ। इसलिए, वो रात को बिना बताए अचानक घर पर आ गया। इसके बाद उसने इच्छा विरुद्ध मेरे साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाए। वो हर 2-3 दिन में मेरे पास आता रहता था। शारीरिक सम्बन्ध बनाते समय उसने मेरा वीडियो भी बना लिया था। वो मुझे लगातार फोन कॉल कर के प्यार का इजहार करता था। वो मुझे गायिका बनाने के लिए फ़िल्मी दुनिया के बड़े-बड़े निर्माता-निर्देशकों से मिला कर बॉलीवुड में लॉन्च कराने का लालच देता था।”
रेनू शर्मा ने आरोप लगाया है कि धनंजय मुंडे ने इसी प्रकार लालच देकर कई बार ‘इच्छा विरुद्ध शारीरिक सम्बन्ध’ बनाए और यौन उत्पीड़न किया। उन्होंने आरोप लगाया है कि जब उनकी बहन करुणा कार्य से घर से बाहर जाया करती थी, तो मुंडे उनके साथ ‘जबरन शारीरिक सम्बन्ध प्रस्थापित’ करता था। पीड़िता के अनुसार, करुणा और मुंडे की शादी 1998 में हुई थी। बता दें कि 46 वर्षीय मुंडे उद्धव सरकार में समाजिक न्याय एवं स्पेशल असिस्टेंस मिनिस्टर हैं।
धंनजय, भाजपा के दिग्गज दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे के भतीजे हैं और उन्होंने हालिया विधानसभा चुनाव में अपनी कजन पंकजा मुंडे को हराया था। शरद पवार की पार्टी NCP के नेता धनंजय मुंडे को पार्टी ने 2014 में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बनाया था। उस समय देवेंद्र फडणवीस राज्य के सीएम थे। हालाँकि, इससे पहले वो भाजपा में भी रहे हैं और नितिन गडकरी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते उन्हें BJYM महाराष्ट्र का अध्यक्ष बनाया था।
अक्टूबर 2019 में तब उनका नाम विवादों में आया था, जब भाजपा नेता और महाराष्ट्र की तत्कालीन महिला एवं बाल विकास मंत्री और उनकी चचेरी बहन पंकजा मुंडे के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था। उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 500 (मानहानि), 509 (महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने के लिए शब्द, हावभाव का इस्तेमाल) और 294 (सार्वजनिक स्थल पर अश्लील कृत्य) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
भारतीय सेना ने मीडिया द्वारा किए जा रहे उस दावे को खारिज किया है, जिसमें कहा जा रहा था कि सैनिकों ने अम्शीपुरा एनकाउंटर (Amshipora Encounter) में 20 लाख रुपए की राशि के लिए आतंकवादियों को मारा। सेना ने सोमवार (जनवरी 11, 2021) को इस बात से इनकार किया है। सोशल मीडिया पर इस फर्जी खबर को फैलाने वालों में एक प्रमुख नाम कथित बालीवुड अभिनेत्री और ट्विटर ट्रोल स्वरा भास्कर का भी है।
“While the army initially said that the three were terrorists, later it admitted that the powers vested under the AFSPA 1990 were exceeded by its men.” ????? #kashmir Army officer staged Shopian encounter for ₹20L, say police | Hindustan Times https://t.co/eQMFETneje
सेना ने अपने बयान में कहा है कि यह दावा भारतीय सेना की प्रक्रियाओं के तथ्यों पर आधारित नहीं है। 3 युवकों को 2020 के जुलाई माह में आतंकवादी बताकर एक कथित फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया गया था। घटना की जांच के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस की तरफ से गठित विशेष दल ने अपनी चार्जशीट में कहा कि फर्जी एनकाउंटर के माध्यम से आरोपित कैप्टन भूपिंदर सिंह और दो अन्य नागरिकों- तबश नाजीर और बिलाल अहमद लोन ने वास्तविक अपराध के साक्ष्यों को जानबूझकर नष्ट किया।
ये मामला जुलाई, 2020 में हुए एक एनकाउंटर का है। भारतीय सेना ने इस बात से इनकार किया है कि उसके कैप्टेन ने 20 लाख रुपए का इनाम पाने के लिए इस एनकाउंटर को अंजाम दिया, जैसा कि मीडिया में चलाया जा रहा है। श्रीनगर में कर्नल राजेश कालिया ने कहा कि अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए या कॉम्बैट की स्थिति में जब जवानों के लिए ऐसे किसी इनाम की व्यवस्था ही नहीं है, फिर ये सवाल कैसे उठता है?
उन्होंने कहा कि मीडिया में चल रही ख़बरें भारतीय सेना के आंतरिक सिस्टम के तथ्यों के एकदम विपरीत हैं। इस मामले में तमाम आरोप लगने के बाद पहले ही भारतीय सेना कोर्ट इंक्वायरी के लिए हरी झंडी दिखा चुकी है। मीडिया की रिपोर्ट्स में जम्मू कश्मीर पुलिस की चार्जशीट के आधार पर ये दावे किए जा रहे थे, लेकिन साथ ही ये भी कहा जा रहा था कि उनके पास चार्जशीट की कॉपी उपलब्ध नहीं है।
Media reporting Amshipora encounter driven by 20 Lakh award for killing trts.Can confidently say Indian Army has no system of cash awards ‘for its personnel’ for any acts in combat situations or otherwise ‘in the line of duty’. Malafide and not based on facts of Army SOPs
अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने रिपोर्ट को क्वोट करते हुए लिखा कि पहले तो भारतीय सेना ने कहा कि उसने तीन आतंकियों को मार गिराया, जबकि उसके बाद उसने खुद माना कि AFSPA 1990 के तहत उसे जो विशेष अधिकार दिए गए हैं, उसका उल्लंघन किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने सैड वाली इमोजी में डाली। सैयद अता हसनैन ने भी कहा है कि सेना में इस तरह के रिवार्ड्स का कोई सिस्टम ही नहीं है।
हाल ही में स्वरा भास्कर ने एक और झूठ फैलाया था। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा था, जिसमें एक व्यक्ति किसानों को लेकर भारतीय सेना के जवानों को भड़काता हुआ नज़र आ रहा था। स्वरा ने इस वीडियो को आगे बढ़ाया, जो एक सेना के जवान का नहीं बल्कि पंजाबी अभिनेता का निकला। उक्त व्यक्ति ने केंद्र सरकार को सीधी धमकी देते हुए सेना में भी बगावत की बात कही थी।
उत्तर प्रदेश में यूँ तो विधानसभा चुनाव 2022 में होना है, लेकिन अभी से ही इसकी सरगर्मी शुरू हो गई और और राज्य का सियासी पारा बढ़ाने के लिए ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लमीन (AIMIM) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी मंगलवार (जनवरी 12, 2021) को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के क्षेत्र आजमगढ़ में पहुँच रहे हैं, जिन्होंने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के ओमप्रकश राजभर के साथ गठबंधन बनाने का ऐलान किया था।
ये दोनों नेता आजमगढ़ पहुँच कर मुस्लिम वोटरों का दिल जीतने की कोशिश करेंगे। कार्यक्रम भी इसी हिसाब से तय किए गए हैं। हालाँकि, इस दौरान पूर्वांचल में उनकी कोई जनसभा तो प्रस्तावित नहीं है, लेकिन वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट से आजमगढ़ जाने के लिए जौनपुर वाला रास्ता चुना गया है, जो उनकी रणनीति को बताता है। हाल ही में बिहार के चुनाव में इस तरह का जातीय-धार्मिक खेल खूब देखने को मिला था।
जैसे बिहार में उपेंद्र कुशवाहा को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित कर ओवैसी ने 5 सीटें जीतने में कामयाबी पाई थी, वैसे ही यूपी में उन्होंने ओमप्रकाश राजभर को चुना है। इस नए ‘भागीदारी संकल्प मोर्चा’ को लेकर जनता का मन टटोलने आए ओवैसी जौनपुर, दीदारगंज, माहुल, आजमगढ़ और फूलपुर में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ संवाद कर के पूर्वांचल में अपनी धाक बढ़ाने की शुरुआत करेंगे। जौनपुर-आजमगढ़ वाला क्षेत्र मुस्लिम-यादव बहुल माना जाता है।
आजमगढ़ में हुए पिछले 15 चुनावों में से 13 बार किसी यादव उम्मीदवार ने ही बाजी मारी है और 3 बार मुस्लिम उम्मीदवार ने बाजी मारी है। अर्थात, पिछले 59 वर्षों में मात्र पूर्व क्रिकेटर संतोष सिंह ही 1984 में नॉन-मुस्लिम, नॉन-यादव उम्मीदवार थे और युवा कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। 2014 में मुलायम सिंह यादव तो 2019 में उनके बेटे अखिलेश ने चुनाव जीता। इसी तरह आजमगढ़ विधानसभा क्षेत्र से भी पिछले 9 में से 8 चुनाव जीत कर सपा के दुर्गा प्रसाद यादव विधायक हैं।
जहाँ तक असदुद्दीन ओवैसी के कार्यक्रम का सवाल है, वो सड़क मार्ग से कार्यकर्ताओं से मिलते चलेंगे। रास्ते में कई जगह कार्यकर्ताओं ने उनके स्वागत की योजना बनाई है। दोपहर में जोहर की नमाज वह जौनपुर के मशहूर गुरैनी मदरसे की मस्जिद में पढ़ने वाले हैं। नमाज के वक़्त अच्छी-खासी भीड़ होती है, ऐसे में वो लोगों से संवाद करेंगे ही। गुरैनी मदरसा के साथ-साथ मदरसा बैतुल उलूम सरायमीर में भी कार्यक्रम तय है, जहाँ मुफ्तियों से मुलाकात होगी और साथ नमाज का कार्यक्रम भी है।
दिलचस्प बात ये है कि निगोह स्थित श्रीराम डिग्री कॉलेज में सपा के पूर्व कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव की जयंती समारोह में आज अखिलेश यादव भी लोगों को सम्बोधित करेंगे, ऐसे में जौनपुर जिले में इन दोनों बड़े नेताओं के कार्यक्रम होंगे। पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा की जन अधिकार पार्टी, बाबू राम पाल की राष्ट्रीय उदय पार्टी, अनिल सिंह चौहान की जनता क्रांति पार्टी और प्रेमचन्द प्रजापति की राष्ट्रीय उपेक्षित समाज पार्टी अब तक ओवैसी-राजभर के गठबंधन में आ चुकी है।
इससे पहले 2016-17 में आजमगढ़ जिले के निजामाबाद थाना क्षेत्र के खोदादादपुर हुए सांप्रदायिक दंगे के बाद औवैसी ने आजमगढ़ आने की कोशिश की थी, लेकिन कानून-व्यवस्था का हवाला देकर उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई थी। चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ ‘रावण’ की भीम आर्मी भी राजभर के साथ समझौता कर चुकी है, ऐसे में अब नए समीकरण बनने की सम्भावना है, जो सपा-बसपा का खेल बिगाड़ सकती है।
उधर पश्चिम बंगाल में ओवैसी को बड़ा झटका लगा है, जहाँ AIMIM के कई सदस्यों ने TMC का दामन थाम लिया। इसमें पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष एसके अब्दुल कलाम और संयोजक शेख अनवर हुसैन पाशा भी शामिल है। AIMIM नेता और उनके समर्थक पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य की उपस्थिति में TMC में शामिल हुए। इन नेताओं ने कहा कि उन्होंने ‘जहरीली हवा’ को दूर रखने के पार्टी बदली है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने जो बाइडन (Joe Biden) के हाथों 20 जनवरी 2021 को सत्ता सौंपने से पहले वॉशिंगटन डीसी में आपातकाल लागू करने की घोषिणा की है। ये आपातकाल का निर्णय यूएस कैपिटल हिल में ट्रंप समर्थकों के विरोध के बाद FDI (द फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) की चेतावनी पर जारी किया गया है।
एफडीआई ने आगाह किया था कि यूएस के 50 शहरों में हथियारबंद प्रदर्शन करने का प्लान किया जा रहा है। ऐसे में यह फैसला उस समय आया है, जब राष्ट्रपति ट्रंप पर महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि कोलंबिया जिले में एक आपात स्थिति है। व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि 59वें राष्ट्रपति उद्घाटन कार्यक्रम के मद्देनजर 11 जनवरी से 24 जनवरी तक इमरजेंसी की स्थिति रहेगी।
इससे पूर्व रविवार को वॉशिंगटन डीसी के मेयर म्यूरियल बोउसर ने 15 दिनों के लिए इमरजेंसी की घोषणा की थी। मेयर ने कहा था कि बाइडन के उद्घाटन के दौरान वॉशिंगटन में हिंसा की आशंका के मद्देनजर आपातकाल की घोषणा की गई है। व्हाइट हाउस को भेजे पत्र में कहा गया है कि 6 जनवरी को कैपिटल में हुई हिंसा के बाद यह संकेत मिले हैं कि हिंसा आगे भी जारी रह सकती है।
व्हाइट हाउस को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि प्रशासन ने उद्घाटन के लिए तैयारियों का जायजा लिया है। इसमें 24 जनवरी तक डीसी नेशनल गार्ड की मदद देने का अनुरोध किया गया है। इसके बाद ही व्हाइट हाउस की ओर से होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और संघीय आपातकाल प्रबंधन एजेंसी को राज्य और स्थानीय अधिकारियों के साथ संसाधनों का समन्वय करने के लिए अधिकृत किया गया है।
बता दें कि व्हाइट हाउस से जारी हुई रिलीज में फेडरल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी को ये अधिकार कर दिया गया कि वह हर आपद स्थिति से निपटें और क्षेत्र में आपातकाल से प्रभावित लोगों को जरूरी सहायता उपलब्ध कराएँ।
यहाँ याद दिला दें कि 6 जनवरी 2021 को सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया के दौरान ट्रंप समर्थकों ने यूएस कैपिटल हिल में भारी हंगामा मचाया था। पुलिस के साथ झड़प, सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान और उद्घाटन मंच पर कब्जा जैसी घटनाएँ उस दिन कैपिटल हिल में दर्ज की गई थी। बाद में ट्रंप ने अपने समर्थकों से ऐसा विरोध न करने का आह्वान किया था। लेकिन, बावजूद इसके कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों से उन्हें बैन कर दिया गया।
अमेरिका के शिकागो में आयोजित हुए विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक सम्बोधन को 127 वर्ष पूरे हो चुके हैं। आइए, इस दौरान हम 19वीं सदी के महान संत के एक और उल्लेखनीय सम्बोधन के बारे में आपको बताते हैं। ‘विश्व के महान शिक्षणगण’ शीर्षक वाले इस सम्बोधन को उन्होंने फ़रवरी 3, 1900 को कैलिफोर्निया के पासाडेना में स्थित शेक्सपियर क्लब में दिया था। इस दौरान उन्होंने पैगम्बरों और उनके संदेशों का विश्लेषण धर्म के सन्दर्भ में किया था। इसमें उन्होंने इस्लाम और मुस्लिमों को लेकर बात की थी।
इस दौरान उन्होंने इस सोच को नकार दिया था कि मेरा पैगम्बर ही एकमात्र पैगम्बर है। उन्होंने कहा था, “आप सोचते हैं कि आपको वास्तविकता, दिव्यता और ईश्वर का भान है, और ये सब कुछ एक ही पैगम्बर में देखते हैं और बाकी किसी और में नहीं, तो मैं ये निष्कर्ष निकालता हूँ कि आप किसी में भी दिव्यता को नहीं समझ पाते हैं। आपने सीधे शब्दों को निगल लिया है और एक समुदाय में बँध गए हैं। जैसे पार्टी-पॉलिटिक्स में होता है।”
विवेकानंद का कहना था कि ऐसा विचारों के मामले में हो सकता है लेकिन धर्मों के मामले में ये ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई एक अकेला पैगम्बर ही सत्य का रूप नहीं हो सकता। उन्होंने कहा था कि हर पैगम्बर को कुछ न कुछ कार्य पूरा करना था और उन्होंने विश्व को ईश्वर का संदेश दिया। उन्होंने कहा था कि अगर कोई समझता है कि उसका पैगम्बर अकेला पैगम्बर है तो वो धर्म को नहीं समझता। उनका कहना था कि धर्म वाद-विवाद, थ्योरी या बौद्धिक सहमति नहीं है।
वो मानते थे कि धर्म हमारे हृदय के अंदर की एक वास्तविकता का एहसास है, ईश्वर को छूने जैसा है। उन्होंने आगे कहा था कि ये खुद के एक आत्मा होने का एहसास है, जो बताता है कि हम भी इस वैश्विक परमात्मा के ही एक भाग हैं और ये उसकी सभी अभिव्यक्तियों को समझा देता है। उन्होंने इसे दृढ़ एहसास का क्षण करार दिया था। उदाहरण के लिए उन्होंने कहा था, “मैं एक पैगम्बर बन जाऊँगा। ईश्वर का बच्चा बन जाऊँगा। प्रकाश का वाहक बन जाऊँगा… नहीं। मैं स्वयं ईश्वर बन जाऊँगा।”
उन्होंने कहा था कि ऐसे पैगम्बरों की पूजा और सम्मान हर धर्म में होता आ रहा है लेकिन मुस्लिम इस मामले में अलग हैं। उन्होंने कहा था कि मनुष्य होने के कारण स्वाभाविक है कि हम किसी व्यक्ति की पूजा करते हैं या बहुत सम्मान करते हैं। ऐसे व्यक्ति की, जो आत्मिक स्तर पर हमसे उच्च होते हैं। बकौल विवेकानंद, मुस्लिम समुदाय शुरू से ऐसे किसी पूजा के खिलाफ है और किसी पैगम्बर की पूजा या सम्मान से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने याद दिलाया था कि किसी एक पैगम्बर की जगह हजारों साधु-संतों की पूजा होती है और ये अच्छा है, ये एक फैक्ट है। उन्होंने कहा था कि कुछ मुस्लिम इस मामले में खासे अनगढ़ हैं और सांप्रदायिक हो चले हैं। वो सोचते हैं कि एक ईश्वर है, एक ही पैगम्बर है और वो मुहम्मद हैं। उन्होंने ‘काफिरों’ पर पड़ने वाले इसके खतरनाक प्रभाव की चर्चा करते हुए कहा था कि वो सोचते हैं कि इस्लाम के इतर सब कुछ ख़त्म कर देना चाहिए, इस्लाम में विश्वास न रखने वालों को मार दिया जाना चाहिए।
उन्होंने आगे ‘कुछ मुस्लिमों’ की सोच की बात करते हुए कहा था कि उनका इरादा है कि जिसकी भी पूजा इस्लाम में नहीं होती हो, उनकी प्रतिमाएँ तोड़ दिए जाने चाहिए और गैर धर्मस्थल ध्वस्त कर दिए जाने चाहिए, अन्य धर्म के बारे में शिक्षा देने वाली पुस्तकें जला दिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा, “प्रशांत से लेकर अटलांटिक महासागर तक पूरी दुनिया में 500 वर्षों तक खून बहा। यही मोहम्मदिज्म है!”
बाद की और पूर्व की कई घटनाओं को देखें तो स्वामी विवेकानंद सही थे। चाहे वो इस्लामी आक्रांताओं की क्रूरता हो या फिर अलकायदा और ISIS जैसे संगठनों की हरकतें। स्वामी विवेकानंद का कहना था कि भले ही इस्लाम को रक्त बहा कर फैलाया गया लेकिन इसमें कुछ भी अच्छा नहीं होता तो ये अब तक टिकता नहीं। उन्होंने कहा था कि अच्छा है, पैगम्बर मुहम्मद ने भाईचारे और बराबरी का सन्देश तो दिया था।
उनका मानना था कि हर पैगम्बर कुछ न कुछ शिक्षा देते हैं और मुहमम्द का जीवन भी उज्ज्वल और काफी कुछ बताने वाला था। जैसे, उन्होंने बताया कि जाति, रंग, पंथ, वंश, समुदाय या लिंग – बराबरी में कोई भी आड़े नहीं आना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा था कि तुर्की का सुल्तान अफ्रीका से एक नीग्रो दास खरीद कर ला सकता है, लेकिन अगर वो मुस्लिम बन गया तो सुल्तान उससे अपनी बेटी की शादी भी कर सकता है।
Interesting rare photo of Vivekananda at a picnic in South Pasadena. He is the one with the ear-covered cap (must be the Bengali in him 🙂 ) in the centre. pic.twitter.com/zNyKt5C25N
हालाँकि, अब स्थिति बदतर है और शिया-सुन्नी-अहमदिया के कई झगड़े चल रहे हैं। दुनिया भी में बराबरी की इस भावना का मजाक बनाया जा रहा है। जब मजहब के आधार पर देश का बँटवारा हुआ, तब तक स्वामी विवेकानंद ब्रह्मलीन हो चुके थे। जिन शिक्षाओं की वो बात करते थे और इस्लाम में जिस बराबरी का उन्होंने हवाला दिया था, वो अब देखने को नहीं मिलती। दुनिया भर में आतंकी हरकतें चीख-चीख कर इसे झुठला रही है।
स्वामी विवेकानंद के अनुसार, हिन्दू धर्म के सिवा संसार के अन्य सभी धर्म ऐतिहासिक जीवनियों के आधार पर खड़े हैं। परन्तु हिन्दू धर्म कुछ तत्वों की नींव पर खड़ा है। उन्होंने कहा था, ”पृथ्वी पर कोई भी व्यक्ति – स्त्री हो या पुरुष, वेदों के निर्माण करने का दम नहीं भर सकता है।” इसीलिए हमारा धर्म किसी व्यक्ति विशेष पर निर्भर नहीं करता, यहाँ तो अनेकों ऋषि-ऋषिकाओं ने और महापुरुषों ने जन्म लिया है और आगे भी लेते रहेंगे।