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‘भड़^*$# करना बंद करो, जाकर धंधे पर बैठ जाओ’: एक सोमनाथ भारती, बदजुबानी के किस्से अनेक

आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक सोमनाथ भारती आज (जनवरी 11, 2021) सुबह से चर्चा में हैं। रायबरेली में उनके चेहरे पर स्याही फेंके जाने की घटना के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मारने की धमकी दी। पुलिस अधिकारियों के साथ अभद्रता करने पर उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

इस बीच AAP के कई नेता उनके लिए आवाज बुलंद कर रहे हैं। सीएम केजरीवाल ने भी उनके पक्ष में पोस्ट किया है। मगर, AAP के सभी दिग्गज शायद भुला रहे हैं कि जिस सोमनाथ भारती की बदजुबानी को वह आज योगी सरकार की नाकामयाबी कहकर छिपा रहे हैं, उनसे जुड़े विवादों की फेहरिस्त बहुत लंबी है।

हालिया मामलों से हम अच्छे से वाकिफ हैं कि उन्होंने कैसे पुलिस को धमकाया। कैसे योगी आदित्यनाथ की मौत की धमकी दी। कैसे यूपी के अस्पतालों में पैदा हो रहे बच्चों की तुलना कुत्ते के बच्चों से की। लेकिन, थोड़ा फ्लैशबैक में जाएँ तो उनके कई कारनामे हैं जो मीडिया में कई दिन तक चर्चा में रहे।

बीवी को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप

सोमनाथ भारती पर अपनी बीवी को कुत्ते से कटवाने का आरोप 2015 में सामने आया था। आप विधायक की पत्नी लिपिका ने मीडिया के सामने मदद की गुहार लगाते हुए घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना आदि का आरोप लगाया था। 

लिपिका ने दिल्ली महिला आयोग में दर्ज कराई अपनी शिकायत में कहा था, “भारती ने कुत्ते से मुझे कटवाया। जब कुत्ते ने मुझ पर हमला किया, तब सोमनाथ भारती वहीं खड़े रहे और देखते रहे। कुत्ते ने मुझे पेट में और कई अन्य हिस्सों पर काटा। भारती ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं और मुझे तत्काल कोई प्राथमिक चिकित्सा तक मुहैया नहीं करवाई।”

जब महिला एंकर से कहा- धंधे पर बैठ जाओ

महिलाओं के साथ बदसलूकी करने वाले सोमनाथ भारती के रवैये का खुलासा 2018 में महिला एंकर से बातचीत के दौरान भी हुआ था। सुदर्शन न्यूज की महिला पत्रकार से बात करते हुए उन्होंने ‘ये भड़^*$# करना बंद करो। जाकर धंधे पर बैठ जाओ’ कहा था। इसके बाद आप विधायक ने 2019 के चुनावों का इंतजार करने के लिए महिला एंकर से कहा और बोले, “ये भड़*%गिरि” नहीं चलेगी, 2019 का इंतजार कर लो।

विदेशी महिलाओं को प्रताड़ित किया

दिल्ली के ख़िड़की एक्सटेंशन मामले में भी सोमनाथ भारती पर अपने समर्थकों के साथ खिड़की एक्सटेंशन में युगांडा मूल के 9 लोगों के घर में घुसकर उनके साथ मारपीट करने का आरोप है। महिलाओं ने उनके ऊपर छेड़खानी और बदसलूकी के भी आरोप लगाए थे। सोमनाथ भारती ने सफाई में कहा था कि उन्हें शिकायत मिली थी कि युगांडा के नागरिक उस इलाके में ड्रग्स और वेश्यावृत्ति का व्यापार कर रहे हैं। लिहाजा दिल्ली के कानून मंत्री के तौर पर उन्होंने वहाँ पुलिस के साथ मिलकर रेड की।

पुलिस की वर्दी उतारने की धमकी

हालिया मामलों की बात करें तो आज ही सोमनाथ भारती ने पुलिस अधिकारी से नोंकझोंक के दौरान अपना रसूख दिखाते हुए कहा, “आपकी वर्दी उतरवाएँगे हम। हम पहचान रहे हैं आपको। जो-जो आज बद्तमीजी कर रहा है मेरे साथ, सबकी वर्दी उतरवाऊँगा मैं। आप हट जाइए यहाँ से।”

मुख्यमंत्री योगी के लिए पुलिस से भारती ने कहा, “ये सब करने से कुछ नहीं होगा अतुल, योगी की मौत सुनिश्चित है। उसको अरेस्ट करिए। मेरी बात समझ लो। योगी से बोल दो ये सब करने से कुछ नहीं होगा। आप समझ लीजिए। यही सब करवा रहे हैं आप?”

इसी प्रकार यूपी अस्पतालों में पैदा होने वाले बच्चों की तुलना सोमनाथ भारती ने कुत्तों से की थी। उन्होंने कहा, “हम उत्तर प्रदेश में आए हैं। हम यहाँ के स्कूलों को देख रहे हैं। यहाँ के अस्पताल को देख रहे हैं। ऐसी बदतर हालत में हैं कि अस्पतालों में बच्चे तो पैदा हो रहे हैं, लेकिन कुत्तों के बच्चे पैदा हो रहे हैं।”

जाह्नवी कपूर ने समर्थन में स्टेटस लिखा फिर माने ‘किसान’, पंजाब में शूटिंग में डाल दिया था अड़ंगा

केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर रहे किसान रोजाना नया बवाल खड़ा कर रहे हैं। इस बार कथित किसानों के उपद्रव और दादागिरी की शिकार और कोई नहीं बल्कि दिवंगत बॉलीवुड अभिनेत्री श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी कपूर (Janhvi Kapoor) हुई है।

जाह्नवी कपूर स्टारर फिल्म ‘गुड लक जेरी’ (Good Luck Jerry) की शूटिंग पंजाब में रविवार (जनवरी 10, 2021) से शुरू हो चुकी है। लेकिन पंजाब के बस्सी पठाना में शुरू हुई इस फिल्म की शूटिंग के पहले ही दिन, कलाकारों को किसानों के विरोध का सामना करना पड़ गया। बताया जा रहा है कि इस कारण फिल्म की शूटिंग भी रोकनी पड़ी जाह्नवी कपूर द्वारा किसानों के आंदोलन के समर्थन में बयान देने के बाद ही शुरू हुई।

मीडिया द्वारा जाह्नवी कपूर के हवाले से यह खबर भी जमकर प्रकाशित की गई और दावा किया गया कि अब एक और ‘बड़ी हस्ती’ ने किसान आंदोलन का समर्थन किया है।



‘दैनिक भास्कर’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म ‘गुड लक जेरी’ की शूटिंग के लिए पहुँची टीम को किसान प्रदर्शनकारियों ने रोक दिया। लोगों ने किसानों को समझाने का काफी प्रयास भी किया। इस मौके पर वहाँ पुलिस भी पहुँच गई। आखिरकार, जाह्नवी कपूर ने किसान आंदोलन के पक्ष में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर किया, जिसके बाद फिल्म की शूटिंग शुरू हो सकी।

यह मामला रविवार का है, जब फिल्म ‘गुड लक जेरी’ की शूटिंग शुरू होनी थी। इस बीच किसान आंदोलन से जुड़े युवाओं का एक समूह घटनास्थल पर पहुँचा। युवाओं ने केंद्र सरकार के साथ-साथ बॉलीवुड अभिनेताओं के खिलाफ कृषि कानूनों का विरोध करते हुए नारे लगाए।

फिल्म की शूटिंग रोककर धरने पर बैठे किसान सरकार और बॉलीवुड कलाकारों के खिलाफ नारे लगाते हुए।
शूटिंग के दौरान प्रदर्शन करते किसान (चित्र साभार- दैनिक भास्कर)

इन किसान आंदोलनकारियों ने कहा कि पंजाबी फिल्म उद्योग के सभी लोग उनका समर्थन कर रहे हैं, लेकिन बॉलीवुड के सितारे सिर्फ शूटिंग के लिए वहाँ आते हैं लेकिन किसान आन्दोलन के पक्ष में कुछ नहीं कहते, जिस कारण वो नाराज हैं। यह हंगामा काफी देर तक जारी रहा। बाद में जब जाह्नवी कपूर ने किसान आंदोलन के समर्थन में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर स्टेटस पोस्ट किया, तब जाकर यह हंगामा बंद हो सका।

किसान प्रदर्शनकारियों की गुंडई के बाद, जाह्नवी कपूर ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में किसान आंदोलन के समर्थन में लिखा, “किसान हमारे देश के दिल में हैं। मैं देश का पेट भरने में उनके योगदान और उनकी भूमिका को जानती हूँ। उम्मीद करती हूँ कि वह जल्द ही किसी नतीजे पर पहुँचेंगे जो किसानों के हित में होगा।”

अभिनेत्री जाह्नवी कपूर की तरफ से किसानों के हक में लगाया गया स्टेटस, जिसके बाद काम फिर से शुरू करने की अनुमति मिली और किसान वापस लौट गए।
चित्र साभार- दैनिक भास्कर

करनाल में बवाल पर 800 के खिलाफ केस, तोड़फोड़ के कारण नहीं हो पाई थी ​खट्टर की किसान महापंचायत

हरियाणा के करनाल जिले में ‘किसान महापंचायत आयोजन स्थल’ पर की गई तोड़फोड़ के मामले में पुलिस ने सोमवार (जनवरी 11, 2021) को भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी समेत 800 से अधिक के खिलाफ मामला दर्ज किया। 71 प्रदर्शनकारियों पर नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है, जबकि कुल 800 से अधिक लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है।

इस सार्वजनिक आयोजन में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को भाग लेना था, मगर उपद्रव के कारण उन्हें कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों द्वारा कार्यक्रम स्थल पर हंगामा किए जाने के बाद कैमला गाँव में आयोजित होने वाली ‘किसान महापंचायत’ रद्द करनी पड़ी थी।

पुलिस ने कहा कि वे घटना के संबंध में वीडियो क्लिप सहित साक्ष्य एकत्र कर रहे हैं और जो इसमें शामिल पाए जाते हैं उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। पुलिस अधिकारी ने कहा कि हालाँकि किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है।

मुख्यमंत्री ने भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी, विपक्षी कॉन्ग्रेस और वाम दलों पर लोगों को बर्बरता के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। इससे पहले गुरनाम ने सरकारी ‘किसान महापंचायत’ का विरोध करने की चेतावनी दी थी। 

बता दें कि प्रदर्शनकारी किसानों ने पहले हेलीपैड पर कब्जा किया, फिर मंच के पास रखा पोडियम तोड़ डाला, फिर कुर्सियाँ, गमले, साउंड सिस्टम और अंत मे पोस्टर तक फाड़ दिया।

आयोजन स्थल को नुकसान पहुँचाने के अलावा उन्होंने आयोजकों के साथ भी हाथापाई की। आयोजन में शामिल होने आए किसानों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, लेकिन असफल रहे। बता दें कि किसान महापंचायत का आयोजन कृषि कानूनों को लेकर किसानों के एक वर्ग के बीच व्याप्त आशंकाओं को दूर करने के लिए किया गया था। हालाँकि, प्रदर्शनकारियों ने राज्य में भाजपा नेतृत्व पर इस तरह की बैठकें आयोजित करके किसानों को विभाजित करने का आरोप लगाया है।

इस हंगामे के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा था, “जो कोई भी बोलना चाहता है, उसमें बाधा डालना सही नहीं है। मुझे नहीं लगता कि लोग डॉ. बीआर आंबेडकर की ओर से दिए गए प्रावधानों के उल्लंघन को बर्दाश्त करेंगे। कॉन्ग्रेस ने 1975 में लोकतंत्र को खत्म करने का प्रयास किया था। उस समय लोगों ने उनके घृणित कार्य की पहचान की और उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया।”

उद्धव सरकार की आलोचना पर मुंबई पुलिस ने ‘एक्टिविस्ट’ हर्षाली पोद्दार को हिरासत में लिया, एल्गार परिषद हिंसा की भी है आरोपित

कोरोना महामारी के दौरान उद्धव सरकार के लिए विवादित सोशल मीडिया पोस्ट शेयर करने के मामले में मुंबई पुलिस ने भीमा-कोरेगाँव की आरोपित हर्षाली पोद्दार को हिरासत में लिया है। पोद्दार के ख़िलाफ़ MRA मार्ग पुलिस थाने में केस दर्ज हुआ था। इसके बाद बुधवार को सत्र न्यायालय ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज की और आज उनके ख़िलाफ़ यह कार्रवाई हुई।

इस खबर को एल्गार परिषद और भीमा-कोरेगाँव शौर्य दिन प्रेरण अभियान के ट्विटर हैंडल से शेयर किया गया। फेसबुक पर भी प्रतिबंधित आतंकी संगठन कबीर काला मंच ने इस खबर को शेयर किया और दावा किया गया कि हर्षाली को फर्जी केस में पकड़ा गया है।

खबरों के अनुसार, सत्र अदालत ने पोद्दार की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज करते हुए पिछले साल 29 अगस्त को अदालत द्वारा उसे दी गई अंतरिम सुरक्षा भी रद्द कर दी।

फर्जी पोस्ट शेयर करने पर पकड़ी गई हर्षाली पोद्दार  

पुलिस ने पोद्दार को इससे पहले दो समूहों के बीच दुश्मनी फैलाने और अपने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से शांति और सद्भाव को बिगाड़ने के आरोप में अप्रैल 2020 में हिरासत में लिया था। पोद्दार ने मोहसिन शेख की एक फेसबुक पोस्ट अपनी टाइमलाइन पर साझा की थी। इसमें उन्होंने तबलीगी जमात और मुस्लिम समुदाय को कोरोना फैलाने के लिए जिम्मेदार ठहराने पर राज्य सरकार की आलोचना की थी।

गिरफ्तारी के भय से हर्षाली ने 27 अगस्त को जमानत याचिका दाखिल की और उनके वकील इशरत खान ने कहा कि उनके ऊपर कोई केस नहीं बनता। वकील ने न्यायालय को कहा कि पूरा केस बेबुनियाद है। उन्होंने आरोप लगाया कि चूँकि हर्षाली एक कार्यकर्ता हैं, इसलिए उन्हें फर्जी केस में फँसाया गया।

बता दें कि साल 2017 के भीमा-कोरेगाँव केस में पुणे पुलिस में हर्षाली का नाम पहले ही एफआईआर में मौजूद है। दिसंबर 2019 में उनका नाम मामले से जुड़ी एफआईआर में डाला गया था।

आरोपों के अनुसार, आरोपित ने कथित तौर पर “लोगों को उकसाने और हिंसा पैदा करने और कानून द्वारा स्थापित सरकार के प्रति असहमति फैलाने के लिए साजिश रची थी।” इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपित ने कथित तौर पर भारत और राज्य सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रची … 4 लाख राउंड और अन्य हथियारों के साथ M4 (परिष्कृत हथियार) की वार्षिक आपूर्ति के लिए 8 करोड़ रुपए का आयोजन किया, नेपाल और मणिपुर के सप्लायरों के माध्यम से गोला-बारूद का इंतजाम किया और अपने रोड शो के दौरान राजीव गाँधी-प्रकार की घटना की तर्ज पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रची।”

क्या है भीमा कोरेगाँव एल्गार परिषद

एल्गार परिषद भीमा-कोरेगाँव केस 31 दिसंबर 2017 को शनिवार वाड़ा में आयोजित हुए एल्गार परिषद के कार्यक्रम से संबंधित है। इसी कार्यक्रम के बाद 1 जनवरी 2018 को भीमा-कोरेगाँव में हिंसा भड़की थी। वहाँ भीमा-कोरेगाँव युद्ध की 200वीं वर्षगाँठ मनाने लाखों दलित इकट्ठा हुए थे, जिसे 1818 में पेशवा के ख़िलाफ़ लड़ा गया था और इसमें ब्रिटिशों ने जीत हासिल की थी। इस युद्ध में ब्रिटिशों की तरफ से अधिकतर दलित थे।

इस पूरे केस में 8 जनवरी को मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद पुणे पुलिस ने अपनी जाँच शुरू की। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार हुए ‘कार्यकर्ताओं’ ने दावा किया कि इस आयोजन को माओवादियों द्वारा पोषित किया गया था और आरोपित भी माओवादी ही हैं।

पुणे पुलिस ने इस मामले में 2 साल तक अपनी जाँच जारी रखी, फिर जाँच को इस वर्ष जनवरी में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी को ट्रांसफर कर दिया गया। मामला सँभालने के बाद एजेंसी ने दावा किया कि कुछ आरोपितों के डिवाइसों से ऐसे दस्तावेज और पत्र पाए गए, जिनसे पता चला कि उन लोगों के लिंक प्रतिबंधित सीपीआई (एम) समूह से थे।

मामला एजेंसी को ट्रांसफर होते ही इस केस में पुलिस ने 9 कथित बुद्धिजीवियों को गिरफ्तार किया। इसमें सुधा भारद्वाज, रोना विल्सन, सुरेंद्र गडलिंग, महेश राउत, शोमा सेन, अरुण फरेरा, वर्नोन गोंसाल्विस और वरवरा राव का नाम शामिल था। इन पर आरोप था कि इन्होंने वहाँ भड़काऊ भाषण दिए।

जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं में 63.93% की कमी, पत्थरबाज और आतंकी बनने के चलन में भी भारी गिरावट

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने और केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद से राज्य विकास की राह पर चल पड़ा है। साथ ही आतंकी घटनाओं और पत्थरबाजी में भी कमी आई है। जम्मू-कश्मीर में पिछले साल आतंकवादी घटनाओं में 63.93 फीसदी की कमी दर्ज की गई। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार (जनवरी 11, 2021) को यह जानकारी दी।

ANI की रिपोर्ट के मुताबिक गृह मंत्रालय ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में 15 नवंबर, 2020 तक आतंकवादी घटनाओं में भारी कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2019 की तुलना में 63.93 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसी अवधि के दौरान सुरक्षा बलों के घायल होने की घटनाओं में 29.11 प्रतिशत और नागरिकों की हताहतों की संख्या में 14.28 प्रतिशत की कमी आई है।

गृह मंत्रालय ने वार्षिक उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र शासित प्रदेशों और राज्यों के कानूनों को जम्मू-कश्मीर में लागू किया जाना केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर में केंद्र शासित प्रदेश से संबंधित 48 और राज्य से संबंधित 167 कानूनों को लागू करने के लिए आदेश जारी किया। वहीं मंत्रालय ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में 44 केंद्रीय कानूनों और 148 राज्य संबंधित कानून के लागू करने के आदेश दिए गए।

अनुच्छेद 370 और 35A के निरस्त होने के बाद गृह मंत्रालय ने कई कानूनों में संशोधन किए तो कई निरस्त कर दिए तो कई नए कानून लागू किए हैं। गृह मंत्रालय ने वार्षिक उपलब्धियों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र शासित प्रदेशों और राज्य कानूनों को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अपनाना केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है।

जम्मू-कश्मीर के मामले में 48 केंद्रीय कानूनों और 167 राज्य कानूनों को लागू करने के आदेश जारी किए जा चुके हैं। वहीं, लद्दाख में 44 केंद्रीय कानूनों और 148 राज्य कानूनों के लागू करने के आदेश दिए गए. केंद्र सरकार ने 31 मार्च को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम (राज्य कानून का अनुकूलन) आदेश, 2020 जारी कर किया था। यह जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 75 के से जुड़ी कठिनाइयों को दूर करता है।

क्षेत्र में प्रधानमंत्री विकास पैकेज के प्रभावी कार्यान्वयन पर प्रकाश डालते हुए, MHA ने खुलासा किया प्रधानमंत्री विकास पैकेज के तहत जम्मू और कश्मीर में छंब से विस्थापित 36,384 विस्थापित परिवारों को प्रति परिवार 5.5 लाख रुपए की वित्तीय सहायता दी गई। इसी के साथ जम्मू कश्मीर में पश्चिम पाकिस्तान शरणार्थियों (WPR) के 5,764 परिवारों के लिए 5.5 लाख रुपए प्रति परिवार की दर से एक बार की वित्तीय सहायता भी बराबर दी जा रही है।

इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में कट्टरपंथियों द्वारा सेना और सुरक्षा बलों पर होने वाली पत्थरबाजी की घटनाओं में साल 2016 से लेकर साल 2020 तक 90% की गिरावट दर्ज की गई। यह जानकारी खुद पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने मीडिया के साथ साझा की थी।

पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने बताया था कि साल 2019 की तुलना में इस साल हुई पत्थरबाजी की घटनाओं में 87.13% की गिरावट हुई है। साल 2019 में, पत्थरबाजी की 1,999 घटनाएँ हुईं थीं, जिनमें से 1,193 बार यह पत्थरबाजी केंद्र सरकार द्वारा साल 2019 के अगस्त माह में जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे को रद्द करने की घोषणा के बाद हुईं।

पुलिस महानिदेशक के अनुसार, “साल 2019 में हुई पत्थरबाजी की घटनाओं और वर्ष 2020 की तुलना में 87.13% की गिरावट दर्ज की गई। 2020 में 255 बार पत्थरबाजी की घटनाएँ हुई हैं।”

गौरतलब है कि 5 अगस्त, 2019 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में अनुच्छेद 370 और 35A को समाप्त करने की घोषणा की थी, जिसके परिणामस्वरूप जम्मू और कश्मीर राज्य का दो संघ क्षेत्रों में विभाजन हो गया था।

केंद्र सरकार ने पहले कहा था कि उसने आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को अपनाया है और विभिन्न उपायों को अपनाया है। जैसे कि सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना, राष्ट्र विरोधी तत्वों के खिलाफ कानून का सख्त प्रवर्तन, आतंकी संगठनों द्वारा उत्पन्न चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए घेरा और तलाशी अभियान।

राज्य में आर्टिकल 370 हटने के बाद से कश्मीरी युवकों के आतंकी संगठन से जुड़ने का प्रतिशत काफी गिरा है। जानकारी के मुताबिक मोदी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के खत्म किए जाने के बाद मुख्य रूप से पिछले साल में कश्मीरी युवाओं के आतंकवादी समूहों में शामिल होने में 40 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। आतंकवादी समूहों में शामिल होने वाले युवाओं की संख्या एक साल पहले 105 थी। मगर इस साल 1 जनवरी और 15 जुलाई के बीच 67 तक गिर गई, जबकि इस अवधि के दौरान आतंकी घटनाएँ भी 188 से घटकर 120 हुई हैं।

सुप्रीम कोर्ट का कृषि कानूनों पर रोक लगाना कहाँ तक उचित? Ajeet Bharti explains SC stand on farm laws

सुप्रीम कोर्ट ने संसद से बनाए कानून पर रोक लगाने की बात कही है, ऐसे में यह देखना है कि क्या यह न्यायपालिका द्वारा विधायिका के कार्यक्षेत्र का अतिक्रमण नहीं है?

पूरा वीडियो यहाँ क्लिक कर के देखें

प्रणय रॉय और राधिका रॉय अवैध कमाई का 50 फीसदी SEBI के पास जमा करें: SAT का निर्देश

एनडीटीवी के प्रमोटर्स प्रणय रॉय और राधिका रॉय को गैर कानूनी तरीके से कमाई गई रकम का 50 फीसदी जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल SAT ने यह निर्देश जारी किया है। रॉय दंपती को सेबी (SEBI) के पास यह रकम जमाने कराने के लिए 7 हफ्ते का वक्त दिया गया है।

इसमें आगे कहा गया है कि यदि NDTV राशि जमा करता है, तो शेष राशि को SAT के समक्ष अपील की पेंडेंसी के दौरान वापस नहीं किया जाएगा। 4 जनवरी को पारित दो अलग-अलग आदेशों में, ट्रिब्यूनल ने उल्लेख किया कि रॉय दंपति द्वारा दायर की गई अपील पर विचार करने की जरूरत है और अपील को 10 फरवरी, 2021 को अंतिम निस्तारण के लिए ट्रिब्यूनल के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

गौरतलब है कि SEBI ने नवंबर 2020 में विवादास्पद मीडिया नेटवर्क NDTV के प्रवर्तकों प्रणय रॉय और राधिका रॉय को इनसाइडर ट्रेडिंग से अनुचित लाभ उठाने का दोषी पाया था। इसके बाद वित्तीय अपराध के लिए दंड के रूप में SEBI ने उन्हें प्रतिभूति बाजार में दो साल के लिए व्यापार करने से रोक दिया। इसके साथ ही दोनों को 12 साल पहले की इनसाइडर ट्रेडिंग के जरिए अवैध तरीके से कमाए गए ₹16.97 करोड़ रुपए लौटाने के लिए भी कहा गया।

सेबी ने पाया कि नई दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड (NDTV) में प्राइस को लेकर संवेदनशील जानकारियाँ रखने योग्य पदों पर रहते हुए प्रणय रॉय और राधिका रॉय ने कंपनी के शेयरों का कारोबार किया। प्रणय रॉय और राधिका रॉय के अलावा, एनडीटीवी के पूर्व सीईओ विक्रमादित्य चंद्रा, वरिष्ठ सलाहकार ईश्वरी प्रसाद बाजपेयी, ग्रुप सीएफओ सौरव बनर्जी को भी इनसाइडर ट्रेडिंग का दोषी पाया गया।

SEBI द्वारा की गई जाँच के अनुसार उन्होंने इनसाइडर ट्रेडिंग (PIT) विनियमों का उल्लंघन किया। उन पर 2007-2008 के दौरान अप्रकाशित मूल्य संवेदनशील जानकारी (UPSI) रखने का आरोप है, जो न्यू इंडिया टेलीविजन लिमिटेड के पुनर्गठन से संबंधित है। सेबी ने सितंबर, 2006 से जून, 2008 के दौरान कंपनी के शेयरों में कारोबार की जाँच करने के बाद यह कदम उठाया था। 

क्या विभाजन की विचारधारा आज भी जिन्दा है: अजीत भारती और संजय दीक्षित के बीच बातचीत

राजस्थान कैडर के IAS अधिकारी रह चुके संजय दीक्षित (Sanjay Dixit) की पुस्तक ‘Nullifying article 370 and enacting CAA’ (अनुच्छेद 370 का निरस्तीकरण और CAA को लागू करना) पर ऑपइंडिया के सम्पादक अजीत भारती और संजय दीक्षित के बीच भारत में रह रहे कथित अल्पसंख्यकों के विभाजन की विचारधारा पर बातचीत हुई।

आईएएस अधिकारी के यूट्यूब चैनल ‘The Jaipur Dialogues’ पर अजीत भारती ने बताया कि किस तरह से आजादी के बाद भी आज तक इस देश को तोड़ने वाली विचारधारा की अच्छी खासी पैठ है और वो यह समय-समय पर साबित भी करने का प्रयास करते हैं।

इस चर्चा के दौरान भारतीय स्वतन्त्रता आंदोलन के दौरान चलाए गए खिलाफत आंदोलन के बारे में भी चर्चा हुई। किताब के लेखक संजय दीक्षित ने समुदाय विशेष के भीतर आजादी के दौर से ही चली आ रही अलगाववाद की भावना का जिक्र करते हुए कहा कि यह हमारे लोगों को कभी नजर क्यों नहीं आया कि काफिरों को इस्तेमाल करने को तो मुस्लिम राजी रहते हैं, लेकिन देखते वो उन्हें हिकारत की ही नजर से आए हैं।

बातचीत में अजीत भारती ने कहा कि अल्पसंख्यकों को जो अधिकार इस देश में मिले हैं, वो हिन्दू अल्पसंख्यकों को भी अपने ही देश में हासिल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि देश में जो अल्पसंख्यक हैं उनके लिए अल्पसंख्यक का दर्जा छोटी इकाइयों के रूप में या जिले के स्तर पर होना चाहिए क्योंकि कश्मीर में यदि आप मुस्लिमों को अल्पसंख्यक कहते हैं तो यह किसी भी तरह से जायज नहीं है।

उन्होंने कहा कि मजहब के नाम पर हुए 1947 के विभाजन में कई मुस्लिम अल्पसंख्यकों को उनकी जमीन भी मिली लेकिन ऐसे लोग, जो आजादी की लड़ाई में सबसे आगे रहे, उन्हें विभाजन के समय हाशिए पर धकेल दिया गया। ऑपइंडिया के सम्पादक ने कहा कि तब तुष्टिकरण की नीति वाले जिन्ना ने पूरे देश को ही तोड़कर रख दिया था और अभी भी यह मानसिकता देश के विभाजन का सपना देखती है।

संजय दीक्षित ने अपनी इस पुस्तक का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी पुस्तक में भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर भी एक हिस्से में चर्चा की गई है। उन्होंने अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण को ‘नेहरूवाद’ का नाम दिया है, जो कि आज तक भी हमारे तंत्र में जिन्दा है।

उन्होंने बताया कि यह अल्पसंख्यक और तुष्टिकरण शब्दों का बीजारोपण आजादी की लड़ाई के आख़िरी वर्षों में तब हुआ जब मुस्लिमों को चुनावों में सुरक्षित कोटा बाँट दिया जाने लगा और गाँधी के आगमन के बाद से तो मानो यह एक स्थापित सत्य बन गया।

आईएएस अधिकारी ने कहा कि हिंदूवादी समूहों ने तब भी इसका विरोध किया था और आज तक भी सत्ताधारी दलों द्वारा इस अल्पसंख्यकों के कोटा का विरोध नहीं किया जाता है। सरदार पटेल ने संविधान सभा की बैठक में कहा था कि अल्पसंख्यक, जिन्होंने देश के विभाजन को बढ़ावा दिया, वो अपने आप को अल्पसंख्यक क्यों कहते हैं? संजय दीक्षित ने अपनी पुस्तक से इस हिस्से को पढ़कर बताया कि सरदार पटेल ने संविधान सभा में यही सवाल किया था कि अगर आप ताकतवर हैं तो फिर आप खुद को अल्पसंख्यक क्यों कहना चाहते हैं?

अल्पसंख्यकों की विचारधारा और देश के प्रति आस्था के विचार पर अजीत भारती ने कहा कि मुस्लिमों ने उम्माह या उम्मत के नाम पर 1947 में विभाजन के बाद से ही बांग्लादेश और पाकिस्तान को अपनी सम्पत्ति और भारत को अपनी साझा सम्पत्ति के रूप में देखा। इसी तरह से खिलाफत आन्दोलन देश के विभाजन का कारण बना, जिसे कि कॉन्ग्रेस ने भी हिन्दू-मुस्लिम एकता के नाम पर भरपूर समर्थन दिया था। लेकिन इसमें सिर्फ हिन्दुओं को ही बेवकूफ बनाकर अपना उल्लू सीधा कर लिया गया। वो मंदिर तोड़ते गए और खुद तुर्की में चाँद देखकर अपने मजहब के प्रति अपनी जिम्मेदारी की मिशाल देते रहे।

उन्होंने कहा कि यही ‘हिन्दू-मुस्लिम एकता’ समय के साथ सिर्फ और सिर्फ हिन्दुओं पर एक बोझ ही साबित हुई है, जबकि मुस्लिम नेताओं ने इसे एक ब्लैकमेल करने और विक्टिम कार्ड खेलने के लिए ही इस्तेमाल किया है।

विभाजन की विचारधारा पर चर्चा करते हुए अजीत भारती ने कहा कि उम्माह के नाम पर सिर्फ और सिर्फ अपनी कौम के लिए ही हमेशा फैसले लेने वाले लोग ‘भारत’ की बात नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता तो पीएचडी कर रहे मुस्लिम छात्र भी भारत को असम से काटने की बात नहीं कर रहे होते और शरजील इमाम जैसे लोग इसका बेहतर उदाहरण हैं।

संजय दीक्षित ने अपनी पुस्तक का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने इसमें डॉक्टर अंबेडकर के एक बयान को इस्तेमाल किया है, जिसमें उन्होंने मुस्लिमों की राजनीति को गैंगस्टर्स का तरीका बताया था।

अजीत भारती ने बताया कि अल्पसंख्यक शुरुआत से ही अपनी भीड़ के अनुपात में अपने दायरे को बढ़ाते और घटाते हैं। उन्होंने कहा कि खुद दंगा करने के बाद जिसे पीड़ा पहुँचाई उन पर ही इसका आरोप भी थोप दिया गया। यही कारसेवकों को जला देने के बाद हुआ और यही रणनीति दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के दौरान भी अपनाई गई।

संजय दीक्षित और अजीत भारती के बीच की पूरी बातचीत आप नीचे दी गई यूट्यूब लिंक पर देख सकते हैं

10 प्लाटून सीआरपीएफ, 200 अधिकारियों की टीम; ED ने बंगाल के कई शहरों में मारे छापे

पश्चिम बंगाल में कोयला घोटाले और गो तस्करी मामले में सीबीआई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी/ED) ने राज्य के अलग-अलग शहरों में छापेमारी की है। समाचार एजेंसी आईएएनएस ने बताया, “प्रवर्तन निदेशालय ने सोमवार (जनवरी 11, 2021) को पब्लिक सेक्टर कोल फर्म इस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड(ईसीएल) से अवैध कोयला खनन और चोरी के संबंध में पश्चिम बंगाल के 12 अलग-अलग स्थानों पर व्यापक छापेमारी की।”

जानकारी के अनुसार सोमवार को लगभग 200 अधिकारियों की टीम ने कोलकाता, उत्तर 24 परगना, हुगली, आसनसोल, दुर्गापुर, बर्द्धमान समेत कई शहरों में लगभग 12 जगहों पर छापेमारी की। जिसके बाद मामले से जुड़े लोगों और उनके परिचितों में हड़कंप मच गया।

लगभग 10 प्लाटून सीआरपीएफ की मदद से सुबह के 10 बजे ऑपरेशन शुरू हुआ और बाद में ईडी के अधिकारियों ने कोन्नगर में अमित सिंह और संजय सिंह और कोलकाता में गणेश बागाड़िया के घरों की तलाशी भी ली।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले सीबीआई ने बंगाल की राजधानी कोलकाता में कई जगहों पर छापेमारी की थी, जिसमें तृणमूल यूथ कॉन्ग्रेस के महासचिव विनय मिश्रा के घर पर भी छापेमारी हुई थी। विनय मिश्रा को ममता बनर्जी के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी का करीबी कहा जाता है। जो लंबे समय से फरार है और इसी कारण सीबीआई उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी कर चुकी है। इससे पहले जब इस संबंध में दिसंबर में छापेमारी हुई थी। तब टीएमसी नेता के अलावा व्यवसायी अमित सिंह, नीरज सिंह के आवासों पर भी छापे मारे गए थे। हालाँकि, छापे के समय वहाँ कोई मौजूद नहीं था।

अब इस केस में सीबीआई के बाद ईडी का हस्तक्षेप केवल इसलिए है ताकि पता चल सके कि कोयला तस्करी व गो तस्करी के पैसे कहाँ जाते थे? इनके तार किन-किन लोगों से जुड़े हैं?

कथित तौर पर गो तस्करी व अवैध कोयला खनन मामले में कुछ समय पहले कोलकाता के कई व्यवसायियों और नेताओं के नाम सामने आए थे। जिसके बाद सीबीआई की पड़ताल पर टीएमसी ने काफी विरोध किया था। वहीं ममता बनर्जी ने केंद्रीय जाँच एजेंसी द्वारा पश्चिम बंगाल में की गई छापेमारी पर नाराज़गी जताते हुए सवाल खड़े किए थे।

‘चुनाव के पहले बाहरी लोग आने लगा…हम हथियार उठाएँगे’: TMC सांसद की BJP को धमकी

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों का अभी ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक सरगर्मियॉं तेज है। राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेताओं के बेतुके बयान भी लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा नाम है सुखेंदु शेखर रॉय का।

टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने भाजपा को धमकी भरे लहजे में कहा है कि बाहरी लोगों के खिलाफ बंगाल की जनता हथियार उठा लेगी। उन्होंने बंगाल दौरे पर बार-बार आ रहे केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं को बाहरी करार दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि पश्चिम बंगाल के शांतिपूर्ण चुनाव में किसी ने खलल डालने की कोशिश की, तो बंगाल की जनता उन ‘बाहरी लोगों’ के खिलाफ हथियार उठा लेगी।

रॉय ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सत्ताधारी दल अभी बाहरी लोगों की हरकतों को नजरअंदाज कर रहा है। लेकिन, जरूरत पड़ी, तो उन्हें सबक सिखाने से पीछे नहीं हटेगी। सुखेंदु के इस बयान पर बंगाल भाजपा के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि भाजपा का एकमात्र उद्देश्य बंगाल का विकास है।

सुखेंदु शेखर ने रिपब्लिक टीवी पर कहा, “चुनाव के पहले बाहरी लोग आने लगा। अभी और भी लोग आएगा। हमारे पास खबर है कि बाहरी लोग दूसरे बाहरी लोग को भी बुला रहे हैं, जो कि ‘ठोक दे’ कहने के लिए जाना जाता है। जो मंत्री बोलते हैं कि ‘गोली मारो सालों को’ उसके गुंडों को मँगा रहे हैं। वो हथियार लेकर आएगा, यहाँ घुसेगा, वहाँ घुसेगा। हम अभी नजरअंदाज कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “हम बंगाल के लोगों से अपील कर रहे हैं कि बाहरी लोगों की बात न सुनें। लेकिन अगर कोई बंगाल में शांति को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करेगा, तो हम इसे रोकने के लिए कुछ भी करेंगे। याद है, बांग्लादेश में मजीबुर ने सबको रजाकरों के खिलाफ हथियार उठाने के लिए कहा था। ठीक इसी तरह मैं बंगालियों से भी अपील कर रहा हूँ कि अगर शांतिपूर्ण बंगाल में गड़बड़ी हुई तो हम हथियार उठाएँगे और जब बंगाल के लोग हथियार उठाएँगे, तो पूरा हिन्दुस्तान काँप उठेगा।”

गौरतलब है कि इससे पहले टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने विवादित बयान दिया था। उन्होंने पश्चिम बंगाल में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा था, “सीता राम के पास जाकर बोलीं कि मेरा सौभाग्य था कि रावण ने मेरा हरण किया। अगर तुम्हारे भगवाधारी चेलों ने मेरा हरण किया होता तो मेरा हाल यूपी के हाथरस जैसा होता।” अभद्र टिप्पणी करने के बाद मचे सियासी बवाल के बाद उन पर एफ़आईआर दर्ज की गई।